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  • डोल ग्यारस पर जरूर करें ये काम 22 सितंबर को भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ी मान्यताएं जानिए व्रत और पूजन की पूरी विधि

    डोल ग्यारस पर जरूर करें ये काम 22 सितंबर को भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ी मान्यताएं जानिए व्रत और पूजन की पूरी विधि

    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के साथ डोल ग्यारस और जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष डोल ग्यारस 22 सितंबर 2026 मंगलवार को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 22 सितंबर को व्रत रखा जा रहा है और व्रत का पारण 23 सितंबर को किया जाएगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान अपनी करवट बदलते हैं। इसी वजह से इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में इसे डोल ग्यारस के नाम से विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया जाता है और कई जगह भगवान की सजी हुई पालकी निकाली जाती है। इसके बाद भगवान को जल विहार कराया जाता है।

    डोल ग्यारस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। श्रद्धालु भगवान को पीले फूल तुलसी दल चंदन अक्षत फल और मिठाई अर्पित कर सकते हैं। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती की जाती है। पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने की भी परंपरा है।

    इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार उपवास करते हैं। कुछ लोग फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग केवल जल ग्रहण करके व्रत रखते हैं। हालांकि निर्जल व्रत हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं होता इसलिए अपनी सेहत और क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। व्रत के दौरान सात्विक आहार लेने और धार्मिक गतिविधियों में मन लगाने की परंपरा है।

    डोल ग्यारस से जुड़ी सबसे खास परंपराओं में भगवान की डोल यात्रा और जल विहार शामिल है। कई स्थानों पर मंदिरों से भगवान की प्रतिमा को पालकी में विराजमान करके शोभायात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु भजन कीर्तन करते हुए भगवान के साथ जलाशय या नदी के किनारे पहुंचते हैं। वहां विधि विधान से भगवान का जल विहार कराया जाता है। यही वजह है कि इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।

    डोल ग्यारस के दिन तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु इस दिन दान पुण्य भी करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपयोगी वस्तुएं देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भक्त आध्यात्मिक रूप से स्वयं को भगवान के करीब महसूस करता है।

    डोल ग्यारस केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं बल्कि कई क्षेत्रों में लोक आस्था और सामाजिक उत्सव का भी हिस्सा है। मंदिरों में विशेष सजावट होती है और भगवान की डोल यात्रा देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति के साथ संयम सात्विकता और सेवा की भावना को महत्व दिया जाता है।

  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा की याचिका पर आज डिवीजन बेंच में सुनवाई सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का लगाया आरोप

    कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा की याचिका पर आज डिवीजन बेंच में सुनवाई सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का लगाया आरोप


    कटनी । कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की जमानत याचिका पर मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। हत्या के आरोपी की करीब 1 करोड़ रुपए की जमीन हड़पने के मामले में दर्ज एफआईआर को उन्होंने चुनौती दी है। मामले की सुनवाई अब सिंगल बेंच के बजाय डिवीजन बेंच के समक्ष होगी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच में भेजने की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने केस डायरी देखी और मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया।

    नेहा पच्चीसिया की ओर से दाखिल याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। उनकी ओर से अदालत से अंतरिम राहत की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि मामले में उनके खिलाफ कोई सीधा सबूत मौजूद नहीं है और एफआईआर में उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं होती है। अब डिवीजन बेंच के समक्ष होने वाली सुनवाई में उनकी ओर से रखी गई इन दलीलों पर विचार किया जाएगा।

    इससे पहले 21 सितंबर को मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच में प्रस्तावित थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच के सामने भेजने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं। इसी आधार पर सरकार का कहना था कि मामले की सुनवाई ऐसी बेंच में होनी चाहिए जिसे इस तरह के मामलों की सुनवाई का अधिकार है।

    नेहा की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने सरकार की इस मांग का विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं पिछली सुनवाई के बाद एफआईआर में जोड़ी गई हैं। इसलिए मामले की सुनवाई पहले से निर्धारित बेंच में ही की जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने केस डायरी का अवलोकन किया और मामले को संबंधित उपयुक्त बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार ने नेहा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि नेहा के विदेश जाने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर की कार्रवाई की गई है। सरकार ने मामले में सह आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया है।

    सरकार के मुताबिक जिला अदालत से नेहा की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके अलावा मामले में नेहा सहित अन्य आरोपियों पर इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई है। अब 22 सितंबर को नई बेंच के समक्ष होने वाली सुनवाई में उनकी याचिका पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

    यह मामला करीब 1 करोड़ रुपए की जमीन से जुड़े आरोपों के कारण पहले से चर्चा में है। पूर्व सीएसपी की ओर से एफआईआर को चुनौती दिए जाने के बाद अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर है। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से एफआईआर और आरोपों को लेकर दलीलें रखी जाएंगी जबकि राज्य सरकार अपनी ओर से जांच और अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर याचिका का विरोध करेगी।

  • रिटायर्ड पुलिसकर्मी की मौत के बाद 2.24 लाख की रिकवरी का मामला आदेश नहीं माना तो एसपी को कोर्ट ने किया तलब

    रिटायर्ड पुलिसकर्मी की मौत के बाद 2.24 लाख की रिकवरी का मामला आदेश नहीं माना तो एसपी को कोर्ट ने किया तलब


    जबलपुर । जबलपुर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने जबलपुर रेंज के आईजी को वारंट की तामील कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही छिंदवाड़ा एसपी को 1 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है। मामला एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी की मृत्यु के बाद विभाग की ओर से की गई 2.24 लाख रुपए की रिकवरी और हाईकोर्ट के पुराने आदेश के पालन से जुड़ा है।

    जबलपुर निवासी सीता तिवारी ने अधिवक्ता सचिन पांडे के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की है। याचिका के मुताबिक उनके पति संतोष तिवारी छिंदवाड़ा में पुलिस विभाग में पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान 14 अगस्त 2020 को उनका निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद पुलिस विभाग की ओर से उनके खिलाफ 2.24 लाख रुपए की रिकवरी निकाली गई। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और रिकवरी की कार्रवाई को चुनौती दी गई।

    मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की कोर्ट में हुई थी। हाईकोर्ट ने रिकवरी का आदेश निरस्त कर दिया था। साथ ही विभाग को संबंधित राशि 8 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभाग की ओर से राशि वापस करने और आदेश का पालन करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

    इसी मामले में वर्ष 2025 में अवमानना नोटिस भी जारी किया गया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात रखी गई कि नोटिस जारी होने के बावजूद आदेश के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट अब तक पेश नहीं की गई। अदालत को यह भी बताया गया कि छिंदवाड़ा एसपी ने 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अपर सचिव को पत्र भेजा था। पत्र में नोटिस मिलने और आगे की आवश्यक मंजूरी से संबंधित जानकारी दी गई थी।

    हालांकि इसके बाद भी हाईकोर्ट के आदेश के पालन की कार्रवाई पूरी नहीं होने पर अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट के समक्ष यह स्थिति सामने आई कि आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई और संबंधित राशि वापस करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

    कोर्ट ने जबलपुर रेंज के आईजी को वारंट की तामील कराने के निर्देश दिए हैं। अब छिंदवाड़ा एसपी को 1 अक्टूबर को हाईकोर्ट के समक्ष पेश होना होगा। इस सुनवाई में अदालत के पिछले आदेश के अनुपालन और अब तक की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विभागीय रिकवरी को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अनुपालन नहीं होने का आरोप है। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद उन्हें निर्धारित राशि नहीं मिली। वहीं विभाग की ओर से गृह विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई है। अब आगे की सुनवाई में अदालत इस मामले में विभाग की कार्रवाई और आदेश के पालन की स्थिति देखेगी।

  • प्याज गोदाम के पास नाले में मिला नवजात का शव राहगीरों ने दी सूचना पहचान और मौत की वजह तलाश रही पुलिस

    प्याज गोदाम के पास नाले में मिला नवजात का शव राहगीरों ने दी सूचना पहचान और मौत की वजह तलाश रही पुलिस


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब राई रोड स्थित प्याज गोदाम के पास एक नाले में नवजात का शव मिला। नाले के पास से गुजर रहे राहगीरों की नजर जब शव पर पड़ी तो उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही कोलारस पुलिस मौके पर पहुंची और रात करीब 8 बजे नवजात के शव को नाले से बाहर निकलवाकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नवजात की पहचान के साथ उसके जन्म से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार नवजात की नाभि पर डिलीवरी के दौरान लगाई जाने वाली स्ट्रिप मिली है। इसी वजह से जांच का एक अहम बिंदु यह है कि बच्चे का जन्म अस्पताल में हुआ था या फिर घर पर डिलीवरी हुई थी। पुलिस आसपास के इलाकों में ऐसी महिलाओं और परिवारों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है जिनके यहां हाल में बच्चे का जन्म हुआ हो। स्वास्थ्य विभाग से भी आवश्यक जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है ताकि नवजात की पहचान की जा सके।

    घटना के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर नवजात को नाले में किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा। शुरुआती स्तर पर पुलिस इस संभावना को भी जांच में शामिल कर रही है कि किसी महिला ने सामाजिक दबाव या लोकलाज के चलते बच्चे को जन्म देने के बाद उसे वहां छोड़ दिया हो। हालांकि पुलिस के सामने फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे इस संभावना की पुष्टि की जा सके। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।

    नवजात के शव को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाए जाने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बच्चे की मौत की वजह के साथ यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि उसकी मौत जन्म के बाद हुई या वह पहले से मृत था। रिपोर्ट से पुलिस को घटना की परिस्थितियों को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नवजात को नाले में कब छोड़ा गया। इसके लिए आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों और हाल की डिलीवरी से संबंधित जानकारी को भी जांच का हिस्सा बना रही है। आसपास मौजूद लोगों से यह जानकारी जुटाई जा रही है कि उन्होंने किसी महिला या संदिग्ध व्यक्ति को घटनास्थल के आसपास देखा था या नहीं।

    नवजात की नाभि पर मिली डिलीवरी स्ट्रिप जांच में महत्वपूर्ण सुराग मानी जा रही है। इसके जरिए पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि डिलीवरी किस स्थान पर हुई और क्या संबंधित महिला ने किसी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार या प्रसव कराया था। फिलहाल पुलिस ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाने की बात कही है।

    कोलारस पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नवजात की पहचान करना है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में जानकारी जुटाने के साथ जन्म और डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। मामले की पूरी तस्वीर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • डोल ग्यारस पर शिवपुरी में रहेगी कड़ी सुरक्षा भीड़ और यातायात संभालने के लिए पुलिस ने तैयार किया प्लान

    डोल ग्यारस पर शिवपुरी में रहेगी कड़ी सुरक्षा भीड़ और यातायात संभालने के लिए पुलिस ने तैयार किया प्लान


    शिवपुरी। शिवपुरी में डोल ग्यारस और आगामी गणेश विसर्जन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख मार्गों पर बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लेना शुरू कर दिया है। सोमवार शाम पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया पुलिस बल के साथ शहर के प्रमुख बाजारों और भीड़ वाले इलाकों में पैदल गश्त पर निकलीं। इस दौरान उन्होंने अलग अलग स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात की स्थिति को देखा तथा संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।

    एसपी ने हॉस्पिटल चौराहा कोर्ट रोड सब्जी मंडी माधव चौक गुरुद्वारा चौराहा राजेश्वरी रोड और पोलो ग्राउंड क्षेत्र का भ्रमण किया। पैदल गश्त के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बाजारों में लोगों की आवाजाही और वाहनों की स्थिति का जायजा लिया। माधव चौक पर दुकानों के सामने बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों को देखकर एसपी ने यातायात प्रभारी रणवीर यादव को पार्किंग व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान बाजारों में लोगों की संख्या बढ़ने के कारण यातायात व्यवस्था को पहले से व्यवस्थित रखा जाए ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।

    पैदल भ्रमण के दौरान एसपी ने दुकानदारों और आम लोगों से भी बातचीत की। उन्होंने त्योहारों को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भीड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

    एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को अपने अपने क्षेत्रों में नियमित पैदल गश्त करने के साथ वाहन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बाजारों और अन्य संवेदनशील तथा भीड़ वाले स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने को भी कहा गया है। त्योहारों के दौरान देर रात तक लोगों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

    शिवपुरी में गणेश विसर्जन का आयोजन बड़े स्तर पर होता है। गणेश प्रतिमाओं और झांकियों के साथ डीजे और बैंड के जरिए जुलूस अलग अलग मार्गों से निकलते हैं। कस्टम गेट पर आयोजकों की ओर से बड़ा मंच भी लगाया जाता है जहां विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। कार्यक्रम देर रात तक चलने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है। ऐसे में पुलिस के सामने भीड़ नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने डोल ग्यारस और गणेश विसर्जन के तय रूट तथा विसर्जन स्थलों पर पर्याप्त बल तैनात करने की तैयारी की है। पुलिस की ओर से जुलूस के दौरान यातायात को व्यवस्थित रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर भी पुलिस की नजर रहेगी।

    एसपी ने लोगों से अपील की है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन निर्धारित स्थानों पर ही करें। उन्होंने लोगों से विसर्जन के दौरान पानी में उतरने से बचने की अपील भी की है ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। पुलिस प्रशासन ने त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आम लोगों से सहयोग की अपील की है।

    इस दौरान सीएसपी सचिन कुमार धुर्वे यातायात थाना प्रभारी रक्षित निरीक्षक रणवीर यादव कोतवाली थाना प्रभारी रोहित दुबे रक्षित निरीक्षक गायत्री इटोरिया और सूबेदार प्रियंका घोष सहित पुलिस बल मौजूद रहा।

  • गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    गणपति उत्सव में इस बार प्रसाद में लाएं स्वाद का नया ट्विस्ट, मोदक-मिठाई के साथ ट्राई करें ये 5 खास नमकीन विकल्प

    नई दिल्ली । गणपति उत्सव में बप्पा के भोग और प्रसाद की अपनी खास परंपरा होती है। मोदक और मिठाइयां आमतौर पर प्रसाद का प्रमुख हिस्सा रहती हैं, लेकिन अगर इस बार कुछ अलग और स्वादिष्ट परोसने की इच्छा है तो नमकीन विकल्प भी आजमाए जा सकते हैं। खास बात यह है कि ऐसे कई व्यंजन कम मात्रा में आसानी से तैयार किए जा सकते हैं और बच्चों से लेकर बड़ों तक इन्हें पसंद किया जा सकता है।

    नारियल और धनिया वाले चने प्रसाद के लिए एक आसान और पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं। इसके लिए उबले हुए काले या सफेद चनों में ताजा नारियल और हरा धनिया मिलाया जा सकता है। हल्का जीरा या राई का तड़का इसका स्वाद बढ़ा देता है। इसे कम समय में तैयार करके बड़ी संख्या में लोगों को परोसा जा सकता है।

    अगर प्रसाद में कुछ ऐसा शामिल करना चाहते हैं जिसे आसानी से हाथ में लेकर खाया जा सके, तो मिनी समोसे अच्छा विकल्प हो सकते हैं। छोटे आकार के इन समोसों में आलू और मटर की हल्की मसालेदार फिलिंग रखी जा सकती है। पूजा के बाद इन्हें छोटे पोर्शन में प्रसाद के तौर पर परोसा जा सकता है।

    मीठे प्रसाद से अलग इस बार नींबू चावल भी तैयार किए जा सकते हैं। नींबू के स्वाद के साथ करी पत्ता और मूंगफली का हल्का तड़का इसे खास बनाता है। यह व्यंजन ज्यादा मात्रा में तैयार करना भी आसान है, इसलिए गणपति उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए इसे बनाया जा सकता है।

    मिनी ढोकला भी प्रसाद की थाली में स्वाद और हल्केपन का अच्छा मेल दे सकता है। सॉफ्ट ढोकले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर परोसा जा सकता है। ऊपर से हरा धनिया या नारियल डालने से इसका स्वाद और प्रस्तुति दोनों बेहतर हो सकते हैं। बच्चों के लिए भी यह एक आसान विकल्प हो सकता है।

    अगर कम मेहनत में कुछ अलग तैयार करना चाहते हैं, तो मसाला नमकीन कप भी बनाया जा सकता है। छोटे कप में सेव, भुना चना, मूंगफली और पोहा मिलाकर क्रंची स्नैक तैयार किया जा सकता है। इसे छोटे हिस्सों में परोसना आसान होता है और उत्सव के माहौल में यह अलग तरह का स्नैक विकल्प बन सकता है।

    गणपति उत्सव में प्रसाद का मतलब केवल मिठाई तक सीमित नहीं है। हालांकि प्रसाद तैयार करते समय परिवार की परंपराओं और पूजा से जुड़े नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। इनके अनुरूप छोटे पोर्शन में नमकीन और हल्के व्यंजन शामिल किए जा सकते हैं। इससे प्रसाद की थाली में स्वाद के साथ नया बदलाव भी देखने को मिलेगा और बप्पा के भोग के बाद परिवार व मेहमानों को कुछ अलग परोसने का अवसर मिलेगा।

  • जिस नक्शे पर निगम ने दी थी बिल्डिंग परमिशन उसी के खिलाफ अब कार्रवाई बावड़ियाकलां के 22 मकान अवैध घोषित

    जिस नक्शे पर निगम ने दी थी बिल्डिंग परमिशन उसी के खिलाफ अब कार्रवाई बावड़ियाकलां के 22 मकान अवैध घोषित


    भोपाल। भोपाल के बावड़ियाकलां स्थित शुभालय बिहार में 22 मकानों को लेकर नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित की जमीन पर टीएंडसीपी से स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए गए इन निर्माणों को नगर निगम ने अवैध घोषित करते हुए संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए हैं। निगम ने 17 मकान मालिकों को 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं जबकि पांच अधूरे मकानों का निर्माण तत्काल रोकने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद अब इन मकानों में रहने वाले और निर्माण करा रहे लोगों के सामने अपने निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    इस मामले की खास बात यह है कि जिन मकानों को अब नगर निगम अवैध निर्माण बता रहा है उनमें से बिल्डिंग परमिशन पहले नगर निगम की ही बिल्डिंग परमिशन शाखा की ओर से जारी की गई थी। ऐसे में निगम की मौजूदा कार्रवाई और पहले जारी की गई अनुमतियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका के बाद आगे बढ़ा है। उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को नगर निगम को पत्र भेजकर संबंधित निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था।

    इसके बाद नगर निगम ने पहले 17 मकानों को नोटिस जारी किए और अब बाकी पांच अधूरे मकानों को भी कार्रवाई के दायरे में ले लिया है। इस तरह शुभालय बिहार में कुल 22 निर्माणों को लेकर निगम ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। 17 मकानों के मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया है ताकि वे कथित अवैध हिस्से को स्वयं हटा सकें। वहीं जिन पांच मकानों का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है वहां आगे किसी भी तरह का निर्माण करने पर रोक लगा दी गई है।

    मामले के याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के अनुसार यह विवाद केवल 22 मकानों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे जमीन और प्लॉट की बिक्री से जुड़ा बड़ा मामला है। उनका आरोप है कि संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की करीब पांच एकड़ जमीन पर भू माफिया ने 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेच दिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक इन प्लॉटों को खरीदने वाले लोग संस्था के सदस्य नहीं थे और उन्होंने संस्था को राशि भी नहीं दी। दूसरी ओर संस्था के संस्थापक सदस्यों को उनकी जमीन का हिस्सा नहीं मिल पाया।

    मामले में सहकारिता विभाग की जांच भी हुई है। विभाग की फरवरी 2026 की जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। जांच में इनमें से 32 रजिस्ट्रियों को अवैध बताया गया। इसके अलावा 38 रजिस्ट्रियों से संबंधित करीब 18 करोड़ 74 लाख रुपए की राशि संस्था के खाते में जमा नहीं होने की बात भी सामने आई।

    ऑपरेटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट में फर्जी दस्तावेज और हैंडराइटिंग में हेरफेर के जरिए वास्तविक सदस्यों के अधिकार प्रभावित किए जाने का उल्लेख किया गया है। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल से जुड़ी बताई गई हैं। सहकारिता विभाग ने इन रजिस्ट्रियों को शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट में मामला भी दायर किया है। अब नगर निगम की ताजा कार्रवाई के बाद बावड़ियाकलां के इन 22 मकानों का मामला एक बार फिर चर्चा में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

  • UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?

    UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। दोनों की बैठक ममदानी के आधिकारिक आवास ग्रेसी मैन्शन में करीब एक घंटे चली। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत की और न्यूयॉर्क में आवास तथा शहर को कामकाजी वर्ग के लिए अधिक किफायती बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानकारी दी।

    ट्रंप ने ग्रेसी मैन्शन पहुंचने के बाद न्यूयॉर्क के मेयर के आधिकारिक आवास से जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि इस इमारत में उन्होंने पहले भी कई मेयरों के साथ समय बिताया है और यहां कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं। UNGA के लिए दुनिया के कई नेता इस समय न्यूयॉर्क में मौजूद हैं और ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं।

    क्वींस में 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियों पर चर्चा

    बैठक में न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में Sunnyside Yards के संभावित पुनर्विकास पर विशेष चर्चा हुई। ममदानी के मुताबिक इस परियोजना से करीब 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियां पैदा हो सकती हैं। दोनों पक्षों ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए न्यूयॉर्क सिटी हॉल और व्हाइट हाउस की हाउसिंग तथा ऑपरेशंस टीमों के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

    ट्रंप ने कहा कि Sunnyside Yards का विकास लंबे समय से चर्चा में है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संघीय स्तर पर मंजूरी और फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विकास में कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए पर्याप्त आवास शामिल होना चाहिए।

    महंगाई और शहर को किफायती बनाने पर भी बात

    मुलाकात के दौरान न्यूयॉर्क में बढ़ती जीवन-यापन लागत और कामकाजी वर्ग के लिए शहर को अधिक किफायती बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। ममदानी ने कहा कि उनका फोकस न्यूयॉर्कवासियों के लिए रहने का खर्च कम करने और ज्यादा आवास उपलब्ध कराने पर है।

    ममदानी ने मुलाकात के बाद कहा कि ट्रंप के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन वह शहर के लोगों को राहत दिलाने की दिशा में काम करने वाले सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेंगे। उन्होंने बैठक को उपयोगी बताया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच आवास से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत होगी।

    ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने मुलाकात

    ग्रेसी मैन्शन में हुई यह मुलाकात ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने बैठक थी और पहली बार दोनों न्यूयॉर्क में मिले। इससे पहले नवंबर 2025 में ममदानी ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद फरवरी में भी ममदानी ने वॉशिंगटन जाकर ट्रंप के साथ न्यूयॉर्क में आवास विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

    इस बार की बैठक में दोनों नेताओं ने अपने मतभेदों के बावजूद न्यूयॉर्क से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। ट्रंप ने ममदानी के साथ मीडिया के सामने सकारात्मक लहजे में बात की और न्यूयॉर्क के लिए उनके काम करने की उम्मीद जताई।

  • आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस

    आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस


    भोपाल। भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। इस मामले में शहर के करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है। इससे पहले 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई कैंसिल हो गई थी। अब मंगलवार को दोपहर में होने वाली सुनवाई पर नगर निगम के साथ रहवासी और प्रभावित कारोबारी पक्षों की भी नजर है। मामले को लेकर नगर निगम और रहवासियों ने अपनी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    दरअसल 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाकर कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इसके बाद करीब 15 दिनों तक संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस देने की प्रक्रिया चली। इस दौरान 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। नोटिस के बाद निगम ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए तीन दिनों में 190 प्रतिष्ठानों को बंद भी किया था।

    निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यापारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कारोबारियों ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 22 दिनों से इस मामले में सीलिंग या बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि आगे नगर निगम को किस तरह की कार्रवाई करनी होगी और प्रभावित प्रतिष्ठानों को लेकर क्या व्यवस्था लागू होगी।

    मामले में रहवासियों की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निगम की ओर से प्रस्तुत की गई कार्रवाई की जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनके मुताबिक कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी हैं जिन्हें सील किए जाने का दावा किया गया था लेकिन बाद में वे दोबारा खुल गए। रहवासी पक्ष ने इस संबंध में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने की तैयारी की है।

    सोमवार को नगर निगम के अधिकारी दिनभर सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई और नोटिस से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित किया। दूसरी ओर रहवासी पक्ष भी अपने दस्तावेज तैयार करता रहा। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने से संबंधित फोटो और वीडियो भी अदालत के सामने रखे जा सकते हैं।

    इस पूरे मामले का असर भोपाल के हजारों कारोबारियों और रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि अदालत की सुनवाई के बाद कार्रवाई को लेकर क्या दिशा तय होती है जबकि रहवासी पक्ष यह चाहता है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में नियमों का पालन सुनिश्चित हो। अब मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख से आगे की कार्रवाई की तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।