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  • एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश

    एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें करीब 40 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है और जानलेवा दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत नहीं मिली, क्योंकि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता और घातक प्रभाव बढ़ा है।

    देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन औसतन 40 लोगों की मौत दर्ज की गई है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

    बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 4E रणनीति पर काम कर रही हैं। इसका पहला हिस्सा एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसके तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने और यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें सुधारा जा रहा है। नए और पुराने राजमार्गों का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग सिस्टम, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। वाहन सुरक्षा के लिए भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट रेटिंग भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना जैसी आदतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। जब तक यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अपेक्षित कमी लाना चुनौती बना रहेगा।

  • शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    नई दिल्ली । कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार की शिक्षा और रोजगार संबंधी नीतियों पर तीखा हमला बोला है। एक विशेष लेख के माध्यम से उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से घिरी है और छात्रों के बीच बढ़ता असंतोष सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे विवाद, शिक्षा संस्थानों की स्थिति और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने व्यापक चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

    सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार छात्र सरकार से पारदर्शिता, जवाबदेही और ठोस सुधार चाहते हैं, लेकिन उनकी मांगों पर संवाद स्थापित करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद की भावना कमजोर हुई है।

    अपने लेख में उन्होंने शिक्षा बजट को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए बजट आवंटन में कमी आने से सरकारी संस्थानों की स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की अपेक्षा निजी संस्थानों को बढ़ावा मिलने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम परिवारों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में संतुलित निवेश और सरकारी संस्थानों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

    सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का विश्वास प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए प्रभावी सुधार लागू किए जाने चाहिए।

    रोजगार के मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के बीच बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार शिक्षा पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए योग्यता आधारित और पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है। उनका मानना है कि शिक्षा और रोजगार की नीतियों को एक-दूसरे से जोड़कर दीर्घकालिक समाधान तैयार किए जाने चाहिए।

    लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का दायित्व है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने पूर्व के छात्र आंदोलनों और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल पहचान है। उनके इन बयानों के बाद शिक्षा, रोजगार और छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

  • एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    एनएसए हिरासत से 26 दिन के अनशन तक, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बदली सियासी तस्वीर, अस्पताल पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों ने तुड़वाया उपवास

    नई दिल्ली । करीब 26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त कर दिया। देर रात अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि यह फैसला लंबी बातचीत, विभिन्न पक्षों से मिले आग्रह और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा से बचने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े आगे के निर्णय और बातचीत की शर्तों की जानकारी जल्द साझा की जाएगी तथा समर्थकों से पूरी तरह शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

    सोनम वांगचुक पिछले कई सप्ताह से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से भी उनका अनशन जारी रहा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से छात्र, सामाजिक संगठन और कई सार्वजनिक हस्तियां उनके समर्थन में सामने आईं। आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने इसे राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बना दिया और सरकार तथा आंदोलनकारी पक्ष के बीच संवाद की संभावनाएं भी तेज हुईं।

    वांगचुक की हालिया भूमिका इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि कुछ महीने पहले तक वे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में थे। लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उन्हें एहतियाती कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई महीनों तक जेल में रखा गया। बाद में सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया और मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने फिर से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होकर शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।

    सोनम वांगचुक का नाम देश में शिक्षा सुधार और वैकल्पिक शिक्षण मॉडल के लिए लंबे समय से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख में विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से एसईसीएमओएल संस्थान की स्थापना की। उनके प्रयासों से स्थानीय शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव आए और स्कूलों के परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली तथा उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

    शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए भी वांगचुक लगातार काम करते रहे हैं। पानी की कमी से निपटने के लिए विकसित किए गए उनके ‘आइस स्तूप’ मॉडल को वैश्विक पहचान मिली। इसके अलावा उन्होंने सौर ऊर्जा, टिकाऊ विकास और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े कई नवाचारों पर भी काम किया है। यही वजह है कि वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि नवाचार और सामुदायिक विकास के प्रतीक के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

    वांगचुक स्वयं को गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित बताते हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए अहिंसक तरीकों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे उपवास, शांतिपूर्ण मार्च और संवाद आधारित आंदोलन उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं। हालिया अनशन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों और मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आंदोलन का रास्ता शांतिपूर्ण ही रहेगा। उनके इस कदम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध आज भी सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर

    देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर


    नई दिल्ली । देशव्यापी छात्र प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को भी किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही सामग्री पर नजर बनाए हुए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट हैं कि बड़े प्रदर्शनों के दौरान कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री की निगरानी कर रही हैं। इसमें एआई आधारित प्रचार सामग्री भी शामिल है, जिसकी प्रामाणिकता और संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सामग्री को लेकर कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

    खुफिया एजेंसियों ने राज्यों को भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख चौराहों और बड़े शहरों के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की भी तैयारी रखी गई है।

    केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी राज्य से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग आती है तो आवश्यक कार्रवाई तुरंत की जा सके। इसका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

    हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी भाग लिया था। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत रखने की तैयारी की गई है।

    प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।

    Tags: Student Protest, Home Ministry, Security Alert, Intelligence Agencies, India News

  • सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े

    सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार अब लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें करीब 40 लोगों की जान चली जाती है। यही वजह है कि सड़क हादसों के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है और जानलेवा दुर्घटनाओं को लेकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क दुर्घटनाओं और मौतों दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि वर्ष 2025 में कुल सड़क हादसों की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत की बात नहीं है, क्योंकि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। इसका सीधा मतलब है कि हादसों की संख्या भले कम हुई हो, लेकिन वे पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहे हैं।

    देशव्यापी आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तमिलनाडु पहले स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे अधिक लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में प्रतिदिन होने वाले हादसों की संख्या उत्तर प्रदेश से अधिक है, लेकिन मौतों का औसत 40 प्रतिदिन दर्ज किया गया है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती को उजागर करती है।

    बढ़ते हादसों और मौतों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 4E रणनीति पर काम तेज किया है। इसके तहत पहला कदम एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसमें ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना, सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित हो।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर सुधार किया जा रहा है। नए और पुराने हाईवे का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। वहीं वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। साथ ही भारत एनकैप क्रैश टेस्ट रेटिंग व्यवस्था भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा और सबसे अहम हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर चोट पर मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। तभी मध्य प्रदेश समेत देशभर में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

  • भोपाल में कानून के रखवालों की शर्मनाक करतूत: मासूम छात्रा को बंधक बनाकर SAF जवान ने किया रेप, साथी आरक्षक बाहर देता रहा पहरा

    भोपाल में कानून के रखवालों की शर्मनाक करतूत: मासूम छात्रा को बंधक बनाकर SAF जवान ने किया रेप, साथी आरक्षक बाहर देता रहा पहरा


    भोपाल । राजधानी भोपाल में कानून की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस की साख को बट्टा लगाने वाला एक बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहाँ विशेष सशस्त्र बल (SAF) में तैनात दो जवानों ने हैवानियत और आपराधिक साजिश की सारी हदें पार करते हुए एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। वारदात को अंजाम देने के लिए मुख्य आरोपी आरक्षक ने अपनी ही बेटी के जन्मदिन की पार्टी का झांसा देकर छात्रा का भरोसा जीता और फिर उसे बंधक बनाकर दुष्कर्म किया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस घिनौने कृत्य में उसका साथी पुलिसकर्मी भी बराबर का साझेदार रहा, जो वारदात के दौरान अपने 3-4 साल के मासूम बेटे को साथ लेकर घर के बाहर पहरा देता रहा ताकि किसी को शक न हो। पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    मिली जानकारी के मुताबिक मुख्य आरोपी संतोष सेन धार में आरक्षक के पद पर पदस्थ है और पीड़िता का पड़ोसी भी है। बीते 22 जुलाई की शाम आरोपी संतोष ने एक परिचित महिला के मोबाइल से किशोरी को फोन किया और अपनी बेटी के जन्मदिन का हवाला देते हुए उसे लाल परेड मैदान के पास मिलने के लिए बुलाया। मासूम छात्रा पड़ोसी पर भरोसा करके शाम करीब 6:30 बजे तय जगह पर पहुँच गई। वहाँ संतोष सेन अपने साथी आरक्षक जितेंद्र राजपूत के साथ कार में मौजूद था, जो ग्वालियर में पदस्थ है। जितेंद्र की कार में उसका छोटा बेटा भी बैठा हुआ था। आरोपी संतोष ने बेहद चालाकी से छात्रा का विश्वास हासिल किया और उसे झांसा देकर एमपी नगर स्थित एक मकान में ले गया।

    मकान में पहुँचते ही मुख्य आरोपी संतोष ने कमरा अंदर से बंद कर लिया और छात्रा को बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान साथी आरक्षक जितेंद्र राजपूत अपने मासूम बच्चे के साथ बाहर खड़ा होकर पहरा देता रहा ताकि कोई अचानक वहाँ न आ पहुँचे। हैवानियत का शिकार होने के बाद जब पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुँची, तो उसने अपने परिजनों को इस खौफनाक घटना की पूरी जानकारी दी। परिजनों के होश उड़ गए और वे तुरंत पीड़िता को लेकर कमला नगर थाने पहुँचे।

    घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए कमला नगर थाने में तुरंत जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद मामले को जहांगीराबाद थाने स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपी जवानों को हिरासत में लिया और गहन पूछताछ के बाद उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कड़ा मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पीड़िता के बयानों के आधार पर निष्पक्ष व कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

  • डेंगू मच्छर से बचाव के लिए बरसात में रखें विशेष सावधानी जानिए कैसे करें खुद और परिवार की सुरक्षा

    डेंगू मच्छर से बचाव के लिए बरसात में रखें विशेष सावधानी जानिए कैसे करें खुद और परिवार की सुरक्षा


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इनमें डेंगू सबसे गंभीर बीमारियों में से एक माना जाता है। हर साल मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसका सबसे बड़ा कारण घरों और आसपास जमा होने वाला साफ पानी है जहां एडीज मच्छर आसानी से पनपता है। यही मच्छर डेंगू वायरस फैलाने का काम करता है। ऐसे में थोड़ी सी सतर्कता और सही आदतें अपनाकर इस बीमारी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। यह सुबह और शाम के समय सबसे ज्यादा काटता है। इसलिए केवल रात में ही नहीं बल्कि दिन में भी मच्छरों से बचाव करना जरूरी है। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें और बच्चों को भी फुल स्लीव्स के कपड़े पहनाएं ताकि मच्छरों के काटने का खतरा कम हो सके।

    घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर गमले टायर बाल्टी पानी की टंकी और पुराने बर्तनों में जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें या बदलें। यदि पानी लंबे समय तक जमा रहेगा तो मच्छर तेजी से अंडे देंगे और उनकी संख्या बढ़ जाएगी। घर की छत बालकनी और आंगन की नियमित सफाई भी बेहद जरूरी है।

    मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही मच्छर भगाने वाली क्रीम स्प्रे या इलेक्ट्रिक वेपराइजर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाना भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है जिससे मच्छर घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।

    यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द शरीर और जोड़ों में तेज दर्द कमजोरी या त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दें तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक जांच कराएं। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से डेंगू के गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    डेंगू होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी नारियल पानी नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक दवा लेने से बचें क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही दवा का सेवन करें।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखे तथा पानी जमा न होने दे तो डेंगू के मामलों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। बरसात के मौसम में थोड़ी सी जागरूकता और नियमित सावधानी न केवल आपको बल्कि पूरे समाज को इस खतरनाक बीमारी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित

    देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से बिगड़े हालात… असम में बाढ़ से 47 मौतें, लाखों लोग प्रभावित


    नई दिल्ली ।
    देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश (Monsoon Rain) का कहर लगातार जारी है। सबसे गंभीर स्थिति असम (Assam) में है, जहां बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 47 हो गई है। पिछले 24 घंटों में छह और लोगों की जान गई है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 7.21 लाख से अधिक हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य के 11 जिलों के 37 राजस्व सर्किलों और 883 गांवों में बाढ़ (Flood) का असर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और हालात और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।


    कौन से जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

    एएसडीएमए (ASDMA) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर जिला है, जहां करीब 3.75 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बाद चराइदेव में 1.86 लाख और जोरहाट में 1.15 लाख लोग प्रभावित हैं। गोलाघाट, होजाई, कामरूप, डिब्रूगढ़, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया समेत कुल 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। पिछले दिन तक 10 जिलों में 6.43 लाख लोग प्रभावित थे, लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति और गंभीर हो गई।


    राहत और बचाव कार्य कहां तक पहुंचा?

    राज्य में 103 राहत शिविरों में 24,124 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है, जबकि 255 राहत वितरण केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक ड्रोन के जरिए भोजन, पेयजल और दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण 25,375.44 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। साथ ही कई स्थानों पर सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

    कौन-कौन सी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
    बाढ़ की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि डिब्रूगढ़ के खोवांग में बुर्हीदिहिंग, शिवसागर में दिखो और देसांग, गोलाघाट के नुमालीगढ़ में धनसिरी तथा श्रीभूमि में कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है।

    गुजरात में बारिश ने कैसी तबाही मचाई?
    गुजरात के वलसाड, नवसारी, सूरत और तापी जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। सबसे अधिक प्रभावित वलसाड जिले के उमरगाम तालुका में बुधवार सुबह से गुरुवार सुबह तक महज 16 घंटे में 1,100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राज्य सरकार के अनुसार, अब तक 1,200 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सूरत में 1,500 और नवसारी के 11 गांवों से 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। तापी जिले में बारिश से जुड़ी एक व्यक्ति की मौत हुई है। 300 से अधिक सड़कें अस्थायी रूप से बंद हैं और राज्य परिवहन निगम की 200 से ज्यादा बस सेवाएं प्रभावित हुई हैं।


    सूरत में बारिश से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बंद

    गुजरात के सूरत में भारी बारिश के कारण अंबिका नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी पुल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सुरक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे 4) पर ईएनए (पलसाना) और खरेल (नवसारी) के बीच वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नज़र रखे हुए है। पानी का स्तर कम होते ही यातायात फिर से शुरू कर दिया जाएगा।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से हालात कितने गंभीर हैं?

    जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही बारिश के कारण तवी, चिनाब और झेलम समेत कई नदियां उफान पर हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है। खराब मौसम के कारण अमरनाथ, वैष्णो देवी और शिवखोड़ी यात्राएं लगातार पांचवें दिन भी स्थगित रहीं। कटड़ा में लगभग 15 हजार श्रद्धालु फंसे हुए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय ने 24 और 25 जुलाई को होने वाली परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।


    राजस्थान में मौसम विभाग ने क्या चेतावनी जारी की है?

    मौसम विभाग ने 24 और 25 जुलाई के बीच अजमेर, कोटा, जोधपुर और उदयपुर संभाग में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।


    हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से क्या असर पड़ा?

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू और ऊना में गुरुवार को तेज बारिश हुई। चंबा जिले के साच जोत क्षेत्र में बादल फटने से चुराह उपमंडल के सतरूंडी नाला, रानीकोट और कार्थ नाला में अचानक बाढ़ आ गई। इससे कई मार्गों पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें सड़कों पर आ गईं। प्रदेश में 136 सड़कें बंद हैं, जबकि कई इलाकों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

  • MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!

    MP: स्टेट हाईवे पर बना नया पुल पहली ही बारिश में धंसा…., MPRDC के घटिया निर्माण की खुली पोल!


    रायसेन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन जिले (Raisen district) में मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों के घटिया स्तर का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है. स्टेट हाईवे 19 बरेली-पिपरिया मार्ग (State Highway 19: Bareilly-Pipariya Road) पर स्थित नयागांव के नए पुल की एप्रोच रोड पहली ही मूसलाधार बारिश में धंस गई हैं।

    निर्माण कार्य में भर्राशाही और लापरवाही का आलम यह है कि नए पुल से आवागमन बाधित होने के बाद नीचे बनाया गया डायवर्जन भी नाले के उफान में पूरी तरह डूब चुका है. इसके बावजूद मौके पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही प्रशासन ने रूट डायवर्ट कर वाहनों की आवाजाही को रोका है।


    जवान की मौत के बाद बना था नया पुल

    बता दें कि इसी नयागांव पुल पर 1 दिसंबर 2025 को मरम्मत कार्य के दौरान 50 साल पुराना जर्जर पुल अचानक ढह गया था. उस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार सेना के एक जवान की असमय मौत हो गई थी।

    इस मुद्दे को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद MPRDC ने आनन-फानन में यहां नए पुल का निर्माण कराया था.लेकिन पहली ही बारिश ने पुल कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, तकनीकी मजबूती और दावों की हवा निकाल दी है।

    उफनते नाले के बीच से वाहन निकालने को मजबूर लोग
    नया पुल धंसने और एप्रोच रोड कट जाने के कारण पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद है. वहीं, नीचे बना कच्चा डायवर्जन मार्ग पानी में डूब चुका है. इसके बावजूद यात्री, बसें और बाइक सवार अपनी जान हथेली पर रखकर नाले के तेज बहाव के बीच से वाहन निकालने को मजबूर हैं।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि MPRDC के कराए जा रहे सभी कार्य बेहद निचले स्तर के साबित हो रहे हैं. अगर समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया या आवागमन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया, तो यहां एक बार फिर 1 दिसंबर 2025 जैसी बड़ी त्रासदी दोहराई जा सकती है।

  • फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

    फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत


    नई दिल्ली।
    फ्रांस (France) में 2026 की भीषण गर्मी (Scorching Heat) ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जून के आखिरी दिनों और जुलाई की शुरुआत के बीच देश में 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी (Public Health Agency) के मुताबिक, 17 जून से 2 जुलाई के बीच 21674 लोगों की मौत हुई, जबकि इस समय में आमतौर पर करीब 15910 मौतें होती हैं. यानी इस बार सामान्य से 5764 ज्यादा मौतें हुईं।

    इन आंकड़ों से पता चलता है कि तेज गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतें सीधे गर्मी की वजह से नहीं हुईं. ज्यादा तापमान ने कई लोगों की पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर कर दिया, जिससे मौतों की संख्या बढ़ गई।

    फ्रांस में सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की हीटवेव के असर की गंभीर तस्वीर दिखाई है. शुरुआत में मौतों का अनुमान कम था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों से पता चला कि गर्मी का असर पहले से ज्यादा बड़ा था. इस दौरान अस्पतालों और देखभाल केंद्रों पर भी लोगों का दबाव बढ़ गया।

    किसी भी आपदा या घटना का असर समझने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा देखती हैं. इसमें किसी खास समय में हुई मौतों की तुलना सामान्य समय में होने वाली मौतों से की जाती है. फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच सामान्य से करीब 36 प्रतिशत ज्यादा मौतें दर्ज हुईं. हालांकि, इनमें से हर मौत की वजह सिर्फ गर्मी नहीं थी. लेकिन तेज तापमान ने बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

    अतिरिक्त मौतों में करीब दो-तिहाई लोग 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे. ज्यादा उम्र के लोगों के लिए तेज गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को आसानी से नियंत्रित नहीं कर पाता. इस दौरान करीब आधी मौतें अस्पतालों में हुईं. कई मौतें नर्सिंग होम और लोगों के घरों में भी दर्ज की गईं. पेरिस और आसपास के इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां करीब 2000 अतिरिक्त मौतें हुईं।

    बहुत ज्यादा गर्मी शरीर पर दबाव बढ़ा देती है. इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है और दिल, फेफड़ों और किडनी पर असर पड़ सकता है. जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी होती है, उनके लिए तेज गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है. इसी वजह से हीटवेव में सिर्फ तापमान बढ़ना ही चिंता की बात नहीं होती, बल्कि इसका असर लोगों की सेहत और मौतों के आंकड़ों में भी दिखाई देता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में हीटवेव ज्यादा बार आने लगी हैं और ज्यादा लंबे समय तक रह रही हैं. साल 2003 में यूरोप में आई भीषण गर्मी में 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था.

    फ्रांस की 2026 की हीटवेव एक बार फिर दिखाती है कि बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं है. यह लोगों की सेहत से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है. आने वाले समय में गर्मी से बचाव के लिए बेहतर तैयारी, समय पर अलर्ट और लोगों को जागरूक करना जरूरी होगा।