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  • भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल

    भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं को अलग अलग मुद्दों पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक से यूजीसी से जुड़े सवाल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया और कुछ देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं। वहीं सागर में मंत्री प्रहलाद पटेल से शराबकांड को लेकर सवाल हुआ जबकि शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल पूछा गया। इसी बीच भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें 11 सितंबर 2023 के आश्वासन की याद दिलाई।

    सिंगरौली में सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान विधायक रीति पाठक से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सवाल सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता जिस विषय पर रखी गई है उसी विषय पर बात की जाए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम समाप्त कर दिया और वहां से चली गईं।

    उधर भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही गई थी।

    2023 की उस महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर दोबारा अवसर देने और लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने की बात शामिल थी। इसके अलावा मासिक मानदेय और पीएससी भर्ती में आरक्षण से संबंधित घोषणाएं भी की गई थीं।

    मौजूदा प्रदर्शन में अतिथि विद्वानों की मुख्य मांग नियमितीकरण और नौकरी की स्थिरता को लेकर नीति बनाने की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी नीति नहीं बनती तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकी जाए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री से बातचीत के बाद भी इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बनी।

    शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने अपने पुराने आश्वासनों का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए और उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

    सागर में सेवा संकल्प अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल से बंडा शराबकांड को लेकर सवाल किया गया। मीडिया ने पूछा कि ऐसे मामले के बीच सेवा कार्यक्रमों का आयोजन कितना जरूरी है और इस घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है। मंत्री ने कार्यक्रमों को सेवा से जुड़ा बताया लेकिन शराबकांड से जुड़े सवाल पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।

    शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल हुआ। मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें पूरा वंदे मातरम् आता है। जवाब में उन्होंने कहा कि वे भी सीख रहे हैं और सभी को सीखते रहना चाहिए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ देर के लिए सवाल जवाब पर केंद्रित हो गया।

    इस तरह सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों में अभियान के साथ साथ अलग अलग मुद्दे भी सामने आए। सिंगरौली में यूजीसी का सवाल हो या सागर में शराबकांड से जुड़ा मुद्दा और भोपाल में अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन सभी घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

  • कर्मचारियों के पूरे वेतन पर बढ़ा कानूनी पेच हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने SC में लगाई याचिका

    कर्मचारियों के पूरे वेतन पर बढ़ा कानूनी पेच हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने SC में लगाई याचिका


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में वेतन को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें प्रोबेशन के दौरान लागू 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त करते हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। मामले में अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

    राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कई आधार रखते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े नियम निर्धारित करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 309 का हवाला दिया गया है। सरकार का कहना है कि प्रोबेशन के दौरान चरणबद्ध वेतन की व्यवस्था किसी मनमाने फैसले के तहत लागू नहीं की गई थी बल्कि वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग में प्रक्रिया और विचार विमर्श के बाद सक्षम स्तर की मंजूरी से इसे लागू किया गया था।

    सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि प्रोबेशन की अवधि केवल नौकरी की शुरुआती अवधि नहीं बल्कि प्रशिक्षण और कर्मचारी की दक्षता के आकलन से जुड़ी प्रक्रिया है। राज्य ने 1966 के सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का उल्लेख करते हुए कहा है कि नियुक्ति के शुरुआती दौर में कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध भुगतान का प्रावधान किया गया था। सरकार का कहना है कि नीतिगत और सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप का दायरा सीमित होना चाहिए जब तक किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान का उल्लंघन सामने न आए।

    मामले का एक अहम पहलू वित्तीय भार भी है। सरकार के मुताबिक यदि 2019 से अब तक प्रोबेशन पर रहे कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन के आधार पर अंतर की राशि का भुगतान करना पड़ा तो राज्य के खजाने पर बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। इसके अलावा पुराने कर्मचारियों के एरियर के भुगतान के बाद बढ़े हुए वेतन का असर भविष्य में होने वाली सरकारी भर्तियों के बजट प्रबंधन पर भी पड़ सकता है।

    सरकार ने अपनी याचिका में पुलिस पटवारी और शिक्षक जैसी बड़ी भर्तियों का भी उल्लेख किया है। राज्य का तर्क है कि पुराने एरियर और वेतन संबंधी अतिरिक्त वित्तीय दायित्व का प्रभाव पूंजीगत कार्यों और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित बजट पर पड़ सकता है। सरकार ने दूसरे राज्यों की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ में प्रोबेशन के दौरान स्टाइपेंड या कम वेतन की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। हालांकि वहां 2023 में यह व्यवस्था समाप्त कर 100 प्रतिशत वेतन लागू किया गया था लेकिन पुराने समय का एरियर नहीं दिया गया।

    इस विवाद में हाईकोर्ट पहले भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दे चुका है। 6 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने और बकाया राशि का 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद डबल बेंच ने 12 दिसंबर 2019 से लागू 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को निरस्त करते हुए नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का निर्देश दिया।

    अब राज्य सरकार ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ऐसे में आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगी। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है और कर्मचारियों के पूरे वेतन तथा पुराने एरियर को लेकर अंतिम स्थिति शीर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • भगवान विष्णु को प्रसन्न करना है तो गुरुवार को करें ये उपाय पीले फूल से लेकर दान तक जानें पूरी विधि

    भगवान विष्णु को प्रसन्न करना है तो गुरुवार को करें ये उपाय पीले फूल से लेकर दान तक जानें पूरी विधि


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए केवल बड़े अनुष्ठान की जरूरत नहीं मानी जाती बल्कि सच्ची श्रद्धा और अच्छे कर्मों को भी विशेष महत्व दिया जाता है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन विधि विधान से पूजा करने के साथ कुछ सरल उपाय अपनाकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने की कामना की जाती है।

    गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है इसलिए पूजा में पीले फूल और पीले फल अर्पित किए जा सकते हैं। भगवान को केले का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें।

    भगवान विष्णु की पूजा में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना गया है। भक्त ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की प्रेरणा मिलती है।

    गुरुवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इस दिन चने की दाल गुड़ केले हल्दी या पीले वस्त्र का दान किया जा सकता है। अपनी क्षमता के अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना भी पुण्यदायक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सेवा और दान को भगवान की भक्ति से जोड़ा गया है।

    भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को भी सकारात्मक रखने की सलाह दी जाती है। पूजा के समय मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध न रखने का प्रयास करें। माता पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें। जरूरतमंद की मदद करें और किसी व्यक्ति को जानबूझकर दुख पहुंचाने से बचें। धार्मिक मान्यता के अनुसार अच्छे कर्म और सात्विक आचरण भगवान विष्णु की भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

    कई लोग गुरुवार को व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं। हालांकि व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा श्रद्धा और विश्वास के साथ करना ही मुख्य माना जाता है।

    भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का स्मरण भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता में माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना गया है। इसलिए गुरुवार को विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा भी कई घरों में है। शाम के समय घर में दीपक जलाकर भगवान का स्मरण किया जा सकता है।

    अंत में सबसे जरूरी बात यह है कि भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पूजा के साथ व्यवहार में भी शुद्धता रखी जाए। सत्य बोलना दूसरों की सहायता करना जीवों के प्रति दया रखना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना भी भक्ति का हिस्सा माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार जब पूजा के साथ अच्छे कर्म जुड़े होते हैं तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतोष का अनुभव बढ़ सकता है।

  • शिक्षकों के लिए बड़ी खबर दिसंबर में TET की तैयारी तेज आवेदन कम होने पर फिर बढ़ सकती है अंतिम तारीख

    शिक्षकों के लिए बड़ी खबर दिसंबर में TET की तैयारी तेज आवेदन कम होने पर फिर बढ़ सकती है अंतिम तारीख


    भोपाल । मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को लेकर गुरुवार को बड़ा फैसला हो सकता है। प्रदेश में लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख एक बार फिर बढ़ाए जाने की संभावना है। अभी तक करीब 19100 शिक्षकों ने ही परीक्षा के लिए आवेदन किया है। आवेदन की संख्या कम होने के कारण शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल के अधिकारी आवेदन के लिए अतिरिक्त समय देने पर विचार कर रहे हैं। गुरुवार को होने वाली बैठक में तय किया जाएगा कि शिक्षकों को आवेदन के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा या फिर 15 दिन की मोहलत मिलेगी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। राज्य शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा मंडल को दी है। इसके बाद परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर मंडल और लोक शिक्षण संचालनालय के स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश वैद्य सहित संबंधित अधिकारी बैठक में परीक्षा की आगे की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे।

    परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया पहले कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से शुरू की गई थी। शुरुआत में आवेदन के लिए समय निर्धारित किया गया था लेकिन अपेक्षाकृत कम आवेदन आने के बाद अंतिम तारीख में बदलाव किया गया। इसके बावजूद 16 सितंबर तक आवेदन करने वाले शिक्षकों की संख्या करीब 19100 ही पहुंच सकी है। अब विभाग चाहता है कि पात्र शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने के लिए पर्याप्त अवसर मिले। इसी वजह से आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

    अधिकारियों की बैठक के बाद यह स्पष्ट होगा कि आवेदन की अवधि कितने दिनों के लिए बढ़ाई जाएगी। निर्णय होने के बाद एमपी ऑनलाइन और कर्मचारी चयन मंडल को आवेदन अवधि बढ़ाने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके बाद शिक्षक निर्धारित अतिरिक्त अवधि में परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। परीक्षा की तारीख फिलहाल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल की तैयारियों को देखते हुए दिसंबर के पहले या दूसरे सप्ताह में परीक्षा आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    मंडल के अधिकारियों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों की संख्या सामने आने के बाद व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्र और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए तैयारी में समय लगता है। इसी वजह से आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परीक्षा की तारीख तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में दिसंबर में TET कराने की संभावना बनी हुई है।

    इधर शिक्षक पात्रता परीक्षा के साथ शिक्षकों से जुड़े दूसरे मुद्दे भी चर्चा में हैं। लंबे समय से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। पदोन्नति प्राप्त कर चुके कई शिक्षकों को पदस्थापना आदेश का इंतजार भी है। शिक्षकों का कहना है कि पदोन्नति के बाद नवीन दायित्व और कार्यस्थल को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    इसके अलावा ई-अटेंडेंस व्यवस्था में सामने आ रही तकनीकी और व्यवहारिक दिक्कतों के समाधान की मांग भी उठ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं होने जैसी स्थितियों को लेकर शिक्षकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत बताई जा रही है। शिक्षक वर्ग चाहता है कि TET से लेकर पदोन्नति और ई-अटेंडेंस तक सभी मामलों में विभाग लिखित और समयबद्ध निर्देश जारी करे। अब गुरुवार की बैठक के बाद TET आवेदन की अंतिम तारीख और परीक्षा की संभावित समय-सारिणी को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

  • ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी

    ढाई लाख दीपों से जगमगाएगा भोपाल शहर से गांव तक सेवा संकल्प की रोशनी 31 अस्पतालों में रक्तदान शिविर भी


    भोपाल। भोपाल में गुरुवार की शाम सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राजधानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ढाई लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। शहर में 17 और ग्रामीण क्षेत्र में 11 स्थानों पर होने वाला यह सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन केवल रोशनी का आयोजन नहीं होगा बल्कि सेवा समर्पण सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण का संदेश भी देगा। ऐतिहासिक स्मारकों से लेकर प्रमुख चौराहों घाटों मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों तक दीपों की रोशनी नजर आएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में देवस्थलों तालाबों और सामुदायिक परिसरों को भी दीपों से सजाया जाएगा।

    राजधानी के अलग अलग हिस्सों में होने वाले इस आयोजन के जरिए शहर के गौरवशाली इतिहास आस्था शौर्य और आधुनिक विकास की झलक भी देखने को मिलेगी। सामूहिक रूप से जलने वाले हजारों दीप लोगों को सेवा और सकारात्मकता की साझा भावना से जोड़ने का प्रयास करेंगे। हर वार्ड में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है जिससे अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

    ग्रामीण क्षेत्र भी इस अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। ग्राम पंचायत चंदेरी के रामदेव बाबा मंदिर प्रांगण से लेकर अरेड़ी के अमृत सरोवर तक कई स्थानों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। ईमलिया में तालाब मंदिर के पास पाटनिया में हनुमान मंदिर ईंटखेड़ी सड़क पर नदी के पास अमोनी में पटेल बाबा मंदिर और सिकंदराबाद के सामुदायिक शेड में भी दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा बगरोदा बरखेड़ी बाजयाफ्त बरखेड़ा बोन्दर और फंदा कलां सहित कई स्थानों पर भी सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन होगा। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक एकता सामूहिक सहभागिता और ग्राम विकास का संदेश पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

    सेवा संकल्प अभियान के तहत केवल दीप प्रज्ज्वलन ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य और रक्तदान से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। भोपाल जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक रक्तदान शिविरों का व्यापक अभियान चलेगा। इसके लिए जिले के 31 अस्पतालों और ब्लड सेंटरों को चिन्हित किया गया है। जिला चिकित्सालय भोपाल के अलावा शहर के कई निजी अस्पतालों मेडिकल संस्थानों और ब्लड सेंटरों में रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। अभियान के दौरान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सके।

    स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य कार्यक्रम भी अभियान का हिस्सा होंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ी देव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक भीमनगर में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण और गोदभराई कार्यक्रम होगा। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर आवश्यक टीकाकरण भी किया जाएगा।

    नरेला विधानसभा क्षेत्र में दीप प्रज्ज्वलन का विशेष आयोजन होगा। यहां सवा लाख दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग के सरकारी आवास पर भी दीपों से विशेष सजावट की जाएगी। यहां 25 फीट ऊंचे दीप स्तंभ में 9125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इसके साथ ही सेवा और समर्पण के 25 वर्ष विषय पर विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

    इस तरह भोपाल में होने वाला दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत को सामूहिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास करेगा। शहर से गांव तक जलने वाले दीप सामाजिक एकता स्वास्थ्य सेवा और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के साथ अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे।

  • दिवाली से पहले बुध-शुक्र की रहेगी वक्री चाल, 6 राशियों के लिए धन-करियर के योग

    दिवाली से पहले बुध-शुक्र की रहेगी वक्री चाल, 6 राशियों के लिए धन-करियर के योग


    नई दिल्ली। दिवाली इस बार 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी और इससे पहले अक्टूबर-नवंबर में बुध और शुक्र की चाल में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार शुक्र 3 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक वक्री रहेंगे, जबकि बुध 24 अक्टूबर से 13 नवंबर तक वक्री अवस्था में होंगे। यानी 24 अक्टूबर से 13 नवंबर तक दोनों ग्रह एक साथ वक्री रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध को बुद्धि, वाणी, कारोबार और संचार का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र सुख-सुविधा, प्रेम, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि से जुड़े हैं।

    वक्री चाल का क्या मतलब है?

    ग्रहों के वक्री होने का अर्थ यह नहीं है कि वे वास्तव में अपनी कक्षा में पीछे की ओर चलने लगते हैं। पृथ्वी से देखने पर उनकी गति में बदलाव के कारण वे कुछ समय के लिए पीछे जाते हुए दिखाई देते हैं। ज्योतिष में इस अवधि को पुराने मामलों की समीक्षा, अधूरे कामों के दोबारा सामने आने और कुछ फैसलों में देरी से जोड़कर देखा जाता है।

    बुध की वक्री चाल: इन राशियों के लिए बन सकते हैं मौके

    मेष: कारोबार से जुड़े लोगों को पुराने संपर्कों से फायदा मिल सकता है। व्यापार में नए अवसर सामने आने और अपनी बात प्रभावी तरीके से रखने का लाभ मिलने की संभावना बताई गई है।

    कर्क: नौकरी और करियर के लिहाज से समय बेहतर रह सकता है। नए अवसर मिल सकते हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत माने जा रहे हैं। हालांकि किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसके सभी पहलुओं को जांचना बेहतर रहेगा।

    वृश्चिक: कामकाज में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके काम फिर गति पकड़ सकते हैं और पहले किए गए प्रयासों का फायदा मिलने की संभावना बन सकती है।

    मिथुन: इस राशि के स्वामी बुध ही हैं, इसलिए वक्री चाल को विशेष महत्व दिया जाता है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन मानसिक तनाव और सेहत की अनदेखी से बचना होगा। छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा सोचने से भी बचें।

    शुक्र की वक्री चाल में इन राशियों को रहना होगा सतर्क

    वृषभ: स्वास्थ्य और खान-पान को लेकर सावधानी जरूरी हो सकती है। दिनचर्या में लापरवाही परेशानी बढ़ा सकती है, इसलिए नियमित जीवनशैली बनाए रखना बेहतर रहेगा।

    मिथुन: बच्चों और परिवार से जुड़े मामलों में संयम रखना होगा। भावनाओं में आकर बड़ा फैसला लेने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना बेहतर माना गया है।

    कन्या: शुक्र की वक्री चाल कुछ मामलों में राहत देने वाली हो सकती है। 3 अक्टूबर के बाद भाग्य का साथ मिलने, पुराने काम पूरे होने और नई संभावनाएं सामने आने के योग बताए गए हैं।

    तुला: शुक्र तुला राशि के स्वामी हैं और इसी राशि में वक्री होंगे। ऐसे में इस अवधि में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आराम और दिनचर्या का ध्यान रखना जरूरी होगा।

    मकर: कामकाज में एक साथ कई मोर्चे संभालने के बजाय प्राथमिकताएं तय करके आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। छोटी गलती भी परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए महत्वपूर्ण कामों की दोबारा जांच करें।

    कुंभ: इस अवधि में भाग्य का साथ अपेक्षाकृत कमजोर रहने की बात कही गई है। ऐसे में किस्मत पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत और रणनीति पर ध्यान देना बेहतर होगा। निवेश और बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है।

    दिवाली से पहले क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही ग्रहों की यह चाल?

    दिवाली को ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में धन, सुख-समृद्धि और नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से दिवाली के आसपास बुध और शुक्र की वक्री चाल को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जा रहा है।

    हालांकि, किसी व्यक्ति पर ग्रहों का प्रभाव केवल राशि के आधार पर तय नहीं माना जाता। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, भाव, दशा और अन्य ग्रहों के संबंधों के आधार पर परिणाम अलग-अलग बताए जाते हैं। इसलिए यहां बताए गए परिणाम ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

  • ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा

    ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा


    नई दिल्ली। सऊदी अरब पर हूती हमलों और ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मंगलवार को प्रस्तावित इस बैठक में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। बातचीत के केंद्र में ईरान के साथ युद्ध की आगे की रणनीति के साथ खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और युद्ध के बाद की अमेरिकी योजना रह सकती है।

    Axios ने तीन सूत्रों के हवाले से बैठक की जानकारी दी है। संभावित बैठक में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक का अंतिम एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    ईरानी हमलों से खाड़ी देश भी प्रभावित

    ट्रंप की प्रस्तावित बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान के साथ युद्ध के दौरान खाड़ी के उन देशों को भी ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके अलावा तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में आई रुकावटों का असर इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।

    ऐसे में अरब नेताओं के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे भी उठ सकते हैं।

    मक्का के एयरस्पेस तक पहुंचा ड्रोन, सऊदी ने बताया ‘रेड लाइन’

    सऊदी अरब और हूतियों के बीच भी तनाव लगातार बना हुआ है। हाल में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूतियों की ओर से लॉन्च किए गए ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित एयरस्पेस में पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।

    सऊदी गठबंधन ने कहा था कि दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उसके लिए “रेड लाइन” है। हालांकि, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के दावे को खारिज करते हुए इसे झूठ बताया था।

    इस घटनाक्रम के बाद ट्रंप और अरब नेताओं की संभावित बैठक में ईरान युद्ध के साथ हूती गतिविधियों और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर चर्चा की संभावना भी जताई जा रही है।

    युद्ध खत्म होने के बाद की योजना पर भी नजर

    Axios के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ युद्ध के बाद की रणनीति पर भी काम कर रहा है। ट्रंप और उनकी वरिष्ठ टीम इस योजना को तैयार कर रही है और इसे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध अब खत्म होने के करीब है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईरान समझौता करना चाहता है और अमेरिका को ईरानी पक्ष की ओर से सीधे इस संबंध में संदेश मिला है।

    हालांकि, इन बयानों के बीच युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन की अंतिम रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।

    विदेश विभाग ने भेजे शुरुआती निमंत्रण

    अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को संभावित बैठक के लिए शुरुआती निमंत्रण भेजे हैं। व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। एक सूत्र के मुताबिक, बैठक में अन्य अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है।

    इससे बैठक का दायरा केवल GCC देशों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय बातचीत का रूप ले सकता है। हालांकि, अंतिम भागीदारी और एजेंडा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

    नेतन्याहू भी ट्रंप से मिलने की कोशिश में

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं। हालांकि, एक इजरायली सूत्र के अनुसार दोनों नेताओं की बैठक अभी तय नहीं हुई है।

    पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने आठ अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने गाजा में शांति को लेकर अपनी योजना का ड्राफ्ट उनके सामने रखा था। करीब एक सप्ताह बाद योजना सार्वजनिक की गई थी और उसके कुछ समय बाद युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता हुआ था।

    अब सबकी नजर न्यूयॉर्क बैठक पर

    इस बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं की प्रस्तावित बैठक ऐसे वक्त हो रही है, जब ईरान युद्ध और हूती हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है।

    बैठक का अंतिम एजेंडा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष, हूती खतरे और खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर कौन से मुद्दे प्राथमिकता से उठाता है। फिलहाल बातचीत में युद्ध के अगले कदम के साथ संघर्ष खत्म होने की स्थिति में अमेरिकी रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • Gen-Z से मातृशक्ति और बुजुर्गों तक… PM मोदी का संवाद कैसे बदलता रहा, हर पीढ़ी के लिए है अलग अंदाज

    Gen-Z से मातृशक्ति और बुजुर्गों तक… PM मोदी का संवाद कैसे बदलता रहा, हर पीढ़ी के लिए है अलग अंदाज


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 76वां जन्मदिन है। 7 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी इस वर्ष 76 वर्ष के हो रहे हैं और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। करीब 12 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल में उनकी राजनीति के साथ उनके संवाद का तरीका भी लगातार बदलता दिखाई देता है। युवाओं के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल क्रिएटर, छात्रों के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’, महिलाओं के लिए ‘माताओं-बहनों-बेटियों’ का संबोधन और बुजुर्गों-परिवारों तक पहुंचने के लिए ‘मन की बात’ जैसे अलग-अलग माध्यम उनके सार्वजनिक संवाद का हिस्सा रहे हैं।

    मोदी के संचार की खासियत पर चर्चा करते समय एक बात बार-बार सामने आती है—वे अलग-अलग वर्गों से बातचीत में अलग भाषा, माध्यम और संदर्भ इस्तेमाल करते हैं। ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे नारों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं से संवाद तक, उनके सार्वजनिक संचार का दायरा पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़ा है।

    Gen-Z के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया
    आज की Gen-Z पीढ़ी के संवाद के तरीके को पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से अलग माना जाता है। इसी बदलाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और डिजिटल क्रिएटर इकोसिस्टम जैसे विषयों पर युवाओं से बातचीत करते रहे हैं।

    2024 में पहली बार आयोजित नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड इसी डिजिटल इकोसिस्टम को औपचारिक पहचान देने वाली पहल के तौर पर सामने आया। इसमें कहानी कहने, सामाजिक बदलाव, शिक्षा, गेमिंग, तकनीक और दूसरे डिजिटल क्षेत्रों में काम करने वाले क्रिएटर्स को शामिल किया गया था।

    जुलाई 2026 में इंस्टाग्राम की एक रील पर 24 घंटे में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिलने का दावा भी सोशल मीडिया पर मोदी की डिजिटल मौजूदगी को लेकर चर्चा में रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री का सार्वजनिक संवाद अब केवल टीवी, अखबार और रैलियों तक सीमित नहीं है।

    ‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री नहीं, मेंटर की भूमिका
    बोर्ड परीक्षाओं के समय प्रधानमंत्री का संवाद एक अलग रूप लेता है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ में वे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव, आत्मविश्वास और पढ़ाई से जुड़े सवालों पर बातचीत करते हैं।

    2026 के संस्करण में 4.5 करोड़ से ज्यादा पंजीकरण हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री छात्रों के सवाल लेते हैं, रोजमर्रा के उदाहरणों के जरिए जवाब देते हैं और पढ़ाई के साथ खेल, आराम, कौशल तथा रुचियों के संतुलन पर बात करते हैं।

    यही वजह है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ की भाषा सामान्य राजनीतिक भाषणों से अलग दिखाई देती है। यहां विषय सत्ता या राजनीति नहीं, बल्कि छात्र की रोजमर्रा की जिंदगी होती है। ‘एग्जाम वारियर्स’ जैसे संबोधन के जरिए परीक्षा के दबाव को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश की जाती है।

    महिलाओं से संवाद में योजनाओं के साथ पहचान
    महिलाओं को संबोधित करते समय प्रधानमंत्री के भाषणों में ‘माताओं, बहनों और बेटियों’ जैसे शब्द नियमित रूप से सुनाई देते हैं। लाल किले की प्राचीर से सैनिटरी पैड, पीरियड पॉवर्टी और घर में शौचालय जैसे विषयों का उल्लेख भी उनके सार्वजनिक भाषणों का हिस्सा रहा है।

    सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं को भी इसी संवाद के साथ जोड़ा गया। उज्ज्वला योजना के जरिए रसोई के धुएं से राहत, लखपति दीदी के जरिए आर्थिक मजबूती और ड्रोन दीदी के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल को भाषणों में जगह मिली।

    इन योजनाओं के नाम और उनसे जुड़े संबोधन ऐसे रखे गए हैं, जिन्हें महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन और अनुभवों से जोड़कर पेश किया जा सके।

    बुजुर्गों और परिवारों तक ‘मन की बात’
    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के बावजूद प्रधानमंत्री ने रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम को भी लगातार इस्तेमाल किया है। ‘मन की बात’ के जरिए वे हर महीने देशवासियों से संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में अक्सर गुमनाम नायकों, ग्रामीण नवाचारों, स्थानीय उपलब्धियों और सामाजिक पहलों की चर्चा होती है।

    इस माध्यम की पहुंच रेडियो सुनने वाले परिवारों और गांवों तक है। इसलिए मोदी के संचार में एक तरफ इंस्टाग्राम और डिजिटल क्रिएटर्स हैं तो दूसरी तरफ रेडियो और चौपाल जैसी पारंपरिक पहुंच भी बनी हुई है।

    स्थानीय भाषा और संस्कृति का इस्तेमाल
    मोदी के सार्वजनिक भाषणों में स्थानीय संदर्भों का इस्तेमाल भी दिखाई देता है। किसी राज्य में पहुंचने पर वहां के त्योहार, परंपरा, खान-पान, स्थानीय व्यक्तित्व और क्षेत्रीय भाषा का उल्लेख उनके संबोधन का हिस्सा रहा है।

    सांस्कृतिक विषयों को लेकर काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे संदर्भ भी उनके भाषणों में दिखाई देते हैं। इन विषयों के जरिए वे भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्थानीय पहचान से जुड़े मुद्दों को अपने संवाद में जगह देते हैं।

    ‘मित्रों’ से ‘मेरे परिवारजनों’ तक
    मोदी के संबोधन समय के साथ बदलते रहे हैं। ‘मित्रों’ और ‘भाइयों-बहनों’ जैसे संबोधनों के साथ अब ‘मेरे परिवारजनों’ जैसे शब्द भी उनके भाषणों में सुनाई देते हैं। इसके साथ ही वे कई बार जटिल नीतिगत विषयों को आंकड़ों के बजाय छोटी घटनाओं और प्रेरक कहानियों के माध्यम से समझाने की कोशिश करते हैं।

    किसी राज्य में भाषण की शुरुआत वहां की क्षेत्रीय भाषा में करना भी उनके संवाद का एक हिस्सा रहा है। इससे भाषण के शुरुआती क्षणों में ही स्थानीय संदर्भ जुड़ जाता है।

    कुल मिलाकर मोदी के सार्वजनिक संवाद में माध्यम और भाषा दोनों का विस्तार दिखाई देता है—एक ओर सोशल मीडिया पर Gen-Z और डिजिटल क्रिएटर्स हैं, तो दूसरी ओर ‘मन की बात’ के जरिए रेडियो सुनने वाले परिवार और स्थानीय भाषाओं-सांस्कृतिक संदर्भों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोग। यही बहुस्तरीय संचार शैली उनके करीब 12 वर्ष के प्रधानमंत्री कार्यकाल में लगातार दिखाई देती रही है।

  • गुरुवार को क्या करें और क्या न करें भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की कृपा पाने के लिए अपनाएं ये नियम

    गुरुवार को क्या करें और क्या न करें भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की कृपा पाने के लिए अपनाएं ये नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी गुरुवार का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। यही वजह है कि गुरुवार को लेकर घर परिवार में कई तरह की धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान पीले फूल पीले वस्त्र और पीले फल अर्पित किए जा सकते हैं। भगवान विष्णु को पीले रंग की चीजें प्रिय मानी जाती हैं। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ या भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। कई लोग गुरुवार को व्रत रखते हैं और दिनभर सात्विक भोजन का सेवन करते हैं।

    गुरुवार के दिन घर में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा स्थल को स्वच्छ रखने और सुबह दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। चने की दाल गुड़ हल्दी केले और पीले वस्त्र जैसी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है।

    अब बात उन कामों की जिन्हें गुरुवार के दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। कई परिवारों में गुरुवार को कपड़े धोने और घर की कुछ विशेष सफाई करने की परंपरा भी नहीं होती है। हालांकि इन मान्यताओं का पालन अलग अलग परिवारों और परंपराओं में अलग तरीके से किया जाता है।

    गुरुवार के दिन तामसिक भोजन से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है। शराब और मांसाहार से भी परहेज रखने की धार्मिक परंपरा है। किसी का अपमान करना या क्रोध में कठोर शब्द बोलना भी इस दिन उचित नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टि से गुरुवार को संयम सेवा और सदाचार का दिन माना गया है इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और बुजुर्गों का सम्मान करना शुभ माना जाता है।

    जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर माना जाता है वे गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा के साथ देवगुरु बृहस्पति का ध्यान कर सकते हैं। पीले रंग की वस्तु का दान और गुरु मंत्र का जाप भी परंपरागत उपायों में शामिल है। हालांकि ज्योतिषीय उपायों को मान्यता धार्मिक विश्वासों के आधार पर दी जाती है और इनके परिणाम व्यक्ति की आस्था पर निर्भर माने जाते हैं।

    गुरुवार का दिन केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि इसे ज्ञान सेवा और अच्छे आचरण से जोड़कर भी देखा जाता है। इस दिन सकारात्मक सोच रखने और दूसरों की मदद करने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा और गुरु के आशीर्वाद से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है। इसलिए गुरुवार को अपनी दिनचर्या में पूजा के साथ संयम और सदाचार को भी स्थान देना चाहिए।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम दौर में है, लेकिन विदाई से पहले एक और बारिश का दौर प्रदेश को मिल सकता है। इस मानसूनी सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे 37.3 इंच का 88.7% है। प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिलों में बारिश अब भी औसत से कम है।

    मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद चक्रवात या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर कुछ हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अभी दो सिस्टम, लेकिन असर सीमित

    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ अरब सागर में लो प्रेशर एरिया भी सक्रिय है। फिलहाल दोनों सिस्टम का प्रदेश में व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय होने से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे में झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में 4 इंच पानी गिरा। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश हुई।

    21 सितंबर के बाद बन सकता है नया दौर

    मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति नहीं है, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। 21 सितंबर के बाद चक्रवात और लो प्रेशर एरिया की गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। इसके असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।

    मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस लिहाज से अब मानसून की विदाई में 13 दिन बाकी हैं। हालांकि, प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी विदा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

    अक्टूबर की बारिश मानसूनी आंकड़े में नहीं जुड़ेगी

    मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की गणना 1 जून से 30 सितंबर के बीच होती है। इसलिए अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी सीजन के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक प्रदेश से पूरी तरह विदा होता है।

    फिलहाल प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 33.1 इंच है, जबकि सामान्य बारिश 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटे तक पहुंचने के लिए करीब 4.2 इंच बारिश और जरूरी है।

    पूर्वी MP में कमी घटकर 1% तक पहुंची

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आते हैं। यहां कुल मिलाकर बारिश सामान्य से 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार आया है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने, जिससे सीजन की बारिश का औसत ऊपर आया। एक समय पूर्वी हिस्सा सामान्य से बेहतर स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन बुधवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 1% हो गया।

    पश्चिमी हिस्से में ज्यादा जिले पिछड़े

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर जिलों में बनी हुई है, जबकि प्रदेश के कई पूर्वी और उत्तरी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश


    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    अब नजर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों पर है। यदि इनका असर प्रदेश पर व्यापक रहा तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के और करीब पहुंच सकता है।