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  • टीएमसी पर हमले को लेकर सियासत गरम, भाजपा-विपक्ष में तकरार

    टीएमसी पर हमले को लेकर सियासत गरम, भाजपा-विपक्ष में तकरार


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी नेताओं पर हुए कथित हमलों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस घटना के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

    टीएमसी की ओर से दावा किया जा रहा है कि उसके नेताओं पर हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला हैं, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह घटनाएं जनता में बढ़ते आक्रोश का परिणाम हैं। इसी बीच विभिन्न दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

    कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में हालात चिंताजनक हैं और वहां तक कि सांसद भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भय का माहौल बनाया गया है और आम जनता भी असुरक्षित महसूस कर रही है।

    वहीं जेडीयू नेता हरि नारायण सिंह ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में लंबे समय से तनावपूर्ण माहौल रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाएं अचानक नहीं हैं, बल्कि यह जनता की नाराजगी का परिणाम हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर भी असंतोष और टूट की स्थिति बन रही है।

    दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इन घटनाओं को जनता की प्रतिक्रिया बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जब पहले हिंसा की घटनाएं हुईं, तब वही नेता चुप थे, और अब स्थिति बदलने पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दिया।

    इसी मुद्दे पर जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के भीतर असंतोष और इस्तीफों की खबरें यह संकेत देती हैं कि पार्टी आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही है।

    पूरा विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे राज्य में कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • ईरान पर जरूरत पड़ी तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया तनाव फिर बढ़ा

    ईरान पर जरूरत पड़ी तो फिर होगी सैन्य कार्रवाई: इजरायली राजदूत का बड़ा बयान, वेस्ट एशिया तनाव फिर बढ़ा

    नई दिल्ली। वेस्ट एशिया में तनाव और कूटनीतिक हलचल के बीच इजरायल ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। नई दिल्ली स्थित इजरायली दूतावास के राजदूत रियूवेन अजार ने साफ कहा है कि यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं तो इजरायल ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हैं और पश्चिम एशिया में तनाव को कम करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, इजरायल ने संकेत दिया है कि वह सुरक्षा से जुड़े किसी भी खतरे को लेकर समझौता नहीं करेगा।

    इजरायली राजदूत ने कहा कि ईरानी सत्ता पिछले दो दशकों से क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है। उनका आरोप है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) तथा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दिशा-निर्देशों का पालन ठीक से नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि IAEA की रिपोर्टों में भी ईरान की अनुपालन स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।

    राजदूत के अनुसार, यदि कोई देश कानूनी अधिकारों का दावा करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन भी करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कदम उठाएगा।

    इसी बीच लेबनान को लेकर भी इजरायल ने अपना रुख स्पष्ट किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए गए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई उसके उत्तरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    राजदूत अजार ने दावा किया कि संघर्षविराम के बावजूद इजरायल पर 1000 से अधिक रॉकेट और ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें कई नागरिकों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह स्थायी संघर्षविराम और हमले रोकने की गारंटी नहीं देता, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।

    इजरायल ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल सैन्य ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता के लिए भी योगदान देने को तैयार है, बशर्ते सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रहे। राजदूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता तभी संभव है जब सभी पक्ष जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें और आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगे।

    इस बयान के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब कूटनीतिक प्रयासों से शांति की उम्मीदें भी बनी हुई हैं।

  • भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान

    भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलने की उम्मीद है।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विज़न की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और देश में रोजगार सृजन को गति देगा।

    CEPA लागू होने के बाद ओमान में भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिल जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। पहले जहां केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर ही शुल्क-मुक्त पहुंच थी, अब यह दायरा बेहद व्यापक हो गया है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते से ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य अवधि में यह 10 अरब डॉलर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।

    विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।

    इस समझौते के तहत भारत ने भी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू—को किसी भी रियायत से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

    इसके अलावा सोना-चांदी, आभूषण और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों पर भी सीमित या कोटा आधारित व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि यह संतुलित समझौता भारत के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार को मजबूती देगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत की सेवाक्षेत्र अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि ओमान का आयात बाजार बड़ा और विविध है, जो भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

  • मारुति सुजुकी की रिकॉर्ड बिक्री, मई में 2.43 लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा

    मारुति सुजुकी की रिकॉर्ड बिक्री, मई में 2.43 लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा


    नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मई में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 2,42,688 वाहनों की बिक्री दर्ज की है। यह कंपनी के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री है, जिसने अप्रैल में बने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    कंपनी के अनुसार, मई 2025 की तुलना में इस साल मई में कुल बिक्री में लगभग 34.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,80,077 यूनिट्स था।

    घरेलू बाजार में कंपनी ने 1,93,535 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 1,38,690 यूनिट्स की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत अधिक है। वहीं, निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स तक पहुंच गया। इसके अलावा अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को 7,239 वाहनों की आपूर्ति की गई।

    मारुति के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट, जिसमें हैचबैक, सेडान, वैन और SUV शामिल हैं, ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस श्रेणी में कुल 1,90,337 वाहन बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,35,962 था।

    SUV और यूटिलिटी वाहनों की मांग में भी तेज उछाल देखा गया। ब्रेजा, फ्रॉन्क्स, जिम्नी, ग्रैंड विटारा, अर्टिगा, XL6 और इनविक्टो जैसे मॉडलों की बिक्री 44.4 प्रतिशत बढ़कर 79,267 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    छोटे कार सेगमेंट में भी मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जहां ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री दोगुने से अधिक होकर 16,275 यूनिट्स हो गई।

    कंपनी का निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स पर पहुंच गया, जो पिछले साल मई में 31,219 यूनिट्स था। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई।

    मारुति सुजुकी ने इससे पहले अप्रैल में भी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी और लगातार मजबूत मांग के चलते कंपनी का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है।

    कंपनी भविष्य में लॉजिस्टिक्स को और अधिक कुशल बनाने के लिए रेल परिवहन का उपयोग बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत 2030-31 तक वाहनों की ढुलाई में रेल हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

    इसके अलावा कंपनी ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण जून 2026 से कई मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।

  • भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद

    भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तेज़ी आने की उम्मीद है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाना है।

    सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का ओमान को निर्यात करीब 4.06 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाने और मध्य अवधि में 10 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।

    समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इसका लाभ भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को मिलेगा। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता उद्योग, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    वहीं भारत ने भी ओमान के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान के भारत को होने वाले आयात का लगभग 94.81 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि ओमान का सेवा आयात लगभग 12.52 अरब डॉलर का है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

    भारत और ओमान ने इस समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा भारत हाल के वर्षों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा चुका है।

  • जबलपुर के जस्टिस रूसिया को नई भूमिका, न्यायपालिका में अहम नियुक्ति

    जबलपुर के जस्टिस रूसिया को नई भूमिका, न्यायपालिका में अहम नियुक्ति


    जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। न्यायाधीश विवेक रूसिया को हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं।

    यह नियुक्ति उस समय हुई जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का प्रमोशन सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में हो गया। उनके स्थान पर अब जस्टिस विवेक रूसिया ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाली है।

    जस्टिस विवेक रूसिया का जन्म 2 अगस्त 1969 को जबलपुर में हुआ था। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1992 में मध्यप्रदेश राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीयन कराया था। उनके पिता स्वर्गीय प्रभाकर रूसिया भी जबलपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं, जिससे उनका कानूनी क्षेत्र से जुड़ाव शुरू से ही रहा।

    उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ सहयोगी के रूप में की और बाद में 1998 में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। इसके बाद वे कोल इंडिया, विभिन्न पावर कंपनियों और सरकारी संस्थानों के पैनल वकील बने।

    जस्टिस रूसिया ने भारत सरकार के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन, जबलपुर में संयुक्त सचिव के पद पर भी रहे।

    7 अप्रैल 2016 को उन्हें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और 17 मार्च 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने।

    अब उनकी नियुक्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुई है, जिससे न्यायपालिका में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया अध्याय शुरू हुआ है।

  • जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर

    जबलपुर में महिला जेल प्रहरी का गंभीर आरोप, नौकरी छोड़ने को हुई मजबूर


    जबलपुर। पाटन सब जेल में पदस्थ एक महिला जेल प्रहरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण वह नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गई है। महिला प्रहरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर शिकायत की है कि ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उसका पीछा किया जाता है और उसे मानसिक दबाव में रखा जा रहा है।

    पूरा विवाद वर्ष 2024 में जेल परिसर में हुई एक घटना से शुरू हुआ बताया जा रहा है, जब एक व्यक्ति बिना अनुमति मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा था। महिला प्रहरी द्वारा नियमों के अनुसार रोके जाने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद से लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

    महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है और धमकियां भी दी जा रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी द्वारा उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” साथ ही यह भी आरोप है कि उसके खिलाफ दबाव बनाने और समझौते के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।

    जेल प्रशासन के अनुसार, महिला कर्मचारी 2018 से पदस्थ है और पहले स्थिति सामान्य थी, लेकिन 2024 के बाद से विवाद बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जानकारी पुलिस और उच्च अधिकारियों सहित मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंचाई गई है। इस संबंध में 17 जनवरी 2026 को एफआईआर भी दर्ज की गई, हालांकि पुलिस ने आरोपी को जमानत दे दी थी।

    सब जेलर का कहना है कि महिला प्रहरी अकेले सरकारी आवास में रहती है और लगातार तनाव व दबाव से गुजर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है।

    वहीं, आरोपित पक्ष का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और वे स्वयं जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है और यदि किसी प्रकार के आरोप हैं तो उसके सबूत पेश किए जाएं।

    जेल प्रशासन ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक बंदी द्वारा खुद को चोट पहुंचाने की घटना सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बंदी ने स्वयं को घायल किया था और बाद में इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।

    फिलहाल, मामला पुलिस जांच और विभागीय स्तर पर समीक्षा में है। महिला प्रहरी ने सुरक्षा और मानसिक तनाव के चलते नौकरी छोड़ने तक का संकेत दिया है।

  • चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल

    चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क में बड़ा बदलाव: सूखे इलाके हुए आबाद, बढ़ी वन्यजीवों की हलचल


    भोपाल। चीता प्रोजेक्ट के बाद कूनो नेशनल पार्क अब तेजी से बदलते इकोसिस्टम की मिसाल बनता जा रहा है। जिन पहाड़ी और सूखे क्षेत्रों में पहले पानी की भारी कमी रहती थी और गर्मियों में वन्यजीव पलायन कर जाते थे, वहां अब हालात बदल गए हैं। सौर ऊर्जा आधारित सोलर लिफ्ट पंप सिस्टम की मदद से कूनो नदी का पानी अब दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे कई तालाब सालभर भरे रहने लगे हैं।

    वन विभाग ने इस दिशा में दो बड़े सोलर पंप सिस्टम स्थापित किए हैं। ओछापुरा रेंज में 42.5 हॉर्स पावर क्षमता वाला पंप कूनो नदी से पानी उठाकर करीब 15 किलोमीटर दूर और 200 मीटर ऊंचाई पर स्थित तालाबों तक पहुंचा रहा है। वहीं वेस्ट पालपुर रेंज में 22.5 हॉर्स पावर का दूसरा सिस्टम 8 किलोमीटर दूर जलाशयों को भर रहा है। इन प्रयासों के कारण पहले जो तालाब गर्मियों में सूख जाते थे, वे अब लगातार जल से भरे रहते हैं।

    वन विभाग के अनुसार यह बदलाव केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वन्यजीवों के आवास और व्यवहार पर भी दिख रहा है। जिन क्षेत्रों से भेड़िया गर्मियों में पलायन कर जाते थे, वे अब पूरे साल स्थायी रूप से देखे जा रहे हैं। चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को अब पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ता।

    कूनो से एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। लंबे समय से विलुप्त माने जा रहे दुर्लभ फॉरेस्ट आउलेट (वन उल्लू) की 113 साल बाद वापसी दर्ज की गई है। यह 2025 से यहां देखा जा रहा है, जिसे विशेषज्ञ पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का संकेत मान रहे हैं।

    इतना ही नहीं, कूनो के इतिहास में पहली बार जंगली कुत्तों (ढोल) की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्र में बढ़ते जैव विविधता संतुलन को दर्शाता है।

    पर्यटन के क्षेत्र में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। कूनो में बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों के चलते पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर नेचर गाइड, पर्यटन सेवाओं और छोटे व्यवसायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    वन विभाग का मानना है कि कूनो अब केवल चीता पुनर्वास परियोजना का केंद्र नहीं, बल्कि एक विकसित होते समृद्ध इकोसिस्टम का उदाहरण बन चुका है, जहां संरक्षण और विकास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

  • 10 गोल्ड समेत 19 मेडल जीतकर भारत का शानदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने सराहा

    10 गोल्ड समेत 19 मेडल जीतकर भारत का शानदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने सराहा


    नई दिल्ली। 22वीं एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया है। भारत ने इस प्रतियोगिता में कुल 19 मेडल अपने नाम किए, जिनमें 10 गोल्ड, 5 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल हैं। टीम के इस बेहतरीन प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह प्रदर्शन भारतीय युवा एथलीटों के दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सफलता आने वाले समय में और अधिक युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करेगी।

    भारतीय टीम ने प्रतियोगिता के आखिरी दिन तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपने अभियान का शानदार समापन किया। महिला 5,000 मीटर दौड़ में मुस्कान ने 16 मिनट 53.08 सेकंड का समय निकालकर बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में मोगली वेंकटराम रेड्डी ने 1 मिनट 48.27 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया।

    डिस्कस थ्रो में निश्चय ने 60.10 मीटर का थ्रो कर सिल्वर मेडल जीता और इस दौरान नया नेशनल अंडर-20 रिकॉर्ड भी बनाया। इसके अलावा भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने शानदार तालमेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया और नया मीट रिकॉर्ड भी स्थापित किया। टीम ने 3 मिनट 38.07 सेकंड में रेस पूरी की, जो पहले के रिकॉर्ड से बेहतर था।

    इस रिले टीम में नीरू पाठक, भूमिका संजय नेहाते, ताहुरा खातून और सहनूर बावा शामिल थीं, जिन्होंने बेहतरीन समन्वय और गति का प्रदर्शन किया। वहीं पुरुष 4×400 मीटर रिले टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 मिनट 05.54 सेकंड का समय निकाला, जो पुराना रिकॉर्ड तोड़ने वाला था। हालांकि मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण टीम को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।

    इसके अलावा भारतीय महिला 4×100 मीटर रिले टीम ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल हासिल किया और 45.05 सेकंड का समय निकाला। इस टीम में काजल हीराभाई वाजा, भावना, आरती और निपम शामिल रहीं।

    इस प्रतियोगिता में भारत का समग्र प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि देश में युवा एथलीटों की नई पीढ़ी तेजी से उभर रही है। खासकर ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भारत की पकड़ मजबूत होती दिख रही है।

    हालांकि मेडल टैली के लिहाज से यह प्रदर्शन 2024 में दुबई में हुए संस्करण से थोड़ा पीछे रहा, लेकिन खिलाड़ियों की व्यक्तिगत उपलब्धियों और रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने भविष्य के लिए मजबूत उम्मीदें जगाई हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी की बधाई ने खिलाड़ियों के मनोबल को और बढ़ाया है, और यह प्रदर्शन भारत के एथलेटिक्स भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • छक्कों की बारिश से छाया वैभव सूर्यवंशी का जलवा, आईपीएल 2026 में बनाया इतिहास

    छक्कों की बारिश से छाया वैभव सूर्यवंशी का जलवा, आईपीएल 2026 में बनाया इतिहास


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का खिताब भले ही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने जीत लिया हो, लेकिन इस पूरे सीजन की सबसे बड़ी कहानी राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के नाम रही। मात्र 15 साल की उम्र में इस खिलाड़ी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया।

    वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में 16 मुकाबलों में 776 रन बनाए और 237 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ गेंदबाजों पर कहर बरपाया। उन्होंने इस सीजन में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए और कई बार अकेले दम पर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। उनकी बल्लेबाजी में सिर्फ आक्रामकता ही नहीं, बल्कि परिपक्वता भी साफ नजर आई।

    सीजन की शुरुआत से ही वैभव ने दिखा दिया था कि वह इस मंच पर लंबे समय तक टिकने आए हैं। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रहकर रन बनाए और टीम के लिए मैच जिताऊ पारियां खेलीं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण गुजरात टाइटंस के खिलाफ दूसरे क्वालीफायर में देखने को मिला, जहां उन्होंने 47 गेंदों पर 96 रनों की शानदार पारी खेली।

    वैभव का यह सीजन सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त भी तैयार की। उन्होंने कुल 72 छक्के लगाए, जो आईपीएल के एक सीजन में किसी भी बल्लेबाज द्वारा सर्वाधिक हैं। इसके अलावा वह सबसे तेज 1000 रन पूरे करने वाले बल्लेबाज भी बने।

    पावरप्ले में उनके प्रदर्शन ने भी सभी को प्रभावित किया, जहां उन्होंने डेविड वॉर्नर जैसे दिग्गज का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सर्वाधिक रन बनाए। वैभव ने एक पारी में 12 छक्के लगाकर नया रिकॉर्ड बनाया और एलिमिनेटर मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ सिर्फ 16 गेंदों में अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया।

    गेंदबाजों के लिए वैभव को रोकना लगभग असंभव साबित हुआ। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और कगिसो रबाडा जैसे दिग्गज गेंदबाजों के खिलाफ भी उन्होंने निडर होकर बल्लेबाजी की। बुमराह के खिलाफ पहली ही गेंद पर लगाया गया उनका छक्का इस सीजन के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया।

    उनके शानदार प्रदर्शन का इनाम उन्हें पांच बड़े अवॉर्ड के रूप में मिला—ऑरेंज कैप, मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर, इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन, सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन और सुपर सिक्सेस ऑफ द सीजन। वह आईपीएल इतिहास के सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता भी बने।

    इस तरह वैभव सूर्यवंशी का आईपीएल 2026 सीजन सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक शुरुआत साबित हुआ, जिसने उन्हें क्रिकेट के भविष्य के सबसे बड़े सितारों में शामिल कर दिया।