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  • फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून

    फतेहपुर से योगी का बड़ा ऐलान: NEET पेपर लीक के दोषियों की संपत्ति होगी जब्त, संसद में आएगा सख्त कानून


    फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को फतेहपुर जिले के मदारीपुर कला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले फतेहपुर आकांक्षी जिलों में शामिल था और रोजगार, स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के मामले में काफी पीछे था। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में जिले की तस्वीर बदली है और अब यह आकांक्षी जिलों की श्रेणी से बाहर आ चुका है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले युवाओं की नौकरियों में धांधली होती थी, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे रही है। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, सड़क, पुल, बिजली, अस्पताल, निवेश और कंपोजिट विद्यालय जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास अब केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव तक पहुंच रहा है।

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ और नकल माफिया को संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। NEET परीक्षा से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों को केवल सजा ही नहीं मिलेगी, बल्कि उनकी संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी। साथ ही पेपर लीक रोकने के लिए संसद में सख्त कानून लाने की भी बात कही।

    कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों के सामने अब केवल जेल या फिर कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जे किए थे, जिन्हें अब मुक्त कराया जा रहा है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने देश के युवाओं को नई पहचान दी है। उन्होंने फतेहपुर की जनता से विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए भाजपा को मजबूत समर्थन देने की अपील भी की।

  • पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

    पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों पर अब तेजी से न्यायिक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध फैसला देना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 8(3) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। जारी अधिसूचना में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों की सुनवाई सामान्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में न फंसे और समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

    इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत पंजीकृत परीक्षा संबंधी अपराध तथा राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे मामलों को भी इन्हीं अदालतों में भेजा जाएगा। इससे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल माफिया और अन्य परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

    हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके तहत अदालतें मामलों का संज्ञान लेने, प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम होंगी। इससे मामलों को अलग अदालतों में भेजने की आवश्यकता कम होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश सहित पूरे देश में चिंता बढ़ाई है। कई अभ्यर्थियों को परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी देरी होती रही है। नई विशेष अदालतों के गठन से इन मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों को शीघ्र सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को भी मामलों की सुनवाई में बेहतर समन्वय मिलेगा। साथ ही यह व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफिया और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।

    प्रदेश सरकार और न्यायपालिका की यह पहल परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाह इस बात पर होगी कि नई अदालतें कितनी तेजी से मामलों का निपटारा करती हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

  • महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम


    नई दिल्ली। भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह उपलब्धि पिछले एक दशक में किए गए व्यापक नीतिगत सुधारों और ऊर्जा क्षेत्र में अपनाई गई नई रणनीतियों का परिणाम है। उनका कहना है कि इस पहल से न केवल नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज को गति मिलेगी बल्कि भारत की आयातित ऊर्जा पर निर्भरता भी धीरे धीरे कम होगी।

    महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू किया गया एमएन डीडब्ल्यूएन18 1 एचडी अप्रेजल वेल चार प्रस्तावित डीपवॉटर कुओं में पहला है। इन सभी कुओं के जरिए देश के सबसे संभावनाशील अपतटीय क्षेत्रों में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का चरणबद्ध आकलन किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना में अत्याधुनिक डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समुद्र की गहराई में छिपे संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों की पहचान और उनका दोहन आसान हो सकेगा।

    हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में सरकार ने एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन क्षेत्र में कई ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं जिनसे इस क्षेत्र की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई ड्रिलिंग केवल समुद्र की तलहटी में खुदाई भर नहीं है बल्कि यह भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव रखने का कार्य है। उनके अनुसार ड्रिलिंग का प्रत्येक मीटर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाएगा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    मंत्री ने इस अवसर पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन ओएनजीसी ऑयल इंडिया लिमिटेड डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स तकनीकी साझेदारों और इस परियोजना से जुड़े सभी विशेषज्ञों को बधाई दी। उन्होंने विश्वास जताया कि महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई यह पहल भविष्य में भारत के अपतटीय तेल और गैस अन्वेषण को नई गति देगी तथा घरेलू उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

    हरदीप पुरी ने सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू होने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही नामांकन आधारित पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम लागू किया गया जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अधिक अवसर मिले। सरकार ने पारदर्शी रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल अपनाने के साथ पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत ऑफशोर नो गो क्षेत्रों को भी अन्वेषण के लिए खोल दिया है। इन कदमों से ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है।

    मंत्री के अनुसार वर्ष 2014 के बाद देश के कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन क्षेत्र का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया जा चुका है। ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक आवंटित किए गए हैं जिनमें 4.3 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है। यह दर्शाता है कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही देश में लगभग 674 वेल की ड्रिलिंग की गई। इसी अवधि में पांच नई हाइड्रोकार्बन खोजें हुईं और सात खोजों का व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू किया गया। इन उपलब्धियों के आधार पर सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में घरेलू तेल और गैस उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में स्वदेशी संसाधनों की भूमिका और मजबूत होगी।

  • एनआईआई में शानदार उछाल के दम पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की मजबूत कमाई तिमाही लाभ में हल्की गिरावट

    एनआईआई में शानदार उछाल के दम पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की मजबूत कमाई तिमाही लाभ में हल्की गिरावट


    नई दिल्ली। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते हुए मिश्रित प्रदर्शन पेश किया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ तिमाही आधार पर 4.3 प्रतिशत घटकर 795.95 करोड़ रुपए रह गया। हालांकि सालाना आधार पर बैंक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 37 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। बेहतर ब्याज आय और घटती क्रेडिट लागत ने बैंक की कमाई को मजबूती प्रदान की है।

    बैंक की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ 831.87 करोड़ रुपए था जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 581 करोड़ रुपए रहा था। इस तुलना से स्पष्ट है कि तिमाही आधार पर हल्की गिरावट के बावजूद बैंक की दीर्घकालिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और उसका मुख्य कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है।

    बैंक के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध आय रही। पहली तिमाही में यह सालाना आधार पर 31.9 प्रतिशत बढ़कर 2696 करोड़ रुपए पर पहुंच गई जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह 2044 करोड़ रुपए थी। नेट इंटरेस्ट इनकम में यह तेज बढ़ोतरी दर्शाती है कि बैंक का ऋण कारोबार और ब्याज से होने वाली कमाई लगातार मजबूत हो रही है।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट के मोर्चे पर भी बैंक ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में परिचालन लाभ 9.4 प्रतिशत बढ़कर 1435 करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 1312 करोड़ रुपए था। इससे संकेत मिलता है कि बैंक की मुख्य परिचालन गतिविधियां लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और आय के स्रोत मजबूत बने हुए हैं।

    बैंक के लिए एक और सकारात्मक संकेत प्रावधानों में आई बड़ी कमी रही। खराब ऋणों के संभावित जोखिम को देखते हुए किए जाने वाले प्रावधान सालाना आधार पर 30.4 प्रतिशत घटकर 371 करोड़ रुपए रह गए जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 533 करोड़ रुपए थे। कम प्रावधान यह दर्शाते हैं कि बैंक की क्रेडिट लागत में सुधार हुआ है और जोखिम प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो रहा है।

    हालांकि एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर कुछ दबाव देखने को मिला। 30 जून तक बैंक का सकल गैर निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात बढ़कर 2.10 प्रतिशत हो गया जबकि मार्च तिमाही के अंत में यह 2.03 प्रतिशत था। इसी तरह शुद्ध गैर निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात भी 0.74 प्रतिशत से बढ़कर 0.76 प्रतिशत पर पहुंच गया। हालांकि यह बढ़ोतरी सीमित है लेकिन बैंक के लिए आने वाली तिमाहियों में एसेट क्वालिटी बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

    शेयर बाजार में बैंक के प्रदर्शन की बात करें तो शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर 1002.25 रुपए पर बंद हुआ। पिछले 52 सप्ताह के दौरान शेयर ने 1090.40 रुपए का उच्चतम स्तर और 682.50 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है। हाल के सप्ताहों में बैंक का शेयर व्यापक बाजार की तुलना में कमजोर प्रदर्शन करता दिखाई दिया है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 2.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि दो सप्ताह में यह 6.54 प्रतिशत और एक महीने में 6.11 प्रतिशत तक फिसला है। इसी अवधि में बीएसई सेंसेक्स में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई जिससे स्पष्ट होता है कि बैंक का शेयर फिलहाल अपने बेंचमार्क सूचकांक से पीछे चल रहा है।

    कुल मिलाकर बैंक के पहली तिमाही के नतीजे यह संकेत देते हैं कि मजबूत ब्याज आय और बेहतर परिचालन प्रदर्शन के दम पर उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि एसेट क्वालिटी में मामूली दबाव और शेयर बाजार में कमजोर प्रदर्शन आने वाले समय में निवेशकों की नजर में प्रमुख विषय बने रहेंगे।

  • डोडला डेयरी की पहली तिमाही में झटका राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा लेकिन मुनाफे में 42 प्रतिशत की गिरावट

    डोडला डेयरी की पहली तिमाही में झटका राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा लेकिन मुनाफे में 42 प्रतिशत की गिरावट


    नई दिल्ली। डोडला डेयरी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते हुए रिकॉर्ड राजस्व दर्ज किया है लेकिन बढ़ती लागत और महंगे कच्चे माल के कारण कंपनी की लाभप्रदता पर बड़ा असर पड़ा है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा घटकर 40.64 करोड़ रुपए रह गया जो पिछली तिमाही के 69.80 करोड़ रुपए की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम है। मजबूत बिक्री के बावजूद लागत में तेज बढ़ोतरी ने कंपनी के मुनाफे को प्रभावित किया।

    हालांकि राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में डोडला डेयरी का कुल राजस्व 19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 1197.94 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि दूध की खरीद कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आने वाले महीनों की मांग को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त इन्वेंट्री तैयार करने की रणनीति अपनाई गई। इसी वजह से परिचालन लागत बढ़ी और शुद्ध लाभ पर दबाव देखने को मिला।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक डोडला सुनील रेड्डी ने कहा कि अधिक इन्वेंट्री तैयार करने का फैसला पूरे डेयरी उद्योग की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। उनका मानना है कि दूसरी तिमाही से दूध की खरीद कीमतों में धीरे धीरे सामान्य स्थिति लौटने लगेगी जिससे कंपनी की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है।

    गर्मी का लंबा मौसम कंपनी के लिए बिक्री के लिहाज से फायदेमंद साबित हुआ। दही छाछ लस्सी और आइसक्रीम जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों की रिकॉर्ड मांग दर्ज की गई। इन उत्पादों की मजबूत बिक्री के कारण अब कंपनी की कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी लगभग एक तिहाई तक पहुंच गई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों की ओर बढ़ रही है।

    कंपनी का ईबीआईटीडीए भी बेहतर रहा और यह बढ़कर 64.9 करोड़ रुपए पर पहुंच गया जबकि पिछली तिमाही में यह 53.8 करोड़ रुपए था। इसके बावजूद कर्मचारियों पर बढ़ते खर्च और दूध खरीद की ऊंची कीमतों ने कुल लाभ को सीमित कर दिया। नए श्रम कानूनों के तहत ऑफ रोल कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन लागू होने से कर्मचारियों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। तिमाही आधार पर यह खर्च 51.7 करोड़ रुपए से बढ़कर 55.7 करोड़ रुपए हो गया जबकि सालाना आधार पर इसमें 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    डोडला डेयरी ने इस तिमाही में अब तक की सबसे अधिक दूध खरीद भी दर्ज की। कंपनी ने प्रतिदिन औसतन 21.1 लाख लीटर दूध की खरीद की जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का कहना है कि परिचालन दक्षता में लगातार सुधार के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन पूरे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर बना हुआ है और आने वाले महीनों में इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।

    कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी मजबूती से बढ़ा है। अफ्रीका बिजनेस से होने वाला राजस्व सालाना आधार पर 45.6 प्रतिशत बढ़ा है जिसमें दूध की बिक्री में 52.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे कंपनी के वैश्विक कारोबार को भी नई गति मिली है।

    भविष्य की विस्तार रणनीति के तहत डोडला डेयरी के निदेशक मंडल ने डायरेक्ट टू कंज्यूमर डेयरी ब्रांड सिड्स फार्म में करीब 11.6 करोड़ रुपए का प्राथमिक निवेश करने को मंजूरी दी है। इस निवेश के जरिए कंपनी ब्रांड में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश कंपनी को प्रीमियम डेयरी और डायरेक्ट टू कंज्यूमर बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद करेगा।

  • पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह के परिजन उपस्थित थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एम.ए., एलएलबी. तक शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। सिंह का 10 मई 2005 को देहावसान हो गया।

    मीडिया से चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पांजलि कार्यक्रम के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह राज्य में तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र बिंदु थे। वे रीवा के निवासी थे। उन्होंने सादगी, निष्पक्षता के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनका स्मरण कर रहे हैं। सिंह ने राजमाता सिंधिया के कार्यकाल में जनता की आवाज बनकर यह भरोसा दिलाया था कि पक्ष हो या विपक्ष, अब राजनीति में बदलाव का समय है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती और पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम कराने की उत्कृष्ट पहल की है।

  • परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड

    परमाणु शक्ति में अमेरिका की बड़ी छलांग ट्रंप बोले दुनिया को अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में करेंगे लीड


    नई दिल्ली। अमेरिका ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई और महत्वाकांक्षी शुरुआत का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि निजी निवेश से विकसित चार एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर सरकार के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। ट्रंप ने इसे केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं बल्कि अमेरिकी परमाणु उद्योग के पुनर्जागरण की शुरुआत बताया और दावा किया कि देश अब अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रंप ने कहा कि कई दशकों की धीमी प्रगति के बाद अमेरिका अब फिर से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल अपने उद्योग का पुनर्निर्माण नहीं कर रहा बल्कि भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की दिशा भी तय कर रहा है। उनके अनुसार देश में इनोवेशन और तकनीकी विकास की नई लहर शुरू हो चुकी है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले वर्ष जारी किए गए चार कार्यकारी आदेशों का उद्देश्य नागरिक परमाणु क्षेत्र को नई गति देना था और सरकार ने तय लक्ष्य से भी आगे बढ़कर उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने ऊर्जा सचिव क्रिस राइट को एडवांस्ड रिएक्टरों के लिए विशेष पायलट कार्यक्रम शुरू करने और आधुनिक तकनीक वाले रिएक्टरों को सुरक्षित रूप से संचालित करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कहा कि इतनी कम अवधि में जो परिणाम मिले हैं उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में चार दशक से अधिक समय बाद पहली बार निजी निवेश से विकसित एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर इस स्तर तक पहुंचे हैं। ट्रंप ने पुरानी नियामक प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि पहले किसी रिएक्टर डिजाइन को मंजूरी मिलने में कई वर्ष लग जाते थे जिससे परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं। उनका कहना था कि नई नीति के कारण यह प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है।

    ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने कहा कि अमेरिका ने केवल पुराना रिकॉर्ड नहीं तोड़ा बल्कि एक साथ चार परियोजनाओं को आगे बढ़ाकर नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने बताया कि निजी निवेश से विकसित किसी नए रिएक्टर डिजाइन ने अंतिम बार 1974 में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया हासिल की थी और अब 50 वर्ष से अधिक समय बाद अमेरिका ने इस उपलब्धि को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। उनके अनुसार यह संकेत है कि अमेरिका एक बार फिर पारंपरिक और अत्याधुनिक दोनों तरह की परमाणु तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर लौट रहा है।

    कार्यक्रम में मौजूद न्यूक्लियर कंपनियों के अधिकारियों ने भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों की सराहना की। एंटारेस न्यूक्लियर के प्रतिनिधि ने बताया कि उनकी कंपनी के रिएक्टर भविष्य में अमेरिकी सैन्य ठिकानों अंतरिक्ष अभियानों और उन्नत रक्षा प्रणालियों को विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। कंपनी ने 2028 से पहले सैन्य ठिकानों पर अपने रिएक्टर तैनात करने की योजना भी साझा की।

    एक अन्य कंपनी के अधिकारी ने कहा कि अमेरिका अब केवल योजनाओं और प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक निर्माण और उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है। एक तीसरे अधिकारी ने इसे परमाणु ऊर्जा के इतिहास का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यही समय नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी का रिएक्टर 4 जुलाई की रात पहली बार नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया तक पहुंचा और अब कंपनी डेटा सेंटरों के लिए अत्याधुनिक न्यूक्लियर ऊर्जा समाधान विकसित करने पर काम कर रही है। इसके लिए इस वर्ष एक बिलियन डॉलर का निवेश जुटाने और विशाल विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि सरकार की नई ऊर्जा रणनीति के कारण अमेरिका आज सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं आंतरिक मामलों के सचिव डग बर्गम ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के बजाय निजी निवेश और नवाचार पर आधारित मॉडल ही भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बनेगा। उनका कहना था कि नियमों को सरल बनाकर और उद्यमियों को अवसर देकर अमेरिका एक बार फिर दुनिया की अग्रणी ऊर्जा शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।

  • व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए

    व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए


    नई दिल्ली। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के वार्षिक डिनर में इस बार सबसे प्रमुख मुद्दा प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में एसोसिएशन के नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब मीडिया बिना किसी डर और दबाव के अपना काम करता रहे। कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि पत्रकारों से असहमति या उनकी आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है लेकिन स्वतंत्र प्रेस को कमजोर करने का कोई भी प्रयास संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

    एसोसिएशन की निवर्तमान अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति और पत्रकारों के रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे हैं। कई बार तीखी बहस और असहमति देखने को मिली है लेकिन इन सबके बावजूद दोनों की जिम्मेदारी जनता के हित में काम करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछते हैं और सरकार जवाब देती है। इसी संवाद से लोकतंत्र मजबूत होता है और जनता तक सही जानकारी पहुंचती है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि सवाल पूछना और जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है तथा इसे किसी टकराव के रूप में नहीं बल्कि जवाबदेही के रूप में देखा जाना चाहिए।

    जियांग ने राष्ट्रपति ट्रंप के कारोबारी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सौदे की भाषा में बात की जाए तो फर्स्ट अमेंडमेंट कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर समझौता किया जा सके। यह अमेरिकी लोकतंत्र की स्थायी और संवैधानिक व्यवस्था है जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रेस की आलोचना और प्रेस को कमजोर करने की कोशिश के बीच बहुत बड़ा अंतर है। आलोचना व्यवस्था को बेहतर बनाती है जबकि स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने की कोशिश लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करती है।

    इस वर्ष का समारोह विशेष महत्व रखता था क्योंकि निर्धारित समय पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप पर हुए हमले के बाद स्थगित कर दिया गया था। अपने संबोधन में जियांग ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि हिंसा ने पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने बताया कि संकट की उस घड़ी में भी रिपोर्टर फोटोग्राफर और टीवी क्रू लगातार घटनास्थल से तथ्य जुटाने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में लगे रहे। उनका कहना था कि यही स्वतंत्र पत्रकारिता की असली पहचान है।

    उन्होंने उस कठिन समय के अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम लगातार हालात की समीक्षा कर रही थी और जनता तक सही सूचना पहुंचाने के सर्वोत्तम तरीके पर चर्चा कर रही थी। जियांग ने कहा कि यही जिम्मेदारी पत्रकारों की भी होती है और यही कारण है कि सरकार और मीडिया दोनों का अंतिम उद्देश्य नागरिकों तक विश्वसनीय और सटीक जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।

    कार्यक्रम में एसोसिएशन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी डर और पक्षपात के तथ्यों की खोज और सत्य को सामने लाने का कार्य जारी रखेगी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है।

    समारोह के दौरान अप्रैल में हुए हमले में बहादुरी दिखाने वाले सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों फोटोग्राफरों और मीडिया संस्थानों को भी सम्मान प्रदान किया गया। पूरे कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र प्रेस केवल एक अधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षक और विद्यार्थी वर्ग के कल्याण से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विद्यार्थियों के हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता के हित में जब भी कोई निर्णय लिया जाता है, मध्यप्रदेश उसे लागू करने और निर्णय के अनुरूप नीतिगत व्यवस्था बनाने वाला पहला राज्य होता है। समय की जरूरत है कि युवाओं से संबंधित न्यायिक फैसले द्रुत गति से हों। इसके लिए मध्यप्रदेश में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में) बनाये जायेंगे। पेपर लीक और परीक्षा सहित अन्य मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 3 माह में निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मन में विद्यार्थियों के कल्याण और उनसे जुड़े सभी विषयों को लेकर बेहद सकारात्मक भाव हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही नीट पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी जांच के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की। प्रकरण दर्ज हुआ और देशभर में तेज गति से आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की गई, फिर दोबारा नीट परीक्षा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूरी सहानुभूति और संवेदना विद्यार्थियों के साथ है। हम हर परिस्थिति में विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में नीट परीक्षाएं बेहतर और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हों, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल्स (एसओपी) तैयार कर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश में सबसे पहले लागू की गई। पिछले ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में विकास की गतिविधियों को गति देकर तेज़ी लाने के साथ-साथ युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कल्याण की चिंता कर इनके हित में निर्णय लेना भी हमारा कर्तव्य है। विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय हमारी सरकार ले चुकी है और यह आगे भी लगातार जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। पूरे देश में पहले मात्र 641 विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है। मेडिकल एजुकेशन की सीटें भी 50 हजार से बढ़कर 1 लाख से अधिक हो चुकी हैं।