

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुका है, जिससे यह उम्मीद थी कि भारत में ईंधन सस्ता होगा। लेकिन इसके उलट हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर कई रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस स्थिति की एक बड़ी वजह तेल कंपनियों की मूल्य नीति और उनका वित्तीय संतुलन है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पहले वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पाईं थीं। उस समय कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद घाटा सहा था। अब माना जा रहा है कि वे उसी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं।
इसके अलावा भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता भी कीमतों को प्रभावित करती है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों पर सीधा असर डालता है।
एक और अहम कारण है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी। भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता क्यों न हो रहा हो।
कीमतों में टैक्स का भी बड़ा योगदान होता है। पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के एक्साइज ड्यूटी और वैट जैसे टैक्स भी शामिल होते हैं। यही टैक्स अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत को काफी बढ़ा देते हैं।
इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च, डीलर कमीशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ते हैं। इन सभी कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर तुरंत भारतीय बाजार में नहीं दिखता।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स संरचना में राहत नहीं मिलती, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कमी की उम्मीद करना मुश्किल है।

बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ यानी अक्षय कुमार अपने प्रशंसकों को खुश करने और नए प्रयोग करने के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने साल 2023 में अपनी फिल्म ‘सेल्फी’ के प्रमोशन के दौरान एक अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम किया था। अक्षय ने अपने फैंस के साथ महज 3 मिनट के बेहद संक्षिप्त समय में कुल 184 परफेक्ट सेल्फी खींचकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला था। वहीं दूसरी तरफ, बच्चन परिवार के नाम भी एक बेहद अनोखा सिनेमाई रिकॉर्ड दर्ज है। फिल्म ‘पा’ में असल जिंदगी के पिता अमिताभ बच्चन ने एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बेटे का किरदार निभाया था, जबकि उनके वास्तविक बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता की भूमिका अदा की थी। गिनीज बुक ने इस अनोखे प्रदर्शन को दुनिया का इकलौता ऐसा रिवर्सल रोल माना, जहां असल जिंदगी के पारिवारिक रिश्ते पर्दे पर पूरी तरह से उलट गए थे।
अभिषेक बच्चन के नाम इस पारिवारिक रिकॉर्ड के अलावा एक और व्यक्तिगत वैश्विक कीर्तिमान भी दर्ज है। साल 2009 में अपनी फिल्म ‘दिल्ली-6’ के अनोखे प्रमोशन के दौरान अभिषेक ने 12 घंटे के भीतर देश के विभिन्न शहरों में कुल 13 पब्लिक अपीयरेंस यानी सार्वजनिक प्रस्तुतियां दी थीं। इस दौरान उन्होंने अपने निजी विमान और कार की मदद से लगभग 1800 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया था और हॉलीवुड के मशहूर स्टार विल स्मिथ के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। लोकप्रियता की बात करें तो बॉलीवुड के ‘किंग खान’ यानी शाहरुख खान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया का सबसे लोकप्रिय और मांग वाला अभिनेता घोषित किया जा चुका है। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, शाहरुख खान की ग्लोबल डिमांड दुनिया के किसी भी अन्य औसत अभिनेता की तुलना में 53.2 गुना ज्यादा आंकी गई थी, जो उनकी बेमिसाल वैश्विक बादशाहत को साबित करती है।
सिनेमा के शुरुआती दौर के कलाकारों की बात करें तो दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार के नाम भी एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने साल 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी और इसके बाद वे लगातार 63 वर्षों तक मुख्य और सहायक भूमिकाओं में बड़े पर्दे पर सक्रिय रूप से नजर आते रहे। सबसे लंबे समय तक बतौर मुख्य अभिनेता सक्रिय रहने का यह रिकॉर्ड आज भी ‘दादा मुनी’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार के ही पास है। इसी तरह मशहूर कैरेक्टर आर्टिस्ट जगदीश राज खुराना ने सिनेमाई इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जिसे तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे करियर में 144 से भी अधिक फिल्मों में सिर्फ ‘पुलिस इंस्पेक्टर’ का किरदार निभाया था, जिसके चलते उनका नाम गिनीज बुक में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ ने साल 2013 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उस दौर के हिसाब से रिकॉर्ड 63.75 करोड़ रुपये की अनुमानित सालाना कमाई के साथ बॉलीवुड की सबसे महंगी और कमाई करने वाली अभिनेत्री के रूप में अपना नाम इस वैश्विक सूची में दर्ज कराया था।
ये वैश्विक रिकॉर्ड्स इस बात का साफ संकेत हैं कि बॉलीवुड के कलाकार न केवल कला के क्षेत्र में बल्कि कूटनीति, विपणन और लोकप्रियता के हर पैमाने पर दुनिया के किसी भी सिनेमा से पीछे नहीं हैं। आने वाले समय में तकनीक और सिनेमा के बदलते स्वरूप के साथ भारतीय कलाकारों द्वारा ऐसे कई और नए कीर्तिमान स्थापित किए जाने की पूरी संभावना दिखाई देती है।

आगरा में सबसे बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक फुटपाथ और सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। देखते ही देखते करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली समा गई। वहीं, सड़क किनारे खड़ी कारें और अन्य वाहन भी गड्ढों में फंस गए या पलट गए। छीपीटोला इलाके में बारिश के दबाव से एक मकान भी गिर गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
शहर की कई कॉलोनियों में पानी घुस जाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों के अंदर तक पानी भर गया और सड़कों पर घुटनों तक जलजमाव देखने को मिला। हालात इतने खराब हो गए कि कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा।
इसी तरह मथुरा में भी देर रात हुई बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु घुटनों तक पानी में चलते नजर आए। बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी बाधित हुआ, हालांकि नमी के कारण लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली।
मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी जारी है, हालांकि यह धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इसके बावजूद अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 3 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो 5 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी यूपी में छिटपुट बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। हवा की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
लखनऊ के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लू का खतरा नहीं है और आने वाले दिनों में भी तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि बारिश के कारण कहीं राहत है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात ने चिंता बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश से हुई तबाही ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ललित मोदी ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में ब्रेकअप की मुख्य वजह भौगोलिक दूरियों को बताया। उन्होंने साझा किया कि सुष्मिता सेन उनके लिए हमेशा से बेहद खास रही हैं और उन्होंने सुष्मिता से अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा है। जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सुष्मिता के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की थीं, तब वे दोनों एक गंभीर रिश्ते में थे और भविष्य में भी साथ रह सकते थे, लेकिन दोनों के काम और जीवन के ठिकाने अलग होने के कारण दूरियां बढ़ती चली गईं। सुष्मिता सेन का पूरा करियर और काम भारत में केंद्रित है, जबकि ललित मोदी का पूरा जीवन और व्यवसाय लंदन में स्थापित है। इस लंबी दूरी के कारण रिश्ते को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया था, हालांकि ललित मोदी का मानना है कि दूरियों के बावजूद सुष्मिता के साथ बिताया गया समय उनके जीवन का एक बेहद खूबसूरत अनुभव था, जिसकी यादें हमेशा उनके पास रहेंगी।
इस इंटरव्यू के दौरान ललित मोदी ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने इस रिश्ते की घोषणा के बाद सुष्मिता सेन को सोशल मीडिया पर ‘गोल्ड डिगर’ यानी पैसों के लिए रिश्ता बनाने वाली महिला कहकर ट्रोल किया था। ललित मोदी ने मजाकिया और बेबाक अंदाज में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सुष्मिता बहुत स्वाभिमानी और बेहद अमीर महिला हैं, जिनके पास खुद के कमाए हुए ढेर सारे डायमंड्स हैं। उन्होंने बताया कि सुष्मिता का अपना डायमंड स्टोर भी है और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। ललित मोदी ने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए कहा कि जब भी वे दोनों बाहर जाते थे, तो सुष्मिता कभी उन्हें पैसे खर्च नहीं करने देती थीं और हर चीज का भुगतान खुद करती थीं। ऐसे में वे गोल्ड डिगर बिल्कुल नहीं थीं, बल्कि मजाक में कहा जाए तो वे खुद ‘डायमंड डिगर’ साबित हुए थे।
साल 2022 में इंटरनेट पर तहलका मचाने वाली उस इंस्टाग्राम पोस्ट के पीछे की कहानी बताते हुए ललित मोदी ने कहा कि वह पोस्ट एक मजेदार बहस का नतीजा थी। दोनों के बीच किसी बात पर हल्की नोंकझोंक हो रही था और ललित मोदी ने मजाक में कहा कि वे इस रिश्ते को सार्वजनिक करने जा रहे हैं, जिस पर सुष्मिता हंस पड़ीं। इसके बाद जब ललित मोदी लंदन से सार्डिनिया की यात्रा पर थे, तब उन्होंने तस्वीरें पोस्ट कर दीं और सार्डिनिया पहुंचते-पहुंचते यह खबर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सबसे बड़ी सुर्खी बन चुकी थी। खास बात यह रही कि सुष्मिता ने कभी भी उनसे उस पोस्ट को हटाने के लिए नहीं कहा और न ही ललित मोदी ने कभी उसे डिलीट करने के बारे में सोचा। दोनों अपनी उस स्थिति को लेकर पूरी तरह सहज थे और उन्हें आज भी अपने उस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि भले ही समय और परिस्थितियों के कारण ललित मोदी और सुष्मिता सेन का प्रेम संबंध आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान आज भी बरकरार है। यह इंटरव्यू दर्शाता है कि आधुनिक दौर में परिपक्वता के साथ रिश्तों को कैसे निभाया और खत्म किया जा सकता है, जहां आपसी समझ और दोस्ती ब्रेकअप के बाद भी कायम रहती है।

किताब के अनुसार, एक दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने कार्यालय में बैठे थे, तभी उनके एडीसी ने आकर सूचना दी कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनसे बेहद जरूरी बात करना चाहते हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ की इस सफाई पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया और अपनी कूटनीतिक रणनीति के तहत उनसे कहा कि अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा है, तो जरा उस शख्स से बात कीजिए जो इस वक्त मेरे पास ही बैठा है। इसके बाद वाजपेयी जी ने फोन की कमान बॉलीवुड के ‘ट्रैजेडी किंग’ कहे जाने वाले अभिनेता दिलीप कुमार के हाथों में सौंप दी।
फोन हाथ में लेते ही दिलीप कुमार ने बिना किसी संकोच के नवाज शरीफ को एक कड़ा और भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मियाां साहब, हमें आपसे इस तरह के कदम की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी क्योंकि आपने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया है।
हालांकि, इस ऐतिहासिक फोन कॉल के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर युद्ध पूरी तरह तो नहीं रुका, लेकिन माना जाता है कि इससे कुछ समय के लिए कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हुई और सीमा पर तनाव को समझने में मदद मिली। यह युद्ध पूरे तीन महीने तक जारी रहा, जिसमें भारतीय सेना ने अपने वीर जवानों की शहादत और अदम्य साहस की बदौलत कारगिल की चोटियों से दुश्मनों को खदेड़कर दोबारा तिरंगा फहराया था।

यह पूरा घटनाक्रम फिल्म नील कमल के निर्माण के समय का है, जिसमें बलराज साहनी, राजकुमार और मनोज कुमार जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। फिल्म के लिए एक विशेष विदाई गीत की आवश्यकता थी, जिसे संगीतकार रवि तैयार कर रहे थे। रवि ने इस खास गीत के लिए मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी कलम से बेहद दर्द भरे और दिल को छू लेने वाले बोल लिखे। इसके बाद इस गाने को अमर बनाने की जिम्मेदारी महान गायक मोहम्मद रफी को सौंपी गई, जिन्होंने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ नामक इस विदाई गीत को अपनी जादुई आवाज से सजाया। गाना पूरी तरह से रिकॉर्ड हो चुका था, लेकिन फिल्म की रिलीज में अभी काफी समय बाकी था, जिसके कारण आम जनता और फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग इस शानदार रचना से पूरी तरह अनजान थे।
इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार राजेंद्र कृष्णन की बेटी की शादी का आयोजन हुआ, जिसमें बॉलीवुड के तमाम दिग्गज कलाकारों और संगीतकारों को आमंत्रित किया गया था। इस भव्य शादी समारोह में अभिनेता राजेंद्र कुमार भी शामिल हुए थे। शादी की रस्मों के बीच राजेंद्र कृष्णन ने संगीतकार रवि से अनुरोध किया कि वे अपनी सुरीली आवाज में महफिल में कोई गाना गाएं। रवि ने इस अनुरोध को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन उन्होंने एक अनूठी शर्त रखी कि वे यह गाना केवल बेटी की विदाई के समय ही गाएंगे। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई और माहौल में उदासी छाने लगी, रवि ने हाथ में माइक संभाला और पूरी शिद्दत व गहरे भावों के साथ अपनी ही धुन पर तैयार किया हुआ अनरिलीज्ड गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ गाना शुरू कर दिया।
रवि की मखमली और भावुक आवाज में इस गाने के बोल जैसे ही गूंजे, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। बेटी की विदाई का वह दृश्य इस गाने के प्रभाव से इतना गमगीन हो गया कि शादी में मौजूद राजेंद्र कुमार अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूट कर रोने लगे। गाना खत्म होने के बाद राजेंद्र कुमार तुरंत संगीतकार रवि के पास पहुंचे और अत्यंत भावुक होकर उनसे पूछा कि आखिर यह दिल को झकझोर देने वाला गाना किस फिल्म का है। चूंकि उस समय तक फिल्म नील कमल सिनेमाघरों में नहीं आई थी, इसलिए रवि ने उन्हें विस्तार से बताया कि यह उनकी आगामी फिल्म का एक विशेष विदाई गीत है, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया है।
इस कालजयी गाने से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प और भावनात्मक पहलू गायक मोहम्मद रफी से भी जुड़ा हुआ है। जब रफी साहब स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब वे खुद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए थे। दरअसल, उन दिनों रफी साहब ने अपनी खुद की बेटी की सगाई की थी, और रिकॉर्डिंग के समय उनके जेहन में अपनी बेटी की विदाई का ख्याल आ गया था। इस वजह से गाते-गाते उनकी आवाज भारी हो गई और वे रो पड़े। संगीतकार रवि ने मोहम्मद रफी की उस भारी और दर्द भरी आवाज को तकनीकी रूप से सुधारने के बजाय वैसे ही रहने दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक पिता का यह वास्तविक दर्द गाने की आत्मा को और अधिक गहरा और जीवंत बना देगा, जो आज भी इस गाने में साफ महसूस होता है।
इस प्रकार, यह गाना न केवल फिल्म नील कमल की पहचान बना, बल्कि भारतीय शादियों में बेटी की विदाई का एक अनिवार्य हिस्सा भी बन गया। इतने दशक बीत जाने के बाद भी जब यह गाना कहीं बजता है, तो आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। यह गीत इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब सच्चे भाव, बेहतरीन लेखन और बेहतरीन संगीत का मिलन होता है, तो ऐसी अमर कलाकृतियों का जन्म होता है जो पीढ़ियों तक इंसानी भावनाओं को झकझोरती रहती हैं।

दोनों सुबह करीब 7 बजे आश्रम पहुंचे और मास्क पहनकर कार से उतरने के बाद नंगे पैर आश्रम परिसर में प्रवेश किया। संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने उनका स्वागत किया। विराट और अनुष्का लगभग दो घंटे तक आश्रम में रुके और संत से मुलाकात की। बाहर निकलने पर विराट के माथे पर चंदन और त्रिपुंड लगा हुआ था, जबकि उनके हाथ में एक धार्मिक पुस्तक भी दिखाई दी।
आश्रम दर्शन के बाद दोनों ने लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम का भी दौरा किया। खास बात यह रही कि इस दौरान भी वे नंगे पैर पैदल ही चलते नजर आए। इस यात्रा के दौरान उनकी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली।
इससे पहले भी विराट और अनुष्का कई बार वृंदावन आ चुके हैं। इसी साल 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर भी दोनों ने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए थे और सत्संग में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, जिसमें इस वर्ष की यह तीसरी यात्रा शामिल है।
गौरतलब है कि हाल ही में Royal Challengers Bengaluru ने अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। इस मुकाबले में विराट कोहली ने अहम भूमिका निभाई थी और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन भी बनाए थे।
आईपीएल में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद कोहली का यह आध्यात्मिक दौरा एक बार फिर चर्चा में है, जहां क्रिकेट की सफलता के बाद उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्राथमिकता दी।

आकाश चोपड़ा ने सबसे पहले इस सीजन की सर्वश्रेष्ठ पारी के रूप में KL Rahul की धमाकेदार 152 रनों की नाबाद पारी को चुना। यह पारी Delhi Capitals की ओर से खेलते हुए आई थी, जिसमें राहुल ने 67 गेंदों पर 16 चौके और 9 छक्के लगाए थे। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर दिल्ली ने 20 ओवर में 264 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जो सीजन के सबसे बड़े स्कोरों में से एक रहा।
सर्वश्रेष्ठ ओपनर के तौर पर आकाश चोपड़ा ने 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को चुना, जिन्होंने Rajasthan Royals के लिए शानदार प्रदर्शन किया। वैभव ने 16 मैचों में 776 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 237 रहा। इस सीजन उन्होंने 72 छक्के लगाकर कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए और सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
मिडिल ऑर्डर में आकाश चोपड़ा ने Heinrich Klaasen को सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुना। Sunrisers Hyderabad की ओर से खेलते हुए क्लासेन ने 15 मैचों में 624 रन बनाए और पूरे सीजन में 160 के स्ट्राइक रेट से आक्रामक बल्लेबाजी की। वह इस सीजन टॉप रन स्कोरर्स में भी शामिल रहे।
फिनिशर की भूमिका में आकाश चोपड़ा ने Donovan Ferreira को सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी माना, जिन्होंने दबाव की परिस्थितियों में अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गेंदबाजी में सबसे बड़ा नाम Bhuvneshwar Kumar का रहा, जिन्हें आकाश चोपड़ा ने आईपीएल 2026 का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज चुना। Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए भुवनेश्वर ने 16 मैचों में 28 विकेट हासिल किए और 17.89 की शानदार इकॉनमी से रन रोके। वह इस सीजन दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे।
आईपीएल 2026 में आकाश चोपड़ा की यह टीम चयन इस बात को दिखाता है कि इस सीजन युवा प्रतिभा और अनुभवी खिलाड़ियों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारे जहां भविष्य की झलक देते हैं, वहीं भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाज आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं।

इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर Miroslav Klose का। क्लोस ने चार विश्व कप (2002, 2006, 2010 और 2014) में खेलते हुए कुल 16 गोल किए और वह अब तक टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत बड़े मुकाबलों में लगातार गोल करने की क्षमता रही।
दूसरे स्थान पर ब्राजील के महान स्ट्राइकर Ronaldo Nazário हैं, जिन्हें ‘द फेनोमेनन’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1994 से 2006 के बीच खेले गए विश्व कप में कुल 15 गोल किए। खास तौर पर 2002 के विश्व कप में उनके 8 गोल ने ब्राजील को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
तीसरे स्थान पर फ्रांस के दिग्गज स्ट्राइकर Just Fontaine हैं, जिन्होंने 1958 के विश्व कप में इतिहास रच दिया था। उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में 13 गोल दागकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज तक कायम है। एक ही टूर्नामेंट में इतने गोल करना फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
चौथे स्थान पर अर्जेंटीना के कप्तान और विश्व कप विजेता Lionel Messi हैं। 2006 से 2022 के बीच उन्होंने विश्व कप में 13 गोल किए। 2022 का कतर विश्व कप उनके करियर का सबसे यादगार टूर्नामेंट रहा, जहां उन्होंने 7 गोल करते हुए अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया।
पांचवें स्थान पर फ्रांस के सुपरस्टार Kylian Mbappé हैं। उन्होंने अब तक खेले गए विश्व कप मुकाबलों में 12 गोल किए हैं। 2022 के फाइनल में उनकी हैट्रिक ने उन्हें पूरी दुनिया में सुर्खियों में ला दिया था और वह गोल्डन बूट भी जीतने में सफल रहे थे।
फीफा वर्ल्ड कप में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह साबित करता है कि यह टूर्नामेंट केवल टीम की नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रतिभा को भी इतिहास में अमर कर देता है। आने वाले विश्व कप में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया खिलाड़ी इन रिकॉर्ड्स को चुनौती दे पाता है या नहीं।