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  • जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी

    जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी


    नई दिल्ली। उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म संस्कृति और जीवन मूल्यों को लेकर संवाद किया। तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन भागवत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म को केवल बुढ़ापे से जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गीता और रामायण को अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबों के तौर पर देखते हैं लेकिन धर्म व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।

    मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अहंकार को लेकर भी युवाओं से बात की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार में यह मानकर काम करता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो वह एक तरह के भ्रम में पड़ जाता है। उन्हें लगता है कि परिस्थितियां भी उनकी इच्छा के मुताबिक ही चलेंगी लेकिन ऐसा नहीं होता। भागवत ने प्रकृति के नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ चीजें अपने निर्धारित नियमों के अनुसार चलती हैं। व्यक्ति उनके बारे में विश्वास करे या न करे लेकिन उनका होना और अपना काम करना जारी रहता है।

    उन्होंने युवाओं से कहा कि धर्म को समझने के लिए पहले से मन में बैठी धारणाओं पर भी विचार करना जरूरी है। भागवत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं के दिमाग को किसी खास विचार से भरना नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने स्तर पर सोचने और चर्चा करने की बात कही। उनके अनुसार धर्म को समझने की प्रक्रिया इतनी व्यापक है कि व्यक्ति पूरा जीवन इसके अर्थ को समझने में लगा सकता है।

    भागवत ने धर्म को केवल पूजा या किसी एक धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि धर्म का संबंध व्यक्ति के आचरण और कर्तव्य से भी है। जिस तरह पानी का स्वभाव बहना है और आग का स्वभाव जलना है उसी तरह व्यक्ति और समाज के लिए भी उनके स्वभाव और जिम्मेदारी के अनुरूप कर्तव्य निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का एक अर्थ कर्तव्य भी है। पुत्र का अपना कर्तव्य है तो राजा का अपना कर्तव्य होता है।

    उन्होंने महाभारत और भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत के माध्यम से धर्म को समझने के कई प्रसंग सामने आते हैं। उनके अनुसार युधिष्ठिर ने अपने जीवन में धर्म को समझने और उसका पालन करने का प्रयास किया। भागवत ने युवाओं से कहा कि सुख और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी धर्म के रास्ते को छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने डर लालच या किसी अन्य दबाव में धर्म से विचलित नहीं होने की बात कही।

    युवा धर्म संसद का आयोजन उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इसमें 24 राज्यों से 1500 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में धर्म संस्कृति शिक्षा तकनीक परिवार मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर संवाद हो रहा है। 19 सितंबर को होने वाले समापन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

  • इंजीनियरिंग करने वालों के लिए सरकारी नौकरी का मौका: UPSC ESE में 480 पदों पर भर्ती आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर

    इंजीनियरिंग करने वालों के लिए सरकारी नौकरी का मौका: UPSC ESE में 480 पदों पर भर्ती आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे इंजीनियरिंग डिग्री धारक युवाओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है। संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा 2027 के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 480 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर 2026 शाम 6 बजे तक तय की गई है।

    UPSC ESE 2027 भर्ती के तहत इंजीनियरिंग की अलग अलग शाखाओं से जुड़े पद शामिल किए गए हैं। इनमें सिविल इंजीनियरिंग श्रेणी प्रथम के पद शामिल हैं। इसके अलावा मैकेनिकल इंजीनियरिंग श्रेणी द्वितीय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग श्रेणी तृतीय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग श्रेणी चतुर्थ के पदों पर भी उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। ऐसे में संबंधित इंजीनियरिंग शाखा से पढ़ाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सरकारी सेवा में जाने का अवसर प्रदान करती है।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित इंजीनियरिंग विषय में निर्धारित डिग्री या डिप्लोमा होना जरूरी है। अभ्यर्थियों की आयु सीमा भी आयोग ने निर्धारित की है। उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम उम्र 30 वर्ष होनी चाहिए। आयु की गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाएगा।

    इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में होगा। सबसे पहले लिखित प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसके बाद व्यक्तित्व परीक्षण या इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के आगे के चरण में मेडिकल जांच और निर्धारित शारीरिक मानकों को भी पूरा करना होगा। सभी चरणों में निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित पदों पर नियुक्ति दी जाएगी।

    UPSC के कार्यक्रम के अनुसार इंजीनियरिंग सर्विस परीक्षा 2027 की प्रारंभिक परीक्षा 31 जनवरी 2027 को आयोजित होने की संभावना है। वहीं मुख्य परीक्षा 18 जून 2027 को होने की संभावित तारीख तय की गई है। हालांकि उम्मीदवारों को परीक्षा से संबंधित अंतिम कार्यक्रम और अन्य जरूरी बदलावों के लिए आयोग की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी को देखते रहना चाहिए।

    आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। सामान्य ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं एससी एसटी पीडब्ल्यूबीडी और महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।

    इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लेना चाहिए। आवेदन में किसी तरह की गलती से बचने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी पहले से तैयार रखना उपयोगी रहेगा। भर्ती से जुड़ी विस्तृत शर्तों परीक्षा पैटर्न और अन्य नियमों की जानकारी के लिए उम्मीदवारों को UPSC की ओर से जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर पढ़ना चाहिए।

  • स्वामित्व योजना के कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर चर्चा: सीएम ने बताया आयोजन का सूत्रधार विजयवर्गीय बोले राज की बात बता दी

    स्वामित्व योजना के कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर चर्चा: सीएम ने बताया आयोजन का सूत्रधार विजयवर्गीय बोले राज की बात बता दी


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार को स्वामित्व अधिकार योजना के तहत फ्री रजिस्ट्री बांटने के अभियान की शुरुआत के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में मंच से हुई एक टिप्पणी चर्चा में आ गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे का उल्लेख करते हुए उन्हें आयोजन का सूत्रधार बताया। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की इसी टिप्पणी का संदर्भ लेते हुए कहा कि उन्होंने एक राज की बात बता दी। कार्यक्रम का यह हिस्सा सामने आए वीडियो के बाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन के दौरान आयोजन की तैयारियों और उसे आकार देने में गौरव रणदिवे की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने रणदिवे को आयोजन का सूत्रधार बताया। इसके बाद जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मंच पर आए तो उन्होंने मुख्यमंत्री की बात को पकड़ते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने एक राज की बात बताई है। उन्होंने इसके लिए गौरव रणदिवे का भी आभार जताया।

    विजयवर्गीय की यह टिप्पणी सामने आने के बाद कार्यक्रम के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। हालांकि सार्वजनिक तौर पर विजयवर्गीय और रणदिवे के बीच किसी औपचारिक विवाद की जानकारी सामने नहीं आई है। कार्यक्रम में हुई टिप्पणी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं जरूर की जा रही हैं। भाजपा नेताओं से जुड़े समर्थक इसे विजयवर्गीय के सार्वजनिक मंचों पर दिखने वाले सहज और चुटीले अंदाज के रूप में देख रहे हैं।

    गौरव रणदिवे इंदौर भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। इंदौर भाजपा के नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद संगठन में उनकी भूमिका बढ़ी और बाद में उन्हें प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उनके संगठनात्मक कद को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसी वजह से मंच से उनका नाम लिए जाने और मुख्यमंत्री की ओर से आयोजन के सूत्रधार के तौर पर उल्लेख किए जाने को भी राजनीतिक हलकों में ध्यान से देखा गया।

    विजयवर्गीय और रणदिवे की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी इंदौर में चर्चा होती रही है। इससे पहले विजयवर्गीय एक कार्यक्रम में राजनीतिक संदर्भ में यह कह चुके हैं कि वे अपने द्वारा उगे हुए पौधों को नहीं काटते। उस समय भी उनके बयान को अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों से जोड़कर देखा गया था। अब इंदौर के इस कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर की गई टिप्पणी के बाद पुराना बयान भी सोशल मीडिया चर्चाओं में फिर सामने आया है।

    वहीं कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर गुटबाजी से जोड़कर टिप्पणी की गई। कांग्रेस मीडिया को-ऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में भाजपा के नेताओं के बीच कथित खींचतान सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्री के बयानों को आधार बनाकर संगठन के भीतर समन्वय पर सवाल उठाए।

    हालांकि कार्यक्रम के मंच से सामने आए बयानों के अलावा दोनों नेताओं के बीच किसी नए विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस घटनाक्रम का राजनीतिक अर्थ निकालने से पहले नेताओं के वास्तविक बयानों और पूरे कार्यक्रम के संदर्भ को देखना महत्वपूर्ण है। फिलहाल रणदिवे को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी और उसके बाद विजयवर्गीय का जवाब इंदौर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा

    महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अलसुबह मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल की विशेष पूजा और श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना के साथ उनका आशीर्वाद लिया। पूरे मंदिर परिसर में जय महाकाल के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद घंटी बजाकर भगवान से पूजा की आज्ञा ली गई। सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और फिर गर्भगृह के कपाट खोले गए। गर्भगृह में प्रवेश के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पुराना श्रृंगार उतारा। इसके बाद विधि विधान के साथ पंचामृत पूजन किया गया। पूजा के बाद कर्पूर आरती की गई।

    भस्म आरती की परंपरा में भगवान महाकाल के पूजन के साथ नंदी जी की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। नंदी हाल में नंदी जी का स्नान कराया गया। इसके बाद ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जल से अभिषेक हुआ। अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह के पूजन से भगवान महाकाल के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण प्रकट होता है।

    पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए। बाबा महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट धारण किया। इसके साथ ही रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी माला से उनका श्रृंगार किया गया। भांग चंदन ड्रायफ्रूट और भस्म भी अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन में होने वाली भस्म आरती बाबा महाकाल की विशेष आराधना के रूप में जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते भस्म आरती के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

    शुक्रवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। रजत मुकुट त्रिशूल मुंडमाला और पुष्पमाला से सजे बाबा महाकाल की छवि ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

  • पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

    पूजा के बाद स्कूटी के पास पहुंची युवती तो दिखी सांप की पूंछ: इंजन में जा छिपा था सांप एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन


    देवास । देवास में एक मंदिर में पूजा करने पहुंची युवती उस समय घबरा गई जब अपनी स्कूटी के पास लौटने पर उसे वाहन के अंदर सांप दिखाई दिया। सांप की पूंछ नजर आते ही युवती ने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दी। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने स्कूटी को ध्यान से देखा तो पता चला कि सांप वाहन के अंदर काफी गहराई तक जा चुका था। इसके बाद सर्प मित्र को सूचना दी गई और सांप को सुरक्षित बाहर निकालने की कवायद शुरू हुई।

    मामला देवास के उज्जैन रोड स्थित शिव मंदिर का बताया जा रहा है। युवती मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंची थी। उसने अपनी स्कूटी मंदिर के पास खड़ी की थी। पूजा पूरी करने के बाद जब वह वापस स्कूटी के पास आई तो उसकी नजर वाहन के अंदर मौजूद सांप की पूंछ पर पड़ी। सांप को देखते ही वह घबरा गई और उसने आसपास के लोगों को बुलाया। कुछ ही समय में वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।

    सूचना मिलने पर सर्प मित्र शाहिद अली अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उस समय तक सांप स्कूटी के अंदर इंजन के आसपास के हिस्से में जाकर छिप चुका था। सांप को बाहर निकालने के लिए टीम ने पहले वाहन के अलग अलग हिस्सों की जांच की। काफी कोशिश के बाद भी सांप आसानी से बाहर नहीं आया। इसके बाद स्कूटी की डिक्की और दूसरे जरूरी पार्ट्स को खोलकर अंदर छिपे सांप की तलाश की गई।

    सर्प मित्र और उनकी टीम करीब एक घंटे तक स्कूटी में सांप की तलाश करती रही। सांप इंजन के पास जाकर इस तरह छिपा हुआ था कि उसे सीधे बाहर निकालना आसान नहीं था। टीम ने बेहद सावधानी के साथ स्कूटी के हिस्से खोले और सांप तक पहुंचने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया।

    सर्प मित्र शाहिद अली ने बताया कि सांप स्कूटी के अंदर काफी गहराई तक चला गया था। इसी वजह से उसे बाहर निकालने के लिए वाहन के कई हिस्सों को खोलना पड़ा। राहत की बात यह रही कि सांप जहरीला नहीं था। इसके बावजूद टीम ने पूरी सावधानी के साथ उसका रेस्क्यू किया ताकि सांप या आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।

    सांप के बाहर निकलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। जिस स्कूटी में कुछ देर पहले तक सांप छिपा हुआ था उसे देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लगी रही। रेस्क्यू के बाद सांप को किसी तरह की चोट नहीं आई और उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि बारिश और बदलते मौसम के दौरान सांप सुरक्षित और गर्म जगह की तलाश में वाहनों के अंदर भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में वाहन खड़ा करने के बाद उसे चलाने से पहले आसपास और खासकर खुले हिस्सों की जांच करना जरूरी है। अगर किसी वाहन में सांप दिखाई दे तो खुद उसे पकड़ने या निकालने की कोशिश करने के बजाय प्रशिक्षित सर्प मित्र या विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।

  • राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल

    राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल


    देवास । मध्य प्रदेश की सियासत में राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर दौरे से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं जहां छात्रों से शिक्षा व्यवस्था और उनसे जुड़े मुद्दों पर संवाद प्रस्तावित है। इस बीच मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। देवड़ा ने कहा कि राहुल गांधी के कितने भी दौरे हो जाएं इसका जनता पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि जनता भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा करती है और कांग्रेस के लंबे शासनकाल को भी नहीं भूली है।

    देवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान में शामिल होने पहुंचे देवड़ा ने मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने शासन के दौरान किए गए कामों का हिसाब देना चाहिए। देवड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में कई घोटाले हुए और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी बने रहे।

    उपमुख्यमंत्री ने सड़क बिजली और सिंचाई जैसे विषयों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के पुराने शासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने करीब 60 वर्षों तक देश में शासन किया और अब जनता यह जानना चाहती है कि उस दौरान आम लोगों के लिए क्या काम किए गए। देवड़ा ने गरीबों के इलाज आवास और साफ पानी जैसी सुविधाओं को लेकर भी कांग्रेस से सवाल किए।

    राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम 19 सितंबर को आयोजित होना है। छात्रों की गूंज नाम के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम का फोकस शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े अनुभवों और समस्याओं पर बताया गया है। राहुल गांधी ने छात्रों से कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी समस्याएं साझा करने की अपील भी की है।

    इंदौर में होने वाले कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर बदलाव हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक मूल रूप से प्रस्तावित नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद क्षेत्रीय पार्क के पास वैकल्पिक स्थान तय किया गया है। आयोजन के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी अनुमति और भुगतान की प्रक्रिया भी चर्चा में रही है।

    देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि कांग्रेस के नेता चाहे जितने दौरे करें भाजपा सरकार को लेकर जनता का भरोसा बना हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी का इंदौर दौरा शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। दूसरी ओर कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सामने लाने की बात कह रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस का कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है तो दूसरी तरफ भाजपा नेता इसे लेकर कांग्रेस के पिछले शासन और मौजूदा राजनीतिक दावों पर सवाल उठा रहे हैं। अब 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों के साथ किन मुद्दों पर संवाद करते हैं और उसके बाद प्रदेश की राजनीति में किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं इस पर नजर रहेगी।

  • रूखे और बेजान बालों के लिए दही-केला हेयर पैक: ऐसे करें इस्तेमाल बाल हो सकते हैं मुलायम और चमकदार

    रूखे और बेजान बालों के लिए दही-केला हेयर पैक: ऐसे करें इस्तेमाल बाल हो सकते हैं मुलायम और चमकदार


    नई दिल्ली। बालों की खूबसूरती बनाए रखने के लिए लोग कई तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों से भी बालों की देखभाल की जा सकती है। दही और केला ऐसा ही घरेलू संयोजन है जिसे हेयर पैक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। केले में पोषक तत्व और दही में प्रोटीन तथा लैक्टिक एसिड पाया जाता है। ये चीजें बालों और स्कैल्प को कंडीशनिंग देने में मदद कर सकती हैं। खासतौर पर रूखे और बेजान बालों को मुलायम महसूस कराने के लिए यह घरेलू पैक इस्तेमाल किया जाता है।

    दही और केले का हेयर पैक तैयार करना काफी आसान है। इसके लिए एक पका हुआ केला लें और उसे अच्छी तरह मैश कर लें। इसमें दो से तीन चम्मच ताजा दही मिलाकर दोनों को तब तक अच्छी तरह मिलाएं जब तक एक स्मूद पेस्ट तैयार न हो जाए। अगर बाल बहुत ज्यादा रूखे हैं तो इसमें थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल भी मिलाया जा सकता है। तैयार मिश्रण को बालों की लंबाई और सिरों पर अच्छी तरह लगाएं। स्कैल्प पर लगाने से पहले यह ध्यान रखें कि वहां किसी तरह की जलन या संक्रमण की समस्या न हो।

    इस पैक को बालों में करीब 20 से 30 मिनट तक रखा जा सकता है। इसके बाद सामान्य पानी से बालों को अच्छी तरह धो लें। केले के छोटे टुकड़े बालों में चिपक सकते हैं इसलिए पैक को पूरी तरह साफ करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर हल्के शैंपू से बाल धोए जा सकते हैं। पैक को बहुत देर तक बालों में लगाकर रखने से अतिरिक्त फायदा मिलने की गारंटी नहीं है इसलिए सीमित समय तक ही इस्तेमाल करना बेहतर है।

    दही बालों को कंडीशनिंग देने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व बालों को मुलायम महसूस कराने में भूमिका निभा सकते हैं। वहीं केला बालों की नमी बनाए रखने में मदद करने वाले हेयर पैक में इस्तेमाल किया जाता है। दोनों को मिलाकर लगाने से बालों में अस्थायी तौर पर सॉफ्टनेस और चमक महसूस हो सकती है। खासकर ऐसे बाल जिनमें रूखापन और फ्रिजीनेस ज्यादा है उनके लिए यह पैक उपयोगी लग सकता है।

    इस घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल सप्ताह में एक बार किया जा सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति के बालों के प्रकार और स्कैल्प की स्थिति पर अलग हो सकता है। अगर बाल बहुत ऑयली हैं तो दही और केले की मात्रा कम रखी जा सकती है। वहीं बहुत ड्राई बालों में पैक को केवल बालों की लंबाई और सिरों तक लगाने से बेहतर कंडीशनिंग मिल सकती है।

    दही और केले का पैक इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। अगर स्कैल्प पर खुजली लालिमा घाव या फंगल इंफेक्शन जैसी समस्या है तो इसे लगाने से बचें। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग थोड़ी मात्रा लेकर पैच टेस्ट कर सकते हैं। किसी तरह की जलन या एलर्जी महसूस होने पर तुरंत धो दें। इसके अलावा बालों के झड़ने की समस्या लगातार बनी हुई है या बहुत ज्यादा बढ़ गई है तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

    बालों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ बाहरी देखभाल पर्याप्त नहीं होती। संतुलित आहार पर्याप्त पानी अच्छी नींद और नियमित हेयर केयर भी जरूरी है। दही और केला हेयर पैक बालों को मुलायम और व्यवस्थित दिखाने में मदद कर सकता है लेकिन इसे बालों की किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। सही तरीके और सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने पर यह घरेलू हेयर केयर रूटीन का एक आसान विकल्प हो सकता है।

  • हाईकोर्ट से विदाई के साथ समाजसेवा का संकल्प: पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह PM राहत कोष में देंगे एक करोड़ रुपए

    हाईकोर्ट से विदाई के साथ समाजसेवा का संकल्प: पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह PM राहत कोष में देंगे एक करोड़ रुपए


    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने रिटायरमेंट के मौके पर समाजसेवा से जुड़ा बड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष में एक करोड़ एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। यह रकम उन्हें अपने जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF से प्राप्त होगी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी इंदिरा के साथ देहदान करने का भी संकल्प लिया है। जस्टिस सिंह ने यह घोषणा गुरुवार को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम के दौरान की। इसी दिन वह न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए।

    फेयरवेल कार्यक्रम में जस्टिस सिंह ने अपने इस फैसले के पीछे पत्नी इंदिरा की इच्छा को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी चाहती थीं कि रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए कुछ किया जाए। इसी भावना का सम्मान करते हुए दोनों ने यह संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि GPF की राशि उनके बैंक खाते में आते ही उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। उनका यह फैसला कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    जस्टिस सिंह ने अपने जीवन से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ छह महीने के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता के साथ उनकी मौसी स्वर्गीय निर्मला बुच और मौसा स्वर्गीय महेश नीलकंठ बुच ने उन्हें बेटे की तरह पाला। निर्मला बुच मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव भी रह चुकी थीं। जस्टिस सिंह ने अपने पालन पोषण और जीवन निर्माण में परिवार की भूमिका को याद करते हुए अपनी बात रखी।

    फेयरवेल के दौरान उन्होंने न्याय व्यवस्था में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में मुकदमों की सुनवाई मुख्य रूप से फिजिकल मोड में होती थी लेकिन अब वर्चुअल सुनवाई ने न्यायिक प्रक्रिया को कई स्तर पर आसान बनाया है। तकनीक के इस्तेमाल से अदालतों की कार्यप्रणाली में बदलाव आया है और न्यायिक प्रक्रिया के सामने मौजूद कई व्यावहारिक चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है।

    कार्यक्रम के दौरान पत्नी इंदिरा का जिक्र करते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में पत्नी की बातों का सम्मान किया है। अब रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए देहदान करने का उनका संकल्प है और वह इस इच्छा को भी पूरा करेंगे। जैसे ही उन्होंने यह बात कही पूरा कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा।

    फेयरवेल कार्यक्रम को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने भी संबोधित किया। उन्होंने जस्टिस सिंह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियां दी गईं उन्होंने उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया। जस्टिस सिंह ने हाईकोर्ट के जज के रूप में करीब तीन साल काम किया और इस दौरान कुल 8788 मुकदमों का निपटारा किया।

    चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि किसी जज के काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उन्होंने कितने मामलों का निपटारा किया बल्कि उनके फैसलों की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। इस तरह जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की विदाई उनके न्यायिक कार्यकाल के आंकड़ों के साथ समाजसेवा और देहदान के संकल्प के लिए भी याद की जाएगी।

  • पंचक को लेकर जानें जरूरी बात: सितंबर में इस तारीख से शुरू होगा पंचक जानिए शुभ कामों पर क्या पड़ेगा असर

    पंचक को लेकर जानें जरूरी बात: सितंबर में इस तारीख से शुरू होगा पंचक जानिए शुभ कामों पर क्या पड़ेगा असर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पंचक उस अवधि को कहा जाता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक हर महीने नहीं आता और इसकी अवधि सामान्य तौर पर करीब पांच दिनों की होती है। सितंबर 2026 में भी पंचक लगने वाला है जिसे लेकर धार्मिक कार्यों और शुभ आयोजनों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं।

    सितंबर 2026 में पंचक 20 सितंबर से शुरू होकर 24 सितंबर तक रहने की मान्यता है। इस अवधि में चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहेगा। पंचक की शुरुआत और समाप्ति का सही समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे पीछे हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचक को पांच नक्षत्रों से जोड़कर देखा जाता है। धनिष्ठा के उत्तरार्ध से लेकर शतभिषा पूर्वाभाद्रपद उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक की अवधि को पंचक कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि पंचक को लेकर अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं भी अलग हो सकती हैं।

    पंचक के दौरान सबसे अधिक चर्चा उन कामों की होती है जिन्हें इस अवधि में करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचक में घर की छत डालने या निर्माण से जुड़े कुछ विशेष कार्यों को शुरू करने से बचना चाहिए। इसी तरह लकड़ी या ईंधन का संग्रह करने को भी कुछ परंपराओं में उचित नहीं माना जाता। दक्षिण दिशा से जुड़े कुछ कार्यों को लेकर भी पंचक में सावधानी बरतने की मान्यता है।

    अंतिम संस्कार से जुड़ी भी पंचक की एक विशेष मान्यता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में पंचक के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर विशेष विधि से अंतिम संस्कार करने की बात कही गई है। मान्यता है कि ऐसा करने से पंचक दोष से बचाव होता है। हालांकि इस विषय में अलग अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मत मिलते हैं इसलिए परिवार के पुरोहित या स्थानीय विद्वान से सलाह लेना उचित माना जाता है।

    पंचक के दौरान पूजा पाठ मंत्र जाप ध्यान और भगवान का स्मरण करने को लेकर कोई सामान्य रोक नहीं मानी जाती। भक्त इस अवधि में अपनी नियमित पूजा कर सकते हैं। भगवान शिव विष्णु और अन्य देवी देवताओं की आराधना करना भी धार्मिक रूप से किया जाता है। जरूरतमंद लोगों की मदद करना और दान पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।

    यह ध्यान रखना जरूरी है कि पंचक से जुड़ी बातें मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से पंचक को लेकर ऐसी मान्यताओं की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को रोकने या उसका समय बदलने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और संबंधित धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना बेहतर होता है।

    सितंबर का पंचक समाप्त होने के बाद सामान्य धार्मिक और मांगलिक कार्यों को लेकर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखे जा सकते हैं। ऐसे में पंचक की तारीख के साथ उसके स्थानीय समय की जानकारी रखना जरूरी है ताकि किसी धार्मिक आयोजन की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति न बने।

  • ग्रहों के जन्म पर नई पहेली: इतना युवा और इतना विशाल ग्रह इतनी दूर कैसे बना? वैज्ञानिक भी हैरान

    ग्रहों के जन्म पर नई पहेली: इतना युवा और इतना विशाल ग्रह इतनी दूर कैसे बना? वैज्ञानिक भी हैरान


    नई दिल्ली। खगोल विज्ञान की दुनिया में वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज मिली है जिसने ग्रहों के निर्माण को लेकर मौजूदा समझ के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। वैज्ञानिकों ने एलियास 2-24 बी नाम के एक बेहद युवा ग्रह की पुष्टि की है। इसकी उम्र 10 लाख साल से भी कम मानी जा रही है। खास बात यह है कि यह ग्रह आकार में करीब बृहस्पति जितना विशाल है और अपने तारे से पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी से करीब 55 गुना ज्यादा दूर स्थित है। इतनी कम उम्र में इतनी दूर एक विशाल गैसीय ग्रह का मौजूद होना वैज्ञानिकों के लिए किसी पहेली से कम नहीं है।

    एलियास 2-24 बी जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है वह खुद भी बेहद युवा है। उसके चारों तरफ गैस धूल बर्फ और चट्टानी पदार्थ से बनी एक विशाल डिस्क मौजूद है। आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहों का निर्माण इसी तरह की डिस्क से होता है। समय के साथ इसमें मौजूद छोटे कण और चट्टानी टुकड़े आपस में जुड़ते हैं। धीरे धीरे बड़े पिंड बनते हैं और फिर वे अपने आसपास मौजूद पदार्थ को खींचकर ग्रह का आकार लेना शुरू करते हैं। लेकिन एलियास 2-24 बी की उम्र को देखते हुए इसकी मौजूदगी इस प्रक्रिया को लेकर वैज्ञानिकों के लिए कई नए सवाल खड़े कर रही है।

    इस ग्रह का सुराग पहली बार तब मिला जब चिली में मौजूद एएलएमए वेधशाला ने एलियास 2-24 के आसपास मौजूद धूल और गैस की डिस्क में एक बड़ा गैप देखा। इसके बाद यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के वेरी लार्ज टेलीस्कोप ने इसी क्षेत्र में बेहद कमजोर रोशनी का एक बिंदु दर्ज किया। हालांकि उस समय यह तय नहीं हो पाया था कि वह वास्तव में ग्रह है या फिर दूर मौजूद किसी दूसरे तारे की रोशनी। इस रहस्य को सुलझाने में वैज्ञानिकों को कई साल लग गए।

    शोधकर्ताओं ने बाद में पुराने आंकड़ों की भी जांच की। नासा की ओर से वित्तपोषित केक वेधशाला के 2018 और 2020 के अवलोकनों में इसी वस्तु को दर्ज किया गया था। दोनों समय उसकी स्थिति की तुलना करने पर पता चला कि वह एलियास 2-24 के साथ ही गति कर रही थी। इससे इस बात की पुष्टि करने में मदद मिली कि यह कोई दूर का पृष्ठभूमि तारा नहीं बल्कि एलियास 2-24 की परिक्रमा करने वाला ग्रह है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एलियास 2-24 बी इतनी जल्दी बना कैसे। वैज्ञानिक मॉडलों के मुताबिक बृहस्पति जैसे विशाल ग्रह को बनने में लाखों साल लग सकते हैं। सूर्य से बृहस्पति जितनी दूरी के आसपास किसी विशाल ग्रह के बनने में करीब 50 लाख साल लगने का अनुमान लगाया जाता है। वहीं एलियास 2-24 बी इससे भी करीब 10 गुना ज्यादा दूर है और उसकी उम्र 10 लाख साल से कम है। यही अंतर मौजूदा ग्रह निर्माण मॉडल के सामने चुनौती पेश करता है।

    यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवजात ग्रह आमतौर पर अपने जन्मस्थान की गैस और धूल के बीच छिपे रहते हैं। ऊपर से उनके युवा तारे की तेज रोशनी उनकी कमजोर चमक को दबा देती है। ऐसे में किसी ग्रह को उसके जन्म के इतने शुरुआती चरण में देख पाना बेहद दुर्लभ मौका माना जा रहा है।

    वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि एलियास 2-24 बी का अध्ययन यह समझने में मदद करेगा कि गैस और धूल से विशाल ग्रह कितनी तेजी से बन सकते हैं। भविष्य में नासा का नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप ऐसे और युवा ग्रहों की खोज में मदद कर सकता है। इस तरह एलियास 2-24 बी सिर्फ एक नया ग्रह नहीं बल्कि ग्रहों के जन्म की प्रक्रिया को समझने के लिए एक अहम प्राकृतिक प्रयोगशाला बन सकता है।