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  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। घने जंगल ऊंचे पहाड़ मनमोहक झरने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। खासकर मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरनों का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। हालांकि पचमढ़ी की यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि आपका सफर सुरक्षित आरामदायक और यादगार बन सके।

    अगर आप पहली बार पचमढ़ी जा रहे हैं तो सबसे पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। बरसात के दिनों में यहां लगातार बारिश होती है इसलिए रेनकोट छाता और वाटरप्रूफ बैग साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना सबसे अच्छा रहता है। आरामदायक कपड़े चुनें ताकि ट्रैकिंग और घूमने में किसी तरह की परेशानी न हो।

    पचमढ़ी में कई पर्यटन स्थल वन क्षेत्र के अंदर स्थित हैं इसलिए यहां घूमने के लिए स्थानीय गाइड या अधिकृत जिप्सी सेवा का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। बी फॉल्स धूपगढ़ जटाशंकर गुफा पांडव गुफाएं अप्सरा विहार रजत प्रपात और महादेव मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों की यात्रा समय के अनुसार करें ताकि सभी जगह आराम से घूम सकें।

    अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहेगा। सुबह का मौसम सुहावना होता है और भीड़ भी कम रहती है। साथ ही पानी की बोतल हल्का नाश्ता और जरूरी दवाइयां अपने बैग में जरूर रखें। जंगल वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति अंदर जाने से बचें और वन विभाग के सभी निर्देशों का पालन करें।

    पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। प्लास्टिक की बोतलें चिप्स के पैकेट या अन्य कचरा खुले में बिल्कुल न फेंकें। जहां डस्टबिन उपलब्ध हो वहीं कचरा डालें। प्राकृतिक स्थलों पर तेज आवाज में संगीत बजाने से बचें ताकि वहां का शांत वातावरण बना रहे और वन्यजीव भी प्रभावित न हों।

    यात्रा पर निकलने से पहले होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी खासकर छुट्टियों और मानसून सीजन में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। पहले से बुकिंग होने पर आपको बेहतर सुविधा और उचित कीमत पर ठहरने की जगह मिल सकती है।

    पचमढ़ी की स्थानीय संस्कृति और स्वाद का आनंद लेना भी यात्रा का अहम हिस्सा है। यहां मिलने वाले स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प आपकी यात्रा को और खास बना सकते हैं। खरीदारी करते समय स्थानीय दुकानदारों से विनम्र व्यवहार करें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें।

    अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। फिसलन वाले झरनों और पहाड़ी किनारों पर अनावश्यक जोखिम न लें। फोटो खींचते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दें क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

    पचमढ़ी सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अनमोल धरोहर है। सही योजना आवश्यक तैयारी और जिम्मेदार व्यवहार के साथ की गई यात्रा न केवल आपको खूबसूरत यादें देगी बल्कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

  • एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

    एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होने के बीच केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि प्रदेश को देश में सबसे अधिक मूंग खरीदी का कोटा पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार स्वीकृत लक्ष्य का केवल दो प्रतिशत ही खरीद सकी है। ऐसे में पहले निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए उसके बाद ही अतिरिक्त कोटा देने के प्रस्ताव पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिन पहले भेजे गए पत्र में कहा कि मूल्य समर्थन योजना के तहत मध्य प्रदेश को पहले ही देश का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है। इसके बावजूद खरीदी की गति बेहद धीमी है और अब तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम खरीद हो पाई है।

    केंद्र सरकार के मुताबिक मध्य प्रदेश के लिए इस वर्ष 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। लेकिन 16 जुलाई 2026 तक केवल 7 हजार 947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है जो स्वीकृत मात्रा का लगभग दो प्रतिशत है। इस दौरान करीब 12 हजार किसानों से ही उपज खरीदी गई। केंद्र ने राज्य सरकार से खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने और पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया है।

    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल्य समर्थन योजना के दिशा निर्देशों के अनुसार तूर उड़द और मसूर जैसी फसलों की शत प्रतिशत खरीद की व्यवस्था है जबकि अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। इसलिए अतिरिक्त कोटा तभी स्वीकृत किया जाएगा जब पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीद पूरी हो जाएगी।

    केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 19 हजार 692 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की मंजूरी दी गई थी। इसके विरुद्ध 3 लाख 93 हजार 123.79 मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई थी। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 3 हजार 413.10 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया और 1 लाख 22 हजार 776 किसानों को इसका लाभ मिला।

    पत्र में सोयाबीन का उदाहरण भी दिया गया है। केंद्र ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन स्वीकृत की गई थी। इसके लिए 1 हजार 93.13 करोड़ रुपए जारी किए गए जिससे 7 लाख 10 हजार 257 किसानों को लाभ मिला।

    इधर नर्मदापुरम सीहोर रायसेन हरदा और आसपास के जिलों में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जुलाई से किसान क्रांति पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू होकर बुधनी बरखेड़ा ओबेदुल्लागंज मंडीदीप होते हुए 29 और 30 जुलाई को भोपाल पहुंचेगी। किसान मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा और रेल मार्ग भी बाधित किया जा सकता है। ऐसे में मूंग खरीदी का मुद्दा अब किसानों के आंदोलन के साथ राजनीतिक टकराव का भी बड़ा विषय बनता जा रहा है।

  • चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार के लिए उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 से 30 जुलाई के बीच कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन सक्रिय है जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी जल्द प्रभाव दिखाएगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई और अब इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

    भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच यानी 334.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच यानी 395.2 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है जबकि 41 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निवाड़ी पूर्वी मध्य प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां औसत से अधिक वर्षा हुई है। दूसरी ओर भोपाल इंदौर सीहोर राजगढ़ देवास हरदा बुरहानपुर नीमच मंदसौर दमोह सिवनी आगर मालवा और भिंड जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहतर रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जून महीने में कमजोर मानसून के कारण बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रह गया था। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी लेकिन पिछले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने से प्रदेश फिर औसत से नीचे पहुंच गया। अब सक्रिय मानसूनी सिस्टम से उम्मीद है कि बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश वाला महीना होता है क्योंकि पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा इसी महीने में होती है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक बारिश 37.3 इंच मानी जाती है जबकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा 38 से 39 इंच के बीच रहती है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा

    आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा


    भोपाल । भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एयर इंडिया को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए छह वरिष्ठ नागरिक यात्रियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 96 हजार रुपए की राशि क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि यह राशि 8 दिसंबर 2024 से सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर संबंधित यात्रियों को दी जाए। आयोग ने माना कि एयरलाइन ने यात्रियों को यात्रा शुरू होने से महज दो घंटे पहले फ्लाइट कार्यक्रम में बदलाव की सूचना दी जिससे उनकी पूरी यात्रा योजना बुरी तरह प्रभावित हुई और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।

    मामले के अनुसार भोपाल निवासी छह वरिष्ठ नागरिकों ने 13 अप्रैल 2024 को 11 मई 2024 की भोपाल से दिल्ली होते हुए श्रीनगर और 17 मई 2024 की वापसी यात्रा के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट बुक की थी। टिकटों पर करीब 1.18 लाख रुपए खर्च किए गए थे। टिकट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों ने श्रीनगर पहलगाम और गुलमर्ग में होटल हाउसबोट स्थानीय टैक्सी पर्यटन पैकेज और अन्य सेवाओं की अग्रिम बुकिंग भी कर ली थी। वापसी यात्रा के लिए दिल्ली से रानी कमलापति स्टेशन तक वंदे भारत एक्सप्रेस के आरक्षित टिकट भी पहले से बुक थे।

    यात्रा के दिन एयर इंडिया ने उड़ान शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले सूचना दी कि निर्धारित यात्रा संभव नहीं होगी और यात्रियों को अगले दिन भेजा जाएगा। अचानक हुए इस बदलाव के कारण पूरी यात्रा योजना अस्तव्यस्त हो गई। यात्रियों को होटल बुकिंग दोबारा करनी पड़ी स्थानीय परिवहन और पर्यटन पैकेज बदलने पड़े जबकि रेलवे टिकटों में भी बदलाव करना पड़ा। उनका कहना था कि यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो इतना बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता। यात्रियों ने एयरलाइन से कई बार मुआवजे की मांग की लेकिन राहत नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने अपना बचाव करते हुए कहा कि फ्लाइट रद्द नहीं हुई थी बल्कि दिल्ली में बर्ड स्ट्राइक की अप्रत्याशित घटना के कारण उड़ान प्रभावित हुई थी। एयरलाइन के अनुसार इसी वजह से यात्रियों की दिल्ली से श्रीनगर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की आशंका थी इसलिए उन्हें अगले दिन की उड़ान में समायोजित किया गया। एयर इंडिया ने इसे अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति बताते हुए सेवा में कमी से इनकार किया।

    हालांकि आयोग ने एयरलाइन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यदि वास्तव में बर्ड स्ट्राइक हुई थी तो उसके समर्थन में डीजीसीए की जांच रिपोर्ट तकनीकी रिपोर्ट या अन्य आधिकारिक दस्तावेज पेश किए जाने चाहिए थे लेकिन एयरलाइन ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। केवल लिखित दावा करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि फोर्स मेज्योर का दावा करने वाली एयरलाइन पर ही उसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी होती है।

    परिवादियों की ओर से पैरवी करने वाली अधिवक्ता कल्पना वर्मा ने बताया कि यात्रियों ने प्रति व्यक्ति लगभग 40 हजार रुपए के वास्तविक नुकसान का दावा किया था लेकिन आयोग ने फिलहाल प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिन्हें अंतिम समय में फ्लाइट में बदलाव या एयरलाइन की लापरवाही के कारण परेशानी उठानी पड़ती है।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली में लगे 'थैंक्यू राहुल गांधी' के पोस्टर


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली की सियासत में पोस्टर वार शुरू हो गई है। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस (DPYC) ने राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में ‘थैंक्यू राहुल गांधी’ लिखे होर्डिंग्स लगाकर इसे छात्रों के आंदोलन और कांग्रेस के अभियान की सफलता बताया।

    दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने कहा कि जिस इस्तीफे की संभावना तक नहीं मानी जा रही थी, वह लगातार आंदोलन कर रहे छात्रों और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान का परिणाम है। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम छात्रों की एकजुटता और संघर्ष की ताकत को दर्शाता है।

    युवा कांग्रेस का कहना है कि राजधानी में लगाए गए ये पोस्टर राहुल गांधी के प्रति युवाओं के समर्थन और आभार को व्यक्त करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। संगठन का दावा है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस लगातार छात्रों के साथ खड़ी रही है।

    हालांकि, अक्षय लाकड़ा ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी युवा कांग्रेस का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अब भी बाकी हैं।

    युवा कांग्रेस की पहली मांग प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की है। वहीं दूसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं देश के छात्रों से माफी मांगें। संगठन ने कहा कि इन मांगों के पूरा होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती

    कैसे रूकेगा पेपर लीक ? PM मोदी की टास्क फोर्स के एक्सपर्ट ने बताई क्‍या है सबसे बड़ी चुनौती


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में सुधारों के लिए गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस समिति के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि का कहना है कि केवल तकनीक के सहारे पेपर लीक की समस्या का पूरी तरह समाधान संभव नहीं है।

    तकनीक के साथ संस्थागत सुधार भी जरूरी
    डॉ. कामकोटि ने कहा कि टास्क फोर्स का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के साथ संस्थागत सुधारों को जोड़कर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सिर्फ उसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

    उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 1985 में जेईई परीक्षा दी थी, तब करीब 5 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 15 लाख से अधिक हो गई है। ऐसे में विशाल परीक्षा तंत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नई व्यवस्थाओं की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी सुधारों की रूपरेखा
    टास्क फोर्स की अध्यक्षता तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। समिति में पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल, वरिष्ठ अधिकारी अमृत लाल मीणा सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन, लॉजिस्टिक्स और नीति निर्माण के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर सुधारों की सिफारिश करेगी।

    ‘मेकर-चेकर’ मॉडल पर भी मंथन
    डॉ. कामकोटि ने बताया कि समिति बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों की तरह ‘मेकर-चेकर’ मॉडल लागू करने की संभावना पर भी विचार कर रही है। इस व्यवस्था में किसी एक व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य का स्वतंत्र रूप से दूसरे अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाई जा सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति अभी शुरुआती चरण में काम कर रही है और अंतिम सिफारिशों पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    पेपर लीक की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
    डॉ. कामकोटि के मुताबिक, किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे अहम कड़ी प्रश्नपत्र तैयार करने वाला व्यक्ति होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ही सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं होगी, तो कोई भी तकनीक पेपर लीक को पूरी तरह नहीं रोक सकती। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की जवाबदेही, ईमानदारी और पूरी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना टास्क फोर्स की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

  • सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    नई दिल्ली ।  इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व एक भव्य धार्मिक आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। शहर के धर्म श्री क्षेत्र स्थित बालाजी मंदिर परिसर में मां राजराजेश्वरी और मां ललिता त्रिपुर सुंदरी के एक करोड़ हरिद्रा (हल्दी) और कुमकुम महाअर्चन का आयोजन प्रस्तावित है। इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और प्रशासन तथा आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
    आयोजकों के अनुसार यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसे भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सामूहिक पूजा, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है। इसके लिए लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    बताया गया है कि आयोजन का शुभारंभ 29 जुलाई की शाम छह बजे होगा। अनुष्ठान में 1100 वैदिक विद्वान और पंडित वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक अर्चन संपन्न कराएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर साधना, जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी कारण इस अवसर पर आयोजित होने वाला यह महाअर्चन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    आयोजन समिति का दावा है कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी प्रकार का शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए आवागमन, बैठने, पेयजल, प्रसाद वितरण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। अनुमान है कि आयोजन के दौरान करीब एक लाख श्रद्धालु परिसर में पहुंच सकते हैं, जिसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए हल्दी, कुमकुम, कमल पुष्प, नारियल, फल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग प्रबंध किए जा रहे हैं। आयोजन की भव्यता को देखते हुए इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल माना जा रहा है।

    धार्मिक आयोजकों का कहना है कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से इस महाअनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की भागीदारी अपेक्षित है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

    गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर सागर में होने वाला यह महाअर्चन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का भी संदेश देगा।

  • कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा ? जानें तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

    कब मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा ? जानें तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने से ज्ञान, विवेक और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

    कब है गुरु पूर्णिमा 2026?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी। हालांकि पूर्णिमा तिथि की शुरुआत एक दिन पहले होगी, लेकिन उदयातिथि के आधार पर व्रत और पूजा 29 जुलाई को ही की जाएगी।

    पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे
    पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे
    पूजन एवं व्रत की तिथि: 29 जुलाई 2026 (बुधवार)

    स्नान-दान का शुभ समय
    गुरु पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:17 बजे से 4:59 बजे तक

    क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का वर्गीकरण किया तथा महाभारत, 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इसी कारण उन्हें सनातन परंपरा का प्रथम गुरु माना जाता है और इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं, उनका पूजन करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

    क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व?
    सनातन संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान, बल्कि कई स्थानों पर उससे भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। ‘गुरु’ का अर्थ है—जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने से बुद्धि, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति होती है तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

    ऐसे करें गुरु पूर्णिमा की पूजा
    – सुबह स्नान कर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
    – घर के मंदिर में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और महर्षि वेद व्यास के चित्र या प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।
    – यदि गुरु साक्षात उपस्थित हों तो उनके चरण स्पर्श कर रोली, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
    – अपनी श्रद्धा के अनुसार वस्त्र, फल, मिष्ठान और दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद लें।
    – यदि गुरु दूर हों तो उनकी तस्वीर के सामने ध्यान लगाकर मानसिक रूप से उनका पूजन करें और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें।

  • एमपी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 4 दिन गिरेगा तेज पानी

    एमपी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 4 दिन गिरेगा तेज पानी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को पूर्वी जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने सोमवार के लिए छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले चार दिनों तक कई इलाकों में तेज से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    आईएमडी भोपाल के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं।

    कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और डिप्रेशन भी सक्रिय है। आने वाले दिनों में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से मौसम और अधिक सक्रिय होगा। इसी वजह से 27 से 30 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अब तक सामान्य से 15% कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच (334.9 मिमी) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 15.5 इंच (395.2 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। फिलहाल 14 जिलों में सामान्य से अधिक जबकि 41 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है। पूर्वी क्षेत्र में निवाड़ी ऐसा एकमात्र जिला है, जहां औसत से अधिक बारिश हुई है।

  • भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद

    भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद


    नई दिल्ली । भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और सरल भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास सोमवार प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के अवसर पर शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि भगवान शिव की पूजा विधि विधान और नियमों के साथ की जाए तो जीवन की अनेक परेशानियां दूर हो सकती हैं तथा सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    शिव पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें तथा भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और फिर गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान तीन पत्तियों वाले ताजे और साफ बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र पर किसी प्रकार का कीड़ा या कटाव नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही धतूरा भांग आक के फूल सफेद चंदन सफेद पुष्प अक्षत और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिव चालीसा रुद्राष्टक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी विशेष पुण्य प्रदान करता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भगवान शिव को तुलसी के पत्ते केतकी का फूल और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को पैरों से स्पर्श नहीं करना चाहिए और पूजा के समय मन में किसी प्रकार का क्रोध अहंकार या नकारात्मक विचार नहीं रखना चाहिए। पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव भाव के भूखे माने जाते हैं।

    यदि संभव हो तो सोमवार का व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। दान और सेवा को भी शिव भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। शाम के समय शिव मंदिर में दीपक जलाकर आरती करने से घर में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। परिवार के साथ सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण करने से आपसी प्रेम और विश्वास भी मजबूत होता है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा करने से ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो सकता है। विशेष रूप से चंद्रमा राहु केतु और शनि से जुड़ी समस्याओं में भगवान शिव की आराधना लाभकारी मानी जाती है। साथ ही मानसिक तनाव भय रोग और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भी शिव उपासना को अत्यंत प्रभावी बताया गया है।

    भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण नियम सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति है। यदि भक्त पूरी आस्था और विश्वास के साथ महादेव का स्मरण करता है तो वे उसकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सुख समृद्धि सफलता तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।