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  • रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक

    रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने रूस (Russia) से ज्यादा तेल खरीद (Buy Oil) रहे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ (Tariff) लगाने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीनेट से बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of Representatives) में भी लाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में इस बिल पर गुरुवार को वोटिंग होगी। अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है। हालांकि इसके बावजूद भारत (India) ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका चाहे जो कर ले, भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा और दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

    भारत ने मंगलवार को एक बयान में कहा है कि अमेरिका भले ही टैरिफ लगा ले, भारत दबाव में नहीं आएगा और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है। वह आगे भी इस पर कायम रहेगा।


    लिंडसे ग्राहम बिल सीनेट से हुआ था पास

    अमेरिका में इस बिल को लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान बिल का नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से इसे पास करा लिया गया था। इसका सीधा सीधा मकसद भारत और चीन जैसे देशों पर टैरिफ थोपना है। इसमें रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन यह साफ है कि भारत सरकार इस बारे में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगी।


    भारत का नाम लिखने की मांग

    इससे पहले यह खबर सामने आई थी कि हाल ही में कुछ अमेरिकी सांसदों ने इस बिल में कुछ बदलावों की सिफारिश की है। सांसदों ने मांग की है कि इस बिल में प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे भारत का नाम लिख दिया जाए। इससे पहले बिल में पहले सिर्फ ‘रूस से तेल खरीदने वाले देशों’ का जिक्र था। इसमें किसी देश का नाम नहीं था। हालांकि अब इसमें भारत का नाम अलग से जोड़ने की मांग की गई है।

    इसके अलावा सांसदों का कहना है कि बिल में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों का नाम साफ-साफ लिखा जाए और उन पर 100 फीसदी टैरिफ ठोका जाए। इन देशों में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।


    अमेरिका ने पहले लगाया है जुर्माना

    अमेरिका इस मुद्दे को लेकर भारत को कई बार निशाना बना चुका है। अमेरिका ने आरोप लगाए है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसका हवाला देते हुए पिछले साल भारत पर 50 फीसदी टैरिफ भी लगा दिया था। हालांकि भारत ने तब भी स्पष्ट किया था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

  • BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात

    BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक पॉडकास्ट में उन्होंने भाजपा छोड़ने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा से अलग होने के बाद अब पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह भाजपा को दूसरी पार्टियों की तुलना में बेहतर मानते हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इनसाइड आउट पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर और भाजपा छोड़ने के फैसले को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब जब वह भाजपा में नहीं हैं तो अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। इसी दौरान उन्होंने पार्टी के काम करने के तरीके और कुछ राजनीतिक मुद्दों पर अपनी असहमति भी सामने रखी।

    शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें भाजपा की ओर से कोई पैसा नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि भाजपा में अभी भी कुछ जवाबदेही दिखाई देती है। उन्होंने अपने तर्क के तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया।

    पूनावाला ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक पंजाब और झारखंड में पेपर लीक से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में सामने आए ऐसे मामलों पर राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।

    पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। पूनावाला ने मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ी बात कही। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना देश के अलग अलग दौर के नेताओं के संदर्भ में करते हुए अपनी राजनीतिक राय रखी। यह टिप्पणी उनके निजी राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई है।

    राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी में बदलाव आया है और उन्होंने खुद में कुछ सुधार किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में निरंतरता की कमी होने की बात भी कही।

    पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई मुद्दों पर लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। उन्होंने अपने और राहुल गांधी के बीच एक समानता का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कुछ आंदोलनों और उनके कथित फंडिंग से जुड़े दावों का जिक्र किया।

    शहजाद पूनावाला का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा से उनके अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। जुलाई में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक कारणों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी के प्रवक्ताओं को वेतन नहीं मिलता है। अब पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान से साफ है कि भाजपा से अलग होने के बावजूद वह राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं।

  • PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर BJP का बड़ा अभियान: भारत रत्न के सवाल पर नड्डा ने दिया जवाब

    PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर BJP का बड़ा अभियान: भारत रत्न के सवाल पर नड्डा ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत रत्न दिए जाने की चर्चाओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का बयान सामने आया है। भाजपा की ओर से 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू किया जा रहा है। इसी अभियान को लेकर यह सवाल उठाया गया कि क्या अभियान के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का कोई प्रस्ताव लाया जा सकता है। इस सवाल पर जेपी नड्डा ने कहा कि इस संबंध में अभी तक पार्टी के भीतर कोई चर्चा नहीं हुई है।

    बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान नड्डा से प्रधानमंत्री मोदी को भारत रत्न दिए जाने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि सर्वोच्च नागरिक सम्मान से जुड़े मामलों पर पार्टी उचित समय पर फैसला करती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई है। हालांकि पूछे गए सुझाव को उन्होंने अच्छा बताया। नड्डा के इस बयान के बाद भारत रत्न को लेकर चल रही अटकलों को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है।

    दरअसल भाजपा 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी के अनुसार अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन करना है। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से देशभर में सफाई अभियान रक्तदान शिविर मेडिकल कैंप और अन्य सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का यह पड़ाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात की राजनीति में लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। वर्ष 2014 में भाजपा की लोकसभा चुनाव में जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वह लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद पर बने रहे।

    प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। ऐसे में 17 सितंबर को उनका जन्मदिन भी है और इसी दिन भाजपा अपने सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी की ओर से इस दौरान अलग अलग राज्यों और शहरों में सेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुई थी। वर्ष 1970 के दशक में वह संघ से जुड़े और बाद में प्रचारक की भूमिका में काम किया। इसके बाद वर्ष 1987 में वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और गुजरात संगठन में जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2001 में उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कई चुनावों में पार्टी का नेतृत्व किया।

    अब भारत रत्न को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच जेपी नड्डा के बयान से इतना स्पष्ट है कि फिलहाल भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान देने को लेकर किसी चर्चा की पुष्टि नहीं की गई है। वहीं सेवा संकल्प अभियान के जरिए भाजपा प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को अलग अलग सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से चिह्नित करने जा रही है।

  • PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़

    PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद मुंबई के पास रहने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा के करीब 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ सामने आया है। असगर अली वोरा ने अपनी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब इस मामले में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और जमीन से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की जानकारी भी दी है।

    असगर अली वोरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात 8 सितंबर को हुई थी। दोनों गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ चुके हैं। मुलाकात के दौरान वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी जमीन से जुड़े पुराने विवाद को रखा था। उन्होंने बताया था कि उन्होंने वर्ष 1989 में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार वर्ष 2011 में इस जमीन पर कब्जे का विवाद शुरू हुआ था। वोरा का आरोप था कि स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया था।

    वोरा का कहना था कि वह लंबे समय से इस मामले को लेकर अलग अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे थे। करीब 15 वर्षों तक मामला अधिकारियों के सामने उठाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला। इसी बीच प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और उन्होंने अपनी समस्या सीधे उनके सामने रखी। मुलाकात के बाद वोरा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही थी।

    मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र मंत्रालय में भी इस विवाद को लेकर बैठक हुई। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में अधिकारियों और दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। बैठक में असगर अली वोरा और नरेंद्र मेहता के साथ मीरा भायंदर नगर निगम के नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी मौजूद रहे।

    बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति को सरेंडर करने की बात कही। मेहता के अनुसार उन्होंने यह जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

    इस मामले में भाजपा विधायक ने पुलिस कमिश्नर को भी अलग पत्र दिया है। इसमें उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी दी। मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद करीब डेढ़ दशक से जमीन विवाद को लेकर संघर्ष कर रहे असगर अली वोरा को राहत मिलने की उम्मीद बनी है।

    अब इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया जमीन के कब्जे और निर्माण अनुमति से जुड़े प्रशासनिक कदमों पर निर्भर करेगी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विवाद में आए इस बदलाव ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें

    एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 की शुरुआत 19 सितंबर से जापान के आइची नागोया में होने जा रही है। भारत ने इस बार अपने 503 खिलाड़ियों का दल तैयार किया है जो 35 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। पिछले एशियन गेम्स में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और इस बार भी कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदक जीतने की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें एथलेटिक्स निशानेबाजी कुश्ती मुक्केबाजी और क्रिकेट प्रमुख हैं।

    एथलेटिक्स एशियन गेम्स में भारत के लिए लंबे समय से पदक दिलाने वाले प्रमुख खेलों में शामिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत ने एशियन गेम्स के 19 संस्करणों में एथलेटिक्स से कुल 283 पदक जीते हैं। इनमें 85 स्वर्ण 102 रजत और 96 कांस्य पदक शामिल हैं। इस बार नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय दल में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन पर नजर रहेगी। मुरली श्रीशंकर गुलवीर सिंह अविनाश साबले तजिंदरपाल सिंह पारुल चौधरी राजेश रमेश और रोहित यादव से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

    निशानेबाजी भी भारत के लिए अहम खेल रहेगा। एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय निशानेबाजों ने अब तक 80 पदक हासिल किए हैं जिनमें 16 स्वर्ण 30 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं। पिछले एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों ने 22 पदक जीते थे। इस बार मनु भाकर के साथ ईशा सिंह ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर आशी चौकसे और सुरुचि जैसे खिलाड़ियों पर भी नजर रहेगी।

    कुश्ती में भी भारतीय पहलवान पदक के लिए जोर लगाएंगे। एशियन गेम्स में भारत ने इस खेल में अब तक 65 पदक जीते हैं। इनमें 11 स्वर्ण 15 रजत और 39 कांस्य पदक शामिल हैं। अमन सहरावत अंतिम पंघाल दीपक पूनिया मनीषा और सुजीत कलकल भारतीय चुनौती को मजबूत करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुश्ती को शामिल नहीं किए जाने के बाद भारतीय पहलवानों के लिए एशियन गेम्स एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच होगा।

    मुक्केबाजी में भी भारत की उम्मीदें मजबूत हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन के बाद एशियन गेम्स को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। महिला वर्ग में साक्षी चौधरी प्रीति पवार और लवलीना बोरगोहेन पर नजर होगी। पुरुष वर्ग में जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश और नरेंद्र बेरवाल भारतीय चुनौती पेश करेंगे।

    इस बार क्रिकेट भी एशियन गेम्स का हिस्सा है और भारत की पुरुष तथा महिला टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। पिछले एशियन गेम्स में दोनों भारतीय टीमों ने स्वर्ण पदक जीता था। महिला टीम 18 सितंबर को अपना पहला मैच खेलेगी जबकि पुरुष टीम 28 सितंबर से अभियान शुरू करेगी। ऐसे में एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन इन प्रमुख खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास तौर पर निर्भर रहेगा।

  • ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी

    ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी


    भोपाल। भोपाल में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सभा के बाद अब तेलंगाना के विधायक टी राजा की प्रस्तावित धर्मसभा को लेकर सियासत तेज होती दिखाई दे रही है। हिंदू उत्सव समिति ने प्रशासन से टी राजा की सभा के लिए अनुमति देने की मांग उठाने का फैसला किया है। समिति का कहना है कि जिस सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में ओवैसी की सभा आयोजित की गई है वहां टी राजा की सभा के लिए भी अनुमति पर विचार किया जाना चाहिए। समिति इस मुद्दे को लेकर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात करने की तैयारी में है।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक समिति इकबाल मैदान अग्रसेन चौक या सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगेगी। उनका कहना है कि मई में टी राजा की प्रस्तावित सभा को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रद्द किया गया था। अब ओवैसी की सभा आयोजित होने के बाद समिति ने प्रशासन के सामने समान नियमों के आधार पर अनुमति देने का सवाल उठाने की बात कही है।

    दरअसल मंगलवार रात भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में असदुद्दीन ओवैसी की सभा हुई थी। कार्यक्रम में ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को यूसीसी से बाहर रखने की मांग रखी और सरकार पर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। ओवैसी ने लव जिहाद कानून का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार से सवाल किए। सभा के दौरान उन्होंने हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के बयानों और सागर शराब मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इसी घटनाक्रम के बाद टी राजा की सभा का मुद्दा फिर सामने आया है। टी राजा की भोपाल के गांधीनगर क्षेत्र में 31 मई को धर्मसभा प्रस्तावित थी लेकिन पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। कार्यक्रम निरस्त होने के बाद टी राजा ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए नाराजगी जाहिर की थी। उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद भी हुआ था।

    धर्मसभा को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में भोपाल के तलैया थाने में शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत में दो इंस्टाग्राम अकाउंट संचालकों पर धमकी अभद्र भाषा और भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए थे। मामले में सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका का भी उल्लेख किया गया था।

    टी राजा तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अपने आक्रामक बयानों को लेकर अक्सर राजनीतिक चर्चा में रहते हैं। उनकी प्रस्तावित भोपाल सभा की अनुमति का मामला पहले न्यायालय तक भी पहुंचा था। अब ओवैसी की सभा के बाद हिंदू उत्सव समिति की ओर से टी राजा के कार्यक्रम की अनुमति मांगने की तैयारी ने इस पूरे मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या फैसला करता है इस पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर रहेगी।

  • आईसीयू में बदल रहा मरीजों का पैटर्न: युवाओं में स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा परेशानी बुजुर्गों में कई बीमारियां बनी बड़ी वजह

    आईसीयू में बदल रहा मरीजों का पैटर्न: युवाओं में स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा परेशानी बुजुर्गों में कई बीमारियां बनी बड़ी वजह


    भोपाल । भोपाल में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले गंभीर मरीजों में बुजुर्गों की संख्या अधिक दिखाई देती थी लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं सामने आ रही हैं जो धीरे धीरे गंभीर रूप ले सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं में बढ़ता तनाव नींद की कमी लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना और बिगड़ी लाइफस्टाइल चिंता का कारण बन रहे हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर मरीज शुरुआत में आईसीयू तक नहीं पहुंचते और ओपीडी में ही इलाज कराते हैं लेकिन कुछ मामलों में स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
    भोपाल में आयोजित एमपी क्रिटिकॉन 1.0 में इंदौर के क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. संजय धानुका और डॉ. आनंद सांघी ने आईसीयू में बदलते मरीजों के पैटर्न पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि बीमारियों का मूल स्वरूप पूरी तरह नहीं बदला है लेकिन मरीजों की उम्र उनकी जीवनशैली और गंभीर अवस्था तक पहुंचने के कारणों में बदलाव जरूर दिखाई दे रहा है।

    20 से 40 साल की उम्र के लोगों में स्ट्रेस डिसऑर्डर इंसोम्निया सिरदर्द और लाइफस्टाइल से जुड़ी परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर चलाने तथा देर रात तक जागने की आदत का असर नींद के साथ गर्दन कंधे और मांसपेशियों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लगातार स्क्रीन देखने के बजाय बीच बीच में ब्रेक लेना चाहिए। इसके साथ सर्वाइकल और शोल्डर एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करना भी मददगार हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार प्रोफेशनल स्ट्रेस अब केवल ऑफिस की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गया है। काम का दबाव कम समय में ज्यादा काम करने की अपेक्षा और घर की जिम्मेदारियां मिलकर तनाव को बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव कुछ लोगों में गंभीर मानसिक परेशानियों का कारण बन सकता है। आईसीयू में पॉइजनिंग के मरीज भी पहुंचते हैं जिनमें कीटनाशक और सल्फास जैसी चीजों से हुई पॉइजनिंग के मामले शामिल हैं। ऐसे मामलों में मरीज के शारीरिक इलाज के साथ मानसिक स्थिति का आकलन भी जरूरी माना जाता है और जरूरत पड़ने पर साइकेट्रिस्ट को उपचार में शामिल किया जाता है।

    तनाव का असर बच्चों और छात्रों में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल नहीं देने पढ़ाई को लेकर डांटने या अपेक्षाओं के दबाव जैसी स्थितियां कुछ बच्चों में काफी तनाव पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में परिवार की भूमिका अहम हो जाती है। केवल दिखाई देने वाले लक्षणों का इलाज करने के बजाय तनाव के पीछे की वजह समझना जरूरी है।

    वहीं दूसरी तरफ आईसीयू में बुजुर्ग मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। बढ़ती उम्र के साथ डायबिटीज ब्लड प्रेशर किडनी संबंधी बीमारी और दूसरी पुरानी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं। कई बार संक्रमण डायलिसिस हार्ट अटैक एंजाइना या ऑपरेशन के बाद होने वाली जटिलताओं के कारण ऐसे मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। बढ़ती उम्र और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का असर भी क्रिटिकल केयर सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र दोनों ही आईसीयू पर अलग अलग तरह का दबाव बढ़ा रहे हैं।

  • बुधवार का व्रत बदल सकता है जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए ऐसे करें पूजा और व्रत के नियमों का पालन

    बुधवार का व्रत बदल सकता है जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए ऐसे करें पूजा और व्रत के नियमों का पालन


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह के अलग अलग दिनों का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। बुधवार का दिन भगवान गणेश के साथ बुध देव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन व्रत और पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायता मिल सकती है। वहीं बुध देव की पूजा को बुद्धि वाणी एकाग्रता और कार्यक्षमता से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि विद्यार्थी नौकरीपेशा लोग और कारोबार से जुड़े लोग भी बुधवार के दिन विशेष पूजा और व्रत करते हैं।

    बुधवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करनी चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाना चाहिए। पूजा की शुरुआत गणेश जी के ध्यान से करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान को फूल दूर्वा सिंदूर और फल अर्पित किए जा सकते हैं। गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।

    व्रत के दौरान मन को शांत रखते हुए भगवान गणेश के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश मंत्र या गणेश गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद भगवान गणेश की आरती करनी चाहिए और परिवार की सुख शांति समृद्धि तथा सभी सदस्यों के कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिए। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय होती है।

    बुधवार व्रत में खानपान को लेकर भी अलग अलग परिवारों और परंपराओं में अलग नियम देखने को मिलते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए व्रत अपनी पारिवारिक परंपरा और क्षमता के अनुसार रखा जा सकता है। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखना और नकारात्मक विचारों से दूर रहने को महत्वपूर्ण माना जाता है।

    बुधवार के दिन हरी वस्तुओं का दान करना भी कई धार्मिक मान्यताओं में शुभ बताया गया है। जरूरतमंद व्यक्ति को हरी मूंग कपड़े या भोजन का दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया जा सकता है। विद्यार्थियों के लिए भी बुधवार को पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने के उद्देश्य से गणेश जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

    व्रत पूरा होने पर भगवान गणेश की आरती करके प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से बुधवार का व्रत करना चाहता है तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार संकल्प लेकर इसे जारी रख सकता है। हालांकि व्रत के नियम स्वास्थ्य और व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार रखना जरूरी है। किसी भी धार्मिक उपाय को निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए। श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ पूजा करना ही इस व्रत का मुख्य उद्देश्य माना जाता है।

  • अडानी-अंबानी की दौलत पर बाजार की मार: एक दिन में ₹59 हजार करोड़ से ज्यादा घटे नेटवर्थ

    अडानी-अंबानी की दौलत पर बाजार की मार: एक दिन में ₹59 हजार करोड़ से ज्यादा घटे नेटवर्थ


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में मंगलवार की तेज गिरावट का असर देश के दो बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति पर भी दिखाई दिया। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक गौतम अडानी की नेटवर्थ एक दिन में 4.44 अरब डॉलर यानी करीब 42 हजार करोड़ रुपए घट गई, जबकि मुकेश अंबानी की संपत्ति में 1.78 अरब डॉलर यानी करीब 17 हजार करोड़ रुपए की कमी आई। अडानी की नेटवर्थ घटकर 105 अरब डॉलर रह गई और वे अरबपतियों की सूची में 20वें स्थान पर पहुंच गए।

    अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट

    अडानी की संपत्ति में कमी की बड़ी वजह ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट रही। मंगलवार, 15 सितंबर को अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 4.29% टूटकर ₹2,928.60 पर बंद हुआ। अडानी पावर में 3.80% की गिरावट रही और यह ₹202 पर बंद हुआ। अडानी पोर्ट्स एंड SEZ 2.88% गिरकर ₹1,713.80 पर आ गया।

    इसी तरह अडानी ग्रीन एनर्जी में 2.05% की कमजोरी रही और शेयर ₹1,255 पर बंद हुआ। अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस 1.86% गिरकर ₹1,347.50 पर आ गया, जबकि अडानी टोटल गैस में करीब 2.46% की गिरावट दर्ज की गई।

    अंबानी की संपत्ति भी घटी

    मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में भी मंगलवार को 1.78 अरब डॉलर यानी करीब 17 हजार करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई। उनकी कुल संपत्ति घटकर 81.3 अरब डॉलर रह गई।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में मंगलवार को तेज गिरावट रही। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार शेयर ₹1,235.30 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 1.77% नीचे था।

    अरबपतियों की संपत्ति में रोजाना होने वाले बदलाव में शेयर बाजार की भूमिका अहम होती है। इन कारोबारियों की नेटवर्थ का बड़ा हिस्सा उनकी कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी से जुड़ा होता है। इसलिए संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव का सीधा असर उनकी संपत्ति के अनुमानित मूल्य पर पड़ता है।

    सेंसेक्स-निफ्टी भी दबाव में

    मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1.04% टूटकर 74,003.82 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.19% गिरकर 23,118.60 अंक पर आ गया।

    बाजार में दबाव की वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी शामिल रही। ऐसे माहौल में बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बढ़ा और इसका असर अडानी तथा रिलायंस समूह के शेयरों पर भी दिखाई दिया।

    मस्क की दौलत में भी बड़ी गिरावट

    दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क की संपत्ति में भी मंगलवार को बड़ी कमी दर्ज की गई। टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में गिरावट के चलते उनकी नेटवर्थ करीब 24.8 अरब डॉलर घटने की बात सामने आई है। इसके बाद उनकी संपत्ति करीब 892 अरब डॉलर रह गई।

    अरबपतियों की नेटवर्थ में इस तरह के दैनिक बदलाव को उनकी कंपनियों के शेयरों के बाजार मूल्य से जोड़कर देखा जाता है। शेयर कीमतों में बदलाव के साथ नेटवर्थ के आंकड़े भी लगातार बदलते रहते हैं।

  • ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे

    ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे


    नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी संघर्ष और यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका, इजरायल और सात अरब देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में बंद कमरे में बैठक हुई। पिछले सप्ताह हुई इस बैठक में ईरान युद्ध, मध्य-पूर्व की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही और हूती खतरे से निपटने को लेकर सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में इजरायल के साथ सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए।

    ब्रैड कूपर ने बुलाई बैठक, सार्वजनिक नहीं की गई जानकारी

    बैठक का आयोजन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था। यह मुलाकात पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद में CENTCOM ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जर्मनी में एक तय कॉन्फ्रेंस के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की गई और मध्य-पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें इजरायल और ऐसे अरब देशों के सैन्य अधिकारी एक साथ शामिल हुए, जिनमें से कुछ के इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद इस स्तर की यह पहली बैठक बताई गई है।

    अमेरिका ने कहा- मध्य-पूर्व से सेना हटाने की योजना नहीं

    बैठक में एडमिरल कूपर ने कथित तौर पर सहयोगी देशों को बताया कि ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिका की मध्य-पूर्व से अपनी सैन्य मौजूदगी हटाने की योजना नहीं है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और जहाजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ी अमेरिकी योजना की भी जानकारी दी।

    वहीं, इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने विभिन्न मोर्चों पर चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों के बारे में बैठक में जानकारी दी। इससे बैठक में ईरान के साथ संघर्ष के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य तैयारियों पर भी चर्चा का संकेत मिलता है।

    अब सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले भी मुद्दा

    बैठक ऐसे समय हुई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हूती खतरे को लेकर सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। 14 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और CENTCOM प्रमुख ब्रैड कूपर की जेद्दा में मुलाकात भी हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और हूती हमलों पर चर्चा हुई।

    Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल, सऊदी अरब और CENTCOM के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियानों में इजरायल किस तरह सहायता कर सकता है। इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) सहयोग का विकल्प भी शामिल बताया गया है। हालांकि, इसे अभी किसी नए सैन्य गठबंधन या संयुक्त अभियान की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।

    अब्राहम अकॉर्ड के बाद बढ़ा सैन्य तालमेल

    अमेरिका-इजरायल और अरब देशों के बीच सैन्य समन्वय की पृष्ठभूमि 2020 के अब्राहम अकॉर्ड से भी जुड़ी है। इजरायल और यूएई-बहरीन के बीच समझौते के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग के नए रास्ते खुले। इसके बाद इजरायल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में शामिल किया गया, जिससे अरब देशों के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहित अन्य सुरक्षा मुद्दों पर सैन्य समन्वय बढ़ा।

    इजरायली अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान यूएई को आयरन डोम प्रणाली और उसके संचालन के लिए इजरायली कर्मियों की मदद भी दी गई। इसके अलावा इजरायल ने यूएई को रियल टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस सहायता देने तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने की बात भी कही है।

    होर्मुज से लेकर लाल सागर तक बढ़ी चुनौती

    मध्य-पूर्व में इस समय सुरक्षा चिंता केवल ईरान तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर होने वाला तेल और व्यापारिक परिवहन, लाल सागर-बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियां और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जुलाई में भी CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद किया था, जिसमें हॉर्मुज से वाणिज्यिक आवाजाही की स्वतंत्रता और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई थी।

    जर्मनी की बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय सैन्य सहयोग के साथ-साथ ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। इसलिए इस बैठक को मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य समन्वय के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे अपने आप किसी नई व्यापक जंग की शुरुआत तय नहीं होती।