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  • 31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

    31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप


    जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है।

    जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका।

    खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है।

    उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।

    इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

    डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां डीके शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में शाम 4 बजकर 5 मिनट पर होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे, जबकि उनके साथ नई कैबिनेट के 10 से 12 मंत्रियों के भी शपथ लेने की संभावना है। समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षित है, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।

    शपथ ग्रहण से पहले डीके शिवकुमार की लगातार हो रही मुलाकातों ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। उन्होंने पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से भी भेंट की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे केवल औपचारिक मुलाकात के बजाय एक बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में संतुलन और संवाद की नीति को दर्शाने का प्रयास हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है।

    शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं और बेंगलुरु शहर को विशेष रूप से सजाया गया है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें दिहाड़ी मजदूर, किसान प्रतिनिधि, दलित संगठन, महिला समूह, युवा नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही मीडिया, फिल्म, खेल, न्यायपालिका, उद्योग और कला जगत से जुड़े लोगों की भी उपस्थिति तय मानी जा रही है, जिससे यह आयोजन व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है।

    नई कैबिनेट को लेकर अभी आधिकारिक रूप से पूरी सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन संकेत हैं कि पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। पार्टी के भीतर संतुलन साधने और विभिन्न गुटों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम चल रहा है। इस बीच डिप्टी सीएम और अन्य प्रमुख मंत्रालयों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अंतिम फैसला शपथ ग्रहण के बाद ही स्पष्ट होगा।

    डीके शिवकुमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक में एक नए युग की शुरुआत होगी, विशेष रूप से युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि जिम्मेदारियां आसान नहीं होंगी और सरकार के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां और कैबिनेट संरचना राज्य की दिशा तय करेगी।

    इस बीच शपथ ग्रहण से पहले उनके आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सख्त कर दिया गया है। समर्थकों में उत्साह का माहौल है और पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने पहले फैसलों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ती है और राज्य की राजनीति में क्या नया संतुलन स्थापित होता है।

  • एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

    एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक होटल में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई तेज कर दी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही के संकेत सामने आए हैं।

    यह आग मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में सुबह करीब 8.50 से 9 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपरी मंजिलों तक धुआं फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में केवल एक ही सीढ़ी होने के कारण लोग फंस गए और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा।

    हादसे के दौरान कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाए और तीसरी मंजिल से नीचे बिछाए गए गद्दों पर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और गली में गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग इस दौरान गंभीर रूप से घायल भी हो गए, जिनमें कुछ के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है।

    स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी, जिससे लोगों को सांस लेने और बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। कई लोग बेसमेंट में भी फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने शटर तोड़कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और एक ही एग्जिट होने के कारण हालात और बिगड़ गए।

    घटना पर बयान देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर थीं। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि आग रेस्टोरेंट के किचन या इलेक्ट्रिक उपकरण से शुरू हुई हो सकती है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सुबह 8.50 बजे सूचना मिली जिसके बाद सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर भेजे गए। राहत और बचाव अभियान में कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत में बेसमेंट सहित कुल छह मंजिलें थीं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

    अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो पास के अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हादसे के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी गई और बचाव कार्य तेजी से पूरा किया गया।

    इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    दिल्ली का यह अग्निकांड एक बार फिर शहरी भवन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुरक्षित निकास और पर्याप्त सीढ़ियों की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

  • 14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब

    14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब


    जबलपुर। जबलपुर की 91 वर्षीय श्यामा देवी झा को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। अधिकरण ने उनकी पारिवारिक पेंशन से की जा रही 3.33 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयुध निर्माणी विभाग ने कथित अधिक पेंशन भुगतान का हवाला देते हुए यह राशि वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन बुजुर्ग महिला ने इसे न्यायिक चुनौती देते हुए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा आयुध निर्माणी में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन का लाभ उनकी पत्नी श्यामा देवी को मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन हाल ही में विभाग ने आदेश जारी कर दावा किया कि उन्हें अधिक भुगतान किया गया है और करीब 3 लाख 33 हजार रुपए की राशि की वसूली की जाएगी।

    विभाग के इस फैसले ने बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। याचिका में कहा गया कि 91 वर्ष की उम्र में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है और इसी राशि से उनका जीवन-यापन चलता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि किसी प्रकार का अधिक भुगतान हुआ भी है तो उसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी प्रकार की तथ्यात्मक जानकारी छिपाई। ऐसे में 14 साल बाद वसूली की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

    मामले में श्यामा देवी की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विभागीय त्रुटि का भार एक वृद्ध पेंशनभोगी पर नहीं डाला जा सकता। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को उचित माना और वसूली आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।

    CAT के आदेश के बाद फिलहाल श्यामा देवी की पारिवारिक पेंशन से किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। अधिकरण ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

    यह मामला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद अधिक भुगतान के नाम पर रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल बुजुर्ग महिला को राहत मिलने से उनके परिवार ने संतोष जताया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा व्यक्त किया है।

  • आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

    आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है, जिसमें देश की मौद्रिक नीति की दिशा तय करने को लेकर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई और विकास दर दोनों को संतुलित रखने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौजूदा दरों को यथावत बनाए रखेगा, हालांकि नीति वक्तव्य में अधिक सतर्क रुख देखने को मिल सकता है।

    इस बैठक पर बाजार और निवेशकों की खास नजर बनी हुई है क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ऋण, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को बैठक के बाद नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें स्थिर नहीं रहती हैं तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई अनुमान में वृद्धि संभव है।

    एचएसबीसी और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की रणनीति अपनाएगा, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार आगे चलकर सख्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिए गए हैं कि बाजार 2026 के अंत तक दरों में हल्की कटौती की संभावना को देख रहा है, हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

    अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि महंगाई का मौजूदा दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा हुआ है, न कि मांग में तेजी के कारण। ऐसे में आरबीआई के लिए चुनौती यह होगी कि वह विकास दर को प्रभावित किए बिना मूल्य स्थिरता बनाए रखे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.6 से 6.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है, बशर्ते वैश्विक तेल कीमतें नियंत्रित रहें।

  • अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

    अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं के बाजार में बुधवार को कमजोरी का रुख देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को नहीं मिल सका। इसके विपरीत घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया है।

    सोने की कीमतों में शुरुआत में मामूली मजबूती देखी गई, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें दबाव बढ़ता गया। अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हल्की बढ़त के साथ खुला, लेकिन जल्द ही इसमें गिरावट दर्ज की गई और यह नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका ने ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना को मजबूत किया है, जिससे सोने में निवेश की मांग सीमित हो गई है।

    चांदी के बाजार में अधिक अस्थिरता देखने को मिली। जुलाई वायदा चांदी की कीमतों में करीब 1,300 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाती है। कारोबार के दौरान चांदी ने शुरुआती स्तर पर स्थिरता दिखाई, लेकिन बाद में बिकवाली दबाव बढ़ने से यह नीचे आ गई। विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की चाल फिलहाल सीमित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक संकेतों के कारण इसमें तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में कमजोरी का रुख देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड और फ्यूचर्स दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतें भी दबाव में रहीं। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता और ब्याज दरों की दिशा को लेकर असमंजस माना जा रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है, अन्यथा दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है क्योंकि किसी भी दिशा में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सेवा क्षेत्र से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। नए कारोबार में लगातार बढ़ोतरी और डिजिटल, आईटी, ई-कॉमर्स तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के चलते मई में भारत के सेवा क्षेत्र का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 58.8 था। यह वृद्धि देश के सेवा आधारित उद्योगों में मजबूत विस्तार और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को दर्शाती है।

    एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, माल ढुलाई, डिजिटल सेवाओं, मनोरंजन, ई-कॉमर्स और आईटी सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कंपनियों के नए ऑर्डरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के चलते सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को तेज किया और उत्पादन क्षमता में विस्तार किया।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए कारोबार में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी सुधार हुआ है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने मई में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग में बढ़ोतरी के चलते कंपनियां विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल अधिकांश कंपनियों ने अपने स्टाफ स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन एक छोटे हिस्से ने नई भर्तियां की हैं।

    अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन मई में इसमें हल्की कमी देखी गई है। यह पिछले चार महीनों में सबसे निचला स्तर है। लागत दबाव में कमी आने से कंपनियों पर सेवाओं की कीमत बढ़ाने का दबाव भी कम हुआ है। इसी कारण मई में सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की गति भी जनवरी के बाद सबसे धीमी रही।

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मई में सेवा क्षेत्र में विस्तार का मुख्य कारण नए ऑर्डरों की लगातार बढ़ती संख्या रही। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी सेवाओं की मांग में सुधार देखने को मिला है। अप्रैल में आई गिरावट के बाद निर्यात आधारित सेवाओं में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई, जिससे कुल कारोबार को मजबूती मिली।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत की सेवाओं की मांग कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत रही, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। हालांकि, विदेशी मांग की वृद्धि दर कुल घरेलू बिक्री की तुलना में थोड़ी कम रही और यह 2025 के औसत से नीचे रही, फिर भी इसमें स्थिरता बनी रही।

    कुल मिलाकर, सेवा क्षेत्र में इस तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आईटी और डिजिटल सेवाओं की मजबूत मांग, ई-कॉमर्स का विस्तार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सेवाओं की जरूरत भारत के सेवा उद्योग को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार और निवेश दोनों में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।

  • नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी

    नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की जमीन कब्जा करने के नेपाली पीएम बालेन शाह (Nepali PM Balen Shah) के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रक्रिया दी है। कहा कि सीमा विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र है, जिसके जरिये समाधान निकाला जाएगा। साथ ही इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) से सटे नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बालेन शाह के बयान के खिलाफ डडेलधुरा समेत कई स्थानों पर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) पर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगडंडी मार्गों, चेकपोस्टों और सीमावर्ती गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां सीमा अपेक्षाकृत खुली है और लोगों का आवागमन अधिक रहता है।


    एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त

    मंगलवार को बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने संयुक्त गश्त की। इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी जारी रहेगी।


    बालेन शाह के बयान पर विदेश मंत्रालय

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान को भी देखा है।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा निर्धारित हो चुका है, फिर भी कुछ हिस्से को सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने सीमा संबंधी सभी मामलों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

    हाल में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जायसवाल ने कहा कि हम संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अंदरूनी मामलों पर ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

  • दक्षिण सूडान में तैनात 565 भारतीय सैनिक प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से हुए सम्मानित

    दक्षिण सूडान में तैनात 565 भारतीय सैनिक प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से हुए सम्मानित


    खार्तूम।
    दक्षिण सूडान (South Sudan) में संयुक्त राष्ट्र मिशन (United Nations Mission) के तहत तैनात कम से कम 565 भारतीय शांति सैनिकों (565 Indian Peacekeepers) को उनकी उत्कृष्ट सेवा, नागरिकों की सुरक्षा और शांति स्थापना के प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक (Prestigious United Nations Medal) से सम्मानित किया गया है। सम्मानित होने वाले इन सैनिकों में 53 महिला सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) निकाय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारतीय शांति सैनिकों को यह सम्मान गश्त के माध्यम से नागरिकों की रक्षा करने, स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बढ़ाने, पशु चिकित्सा शिविर आयोजित करने, महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने, लैंगिक हिंसा के खिलाफ लड़ने और मानवीय सहायता की पहुंच को सुगम बनाने के लिए दिया गया है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भारतीय दल को बधाई दी। मिशन ने कहा, “भारतीय ब्लू हेल्मेट्स ने अपने संचालन के सभी क्षेत्रों में लगातार व्यावसायिकता और कर्तव्यपरायणता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। देश को उनकी सेवा पर गर्व है।” आपको बता दें कि ब्लू हेल्मेट्स उन सैन्य कर्मियों, पुलिस अधिकारियों और नागरिक विशेषज्ञों को कहा जाता है जो संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की कमान के तहत दुनिया के अशांत क्षेत्रों में काम करते हैं।


    शांति स्थापना में भारत का योगदान

    भारत का संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में एक गौरवशाली और लंबा इतिहास रहा है। नेपाल के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में वर्दीधारी सैन्य और पुलिसकर्मियों का योगदान देने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के वर्तमान में 4,200 से अधिक सैन्य और पुलिस कर्मी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मिशनों में तैनात हैं, जिनमें 155 महिला कर्मी शामिल हैं।

    भारतीय सैनिक इस समय दक्षिण सूडान के अलावा एबेई, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, साइप्रस, कांगो, लेबनान, मध्य पूर्व, सोमालिया और पश्चिमी सहारा के मिशनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वैश्विक शांति की वेदी पर भारत ने सबसे बड़ा बलिदान भी दिया है। कर्तव्य की वेदी पर देश के लगभग 180 भारतीय शांति सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है, जो किसी भी सैनिक योगदान देने वाले देश की तुलना में सबसे अधिक संख्या है।

  • प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद

    प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद


    प्रयागराज।
    यूपी (UP) के प्रयागराज (Prayagraj) के साउथ मलाका (South Malacca) में चार लोगों की निर्मम हत्या की बात फैलते ही पूरा इलाके में सनसनी फैल गई। मंगलवार दोपहर घर के भीतर से उठ रही तेज दुर्गंध ने जिस खौफनाक कांड से पर्दा उठाया, उसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पुलिस को भी हैरान कर दिया। एक के बाद एक, चार शव बरामद होने की खबर फैलते ही साउथ मलाका चौराहे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर चार लोगों की इतनी बेरहमी से हत्या किसने और क्यों की?

    मकान से निकल रही दुर्गंध इतनी तीव्र थी कि चौराहे से गुजरने वाले राहगीरों तक को परेशानी हो रही थी। आसपास के दुकानदारों को पहले लगा कि किसी जानवर की मौत हुई होगी, लेकिन जब पुलिस ने मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पूरा मामला सनसनीखेज हत्याकांड में बदल गया। बताया जा रहा है कि शव करीब तीन दिन तक बंद कमरों में पड़े रहने के कारण सड़ने लगे थे, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई थी। चार हत्याओं की खबर फैलते ही आसपास के लोग अपने घरों और दुकानों से निकलकर घटनास्थल पर पहुंच गए। चौराहे पर देर शाम तक लोगों की भीड़ जुटी रही। घटनास्थल पर पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस आयुक्त, डीसीपी सिटी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और डॉग स्क्वायड की टीम घंटों जांच में जुटी रही।

    पुलिस को मकान से तीन मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल होने की आशंका वाली एक हथौड़ी भी मिली है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस आसपास के लोगों, किरायेदारों, रिश्तेदारों और परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। शहर के बीचोंबीच हुए इस सनसनीखेज चौहरे हत्याकांड ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है।


    चौथा शव किसका? सबसे बड़ा सवाल

    साउथ मलाका हत्याकांड की जांच में सबसे बड़ा सवाल भूतल स्थित कलर लैब से बरामद चौथे शव की पहचान को लेकर खड़ा हो गया है। पुलिस को आशंका है कि युवक की पहले दुकान के भीतर हत्या की गई और फिर केमिकल डालकर उसका चेहरा जला दिया गया, ताकि पहचान छिपाई जा सके। प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि शव वीरेंद्र वैश्य के बड़े बेटे अभिषेक का हो सकता है, लेकिन चेहरा बुरी तरह झुलस जाने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से पहचान सुनिश्चित कराने की तैयारी कर रही है।

    पुलिस को यह भी संदेह है कि युवक की हत्या के बाद आरोपी पहली मंजिल पर पहुंचे और वृद्ध दंपती वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता और बेटी मीनाक्षी पर हथौड़ी या किसी भारी वस्तु से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं चौथा शव किसी अन्य व्यक्ति का तो नहीं है और पहचान छिपाने के लिए चेहरा जलाया गया हो। इसी बिंदु को जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।