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  • सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता

    सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता


    मध्यप्रदेश:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देते हुए तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग तकनीक के साथ नए प्रयोग कर रहा है और अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर अधोसंरचना तैयार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। उन्होंने कहा कि अभियंता दिवस समारोह अभियांत्रिकी कार्यों में गुणवत्ता और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी बनाई संरचनाएं उनकी सोच और तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि इंजीनियर शब्द में उन्हें इंजन का आभास होता है। इंजन वह होता है जो पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापत्य और शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐतिहासिक इमारतों, चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों और उत्कृष्ट प्रतिमाओं के रूप में इंजीनियरिंग तथा कला-कौशल के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और अन्य प्राचीन संरचनाएं हजारों वर्षों पुरानी कला साधना की पहचान हैं।

    मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी ऐतिहासिक विभूतियों को स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है और अधोसंरचना निर्माण के लिए स्वयं संसाधन जुटाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसमें लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का टीम वर्क महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी है। उन्होंने इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पिछले नौ महीनों में प्रदेश के 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

    कार्यक्रम में CSIR-AMPRI भोपाल और लोक निर्माण विभाग के बीच हुए MoU के तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क निर्माण की तकनीक विकसित करने और सरकारी भवनों में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में भी काम होगा।

    समारोह में अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को लोक निर्माण पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार कम्पेंडियम सर्कुलर का विमोचन भी किया गया। कई अधिकारियों और अभियंताओं को सम्मानित किया गया, जबकि सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।

  • अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92 प्रतिशत पहुंची, ईंधन और खाद्य कीमतों में तेजी से बढ़ा दबाव

    अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92 प्रतिशत पहुंची, ईंधन और खाद्य कीमतों में तेजी से बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली ।देश में थोक महंगाई का दबाव अगस्त 2026 में एक बार फिर बढ़ा है। थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI पर आधारित महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 9.78 प्रतिशत दर्ज की गई थी। महंगाई में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन और ऊर्जा तथा खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आए उछाल से जुड़ी रही। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र की महंगाई में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई।

    अगस्त में सभी वस्तुओं का समग्र थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 110.8 पर पहुंच गया। इससे पहले जुलाई में यह स्तर अलग था। थोक कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर दिखाई दिया, खासकर ईंधन और ऊर्जा तथा रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाद्य वस्तुओं पर।

    ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में महंगाई सबसे ज्यादा बढ़ी। जुलाई में इस श्रेणी की महंगाई दर 20.05 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि में इस श्रेणी का सूचकांक भी 105.4 से बढ़कर 108.3 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू थोक कीमतों पर भी दिखाई दिया।

    खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। जुलाई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 6.65 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बजट पर पड़ने वाली लागत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विनिर्माण क्षेत्र में भी थोक महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी हुई। जुलाई में यह 8.29 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 8.37 प्रतिशत हो गई। इस दौरान विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक 108.4 से बढ़कर 108.8 पर पहुंच गया।

    हालांकि प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर में कमी दर्ज की गई। जुलाई में यह 8.52 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 7.76 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद इस श्रेणी का सूचकांक 117.2 से बढ़कर 118.1 पर पहुंच गया। यानी महंगाई दर में कमी के बावजूद सूचकांक में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    अगस्त में थोक महंगाई को प्रभावित करने वाली प्रमुख वस्तुओं में खनिज तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य वस्तुएं, मूल धातु, गैर-खाद्य कृषि उत्पाद और रासायनिक उत्पाद शामिल रहे। इन क्षेत्रों में कीमतों में बदलाव का असर कुल WPI आंकड़े पर पड़ा।

    जून 2026 के थोक महंगाई के आंकड़ों में भी संशोधन किया गया है। जून की अंतिम थोक महंगाई दर को पहले जारी किए गए 9.87 प्रतिशत के अनुमान से बढ़ाकर 9.97 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही जून का अंतिम सूचकांक भी संशोधित किया गया। पहले यह 110.2 था, जिसे संशोधित कर 110.3 कर दिया गया।

    जुलाई के मुकाबले अगस्त में थोक महंगाई बढ़ने के आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने कुल महंगाई दर को प्रभावित किया है। खास तौर पर ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में हुई बढ़ोतरी ने अगस्त के आंकड़ों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस तरह अगस्त में WPI आधारित महंगाई दर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई के 9.78 प्रतिशत से अधिक है। ईंधन और ऊर्जा तथा खाद्य वस्तुओं की महंगाई में बढ़ोतरी के साथ विनिर्माण क्षेत्र में मामूली तेजी दर्ज हुई, जबकि प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर में कमी आई। जून के आंकड़ों में संशोधन के बाद अब अंतिम दर 9.97 प्रतिशत दर्ज की गई है।

  • UPI पेमेंट पर चार्ज की तैयारी, 2000 रुपये तक कोई शुल्क नहीं, बड़े भुगतान पर दुकानदारों से वसूली संभव

    UPI पेमेंट पर चार्ज की तैयारी, 2000 रुपये तक कोई शुल्क नहीं, बड़े भुगतान पर दुकानदारों से वसूली संभव

    नई दिल्ली । UPI से भुगतान करने वाले लोगों के लिए शुल्क से जुड़ा नया बदलाव सामने आया है। 2000 रुपये तक के UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा, जबकि इससे अधिक राशि के भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस शुल्क का सीधा भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लगने वाले शुल्क की दर तय करने की जिम्मेदारी NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की होगी।

    अब तक UPI भुगतान को लेकर यह व्यवस्था थी कि किसी भी राशि के लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता था। नई व्यवस्था में 2000 रुपये तक के भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। इससे ज्यादा राशि के भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था लागू होने की संभावना है। ऐसे में बड़े मूल्य के UPI लेनदेन करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों पर इसका असर पड़ सकता है।

    सामने आई जानकारी के अनुसार 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क कितना होगा, इसका अंतिम फैसला NPCI करेगा। इसकी दर 0.3 से 0.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, यह अंतिम दर नहीं है और वास्तविक शुल्क NPCI के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यदि शुल्क की दर 0.3 से 0.5 प्रतिशत के बीच रहती है, तो 5000 रुपये के भुगतान पर 15 से 25 रुपये तक का शुल्क बन सकता है। यह राशि ग्राहक से सीधे वसूल किए जाने की बात नहीं है। इसका भुगतान दुकानदार या संबंधित व्यापारी को करना होगा। यानी किसी दुकान पर 5000 रुपये का सामान खरीदने के लिए UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को अलग से 15 या 25 रुपये देने की जरूरत नहीं होगी।

    इस व्यवस्था में व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन को अलग रखा गया है। यानी कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजता है, तो राशि कितनी भी हो, उसके लिए चार्ज नहीं लगेगा। इस तरह व्यक्तिगत लेनदेन पर शुल्क का असर नहीं पड़ेगा।

    बदलाव का मुख्य असर व्यापारिक भुगतान पर पड़ने की संभावना है। दुकानदारों और कारोबारियों द्वारा ग्राहकों से सामान या सेवाओं के बदले UPI के जरिए प्राप्त की जाने वाली बड़ी रकम पर शुल्क लागू हो सकता है। हालांकि, इस शुल्क की अंतिम दर और लागू होने से जुड़ी विस्तृत व्यवस्था NPCI के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

    UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है और छोटे से लेकर बड़े लेनदेन तक इसका इस्तेमाल किया जाता है। नई व्यवस्था में 2000 रुपये तक के भुगतान को बिना शुल्क जारी रखने की बात कही गई है। इससे रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर सीधे शुल्क का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    दूसरी ओर, 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क की संभावित व्यवस्था कारोबारियों के लिए नई लागत पैदा कर सकती है। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेनदेन पर किसी राशि की सीमा के आधार पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बिंदु NPCI द्वारा तय की जाने वाली शुल्क दर है। 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर कितना प्रतिशत शुल्क लगेगा और यह व्यवस्था किस तरह लागू होगी, इसकी तस्वीर अंतिम निर्णय के बाद साफ होगी। फिलहाल 2000 रुपये तक के भुगतान को शुल्क से मुक्त रखने की व्यवस्था बताई गई है।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी सुरक्षा चूक, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस तीन इटालियन नागरिक म्यूनिख रवाना, एयर इंडिया को नोटिस

    नई दिल्ली ।दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चूक का मामला सामने आया है। तीन इटालियन नागरिक बिना दिल्ली में अनिवार्य डिपार्चर इमिग्रेशन कराए ही विदेश रवाना हो गए। तीनों यात्री दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हुए। मामले के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और संबंधित व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है।

    मामला 3 और 4 सितंबर की दरमियानी रात का बताया गया है। तीनों इटालियन नागरिक अमृतसर से एयर इंडिया की हब-एंड-स्पोक उड़ान AI-1115 से दिल्ली पहुंचे थे। यह विमान रात करीब 12:50 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा। दिल्ली पहुंचने के बाद तीनों यात्रियों को डोमेस्टिक बोर्डिंग पास जारी किया गया था।

    इसके बावजूद यात्रियों को गलत तरीके से इंटरनेशनल ट्रांसफर क्षेत्र में पहुंचा दिया गया। वहां से वे सीधे अंतरराष्ट्रीय डिपार्चर जोन तक पहुंच गए। इसके बाद 4 सितंबर की तड़के करीब 1:45 बजे तीनों लुफ्थांसा की उड़ान LH-763 से म्यूनिख के लिए रवाना हो गए। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने दिल्ली में डिपार्चर इमिग्रेशन क्लीयरेंस नहीं कराया।

    मामले में सबसे बड़ा सवाल एयरपोर्ट पर लागू मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP को लेकर उठ रहा है। यात्रियों के पास डोमेस्टिक बोर्डिंग पास होने के बावजूद वे इंटरनेशनल डिपार्चर क्षेत्र तक कैसे पहुंच गए और उन्हें वहां जाने से रोकने वाली व्यवस्था ने काम क्यों नहीं किया, इसकी जांच की जा रही है।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन से संबंधित SOP में पांच व्यवस्थाओं के कथित उल्लंघन को चिन्हित किया है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अलग रखना, केवल ‘I’ बोर्डिंग पास वाले यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर डेस्क तक जाने की अनुमति देना और हब तथा स्पोक एयरपोर्ट पर चौबीसों घंटे नोडल अधिकारी एवं मॉनिटरिंग टीम की व्यवस्था शामिल है।

    मंत्रालय के अनुसार इस मामले में यात्रियों की निगरानी और उन्हें निर्धारित मार्ग से भेजने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर सकी। इसी वजह से तीन यात्री उस प्रक्रिया को पार कर अंतरराष्ट्रीय उड़ान तक पहुंच गए, जिसे उनके लिए लागू नहीं होना चाहिए था।

    घटना को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया से जवाब मांगा है। एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी कर मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यात्रियों के गलत मार्ग से इंटरनेशनल डिपार्चर तक पहुंचने के पीछे किस स्तर पर चूक हुई।

    मामले में गृह मंत्रालय ने भी गंभीरता दिखाई है। गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की मंगलवार शाम एक आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में घटना से जुड़े सुरक्षा और इमिग्रेशन पहलुओं पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि तीनों यात्रियों को घरेलू बोर्डिंग पास के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में एयरलाइन स्टाफ की लापरवाही थी या एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा और संबंधित एजेंसियों की व्यवस्था में कमी रही।

    मामला सामने आने के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की आवाजाही, बोर्डिंग पास की जांच और घरेलू से अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और आगे ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन में राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नई दिल्ली में ग्रहण किया सम्मान

    टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन में राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नई दिल्ली में ग्रहण किया सम्मान

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले को ग्रे वॉटर प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। आईएससी-फिक्की स्वच्छता पुरस्कार में टीकमगढ़ को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी का विजेता घोषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नवीत कुमार धुर्वे और जिला समन्वयक जिला पंचायत मनीष जैन ने पुरस्कार ग्रहण किया।

    टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों ने गांवों की गलियों में बहने वाले गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए भूमिगत जल निकासी की व्यवस्था विकसित की है। यह पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे अन्य गांवों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की।

    पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था जिले के 225 गांवों तक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन की योजना, तकनीकी मार्गदर्शन और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से ग्राम पंचायतों में स्थानीय जरूरत के अनुसार भूमिगत जल निकासी व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके चलते गांवों की गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में गंदा पानी बहने, कीचड़ और जलभराव की समस्या में कमी आई है।

    इस मॉडल में घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए घरों के बाहर सिल्ट चैंबर बनाए जाते हैं। इन चैंबरों को करीब आठ इंच व्यास वाले पाइपों से जोड़ा जाता है। पाइपलाइन के माध्यम से पानी को भूमिगत तरीके से गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाया जाता है, जहां सोख्ता गड्ढे के जरिए पानी का निस्तारण किया जाता है।

    सिल्ट चैंबर में गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था रहती है। इससे भूमिगत पाइपों में रुकावट की संभावना कम होती है और पानी की निकासी सुचारु बनी रहती है। व्यवस्था का असर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजमर्रा के जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। गलियों में गंदे पानी और कीचड़ की समस्या कम होने से लोगों का आवागमन आसान हुआ है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी रास्ते अधिक सुविधाजनक हुए हैं।

    इस पूरी व्यवस्था के विकास में ग्राम पंचायतों के स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के साथ पंचम वित्त आयोग से मिले वित्तीय संसाधनों का उपयोग किया गया। चैंबर, भूमिगत पाइपलाइन और सोख्ता गड्ढों का निर्माण स्थानीय परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार किया गया है।

    कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने पुरस्कार को जिले की ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल अब 225 गांवों तक पहुंच गई है। उनके अनुसार यह केवल भूमिगत जल निकासी तैयार करने का काम नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता और गांवों के परिवेश में बदलाव लाने का प्रयास है।

    उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस मॉडल को और प्रभावी बनाने के साथ इसके संचालन और रखरखाव पर भी लगातार ध्यान देगा। एक गांव से शुरू होकर 225 गांवों तक पहुंची यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे वॉटर प्रबंधन के लिए स्थानीय समाधान और योजनाबद्ध प्रयास के उदाहरण के रूप में सामने आई है।

  • सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    मध्य प्रदेश: के सतना में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिस और आबकारी अमले को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। कबाड़ी टोला इलाके में अवैध शराब की फुटकर बिक्री के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने मोहल्ले में आने-जाने वाले रास्तों पर CCTV कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिए पुलिस और आबकारी विभाग की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी।

    अधिकारियों के मुताबिक सोमवार दोपहर मुखबिर से अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद सतना सर्किल क्रमांक-1 की टीम ने कबाड़ी टोला में घेराबंदी कर कार्रवाई की। टीम ने 24 वर्षीय राजेश उर्फ नंगा लोधी को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 113 पाव अंग्रेजी और देशी शराब बरामद की गई। जब्त शराब की कीमत 15 हजार 123 रुपये बताई गई है।

    कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ की गई। पूछताछ में अवैध शराब के कारोबार में उसके साथ जुड़े अन्य लोगों और कथित सरपरस्तों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों ने इस जानकारी की तस्दीक शुरू कर दी है और संबंधित ठिकानों पर आगे छापेमारी की जा रही है।

    मामले की जांच के दौरान CCTV कैमरों का नेटवर्क सामने आना कार्रवाई का अहम हिस्सा रहा। जानकारी के मुताबिक राजेश लोधी और उसके सहयोगियों ने कबाड़ी टोला में मोहल्ले के प्रवेश मार्गों पर गोपनीय तरीके से कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की लाइव फीड राजेश के घर में लगी टीवी स्क्रीन पर देखी जाती थी।

    इस व्यवस्था का इस्तेमाल पुलिस और आबकारी अमले की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। जब भी टीम के इलाके में पहुंचने की जानकारी कैमरों के जरिए मिलती थी, आरोपी और उसके साथी कथित तौर पर शराब को छिपाकर वहां से निकल जाते थे। इस तरह वे कार्रवाई से बचने की कोशिश करते थे।

    आबकारी टीम ने कार्रवाई के दौरान CCTV कैमरों के साथ उनका DVR भी जब्त कर लिया है। अब जब्त उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कैमरों और DVR से अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों तथा उसकी निगरानी व्यवस्था के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

    इस कार्रवाई से यह भी सामने आया कि अवैध शराब की बिक्री में शामिल लोगों ने अपने ठिकाने की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया था। आमतौर पर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल यहां कार्रवाई से बचने के लिए किया जा रहा था। आबकारी विभाग अब जब्त किए गए उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहा है।

    आरोपी के खिलाफ अवैध शराब से संबंधित प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ में सामने आए अन्य नामों और ठिकानों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

    कार्रवाई में आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। फिलहाल आरोपी से बरामद 113 पाव शराब, CCTV कैमरों और DVR को जांच का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की कार्रवाई का अगला चरण पूछताछ और तकनीकी जांच से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा।

  • छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    मध्य प्रदेश: के छिंदवाड़ा जिले में गलत इलाज के बाद एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के मरीजों का एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों को दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। महिला की मौत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दोनों के पास चिकित्सा शिक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले।

    पुलिस के अनुसार घटना 18 जुलाई 2026 की है। ग्राम बम्होरी निवासी 43 वर्षीय आरती, पत्नी रामभगस साहू, को बुखार आया था। तब उसके परिजन इलाज के लिए महाराजा मार्केट स्थित एक क्लिनिक पर लेकर पहुंचे थे। यहां राजेश सिन्हा नाम का व्यक्ति इलाज करता था। महिला की जांच और उपचार के दौरान उसके भाई ज्योतिप्रकाश मंडल उर्फ काली ने फोन पर राजेश से बातचीत की।

    इसके बाद ज्योतिप्रकाश ने आरती को दो इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल हर्रई अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान आरती की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपचार से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

    जांच के दौरान पुलिस को राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल के पास चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र, डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। इसके अलावा दोनों के पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके बावजूद दोनों मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें दवाएं तथा इंजेक्शन दे रहे थे। पुलिस ने इसी आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) के साथ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच का मुख्य आधार महिला को दिए गए उपचार, दोनों आरोपियों की चिकित्सा योग्यता और घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से जुड़े तथ्य रहे।

    मामला बिना वैध चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने से जुड़ा है। जांच में दोनों आरोपियों के पास इलाज करने के लिए जरूरी डिग्री, डिप्लोमा और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दे रहे थे।

    आरती को बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन दो इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

  • BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान से आए पत्रकार बसीम लालेह ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत संवाद और कूटनीति के स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक सक्रियता की सराहना की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर भी टिप्पणी की।

    लालेह के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थता में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहा। इसके विपरीत, भारत ने विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान और यूएई के नेताओं के साथ बातचीत इसका उदाहरण है।

    ईरानी पत्रकार ने बताया कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बातचीत हुई। इसके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी प्रधानमंत्री की चर्चा हुई। उनके अनुसार, इसके बाद यूएई और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बनना पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद के जरिए आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    आसिम मुनीर को लेकर लालेह ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुनीर कई मोर्चों पर असफल रहे हैं और भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आसिम मुनीर की छुट्टी कर दी है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के संदर्भ में की गई थी।

    लालेह ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने मतभेदों को पीछे छोड़कर बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के समाधान के लिए संवाद महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

    पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लालेह ने कहा कि पाकिस्तान खुद कई मामलों में दूसरे देशों पर निर्भर है। उनके अनुसार, इसी वजह से पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र तरीके से विदेश नीति तय करना मुश्किल है। उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीति को कमजोर बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति को लेकर कोई प्रभावी उदाहरण स्थापित नहीं कर पाया है।

    ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना करता रहा है, उसके लिए शांति की पहल का नेतृत्व करना मुश्किल होता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लगातार अधिक महत्व मिल रहा है।

    लालेह ने सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हमले करने वालों के खिलाफ पाकिस्तान अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाया है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की सक्रिय कूटनीति और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज है। ईरानी पत्रकार बसीम लालेह की टिप्पणियों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। वहीं, भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    नई दिल्ली । ममता बनर्जी के सामने पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों को लेकर चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। खबरों के अनुसार, उन्होंने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। इसके तहत नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, टीएमसी या कांग्रेस की ओर से इस बातचीत को लेकर अब तक आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार शाम ममता बनर्जी ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से बातचीत की थी। बताया गया है कि बातचीत के दौरान उन्होंने उपचुनाव में साथ आने का प्रस्ताव रखा। ममता बनर्जी की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने और रेजीनगर सीट पर टीएमसी उम्मीदवार के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगे जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही नंदीग्राम से टीएमसी उम्मीदवार का नाम वापस लेने की पेशकश किए जाने का भी दावा किया गया है।

    हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने टीएमसी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। कांग्रेस की ओर से कथित तौर पर कहा गया है कि यदि टीएमसी गठबंधन चाहती है तो उसे नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर कांग्रेस का समर्थन करना होगा। टीएमसी शासन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित अत्याचारों को भी इस फैसले की वजह बताया गया है।

    ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस से संपर्क किए जाने की खबर ऐसे समय आई है, जब दोनों दल उपचुनाव में अलग-अलग मैदान में उतर रहे हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, टीएमसी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।

    नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वह इसी सीट से चुनाव हार गई थीं। आगामी उपचुनाव को लेकर ऐसी अटकलें भी थीं कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से मैदान में उतर सकती हैं, लेकिन टीएमसी ने यहां संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। उनकी उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं और उनके नाम को वर्ष 2014 के शिक्षक भर्ती घोटाले से जोड़कर चर्चा की जा रही है।

    इस बीच टीएमसी के भीतर बगावत का असर भी दोनों सीटों पर दिखाई दे रहा है। ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट ने नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमां शेख को उम्मीदवार बनाया गया है। यह गुट टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के कारण उपचुनाव की स्थिति बनी है। इसी बीच टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी निर्वाचन आयोग में मामला चल रहा है। बताया जा रहा है कि आयोग 17 सितंबर से पहले इस पर फैसला ले सकता है।

    विधानसभा चुनाव में अविभाजित टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। बाद में 60 से अधिक विधायकों के ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ चले जाने का दावा किया गया। ऐसे में उपचुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन की कथित कोशिश और बागी गुट की सक्रियता ने ममता बनर्जी के सामने राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा दिया है।

  • दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन पर बनेगी बड़ी गैंगस्टर फिल्म, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी मचाएगी धमाल

    दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन पर बनेगी बड़ी गैंगस्टर फिल्म, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी मचाएगी धमाल

    नई दिल्ली ।रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद अब बॉलीवुड में गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड की कहानियों को लेकर हलचल बढ़ गई है। इसी कड़ी में राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए साथ आए हैं। दोनों की यह फिल्म मुंबई अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर आधारित होगी और इसकी कहानी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के अलगाव के दौर से जुड़ी होगी। फिल्म को ‘धुरंधर’ से भी बड़े स्तर का प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।

    राम गोपाल वर्मा गैंगस्टर ड्रामा फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जबकि मोहित सूरी अपनी फिल्मों में रोमांस, इमोशन और संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। इस प्रोजेक्ट में दोनों निर्देशकों की अलग-अलग शैली का मेल देखने को मिल सकता है। राम गोपाल वर्मा ने मोहित सूरी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए इस फिल्म की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि दोनों अगली फिल्म के लिए साथ काम कर रहे हैं और यह पूरी तरह गैंगस्टर ड्रामा होगी।

    फिल्म की कहानी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के अलग होने की घटनाओं के इर्द-गिर्द रखी गई है। राम गोपाल वर्मा के मुताबिक उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है, जबकि मोहित सूरी इसका निर्देशन करेंगे। उन्होंने कहा कि मोहित ने स्क्रिप्ट को एक अलग स्तर पर पहुंचाया है। कहानी में अंडरवर्ल्ड के साथ भारतीय खुफिया एजेंसियों की भूमिका को भी दिखाने की बात कही गई है। फिल्म की पृष्ठभूमि में 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया है।

    राम गोपाल वर्मा ने फिल्म के स्वरूप को लेकर कहा है कि इसमें गैंग वॉर के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। किरदारों की कहानी, संगीत और एक्शन पर विशेष ध्यान देने की तैयारी है। उनके मुताबिक मोहित सूरी ने कहानी को अपने अंदाज में पेश किया है और किरदारों के भावनात्मक पक्ष को मजबूत बनाया है।

    राम गोपाल वर्मा ने यह भी कहा कि मोहित सूरी के विजन को देखने के बाद उन्हें विश्वास है कि फिल्म बड़े स्तर पर दर्शकों के सामने आएगी। उन्होंने इसकी तुलना अपनी फिल्म ‘सत्या’ से करते हुए कहा कि यह कहानी जमीन से जुड़ी होगी और भावनात्मक स्तर पर भी प्रभाव छोड़ने की कोशिश करेगी। हालांकि, फिल्म की स्टारकास्ट और रिलीज डेट को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस प्रोजेक्ट की घोषणा ऐसे समय हुई है जब ‘धुरंधर’ और उसके दूसरे भाग को दर्शकों से बड़ी प्रतिक्रिया मिलने की बात कही जा रही है। रणवीर सिंह की मुख्य भूमिका वाली इन फिल्मों में संजय दत्त, अक्षय खन्ना, सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी नजर आए हैं। अंडरवर्ल्ड और गैंग वॉर की पृष्ठभूमि वाली फिल्मों की बढ़ती चर्चा के बीच राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी का यह प्रोजेक्ट खासा ध्यान खींच रहा है।

    अब फिल्म की कहानी, कलाकारों और निर्माण से जुड़ी बाकी जानकारी का इंतजार है। दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के दौर की घटनाओं को बड़े पर्दे पर किस तरह पेश किया जाता है, यह फिल्म की सबसे अहम खासियतों में से एक हो सकती है। वहीं, राम गोपाल वर्मा और मोहित सूरी की जोड़ी इस गैंगस्टर ड्रामा को किस तरह का सिनेमाई रूप देती है, इस पर भी दर्शकों की नजर रहेगी।