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  • चीज पिज्जा मांगा था मिला वेज पिज्जा फिर जमकर हुआ विवाद देवास में ग्राहकों और कर्मचारियों पर FIR

    चीज पिज्जा मांगा था मिला वेज पिज्जा फिर जमकर हुआ विवाद देवास में ग्राहकों और कर्मचारियों पर FIR


    देवास । देवास शहर में पिज्जा के एक ऑर्डर को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया। घटना मंगलवार रात शहर के बस स्टैंड के सामने स्थित एनी टाइम बेकरी में हुई। यहां चीज पिज्जा की जगह वेज पिज्जा दिए जाने और ऑर्डर तैयार होने में देरी को लेकर ग्राहकों और बेकरी कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई। घटना के बाद दोनों पक्षों ने कोतवाली थाने पहुंचकर एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के अनुसार राम रहीम नगर निवासी प्रिंस और संजू चौहान मंगलवार रात करीब 11 बजे पिज्जा लेने के लिए बस स्टैंड के सामने स्थित बेकरी पहुंचे थे। दोनों ने वहां चीज पिज्जा का ऑर्डर दिया था। आरोप है कि कुछ समय बाद उन्हें चीज पिज्जा की जगह वेज पिज्जा तैयार करके दे दिया गया। पहले से ही ऑर्डर मिलने में देरी को लेकर नाराज ग्राहक जब कर्मचारियों से इस बारे में बात करने लगे तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल ऑर्डर को लेकर था लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। मामला इतना बढ़ गया कि ग्राहकों और बेकरी कर्मचारियों के बीच मारपीट शुरू हो गई। घटना में बेकरी कर्मचारी देवराज सेन ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। देवराज का आरोप है कि प्रिंस और संजू ने उसके साथ मारपीट की। इस दौरान उसके सिर में चोट आई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।

    वहीं दूसरी ओर प्रिंस और संजू चौहान ने भी पुलिस के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। दोनों का आरोप है कि बेकरी कर्मचारी देवराज सेन के अलावा संचालक जसपाल और राजू ने उनके साथ मारपीट की। इस तरह विवाद में दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे पर मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत को दर्ज किया। कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के मुताबिक विवाद चीज पिज्जा की जगह वेज पिज्जा दिए जाने और ऑर्डर में देरी को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस घटना से जुड़े लोगों के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही विवाद की वास्तविक वजह और मारपीट की परिस्थितियों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। मामूली बात से शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस केस तक पहुंच गया है। पिज्जा के ऑर्डर में हुई गलती और देरी को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने कुछ ही देर में ऐसा रूप ले लिया कि ग्राहकों और कर्मचारियों दोनों को थाने पहुंचना पड़ा।

  • गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया

    नई दिल्ली । गंगा स्नान से जुड़े दो वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दोनों वीडियो में एक महिला गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है, लेकिन महिला के पहनावे और दृश्य में स्पष्ट अंतर नजर आता है। एक वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में दिखाई दे रही है, जबकि दूसरे वीडियो में वह सलवार सूट पहने हुए गंगा स्नान करती नजर आती है। दोनों वीडियो सामने आने के बाद इनकी वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में महिला के बाद एक युवक गंगा में स्नान करने के लिए जाता दिखाई देता है। इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति भी गंगा की ओर जाता नजर आता है। घटनाओं और गतिविधियों का यह क्रम दोनों वीडियो में काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। महिला के दृश्य में अंतर होने के कारण अब वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।

    पहले वीडियो में महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई देती है। इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ता है। उसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसे किस स्थान पर बनाया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए दिखाई देती है। इस वीडियो में भी महिला के स्नान के बाद युवक और बुजुर्ग के गंगा की ओर जाने की गतिविधियां पहले वीडियो से मिलती-जुलती नजर आती हैं। यही समानता दोनों वीडियो की सत्यता को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बनी हुई है।

    दोनों वीडियो में महिला के दृश्य में अंतर और बाकी गतिविधियों की समानता को देखते हुए इनके AI की मदद से तैयार किए जाने या डिजिटल तरीके से बदले जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो वास्तव में AI से बनाए गए हैं या इनमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। संस्था के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखे हैं। उनका कहना है कि यदि AI के जरिए महिलाओं के चित्र या वीडियो को इस तरह गंगा के बीच दिखाया जा रहा है तो यह निंदनीय है।

    नितिन गौतम ने ऐसे वीडियो को तीर्थ और महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की मांग रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के कारण इस तरह की सामग्री तैयार करना आसान हो गया है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।

    फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनके रिकॉर्ड होने की तारीख, वास्तविक स्थान और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानने से पहले आधिकारिक या तकनीकी जांच का इंतजार करना जरूरी है। वीडियो में दिखाई देने वाली समान गतिविधियां AI से छेड़छाड़ की आशंका जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • घर में 10 बच्चे फिर भी छह को खोज रहा था पिता पत्नी की तलाश के बीच ट्रेन से कटकर मौत

    घर में 10 बच्चे फिर भी छह को खोज रहा था पिता पत्नी की तलाश के बीच ट्रेन से कटकर मौत


    देवास । देवास में पत्नी और बच्चों की तलाश कर रहे 45 वर्षीय व्यक्ति की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना मंगलवार रात विजयनगर क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर हुई। मृतक की पहचान मोती बंगला निवासी सरदार पिता पिट्टू डामोर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सरदार पिछले करीब एक महीने से अपनी पत्नी और छह बच्चों की तलाश में इधर उधर भटक रहा था। इसी दौरान मंगलवार रात रेलवे ट्रैक पर हुए हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

    जानकारी के मुताबिक सरदार और उसकी पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। करीब एक महीने पहले भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। विवाद के बाद उसकी पत्नी अपने छह बच्चों को लेकर घर से चली गई थी। पत्नी के घर से जाने के बाद सरदार लगातार उन्हें तलाश कर रहा था। उसने पत्नी के मायके में भी जानकारी ली और वहां जाकर बच्चों के बारे में पता करने की कोशिश की लेकिन उसे कोई सुराग नहीं मिला।

    सरदार के कुल 10 बच्चे बताए गए हैं। इनमें से चार बच्चे फिलहाल उसके साथ रह रहे थे जबकि छह बच्चे उसकी पत्नी के साथ घर से चले गए थे। पत्नी और बच्चों के अचानक चले जाने के बाद सरदार उनकी तलाश में लगातार परेशान था। परिवार और आसपास के लोगों से भी उसने जानकारी जुटाई लेकिन पत्नी और बच्चों का पता नहीं चल सका।

    मंगलवार रात करीब 9:30 बजे विजयनगर क्षेत्र में सरदार रेलवे ट्रैक पर था। इसी दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।

    पुलिस ने घटना की जानकारी मृतक के परिवार और मोहल्ले के लोगों को दी। बुधवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे से जुड़े परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सरदार रेलवे ट्रैक पर किस वजह से पहुंचा था। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पत्नी और छह बच्चों के घर से चले जाने के बाद करीब एक महीने तक उनकी तलाश करने की बात सामने आई है। इसी दौरान उसकी ट्रेन से कटकर मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम का माहौल है और अब पुलिस घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।

  • साउथ Vs बॉलीवुड: 1000 करोड़ क्लब में बराबर फिल्में, फिर भी कुल कमाई में हिंदी सिनेमा ने कैसे बनाई बढ़त?

    साउथ Vs बॉलीवुड: 1000 करोड़ क्लब में बराबर फिल्में, फिर भी कुल कमाई में हिंदी सिनेमा ने कैसे बनाई बढ़त?

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में 1000 करोड़ रुपये का आंकड़ा अब सिर्फ एक बॉक्स ऑफिस नंबर नहीं, बल्कि इंडस्ट्री की ताकत और फिल्मों की पहुंच का बड़ा पैमाना बन चुका है। कभी यह मुकाम सिर्फ चुनिंदा साउथ फिल्मों के नाम था, लेकिन अब बॉलीवुड ने भी इस क्लब में अपनी मजबूत जगह बना ली है।

    खास बात यह है कि 1000 करोड़ क्लब में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की फिल्मों की संख्या बराबर है। फिर भी कमाई के मामले में बॉलीवुड का पलड़ा भारी है। यहां जानिए कैसे?

    किस फिल्म से हुई 1000 करोड़ क्लब की शुरुआत?

    1000 करोड़ क्लब की शुरुआत भारतीय सिनेमा में एसएस राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ से हुई थी। इसके बाद साउथ की कई फिल्मों ने इस आंकड़े को पार किया और हिंदी सिनेमा के लिए भी एक नया बॉक्स ऑफिस बेंचमार्क तैयार किया। अब ‘बाहुबली 2’ से शुरू हुआ ये सिलसिला रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ तक जा पहुंचा है।

    लिस्ट में शामिल हैं कौन सी फिल्में?

    अब सवाल यह है कि आखिर बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों के बीच 1000 करोड़ की कमाई का यह मुकाबला कितना दिलचस्प है? किस इंडस्ट्री की फिल्मों ने कौन से नंबर पर अपना दबदबा बनाया और साथ ही अगर पांच-पांच फिल्मों की कमाई का टोटल किया जाए तो कौन आगे होगा? आइए जानते हैं इसके बारे में।

    कल्कि (1042 करोड़ रुपये)

    दसवें नंबर पर ‘कल्कि’ है। प्रभास, दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन स्टारर 2024 में रिलीज हुई थी। अब मेकर्स जल्द ही इसका दूसरा पार्ट भी लेकर आ सकते हैं।

    पठान (1055 करोड़ रुपये)

    नौवें नंबर पर शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की मूवी ‘पठान’ है। साल 2023 में आई इस मूवी का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद ने किया था।

    जवान (1160 करोड़ रुपये)

    आठवें नंबर पर भी शाहरुख खान स्टारर फिल्म ‘जवान’ है। 2023 में आई इस मूवी का निर्देशन एटली कुमार ने किया था। इसमें किंग खान के साथ नयनतारा, रिद्धि डोगरा और विजय सेतुपति समेत कई सितारे नजर आए थे।

    केजीएफ 2 (1215 करोड़ रुपये)

    सातवें नंबर पर यश स्टारर फिल्म ‘केजीएफ 2’ 2022 में आई थी। इस मूवी में अभिनेता के साथ रवीना टंडन, संजय दत्त, श्रीनिधि शेट्टी समेत कई सितारे नजर आए। फिल्म का निर्देशन प्रशांत नील ने किया था।

    आरआरआर (1230 करोड़ रुपये)

    लिस्ट में छठे नंबर पर एसएस राजामौली की ही फिल्म ‘आरआरआर’ है, जो 2022 में आई थी। इसमें आलिया भट्ट, राम चरण और जूनियर एनटीआर नजर आए थे।

    धुरंधर (1307 करोड़ रुपये)

    पांचवें नंबर पर रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ है, जो साल 2025 के दिसंबर में आई थी। फिल्म का निर्देशन आदित्य धर ने किया था। इसमें अर्जुन रामपाल, आर माधवन समेत कई स्टार्स दिखाई दिए।

    पुष्पा 2 (1788 करोड़ रुपये)

    चौथे नंबर पर ‘पुष्पा 2’ है, अल्लू अर्जुन स्टारर यह मूवी 2024 में आई थी। फिल्म का निर्देशन सुकुमार ने किया था।

    बाहुबली 2 (1788 करोड़ रुपये)

    तीसरे नंबर पर प्रभास स्टारर ‘बाहुबली 2’ है, जो 2017 में आई थी। एसएस राजामौली के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया समेत कई सितारे नजर आए।

    धुरंधर 2 (1813 करोड़ रुपये)

    दूसरे नंबर पर ‘धुरंधर 2’ है। रणवीर सिंह स्टारर यह मूवी इसी साल मार्च में रिलीज हुई थी। इसमें रणवीर के अलावा माधवन, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और सारा अर्जुन जैसे कलाकार मौजूद थे।

    दंगल (2070 करोड़ रुपये)

    टॉप पर ‘दंगल’ है, जिसने 2070 करोड़ रुपये कमाए। आमिर खान की यह फिल्म 2016 में रिलीज हुई थी। इसमें अभिनेता के साथ फातिमा सना शेख, सान्या मल्होत्रा समेत कई सितारे नजर आए।

    कैसे बॉलीवुड है रेस में आगे?

    वैसे तो इस फेहरिस्त में पांच फिल्में बॉलीवुड की हैं तो वहीं पांच साउथ की भी हैं, पर अगर फिल्मों की कमाई का विश्लेषण करें, तो बॉलीवुड फिल्में इस क्लब में टॉप पर हैं। समझिए कैसे?अगर इस लिस्ट में शामिल बॉलीवुड की पांच फिल्मों ‘दंगल’, ‘धुरंधर 2’, ‘धुरंधर’, ‘जवान’ और ‘पठान’ के कलेक्शन का टोटल किया जाए, तो यह 7405 करोड़ रुपये होगा।

    वहीं, साउथ की फिल्म ‘बाहुबली 2’, ‘पुष्पा 2’, ‘आरआरआर’, ‘केजीएफ 2’ और ‘कल्कि’ का टोटल किया जाए तो यह 7017 करोड़ होगा। इन आंकड़ों से भी साफ जाहिर है कि बॉलीवुड यहां भी आगे है।

  • मेडिकल यूनिवर्सिटी के 250 करोड़ के फंड पर भी विवाद उज्जैन को 70 फीसदी राशि देने पर आपत्ति

    मेडिकल यूनिवर्सिटी के 250 करोड़ के फंड पर भी विवाद उज्जैन को 70 फीसदी राशि देने पर आपत्ति


    जबलपुर। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पुनर्गठन का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। विश्वविद्यालय को दो हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया को लेकर जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे सहित अन्य लोगों ने याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश की इकलौती मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन में जबलपुर के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

    याचिका में मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पुनर्गठन से जुड़े राजपत्र में प्रकाशित संशोधन अधिनियम के साथ मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए ढांचे के तहत जबलपुर विश्वविद्यालय के हिस्से में चार संभाग रखे गए हैं जबकि उज्जैन में गठित धन्वंतरि विश्वविद्यालय को छह संभाग दिए गए हैं। याचिका में इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि पुनर्गठन की प्रक्रिया समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत में पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर कई आपत्तियां रखीं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के विभाजन से पहले किसी विशेषज्ञ समिति से विस्तृत अध्ययन नहीं कराया गया। इसके अलावा प्रक्रिया की व्यवहार्यता को लेकर भी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं कराई गई। याचिका में दावा किया गया है कि इतने बड़े संस्थागत बदलाव से पहले प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रभाव का विशेषज्ञ स्तर पर आकलन किया जाना जरूरी था। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    मामले में विश्वविद्यालय की आर्थिक संपत्तियों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बन गया है। याचिका के अनुसार मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पास करीब 250 करोड़ रुपए का रिजर्व फंड है। याचिकाकर्ताओं ने इस राशि के बंटवारे को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। आरोप है कि रिजर्व फंड की करीब 70 प्रतिशत राशि उज्जैन में गठित धन्वंतरि विश्वविद्यालय को दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। याचिका में इस राशि के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय का पुनर्गठन केवल प्रशासनिक सीमाओं का बदलाव नहीं है बल्कि इसका सीधा असर मेडिकल शिक्षा से जुड़े संस्थानों और विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संभागों के बंटवारे और आर्थिक संसाधनों के वितरण को लेकर स्पष्ट और समान नीति जरूरी है। हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुनर्गठन की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर उसका क्या रुख है।

  • छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    छतरपुर गोलीकांड में बड़ा अपडेट शालिगराम गर्ग को मिली जमानत 50 हजार के मुचलके पर रिहाई के निर्देश

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में हुए चर्चित गोलीकांड के आरोपी शालिगराम गर्ग उर्फ छोटे सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। बागेश्वर धाम के संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिगराम की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने उन्हें 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहा करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की सिंगल बेंच ने पहले से सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद अब शालिगराम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

    शालिगराम गर्ग के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर छतरपुर के कोड़ा गांव निवासी मोतीलाल कुशवाहा पर जानलेवा हमला किया था। शिकायत के मुताबिक घटना के दौरान गोली भी चलाई गई थी और एक गोली मोतीलाल के सीने में जाकर फंस गई थी। घायल मोतीलाल का जिला अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था जिसके बाद गोली निकाल दी गई थी। इस मामले में रघुराजनगर थाना पुलिस ने जांच के बाद शालिगराम को 15 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था।

    जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शालिगराम की ओर से अधिवक्ता रोहित रघुवंशी और अमित दवे ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि शालिगराम को राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिश के चलते मामले में फंसाया गया है। वकीलों ने यह भी दलील दी कि आरोपी को बदनाम करने के उद्देश्य से उसके खिलाफ मामला बनाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए 50 हजार रुपए के मुचलके पर रिहाई के निर्देश दिए।

    पूरा मामला जुलाई 2026 में सामने आया था। मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया था कि शालिगराम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे थे। शिकायत के अनुसार उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें घर से बाहर खींचकर लाठी डंडों से पीटा गया। इसके बाद गोली चलाए जाने का आरोप लगाया गया। मोतीलाल के सीने में गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।

    मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई थी। पुलिस जांच में CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। एक तस्वीर में शालिगराम के हाथ में हथियार दिखाई देने का दावा किया गया था। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और बाद में शालिगराम को गिरफ्तार कर लिया।

    इस मामले में जमीन विवाद की बात भी सामने आई थी। घायल मोतीलाल ने आरोप लगाया था कि शालिगराम उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। हालांकि यह आरोप मामले की शिकायत और बयान का हिस्सा हैं और अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इन पर निर्णय होना बाकी है।

    मामले पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि शालिगराम गर्ग से उनका कोई संबंध नहीं है और वह इस बात को पहले भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने घटना को लेकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की बात कही थी। फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शालिगराम की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

  • पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी

    पिता की संदिग्ध मौत का था बदला लेना 21 अगस्त की रात फूफा की हत्या अब पुलिस ने दबोचा आरोपी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने मोहर सिंह रावत की हत्या के आरोप में उनके भतीजे दिलीप रावत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी को शक था कि करीब 7 से 8 साल पहले उसके पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे उसके फूफा मोहर सिंह रावत का हाथ था। इसी बात को लेकर उसके मन में लंबे समय से नाराजगी थी। पुलिस का कहना है कि इसी पुरानी रंजिश के चलते दिलीप ने हत्या की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

    घटना 21 अगस्त की रात रातीकिरार पुलिया के पास हुई। पुलिस के अनुसार दिलीप ने शराब के नशे में मोहर सिंह के साथ मारपीट की। इसके बाद पत्थर से उनके सिर पर हमला किया जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने शव को सड़क से नीचे ले जाकर छिपाने की कोशिश भी की। हालांकि वह ज्यादा नशे में था और शव को अधिक दूर तक नहीं ले जा सका। इसके बाद वह मौके से फरार हो गया।

    22 अगस्त को जाफरपुर निवासी मिथुन रावत ने सिरसौद थाने में अपने पिता मोहर सिंह के लापता होने की सूचना दी। परिवार के मुताबिक मोहर सिंह 21 अगस्त को दोपहर करीब 12 बजे अपने भतीजे दिलीप के साथ शिवपुरी से छिमछिमा मंदिर जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। इसी बीच गांव के युवक दुर्वेन्द्र रावत ने परिजनों को जानकारी दी कि मोहर सिंह रातीकिरार पुलिया के पास पड़े हुए हैं। परिवार के लोग तुरंत वहां पहुंचे तो मोहर सिंह मृत अवस्था में मिले।

    मामले की जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे और सिर बुरी तरह कुचला गया था। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल और साइबर सेल की मदद ली। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। जांच आगे बढ़ने के साथ ही पुलिस का शक मोहर सिंह के भतीजे दिलीप रावत पर गहराता गया।

    पुलिस के मुताबिक इसी दौरान दिलीप गांव छोड़कर फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। 14 सितंबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दिलीप को शिवपुरी में पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी मथुरा से शिवपुरी की ओर आ रहा था। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने कथित तौर पर वारदात और हत्या की वजह के बारे में जानकारी दी।

    पूछताछ में सामने आया कि दिलीप के पिता प्रीतम रावत की करीब 7 से 8 साल पहले संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। यह मौत उसकी बुआ के घर यानी मोहर सिंह के घर पर हुई थी। दिलीप को लंबे समय से शक था कि उसके पिता की मौत के लिए मोहर सिंह जिम्मेदार थे। इसी शक और पुरानी रंजिश को लेकर उसके मन में फूफा के खिलाफ गुस्सा बना हुआ था।

    पुलिस के अनुसार 21 अगस्त की रात शराब के नशे में उसने मोहर सिंह के साथ मारपीट की और पत्थर से सिर पर हमला कर दिया। बाद में शव को ठिकाने लगाने के लिए दोबारा घटनास्थल पर पहुंचा और उसे घसीटकर सड़क से नीचे ले जाने की कोशिश की। लेकिन नशे की हालत में वह सफल नहीं हो सका और मौके से भाग गया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

  • शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म

    शिवपुरी में सिंध नदी का गहरा पानी बना काल 14 साल के सौरभ की तलाश 18 घंटे बाद हुई खत्म


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के बिजरौनी गांव के पास सिंध नदी में मंगलवार दोपहर डूबे 14 साल के सौरभ कुशवाह का शव बुधवार सुबह बरामद कर लिया गया। बच्चे की तलाश के लिए करीब 18 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। बुधवार सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी में शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची परिवार में चीख पुकार मच गई। परिजन बदहवास होकर मौके पर पहुंचे और बच्चे का शव देखते ही रोने लगे।

    जानकारी के मुताबिक मंगलवार को ऋषिपंचमी के अवसर पर बिजरौनी गांव की कुछ महिलाएं सिंध नदी के किनारे पूजा और स्नान करने पहुंची थीं। उनके साथ परिवार के बच्चे भी मौजूद थे। सौरभ भी अपनी मां के साथ नदी पर गया था। महिलाएं नदी किनारे पूजा की तैयारी में जुटी थीं इसी दौरान सौरभ नहाने के लिए नदी के पानी में उतर गया। देखते ही देखते वह गहरे पानी की तरफ चला गया और डूब गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी की गहराई अधिक होने के कारण तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद एसडीईआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने मंगलवार दोपहर से नदी में सौरभ की तलाश शुरू कर दी। गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने नदी के आसपास काफी देर तक तलाश की लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। शाम होने के बाद अंधेरा बढ़ गया जिसके चलते रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद बुधवार सुबह दोबारा तलाश शुरू करने का फैसला लिया गया।

    बुधवार सुबह करीब 4 बजे सौरभ के परिजन और गांव के लोग फिर नदी के किनारे पहुंच गए। ग्रामीणों ने भी अपने स्तर पर नदी में बच्चे की तलाश शुरू कर दी। कई घंटे की कोशिश के बाद सुबह करीब 8 बजे घटनास्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी के पानी में सौरभ का शव दिखाई दिया। शव को बाहर निकाला गया और पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।

    सौरभ की मौत के बाद ग्रामीणों में सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन को लेकर भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से रेत निकालने के लिए कई जगह गहरे गड्ढे बनाए गए हैं। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाता है और वे सामान्य नदी के तल से अलग नजर नहीं आते। ऐसे में नदी में नहाने वाले लोगों को पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं हो पाता। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के गहरे गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ा रहे हैं।

    पुलिस ने शव बरामद करने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सौरभ की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बिजरौनी गांव में भी शोक का माहौल है। ऋषिपंचमी के दिन मां के साथ पूजा के लिए नदी पर गया सौरभ वापस घर नहीं लौट सका। करीब 18 घंटे की तलाश के बाद उसका शव मिलने से परिवार की उम्मीदें भी टूट गईं।

  • ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता

    ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता


    भोपाल । AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भोपाल में दिए गए बयान के बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार किया है। ओवैसी ने मंगलवार को भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित UCC विरोधी सभा के दौरान रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र किया था। उन्होंने विधायक को काजी कैंप आने की चुनौती दी थी। इसके बाद बुधवार को रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने पुराने बयान पर कायम रहने की बात कही।

    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद विधायक ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ओवैसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय सेना ने किया और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। शर्मा ने दावा किया कि आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत की मिसाइल कार्रवाई जारी रहेगी।

    विधायक ने कहा कि मिसाइल चलती थी और मिसाइल चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां आतंकवाद के कैंप होंगे और जहां भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कैंप होंगे वहां भारत की मिसाइल तैयार है। शर्मा ने कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं। उन्होंने ओवैसी को पूरा भाषण सुनने की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वह वकील होने के नाते इसे अदालत में ले जा सकते हैं।

    इसके बाद रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी ओवैसी के बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल हिंदुओं से वोट मांगते हैं तो हिंदुओं से जुड़े कानूनों को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं। उन्होंने UCC को लेकर अपनी पार्टी के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि मध्यप्रदेश में UCC लागू हो चुका है। शर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है।

    ओवैसी ने भोपाल में आयोजित अपनी सभा में UCC को लेकर अलग रुख रखा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को उनकी संस्कृति परंपरा और धार्मिक पहचान के कारण UCC से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों शामिल किया गया। उन्होंने UCC के जरिए RSS का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था। ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों का भी हवाला दिया था।

    इस तरह भोपाल में UCC को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर ओवैसी UCC के प्रावधानों और इसके दायरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर रामेश्वर शर्मा इसे लागू करने के समर्थन में अपना पक्ष रख रहे हैं। मिसाइल संबंधी पुराने बयान को लेकर ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा के जवाब ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

  • सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान

    सीधी में सांसद को चेतावनी खंडवा में कुत्ते को ज्ञापन इंदौर में राहुल गांधी पर विजयवर्गीय का चुटीला बयान


    सीधी । मध्यप्रदेश में मंगलवार को राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं चर्चा में रहीं। सीधी में सड़क की बदहाली को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें सड़क निर्माण शुरू नहीं होने पर कड़ी चेतावनी दी। वहीं इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र कार्यक्रम को लेकर सवाल पूछे जाने पर ऐसा जवाब दिया जिस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग हंस पड़े। दूसरी ओर खंडवा में कलेक्टर के किसानों से नहीं मिलने पर प्रदर्शनकारियों ने कुत्ते के गले में ज्ञापन बांधकर विरोध जताया। रतलाम में भी किसानों ने कलेक्ट्रेट में हनुमान चालीसा का पाठ किया।

    सीधी में सड़क की खराब हालत को लेकर आंदोलन कर रहीं लीला साहू ने भाजपा सांसद राजेश मिश्रा को सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि इसी साल सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो सांसद की सांसदी चली जाएगी। उन्होंने अपने बयान में महिला शक्ति और रावण के संदर्भ का उदाहरण देते हुए सांसद के साम्राज्य के खत्म होने की बात कही।

    लीला साहू के मुताबिक उनके गांव की सड़क लंबे समय से खराब है। सड़क पर कीचड़ जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही मुश्किल है और पैदल चलने में भी लोगों को परेशानी होती है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस के गांव तक पहुंचने में भी दिक्कत हो सकती है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने धरना प्रदर्शन शुरू किया है।

    लीला साहू ने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया जिसमें उनके मुताबिक गर्भावस्था के दौरान सांसद की ओर से हेलिकॉप्टर से ले जाने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांव की गर्भवती महिलाओं को वास्तव में परेशानी हो रही है तो उनकी मदद के लिए हेलिकॉप्टर क्यों नहीं आया।

    इधर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी बढ़ाने के लिए रैपर्स और सिंगर्स को बुलाए जाने की चर्चा के बीच विजयवर्गीय ने तंज करते हुए कहा कि जबरदस्ती बुला रहे हैं और राहुल गांधी इसके लिए पर्याप्त हैं। उनके इस बयान के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया। यह बयान राजनीतिक तंज के तौर पर सामने आया।

    खंडवा में किसानों का विरोध प्रदर्शन अलग वजह से चर्चा में आ गया। किसान अपनी मांगों को लेकर रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे कलेक्टर को ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन कलेक्टर के कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद किसानों ने विरोध के अनोखे तरीके के तौर पर एक कुत्ते के गले में ज्ञापन बांध दिया।

    भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने भी इस दौरान प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कलेक्टर को लेकर कड़ा बयान दिया और कहा कि वे अधिकारियों की अकड़ निकालने का काम करेंगे। इसी तरह रतलाम में भी किसानों के कलेक्टर से नहीं मिलने पर नाराजगी सामने आई। किसानों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।

    इन घटनाओं के बीच मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक IAS अधिकारी की ऊर्जा विभाग में वापसी को लेकर भी चर्चाएं चलती रहीं। खबर में दावा किया गया है कि अधिकारी अपनी वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं और दिल्ली स्तर पर भी संपर्क साधे जा रहे हैं। साथ ही उनके बिहार से जुड़े पारिवारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा का उल्लेख किया गया है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं रखी गई है।

    इस तरह मंगलवार को मध्यप्रदेश में सड़क की बदहाली से लेकर किसानों के विरोध और नेताओं के राजनीतिक बयानों तक कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। सीधी में सड़क आंदोलन खंडवा में अनोखा ज्ञापन और इंदौर में राहुल गांधी को लेकर विजयवर्गीय का बयान खास तौर पर चर्चा में रहा।