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  • कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों छोटे छोटे घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। देवास के सोनकच्छ में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां मंदिर में पूजा करने पहुंचे भाजपा विधायक राजेश सोनकर को पुजारी ने उनका पुराना वादा याद दिला दिया। पूजा-अर्चना के बाद जब विधायक मंदिर से बाहर निकले तो पुजारी ने उनसे सड़क निर्माण को लेकर सवाल कर दिया। पुजारी ने कहा कि पिछली बार जब विधायक यहां आए थे तब उन्होंने अगली बार डामर रोड से आने की बात कही थी लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इस दौरान विधायक पुजारी की बात सुनते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।

    दूसरी ओर ग्वालियर जिले के डबरा में भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह द्वारा पूर्व मंत्री इमरती देवी को मंच पर बुलाए जाने के बावजूद उनके मंच पर नहीं जाने का मामला सामने आया। कार्यक्रम के दौरान सांसद ने उन्हें मंच पर आने के लिए बुलाया लेकिन इमरती देवी कार्यकर्ताओं के बीच नीचे ही बैठी रहीं। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। बाद में जब उनसे मंच पर नहीं जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वहां तो मर्डर करने वाले भी बैठे हैं और ऐसे लोगों के साथ जाने का क्या मतलब है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी से नाराज नहीं हैं। उन्होंने खुद को भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बैठना पसंद है।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर छतरपुर में भाजपा विधायक ललिता यादव का भजन भी चर्चा में रहा। 17 सितंबर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया। इसी दौरान ललिता यादव ने मोदी के नाम पर भजन गाया। उन्होंने मोदी जन्मे आधी रात सुनो री सखियां भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मौजूद अन्य महिला नेताओं ने भी उनका साथ दिया। विधायक के इस भजन का वीडियो सामने आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी।

    मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक खबर भी चर्चा में है। एक ही विभाग के अलग अलग विंग में पदस्थ एक ही बैच के दो आईएएस अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों को लेकर मतभेद की बात सामने आई है। इनमें एक महिला अधिकारी हैं। जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी अपनी तय की गई टेंडर शर्तों के अनुसार काम कराने के पक्ष में हैं जबकि दूसरे विंग में पदस्थ अधिकारी ने एक टेंडर की शर्तों में बदलाव कर दिया। बताया गया है कि नए पदस्थ अधिकारी के सामने टेंडर की फाइल आने के बाद उन्होंने शर्तों में बदलाव किया।

    इसके बाद महिला अधिकारी ने पत्र लिखकर टेंडर की शर्तों में बदलाव नहीं करने की बात कही। अब दोनों अधिकारियों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यही बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार किसके पास है। मामला बढ़ने के बाद यह प्रकरण वल्लभ भवन तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस सामग्री में नहीं है।

    इस तरह देवास में सड़क के वादे को लेकर पुजारी का सवाल हो या डबरा में मंच पर नहीं जाने का घटनाक्रम और छतरपुर में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा विधायक का भजन इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अलग अलग वजहों से चर्चा पैदा की है।

  • सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग

    सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग


    नई दिल्ली। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच आभूषण खरीदने वालों की लागत में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए प्रति आर्टिकल कर दी है। यानी प्रति आभूषण 30 रुपए की बढ़ोतरी हुई है और बेस शुल्क करीब 66.7% बढ़ गया है। नई दर 14 सितंबर से लागू हो चुकी है। हालांकि, चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपए प्रति आर्टिकल ही रखी गई है।

    खरीदार के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि 75 रुपए हॉलमार्किंग शुल्क ही अंतिम राशि नहीं है। BIS के नियमों के अनुसार इस फीस पर लागू टैक्स अलग से देना होता है। BIS की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18% GST का उल्लेख है। इस हिसाब से 75 रुपए पर 18% GST जोड़ने के बाद प्रति आभूषण प्रभावी शुल्क 88.50 रुपए हो जाता है।

    वजन नहीं, आभूषण की संख्या से तय होती है फीस

    BIS के अनुसार हॉलमार्किंग शुल्क आभूषण के वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लिया जाता है। यानी आभूषण एक ग्राम का हो या उससे अधिक वजन का, शुल्क का आधार उसका वजन नहीं बल्कि एक आर्टिकल होना है।

    इसका सीधा असर हल्के आभूषण खरीदने वालों पर पड़ सकता है। कम वजन के आभूषणों में हॉलमार्किंग शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से तुलनात्मक रूप से ज्यादा बैठता है। त्योहारी सीजन में अंगूठी, नोज पिन, चेन या दूसरे हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह अतिरिक्त लागत ज्यादा महसूस हो सकती है।

    ज्वेलर्स बोले- बढ़ा हुआ खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंचता है

    कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल का कहना है कि हॉलमार्किंग चार्ज हो या किसी अन्य तरह का शुल्क और टैक्स, उसका भुगतान अंततः ग्राहक से ही लिया जाता है और संबंधित सरकारी विभाग में जमा कराया जाता है।

    उनके मुताबिक, एक तरफ पहले से कई तरह के टैक्स और शुल्क लागू हैं, वहीं अब हॉलमार्किंग की लागत भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कारोबार की लागत में होने वाली हर बढ़ोतरी किसी न किसी रूप में ग्राहक की जेब तक पहुंचती है।

    2021 में 256 जिलों से शुरू हुई थी अनिवार्य हॉलमार्किंग

    सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था जून 2021 में 256 जिलों से शुरू की गई थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया।

    मार्च 2026 में छठे चरण के तहत सात और जिले इसमें शामिल किए गए। इसके बाद अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे वाले जिलों की संख्या बढ़कर 380 हो गई। यानी बीते वर्षों में हॉलमार्किंग व्यवस्था का विस्तार हुआ है और अब प्रति आर्टिकल लगने वाली फीस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है।

    इस बदलाव के बाद सोने के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को आभूषण की कीमत के अलावा हॉलमार्किंग शुल्क और उस पर लागू GST की लागत भी ध्यान में रखनी होगी।

  • सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज

    सब्सिडी के लिए मांगी रिश्वत की शिकायत पहुंची केंद्रीय मंत्री तक सीहोर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी पर गिरी गाज


    सीहोर । सीहोर जिले में सब्सिडी की राशि जारी करने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी पर कार्रवाई की गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के विपणन अधिकारी अनुराग को शिकायत सामने आने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला उस समय सामने आया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर जिले के दौरे पर निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान वेयरहाउस संचालकों ने अधिकारी पर सब्सिडी की राशि जारी करने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया था।

    बताया गया है कि शिकायत में दो वेयरहाउस संचालकों से रिश्वत मांगने की बात कही गई थी। आरोप है कि शिवाय वेयरहाउस से सब्सिडी की रकम जारी करने के बदले एक लाख रुपए की मांग की गई जबकि श्रीकृष्णा वेयरहाउस संचालक से 60 हजार रुपए मांगे गए। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाई थी। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    शिकायत सामने आने के बाद कृषि मंत्रालय के स्तर पर अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सब्सिडी जारी करने के लिए वास्तव में किसी तरह की रकम की मांग की गई थी या नहीं और इस पूरे मामले में अधिकारी की भूमिका क्या रही।

    मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सब्सिडी की राशि सरकारी प्रक्रिया के तहत पात्र लाभार्थियों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में राशि जारी करने के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने की शिकायत ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर तय होगी।

    सीहोर में निरीक्षण के दौरान सामने आई इस शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है। अब जांच में शिकायत से जुड़े दस्तावेजों रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके आधार पर यह स्पष्ट होगा कि सब्सिडी जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।

    इस मामले में अभी विभागीय जांच के परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसलिए रिश्वत मांगने के आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारी अनुराग के निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। सीहोर में सामने आए इस मामले ने सरकारी सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर भी ध्यान खींचा है।

  • चेहरे की चमक बढ़ाने से लेकर दाग धब्बों तक एलोवेरा और हल्दी का ये तरीका आ सकता है काम स्किन केयर विथ एलोवेरा हल्दी

    चेहरे की चमक बढ़ाने से लेकर दाग धब्बों तक एलोवेरा और हल्दी का ये तरीका आ सकता है काम स्किन केयर विथ एलोवेरा हल्दी


    नई दिल्ली। आज के समय में त्वचा की देखभाल के लिए लोग कई तरह के महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों को भी पारंपरिक तौर पर स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता रहा है। एलोवेरा और हल्दी इन्हीं में शामिल हैं। एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी देने के लिए जाना जाता है जबकि हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक घरेलू देखभाल में किया जाता रहा है। दोनों को सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा को साफ और फ्रेश महसूस कराने में मदद मिल सकती है।

    एलोवेरा में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और इसका जेल त्वचा पर लगाने से त्वचा को हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर गर्मी या धूप के संपर्क के बाद एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक देने वाला एहसास दे सकता है। वहीं हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है। इसमें करक्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है जिसे इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है।

    घर पर एलोवेरा और हल्दी का फेस पैक बनाने के लिए ताजा और साफ एलोवेरा जेल लिया जा सकता है। इसमें बहुत थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाई जा सकती है। दोनों को अच्छी तरह मिलाकर चेहरे पर पतली परत में लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय तक रखने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। हल्दी की मात्रा ज्यादा रखने से चेहरे पर पीला रंग रह सकता है इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना बेहतर है।

    अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू नुस्खे को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। इसके लिए मिश्रण को त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर लालिमा जलन खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खुले घाव या पहले से irritated त्वचा पर भी ऐसे मिश्रण लगाने से बचना बेहतर है।

    यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि एलोवेरा और हल्दी किसी गंभीर त्वचा समस्या का इलाज नहीं हैं। मुंहासे दाग धब्बे एलर्जी या लगातार होने वाली त्वचा संबंधी परेशानी के लिए त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा उचित रहता है। साथ ही दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    एलोवेरा और हल्दी का इस्तेमाल त्वचा को प्राकृतिक तरीके से संवारने वाली सामान्य घरेलू दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का असर भी अलग हो सकता है। नियमित सफाई पर्याप्त मॉइस्चराइजिंग संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के साथ त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

  • दिवाली-छठ की भीड़ से पहले रेलवे की तैयारी तेज भोपाल समेत MP के 30 स्टेशनों से चलेंगी कई पूजा स्पेशल ट्रेनें

    दिवाली-छठ की भीड़ से पहले रेलवे की तैयारी तेज भोपाल समेत MP के 30 स्टेशनों से चलेंगी कई पूजा स्पेशल ट्रेनें

    भोपाल। दिवाली और छठ पूजा के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने मध्यप्रदेश से कई स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी की है। त्योहारी सीजन में नियमित ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का संचालन किया जाएगा। इन स्पेशल ट्रेनों के जरिए मध्यप्रदेश के करीब 30 स्टेशन राजस्थान उत्तरप्रदेश बिहार झारखंड महाराष्ट्र तेलंगाना आंध्रप्रदेश तमिलनाडु हरियाणा और दिल्ली से जुड़ेंगे। इससे यात्रियों को त्योहारों के दौरान अपने घर जाने और वापस लौटने के लिए अतिरिक्त ट्रेन विकल्प मिल सकेंगे।

    भोपाल मंडल के यात्रियों के लिए भी इन सेवाओं में कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। सुल्तानपुर और वाराणसी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें बीना रानी कमलापति और इटारसी होकर चलेंगी। दोनों दिशाओं में इनके चार चार फेरे निर्धारित किए गए हैं। इससे भोपाल मंडल के इन तीन प्रमुख स्टेशनों से मुंबई जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। सुल्तानपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन 21 अक्टूबर से 11 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार चलेगी जबकि वापसी सेवा 22 अक्टूबर से 12 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार रहेगी। वाराणसी से मुंबई जाने वाली ट्रेन 22 अक्टूबर से 12 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार और मुंबई से वाराणसी लौटने वाली ट्रेन 23 अक्टूबर से 13 नवंबर तक प्रत्येक शुक्रवार चलेगी।

    इसके अलावा अजमेर से रांची के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी। ट्रेन के दोनों दिशाओं में नौ नौ फेरे होंगे। यह सेवा अक्टूबर से नवंबर के बीच चलेगी और मध्यप्रदेश में रुठियाई गुना सागर दमोह कटनी ब्यौहारी और सिंगरौली जैसे स्टेशनों के यात्रियों को सुविधा देगी। इसी तरह जोधपुर और चेन्नई बीच चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन के भी दोनों दिशाओं में नौ नौ फेरे होंगे। यह ट्रेन गुना बीना भोपाल और इटारसी जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी।

    पितृपक्ष के दौरान रानी कमलापति से गया के बीच भी विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन के दोनों दिशाओं में तीन तीन फेरे होंगे। रानी कमलापति से गया के लिए सेवा 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को रहेगी जबकि गया से वापसी 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को होगी। ट्रेन नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर कटनी मैहर सतना और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर ठहरेगी।

    त्योहारी भीड़ को देखते हुए पुणे से गोरखपुर और मुंबई सीएसएमटी से गोरखपुर के बीच भी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। पुणे गोरखपुर सेवा मध्यप्रदेश में खंडवा इटारसी भोपाल और बीना से होकर जाएगी। वहीं मुंबई सीएसएमटी गोरखपुर सेवा खंडवा इटारसी भोपाल और बीना से होकर चलेगी। मुंबई गोरखपुर स्पेशल के 43 फेरे निर्धारित हैं जबकि पुणे और मुंबई से गोरखपुर जाने वाली दोनों सेवाओं को मिलाकर कुल 87 अतिरिक्त फेरे होने की जानकारी दी गई है।

    विंध्य और मालवा क्षेत्र के यात्रियों के लिए भी अतिरिक्त सेवाएं रखी गई हैं। रानी कमलापति रीवा पूजा स्पेशल के दोनों दिशाओं में चार चार फेरे होंगे। वहीं रीवा से डॉ. अंबेडकर नगर के बीच चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन के दोनों दिशाओं में छह छह फेरे होंगे। यह ट्रेन सतना मैहर कटनी जबलपुर इटारसी रानी कमलापति संत हिरदाराम नगर सीहोर शुजालपुर मक्सी देवास और इंदौर जैसे स्टेशनों पर ठहरेगी। इससे रीवा और आसपास के यात्रियों को भोपाल जबलपुर और इंदौर मालवा क्षेत्र के लिए अतिरिक्त कनेक्टिविटी मिलेगी।

    इन 10 स्पेशल ट्रेन सेवाओं के घोषित ठहरावों को मिलाकर दोहराव हटाने पर मध्यप्रदेश के 30 अलग अलग स्टेशन इस त्योहारी रेल नेटवर्क में शामिल होंगे। इनमें भोपाल रानी कमलापति बीना इटारसी नर्मदापुरम खंडवा गुना सागर दमोह विदिशा कटनी मैहर सतना जबलपुर इंदौर देवास और डॉ. अंबेडकर नगर सहित कई स्टेशन शामिल हैं। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को नियमित सेवाओं के साथ यात्रा के और विकल्प मिल सकेंगे।

  • भोपाल में शत्रु संपत्ति विवाद ने फिर पकड़ा जोर कोहेफिजा के खसरा नंबर 42 की जांच से भू-स्वामियों की बढ़ी बेचैनी

    भोपाल में शत्रु संपत्ति विवाद ने फिर पकड़ा जोर कोहेफिजा के खसरा नंबर 42 की जांच से भू-स्वामियों की बढ़ी बेचैनी

    भोपाल। भोपाल में शत्रु संपत्ति से जुड़ा वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। नवाब भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान और उनकी दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जुड़ी संपत्तियों को लेकर चल रही जांच अब वर्तमान भू-स्वामियों और रहवासियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। कोहेफिजा क्षेत्र में न्यायालय सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संत हिरदाराम नगर यानी बैरागढ़ की ओर से कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं। इससे क्षेत्र में अपनी जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    सामने आए एक नोटिस में ग्राम कोहेफिजा के खसरा नंबर 42/10 में दर्ज 0.0320 हेक्टेयर भूमि से संबंधित व्यक्ति को 24 सितंबर को उपस्थित होकर अपने पक्ष में दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। नोटिस में अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत का उल्लेख करते हुए जांच की जानकारी दी गई है। इसमें रियाज मंजिल को भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के अनुसार शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने की बात कही गई है। साथ ही संबंधित खसरे के कॉलम 12 में शत्रु संपत्ति जांच की प्रविष्टि होने और Enemy Property Act 1968 की धारा 12 का हवाला भी दिया गया है।

    मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रियाज मंजिल का संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह कोठी नवाब हमीदुल्लाह खान ने आफताब जहां बेगम को दी थी। अब इस संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और आसपास की जमीनों की जांच ने पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच का दायरा केवल रियाज मंजिल तक सीमित रहेगा या नवाब परिवार से जुड़ी दूसरी संपत्तियां भी इसकी जद में आएंगी।

    जून 2026 में भोपाल कलेक्टर की ओर से शत्रु संपत्तियों की जांच को लेकर बैरागढ़ सहित अलग-अलग एसडीएम को निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस जांच में रियाज मंजिल के साथ मेपल हाउस नानी की हवेली और नवाब परिवार से संबंधित अन्य संपत्तियों को भी शामिल किए जाने की बात कही गई थी। ऐसे में कोहेफिजा के मौजूदा नोटिस को उसी व्यापक जांच प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।

    आफताब जहां बेगम से जुड़ी जमीनों को लेकर भी पुराने रिकॉर्ड और दावों की चर्चा होती रही है। वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में बेहटा और बोरबन क्षेत्र में उनके नाम बड़ी मात्रा में जमीन दर्ज होने का दावा किया गया है। इन जमीनों में से कुछ को बाद में पावर ऑफ अटॉर्नी और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर हिबानाम के जरिए बेचे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। बेहटा की 30.55 एकड़ जमीन की वर्ष 1994 में हुई बिक्री को लेकर आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    हालांकि मौजूदा भू-स्वामियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि उनकी जमीन वास्तव में 29 अप्रैल 2024 के अभिरक्षक आदेश या प्रमाण पत्र में शामिल है या नहीं। नोटिस में रियाज मंजिल को शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने और संबंधित खसरे में शत्रु संपत्ति जांच की प्रविष्टि दोनों का उल्लेख है। ऐसे में अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल कोहेफिजा सहित बैरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में पुराने संपत्ति रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ने से इस मामले ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।

  • घर में मिला महिला इंस्पेक्टर का खून से लथपथ शव पास पड़ा था हथौड़ा प्रेमी पर हत्या का शक फिर उठाया खौफनाक कदम

    घर में मिला महिला इंस्पेक्टर का खून से लथपथ शव पास पड़ा था हथौड़ा प्रेमी पर हत्या का शक फिर उठाया खौफनाक कदम


    भोपाल। भोपाल में महिला RTO इंस्पेक्टर की हत्या और उसके बाद उनके प्रेमी की आत्महत्या का मामला सामने आने से सनसनी फैल गई है। खजूरी सड़क थाना क्षेत्र की लेखपाल कॉलोनी में सोमवार सुबह RTO इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले का शव उनके घर के अंदर मिला। मीनाक्षी की उम्र करीब 45 वर्ष बताई गई है। उनके सिर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं और शव के पास ही खून से सना हथौड़ा पड़ा हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मीनाक्षी भंवरी जोड़ के पास लेखपाल कॉलोनी में रहती थीं। उनके साथ एक रूममेट भी रहती थी। सोमवार सुबह करीब 7 बजे रूममेट ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस के पहुंचने पर घर के अंदर मीनाक्षी का शव मिला। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मामले को हत्या के एंगल से जांचना शुरू किया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में मीनाक्षी के प्रेमी पवन कुमार द्विवेदी का नाम सामने आया है। बताया गया है कि पवन मूल रूप से सीधी जिले का रहने वाला था और करीब दो दिन पहले ही भोपाल आया था। वह मीनाक्षी के साथ उनके घर में ही रह रहा था। पुलिस को आशंका है कि रविवार देर रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा। इसके बाद पवन ने कथित तौर पर हथौड़े से मीनाक्षी के सिर पर वार किए जिससे उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पवन ने भी कथित तौर पर घर से करीब 20 मीटर दूर स्थित एक पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को उसकी जेब से बैंक पासबुक भी मिली है। पवन पहले इंदौर में कोचिंग क्लासेस चला चुका था और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। पुलिस अब उसके भोपाल आने की वजह और मीनाक्षी के साथ उसके संबंधों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है।

    प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पवन मीनाक्षी से शादी करना चाहता था जबकि मीनाक्षी शादी के लिए तैयार नहीं थीं। पुलिस को आशंका है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ होगा। हालांकि पुलिस ने अभी इस वजह को अंतिम कारण नहीं माना है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

    पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। फोरेंसिक साइंस लैब यानी FSL की टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। अब पुलिस मीनाक्षी और पवन के बीच हुई बातचीत उनके पिछले संपर्क और घटना से पहले की गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी है। फिलहाल मामले में हत्या और आत्महत्या की घटनाओं को जोड़कर जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की परिस्थितियों और घटनाक्रम को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • 23 सितंबर को अस्त होंगे शुक्र, 37 दिन बाद उदय, 4 राशियों के लिए अक्टूबर तक धन-लाभ के योग

    23 सितंबर को अस्त होंगे शुक्र, 37 दिन बाद उदय, 4 राशियों के लिए अक्टूबर तक धन-लाभ के योग


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को धन-संपत्ति, भौतिक सुख-सुविधा, प्रेम, सौंदर्य और आकर्षण से जुड़ा ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार आने वाले दिनों में शुक्र की स्थिति में दो बड़े बदलाव होने वाले हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार 23 सितंबर को शुक्र अस्त हो जाएंगे और करीब 37 दिनों तक इसी अवस्था में रहेंगे। इसके बाद 30 अक्टूबर को शुक्र उदित होंगे। खास बात यह है कि इसी अवधि में 3 अक्टूबर को शुक्र वक्री भी हो जाएंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शुक्र की इन बदलती स्थितियों का सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है। इनमें वृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए आर्थिक और करियर से जुड़े मामलों में लाभ के योग बताए गए हैं।

    वृषभ : अटका पैसा वापस मिलने के योग

    वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ही हैं। ऐसे में शुक्र की स्थिति में होने वाला यह बदलाव ज्योतिषीय दृष्टि से इस राशि के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मान्यता के अनुसार इस दौरान भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो सकती है और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रह सकती है।

    लंबे समय से अटका या फंसा हुआ पैसा वापस मिलने के योग बन सकते हैं। नया कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को लाभ मिल सकता है। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने की इच्छा भी पूरी होने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना मिलने और आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना जताई गई है।

    मिथुन : आय के नए रास्ते खुल सकते हैं

    मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और ज्योतिष में बुध-शुक्र के बीच मित्रवत संबंध माने जाते हैं। इसी आधार पर शुक्र की यह स्थिति मिथुन राशि के लिए लाभकारी बताई जा रही है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में आय के नए और स्थायी स्रोत बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या वेतन वृद्धि से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है। कारोबार में किए गए पुराने निवेश से उम्मीद से बेहतर रिटर्न मिलने के योग हैं। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है, जिसका फायदा व्यावसायिक सौदों में मिलने की संभावना है।

    तुला : प्रतिष्ठा के साथ आर्थिक लाभ

    तुला भी शुक्र की स्वराशि है। इसलिए शुक्र की स्थिति में बदलाव का असर इस राशि के जातकों के व्यक्तित्व और आर्थिक मामलों पर पड़ने की बात कही गई है।

    मान्यता के अनुसार इस दौरान मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। मीडिया, फैशन, आर्ट्स, डिजाइनिंग या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को पहचान मिलने के साथ आर्थिक लाभ हो सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद सुलझने पर आर्थिक राहत मिलने के भी योग बताए गए हैं।

    मकर : नौकरी और कारोबार में मिल सकता है फायदा

    मकर राशि के स्वामी शनि हैं और ज्योतिषीय मान्यता में शनि और शुक्र को मित्र ग्रह माना जाता है। इसी वजह से शुक्र का यह परिवर्तन मकर राशि के करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

    नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को किसी बड़ी कंपनी से अच्छा ऑफर मिल सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़ी यात्राएं लाभदायक हो सकती हैं। परिवार में सुख-शांति का माहौल रहने के साथ संचित धन में बढ़ोतरी के भी योग बताए गए हैं।

    शुक्र को मजबूत करने के लिए ज्योतिषीय उपाय

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शुक्र से जुड़े शुभ प्रभावों के लिए शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। उन्हें सफेद मिष्ठान, खीर या मखाने का भोग लगाया जा सकता है।

    शुक्रवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को चावल, दूध, चीनी, मिश्री या सफेद वस्त्र का दान भी शुभ माना गया है। इसके अलावा रोजाना, विशेषकर शुक्रवार को स्फटिक की माला से 108 बार शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति के प्रभाव को व्यक्ति की जन्मकुंडली के आधार पर अलग-अलग माना जाता है, इसलिए यहां बताए गए परिणाम सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • केतन हत्याकांड: खाटू श्याम में सिया-चेतन ने की थी गुपचुप शादी? फूलों की माला वाली तस्वीर से बढ़ा शक

    केतन हत्याकांड: खाटू श्याम में सिया-चेतन ने की थी गुपचुप शादी? फूलों की माला वाली तस्वीर से बढ़ा शक


    पुणे। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के रिश्ते को लेकर नए सवाल सामने आ रहे हैं। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों ने दिसंबर 2025 में राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में परिवार से छिपकर शादी की थी। जांच के दौरान पुलिस को दोनों की एक तस्वीर मिली है, जिसमें सिया और चेतन फूलों की माला पहने नजर आ रहे हैं। हालांकि, मंदिर में उनकी शादी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या CCTV फुटेज पुलिस को अब तक नहीं मिला है।

    मोबाइल बातचीत से मिला राजस्थान कनेक्शन

    पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के मोबाइल फोन की बातचीत का विश्लेषण करने के दौरान कथित शादी का सुराग मिला। पुलिस अधिकारियों ने 7 जुलाई को बताया था कि दोनों के बीच हुई बातचीत से संकेत मिले हैं कि उन्होंने परिवार की जानकारी के बिना शादी की हो सकती है।

    इस सुराग की पुष्टि के लिए पुलिस टीम जुलाई में राजस्थान पहुंची। जांचकर्ताओं ने खाटू श्याम मंदिर में दोनों की कथित शादी से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज खंगाले, लेकिन ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या वीडियो नहीं मिला, जिससे शादी की पुष्टि हो सके।

    हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को सिया और चेतन की एक तस्वीर जरूर मिली। इसमें दोनों के गले में फूलों की मालाएं दिखाई दे रही हैं। पुलिस ने इस तस्वीर को जांच में महत्वपूर्ण माना है। खबरों के मुताबिक, इसे चार्जशीट के साथ अदालत के समक्ष भी पेश किया गया है। तस्वीर से दोनों की कथित शादी का शक जरूर गहरा हुआ है, लेकिन अकेले तस्वीर के आधार पर शादी की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।

    अक्टूबर 2025 से करीब आए, दिसंबर में राजस्थान गए

    पुलिस जांच के मुताबिक, सिया और चेतन अक्टूबर 2025 से एक-दूसरे के करीब आए थे। बताया गया है कि दोनों के परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे। दिसंबर 2025 में दोनों कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान गए थे।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों ने पहले पुणे से फ्लाइट के जरिए राजस्थान जाने की योजना बनाई थी, लेकिन फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्होंने ट्रेन से सफर किया। राजस्थान से वापसी भी ट्रेन से ही हुई थी।

    जांच एजेंसियों को इस यात्रा से जुड़े कुछ सबूत भी मिले हैं। इसी अवधि में सिया के परिवार की ओर से उसके लिए शादी की तलाश चल रही थी। बाद में उसका रिश्ता केतन अग्रवाल के साथ तय हुआ।

    19 फरवरी को हुई थी सगाई

    सिया और केतन अग्रवाल की सगाई 19 फरवरी 2026 को हुई थी। दोनों की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर में प्रस्तावित थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सिया और चेतन के बीच इस दौरान संपर्क बना हुआ था।

    जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी रिश्ते के चलते सिया और चेतन ने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची। पुलिस अब दोनों के रिश्ते, राजस्थान यात्रा और खाटू श्याम मंदिर से जुड़ी तस्वीर समेत अन्य सबूतों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है।

    माला वाली तस्वीर ने बढ़ाया सवाल

    फिलहाल जांच में सबसे अहम सवाल यही है कि सिया और चेतन की फूलों की माला पहने तस्वीर किस मौके की है। क्या दोनों ने वास्तव में खाटू श्याम मंदिर में शादी की थी या तस्वीर किसी दूसरे अवसर की है, इसका स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है।

    मंदिर से शादी का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड और CCTV फुटेज नहीं मिलने के कारण पुलिस के पास फिलहाल इस कथित शादी की पुष्टि करने वाला निर्णायक दस्तावेज नहीं है। ऐसे में तस्वीर और मोबाइल बातचीत जांच के अहम हिस्से जरूर हैं, लेकिन दोनों की शादी हुई थी या नहीं, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।

  • डोल ग्यारस के दिन जरूर करें भगवान विष्णु की पूजा जानिए शुभ मान्यता और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं

    डोल ग्यारस के दिन जरूर करें भगवान विष्णु की पूजा जानिए शुभ मान्यता और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं


    नई दिल्ली। डोल ग्यारस हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इसे जलझूलनी एकादशी और परिवर्तिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में इस दिन भगवान की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और मंदिरों से डोल यात्रा निकाली जाती है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें शामिल होकर भगवान के दर्शन करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    डोल ग्यारस का पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। कई स्थानों पर भगवान की प्रतिमा को सुंदर तरीके से सजाकर डोल में विराजमान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु भगवान को जलाशय या नदी के किनारे ले जाते हैं। वहां पूजा अर्चना और जल से संबंधित धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इसी वजह से इस पर्व को जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है।

    डोल ग्यारस के दिन व्रत रखने की परंपरा भी है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और धार्मिक मान्यता के अनुसार उपवास रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जला व्रत करते हैं जबकि कई श्रद्धालु फलाहार करते हैं। सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजा में भगवान को पीले फूल तुलसी की पत्तियां फल और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं। विष्णु मंत्र का जाप करने के साथ भगवान की आरती की जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है।

    इस पर्व से जुड़ी डोल यात्रा सबसे आकर्षक परंपराओं में से एक है। कई शहरों और गांवों में मंदिरों से भगवान की सवारी निकाली जाती है। डोल को फूलों और रंग बिरंगी सजावट से सजाया जाता है। श्रद्धालु भजन और कीर्तन करते हुए यात्रा में शामिल होते हैं। कई जगहों पर ढोल नगाड़ों के साथ भगवान की सवारी निकाली जाती है। मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और पूरे वातावरण में धार्मिक उत्साह नजर आता है।

    डोल ग्यारस को लेकर एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान विष्णु के शयनकाल में परिवर्तन होता है। इसी कारण यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन दान पुण्य भी करते हैं। जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री देना शुभ माना जाता है। कई लोग गौ सेवा और धार्मिक स्थलों पर सेवा कार्य भी करते हैं।

    डोल ग्यारस केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। डोल यात्रा में अलग अलग वर्गों के लोग एक साथ शामिल होते हैं। मंदिरों में होने वाले आयोजन लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। यही वजह है कि आज भी डोल ग्यारस का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा और डोल यात्रा के साथ यह पर्व लोगों के जीवन में सुख शांति और सकारात्मकता की कामना का संदेश देता है।