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  • फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा

    फूलों और ड्रायफ्रूट से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गुरुवार भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा


    मध्य प्रदेश । Ujjain स्थित Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में गुरुवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। सुबह लगभग 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत और भस्म से हुआ अभिषेक
    आरती के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरि-ओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।

    भांग, चंदन और फूलों से राजा स्वरूप श्रृंगार
    भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग, चंदन, गुलाब के फूलों की माला, रजत चंद्र, रजत मुकुट और त्रिपुंड से सजाया गया। इसके अलावा शेषनाग का रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प मालाएं भी अर्पित की गईं। भगवान को भव्य “राजा स्वरूप” में सजाया गया, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

    ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग 
    श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल, ड्रायफ्रूट और मिष्ठान का भोग लगाया गया। पूरे गर्भगृह में फूलों और सुगंधित मालाओं से अलौकिक वातावरण बना रहा।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़
    भस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे वातावरण में “हर हर महादेव” की गूंज सुनाई दी।

    भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है, जो हर दिन Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple को दिव्यता से भर देता है।

  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

  • सूक्ष्म कला का अद्भुत उदाहरण, छात्रा ने दाल पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग और दर्ज कराया वर्ल्ड रिकॉर्ड

    सूक्ष्म कला का अद्भुत उदाहरण, छात्रा ने दाल पर बनाए 12 ज्योतिर्लिंग और दर्ज कराया वर्ल्ड रिकॉर्ड


    मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर अपनी प्रतिभा के कारण चर्चा में है। यहां के उत्कृष्ट विद्यालय की 12वीं की छात्रा दीक्षा कुशवाह ने ऐसी सूक्ष्म कला प्रस्तुत की है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। दीक्षा ने केवल 8 मिलीमीटर आकार की चने की दाल पर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की बेहद बारीक पेंटिंग बनाई। खास बात यह है कि उन्होंने यह पूरा कार्य सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया।

    वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
    दीक्षा की इस असाधारण उपलब्धि को World Wide Book of Records में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि सूक्ष्म कला (micro art) के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान मानी जा रही है।

    एक साल की मेहनत और कला का सफर
    ऋषि नगर निवासी दीक्षा कुशवाह फ्रीगंज स्थित आर्ट क्लास में सूक्ष्म चित्रकला सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस कला को निखारा और लगातार अभ्यास किया। इस कार्य के लिए उन्हें विशेष उपकरणों, धैर्य और अत्यधिक एकाग्रता की जरूरत पड़ी। इतने छोटे आकार में सटीक आकृतियां बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था।

    आस्था और प्रेरणा से मिली दिशा
    दीक्षा ने बताया कि उन्हें 12 ज्योतिर्लिंग बनाने की प्रेरणा केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के बाद मिली। साथ ही कॉलेज के अन्य छात्रों की वर्ल्ड रिकॉर्ड उपलब्धियों ने भी उन्हें प्रेरित किया।

    स्थानीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान
    दीक्षा की यह उपलब्धि न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और लगन से छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

    छोटी सी दाल पर इतनी सूक्ष्म कला बनाकर दीक्षा कुशवाह ने साबित कर दिया कि प्रतिभा आकार नहीं, समर्पण और अभ्यास से बनती है। उनकी यह उपलब्धि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान

    सांदीपनि लोक बनेगा नया धार्मिक केंद्र, सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 139 करोड़ की मेगा परियोजना का ऐलान


    मध्य प्रदेश । Ujjain एक बार फिर बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा में है। यहां स्थित Sandipani Ashram को अब भव्य ‘सांदीपनि लोक’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 139 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे सिंहस्थ कुंभ से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना ‘श्रीकृष्ण पाथेय योजना’ के तहत तैयार की जा रही है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली को आधुनिक और भव्य स्वरूप देना है।

    108 फीट ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बनेगी मुख्य आकर्षण
    इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण होगी भगवान श्रीकृष्ण की 108 फीट ऊंची प्रतिमा। इसे प्रदेश की सबसे ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा बताया जा रहा है। इस प्रतिमा का डिजाइन तकनीकी परीक्षण और विंड टनल स्टडी के बाद तैयार किया जाएगा, ताकि इसकी संरचना पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ हो।

    महर्षि सांदीपनि और गुरुकुल परंपरा का भव्य प्रदर्शन
    परियोजना के तहत आश्रम परिसर में महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा, गुरुकुल परंपरा से जुड़े थीम आधारित क्षेत्र, मंदिर परिसर और जल फाउंटेन विकसित किए जाएंगे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है, जहां मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने बलराम और सुदामा के साथ शिक्षा प्राप्त की थी।

    डिजिटल अनुभव से जुड़ेगा इतिहास और आस्था
    सांदीपनि लोक को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए AR/VR आधारित अनुभव, डिजिटल प्रदर्शनी और मल्टी-लैंग्वेज ऑडियो-विजुअल सिस्टम उपलब्ध होगा। पर्यटक हेडफोन या VR डिवाइस के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, 64 कलाओं और गुरुकुल परंपरा को इंटरैक्टिव तरीके से समझ सकेंगे।

    लाइट एंड साउंड शो से जीवंत होगी श्रीकृष्ण कथा
    परिसर में इमर्सिव लाइट एंड साउंड शो भी विकसित किया जाएगा, जिसमें श्रीकृष्ण की जीवनगाथा और उज्जैन से उनका ऐतिहासिक संबंध दर्शाया जाएगा।

    सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारी
    यह पूरी योजना आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है, जिससे Ujjain को एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। महाकाल लोक के बाद अब सांदीपनि लोक को भी उसी स्तर का बड़ा आध्यात्मिक और पर्यटन प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    महाकाल लोक के बाद बढ़ा धार्मिक पर्यटन
    महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। अब प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है।

    सांदीपनि लोक परियोजना न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि यह उज्जैन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर एक वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

  • दर्दनाक हादसा उज्जैन में, टवेरा वाहन पलटने से 9 श्रद्धालु घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी

    दर्दनाक हादसा उज्जैन में, टवेरा वाहन पलटने से 9 श्रद्धालु घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी


    मध्य प्रदेश । Ujjain में गुरुवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया, जब ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से Bhartrihari Gufa की ओर जा रही श्रद्धालुओं से भरी टवेरा गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। वाहन में आंध्र प्रदेश से आए 9 श्रद्धालु सवार थे, जिनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल थीं। हादसा इतना अचानक हुआ कि कई यात्री वाहन के अंदर ही फंस गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    स्थानीय लोगों और महंत ने दिखाया साहस
    घटना के तुरंत बाद Rinmukteshwar Mahadev Temple के महंत महावीरनाथ महाराज और स्थानीय लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की और घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। स्थानीय लोगों की मदद से कई यात्रियों को तुरंत बाहर निकाला गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।

    घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
    सूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ श्रद्धालु वाहन के नीचे दब गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया।

    निर्माण कार्य और संकरी सड़क बनी वजह?
    स्थानीय लोगों के अनुसार हादसा उस क्षेत्र में चल रहे घाट निर्माण कार्य के कारण हुआ, जहां एक तरफ निर्माण कार्य और दूसरी तरफ दीवार होने से रास्ता संकरा हो गया था। इसी वजह से वाहन असंतुलित होकर पलट गया।

    पुलिस जांच जारी, ड्राइवर पर शक
    Madhya Pradesh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर ड्राइवर के नशे में होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हादसा तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति या मानवीय गलती किस वजह से हुआ।

    धार्मिक यात्रा के दौरान हुआ यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर सावधानी की जरूरत को उजागर करता है। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन की तत्परता ने कई जानें बचाने में अहम भूमिका निभाई।

  • जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां

    जब फुटबॉल बना विरासत, वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी पिता और बेटे की ये 5 जोड़ियां


    नई दिल्ली । फुटबॉल के सबसे बड़े मंच FIFA World Cup में जहां हर खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलना सपना मानता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी रहे हैं जिनमें यह सपना दो पीढ़ियों तक पूरा हुआ। कई दिग्गज खिलाड़ियों ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए विश्व कप में जगह बनाई।

    1. लुइस और मारियो पेरेज (मेक्सिको)
    पिता लुइस पेरेज ने 1930 के विश्व कप में मेक्सिको का प्रतिनिधित्व किया था। उनके बेटे मारियो पेरेज ने 1950 के वर्ल्ड कप में राष्ट्रीय टीम की ओर से खेला। हालांकि दोनों ही अपने-अपने विश्व कप में गोल नहीं कर सके।

    2. मार्टी और जोस वैंटोलरा (स्पेन/मेक्सिको)
    मार्टी वैंटोलरा 1934 में स्पेन की टीम का हिस्सा थे, जबकि उनके बेटे जोस वैंटोलरा ने 1970 में मेक्सिको के लिए विश्व कप खेला। दोनों ही खिलाड़ी गोल करने में सफल नहीं हो पाए।

    3. डोमिंगोस और अदेमिर दा गुइया (ब्राजील)
    डोमिंगोस ने 1938 में Brazil national football team की ओर से विश्व कप खेला। उनके बेटे अदेमिर दा गुइया 1974 में ब्राजील टीम का हिस्सा रहे, लेकिन सीमित अवसरों में उन्हें भी गोल नहीं मिला।

    4. रोजर और पैट्रिस रियो (फ्रांस)
    रोजर रियो ने 1934 में France national football team के लिए विश्व कप खेला। उनके बेटे पैट्रिस रियो 1978 में फ्रांस की टीम में शामिल रहे, लेकिन वे भी गोल नहीं कर सके।

    5. निकोले और इओन लुपस्कु (रोमानिया)
    निकोले लुपस्कु ने 1970 विश्व कप में रोमानिया का प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे इओन लुपस्कु 1990 और 1994 के वर्ल्ड कप में टीम का हिस्सा रहे और कुल 8 मैच खेले, लेकिन गोल नहीं कर पाए।

    विरासत की कहानी
    ये सभी जोड़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली फुटबॉल परंपरा भी है, जहां एक ही परिवार का नाम दो अलग-अलग युगों में इतिहास बनाता है।

  • UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

    UN सुरक्षा परिषद चुनाव में बड़ा बदलाव: पाकिस्तान की विदाई तय, पहली बार किर्गिस्तान को मिली UNSC में जगह

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के लिए हुए चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े सबसे प्रभावशाली मंचों में से एक माने जाने वाले सुरक्षा परिषद में कई नए देशों की एंट्री हुई है, जबकि कुछ मौजूदा सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के साथ परिषद से बाहर हो जाएंगे। इस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत रही, जिसने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में जगह बनाई है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद किर्गिस्तान को दो वर्षीय कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद का सदस्य चुना गया। इसके साथ ही देश ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सुरक्षा परिषद में उसकी मौजूदगी को मध्य एशियाई क्षेत्र के बढ़ते महत्व और वैश्विक मंच पर उसकी सक्रिय भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

    इस चुनाव के परिणामों के बाद पाकिस्तान का कार्यकाल समाप्त होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों में शामिल है, लेकिन उसका कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत में समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही परिषद में उसकी जगह नए सदस्य देश अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। पाकिस्तान के अलावा पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया भी अपना कार्यकाल पूरा कर परिषद से बाहर हो जाएंगे।

    चुनाव प्रक्रिया के दौरान पांच सीटों के लिए सात देशों के बीच मुकाबला हुआ। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार देश को जीत के लिए महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के कम से कम दो-तिहाई मत प्राप्त करना आवश्यक होता है। मतदान के पहले दौर में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को पर्याप्त समर्थन मिल गया और वे सीधे निर्वाचित हो गए। शेष सीट के लिए कई दौर की वोटिंग हुई, जिसके बाद किर्गिस्तान ने फिलीपींस को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।

    नवनिर्वाचित देशों का कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा और 31 दिसंबर 2028 तक जारी रहेगा। इस दौरान ये देश वैश्विक सुरक्षा, संघर्ष समाधान, शांति स्थापना अभियानों और अंतरराष्ट्रीय संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। सुरक्षा परिषद में उनकी भूमिका न केवल क्षेत्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगी।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 सदस्य देशों से मिलकर बनी है। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन स्थायी सदस्य हैं, जिन्हें वीटो शक्ति प्राप्त है। इनके अलावा दस गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका चुनाव क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। हर वर्ष पांच सीटों पर नए सदस्यों का चयन होता है, जिससे परिषद में विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    सुरक्षा परिषद को संयुक्त राष्ट्र की सबसे प्रभावशाली संस्था माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बाध्यकारी निर्णय लेने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति देने की शक्ति रखती है। ऐसे में परिषद की सदस्यता किसी भी देश के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। किर्गिस्तान की ऐतिहासिक जीत और नए सदस्य देशों की एंट्री को इसी संदर्भ में वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

  • जब टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने आए भारत और अफगानिस्तान, किसका रहा दबदबा?

    जब टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने आए भारत और अफगानिस्तान, किसका रहा दबदबा?


    नई दिल्ली । भारत और अफगानिस्तान के बीच महामुकाबला: मुल्लांपुर टेस्ट में युवा जोश के साथ उतरेगी टीम इंडिया
    क्रिकेट प्रेमियों का इंतजार खत्म होने जा रहा है क्योंकि भारत और अफगानिस्तान की टीमें पूरे आठ साल बाद टेस्ट क्रिकेट के सबसे लंबे और पारंपरिक प्रारूप में एक बार फिर टकराने के लिए तैयार हैं। दोनों देशों के बीच यह एकमात्र टेस्ट मैच शनिवार से मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम इस मुकाबले में नए और युवा कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान क्रिकेट टीम इस बार मजबूत तैयारी के साथ इतिहास रचने की पुरजोर कोशिश करेगी।

    अगर दोनों टीमों के हेड टू हेड रिकॉर्ड और इतिहास पर नजर डालें, तो टेस्ट प्रारूप में भारत का पलड़ा पूरी तरह भारी रहा है। भारत और अफगानिस्तान के बीच अब तक टेस्ट इतिहास में केवल एक ही मुकाबला खेला गया है। यह ऐतिहासिक मैच वर्ष 2018 में बेंगलुरु के मैदान पर आयोजित हुआ था, जो अफगानिस्तान के क्रिकेट इतिहास का पहला टेस्ट मैच भी था। उस मुकाबले में भारतीय टीम ने खेल के हर विभाग में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को एक पारी और 262 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त दी थी। यह ऐतिहासिक जीत आज भी टेस्ट क्रिकेट में रनों और पारी के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी जीतों में शुमार की जाती है। हालांकि, तब से लेकर अब तक वक्त काफी बदल चुका है और अफगान टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बनाई है।

    इस बार मुल्लांपुर टेस्ट के लिए भारतीय चयनकर्ताओं ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए टीम में कई नए और युवा चेहरों को शामिल किया है, जिन पर चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित करने का दारोमदार होगा। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी चमक बिखेरने वाले देवदत्त पडिक्कल को टीम में मौका मिला है। इसके अलावा पहली बार भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बने मानव सुथार, तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ और फिरकी गेंदबाज हर्ष दुबे जैसी नई प्रतिभाओं पर भी सभी खेल प्रेमियों और जानकारों की खास निगाहें टिकी रहेंगी।

    कागज पर भारतीय टीम का बल्लेबाजी क्रम बेहद मजबूत, संतुलित और आक्रामक नजर आ रहा है। टीम के पास यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत और देवदत्त पडिक्कल जैसे मैच जिताऊ बल्लेबाज मौजूद हैं। पिछले कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए यह टेस्ट मैच अपनी लय और पुरानी फॉर्म में वापस लौटने का एक बेहतरीन सुनहरा अवसर माना जा रहा है। इसके साथ ही युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल और साई सुदर्शन भी भारतीय सरजमीं पर एक बड़ी और यादगार पारी खेलने के प्रबल दावेदार के रूप में उतरेंगे।

    भले ही आंकड़े और परिस्थितियां टीम इंडिया के पक्ष में दिख रही हों, लेकिन भारतीय टीम अफगानिस्तान को किसी भी कीमत पर हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान ने सीमित ओवरों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बेहद तेजी से प्रगति की है। उनके कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी, आक्रामक ओपनर रहमानुल्लाह गुरबाज, अनुभवी रहमत शाह और ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई जैसे धाकड़ खिलाड़ी किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने का माद्दा रखते हैं। हालांकि भारतीय टीम घरेलू परिस्थितियों में बेहद मजबूत है, लेकिन अफगानिस्तान के पास उलटफेर करने की पूरी क्षमता है, जिससे यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

  • वैभव के बल्ले ने जीता विदेशी स्टार का दिल, लिविंगस्टन ने की जमकर तारीफ

    वैभव के बल्ले ने जीता विदेशी स्टार का दिल, लिविंगस्टन ने की जमकर तारीफ


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक्स को हिला देने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi की तारीफ में अब विदेशी क्रिकेटर भी कसीदे पढ़ रहे हैं। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर Liam Livingstone ने वैभव की बल्लेबाजी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने पूरे क्रिकेट करियर में ऐसी बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी।

    लिविंगस्टन ने ‘स्टिक टू क्रिकेट’ पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि आईपीएल में यह उनका सातवां सीजन था और उन्होंने दुनिया के कई बेहतरीन बल्लेबाजों को करीब से देखा है, लेकिन वैभव की बल्लेबाजी कुछ अलग ही स्तर की थी। उन्होंने कहा, “मैंने इस तरह की बल्लेबाजी पहले कभी नहीं देखी। मैं कई महान खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं, लेकिन वैभव जैसा प्रभाव किसी ने नहीं छोड़ा।”

    एलिमिनेटर में मचाया था तूफान
    वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए एलिमिनेटर मुकाबले में Sunrisers Hyderabad के खिलाफ सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 5 चौके और 12 छक्के जड़कर विपक्षी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की थी। उनकी इस पारी ने कई रिकॉर्ड तोड़े और क्रिकेट विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। यही मैच लिविंगस्टन के लिए भी सबसे यादगार अनुभवों में से एक बन गया।

    ‘मिस हिट नाम की चीज नहीं थी’
    लिविंगस्टन ने वैभव की तकनीक और शॉट चयन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वैभव गेंद को इतनी सफाई से मारते हैं कि उनके शॉट्स में मिस हिट लगभग देखने को नहीं मिलती।

    उन्होंने बताया, “शुरुआत में हमने उन्हें बाउंसर पर आउट किया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने जिस तरह अपने खेल में सुधार किया, वह अविश्वसनीय था। जब हम बाउंसर डालते तो वह गेंद को थर्ड मैन की दिशा में भेज देते। फुल लेंथ गेंद डालते तो उसे भी बाउंड्री के पार पहुंचा देते। हमें समझ ही नहीं आता था कि आखिर उन्हें गेंद कहां फेंकी जाए।”

    आईपीएल 2026 में बनाया नया इतिहास
    वैभव के लिए आईपीएल 2026 सपनों जैसा रहा। उन्होंने 16 मुकाबलों में 776 रन बनाए और 237 के शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। इस प्रदर्शन के दम पर वह ऑरेंज कैप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। इतना ही नहीं, उन्होंने टी20 दिग्गज Chris Gayle का बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। पूरे सीजन में 72 छक्के लगाकर वैभव आईपीएल के एक सीजन में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।

    महज 15 साल की उम्र में जिस तरह वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी है, उसे देखते हुए क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रहे हैं।

  • बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ा तनाव, उस्मान हादी की हत्या पर भाई का सनसनीखेज आरोप, पीएम तारिक रहमान को भी दी चेतावनी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश के चर्चित युवा राजनीतिक नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उमर हादी ने दावा किया है कि उनके भाई की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कई प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक चेहरों की भूमिका रही है।

    शरीफ उस्मान हादी वर्ष 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन हासिल किया था और देश की राजनीति को नई दिशा दी थी। हादी को सरकार विरोधी राजनीति के एक मुखर युवा नेता के रूप में देखा जाता था। उन्होंने बाद में इंकलाब मंच नामक राजनीतिक संगठन का गठन किया और संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सक्रिय प्रचार अभियान चला रहे थे।

    दिसंबर 2025 में चुनाव प्रचार के दौरान उन पर घातक हमला हुआ था। ढाका में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल हादी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन छह दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने उस समय पूरे बांग्लादेश में राजनीतिक सुरक्षा और चुनावी हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    अब इस मामले में उनके बड़े भाई उमर हादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। ब्रिटेन में बांग्लादेश के राजनयिक के रूप में कार्यरत उमर हादी ने फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेशों में कहा कि उनके भाई की हत्या एक सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात-ए-इस्लामी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक व्यक्ति ने इस हमले की योजना तैयार की थी।

    उमर हादी ने यह भी दावा किया कि पूर्व अंतरिम सरकार के कुछ प्रभावशाली सलाहकारों तथा मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े कुछ सांसद और मंत्री भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल थे। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत साक्ष्य साझा नहीं किया है, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    अपने संदेश में उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और दोषियों को कानून के दायरे में लाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि इस हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।

    उमर हादी ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अपराधियों को संरक्षण मिलता रहा तो भविष्य में शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व भी ऐसे खतरों से सुरक्षित नहीं रह पाएगा। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हत्या की निष्पक्ष जांच और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

    फिलहाल संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही इस संवेदनशील प्रकरण से जुड़े सवालों का समाधान कर सकती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।