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  • आईपीओ, फिर भी मजबूत निवेश, एसएमई कंपनियों ने छह महीने में 3,752 करोड़ रुपये जुटाकर दिखाया भरोसा

    आईपीओ, फिर भी मजबूत निवेश, एसएमई कंपनियों ने छह महीने में 3,752 करोड़ रुपये जुटाकर दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । देश के लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) पूंजी बाजार के माध्यम से निवेश जुटाने में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान 78 एसएमई कंपनियों ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिए कुल 3,752 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई। आईपीओ की संख्या पिछले दो वर्षों की समान अवधि की तुलना में कम रही, लेकिन निवेश जुटाने का स्तर मजबूत बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब गुणवत्ता आधारित कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं और मजबूत कारोबारी मॉडल वाली कंपनियों को बाजार से पर्याप्त समर्थन मिल रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार जुटाई गई कुल राशि में सबसे बड़ा योगदान फ्रेश इश्यू का रहा। नई इक्विटी जारी कर कंपनियों ने लगभग 3,555 करोड़ रुपये जुटाए, जो कुल इश्यू आकार का करीब 95 प्रतिशत है। दूसरी ओर, ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए केवल 197 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी कम है। इससे स्पष्ट होता है कि कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय अपने विस्तार, नई परियोजनाओं और कारोबार को बढ़ाने के लिए ताजा पूंजी जुटाने पर अधिक जोर दे रही हैं।

    हालांकि आईपीओ की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में 88 और वर्ष 2024 की पहली छमाही में 116 एसएमई आईपीओ आए थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या घटकर 78 रह गई। इसके बावजूद कुल जुटाई गई राशि में केवल मामूली गिरावट आई है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में एसएमई कंपनियों ने 4,004 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह अंतर दर्शाता है कि बाजार में कम लेकिन अपेक्षाकृत बड़े और मजबूत आईपीओ आ रहे हैं, जिन्हें निवेशकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही, यानी अप्रैल से जून के बीच 38 एसएमई कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुईं। इन कंपनियों ने लगभग 1,891 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में जुटाई गई 1,644 करोड़ रुपये की राशि से अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में निवेशकों की रुचि अभी भी बनी हुई है और विकास की संभावनाओं वाली कंपनियों को पूंजी जुटाने में अपेक्षाकृत आसानी हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में एसएमई आईपीओ गतिविधियों में असाधारण तेजी देखने को मिली थी, जबकि मौजूदा वर्ष में बाजार अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में पहुंच गया है। अब निवेशकों का ध्यान केवल बड़ी संख्या में आने वाले आईपीओ पर नहीं, बल्कि उन कंपनियों पर है जिनकी वित्तीय स्थिति, विकास की योजना और कारोबारी संभावनाएं मजबूत हैं। यही कारण है कि कम लिस्टिंग के बावजूद पूंजी जुटाने की क्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    विश्लेषकों के अनुसार एसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और पूंजी बाजार तक इसकी आसान पहुंच आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। मजबूत आईपीओ बाजार से इन कंपनियों को विस्तार, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते हैं। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि निवेशकों का भरोसा गुणवत्ता वाली एसएमई कंपनियों पर कायम है और आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रहने की संभावना है।

  • गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल

    गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल


    भोपाल । रातों-रात अमीर बनने का सपना, खेतों में दबे खजाने की कहानियां और तंत्र-मंत्र के जरिए अकूत संपत्ति मिलने का झांसा आज भी लोगों को अंधविश्वास की ऐसी अंधेरी दुनिया में धकेल रहा है, जहां अंत अक्सर हत्या, ठगी और बर्बादी के रूप में होता है। मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए कई मामलों ने यह साबित कर दिया है कि गड़े धन का मिथक अब केवल अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अंधविश्वास का खतरनाक हथियार बन चुका है।

    भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके में एक पिता ने कथित तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी 17 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी। तांत्रिक ने दावा किया था कि खेत में दबे खजाने तक पहुंचने के लिए लड़की की बलि जरूरी है। पिता ने बेटी की हत्या कर शव खेत में दफना दिया। कई महीने बाद जब खेत की जुताई हुई तो कंकाल मिलने से पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    रायसेन जिले में भी गड़े धन की तलाश एक व्यापारी की जिंदगी पर भारी पड़ गई। कथित तांत्रिक ने करोड़ों के खजाने का लालच देकर पूजा कराई और फिर नरबलि की बात कहकर व्यापारी की हत्या कर शव रेत में दफना दिया। पुलिस जांच में यह सनसनीखेज वारदात सामने आई।

    बालाघाट में एक तांत्रिक के कहने पर 11 लोग एक महिला के घर में गड़ा धन तलाशने घुस गए। महिला के जागने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। हालांकि आरोपियों को कोई खजाना नहीं मिला और वे घर का सामान लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बाद में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया।

    मंदसौर में भी कथित तांत्रिकों ने किसान को नोटों की बारिश और गड़ा धन निकालने का सपना दिखाकर करीब 12 लाख रुपये ठग लिए। पूजा-पाठ, भूत-प्रेत और नरबलि का डर दिखाकर लगातार पैसे वसूले जाते रहे। आखिरकार जब नोटों की गड्डियों में असली मुद्रा की जगह छोटे नोट निकले तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस गंभीर समस्या की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में टोना-टोटका से जुड़ी 54 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश में 17 मामले सामने आए। इस तरह अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं के मामलों में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन समय में युद्ध के दौरान लोग अपनी संपत्ति जमीन में छिपा देते थे। समय के साथ यह मान्यता बन गई कि ऐसे खजानों की रक्षा अदृश्य शक्तियां करती हैं और विशेष तांत्रिक क्रियाओं से ही उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में तंत्र-मंत्र से गड़ा धन निकालने, नोटों की बारिश कराने या रातों-रात अमीर बनने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। कथित तांत्रिक इसी अज्ञानता और लालच का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो और फर्जी दावों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जरूरत है कि लोग वैज्ञानिक सोच अपनाएं, अंधविश्वास से दूर रहें और किसी भी तरह के चमत्कार या गड़े धन के दावों पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें। क्योंकि खजाने की तलाश में उठाया गया एक गलत कदम कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह कर सकता है।

  • एआई और इनोवेशन से बढ़ेगी ऑफिस स्पेस की मांग, भारत में जीसीसी की हिस्सेदारी 50% के करीब पहुंचने के संकेत

    एआई और इनोवेशन से बढ़ेगी ऑफिस स्पेस की मांग, भारत में जीसीसी की हिस्सेदारी 50% के करीब पहुंचने के संकेत

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक कंपनियों के लिए केवल लागत आधारित संचालन का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि अब नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। इसी बदलाव का असर देश के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में भी साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दो वर्षों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग का सबसे बड़ा आधार बनने की ओर बढ़ रहे हैं। अनुमान है कि वर्ष 2026 और 2027 के दौरान देश में होने वाली कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीजिंग का लगभग 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले जीसीसी के खाते में जाएगा। इससे भारत की वैश्विक कारोबारी और तकनीकी क्षमता को नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    बीते कुछ वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने परिचालन और रणनीतिक केंद्रों का लगातार विस्तार किया है। वर्ष 2021 से अब तक देश के सात प्रमुख शहरों में जीसीसी ने लगभग 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। यह इसी अवधि के दौरान हुई कुल ऑफिस स्पेस मांग का करीब 37 प्रतिशत हिस्सा है। केवल वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही जीसीसी द्वारा 1.66 करोड़ वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया, जो कुल ग्रेड-ए लीजिंग का लगभग 46 प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत में वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब जीसीसी की भूमिका पारंपरिक बैक-ऑफिस सेवाओं तक सीमित नहीं रह गई है। वर्तमान समय में ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे उच्च मूल्य वाले कार्यों का संचालन कर रहे हैं। कुशल मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत, मजबूत तकनीकी क्षमता, अनुकूल कारोबारी माहौल और नीतिगत समर्थन ने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित नवाचार और तकनीकी निवेश ऑफिस स्पेस की मांग को और अधिक गति देने की उम्मीद है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021 से अब तक जीसीसी लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक करीब 39 प्रतिशत रही है। हालांकि अब अन्य क्षेत्रों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र ने कुल लीजिंग में लगभग 22 प्रतिशत योगदान दिया है, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही। वर्ष 2021 से 2025 के बीच बीएफएसआई क्षेत्र की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, वहीं इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मांग 2.5 गुना से अधिक बढ़ने का अनुमान दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि जीसीसी मॉडल अब विभिन्न उद्योगों में तेजी से अपनाया जा रहा है।

    शहरों की बात करें तो बेंगलुरु और हैदराबाद अभी भी जीसीसी गतिविधियों के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं। वर्ष 2021 से अब तक कुल लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही है। इसके बावजूद अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में तेजी से रुचि दिखा रही हैं। इसके साथ ही ‘हब-प्लस-वन’ रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी विस्तार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। एआई-आधारित जीसीसी, नैनो और मिड-साइज कैपेबिलिटी सेंटर तथा नए कारोबारी मॉडल आने वाले वर्षों में भारत के ऑफिस स्पेस बाजार और वैश्विक निवेश परिदृश्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • जुलाई में भारत के निजी क्षेत्र की रफ्तार धीमी, कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर; निर्यात मांग ने मैन्युफैक्चरिंग को दिया मजबूत सहारा

    जुलाई में भारत के निजी क्षेत्र की रफ्तार धीमी, कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर; निर्यात मांग ने मैन्युफैक्चरिंग को दिया मजबूत सहारा

    नई दिल्ली । जुलाई महीने में भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि का क्रम जारी रहा, हालांकि इसकी रफ्तार जून की तुलना में कुछ धीमी दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई में कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 54.3 रहा। यह स्तर इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक गतिविधियां अब भी विस्तार के चरण में हैं, क्योंकि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना आर्थिक वृद्धि का संकेत माना जाता है। हालांकि जून में यह सूचकांक 57.1 था, जिससे स्पष्ट है कि जुलाई में विकास की गति कुछ कम हुई है।

    जुलाई के दौरान निजी क्षेत्र के प्रदर्शन में सर्विस सेक्टर की सुस्ती प्रमुख कारण रही। कारोबार से जुड़े नए ऑर्डरों की रफ्तार कमजोर पड़ी और ग्राहकों की ओर से पूछताछ में कमी देखने को मिली। कई कंपनियों ने मांग में नरमी और कुछ ऑर्डर रद्द होने की वजह से सेवा गतिविधियों में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी दर्ज की। इसके चलते सर्विस सेक्टर का बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स घटकर 53.1 पर पहुंच गया, जो पिछले 53 महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

    इसके विपरीत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। वैश्विक बाजारों से लगातार मिल रही मजबूत मांग और निर्यात ऑर्डरों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में मामूली गिरावट के बावजूद फैक्ट्री उत्पादन सूचकांक में सुधार दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि औद्योगिक उत्पादन की गति बनी हुई है और विनिर्माण क्षेत्र देश की आर्थिक गतिविधियों को सहारा देता रहा।

    व्यापारिक संस्थानों ने भविष्य की संभावित चुनौतियों को देखते हुए अपनी तैयारियां भी तेज कर दी हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखते हुए कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद बढ़ाई है। इसके साथ ही तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है, ताकि किसी भी आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो।

    सर्वेक्षण के अनुसार लागत का दबाव भी जुलाई में बढ़ा है। कच्चे माल और अन्य इनपुट की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी, जिसका असर उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दिया। कई कंपनियों ने बढ़ती लागत के बीच अपने लाभ मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कीमतों में आवश्यक बदलाव किए। इसके बावजूद रोजगार के मोर्चे पर स्थिति सकारात्मक बनी रही और कंपनियों ने कर्मचारियों की नियुक्ति जारी रखी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का निजी क्षेत्र अभी भी मजबूती का संकेत दे रहा है। निर्यात आधारित मांग, उत्पादन गतिविधियों की स्थिरता और रोजगार सृजन जैसे कारक आर्थिक विस्तार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि घरेलू मांग में सुधार और सर्विस सेक्टर की गति बढ़ाना आने वाले महीनों में आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

    कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था विस्तार के मार्ग पर बनी हुई है, लेकिन विकास की गति को बनाए रखने के लिए घरेलू मांग को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को सीमित करना आवश्यक होगा। यदि आने वाले महीनों में मांग और कारोबारी विश्वास में सुधार होता है तो निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां फिर से तेज रफ्तार पकड़ सकती हैं।

  • पेटीएम की ग्रोथ को मिला एआई का सहारा, लागत दक्षता बढ़ने के साथ ब्रोकरेज ने बढ़ाया लक्ष्य मूल्य

    पेटीएम की ग्रोथ को मिला एआई का सहारा, लागत दक्षता बढ़ने के साथ ब्रोकरेज ने बढ़ाया लक्ष्य मूल्य

    नई दिल्ली । डिजिटल वित्तीय सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी पेटीएम ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में परिचालन प्रदर्शन के साथ लागत नियंत्रण के मोर्चे पर भी मजबूत प्रगति दर्ज की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोमेशन को अपनाने से कंपनी की लागत दक्षता लगातार बेहतर हुई है, जिससे बढ़ते कारोबार के बावजूद खर्चों पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है। यही कारण है कि कंपनी का मुनाफा बाजार के कई अनुमानों से बेहतर रहा और भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।

    कंपनी ने कारोबार के विस्तार के साथ मर्चेंट और उपभोक्ता आधार बढ़ाने में निवेश जारी रखा है, लेकिन इसके बावजूद गैर-बिक्री संबंधी खर्च लगभग स्थिर बने हुए हैं। ग्राहक सेवा, कलेक्शन और मर्चेंट अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं में एआई आधारित तकनीक के इस्तेमाल ने परिचालन को अधिक कुशल बनाया है। इससे कंपनी को बड़े पैमाने पर लागत बचत के साथ तेज गति से कारोबार बढ़ाने में मदद मिल रही है।

    पेटीएम के लिए वित्तीय सेवाओं का कारोबार सबसे तेजी से उभरता हुआ ग्रोथ इंजन बनकर सामने आया है। इस खंड में राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें मर्चेंट लेंडिंग और कंज्यूमर लेंडिंग की मजबूत मांग का अहम योगदान रहा। कंपनी के साथ काम करने वाले लेंडिंग पार्टनर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और दोबारा ऋण लेने वाले व्यापारियों की हिस्सेदारी भी काफी मजबूत बनी हुई है। इससे इस कारोबार की गुणवत्ता और स्थिरता दोनों को बल मिला है।

    कंपनी के पास उपलब्ध लेंडिंग कैपिटल उसकी मौजूदा ऋण वितरण क्षमता से कई गुना अधिक बताई जा रही है। इससे स्पष्ट है कि भविष्य में ऋण वितरण बढ़ाने के लिए फंडिंग किसी प्रकार की बाधा नहीं बनेगी। साथ ही कंपनी केवल डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर काम कर रही है, जिसके कारण वह स्वयं ऋण जोखिम नहीं उठाती और अपने पास लोन बुक भी नहीं रखती। इससे जोखिम सीमित रहने के साथ कारोबार का विस्तार अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है।

    कंज्यूमर लेंडिंग कारोबार में भी तेज वृद्धि देखने को मिली है। वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि पेटीएम पोस्टपेड की मांग पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही कारोबार कंपनी के राजस्व और परिचालन लाभ में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इसके साथ ही मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी, ब्रोकिंग और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन जैसे वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार भी कंपनी की नई विकास रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।

    भुगतान कारोबार में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों में लेनदेन बढ़ने से कुल भुगतान मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। कार्ड-ऑन-यूपीआई और पोस्टपेड भुगतान की हिस्सेदारी बढ़ने से पेमेंट प्रोसेसिंग मार्जिन में भी संरचनात्मक सुधार देखने को मिला है। इससे कंपनी की आय की गुणवत्ता पहले की तुलना में और मजबूत हुई है।

    परिचालन स्तर पर कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन भी पिछली तिमाही की तुलना में बेहतर हुआ है। मजबूत ऑपरेटिंग लीवरेज और राजस्व की तुलना में खर्चों की नियंत्रित वृद्धि के कारण लाभ में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। इसी आधार पर कंपनी के लिए निर्धारित दीर्घकालिक मार्जिन लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल करने की संभावना भी मजबूत मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित ऑटोमेशन, भुगतान कारोबार का विस्तार और तेजी से बढ़ती वित्तीय सेवाएं आने वाले वर्षों में पेटीएम की आय और लाभप्रदता को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती हैं। इसी सकारात्मक दृष्टिकोण को देखते हुए कंपनी के भविष्य के लाभ अनुमान में बढ़ोतरी की गई है और निवेश के प्रति भरोसा भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है।

  • सोना-चांदी लगातार दूसरे दिन फिसले, मजबूत डॉलर के दबाव में कीमती धातुओं में 0.6% तक की गिरावट

    सोना-चांदी लगातार दूसरे दिन फिसले, मजबूत डॉलर के दबाव में कीमती धातुओं में 0.6% तक की गिरावट

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक बाजारों में बने दबाव के कारण दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बाजार में आए बदलाव का सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव की तुलना में कमजोर स्तर पर हुई। कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 0.61 प्रतिशत टूटकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला और ऊपरी स्तर भी दर्ज किया, जिससे बाजार में अस्थिरता का संकेत मिला। लगातार दूसरे दिन आई इस गिरावट ने अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी बनी रही। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध में शुरुआती कारोबार से ही दबाव देखा गया। कारोबार के दौरान चांदी की कीमत करीब 0.40 प्रतिशत तक फिसल गई। बाजार में खरीदारी सीमित रहने और वैश्विक संकेत कमजोर होने के कारण चांदी में भी गिरावट का रुख बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की रणनीति दोनों का प्रभाव चांदी की कीमतों पर लगातार पड़ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी दबाव में रहे। कॉमैक्स पर सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। वैश्विक निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों को लेकर नई रणनीति अपनाई, जिससे कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी बनी रही। विदेशी बाजारों की चाल का असर भारतीय वायदा बाजार पर तेजी से देखने को मिला और घरेलू कीमतें भी उसी दिशा में आगे बढ़ीं।

    विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में मजबूती इस गिरावट की प्रमुख वजहों में शामिल है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने पर सोने और चांदी जैसी धातुएं विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी मांग प्रभावित होती है। हाल के दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों के कारण डॉलर में मजबूती देखने को मिली है। इसी का असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी पड़ा है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतक सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है, जबकि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ सकती है। फिलहाल निवेशकों को बाजार की बदलती परिस्थितियों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • 'बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं': जंतर-मंतर घटनाक्रम पर अभिनेता रजा मुराद की भावुक अपील

    'बच्चों के जख्मों पर मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं': जंतर-मंतर घटनाक्रम पर अभिनेता रजा मुराद की भावुक अपील


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जुड़े वरिष्ठ बॉलीवुड अभिनेता रजा मुराद ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील करते हुए कहा कि बच्चों के जख्मों पर “मरहम लगाइए, नमक-मिर्च नहीं।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

    रजा मुराद ने अपने संदेश की शुरुआत जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की खबरें और तस्वीरें बेहद पीड़ादायक हैं। उनके अनुसार, यदि युवा अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरते हैं तो सबसे पहले उनकी बात सुनने और संवाद स्थापित करने की कोशिश की जानी चाहिए।

    उन्होंने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि घर का कोई बच्चा नाराज हो जाए या अपनी शिकायत रखे तो उसे डांटने या कठोरता दिखाने के बजाय समझाया और मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र भी इसी देश के बच्चे हैं और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में उनके साथ भी वही व्यवहार होना चाहिए, जो किसी परिवार के सदस्य के साथ किया जाता है।

    रजा मुराद ने कहा कि किसी भी घायल व्यक्ति के घाव पर मरहम लगाया जाता है, नमक नहीं छिड़का जाता। उनके मुताबिक यदि छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो जरूरत उन्हें और आहत करने की नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं को समझने और भरोसा दिलाने की है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

    अपने संदेश में उन्होंने यह भी कहा कि आज जिन युवाओं को हम प्रदर्शनकारी के रूप में देख रहे हैं, वही कल देश के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदार भूमिकाएं निभाएंगे और देश की बागडोर संभालेंगे। इसलिए उनके साथ संवाद, संवेदनशीलता और सम्मान का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से आग्रह किया कि वे हालात को टकराव के बजाय बातचीत और विश्वास के जरिए संभालने का प्रयास करें।

    रजा मुराद ने अपने संदेश के अंत में कहा कि देश केवल सीमाओं से बना भूभाग नहीं, बल्कि एक बड़ा परिवार है और छात्र उसी परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने अपील की कि युवाओं को अकेला या उपेक्षित महसूस कराने के बजाय उनके साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत किया जाए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

    इससे पहले अभिनेता रघुवीर यादव भी छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अब रजा मुराद के बयान के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना हुआ है।

  • फोर्स लेबर आयात प्रतिबंध का मिला फायदा, अमेरिका ने भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा, कई देशों पर अधिक शुल्क

    फोर्स लेबर आयात प्रतिबंध का मिला फायदा, अमेरिका ने भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा, कई देशों पर अधिक शुल्क

    नई दिल्ली । अमेरिका ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात को लेकर अपनी नई व्यापारिक कार्रवाई के तहत भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि यह दर उन कई देशों की तुलना में कम है, जिन पर 12.5 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि भारत ने जांच प्रक्रिया के दौरान फोर्स लेबर से निर्मित उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए, जिसके कारण उसे अपेक्षाकृत कम टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया।

    यह निर्णय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा सेक्शन 301 के तहत की गई व्यापक जांच के बाद लिया गया है। जांच में 60 प्रमुख व्यापारिक अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अमेरिकी प्रशासन का आरोप था कि इन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने या उसके पालन को सुनिश्चित करने में पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसी आधार पर विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग टैरिफ दरें तय की गई हैं।

    यूएसटीआर के अनुसार, भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिन्हें 10 प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में रखा गया है। इस समूह में बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश भी शामिल हैं। वहीं चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू किया जाएगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान के लिए अलग व्यवस्था अपनाई गई है।

    अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जून में प्रस्तावित कार्रवाई सार्वजनिक किए जाने के बाद भारत ने फोर्स लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू करने की दिशा में कदम उठाए। इसी पहल को ध्यान में रखते हुए भारत को अधिक अनुकूल श्रेणी में रखा गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जबरन श्रम को समाप्त करने और व्यापारिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    इस जांच प्रक्रिया के दौरान दो चरणों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया गया और दो हजार से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियां प्राप्त हुईं। इसके आधार पर यूएसटीआर ने निष्कर्ष निकाला कि समीक्षा के दायरे में शामिल सभी अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों में सुधार की आवश्यकता है। इसी कारण 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

    हालांकि अमेरिका ने कुछ आवश्यक उत्पादों को इस कार्रवाई से बाहर भी रखा है। इनमें दवाएं, सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, चुनिंदा कच्चा माल और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा जाना द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, हालांकि आगे इसका प्रभाव दोनों देशों के व्यापार और निर्यात पर नजर रखने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी

    भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी


    भोपाल । राजधानी भोपाल का रानी कमलापति जिनालय परिसर इन दिनों भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम में राष्ट्रसंत आचार्य समय सागर महाराज के सान्निध्य में प्रस्तावित 20 मुनिराजों के मंगल चातुर्मास की तैयारियां पूरे श्रद्धाभाव के साथ चल रही हैं। परिसर में गूंजते श्रद्धालुओं के “हे स्वामी नमोस्तु… नमोस्तु… नमोस्तु…” के स्वर और साधु-संतों की तपस्या से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया है।

    कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना और परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज की आराधना के साथ हुई। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य आत्मकल्याण है, न कि प्रदर्शन। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दर्शन में प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है।” आचार्य श्री ने लोगों से बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मचिंतन, संयम और सच्ची आस्था के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

    प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। सुबह गुरु वंदना के साथ दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद पूजा-अर्चना, धार्मिक प्रवचन और साधना का क्रम चलता है। दोपहर में प्रतिक्रमण, तत्व चर्चा और आचार्य भक्ति का आयोजन किया जाता है, जबकि शाम को मंगल आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

    आचार्य श्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का सौभाग्य इस बार पंचायत कमेटी ट्रस्ट के उपमंत्री ऋषभ जैन, मनीष जैन, निमिषा जैन एवं प्रगति परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा राकेश जैन, सुनीता जैन, सुधा जैन, सविता जैन और पी.सी. जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ आहार चर्या में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।

    आयोजकों के अनुसार आचार्य समय सागर महाराज के मंगल चातुर्मास की विधिवत कलश स्थापना 2 अगस्त को होगी। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के भोपाल पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर तीर्थ परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम को भविष्य में जैन समाज के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चातुर्मास के इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर दिया है, बल्कि संयम, सेवा और आत्मशुद्धि के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

  • राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पेपर लीक पर बहस में शामिल नहीं होगा विपक्ष

    नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में होने वाली किसी भी चर्चा में भाग नहीं लेगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्ष की मांग है कि पहले जिम्मेदारी तय की जाए और उसके बाद ही सदन में बहस आगे बढ़े।

    संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि जब उनका नाम लेकर चर्चा की गई और वे उसका जवाब देने के लिए खड़े हुए, तब उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला। उनके अनुसार संसदीय परंपरा के तहत जिस सदस्य का नाम लिया जाता है, उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया।

    इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने राहुल गांधी से भी आग्रह किया था कि वे अपने दल के सांसदों को सदन में बहस में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। हालांकि इसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और कार्यवाही निर्धारित समय से पहले स्थगित कर दी गई।

    राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार तीन प्रमुख मांगों पर कायम है। इनमें शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना, छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई शामिल है। उनका कहना है कि केवल चर्चा से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

    पेपर लीक के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ समय से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विभिन्न विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा जता चुकी है। इसी बीच केंद्र सरकार पेपर लीक से जुड़े कानून को और सख्त बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक और विधायी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर सहमति बन पाती है या नहीं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो पेपर लीक, परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा संभव हो सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से सहयोग की अपील कर रही है।