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  • मंगलवार के दिन हनुमान जी को ये चीजें अर्पित करने से मिलती है विशेष कृपा संकट होते हैं दूर और खुलते हैं सफलता के द्वार

    मंगलवार के दिन हनुमान जी को ये चीजें अर्पित करने से मिलती है विशेष कृपा संकट होते हैं दूर और खुलते हैं सफलता के द्वार


    नई दिल्ली। हनुमान जी को अटूट भक्ति शक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का दिन उनकी विशेष पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से भय रोग शत्रु बाधा और आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से बजरंगबली अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    मंगलवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या हनुमान मंदिर में भगवान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान राम नाम का स्मरण करें क्योंकि भगवान हनुमान को श्रीराम का नाम सबसे अधिक प्रिय है। श्रीराम का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

    हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सिंदूर अर्पित करने से बजरंगबली शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसके साथ लाल फूल लाल चोला जनेऊ और तुलसी दल भी श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जा सकते हैं। भोग में गुड़ और चना सबसे प्रिय माने जाते हैं। इसके अलावा बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू केले नारियल और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। श्रद्धा और प्रेम से चढ़ाया गया प्रसाद भगवान अवश्य स्वीकार करते हैं।

    मंगलवार के दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना बंदरों को गुड़ और चना खिलाना तथा गाय को रोटी खिलाना भी पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और क्रोध झूठ तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। सात्विक भोजन ग्रहण करना और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष हो या जिनके जीवन में बार बार बाधाएं आ रही हों उन्हें मंगलवार का व्रत और हनुमान पूजा विशेष लाभ देती है। यह पूजा आत्मविश्वास बढ़ाती है और मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले भक्तों के जीवन में साहस धैर्य और सकारात्मकता का संचार होता है।

    धार्मिक मान्यता है कि भगवान हनुमान आज भी अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। यदि मंगलवार के दिन सच्ची श्रद्धा विश्वास और सेवा भाव से उनकी पूजा की जाए तो जीवन की कठिन से कठिन बाधाएं भी दूर हो सकती हैं। इसलिए इस पावन दिन भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए बजरंगबली की आराधना करें और उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित कर सुख शांति समृद्धि तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करें।

  • मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    मां की एक सलाह ने बदल दी जिंदगी धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि हेमा मालिनी राजनीति में जाएं एक्ट्रेस ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हेमा मालिनी ने अपने राजनीतिक सफर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था तब उनके पति और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र इसके पक्ष में नहीं थे। इसका कारण किसी राजनीतिक मतभेद से ज्यादा उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता थी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली भारी भीड़ और लगातार हेलिकॉप्टर से यात्रा करना धर्मेंद्र को हमेशा परेशान करता था।

    हेमा मालिनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें अलग अलग राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए भेजा जाता था जहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी। ऐसी परिस्थितियों को देखकर धर्मेंद्र हमेशा चिंतित रहते थे। वह बार बार उनसे सुरक्षित रहने की सलाह देते और पूछते कि क्या इतना जोखिम उठाना वास्तव में जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान हेलिकॉप्टर से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर भी उन्हें काफी चिंता रहती थी। हालांकि हेमा मालिनी का कहना है कि पार्टी की जिम्मेदारी होने के कारण उन्हें अपना दायित्व निभाना पड़ता था।

    उन्होंने बताया कि राजनीति की ओर उनका झुकाव वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने अभिनेता और भाजपा नेता विनोद खन्ना के लिए चुनाव प्रचार किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन और स्नेह देखा। उन्होंने कहा कि जब भी चुनावी सभाओं में विशाल भीड़ उमड़ती थी तो उन्हें विश्वास ही नहीं होता था कि इतने लोग उन्हें देखने और सुनने आए हैं। लोगों का यह प्रेम उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक अनुभव था।

    हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। लेकिन उनकी मां ने उन्हें समझाया कि अब केवल अभिनय तक सीमित रहने के बजाय देश के लिए भी योगदान देने का समय आ गया है। उनकी मां ने उन्हें बताया कि भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े और सम्मानित नेता हैं तथा यह अवसर देश सेवा का माध्यम बन सकता है। मां की यह बात उनके मन को छू गई और उन्होंने राजनीति में सक्रिय होने का निर्णय ले लिया।

    एक्ट्रेस ने अपने पहले चुनाव से जुड़ा एक और रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी के सामने स्पष्ट शर्त रखी थी कि यदि वह चुनाव लड़ेंगी तो केवल मथुरा लोकसभा सीट से ही लड़ेंगी क्योंकि वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त हैं और मथुरा से उनका विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। बाद में पार्टी ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें मथुरा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने इस दौरान दिवंगत नेताओं सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के सहयोग को भी याद करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

    फिल्मी दुनिया में दशकों तक अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने वाली हेमा मालिनी आज राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में मनोरंजन और जनसेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका यह अनुभव बताता है कि परिवार की चिंताओं और व्यक्तिगत दुविधाओं के बावजूद यदि उद्देश्य स्पष्ट हो तो जीवन में नए रास्ते अपनाए जा सकते हैं।

  • सफलता के रास्ते में रुकावटें बन रही हैं परेशानी तो रोज करें इन शुभ मंत्रों का जाप मन मिलेगा शांत और बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा

    सफलता के रास्ते में रुकावटें बन रही हैं परेशानी तो रोज करें इन शुभ मंत्रों का जाप मन मिलेगा शांत और बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में मंत्र जाप को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मिक शांति और मानसिक एकाग्रता का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित अनेक मंत्रों का नियमित और श्रद्धापूर्वक जाप करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन में विश्वास बढ़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान की आराधना के साथ मंत्रों का उच्चारण करने से मन शांत रहता है तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यही कारण है कि पूजा पाठ ध्यान और साधना में मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है।

    धार्मिक मान्यता है कि जब जीवन में बार बार बाधाएं आने लगें कार्य समय पर पूरे न हों या मन लगातार चिंता और अस्थिरता से घिरा रहे तब नियमित पूजा के साथ मंत्र जाप करना लाभकारी माना जाता है। मंत्रों के उच्चारण से मन एकाग्र होता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर अधिक सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ता है। हालांकि किसी भी मंत्र का प्रभाव श्रद्धा अनुशासन और नियमित साधना पर आधारित माना गया है।

    यदि किसी कार्य में लगातार रुकावटें आ रही हों तो भगवान गणेश की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है। गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा मोदक और लाल पुष्प अर्पित कर श्रद्धा के साथ श्री गणेशाय नमः मंत्र का 11 बार जाप करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होने की प्रार्थना की जाती है और मन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

    भाग्य और सकारात्मकता में वृद्धि की कामना रखने वाले श्रद्धालु विशेष मंत्रों का भी जाप करते हैं। धार्मिक परंपराओं में ॐ ऐं श्रीं भाग्योदयं कुरु कुरु श्रीं ऐं फट् मंत्र का 11 21 या 51 बार जाप करने की मान्यता है। कहा जाता है कि इस मंत्र का नियमित जाप व्यक्ति के भीतर आशावाद बढ़ाने और आत्मविश्वास मजबूत करने में सहायक माना जाता है। इसके साथ सात्विक जीवनशैली और अच्छे कर्मों को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।

    यदि मन चिंता तनाव या अस्थिरता से घिरा हो तो भगवान शिव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। प्रातःकाल शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर श्रद्धा के साथ शिव मंत्रों का जाप करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु रुद्राक्ष की माला से मंत्रों का जप करते हैं जिससे ध्यान केंद्रित रखने में सहायता मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना से मन को शांति धैर्य और संयम प्राप्त होता है।

    धर्माचार्यों का कहना है कि मंत्र जाप केवल शब्दों का उच्चारण नहीं बल्कि श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक भाव का अभ्यास है। यदि व्यक्ति नियमित रूप से पूजा ध्यान और सदाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाए तो मानसिक संतुलन मजबूत होता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी बढ़ती है। इसलिए मंत्र जाप के साथ अच्छे विचार सेवा भावना और सकारात्मक कर्मों को भी समान महत्व देना चाहिए क्योंकि यही जीवन को संतुलित और सफल बनाने का वास्तविक मार्ग माना गया है।

  • मंगलवार को इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा, मंगल दोष होगा शांत, जीवन में आएगी सुख समृद्धि और सफलता

    मंगलवार को इस विधि से करें हनुमान जी की पूजा, मंगल दोष होगा शांत, जीवन में आएगी सुख समृद्धि और सफलता


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से बजरंगबली की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव भी कम होता है। मान्यता है कि जो भक्त मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान जी की उपासना करता है उसके जीवन में साहस आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही शत्रु बाधा भय रोग और आर्थिक परेशानियों से भी राहत मिलने लगती है।

    मंगलवार की पूजा के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल अथवा केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या हनुमान मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें सिंदूर चमेली का तेल लाल फूल और तुलसी अर्पित करें। गुड़ और चने का भोग लगाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा बजरंग बाण सुंदरकांड अथवा हनुमान अष्टक का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। यदि समय कम हो तो कम से कम हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।

    धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मंगलवार के दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण करते हुए हनुमान जी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है क्योंकि बजरंगबली स्वयं भगवान राम के परम भक्त हैं। पूजा के अंत में आरती करें और परिवार की सुख शांति उत्तम स्वास्थ्य तथा समृद्धि की कामना करें। इसके बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटें।

    मंगलवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन क्रोध असत्य वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र गुड़ मसूर की दाल या लाल फल का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। बंदरों को गुड़ और चना खिलाने तथा गाय को रोटी खिलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष हो या बार बार कार्यों में बाधाएं आती हों उन्हें मंगलवार का व्रत रखने के साथ नियमित रूप से ओम अं अंगारकाय नमः तथा ओम हनुमते नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। नौकरी व्यवसाय शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी मंगलवार की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से की गई आराधना से भय संकट रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में सुख समृद्धि सफलता और सम्मान का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए प्रत्येक मंगलवार श्रद्धा और विश्वास के साथ बजरंगबली की पूजा कर उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

  • महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

    महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ


    नई दिल्ली। हर महीने की पहली तारीख देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी दिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी करती हैं। एक अगस्त से भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में करोड़ों परिवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार रसोई गैस सस्ती होगी या फिर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए लेंगी।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों विदेशी मुद्रा विनिमय दर और आयात लागत के आधार पर तय की जाती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आती है तो गैस सिलेंडर महंगा भी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। इसी कारण तेल कंपनियां बाजार की स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे। हालांकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की संभावना अधिक मानी जा रही है क्योंकि इस श्रेणी में कीमतों में अक्सर तेजी से संशोधन किया जाता है।

    देश में घरेलू उपयोग के लिए 14 दशमलव 2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर और व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल किया जाता है। होटल रेस्टोरेंट ढाबे और छोटे कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर पर अधिक निर्भर रहते हैं। इसलिए इस श्रेणी में कीमतों में बदलाव का सीधा असर खाद्य पदार्थों और अन्य सेवाओं की लागत पर भी पड़ सकता है।

    यदि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम परिवारों को मिलेगा। वहीं यदि कीमतें बढ़ती हैं तो मासिक घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमतें घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नई कीमतों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किसी भी जानकारी पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों या अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि वास्तविक कीमतें केवल तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी सूची के अनुसार ही लागू होती हैं। नई दरें देश के अलग अलग शहरों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण थोड़ी अलग हो सकती हैं।

    हर महीने की तरह इस बार भी एक अगस्त को इंडियन ऑयल भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम नई एलपीजी दरें जारी करेंगी। यदि वैश्विक बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। वहीं विपरीत परिस्थितियों में कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार भी नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी की नजर अब पहली अगस्त को जारी होने वाली नई एलपीजी मूल्य सूची पर टिकी हुई है।

  • भोपाल के छात्रावास में जन्मदिन बना मातम 12वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान सुसाइड नोट मिलने से जांच तेज

    भोपाल के छात्रावास में जन्मदिन बना मातम 12वीं की छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान सुसाइड नोट मिलने से जांच तेज


    भोपाल । भोपाल के कटारा हिल्स स्थित आदिवासी कन्या छात्रावास में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई जहां 12वीं कक्षा की छात्रा और जेईई की तैयारी कर रही 17 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सबसे दुखद बात यह रही कि जिस दिन उसने यह कदम उठाया उसी दिन उसका 17वां जन्मदिन भी था। इस घटना से छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राएं शिक्षक और परिजन गहरे सदमे में हैं। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें छात्रा ने इस कदम के लिए स्वयं को जिम्मेदार बताते हुए अपने माता पिता से माफी मांगी है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतक छात्रा की पहचान अलीराजपुर जिले की रहने वाली दर्शन मिनामा के रूप में हुई है। वह भोपाल के अनंत हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की छात्रा थी और साथ ही एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान से जेईई परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह सितंबर 2025 से छात्रावास में रह रही थी और पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर मानी जाती थी।

    जानकारी के अनुसार रविवार शाम वह कोचिंग से लौटकर अपने कमरे में चली गई। उसकी रूममेट पिछले लगभग बीस दिनों से गांव गई हुई थी जिसके कारण वह कमरे में अकेली रह रही थी। शाम करीब छह बजे उसकी सहेलियां जन्मदिन मनाने के लिए केक लेकर उसके कमरे पर पहुंचीं लेकिन काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। लगातार आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बाद जब सेंट्रल लॉक खोला गया तो छात्रा कमरे के अंदर फंदे से लटकी हुई मिली। यह दृश्य देखकर छात्राओं में चीख पुकार मच गई और तुरंत वार्डन को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

    मौके पर पहुंची पुलिस एफएसएल टीम और फोटोग्राफर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। कमरे की तलाशी के दौरान एक सुसाइड नोट मिला जिसमें छात्रा ने लिखा कि वह अपने इस कदम के लिए स्वयं जिम्मेदार है और अपने माता पिता से माफी मांगती है। पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को छात्रा के मानसिक तनाव या अवसाद में होने की आशंका है लेकिन आत्महत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। पुलिस परिजनों से बातचीत कर रही है और छात्रा के दोस्तों तथा शिक्षकों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे ताकि घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझा जा सके। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया परिजनों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी।

    इस घटना ने छात्रावास की व्यवस्थाओं और वहां रहने वाली छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग दस महीने पहले इसी छात्रावास में 12वीं की एक अन्य छात्रा ने भी आत्महत्या कर ली थी। उस समय भी घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और काउंसलिंग सिस्टम को मजबूत करने की बात कही गई थी लेकिन अब दोबारा हुई इस घटना ने उन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परिवार शिक्षकों और छात्रावास प्रबंधन को नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि यदि कोई छात्र मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी से गुजर रहा हो तो समय रहते उसकी पहचान कर उचित सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

    अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज


    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतें करीब एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई कार्रवाई फिलहाल टालने से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

    सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर यानी 8.7 फीसदी टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर यानी 7.5 फीसदी गिरकर 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 16 जुलाई के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने के फैसले से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

    ट्रंप ने कूटनीति को दी प्राथमिकता

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को और समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

    सऊदी और रूस से जुड़ी घटनाओं पर भी नजर

    इस बीच सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात केंद्र से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों से कजाकिस्तान के तेल उत्पादन पर भी असर पड़ा, हालांकि बाद में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने टर्मिनल से तेल लोडिंग फिर शुरू होने की पुष्टि की।

    बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा हो, लेकिन जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की स्थिति आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    नई दिल्ली । भारतीय विवाह समारोहों में दूल्हे का घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचना सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। घुड़चढ़ी की यह रस्म आज भी अधिकांश क्षेत्रों में पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती है। समय के साथ विवाह के तौर-तरीकों में कई बदलाव आए हैं, लेकिन दूल्हे की घोड़ी पर सवारी आज भी भारतीय शादियों की सबसे प्रमुख रस्मों में शामिल है। इस परंपरा के पीछे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं का विशेष महत्व माना जाता है।

    भारतीय समाज में घोड़ा और विशेष रूप से घुड़सवारी लंबे समय तक शौर्य, सम्मान और नेतृत्व का प्रतीक रहे हैं। प्राचीन काल में राजा, योद्धा और सेनापति घोड़े पर यात्रा करते थे। इसी कारण विवाह के अवसर पर दूल्हे का घोड़ी पर बैठकर आना इस बात का प्रतीक माना गया कि वह अब परिवार की नई जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार है। विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन माना जाता है, इसलिए इस रस्म को सम्मानजनक स्थान मिला।

    घुड़चढ़ी को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे दूल्हे के आत्मविश्वास, संयम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं। वहीं, कई सांस्कृतिक व्याख्याओं के अनुसार यह रस्म विवाह से पहले दूल्हे के धैर्य और जिम्मेदारी का प्रतीकात्मक प्रदर्शन मानी जाती रही है। हालांकि इन मान्यताओं को ऐतिहासिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    घोड़ी के चयन को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। लोक परंपराओं में माना जाता है कि घोड़ी अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित स्वभाव की होती है, इसलिए विवाह जैसे सार्वजनिक आयोजन में उसका उपयोग अधिक उपयुक्त माना गया। कुछ सांस्कृतिक व्याख्याएं इसे संवेदनशीलता और संतुलित व्यवहार का प्रतीक भी बताती हैं। हालांकि यह कहना कि घोड़ी का चयन किसी निश्चित वैज्ञानिक कारण से किया गया था, उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं होता।

    इतिहासकारों का मानना है कि पुराने समय में बारातें लंबी दूरी तय करके दूसरे गांव या नगर पहुंचती थीं। उस दौर में यात्रा अपेक्षाकृत कठिन और जोखिमपूर्ण होती थी। ऐसे में घोड़े या घोड़ी पर सवारी व्यावहारिक आवश्यकता भी थी। समय बीतने के साथ यह आवश्यकता धीरे-धीरे एक सांस्कृतिक परंपरा और विवाह की पहचान बन गई। आज परिवहन के आधुनिक साधन उपलब्ध होने के बावजूद घुड़चढ़ी की रस्म अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है।

    आधुनिक समय में इस परंपरा का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। कई स्थानों पर दूल्हा घोड़ी के बजाय बग्घी, विंटेज कार या अन्य वाहनों से भी विवाह स्थल तक पहुंचता है। फिर भी पारंपरिक परिवारों में घुड़चढ़ी को शुभ माना जाता है और इसे विवाह संस्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है। यह रस्म भारतीय समाज की उन सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं और आज भी उत्सव, सम्मान तथा सामाजिक एकता का संदेश देती हैं। इसलिए घुड़चढ़ी को केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय विवाह संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत और प्रतीकात्मक परंपरा के रूप में देखा जाता है।

  • एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

    एनजीटी के आदेशों की अनदेखी कर वेटलैंड में मड रैली जैव विविधता पर मंडराया खतरा प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल


    भोपाल । भोपाल के कलियासोत डैम के वेटलैंड क्षेत्र में आयोजित मड रैली एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस आयोजन को प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में सैकड़ों लोग और दर्जनों वाहन पहुंचे वहां पहले से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद खुलेआम मड रैली का आयोजन होना कई सवाल खड़े करता है।

    रविवार को कलियासोत डैम के किनारे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहनों की रेस आयोजित की गई। आयोजन में पचास से अधिक गाड़ियों ने हिस्सा लिया जबकि सैकड़ों लोग वहां मौजूद रहे। इस दौरान कई वाहन आपस में टकरा गए और कुछ लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी गतिविधि होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वेटलैंड केवल जलभराव वाला क्षेत्र नहीं होता बल्कि यह अनेक दुर्लभ जलीय जीव जंतुओं पक्षियों और वनस्पतियों का प्राकृतिक आवास होता है। यहां मगरमच्छ घड़ियाल कछुए मछलियां और कई प्रवासी पक्षी निवास करते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही तेज आवाज और भीड़भाड़ से इन जीवों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित होता है। इतना ही नहीं कई जीवों के घोंसले और अंडे भी ऐसे आयोजनों के कारण नष्ट हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में भी इसी तरह की मड रैली के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में एनजीटी ने देशभर के वेटलैंड क्षेत्रों में मड रैली और इसी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। उस समय भोपाल जिला प्रशासन ने भी ऐसे आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी थी। इसके बावजूद दोबारा ऐसे आयोजन का होना नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    वन विभाग के अनुसार कलियासोत और आसपास के जंगलों में बाघ तेंदुए सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही रहती है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और अत्यधिक शोर से वन्यजीवों के व्यवहार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे आयोजनों पर रोक नहीं लगी तो क्षेत्र की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

    घटना के बाद प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। राजस्व अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं और अवैध रूप से मड रैली आयोजित करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में हर शनिवार और रविवार को विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सके।

    जानकारों के मुताबिक ऐसे आयोजनों की जानकारी आम तौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती। सोशल मीडिया और निजी मैसेजिंग ग्रुप के माध्यम से चुनिंदा लोगों को सूचना दी जाती है जिससे बड़ी संख्या में ऑफरोड वाहन चालक और दर्शक मौके पर पहुंच जाते हैं। यही वजह है कि प्रशासन को समय रहते सूचना नहीं मिल पाती।

    पर्यावरण विशेषज्ञों ने मांग की है कि वेटलैंड क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह नियंत्रित की जाए नियमित गश्त बढ़ाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

  • 29 जुलाई को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शुक्र का गोचर, 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां, जाने उपाय

    29 जुलाई को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शुक्र का गोचर, 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं चुनौतियां, जाने उपाय


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, समृद्धि, प्रेम और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है। शुक्र की चाल या नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 29 जुलाई 2026 को शुक्र ग्रह सूर्य के स्वामित्व वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन का कुछ राशियों पर सकारात्मक असर रहेगा, जबकि कुछ जातकों को आर्थिक, पारिवारिक और पेशेवर जीवन में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

    मेष राशि
    मेष राशि के लोगों के लिए यह गोचर खर्चों में बढ़ोतरी का संकेत दे सकता है। बजट बिगड़ने की आशंका रहेगी और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ विवाद से बचें और किसी भी वित्तीय लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों को इस दौरान स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों पर विशेष ध्यान देना होगा। घर-परिवार में मतभेद या तनाव की स्थिति बन सकती है। वाणी पर संयम रखें और किसी भी बड़े निवेश से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह अवश्य लें।

    सिंह राशि
    उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए इसका प्रभाव सिंह राशि पर अधिक देखने को मिल सकता है। अहंकार या अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण काम प्रभावित हो सकते हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखें। प्रेम संबंधों में गलतफहमियों से बचने के लिए संवाद बनाए रखना जरूरी होगा।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लोगों को करियर और कारोबार में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। साझेदारी में काम करने वालों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। धन संबंधी मामलों में लिखित दस्तावेजों का ध्यान रखें। कामकाज के सिलसिले में अनावश्यक यात्राएं होने से थकान और आर्थिक नुकसान की संभावना भी रहेगी।

    अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    – प्रत्येक शुक्रवार मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें और सफेद मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
    – “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का नियमित जाप करें।
    – शुक्रवार को जरूरतमंद लोगों को चावल, दूध, चीनी जैसी सफेद वस्तुओं का दान करें।