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  • राधा-कृष्ण की शादी पर आज भी क्यों है अलग-अलग मत? सेवायत ने बताया खेल-खेल में कैसे हुआ था दिव्य विवाह

    राधा-कृष्ण की शादी पर आज भी क्यों है अलग-अलग मत? सेवायत ने बताया खेल-खेल में कैसे हुआ था दिव्य विवाह


    नई दिल्ली। राधा और कृष्ण का प्रेम भारतीय धार्मिक परंपरा में सबसे चर्चित और पूजनीय प्रसंगों में शामिल है। दोनों के रिश्ते को लेकर सदियों से अलग-अलग मान्यताएं और धार्मिक व्याख्याएं सामने आती रही हैं। इनमें सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण का विवाह वास्तव में हुआ था। राधा अष्टमी के मौके पर बरसाना के श्री लाड़ली जी मंदिर के सेवायत भगवानदास गोस्वामी ने इस सवाल से जुड़ी ब्रज की प्रचलित मान्यता और कथा के बारे में जानकारी दी है।

    ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण के विवाह से जुड़ी भांडीर वन की कथा विशेष रूप से प्रचलित है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में वर्णित मान्यता के अनुसार भांडीर वन में राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था और स्वयं ब्रह्मा जी इस विवाह में पुरोहित बने थे। धार्मिक परंपरा में इसे सामान्य राजसी या सामाजिक विवाह के बजाय भगवान कृष्ण की लीला के रूप में देखा जाता है।

    बरसाना के सेवायत भगवानदास गोस्वामी के अनुसार जब कृष्ण बाल रूप में थे तब वे राधा रानी के साथ अपने सखा और सखियों के साथ खेला करते थे। इसी दौरान खेल खेल में राधा और कृष्ण का विवाह कराने की बात सामने आई। बाल विवाह के खेल की तरह इसकी तैयारी की गई और भांडीर वन में विवाह की वेदी सजाई गई। मान्यता है कि इसी दौरान ब्रह्मा जी स्वयं पुरोहित के रूप में वहां उपस्थित हुए और वैदिक मंत्रों के साथ राधा-कृष्ण का विवाह संपन्न कराया।

    इस कथा में विवाह को कृष्ण की दिव्य लीला माना जाता है। इसलिए इसे किसी सामान्य सांसारिक विवाह की तरह नहीं देखा जाता। ब्रज की धार्मिक परंपरा में राधा और कृष्ण का प्रेम सामाजिक और सांसारिक बंधनों से ऊपर माना गया है। यही वजह है कि दोनों के संबंध को केवल पति-पत्नी के रिश्ते तक सीमित करके नहीं देखा जाता बल्कि इसे शाश्वत प्रेम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    हालांकि सभी धार्मिक ग्रंथों में राधा-कृष्ण के विवाह का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण जैसे प्रमुख ग्रंथों में राधा-कृष्ण के विवाह का सीधा वर्णन नहीं मिलता। दूसरी ओर ब्रह्मवैवर्त पुराण और कुछ वैष्णव परंपराओं में उनके विवाह से जुड़ी कथाएं मिलती हैं। इसी वजह से इस विषय पर अलग-अलग धार्मिक मत मौजूद हैं।

    राधा-कृष्ण के प्रेम को लेकर आध्यात्मिक मान्यता यह भी है कि दोनों एक ही दिव्य प्रेम के दो स्वरूप हैं। भक्त परंपरा में राधा को कृष्ण की आराध्या और उनके हृदय की शक्ति के रूप में देखा जाता है। इसी कारण उनका संबंध सांसारिक रिश्तों से अलग और आध्यात्मिक प्रेम का स्वरूप माना जाता है।

    राधा रानी के प्राकट्य की कथा भी ब्रज की परंपराओं में बेहद विशेष मानी जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण और गर्ग संहिता से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार राधा रानी का प्राकट्य साधारण जन्म की तरह नहीं हुआ था। कथा के अनुसार राजा वृषभानु को यमुना के किनारे एक दिव्य स्वर्ण कमल पर राधा रानी शिशु रूप में प्राप्त हुई थीं। ब्रज की मान्यता में इसी दिव्य प्राकट्य को राधा रानी के धरती पर आगमन से जोड़ा जाता है।

    इस तरह राधा-कृष्ण के विवाह को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएं मौजूद हैं। बरसाना की प्रचलित कथा में भांडीर वन का विवाह और ब्रह्मा जी का पुरोहित बनना प्रमुख रूप से बताया जाता है जबकि अन्य ग्रंथों में विवाह का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। यही विविधता राधा-कृष्ण की कथा को धार्मिक आस्था और भक्ति की दृष्टि से और भी विशेष बनाती है।

  • शाहरुख अजय और टाइगर को नोटिस के बाद तुकाराम मुंढे का सख्त रुख बोले विज्ञापन करने वाले भी जिम्मेदार

    शाहरुख अजय और टाइगर को नोटिस के बाद तुकाराम मुंढे का सख्त रुख बोले विज्ञापन करने वाले भी जिम्मेदार


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने सख्त रवैये को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी से जुड़े मामलों पर कार्रवाई के बीच उन्होंने बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों शाहरुख खान अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को लेकर भी कड़ा बयान दिया है। मामला विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़ा है। FDA की ओर से तीनों अभिनेताओं को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था और अब इसी मामले पर तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि किसी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता कानून से ऊपर नहीं हो सकती।

    एनडीटीवी से बातचीत में तुकाराम मुंढे ने कहा कि लोगों के लिए शाहरुख खान अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ बड़े स्टार हो सकते हैं लेकिन उनके लिए वे उन लोगों के तौर पर देखे जाते हैं जिन्होंने संबंधित उत्पाद का विज्ञापन किया है। उन्होंने कहा कि अगर विज्ञापन के जरिए कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उनके मुताबिक FDA ने जो कार्रवाई शुरू की है वह कानून के तहत की गई है और इस मामले में आगे की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार ही चलेगी।

    मुंढे ने यह भी बताया कि तीनों अभिनेताओं को 11 अगस्त को नोटिस जारी किया गया था और उनसे निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया था। तीनों में से एक अभिनेता के जवाब को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ने की बात कही गई है। हालांकि जब उनसे विशेष रूप से पूछा गया कि क्या शाहरुख खान ने नोटिस का जवाब दिया है तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी याद नहीं है क्योंकि यह मामला असिस्टेंट कमिश्नर के स्तर पर है। उन्होंने संभावना जताई कि शायद जवाब नहीं दिया गया है लेकिन इस बारे में वह निश्चित नहीं हैं। वहीं उन्होंने संकेत दिया कि बाकी दो अभिनेताओं की ओर से दिए गए जवाब पर विभाग की ओर से विचार किया जाएगा।

    इस पूरे मामले में सबसे अहम मुद्दा विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी को लेकर है। आमतौर पर किसी उत्पाद से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी को निर्माता या कंपनी से जोड़ा जाता है लेकिन तुकाराम मुंढे ने इस तर्क से असहमति जताई है। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति या संस्था की ओर से किसी उत्पाद का प्रचार किया जा रहा है उसे भी उस उत्पाद और उसके दावों के बारे में पर्याप्त जानकारी हासिल करनी चाहिए। यानी किसी ब्रांड का चेहरा बनने से पहले विज्ञापन करने वाले व्यक्ति की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    शाहरुख खान की बात करें तो उनकी पिछली रिलीज फिल्म डंकी थी जो 2023 में आई थी। अब वह किंग को लेकर चर्चा में हैं जिसमें सुहाना खान सहित कई कलाकार नजर आएंगे। अजय देवगन भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। वहीं टाइगर श्रॉफ की फिल्मों को लेकर भी दर्शकों की नजर बनी हुई है। ऐसे में तीनों सितारों से जुड़ा यह मामला फिल्मी दुनिया के साथ-साथ सेलिब्रिटी विज्ञापनों की जिम्मेदारी पर भी बहस खड़ी करता है।

  • बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां

    बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने से कई तरह के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। गंदा पानी दूषित भोजन और मच्छरों की बढ़ती संख्या बरसात के दिनों में परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखना जरूरी हो जाता है। रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर बारिश के मौसम में बीमार पड़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।

    बरसात में सबसे पहले साफ पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। बारिश के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। अगर पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर या उचित Water Purification Method से सुरक्षित करने के बाद इस्तेमाल करना बेहतर होता है। बाहर से मिलने वाले ऐसे पेय पदार्थों से भी सावधानी रखना जरूरी है जिनकी साफ सफाई को लेकर भरोसा न हो।

    खाने को लेकर भी बरसात में विशेष सावधानी जरूरी है। सड़क किनारे खुले में रखे खाद्य पदार्थ धूल और गंदगी के संपर्क में आ सकते हैं। नमी और गर्म वातावरण में कुछ खाद्य पदार्थ जल्दी खराब भी हो सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें और लंबे समय तक बाहर रखा हुआ खाना खाने से बचें।

    बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ना भी आम समस्या है। घर के आसपास गमले कूलर की ट्रे बाल्टी छत और दूसरी जगहों पर पानी जमा न होने दें। पानी जमा होने पर मच्छरों को पनपने का मौका मिल सकता है। घर के आसपास नियमित रूप से सफाई करना और जहां जरूरी हो वहां मच्छररोधी उपाय अपनाना मददगार हो सकता है। सोते समय मच्छरदानी या अन्य सुरक्षित उपायों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    गीले कपड़े और लंबे समय तक नमी में रहने से भी बचना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद शरीर और कपड़ों को जल्द से जल्द सुखाना बेहतर होता है। पैरों को खास तौर पर सूखा रखना जरूरी है क्योंकि लगातार गीले जूते या मोजे पहनने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। बाहर से लौटने के बाद हाथ पैर साफ पानी से धोना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

    बरसात में घर की सफाई पर भी ध्यान दें। सीलन और गंदगी वाली जगहों को साफ रखें तथा कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी आने दें। घर के आसपास नालियों में पानी रुकने या कचरा जमा होने की स्थिति हो तो उसे साफ कराने की कोशिश करें। बच्चों और बुजुर्गों को गंदे पानी या कीचड़ वाली जगहों से दूर रखना भी जरूरी है।

    अगर बारिश के मौसम में लगातार बुखार उल्टी दस्त सांस लेने में परेशानी त्वचा पर असामान्य लक्षण या कोई अन्य गंभीर समस्या दिखाई दे तो इसे सामान्य मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहता है। खासकर तेज बुखार या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षणों में समय पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    कुल मिलाकर बरसात में स्वस्थ रहने के लिए साफ पानी सुरक्षित भोजन मच्छरों से बचाव व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास की सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी बारिश के मौसम को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद कर सकती है।

  • शनिवार को क्या करें और क्या नहीं शनिदेव की कृपा पाने के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान शनिवार के नियम

    शनिवार को क्या करें और क्या नहीं शनिदेव की कृपा पाने के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान शनिवार के नियम


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन भगवान शनिदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन अच्छे कर्म करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। वहीं कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें शनिवार के दिन करने से बचना चाहिए।

    शनिवार की सुबह स्नान करने के बाद शनिदेव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। भक्त शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं। इसके साथ ही काले तिल और काले वस्त्र का दान करने की भी धार्मिक मान्यता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और उसकी सहायता करना भी पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि सेवा और दान से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

    शनिवार के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में सेवा और विनम्र व्यवहार को विशेष महत्व दिया गया है। इसी तरह किसी के साथ छल कपट करना झूठ बोलना या जानबूझकर किसी को परेशान करना भी उचित नहीं माना जाता। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है इसलिए इस दिन अपने व्यवहार और कर्मों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    शनिवार को सरसों का तेल खरीदने से बचने की भी कई जगह धार्मिक मान्यता प्रचलित है। हालांकि यह परंपरा क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती है। कुछ लोग इस दिन तेल का दान करना शुभ मानते हैं। इसी तरह लोहे से जुड़ी वस्तुओं को खरीदने को लेकर भी अलग अलग मान्यताएं मिलती हैं। इसलिए इन नियमों को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना चाहिए।

    शनिवार के दिन शराब और मांसाहार से दूर रहने की सलाह भी कई धार्मिक परंपराओं में दी जाती है। भक्त इस दिन सात्विक भोजन करने और संयम रखने को महत्व देते हैं। सुबह या शाम शनिदेव के मंत्र का जाप करना और हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

    शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि पूजा करते समय स्थानीय परंपरा और धार्मिक विधि का ध्यान रखना चाहिए।

    शनिवार का सबसे बड़ा संदेश यही माना जाता है कि व्यक्ति अपने कर्मों को बेहतर बनाए। किसी के साथ अन्याय न करें जरूरतमंद की मदद करें और अपने व्यवहार में संयम रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव की कृपा केवल पूजा पाठ से नहीं बल्कि अच्छे कर्मों और न्यायपूर्ण आचरण से भी जुड़ी मानी जाती है। इसलिए शनिवार को दान सेवा और सदाचार का दिन मानकर सकारात्मक कार्य करना शुभ माना जाता है।

  • UPI चार्ज से पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कैश की मांग, ₹2 हजार से ज्यादा के ऑनलाइन भुगतान से बच रहे ग्राहक

    UPI चार्ज से पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कैश की मांग, ₹2 हजार से ज्यादा के ऑनलाइन भुगतान से बच रहे ग्राहक


    नई दिल्ली। UPI के जरिए ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने की घोषणा के बाद पेट्रोल पंपों पर इसका असर दिखाई देने लगा है। 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियम के तहत सामान्य मर्चेंट कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR तय किया गया है, जबकि पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल पेमेंट के लिए ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।

    राजस्थान के अलवर में आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, कई पेट्रोल पंपों पर कैश पेमेंट से जुड़े पोस्टर लगाए गए हैं। यहां पेट्रोल-डीजल भरवाने पहुंच रहे ग्राहकों को ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान UPI से करने से बचने की सलाह दी जा रही है। इसके चलते कुछ जगहों पर ग्राहक भी ऑनलाइन भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगे हैं।

    पेट्रोल पंपों पर लगे कैश पेमेंट के पोस्टर

    नए MDR नियम को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। संचालकों का कहना है कि अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होनी है, इसलिए फिलहाल वे UPI से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, जैसे-जैसे ग्राहकों को MDR के बारे में जानकारी मिल रही है, बड़े UPI भुगतान को लेकर उनकी झिझक बढ़ रही है।

    अलवर में पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन पर कैश भुगतान के पोस्टर लगाए जाने की बात भी सामने आई है। संचालकों के मुताबिक, अभी तक नए शुल्क को लेकर सभी स्तरों पर स्पष्टता नहीं है। इसी वजह से ग्राहकों को भी यह समझने में परेशानी हो रही है कि नए नियम का वास्तविक असर किस पर पड़ेगा।

    ग्राहक कर रहे भुगतान बांटने की कोशिश

    पेट्रोल-डीजल भरवाने वाले कुछ ग्राहकों ने आजतक से बातचीत में बताया कि UPI MDR को लेकर लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कुछ लोग ₹2,000 से अधिक का एकमुश्त ऑनलाइन भुगतान करने से बच रहे हैं।

    कुछ ग्राहक बड़े भुगतान को दो या तीन हिस्सों में करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, नए नियम के अनुसार शुल्क की गणना मर्चेंट कैटेगरी और लागू MDR व्यवस्था के आधार पर होगी, इसलिए केवल भुगतान को हिस्सों में बांटने से हर स्थिति में शुल्क से बचना संभव होगा, यह जरूरी नहीं है।

    लोगों की चिंता- असर आखिरकार जेब पर आएगा

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर UPI शुल्क का अतिरिक्त बोझ कारोबारियों पर बढ़ता है तो उसका असर आगे चलकर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कुछ ग्राहकों ने आशंका जताई कि खाने-पीने सहित दूसरी चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

    लोगों का कहना है कि सरकार को इस तरह की व्यवस्था लागू करने से पहले इसके असर पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि कारोबारियों पर बढ़ने वाली लागत का असर अंततः आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है।

    पेट्रोल पंप पर ₹5 MDR, 0.4% नहीं

    UPI के नए MDR ढांचे में सभी कारोबारियों के लिए एक जैसी दर नहीं रखी गई है। सामान्य मर्चेंट कैटेगरी में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है। वहीं फ्यूल, रेलवे, टेलीकॉम और इंश्योरेंस जैसी कुछ कैटेगरी के लिए अलग फ्लैट MDR तय किया गया है।

    पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान के लिए ₹5 का फ्लैट MDR लगेगा। यानी ग्राहक अगर पेट्रोल-डीजल के लिए ₹10,000 का भुगतान UPI से करता है, तो पेट्रोल पंप की कैटेगरी में MDR ₹5 ही रहेगा, 0.4% के हिसाब से ₹40 नहीं।

    यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के बजाय मर्चेंट पर लागू होने वाला MDR है। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि नए शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए।

    छोटे कारोबारियों को राहत

    नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए भी प्रावधान रखा गया है। UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। वहीं ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

    इस तरह 15 अक्टूबर से UPI की पूरी व्यवस्था बंद या सभी भुगतानों पर शुल्क वाली नहीं हो रही है। बदलाव मुख्य रूप से चुनिंदा P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को होने वाले बड़े डिजिटल भुगतान पर लागू होगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।

  • 31 अक्टूबर को गुरु बदलेंगे नक्षत्र, मेष समेत 5 राशियों के लिए बनेंगे तरक्की और धन के योग

    31 अक्टूबर को गुरु बदलेंगे नक्षत्र, मेष समेत 5 राशियों के लिए बनेंगे तरक्की और धन के योग


    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणना के अनुसार गुरु यानी बृहस्पति 31 अक्टूबर 2026 को अपना नक्षत्र बदलकर मघा में प्रवेश करेंगे। मघा नक्षत्र के स्वामी केतु हैं और गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धन, संतान, भाग्य और विस्तार का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक गुरु और केतु के इस संबंध का असर करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर दिखाई दे सकता है। इस नक्षत्र में गुरु का गोचर जून 2027 के अंत तक रहने की गणना है। इस अवधि में मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए नौकरी, कारोबार, धन और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव के योग माने जा रहे हैं।

    मघा नक्षत्र में गुरु का क्या महत्व

    वैदिक ज्योतिष में मघा नक्षत्र को पूर्वजों, परंपरा, प्रतिष्ठा और अधिकार से जोड़ा जाता है। इसका स्वामी केतु है, जबकि गुरु ज्ञान, विस्तार और समृद्धि के कारक माने जाते हैं। ऐसे में ज्योतिषीय मान्यता है कि गुरु के मघा नक्षत्र में आने से कुछ राशियों के जातकों को पद, सम्मान, करियर और आर्थिक मामलों में नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि इन परिणामों को सामान्य ज्योतिषीय आकलन माना जाता है।

    मेष: करियर में बढ़ सकती है जिम्मेदारी

    मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का मघा नक्षत्र में प्रवेश करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है या कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। काम में भूमिका बढ़ने के साथ आय में इजाफे के नए रास्ते भी खुलने की संभावना जताई जा रही है।

    सिंह: अटके कामों को मिल सकती है गति

    सिंह राशि वालों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है और लंबे समय से रुके हुए कामों को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई उपलब्धि मिलने की संभावना भी मानी जा रही है।

    वृश्चिक: काम की हो सकती है सराहना

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए गुरु का नक्षत्र परिवर्तन करियर से जुड़े मामलों में अहम रह सकता है। ऑफिस में आपके काम की सराहना हो सकती है। नई जिम्मेदारी, महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या पद मिलने के योग बन सकते हैं। इससे कार्यक्षेत्र में आपकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।

    धनु: प्रमोशन और नए अवसर के योग

    धनु राशि के स्वामी गुरु स्वयं हैं। इसलिए ज्योतिषीय मान्यता में गुरु के नक्षत्र परिवर्तन को इस राशि के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। नौकरी में प्रमोशन या जिम्मेदारी बढ़ने की स्थिति बन सकती है। वहीं नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे लोगों को नए अवसर मिलने के योग माने जा रहे हैं।

    मीन: आय और प्रतिभा से जुड़े कामों में लाभ

    मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक और पारिवारिक मामलों में बदलाव ला सकता है। आय के साधनों में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। क्रिएटिव फील्ड, मीडिया, कला या अपनी प्रतिभा से जुड़े काम करने वालों को नए अवसर मिल सकते हैं।

    सभी राशियों पर एक जैसा असर नहीं

    ज्योतिष में किसी ग्रह के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों और व्यक्तियों पर एक समान नहीं माना जाता। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति, लग्न, चंद्र राशि और दशा-अंतर्दशा समेत कई कारक इसके परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

    इसलिए मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि को लेकर बताए गए ये परिणाम सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के आधार पर निश्चित भविष्यफल नहीं माना जाना चाहिए।

  • ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान

    ट्रंप बोले- चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो हम भी करते हैं, जिनपिंग की यात्रा से पहले बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों और जासूसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है तो संभव है कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता हो। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और उनकी आगामी मुलाकात अच्छी रहने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी जिनपिंग अगले सप्ताह अमेरिका आएंगे। उन्होंने चीन के साथ अमेरिका के संबंधों को भी अच्छा बताया। ट्रंप के मुताबिक, जिनपिंग के साथ उनकी अच्छी रिलेशनशिप है और उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई अलग-अलग समझौते होने की संभावना है।

    टैरिफ से चीन को हो रहा नुकसान

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन अमेरिका को काफी टैरिफ दे रहा है। ट्रंप के अनुसार, इन टैरिफ की वजह से चीन को काफी नुकसान हो रहा था और वह ऐसा नहीं करना चाहते थे।

    चीन की कथित जासूसी को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि किसी ने उनसे कहा था कि चीन अमेरिका की जासूसी करता है। इस पर उन्होंने कहा कि शायद चीन ऐसा करता हो, लेकिन अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है।

    एयरपोर्ट पर जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं ट्रंप

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ट्रंप अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी के बाहर जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर स्वागत करने की योजना बना रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि किसी विदेशी नेता का अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पर स्वागत किया जाना दुर्लभ है।

    अधिकारियों के मुताबिक, शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान व्हाइट हाउस में स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रोज गार्डन में सैन्य समीक्षा और शाम को स्टेट डिनर का कार्यक्रम भी शामिल होगा।

    डिनर में टेक कंपनियों के CEO भी होंगे शामिल

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्टेट डिनर में कई बड़ी टेक कंपनियों के CEO के शामिल होने की संभावना है। इनमें Amazon के जेफ बेजोस, Alphabet के सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Apple के टिम कुक, Tesla के एलन मस्क, Nvidia के जेनसन हुआंग और Dell Technologies के माइकल डेल शामिल हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जिनपिंग की यात्रा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ की आपूर्ति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापार और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सरकारी खजाने में पहुंचा आपका पैसा कहां होता है इस्तेमाल जानिए टैक्स से जुड़े खर्च का पूरा हिसाब

    सरकारी खजाने में पहुंचा आपका पैसा कहां होता है इस्तेमाल जानिए टैक्स से जुड़े खर्च का पूरा हिसाब


    नई दिल्ली। नौकरी करने वाला हो या अपना कारोबार चलाने वाला हर व्यक्ति अपनी कमाई के हिसाब से सरकार को टैक्स देता है। हर साल करोड़ों लोगों और कंपनियों से मिलने वाला यह टैक्स सरकार की आय का एक अहम हिस्सा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकलकर सरकारी खजाने तक पहुंचने वाला पैसा आखिर जाता कहां है। दरअसल सरकार टैक्स से मिलने वाली रकम को किसी एक काम में खर्च नहीं करती बल्कि देश की अलग अलग जरूरतों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

    इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स जैसे डायरेक्ट टैक्स से सरकार को मिलने वाला पैसा Consolidated Fund of India में जाता है। इसके बाद सरकार बजट के जरिए अलग अलग क्षेत्रों के लिए खर्च का प्रावधान करती है। इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया टैक्स सीधे उसी व्यक्ति के लिए किसी एक सुविधा पर खर्च नहीं होता बल्कि सरकारी आय का हिस्सा बनकर देश के व्यापक खर्च में इस्तेमाल होता है।

    सरकारी बजट में कुल खर्च को अलग अलग हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्यों को टैक्स में उनकी हिस्सेदारी देने पर जाता है। कुल सरकारी खर्च में इसका हिस्सा करीब 22 प्रतिशत बताया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों को उनके हिस्से की राशि उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने स्तर पर विकास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े खर्च कर सकें।

    सरकार के खर्च में एक बड़ा हिस्सा कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज की अदायगी में भी जाता है। आंकड़ों के मुताबिक कुल खर्च का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा ब्याज भुगतान और कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होता है। यह सरकारी वित्त व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि सरकार द्वारा लिए गए कर्ज की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए नियमित भुगतान करना पड़ता है।

    इसके अलावा करीब 17 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए खर्च किया जाता है। इन योजनाओं के जरिए केंद्र सरकार अलग अलग क्षेत्रों में योजनाएं और कार्यक्रम संचालित करती है। करीब 11 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर खर्च होता है जिसमें सीमा सुरक्षा और रक्षा से जुड़े दूसरे खर्च शामिल होते हैं।

    केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी सरकारी खर्च का हिस्सा जाता है। इसका करीब 8 प्रतिशत हिस्सा ऐसे कार्यक्रमों के लिए रखा जाता है। इनमें ग्रामीण रोजगार और आवास जैसी योजनाएं शामिल हो सकती हैं। इसके बाद करीब 7 प्रतिशत हिस्सा वित्त आयोग के अनुदान और दूसरे ट्रांसफर पर खर्च होता है।

    सरकारी खर्च में प्रशासनिक जरूरतों का भी हिस्सा होता है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 7 प्रतिशत हिस्सा अन्य प्रशासनिक खर्च के लिए जाता है। इसके अलावा लगभग 6 प्रतिशत सब्सिडी और करीब 2 प्रतिशत पेंशन पर खर्च होने का उल्लेख किया गया है। इन सभी हिस्सों को मिलाकर सरकारी खर्च का पूरा ढांचा तैयार होता है।

    वहीं डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 सितंबर तक सरकार को डायरेक्ट टैक्स से 12.12 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। यह रकम पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसमें इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स से मिलने वाली रकम शामिल होती है।

    इस तरह आपकी कमाई से सरकार तक पहुंचने वाला टैक्स किसी एक जगह जमा होकर पड़ा नहीं रहता। यह सरकारी आय का हिस्सा बनता है और बजट के जरिए राज्यों की हिस्सेदारी कर्ज भुगतान रक्षा योजनाओं प्रशासन सब्सिडी और पेंशन समेत कई जरूरी क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि टैक्स की रकम को देश की पूरी वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • ममता बनर्जी के सामने एक साथ तीन बड़े संकट, अब सुप्रीम कोर्ट से लगाई आस

    ममता बनर्जी के सामने एक साथ तीन बड़े संकट, अब सुप्रीम कोर्ट से लगाई आस


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद शुक्रवार को कई नए मोड़ से गुजरा। चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाले पारंपरिक चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दोनों गुटों को नए नाम और प्रतीक आवंटित किए। इसके कुछ ही समय बाद नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। ममता ने इसके बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया, लेकिन कुछ घंटे बाद ही पुलिस ने मिलन प्रधान को एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया।

    घटनाक्रम के बीच ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले के अलावा 10 बागी विधायकों की अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से निर्णय में देरी को लेकर भी अलग याचिका दायर की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक पहली याचिका में आयोग के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी में अयोग्यता की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान पार्टी के नाम और प्रतीक को लेकर किए गए इंतजाम पर सवाल उठाया गया है। इन मामलों पर 21 सितंबर को सुनवाई संभावित बताई जा रही है।

    ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न

    चुनाव आयोग के अंतरिम इंतजाम के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ वाला प्रतीक फिलहाल दोनों गुटों के इस्तेमाल के लिए रोक दिया गया है। यह व्यवस्था अक्टूबर में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर अंतरिम तौर पर की गई है।

    ममता गुट ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के बहुसंख्यक कैडर और मूल संगठनात्मक ढांचे को पर्याप्त महत्व दिए बिना बागी गुट के दावों को प्राथमिकता दी। गुट का कहना है कि पार्टी के नाम और पारंपरिक चिह्न पर अंतिम फैसला करने से पहले विधायकों की सदस्यता से जुड़े विवाद का निपटारा होना चाहिए।

    10 बागी विधायकों की सदस्यता पर भी विवाद

    ममता गुट के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की है। इस मामले में विधानसभा सचिवालय की ओर से संबंधित विधायकों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

    सूची में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप राय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मिन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं।

    विवाद केवल विधायकों की सदस्यता तक सीमित नहीं है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर भी दोनों खेमों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। ममता गुट ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को इस पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी। ममता गुट ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त में हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए ऋतब्रत को फिलहाल सीमित अवधि के लिए पद पर बने रहने की अनुमति दी थी।

    एक दिन में बदली नंदीग्राम की तस्वीर

    6 अक्टूबर को प्रस्तावित नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को घटनाक्रम तेजी से बदला। ममता गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले वह अपने पति सत्यजीत के साथ राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंचीं और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। नामांकन वापस लेने की वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी। ममता बनर्जी ने बाद में कहा कि उनकी प्रत्याशी पर दबाव बनाया गया था।

    इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कांग्रेस को ‘सिस्टर पार्टी’ बताते हुए इसे INDIA ब्लॉक को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया। हालांकि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी ने TMC से समर्थन नहीं मांगा था।

    समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार

    ममता के समर्थन की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद कांग्रेस के नंदीग्राम प्रत्याशी मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार मामला 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़ा है और उनके खिलाफ पहले से गिरफ्तारी वारंट लंबित था। उन्हें अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई है।

    गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस और ममता गुट ने सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ा, जबकि कांग्रेस नेताओं ने भी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, पुलिस और भाजपा की ओर से इसे कानून के तहत कार्रवाई बताया गया और राजनीतिक आरोपों को खारिज किया गया। इसलिए गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक मंशा होने का दावा फिलहाल संबंधित पक्षों के आरोप के रूप में ही सामने आया है।

    28 साल पुरानी पार्टी पहचान पर कानूनी लड़ाई

    ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। ‘फूल-घास’ वाला पारंपरिक चुनाव चिह्न लंबे समय से पार्टी की पहचान रहा है। मौजूदा विवाद में पहली बार दोनों गुट इस नाम और प्रतीक पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने फिलहाल दोनों को अलग-अलग नाम और चिह्न देकर उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अंतरिम इंतजाम किया है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव 6 अक्टूबर को और मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे में ममता गुट के लिए एक ओर मूल पार्टी नाम और प्रतीक को लेकर कानूनी लड़ाई अहम है, वहीं दूसरी ओर बागी विधायकों की अयोग्यता का मामला भी इससे जुड़ा हुआ है।

    राहुल गांधी का भाजपा पर आरोप, भाजपा ने पलटवार किया

    कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर राहुल गांधी ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और भाजपा निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करती। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों और चुनावी मुकाबले को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

    भाजपा ने इन आरोपों को विपक्ष की प्रतिक्रिया बताते हुए पलटवार किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद में आयोग अपने नियमों के तहत निर्णय लेता है। इस पूरे घटनाक्रम में दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और नंदीग्राम उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया पर हैं।

  • एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के अब 11 दिन ही बाकी हैं और प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि मानसून के अंतिम सप्ताह में कुछ जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक प्रदेश का कुल बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद बनी हुई है।

    हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के ज्यादातर जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा अब भी पीछे है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अब तक सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले दिनों में लगातार तीन से चार दिन अच्छी बारिश की जरूरत होगी।

    इसके उलट मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे से दोगुना पानी गिर चुका है। वहीं भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। प्रदेश के बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का अनुमान

    मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम की अगली गतिविधि भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस सिस्टम के बनने और आगे बढ़ने से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव की स्थिति बन सकती है।

    मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद प्रदेश में अभी बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में अंतिम सप्ताह में यदि कुछ जिलों में अच्छी बारिश होती है तो जिन इलाकों में फिलहाल बारिश का आंकड़ा कम है, वहां सामान्य के करीब पहुंचने की उम्मीद बढ़ सकती है।