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  • Russia: पुतिन की पार्टी फिर बहुमत की ओर…! ससदीय चुनाव में मिले 57.54% से अधिक वोट

    Russia: पुतिन की पार्टी फिर बहुमत की ओर…! ससदीय चुनाव में मिले 57.54% से अधिक वोट


    मास्को।
    रूस (Russia) में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) की पार्टी को एक बार फिर से स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार हैं। पुतिन लंबे समय से रूस की सत्ता पर काबिज हैं। इस वर्ष कराए गए चुनाव में भी पार्टी के समर्थकों ने बंपर वोटिंग (Massive Voter turnout) की है। केंद्रीय चुनाव आयोग (Central Election Commission) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक पुतिन की पार्टी- यूनाइटेड रूस (Putin’s Party – United Russia) को 57 प्रतिशत से अधिक वोट मिले हैं। अंतिम आंकड़े आने पर वोट प्रतिशत में बदलाव संभव है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नीतियों का विरोध लगभग नदारद रहा। क्रेमलिन का वर्चस्व मजबूत होने की उम्मीद है। मतदान में धांधली और इलेक्ट्रॉनिक मतदान में समस्याओं की रिपोर्ट्स भी सामने आईं।


    चुनाव नतीजों में क्या खास, किस दल का कैसा प्रदर्शन?

    रूस के केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने रविवार देर रात (रूसी समय) जारी एक बयान में कहा, चुनाव के शुरुआती परिणाम आ गए हैं। सत्तारूढ़ दल- यूनाइटेड रूस को 57.54% से अधिक वोट मिले हैं। इन प्रारंभिक नतीजों के आधार पर माना जा रहा है कि पुतिन की सत्ता पर पकड़ और मजबूत होगी। खास बात ये भी है कि यूक्रेन के साथ वर्ष 2022 में शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद पहली बार आम चुनाव कराए गए हैं।

    रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान शुक्रवार को 11 करोड़ 10 लाख पात्र मतदाताओं के लिए शुरू हुआ था। इसमें यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के निवासी भी शामिल थे, जिन्हें मॉस्को ने युद्ध के बाद अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था, पर अभी भी उन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है। क्रीमिया के निवासी भी मतदान में शामिल थे, जिसे रूस ने 2014 में अवैध रूप से अपने साथ मिलाया था। कीव और यूरोपीय संघ ने रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में हुए मतदान को अवैध बताया। उन्होंने विदेशी सरकारों से परिणामों को मान्यता न देने का आग्रह किया। रूस और यूक्रेन के रूसी-नियंत्रित क्षेत्रों में मतदान समाप्त होने के बाद भी, पश्चिमी समय क्षेत्रों में दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में मतदान जारी रहा। क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने और अपनी कार्रवाई को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।


    क्रेमलिन की मुख्य पार्टी को भारी बहुमत

    प्रारंभिक परिणामों से पता चला है कि चार अन्य पार्टियां जो लगभग हमेशा क्रेमलिन के पक्ष में मतदान करती हैं, संसद के निचले सदन- स्टेट ड्यूमा में उनकी वापसी तय है। केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार लगभग 58% मतदान केंद्रों की गिनती हो चुकी है। पार्टी सूचियों के आधार पर आवंटित 225 सांसदों में से यूनाइटेड रूस को लगभग 58% वोट मिले हैं।

    225 अन्य सांसदों का चुनाव एकल-सीट चुनावों में होगा, यूनाइटेड रूस उनमें भी अधिकांश सीटें जीतने की स्थिति में है। इस चुनाव में अधिकांश विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया, और यह चुनाव सोवियत काल के बाद से रूस में सबसे कठोर राजनीतिक दमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के माहौल में हुआ।

    क्रेमलिन ने असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाताओं ने दो अलग-अलग मतपत्र डाले, जिससे डूमा की आधी सीटें भरी गईं। बाकी सीटों पर एकल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों में व्यक्तिगत उम्मीदवारों को चुना गया। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। ‘सिस्टेमिक विपक्ष’ की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।


    क्या क्रेमलिन का नियंत्रण मजबूत होगा?

    क्रेमलिन इस संसदीय चुनाव को युद्ध के लिए जन समर्थन दिखाने का माध्यम मानता है, जो 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद पहला चुनाव है। यह अपनी कार्रवाई को वैध बनाने का भी प्रयास कर रहा है। उसने किसी भी असंतोष को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है। एक बड़े राज्य मीडिया अभियान और वास्तविक विपक्ष की अनुपस्थिति में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण है। यह क्रेमलिन को रूसी राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद करेगा। यह बढ़ती आर्थिक लागतों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच हो रहा है। मतदाता डूमा की 450 सीटों के लिए दो अलग-अलग मतपत्र डालते हैं; आधे सीटों के लिए राजनीतिक दल चुने जाते हैं, जबकि बाकी के लिए व्यक्तिगत उम्मीदवार। मुख्य क्रेमलिन पार्टी, यूनाइटेड रूस, से निचले सदन, स्टेट डूमा पर अपना भारी नियंत्रण बनाए रखने की उम्मीद है। ‘सिस्टेमिक विपक्ष’ की छोटी पार्टियां भी अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगी।


    मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान में क्या समस्याएं आईं?

    रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा ने रविवार को बताया कि मॉस्को में इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली को साइबर हमलों का निशाना बनाया गया। उन्होंने इसके लिए ‘सिस्टेमिक पार्टियों’ में से एक को दोषी ठहराया, पर किसी का नाम नहीं लिया। एक स्वतंत्र रूसी समाचार आउटलेट- सोता विजन, ने रविवार को मॉस्को के मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली में तकनीकी खराबी की सूचना दी। आउटलेट ने टेलीग्राम पर बताया कि लोगों को कागजी मतपत्र नहीं दिए गए, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक टर्मिनल से मतदान करने को कहा गया। दिवंगत रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी के करीबी सहयोगी लियोनिद वोल्कोव ने सुझाव दिया कि कागजी मतपत्र प्रणाली का खराब होना जानबूझकर किया गया हो सकता है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक मतदान की ओर धकेलना था। उन्होंने रविवार को एक्स पर ‘कागजी मतपत्र की मांग करें!’ लिखा। कई मतदाताओं ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान से इनकार कर दिया, जिससे मतदान केंद्रों के बाहर कतारें लग गईं। यबलोको पार्टी के नेता निकोलाई राइबाकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक मतपत्र डाला, जिस पर ‘स्वतंत्रता के लिए,’ ‘शांति के लिए,’ और ‘यबलोको’ लिखा देखा गया।


    विदेशों में रूसी विपक्ष ने कैसे विरोध किया?

    एलेक्सी नवालनी की विधवा यूलिया नवालनाया सहित रूस के निर्वासित विपक्ष ने युद्ध-विरोधी रूसियों से रविवार दोपहर मतदान करने का आह्वान किया। आर्मेनिया में रहने वाले हजारों रूसियों ने मतदान में भाग लिया। वे राजधानी येरेवन में रूसी दूतावास के बाहर कतार में खड़े थे। उनमें से कुछ ‘शांतिपूर्ण रूस के लिए दोपहर’ नामक युद्ध-विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने युद्ध-विरोधी और पुतिन-विरोधी पोस्टर पकड़े हुए थे। पत्रकार मार्क पोडबेरेज़िन ने कहा कि येरेवन में चुनाव आयोग के सदस्यों ने ऐसी टिप्पणियां कीं जो ‘खुले तौर पर डराने-धमकाने’ वाली थीं। उन्होंने सुना था कि ‘आपको देर-सबेर रूस लौटना होगा, इसे ध्यान में रखें।’ लिडिया क्लिमेंको ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके वोट का कोई वास्तविक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सबसे उपयोगी काम ‘अन्य लोगों को देखना था जो युद्ध के खिलाफ हैं, एक साझा उद्देश्य में एक साथ होना।’ जर्मनी में, मतदाताओं ने बर्लिन में रूसी दूतावास में अपने मतपत्र डाले। असंतुष्ट और ओपन रूस समूह के पूर्व प्रमुख आंद्रेई पिवोवारोव ने इमारत के बाहर एकत्रित विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया।

  • इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान

    इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान


    रोम।
    इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Italian Prime Minister Giorgia Meloni) ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव प्रस्तावित किया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इस उपाय के तहत इतालवी स्कूलों (Italian schools) में बुर्का और नकाब (Burqa and Niqab) पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों (Foreign Students) की संख्या भी सीमित की जाएगी। यह घोषणा प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर उनकी सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है।

    इटली आने वाले लोगों को हमारी भाषा सीखनी चाहिए
    मेलोनी ने अपनी राष्ट्रवादी रूढ़िवादी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपाय में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान होगा। इसके तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा के पाठ अनिवार्य किए जाएंगे। ये वे माता-पिता होंगे जिन्हें ‘स्कूल प्रणाली में एकीकृत होने में गंभीर कठिनाइयां’ आ रही हैं। मेलोनी ने रोम में जियोवेंटु नाज़ियोनेल राष्ट्रीय उत्सव में एक जोरदार तालियों के बीच कहा। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारे लिए, जो कोई भी इटली आता है और यहां अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उन्हें हमारी संस्कृति को समझना चाहिए और हमारे नियमों का सम्मान करना चाहिए।’ मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘यह उनका स्वागत करने का एकमात्र गंभीर तरीका है।’


    क्या है बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध का प्रस्ताव?

    मेलोनी ने विशेष रूप से बुर्का पर प्रतिबंध का उल्लेख किया है। बुर्का एक ऐसा पहनावा है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं और पूरे शरीर को ढकता है। उन्होंने नकाब पर भी प्रतिबंध की बात की। नकाब सबसे रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं, जिसमें केवल आंखें ही दिखती हैं। हालांकि, मेलोनी ने रविवार को (20 सितंबर) अपने संबोधन में हिजाब का कोई जिक्र नहीं किया। हिजाब एक सिर पर पहना जाने वाला स्कार्फ है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं। सरकार द्वारा इस उपाय को मंजूरी मिलने के बाद, इसे कानून बनने के लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होगी। यह अनुमोदन 60 दिनों के भीतर प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    प्रवासन पर मेलोनी का क्या रुख है?
    मेलोनी की राजनीतिक जड़ें धुर-दक्षिणपंथी विचारधारा में गहराई से जमी हुई हैं। वह प्रवासन के मुद्दे पर लगातार सख्त और आक्रामक रुख अपनाती रही हैं। प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति में बदलाव देखा है। वह एक राष्ट्रवादी बाहरी व्यक्ति से यूरोपीय संघ के राजनेताओं के बीच एक स्थापित और प्रभावशाली व्यक्ति बन गई हैं। उनकी नीतियां अक्सर इटली की राष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। यह उनके राजनीतिक एजेंडे का एक केंद्रीय बिंदु रहा है।


    क्यों उठाए जा रहे हैं ये नए नीतिगत कदम?

    मेलोनी अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले अपनी लोकप्रियता को और बढ़ाना चाहती हैं। इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह कई नई नीतियां पेश कर रही हैं। इन नीतियों में छोटे और मध्यम आकार की कारों और स्कूटरों पर लगने वाले संपत्ति कर से छूट देना भी शामिल है। यह एक ऐसा कर है जिससे लोग काफी नाखुश थे। इस महीने की शुरुआत में, मेलोनी का रूढ़िवादी प्रशासन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली का सबसे लंबे समय तक निर्बाध रूप से सेवा करने वाला सरकार बन गया। यह उपलब्धि उनकी राजनीतिक स्थिरता और देश में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। ये कदम मतदाताओं को आकर्षित करने और उनकी सरकार की छवि को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।

  • 25 सितंबर को रिलीज से पहले 'द वन' पर बड़ा विवाद! गायक ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी मेकर्स से की ये मांग

    25 सितंबर को रिलीज से पहले 'द वन' पर बड़ा विवाद! गायक ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी मेकर्स से की ये मांग

    नई दिल्ली। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म द वन रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म को लेकर गायक सरगम वैश ने मेकर्स पर उनके संगीत का कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। सरगम वैश के मुताबिक फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर में उनके गाए अयि गिरिनंदिनी के करीब 25 सेकेंड के हिस्से का इस्तेमाल किया गया है। गायक का दावा है कि उन्होंने इस इस्तेमाल के लिए फिल्म की टीम को कोई अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने मेकर्स से ट्रेलर के साथ साथ फिल्म से भी संबंधित संगीत को हटाने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

    सरगम वैश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस पूरे मामले के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन साल से काम कर रहे थे। उनके अनुसार ट्रेलर में उनके मूल काम के प्रोडक्शन और वोकल्स का इस्तेमाल उसी रूप में किया गया है। गायक ने कहा कि उन्होंने फिल्म के ट्रेलर या उसके प्रचार में अपने संगीत के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी। उनका कहना है कि किसी भी कलाकार के काम को उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और कलाकार के रचनात्मक अधिकारों का सम्मान होना जरूरी है।

    सरगम वैश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी बताया कि इस मामले का असर उनके मौजूदा करार पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक उन्होंने इस संगीत को लेकर पहले ही एक बड़े म्यूजिक लेबल के साथ अनुबंध किया हुआ है। ऐसे में बिना अनुमति किसी दूसरे प्रोजेक्ट में संगीत के इस्तेमाल से उनके कॉन्ट्रैक्ट पर परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने फिल्म की टीम से सीधे बातचीत करने और विवादित संगीत को फिल्म से हटाने का अनुरोध किया है।

    गायक ने लोगों से भी इस मामले में समर्थन मांगा है। उन्होंने कहा कि वह यह मुद्दा सार्वजनिक रूप से इसलिए उठा रहे हैं ताकि उनकी बात फिल्म की टीम तक पहुंचे। हालांकि अभी तक फिल्म के मेकर्स की ओर से इस आरोप पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में फिलहाल यह मामला गायक के लगाए आरोपों और उनके द्वारा मांगे गए समाधान तक सीमित है।

    विवाद के बीच द वन की रिलीज डेट भी नजदीक आ चुकी है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की यह फिल्म 25 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म की टीम इन दिनों जोरदार प्रमोशन में जुटी हुई है। इसी सिलसिले में सिद्धार्थ और तमन्ना सलमान खान के शो बिग बॉस 20 में भी पहुंचे। शो के दौरान फिल्म के नाम को लेकर चल रही गलतफहमी पर भी बातचीत हुई।

    तमन्ना ने सलमान खान से फिल्म के नाम को लेकर दर्शकों के बीच बनी उलझन दूर करने का अनुरोध किया। दरअसल फिल्म के टाइटल Vvaan की स्पेलिंग के कारण कई लोग इसे विवान पढ़ रहे हैं। फिल्म की टीम ने बताया कि क्रिएटिव तरीके से टाइटल की स्पेलिंग रखी गई है लेकिन फिल्म का नाम द वन है। सलमान खान ने भी इस दौरान फिल्म के नाम को लेकर अपनी बात रखी और टीम को फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

    फिल्म से जुड़ा एक छठ पूजा वाला गाना भी चर्चा में है। शो के दौरान आम्रपाली ने फिल्म के इस गाने की तारीफ करते हुए कहा कि यह यूपी और बिहार में लोकप्रिय हो रहा है। अब रिलीज से कुछ दिन पहले संगीत को लेकर सामने आया विवाद द वन की चर्चा को और बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि फिल्म की टीम सरगम वैश के आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या विवादित संगीत को लेकर कोई बदलाव किया जाता है।

  • सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें खानपान से लेकर पूजा तक इन नियमों का रखें ध्यान

    सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें खानपान से लेकर पूजा तक इन नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को शिव कृपा प्राप्त होती है। कई लोग मनोकामना पूर्ति सुख शांति और परिवार की समृद्धि की कामना से सोमवार का व्रत रखते हैं। कुछ भक्त लगातार कई सोमवार तक व्रत करते हैं तो कुछ लोग अपनी श्रद्धा और संकल्प के अनुसार एक या अधिक सोमवार को उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग ही नहीं बल्कि मन वचन और कर्म में संयम रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    सोमवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के स्थान को साफ करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू की जा सकती है। शिवलिंग पर जल चढ़ाना सोमवार की पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। श्रद्धा के अनुसार दूध और गंगाजल से अभिषेक भी किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र फूल और फल अर्पित किए जा सकते हैं।

    सोमवार व्रत में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करने से भक्त की श्रद्धा प्रकट होती है। बेलपत्र चढ़ाते समय उसे साफ करके अर्पित करना चाहिए। पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। नमः शिवाय का जाप भगवान शिव की आराधना में प्रमुख माना जाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी श्रद्धा के साथ किया जाता है।

    व्रत के दौरान खानपान के नियम व्यक्ति की परंपरा और व्रत के प्रकार पर निर्भर करते हैं। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कई लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाने और व्रत में मान्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। सेंधा नमक का इस्तेमाल भी कई व्रत परंपराओं में किया जाता है। सामान्य नमक और अनाज का सेवन कई लोग व्रत के दौरान नहीं करते हैं। हालांकि स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    सोमवार व्रत में सात्विक आचरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन क्रोध झूठ अपशब्द और किसी के प्रति गलत भावना रखने से बचना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी धार्मिक परंपरा में शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान भगवान शिव का ध्यान और पूजा करते हुए मन को शांत रखने का प्रयास करना चाहिए।

    शाम के समय भगवान शिव की पूजा और आरती की जा सकती है। व्रत खोलने का समय भी अलग अलग परंपराओं में अलग हो सकता है। कुछ लोग शाम की पूजा के बाद फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग अगले दिन व्रत का पारण करते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमों का पालन करना उचित माना जाता है। सोमवार व्रत का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं बल्कि श्रद्धा संयम और सकारात्मक आचरण के साथ भगवान शिव का स्मरण करना भी माना जाता है।

  • भगवान विष्णु की करवट बदलने से जुड़ी है राजा बलि की कहानी! जानिए परिवर्तिनी एकादशी का वामन अवतार से क्या है संबंध

    भगवान विष्णु की करवट बदलने से जुड़ी है राजा बलि की कहानी! जानिए परिवर्तिनी एकादशी का वामन अवतार से क्या है संबंध

    नई दिल्ली। परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली एकादशी मानी जाती है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन अपनी करवट बदलते हैं। इसी वजह से इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी और पार्श्व एकादशी के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में परिवर्तिनी एकादशी 21 सितंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी के दिन योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद चातुर्मास की अवधि शुरू होती है। इस दौरान भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करते हैं। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। इन दोनों महत्वपूर्ण एकादशियों के बीच भाद्रपद शुक्ल एकादशी आती है जिसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि चार महीने की योगनिद्रा के बीच भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट बदलते हैं। इसे भगवान के विश्राम के दौरान होने वाला परिवर्तन माना जाता है। इसी कारण इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी पड़ा। इसे पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने और व्रत रखने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

    परिवर्तिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार से भी बताया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी अवसर पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि ने वामन भगवान की मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया और दो पग में पृथ्वी और स्वर्ग लोक को नाप लिया। जब तीसरा पग रखने के लिए स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने कर दिया।

    राजा बलि की भक्ति और समर्पण से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने राजा बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही मान्यता के अनुसार भगवान ने बलि को यह वरदान दिया कि वह हर वर्ष चार महीने के लिए पाताल लोक में उनके यहां निवास करेंगे। इसी कथा को चातुर्मास की परंपरा से भी जोड़ा जाता है।

    इस तरह परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु की योगनिद्रा के बीच होने वाले करवट परिवर्तन के साथ साथ उनके वामन अवतार और राजा बलि की भक्ति से भी जुड़ी हुई है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और उनके वामन स्वरूप की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस एकादशी को आत्मसंयम भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का पर्व माना गया है।

  • Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

    Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

    निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

    इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

  • 15 बार देख चुकी हैं 'हनुमान अंश' फिर भी हर बार छलक आते हैं आंसू! नीम करोली बाबा की बेटी से मुलाकात का रागिनी सोना ने खोला राज

    15 बार देख चुकी हैं 'हनुमान अंश' फिर भी हर बार छलक आते हैं आंसू! नीम करोली बाबा की बेटी से मुलाकात का रागिनी सोना ने खोला राज


    नई दिल्ली। फिल्म हनुमान अंश इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने दुनियाभर में 329.30 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म की इस सफलता को लेकर निर्माता रागिनी सोना ने एक ऐसा अनुभव साझा किया है जिसने फिल्म की कहानी के साथ आध्यात्मिक पहलू को भी चर्चा में ला दिया है। रागिनी का मानना है कि फिल्म को नीम करोली बाबा का आशीर्वाद मिला है। उन्होंने रिलीज से पहले बाबा की बेटी गिरिजा जी जिन्हें अम्मा जी के नाम से भी जाना जाता है उनसे हुई मुलाकात का अनुभव साझा किया है।

    रागिनी सोना के मुताबिक फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की इच्छा थी कि फिल्म को आगे बढ़ाने से पहले नीम करोली बाबा के परिवार का आशीर्वाद लिया जाए। इसी सिलसिले में टीम ने अम्मा जी से संपर्क किया। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह हनुमान अंश फिल्म देखना चाहेंगी तो उन्होंने कहा कि जब उन्हें सही समय लगेगा तब वह फिल्म देखेंगी। रागिनी के मुताबिक अब तक अम्मा जी फिल्म को करीब 15 बार देख चुकी हैं और हर बार फिल्म देखते हुए उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।

    रागिनी ने बताया कि मुलाकात के दौरान अम्मा जी ने उनसे फिल्म बनाने की प्रेरणा के बारे में पूछा। इसके जवाब में उन्होंने अपने बचपन का एक अनुभव साझा किया। रागिनी ने बताया कि जब वह छह साल की थीं तब उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई थी। वहीं विशाल ने बाबा को लेकर किए गए अपने शोध के बारे में बताया। बातचीत के दौरान रागिनी ने यह भी बताया कि उनके पिता नैनीताल में पोस्टेड थे। इसके बाद उनके अनुसार फोन पर ऐसा अनुभव हुआ जिसे वह आज भी चमत्कार मानती हैं।

    रागिनी के मुताबिक अम्मा जी ने अचानक उनके पिता का नाम बता दिया। इसके बाद उन्होंने आगरा स्थित उनके करीब 50 साल पुराने घर की लोकेशन तक बता दी और उनके बड़े भाई का नाम भी लिया। रागिनी का कहना है कि अम्मा जी ने कहा कि उन्हें सब कुछ अपनी आंखों के सामने साफ दिखाई दे रहा है। इस दौरान फिल्म निर्देशक विशाल भी मौजूद थे और रागिनी ने उन्हें इस अनुभव का प्रत्यक्षदर्शी बताया।

    इस घटना से रागिनी बेहद भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उन्होंने अम्मा जी से पूछा कि उन्हें यह सब कैसे पता चला। रागिनी के अनुसार अम्मा जी ने इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें खुद नहीं पता लेकिन सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। इस अनुभव के बाद रागिनी का विश्वास और मजबूत हो गया कि शायद उन्हें इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए बाबा का आशीर्वाद मिला है।

    रागिनी और उनकी टीम ने नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी मुलाकात की। उन्होंने उनके सरल स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि बाबा का संदेश सभी से प्रेम करने और सभी को भोजन कराने का था और परिवार आज भी इस भावना को आगे बढ़ा रहा है।

    रागिनी ने क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक दोनों ने नई पीढ़ी के बीच नीम करोली बाबा को लेकर जिज्ञासा बढ़ाने में भूमिका निभाई है। रागिनी का कहना है कि कुछ आध्यात्मिक अनुभव ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों में पूरी तरह समझाना मुश्किल होता है और केवल महसूस किया जा सकता है। उनके अनुसार हनुमान अंश अब दर्शकों को नीम करोली बाबा के जीवन और संदेश से परिचित कराने का एक माध्यम बन गई है।

  • सोमवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां जानिए पूजा का सही तरीका और व्रत से जुड़े जरूरी नियम

    सोमवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां जानिए पूजा का सही तरीका और व्रत से जुड़े जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भक्तों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। कई लोग सुख शांति समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना से सोमवार का व्रत रखते हैं। कुछ भक्त लगातार कई सोमवार तक व्रत करते हैं जबकि कुछ विशेष संकल्प के साथ सोमवार व्रत का पालन करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ किया गया व्रत भक्त के मन में सकारात्मकता और भक्ति की भावना को मजबूत करता है।

    सोमवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद शिवलिंग का जल से अभिषेक किया जाता है। धार्मिक परंपरा में भगवान शिव को जल और दूध अर्पित करने का विधान बताया गया है। इसके साथ बेलपत्र धतूरा फूल और फल अर्पित किए जा सकते हैं।

    पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षरी मंत्र का जाप किया जा सकता है। पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय को भगवान शिव की आराधना में विशेष महत्व दिया जाता है। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    सोमवार व्रत में खानपान को लेकर भी अलग अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फलाहार में फल दूध दही मखाने और व्रत में खाए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखते हुए ही उपवास करना चाहिए। किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दिन सात्विक विचार और आचरण रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। इस दिन क्रोध झूठ और किसी के प्रति बुरा व्यवहार करने से बचना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। शाम के समय भगवान शिव की दोबारा पूजा करके आरती की जा सकती है।

    व्रत का पारण अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार किया जाता है। कुछ लोग शाम की पूजा के बाद फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग अगले दिन व्रत खोलते हैं। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में सोमवार व्रत के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत का पालन करना उचित माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्रत केवल भोजन से जुड़ा नियम नहीं बल्कि श्रद्धा संयम और अच्छे आचरण का संकल्प भी माना जाता है।

  • जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज

    जब डॉक्टर बने संगीतकार और बुजुर्गों ने गुनगुनाए पुराने गीत: भोपाल में अल्जाइमर-डिमेंशिया जागरूकता का खास अंदाज


    भोपाल। भोपाल में रविवार को बुजुर्गों के लिए आयोजित एक खास कार्यक्रम ने संगीत और अपनत्व के जरिए जिंदगी को फिर से करीब से महसूस करने का मौका दिया। होशंगाबाद रोड स्थित होटल बैस्टियन में अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित बुजुर्गों के साथ उनके परिवारों और केयरगिवर्स के लिए लव यू जिंदगी कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंजलि एन एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजिस्ट और लव यू जिंदगी संस्था की ओर से हुए इस आयोजन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ वृद्धावस्था और अल्जाइमर तथा डिमेंशिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों के साथ उनके परिजन केयरगिवर्स और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।

    कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य अतिथि राधारमण इंस्टीट्यूट के संजीव सक्सेना विशिष्ट अतिथि लेफ्टिनेंट वाइस एडमिरल विमल वर्मा और जनरल श्याम सुंदर श्रीवास्तव मौजूद रहे। अतिथियों ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों की शारीरिक जरूरतों के साथ उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस अवसर पर राधारमण इंस्टीट्यूट के संस्थापक स्वर्गीय राधारमण सक्सेना के शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

    कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों के म्यूजिकल बैंड Med Beats की प्रस्तुति रही। डॉक्टरों ने बुजुर्गों की पसंद के पुराने और सदाबहार गीतों की धुनें छेड़ीं तो कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया। परिचित गीतों को सुनकर कई बुजुर्ग अपने पुराने दिनों की यादों में खो गए। कुछ लोगों ने गीतों के साथ गुनगुनाया तो कुछ ने संगीत की धुन पर हल्की शारीरिक गतिविधियां करते हुए खुशी जाहिर की। कई बुजुर्गों के चेहरे पर लंबे समय बाद खुली मुस्कान दिखाई दी।

    आयोजकों के मुताबिक डिमेंशिया और अल्जाइमर से प्रभावित लोगों के लिए परिचित संगीत खास अनुभव दे सकता है। पुराने और पहचाने हुए गीत व्यक्ति को बीते समय की यादों से जोड़ सकते हैं और उनके सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में संगीत को मनोरंजन के साथ भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनाया गया। आयोजन में सिर्फ बुजुर्गों को ही केंद्र में नहीं रखा गया बल्कि उनकी देखभाल करने वाले परिवारों और केयरगिवर्स को भी विशेष महत्व दिया गया।

    संस्था की संस्थापक डॉ. अंजलि सहाय ने कहा कि वृद्धावस्था में अकेलापन चिंता और स्मृति से जुड़ी समस्याएं बुजुर्गों के लिए चुनौती बन सकती हैं। ऐसे समय में उन्हें सकारात्मक आत्मीय और खुशहाल वातावरण देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अल्जाइमर और डिमेंशिया से प्रभावित व्यक्ति की देखभाल करने वाले परिवार और केयरगिवर्स भी लगातार भावनात्मक दबाव से गुजरते हैं इसलिए उनके लिए भी सहयोग और संवेदनशील माहौल जरूरी है। लव यू जिंदगी कार्यक्रम ने इसी संदेश को संगीत और सामूहिक सहभागिता के जरिए सामने रखा कि बुजुर्गों की जिंदगी में दवाओं और देखभाल के साथ खुशी अपनापन और संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच

    पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच


    इंदौर।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब प्रदेश के नगरीय निकायों में पानी और सीवर लाइनों की अंदरूनी स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इस जांच के लिए सड़कों को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। विभाग ने एजेंसी के साथ एक साल का समझौता किया है और पाइपलाइन जांच की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय की गई है।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि इंदौर का भागीरथपुरा हादसा है। दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में दूषित पेयजल के कारण यहां 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए थे। सामने आया था कि सीवर लाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। जांच के दौरान अकेले भागीरथपुरा क्षेत्र में ऐसे 260 स्थान मिले थे जहां सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलने की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में ऐसी संवेदनशील जगहों की पहचान शुरू की।

    GIS प्लेटफॉर्म गरुड़ के जरिए कराई गई मैपिंग में प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स चिन्हित किए गए जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर के करीब 30 हजार और भोपाल के 20 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स शामिल हैं। इन जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज या दूसरी तकनीकी खराबी होने की स्थिति में सीवर का पानी पेयजल लाइन में पहुंचने का खतरा बना रहता है।

    अब इन पाइपलाइनों के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए CCTV क्रॉलर सिस्टम वाले रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा। रोबोट को मौजूदा मैनहोल एयर रिलीज वाल्व या दूसरे एक्सेस पॉइंट्स से पाइपलाइन के भीतर भेजा जाएगा। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगे होंगे। करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े इस सिस्टम की मदद से पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और तकनीकी डेटा जुटाया जा सकेगा। लीकेज टूट-फूट अवरोध और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याओं की पहचान भी की जा सकेगी।

    इस काम के लिए विभाग ने 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर और पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने 40 रुपए प्रति मीटर की दर पेश की। सबसे कम बोली के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे। विभाग के मुताबिक ऐसी रोबोटिक पाइपलाइन जांच तकनीक देश के 15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल की जा रही है। मध्य प्रदेश में इसका इस्तेमाल पहली बार बड़े स्तर पर किया जाएगा।