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  • Report : अमेरिका ने ईरान जंग में अब तक 38 अरब डॉलर फूंके….., महंगाई पर पड़ेगा युद्ध का असर

    Report : अमेरिका ने ईरान जंग में अब तक 38 अरब डॉलर फूंके….., महंगाई पर पड़ेगा युद्ध का असर


    वाशिंगटन।
    ईरान के खिलाफ युद्ध (Iran War) पर 1 अगस्त तक अमेरिका (America) के रक्षा विभाग के 38 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। यह खर्च आगे भी जारी रहेगा। युद्ध की स्थिति और उसकी तीव्रता के आधार पर हर महीने तीन अरब डॉलर या उससे ज्यादा खर्च हो सकते हैं। यह आकलन मंगलवार को गैर-दलीय संस्था कांग्रेसनल बजट कार्यालय (सीबीओ) (Congressional Budget Office – CBO) ने जारी किया।

    सीबीओ ने कहा कि इस युद्ध का असर महंगाई पर 2027 की पहली तिमाही तक रह सकता है। इसके कारण महंगाई पहले के अनुमान से करीब 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा रह सकती है। इसकी बड़ी वजह तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से इनकी आवाजाही प्रभावित हुई है। लाल सागर से होने वाली जहाजों की आवाजाही में भी बाधा आई है।

    यह अनुमान प्रतिनिधि ब्रेंडन बॉयल के जानकारी मांगने के बाद तैयार किया गया। बॉयल प्रतिनिधि सभा की बजट समिति में सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य हैं। सीबीओ का यह अनुमान पहले दिए गए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुमान से काफी मिलता है। हेगसेथ ने सीनेट में गवाही के दौरान युद्ध की लागत 37.5 अरब डॉलर बताई थी।

    सीबीओ के मुताबिक, इस खर्च का बड़ा हिस्सा युद्ध में इस्तेमाल हुई या नष्ट हुई मिसाइलों, हथियारों और सैन्य उपकरणों को फिर से खरीदने पर हो रहा है। इसमें युद्ध में मारे गए या घायल हुए अमेरिकी सैनिकों का खर्च शामिल नहीं है। इसमें भविष्य में सैनिकों की स्वास्थ्य देखभाल और विकलांगता मुआवजे का खर्च भी शामिल नहीं किया गया है।

    ब्रेंडन बॉयल ने कहा कि युद्ध की मानवीय कीमत के अलावा अमेरिकी लोगों को इसकी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सीबीओ की गैर-दलीय रिपोर्ट से साफ है कि युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं। खर्च अभी भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम लोगों के लिए चीजों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।

    बॉयल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन कई वर्षों से अमेरिकी लोगों से कहते रहे हैं कि देश में परिवारों की मदद करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। लेकिन उनके मुताबिक, सरकार एक ऐसे युद्ध पर अरबों डॉलर खर्च कर सकती है, जिसे उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की कीमत आखिरकार अमेरिकी लोगों को चुकानी पड़ रही है।


    50 से ज्यादा विमान-हेलिकॉप्टर और ड्रोन गंवाए

    ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से 30 जून तक चले ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिका को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पेंटागन के महानिरीक्षक की सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों और युद्ध से जुड़े हादसों में अमेरिका के 50 से ज्यादा विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 30 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी मिसाइल व ड्रोन हमलों से कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इराक, ओमान व जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतों को नुकसान पहुंचा।

    अमेरिका ने ये विमान खोए : अमेरिका के चार एफ-15ई लड़ाकू विमान नष्ट हुए। इसके अलावा ए-10 थंडरबोल्ट- एक, ई-3 सेंट्री- एक व एक एएच-64 अपाचे भी गंवाया। एक एफ-35ए और 7 केसी-135 विमान भी क्षतिग्रस्त हुए। इनमें से एक 12 मार्च को इराक में ईंधन भरने के मिशन में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें सभी छह सदस्यों की मौत हो गई थी।


    गोला-बारूद के भंडार पर बढ़ा दबाव :

    रिपोर्ट ने अमेरिकी हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर बढ़ते दबाव तथा आपूर्ति शृंखला में बाधाओं की ओर भी इशारा किया है। ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका इतिहास में सबसे अधिक आधुनिक हथियार बना रहा है।

  • PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…

    PM मोदी की जिनपिंग को दो टूक… बोले- सीमा पर शांति होगी .. तभी आगे बढ़ेंगे रिश्ते…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पिछले सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत (India) की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया। चीनी बयान में मोदी के हवाले से कहा गया था कि तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और भारत अपनी धरती पर किसी को भी चीन विरोधी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने भारतीय चिंताओं का भी उल्लेख किया और इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’


    सीमा पर शांति को रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद बताया

    जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।


    भारत ने चीन के साथ संबंधों में अपनी चिंताएं रखीं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक आधार है। भारत और चीन के बीच सीमा पर बार-बार पैदा हुए तनाव के बीच भारत ने पिछले 16 वर्षों से सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना’ नीति को उसी तरह स्पष्ट रूप से व्यक्त करना बंद कर दिया है।


    तिब्बत और ताइवान पर भारत की नीति में बदलाव नहीं

    हालांकि व्यवहार में तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार का कहना है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति स्पष्ट और निरंतर है। भारत व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में ताइवान के साथ संबंधों को बढ़ावा देता है और सहयोग की सुविधा प्रदान करता है।


    तिब्बत को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट

    तिब्बत के मामले में भारत अब भी यह मानता है कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र चीन जनवादी गणराज्य के क्षेत्र का हिस्सा है। यह स्थिति वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के बीच हस्ताक्षरित ‘संबंधों और व्यापक सहयोग के सिद्धांतों पर घोषणा’ में भी दर्ज की गई थी। इस घोषणा में यह भी कहा गया था कि भारत अपनी जमीन से तिब्बतियों को चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति नहीं देता।


    चीन के बयान में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का भी जिक्र
    चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से यह भी कहा कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और चीन के प्रति भारत के दृष्टिकोण का किसी तीसरे देश से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में तिब्बत या ताइवान का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


    ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले पर भी चर्चा

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार भारत ने अपने बयान में चीन के उस ‘दोस्त, प्रतिद्वंद्वी नहीं’ वाले फॉर्मूले का इस्तेमाल नहीं किया, जिसका उल्लेख पिछले साल तियानजिन में मोदी-शी मुलाकात के बाद चीन की ओर से जारी बयान में किया गया था।


    जयशंकर और वांग यी की बातचीत में भी उठा था मुद्दा

    जुलाई में मनीला में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई मुलाकात के बाद भी चीन ने जयशंकर के हवाले से भारत द्वारा चीन की संप्रभुता का सम्मान करने जैसी बातें कही थीं। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि जयशंकर ने वांग यी से बातचीत में यह बात कही थी कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दे भारत को चीन के सामने उठाने चाहिए।

    चीन के कब्जे को लेकर भारत ने जताई आपत्ति
    उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह से चीन की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। हालांकि, चीन 1963 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा किए हुए है, जबकि इन क्षेत्रों पर भारत के अधिकार को चीन भी स्वीकार करता रहा है।

  • वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने पर संजू सैमसन ने समझाया टीम का फैसला बोले मुश्किल निर्णय लेना आसान नहीं

    वैभव सूर्यवंशी को मौका मिलने पर संजू सैमसन ने समझाया टीम का फैसला बोले मुश्किल निर्णय लेना आसान नहीं


    नई दिल्ली। दिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में संजू सैमसन ने बल्ले से शानदार वापसी की। उन्होंने महज 22 गेंदों में 57 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय से अपनी बल्लेबाजी को लेकर चर्चा में रहे संजू के लिए यह पारी खास रही। हालांकि मैच के बाद उन्होंने सिर्फ अपनी बल्लेबाजी को लेकर बात नहीं की बल्कि आलोचना और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के असर को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी।

    संजू ने माना कि क्रिकेटरों को लेकर लगातार होने वाली चर्चाएं और आलोचनाएं खिलाड़ी को प्रभावित करती हैं। उनका कहना था कि अनुभव के साथ उन्होंने ऐसी परिस्थितियों से निपटना जरूर सीखा है लेकिन वह भी इंसान हैं। लगातार सामने आने वाली बातों का असर होना स्वाभाविक है। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि वह कई बार खुद को बाहरी शोर से दूर रखने की कोशिश करते हैं लेकिन कभी कभी सोशल मीडिया या दूसरी जगहों पर सामने आने वाली टिप्पणियां नजर आ ही जाती हैं।

    संजू ने बताया कि वह खुद को बाहरी शोर से दूर रखने के लिए वाईफाई बंद करने जैसी कोशिश करते हैं लेकिन कई बार वह दोबारा चालू हो जाता है और कुछ कमेंट सामने आ जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसी चीजें मन को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि उनका फोकस इस बात पर रहता है कि मैदान पर उतरते समय उनका माइंडसेट साफ रहे और वह अपनी तैयारी तथा खेल पर ध्यान दें।

    उन्होंने साफ किया कि अगर वह बाहर की बातों को अपने खेल पर हावी होने देंगे तो गेंदबाजी के खिलाफ खुलकर बल्लेबाजी करना मुश्किल हो जाएगा। उनके अनुसार बल्लेबाज को हर गेंद पर सोच समझकर खेलना होता है और ज्यादा सोचने से स्वाभाविक खेल प्रभावित हो सकता है। इसलिए वह कोशिश करते हैं कि मैदान पर अपना ध्यान सिर्फ खेल और टीम की जरूरत पर रखें।

    इसी बातचीत के दौरान संजू सैमसन ने 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी अपनी राय रखी। वैभव ने हाल के मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है और उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम में जगह बनाने की दावेदारी मजबूत की है। संजू ने माना कि वैभव के प्रदर्शन को देखते हुए उसे टीम में मौका मिलना स्वाभाविक था।

    संजू ने कहा कि भारतीय टीम को संभालना आसान काम नहीं है। एक तरफ अनुभवी खिलाड़ी होते हैं तो दूसरी तरफ युवा खिलाड़ियों का शानदार फॉर्म भी चयन के फैसले को प्रभावित करता है। उन्होंने वैभव के करीब 700 से 800 रन बनाने वाले प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे प्रदर्शन के बाद युवा खिलाड़ी को मौका देना टीम मैनेजमेंट के लिए समझ में आने वाला फैसला है।

    संजू ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने हाल के दो तीन मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया था जबकि वैभव अच्छी फॉर्म में थे। ऐसे में नेतृत्व समूह के सामने टीम के हित को देखते हुए फैसला लेने की स्थिति बनी। संजू ने इस फैसले को शिकायत की नजर से देखने के बजाय टीम मैनेजमेंट की मजबूरी और जिम्मेदारी को समझने की बात कही।

    उन्होंने हेड कोच गौतम गंभीर के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया। संजू के मुताबिक सीरीज के दौरान इस मुद्दे पर टीम के भीतर बातचीत हुई थी और सीरीज शुरू होने से पहले भी गंभीर ने उनसे काफी बात की थी। उनके अनुसार ऐसे मामलों में स्पष्ट संवाद बेहद जरूरी होता है।

    संजू ने कहा कि लोकप्रिय फैसला लेना आसान होता है लेकिन टीम के हित में कठिन फैसला लेना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने नेतृत्व समूह की तारीफ करते हुए कहा कि टीम को सबसे आगे रखते हुए मुश्किल फैसले लिए जा रहे हैं। उनका बयान यह दिखाता है कि चयन की प्रतिस्पर्धा के बीच खिलाड़ी के लिए टीम का लक्ष्य और आपसी संवाद कितना महत्वपूर्ण है।

  • US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका

    US : FBI चीफ ने भर्ती नीति में बदलाव का किया बचाव…. बोले- पीड़ितो को भी मिलेगा मौका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के FBI चीफ काश पटेल (FBI Chief Kash Patel) ने भर्ती नीति में बदलाव (Recruitment Policy Changes) का बचाव किया है. उन्होंने मंगलवार को सीनेट की सुनवाई में इस मुद्दे पर सफाई दी. पटेल ने कहा कि FBI के मानक कमजोर नहीं किए गए हैं. बदलाव का मकसद पीड़ितों को मौका देना है।

    दरअसल, FBI ने हाल में भर्ती नियमों में बदलाव किया है. इसके तहत कुछ आवेदकों को प्रॉस्टिट्यूशन के पुराने मामलों के बावजूद नौकरी के लिए विचार किया जा सकता है. बचपन में बेस्टियलिटी का शिकार रहे लोगों को भी मौका दिया जा सकता है।


    ‘पीड़ितों को सजा नहीं देना चाहते’

    सुनवाई के दौरान FBI की भर्ती नीति को लेकर सवाल हुए. रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने बेस्टियलिटी से जुड़े नियम पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि इस नियम को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? कैनेडी ने कहा कि इस नियम की सिफारिश करने वाले व्यक्ति से पूछा जाना चाहिए कि वह आखिर ऐसा सुझाव कहां से लेकर आया है।

    इसका जवाब देते हुए पटेल ने कहा कि शुरुआत में उनका भी यही रिएक्शन था. लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें कुछ मामले दिखाए. इनमें कुछ लोग ऐसी घटनाओं के लिए मजबूर किए गए थे. इसके बाद पटेल को लगा कि ऐसे लोगों को नौकरी के लिए विचार करने का मौका मिलना चाहिए।

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 साल में वेश्यावृत्ति में शामिल रहे कुछ लोगों को FBI में नौकरी नहीं मिल सकेगी। गौरतलब है, सीनेट की सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा. डेमोक्रेट सांसदों ने पटेल से कई सवाल किए. उन्होंने ट्रंप से जुड़े मामलों की जांच करने वाले FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी का भी मुद्दा उठाया. सीनेटर कोरी बुकर ने पटेल पर तीखा हमला किया. उन्होंने पटेल को FBI के लिए अयोग्य तक बताया. पटेल ने भी पलटकर जवाब दिया. दोनों के बीच तीखी बहस हुई।


    चुनाव के दिन FBI की भूमिका पर भी सवाल

    नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे में FBI की भूमिका पर भी सवाल उठे. चुनाव को लेकर भी पटेल से सवाल किया गया. डेमोक्रेट सीनेटर पीटर वेल्च ने पूछा कि क्या वह नवंबर में होने वाले चुनाव में लोगों के वोट के अधिकार में किसी तरह का दखल नहीं देंगे। इसका जवाब देते हुए FBI चीफ काश पटेल ने कहा कि वह किसी भी तरह के हस्तक्षेप में शामिल नहीं होंगे. हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के दिन FBI एजेंटों को मतदान केंद्रों पर भेजा जा सकता है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार नहीं किया।

    पटेल ने कहा कि चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की है. FBI के 56 फील्ड ऑफिस में चुनाव से जुड़े अपराधों के लिए अधिकारी मौजूद रहेंगे. जरूरत पड़ने पर एजेंसी कार्रवाई कर सकती है।


    ट्रंप से जुड़े मामलों पर भी घिरे FBI चीफ

    डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने FBI अधिकारियों की बर्खास्तगी पर सवाल किया. उन्होंने ईरान मामलों के विशेषज्ञ रहे अधिकारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया. ब्लूमेंथल ने पूछा कि क्या ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों को हटाना ज्यादा जरूरी था. या ईरान से जुड़े खतरों पर नजर रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखना?

    पटेल ने जवाब दिया कि उनके लिए सबसे जरूरी FBI को राजनीतिक हथियार बनने से रोकना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों को एजेंसी में नहीं रखना चाहते जो FBI का गलत इस्तेमाल कर रहे हों. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप से जुड़े मामले की जांच में शामिल होना किस तरह FBI को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाता है.

  • सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…

    सांसद प्रिया सरोज से शादी करेंगे क्रिकेटर रिंकू सिंह…. लखनऊ में इस तारीख को लेंगे सात फेरे…


    लखनऊ।
    क्रिकेटर रिंकू सिंह (Cricketer Rinku Singh) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सांसद प्रिया सरोज (MP Priya Saroj) की शादी की तारीख और स्थान तय हो गया है। इसके साथ ही शादी को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया है। खेल और राजनीति (Sports and Politics) के इस हाई प्रोफाइल गठबंधन का लंबे समय से प्रशंसकों और समर्थकों को इंतजार था। रिंकू और प्रिया सरोज लखनऊ में 4 दिसंबर को सात फेरे लेंगे। दोनों की सगाई भी लखनऊ में ही हुई थी। उस समय चर्चा थी कि शादी वाराणसी के होटल ताज में होगी। प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र मछली शहर में वाराणसी जिले का पिंडरा विधानसभा क्षेत्र भी आता है।


    लखनऊ के होटल रमाडा में होगा आयोजन

    प्रिया के पिता जौनपुर के केराकत से विधायक और पूर्व सांसद तूफानी सरोज ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति से तारीख और स्थल तय कर लिया गया है। लखनऊ के रमाडा होटल में चार दिसंबर को भव्य आयोजन होगा। इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। बनारस में करखियांव (कठेरवा) स्थित प्रिया के गांव में बने घर को सजाया संवारा जा रहा है।दोनों की सगाई भी लखनऊ के ही द सेंट्रम होटल में हुई थी।

    बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों में शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। वीवीआईपी वेडिंग में क्रिकेट और राजनीति से जुड़े दिग्गजों के जमावड़े की उम्मीद है। प्रिया सरोज समाजवादी पार्टी की सांसद हैं तो उसके सभी सांसदों-विधायकों के रहने की तो पहले से ही उम्मीद है। रिंकू सिंह जिस कोलकाता राइडर के साथ खेलते हैं उस टीम के मेंबर के अलावा भारतीय टीम के भी तमाम खिलाड़ियों को न्योता देने की उम्मीद है।


    वाराणसी के बजाय क्यों लखनऊ

    रिंकू और प्रिया सरोज की सगाई राजधानी लखनऊ में ही हुई थी। ऐसे में उस समय चर्चा की थी शादी का आयोजन प्रिया सरोज के संसदीय क्षेत्र से जुड़ी धार्मिक नगरी वाराणसी में होगा। यहां के होटल ताज का नाम भी फाइनल बताया जा रहा था। लेकिन अब लखनऊ के होटल में आयोजन पर मुहर लग रही है। इसके पीछे क्रिकेट और राजनीति से जुड़ी हस्तियों के आने-जाने और सुरक्षा को प्राथमिकता को कारण बताया जा रहा है।


    यूपी के ही अलीगढ़ के रहने वाले हैं रिंकू सिंह

    क्रिकेटर रिंकू सिंह और प्रिया सरोज दोनों की यूपी के रहने वाले हैं। रिंकू सिंह अलीगढ़ के एक मध्यम परिवार से आते हैं। अपनी कड़ी मेहनत प्रतिभा के बल पर रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट टीम में जगह पक्की की और पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। उनकी गिनती शानदार फिनिशर के रूप में होती है। आईपीएल में हाथ से निकलते मैच में कोलाकाता नाईट राइडर के लिए एक ओवर में पांच लगातार छक्के मारकर रिंकू सिंह ने इतिहास रचा था।

    वहीं, प्रिया सरोज जौनपुर की केराकत सीट से तीन बार विधायक और मछली शहर से सांसद रहे तूफानी सरोज की बेटी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने प्रिया को मछली शहर से टिकट दिया और वह जीत हासिल कर सबसे कम उम्र की सांसदों में शामिल हो गईं।

  • भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी

    भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी


    नई दिल्ली।
    अल नीनो (El Niño) ने दस्तक दे दी है। अब भारत (India) में भी इसका असर दिखने लगा है। यहां अल नीनो ने मौसम को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम ने फसलों पर असर डाला और फसलें अब आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। चीनी (Sugar) के बाद अंडे और चिकन के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस तरह गन्ने का उत्पादन गिरा है, अगर उसी तरह मक्के का उत्पादन भी घटा तो इन चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। चावल और सोयाबीन जैसी फसलें भी संकट के केंद्र में हैं।

    गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर और अनियमित रहता है। साथ ही ज्यादा गर्मी रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार घट सकती है। इस बार मौसम विज्ञानियों ने सदी के सबसे ताकतवर अल नीनो की दस्तक की चेतावनी दी है। भारत में इसका असर दिखना शुरू हो गया है और साल के अंत तक इसके पीक पर पहुंचने की संभावना है।


    चीनी हुई कड़वी

    हाल ही में चीनी की कीमतें सालाना आधार पर 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसकी वजह पिछले साल ज्यादा बारिश और फफूंद के कारण गन्ने की पैदावार घटना है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और निर्यात के कारण भी चीनी के दाम बढ़े हैं। त्योहार सीजन से पहले चीनी 49 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि अब दाम स्थिर हैं।


    मक्का बिगाड़ेगा बजट

    इस साल मक्का उत्पादन भी कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके दाम में पहले ही करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। अगर पैदावार कम हुई तो पशु आहार और महंगा होगा। इसके महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंडे और चिकन के दाम पर पड़ेगा। बारिश की कमी से 2026-27 में गन्ना उत्पादन कम रह सकता है। चीनी की मांग को देखते हुए अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन कम किया जाएगा। ऐसे में एथेनॉल मक्के से बनेगा। मगर इस साल मक्का उत्पादन भी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इसके दाम बढ़ेंगे।


    पशु आहार भी महंगा

    भारत में 2025 में पोल्ट्री उद्योग 2.6 लाख करोड़ रुपये का था। मक्का, सोयाबीन खली महंगे होने से पोल्ट्री की लागत बढ़ेगी, क्योंकि ये प्रमुख पशु-मुर्गी आहार हैं। दरअसल देश में 25 फीसदी एथेनॉल गन्ने से बनता है, बाकी अनाज खासकर मक्का से बनाया जाता है। बीती एक अप्रैल से ई-20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई। इससे चीनी उत्पादन घटने के बावजूद 2025-26 में 30 लाख टन से ज्यादा गन्ने से एथेनॉल बनाया गया।

  • बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

    बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं


    नई दिल्ली। बवासीर यानी पाइल्स एक आम समस्या है जिससे बड़ी संख्या में लोग परेशान रहते हैं। इसमें गुदा या मलाशय के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है। कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहना मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना टॉयलेट में अधिक देर तक बैठे रहना और खाने में फाइबर की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। बवासीर होने पर दर्द खुजली जलन सूजन और मल त्याग के दौरान खून आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते और बवासीर भी मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी जाती है।

    पहली होती है आंतरिक बवासीर। यह मलाशय के अंदर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। शुरुआती स्थिति में इसमें आमतौर पर दर्द बहुत कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। हालांकि मल त्याग के दौरान ताजा लाल खून दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण हो सकता है। जैसे जैसे समस्या बढ़ती है वैसे वैसे सूजी हुई नसें मलाशय से बाहर की ओर आने लग सकती हैं। आंतरिक बवासीर को गंभीरता के आधार पर चार ग्रेड में बांटा जाता है। शुरुआती ग्रेड में नसें अंदर रहती हैं जबकि आगे की स्थिति में वे बाहर निकल सकती हैं और कुछ मामलों में उन्हें हाथ से वापस अंदर करना पड़ सकता है।

    दूसरी तरह की बवासीर बाहरी बवासीर होती है। यह गुदा के बाहर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। इसमें दर्द खुजली और सूजन जैसी समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सूजी हुई नस के भीतर खून का थक्का बन जाता है। इसे थ्रॉम्बोस्ड हेमोरॉयड कहा जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द हो सकता है और गुदा के पास गांठ जैसी महसूस हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर जानलेवा नहीं होती लेकिन अचानक तेज दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    आमतौर पर बवासीर को जानलेवा बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लगातार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए। खासकर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव होने पर शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इससे कमजोरी थकान और चक्कर जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव चिंता का कारण बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मल के साथ खून आने का कारण हर बार बवासीर ही हो यह जरूरी नहीं है। गुदा में दरार यानी फिशर आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं और कुछ गंभीर बीमारियां भी रक्तस्राव का कारण हो सकती हैं। इसलिए बार बार खून आने पर खुद से इसे बवासीर मानकर इलाज करना सही नहीं है।

    अगर गुदा से लगातार या ज्यादा खून निकल रहा है और इसके साथ चक्कर कमजोरी बेहोशी जैसा महसूस होना तेज दर्द या काला मल आने जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई दिनों तक कब्ज दर्द खुजली या मल के साथ खून आने की समस्या बनी रहने पर भी जांच कराना जरूरी है।

    बवासीर से बचाव के लिए कब्ज को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। भोजन में फल सब्जियां साबुत अनाज और दालों जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से बचें। टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर तक बैठने की आदत भी छोड़नी चाहिए। समय रहते ध्यान देने से बवासीर की समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

  • पाकिस्तान से खजूर की खेप भारत लाने का खुलासा? DRI ने 13 कंटेनरों में 362 टन माल किया जब्त

    पाकिस्तान से खजूर की खेप भारत लाने का खुलासा? DRI ने 13 कंटेनरों में 362 टन माल किया जब्त


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में राजस्व खुफिया निदेशालय यानी DRI ने 362 मीट्रिक टन से ज्यादा सूखे खजूर की एक बड़ी खेप जब्त की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह माल पाकिस्तान के कराची पोर्ट से भेजा गया था। हालांकि भारत पहुंचने से पहले इसे संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से आया हुआ बताया गया। आयात से जुड़े दस्तावेजों में भी माल का मूल देश UAE दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान DRI को खेप के पाकिस्तान कनेक्शन की जानकारी मिली जिसके बाद इसे रोक लिया गया।

    यह कार्रवाई DRI की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट के तहत की गई है। एजेंसी ऐसे मामलों पर नजर रख रही है जिनमें पाकिस्तान मूल के सामान को किसी तीसरे देश के जरिए भारत लाने की कथित कोशिश की जाती है। इसी अभियान के तहत महाराष्ट्र में एक मुंबई स्थित कंपनी की ओर से आयात किए गए 13 कंटेनरों को जांच के लिए रोका गया।

    ये सभी कंटेनर नासिक के अंबड स्थित कंटेनर फ्रेट स्टेशन पर पहुंचे थे। आयात दस्तावेजों में इनके भीतर मौजूद सूखे खजूर का मूल देश UAE बताया गया था। दस्तावेजों के आधार पर पहली नजर में यह खेप संयुक्त अरब अमीरात से भारत आई हुई लग रही थी। लेकिन DRI की जांच आगे बढ़ने पर माल की असली सप्लाई चेन को लेकर सवाल खड़े हुए।

    एजेंसी की शुरुआती जांच के मुताबिक खजूर वास्तव में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से रवाना हुए थे। इसके बाद इन्हें UAE के जेबेल अली पोर्ट के रास्ते भारत भेजा गया। जांच में यह भी सामने आया कि जेबेल अली में कथित तौर पर कंटेनरों को बदला गया था। इसके बाद दूसरे जहाज के जरिए माल को भारत भेजे जाने की बात सामने आई है। इस प्रक्रिया ने DRI के सामने ट्रांसशिपमेंट के जरिए माल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की आशंका को बढ़ा दिया।

    DRI को संदेह है कि यह खेप ऐसे नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है जिसका संबंध पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ी संस्थाओं से है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि माल की बुकिंग से लेकर ट्रांसशिपमेंट और भारत में आयात तक पूरी प्रक्रिया में कौन कौन लोग या संस्थाएं शामिल थीं। साथ ही आयात दस्तावेजों में मूल देश के तौर पर UAE दर्ज किए जाने के पीछे की वजह की भी जांच की जा रही है।

    दरअसल केंद्र सरकार ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से सामान के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह फैसला पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया था। ऐसे में किसी तीसरे देश के जरिए पाकिस्तान मूल के सामान को भारत लाने की कोशिश सामने आने पर जांच एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है।

    DRI अब इस मामले में गलत घोषणा ट्रांसशिपमेंट और आयात दस्तावेजों में कथित हेरफेर से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। 362 टन से ज्यादा खजूर की यह खेप इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सप्लाई चेन में कराची से UAE और फिर भारत तक का रास्ता सामने आया है। एजेंसी की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी और भारत में प्रतिबंधित सामान की कथित एंट्री कराने की कोशिश किस स्तर तक की गई थी।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें

    सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की चाल हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। कभी तेजी निवेशकों का उत्साह बढ़ाती है तो कभी अचानक गिरावट बाजार की चिंता बढ़ा देती है। ऐसे में शेयर बाजार की दिशा को समझने के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव को देखना पर्याप्त नहीं होता बल्कि देश और दुनिया की आर्थिक गतिविधियों का भी असर बाजार पर पड़ता है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे बाजार में किसी भी फैसले से पहले मौजूदा परिस्थितियों और प्रमुख संकेतकों को ध्यान से समझें।

    शेयर बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों की चाल का भी पड़ता है। अमेरिका समेत दूसरे प्रमुख बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के फैसले महंगाई के आंकड़े और आर्थिक विकास से जुड़े संकेत भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं। यदि आर्थिक माहौल मजबूत दिखाई देता है तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है वहीं कमजोर संकेतों की स्थिति में बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है।

    भारतीय बाजार के लिए कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बेहद अहम होते हैं। किसी कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी बिक्री में सुधार और भविष्य के कारोबार को लेकर सकारात्मक संकेत उसके शेयर को मजबूती दे सकते हैं। इसके उलट कमजोर नतीजे या कारोबार से जुड़ी चिंता किसी शेयर में बिकवाली बढ़ा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों को केवल शेयर की कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।

    बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर अर्थव्यवस्था के साथ बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा सकती है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है।

    ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। शेयर बाजार में तेजी देखकर केवल मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाना और गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करना नुकसान का कारण बन सकता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की मौजूदा दिशा और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करना जरूरी है। बाजार में अवसर लगातार बनते रहते हैं इसलिए धैर्य और सोच समझकर लिया गया फैसला निवेशकों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

  • MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन

    MP: भोपाल में VIP रोड पर ओवैसी के काफिले का एक्सीडेंट….अचानक ब्रेक लगाने से आपस में टकराए वाहन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के काफिले (Convoy) से जुड़ा सड़क हादसा सामने आया है. शहर के VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हादसा हुआ, जिसमें करीब 4 से 5 बाइक सवारों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    बताया जा रहा है कि VIP रोड पर ओवैसी का काफिला गुजर रहा था. इसी दौरान काफिले के वाहनों और बाइक सवारों (Motorcyclists) के बीच टक्कर हो गई. हादसा इतना अचानक हुआ कि मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. सड़क पर मौजूद लोगों ने घायलों की मदद की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. हादसे में घायल बाइक सवारों को किस तरह की चोटें आई हैं।

    इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है. वहीं, VIP रोड पर हादसे के बाद कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित होने की सूचना है. पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालते हुए यातायात को सामान्य कराया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है. हादसा काफिले के किस वाहन से हुआ और दुर्घटना की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    यातायात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त वसंत कॉल ने बताया कि असदुद्दीन ओवैसी के काफिले में चल रही कुछ गाड़ियां एक दूसरे से टकराई हैं. काफिला मोड़ पर रोक गया था उसके बाद ये हादसा हुआ है. पुलिस ने तुरंत ही मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. कुछ बाइक सवारों को चोट आई थी. उनको प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचा दिया है।

    VIP रोड पर ओवैसी के काफिले के दौरान हुए इस हादसे ने एक बार फिर वीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।