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  • ट्रंप से न्यूयॉर्क में मिलेंगे जेलेंस्की, फोन पर बातचीत के बाद बोले- यह मुलाकात बहुत कुछ बदल सकती है

    ट्रंप से न्यूयॉर्क में मिलेंगे जेलेंस्की, फोन पर बातचीत के बाद बोले- यह मुलाकात बहुत कुछ बदल सकती है


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। बातचीत के बाद जेलेंस्की ने इसे अहम बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शांति की दिशा में कई जरूरी कदमों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि वह जल्द ही ट्रंप से न्यूयॉर्क में मुलाकात करेंगे। जेलेंस्की के मुताबिक, यह बैठक मौजूदा हालात में काफी कुछ बदल सकती है और इस समय मजबूत कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं।

    ट्रंप से बातचीत को बताया अहम

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत के दौरान न्यूयॉर्क में आमने-सामने मुलाकात करने पर सहमति बनी है।

    जेलेंस्की ने कहा कि मौजूदा समय में कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हैं और दोनों पक्ष शांति से जुड़े मुद्दों पर आगे बढ़ने के रास्ते तलाश रहे हैं।

    अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कीव दौरे का किया जिक्र

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के कीव दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने ट्रंप को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की कीव यात्रा से अमेरिकी पक्ष को यूक्रेन के जमीनी हालात को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।

    जेलेंस्की के अनुसार, इस दौरान सुरक्षा और शांति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए यूक्रेनी और अमेरिकी टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

    शांति का रास्ता तलाशना यूक्रेन की पहली प्राथमिकता

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के लिए शांति का रास्ता तलाशना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि तनाव कम करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए कई प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है।

    इनमें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और लोगों की जान की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की टीम अमेरिकी टीम के साथ मिलकर काम कर रही है और देश इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है।

    लिंडसे ग्राहम विधेयक को कानून बनाने पर ट्रंप को धन्यवाद

    बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने लिंडसे ग्राहम विधेयक को कानून का रूप देने के लिए भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि शांति स्थापित की जानी चाहिए।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस-यूक्रेन संकट के दौरान यूक्रेन का समर्थन करने वाले वैश्विक सहयोगियों और मदद के लिए आगे आने वाले लोगों को भी धन्यवाद दिया।

    अब इस बातचीत के बाद दोनों नेताओं की न्यूयॉर्क में होने वाली मुलाकात पर नजर है। जेलेंस्की ने जिस तरह इस बैठक को ‘बहुत कुछ बदलने’ वाली मुलाकात बताया है, उससे शांति प्रयासों को लेकर इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के बाद क्या ठोस कदम सामने आते हैं, यह आगे की बातचीत पर निर्भर करेगा।

  • MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात

    MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात


    भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्यप्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार 24 सितंबर से प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि इससे पहले हल्की बारिश और रिमझिम का दौर जारी रहेगा। प्रदेश में अब तक औसतन 33.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का करीब 91% है।

    बारिश के नए दौर की वजह बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम तंत्र है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार तक लो प्रेशर एरिया उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में सक्रिय था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके पश्चिम-उत्तर दिशा में बढ़ने के साथ धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इसके 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने का अनुमान है।

    23 सितंबर से बढ़ेगी सक्रियता, 24 से भारी बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार इस सिस्टम का असर 23 सितंबर की सुबह से बढ़ना शुरू हो सकता है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है। 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    इस दिन छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मानसून की विदाई से पहले बनने वाला यह सिस्टम प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकता है।

    32 जिलों में 5 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश में अब तक हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 32 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 5% से 49% तक कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार हुआ है। रविवार तक बारिश का आंकड़ा माइनस 2% तक पहुंच गया था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश की कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश में भी कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% तक कम पानी गिरा है। ऐसे में 24 सितंबर से शुरू होने वाला बारिश का दौर इन क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    इस तरह मानसून की विदाई से पहले आने वाला नया मौसम सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में और सुधार कर सकता है। फिलहाल 23 सितंबर से गतिविधि बढ़ने और 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

  • आज का राशिफल 21 सितंबर 2026: ग्रहों की चाल से बदलेगा दिन का मिजाज, जानें 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा सोमवार

    आज का राशिफल 21 सितंबर 2026: ग्रहों की चाल से बदलेगा दिन का मिजाज, जानें 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा सोमवार


    नई दिल्ली। 21 सितंबर 2026 सोमवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग अलग अनुभव लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के कामकाज धन परिवार प्रेम और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर देखने को मिल सकता है। कुछ राशि के जातकों को काम में सफलता मिलने के संकेत हैं तो कुछ लोगों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जाती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन जिम्मेदारियों से भरा रह सकता है जबकि कारोबार करने वाले जातकों को किसी महत्वपूर्ण सौदे में फायदा मिल सकता है। परिवार में किसी सदस्य के साथ बातचीत करते समय संयम रखना बेहतर रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए सोमवार का दिन कामकाज के लिहाज से अच्छा रह सकता है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। कारोबार में लाभ के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े निवेश में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा।

    वृषभ राशि के लोगों को आज अपनी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आर्थिक मामलों में दिन सामान्य रह सकता है लेकिन अनावश्यक खर्च परेशानी बढ़ा सकता है। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न कर सकती है। घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की कोशिश करें।

    मिथुन राशि के लिए दिन नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। व्यापार में कोई नया संपर्क भविष्य में लाभ दे सकता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है।

    कर्क राशि के जातकों को आज भावनाओं में बहकर फैसला लेने से बचना चाहिए। नौकरी में काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन मेहनत का सकारात्मक परिणाम भी मिल सकता है। धन के मामले में सावधानी जरूरी है। घर परिवार में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करें।

    सिंह राशि के लिए सोमवार का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता सामने आएगी। कारोबारियों को लाभ का मौका मिल सकता है। सामाजिक क्षेत्र में मान सम्मान बढ़ सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति से बहस करने से बचें।

    कन्या राशि के जातकों को आज अपनी प्राथमिकताएं तय करके काम करना चाहिए। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। पुराने निवेश से लाभ की उम्मीद बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम लें।

    तुला राशि के लिए दिन रिश्तों और काम दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है। पार्टनर या परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। कारोबार में साझेदारी से जुड़े फैसले सोच समझकर लें। नौकरी में बदलाव की योजना बना रहे लोगों को अभी पूरी जानकारी जुटानी चाहिए।

    वृश्चिक राशि के जातकों को आज मेहनत का परिणाम मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हो सकती है। धन लाभ के अवसर बनेंगे लेकिन खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। परिवार में किसी बुजुर्ग की सलाह आपके काम आ सकती है।

    धनु राशि के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। यात्रा से जुड़े योग बन सकते हैं। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। किसी पुराने काम को पूरा करने में सफलता मिल सकती है। विद्यार्थियों के लिए भी दिन अच्छा रह सकता है।

    मकर राशि के जातकों को आज काम में धैर्य रखना होगा। किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में लेने से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। परिवार के साथ किसी छोटी बात को लेकर तनाव हो सकता है लेकिन बातचीत से स्थिति संभाली जा सकती है।

    कुंभ राशि के लिए सोमवार का दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिल सकता है। नौकरी में तरक्की के संकेत मिल सकते हैं। कारोबार में नए ग्राहक जुड़ सकते हैं। रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन मिला जुला रह सकता है। काम पूरा करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। धन संबंधी मामलों में सावधानी रखें। परिवार का सहयोग मिलेगा। किसी पुराने परिचित से बातचीत होने पर कोई उपयोगी जानकारी मिल सकती है।

  • दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । टेलीविजन के शुरुआती दौर में कुछ ऐसे धारावाहिक आए, जिन्होंने केवल मनोरंजन तक अपनी पहचान सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे टीवी उद्योग के काम करने के तरीके को बदल दिया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ भी ऐसा ही धारावाहिक था, जिसने प्रसारण के दौरान दर्शकों की जबरदस्त दिलचस्पी हासिल की और कमाई के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया।

    दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक के कुल 78 एपिसोड थे। इसके प्रसारण के दौरान देशभर में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उस समय टेलीविजन घरों में मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन रहा था और रामायण ने दर्शकों के बीच ऐसी जगह बनाई कि इसके प्रसारण के दौरान लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित होने लगी थी।

    पुराने आंकड़ों के अनुसार, पहली बार प्रसारण के समय रामायण को करीब 4 करोड़ लोगों ने देखा था। इसकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। धारावाहिक को 53 देशों में प्रसारित किया गया और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इसे बड़ी संख्या में दर्शक मिले।

    उपलब्ध आंकड़ों में बताया गया है कि दुनिया भर में रामायण को 65 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा। इसी वजह से इसे अपने दौर के सबसे अधिक देखे जाने वाले पौराणिक टेलीविजन धारावाहिकों में शामिल किया जाता है। दोबारा प्रसारण के दौरान भी इसकी लोकप्रियता देखने को मिली और नई पीढ़ी के दर्शकों ने भी इसे काफी पसंद किया।

    रामायण की सफलता का असर इसकी कमाई पर भी दिखाई दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले टेलीकास्ट के दौरान इस धारावाहिक ने दूरदर्शन के लिए करीब 23 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह आंकड़ा उस दौर के टेलीविजन बाजार को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

    इस कमाई में विज्ञापनों की बड़ी भूमिका रही। धारावाहिक की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई बड़े ब्रांड इससे जुड़े। कोलगेट, हिंदुस्तान लीवर और अरविंद मफतलाल जैसे ब्रांड्स ने इसके साथ विज्ञापन किए। रामायण के जरिए टेलीविजन कार्यक्रमों के साथ विज्ञापन जोड़ने की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ीं।

    उस दौर में टेलीविजन धारावाहिकों के साथ विज्ञापनों का कारोबार आज की तरह व्यापक नहीं था। रामायण की लोकप्रियता ने कंपनियों को यह समझने का मौका दिया कि किसी लोकप्रिय कार्यक्रम के साथ जुड़कर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसके बाद टेलीविजन पर विज्ञापन बाजार के विस्तार का रास्ता और मजबूत हुआ।

    रामायण की सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि इसने एक साथ कहानी, धार्मिक आस्था, दर्शकों की भागीदारी और व्यावसायिक सफलता को जोड़ा। इसके पात्र और कलाकार घर-घर में पहचाने जाने लगे। आज भी इस धारावाहिक से जुड़ी यादें दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

    इसी वजह से रामानंद सागर की रामायण को भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। 78 एपिसोड वाले इस धारावाहिक ने न केवल बड़ी दर्शक संख्या हासिल की, बल्कि कमाई और विज्ञापन के क्षेत्र में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसकी चर्चा दशकों बाद भी होती है।

  • केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से गर्भगृह से जुड़ा एक कथित वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर सामने आई इस रील को लेकर मंदिर की धार्मिक मर्यादा और निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बद्री-केदार मंदिर समिति ने वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    केदारनाथ धाम में इन दिनों यात्रा का दौर जारी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच गर्भगृह से संबंधित वीडियो और रील सोशल मीडिया पर सामने आने लगीं। इनमें से एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद मंदिर व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर गया।

    बताया गया है कि ‘हर्षित किचरा’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल से गर्भगृह के अंदर का वीडियो पोस्ट किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। इसके बाद मंदिर के भीतर वीडियो बनाने की अनुमति और वहां लागू नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई।

    मामले पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गंभीरता जताई है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह से संबंधित वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो की निगरानी भी की जा रही है।

    मंदिर समिति की ओर से पूरे मामले के कानूनी और धार्मिक पहलुओं की भी जांच कराई जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया और मंदिर में लागू नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि जांच के दौरान मंदिर समिति या मंदिर की व्यवस्था से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यानी जांच का दायरा केवल वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

    गर्भगृह मंदिर का अत्यंत महत्वपूर्ण और धार्मिक रूप से संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। ऐसे स्थान से वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर व्यवस्था से जुड़े नियमों का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और पूजा की निर्धारित प्रक्रिया की मर्यादा बनाए रखना है।

    फिलहाल मंदिर समिति की जांच जारी है और वायरल वीडियो से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वीडियो किसने बनाया, उसे किस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और इस दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।

    मंदिर समिति ने संकेत दिया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। साथ ही समिति की ओर से यह संदेश भी दिया गया है कि धार्मिक स्थल की व्यवस्था और निर्धारित नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।

  • त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    नई दिल्ली । देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ हवाई यात्रियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। विमान टिकटों के किराए में अचानक तेज बढ़ोतरी का दावा किया गया है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विमान कंपनियों के किराए पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की मांग की है।

    CTI के अनुसार, कुछ दिन पहले जिन घरेलू उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थे, उनके किराए में अब 50 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संगठन का कहना है कि त्योहारी मौसम में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने वाली है और इसी दौरान किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।

    त्योहारी सीजन गणपति महोत्सव से शुरू होकर दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। बढ़ती मांग के बीच टिकटों के दाम में तेज वृद्धि यात्रियों के यात्रा बजट को प्रभावित कर सकती है।

    किराए में बढ़ोतरी का असर प्रमुख घरेलू रूटों पर भी बताया गया है। कुछ समय पहले दिल्ली और मुंबई के बीच आने-जाने का हवाई किराया करीब 10 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार से 25 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसी तरह दिल्ली-अहमदाबाद रूट पर पहले करीब 10 से 12 हजार रुपये का किराया था, जो अब 18 से 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।

    दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी किराए में बड़ा अंतर सामने आया है। पहले जहां आने-जाने का टिकट करीब 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसके लिए 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी पहले लगभग 11 हजार रुपये का किराया था, जो अब करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

    CTI ने विमान कंपनियों की क्षमता में कमी का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में घरेलू उड़ानों की सीट क्षमता में 5.6 फीसदी की कमी आई है। इसमें इंडिगो की क्षमता 4.5 फीसदी और एयर इंडिया की 8.8 फीसदी कम होने का दावा किया गया है। CTI का कहना है कि बड़ी विमान कंपनियों के पास घरेलू बाजार का बड़ा हिस्सा होने के कारण सीटों की उपलब्धता में कमी का सीधा असर किराए पर पड़ता है।

    इसके अलावा छोटे बच्चों के हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। CTI के मुताबिक, तीन दिन से दो साल तक के बच्चों का शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इस आयु वर्ग के बच्चों को अलग सीट उपलब्ध नहीं कराई जाती।

    CTI ने सरकार से मांग की है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत देने के लिए विमान कंपनियों के किराए की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएं।

  • हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया

    हरदीप सिंह पुरी के बयान से पंजाब की सियासत गरम, भाजपा ने पुराने 22 सीटों वाले समझौते से अलग रुख साफ किया


    नई दिल्ली ।
    पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि यदि दोनों दल भविष्य में साथ आते हैं तो सीटों का बंटवारा बराबरी के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा अब पुराने गठबंधन के उस फॉर्मूले पर आगे नहीं बढ़ना चाहती, जिसमें उसे विधानसभा की सीमित सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ता था।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। हरदीप सिंह पुरी के बयान के मुताबिक भाजपा आधी सीटों पर दावेदारी चाहती है। उन्होंने पुराने 22 से 23 सीटों वाले फॉर्मूले को स्वीकार करने से इनकार किया और कहा कि भाजपा अब जूनियर पार्टनर की भूमिका में नहीं रहना चाहती। हालांकि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

    भाजपा और अकाली दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। पुराने समीकरण में अकाली दल अधिक सीटों पर चुनाव लड़ता था, जबकि भाजपा मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी के आधार पर सीमित सीटों पर मैदान में उतरती थी। वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था।

    अब भाजपा पंजाब में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की गतिविधियों और नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि वह राज्य में अपने संगठनात्मक आधार को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाना चाहती है। हाल के समय में भाजपा ने अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं और प्रभावशाली चेहरों को अपने साथ जोड़ा है।

    पंजाब की राजनीति में भाजपा की पारंपरिक पकड़ मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच रही है। पार्टी अब ग्रामीण क्षेत्रों और सिख समुदाय के बीच भी अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत कई प्रमुख सिख चेहरों के भाजपा से जुड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत और अटकलों के बीच भाजपा अपने हिस्से को लेकर स्पष्ट रुख अपनाती दिखाई दे रही है। पार्टी का जोर पुराने सहयोगी के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करने की स्थिति में बराबरी की भूमिका पर है।

    वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस चुनाव में अकाली दल को तीन सीटें और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। इसके बाद दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का सवाल महत्वपूर्ण बन गया है।

    हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा ने पंजाब में अपने संगठन और जनाधार के विस्तार पर भी जोर बढ़ाया है। पार्टी की ओर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने की बात सामने आई है। ऐसे में अकाली दल के साथ संभावित समझौते में सीटों की संख्या और भूमिका को लेकर बातचीत आसान नहीं होगी।

    फिलहाल भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हरदीप सिंह पुरी के बयान ने इतना स्पष्ट किया है कि यदि दोनों दल दोबारा साथ आते हैं तो भाजपा पुराने छोटे साझेदार वाले समीकरण के बजाय बराबरी की शर्त पर समझौता चाहती है। अब देखना होगा कि अकाली दल इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और दोनों दल आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए किस तरह का राजनीतिक समीकरण तैयार करते हैं।

  • गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    गिरगांव चा राजा गणपति की पर्यावरण-अनुकूल परंपरा ने बनाया खास, 24 फीट की मूर्ति में दिखती है अनोखी कलात्मक झलक

    नई दिल्ली । मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थापित होने वाला ‘गिरगांव चा राजा’ गणपति अपनी भव्यता के साथ पर्यावरण-अनुकूल परंपरा के लिए भी खास पहचान रखता है। हर साल गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस गणपति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी मूर्ति मिट्टी से तैयार की जाती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लंबे समय से इस परंपरा का हिस्सा रहा है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1928 में दक्षिण मुंबई की निकडवारी लेन से हुई थी। उस समय पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय आज की तरह सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद इस गणपति मंडल से जुड़े लोगों ने मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया।

    उस समय कई गणपति मूर्तियां प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई जाती थीं, लेकिन ‘गिरगांव चा राजा’ के लिए मिट्टी को प्राथमिकता दी गई। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना था। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी इसकी मूर्ति पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की जाती है।

    गणपति उत्सव के दौरान इस परंपरा को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से भी जोड़ा जाता है। मिट्टी से बनी मूर्ति के कारण विसर्जन के बाद इसके प्राकृतिक रूप से घुलने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होती है। यही वजह है कि यह गणपति पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव की चर्चा में विशेष स्थान रखता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘गिरगांव चा राजा’ का उल्लेख किया था। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली इसकी परंपरा की सराहना की थी। इसके बाद यह गणपति प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा गणपति के तौर पर भी चर्चित हुआ।

    इस गणपति की मूर्ति अपनी कलात्मक विशेषताओं के कारण भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई करीब 24 फीट बताई जाती है। मूर्ति की सूंड पर भगवान कृष्ण की तस्वीर बनाई जाती है, जो इसे एक अलग और विशिष्ट स्वरूप देती है।

    गिरगांव चा राजा का विसर्जन भी गणेशोत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। विशाल मूर्ति को गिरगांव की ऐतिहासिक गलियों से होते हुए गिरगांव चौपाटी तक ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुलूस में शामिल होते हैं।

    विसर्जन यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा में युवा ढोल और लेजिम के साथ शामिल होते हैं। संगीत और पारंपरिक नृत्य के बीच गणपति को विदाई दी जाती है। गिरगांव की गलियों से अरब सागर तक पहुंचने वाली यह यात्रा स्थानीय गणेशोत्सव की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

    ‘गिरगांव चा राजा’ की खासियत केवल उसकी विशाल मूर्ति या कलात्मक सजावट तक सीमित नहीं है। करीब एक सदी से चली आ रही मिट्टी की मूर्ति बनाने की परंपरा इसे पर्यावरण संरक्षण से जोड़ती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव के दौरान यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देता है।

    वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आधुनिक समय के पर्यावरणीय सरोकार भी जुड़े हैं। मिट्टी की मूर्ति, अनोखी कलाकारी और पारंपरिक विसर्जन जुलूस ने ‘गिरगांव चा राजा’ को मुंबई के प्रमुख गणपति उत्सवों में अलग पहचान दिलाई है।

  • राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

    राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में मोदी की मिमिक्री पर विवाद, बीजेपी ने बुजुर्ग महिला और मां के अपमान का लगाया आरोप

     
    मध्य प्रदेश : के इंदौर में आयोजित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणि ने प्रधानमंत्री मोदी की आवाज और बोलने के अंदाज की नकल की। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला से जुड़े प्रसंग का मजाक बनाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है।

    कार्यक्रम के दौरान की गई मिमिक्री का वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा और संवेदनशीलता से जोड़ते हुए सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी कॉमेडियंस और जोकर्स की पार्टी बन गई है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।

    शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ संवाद के लिए आयोजित कार्यक्रम का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी की दिवंगत मां के अपमान और मजाक के लिए किया गया। जोशी ने इसे मानवीय संवेदना और राजनीतिक संस्कृति से जुड़ा गंभीर मामला बताया।

    बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी की मौजूदगी में हुए इस मंचीय कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री से जुड़े निजी और पारिवारिक संदर्भों को मजाक का हिस्सा बनाया गया।

    वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने बीजेपी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मां से संबंधित कोई बात नहीं हुई। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की मां का उल्लेख नहीं किया और लगाए जा रहे आरोपों में तथ्य नहीं हैं। तिवारी ने आरोप लगाने से पहले पूरे मामले को सही तरीके से देखने की बात कही।

    विवाद के बीच राहुल गांधी ने इंदौर कार्यक्रम में उठाए गए छात्रों के मुद्दों को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि एक छात्रा ने उनसे सवाल किया कि सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है, लेकिन छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने के लिए क्यों नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि गांवों से शहरों में पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं को हॉस्टल नहीं मिलने पर पीजी में रहना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि किराए और सुरक्षित आवास का खर्च अधिक होने के कारण कई छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है। कार्यक्रम में छात्रों ने शिक्षा, भर्ती, परीक्षा, आरक्षण, हॉस्टल और रोजगार से जुड़े सवाल उठाए।

    ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का यह पांचवां संस्करण था। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इंदौर में एक छात्रा ने सरकारी परीक्षाएं पास करने के बावजूद ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के कारण नियुक्ति रुकने का मुद्दा उठाया। वहीं एक छात्र ने MPPSC में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने पर कार्रवाई होने की बात कही। इस बीच मोदी की मिमिक्री को लेकर शुरू हुआ विवाद कार्यक्रम के अन्य छात्र मुद्दों पर भारी पड़ता दिखाई दिया।

  • DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    नई दिल्ली । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तंज कसते हुए उनके हालिया कार्यक्रमों और मंच साझा करने को लेकर टिप्पणी की। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को सुनने के लिए लोग तैयार नहीं हैं और उन्हें कलाकारों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा।

    नतीजों के बाद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देशभर में ‘झूठ की गूंज’ चल रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सुनने के लिए कोई आने को तैयार नहीं है। दुबे ने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह 100 से ज्यादा चुनाव हार चुके हैं। यह संख्या उनके बयान का हिस्सा है।

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के हालिया मंच साझा करने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने नेहा राठौर के साथ मंच साझा किया। इसके बाद इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के साथ भी वह मंच पर नजर आए।

    इसी संदर्भ में निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब राहुल गांधी को राखी सावंत के साथ भी मंच साझा करना पड़ेगा। उनका यह बयान DUSU चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी पर की गई राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया।

    दुबे ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाने के लिए कलाकारों का सहारा लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में कलाकारों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने DUSU चुनाव परिणाम को भी युवाओं के राजनीतिक रुझान से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    DUSU चुनाव के परिणामों में अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। सचिव पद पर रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह 16,615 वोट के साथ विजयी रहे।

    इस तरह केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर ABVP उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया। चुनाव परिणाम के बाद छात्र राजनीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    निशिकांत दुबे ने DUSU परिणामों के अलावा झारखंड में SIR की प्रक्रिया को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप लगाए। सारठ में SIR प्रक्रिया के दौरान 34 लोगों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में प्रक्रिया के दौरान जो गड़बड़ियां हो रही हैं, उन्हें सरकार खुद करवा रही है।

    उन्होंने सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बेहतर काम कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता SIR की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने झारखंड में MMDR बिल के विरोध सहित कई राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।