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  • पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजधानी स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन और प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। आयोजन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 की इस वर्ष की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इको सिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला से जुड़े भारतीय और वैश्विक उद्योगों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके अलावा नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और छात्र भी आयोजन में शामिल होंगे।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग, निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। आयोजन के दौरान विभिन्न विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिस्प्ले उद्योग की प्रगति से जुड़े सत्र, सहयोग और संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए छह कंट्री राउंडटेबल तथा महिला नेतृत्व पर केंद्रित एक मंच भी शामिल है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला को एक साथ प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है। इसमें सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक की पूरी प्रक्रिया को प्रस्तुत किया जाएगा।

    आयोजन में ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ नाम से एक नया मूल्य श्रृंखला अनुभव भी शामिल होगा। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कच्चे स्तर से तैयार सिस्टम तक की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

    आयोजकों के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी होगी और करीब 50,000 आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधियों के साथ 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे।

    प्रदर्शनी में कई देशों के लिए अलग पवेलियन भी बनाए जाएंगे। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन की भागीदारी वाले छह कंट्री पवेलियन इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा 12 स्टेट बूथ भी लगाए जाएंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में स्टार्टअप पवेलियन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित किया जाएगा। इसके साथ स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे सम्मेलन में उद्योग, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    17 सितंबर से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े वैश्विक तथा भारतीय हितधारक एक साथ जुटेंगे। सम्मेलन के जरिए सहयोग, निवेश और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी तथा सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों को प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा।

  • कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    कैबिनेट ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दी

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।

    Keywords: EPFO, Pension, Insurance, Employees, Security

    नई दिल्ली ।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ाने का उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है। नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकेगा। इससे उन्हें भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब करीब 12 वर्ष बाद इसे 25,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस अवधि में देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोजगार की स्थिति में बदलाव आया है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा ईपीएफओ सीमा के करीब पहुंची है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन स्तर के अनुरूप करने की जरूरत महसूस की गई। इसी आधार पर अनिवार्य कवरेज की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ ढांचे के अंतर्गत नहीं आता था। इससे ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से बाहर रह जाता था। नई व्यवस्था में 15,000 से 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद है।

    वेतन सीमा बढ़ने के बाद कर्मचारियों को तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से लाभ मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत नियमित बचत की व्यवस्था होगी। कर्मचारी पेंशन योजना के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा मिलेगी। वहीं कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके साथ पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान की व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं मिलने से कर्मचारियों के लिए भविष्य की वित्तीय सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए भी व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।

    इस फैसले से सरकारी व्यय भी बढ़ेगा। अनुमान के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय करीब 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है। अगले पांच वर्षों में इस निर्णय पर करीब 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ चर्चा की गई थी और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।

    वर्तमान में ईपीएफओ के तहत करीब 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है। वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

    सरकार के अनुसार, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का भी विस्तार जरूरी है। ईपीएफओ की वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाने का निर्णय इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

  • अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    अमृत ग्रुप की कंपनियों और प्रमोटरों से जुड़े ठिकानों पर ईडी की रेड, निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और फंड ट्रेल की जांच

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके प्रमोटरों से जुड़े कोलकाता और मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित करीब 17 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय बलों के जवान भी टीमों के साथ मौजूद रहे। कोलकाता में छह अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली गई, जबकि इंदौर में 11 ठिकानों पर कार्रवाई जारी रही।

    यह जांच निवेश से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामले में की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, अमृत ग्रुप की कंपनियों और उनके निदेशकों ने अलग-अलग डिपॉजिट स्कीम के नाम पर आम लोगों से रकम जमा कराई। निवेशकों को आकर्षक और अधिक रिटर्न देने का भरोसा दिलाए जाने का आरोप है। एजेंसी के मुताबिक, बाद में कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया गया रिटर्न नहीं दिया और निवेशकों की रकम भी वापस नहीं की।

    मामले में शिकायतें सामने आने के बाद जांच आगे बढ़ी। ईडी को संदेह है कि निवेशकों से कथित तौर पर जुटाए गए चिटफंड के पैसों का इस्तेमाल रियल एस्टेट और निर्माण कारोबार में किया गया तथा इसी माध्यम से रकम को कथित तौर पर वैध दिखाने की कोशिश की गई। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी इसी वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    कोलकाता में नारकेलडांगा, नेताजी नगर और रवींद्र सरोबर थाना क्षेत्रों में छह स्थानों पर ईडी की टीमें पहुंचीं। वहीं, इंदौर में भी अमृत ग्रुप से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली गई। दोनों शहरों में एक साथ हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना है।

    इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में ईडी की कोलकाता टीम ने जमीन हड़पने और दस्तावेजों तथा जमीन के रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में अमित गांगुली नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी मंगलवार रात की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, अमित गांगुली पर अलग-अलग लोगों और संस्थाओं की संपत्तियों पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करने के आरोप हैं।

    ईडी के मुताबिक, अमित गांगुली के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से 23 एफआईआर दर्ज हैं। एजेंसी इन मामलों और संपत्तियों से जुड़े कथित लेनदेन की भी जांच कर रही है। हालांकि, इन आरोपों और मामलों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

    अमृत ग्रुप से जुड़ी कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई का मुख्य आधार निवेशकों से रकम जुटाने, कथित तौर पर रिटर्न का भुगतान नहीं करने और पैसों के संभावित दूसरे कारोबारों में इस्तेमाल से जुड़ी जांच है। ईडी की तलाशी के दौरान संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

    फिलहाल कंपनी या उसके प्रमोटरों की ओर से ईडी की कार्रवाई को लेकर कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कोलकाता में छह और इंदौर में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई। खानूगांव कैंपस में आयोजित बैठक में UCC के विरोध के साथ इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और बोर्ड के रुक्न-ए-आमला एवं कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने मुस्लिम समाज की ओर से अपना पक्ष रखा।

    शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि मुस्लिम समाज UCC को स्वीकार नहीं करता और इस मुद्दे पर पहले भी अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है। ऐसे में UCC की जरूरत और उसके संभावित असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और जिम्मेदार लोगों से इस विषय पर गंभीरता से सोचने की बात कही।

    शहर काजी ने अपने पक्ष को रखते हुए आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दिए गए एक भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में गोलवलकर ने कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड को जरूरी नहीं बताया था। शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम समाज और इस विषय के जानकारों की बात सुनी जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है। उनका कहना था कि इस विषय को केवल सामान्य चर्चा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े पक्षों को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।

    बैठक में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा हुई। शहर काजी ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को पहले से अधिकार और सम्मान दिया है। उन्होंने महिलाओं के मां, बेटी और पत्नी के रूप में अधिकारों के साथ संपत्ति में हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में मुस्लिम समाज किसी से पीछे नहीं है।

    UCC के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम का भी मुद्दा बैठक में उठा। मध्य प्रदेश से लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई। शहर काजी ने मुस्लिम समाज के साथ सेक्युलर नागरिकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।

    आरिफ मसूद ने कहा कि UCC के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए बोर्ड की लीगल टीम तैयार है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग जिलों में भी वकील अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। बोर्ड की ओर से याचिका का मसौदा तैयार होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने के बजाय कानूनी लड़ाई के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की।

    इस तरह भोपाल की बैठक में UCC को लेकर विरोध के साथ आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया, दोनों स्तरों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बोर्ड की ओर से 17 सितंबर के दिल्ली कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने और कानूनी कार्रवाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    NEET UG-2026 में सीट छोड़ने पर 2 लाख की एग्जिट पेनल्टी हटाने की मांग, जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

    मध्य प्रदेश: में NEET UG-2026 की एमबीबीएस काउंसलिंग में आवंटित सीट छोड़ने पर लगाई गई 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पटवारी ने सरकार से इस पेनल्टी को वापस लेने और विद्यार्थियों से पहले ही वसूली जा चुकी अतिरिक्त राशि लौटाने की मांग की है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि 3 सितंबर 2026 के राउंड-2 नोटिस में सीट छोड़ने पर 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी का प्रावधान किया गया। उनके अनुसार यह व्यवस्था पहले जारी की गई रूल बुक के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि रूल बुक में राउंड-2 तक आवंटित सीट छोड़ने की स्थिति में केवल प्रवेश शुल्क देय होने की जानकारी दी गई थी। विद्यार्थियों ने इसी नियम पुस्तिका के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।

    पटवारी ने कहा कि उसी समय ऑल इंडिया एमसीसी सहित अन्य राज्यों की मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रियाएं भी चल रही थीं। एमसीसी के राउंड-2 सीट आवंटन का कार्यक्रम 11 सितंबर को होना था, जबकि मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने फ्री एग्जिट की अंतिम तारीख 3 और 4 सितंबर निर्धारित कर दी थी।

    उनके अनुसार इस समय-सीमा के कारण विद्यार्थियों को एमसीसी के राउंड-2 परिणाम और सीट अपग्रेड होने की संभावनाओं की जानकारी मिले बिना ही मध्य प्रदेश में मिली सीट को छोड़ने या उसे बनाए रखने का अंतिम निर्णय लेना पड़ा। पटवारी ने इसे विद्यार्थियों के लिए परेशानी वाली स्थिति बताते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों की स्पष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।

    पटवारी ने यह भी कहा कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी अन्य काउंसलिंग व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है। उनके अनुसार एमसीसी की व्यवस्था में अधिकतम 10 हजार रुपये तक का नुकसान होता है। उन्होंने मांग की कि काउंसलिंग के पहले राउंड से ही सभी नियम स्पष्ट रूप से विद्यार्थियों के सामने रखे जाने चाहिए।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके बीच में नियमों में बदलाव विद्यार्थियों के लिए परेशानी पैदा करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि NEET UG की पुनः परीक्षा और काउंसलिंग में हुई देरी से विद्यार्थी पहले ही प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सीट छोड़ने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला प्रावधान उनके लिए आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।

    पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि 2 लाख रुपये की एग्जिट पेनल्टी को वापस लेने के साथ इसे स्थगित किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त 2026 की रूल बुक में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों की देयता केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित रखी जानी चाहिए।

    उन्होंने पहले से वसूली गई अतिरिक्त राशि विद्यार्थियों को वापस करने की मांग भी की। इसके अलावा राउंड-2 की प्रक्रिया पूरी होने से पहले आवंटित सीट छोड़ने के लिए विद्यार्थियों को उचित समय-सीमा उपलब्ध कराने की बात कही।

    पटवारी ने भविष्य में काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले नियमों में बदलाव नहीं करने की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने रखी है। उनका कहना है कि काउंसलिंग से जुड़े सभी नियम प्रक्रिया शुरू होने से पहले स्पष्ट होने चाहिए, ताकि विद्यार्थी उपलब्ध विकल्पों और अलग-अलग काउंसलिंग के परिणामों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले सकें।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से की मुलाकात, सेवा संकल्प अभियान और नि:शुल्क रजिस्ट्री की दी जानकारी

    मध्य प्रदेश। के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी राज्यपाल को दी।

    मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाले विशेष अभियान के बारे में भी बताया। इसके तहत प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र के 50 लाख से अधिक लोगों के पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की योजना है। इस रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकारी स्तर पर वहन किया जाएगा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ ही सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए कार्यों को स्मरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर दीपोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितंबर को ग्रामीण क्षेत्रों के 50 लाख से अधिक पट्टों की रजिस्ट्री निशुल्क कराई जाएगी। इसके लिए होने वाला पूरा सरकारी खर्च शासन की ओर से वहन किया जाएगा। इस अभियान को प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प से जुड़ी विकास यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जा रहे सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा बताया गया है।

    ‘सेवा-संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पूरे मध्य प्रदेश में संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की अविरल सेवा-संकल्प की यात्रा को प्रदेश के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस महाअभियान का हिस्सा बनें और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की यात्रा में सहभागी बनें।

    राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने अभियान से संबंधित कार्यक्रमों और नि:शुल्क रजिस्ट्री की योजना की जानकारी साझा की। ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ के तहत होने वाली रजिस्ट्री ग्रामीण क्षेत्र के पट्टाधारकों से जुड़ी है और इसमें सरकारी स्तर पर खर्च वहन किए जाने की बात कही गई है।

    सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर होगी और इसका संचालन एक महीने तक किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश में अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे प्रधानमंत्री की जनसेवा से जुड़ी 25 वर्षों की यात्रा को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बताया है।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल को मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी में अभियान के कार्यक्रमों के साथ-साथ 50 लाख से अधिक ग्रामीण पट्टों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से संबंधित योजना भी शामिल रही। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अभियान में सहभागिता की अपील करते हुए इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी यात्रा में भागीदारी का अवसर बताया।

  • स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    स्वामित्व योजना के अतिरिक्त काम से नाराज पटवारियों का प्रदर्शन, 55 जिलों में कलमबंद हड़ताल की दी चेतावनी

    मध्य प्रदेश । के छतरपुर जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपे जाने के विरोध में पटवारियों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला शाखा के आह्वान पर दर्जनों पटवारी रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। पटवारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की बात कही।

    पटवारी संघ की मुख्य मांग है कि आबादी भूमि के पंजीयन और निष्पादन की प्रक्रिया, ई-केवाईसी तथा व्यक्तिगत दायित्व से जुड़े अन्य कार्यों से पटवारी संवर्ग को अलग रखा जाए। संघ का कहना है कि इन कार्यों में जमीन की सीमा, क्षेत्रफल, मालिकाना हक या दस्तावेजों से जुड़ी किसी भी त्रुटि की स्थिति में पटवारियों पर व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी आने की आशंका है। इसी वजह से संघ इन अतिरिक्त दायित्वों को लेकर विरोध कर रहा है।

    मध्य प्रदेश पटवारी संघ संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष हारून अहमद ने कहा कि पंजीयन से संबंधित कार्यों के लिए शासन के पास अलग विभाग मौजूद है। इसके बावजूद राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र का भू-स्वरूप कृषि भूमि से अलग है और पंचायत राज व्यवस्था के तहत सर्वेक्षण से जुड़े कार्य पंचायत विभाग से संबंधित हैं।

    पटवारियों ने किसान हितैषी फार्मर आईडी और जियो-टैग गिरदावरी में सामने आ रही तकनीकी खामियों का भी मुद्दा उठाया। संघ के अनुसार, तकनीकी समस्याओं के कारण मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। पटवारी संघ का कहना है कि पहले से ही कई जिम्मेदारियां निभा रहे कर्मचारियों पर लगातार नई योजनाओं का काम बढ़ाया जा रहा है।

    संघ ने ग्रेड-पे, वेतन विसंगति और कैडर रिव्यू जैसी लंबित मांगों का भी उल्लेख किया। पटवारियों के मुताबिक इन मुद्दों का अभी निराकरण नहीं हुआ है और इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यभार लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से संघ ने शासन से आबादी पंजीयन एवं निष्पादन योजना से पटवारियों को तत्काल अलग करने की मांग की है।

    कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान पटवारी इस बात पर भी अड़े रहे कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन केवल जिला कलेक्टर को ही सौंपा जाएगा। डिप्टी कलेक्टर और एडीएम विनय द्विवेदी ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन पटवारियों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों अधिकारी बिना आवेदन लिए वापस लौट गए और पटवारी धरने पर बैठे रहे।

    पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर दबाव जारी रहा, तो प्रदेश के सभी 55 जिलों में पटवारी काम बंद कर कलमबंद हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे। संघ ने ऐसी स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।

  • धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, दो महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

    धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत, दो महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

    मध्य प्रदेश: बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है। जमानत मंजूर होने के बाद करीब दो महीने से जेल में बंद शालिग्राम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। यह फैसला जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने सुनाया।

    मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रघुराजनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि मोतीलाल कुशवाहा को स्कूल के पास रोककर उनके साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने गाली-गलौज की और साथ मौजूद सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाया।

    मामले में मोतीलाल कुशवाहा के पेट में गोली लगने का भी आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। शालिग्राम की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया था। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के कारण उन्हें इस मामले में फंसाया गया है।

    बचाव पक्ष की ओर से अदालत में घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1), 296(B), 351(3) और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।

    शालिग्राम उर्फ छोटे सरकार को 15 जुलाई 2026 से जेल में रखा गया है। इससे पहले जिला अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन वहां से जमानत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली।

    जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ में जमानत याचिका पर 10 सितंबर को सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सामने रखी गईं, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त रिहाई का आदेश दिया है।

    इस मामले में शालिग्राम पर मुख्य आरोप सह-आरोपियों को हमला करने के लिए उकसाने और घटना से जुड़े होने को लेकर लगाए गए हैं। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश का हवाला दिया है। अदालत के समक्ष घटना से संबंधित मोबाइल वीडियो होने की बात भी रखी गई थी।

    जिला अदालत से जमानत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब शालिग्राम को राहत मिली है। अदालत के आदेश के अनुसार निजी मुचलका और निर्धारित शर्तों के आधार पर उनकी जेल से रिहाई हो सकेगी। वह 15 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थे और जमानत मिलने के बाद करीब दो महीने बाद बाहर आएंगे।

  • मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत रामेश्वर शर्मा की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था।

    इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 15 सितंबर को भोपाल में आयोजित सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो काजी कैंप में आकर मिसाइल गिराकर दिखाएं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह इस तरह के बयानों से डरने वाले नहीं हैं।

    ओवैसी की टिप्पणी के बाद रामेश्वर शर्मा ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर उनका पूरा बयान सुनना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि उनके बयान को लेकर कोई आपत्ति है तो अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

    रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय मिसाइलों और आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपनी ताकत दिखाई है। शर्मा का कहना था कि जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी गतिविधियां होंगी, वहां भारत की मिसाइल तैयार है।

    शर्मा ने यह भी कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं। इस दौरान उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।

    यह राजनीतिक विवाद केवल मिसाइल वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी रामेश्वर शर्मा और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मतभेद सामने आए। रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट चाहते हैं तो हिंदू कानून को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शर्मा ने कहा कि UCC लागू होने से शादी और परिवार से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है।

    वहीं, असदुद्दीन ओवैसी UCC का लगातार विरोध करते रहे हैं। भोपाल में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद मिसाइल टिप्पणी से आगे बढ़कर समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे तक पहुंच गए।

    करोंद चौराहे और काजी कैंप के संदर्भ से शुरू हुआ यह विवाद अब आतंकवाद और UCC से जुड़े बयानों तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं की ओर से लगातार सामने आए बयानों और जवाबी टिप्पणियों के कारण भोपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। फिलहाल पूरा विवाद दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उनके जवाबी बयानों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर में बिना नंबर की कार से अंग्रेजी शराब की तस्करी का खुलासा, पुलिस ने 251 बोतलों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा

    जबलपुर: के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बिना नंबर की कार से बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है। मंगलवार रात मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने ग्राम बसा क्षेत्र में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से दो युवकों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 251 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई, जबकि शराब और वाहन की कीमत लाखों रुपये बताई गई है।

    माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार के अनुसार पुलिस को मंगलवार रात सूचना मिली थी कि ग्राम बसा इलाके में प्रियांश अग्निहोत्री के घर के सामने सड़क पर खड़ी बिना नंबर की कार में अवैध रूप से बड़ी मात्रा में शराब रखी गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर घेराबंदी की और कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस टीम को अपने पास आता देखकर दो संदिग्ध युवक कार के पास से भागने की कोशिश में थे। पुलिसकर्मियों ने दोनों को घेर लिया और मौके पर ही पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान प्रियांश अग्निहोत्री निवासी ग्राम बसा और आशुतोष उर्फ चुंगा यादव निवासी ग्राम मड़ई, रांझी के रूप में हुई।

    इसके बाद पुलिस ने मौके पर मौजूद बिना नंबर की सफेद रंग की सुजुकी फ्रोन्स कार की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कार से 19 कार्टून बरामद किए गए। इन कार्टूनों को खोलने पर कुल 251 बोतल अंग्रेजी शराब मिली। पुलिस ने शराब को जब्त कर वाहन को भी अपने कब्जे में ले लिया।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस को प्रियांश के घर के पोर्च में रखा एक बड़ा काला थैला भी मिला। इसमें भी शराब भरी हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी इस शराब को कार में लोड करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि करीब 10 दिन पहले बिक्री के लिए ग्वारीघाट निवासी अर्जुन केवट से 25 पेटी अंग्रेजी शराब मंगाई गई थी। उनके अनुसार आशुतोष उर्फ चुंगा यादव शराब को अर्जुन केवट की बिना नंबर वाली सफेद कार से प्रियांश के घर लेकर आया था।

    आरोपियों ने पुलिस को यह भी बताया कि पुलिस की गश्त और लगातार निगरानी के कारण वे शराब को किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान माढ़ोताल पुलिस को इसकी सूचना मिल गई और टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर दी।

    पुलिस ने बरामद शराब और वाहन को जब्त करने के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मामले की आगे जांच कर रही है। पूछताछ के आधार पर अवैध शराब की आपूर्ति और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी तलाश की जा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 25 पेटी शराब कहां से लाई गई थी और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस जांच के आधार पर अवैध शराब के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।