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  • उत्पात की कीमत 25 हजार रुपए, पेनाल्टी नहीं तो रिजल्ट नहीं; IET छात्रों पर कड़ी कार्रवाई

    उत्पात की कीमत 25 हजार रुपए, पेनाल्टी नहीं तो रिजल्ट नहीं; IET छात्रों पर कड़ी कार्रवाई


    मध्य प्रदेश । देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) के रामानुजन छात्रावास में हुए हंगामे के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। हॉस्टल परिसर में अर्धनग्न होकर डांस करने, अनुशासनहीनता फैलाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दोषी पाए गए छात्रों को 25 हजार रुपए का जुर्माना जमा करने के बाद ही उनका परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा।

    आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बंसल के अनुसार मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच समिति की अनुशंसा के आधार पर दोषी छात्रों का रिजल्ट फिलहाल रोक दिया गया है। जब तक छात्र निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें परीक्षा परिणाम उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। अब तक केवल एक छात्र ने 25 हजार रुपए की पेनाल्टी जमा की है, जबकि बाकी छात्रों को भी यह राशि जमा करनी होगी।

    मामले में शामिल 17 छात्रों की पहचान की जा चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्रों के अभिभावकों को बुलाया है ताकि उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया जा सके। अब तक पांच छात्रों के माता-पिता प्रशासन से मुलाकात कर चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को छात्रों के व्यवहार और विश्वविद्यालय की कार्रवाई दोनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

    हंगामे के कारण फाइनल ईयर के कुछ छात्रों की परीक्षाएं भी प्रभावित हुई थीं। घटना के बाद उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी। अब विश्वविद्यालय जून के मध्य, यानी 15 जून के आसपास इन छात्रों की शेष परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। परीक्षा कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

    दरअसल, कुछ दिन पहले रामानुजन छात्रावास में रहने वाले फाइनल ईयर के छात्रों ने देर रात जमकर उत्पात मचाया था। छात्रों ने हॉस्टल परिसर में अर्धनग्न होकर डांस किया और कई जगह तोड़फोड़ की। इस दौरान हॉस्टल की टेबल-कुर्सियां, पानी की टंकियां और खिड़कियों के कांच तक तोड़ दिए गए। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी आलोचना हुई और तत्काल जांच के आदेश दिए गए।

    जांच के दौरान वायरल वीडियो के आधार पर 17 छात्रों को चिन्हित किया गया। इसके बाद अनुशासन समिति ने आर्थिक दंड, रिजल्ट रोकने और परीक्षा से वंचित करने जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। प्रशासन ने इन्हीं सिफारिशों के आधार पर कदम उठाए हैं।

    हालांकि घटना के वीडियो वायरल होने के बाद हॉस्टल के कुछ छात्रों ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी और अपने व्यवहार पर खेद जताया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि संस्थान की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

    विश्वविद्यालय के इस फैसले को अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का संदेश साफ है कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासनहीनता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • इंदौर में देर रात खूनी संघर्ष, सड़क पर शराब पीने को लेकर दो गुटों में चाकूबाजी

    इंदौर में देर रात खूनी संघर्ष, सड़क पर शराब पीने को लेकर दो गुटों में चाकूबाजी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने को लेकर हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ झगड़ा कुछ ही देर में इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। चाकूबाजी की इस घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक जनता क्वार्टर निवासी विनोद उर्फ पन्नू सिंह जादौन शनिवार रात करीब 11 बजे सांची पॉइंट के सामने टहल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ युवकों को सड़क किनारे सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते देखा। विनोद ने उन्हें समझाते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाका है, जहां महिलाओं और परिवारों का लगातार आना-जाना रहता है, इसलिए खुलेआम शराब पीना उचित नहीं है। लेकिन उनकी यह समझाइश विवाद का कारण बन गई।

    शिकायत के अनुसार समझाने की बात सुनते ही वहां मौजूद लोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट की नौबत आ गई। आरोप है कि एक युवक ने विनोद के साथ हाथापाई की, जबकि दूसरे आरोपी ने चाकू निकालकर उन पर हमला कर दिया। हमले में विनोद के गले के पास गंभीर चोट आई और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया। जानकारी मिलने पर विनोद पक्ष के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव शुरू हो गया। आरोप है कि जवाबी कार्रवाई में दूसरे पक्ष के लोगों पर भी चाकुओं से हमला किया गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। एक युवक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जबकि अन्य के शरीर पर भी कई घाव पाए गए। दूसरे पक्ष के एक सदस्य ने भी शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उस पर चाकू से हमला किया गया, जिससे उसके पैर में गंभीर चोट आई।

    सूचना मिलते ही परदेशीपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। शुरुआती जांच के आधार पर दोनों ओर से प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। कुछ आरोपी घटना के बाद से फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि विवाद में शामिल दोनों पक्षों के कुछ लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना पूर्व नियोजित थी या अचानक हुए विवाद का परिणाम। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्कता बरत रही है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी और असामाजिक गतिविधियों के कारण आए दिन विवाद की स्थिति बनती है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

  • मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    नई दिल्ली । मई माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था में मांग और कर अनुपालन की मजबूती को दर्शाती है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत का सकल जीएसटी संग्रह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर के करीब पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर और अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
    आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,88,172 करोड़ रुपये की तुलना में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं शुद्ध जीएसटी राजस्व 1,66,904 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसमें 3.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है। रिफंड को समायोजित करने के बाद राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कर संग्रह प्रणाली की मजबूती का संकेत है।

    महीने के दौरान रिफंड की राशि भी बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये रही, हालांकि इसके बावजूद कुल राजस्व में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। घरेलू कर संग्रह में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन आयात से प्राप्त कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि ने कुल आंकड़ों को संतुलित बनाए रखा। आयात आधारित जीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वैश्विक व्यापार गतिविधियों में मजबूती और आयात मांग में सुधार का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति घरेलू खपत और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतरता को दर्शाती है।

    वहीं दूसरी ओर घरेलू जीएसटी संग्रह 1,34,530 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.6 प्रतिशत की कमी देखी गई, लेकिन सेवा क्षेत्र और वस्तु श्रेणियों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। सेवा क्षेत्र में 22.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि और वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक रुझान यह दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत आधारित विकास मॉडल मजबूत स्थिति में है। सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई, जो आर्थिक गतिविधियों की व्यापकता को दर्शाता है।

    राज्यों के स्तर पर भी जीएसटी संग्रह में विविध प्रदर्शन देखने को मिला। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्यों में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से केरल और हरियाणा जैसे राज्यों ने दोहरे अंकों में वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह संकेत देता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं और कर आधार का विस्तार हो रहा है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में कुल सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में शुद्ध राजस्व में भी 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल माह में भी रिकॉर्ड संग्रह देखने को मिला था, जो यह दर्शाता है कि लगातार दो महीनों से राजस्व वृद्धि का रुझान मजबूत बना हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वित्त वर्ष के निर्धारित कर लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा और देश की आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।

  • नौतपा के अंत में इंदौर को गर्मी से राहत, मई का सबसे कम तापमान दर्ज; आज तेज आंधी के आसार

    नौतपा के अंत में इंदौर को गर्मी से राहत, मई का सबसे कम तापमान दर्ज; आज तेज आंधी के आसार


    मध्य प्रदेश । नौतपा के अंतिम दिनों में इंदौर में मौसम ने ऐसा करवट ली कि भीषण गर्मी से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिल गई। मई के आखिरी दिन शनिवार को शहर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री कम रहा। खास बात यह रही कि यह पूरे मई महीने का सबसे कम अधिकतम तापमान रहा। लगातार कई दिनों तक तेज धूप और लू जैसी परिस्थितियों का सामना करने वाले शहरवासियों के लिए यह बदलाव राहत भरी खबर बनकर सामने आया है।

    हालांकि तापमान में गिरावट दर्ज होने के बावजूद उमस ने लोगों का पीछा नहीं छोड़ा। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण दिनभर चिपचिपी गर्मी महसूस की गई। रात का तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक रहा। इसके बावजूद दिन के समय तेज गर्मी का असर कम रहने से लोगों ने राहत की सांस ली।

    सोमवार सुबह मौसम साफ रहा, लेकिन मौसम विभाग ने दिन में तेज आंधी चलने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणालियों और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण आने वाले दिनों में भी मौसम में बदलाव बना रह सकता है। आंधी, बादल और हल्की बारिश की वजह से तापमान में और गिरावट दर्ज हो सकती है।

    मई महीने की शुरुआत 39.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ हुई थी। पूरे महीने मौसम लगातार करवटें बदलता रहा। आंकड़ों के अनुसार मई के दौरान 20 दिनों तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। नौतपा के शुरुआती दिनों में सूरज ने जमकर तेवर दिखाए और कई बार तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। 18 मई को अधिकतम तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो महीने के सबसे गर्म दिनों में शामिल रहा।

    इसके बाद महीने के अंतिम सप्ताह में मौसम का मिजाज अचानक बदलने लगा। बादलों की आवाजाही, हवाओं की दिशा में बदलाव और प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में लगातार गिरावट आई। हालांकि पिछले करीब 15 दिनों से बढ़ी हुई नमी के कारण उमस लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।

    मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में आमतौर पर तापमान में और कमी देखने को मिलती है। पिछले सात वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जून में अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। वर्ष 2025 में जून का अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं मानसून पूर्व गतिविधियों के चलते जून में सामान्यतः अच्छी बारिश भी होती है। पिछले वर्ष जून में इंदौर में करीब साढ़े पांच इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई थी।

    इंदौर के मौसम इतिहास में जून से जुड़े कई रोचक रिकॉर्ड भी दर्ज हैं। वर्ष 1980 में जून के दौरान 17 इंच से अधिक बारिश हुई थी, जबकि 23 जून 2003 को 24 घंटे में लगभग पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी। वहीं 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

    प्रदेशभर में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कई जिलों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिली हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी मौसम इसी तरह राहत भरा बना रह सकता है और लोगों को भीषण गर्मी से काफी हद तक राहत मिलने की संभावना है।

  • RCB की ऐतिहासिक जीत पर गर्व से भरे दादा, लेकिन पिछले हादसे की याद ने रोके जश्न के कदम

    RCB की ऐतिहासिक जीत पर गर्व से भरे दादा, लेकिन पिछले हादसे की याद ने रोके जश्न के कदम


    मध्य प्रदेश । रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान रजत पाटीदार के लिए इस बार का जन्मदिन जीवन की सबसे खास यादों में शामिल हो गया है। 33वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले उनकी टीम ने आईपीएल का खिताब अपने नाम कर लिया और इस उपलब्धि ने परिवार तथा प्रशंसकों की खुशी को दोगुना कर दिया। हालांकि इस ऐतिहासिक सफलता के बावजूद इंदौर स्थित पाटीदार परिवार ने जश्न को सादगी और संवेदनशीलता के साथ मनाने का फैसला किया है।

    इन दिनों रजत पाटीदार अपनी टीम और परिवार के साथ अहमदाबाद में मौजूद हैं, जबकि इंदौर स्थित उनके घर पर दादा जगदीश नारायण पाटीदार परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मैच का रोमांच देख रहे थे। जैसे ही आरसीबी की जीत सुनिश्चित हुई, घर पर बधाई देने वालों का सिलसिला शुरू हो गया। रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक लगातार पहुंचकर परिवार को शुभकामनाएं देने लगे। हर किसी के चेहरे पर खुशी थी, क्योंकि रजत ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इंदौर और मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है।

    परिजनों के अनुसार दादा जगदीश नारायण पाटीदार अपने पोते की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उनके चेहरे पर गर्व साफ दिखाई देता है, लेकिन उन्होंने इस खुशी को शोर-शराबे के बजाय शांत और गरिमापूर्ण तरीके से महसूस करना पसंद किया। काफी आग्रह के बाद वे घर से बाहर आए और लोगों की शुभकामनाएं स्वीकार कीं। इस दौरान समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और आतिशबाजी भी की, लेकिन दादाजी खुद इस उत्सव से दूरी बनाए रहे।

    इसके पीछे एक भावनात्मक कारण भी है। परिवार आज भी उस दर्दनाक घटना को नहीं भूला है, जब आरसीबी की पहली आईपीएल जीत के बाद हुए जश्न के दौरान भगदड़ मच गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। उस हादसे ने परिवार को गहराई से प्रभावित किया था। यही वजह है कि इस बार जीत की खुशी के बावजूद परिवार ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों से दूरी बनाकर रखने का निर्णय लिया है।

    रजत पाटीदार के जन्मदिन पर उनके मित्र और प्रशंसक विशेष आयोजन करना चाहते थे, लेकिन परिवार की भावनाओं और रजत की अनुपस्थिति को देखते हुए उन्होंने भी सादगी का रास्ता चुना। परिवार का मानना है कि खेल में मिली सफलता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी भी उत्सव में मानव जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी सबसे ऊपर है।

    पाटीदार परिवार के लिए यह अवसर केवल एक खेल उपलब्धि का नहीं, बल्कि विनम्रता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी संदेश लेकर आया है। एक ओर पोते की सफलता पर दादा का सीना गर्व से चौड़ा है, तो दूसरी ओर वे यह भी चाहते हैं कि जीत का जश्न हमेशा संयम और समझदारी के साथ मनाया जाए। यही सोच इस परिवार को बाकी लोगों से अलग बनाती है और यही कारण है कि रजत पाटीदार की सफलता आज केवल क्रिकेट की जीत नहीं, बल्कि मूल्यों की भी जीत बन गई है।

  • भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती

    भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती

    नई दिल्ली । मई में भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसमें एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.0 के स्तर पर पहुंच गया है। यह अप्रैल के 54.7 और शुरुआती अनुमान 54.3 से अधिक है, जो औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत देता है। नए ऑर्डरों, उत्पादन गतिविधियों और खरीद में आई तेज़ वृद्धि ने इस सुधार को प्रमुख रूप से समर्थन दिया है, जिसके चलते कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए स्टॉक जमा करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार मई का प्रदर्शन पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर और व्यापक रिकवरी की ओर इशारा करता है। देश के कई हिस्सों, जिनमें मध्य प्रदेश सहित विभिन्न औद्योगिक केंद्र शामिल हैं, वहां भी उत्पादन गतिविधियों में सुधार का रुझान देखा गया है।

    सर्वेक्षण के अनुसार इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स सेगमेंट में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की तुलना में अधिक तेज रही, जिससे औद्योगिक उत्पादन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू मांग इस वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई है, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नए ऑर्डरों की लगातार प्राप्ति ने संतुलन बनाए रखा है।

    एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देशों से भी भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है, जिससे निर्यात आधारित गतिविधियों को समर्थन मिला है। लागत के मोर्चे पर कच्चे माल, ऊर्जा, ईंधन और परिवहन खर्चों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव का परिणाम मानी जा रही है।

    हालांकि तैयार उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिससे कंपनियों के लाभ मार्जिन पर कुछ दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है। उत्पादन और नए ऑर्डरों में आई तेज़ी फरवरी के बाद सबसे अधिक दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उद्योगों में मांग का स्तर मजबूत बना हुआ है।

    उद्योग जगत के अनुसार यह रुझान आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है, क्योंकि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि से औद्योगिक मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों का विश्वास स्तर भी मजबूत बना हुआ है, जो उत्पादन क्षमता विस्तार और नई भर्तियों की संभावनाओं को बढ़ा रहा है।

    हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण लागत दबाव बना रह सकता है, लेकिन घरेलू मांग इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर रही है। कुल मिलाकर मई के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर गति से विस्तार कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिससे निवेश और उत्पादन दोनों को सकारात्मक दिशा मिल रही है।

  • खेत बचाने की लड़ाई सड़क पर, खाने का सामान लेकर धरने पर बैठे किसान

    खेत बचाने की लड़ाई सड़क पर, खाने का सामान लेकर धरने पर बैठे किसान


    मध्य प्रदेश । इंदौर में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पूर्वी बायपास प्रोजेक्ट और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सोमवार से किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कलेक्टर कार्यालय के बाहर गंजी कंपाउंड में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए हैं।

    धरने में मुख्य रूप से सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, फरसपुर, खुड़ैल और आसपास के गांवों के किसान शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों परियोजनाओं के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों ने मांग की है कि सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करे और इन परियोजनाओं को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए।

    आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान अपने परिवारों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे हैं। कई महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने अपने साथ भोजन बनाने का सामान भी लाया है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखेंगे।

    किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जिन जमीनों का अधिग्रहण प्रस्तावित है, वे वर्षों से उनकी जीविका का प्रमुख आधार रही हैं। ऐसे में बिना संतोषजनक समाधान और उचित सहमति के भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई भी जारी है। पिछले महीने हाई कोर्ट ने इस परियोजना से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। यह याचिका भारतीय किसान यूनियन की ओर से दायर की गई थी। अदालत ने मामले में एनएचएआई और प्रशासन को नोटिस जारी कर उनका पक्ष भी मांगा है।

    किसान नेताओं का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता नहीं है, जिससे किसानों में चिंता बनी हुई है। इसी वजह से उन्होंने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आशंकाओं का समाधान करें।

    धरना स्थल पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है और विभिन्न गांवों से लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि किसान अपने अधिकारों और जमीन की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

  • दतिया में चुनावी शतरंज बिछी, बीजेपी-कांग्रेस की तैयारी तेज; दामोदर यादव बन सकते हैं गेमचेंजर

    दतिया में चुनावी शतरंज बिछी, बीजेपी-कांग्रेस की तैयारी तेज; दामोदर यादव बन सकते हैं गेमचेंजर


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को नई ऊर्जा दे दी है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग को 2 अक्टूबर 2026 तक उपचुनाव कराना है, ऐसे में राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।

    भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। पिछले दो महीनों से वे दतिया क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के प्रयासों में जुटे हैं। यादव, पाल, क्षत्रिय सहित विभिन्न समाजों के लोगों को भाजपा से जोड़ने के लिए लगातार सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। मई महीने के दौरान कई चरणों में अलग-अलग वर्गों के लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उपचुनाव से पहले अपने पारंपरिक और नए सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    डॉ. मिश्रा ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाजपा की विकासवादी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जनता का विश्वास मिलने का दावा किया है। लगातार हो रही सदस्यता गतिविधियों को भाजपा की चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि उपचुनाव होता है तो पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।

    वहीं कांग्रेस की रणनीति संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर केंद्रित है। पार्टी ने दतिया विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक, मंडलम और बूथ स्तर तक बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की तैयारियों के निर्देश दिए जा रहे हैं। 2 जून को प्रस्तावित बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

    हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चयन को लेकर है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे हैं। दूसरी ओर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। नायक का तर्क है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हित में त्याग किया था, इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा कई अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

    कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है ताकि उपचुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    इधर आजाद समाज पार्टी भी दतिया में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी है। पार्टी नेता दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों, जनसंपर्क अभियानों और कार्यकर्ता बैठकों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उनकी पार्टी से जुड़ रहे हैं। पार्टी ने उन्हें संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुकाबला भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा दिखाई दे रहा हो, लेकिन आजाद समाज पार्टी की सक्रियता चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। खासकर यदि दामोदर यादव कुछ खास सामाजिक वर्गों और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल रहते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय रंग ले सकता है।

    उधर निर्वाचन आयोग ने भी उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दतिया में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भी चुनावी तैयारियां गति पकड़ रही हैं।

    दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में प्रभाव और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव की दिशा तय करेंगे।

  • मई में 56% ज्यादा बारिश, मध्य प्रदेश में गर्मी पर ब्रेक; कई जिलों में बारिश और तेज हवाएं

    मई में 56% ज्यादा बारिश, मध्य प्रदेश में गर्मी पर ब्रेक; कई जिलों में बारिश और तेज हवाएं


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण गर्मी का असर काफी हद तक कम हो गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है, जिससे दिन और रात दोनों के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि श्योपुर जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

    रविवार और सोमवार की दरमियानी रात प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम सुहावना बना रहा। खंडवा प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पचमढ़ी में तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी भोपाल में रात का तापमान 24.5 डिग्री, इंदौर में 26.4 डिग्री, ग्वालियर में 24.7 डिग्री, उज्जैन में 26 डिग्री और जबलपुर में 24.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से नीचे रहा। दमोह में 21.8 डिग्री, रीवा में 22 डिग्री, खरगोन और छिंदवाड़ा में 23.4 डिग्री, उमरिया में 23.5 डिग्री तथा दतिया में 23.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बादल, नमी और वर्षा गतिविधियों के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है।

    बारिश की बात करें तो सतना जिले में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जहां 24 घंटे के दौरान सवा इंच से ज्यादा पानी बरसा। दतिया में आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिवपुरी, गुना, ग्वालियर, श्योपुर, रीवा, सिवनी, बैतूल, सिंगरौली, मैहर और उमरिया समेत कई जिलों में बारिश हुई। राजधानी भोपाल में भी सोमवार सुबह से तेज हवाओं के साथ मौसम खुशनुमा बना रहा।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई महीने में प्रदेश में सामान्य से लगभग 56 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि इस बार प्री-मानसून गतिविधियां सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और अरब सागर-बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के संयुक्त प्रभाव के कारण प्रदेश में बार-बार मौसम बदल रहा है।

    हालांकि बारिश और ठंडक के बीच आकाशीय बिजली का खतरा भी बढ़ गया है। श्योपुर में बिजली गिरने की घटना ने मौसम विभाग की चेतावनियों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है। विशेषज्ञों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। किसानों के लिए यह मौसम फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

    गर्मी से परेशान लोगों के लिए यह बदलाव राहत लेकर आया है, लेकिन मौसम के लगातार बदलते मिजाज को देखते हुए प्रशासन और नागरिकों दोनों को सावधानी बरतनी होगी।