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  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक

    गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने केवल ब्रॉन्ज मेडल ही नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे से करोड़ों लोगों का दिल भी जीत लिया। आर्थिक तंगी, कठिन परिस्थितियों और रोजमर्रा की चुनौतियों से लड़ते हुए उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कभी उनके गांव के लोगों ने भी नहीं की थी। ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचकर जीवनयापन करने वाले झंडू आज देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

    पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मुकाबले के बाद भावुक झंडू ने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। उनका मानना था कि लगातार मेहनत करने वालों को एक दिन सफलता जरूर मिलती है और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

    झंडू ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर चलाने के लिए कभी ई-रिक्शा चलाना पड़ा तो कभी सब्जियां बेचनी पड़ीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को नहीं छोड़ा। दिनभर मेहनत करने के बाद भी अभ्यास जारी रखा और हर चुनौती को अपनी ताकत बनाया। उनका कहना है कि कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनाया।

    प्रतियोगिता में झंडू ने ग्रुप बी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 130.9 अंक हासिल किए और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उन्होंने युगांडा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता, जबकि झंडू केवल 0.1 अंक के बेहद मामूली अंतर से रजत पदक से चूक गए। इसके बावजूद उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इसी के साथ देश का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदकों का खाता खुला।

    झंडू की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया, उनका हौसला बढ़ाया और उन पर विश्वास बनाए रखा।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि उनके सफर का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। अब उनका लक्ष्य देश के लिए और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतना है। झंडू का मानना है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

    झंडू कुमार की यह कहानी साबित करती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, निरंतर मेहनत और अपने सपनों पर अटूट विश्वास से हासिल होती है। उनका संघर्ष आज देशभर के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार पंच, जादुमनी ने एकतरफा मुकाबले में दर्ज की शानदार जीत

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दमदार पंच, जादुमनी ने एकतरफा मुकाबले में दर्ज की शानदार जीत


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग दल ने शानदार आगाज किया है। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में भारत के युवा मुक्केबाज जादुमनी सिंह मंडेन्गबाम ने अपने पहले ही मुकाबले में दमदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान स्कॉटलैंड के एरन कलन को 5-0 से करारी शिकस्त दी। इस प्रभावशाली जीत के साथ जादुमनी ने राउंड ऑफ 16 में जगह पक्की कर ली और पदक की ओर एक मजबूत कदम बढ़ा दिया।

    एसईसी हॉल में खेले गए इस मुकाबले में शुरुआत से ही जादुमनी पूरी तरह लय में नजर आए। उन्होंने तेज रफ्तार, सटीक पंच और मजबूत डिफेंस का शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। पहले राउंड से लेकर आखिरी राउंड तक भारतीय मुक्केबाज का दबदबा साफ दिखाई दिया। घरेलू दर्शकों के जोरदार समर्थन के बावजूद स्कॉटलैंड के एरन कलन भारतीय खिलाड़ी की आक्रामक रणनीति के सामने बेबस नजर आए।

    मुकाबले के दौरान जादुमनी ने बेहतरीन फुटवर्क और सटीक काउंटर अटैक का प्रदर्शन किया। उनके लगातार सटीक पंचों ने विपक्षी खिलाड़ी को पूरे मुकाबले में दबाव में रखा। यही वजह रही कि पांचों जजों ने एकमत से जादुमनी को विजेता घोषित किया। सभी जजों ने प्रत्येक राउंड में भारतीय बॉक्सर के पक्ष में 30-27 का समान स्कोर दिया, जिससे उनकी एकतरफा जीत की तस्वीर साफ हो गई।

    इस शानदार जीत के बाद अब जादुमनी का अगला मुकाबला 26 जुलाई को पाकिस्तान के मुक्केबाज रहमान से होगा। दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच होने वाला यह मुकाबला काफी रोमांचक माना जा रहा है। यदि जादुमनी इस चुनौती को भी पार कर लेते हैं तो वह क्वार्टर फाइनल में पहुंच जाएंगे और पदक की उम्मीदें और मजबूत हो जाएंगी। भारतीय दल को उनसे इस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम इस बार अधिक से अधिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरी है। हालांकि इस संस्करण में बैडमिंटन, हॉकी, क्रिकेट, शूटिंग और कुश्ती जैसे कई प्रमुख खेल शामिल नहीं किए गए हैं, जिनमें भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है। ऐसे में बॉक्सिंग से भारतीय दल को बड़ी उम्मीदें हैं।

    इससे पहले भारत की स्टार मुक्केबाज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन बिना मुकाबला खेले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं। पहले दौर में बाय मिलने के कारण उनका कांस्य पदक पहले ही सुनिश्चित हो गया है। अब वह 31 जुलाई को अपना पहला मुकाबला खेलेंगी। यदि लवलीना जीत दर्ज करती हैं तो उनका कम से कम रजत पदक पक्का हो जाएगा।

    जादुमनी की दमदार शुरुआत ने भारतीय बॉक्सिंग टीम का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें उनके अगले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां पाकिस्तान के खिलाफ जीत दर्ज कर वह पदक की दौड़ में खुद को और मजबूती से स्थापित करना चाहेंगे।

  • भारत का डबल धमाका! पहले ओमान फिर पाकिस्तान को हराया, पुरुष टीम का शानदार प्रदर्शन जारी

    भारत का डबल धमाका! पहले ओमान फिर पाकिस्तान को हराया, पुरुष टीम का शानदार प्रदर्शन जारी


    नई दिल्ली। मस्कट में आयोजित एफआईएच यूथ हॉकी5एस एशियन चैंपियनशिप 2026 में भारतीय सब जूनियर पुरुष टीम ने अपने शानदार खेल से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारतीय खिलाड़ियों ने पहले मेजबान ओमान को 10-1 के बड़े अंतर से मात दी और इसके बाद चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 7-3 से हराकर टूर्नामेंट में अपना दबदबा साबित कर दिया। लगातार दो प्रभावशाली जीत के साथ भारतीय टीम ने यह संकेत दे दिया है कि वह खिताब की सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल है। हालांकि महिला टीम को चीन के खिलाफ कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।

    पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। पहले हाफ में ही भारत ने 3-0 की मजबूत बढ़त बना ली थी। रोमित पाल ने आठवें मिनट में पहला गोल दागकर टीम का खाता खोला। इसके बाद करण गौतम और कप्तान केतन कुशवाहा ने लगातार गोल कर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया। भारतीय खिलाड़ियों की तेज रफ्तार और सटीक आक्रमण के सामने पाकिस्तानी टीम पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई।

    दूसरे हाफ में भी भारतीय टीम का दबदबा कायम रहा। प्रहलाद राजभर ने चौथा गोल कर बढ़त को और मजबूत किया। पाकिस्तान ने मोहम्मद उस्मान के दो गोल और कप्तान अदील के एक गोल के दम पर वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन भारतीय टीम ने उन्हें ज्यादा मौका नहीं दिया। शाहरुख अली, राहुल यादव और कप्तान केतन कुशवाहा ने लगातार गोल दागकर भारत की 7-3 की शानदार जीत सुनिश्चित कर दी।

    इससे पहले मेजबान ओमान के खिलाफ भी भारतीय खिलाड़ियों ने एकतरफा प्रदर्शन किया। पहले हाफ में ही भारत ने 6-0 की बढ़त हासिल कर मुकाबले का रुख तय कर दिया था। शाहरुख अली और कप्तान केतन कुशवाहा ने दो-दो गोल किए, जबकि करण गौतम और प्रहलाद राजभर ने भी गोल कर टीम की बढ़त मजबूत की। ओमान की ओर से एकमात्र गोल खजराज सुबैत सुबैत अल मशराफी ने किया, लेकिन इससे मैच के नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ा और भारत ने 10-1 से बड़ी जीत दर्ज की।

    दूसरी ओर भारतीय सब जूनियर महिला टीम को चीन के खिलाफ 3-6 से हार झेलनी पड़ी। भारत ने शानदार शुरुआत करते हुए शुरुआती बढ़त बनाई। संदीप कुमार ने पहला गोल किया, जबकि किरण एक्का ने लगातार दो गोल दागकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। हालांकि चीन ने शानदार वापसी करते हुए हाफ टाइम तक मुकाबला 3-3 से बराबर कर लिया।

    दूसरे हाफ में चीनी टीम ने अपनी आक्रामकता और बढ़ा दी। गुओ जियाक्सिन ने हैट्रिक पूरी की, जबकि लू टोंगटोंग ने दूसरा गोल कर चीन की जीत पर मुहर लगा दी। भारतीय टीम ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन वापसी नहीं कर सकी।

    यह टूर्नामेंट पहली बार आयोजित होने वाले एफआईएच यूथ हॉकी5एस विश्व कप के लिए एशियाई क्वालीफायर भी है। ऐसे में भारतीय पुरुष टीम की लगातार दो जीत उसके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देने के साथ विश्व कप क्वालीफिकेशन की राह भी मजबूत कर रही है।

  • IND vs ZIM: दूसरे टी20 में इन 5 खिलाड़ियों पर रहेंगी सबकी निगाहें, वैभव फिर मचा सकते हैं धमाल!

    IND vs ZIM: दूसरे टी20 में इन 5 खिलाड़ियों पर रहेंगी सबकी निगाहें, वैभव फिर मचा सकते हैं धमाल!


    नई दिल्ली। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। पहले मुकाबले में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी और उसकी कोशिश होगी कि जीत हासिल कर सीरीज पर कब्जा जमा लिया जाए। दूसरी ओर जिम्बाब्वे के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा होगा। यदि मेजबान टीम को सीरीज में बने रहना है तो उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

    पहले मुकाबले में भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। उन्होंने केवल 19 गेंदों में अर्धशतक जड़ते हुए साबित कर दिया कि वह बड़े मंच पर भी बेखौफ अंदाज में खेलने का माद्दा रखते हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों की रणनीति पूरी तरह बिगाड़ दी थी। दूसरे मुकाबले में भी उनसे इसी तरह की धमाकेदार शुरुआत की उम्मीद रहेगी। यदि उनका बल्ला फिर चला तो भारतीय टीम को बड़ी बढ़त मिल सकती है।

    विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन भी शानदार लय में दिखाई दे रहे हैं। पहले मैच में उन्होंने तेज गति से रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया था। इंग्लैंड दौरे पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद ईशान अब लगातार बड़ी पारियां खेलकर अपनी जगह और मजबूत करना चाहेंगे। उनकी तेज शुरुआत विपक्षी टीम पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

    गेंदबाजी विभाग में सबसे बड़ी उम्मीद तेज गेंदबाज मयंक यादव से होगी। चोट से वापसी के बाद उन्होंने पहले ही मुकाबले में अपनी रफ्तार और सटीक लाइन लेंथ से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने चार ओवर में सिर्फ 18 रन देकर दो विकेट झटके और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। यदि मयंक इसी लय में गेंदबाजी करते हैं तो जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान नहीं होगा।

    हालांकि भारतीय टीम को जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा से सतर्क रहना होगा। रजा बल्ले और गेंद दोनों से मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। इस साल टी20 क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है और घरेलू परिस्थितियों का उन्हें पूरा फायदा मिलता है। यदि वह लंबी पारी खेलने में सफल रहे तो भारत के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

    तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजारबानी भी जिम्बाब्वे के सबसे प्रभावी खिलाड़ियों में शामिल हैं। पहले मुकाबले में उन्होंने नई गेंद से भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया था और दो अहम विकेट भी अपने नाम किए थे। उनकी अतिरिक्त उछाल और स्विंग भारतीय शीर्ष क्रम की परीक्षा ले सकती है।

    कुल मिलाकर दूसरे टी20 मुकाबले में भारत के पास सीरीज जीतने का शानदार मौका है, लेकिन जिम्बाब्वे भी वापसी के लिए पूरा दम लगाएगा। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, मयंक यादव, सिकंदर रजा और ब्लेसिंग मुजारबानी जैसे खिलाड़ी इस मुकाबले के सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

  • एआई और रोबोटिक्स में चीन की बढ़त रोकने का अमेरिकी प्लान, सांसद बोले- चीनी रोबोट बन सकते हैं जासूसी का हथियार

    एआई और रोबोटिक्स में चीन की बढ़त रोकने का अमेरिकी प्लान, सांसद बोले- चीनी रोबोट बन सकते हैं जासूसी का हथियार


    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती ताकत अब अमेरिका के लिए नई सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने एक ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाया है जिसका उद्देश्य चीन में निर्मित ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट को अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से दूर रखना है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यही रोबोट राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी की कम्युनिकेशंस एंड टेक्नोलॉजी सब कमेटी में गार्ड एक्ट पर सुनवाई के दौरान सांसदों ने कहा कि चीन पहले ड्रोन उद्योग में जिस रणनीति से वैश्विक बाजार पर कब्जा करने में सफल रहा था अब वही मॉडल रोबोटिक्स और एआई सेक्टर में अपनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इंटरनेट से जुड़े ये रोबोट केवल मशीन नहीं बल्कि डेटा संग्रह और निगरानी का माध्यम भी बन सकते हैं।

    समिति के अध्यक्ष ब्रेट गुथरी ने कहा कि अमेरिका पहले ही चीनी दूरसंचार उपकरणों और ड्रोन के खिलाफ कड़े कदम उठा चुका है। अब रोबोटिक्स क्षेत्र में भी उसी सतर्कता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी नागरिकों के डेटा की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर अनक्रूड व्हीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल रॉबिंस ने चेतावनी दी कि चीन बेहद कम कीमत पर सरकारी सब्सिडी वाले रोबोट दुनिया भर में उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक स्तर पर ह्यूमनॉइड रोबोट की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति पर चीनी कंपनियों का कब्जा हो चुका है और अमेरिकी अनुसंधान संस्थान भी सस्ते विकल्पों की वजह से इन पर निर्भर होते जा रहे हैं।

    रॉबिंस ने कहा कि एक सामान्य लैपटॉप केवल डेटा चुरा सकता है लेकिन इंटरनेट से जुड़ा रोबोट किसी फैक्ट्री अस्पताल बिजली संयंत्र या सैन्य ठिकाने के भीतर घूमकर निगरानी कर सकता है डेटा इकट्ठा कर सकता है और भौतिक गतिविधियां भी अंजाम दे सकता है। उनके अनुसार यदि ऐसे सिस्टम से छेड़छाड़ की जाए या रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया जाए तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने इसे ट्रोजन हॉर्स जैसी स्थिति बताया और कहा कि कार्रवाई में जितनी देरी होगी भविष्य में चीनी तकनीक पर निर्भरता उतनी ही बढ़ती जाएगी।

    व्हाइट हाउस की पूर्व प्रौद्योगिकी सलाहकार लिंडसे गोरमन ने भी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को पूरी तरह बदल दिया है। उनके मुताबिक एआई साइबर हमलों को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बना रहा है और इससे हमलावरों को बढ़त मिलने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को कम लागत वाले भरोसेमंद एआई मॉडल विकसित करने चाहिए ताकि दुनिया के अन्य देशों को चीनी विकल्पों पर निर्भर न रहना पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य ताकत या अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि एआई और रोबोटिक्स में तकनीकी बढ़त भी देशों की रणनीतिक स्थिति तय करेगी। यही वजह है कि अमेरिका अब जापान दक्षिण कोरिया ताइवान इजरायल ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षित और भरोसेमंद तकनीकी सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक तकनीकी और भू-राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

  • टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा

    टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी टैरिफ नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार की व्यापारिक रणनीति के कारण अमेरिका में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हालिया कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार टैरिफ नीति को जारी रखेगी और इसके लिए आवश्यक कानूनी बदलाव भी कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली है लेकिन आर्थिक एजेंडा पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है।

    ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सरकार ने टैरिफ लागू करने के लिए दूसरी कानूनी व्यवस्थाओं का सहारा लिया है जिनका इस्तेमाल पहले भी विभिन्न अमेरिकी प्रशासन कर चुके हैं। उनके मुताबिक अदालत ने केवल प्रक्रिया बदलने की बात कही थी और सरकार ने उसी दिशा में कदम उठाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कानूनी व्यवस्था के तहत लागू किए गए टैरिफ न्यायिक जांच में भी टिकेंगे।

    राष्ट्रपति ने दावा किया कि टैरिफ नीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर की कंपनियां अब अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए आगे आ रही हैं। उनके अनुसार देश में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित या शुरू हो चुका है जो अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चार वर्षों में निवेश एक ट्रिलियन डॉलर से भी कम रहा जबकि उनकी सरकार ने केवल एक वर्ष में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि टैरिफ लागू नहीं किए गए होते तो अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनका मानना है कि आयात शुल्क ने विदेशी कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि संघीय राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से हाल में शुरू की गई एक व्यापारिक जांच में बाल मजदूरी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने दुनिया के कई देशों की समीक्षा की और बाल मजदूरी भी उन कारणों में शामिल थी जिनके आधार पर कुछ व्यापारिक फैसले लिए गए। हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक विस्तार से टिप्पणी नहीं की।

    राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक नीति को ऊर्जा उत्पादन घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि टैरिफ केवल व्यापारिक हथियार नहीं बल्कि अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका वापस लाना और देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है।

    इस बीच ट्रंप की टैरिफ नीति पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी हुई है। यूरोपीय संघ चीन और कई एशियाई व्यापारिक साझेदार अमेरिकी व्यापारिक कदमों और उनसे जुड़े कानूनी विवादों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक व्यापार सप्लाई चेन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ट्रंप की बदली हुई कानूनी रणनीति और उनके बड़े आर्थिक दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • 7200 वोल्ट की लाइन पर फंसा भालू, मदद पहुंचने से पहले चली गई जान; वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल

    7200 वोल्ट की लाइन पर फंसा भालू, मदद पहुंचने से पहले चली गई जान; वायरल वीडियो ने उठाए कई सवाल


    नई दिल्ली।
    अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में एक दर्दनाक घटना ने वन्यजीव बचाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक जंगली भालू बिजली के ऊंचे खंभे पर चढ़ गया और हाई वोल्टेज तारों के बीच फंस गया। राहगीरों ने तुरंत इसकी सूचना इमरजेंसी सेवाओं को दी, लेकिन समय पर राहत टीम नहीं पहुंच सकी। आखिरकार 7200 वोल्ट की बिजली लाइन के संपर्क में आने से भालू की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    राहगीरों ने सबसे पहले देखा संकट में फंसा भालू

    घटना के दौरान शैनन मुलेंस अपने परिवार के साथ हाईवे से गुजर रही थीं। उन्होंने सबसे पहले बिजली के खंभे पर फंसे भालू को देखा। उनके मंगेतर ने तुरंत 911 पर कॉल कर अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

    कुछ देर बाद वहां से गुजर रहे रॉबिन डॉसन भी रुक गए। उन्होंने भी इमरजेंसी सेवाओं को फोन कर बताया कि भालू खंभे पर फंसा हुआ है और लगातार संघर्ष कर रहा है। डॉसन के मुताबिक, दूर खड़े होने के बावजूद भालू की तेज सांसें साफ सुनाई दे रही थीं, जिससे उसकी परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता था।

    करीब आधे घंटे तक नहीं पहुंची रेस्क्यू टीम

    रॉबिन डॉसन लगभग 30 मिनट तक मौके पर मौजूद रहे। उन्हें उम्मीद थी कि वन विभाग या बिजली विभाग की टीम जल्द पहुंचकर भालू को सुरक्षित नीचे उतार लेगी। लेकिन काफी देर तक कोई नहीं आया।

    इसके बाद उन्होंने दोबारा 911 पर संपर्क किया। उनका कहना है कि उन्हें बताया गया कि फिलहाल कोई टीम नहीं भेजी जाएगी और संभव है कि भालू खुद ही नीचे उतर आए। इस जवाब से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए, क्योंकि हाई वोल्टेज तारों के बीच फंसे जानवर के लिए खुद सुरक्षित उतरना बेहद मुश्किल था।

    वीडियो बनाने के लिए जुटती रही भीड़

    घटना की जानकारी फैलते ही कई लोग सड़क किनारे रुकने लगे। कुछ लोग केवल भालू को देखने पहुंचे, जबकि कई लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करनी शुरू कर दीं।

    बाद में न्यू मैक्सिको डिपार्टमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ ने बताया कि लोगों से बार-बार अपील की गई थी कि वे वहां न रुकें और भालू को अकेला छोड़ दें, ताकि वह खुद नीचे उतरने की कोशिश कर सके। विभाग का मानना है कि लगातार लोगों की मौजूदगी से भालू और अधिक तनाव में आ गया।

    7200 वोल्ट का करंट बना मौत की वजह

    जब तक बिजली विभाग और स्थानीय शेरिफ की टीम मौके पर पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अधिकारियों के अनुसार, खंभे पर मौजूद लाइन में लगभग 7200 वोल्ट का करंट प्रवाहित हो रहा था। किसी समय भालू का संपर्क हाई वोल्टेज तार से हो गया, जिससे उसे तेज करंट लगा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    स्थानीय शेरिफ कर्टिस स्कैग्स ने पुष्टि की कि जब अधिकारी पहुंचे, तब तक भालू की जान जा चुकी थी और उसका शव खंभे के नीचे मिला।

    वन विभाग ने शुरू की जांच

    न्यू मैक्सिको डिपार्टमेंट ऑफ वाइल्डलाइफ ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाएगा कि रेस्क्यू टीम के पहुंचने में देरी क्यों हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कई लोगों ने पूछा कि जब समय रहते सूचना मिल गई थी तो बचाव अभियान तुरंत क्यों शुरू नहीं किया गया। कुछ यूजर्स का कहना था कि यदि कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति रोक दी जाती तो शायद भालू की जान बचाई जा सकती थी।

    वहीं, कई लोगों ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं के दौरान लोगों को वीडियो बनाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि रेस्क्यू टीम बिना बाधा के अपना काम कर सके।

    बढ़ रहा इंसानों और वन्यजीवों का सामना

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के कई इलाकों में जंगलों के सिकुड़ने और आबादी बढ़ने के कारण भालू जैसे वन्यजीव अक्सर रिहायशी क्षेत्रों या बिजली के ढांचों तक पहुंच जाते हैं। इससे न केवल जानवरों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।

    यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि वन्यजीवों से जुड़ी आपात स्थिति में समय पर रेस्क्यू, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आम लोगों का जिम्मेदार व्यवहार किसी भी जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल

    ट्रंप का मास्टरप्लान! सऊदी परमाणु समझौते के बदले इजरायल से दोस्ती की शर्त, मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसके साथ इजरायल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की बड़ी कूटनीतिक शर्त भी जुड़ी हुई है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य पूर्व नीति का सबसे अहम उद्देश्य सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल कराना और इजरायल के साथ उसके संबंधों को औपचारिक रूप से सामान्य बनाना है। इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी नेतृत्व के सामने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करना उनकी प्राथमिक अपेक्षाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान कार्यकाल की नीति नहीं बल्कि लंबे समय से ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक सोच का हिस्सा रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि परमाणु समझौता पहले होगा या इजरायल से रिश्तों का सामान्यीकरण लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    मिलर ने ट्रंप की सऊदी अरब के साथ वर्षों पुरानी कूटनीतिक भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 में रियाद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बाद से ही अमेरिका ने सऊदी अरब को क्षेत्रीय स्थिरता का मजबूत साझेदार बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। उनके अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी नेतृत्व की रणनीतिक सोच और भविष्य की योजनाओं को अच्छी तरह समझते हैं और उन्हें भरोसा है कि आने वाले समय में यह साझेदारी मध्य पूर्व में ऐतिहासिक बदलाव का कारण बनेगी।

    व्हाइट हाउस का मानना है कि यदि सऊदी अरब इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करता है तो इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी और अब्राहम अकॉर्ड्स को नई मजबूती मिलेगी। ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त अरब अमीरात बहरीन मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। अब अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि सऊदी अरब भी इस पहल का हिस्सा बने क्योंकि उसे क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली अरब देश माना जाता है।

    इस दौरान स्टीफन मिलर ने निकारागुआ की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां की सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और समाजवादी शासन चुनावी प्रक्रिया का उपयोग सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के लिए करता है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो पहले ही इस मुद्दे पर अमेरिकी नीति स्पष्ट कर चुके हैं।

    मिलर ने यह भी दावा किया कि ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के प्रभाव को मजबूत करने और सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा देने पर केंद्रित है। उनके अनुसार कई देशों की सरकारें अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि आधारित नीति के साथ खड़ी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते और इजरायल से संबंध सामान्य करने की अमेरिकी कोशिशें आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति को नई दिशा दे सकती हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो क्षेत्रीय कूटनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार

    मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के पास समझौते के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान और बातचीत ही है। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और वाशिंगटन हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मौजूदा सैन्य अभियान को और तेज किया जा सकता है लेकिन अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत हो जाता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता होगा। उनके मुताबिक अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि फिलहाल दो रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता सैन्य कार्रवाई का है जिसमें अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है जबकि दूसरा रास्ता बातचीत और समझौते का है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में अब ज्यादा गंभीरता से वार्ता कर रहा है हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी अंतिम समझौते की अभी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।

    उन्होंने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ट्रंप के मुताबिक कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और अमेरिका बातचीत के सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्प पूरी तरह तैयार रहेगा।

    अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे उसकी ताकत काफी कमजोर हुई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव अभियान ने पूरे क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है और अब ईरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

    रूस और चीन की संभावित भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल किसी बड़े स्तर पर ईरान के समर्थन में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।

    ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

    दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है। इसके बावजूद अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत और संभावित समझौता पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बना रहेगा।