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  • पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    नई दिल्ली ।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के रहने वाले शाकिर खान ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी योजना का लाभ लेकर अपना कारोबार शुरू किया है। कभी खुद का व्यवसाय शुरू करना उनके लिए एक सपना था, लेकिन बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी की मदद से उन्होंने होटल स्थापित किया। अब वह अपने कारोबार के जरिए खुद रोजगार पाने के साथ 6 से 7 युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर केंद्र सरकार की पीएमईजीपी योजना को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करना है, जो रोजगार की तलाश में हैं और अपना व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं। इसके तहत बैंक ऋण के साथ सरकारी सब्सिडी का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।

    शाकिर खान के लिए इस योजना का लाभ उनके कारोबारी सफर में महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने बताया कि पहले खुद का व्यवसाय शुरू करना केवल एक सपना था। कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। पीएमईजीपी योजना के तहत बैंक से ऋण मिलने और सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद उनके लिए होटल शुरू करना संभव हो सका।

    होटल शुरू होने के बाद उनका कारोबार आगे बढ़ा और अब वह अपने काम को संचालित कर रहे हैं। शाकिर के मुताबिक, इस योजना ने उनके उद्यमी बनने के सपने को पूरा करने में मदद की। उनका कहना है कि यदि उन्हें पीएमईजीपी योजना का सहयोग नहीं मिलता तो अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना अधूरा रह सकता था।

    शाकिर खान का उदाहरण इस बात से जुड़ा है कि सरकारी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल करके कोई व्यक्ति अपना रोजगार स्थापित करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार कर सकता है। होटल में फिलहाल 6 से 7 युवा काम कर रहे हैं। इस तरह उनका कारोबार उनके लिए आय का साधन बनने के साथ दूसरे युवाओं के रोजगार से भी जुड़ा है।

    पीएमईजीपी योजना का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है। इसके माध्यम से उद्योग, सेवा और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत कारोबार शुरू करने के इच्छुक लोगों को बैंक वित्तपोषण के माध्यम से अपना उद्यम स्थापित करने का अवसर मिलता है।

    शाकिर खान ने योजना को युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने और आर्थिक रूप से मजबूत होने में मददगार बताया। उनके अनुसार, कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से उन लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, जिनके पास अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा तो होती है, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होते।

    पीएमईजीपी के जरिए शाकिर ने धमतरी में अपना होटल शुरू किया और अब वह स्वयं उद्यमी के रूप में काम कर रहे हैं। उनके कारोबार से जुड़े 6 से 7 युवाओं को भी रोजगार मिला है। इस तरह उनकी व्यक्तिगत कारोबारी शुरुआत अब अन्य लोगों की आजीविका से भी जुड़ गई है।

    शाकिर की कहानी स्वरोजगार के उस पहलू को सामने रखती है, जिसमें सरकारी योजना के जरिए व्यवसाय शुरू करने वाले व्यक्ति आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी काम के अवसर तैयार कर सकते हैं। पीएमईजीपी के तहत मिलने वाले ऋण और सब्सिडी के सहारे उन्होंने अपने सपने को कारोबार में बदला और रोजगार देने वाले उद्यमी के रूप में आगे बढ़े।

  • झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली तनाव खानपान में पोषक तत्वों की कमी नींद पूरी न होना और बालों की सही देखभाल नहीं करना इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए बाजार में कई तरह के उत्पाद मौजूद हैं लेकिन घरेलू स्तर पर नारियल तेल का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो तो केवल घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कारण की पहचान करना जरूरी है।

    नारियल तेल को बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल करने का एक आसान तरीका है इसे हल्का गुनगुना करके सिर की त्वचा पर लगाना। तेल को बहुत गर्म नहीं करना चाहिए। हल्के हाथों से उंगलियों की मदद से सिर की त्वचा पर मसाज की जा सकती है। इससे बालों में तेल अच्छी तरह फैलता है और सिर की त्वचा की मालिश करने से आराम भी महसूस हो सकता है। मसाज करते समय नाखूनों का इस्तेमाल करने के बजाय उंगलियों के पोरों से धीरे धीरे मालिश करना बेहतर रहता है।

    अगर बाल बहुत ज्यादा रूखे हैं तो नारियल तेल को बालों की लंबाई पर भी लगाया जा सकता है। खासतौर पर बालों के सिरों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाने से रूखापन और उलझने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। तेल लगाने के बाद कुछ समय के लिए बालों को छोड़ दें और फिर हल्के शैंपू से धो लें। बहुत अधिक तेल लगाने से बाल चिपचिपे हो सकते हैं और उन्हें साफ करने में ज्यादा शैंपू की जरूरत पड़ सकती है।

    नारियल तेल में कुछ लोग एलोवेरा जेल या मेथी जैसी चीजें मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे घरेलू मिश्रणों का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि किसी चीज से एलर्जी या सिर की त्वचा में जलन तो नहीं होती। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग थोड़ी मात्रा को त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देख सकते हैं। जलन खुजली लालिमा या किसी तरह की परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

    बालों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल तेल लगाना पर्याप्त नहीं है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना भी महत्वपूर्ण है। दालें अंडे दूध दही हरी सब्जियां फल और मेवे जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बालों की सामान्य सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है।

    बालों को धोने के बाद बहुत जोर से रगड़ने या लगातार गर्म उपकरणों का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। गीले बाल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें धीरे से सुखाना बेहतर रहता है। बहुत कसकर बाल बांधने की आदत भी बालों पर खिंचाव बढ़ा सकती है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में बाल झड़ने का कारण अलग हो सकता है। अगर बाल अचानक बहुत तेजी से झड़ने लगें सिर की त्वचा पर खुजली या घाव हों या बालों में स्पष्ट रूप से खाली जगह दिखाई देने लगे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। नारियल तेल बालों की देखभाल का एक सामान्य घरेलू तरीका हो सकता है लेकिन यह हर तरह के बाल झड़ने का इलाज नहीं है।

  • हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम

    हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार हादसों की वजह बन रही है। बुधवार रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां सड़क पर बैठे बैल से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार 38 वर्षीय विकास भार्गव गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में बैल की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।

    हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।

    यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

    प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।

  • उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    नई दिल्ली ।हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं के अलावा उंगलियों की बनावट और उनके बीच दिखाई देने वाले अंतर को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जब हथेली की सभी उंगलियों को एक साथ मिलाने के बाद भी उनके बीच गैप दिखाई देता है, तो इससे व्यक्ति के स्वभाव और आर्थिक स्थिति से जुड़े कुछ संकेत मिल सकते हैं। अलग-अलग उंगलियों के बीच बने गैप का अलग अर्थ बताया गया है।

    तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच गैप को हस्तरेखा शास्त्र में स्वतंत्र विचारों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर दिखाई देता है, वे किसी के दबाव में रहकर काम करना पसंद नहीं करते। वे अपने तरीके से निर्णय लेना और स्वतंत्र होकर काम करना पसंद कर सकते हैं।

    ऐसे लोगों को मेहनती भी माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ये लोग अपनी मेहनत के दम पर धन और मान-सम्मान हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कमाई के साथ खर्च करने की प्रवृत्ति भी अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें आर्थिक मामलों में अनुशासन और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, यदि ऐसे लोग अपनी योजनाओं और खर्च को व्यवस्थित तरीके से संभालें, तो जीवन में अच्छी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच गैप को आर्थिक स्थिति और करियर से जोड़कर देखा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र की मान्यता के अनुसार, ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती वर्षों में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर 25 वर्ष की उम्र तक आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने की बात कही जाती है। करियर में भी स्थिरता आने में समय लग सकता है।

    इसके बावजूद ऐसे लोगों के स्वभाव को उदार माना जाता है। मान्यता है कि इनके पास धन सीमित होने के बावजूद ये दूसरों की मदद करने की कोशिश करते हैं। भविष्य को लेकर ज्यादा चिंता न करने के कारण ये लोग कई बार आर्थिक योजना और बजट बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे उन्हें वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सही योजना और बजट के साथ जीवन आगे बढ़ाने पर परिस्थितियों में सुधार की संभावना मानी जाती है।

    अनामिका और कनिष्ठा यानी छोटी उंगली के बीच दिखाई देने वाले गैप को हस्तरेखा शास्त्र में व्यक्ति की वृद्धावस्था की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, यदि इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर हो तो बुढ़ापे में आर्थिक परेशानी की स्थिति बन सकती है। ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती चरण से ही भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

    वहीं, अगर अनामिका और कनिष्ठा के बीच गैप नहीं होता है, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे वृद्धावस्था में बेहतर आर्थिक स्थिति का संकेत माना जाता है। इस तरह उंगलियों के बीच का अंतर व्यक्ति के स्वभाव, खर्च करने की आदत, आर्थिक योजना और जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर देखा जाता है।

    हालांकि, ये सभी बातें हस्तरेखा शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी या आर्थिक स्थिति का निश्चित आकलन नहीं माना जाना चाहिए। उंगलियों की बनावट और उनके बीच का अंतर व्यक्ति की शारीरिक संरचना से भी संबंधित हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को केवल पारंपरिक हस्तरेखा मान्यताओं के संदर्भ में ही देखना उचित है।

  • दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    नई दिल्ली ।बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो हड्डियों और दांतों की संरचना को मजबूत बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। आमतौर पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए दूध और डेयरी उत्पादों को प्रमुख स्रोत माना जाता है, लेकिन कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जिन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति दूध कम पीता है या कैल्शियम के लिए दूसरे विकल्प तलाश रहा है, तो पौधों से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम का सेवन ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शरीर में कैल्शियम के बेहतर इस्तेमाल के लिए विटामिन डी, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

    रागी कैल्शियम से भरपूर अनाजों में शामिल है। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी पाया जाता है। इसे रोटी, दलिया या रागी डोसा के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। रागी के 100 ग्राम आटे में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इसकी मात्रा भोजन की तैयारी और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।

    तिल भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। सफेद और काले दोनों तरह के तिल भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल तिल की चटनी, सब्जी या सलाद में किया जा सकता है। तिल से लड्डू भी बनाए जाते हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। तिल में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है, फिर भी रोजाना सेवन की मात्रा सामान्यतः कम रहती है, इसलिए इसे पूरी डाइट का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

    टोफू उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो दूध से बने खाद्य पदार्थों के अलावा कैल्शियम का स्रोत तलाशते हैं। कैल्शियम-सेट टोफू में प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है। हालांकि, सभी टोफू उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए टोफू खरीदते समय उसके पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम पाया जाता है। सहजन के पत्ते, चौलाई और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को दाल, सब्जी या साग के रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पालक में मौजूद ऑक्सलेट कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल पालक पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए निर्भर रहना उचित नहीं है।

    बादाम भी कैल्शियम देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। इनमें मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स भी पाए जाते हैं। थोड़ी मात्रा में बादाम को नाश्ते या स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि, बादाम में कैल्शियम की मात्रा तिल या कैल्शियम-सेट टोफू से अलग होती है, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।

    उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों के साथ मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। इसलिए डाइट में कैल्शियम वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त विटामिन डी, प्रोटीन और वजन सहने वाली नियमित शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • 50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री

    50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गांवों में वर्षों से अपने घर और आबादी की जमीन पर रह रहे लाखों परिवारों के लिए 17 सितंबर से एक बड़ा अभियान शुरू हो रहा है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा चयनित संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जिन लोगों के नाम स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं उन्हें अब संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराया जाए। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    इस योजना को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्वामित्व योजना में प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री एक जैसी चीज नहीं हैं। ग्रामीण आबादी की जमीन का सर्वे कर तैयार किए गए अधिकार अभिलेख में संपत्ति पर संबंधित व्यक्ति के अधिकार का रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए चयनित संपत्तियों का पंजीयन कराने जा रही है। यानी पहले से तैयार रिकॉर्ड को पंजीकृत दस्तावेज का रूप दिया जाएगा।

    सरकार ने इसके लिए अलग से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यवस्था की है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाने की योजना है ताकि लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ अधिकारियों को उप-पंजीयक की शक्तियां भी दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन कम समय में पूरा करना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अभियान एक महीने तक चलाया जाएगा और पंजीयन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

    इसका फायदा हर व्यक्ति को अपने आप नहीं मिलेगा। अभियान में वही संपत्तियां शामिल हैं जिनके अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत पहले से तैयार और मंजूर हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अभी स्वामित्व योजना के तैयार रिकॉर्ड में शामिल नहीं है तो केवल इस अभियान के दौरान आवेदन करके तुरंत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सुविधा नहीं होगी। पहले उसका रिकॉर्ड योजना की प्रक्रिया के तहत तैयार होना जरूरी होगा।

    रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति के मालिक के पास उसका पंजीकृत दस्तावेज होगा। इससे संपत्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को और मजबूत आधार मिल सकता है। सरकार का कहना है कि पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर पात्रता और बैंक की अन्य शर्तें पूरी होने पर संपत्ति के बदले ऋण लेने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा संपत्ति को कारोबार या स्वरोजगार के लिए इस्तेमाल करने के रास्ते भी आसान हो सकते हैं।

    हालांकि जमीन विवादित होने पर स्थिति अलग हो सकती है। सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से किसी पुराने मालिकाना विवाद का अपने आप अंत नहीं माना जा सकता। यदि किसी संपत्ति पर किसी दूसरे व्यक्ति का दावा है या मामला राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में चल रहा है तो उसका कानूनी निपटारा अलग प्रक्रिया से ही होगा। इसलिए रजिस्ट्री को हर तरह के भूमि विवाद का अंतिम समाधान मानना सही नहीं होगा।

    इस अभियान के बीच पटवारियों की आपत्ति भी सामने आई है। पटवारी संघों की चिंता अतिरिक्त जिम्मेदारी और रिकॉर्ड में भविष्य में सामने आने वाली किसी गलती की जवाबदेही को लेकर बताई गई है। उनका सवाल है कि यदि खसरे नक्शे या सर्वे रिकॉर्ड में कोई त्रुटि निकलती है और उसके आधार पर विवाद खड़ा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। कुछ पटवारी संगठनों ने इस तरह की जिम्मेदारी के साथ अधिकार भी स्पष्ट करने की मांग की है।

    यह मुद्दा सरकार के स्तर पर भी उठा है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पटवारियों की आशंकाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से यह कहा गया है कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।

    यानी स्वामित्व योजना के तहत शुरू हो रहा यह अभियान उन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी संपत्ति पहले से योजना के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन किसी नए दावे या पुराने विवाद को केवल मुफ्त रजिस्ट्री के जरिए खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित राजस्व या न्यायिक प्रक्रिया ही लागू होगी। अब अभियान शुरू होने के साथ यह देखना अहम होगा कि चयनित 50 लाख से ज्यादा संपत्तियों का पंजीयन तय समय में किस तरह पूरा होता है।

  • सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात

    सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) गुजरात (Gujarat) से सटे सर क्रीक और सिंध (Sir Creek and Sindh) के तटीय इलाकों में अपनी सैन्य तैयारियों को चुपचाप धार दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में इस इलाके में पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी एम्फीबियस (जल और थल) युद्धक क्षमताओं को तेजी से मजबूत किया है। दलदली पानी में चलने वाले विशेष होवरक्राफ्ट की तैनाती, नए ड्रोन प्रोजेक्ट और तीनों सेनाओं के बड़े युद्धाभ्यास यह बताते हैं कि पाकिस्तान इस जलीय और दुर्गम इलाके को भारत के खिलाफ एक नए मोर्चे के रूप में विकसित करने की जुगत में है।

    पाकिस्तान ने सर क्रीक के आसपास के बैकवाटर में कई तटीय सुरक्षा अभ्यास चलाए हैं। पिछले साल अगस्त में तुर्की की स्पेशल फोर्सेज और फरवरी में सऊदी अरब की नौसेना के साथ कराची/सिंध तट पर क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट अभियानों का अभ्यास किया गया। पिछले साल जून व अगस्त में पोर्ट कासिम और कराची बंदरगाहों पर गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए पोर्ट सिक्योरिटी और हार्बर डिफेंस अभ्यास भी आयोजित किए।


    पाकिस्तान की हालिया तैयारियां

    पाकिस्तान नौसेना ने इसी महीने उत्तरी अरब सागर में सी-स्पार्क युद्धाभ्यास की शुरुआत की है। इस अभ्यास में युद्धपोत, पनडुब्बियां, विमान और मानव रहित (ड्रोन) प्रणालियां शामिल हैं। अभ्यास का मुख्य फोकस पारंपरिक नौसैनिक युद्ध के साथ-साथ हवाई, जमीनी और साइबर समेत मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मजबूत करना है, जिसमें पाकिस्तानी सेना और वायुसेना भी भाग ले रही हैं।

    पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद अक्तूबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ क्रीक के दौरे पर गए। इस दौरान तीन नए 2400 टीडी होवरक्राफ्ट मरीन बेड़े में शामिल किए गए। इस साल जुलाई में पाकिस्तानी नौसेना ने अबाबील नाम से एक एम्फीबियस और ड्रोन एकीकरण प्रशिक्षण चलाया। इसमें मरीन कमांडोज, यूएवी और समुद्र से तट पर उतरने वाले अभ्यासों को आपस में जोड़ा गया।


    पाकिस्तान की मंशा

    सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की इस बहुआयामी तैयारी के पीछे कई सामरिक कारण हैं। पारंपरिक रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष का केंद्र कश्मीर और पंजाब सीमा रही है। पाकिस्तान गुजरात के कच्छ और सर क्रीक मोर्चे को एक वैकल्पिक या आक्रामक मोर्चे के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि भारतीय सेना को कई दिशाओं में उलझाया जा सके। सर क्रीक का इलाका बेहद जटिल, दलदली और जलीय है। जहां भारी टैंक या सेना के पारंपरिक वाहन काम नहीं करते। पाकिस्तान इन भौगोलिक बाधाओं का लाभ उठाकर तेजी से घुसपैठ या हमले की क्षमता परख रहा है। गुजरात सीमा पर हमले के पीछे मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हैं। पाकिस्तान का आकलन है कि इस क्षेत्र में किसी तरह की सफलता भारत के राष्ट्रीय मनोबल को कमजोर कर सकती है।


    भारत की जवाबी तैयारी

    पिछले साल मई में भारत-पाक सैन्य टकराव के दौरान गुजरात मोर्चे पर पाकिस्तानी ड्रोनों की गतिविधियों को भारत ने नाकाम किया था। इसके बाद जून में सेना, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में एक बड़ा संयुक्त अभ्यास किया, जिसमें दलदली क्षेत्र में स्पीड बोट्स, ड्रोन-विरोधी प्रणालियों और अंडरवाटर ऑपरेशन्स का परीक्षण किया गया।


    पाक का हवाई मार्ग भारत के लिए 24 अक्तूबर तक बंद

    पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र पर लगी रोक को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया। पाकिस्तान के विमानपत्तन प्राधिकरण (पीएए) के मुताबिक, अब यह पाबंदी 24 अक्तूबर तक बढ़ाई गई है। यह रोक बुधवार सुबह 10:45 बजे से लागू हुई और 24 अक्तूबर 2026 सुबह 04:59 बजे तक जारी रहेगी। रोक की पिछली समय-सीमा 24 सितंबर को खत्म हो रही है।

  • केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक

    केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले हफ्ते केंद्रीय मंत्रियों (Union Ministers) के साथ दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ करेंगे। 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में सरकार के कामकाज, नीतियों और सुधारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन होगा। सूत्रों के मुताबिक, सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को अगले हफ्ते दिल्ली में मौजूद रहने को कहा गया है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री शामिल होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।


    सुधारों पर मंत्रियों की होगी प्रेजेंटेशन

    बैठक में कुछ मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए काम और अलग-अलग क्षेत्रों में सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों पर प्रेजेंटेशन दे सकते हैं। इस दौरान यह चर्चा भी हो सकती है कि सरकारी नीतियों को ज्यादा असरदार कैसे बनाया जाए और उनका फायदा आम लोगों तक तेजी से कैसे पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी मंत्रियों से कह चुके हैं कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और उनका जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।


    योजनाओं की प्रगति से लेकर सरकारी सेवाओं तक पर नजर

    ‘चिंतन बैठक’ में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनके जमीन पर क्रियान्वयन की भी समीक्षा हो सकती है। चर्चा इस बात पर होगी कि योजनाओं का लाभ लोगों तक किस तरह और बेहतर तरीके से पहुंचाया जाए। इसके अलावा सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी मंथन होने की संभावना है।


    आगे की रणनीति और सरकार के रोडमैप पर भी फोकस

    दो दिन चलने वाली इस बैठक में समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नीतियां बनाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं। अब तक किए गए काम की समीक्षा के साथ आगे की प्राथमिकताओं और सरकार के अगले रोडमैप पर भी चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक का बड़ा फोकस शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, सुधारों को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर रहेगा।


    पिछले हफ्ते राज्य मंत्रियों के साथ हुई थी लंबी बैठक

    बता दें कि पीएम मोदी ने अपनी सरकार के राज्य मंत्रियों के साथ भी लंबी बैठक की थी। इस दौरान मंत्रालयों के कामकाज और अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इससे पहले हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भी अलग-अलग मंत्रालयों की उपलब्धियों पर चर्चा हुई थी। काम की रफ्तार, फाइलों के निपटारे और अदालतों में लंबित सरकारी मामलों जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों की रैंकिंग भी की गई थी। यह ‘चिंतन बैठक’ ऐसे वक्त हो रही है, जब मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा मोदी सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

  • उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं

    उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया है। जबलपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के सामने यह प्रमाण नहीं आया कि जिस वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था वह मंत्री का वाहन था या तिरंगा मंत्री के निर्देश पर वहां लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी आधार पर अदालत ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

    यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।

    परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।

    परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।

    इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।

    इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।

  • PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…

    PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज अपना 76वां जन्मदिन (76th Birthday) मना रहे हैं। केंद्र की सत्ता में रहते हुए यह उनका 13वां जन्मदिन है। गुरुवार सुबह से ही उन्हें देश-विदेश से बधाई मिलने का सिलसिला जारी है। अगर मोदी के पीएम के तौर पर कार्यकाल को देखा जाए तो बीते 12 वर्षों के अपने शासन में प्रधानमंत्री (Prime Minister) के तौर पर उन्होंने कई उपलब्धियां (Achievements) हासिल की हैं। फिर चाहे देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की बात हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का विषय। इन पहलुओं के साथ पीएम मोदी ने निजी तौर पर भी कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    उनके कीर्तिमानों मे सबसे लंबे समय तक अलग-अलग स्तरों पर सरकार चलाने वाले नेता के साथ-साथ सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी पीएम रहने तक की उपलब्धि शामिल है। इसी साल पीएम मोदी ने भारत पर लगातार सबसे लंबा शासन करने वाले प्रधानमंत्री बनने का कीर्तिमान भी अपने नाम किया। वे लगातार शासन के मामले में पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लगातार 4398 दिन शासन (चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर) करने के रिकॉर्ड को जून में तोड़ चुके हैं।

    हालांकि, यह सिर्फ कुछ रिकॉर्ड हैं, जिन्हें पीएम मोदी ने छुआ है। अभी कई और कीर्तिमान उनकी झोली में गिरना बाकी है। वहीं, कुछ और रिकॉर्ड ऐसे भी हैं, जो फिलहाल उनकी पहुंच से दूर हैं और उन्हें पार करने के लिए मोदी को कम से कम एक और कार्यकाल के लिए पीएम बनना होगा।

    ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं? इनके जरिए उन्होंने किन नेताओं के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा? अब वे कौन सा रिकॉर्ड तोड़ने के बेहद करीब आ चुके हैं? इसके अलावा वे कौन से और किन नेताओं के रिकॉर्ड हैं, जो फिलहाल पीएम मोदी की पहुंच से दूर हैं और इन्हें हासिल करने में कितना समय लग सकता है?

    पीएम मोदी ने अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड तोड़े?
    1. भारत में सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल (राज्य और केंद्र मिलाकर)
    22 मार्च 2026 को पीएम मोदी राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों को मिलाकर भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए थे। लगातार कार्यकारी पद पर बने रहने के मामले में उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    पीएम मोदी के लिए यह पूरी उपलब्धि सिर्फ किसी एक सरकार का नेतृत्व करते हुए नहीं आई है। बल्कि उनकी इस उपलब्धि में 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड और अब लगातार करीब 12 साल से प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड शामिल है।

    गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (अक्तूबर 2001 – मई 2014)
    भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (मई 2014 – वर्तमान)


    2. सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री

    पीएम मोदी कांग्रेस पार्टी से बाहर के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने इस मामले में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा, वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने संसद में लगातार दो बार पूर्ण बहुमत (2014 और 2019 दोनों में) की सरकार बनाई। इनमें जहां भाजपा अपनी दम पर बहुमत के आंकड़े- 272 के पार थी, वहीं एनडीए का आंकड़ा 300 के पार ही था।


    3. लगातार तीन आम चुनाव में जीत

    2024 के आम चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय नेता बने। उनसे पहले यह उपलब्धि केवल जवाहरलाल नेहरू के नाम थी।


    4. अजेय कार्यकारी सफर

    अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार नियुक्त होने के बाद से, वह सत्ता में रहते हुए कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं और उन्होंने एक भी दिन निर्वाचित कार्यकारी पद से बाहर नहीं बिताया है।

    पीएम मोदी ने अब कौन सा रिकॉर्ड तोड़ा?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बन गए। वह देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार कार्यकाल वाले 64 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, आजादी के बाद देश के पहले आम चुनावों के बाद गठित पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952 को हुआ था। उसकी पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी और इसी दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस लिहाज से देखा जाए तो जहां नेहरू पहला चुनाव जीतने के बाद लगातार 4398 दिन (12 साल 15 दिन) तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वहीं, पीएम मोदी ने आज (बुधवार) को कुल 4399 दिन लगातार पीएम रहने का गौरव हासिल कर लिया। यानी वे लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।

    इस रिकॉर्ड की बारीक समझ भी हासिल करना जरूरी है। दरअसल, जवाहरलाल नेहरू का प्रधानमंत्री के रूप में कुल कार्यकाल कुल 6,131 दिन का था। इसकी वजह यह है कि उन्होंने भारत की कमान 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद ही संभाल ली थी। तब पीएम पद के लिए कोई चुनाव नहीं हुआ था। देश में पहली बार आम चुनाव 1952 में ही हुए। यानी 1947 से 1952 तक नेहरू पीएम तो रहे, लेकिन उनकी सरकार चुनाव के जरिए नहीं आई थी यानी निर्वाचित नहीं थी। इस लिहाज से आम चुनाव के बाद लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने की अवधि को देखा जाए, तो पीएम मोदी अब नेहरू के रिकॉर्ड को पार कर चुके हैं।


    अभी कौन से रिकॉर्ड पीएम मोदी की पहुंच से दूर?
    1. प्रधानमंत्री के रूप में कुल सबसे लंबा कार्यकाल

    भले ही पीएम मोदी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर कुल दिनों के मामले में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड अभी भी सबसे ऊपर है। जवाहरलाल नेहरू का कुल कार्यकाल (1947-1964) 16 वर्ष और 286 दिन का रहा है यानी कुल 6,131 दिन। इसी तरह इंदिरा गांधी ने भी अलग-अलग कार्यकालों में देश पर 15 साल से ज्यादा शासन किया है।

    पीएम मोदी की स्थिति: मई 2014 से अब तक उनका कार्यकाल लगभग 12 वर्ष का हुआ है। नेहरू के इस कुल कार्यकाल के रिकॉर्ड को पार करने के लिए पीएम मोदी को साल 2030 के अंत तक देश का प्रधानमंत्री बने रहना होगा। यानी भाजपा का अगला लोकसभा चुनाव जीतना जरूरी होगा। साथ ही पीएम मोदी का 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद अगले करीब दो साल तक लगातार प्रधानमंत्री बना रहना भी अनिवार्य होगा। तभी नेहरू का यह रिकॉर्ड टूटना संभव हो सकता है।


    2. सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 साल से अधिक (4,610 दिन) का समय बिताया, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है, लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सर्वकालिक इतिहास में उनसे आगे कई नेता हैं। सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग (24 वर्ष, 165 दिन) और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (24 वर्ष, 99 दिन) के नाम भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। चूंकि पीएम मोदी अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के इस व्यक्तिगत रिकॉर्ड में अब बदलाव होने की संभावना कम ही है।


    3. लोकसभा चुनाव में किसी एक पार्टी द्वारा सर्वाधिक सीटें जीतने का रिकॉर्ड

    चुनावी सफलता के मामले में भाजपा ने पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 (282 सीटें) और 2019 (303 सीटें) में पूर्ण बहुमत हासिल किया, लेकिन भारत के संसदीय इतिहास में एक पार्टी द्वारा सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड अभी भी कांग्रेस के नाम है। यह जीत राजीव गांधी के समय में कांग्रेस को मिली थी। तब पार्टी ने 414 सीट जीत कर इतिहास रच दिया था। यह अब तक का रिकॉर्ड है, जिसे कोई भी दल या यहां तक कि गठबंधन भी नहीं तोड़ पाया है।


    4. चार या अधिक कार्यकाल का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी इस समय अपने तीसरे कार्यकाल में हैं, जिससे उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लगातार तीन बार प्रधानमंत्री चुने जाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है। अगर वह 2029 में चौथे कार्यकाल के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वह भारत के इतिहास में चार बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बनकर एक नया रिकॉर्ड कायम करेंगे और चार बार चुने जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे।