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  • मंदाकिनी का बड़ा खुलासा फिल्मों में काम के बाद भी नहीं मिली फीस बताया कैसा था उस दौर का माहौल

    मंदाकिनी का बड़ा खुलासा फिल्मों में काम के बाद भी नहीं मिली फीस बताया कैसा था उस दौर का माहौल


    नई दिल्ली। 1985 में रिलीज हुई फिल्म राम तेरी गंगा मैली ने मंदाकिनी को रातोंरात पहचान दिला दी थी। राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में मंदाकिनी ने राजीव कपूर के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी के साथ इसके कई दृश्य और गाने भी उस समय काफी चर्चा में रहे थे। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी को हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया था। अब फिल्म के रिलीज होने के कई साल बाद मंदाकिनी ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर से जुड़ी कुछ ऐसी बातें साझा की हैं जो काफी चर्चा में हैं।

    मंदाकिनी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में अपने करियर के दिनों को याद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री का काम करने का तरीका आज के मुकाबले काफी अलग था। मंदाकिनी के मुताबिक उन्होंने अपने करियर में करीब 16 से 17 फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें उन फिल्मों की पूरी फीस नहीं मिली। उन्होंने उस दौर को याद करते हुए फिल्म सेट के माहौल को बेहद अनौपचारिक और घर जैसा बताया।

    अभिनेत्री ने बताया कि फिल्मों में काम करने का अनुभव उनके लिए काफी अच्छा रहा। उनके अनुसार कलाकारों के बीच आपसी मेलजोल ज्यादा था और सेट पर सभी लोग साथ मिलकर समय बिताते थे। कलाकार एक साथ खाना खाते थे और किसी दूसरे कलाकार से मिलने के लिए पहले से अनुमति लेने जैसी औपचारिकता नहीं होती थी। लोग एक दूसरे के कमरे में भी आसानी से जा सकते थे। मंदाकिनी ने कहा कि उस समय का माहौल उन्हें काफी सहज और परिवार जैसा महसूस होता था।

    मंदाकिनी ने उस दौर के फिल्मी कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी अपनी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उस समय फिल्मों को साइन करने की प्रक्रिया काफी अनौपचारिक हुआ करती थी। कई बार कलाकारों से पहले फिल्म साइन करने के लिए कहा जाता था और भुगतान की बात बाद में होती थी। इस वजह से कई मौकों पर कलाकारों को अपनी फीस को लेकर इंतजार करना पड़ता था। मंदाकिनी ने इसी संदर्भ में बताया कि उनके साथ भी कई फिल्मों में ऐसा हुआ।

    उन्होंने यह भी बताया कि कभी कभी वह बिना फीस लिए भी फिल्मों में काम करने के लिए तैयार हो जाती थीं। खासकर जब फिल्म से जुड़े लोग या उनके साथी कलाकार कुछ दिनों के काम के लिए मदद मांगते थे तो वह सहयोग कर देती थीं। उनके अनुसार उस समय इंडस्ट्री में काम करने का तरीका काफी अलग था और कई चीजें औपचारिक समझौते के बजाय आपसी भरोसे और बातचीत के आधार पर तय हो जाती थीं।

    मंदाकिनी के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में राम तेरी गंगा मैली का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1985 में रिलीज हुई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था और मंदाकिनी को इसके बाद बड़ी पहचान मिली। फिल्म में उनके कई दृश्य उस समय चर्चा का विषय बने थे। खासतौर पर झरने के नीचे फिल्माया गया दृश्य और ब्रेस्ट फीडिंग सीन लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा में रहे।

    राम तेरी गंगा मैली को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में भी सफलता मिली थी। फिल्म को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिले थे। इसके संगीत और निर्देशन की भी काफी सराहना हुई थी। फिल्म की सफलता ने मंदाकिनी के करियर को नई ऊंचाई दी और वह दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गईं।

    अब इतने वर्षों बाद जब मंदाकिनी ने अपने शुरुआती फिल्मी सफर को याद किया है तो उनकी बातों से उस दौर के हिंदी फिल्म उद्योग के कामकाज की एक अलग तस्वीर सामने आती है। एक तरफ उन्होंने सेट के दोस्ताना माहौल और सहयोग को याद किया तो दूसरी तरफ यह भी बताया कि उस समय काम और भुगतान से जुड़े समझौते आज की तरह व्यवस्थित नहीं थे। इसी वजह से उनके मुताबिक कई फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें पूरी फीस नहीं मिल सकी।

  • वास्तु के इन आसान नियमों से बदल सकता है घर का माहौल जानिए किन चीजों को कहां रखना माना जाता है शुभ

    वास्तु के इन आसान नियमों से बदल सकता है घर का माहौल जानिए किन चीजों को कहां रखना माना जाता है शुभ


    नई दिल्ली। घर का वातावरण व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं को लेकर कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि घर में वस्तुओं को सही स्थान पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार बेहतर हो सकता है। वहीं लंबे समय तक अव्यवस्था रहने से घर का वातावरण प्रभावित होने की मान्यता है। यही कारण है कि लोग घर बनवाने से लेकर सामान रखने तक वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हमेशा साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास कूड़ा या बेकार सामान जमा नहीं करना चाहिए। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार पर साफ सफाई रखने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। शाम के समय मुख्य द्वार के पास दीपक जलाने की परंपरा भी कई घरों में है।

    घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस स्थान को साफ और हल्का रखने की सलाह दी जाती है। यहां पूजा स्थल बनाया जा सकता है। पूजा के स्थान के आसपास अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। सुबह के समय पूजा और प्रार्थना करने से मन को शांति मिलने का अनुभव हो सकता है।

    वास्तु मान्यताओं में रसोई की दिशा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है और इसलिए इसे रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि रसोई किसी दूसरी दिशा में बनी हो तो भी घर की वास्तविक संरचना के अनुसार व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। रसोई में सफाई रखना और गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान न रखना जरूरी है।

    सोने के कमरे को लेकर भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। बेड के नीचे बेकार सामान भरकर रखने से बचने की सलाह दी जाती है। कमरे में बहुत ज्यादा सामान रखने के बजाय खुला और व्यवस्थित वातावरण बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक रखने से भी वास्तु के अनुसार बचना चाहिए। टूटा शीशा पुरानी खराब घड़ी या खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसी वस्तुएं घर में अनावश्यक जगह घेरती हैं। इसलिए जो चीजें इस्तेमाल में नहीं हैं उन्हें समय समय पर हटाना चाहिए। इससे घर व्यवस्थित रहने के साथ मानसिक रूप से भी हल्कापन महसूस हो सकता है।

    पौधों को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। घर में हरे पौधे रखने से वातावरण सुंदर और ताजा बना रहता है। तुलसी के पौधे को धार्मिक रूप से विशेष महत्व दिया जाता है। इसे साफ स्थान पर रखना और नियमित रूप से इसकी देखभाल करना शुभ माना जाता है। हालांकि पौधे लगाने से पहले उनकी धूप और पानी की जरूरत का भी ध्यान रखना चाहिए।

    घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए केवल वास्तु नियमों पर निर्भर रहने के बजाय साफ सफाई और अच्छे व्यवहार को भी महत्व देना चाहिए। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम सम्मान और सहयोग का वातावरण घर को सुखद बनाता है। वास्तु से जुड़े उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इनके प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी नहीं है। इसलिए इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में अपनाया जा सकता है।

  • गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    नई दिल्ली । गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक और अलग-अलग तरह की मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इनमें मोतीचूर के लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय इस बार घर पर ही बेसन से दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी खास सांचे या बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं है। सामान्य रसोई में मौजूद सामग्री से भी इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    मोतीचूर लड्डू बनाने के लिए एक कप बेसन, तीन-चौथाई कप पानी, एक कप चीनी, आधा कप पानी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी ऑरेंज या येलो फूड कलर, एक बड़ा चम्मच मगज के बीज और तलने के लिए देसी घी या तेल की जरूरत होगी। चाशनी के लिए आधा छोटा चम्मच नींबू का रस भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे चाशनी जमने से बची रहती है।

    सबसे पहले एक बाउल में एक कप बेसन लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए चिकना और बिना गुठलियों वाला पतला घोल तैयार करें। घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसी से बूंदी के छोटे-छोटे दाने तैयार किए जाएंगे।

    अब कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। एक छेद वाली सामान्य कड़छी या कद्दूकस की मदद से बेसन का घोल गर्म तेल में डालें। कड़छी को कड़ाही के ऊपर हल्का थपथपाने पर घोल की छोटी-छोटी बूंदें तेल में गिरने लगेंगी। इन बूंदियों को केवल 10 से 15 सेकंड तक हल्का तलना है। इन्हें ज्यादा देर तक तलने से बूंदी कड़क हो सकती है, जबकि मोतीचूर लड्डू के लिए नरम दाने जरूरी होते हैं।

    इसके बाद चाशनी तैयार करें। एक पैन में एक कप चीनी और आधा कप पानी डालकर गर्म करें। इसमें एक चुटकी फूड कलर, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच नींबू का रस डालें। इसे तब तक गर्म करें जब तक चीनी पूरी तरह घुलकर हल्की चिपचिपी चाशनी न बन जाए। इसके लिए एक तार की चाशनी तैयार करने की जरूरत नहीं है।

    अगर तैयार बूंदी के दाने थोड़े बड़े या असमान हैं, तो उन्हें ठंडा होने के बाद मिक्सी के जार में डालकर केवल एक-दो सेकंड चलाया जा सकता है। इससे बूंदी बारीक और दानेदार हो जाएगी तथा मोतीचूर जैसा टेक्सचर तैयार होगा। ध्यान रखें कि मिक्सी को ज्यादा देर तक न चलाएं।

    अब तैयार बूंदी को गरमा-गरम चाशनी में डालें और धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक पकाएं। इस दौरान बूंदी चाशनी को अच्छी तरह सोख लेगी। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण में मगज के बीज डालकर मिला दें। मिश्रण को ढककर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें।

    जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तो हाथों में थोड़ा सा घी लगाएं और इसे गोल आकार देते हुए लड्डू बांध लें। इस तरह घर पर ही दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार हो जाएंगे। इन्हें भगवान गणेश को भोग में चढ़ाने के साथ परिवार के सदस्यों को भी परोसा जा सकता है।

  • त्योहारी सीजन से पहले सोने पर बढ़ा ये चार्ज सरकार ने बदली हॉलमार्किंग की फीस समझें पूरा हिसाब

    त्योहारी सीजन से पहले सोने पर बढ़ा ये चार्ज सरकार ने बदली हॉलमार्किंग की फीस समझें पूरा हिसाब


    नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले सोने के गहनों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS ने सोने के गहनों और आर्टवर्क की हॉलमार्किंग फीस में बढ़ोतरी कर दी है। हॉलमार्किंग की फीस अब पहले के मुकाबले ज्यादा होगी। प्रति आर्टिकल लगने वाली फीस को 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है। यानी हॉलमार्किंग चार्ज में 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव BIS हॉलमार्किंग संशोधन नियम 2026 के तहत लागू किया गया है।

    हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके जरिए सोने के आभूषणों और दूसरी संबंधित वस्तुओं की गुणवत्ता और शुद्धता की पहचान की जाती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में जब सोने और सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ जाती है तब हॉलमार्किंग फीस में यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि फीस बढ़ने के बावजूद ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि उन्हें सीधे तौर पर 30 रुपये अतिरिक्त देने का नियम नहीं बनाया गया है।

    हॉलमार्किंग की नई फीस ज्वैलर्स द्वारा हॉलमार्किंग सेंटर को दी जाएगी। सरकारी नियमों के मुताबिक यह शुल्क सीधे ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति सोने का आभूषण खरीदता है तो दुकानदार उससे हॉलमार्किंग के नाम पर अलग से 30 रुपये वसूल नहीं कर सकता। हालांकि ज्वैलर्स के पास बढ़ी हुई लागत को अपनी कीमत तय करने के दौरान शामिल करने का विकल्प हो सकता है।

    ज्वैलर्स चाहें तो हॉलमार्किंग फीस में हुई अतिरिक्त लागत को खुद वहन कर सकते हैं। इसके अलावा वह इसे गहनों की मेकिंग चार्ज या अपनी ओवरऑल प्राइसिंग में शामिल कर सकते हैं। इसलिए ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक के बिल में अलग से 30 रुपये जोड़ दिए जाएंगे।

    नई व्यवस्था के तहत हॉलमार्किंग सेंटरों से BIS को भी निर्धारित राशि मिलेगी। सोने के प्रति आर्टिकल पर BIS को 7.50 रुपये देने होंगे। इसके लिए न्यूनतम 20 रुपये प्रति कंसाइनमेंट का प्रावधान रखा गया है। चांदी के मामले में प्रति आर्टिकल 3.50 रुपये BIS को देने होंगे और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट की राशि तय की गई है। इन रकम पर लागू टैक्स अलग से लिया जाएगा।

    हालांकि कुछ शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस 200 रुपये ही बनी रहेगी। यानी एक कंसाइनमेंट के लिए कम से कम 200 रुपये का शुल्क देना होगा। चांदी की वस्तुओं की हॉलमार्किंग फीस भी 35 रुपये प्रति आर्टिकल पर पहले की तरह बनी रहेगी। चांदी के लिए कंसाइनमेंट चार्ज 150 रुपये निर्धारित है।

    त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए इन बदलावों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि हॉलमार्किंग सोने की खरीद से जुड़ी अहम प्रक्रिया है। ग्राहक आभूषण खरीदते समय बिल में सोने की कीमत मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी ध्यान से देख सकते हैं। वहीं हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदने से उन्हें सोने की शुद्धता से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। नई फीस व्यवस्था के बाद हॉलमार्किंग की लागत ज्वैलर्स के स्तर पर बढ़ेगी लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार इसे ग्राहक से अलग शुल्क के रूप में सीधे वसूल नहीं किया जाना चाहिए।

  • यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति

    यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा का जोर सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की मजबूती और संबंधित सीट पर जीत की संभावनाओं पर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सपा करीब 60 से 70 सीटों के विकल्प पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है।

    2017 के फॉर्मूले को आधार बना रही कांग्रेस

    कांग्रेस की दलील है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत उसने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसी आधार पर पार्टी इस बार भी 100 से अधिक सीटों की हिस्सेदारी चाह रही है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी जुलाई में गठबंधन में ‘बराबरी और सम्मान’ की बात कही थी।

    हालांकि, 2017 के मुकाबले मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। 2022 में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। यही वजह है कि सीटों के बंटवारे में पिछली बार के आंकड़े के बजाय मौजूदा संगठन और उम्मीदवारों की स्थिति को भी महत्व दिया जा रहा है।

    सपा का फोकस ‘कितनी सीटें’ नहीं, ‘कौन जीत सकता है’

    अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि गठबंधन में मुद्दा सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता है। सपा के भीतर सीटवार राजनीतिक स्थिति और संभावित उम्मीदवारों के आधार पर हिस्सेदारी तय करने की बात कही जा रही है।

    ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी मांगी जा रही है, जिन पर वह दावा कर रही है। इसके बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरण, संगठन की स्थिति और उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सीटों पर फैसला किए जाने की बात सामने आई है।

    रायबरेली-अमेठी समेत कई सीटों पर खींचतान

    सीटों की कुल संख्या के अलावा कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दोनों दलों के बीच मतभेद की खबरें हैं। रिपोर्टों में रायबरेली और अमेठी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अंतिम फॉर्मूला तय होने से पहले सीटवार दावों पर बातचीत जारी है।

    कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की छह सीटें जीती थीं, जबकि सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में 43 सीटें जीती थीं।

    2022 में अलग-अलग लड़े थे दोनों दल

    2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। सपा के साथ तब राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे दल भी गठबंधन में थे। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए।

    अब 2027 के चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस फिर साथ आने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के सामने सीटों की संख्या के साथ-साथ यह सवाल भी है कि किन क्षेत्रों में किस पार्टी का संगठन और उम्मीदवार गठबंधन के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

    राजभर-निषाद को लेकर भी सपा ने रुख स्पष्ट किया

    इसी बीच सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को लेकर भी राजनीतिक अटकलें चलती रही हैं। दोनों नेता उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं।

    आपकी मूल कॉपी में सपा के एक रणनीतिकार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने पर संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती, इसलिए इसे सपा सूत्र/रणनीतिकार के दावे के रूप में ही प्रकाशित करना सुरक्षित होगा।

    फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है। सीटों की संख्या के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्रवार दावों और संभावित उम्मीदवारों पर सहमति बनने के बाद ही गठबंधन का वास्तविक फॉर्मूला स्पष्ट होगा।

  • मूवी लवर्स के लिए आ गया जबरदस्त शुक्रवार थिएटर से OTT तक रिलीज होंगी ये धांसू फिल्में

    मूवी लवर्स के लिए आ गया जबरदस्त शुक्रवार थिएटर से OTT तक रिलीज होंगी ये धांसू फिल्में


    नई दिल्ली। मूवी लवर्स के लिए सितंबर का यह वीकेंड काफी खास रहने वाला है। 17 और 18 सितंबर को थिएटर से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म तक कई फिल्में और सीरीज दस्तक देने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार दर्शकों को एक ही जॉनर का कंटेंट नहीं बल्कि क्राइम एक्शन कॉमेडी रोमांस हॉरर और ड्रामा जैसे अलग अलग रंग देखने को मिलेंगे। ऐसे में जिन लोगों को हर हफ्ते नई फिल्में देखने का इंतजार रहता है उनके लिए आने वाले दिन मनोरंजन से भरपूर रहने वाले हैं।

    थिएटर रिलीज की शुरुआत तमिल फिल्म एना विलाई से हो रही है। यह सोशल ड्रामा और थ्रिलर फिल्म है जिसकी कहानी एक मछुआरे के इर्द गिर्द घूमती है। समुद्र के किनारे उसे सोने का सामान मिलता है जिसके बाद कहानी में कई घटनाएं सामने आती हैं। फिल्म 17 सितंबर को रिलीज हो चुकी है और इसमें सामाजिक मुद्दों के साथ रहस्य का पहलू भी देखने को मिलेगा।

    18 सितंबर को कई दक्षिण भारतीय फिल्मों की रिलीज होगी। तमिल फिल्म द डार्क हेवेन एक गांव में हो रही हत्याओं की कहानी पर आधारित है। इन मामलों की जांच एक ईमानदार पुलिस अधिकारी करता है। इसी दिन तमिल कॉमेडी ड्रामा नल्लापदम भी सिनेमाघरों में आएगी। फिल्म की कहानी एक ऐसे शराबी के इर्द गिर्द है जो दूसरे शराबियों के लिए एक एसोसिएशन शुरू करता है।

    मलयालम फिल्म इट्स ए मेडिकल मिरेकल भी 18 सितंबर को रिलीज होने जा रही है। यह ड्रामा और सुपरनैचुरल थ्रिलर है जिसमें एक लड़की के ब्रेन डेड होने के बाद कहानी में ऐसा मोड़ आता है जो पूरे घटनाक्रम को बदल देता है। वहीं हॉरर और साइंस फिक्शन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए रेजिडेंट ईविल भी सिनेमाघरों में पहुंच रही है। फिल्म को हिंदी समेत कई भाषाओं में देखा जा सकेगा।

    इसके अलावा भारत देश है मेरा भी 18 सितंबर को रिलीज होगी। फिल्म की कहानी कश्मीर में रहने वाले पंडितों से जुड़े घटनाक्रम पर आधारित बताई गई है। फिल्म में अनुप जलोटा समेत कई कलाकार नजर आएंगे। तेलुगू फिल्म सीक्रेट सोल्जर भी इसी दिन सिनेमाघरों में दस्तक देगी। इसकी कहानी जियोपॉलिटिकल घटनाओं और जासूसी की दुनिया से जुड़ी है।

    फैमिली एंटरटेनमेंट पसंद करने वालों के लिए तेलुगू फिल्म हैपी जर्नी रिलीज होगी। वहीं मलयालम फिल्म L&O लॉ एंड ऑर्डर में एक्शन क्राइम और ड्रामा का मेल देखने को मिलेगा। कुणाल खेमू के निर्देशन में बनी वाइब भी 18 सितंबर को रिलीज होगी। फिल्म में प्रीति जिंटा स्पर्श श्रीवास्तव और वंशिका धीर जैसे कलाकार नजर आएंगे। इसके अलावा लव लॉटरी और करीना कपूर तथा पृथ्वीराज सुकुमारन स्टारर दायरा भी इसी शुक्रवार सिनेमाघरों में पहुंचने वाली हैं। दायरा का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है और इसकी कहानी एक रेप पीड़िता तथा 17 साल के नाबालिग आरोपी से जुड़े मामले पर आधारित है।

    थिएटर के साथ ओटीटी पर भी कंटेंट की कमी नहीं होगी। नेटफ्लिक्स पर लस्ट स्टोरीज 3 रिलीज होगी जिसमें आधुनिक रिश्तों से जुड़ी चार अलग अलग कहानियां दिखाई जाएंगी। बेस्ट ऑफ द बेस्ट में बचपन के दो दोस्तों की कहानी देखने को मिलेगी जो एक प्रतिस्पर्धी बॉलीवुड फ्यूजन डांस टीम का हिस्सा बनते हैं। नेटफ्लिक्स पर ही द स्कैंडल नाम की रोमांटिक कोरियन ड्रामा सीरीज भी दर्शकों के सामने आएगी।

    जियोहॉटस्टार पर मलयालम एक्शन थ्रिलर थुडक्कम रिलीज होगी जिसमें मार्शल आर्ट व्यवसायी का सामना एक कॉन्ट्रैक्ट किलर से होता है। वहीं SonyLIV पर कट्टलन आएगी जिसकी कहानी हाथीदांत के अवैध शिकार से जुड़े सत्ता संघर्ष पर आधारित है। कुल मिलाकर 17 और 18 सितंबर का वीकेंड थिएटर और ओटीटी दोनों जगह अलग अलग तरह के मनोरंजन से भरा रहने वाला है।

  • एशियन गेम्स में बदली टीम इंडिया की स्क्वाड नीतीश रेड्डी को मिली नई जिम्मेदारी इस युवा खिलाड़ी की एंट्री

    एशियन गेम्स में बदली टीम इंडिया की स्क्वाड नीतीश रेड्डी को मिली नई जिम्मेदारी इस युवा खिलाड़ी की एंट्री


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की स्क्वाड में बड़ा बदलाव किया गया है। बीसीसीआई ने टीम में दो अहम परिवर्तन किए हैं। ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी अब एशियन गेम्स में भारतीय टीम का हिस्सा नहीं होंगे। उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड में शामिल किया गया है। वहीं स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती चोट के कारण एशियन गेम्स से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह युवा ऑलराउंडर विप्रज निगम को भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

    बीसीसीआई ने 16 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इन बदलावों की जानकारी दी। बोर्ड के मुताबिक वरुण चक्रवर्ती साइड स्ट्रेन की समस्या से जूझ रहे हैं। इसी चोट के कारण वह जापान के खिलाफ 22 सितंबर को होने वाले टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में भी नहीं खेल पाएंगे। वरुण की जगह दिल्ली कैपिटल्स से जुड़े युवा खिलाड़ी विप्रज निगम को टीम में शामिल किया गया है। अब विप्रज भारतीय दल के साथ जापान जाएंगे और एशियन गेम्स में टीम इंडिया की जर्सी में नजर आ सकते हैं।

    नीतीश कुमार रेड्डी को एशियन गेम्स की टीम से हटाने के पीछे बीसीसीआई की वनडे क्रिकेट को लेकर योजना अहम मानी जा रही है। बोर्ड चाहता है कि नीतीश को वनडे फॉर्मेट में ज्यादा मौके मिलें और वह इस प्रारूप में अपनी उपयोगिता साबित करें। इसी वजह से उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इस सीरीज में मोहम्मद सिराज और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को भी जगह दी गई है।

    नीतीश के हालिया प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में उन्होंने गेंद से प्रभावी प्रदर्शन किया था। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मैच में नीतीश ने तीन अफगानी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा था। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार भी मिला था। इसके बाद उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया।

    नीतीश जून 2026 में अफगानिस्तान के खिलाफ दो वनडे मुकाबले भी खेल चुके हैं। इन दोनों मैचों में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था। हालांकि धर्मशाला में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में उन्होंने गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए थे। अब वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में उनके सामने वनडे क्रिकेट में खुद को साबित करने का एक और अवसर होगा।

    दूसरी ओर वरुण चक्रवर्ती की चोट ने एशियन गेम्स की टीम का समीकरण बदल दिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में गेंदबाजी के दौरान उन्हें चोट लगी थी। इसके बाद वह सीरीज के बाकी मुकाबलों से बाहर हो गए थे। अब साइड स्ट्रेन के कारण उन्हें जापान टी20 और एशियन गेम्स से भी बाहर होना पड़ा है।

    एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर के हाथों में है जबकि तिलक वर्मा उपकप्तान बनाए गए हैं। टीम में अभिषेक शर्मा संजू सैमसन ईशान किशन शिवम दुबे अक्षर पटेल वॉशिंगटन सुंदर रवि बिश्नोई जसप्रीत बुमराह अर्शदीप सिंह वैभव सूर्यवंशी यश ठाकुर और विप्रज निगम शामिल हैं। स्क्वाड में हुए बदलाव के बाद अब खास नजर युवा विप्रज निगम और वनडे टीम में शामिल किए गए नीतीश कुमार रेड्डी पर रहेगी।

  • मनी प्लांट की ग्रोथ रुक गई है तो किचन की ये 3 चीजें आजमाएं, हरी और चमकदार पत्तियों के साथ बेल होगी घनी

    मनी प्लांट की ग्रोथ रुक गई है तो किचन की ये 3 चीजें आजमाएं, हरी और चमकदार पत्तियों के साथ बेल होगी घनी

    नई दिल्ली ।घर में लगाया गया मनी प्लांट लंबे समय तक हरा-भरा और घना रहे, इसके लिए केवल पानी देना पर्याप्त नहीं है। कई बार पौधे की नई पत्तियां निकलना कम हो जाती हैं, बेल की बढ़त रुक जाती है या पुरानी पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर बाजार से महंगी खाद खरीदने के बारे में सोचते हैं। हालांकि घर की रसोई में मौजूद कुछ चीजों का सीमित मात्रा में इस्तेमाल पौधे की देखभाल में किया जा सकता है।

    मनी प्लांट के लिए चाय बनाने के बाद बची चायपत्ती का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कुछ पोषक तत्व और ऑर्गेनिक मैटर मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि चायपत्ती का इस्तेमाल करने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।

    चाय बनाने के बाद बची पत्ती को साफ पानी से धो लें, ताकि उसमें दूध और चीनी के अवशेष न रहें। इसके बाद इसे पूरी तरह सुखाएं। सूखने के बाद थोड़ी मात्रा में चायपत्ती को गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इसे बार-बार या जरूरत से ज्यादा मात्रा में डालने से बचना चाहिए।

    मनी प्लांट की देखभाल में केले के छिलके से तैयार पानी का भी सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है। केले के छिलकों में पोटैशियम सहित कई खनिज मौजूद होते हैं। इससे पौधे के लिए एक साधारण घरेलू लिक्विड फीड तैयार किया जा सकता है। हालांकि इसे किसी नियमित उर्वरक का सीधा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    इसके लिए दो से तीन केले के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में करीब 24 घंटे भिगोकर रखा जा सकता है। इसके बाद छिलकों को पानी से निकाल दें और तैयार पानी को सादे पानी में मिलाकर पौधे में डालें। इसका इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

    तीसरा विकल्प चावल धोने के बाद बचा हुआ पानी या बिना नमक वाला चावल पकाने के बाद बचा मांड है। इसमें स्टार्च के साथ कुछ पोषक तत्व भी होते हैं। चावल धोने के पानी को सादे पानी के साथ मिलाकर कभी-कभार मनी प्लांट में इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर चावल का मांड इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसमें नमक, तेल या मसाला नहीं होना चाहिए।

    चावल का पानी लंबे समय तक रखकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पुराना या बदबूदार पानी मिट्टी में डालने से बचें, क्योंकि इससे गमले में छोटे कीड़े आने की समस्या हो सकती है।

    इन घरेलू चीजों के इस्तेमाल के साथ पौधे की मूल जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। मनी प्लांट को बहुत तेज सीधी धूप में रखने से उसकी पत्तियां झुलस सकती हैं। इसे ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन बहुत तेज सीधी धूप न पड़े।

    पानी देते समय मिट्टी की ऊपरी सतह की नमी जांच लें। मिट्टी हर समय गीली रहने से जड़ों को नुकसान हो सकता है। गमले में पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। पौधे में मौजूद पीली, सूखी या खराब पत्तियों को साफ कैंची से हटाते रहना भी देखभाल का हिस्सा है। इस तरह घरेलू चीजों के सीमित इस्तेमाल के साथ सही रोशनी, पानी और जल निकासी का संतुलन बनाए रखने से मनी प्लांट की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

  • 100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

    100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क


    जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

    जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

    दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

    ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

    मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

    फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

  • 17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी

    17 सितंबर को कैसा रहेगा शेयर बाजार Nifty 23200 के ऊपर बंद Sensex में भी जोरदार रिकवरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 17 सितंबर को कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। इससे पहले 16 सितंबर को बाजार ने लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद राहत की सांस ली। बुधवार को Sensex 332.63 अंक की बढ़त के साथ 74336.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Nifty 99 अंक चढ़कर 23217.60 पर पहुंच गया। बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली और कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी तथा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की गिरावट से भी सेंटीमेंट को सहारा मिला।

    अब 17 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगा। 16 सितंबर को भारतीय बाजार बंद होने के बाद फेड का फैसला सामने आना था इसलिए इसका असर अगले कारोबारी सत्र में दिखाई दे सकता है। वैश्विक बाजारों में निवेशक फेड के फैसले के साथ उसकी आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी पर भी नजर रखेंगे। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख रहने पर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है जबकि नरम संकेत मिलने पर बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।

    कच्चा तेल भी 17 सितंबर के कारोबार के लिए बड़ा संकेत रहेगा। 16 सितंबर को Brent crude करीब 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर था। हाल के दिनों में तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई और व्यापार घाटे से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में तेल की कीमतों में आगे की चाल का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। 15 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 2978 करोड़ रुपए की निकासी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक 2686 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे। लगातार विदेशी बिकवाली की स्थिति बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 23200 का स्तर चर्चा में रहेगा। 16 सितंबर को Nifty इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान यह 23116.10 के निचले स्तर तक गया था लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से 23284.75 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा। ऐसे में 17 सितंबर को बाजार में शुरुआती चाल के बाद निवेशकों की नजर यह देखने पर होगी कि Nifty अपनी बढ़त को बनाए रखता है या फिर ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलती है।

    सेक्टोरल स्तर पर बैंक और FMCG शेयरों में बुधवार को मजबूती देखने को मिली जबकि IT और फार्मा शेयर दबाव में रहे। SBI HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों ने Nifty को सहारा दिया। 17 सितंबर को भी इन प्रमुख सेक्टरों की गतिविधियां बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    इसके अलावा 17 सितंबर से NSE का बहुप्रतीक्षित IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। NSE IPO का प्राइस बैंड 1700 से 1785 रुपए प्रति शेयर रखा गया है और यह इश्यू 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल है। प्राथमिक बाजार में इस बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की सक्रियता का असर सेकेंडरी मार्केट की liquidity पर भी नजर आने वाला विषय रहेगा।

    कुल मिलाकर 17 सितंबर को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान अमेरिकी फेड का फैसला कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की खरीदारी और Nifty के प्रमुख तकनीकी स्तर सबसे अहम संकेत रहेंगे। बाजार में तेजी के बाद भी उतार चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेशकों के लिए किसी भी दिशा में कदम उठाने से पहले बाजार की चाल और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना जरूरी होगा।