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  • फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

    फ्रांस में भीषण गर्मी का कहर…. मात्र 16 दिन में ही 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत


    नई दिल्ली।
    फ्रांस (France) में 2026 की भीषण गर्मी (Scorching Heat) ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. जून के आखिरी दिनों और जुलाई की शुरुआत के बीच देश में 21 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई. फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी (Public Health Agency) के मुताबिक, 17 जून से 2 जुलाई के बीच 21674 लोगों की मौत हुई, जबकि इस समय में आमतौर पर करीब 15910 मौतें होती हैं. यानी इस बार सामान्य से 5764 ज्यादा मौतें हुईं।

    इन आंकड़ों से पता चलता है कि तेज गर्मी अब सिर्फ मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतें सीधे गर्मी की वजह से नहीं हुईं. ज्यादा तापमान ने कई लोगों की पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर कर दिया, जिससे मौतों की संख्या बढ़ गई।

    फ्रांस में सामने आए नए आंकड़ों ने 2026 की हीटवेव के असर की गंभीर तस्वीर दिखाई है. शुरुआत में मौतों का अनुमान कम था, लेकिन बाद में मिले आंकड़ों से पता चला कि गर्मी का असर पहले से ज्यादा बड़ा था. इस दौरान अस्पतालों और देखभाल केंद्रों पर भी लोगों का दबाव बढ़ गया।

    किसी भी आपदा या घटना का असर समझने के लिए स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा देखती हैं. इसमें किसी खास समय में हुई मौतों की तुलना सामान्य समय में होने वाली मौतों से की जाती है. फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच सामान्य से करीब 36 प्रतिशत ज्यादा मौतें दर्ज हुईं. हालांकि, इनमें से हर मौत की वजह सिर्फ गर्मी नहीं थी. लेकिन तेज तापमान ने बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

    अतिरिक्त मौतों में करीब दो-तिहाई लोग 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे. ज्यादा उम्र के लोगों के लिए तेज गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि उनका शरीर तापमान को आसानी से नियंत्रित नहीं कर पाता. इस दौरान करीब आधी मौतें अस्पतालों में हुईं. कई मौतें नर्सिंग होम और लोगों के घरों में भी दर्ज की गईं. पेरिस और आसपास के इलाकों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, जहां करीब 2000 अतिरिक्त मौतें हुईं।

    बहुत ज्यादा गर्मी शरीर पर दबाव बढ़ा देती है. इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है और दिल, फेफड़ों और किडनी पर असर पड़ सकता है. जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी होती है, उनके लिए तेज गर्मी और ज्यादा खतरनाक हो सकती है. इसी वजह से हीटवेव में सिर्फ तापमान बढ़ना ही चिंता की बात नहीं होती, बल्कि इसका असर लोगों की सेहत और मौतों के आंकड़ों में भी दिखाई देता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में हीटवेव ज्यादा बार आने लगी हैं और ज्यादा लंबे समय तक रह रही हैं. साल 2003 में यूरोप में आई भीषण गर्मी में 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था.

    फ्रांस की 2026 की हीटवेव एक बार फिर दिखाती है कि बढ़ती गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं है. यह लोगों की सेहत से जुड़ी बड़ी चुनौती बन चुकी है. आने वाले समय में गर्मी से बचाव के लिए बेहतर तैयारी, समय पर अलर्ट और लोगों को जागरूक करना जरूरी होगा।

  • क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

    क्रिमिनल केस के बावजूद मिला भोपाल का वीआईपी थाना, टीआई के निलंबन के बाद पोस्टिंग सिस्टम पर उठे बड़े सवाल


    भोपाल । भोपाल के चर्चित अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के निलंबन के बाद अब केवल उनके खिलाफ लगे आरोप ही चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि पुलिस विभाग की पोस्टिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुनील शर्मा के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राजधानी भोपाल के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थानों में गिने जाने वाले अरेरा हिल्स थाने का प्रभारी बनाया गया। इस खुलासे के बाद पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

    पूरा मामला तब सामने आया जब एक युवक ने पुलिस आयुक्त से शिकायत कर आरोप लगाया कि अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के उसकी पत्नी से अनैतिक संबंध हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि थाने में पदस्थ आरक्षक नंदकिशोर इस पूरे मामले में टीआई का सहयोग कर रहा था और महिला पर दबाव बनाने में उसकी भूमिका थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को निलंबित कर दिया।

    मामले की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि सुनील शर्मा के खिलाफ गुना कोतवाली में पहले से एक आपराधिक प्रकरण दर्ज है और यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इसके बावजूद उन्हें भोपाल जैसे संवेदनशील जिले के वीआईपी थाने का प्रभार सौंपा गया, जिसने विभागीय प्रक्रिया और नियमों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    पुलिस मुख्यालय ने वर्षों पहले ही ऐसे मामलों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 15 अक्टूबर 2014 को जारी आदेश में कहा गया था कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच, भ्रष्टाचार अथवा लोकायुक्त संबंधी प्रकरण लंबित हों, उन्हें थानों या अन्य संवेदनशील पदों पर पदस्थ नहीं किया जाएगा। इसके बाद 17 जून 2025 को भी पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को दोबारा निर्देश जारी कर कहा था कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण, नैतिक अधःपतन या अवैध निरोध जैसे गंभीर आरोप लंबित हों, उन्हें थानों, क्राइम ब्रांच या किसी महत्वपूर्ण कार्यालय में पदस्थ नहीं किया जाए।

    इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सुनील शर्मा की नियुक्ति ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पोस्टिंग से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की जांच की गई थी। यदि जांच हुई थी तो नियमों के बावजूद उन्हें संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई। वहीं यदि जांच नहीं हुई तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग की जवाबदेही पर भी बहस तेज हो गई है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि पोस्टिंग नियमों के विपरीत हुई है तो क्या केवल संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होगी या फिर ऐसे अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी जिन्होंने नियमों के बावजूद यह पदस्थापना की।

    डीसीपी जोन-3 विकास सेहवाल ने बताया कि महिला के पति की शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर टीआई सुनील शर्मा और आरक्षक नंदकिशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल यह मामला केवल एक थाना प्रभारी के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस विभाग की पारदर्शिता, पोस्टिंग प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर बहस का विषय बन चुका है।

  • बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    बारिश और बादलों का डबल अटैक शुक्रवार को कई राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्यप्रदेश । देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और शुक्रवार को भी मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर मध्य पूर्व और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कुछ इलाकों में भारी से अति भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश से नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है वहीं कई शहरों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश राजस्थान उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल ओडिशा और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में शुक्रवार को तेज बारिश होने की संभावना है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

    मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण कई जिलों में अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है। भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर सिवनी मंडला छिंदवाड़ा रायसेन नर्मदापुरम और आसपास के क्षेत्रों में कहीं कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। लगातार वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।

    उत्तर भारत में दिल्ली एनसीआर के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और पहाड़ी रास्तों पर फिसलन का खतरा बना रह सकता है इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी मानसून सक्रिय रहेगा। बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल असम मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक तमिलनाडु और तेलंगाना के कुछ क्षेत्रों में भी गरज चमक के साथ वर्षा होने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण अगले कुछ दिनों तक मानसून की गतिविधियां मजबूत बनी रहेंगी। इसके चलते कई राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह बारिश खरीफ फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय सावधानी रखें और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े न हों। स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते बचाव किया जा सके।

  • दिल्ली प्रदर्शन की आड़ में देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास…. 150 को दबोचा, पिस्टल-चाकू बरामद

    दिल्ली प्रदर्शन की आड़ में देश का माहौल बिगाड़ने का प्रयास…. 150 को दबोचा, पिस्टल-चाकू बरामद


    नई दिल्ली।
    कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party -CJP) के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन (Jantar Mantar Protest) पर बैठे प्रदर्शनकारी छात्रों की आड़ में दिल्ली व देश का माहौल बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। दक्षिण व दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने छात्रों के भेष में जंतर-मंतर जा रहे 150 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा है। बल्लभगढ़ निवासी दो लड़कों नवीन वत्स, सौरभ के बैग से पिस्टल, चाकू मिला है। बदरपुर थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है।

    दक्षिण रेंज के कई थाना पुलिस को इनपुट मिले थे कि कुछ लोग माहौल खराब करने के लिए के छात्र बनकर जंतर-मंतर जा रहे थे। इन लोगों ने पीछे छात्रों की तरह बैग लटकाया हुआ है। इन इनपुट के बाद बदरपुर, सनलाइट कॉलोनी, निजामुद्दीन, लोधी कॉलोनी, लाजपत नगर आदि थाना इलाकों में पिकेट लगाकर चेकिंग की गई।

    पुलिस बाइक से जा रहे आरोपियों को रोका। इनके बैग से आपत्तिजनक सामग्री जैसे स्प्रे व पत्थर आदि बरामद किए गए। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कुछ के मोबाइल फोन में वॉट्सएप पर आपत्तिजनक चैट मिली है। आरोपी वॉट्सएप पर ज्यादा बातें कर रहे हैं। इन चैट में जिक्र है कि जैसे…तैसे जंतर-मंतर इस सामान को पहुंचाओ। जंतर-मंतर पर छात्र बनकर और बैग लटकाकर जाना है। पुलिस इन मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेज रही है।

    इससे निजामुद्दीन, लाजपत नगर, सनलाइट व लोधी कॉलोनी आदि थाना पुलिस ने 20 से 25 से ज्यादा आरोपियों ने रात को पकड़ा था। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया हुआ है और उनसे पूछताछ की जा रही है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह प्रदर्शन में भाग लेने के लिए जा जंतर-मंतर जा रहे थे। जिले के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी जामिया नगर, शाहीनबाग, सनलाइट, फरीदाबाद व नोएडा के रहने वाले हैं।


    कई छात्रों को समझा बुझाकर किया वापस

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए 150 छात्रों में से कई छात्रों को समझा बुझाकर वापस कर दिया गया है जबकि कुछ से पूछताछ जारी है। इनके बैग से आपत्तिजनक सामान मिला था। पुलिस का कहना है कि 15 अगस्त नजदीक है। इस प्रदर्शन की आड़ में कुछ आसामाजिक तत्व भी आ सकते हैं जो राजधानी में अपनी नापाक हरकत से देश का माहौल कर सकते हैं। ऐसे में सभी से अपील है कि सतर्क रहें और कोई भी संदिग्ध नजर आने पर पुलिस को 112 पर सूचित करें।

    दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस ने 100 से ज्यादा संदिग्ध को पकड़ा है। बदरपुर थाना पुलिस ने चेकिंग के दौरान दो आरोपियों को पकड़ा है। तलाशी लेने पर उनके बैग से पिस्टल व चाकू बरामद किए गए हैं। इनको गिरफ्तार कर लिया गया है। कुछ के बैग से स्प्रे आदि सामान बरामद किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है। -डॉ. हेमंत तिवारी पुलिस उपायुक्त दक्षिण-पूर्व जिला

    पुलिस ने काफी संदिग्धों को पकड़ा है और उनके बैग से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। पूरी साजिश को पर्दाफाश करने के लिए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। – विजय कुमार संयुक्त पुलिस आयुक्त, दक्षिणी रेंज

  • सरकारी स्कूलों की सच्चाई दिखाती है Adarsh Baal Vidyalaya, दमदार अभिनय ने जीता दिल, जानें कैसी है सीरीज

    सरकारी स्कूलों की सच्चाई दिखाती है Adarsh Baal Vidyalaya, दमदार अभिनय ने जीता दिल, जानें कैसी है सीरीज


    नई दिल्ली । ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीज Adarsh Baal Vidyalaya केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उन सच्चाइयों को भी सामने लाती है जिनसे आम लोग अक्सर रूबरू होते हैं। हास्य, व्यंग्य और भावनात्मक घटनाओं के सहारे यह सीरीज सरकारी स्कूलों की चुनौतियों, शिक्षकों की परेशानियों और बच्चों के भविष्य से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाती है। निर्देशक हिमांक गौर ने सात एपिसोड की इस सीरीज में सामाजिक मुद्दे को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है, जिससे कहानी बोझिल होने के बजाय दर्शकों को जोड़कर रखती है।

    सीरीज की कहानी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल आदर्श बाल विद्यालय के इर्द-गिर्द घूमती है। सरकार की ओर से एक योजना शुरू की जाती है जिसके तहत बोर्ड परीक्षा में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूल के प्रधानाचार्य को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जाने का अवसर मिलेगा। यह खबर मिलते ही स्कूल के प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी अपने स्कूल को सर्वश्रेष्ठ बनाने की पूरी कोशिश में जुट जाते हैं। इसके बाद शुरू होता है संघर्ष, हास्य, चुनौतियों और कई भावनात्मक मोड़ों से भरा सफर जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

    प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी के किरदार में केके मेनन एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का शानदार परिचय देते हैं। उनका संतुलित अभिनय इस किरदार को पूरी तरह जीवंत बना देता है। अर्चना पूरन सिंह भी एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में प्रभाव छोड़ती हैं और अपने अनुभव से कहानी को मजबूती देती हैं। देवेन भोजानी, नवीन कस्तूरिया, अभिमन्यु सिंह और प्रसन्ना बिष्ट जैसे कलाकार भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय करते हैं। खास बात यह है कि बाल कलाकारों का अभिनय भी बेहद स्वाभाविक है और कई दृश्यों में वे अनुभवी कलाकारों के बराबर प्रभाव छोड़ते हैं।

    निर्देशन के स्तर पर हिमांक गौर ने शुरुआत बेहद प्रभावशाली रखी है। पहले तीन एपिसोड हास्य, व्यंग्य और दिलचस्प घटनाओं से भरपूर हैं जो दर्शकों को लगातार बांधे रखते हैं। हालांकि इसके बाद कहानी की गति कुछ धीमी पड़ती दिखाई देती है। कुछ उपकथाएं ऐसी लगती हैं जिनकी आवश्यकता नहीं थी और कुछ दृश्य अनावश्यक रूप से लंबे महसूस होते हैं। इसके बावजूद अंतिम एपिसोड में कहानी फिर से पटरी पर लौटती है और एक संतोषजनक समापन की ओर बढ़ती है, हालांकि क्लाइमैक्स कुछ दर्शकों की अपेक्षाओं से अलग हो सकता है।

    इस सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सीधे भाषण देने के बजाय मनोरंजक अंदाज में सामने लाती है। सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता, अभिभावकों की उम्मीदें और बच्चों पर पड़ने वाला मानसिक दबाव जैसे मुद्दों को सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि गंभीर विषय होने के बावजूद कहानी कहीं भी भारी नहीं लगती।

    यदि आप ऐसी वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं जो मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश भी दे, तो Adarsh Baal Vidyalaya एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। बीच के कुछ एपिसोड थोड़े धीमे जरूर लगते हैं लेकिन मजबूत अभिनय, प्रभावशाली संवाद और शिक्षा व्यवस्था पर सार्थक टिप्पणी इसे देखने लायक बनाती है। परिवार के साथ देखी जाने वाली यह सीरीज हंसाती भी है, सोचने पर मजबूर भी करती है और अंत में एक सकारात्मक संदेश छोड़ जाती है।

  • ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी

    ग्लासगो के आसमान में उड़ता दिखा 'ड्रैगन', लोग रह गए हैरान; बाद में सामने आई वायरल वीडियो की असली कहानी


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में सुबह का एक सामान्य दिन अचानक चर्चा का विषय बन गया, जब लोगों ने नदी के ऊपर एक विशाल पंखों वाले ड्रैगन जैसी आकृति को उड़ते देखा। कुछ देर के लिए लोगों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। कई लोगों ने इसे किसी फिल्म की शूटिंग समझा, तो कुछ ने किसी हाई-टेक ड्रोन शो का हिस्सा माना। देखते ही देखते इस रहस्यमयी उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
    रेडियो प्रेजेंटर ने सबसे पहले रिकॉर्ड किया वीडियो

    बताया जा रहा है कि इस अनोखे दृश्य को सबसे पहले एसटीवी रेडियो के प्रेजेंटर इवेन कैमरून ने अपने कैमरे में कैद किया। वह सुबह करीब 5:45 बजे काम पर जा रहे थे, तभी रिवर क्लाइड और OVO हाइड्रो एरीना के पास उन्होंने आसमान में उड़ती विशाल आकृति देखी।

    उन्होंने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद कुछ ही घंटों में लाखों लोग इसे देख चुके थे। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए।

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने मजाक में लिखा कि “ड्रैगन आखिरकार धरती पर लौट आए हैं”, तो कुछ लोगों ने इसे लोकप्रिय फिल्मों और गेम्स से जोड़कर देखा। कई यूजर्स ने माना कि पहली नजर में यह आकृति बिल्कुल किसी असली उड़ने वाले जीव जैसी दिखाई दे रही थी।

    क्या था इस उड़ते ड्रैगन का सच?

    बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई असली ड्रैगन नहीं, बल्कि लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के मशहूर ड्रैगन सायरैक्स (Syrax) का उड़ने वाला मॉडल था। इसे सीरीज के प्रचार अभियान के तहत तैयार किया गया था।

    इस मॉडल की डिजाइन इतनी वास्तविक बनाई गई कि दूर से देखने पर यह किसी जीवित ड्रैगन जैसा नजर आता है।

    जर्मन कंपनी ने तैयार किया हाई-टेक मॉडल

    इस विशेष मॉडल को जर्मनी की AirStage कंपनी ने विकसित किया है। इसे कार्बन फाइबर, हल्के फोम और छोटे इलेक्ट्रिक इंजनों की मदद से तैयार किया गया है। करीब 13 किलोग्राम वजनी इस मॉडल में 23 मूविंग पार्ट्स लगाए गए हैं, जो उड़ान के दौरान पंख, पूंछ और शरीर को वास्तविक जीव की तरह हिलने-डुलने में सक्षम बनाते हैं।

    उड़ान के दौरान दिखती है असली जैसी हरकत

    ड्रैगन के पंख लगातार फड़फड़ाते हैं, जबकि उसकी पूंछ संतुलन बनाए रखती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों की समन्वित गतिविधि इसे बेहद प्राकृतिक रूप देती है।

    इसके छोटे इंजन इस तरह छिपाए गए हैं कि दूर से देखने पर उनका पता नहीं चलता, जिससे भ्रम और भी बढ़ जाता है।

    पायलट ने बताया चुनौतीपूर्ण अनुभव

    इस मॉडल को उड़ाने वाले पायलट डेनिस गुटोव्स्की के अनुसार, इसे नियंत्रित करना सामान्य रिमोट कंट्रोल विमान उड़ाने से कहीं अधिक कठिन है। उन्होंने बताया कि मॉडल के कई हिस्से एक साथ चलते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण और अभ्यास की जरूरत होती है।

    पहले भी हो चुका है प्रदर्शन

    यह पहली बार नहीं है जब इस ड्रैगन मॉडल ने लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले भी इसे लंदन में ‘हाउस ऑफ द ड्रैगन’ के प्रमोशनल अभियान के दौरान उड़ाया गया था। हर बार इसकी वास्तविक जैसी उड़ान लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

    महीनों की रिसर्च के बाद तैयार हुई तकनीक

    कंपनी के अनुसार, इस मॉडल को तैयार करने में कई महीने लगे।

    डिजाइन टीम ने पक्षियों और चमगादड़ों की उड़ान का अध्ययन किया, फिर कंप्यूटर मॉडल विकसित कर कई चरणों में परीक्षण किए। लंबे प्रयोगों के बाद ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जो हवा में बेहद वास्तविक दिखाई देता है।

    ग्लासगो में वायरल हुआ यह वीडियो अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे आधुनिक इंजीनियरिंग, एनीमेशन और रचनात्मक तकनीक का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

  • ऑफिस ड्रेस कोड के साथ चुनें सही जूते, जानिए फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स में कौन है बेहतर विकल्प

    ऑफिस ड्रेस कोड के साथ चुनें सही जूते, जानिए फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स में कौन है बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली। बदलते कॉर्पोरेट माहौल के साथ ऑफिस संस्कृति में भी तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां अधिकांश संस्थानों में सख्त फॉर्मल ड्रेस कोड लागू होता था, वहीं अब कई कंपनियां बिजनेस कैजुअल और स्मार्ट कैजुअल पहनावे को बढ़ावा दे रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों के सामने यह सवाल अक्सर रहता है कि ऑफिस के लिए फॉर्मल शूज़ पहनना बेहतर रहेगा या स्नीकर्स। विशेषज्ञों का मानना है कि सही फुटवियर का चुनाव केवल आपके व्यक्तित्व को निखारता ही नहीं, बल्कि पूरे दिन की कार्यक्षमता और आराम पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

    यदि आपका कार्यक्षेत्र बैंकिंग, सरकारी कार्यालय, वित्तीय संस्थान, कानूनी सेवाओं या पारंपरिक कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़ा है, जहां प्रोफेशनल ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य होता है, तो फॉर्मल शूज़ सबसे उपयुक्त विकल्प माने जाते हैं। क्लाइंट मीटिंग, इंटरव्यू, बिजनेस प्रेजेंटेशन या किसी आधिकारिक कार्यक्रम में फॉर्मल शूज़ आपकी पेशेवर छवि को मजबूत बनाते हैं और आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। साफ-सुथरे और अच्छी गुणवत्ता वाले फॉर्मल शूज़ आज भी प्रोफेशनल लुक का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

    दूसरी ओर, यदि आप सूचना प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन या किसी रचनात्मक क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो स्नीकर्स भी एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कई आधुनिक कंपनियां कर्मचारियों को आरामदायक और स्मार्ट कैजुअल फुटवियर पहनने की अनुमति देती हैं। साधारण और सादे डिजाइन वाले स्नीकर्स स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ लंबे समय तक आराम भी प्रदान करते हैं। ऐसे जूते उन लोगों के लिए अधिक उपयोगी साबित होते हैं जिन्हें दिनभर ऑफिस परिसर में अधिक चलना-फिरना पड़ता है।

    आराम के लिहाज से स्नीकर्स को अक्सर बेहतर माना जाता है क्योंकि इनमें बेहतर कुशनिंग, हल्का वजन और पैरों को पर्याप्त सपोर्ट मिलता है। लंबे समय तक खड़े रहने या लगातार चलने वाले कर्मचारियों के लिए यह थकान कम करने में मददगार हो सकते हैं। हालांकि अब बाजार में ऐसे आधुनिक फॉर्मल शूज़ भी उपलब्ध हैं जिनमें मेमोरी फोम, कुशन सोल और सॉफ्ट इनसोल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे पारंपरिक फॉर्मल शूज़ भी पहले की तुलना में अधिक आरामदायक हो गए हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जूते खरीदते समय केवल ब्रांड या डिजाइन पर ध्यान न दें। सही आकार, मजबूत सोल, अच्छी ग्रिप, टिकाऊ सामग्री और आरामदायक फिटिंग को प्राथमिकता देना अधिक जरूरी है। गलत आकार के जूते पैरों में दर्द, छाले और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए फुटवियर का चयन हमेशा अपनी जरूरत, कार्यस्थल के वातावरण और दैनिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

    यदि संभव हो तो अलमारी में फॉर्मल शूज़ और स्नीकर्स दोनों रखना सबसे व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। महत्वपूर्ण बैठकों, आधिकारिक कार्यक्रमों और औपचारिक अवसरों पर फॉर्मल शूज़ पहने जा सकते हैं, जबकि सामान्य कार्यदिवस, कैजुअल ऑफिस माहौल या अधिक गतिविधि वाले दिनों में स्नीकर्स बेहतर साबित हो सकते हैं। सही अवसर के अनुसार फुटवियर का चुनाव न केवल आपकी पेशेवर छवि को मजबूत करता है, बल्कि पूरे दिन आराम और आत्मविश्वास भी बनाए रखता है।

  • फैंस को करना होगा थोड़ा और इंतजार, रामायण का ट्रेलर नहीं हुआ रिलीज, सामने आई वजह

    फैंस को करना होगा थोड़ा और इंतजार, रामायण का ट्रेलर नहीं हुआ रिलीज, सामने आई वजह


    नई दिल्ली । रणबीर कपूर और यश स्टारर मेगा बजट फिल्म रामायण का ट्रेलर देखने का इंतजार कर रहे प्रशंसकों को फिलहाल थोड़ा और धैर्य रखना होगा। 24 जुलाई को रिलीज होने वाला बहुप्रतीक्षित ट्रेलर अंतिम समय पर स्थगित कर दिया गया है। हालांकि इस फैसले से फैंस जरूर निराश हुए हैं लेकिन फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि यह फैसला एक बड़ी वैश्विक रणनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भव्य तरीके से प्रस्तुत करना है।

    फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से ट्रेलर लॉन्च टलने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी लंबे समय से यह इच्छा थी कि रामायण केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के दर्शकों तक पहुंचे। अब यह सपना साकार होने जा रहा है क्योंकि फिल्म के लिए सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट के साथ वैश्विक साझेदारी हुई है। इसी वजह से ट्रेलर को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ रिलीज करने का निर्णय लिया गया है ताकि दुनिया भर के दर्शकों को एक साथ इस फिल्म की पहली झलक मिल सके।

    नमित मल्होत्रा ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय सिनेमा के सौ वर्ष से अधिक लंबे इतिहास में यह एक गौरवपूर्ण क्षण होगा। उनका मानना है कि रामायण जैसी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को अब एक बड़े वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा जिससे दुनिया भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को और करीब से जान सकेगी। उन्होंने फिल्म पर भरोसा जताने वाले सभी प्रशंसकों का आभार भी व्यक्त किया और देश के युवाओं को भारत का भविष्य बताते हुए सकारात्मक संदेश दिया।

    इससे पहले पिछले सप्ताह नई दिल्ली के भारत मंडपम में फिल्म का ट्रेलर चुनिंदा मीडिया प्रतिनिधियों और कुछ प्रशंसकों को विशेष स्क्रीनिंग के दौरान दिखाया गया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि 24 जुलाई को इसे आधिकारिक तौर पर सभी के लिए जारी कर दिया जाएगा। इसी बीच सैन डिएगो कॉमिक कॉन में रणबीर कपूर यश निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा ने एक विशेष पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। माना जा रहा था कि इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के बाद ट्रेलर रिलीज होगा लेकिन बाद में मेकर्स ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

    रामायण भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। पहले भाग को दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में लाया जाएगा जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष दिवाली 2027 पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। दक्षिण भारतीय सुपरस्टार यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं जिसे लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है।

    फिल्म की स्टार कास्ट भी बेहद मजबूत है। इसमें सनी देओल हनुमान रवि दुबे लक्ष्मण अरुण गोविल दशरथ लारा दत्ता रकुल प्रीत सिंह विवेक ओबेरॉय कुणाल कपूर और अन्य कई कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। बड़े बजट अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक के साथ तैयार हो रही इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    फिलहाल मेकर्स ने ट्रेलर की नई रिलीज तारीख का ऐलान नहीं किया है लेकिन उनका कहना है कि इंतजार जल्द खत्म होगा और ट्रेलर को दुनिया भर में एक साथ भव्य अंदाज में पेश किया जाएगा। ऐसे में अब प्रशंसकों की निगाहें फिल्म के अगले आधिकारिक अपडेट पर टिकी हैं।

  • NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन

    NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन



    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच अब बॉलीवुड की चुप्पी भी टूटती नजर आ रही है। शुरुआत में जहां फिल्म उद्योग के चुनिंदा कलाकार ही इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे थे वहीं अब कई बड़े सितारे खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज है कि क्या सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड के अन्य कलाकारों ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी या फिर यह छात्रों के बढ़ते आंदोलन का असर है।

    सबसे पहले अभिनेता सलमान खान ने NEET पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है। बाद में उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और सरकार की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त करने का भी आग्रह किया।

    सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर छात्र के पीछे एक सपना और एक परिवार की उम्मीद जुड़ी होती है। उनके अनुसार नई पीढ़ी की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    इसके अलावा कई अन्य कलाकारों ने भी आंदोलन को लेकर अपनी राय सार्वजनिक की। रिपोर्टों के अनुसार शबाना आजमी हुमा कुरैशी और अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की। कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक बहस से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    फिल्म जगत के कई लोगों का मानना है कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। वहीं कुछ कलाकारों ने यह भी अपील की कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा सुधार बना रहे और किसी भी तरह की हिंसा या भटकाव से बचा जाए।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि सलमान खान की टिप्पणी के बाद बॉलीवुड के अन्य सितारों का भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना शुरू हुआ है जबकि कुछ का कहना है कि लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन और जनसमर्थन ने कलाकारों को अपनी राय रखने के लिए प्रेरित किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि किसी एक अभिनेता की प्रतिक्रिया ही बाकी सितारों के बोलने का कारण बनी।

    फिलहाल NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी बीच फिल्म जगत से मिल रहे समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

  • त्वचा को बनाना है साफ चमकदार और स्वस्थ तो अपनाएं बेसन का घरेलू नुस्खा मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे

    त्वचा को बनाना है साफ चमकदार और स्वस्थ तो अपनाएं बेसन का घरेलू नुस्खा मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे


    नई दिल्ली । प्राकृतिक सुंदरता पाने के लिए आज भी घरेलू नुस्खों पर लोगों का भरोसा कायम है। इन्हीं पारंपरिक उपायों में बेसन का नाम सबसे पहले लिया जाता है। रसोई में आसानी से मिलने वाला बेसन केवल स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा की देखभाल के लिए भी बेहद उपयोगी माना जाता है। वर्षों से भारतीय घरों में बेसन का इस्तेमाल चेहरे की सफाई रंगत निखारने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा की गहराई से सफाई करने के साथ उसे मुलायम और चमकदार बनाने में मदद करते हैं।

    बेसन प्राकृतिक क्लींजर की तरह काम करता है। दिनभर धूल मिट्टी प्रदूषण और अतिरिक्त तेल त्वचा पर जमा हो जाता है जिससे चेहरे की चमक कम होने लगती है। ऐसे में बेसन से चेहरा साफ करने पर त्वचा के रोमछिद्रों में जमी गंदगी निकल जाती है और चेहरा ताजा तथा साफ दिखाई देने लगता है। नियमित रूप से इसका उपयोग करने पर त्वचा अधिक स्वस्थ और तरोताजा महसूस होती है।

    तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए भी बेसन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मदद करता है जिससे मुंहासों और ब्लैकहेड्स की समस्या कम हो सकती है। यदि बेसन में गुलाब जल या दही मिलाकर फेस पैक तैयार किया जाए तो त्वचा को ठंडक मिलने के साथ प्राकृतिक नमी भी बनी रहती है। वहीं सूखी त्वचा वाले लोग इसमें दूध या मलाई मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे त्वचा को पोषण मिलता है और रूखापन कम होता है।

    त्वचा की रंगत निखारने में भी बेसन की अहम भूमिका मानी जाती है। हल्दी और बेसन का मिश्रण लंबे समय से पारंपरिक उबटन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। यह त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है और नई चमक लेकर आता है। शादी विवाह और विशेष अवसरों पर भी बेसन का उबटन लगाने की परंपरा इसी कारण आज भी प्रचलित है।

    यदि चेहरे पर हल्की टैनिंग हो गई है तो बेसन में दही और नींबू का रस मिलाकर तैयार किया गया पैक उपयोगी माना जाता है। यह त्वचा को ताजगी देने के साथ उसकी रंगत को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी घरेलू नुस्खे का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहता है।

    बेसन त्वचा की हल्की एक्सफोलिएशन भी करता है। जब इसे हल्के हाथों से चेहरे पर लगाया जाता है तो यह मृत त्वचा को हटाकर त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है। इससे चेहरा साफ और अधिक चमकदार दिखाई देता है। नियमित देखभाल के साथ संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी स्वस्थ त्वचा के लिए उतने ही जरूरी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक उपाय तभी असर दिखाते हैं जब उनका उपयोग सही तरीके और नियमितता के साथ किया जाए। बेसन त्वचा की सामान्य देखभाल में सहायक हो सकता है लेकिन यदि त्वचा पर लगातार एलर्जी जलन गंभीर मुंहासे या किसी प्रकार की समस्या हो तो स्वयं उपचार करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

    प्राकृतिक गुणों से भरपूर बेसन आज भी त्वचा की देखभाल का एक भरोसेमंद घरेलू उपाय माना जाता है। यदि इसे अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार सही सामग्री के साथ इस्तेमाल किया जाए तो यह चेहरे की सफाई चमक और कोमलता बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।