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  • रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें, सुबह दिखेगा साफ और चमकदार चेहरा..

    रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें, सुबह दिखेगा साफ और चमकदार चेहरा..


    नई दिल्ली।मिट्टी प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी स्किन की नेचुरल चमक छीन लेती है। ऐसे में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोइंग स्किन के लिए हमेशा महंगे प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं होते। आपकी किचन और ड्रेसिंग टेबल पर मौजूद कुछ नेचुरल चीजें भी कमाल का असर दिखा सकती हैं।एक्सपर्ट्स के मुताबिक रात का समय स्किन रिपेयर के लिए सबसे बेहतर होता है। दिनभर धूप और प्रदूषण से डैमेज हुई स्किन रात में खुद को रिपेयर करती है। अगर इस दौरान सही चीजें स्किन पर लगाई जाएं तो उनका असर ज्यादा जल्दी और बेहतर दिखाई देता है।

    रात को सोने से पहले क्यों जरूरी है स्किन केयर
    दिनभर स्किन बाहरी नुकसान झेलती है। रात के समय ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और स्किन सेल्स तेजी से रिपेयर होते हैं। यही वजह है कि नाइट स्किनकेयर रूटीन को सबसे अहम माना जाता है।

    रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें

    1. एलोवेरा जेल
    एलोवेरा जेल स्किन को गहराई से हाइड्रेट करता है और दाग धब्बों को हल्का करने में मदद करता है। सोने से पहले चेहरे को साफ करके हल्की मात्रा में एलोवेरा जेल लगाएं और रातभर छोड़ दें। सुबह चेहरा फ्रेश और सॉफ्ट नजर आएगा।

    2. गुलाब जल
    गुलाब जल नेचुरल टोनर की तरह काम करता है। यह स्किन के पोर्स को टाइट करता है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाता है। कॉटन की मदद से सोने से पहले चेहरे पर गुलाब जल लगाएं। यह स्किन को शांत करता है और रेडनेस भी कम करता है।

    3. नारियल तेल या बादाम तेल
    अगर आपकी स्किन ड्राई है तो सोने से पहले कुछ बूंदें नारियल तेल या बादाम तेल की मसाज करें। यह स्किन को पोषण देता है और रातभर नमी बनाए रखता है। सुबह स्किन सॉफ्ट और चमकदार दिखती है।

    बेहतर रिजल्ट के लिए रखें इन बातों का ध्यान
    सोने से पहले मेकअप जरूर हटाएं। हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें और पर्याप्त नींद लें। पानी ज्यादा पिएं और जंक फूड से दूरी बनाएं।नियमित रूप से इन नेचुरल उपायों को अपनाने से कुछ ही दिनों में स्किन की रंगत में सुधार और नेचुरल ग्लो साफ नजर आने लगेगा।

  • UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र

    UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

    1 फरवरी और 2 फरवरी को जारी बयानों में कन्नौज सांसद ने आरोप लगाया कि PDA और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखत के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ा धोखा बताया, न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की और वोटर्स से मतदाता लिस्ट में अपने नाम वेरिफाई करने को कहा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की अपील की.अखिलेश ने कहा कि नामों को गलत तरीके से हटाने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को इस मुद्दे पर मिला अखिलेश यादव का साथ, जमकर हुआ हंगामा

    किस ओर इशारा कर रहे यूपी एसआईआर के आंकड़े?

    इन आरोपों के बीच, 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 जमा करने का दिन-वार डेटा दिखाता है कि पूरे महीने में नाम हटाने और आपत्ति के आवेदनों में कैसे बढ़ोतरी हुई. 6, 7, और 8 जनवरी को कोई फॉर्म दर्ज नहीं किया गया. 9 जनवरी को 175 आवेदनों के साथ शुरू हुई, जबकि 10 जनवरी को कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं हुई. 11 जनवरी को 2,236 नए आवेदनों के साथ इसमें अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद 12 जनवरी (677), 13 जनवरी (734), 14 जनवरी (736), 15 जनवरी (889), और 16 जनवरी (906) फॉर्म जमा हुए.

    महीने के दूसरे आधे हिस्से में यह गति और तेज हो गई. 17 जनवरी को 1,970 नए आवेदन दाखिल किए गए, इसके बाद 18 जनवरी को 3,865 आवेदन आए. 19 जनवरी से रोज़ाना के आंकड़े ज़्यादा रहे: 19 जनवरी (2,674), 20 जनवरी (2,670), 21 जनवरी (2,848), 22 जनवरी (2,787), 23 जनवरी (2,318), 24 जनवरी (2,861), 25 जनवरी (2,797), और 26 जनवरी (2,947). आखिरी दिनों में और बढ़ोतरी देखी गई-27 जनवरी (3,317), 28 जनवरी (3,424), 29 जनवरी (3,551), 30 जनवरी (4,288), और 31 जनवरी (8,503), जो एक दिन में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी. 31 जनवरी तक कुल मिलाकर 57,173 फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा हो चुके थे.

    क्या है फॉर्म 7?

    फॉर्म 7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया आवेदन पत्र है जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में किसी का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है. इसे तब भरा जाता है जब अमुक लगता है कि किसी मतदाता का नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए. ऐसा तब हो सकता है जब मतदाता की मौत हो गई हो, वह हमेशा के लिए दूसरी जगह चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी और वजह से बतौर मतदाता पंजीकृत होने के योग्य न हो. कोई मतदाता, सूची से अपना नाम हटवाने के लिए भी फॉर्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है.

  • असली या नकली? महंगी पश्मीना शॉल खरीदने से पहले जान लें पहचान के आसान तरीके..

    असली या नकली? महंगी पश्मीना शॉल खरीदने से पहले जान लें पहचान के आसान तरीके..


    नई दिल्ली । पश्मीना शॉल सिर्फ सर्दियों से बचाने वाला कपड़ा नहीं, बल्कि कश्मीर और लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसकी बारीक बनावट, हल्कापन और जबरदस्त गर्माहट इसे दुनिया की सबसे महंगी और खास ऊन में शामिल करती है। यही वजह है कि शुद्ध पश्मीना शॉल की कीमत 30 से 40 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है। लेकिन ऊंची कीमत के कारण बाजार में नकली और सेमी सिंथेटिक पश्मीना की भरमार है, जिसमें ग्राहक अक्सर धोखा खा जाते हैं।

    नकली पश्मीना देखने में बिल्कुल असली जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ आसान जांच के जरिए इसकी सच्चाई पहचानी जा सकती है। अगर आप भी महंगी पश्मीना शॉल खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    ऊन का स्रोत पहचानें
    असली पश्मीना लद्दाख की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली चांगथांगी बकरियों के अंडरकोट से बनाया जाता है। अत्यधिक ठंड के कारण इनके रेशे बेहद महीन, मुलायम और गर्म होते हैं। यही खासियत पश्मीना को दूसरी ऊन से अलग बनाती है।

    वजन से करें जांच
    शुद्ध पश्मीना बेहद हल्का होता है। आमतौर पर पूरा पश्मीना शॉल लगभग 180 ग्राम के आसपास होता है, जबकि स्टोल का वजन करीब 90 से 100 ग्राम तक रहता है। अगर शॉल हाथ में भारी महसूस हो, तो वह नकली या मिश्रित हो सकता है।

    बर्न टेस्ट से पहचान
    पश्मीना की असलियत जांचने का एक पुराना तरीका बर्न टेस्ट है। शॉल के किनारे से निकाले गए धागे को जलाने पर असली पश्मीना बालों की तरह धीरे जलता है और राख बन जाता है। वहीं नकली या सिंथेटिक धागा प्लास्टिक की तरह पिघलता है और तेज बदबू देता है।

    बुनावट और फिनिशिंग पर नजर डालें
    असली पश्मीना पूरी तरह हाथ से बुना जाता है। इसलिए उसकी बुनावट में हल्की असमानता हो सकती है। अगर शॉल मशीन से बनी तरह बहुत ज्यादा परफेक्ट और एकसमान दिखे, तो वह नकली होने का संकेत हो सकता है।

    जीआई टैग जरूर देखें
    खरीदारी के समय पश्मीना शॉल पर जीआई टैग की मांग जरूर करें। यह टैग उसकी प्रामाणिकता और मूल स्थान की पुष्टि करता है और बताता है कि शॉल वास्तव में कश्मीर या लद्दाख क्षेत्र की पारंपरिक पश्मीना है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्मीना शॉल खरीदते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता आपको नकली से बचा सकती है और आपकी महंगी खरीद को सही निवेश बना सकती है।

  • महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज

    महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज


    नई दिल्ली । उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक दल का नेता सर्वसम्मति से चुना गया. इसके बाद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रवादी कांग्रेस के दिवंगत नेता अजित पवार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे. अब उनके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रफुल्ल पटेल का नाम सामने आ रहा था. कुछ खबरों में दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति हो चुकी है. लेकिन इसके बाद पार्टी में विवाद खड़ा हो गया और प्रफुल्ल पटेल को खुद इन खबरों का खंडन करना पड़ा.

    प्रफुल्ल पटेल के नाम की थी चर्चा

    प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रवादी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं. अजित पवार के बाद उनके अध्यक्ष बनने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी के अंदर विरोध के बाद पटेल ने इस पर विराम लगाने की कोशिश की. इसके बावजूद पार्टी की कमान किसके हाथ जाएगी, इस पर नेताओं में मतभेद साफ नजर आ रहे हैं.

    राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ सुनेत्रा पवार होंगी- कोकाटे

    राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे ने इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ सुनेत्रा पवार ही होंगी. दूसरा-तीसरा कोई नहीं. दोनों राष्ट्रवादी एक साथ आ जाएं, तब भी अध्यक्ष पद सुनेत्रा वहिनी के पास ही रहेगाजब उनसे पूछा गया कि क्या उनके समर्थन में विधायकों और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा, हस्ताक्षर हों या न हों, अध्यक्ष पद पर सुनेत्रा पवार ही आएंगी. कोकाटे ने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार अजित पवार की राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगी और पार्टी की सर्वेसर्वा बनेंगी.

    पदाधिकारियों ने भी पत्र लिखकर मांग की

    अब केवल विधायक ही नहीं, बल्कि पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने भी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है. एनसीपी के सांस्कृतिक सेल के अध्यक्ष बाबासाहेब पाटील के नेतृत्व में 30 से अधिक पदाधिकारियों ने पत्र लिखकर सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग की. यह पत्र वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को भेजा गया है. पत्र में कहा गया, अजित पवार के निधन से पार्टी पर दुख का साया है. ऐसे कठिन समय में पार्टी को मजबूत, संयमी और सभी को साथ रखने वाला नेतृत्व चाहिए. सुनेत्रा पवार ने प्रतिकूल परिस्थितियों में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालकर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है. उनके अनुभव, निष्ठा और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनापन को देखते हुए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त हैं. इसलिए पार्टी के विभिन्न सेल के पदाधिकारी एकमत से मांग करते हैं कि सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया जाए.

    पटेल के नाम पर विरोध?

    वहीं प्रफुल्ल पटेल ने अध्यक्ष पद की खबरों का खंडन करते हुए कहा, मेरे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं. एनसीपी एक लोकतांत्रिक संस्था है. इतना बड़ा निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही लिया जाएगा. पार्टी की स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा

    प्रफुल्ल पटेल को करना चाहिए सुनेत्रा पवार का समर्थन

    इसके बाद सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष बनाने की मांग और तेज हो गई. पार्टी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने कहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद अजित दादा का था. उनके बाद यह जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को ही स्वीकार करनी चाहिए. प्रफुल्ल पटेल का विरोध नहीं है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुनेत्रा पवार का समर्थन करते हुए काम करना चाहिए.

    एनसीपी अध्यक्ष को लेकर विपक्ष ने क्या कहा?
    वहीं इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी टिप्पणी की.मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा, राष्ट्रवादी कांग्रेस मराठी मिट्टी से उभरा हुआ संघर्षशील कार्यकर्ताओं का पक्ष है. ऐसे पक्ष का अध्यक्ष मराठी चेहरा होना चाहिए. वहपाटील हो सकता है, लेकिनपटेल नहीं. उनके अलावा शिवसेना उद्धव गुट सांसद संजय राउत ने भी कहा कि पार्टी की कमान प्रफुल्ल पटेल के हाथ में नहीं जानी चाहिए.
  • मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल

    मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल


    मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सोमवार सुबह करीब 10 बजे नेशनल हाईवे 552 पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। माता बसैया थाना क्षेत्र के खैरा मोड़ पर एक तेज रफ्तार यात्री बस ने सड़क किनारे खड़े ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा में बैठी महिला उछलकर सड़क पर गिर गई और बस का पिछला टायर उसके ऊपर से निकल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में मृतिका के बेटे सहित परिवार के पांच अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    खड़े रिक्शे पर काल बनकर आई बस प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनीता प्रजापति पत्नी पप्पू प्रजापति अपने परिवार के साथ ई-रिक्शा में सवार होकर कहीं जा रही थीं। खैरा मोड़ के पास ई-रिक्शा साइड में खड़ा हुआ था, तभी मुरैना से अंबाह की ओर जा रही ‘शीतला बस’ क्रमांक MP06 P 0524 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रिक्शे को टक्कर मार दी। सुनीता प्रजापति सड़क पर गिर गईं और बस का पहिया उनके ऊपर से गुजर गया।

    परिवार के 5 सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती हादसे में ई-रिक्शा में सवार अन्य लोग सड़क पर बिखर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायलों में मृतिका का 26 वर्षीय बेटा लवकुश भी शामिल है। अन्य घायलों की पहचान इस प्रकार है: शुभम 18 वर्ष, अर्चना पत्नी मांगी लाल गौर 40 वर्ष, मणि गौर पुत्र दाताराम गौर 45 वर्ष ,मुन्नी पत्नी दाताराम गौर 60 वर्ष , लवकुश पुत्र पप्पू प्रजापति 26 वर्ष सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

    बस छोड़कर फरार हुआ चालक हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों को इकट्ठा होते देख बस चालक मौके पर ही बस छोड़कर फरार हो गया। माता बसैया थाना प्रभारी एसआई अरुण कुशवाहा ने बताया कि पुलिस ने बस को जब्त कर थाने में रखवा लिया है। मृतिका के शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

  • इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में

    इंदौर भागीरथपुरा त्रासदी: दूषित पानी ने ली 32वीं जान, वेंटिलेटर पर रही बुजुर्ग महिला ने तोड़ा दम; अभी भी 2 मरीज ICU में


    इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की आपूर्ति से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार रात बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती 65 वर्षीय अनिता कुशवाह की मौत के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 32 हो गई है। अनिता पिछले एक महीने से वेंटिलेटर पर थीं और उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    एक महीने तक चला संघर्ष, फेल हुई किडनी अनिता के बेटे नीलेश ने बताया कि उनकी मां को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। 28 दिसंबर को दूषित पानी के कारण उन्हें उल्टी-दस्त शुरू हुए। भाग्यश्री अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत फिर बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अरबिंदो और फिर बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। संक्रमण इतना घातक था कि उनकी किडनी फेल हो गई और उन्हें कार्डियक अरेस्ट दिल का दौरा भी आया। लंबे समय तक डायलिसिस और वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।

    450 मरीज ठीक हुए, पर खतरा अभी टला नहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार, अब तक 450 से ज्यादा लोग इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं। हालांकि, अभी भी तीन मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 2 की हालत अत्यंत नाजुक है और वे आईसीयू में जीवन रक्षक प्रणालियों पर हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे खुला रखा है और दो एम्बुलेंस तैनात की हैं।

    निगम के दावों पर अविश्वास: 30% हिस्से में ही सप्लाई नगर निगम का दावा है कि अब पानी साफ आ रहा है और पाइप लाइन के लीकेज दुरुस्त कर लिए गए हैं, लेकिन क्षेत्र के निवासी अभी भी डरे हुए हैं। वर्तमान में केवल 30% हिस्से में ही पानी की सप्लाई की जा रही है। लोग निगम के पानी के बजाय आरओ और टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं। 70% हिस्से में अभी भी नई पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है, जिसके बाद लीकेज टेस्टिंग और सैंपल जांच की जाएगी। अनिता कुशवाह का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। उनके परिवार में पति, एक बेटा और दो बेटियां हैं। यह घटना इंदौर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

  • इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक रैपिडो बाइक चालक ने राजवाड़ा खरीदारी करने जा रही एक नाबालिग लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपी ने न केवल सुरक्षा के भरोसे को तोड़ा, बल्कि नाबालिग को सस्ते कपड़ों का लालच देकर सुनसान फ्लैट पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    राजवाड़ा जाने के लिए बुक की थी बाइक पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह खरीदारी करने के लिए राजवाड़ा जाना चाहती थी, जिसके लिए उसने मोबाइल ऐप के माध्यम से रैपिडो बाइक बुक की थी। चालक उसे राजवाड़ा तो ले गया, लेकिन वहां उसने पीड़िता को अपनी बातों के जाल में फंसाना शुरू कर दिया। आरोपी ने नाबालिग से कहा कि वह एक ऐसी जगह जानता है जहाँ बहुत ही सस्ते दामों पर अच्छे कपड़े मिलते हैं। मासूम लड़की उसकी बातों में आ गई।

    परदेसीपुरा ले जाकर किया दुष्कर्म आरोपी चालक नाबालिग को राजवाड़ा से परदेसीपुरा स्थित अपने एक कमरे पर ले गया। वहां पहुँचते ही आरोपी ने अपना असली रंग दिखाया और पीड़िता के साथ जबरदस्ती की। डरी-सहमी नाबालिग जब बदहवास हालत में अपने घर पहुँची और परिजनों को आपबीती सुनाई, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। तत्काल रावजी बाजार थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    पुलिस की तलाश और तकनीक का सहारा रावजी बाजार पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अज्ञात आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस की टीमें अब दो स्तरों पर काम कर रही हैं डिजिटल फुटप्रिंट: रैपिडो ऐप से उस समय की गई बुकिंग और चालक की आईडी की जानकारी निकाली जा रही है।

    CCTV फुटेज: राजवाड़ा से लेकर परदेसीपुरा तक के पूरे रूट के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि बाइक नंबर और आरोपी के चेहरे की स्पष्ट पहचान हो सके। यह घटना उन हजारों महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है जो रोजाना निजी ट्रांसपोर्ट एप्स का इस्तेमाल करती हैं। पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है।

  • दामजीपुरा बवाल अपडेट: बैतूल में भारी पुलिस बल तैनात, आरोपी अब्बू खान गिरफ्तार; हिंसा के बाद अब शांति की ओर कदम

    दामजीपुरा बवाल अपडेट: बैतूल में भारी पुलिस बल तैनात, आरोपी अब्बू खान गिरफ्तार; हिंसा के बाद अब शांति की ओर कदम


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के दामजीपुरा गांव में बीते रविवार को हुई साम्प्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। एक आपत्तिजनक और अमानवीय वीडियो वायरल होने के बाद भड़की भीड़ ने इलाके में जमकर उत्पात मचाया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है और फिलहाल गांव एक छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।

    घटना का मूल कारण: अमानवीय कृत्य और आक्रोश विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक विशेष समुदाय के आदतन अपराधी अब्बू खान द्वारा गाय के साथ अप्राकृतिक कृत्य करने का मामला सामने आया। इस घृणित कार्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार सुबह दामजीपुरा और आसपास के करीब 10 गांवों से हजारों की भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित भीड़ ने आरोपी के घर और दुकान सहित कई स्थानों पर तोड़फोड़, आगजनी और पथराव किया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।

    भारी सुरक्षा घेरा और 120 जवानों की तैनाती हालात बेकाबू होते देख बैतूल सहित आसपास के चार जिलों का पुलिस बल तत्काल दामजीपुरा रवाना किया गया। वर्तमान में करीब 120 सशस्त्र जवान गांव की गलियों में गश्त कर रहे हैं। पुलिस की पैनी नजर उन असामाजिक तत्वों पर है जो सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था तब तक कायम रहेगी जब तक पूर्ण विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता।

    आरोपी सलाखों के पीछे पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अब्बू खान को गिरफ्तार कर लिया है। उसे न्यायालय में पेश कर सख्त रिमांड मांगी जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपी के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बने। वहीं, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल उपद्रवियों की भी पहचान की जा रही है।

    बाजारों में लौटी रौनक, शांति की अपील सोमवार से दामजीपुरा के बाजार में दुकानें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं और लोग अपनी दिनचर्या की ओर लौट रहे हैं। कलेक्टर और एसपी ने संयुक्त रूप से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस विभाग ने चेतावनी जारी की है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

  • मैं आपका सलाहकार नहीं हूं; राहुल गांधी के तंज पर भड़के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

    मैं आपका सलाहकार नहीं हूं; राहुल गांधी के तंज पर भड़के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में हो रही चर्चा के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जब पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे का जिक्र करते हुए डोकलाम में चीनी सेना के टैंक की उपस्थिति का उल्लेख किया तो सदन में हंगामा मच गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके बयान पर आपत्ति जताई। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल के बयान पर आपत्ति जताई। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के निमय संख्या 349 का जिक्र किया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष इसका उल्लेख नहीं कर सकते हैं।
    सदन में इस पर हंगामा चलता रहा। स्पीकर ने कई बार राहुल गांधी को नियम 349 का हवाला देते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला नहीं देने की हिदायत दी लेकिन राहुल गांधी बार-बार वैसा ही करते रहे।इस दौरान बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि तो फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

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    आखिर कौन सा नियम हमें चीन पर चर्चा से रोक रहा?

    राहुल गांधी ने सवाल किया कि आखिर कौन सा नियम हमें भारत और चीन के संबंधों पर बात करने से रोकता है। इस पर स्पीकर ने कहा कि आप ऐसी पुस्तक का जिक्र कर रहे हैं जो रक्षा मंत्री के अनुसार प्रकाशित ही नहीं हुई है। इसके अलावा आप जिस मुद्दे की बात कर रहे हैं उसका यहां चल रहे विषय से कोई संबंध ही नहीं है। राहुल गांधी फिर भी अड़े रहे और स्पीकर से कहा कि आप यह कहना चाहते हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का विदेश नीति से कोई लेना-देना ही नहीं है। स्पीकर ने इस पर जवाब दिया कि आप विषय पर बात करें। आपको इस संबंध में कई बार नियम से अवगत कराया जा चुका है।
    अखिलेश ने दिया राहुल का साथ
    राहुल गांधी ने इसके बाद एक मैग्जिन में छपे आर्टिकल का उल्लेख करते हुए फिर से जनरल नरवणे की बात उठाई। इस पर भी ट्रेजरी बेंच ने हंगामा करना शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री ने इस पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा करने की इजाजत नेता प्रतिपक्ष को नहीं दी जानी चाहिए। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में उठ खड़े हुए।
    उन्होंने चीन के सवाल को सेंसिटिव बताते हुए कहा कि अगर कोई सुझाव देशहित में है तो विपक्ष के नेता को पढ़ने देना चाहिए। अखिलेश ने डॉक्टर लोहिया से लेकर मुलायम सिंह यादव तक का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें चीन से सावधान रहना है। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने कहा कि हम सुनने के लिए बैठे हैं लेकिन आसन द्वारा व्यवस्था दिए जाने के बाद भी ये फिर से वही चीज पढ़ रहे हैं ऐसे सदन कैसे चलेगा। इसके बाद भी सदन में बहुत देर तक गतिरोध बना रहा। यह देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दी।

  • मऊगंज में 'कागजी' तस्करी का भंडाफोड़: 28 गौवंशों से भरी 3 पिकअप जब्त; सरपंचों के फर्जी पत्राचार ने खोली प्रशासन की पोल

    मऊगंज में 'कागजी' तस्करी का भंडाफोड़: 28 गौवंशों से भरी 3 पिकअप जब्त; सरपंचों के फर्जी पत्राचार ने खोली प्रशासन की पोल


    मऊगंज । रीवा और मऊगंज जिले की सीमा पर स्थित लौर थाना क्षेत्र में गौ-तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पटपरा तिराहे पर स्थानीय ग्रामीणों की सजगता से गौवंशों से भरी तीन पिकअप गाड़ियों को पकड़ा गया है। इस कार्रवाई ने न केवल पशु क्रूरता की पराकाष्ठा को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि तस्करों ने बचने के लिए पंचायतों और कागजों का एक ऐसा मायाजाल बुना है, जिसकी जड़ें काफी गहरी हैं।

    क्रूरता की हदें पार, चीख भी नहीं सके बेजुबान ग्रामीणों ने जब घेराबंदी कर तीन पिकअप वाहनों MP17 G3621, MP17 ZH 1466, MP 17 G 346 को रोका, तो अंदर का नजारा देखकर रूह कांप गई। तीन गाड़ियों में कुल 28 गौवंशों को इतनी बेरहमी से ठूंस-ठूंस कर भरा गया था कि वे हिलने-डुलने तक में असमर्थ थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान महेंद्र गुप्ता, अंकित साकेत और सुरेश साहू निवासी मनगवां के रूप में हुई है।

    फर्जी दस्तावेजों का मायाजाल पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने जो दस्तावेज पेश किए, वे तस्करी के इस खेल को और भी संदिग्ध बनाते हैं। मऊगंज की आमोखर ग्राम पंचायत के सरपंच ने 26 जनवरी को एक पत्र जारी कर 50 किलोमीटर दूर स्थित तिवरीगवां पंचायत से 70 गौवंशों की मांग की थी। हैरानी की बात यह है कि जब तिवरीगवां के सरपंच से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसे किसी भी पत्राचार या जानकारी से साफ इनकार कर दिया। आखिर एक पंचायत का सरपंच दूसरी पंचायत के आवारा पशुओं का ‘सौदा’ कैसे कर सकता है?

    गौ-सेवा या संगठित तस्करी? सूत्रों की मानें तो यह गौ-सेवा नहीं बल्कि तस्करी का एक संगठित सिंडिकेट है। आमोखर गौशाला, जिसकी क्षमता 400 है और जहाँ पहले से ही 500 से अधिक पशु बदहाली में हैं, वहाँ अचानक दूसरे जिले से पशु क्यों मंगाए जा रहे थे? आरोपियों ने बचाव के लिए रीवा प्रशासन का महीनों पुराना एक पत्र भी दिखाया, जिसका वर्तमान परिवहन से कोई कानूनी लेना-देना नहीं था। यह साफ इशारा करता है कि कागजों को ढाल बनाकर तस्करी की चाल चली जा रही थी।

    सवालों के घेरे में ‘खाकी’ और पंचायत आशुतोष मिश्रा और गोलू गौतम जैसे सजग युवाओं की बदौलत यह गिरोह पकड़ में तो आ गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई फिलहाल ‘पशु क्रूरता’ की साधारण धाराओं तक सीमित दिख रही है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन उन सरपंचों पर शिकंजा कसेगा जिन्होंने फर्जी पत्राचार किया? क्या पुलिस इस रैकेट के असली ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचेगी? मऊगंज एसडीओपी सचि पाठक ने वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि इसे केवल क्रूरता नहीं बल्कि संगठित अपराध मानकर जांच की जाए।