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  • जब मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच पहले पंच को लेकर अटक गई शूटिंग, निरहुआ ने बीच में आकर सुलझाया मामला

    जब मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच पहले पंच को लेकर अटक गई शूटिंग, निरहुआ ने बीच में आकर सुलझाया मामला


    नई दिल्ली ।
    बिग बॉस 20 के एक एपिसोड में आम्रपाली दुबे ने भोजपुरी सिनेमा के दो चर्चित कलाकारों मनोज तिवारी और रवि किशन से जुड़ा एक पुराना किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों कलाकारों के बीच फाइट सीन को लेकर ऐसी स्थिति बन गई थी कि काफी देर तक शूटिंग शुरू ही नहीं हो पाई। दोनों इस बात पर सहमत नहीं हो रहे थे कि सीन में सबसे पहला पंच कौन मारेगा। आखिरकार अभिनेता और भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बीच में आकर ऐसा रास्ता निकाला, जिससे दोनों कलाकारों का सीन भी हो गया और शूटिंग आगे बढ़ सकी।

    यह किस्सा आम्रपाली ने मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी से बातचीत के दौरान सुनाया। उन्होंने बताया कि फिल्म में मनोज तिवारी ने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था, जबकि रवि किशन की भूमिका एक गुंडे की थी। कहानी के मुताबिक दोनों के बीच फाइट का दृश्य फिल्माया जाना था। लेकिन सीन की शुरुआत में पहला पंच किसकी तरफ से होगा, इसे लेकर दोनों कलाकार अपनी-अपनी बात पर कायम रहे।

    आम्रपाली के मुताबिक मनोज तिवारी का कहना था कि उन्होंने पुलिस का किरदार निभाया है, इसलिए पहला वार पुलिस की तरफ से होना चाहिए। दूसरी ओर रवि किशन भी अपनी भूमिका और संवाद के आधार पर तर्क दे रहे थे। उनका कहना था कि जब उनके किरदार का संवाद ही ऐसा है कि उसके बिना वहां पत्ता तक नहीं हिलता, तो फिर पहला पंच उन्हें कैसे मारा जा सकता है। इस बात को लेकर शूटिंग लंबे समय तक रुकी रही।

    मामला आगे बढ़ता नहीं दिखा तो दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बीच में आने का फैसला किया। आम्रपाली ने बताया कि निरहुआ ने दोनों कलाकारों से कहा कि वह दोनों के बीच आकर उन्हें रोकने की भूमिका निभाएंगे। इसके बाद फाइट सीन में मनोज तिवारी और रवि किशन के बजाय दोनों के पंच निरहुआ को लगेंगे। इस सुझाव के बाद शूटिंग आगे बढ़ी और मौजूद लोगों ने निरहुआ के इस समाधान की सराहना की।

    आम्रपाली ने यह किस्सा उस समय सुनाया, जब बिग बॉस 20 के घर में दिन की शुरुआत खाने को लेकर आम्रपाली दुबे और माही विज के बीच विवाद से हुई थी। दोनों के बीच किचन में खाना बनाने को लेकर बहस हुई। आम्रपाली ने कहा कि जब वह किचन में खाना बना रही हों तो उन्हें किसी तरह की दखलअंदाजी पसंद नहीं है।

    इसके बाद घर में कैप्टेंसी टास्क भी हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को पुरुष और महिला टीमों में बांटा गया। पहले राउंड के दौरान अरिश्फा खान और स्काउट के बीच विवाद हो गया। अरिश्फा ने स्काउट के गेमिंग प्रोफेशन को लेकर सवाल उठाए, जिसके जवाब में स्काउट ने उनके डांस वीडियो का जिक्र किया। इसके बाद युंग भी स्काउट के समर्थन में आ गए और दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई।

    बाद में ईशा रिखी ने स्काउट को चुप रहने के लिए कहा, जिससे वह नाराज हो गए और भावुक होकर रोने लगे। इसके बाद कैमरे के सामने स्काउट ने कहा कि अगर गलती उनकी है तो उन्हें घर से निकाल दिया जाए, लेकिन अगर गलती दूसरे पक्ष की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इस तरह एपिसोड में जहां घर के सदस्यों के बीच विवाद देखने को मिला, वहीं आम्रपाली द्वारा सुनाया गया मनोज तिवारी, रवि किशन और निरहुआ से जुड़ा पुराना किस्सा भी चर्चा में रहा।

  • 254 रन का विशाल स्कोर फिर 135 पर समेटा इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ दर्ज की बड़ी जीत

    254 रन का विशाल स्कोर फिर 135 पर समेटा इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ दर्ज की बड़ी जीत


    नई दिल्ली। इंग्लैंड ने तीन टी20 मैचों की सीरीज के पहले मुकाबले में श्रीलंका को 119 रन से करारी शिकस्त देकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। वेस्ट एंड के यूटिलिटा बाउल में खेले गए मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में चार विकेट पर 254 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में श्रीलंका की पूरी टीम 19 ओवर में 135 रन पर सिमट गई। इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान हैरी ब्रूक रहे जिन्होंने टी20 करियर का दूसरा शतक लगाते हुए नाबाद 114 रन बनाए।

    श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था लेकिन इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही इस फैसले को गलत साबित करना शुरू कर दिया। पूर्व कप्तान जोस बटलर ने पारी की शुरुआत करते हुए तेजतर्रार अंदाज में रन बनाए। बटलर ने 44 गेंदों का सामना करते हुए आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से 80 रन की शानदार पारी खेली। वह शतक से जरूर चूक गए लेकिन उनकी पारी ने इंग्लैंड को बड़े स्कोर की मजबूत नींव दे दी।

    इसके बाद कप्तान हैरी ब्रूक ने मोर्चा संभाला और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर जमकर प्रहार किया। ब्रूक ने केवल 49 गेंदों में नाबाद 114 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 10 चौके और छह छक्के शामिल रहे। ब्रूक ने अपना अर्धशतक महज 20 गेंदों में पूरा किया जबकि शतक तक पहुंचने के लिए उन्होंने 42 गेंदों का सामना किया। उनकी विस्फोटक पारी की बदौलत इंग्लैंड आखिरी ओवरों में तेजी से रन जुटाने में सफल रहा।

    इंग्लैंड की पारी में विल जैक्स ने भी 12 गेंदों पर 21 रन बनाए। एन्यूरिन डोनाल्ड ने पांच गेंदों में 12 रन का योगदान दिया जबकि टॉम बेंटन ने 10 गेंदों पर 10 रन बनाए। श्रीलंका की ओर से दुश्मंथा चमीरा दुनिथ वेलालागे एहसान मलिंगा और वानिंदु हसरंगा को एक-एक विकेट मिला। इसके बावजूद इंग्लैंड का स्कोर 250 रन के पार पहुंच गया।

    255 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही और बड़े लक्ष्य का दबाव साफ नजर आया। श्रीलंका की ओर से दुनिथ वेलालागे ने सबसे ज्यादा 33 रन बनाए। दासुन शनाका ने 24 रन की पारी खेली लेकिन दोनों बल्लेबाज टीम को लक्ष्य के करीब नहीं पहुंचा सके

    इंग्लैंड की गेंदबाजी के सामने श्रीलंका की बल्लेबाजी पूरी तरह दबाव में नजर आई। सोनी बेकर ने चार ओवर में केवल 12 रन देकर तीन विकेट झटके। लियाम डॉसन और जेमी ओवरटन को दो-दो विकेट मिले जबकि जोश टंग विल जैक्स और आदिल रशीद ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया। श्रीलंका 19 ओवर में 135 रन पर ऑलआउट हो गया और इंग्लैंड ने 119 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    हैरी ब्रूक को उनकी शानदार शतकीय पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। अब दोनों टीमों के बीच दूसरा टी20 मुकाबला गुरुवार को भारतीय समयानुसार रात 11 बजे खेला जाएगा। श्रीलंका की नजर इस मुकाबले में वापसी करते हुए सीरीज बराबर करने पर होगी जबकि इंग्लैंड जीत की लय बरकरार रखना चाहेगा
  • पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा? 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष, जानें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक सभी महत्वपूर्ण तिथियां

    पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा? 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष, जानें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक सभी महत्वपूर्ण तिथियां

    नई दिल्ली ।पितृ पक्ष हिंदू धार्मिक परंपरा में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि में परिवार अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल तर्पण, अन्न अर्पण और दान-पुण्य किया जाता है। पारिवारिक परंपराओं के अनुसार श्राद्ध कर्म दोपहर के समय करने का विधान बताया गया है।

    साल 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार को पूर्णिमा तिथि के श्राद्ध से होगी। इसके बाद अलग-अलग तिथियों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष की अवधि में प्रतिपदा से लेकर चतुर्दशी तक विभिन्न तिथियों पर श्राद्ध कर्म होंगे। वहीं, 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।

    पितृ पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा तिथि के श्राद्ध से होगी। 26 सितंबर को पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन 27 सितंबर, रविवार को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध होगा। 28 सितंबर, सोमवार को द्वितीया और 29 सितंबर, मंगलवार को तृतीया तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाएगा।

    30 सितंबर, बुधवार को चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर, गुरुवार को षष्ठी और 2 अक्टूबर, शुक्रवार को सप्तमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। 3 अक्टूबर, शनिवार को अष्टमी और 4 अक्टूबर, रविवार को नवमी तिथि के लिए श्राद्ध कर्म होगा।

    5 अक्टूबर, सोमवार को दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। 6 अक्टूबर, मंगलवार को एकादशी तिथि के श्राद्ध का दिन रहेगा। 7 अक्टूबर, बुधवार को द्वादशी तिथि के साथ मघा तिथि का श्राद्ध भी बताया गया है। इसके बाद 8 अक्टूबर, गुरुवार को त्रयोदशी और 9 अक्टूबर, शुक्रवार को चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध होगा।

    पितृ पक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर, शनिवार को होगा। इस दिन अमावस्या तिथि पर सर्वपितृ अमावस्या का तर्पण और श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक परंपरा में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी उपलब्ध नहीं होती, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने का विधान बताया गया है।

    पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया परिवार की परंपरा और मान्यताओं के अनुसार की जाती है। सामान्य रूप से पितरों का मन में स्मरण करने के बाद जल तर्पण और अन्न का अर्पण किया जाता है। इसके बाद दान-पुण्य करने की परंपरा भी बताई गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में किए गए इन कर्मों का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

    इस तरह 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। पूर्णिमा से आरंभ होने वाली यह अवधि सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगी। परिवार अपने पितरों की संबंधित तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण की परंपरा का पालन कर सकते हैं।

  • जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे थे अब मिलेगा अधिकार नितिन नवीन करेंगे इंदौर में योजना की शुरुआत

    जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे थे अब मिलेगा अधिकार नितिन नवीन करेंगे इंदौर में योजना की शुरुआत

    इंदौर । इंदौर में लंबे समय से अपनी जमीन और मकान पर रहने के बावजूद वैध दस्तावेज या पट्टा नहीं होने की समस्या झेल रहे हजारों लोगों के लिए बड़ी पहल होने जा रही है। इंदौर और आसपास के इलाकों में करीब 30 हजार लोगों को स्वामित्व का अधिकार देने की तैयारी की गई है। इस योजना की शुरुआत 17 सितंबर को इंदौर के सुपर कॉरिडोर मैदान में होने वाले कार्यक्रम से की जाएगी। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस दौरान मौजूद रहेंगे।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह मध्यप्रदेश में पहला दौरा होगा। हालांकि उनके स्वागत के लिए किसी तरह की बड़ी रैली या शोभायात्रा आयोजित नहीं की जाएगी। उनका दौरा सीमित समय का रहेगा और वे सीधे सरकारी कार्यक्रम में पहुंचेंगे। बताया गया है कि इसी दिन उनका उज्जैन और नीमच जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। हालांकि उनके पूरे दौरे का अधिकृत कार्यक्रम अभी जिला प्रशासन को नहीं मिला है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार स्वामित्व योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को उनकी जमीन और मकान का अधिकार दिलाना है जो लंबे समय से किसी स्थान पर रह रहे हैं लेकिन उनके पास उस जमीन का वैध दस्तावेज या पट्टा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से लंबे समय से यह समस्या सामने आती रही है कि कई परिवार चार दशक या उससे भी ज्यादा समय से अपनी जगह पर रह रहे हैं लेकिन जमीन के मालिकाना अधिकार से जुड़े कागजात उनके पास नहीं हैं।

    बताया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए गए हैं। इसी दौरान ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों ने जमीन के अधिकार से जुड़ी समस्या भी सामने रखी। इसके बाद स्वामित्व योजना के जरिए ऐसे परिवारों को उसी स्थान पर अधिकार देने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया जहां वे वर्षों से रह रहे हैं।

    इंदौर के सुपर कॉरिडोर मैदान में होने वाले कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इनमें करीब 30 हजार लाभार्थी आसपास के गांवों से पहुंचेंगे। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल के साथ साथ आने जाने वाले रास्तों पार्किंग सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    लाभार्थियों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए करीब 2 हजार बसों की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। बारिश को देखते हुए भी आयोजन स्थल पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि लोगों को परेशानी न हो। नितिन नवीन की सुरक्षा को देखते हुए उनके संभावित रूट पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती और कार्यक्रम स्थल पर सीसीटीवी कैमरों समेत अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।

    जिला प्रशासन को दिल्ली से राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे का अंतिम कार्यक्रम मिलने के बाद सुरक्षा और ट्रैफिक प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए लंबे समय से जमीन पर रह रहे उन लोगों को स्वामित्व का अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी जिनके पास अब तक अपने घर और जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं थे।

  • त्वचा की छोटी छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी इन आसान उपायों से रखें स्किन का खास ख्याल

    त्वचा की छोटी छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी इन आसान उपायों से रखें स्किन का खास ख्याल


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन बदलता मौसम धूल मिट्टी प्रदूषण तनाव और गलत खानपान का असर त्वचा पर आसानी से दिखाई देने लगता है। कई बार लोग चेहरे पर निखार लाने के लिए महंगे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतों में सुधार करके भी त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि उसकी सफाई नमी और सुरक्षा का नियमित रूप से ध्यान रखा जाए।

    दिनभर बाहर रहने के दौरान धूल मिट्टी और प्रदूषण त्वचा पर जमा हो सकते हैं। इसलिए चेहरे को अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार किसी हल्के क्लींजर से साफ करना जरूरी माना जाता है। बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने या तेज साबुन का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है। ऐसे में त्वचा को साफ रखने के साथ उसकी नमी बनाए रखना भी जरूरी है।

    मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को हल्का और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर पसंद आ सकता है जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा अधिक मॉइस्चराइजिंग विकल्प उपयोगी हो सकता है। त्वचा को नियमित रूप से मॉइस्चराइज करने से रूखापन और खिंचाव कम महसूस हो सकता है।

    धूप से त्वचा की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक तेज धूप में रहने से त्वचा पर टैनिंग और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना अच्छी आदत मानी जाती है। धूप में ज्यादा समय बिताना हो तो टोपी या छाते जैसी चीजों से भी त्वचा को बचाया जा सकता है।

    त्वचा की सेहत का संबंध खानपान और जीवनशैली से भी माना जाता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और फल तथा सब्जियों को आहार में शामिल करना शरीर के साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला भुना भोजन और अनियमित दिनचर्या से बचना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है क्योंकि लगातार नींद की कमी से चेहरा थका हुआ दिखाई दे सकता है।

    चेहरे को बार बार हाथ लगाने और बिना साफ किए मेकअप के साथ सोने से भी बचना चाहिए। मेकअप करने के बाद रात में त्वचा को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। इसके अलावा तकिए के कवर और चेहरे के संपर्क में आने वाली चीजों की सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

    घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी जरूरी है। हर प्राकृतिक चीज हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित हो यह जरूरी नहीं है। किसी नए प्रोडक्ट या घरेलू सामग्री को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। यदि त्वचा पर लगातार खुजली जलन लालिमा मुंहासे या कोई अन्य समस्या बनी रहती है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

    कुल मिलाकर त्वचा की देखभाल के लिए महंगे प्रोडक्ट से ज्यादा जरूरी नियमितता है। साफ सफाई मॉइस्चराइजिंग धूप से सुरक्षा संतुलित खानपान पर्याप्त नींद और सही दिनचर्या को अपनी आदत में शामिल करके त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले युवाओं के बीच पहुंची कांग्रेस गिटार से गाने और नुक्कड़ नाटक से न्योता

    राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले युवाओं के बीच पहुंची कांग्रेस गिटार से गाने और नुक्कड़ नाटक से न्योता


    इंदौर । इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने प्रचार का तरीका बदला है। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के प्रचार में ढोल नगाड़े बड़े बैनर मंच और नेताओं के औपचारिक दौरे देखने को मिलते हैं लेकिन इस बार इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ता युवाओं के बीच अलग अंदाज में पहुंच रहे हैं। जींस और टीशर्ट पहनकर नेता कॉलेज और हॉस्टल सहित युवाओं से जुड़े स्थानों पर जा रहे हैं। यहां गिटार पर गाने डांस और नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों से संवाद किया जा रहा है और इसके बाद उन्हें 19 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है।

    नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस का जोर युवाओं तक पहुंचने और उनसे सीधे बातचीत करने पर है। पार्टी की ओर से संगीत कला खेल और नुक्कड़ नाटक को प्रचार अभियान का हिस्सा बनाया गया है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवाओं के बीच जाकर उनसे सहज माहौल में बातचीत करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

    प्रचार अभियान के दौरान युवा कलाकार भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अलग अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं। कहीं कलाकार गिटार लेकर गाने गाते नजर आ रहे हैं तो कहीं डांस और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्रों से जुड़े विषय सामने रखे जा रहे हैं। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देने के बाद युवाओं को छात्रों की गूंज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इस तरह अभियान में पारंपरिक सभा की जगह संवाद और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रमुखता दी गई है।

    इस अभियान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी भी सक्रिय हैं। वह अलग अलग स्थानों पर नुक्कड़ नाटक की टीम और कलाकारों के साथ युवाओं के बीच पहुंच रही हैं। खासतौर पर युवतियों से बातचीत कर उन्हें कार्यक्रम में आने का न्योता दिया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी भी युवाओं से संपर्क कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर खेल प्रतियोगिताओं और छोटे कार्यक्रमों के जरिए भी छात्रों से संवाद किया जा रहा है।

    अभियान के दौरान स्कूल विद्यार्थियों के बीच भी कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां दिखाई दीं। विद्यार्थियों ने मैदान में छात्रों की गूंज लिखकर अपनी भागीदारी जताई। कांग्रेस इसे युवाओं और विद्यार्थियों के बीच कार्यक्रम को लेकर बन रहे माहौल के तौर पर देख रही है।

    इंदौर में लगाए गए कार्यक्रम से जुड़े पोस्टरों में भी अलग तरीका अपनाया गया है। पोस्टरों में कांग्रेस का नाम नहीं लिखा गया है। हालांकि कांग्रेस नेताओं के फोटो नजर आ रहे हैं लेकिन उनके राजनीतिक पदों का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे प्रचार को सीधे राजनीतिक सभा के बजाय छात्रों और युवाओं से जुड़े आयोजन के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है।

    कार्यक्रम की तैयारियों के बीच आयोजकों की ओर से राजवाड़ा स्थित प्राचीन वनखंडी हनुमान मंदिर परिसर में यज्ञ हवन और पूजन कराने की भी जानकारी दी गई है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 3 के प्रभारी दीपक जोशी पिंटू पूर्व प्रदेश महासचिव सन्नी पठारे और महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव अधिवक्ता साक्षी शुक्ला ने बताया कि कार्यक्रम की सफलता के लिए यह आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने कार्यक्रम की अनुमति में देरी और अधिक राशि लेकर अनुमति देने जैसी बाधाओं के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन दावों पर संबंधित प्रशासनिक पक्ष का जवाब इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

  • मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    मराठा आरक्षण की मांग पर जरांगे मुंबई रवाना, पुलिस की अनुमति नहीं; फडणवीस ने गणेशोत्सव में बाधा न डालने की अपील की

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से आजाद मैदान में प्रस्तावित आंदोलन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद उन्होंने जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मुंबई की ओर कूच किया। जरांगे के 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की संभावना है। उनका यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में गणेशोत्सव चल रहा है और मुंबई में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल हो रहे हैं।

    जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। मुंबई पहुंचने के लिए उन्हें करीब 400 किलोमीटर का सफर तय करना है। शुरुआती योजना में बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ मुंबई जाने की बात थी, लेकिन पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपने साथ सीमित संख्या में लोगों को लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया। रास्ते में मराठा समुदाय के लोग उनसे जुड़ रहे हैं। उनके काफिले के बीड के पाटोदा, अहिल्यानगर के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली से होते हुए मुंबई पहुंचने की योजना है।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने अधिकारियों, होमगार्ड और रैपिड सिटी पुलिस की टुकड़ियों समेत 648 जवानों की तैनाती की है। प्रशासन की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जरांगे के साथ रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक जुड़ सकते हैं और उनका मुंबई पहुंचना गणेशोत्सव के दौरान भीड़ तथा यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि गणेशोत्सव के दौरान आम लोगों और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन के समय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। फडणवीस के अनुसार सरकार ने जरांगे की 13 में से 12 मांगों को स्वीकार कर उन पर कार्रवाई की है, जबकि बची हुई मांग से जुड़ी कानूनी अड़चनें भी उन्हें बताई गई हैं।

    दूसरी ओर, जरांगे ने मुंबई जाने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के अधिकार को रोका नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने 11 सितंबर की सुनवाई में भी लोकतंत्र और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को लेकर टिप्पणी की थी।

    जरांगे ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं और दावा किया है कि उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश की जा रही है। ये आरोप उनके और सरकार के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आए हैं। वहीं उनकी पत्नी सुमित्रा ने कहा कि सरकार की ओर से समय पर निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उन्हें मुंबई जाने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस से भी अपने पति से जरांगे की आरक्षण संबंधी मांग पर बात करने की अपील की।

    मराठा आरक्षण को लेकर जरांगे का आंदोलन पहले भी मुंबई तक पहुंच चुका है। अगस्त 2025 में उन्होंने आजाद मैदान में बड़ा आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार द्वारा उनकी कई मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था। अब एक बार फिर मुंबई की ओर उनके कूच से मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य में केंद्र में आ गया है।

  • बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से गूंजा मंदिर परिसर भस्म आरती में रजत आभूषणों से सजे भगवान

    बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से गूंजा मंदिर परिसर भस्म आरती में रजत आभूषणों से सजे भगवान


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। भोर होते ही मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया जिसमें उन्हें राजा स्वरूप प्रदान किया गया।

    भस्म आरती की परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम किया गया। इसके बाद स्वस्ति वाचन हुआ और अनुमति लेकर चांदी का द्वार खोला गया। गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने बाबा महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारा। इसके बाद भगवान का पंचामृत पूजन किया गया। पंचामृत पूजन के दौरान दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक विधियों के बाद कर्पूर आरती भी संपन्न हुई।

    जलाभिषेक और पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल को ड्रायफ्रूट फल और मिठाई का भोग लगाया गया। इसके बाद भस्म अर्पित करने की विशेष परंपरा निभाई गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप और भी आकर्षक हो गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी परंपरा के तहत भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को भांग चंदन और सिंदूर से सजाया गया। इसके साथ ही विभिन्न आभूषण धारण कराए गए। भगवान के मस्तक पर शेषनाग का रजत मुकुट सजाया गया जबकि रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला ने उनके स्वरूप की दिव्यता बढ़ा दी। सुगंधित फूलों से बनी माला भी भगवान को अर्पित की गई। राजा स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।

    मंदिर के नंदी हॉल में भी विशेष पूजा अर्चना की गई। नंदी जी का स्नान कराया गया और इसके बाद ध्यान तथा पूजन की प्रक्रिया पूरी की गई। भस्म आरती के दौरान मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग अलग पूजन विधियां संपन्न होती रहीं।

    इस विशेष आरती में महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। देश के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने और बाबा महाकाल के भस्म स्वरूप के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

    बुधवार को भी आरती के दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल बना रहा। भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। रजत मुकुट रजत मुंडमाल रुद्राक्ष माला और फूलों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव रहे।

  • राइड बुकिंग में अतिरिक्त रकम देने का दबाव पड़ा भारी, CCPA ने रैपिडो की कंपनी पर 10 लाख रुपये की कार्रवाई की

    राइड बुकिंग में अतिरिक्त रकम देने का दबाव पड़ा भारी, CCPA ने रैपिडो की कंपनी पर 10 लाख रुपये की कार्रवाई की

    नई दिल्ली । रैपिडो चलाने वाली कंपनी रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई ऐप पर इस्तेमाल किए जा रहे ऐसे तरीकों को लेकर की गई है, जिनसे यात्रियों पर राइड बुक करने से पहले अतिरिक्त पैसे देने का दबाव पड़ने की बात सामने आई। प्राधिकरण ने इसे डार्क पैटर्न और भ्रामक व्यापार तरीके की श्रेणी में रखा है।

    CCPA की जांच में पाया गया कि रैपिडो ऐप पर शुरुआत में यात्री को एक किराया दिखाई देता था, लेकिन बुकिंग की प्रक्रिया के दौरान उससे अतिरिक्त रकम जोड़ने के लिए कहा जाता था। ऐप पर ऐसे संदेश दिखाए जाने की बात सामने आई, जिनमें ज्यादा पैसे देने से राइड मिलने की संभावना बढ़ने का संकेत दिया जाता था।

    जांच के मुताबिक, कुछ संदेशों में यात्रियों से 10, 20 या 30 रुपये अतिरिक्त जोड़ने के लिए कहा जाता था। इसके पीछे यह बताया जाता था कि कैप्टन कम कीमत पर राइड स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इस तरह के संदेशों से यात्री के मन में यह धारणा बन सकती थी कि यदि उसने किराया नहीं बढ़ाया तो उसे राइड नहीं मिलेगी। CCPA ने इस तरीके को ‘कन्फर्म शेमिंग’ नाम दिया है।

    प्राधिकरण ने रैपिडो के ‘सेट योर प्राइस’ फीचर के इंटरफेस पर भी सवाल उठाए। जांच में पाया गया कि कीमत बढ़ाने का विकल्प हरे रंग में दिखाया जाता था, जबकि कीमत कम करने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी दिखाई देती थी। इसके अलावा कीमत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्लाइडर में अधिक जगह दिए जाने की बात भी सामने आई। CCPA ने इस तरीके को ‘इंटरफेस इंटरफेरेंस’ की श्रेणी में रखा।

    टिपिंग को लेकर भी प्राधिकरण ने स्थिति स्पष्ट की। CCPA के मुताबिक टिप किसी सेवा के पूरा होने के बाद ग्राहक की इच्छा से दिया जाने वाला अतिरिक्त भुगतान होता है। इसे राइड हासिल करने की शर्त के रूप में नहीं जोड़ा जा सकता। मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के अनुसार भी टिप राइड पूरी होने के बाद ही मांगी जानी चाहिए।

    रैपिडो की ओर से सफाई में कहा गया कि टिप पूरी तरह यात्रियों की इच्छा पर निर्भर है और उसका मैचिंग सिस्टम अतिरिक्त पैसे दिए बिना भी काम करता है। हालांकि, CCPA ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण ने यह भी पाया कि ज्यादा पैसे देने से राइड मिलने की संभावना बढ़ने के संबंध में कंपनी कोई सबूत पेश नहीं कर सकी।

    CCPA की कार्रवाई के बाद रैपिडो के ऐप पर राइड बुकिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाले इंटरफेस और अतिरिक्त भुगतान से जुड़े तरीकों पर सवाल सामने आए हैं। मामला केवल टिप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किराया बढ़ाने के लिए दिए जाने वाले संकेतों और ऐप के डिजाइन को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

    इस बीच उबर, ओला और नम्मा यात्री जैसी कंपनियां भी CCPA की जांच के दायरे में हैं। ऐसे में राइड-बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों से अतिरिक्त भुगतान मांगने के तरीकों और ऐप इंटरफेस से जुड़े मामलों पर नियामकीय निगरानी जारी है।

  • ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    नई दिल्ली ।‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद भक्ति और धार्मिक कथाओं पर आधारित फिल्मों को लेकर फिल्म जगत में गतिविधियां बढ़ी हैं। हाल के दिनों में कई नए प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इन फिल्मों में अलग-अलग धार्मिक व्यक्तित्वों और कथाओं को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। खाटु श्याम बाबा, महाकवि तुलसीदास, साई बाबा और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कहानियों पर आधारित प्रोजेक्ट इनमें प्रमुख हैं।

    सबसे पहले ‘हारे के सहारे खाटु श्याम हमारे’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई है। यह फिल्म खाटु श्याम बाबा की जिंदगी पर आधारित होगी। फिल्म में उनकी महिमा और उनके प्रति लोगों की आस्था को कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा। खाटु श्याम बाबा की भक्ति से जुड़े पहलुओं को बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी इस प्रोजेक्ट में की जा रही है।

    इसके बाद ‘राबोला’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई। इस फिल्म का निर्माण डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी करेंगे। वह इससे पहले अक्षय कुमार की फिल्म ‘पृथ्वीराज चौहान’ बना चुके हैं। ‘राबोला’ में महाकवि तुलसीदास की कहानी को दिखाया जाएगा। तुलसीदास भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं और उनके जीवन पर आधारित यह प्रोजेक्ट इसी पृष्ठभूमि को पर्दे पर पेश करेगा।

    महाकवि तुलसीदास पर एक अन्य फिल्म की भी घोषणा हुई है। यह प्रोजेक्ट ‘हनुमान अंश’ बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी का नया प्रोजेक्ट बताया गया है। इस फिल्म को लेकर भी दर्शकों की रुचि बनी हुई है। एक ही विषय पर अलग-अलग फिल्म परियोजनाओं की घोषणा होने से तुलसीदास के जीवन और उनकी भक्ति परंपरा को लेकर फिल्म जगत में नया ध्यान देखने को मिल रहा है।

    अगले साल ‘तेरा साई’ नाम से भी एक फिल्म आने की तैयारी है। इसमें संजय मिश्रा और पलाश मुच्छल जुड़े हैं। फिल्म में साई बाबा की जिंदगी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। साई बाबा के जीवन पर पहले भी फिल्में और धारावाहिक बन चुके हैं, लेकिन इस नए प्रोजेक्ट में उनकी कहानी को नए सिनेमा के माध्यम से दिखाने की तैयारी है।

    इसके अलावा ‘श्रीमद्भागवतम्’ नाम से भी एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इसे सात हिस्सों में बनाए जाने की योजना है। फिल्म के ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I: विष्णुरत’ का पहला टीजर पोस्टर भी जारी किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के हाथ की झलक दिखाई गई है। सात भागों में बनने वाली यह फिल्म धार्मिक ग्रंथ से जुड़ी कथा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना का हिस्सा है।

    इन सभी घोषणाओं को ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद सामने आए नए प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इन फिल्मों की रिलीज और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अलग-अलग समय पर सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि धार्मिक और भक्ति कथाओं पर आधारित कई नए प्रोजेक्ट एक साथ चर्चा में आ गए हैं। आने वाले समय में इन फिल्मों की कहानी, कलाकारों और निर्माण से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।