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  • LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!

    LIC के साथ ₹2684 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में CBI का एक्शन…. अनिल अंबानी समेत कई पर केज दर्ज!


    नई दिल्ली।
    अनिल अंबानी (Anil Ambani) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई-CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी) (Reliance Capital Limited – RCAP), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। एक खबर के मुताबिक यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (Life Insurance Corporation of India – LIC) के निवेश से जुड़े 2684 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। हालांकि, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों को खारिज किया है।


    क्या कहा प्रवक्ता ने?

    प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा, ”सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है। अनिल अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के बोर्ड में गैर कार्यकारी निदेशक/चेयरमैन रहे। नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कंपनी के निदेशक मंडल को हटाकर एक प्रशासक नियुक्त कर दिया था।” प्रवक्ता के मुताबिक अनिल अंबानी ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और कानून के तहत उन्हें मिले सभी अधिकारों को वह सुरक्षित रखते हैं।


    क्या है आरोप?

    सीबीआई के अनुसार, एलआईसी का आरोप है कि 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच उसने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड द्वारा जारी किए गए पांच अपरिवर्तनीय ‘डिबेंचर’ खरीदे थे, जिनकी कुल कीमत 3,900 करोड़ रुपये थी। ये निवेश सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों, फंड की जरूरतों और मौजूदा कर्ज को फिर से री-फाइनेंस के लिए किए गए थे।

    एलआईसी का आरोप है कि आरोपी व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश रची और कई अपराध किए, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक कदाचार, फंड का गलत इस्तेमाल/गबन और खातों में हेराफेरी शामिल हैं। एलआईसी का आरोप है कि आरोपियों ने गलत जानकारी देकर उसे कंपनी में निवेश करने के लिए छल से राजी किया और उसके बाद धोखाधड़ी से फंड को अन्य खातों में भेज दिया। इन कथित कृत्यों की वजह से एलआईसी को 2,684 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।


    पहले भी कई मामले दर्ज

    सीबीआई ने बताया कि उसने पहले कई सरकारी बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के खिलाफ आठ प्राथमिकी दर्ज की थीं।

    इन मामलों में अब तक छह आरोपपत्र दाखिल किये जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बयान में कहा गया है कि मामलों की जांच चल रही है और उच्चतम न्यायालय इनकी निगरानी कर रहा है।

  • MP: शिवपुरी में 1.24 करोड़ के सरकारी भवन में पड़ी दरारें, महज 18 दिन पहले किया था उद्घाटन

    MP: शिवपुरी में 1.24 करोड़ के सरकारी भवन में पड़ी दरारें, महज 18 दिन पहले किया था उद्घाटन


    शिवपुरी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के खनियाधाना (Khaniadhana) में विकास और निर्माण कार्यों की पोल खोलने वाली एक तस्वीर सामने आई है. जिस इमारत पर 1 करोड़ 24 लाख रुपया खर्च किया गया, वह उद्घाटन के महज 18 दिन के भीतर ही जर्जर हालत में पहुंच गई है। खनियाधाना से बामोरकलां में शिफ्ट होने वाली नवनिर्मित उप तहसील की इस बिल्डिंग (Newly constructed sub-tehsil building) में जगह-जगह गहरी दरारें उभर आई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

    बीती 31 अगस्त को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पिछोर विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने बड़े ही उत्साह के साथ बामोरकलां नई उप तहसील भवन का लोकार्पण किया था. इस भवन के निर्माण को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से तारीफ की थी।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य में घोर लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया . ठेकेदार को इस बात का अंदेशा था कि पोल जल्द खुल जाएगी, इसलिए उसने आनन-फानन में दीवारों पर आई दरारों पर पुताई और लीपापोती करवा दी और जनप्रतिनिधियों से फीता कटवा दिया. अब स्थिति यह है कि लोकार्पण के ठीक 18 दिन बाद ही पुताई की परतें उखड़ने लगी हैं और बिल्डिंग के भीतर व बाहर चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।

    इस पूरे मामले को लेकर जब खनियाधाना तहसीलदार निशिकांत जैन से बात की गई तो उनका कहना है कि पीयू के अधिकारी और ठेकेदार को बिल्डिंग में आई दरार और अन्य खामियों को लेकर अवगत करा दिया गया है. उनका कहना है कि उन्होंने अभी बिल्डिंग का पजेशन नहीं लिया गया है.


    किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश

    खनियाधाना से बामोरकलां शिफ्ट होने वाली इस उप-तहसील भवन की बदहाली से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों में गहरा रोष व्याप्त है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के 1.24 करोड़ रुपये पानी में बहा दिए गए और अधिकारियों व ठेकेदार की सांठगांठ के कारण पहली ही बारिश और 18 दिनों में इमारत की नींव हिलने लगी है।

  • ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा बदलाव… चीन ने बड़ा स्टॉक जमा कर बदल दिया तेल का पूरा खेल!

    ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा बदलाव… चीन ने बड़ा स्टॉक जमा कर बदल दिया तेल का पूरा खेल!


    बीजिंग।
    ईरान युद्ध (Iran War) ने तेल क्षेत्र (Global Oil Market ) में ऐसा बदलाव ला दिया है, जिसकी शायद किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी। अब तक यही नियम चलता था कि जिनके पास तेल कुएं हैं, यानी सऊदी अरब (Saudi Arabia) या अमेरिका (America) जैसे निर्यातक देश ही आपूर्ति और कीमतों की चाल तय करते थे। आयातक देशों को हमेशा उनके इशारों पर नाचना पड़ता था। लेकिन चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदार होते हुए भी पूरा पासा पलट दिया है।

    चीन (China) ने काफी मात्रा में कच्चा तेल जमा करके, शोधन क्षमता बढ़ाकर और कोयले तथा अन्य विकल्पों में निवेश करके अपनी सबसे बड़ी कमजोरी (तेल के लिए दूसरों पर निर्भर होना) को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है। अब आयातक देश अपनी मनमर्जी से तेल का बाजार नहीं चला सकते। चीन ने दिखा दिया है कि वह जब चाहे तेल खरीदकर कीमतें बढ़ा सकता है और जब चाहे खरीदारी रोककर कीमतें गिरा सकता है। इसके अलावा, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में आगे होने के कारण व अब कच्चे तेल का मोहताज भी नहीं रहा है।


    रणनीतिक ताकत का कराया अहसास

    ईरान जंग के शुरुआती महीनों में चीन ने पड़ोसियों को ईंधन आपूर्ति रोक अपनी ताकत का अहसास कराया। वहीं, पश्चिम एशिया पर निर्भर अन्य देशों के पास दूसरे विकल्प नहीं थे। उन्हें या तो ऊर्जा इस्तेमाल घटाना पड़ा या भारी कीमत चुकानी पड़ी।


    तीन तरीकों से खुद को बनाया आत्मनिर्भर

    – विशाल रिजर्व : जब तेल सस्ता था, तब चीन ने चुपचाप भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदकर अपने गोदामों में भर लिया। आज दुनिया के कुल ज्ञात आपातकालीन तेल भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अकेला चीन के पास है।
    – मौके का फायदा : दुनियाभर में तेल की किल्लत हुई तो चीन ने अपने पुराने स्टॉक का इस्तेमाल शुरू किया और आयात 23% घटा दिया। तेल कीमतें काबू में रहीं। चीन ने साबित कर दिया कि अगर वो खरीदना बंद कर दें, तो तेल बेचने वाले संकट में आ जाएंगे।


    ईंधन बना कूटनीतिक हथियार

    चीन के पास उसे पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन में बदलने की सबसे बड़ी फैक्ट्रियां भी हैं। युद्ध के समय उसने अपने पड़ोसी देशों को डीजल-पेट्रोल की सप्लाई रोक दी। वियतनाम जैसे करीबी दोस्तों को ईंधन दिया लेकिन फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया को आपूर्ति रोक दी।


    मांग घटाकर भी खुद को कर रहा मजबूत

    चीन ने अपनी खपत भी घटा दी है। दूसरी तिमाही में चीन ने हर रोज 15 लाख बैरल कम तेल का इस्तेमाल किया, जो वैश्विक मांग में 1% से अधिक की गिरावट के बराबर है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, चीन में यात्री कारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अब 14 प्रतिशत है। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है और कोयले से रसायन बनाने की तकनीक भी है, जो हर देश के पास नहीं है।

  • Share Market में पैसा लगाना है तो पहले समझें पूरा तरीका: Risk से बचने के लिए निवेशकों को पता होनी चाहिए ये बातें

    Share Market में पैसा लगाना है तो पहले समझें पूरा तरीका: Risk से बचने के लिए निवेशकों को पता होनी चाहिए ये बातें


    नई दिल्ली। आज के समय में Share Market निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बैंक में पैसा रखने के अलावा कई लोग अपने भविष्य के लिए शेयर बाजार में निवेश करने के बारे में सोचते हैं। बाजार में मिलने वाले रिटर्न की संभावनाएं लोगों को आकर्षित करती हैं लेकिन शेयर बाजार में निवेश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी के केवल किसी की सलाह या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के आधार पर पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है।

    Share Market में निवेश शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि यहां पैसा किसी कंपनी के शेयर में लगाया जाता है। कंपनी के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन के साथ उसके शेयर की कीमत में उतार चढ़ाव हो सकता है। बाजार ऊपर जाने पर निवेश की वैल्यू बढ़ सकती है लेकिन गिरावट आने पर नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी Risk Capacity और Financial Goal को समझना जरूरी है।

    शेयर बाजार में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले Demat Account और Trading Account की जरूरत होती है। इन्हीं के जरिए शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। Account खोलने से पहले Broker की सुविधाओं और शुल्क से जुड़ी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। इसके बाद निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अलग अलग कंपनियों और निवेश विकल्पों का अध्ययन कर सकता है।

    किसी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार को समझना बेहद जरूरी है। कंपनी क्या काम करती है उसकी कमाई किस तरह होती है कंपनी पर कितना कर्ज है और पिछले कुछ वर्षों में उसका प्रदर्शन कैसा रहा है जैसे सवालों पर ध्यान दिया जा सकता है। कंपनी के Financial Results और अन्य सार्वजनिक जानकारी को पढ़कर निवेशक किसी कंपनी को बेहतर तरीके से समझ सकता है।

    नए निवेशकों के लिए एक बड़ी गलती यह हो सकती है कि वे अपना पूरा पैसा एक ही शेयर में लगा दें। किसी एक कंपनी या एक ही सेक्टर पर पूरी तरह निर्भर रहने से जोखिम बढ़ सकता है। निवेश में Diversification यानी अलग अलग कंपनियों और Asset Classes में पैसा बांटने की रणनीति जोखिम को समझने और संभालने में मदद कर सकती है। हालांकि Diversification भी बाजार में नुकसान की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

    Share Market में निवेश करते समय जल्दबाजी से बचना भी जरूरी है। शेयर की कीमत तेजी से बढ़ रही हो तो केवल इस वजह से उसे खरीदना या गिरावट देखकर घबराकर बेच देना हमेशा सही रणनीति नहीं होती। बाजार में Short Term उतार चढ़ाव सामान्य हो सकते हैं। इसलिए निवेश का फैसला अपने लक्ष्य और Risk Profile को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

    नए निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि शेयर बाजार में Guaranteed Return जैसी कोई चीज नहीं होती। किसी व्यक्ति के पुराने रिटर्न को देखकर यह मान लेना कि भविष्य में भी उतना ही फायदा मिलेगा सही नहीं है। इसी तरह WhatsApp और Social Media पर मिलने वाले Tips पर बिना जांच के पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति पहली बार Share Market में निवेश शुरू कर रहा है तो पहले बाजार की बुनियादी जानकारी हासिल करना और छोटी राशि से शुरुआत करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। निवेश से पहले अपनी आय खर्च बचत और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर SEBI Registered Investment Adviser से सलाह ली जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Share Market में निवेश को जल्दी पैसा कमाने के साधन के बजाय जोखिम और संभावित रिटर्न को समझते हुए लंबे समय की वित्तीय योजना का हिस्सा माना जाए।

  • विराट कोहली से मुलाकात के बाद मुंबई लौटे शिंदे का iPhone हुआ गायब: रात 3 बजे मचा हड़कंप और 4 बजे विमान में मिला फोन

    विराट कोहली से मुलाकात के बाद मुंबई लौटे शिंदे का iPhone हुआ गायब: रात 3 बजे मचा हड़कंप और 4 बजे विमान में मिला फोन


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मुंबई लौटने के बाद उस समय अजीब स्थिति बन गई जब उनका iPhone अचानक गायब हो गया। लंदन के करीब एक सप्ताह के दौरे से वापस लौटे शिंदे को घर पहुंचने के लगभग एक घंटे बाद पता चला कि उनका मोबाइल फोन उनके पास नहीं है। इसके बाद उनकी टीम ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और फोन की तलाश शुरू कर दी गई। जांच के दौरान पता चला कि फोन किसी अन्य जगह पर नहीं बल्कि उसी ब्रिटिश एयरवेज के विमान में छूट गया था जिससे शिंदे मुंबई पहुंचे थे। करीब एक घंटे की तलाश के बाद फोन विमान के अंदर मिल गया और रात करीब 4 बजे उसे शिंदे को वापस सौंप दिया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक एकनाथ शिंदे करीब एक सप्ताह के लंदन दौरे पर थे। वह 5 सितंबर को अपने करीबी सहयोगियों के साथ ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे। दौरे के दौरान उन्होंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। लंदन से मुंबई लौटते समय उन्होंने ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट से यात्रा की। विमान करीब रात 2 बजे मुंबई पहुंचा था। एयरपोर्ट से निकलने के बाद शिंदे अपने घर चले गए। घर पहुंचने के लगभग एक घंटे बाद रात करीब 3 बजे उन्हें महसूस हुआ कि उनका iPhone उनके पास नहीं है।

    फोन गायब होने की जानकारी मिलते ही शिंदे की टीम सक्रिय हो गई। पुलिस को सूचना देने के बाद एयरलाइन की सुरक्षा टीम से संपर्क किया गया। चूंकि फोन के विमान में छूटने की आशंका थी इसलिए सुरक्षा टीम ने विमान के अंदर उसकी तलाश शुरू की। काफी जांच के बाद फोन विमान के भीतर ही मिल गया। करीब रात 4 बजे iPhone शिंदे को वापस सौंप दिया गया। इस तरह फोन गायब होने से लेकर उसके बरामद होने तक करीब एक घंटे का समय लगा।

    एकनाथ शिंदे के लंदन दौरे के दौरान उनकी मुलाकात भारतीय क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली से भी हुई थी। दोनों की मुलाकात से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी सामने आने के बाद यह दौरा चर्चा में रहा था। रिपोर्ट के अनुसार शिंदे ने लंदन में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पूर्व आवास में बने स्मारक का दौरा भी किया। इसके अलावा लंदन में वड़ा पाव खाते हुए उनकी तस्वीर और वीडियो भी चर्चा में रहे।

    शिंदे के iPhone को लेकर यह जानकारी भी सामने आई है कि वह वीडियो कॉल के लिए नियमित तौर पर इसका इस्तेमाल करते हैं। बैठकों और अन्य व्यस्त कार्यक्रमों के दौरान वह कभी-कभी अपना मोबाइल निजी सहायक को भी सौंप देते हैं। ऐसे में मुंबई लौटने के बाद फोन के गायब होने की जानकारी मिलने पर उनकी टीम ने तुरंत उसकी तलाश शुरू कर दी।

    खास बात यह है कि एकनाथ शिंदे के मोबाइल फोन के गायब होने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले जब वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे तब भी उनका एक फोन गायब हुआ था। बाद में उस फोन को भी बरामद कर लिया गया था। इस बार भी कुछ समय की तलाश के बाद उनका iPhone उसी विमान के भीतर मिल गया। फोन मिलने के बाद शिंदे और उनकी टीम ने राहत की सांस ली।

  • जैंपा का बड़ा कारनामा: 200 वनडे विकेट पूरे कर शेन वॉर्न का रिकॉर्ड तोड़ा, इस मामले में भारतीय गेंदबाज भी पीछे

    जैंपा का बड़ा कारनामा: 200 वनडे विकेट पूरे कर शेन वॉर्न का रिकॉर्ड तोड़ा, इस मामले में भारतीय गेंदबाज भी पीछे


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के स्टार स्पिन गेंदबाज एडम जैंपा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने नाम एक बड़ी उपलब्धि दर्ज कर ली है। हरारे में खेले गए मुकाबले में जैंपा ने दो विकेट हासिल किए और इसी के साथ वनडे क्रिकेट में अपने 200 विकेट पूरे कर लिए। इस उपलब्धि के साथ वह ऑस्ट्रेलिया की ओर से वनडे में सबसे तेज 200 विकेट लेने वाले स्पिन गेंदबाज बन गए हैं। जैंपा ने इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न का पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। वॉर्न ने 125 वनडे मुकाबलों में 200 विकेट पूरे किए थे जबकि जैंपा ने यह मुकाम 123 मैचों में हासिल किया।

    ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए दूसरे वनडे में कंगारू टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार स्कोर खड़ा किया। ट्रैविस हेड के तूफानी शतक की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवर में 6 विकेट खोकर 356 रन बनाए। इसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 48.3 ओवर में 272 रन पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया ने यह मुकाबला 84 रन से जीतकर तीन मैचों की वनडे सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। जैंपा ने गेंद से अहम भूमिका निभाते हुए दो विकेट चटकाए और इसी दौरान अपने वनडे करियर के 200 विकेट पूरे कर लिए।

    जैंपा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने शेन वॉर्न जैसे दिग्गज गेंदबाज का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा है। वॉर्न ने ऑस्ट्रेलिया के लिए वनडे क्रिकेट में 125 मैचों में 200 विकेट पूरे किए थे। अब जैंपा 123 मैचों में यह आंकड़ा हासिल करके ऑस्ट्रेलिया के सबसे तेज स्पिनर बन गए हैं। हालांकि पूरी दुनिया में सबसे तेज 200 वनडे विकेट लेने वाले स्पिन गेंदबाज का रिकॉर्ड अभी भी पाकिस्तान के सकलैन मुश्ताक के नाम है।

    सकलैन मुश्ताक ने केवल 104 वनडे मैचों में 200 विकेट पूरे किए थे। इस मामले में अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान दूसरे स्थान पर हैं। राशिद ने 115 मैचों में यह उपलब्धि हासिल की थी। अब 123 मैचों के साथ जैंपा इस खास सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उनके बाद शेन वॉर्न का नाम आता है जिन्होंने 125 मैचों में 200 विकेट पूरे किए थे। इंग्लैंड के आदिल रशिद 137 मैचों के साथ इस सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    इस रिकॉर्ड सूची में भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो टॉप पांच में कोई भी भारतीय शामिल नहीं है। भारत की ओर से सबसे ऊपर अनिल कुंबले का नाम है। कुंबले ने वनडे क्रिकेट में 200 विकेट तक पहुंचने के लिए 147 मैच खेले थे और वह इस सूची में सातवें स्थान पर हैं। उनके बाद हरभजन सिंह का नाम आता है जिन्होंने 178 वनडे मैचों में 200 विकेट पूरे किए थे।

    एडम जैंपा के लिए यह उपलब्धि उनके वनडे करियर में एक और बड़ा पड़ाव है। ऑस्ट्रेलियाई टीम को जिम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज में लगातार दूसरी जीत दिलाने में उनकी गेंदबाजी का भी अहम योगदान रहा। अब जैंपा की नजर अपने प्रदर्शन को आगे और मजबूत करने पर होगी जबकि क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वह आने वाले मुकाबलों में अपनी विकेटों की संख्या को कहां तक पहुंचाते हैं।

  • शनिदेव की कृपा के लिए शनिवार व्रत में रखें इन बातों का ध्यान जानिए क्या करें और क्या नहीं शनिवार व्रत की विधि और नियम

    शनिदेव की कृपा के लिए शनिवार व्रत में रखें इन बातों का ध्यान जानिए क्या करें और क्या नहीं शनिवार व्रत की विधि और नियम


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव न्याय के देवता हैं और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिदेव को प्रसन्न करने और जीवन में चल रही परेशानियों से राहत की कामना के लिए कई लोग शनिवार का व्रत रखते हैं। शनिवार व्रत के दौरान पूजा के साथ संयम और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान शनिदेव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के स्थान को साफ करके शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव की पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में काले तिल और सरसों के तेल का विशेष महत्व बताया गया है।

    शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके अलावा काले तिल काले वस्त्र और जरूरत के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। कुछ लोग शनिदेव के मंदिर जाकर पूजा करते हैं और तेल का दीपक जलाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दान और सेवा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

    व्रत के दौरान भोजन को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ भक्त पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कई लोग फलाहार करके व्रत करते हैं। फल दूध मखाना या अन्य सात्विक चीजों का सेवन अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है। व्रत के दौरान भोजन से ज्यादा मन और व्यवहार की शुद्धता को महत्व दिया जाता है। इसलिए क्रोध झूठ छल कपट और किसी को नुकसान पहुंचाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    शनिवार व्रत में हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव की विशेष कृपा रहती है। इसलिए शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना या हनुमान जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है। कुछ भक्त शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं।

    शनिवार व्रत का पारण अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार किया जाता है। व्रत पूरा होने के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए क्योंकि सेवा और दया को शनिदेव की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार व्रत का उद्देश्य केवल शनिदेव को प्रसन्न करना नहीं बल्कि व्यक्ति को संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करना भी है। इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन अच्छे विचार रखने और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करना चाहिए। शनिवार व्रत से जुड़े नियम अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकते हैं इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार पूजा विधि अपनाना उचित माना जाता है।

  • महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म

    महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म


    नई दिल्ली। मराठी सिनेमा की फिल्म गोंधल ने 2027 में होने वाले 99वें अकादमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में जगह बनाई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा गोंधल के इर्द गिर्द बुनी गई है। फिल्म के ऑस्कर तक पहुंचने के बाद अब महाराष्ट्र की इस लोक परंपरा को लेकर भी देशभर में उत्सुकता बढ़ गई है।

    गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है जिसमें भक्ति गीत संगीत नृत्य और देवी देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस रस्म को आमतौर पर गोंधली समुदाय के लोग करते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य के जरिए देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। गोंधल का आयोजन खास तौर पर रात के समय होने वाले धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। महाराष्ट्र में शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी इस परंपरा का आयोजन किया जाता है।

    गोंधल के दौरान ढोल सहित कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। तुंतुणे और धातु से बने वाद्य भी इसकी प्रस्तुति का हिस्सा होते हैं। कई आयोजनों में मशाल या दीपक की रोशनी के बीच कलाकार गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं। पूरी रस्म भक्ति और सामूहिक सहभागिता के माहौल में आगे बढ़ती है और अंत में आरती के साथ इसका समापन होता है।

    महाराष्ट्र में गोंधल का महत्व केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जाता। यह लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक जीवन का भी हिस्सा रहा है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ जुटते हैं और पूजा पाठ के साथ रातभर भक्ति संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उनके अनुसार यह ऐसा सामुदायिक आयोजन रहा है जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और उत्सव का हिस्सा बनते थे।

    निर्देशक संतोष दावखर ने अपने बचपन के अनुभवों से प्रेरणा लेकर गोंधल को फिल्म की कहानी का केंद्र बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात के समय होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है। इसमें इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। शादी के बाद सुमन एक अमीर परिवार में अपनी जिंदगी से परेशान नजर आती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।

    इसके बाद कहानी में रिश्तों के बदलते समीकरण सामने आते हैं। विश्वास और धोखे के बीच घटनाएं आगे बढ़ती हैं और मामला हत्या की साजिश तक पहुंचता है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बल्कि कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आता है।

    अब फिल्म के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की राह पर है। गोंधल फिल्म के माध्यम से इस परंपरा को केवल धार्मिक रस्म के रूप में नहीं बल्कि महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और सामुदायिक विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखने का अवसर मिलेगा।

  • टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर पर सस्पेंस बरकरार! 25 टेस्ट वाले पार्थिव पटेल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    टीम इंडिया के चीफ सेलेक्टर पर सस्पेंस बरकरार! 25 टेस्ट वाले पार्थिव पटेल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने अभी तक अगरकर के कार्यकाल को आगे बढ़ाने या नया चीफ सेलेक्टर नियुक्त करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन इस बीच पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम संभावित उम्मीदवार के तौर पर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब छह महीनों से BCCI के भीतर पार्थिव पटेल के नाम पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में चयन समिति के नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

    अगरकर को एक्सटेंशन मिलने की संभावना फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि भारतीय क्रिकेट से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार अगर BCCI और अगरकर के बीच नए कार्यकाल को लेकर सहमति नहीं बनती है तो पार्थिव पटेल को चयन समिति की कमान सौंपी जा सकती है। बोर्ड ने अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने वार्षिक आम बैठक के बाद इतना जरूर कहा कि इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए बोर्ड के पदाधिकारियों को अधिकृत किया गया है।

    अजीत अगरकर ने हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे और टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का चयन किया था। इसके अलावा ईरानी कप के लिए रेस्ट ऑफ इंडिया की टीम भी उनके नेतृत्व वाली चयन समिति ने चुनी। रिपोर्ट के मुताबिक यह मौजूदा चयन समिति के चेयरमैन के तौर पर अगरकर की आखिरी सेलेक्शन मीटिंग हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    अगरकर की स्थिति को लेकर चर्चा उस समय भी बढ़ी थी जब वह भारतीय क्रिकेट की एक अहम रिव्यू मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे। इस बैठक में BCCI के शीर्ष अधिकारी हेड कोच गौतम गंभीर टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण समेत कई अहम लोग मौजूद थे। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने अगरकर की गैरमौजूदगी की वजह उनके शहर से बाहर होना बताया था।

    वहीं संभावित नए चीफ सेलेक्टर के रूप में पार्थिव पटेल का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लंबा अनुभव रहा है। 41 साल के पार्थिव ने भारत के लिए 25 टेस्ट 38 वनडे और 2 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं। अगर वह चयन समिति के चेयरमैन बनते हैं तो मौजूदा पैनल में टेस्ट मैचों के लिहाज से सबसे अनुभवी सदस्य होंगे। मौजूदा पैनल में शिवसुंदर दास ने 23 प्रज्ञान ओझा ने 24 आरपी सिंह ने 14 और अजय रात्रा ने 6 टेस्ट खेले हैं।

    संन्यास के बाद भी पार्थिव पटेल क्रिकेट से लगातार जुड़े हुए हैं। वह फिलहाल गुजरात टाइटन्स के असिस्टेंट और बैटिंग कोच की भूमिका में हैं और उपलब्धता के अनुसार कमेंट्री भी करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगले IPL सीजन में गुजरात टाइटन्स के साथ उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना थी लेकिन यदि BCCI उन्हें चयन समिति का चेयरमैन नियुक्त करता है तो फ्रेंचाइजी को अपने कोचिंग सेटअप में बदलाव करना पड़ सकता है।

    भारतीय टीम के लिए आने वाला समय भी बेहद अहम है। 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियां चल रही हैं और वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 का चक्र भी जारी है। ऐसे में चयन समिति के नेतृत्व को लेकर BCCI का फैसला टीम इंडिया की आगे की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल अगरकर के भविष्य पर अंतिम फैसला बाकी है और पार्थिव पटेल का नाम संभावित विकल्प के रूप में चर्चा में बना हुआ है।

  • महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़कर आजमाएं केसर का नुस्खा चेहरे की चमक के लिए ऐसे करें इस्तेमाल

    महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़कर आजमाएं केसर का नुस्खा चेहरे की चमक के लिए ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। केसर का इस्तेमाल सदियों से खानपान के साथ साथ सौंदर्य देखभाल में भी किया जाता रहा है। इसकी खुशबू और रंग के अलावा इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसे त्वचा के लिए उपयोगी माना जाता है। खासतौर पर चेहरे की देखभाल में केसर का इस्तेमाल त्वचा को मुलायम बनाए रखने और चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाने के लिए किया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

    केसर को त्वचा की देखभाल में शामिल करने का एक आसान तरीका केसर वाला फेस पैक है। इसके लिए कुछ केसर के रेशों को थोड़े से दूध में भिगोकर रखा जा सकता है। कुछ समय बाद जब दूध में केसर का रंग उतर जाए तो इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। करीब दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा पर नमी महसूस हो सकती है और चेहरे को फ्रेश लुक मिल सकता है।

    केसर को शहद के साथ मिलाकर भी फेस पैक तैयार किया जाता है। शहद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है जबकि केसर को पारंपरिक रूप से त्वचा की रंगत और चमक से जोड़कर देखा जाता है। इसके लिए केसर के कुछ रेशों को थोड़े से शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। कुछ देर बाद चेहरा धो लें। यदि त्वचा संवेदनशील है तो इस मिश्रण का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहेगा।

    केसर और एलोवेरा जेल का मिश्रण भी घरेलू स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी देने में मदद कर सकता है। वहीं केसर को इसके प्राकृतिक गुणों के कारण त्वचा की देखभाल में शामिल किया जाता है। दोनों को थोड़ी मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे आंखों के आसपास लगाने से बचना चाहिए।

    केसर का इस्तेमाल करते समय मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है। ज्यादा केसर लगाने से ज्यादा फायदा मिलेगा ऐसा जरूरी नहीं है। प्राकृतिक चीज होने के बावजूद कुछ लोगों को इससे एलर्जी या जलन हो सकती है। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर पैच टेस्ट करना समझदारी है। जलन लालिमा खुजली या सूजन जैसी परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    चेहरे की चमक केवल किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    केसर को स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जा सकता है लेकिन इसे किसी इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे दाग खुजली या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी हुई है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। घरेलू उपायों का इस्तेमाल सावधानी के साथ करने पर केसर आपकी सामान्य त्वचा देखभाल का एक हिस्सा बन सकता है।