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  • व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.

    व्रत में कमजोरी से बचना है तो अपनाएं ये पौष्टिक स्नैक्स, दिनभर बनी रहेगी एनर्जी.


    नई दिल्ली । सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ संयम और सात्विक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है। इस दौरान लंबे समय तक उपवास रखने से शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में संतुलित और पौष्टिक आहार का चयन करना आवश्यक हो जाता है, ताकि दिनभर शरीर सक्रिय रहे और आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति भी होती रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि हल्के, सुपाच्य और पोषण से भरपूर स्नैक्स व्रत के दौरान बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

    साबूदाना से तैयार टिक्की व्रत के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल है। उबले आलू के साथ तैयार यह स्नैक लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। इसे कम घी या हल्के तेल में सेंककर दही अथवा व्रत वाली हरी चटनी के साथ खाया जा सकता है। इसी तरह कुट्टू के आटे से बना चीला भी प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें पनीर या उबले आलू का उपयोग करने से इसका पोषण मूल्य और बढ़ जाता है।

    मखाना चिवड़ा भी व्रत के लिए एक हल्का और पौष्टिक विकल्प है। घी में हल्का भुना मखाना, मूंगफली और सेंधा नमक के साथ तैयार यह स्नैक कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। हल्की भूख लगने पर यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ पेट भी भरा हुआ महसूस कराता है। वहीं उबले आलू, सेंधा नमक, काली मिर्च, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाकर तैयार आलू चाट स्वाद और पोषण का संतुलित विकल्प माना जाता है।

    सिंघाड़े के आटे से बने पकौड़े भी व्रत के दौरान पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में शामिल हैं। इन्हें पनीर या आलू के साथ तैयार कर दही के साथ परोसा जा सकता है। यदि तली हुई चीजों से बचना चाहते हैं तो इन्हें कम तेल में भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा दही, केला, सेब और भीगे हुए बादाम से तैयार फ्रूट एंड नट लस्सी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करती है।

    शकरकंद से बने चिप्स भी सामान्य तले हुए स्नैक्स की तुलना में अधिक पौष्टिक विकल्प माने जाते हैं। इन्हें घी में हल्का सेंककर या बेक करके तैयार किया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं। वहीं राजगिरा और गुड़ से बने लड्डू तुरंत ऊर्जा देने वाले स्नैक्स के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें पहले से तैयार कर पूरे सावन में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्रत के दौरान तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। दिनभर पर्याप्त पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके साथ ही मौसमी फल, दही और सूखे मेवों को भोजन का हिस्सा बनाना लाभकारी माना जाता है। एक बार में अधिक भोजन करने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में संतुलित स्नैक्स लेना बेहतर रहता है। सही खानपान अपनाकर सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा के साथ-साथ स्वस्थ और ऊर्जावान तरीके से भी पूरा किया जा सकता है।

  • 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी निर्णय नहीं, सरकार बोली- वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही बढ़ेगा कदम

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की अटकलों पर विराम लगाते हुए संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार का कहना है कि किसी भी नए निर्णय का आधार केवल वैज्ञानिक प्रमाण और व्यावहारिक अनुभव होंगे।

    लोकसभा में लिखित उत्तर के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि ई85 ईंधन केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध कराया गया है। ऐसे वाहन विशेष रूप से इस ईंधन के उपयोग के लिए डिजाइन और प्रमाणित किए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने का निर्णय लिया जा चुका है।

    सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को चरणबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल कंपनियों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों सहित विभिन्न संस्थानों की भागीदारी रही है। व्यापक परीक्षणों और फील्ड वैलिडेशन के बाद ही ई20 ईंधन को लागू किया गया।

    सरकार के अनुसार उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक उपयोग के अनुभव बताते हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप इस्तेमाल किए जाने पर ई20 पेट्रोल सुरक्षित और तकनीकी रूप से उपयुक्त ईंधन है। सरकार ने कहा कि यह निष्कर्ष केवल प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित नहीं है, बल्कि देशभर में इसके व्यावहारिक उपयोग से प्राप्त अनुभवों से भी इसकी पुष्टि हुई है।

    संसद को दी गई जानकारी के अनुसार देश में ई15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्षों से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। इस अवधि में करोड़ों दोपहिया वाहन और लाखों पेट्रोल कारें इस ईंधन पर संचालित हुई हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या असामान्य तकनीकी समस्या का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 के कारण अतिरिक्त घिसावट या इंजन की आयु कम होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।

    सरकार ने यह भी बताया कि प्रमुख वाहन निर्माताओं के सर्विस डेटा में ई20 उपयोग करने वाले वाहनों में इंजन डैमेज या असामान्य खराबी की दर सामान्य ईंधन वाले वाहनों की तुलना में अधिक नहीं पाई गई। साथ ही कंपनियां ऐसे वाहनों पर सामान्य वारंटी भी जारी रख रही हैं। विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए परीक्षणों में भी ई20 ईंधन को तकनीकी रूप से अनुकूल पाया गया है।

    माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वाहन की स्थिति, ड्राइविंग शैली और सड़क की परिस्थितियां शामिल हैं। कुछ पुराने ई10 आधारित वाहनों में माइलेज में सीमित कमी संभव है, लेकिन ई20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, साफ दहन, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे लाभ भी प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत, कच्चे तेल के आयात में कमी, कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट और किसानों की आय बढ़ाने में भी सकारात्मक योगदान मिला है।

  • 8वें वेतन आयोग में 1.92 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, जानिए कितनी बढ़ सकती है बेसिक सैलरी

    8वें वेतन आयोग में 1.92 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा तेज, जानिए कितनी बढ़ सकती है बेसिक सैलरी

    नई दिल्ली । 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच वेतन वृद्धि की संभावनाओं पर चर्चा लगातार तेज हो रही है। सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है, क्योंकि इसी के आधार पर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। फिलहाल 1.92 फिटमेंट फैक्टर को लेकर विभिन्न स्तरों पर अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार या प्रस्तावित वेतन आयोग की ओर से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    यदि केवल अनुमान के तौर पर 1.92 फिटमेंट फैक्टर को आधार माना जाए तो वर्तमान में 18,000 रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर 34,560 रुपये हो सकती है। इसी प्रकार अन्य वेतन स्तरों पर भी नई बेसिक सैलरी का अनुमान लगाया जा रहा है। यह गणना केवल संभावित परिदृश्य को समझाने के लिए है और इसे अंतिम वेतन संरचना नहीं माना जा सकता।

    अनुमानित गणना के अनुसार, 25,500 रुपये की मौजूदा बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 48,960 रुपये, 35,400 रुपये की बेसिक लगभग 67,968 रुपये, 44,900 रुपये की बेसिक करीब 86,208 रुपये तथा 56,100 रुपये की बेसिक लगभग 1,07,712 रुपये तक पहुंच सकती है। यह पूरा आकलन केवल 1.92 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बेसिक सैलरी में बदलाव देखकर वास्तविक वेतन वृद्धि का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कर्मचारियों की कुल आय में महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता (TA) और अन्य भत्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नया वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी भत्तों की गणना के नियम भी बदल सकते हैं, जिससे वास्तविक ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी प्रभावित होगी।

    फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक गुणांक होता है, जिसके माध्यम से वर्तमान बेसिक वेतन को गुणा करके संशोधित बेसिक वेतन निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान बेसिक वेतन 35,400 रुपये है और 1.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो संशोधित बेसिक वेतन लगभग 67,968 रुपये होगा। इसी सिद्धांत के आधार पर सभी वेतन स्तरों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

    वर्तमान समय में केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसलिए वेतन वृद्धि का वास्तविक आकलन करते समय मौजूदा बेसिक वेतन के साथ महंगाई भत्ते को भी शामिल करना आवश्यक माना जाता है। उदाहरण के लिए 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 60 प्रतिशत डीए जोड़ने के बाद कुल राशि 28,800 रुपये होती है। यदि संभावित नई बेसिक 34,560 रुपये मानी जाए तो दोनों के बीच का अंतर लगभग 5,760 रुपये रहता है। हालांकि इसे सीधे वास्तविक वेतन वृद्धि नहीं माना जा सकता क्योंकि अन्य भत्तों का पुनर्निर्धारण भी इसमें शामिल होगा।

    गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था। अब कर्मचारियों की निगाहें 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों और सरकार के फैसले पर टिकी हैं। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और केंद्रीय कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की बेसिक, ग्रॉस और इन-हैंड सैलरी में वास्तविक बदलाव कितना आएगा।

  • संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित

    संसद परिसर में NDA और विपक्ष आमने-सामने, जमकर हुई नारेबाजी, दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक स्थगित


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन परिसर के बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर एनडीए सांसद भी विरोध दर्ज कराने के लिए मैदान में उतर आए। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई और माहौल काफी देर तक गर्म रहा।

    एनडीए सांसद 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने का विरोध कर रहे थे, जबकि इंडिया ब्लॉक के सांसद NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

    प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा नारे लगाते हुए एनडीए सांसदों के काफी करीब पहुंच गईं। स्थिति को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बीच में आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे किसी तरह की टकराव की स्थिति नहीं बनने पाई।

    संसद के भीतर भी दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार शोर-शराबे के चलते पहले लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई। दोपहर बाद सदन की बैठक शुरू होते ही फिर से हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 3 बजे तक रोकी गई थी। दोबारा बैठक शुरू होने पर विपक्षी सांसदों ने फिर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार, 24 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।

  • NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    NEET मुद्दे पर जंतर-मंतर बना देशभर के छात्रों का मंच, भोजन-पानी से लेकर समर्थन तक कई हाथ आए साथ

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े मुद्दों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्र शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी ने इसे विविधता और सहभागिता का प्रतीक बना दिया है।

    धरनास्थल पर मौजूद छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग से जुड़ा है। उनका मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष और भरोसेमंद होगी तो लाखों युवाओं का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। इसी उद्देश्य से वे कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रदर्शन में शामिल हैं।

    गर्मी और उमस के बीच जंतर-मंतर पर बने अस्थायी शिविरों में बड़ी संख्या में छात्र दिन-रात डटे हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल कई छात्र विभिन्न राज्यों से लंबी यात्रा कर दिल्ली पहुंचे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

    धरने के दौरान स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की ओर से भी लगातार सहयोग किया जा रहा है। कई लोग प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इस सहयोग से उन्हें आंदोलन जारी रखने का मनोबल मिलता है और यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्ग भी उनकी मांगों के प्रति संवेदनशील हैं।

    प्रदर्शन स्थल पर अपनी बात रखने के लिए विशेष बोर्ड भी लगाए गए हैं, जहां छात्र अपनी मांगों और सुझावों को लिखकर साझा कर रहे हैं। इनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव जैसी मांगें प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि सुधार के लिए ठोस सुझाव देना भी है।

    आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने बताया कि उनके परिवारों की राय अलग-अलग रही, लेकिन उन्होंने अपने स्तर पर इस अभियान का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत भविष्य का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास है। इसी भावना के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं।

    इसी बीच कुछ स्थानीय परिवार भी प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए आगे आए हैं। कई लोग अपने घरों से भोजन तैयार कर छात्रों तक पहुंचा रहे हैं। स्वयंसेवकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों में बैठे छात्रों की सहायता करना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इस सहयोग को प्रदर्शनकारी भी आंदोलन की बड़ी ताकत मान रहे हैं।

    जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समानांतर सरकार और CJP के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी चल रही है। हालांकि अब तक किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। फिलहाल धरना शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

  • बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे

    बातचीत को तैयार सरकार, चार बार भेजा न्योता, CJP बोली- जंतर-मंतर आएं, नड्डा के घर नहीं जाएंगे


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बातचीत की इच्छा जताई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार किसी भी समय वार्ता के लिए तैयार है और पिछले 24 घंटे में CJP को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में चर्चा के लिए चार बार आमंत्रित किया गया, लेकिन संगठन ने सभी प्रस्ताव अस्वीकार कर दिए।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बातचीत करना चाहती है तो उसके प्रतिनिधि जंतर-मंतर आएं या किसी तटस्थ स्थान पर बैठक करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी राजनीतिक नेता के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएगा।

    इधर, प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) ने कनॉट प्लेस स्थित दुकानों, दफ्तरों और रेस्तरां संचालकों से गुरुवार शाम 6:30 बजे तक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की है।

    जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का आंदोलन 20 जून से लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP का प्रदर्शन 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वहीं, सोनम वांगचुक का अनशन भी 26 दिन से जारी है और उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा है।

    धरनास्थल पर देशभर से लोगों का समर्थन भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों के लिए विभिन्न राज्यों से भोजन भेजा जा रहा है, जबकि छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।

  • CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    CJP प्रदर्शन के बीच वायरल दावे पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण, NSA डिटेंशन शक्तियों की खबर को बताया भ्रामक

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में जारी CJP प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत विशेष डिटेंशन की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इस दावे के व्यापक प्रसार के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए इसे भ्रामक बताया और लोगों से केवल प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

    दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जिस आदेश का हवाला देकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं, वह किसी विशेष प्रदर्शन या मौजूदा घटनाक्रम से संबंधित नहीं है। पुलिस के अनुसार यह आदेश नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे निर्धारित अंतराल पर जारी किया जाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित आदेश 7 जुलाई को जारी किया गया था और इसकी प्रभावी अवधि 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    पुलिस का कहना है कि यह आदेश CJP के विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही जारी किया जा चुका था। इसलिए इसे वर्तमान प्रदर्शन या किसी विशेष कार्रवाई से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई नया या विशेष आदेश जारी नहीं किया गया है और वायरल दावों का वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें। अधिकारियों ने कहा कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए लोगों को केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा कि किसी भी संवेदनशील विषय पर गलत जानकारी का प्रसार कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

    इधर राजधानी में CJP का विरोध प्रदर्शन जारी है और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बीच केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला भी जारी है। दोनों पक्षों के बीच अब तक कई दौर की चर्चा हो चुकी है, हालांकि अभी किसी अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी, जबकि CJP ने अपने रुख को लेकर अलग बयान दिया है।

    राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों और वीडियो के बीच प्रशासन बार-बार लोगों से संयम बरतने और अपुष्ट सूचनाओं से बचने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि संवेदनशील परिस्थितियों में केवल आधिकारिक और सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना ही अफवाहों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि वायरल दावे और वास्तविक प्रशासनिक आदेश अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्पष्टीकरण को प्राथमिकता देना आवश्यक है, ताकि गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो।

  • सीएम योगी ने गोरखपुर को दी 994 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, विपक्ष पर साधा निशाना

    सीएम योगी ने गोरखपुर को दी 994 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात, विपक्ष पर साधा निशाना


    गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान जिले को कुल 994 करोड़ रुपये की 14 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 813 करोड़ रुपये की चार परियोजनाओं का लोकार्पण और 181 करोड़ रुपये की दस परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी आस्था का विरोध करते थे, आज वही आस्था के सबसे बड़े समर्थक बनने का दावा कर रहे हैं।

    विपक्ष पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के शासनकाल में प्रदेश की 29 चीनी मिलें बंद हो गईं। उनका आरोप था कि इन सरकारों ने युवाओं के रोजगार, किसानों के हित और प्रदेश की कानून-व्यवस्था की अनदेखी की। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया और रामभक्तों पर गोली चलवाई, जबकि कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर से जुड़े मामले में अदालत में विरोध का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे दल आज आस्था पर उपदेश दे रहे हैं, जो जनता को स्वीकार्य नहीं है।

    2017 से पहले और अब के यूपी की तुलना
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में दंगे, अपराध और असुरक्षा का माहौल था। धार्मिक आयोजनों और पर्वों के दौरान तनाव की स्थिति बनती थी, जबकि अब प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और लोग सुरक्षित वातावरण में त्योहार मना रहे हैं।

    उन्होंने इंसेफेलाइटिस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हजारों बच्चों की जान जाने के बावजूद पिछली सरकारों ने गंभीरता नहीं दिखाई। उनकी सरकार ने इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण का काम किया।

    रोजगार और निवेश पर सरकार का दावा
    सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने 9 लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी हैं। इसके अलावा निजी निवेश के माध्यम से 65 लाख लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना से पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान मिली और करोड़ों युवाओं व कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

    गोरखपुर के विकास का किया उल्लेख
    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले गोरखपुर माफिया, अपराध और इंसेफेलाइटिस जैसी समस्याओं के कारण चर्चा में रहता था, जबकि आज यहां निवेश का माहौल बना है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में बड़े पैमाने पर निवेश से लगभग 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं रामगढ़ताल अब पर्यटन और रोजगार का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

    इन परियोजनाओं का हुआ लोकार्पण
    टीपीनगर-पैडलेगंज सिक्सलेन फ्लाईओवर – 429.49 करोड़ रुपये
    पैडलेगंज से फिराक गोरखपुरी चौराहा तक फोरलेन सड़क – 277.77 करोड़ रुपये
    एयरफोर्स स्टेशन परिसर में एमईएस कार्यालय का स्थानांतरण – 103.51 करोड़ रुपये
    थाना गुलरिहा में हॉस्टल, बैरक और विवेचना कक्ष का निर्माण – 2.74 करोड़ रुपये

    इन योजनाओं का हुआ शिलान्यास
    मुख्यमंत्री ने महिला श्रमजीवी छात्रावास, नंदानगर अंडरपास, साइंस म्यूजियम, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, परिवहन विभाग की टायर शॉप के आधुनिकीकरण सहित विभिन्न सड़क और नाली निर्माण परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया।

    कार्यक्रम में सांसद रवि किशन ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोरखपुर की तस्वीर तेजी से बदली है और शहर आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर मायावती का बड़ा हमला, आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील

    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश में पेपर लीक की घटनाओं, नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को भ्रष्टाचार की व्यापक समस्या से जोड़ते हुए केंद्र और संबंधित संस्थाओं से समयबद्ध तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण होने से स्थिति और जटिल बनती है तथा इसका सीधा असर आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं पर पड़ता है।

    मायावती ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि युवाओं के मन में गंभीर चिंता और असंतोष है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शी और भरोसेमंद कार्रवाई के जरिए छात्रों का विश्वास बहाल करे।

    उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का दायरा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक जनचर्चा का विषय बन गया है। उनके अनुसार, जब ऐसे मामलों पर राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं तो मूल मुद्दे से ध्यान भटकने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम रखते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

    बसपा प्रमुख ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद हों या भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियां, इन सभी के पीछे भ्रष्टाचार की समस्या एक साझा कारण के रूप में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

    मायावती ने भ्रष्टाचार को देश की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यह समाज और प्रशासन को भीतर से कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों का पालन ही सुशासन की सबसे बड़ी आधारशिला है। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सुशासन और जवाबदेह प्रशासन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को उनकी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए।

    उन्होंने सरकार, प्रशासन और संवैधानिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें और जनता से जुड़े गंभीर मामलों में त्वरित तथा निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थागत सुधारों की भी आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    मायावती ने यह भी कहा कि किसी भी आंदोलन को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाने के बजाय संवाद और सहमति से समाधान खोजने का प्रयास होना चाहिए। उनका मानना है कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव का माहौल बनने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती है और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से संयम बरतने तथा शांतिपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उनका कहना है कि छात्रों के भविष्य, सार्वजनिक विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे विषय पर संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाया जाना आवश्यक है।

  • गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान 429 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शहर के पहले सिक्सलेन फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 995 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फ्लाईओवर का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विकास कार्यों के साथ स्वच्छता, अतिक्रमण हटाने और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हाल ही में बारिश के दौरान रवि किशन को पानी में उतरकर नाली साफ करते देखा गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि नाली साफ करने से बेहतर है कि नालों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, क्योंकि इससे पानी का निकास स्वतः बेहतर हो जाएगा। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी।

    मुख्यमंत्री ने इसी दौरान सांसद रवि किशन की ओर से आयोजित भोज का भी जिक्र किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि भोजन कार्यक्रम में कितने लोग शामिल हुए थे। जब सीमित संख्या में लोगों ने हाथ उठाया तो मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में कहा कि लगता है केवल चार-पांच लोगों को ही भोजन मिला। इस पर रवि किशन ने जवाब देते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस सहज बातचीत ने कार्यक्रम का माहौल हल्का बना दिया।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार सड़क, पुल, फ्लाईओवर और अन्य आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना था कि मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, जबकि अब राज्य में अपराध और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बीते वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं तथा विकास को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ाया जा रहा है।

    योगी आदित्यनाथ ने लोगों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की। उन्होंने कहा कि नालों और जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचना आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकास कार्य तभी लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे जब जनता भी उनकी देखभाल और संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।

    गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का संबोधन विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना, स्वच्छता अभियान और जनभागीदारी जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। वहीं सांसद रवि किशन के साथ उनका हल्का-फुल्का संवाद भी कार्यक्रम की प्रमुख चर्चा बना रहा, जिसे उपस्थित लोगों ने सहज और सकारात्मक माहौल का हिस्सा माना।