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  • कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?

    कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?


    नई दिल्ली। आज उत्तर कोरिया का नाम आते ही दुनिया से कटे हुए एक ऐसे देश की तस्वीर सामने आती है, जहां कड़े सरकारी नियंत्रण, परमाणु हथियार, सीमित स्वतंत्रता और बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग-थलग व्यवस्था है। लेकिन करीब आठ-नौ दशक पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। आज का उत्तर कोरिया कभी पूरे कोरियाई प्रायद्वीप का सबसे विकसित, औद्योगिक और आधुनिक क्षेत्र माना जाता था।

    इतिहास से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि 1948 में उत्तर कोरिया के गठन और किम इल सुंग के सत्ता में आने से पहले यह क्षेत्र एकीकृत कोरिया का हिस्सा था। उस समय राजधानी प्योंगयांग शिक्षा, संस्कृति और ईसाई धर्म का प्रमुख केंद्र थी। बड़ी संख्या में चर्च, मिशनरी स्कूल और आधुनिक शिक्षण संस्थान मौजूद थे। इसी वजह से प्योंगयांग को कभी “पूर्व का यरुशलम” भी कहा जाता था। यहां लोगों को धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी।

    औद्योगिक विकास में था सबसे आगे
    1910 से 1945 के बीच जापान के औपनिवेशिक शासन के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्से को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यहां खनिज संपदा, कोयला और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण बड़े स्टील प्लांट, जलविद्युत परियोजनाएं, रासायनिक कारखाने और रेलवे नेटवर्क विकसित किए गए। उस समय दक्षिणी क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर था, जबकि उत्तर तकनीकी और औद्योगिक रूप से अधिक मजबूत माना जाता था।

    विभाजन के बाद बदल गई तस्वीर
    द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद 1945 में कोरिया को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया। उत्तरी भाग सोवियत संघ के प्रभाव में आया और 1948 में किम इल सुंग के नेतृत्व में उत्तर कोरिया की स्थापना हुई। इसके बाद 1950 से 1953 तक चले कोरियाई युद्ध ने देश के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया। भारी बमबारी में शहर, उद्योग और बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।

    युद्ध के बाद सोवियत संघ और चीन की आर्थिक सहायता से उत्तर कोरिया ने तेज़ी से पुनर्निर्माण किया और 1970 के दशक तक उसकी अर्थव्यवस्था कई मामलों में दक्षिण कोरिया के बराबर या उससे बेहतर मानी जाती थी।

    ‘जुचे’ नीति और अलगाव की शुरुआत
    बाद के वर्षों में किम इल सुंग ने ‘जुचे’ (आत्मनिर्भरता) की नीति अपनाई, जिसके तहत देश ने बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली। 1990 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद आर्थिक सहायता और सस्ते तेल की आपूर्ति बंद हो गई, जिससे उत्तर कोरिया गंभीर आर्थिक संकट और अकाल की चपेट में आ गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उस दौर में भुखमरी और कुपोषण से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

    दक्षिण और उत्तर कोरिया की अलग राह
    जहां दक्षिण कोरिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और खुली अर्थव्यवस्था को अपनाते हुए तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई, वहीं उत्तर कोरिया ने सीमित संसाधनों का बड़ा हिस्सा रक्षा और परमाणु कार्यक्रमों पर केंद्रित किया। समय के साथ दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास में बड़ा अंतर पैदा हो गया।

    सख्त नियंत्रण वाली व्यवस्था
    उत्तर कोरिया में नागरिकों के जीवन पर सरकारी नियंत्रण बेहद कड़ा माना जाता है। वहां सामाजिक स्थिति का निर्धारण कथित ‘सोंगबुन’ व्यवस्था के आधार पर किया जाता है, जिसमें परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि और शासन के प्रति निष्ठा को महत्व दिया जाता है। शिक्षा व्यवस्था में भी शासन और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है।

    देश के भीतर आवागमन, सूचना तक पहुंच और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर भी व्यापक नियंत्रण है। बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क और बंद व्यवस्था के कारण उत्तर कोरिया आज भी दुनिया के सबसे रहस्यमयी देशों में गिना जाता है।

    कभी औद्योगिक प्रगति, आधुनिक शिक्षा और आर्थिक विकास का केंद्र रहा यह क्षेत्र आज अपनी राजनीतिक व्यवस्था, सीमित खुलापन और वैश्विक अलगाव के कारण पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है।

  • रोज सूर्यदेव को अर्घ्य देने से खुलते हैं सफलता के द्वार जानिए जल चढ़ाने के अद्भुत धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ

    रोज सूर्यदेव को अर्घ्य देने से खुलते हैं सफलता के द्वार जानिए जल चढ़ाने के अद्भुत धार्मिक और वैज्ञानिक लाभ


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि वे ऐसे देव हैं जिनका दर्शन प्रतिदिन किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करना केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आत्मविश्वास और अनुशासन लाने वाली एक महत्वपूर्ण साधना भी है। मान्यता है कि नियमित रूप से सूर्यदेव को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और सफलता के नए द्वार खुलते हैं। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करते हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रह आत्मा पिता सम्मान नेतृत्व क्षमता और सरकारी क्षेत्र का कारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो उसे आत्मविश्वास की कमी मान सम्मान में बाधा और करियर में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नियमित रूप से सूर्यदेव को जल अर्पित करने और आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप करने से सूर्य की शुभता बढ़ने की मान्यता है। इससे आत्मबल मजबूत होता है और निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार आता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को जल अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह साधना मन को शांत करने के साथ सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक मानी जाती है। कई लोग इसे मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी मानते हैं। नियमित पूजा से व्यक्ति में अनुशासन आता है और दिन की शुरुआत सकारात्मक भाव के साथ होती है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से भी सुबह की हल्की धूप शरीर के लिए लाभदायक मानी जाती है। सूर्योदय के समय मिलने वाली सूर्य की किरणें शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद करती हैं जो हड्डियों मांसपेशियों और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। सुबह जल्दी उठकर खुले वातावरण में सूर्य की ओर जल अर्पित करने से ताजी हवा मिलती है जिससे मानसिक तनाव कम करने और शरीर को सक्रिय रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    मान्यता है कि सूर्य को जल अर्पित करते समय तांबे के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है। जल धीरे धीरे अर्पित करते हुए सूर्य की किरणों को जलधारा से देखने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके साथ यदि श्रद्धा और एकाग्रता से सूर्य मंत्रों का स्मरण किया जाए तो पूजा का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं का आधार आस्था है और इन्हें व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जिन लोगों को सरकारी कार्यों में बाधा आती है नौकरी में सम्मान नहीं मिल रहा हो या आत्मविश्वास की कमी महसूस होती हो वे नियमित रूप से सूर्यदेव की उपासना कर सकते हैं। इसके साथ सत्यनिष्ठा अनुशासित जीवन और सकारात्मक सोच अपनाने की भी सलाह दी जाती है क्योंकि केवल पूजा ही नहीं बल्कि कर्म भी सफलता का आधार माने गए हैं।

    सूर्य उपासना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि स्वस्थ दिनचर्या का भी प्रतीक है। सुबह जल्दी उठना स्वच्छ वातावरण में समय बिताना ध्यान और प्रार्थना करना तथा प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों की दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

  • धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह बोले- BJP में पद नहीं, देश और छात्रों का हित सर्वोपरि


    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी पद से अधिक महत्व देश, युवाओं और विद्यार्थियों के हित का है। उन्होंने कहा कि प्रधान का इस्तीफा इसी सोच और संगठन की कार्यशैली का प्रतीक है।

    अमित शाह ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र, युवा पीढ़ी और छात्र हैं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी सिद्धांत को दर्शाता है।

    छात्रों के हित में लिया गया फैसला
    धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और NEET पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य की रक्षा और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए सरकार प्रतिबद्ध
    अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं और इससे NEET में सफल विद्यार्थियों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा।

    प्रधान के कार्यकाल की उपलब्धियों का किया उल्लेख
    गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं को बढ़ावा देने, पीएम श्री स्कूलों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने में प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए भी कई अहम पहल कीं। अमित शाह के अनुसार उनका कार्यकाल विकसित भारत के लक्ष्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचायक रहा।

  • आज का राशिफल 26 जुलाई किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किसे रहना होगा सतर्क पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज का राशिफल 26 जुलाई किस राशि को मिलेगा धन लाभ और किसे रहना होगा सतर्क पढ़ें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली।  ग्रहों और नक्षत्रों की बदलती चाल का प्रभाव हर राशि के जातकों के जीवन पर अलग अलग तरीके से पड़ता है। 26 जुलाई का दिन कुछ लोगों के लिए नई सफलता और खुशियों का संदेश लेकर आएगा तो कुछ को आर्थिक मामलों और रिश्तों में सतर्क रहने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे और जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाएंगे। कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें और संतुलित खानपान अपनाएं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। कार्यस्थल पर एकाग्रता बनाए रखने से सफलता मिलेगी। अनावश्यक विवादों से दूर रहें। नौकरी बदलने या पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं। खानपान में सावधानी रखें और जंक फूड से बचें।

    मिथुन राशि

    मिथुन राशि वालों की प्रेम संबंधी परेशानियां कम होंगी। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से कान गला और नाक से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज न करें। आर्थिक स्थिति संतुलित बनी रहेगी।

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। निवेश करने से पहले पूरी योजना बनाएं और जल्दबाजी से बचें। अनावश्यक जोखिम लेने से नुकसान हो सकता है। मानसिक तनाव से बचने के लिए सकारात्मक सोच अपनाएं।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है लेकिन खर्चों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। नौकरी और व्यापार में अच्छे परिणाम मिलेंगे। माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

    कन्या राशि
    कन्या राशि वालों के लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। नौकरी में पदोन्नति और विरोधियों पर विजय मिलने की संभावना है। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों पर कार्यभार बढ़ सकता है। जीवनसाथी या पार्टनर के साथ मतभेद होने की संभावना है इसलिए धैर्य और संयम बनाए रखें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और मानसिक शांति के लिए योग तथा ध्यान करें।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के विद्यार्थियों को सफलता मिलने के योग हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति मिल सकती है। संपत्ति से लाभ के संकेत हैं लेकिन भावनाओं में बहकर कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने से बचें। खर्चों पर नियंत्रण रखें।

    धनु राशि
    धनु राशि वालों के लिए दिन उपलब्धियों से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। पुराने मित्रों से मुलाकात हो सकती है और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

    मकर राशि
    मकर राशि वालों को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना होगा। पढ़ाई और करियर में अच्छे परिणाम मिलेंगे लेकिन खर्च बढ़ सकते हैं। काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। परिवार के साथ समय बिताने का प्रयास करें।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि के कारोबारियों के लिए दिन लाभदायक रहेगा। कला और संगीत में रुचि बढ़ेगी। हालांकि आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी होगा। घरेलू विवादों को शांति और समझदारी से सुलझाने का प्रयास करें।

    मीन राशि
    मीन राशि वालों का मन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में लगेगा। शिक्षा और विदेश से जुड़े मामलों में शुभ समाचार मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ होने के योग हैं। कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी और धन लाभ के अवसर भी बनेंगे।

  • एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना

    एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे के लिए शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। वहीं, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर समेत करीब 50 जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, शियर जोन और पूर्वी व पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय दो निम्न दबाव क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं। हालांकि शनिवार को अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज की गई।

    पांच दिनों में सुधरे बारिश के आंकड़े
    बीते पांच दिनों की बारिश से प्रदेश में वर्षा की कमी में सुधार आया है। 20 जुलाई तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद यह अंतर घटकर 21 जुलाई को 14 प्रतिशत, 22 जुलाई को 11 प्रतिशत, 23 जुलाई को 10 प्रतिशत और 24-25 जुलाई को 11 प्रतिशत रह गया। अब तक प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 370.9 मिमी (14.6 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में बारिश की संभावना
    अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं।

    जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, जून में मानसून कमजोर रहने से बारिश का आंकड़ा कम रहा। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन इसके बाद लगातार कई दिनों तक भारी बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का ग्राफ फिर सामान्य से नीचे आ गया।

    आमतौर पर जुलाई महीने में प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। मध्य प्रदेश की सामान्य वार्षिक वर्षा 37.3 इंच है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। इनमें जबलपुर ऐसा प्रमुख शहर है, जहां जुलाई में औसतन 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की जाती है।

  • होर्मुज और लाल सागर के बाद ब्लैक सी पर बढ़ी चिंता, भारत ने समुद्री कर्मचारियों के लिए जारी किए सुरक्षा निर्देश

    होर्मुज और लाल सागर के बाद ब्लैक सी पर बढ़ी चिंता, भारत ने समुद्री कर्मचारियों के लिए जारी किए सुरक्षा निर्देश


    नई दिल्ली ।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब समुद्री मार्गों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मचारियों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने सलाह दी है कि किसी भी समुद्री यात्रा या नई नियुक्ति से पहले संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, रोजगार की शर्तों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इस कदम का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित जोखिमों को कम करना है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि ब्लैक सी और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में मौजूदा समय में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। युद्ध के कारण व्यावसायिक जहाजों पर हमलों का खतरा बना हुआ है और समुद्री गतिविधियां लगातार प्रभावित हो रही हैं। ऐसे माहौल में जहाजों पर कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सरकार ने विशेष रूप से उन भारतीय नाविकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, जो इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं या नई नियुक्ति के लिए जाने वाले हैं।

    हाल के दिनों में यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। उस जहाज पर भारतीय नागरिक भी सवार थे। घटना के बाद कुछ भारतीय सुरक्षित पाए गए, जबकि अन्य की तलाश और स्थिति को लेकर प्रयास जारी रहे। इस घटनाक्रम ने ब्लैक सी क्षेत्र में कार्यरत समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने समय रहते एहतियाती सलाह जारी की है।

    एडवाइजरी में नाविकों से कहा गया है कि किसी भी जहाज पर कार्यभार संभालने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, बीमा सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही रोजगार अनुबंध की शर्तों की भी सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं। सरकार का मानना है कि पूर्व तैयारी और सही जानकारी संभावित संकट की स्थिति में जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया है कि अप्रैल 2026 से अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों में कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार लगातार भारतीय नाविकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर रही है। अधिकारियों ने सभी संबंधित एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों से भी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

    इस बीच वैश्विक समुद्री व्यापार पहले से ही कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता बनी हुई है, जबकि लाल सागर में भी सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है। अब ब्लैक सी में बढ़ते जोखिम ने वैश्विक शिपिंग उद्योग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समुद्री क्षेत्रों में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार की यह एडवाइजरी भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम मानी जा रही है।

  • IPO में पैसा लगाने से पहले पूरी तैयारी जरूरी सही जानकारी के साथ बढ़ाएं मुनाफे की संभावना और घटाएं जोखिम

    IPO में पैसा लगाने से पहले पूरी तैयारी जरूरी सही जानकारी के साथ बढ़ाएं मुनाफे की संभावना और घटाएं जोखिम


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के बीच आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जब कोई कंपनी पहली बार आम निवेशकों के लिए अपने शेयर जारी करती है तो उसे आईपीओ कहा जाता है। कई निवेशक लिस्टिंग के दिन होने वाले संभावित मुनाफे की उम्मीद में आईपीओ में पैसा लगाते हैं जबकि कुछ लोग लंबे समय के निवेश के उद्देश्य से इसमें भाग लेते हैं। हालांकि हर आईपीओ मुनाफा ही देगा ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए निवेश करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझना बेहद जरूरी है।
    सबसे पहले यह जानना चाहिए कि कंपनी किस क्षेत्र में काम करती है और उसका बिजनेस मॉडल कितना मजबूत है। यदि कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और भविष्य में उसके विस्तार की अच्छी संभावना है तो निवेश का अवसर बेहतर माना जा सकता है। केवल चर्चा या प्रचार के आधार पर किसी आईपीओ में पैसा लगाना समझदारी नहीं होती।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कंपनी की वित्तीय स्थिति है। निवेश से पहले कंपनी के राजस्व मुनाफे कर्ज और पिछले कुछ वर्षों के प्रदर्शन को जरूर देखना चाहिए। यदि कंपनी लगातार लाभ में है और उसकी आय में स्थिर वृद्धि हो रही है तो यह सकारात्मक संकेत माना जाता है। वहीं अधिक कर्ज या लगातार घाटे वाली कंपनियों में निवेश करने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    आईपीओ का प्राइस बैंड और लॉट साइज भी निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राइस बैंड बताता है कि शेयर किस कीमत पर जारी किए जा रहे हैं जबकि लॉट साइज यह तय करता है कि न्यूनतम कितने शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। निवेशक को अपने बजट और जोखिम क्षमता के अनुसार आवेदन करना चाहिए।

    कई निवेशक ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी को भी देखते हैं। यदि किसी आईपीओ का जीएमपी अच्छा है तो माना जाता है कि बाजार में उसकी मांग मजबूत हो सकती है। हालांकि केवल जीएमपी के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए क्योंकि यह कोई आधिकारिक संकेतक नहीं है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है।

    कंपनी जुटाई गई राशि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए करेगी यह जानकारी भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कंपनी इस राशि का उपयोग कारोबार बढ़ाने नई परियोजनाओं में निवेश करने या कर्ज कम करने के लिए कर रही है तो इसे सकारात्मक माना जा सकता है। इसके विपरीत यदि अधिकांश राशि केवल पुराने निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने में जा रही है तो निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए।

    आईपीओ का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस भी पढ़ना चाहिए जिसमें कंपनी के जोखिम भविष्य की योजनाएं कानूनी मामले और वित्तीय जानकारी विस्तार से दी जाती है। इससे निवेशक को कंपनी की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलती है और जोखिम का सही आकलन किया जा सकता है।

    निवेश करने से पहले यह भी सुनिश्चित करें कि आपके पास सक्रिय डीमैट अकाउंट ट्रेडिंग अकाउंट और बैंक खाते से जुड़ी यूपीआई या एएसबीए सुविधा उपलब्ध हो। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले सभी दस्तावेज सही तरीके से अपडेट होना जरूरी है ताकि आवेदन में किसी प्रकार की परेशानी न आए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ में निवेश करते समय केवल लिस्टिंग गेन के लालच में फैसला नहीं लेना चाहिए। कंपनी के फंडामेंटल उद्योग की स्थिति प्रबंधन की विश्वसनीयता और भविष्य की विकास क्षमता का विश्लेषण करने के बाद ही निवेश करना बेहतर होता है। सही जानकारी और सोच समझकर लिया गया निर्णय लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की संभावना बढ़ा सकता है।

  • हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड

    हरारे में वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 20 रन की तूफानी पारी से तोड़ा महेला जयवर्धने का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भले ही बड़ी पारी नहीं खेली, लेकिन अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से रिकॉर्ड बुक में जगह बना ली। महज 9 गेंदों में 20 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट से रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।

    9 गेंदों में 20 रन, गेंदबाजों पर बोला हमला

    वैभव ने क्रीज पर उतरते ही आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने 9 गेंदों का सामना करते हुए 3 चौके और 1 छक्का लगाया तथा 222.22 की स्ट्राइक रेट से 20 रन बनाए। हालांकि, बड़ी पारी की ओर बढ़ते हुए पुल शॉट खेलने के प्रयास में वह बाउंड्री पर कैच आउट हो गए, लेकिन उनकी छोटी पारी भी रिकॉर्ड बनाने के लिए काफी साबित हुई।

    महेला जयवर्धने को छोड़ा पीछे

    इस पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआती पांच पारियों में सर्वाधिक स्ट्राइक रेट के मामले में श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने को पीछे छोड़ दिया। वैभव ने अपने पहले पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 112 रन 211.32 की स्ट्राइक रेट से बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है। वहीं, महेला जयवर्धने ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 201.82 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे।

    युवराज सिंह अब भी नंबर-1

    इस खास सूची में भारत के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह अब भी शीर्ष पर बने हुए हैं। युवराज ने अपने शुरुआती पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 235.09 की शानदार स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की थी। अब तक कोई भी बल्लेबाज उनके इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है।

    सबसे अधिक स्ट्राइक रेट (पहली 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियां):

    • युवराज सिंह (भारत) – 235.09
    • वैभव सूर्यवंशी (भारत) – 211.32
    • महेला जयवर्धने (श्रीलंका) – 201.82
    • मोहम्मद अशरफुल (बांग्लादेश) – 201.67
    • रिचर्ड लेवी (दक्षिण अफ्रीका) – 200.00

    निडर बल्लेबाजी से बढ़ा भरोसा

    कम उम्र में वैभव सूर्यवंशी का बेखौफ अंदाज भारतीय क्रिकेट के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। वह पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने में विश्वास रखते हैं और विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 में उनकी पारी भले ही लंबी नहीं चली, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और लगातार ऊंची स्ट्राइक रेट यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वह भारतीय टी20 टीम के अहम मैच विजेता खिलाड़ियों में शामिल हो सकते हैं।

  • शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी

    शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथ, केंद्र सरकार ने सौंपी अतिरिक्त जिम्मेदारी


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे जोशी अब शिक्षा मंत्रालय का दायित्व भी निभाएंगे। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता है।

    कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर में जन्मे जोशी वर्ष 2004 से धारवाड़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके पिता वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कार्यरत थे और उनका परिवार मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं।

    रेलवे स्कूल से विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई

    प्रह्लाद जोशी की प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल और न्यू इंग्लिश स्कूल, हुबली में हुई। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक विश्वविद्यालय के केएस आर्ट्स कॉलेज, धारवाड़ से स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी।

    आरएसएस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    जोशी का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर शुरू हुआ। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया। 1990 के दशक में हुबली ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने के आंदोलन और ‘कश्मीर बचाओ’ अभियान के दौरान उनकी पहचान व्यापक स्तर पर बनी।

    संगठन में निभाईं कई अहम जिम्मेदारियां

    भाजपा संगठन में प्रह्लाद जोशी ने विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 1995 से 1998 तक वे भाजपा के धारवाड़ जिला अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1998 से 2003 तक जिला महासचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आगे चलकर वे कर्नाटक भाजपा के महासचिव बने और वर्ष 2013 से 2016-17 तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लगातार पांचवीं बार बने सांसद

    प्रह्लाद जोशी ने वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज करते हुए पांचवीं बार सांसद बने। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री बनाया गया। वहीं, मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।