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  • शादी के 9 साल बाद अलग हुए हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी कोर्ट में सुलह की कोशिश भी रही नाकाम

    शादी के 9 साल बाद अलग हुए हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी कोर्ट में सुलह की कोशिश भी रही नाकाम


    भोपाल। शहडोल से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम जिला न्यायालय ने दोनों की पारस्परिक सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी है। अदालत का यह आदेश 3 सितंबर 2026 को जारी हुआ। दोनों का विवाह 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था। इस तरह करीब नौ साल बाद दोनों अलग हो गए हैं।

    अदालत के सामने रखे गए तथ्यों के मुताबिक विवाह के बाद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी कुछ समय तक साथ रहे और अपने वैवाहिक दायित्व निभाते रहे। इस दौरान 20 जून 2019 को उनकी बेटी गिरिशा सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद पति पत्नी के बीच छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगे। धीरे धीरे दोनों के बीच मतभेद बढ़ते गए और स्थिति ऐसी हो गई कि उनका एक दूसरे से मिलना जुलना भी बंद हो गया।

    दोनों 5 मई 2021 से अलग अलग रह रहे थे। लंबे समय तक अलग रहने के बाद दोनों ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि अब उनके बीच वैवाहिक जीवन को दोबारा शुरू करने की कोई संभावना नहीं है। दोनों ने अपनी सहमति से विवाह विच्छेद की मांग की। मामले में किसी एक पक्ष पर गंभीर आरोप लगाने के बजाय यह बात सामने रखी गई कि उनके बीच वैवाहिक संबंध सामान्य रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों को रिश्ते पर दोबारा विचार करने और साथ आने के लिए छह महीने का समय दिया था। न्यायालय की ओर से सुलह की कोशिश भी की गई लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद दोनों ने अदालत को बताया कि वे पति पत्नी के रूप में दोबारा साथ नहीं रहना चाहते और अपनी इच्छा से तलाक चाहते हैं।

    इसके बाद अदालत ने दोनों की पारस्परिक सहमति को स्वीकार करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री पारित कर दी। अदालत ने माना कि दोनों के लिए एक साथ रहकर वैवाहिक जीवन आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

    तलाक के बाद उनकी बेटी गिरिशा सिंह हिमाद्री सिंह के साथ रहेगी। उसकी परवरिश शिक्षा स्वास्थ्य और अन्य जरूरी जिम्मेदारियां हिमाद्री सिंह संभालेंगी। अदालत के समक्ष हिमाद्री ने अपने और बेटी के लिए नरेंद्र मरावी से किसी तरह के भरण पोषण या गुजारा भत्ते की मांग नहीं करने की बात भी कही। दोनों पक्षों ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के दौरान मिले उपहार और जेवरात को लेकर कोई विवाद बाकी नहीं है।

    तलाक की खबर सामने आने के बाद नरेंद्र मरावी ने कहा कि वह लगातार अलग अलग कार्यक्रमों में व्यस्त होने के कारण बाहर थे और उन्होंने अभी अदालत का आदेश नहीं देखा है। उन्होंने यह भी बताया कि तलाक की अर्जी हिमाद्री सिंह की ओर से दाखिल की गई थी। वहीं हिमाद्री सिंह से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

    इस तरह करीब पांच साल तक अलग रहने के बाद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का रिश्ता अब कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। अदालत के फैसले के बाद दोनों अपने जीवन में अलग रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।

  • चेहरे की dullness दूर करने में काम आ सकता है चावल जानिए कैसे बनाएं आसान घरेलू स्किन केयर

    चेहरे की dullness दूर करने में काम आ सकता है चावल जानिए कैसे बनाएं आसान घरेलू स्किन केयर


    नई दिल्ली। चेहरे की खूबसूरती और निखार के लिए लोग अक्सर महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों से भी त्वचा की देखभाल की जा सकती है। चावल ऐसी ही चीज है जिसका इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की देखभाल से जुड़े घरेलू नुस्खों में किया जाता रहा है। चावल में मौजूद स्टार्च और कुछ पोषक तत्व त्वचा को मुलायम महसूस कराने और चेहरे की सफाई में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि राइस वॉटर और चावल से बने फेस पैक को घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल करने का चलन बढ़ रहा है।

    चावल से स्किन केयर करने का सबसे आसान तरीका राइस वॉटर है। इसके लिए चावल को अच्छी तरह धोकर पानी में कुछ समय के लिए भिगोया जा सकता है। इसके बाद उस पानी को अलग करके चेहरे की सफाई के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है। राइस वॉटर को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है और कुछ समय बाद सामान्य पानी से चेहरा धोया जा सकता है। इससे त्वचा साफ और फ्रेश महसूस हो सकती है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    चावल से फेस पैक भी तैयार किया जा सकता है। इसके लिए चावल को अच्छी तरह पकाकर या भिगोकर उसका मुलायम पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इसमें जरूरत के अनुसार एलोवेरा जेल या दही जैसी चीज मिलाई जा सकती है। तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। कुछ समय बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लेना चाहिए। यह उपाय त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी रहती है तो चावल के पेस्ट में थोड़ा दही मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग बहुत भारी सामग्री मिलाने से बचें। चेहरे पर किसी भी घरेलू मिश्रण को रगड़कर लगाने के बजाय हल्के हाथों से लगाना बेहतर होता है। ज्यादा रगड़ने से त्वचा में जलन या लालिमा हो सकती है।

    चावल से स्किन केयर करते समय यह समझना जरूरी है कि घरेलू नुस्खे किसी गंभीर त्वचा समस्या का इलाज नहीं हैं। अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे खुजली जलन लाल चकत्ते या किसी तरह की एलर्जी है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

    राइस स्किन केयर का फायदा पाने के लिए नियमितता के साथ त्वचा की मूल जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाना और चेहरे की साफ सफाई बनाए रखना त्वचा की देखभाल के अहम हिस्से हैं। चावल से बने घरेलू उपाय त्वचा को कुछ समय के लिए मुलायम और फ्रेश महसूस करा सकते हैं लेकिन इन्हें चमत्कारी उपचार नहीं समझना चाहिए। सही तरीके और सावधानी के साथ चावल को एक सरल घरेलू स्किन केयर विकल्प के तौर पर आजमाया जा सकता है।

  • गणेश चतुर्थी पर भव्य होंगे बप्पा के दरबार खजराना में स्वर्ण आभूषण तो बड़ा गणपति में 101 किलो का भोग

    गणेश चतुर्थी पर भव्य होंगे बप्पा के दरबार खजराना में स्वर्ण आभूषण तो बड़ा गणपति में 101 किलो का भोग


    इंदौर । गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर आज मध्य प्रदेश में घर घर गणपति बप्पा विराजेंगे। शहरों से लेकर गांवों तक भगवान गणेश की स्थापना को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इंदौर उज्जैन और प्रदेश के दूसरे प्रमुख गणेश मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना और आकर्षक श्रृंगार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है और पूरे माहौल में गणपति बप्पा के जयकारे गूंज रहे हैं।

    इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान का बेहद भव्य श्रृंगार किया जाएगा। बप्पा को करीब 7 करोड़ रुपये के स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाएंगे। इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त में भगवान गणेश को हीरे जड़ित नेत्र धारण कराए गए। मंदिर में हर दिन अलग और आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

    खजराना गणेश मंदिर में गणेशोत्सव को लेकर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। गणेश चतुर्थी के मौके पर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने मंदिर पहुंचकर ध्वज पूजन किया। अधिकारियों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

    इंदौर के ही पश्चिम क्षेत्र में स्थित बड़ा गणपति मंदिर भी इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंदिर की विशाल गणेश प्रतिमा करीब 25 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी है। इस वर्ष मंदिर के 125 वर्ष पूरे होने के कारण गणेशोत्सव का उत्साह और भी खास है। गणेश चतुर्थी पर भगवान को करीब 101 किलो लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। यह भोग शुद्ध गाय के घी से तैयार किया गया है। इसमें अलग अलग आकार के लड्डू शामिल होंगे।

    बड़ा गणपति मंदिर में रोजाना रात 9 बजे एक घंटे की संगीतमय आरती होगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में आने और जाने के लिए अलग अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। भक्तों को निर्धारित समय के अनुसार भगवान के दर्शन कराए जाएंगे ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

    उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश मंदिर की परंपरा भी गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। यहां भगवान की पीठ की ओर उल्टा स्वास्तिक बनाने की मान्यता है। श्रद्धालु मनोकामना लेकर मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। खासतौर पर संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग इस परंपरा का पालन करते हैं। मान्यता पूरी होने के बाद श्रद्धालु दोबारा मंदिर पहुंचकर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।

    चिंतामन गणेश मंदिर में श्रद्धालु रक्षा सूत्र भी बांधते हैं और मनोकामना पूरी होने के बाद उसे खोलने के लिए वापस आते हैं। मंदिर परिसर में तुलादान की भी परंपरा है। कई श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर अनाज लड्डू या अन्य प्रसाद से तुलादान करते हैं। कुछ परिवार संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के वजन के बराबर लड्डुओं का तुलादान कर प्रसाद भक्तों में बांटते हैं।

    इस तरह गणेश चतुर्थी पर मध्य प्रदेश के प्रमुख गणेश मंदिरों में आस्था और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। घरों से लेकर मंदिरों तक हर जगह बप्पा के स्वागत की तैयारियां पूरी हैं और श्रद्धालु गणपति से सुख समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दीपके और CJP के अन्य नेता महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

    CJP ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होंगे। इससे पहले कुछ MPSC अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित दीपके के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी।

    24 सितंबर तक का दिया अल्टीमेटम

    CJP ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। पार्टी के अनुसार यदि 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो अभ्यर्थियों से बातचीत के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा।

    MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद जारी वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि वह और CJP अभ्यर्थियों की लड़ाई में उनके साथ हैं और इस्तीफा होने तक उनका समर्थन जारी रहेगा।

    प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मुद्दा

    MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख की पुणे में मौत के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था। उसके पास मिले कथित सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख था। इसके बाद CJP ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कदम उठाया।

    अभिजीत दीपके ने इसी सप्ताह प्रथमेश देशमुख के परिजनों से भी मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि देशमुख नौकरी हासिल कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे व्यवस्था की विफलता बताया।

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद फिर सक्रिय CJP

    इससे पहले अभिजीत दीपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। करीब एक महीने पहले उन्होंने आंदोलन के ‘सीजन-2’ का संकेत देते हुए कहा था कि देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

    मनोज जरांगे को भी दिया समर्थन

    इस बीच दीपके ने महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मनोज जरांगे को भी समर्थन दिया है। वह शुक्रवार को जरांगे से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार से जरांगे की मांगों पर बातचीत करने की अपील की।

    दीपके ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं के पास दूसरे लोगों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जरांगे के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    CJP के नए ऐलान के बाद MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दीपके की राजनीतिक सक्रियता आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    नई दिल्ली। चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक स्कूल का कथित फरमान इन दिनों चर्चा में है। रूयुआन काउंटी हाई स्कूल में छात्रों के लिए ऐसा नियम बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसके तहत छह महीने के सेमेस्टर में क्लास के दौरान छात्र सिर्फ एक बार टॉयलेट जा सकते हैं। दूसरी बार टॉयलेट जाने पर अभिभावकों को स्कूल बुलाने और तीसरी बार ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

    मामला सामने आने के बाद चीन के सोशल मीडिया पर स्कूल प्रशासन की आलोचना शुरू हो गई। स्थानीय शिक्षा विभाग ने भी अभिभावकों और आम लोगों से मिली शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शिक्षक ने लीक की PPT की तस्वीर

    इस नियम का खुलासा स्कूल की एक स्टाफ मीटिंग में इस्तेमाल की गई पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की तस्वीर इंटरनेट पर सामने आने के बाद हुआ। बताया गया कि स्कूल के एक शिक्षक ने यह तस्वीर ऑनलाइन साझा की थी।

    PPT में क्लासरूम मैनेजमेंट से जुड़े कई सख्त नियम बताए गए थे। इनमें टॉयलेट जाने से संबंधित नियम सबसे ज्यादा चर्चा में आया।

    बताया गया कि पहली बार भी छात्र को तभी क्लास से बाहर जाकर टॉयलेट जाने की अनुमति मिलेगी, जब स्थिति गंभीर या आपातकालीन हो। दूसरी बार ऐसा करने पर उसके माता-पिता को स्कूल बुलाया जाएगा और छात्र के आचरण तथा अनुशासन को लेकर बातचीत होगी। तीसरी बार टॉयलेट जाने पर छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

    शिक्षकों की नौकरी पर भी नियमों का असर

    रिपोर्ट के मुताबिक, PPT में शिक्षकों के मूल्यांकन को भी छात्रों के अनुशासन से जोड़ने की बात कही गई थी। बताया गया कि शिक्षक की कक्षा के छात्र नियमों का कितना पालन करते हैं, इसे उनके प्रदर्शन के आकलन का आधार बनाया जाएगा।

    इसी आधार पर शिक्षकों के प्रमोशन, वार्षिक वेतन वृद्धि और पुरस्कारों पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। इससे इस कथित नियम को लेकर विवाद और बढ़ गया।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

    मामला सार्वजनिक होने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने स्कूल के नियमों पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने इसे छात्रों की बुनियादी शारीरिक जरूरतों को अनुशासन से जोड़ने वाला कदम बताया।

    एक यूजर ने सवाल किया कि आखिर यह स्कूल है या जेल। वहीं, कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से नियम को तत्काल रद्द कराने और स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    एक अन्य यूजर ने अपने स्कूल के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां क्लास के दौरान टॉयलेट जाने के लिए शिक्षक से हस्ताक्षर वाला पास लेना पड़ता था।

    पहले स्कूल ने बताया गलतफहमी, अब जांच शुरू

    विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय मीडिया ने स्कूल प्रशासन से इस संबंध में जवाब मांगा। शुरुआत में एक स्टाफ सदस्य ने इसे महज गलतफहमी बताया। बाद में स्कूल की ओर से इसे विरोधी तत्वों की ओर से फैलाई गई अफवाह करार दिया गया।

    हालांकि, स्थानीय शिक्षा ब्यूरो ने कहा कि उसे अभिभावकों और आम लोगों से इस मामले में बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल PPT में बताए गए नियम वास्तव में स्कूल की आधिकारिक नीति का हिस्सा थे या नहीं।

  • 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि बाकी राज्यों में भी इसे तय समयसीमा से पहले लागू किया जाएगा।

    अमित शाह ने रविवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। UCC के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म से अलग समान कानून की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है।

    आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का किया जिक्र

    गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    शाह ने कहा कि 2014 से पहले देश की राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला था, जबकि भाजपा सरकार आने के बाद राजनीति का आधार प्रदर्शन और कामकाज बना है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीति भी मजबूत हुई है तथा इसमें ‘इंडिया फर्स्ट’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

    भारत की आर्थिक प्रगति का भी किया उल्लेख

    अमित शाह ने भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत पहले कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने पहली तिमाही में GDP की 7.8 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

    गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक ये ऐसे मुद्दे थे, जो लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बने रहे।

    मणिपुर में NRC पर नेताओं से बातचीत जारी

    मणिपुर में 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने से जुड़े सवाल पर शाह ने कहा कि राज्य के नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।

    अवैध घुसपैठ को लेकर गृह मंत्री ने सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मातृभाषा को प्राथमिकता देने की वकालत

    भाषा को लेकर जारी बहस के बीच अमित शाह ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व को इस विषय का समाधान निकालना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाषा के मुद्दे पर लोगों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

    सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के विरोध करने के अधिकार का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती।

    चीन पर संवेदनशील जानकारी साझा करने से इनकार

    चीन और अन्य संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर अमित शाह ने सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी साझा करने से सशस्त्र बलों को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को देश की रक्षा क्षमता पर पूरा भरोसा है।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी घोषणा की। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा।

    17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। अभियान में भाजपा, NDA के सहयोगी दल, सामाजिक संगठन और आम लोग शामिल होंगे। इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा जिलों, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों तथा बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा।

    शाह ने कहा कि अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन, उनकी उपलब्धियों और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखा जाएगा। अभियान के तहत 12 तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गांवों में स्थानीय भाषाओं में संगीत और नाटक के कार्यक्रम भी होंगे, जिन्हें ‘अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ नमो सेवा’ नाम दिया गया है।

    फडणवीस बोले- जनकल्याण पर रहेगा जोर

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार और भाजपा मिलकर ‘सेवा संकल्प अभियान’ में हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में NDA के सभी सहयोगी दल अभियान के साथ हैं।

    फडणवीस के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का अपना महत्व है। अभियान का उद्देश्य आम लोगों के जीवन में बदलाव लाना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना है।

  • बिहार में हैरान करने वाला मामला: 14 साल की किशोरी के पेट से निकला करीब 2 किलो बालों का गुच्छा

    बिहार में हैरान करने वाला मामला: 14 साल की किशोरी के पेट से निकला करीब 2 किलो बालों का गुच्छा


    आरा।
    बिहार के भोजपुर जिले के आरा शहर में रविवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर 14 वर्षीय किशोरी के पेट से करीब दो किलोग्राम वजन का बालों का गुच्छा निकाला। ऑपरेशन के बाद किशोरी की हालत ठीक बताई जा रही है और वह अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में भर्ती है।

    जानकारी के मुताबिक किशोरी मूल रूप से बक्सर जिले की रहने वाली है। पेट में लगातार तेज दर्द और ऊपरी हिस्से में सूजन की शिकायत के बाद परिजन उसे इलाज के लिए आरा लेकर पहुंचे थे। जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट में गठरी जैसी संरचना दिखाई दी। इसके बाद सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें पेट के अंदर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई।

    दो साल से पेट दर्द से परेशान थी किशोरी

    बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के रहथुआ गांव निवासी मुन्ना सिंह की 14 वर्षीय बेटी नेहा कुमारी करीब दो वर्षों से पेट दर्द की समस्या से परेशान थी। उसके पेट के ऊपरी हिस्से में सूजन और दर्द रहता था, जो समय के साथ बढ़ता गया।

    परिजनों के मुताबिक किशोरी को भूख कम लगती थी और उसका वजन भी घट रहा था। इसके अलावा उसे उल्टी की शिकायत भी रहती थी। शुरुआत में समस्या का सही कारण सामने नहीं आ सका।

    सीटी स्कैन में सामने आया बालों का गुच्छा

    परिजन किशोरी को आरा शहर के कतीरा स्थित कंचन शल्य निकेतन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सक डॉ. पी. सिंह ने आवश्यक जांच और सीटी स्कैन कराने की सलाह दी।

    जांच रिपोर्ट में पेट के अंदर बालों का बड़ा गुच्छा दिखाई दिया। इसके बाद चिकित्सक ने किशोरी की सर्जरी कर उसे बाहर निकाला। ऑपरेशन के दौरान निकाले गए बालों का वजन करीब दो किलोग्राम बताया गया।

    बचपन से बाल खाने की आदत

    चिकित्सक के अनुसार किशोरी को बचपन से अपने बाल खाने की आदत थी। लंबे समय तक बाल खाते रहने के कारण वे उसके पाचन तंत्र में जमा होते गए और धीरे-धीरे एक बड़े गुच्छे का रूप ले लिया। इसी वजह से उसे पेट दर्द, सूजन और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने लगीं।

    डॉ. पी. सिंह ने बताया कि किशोरी के शरीर में खून की भी कमी थी। ऑपरेशन से पहले उसे दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। सर्जरी के बाद उसकी स्थिति सामान्य है।

    कम लोगों में पाई जाती है ऐसी समस्या

    डॉक्टर के मुताबिक अपने बाल या दूसरे व्यक्ति के बाल खाने की आदत से जुड़ी यह समस्या बहुत कम लोगों में देखी जाती है। लंबे समय तक बाल पेट में जमा होने से इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है।

    चिकित्सक ने कहा कि अगर किशोरी को परिजन पहले ही इलाज के लिए लेकर आते तो समस्या का उपचार काफी पहले किया जा सकता था। लेकिन इलाज में देरी के कारण पेट में बालों का गुच्छा काफी बड़ा हो गया और किशोरी को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी।

  • 16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास

    16 साल का इंतजार हुआ खत्म धीरज बोम्मादेवरा ने शूट ऑफ में जापान को हराकर रचा भारतीय तीरंदाजी का इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय तीरंदाजी के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। भारत के स्टार रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने विश्व कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो इससे पहले कोई भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज नहीं कर सका था। धीरज ने जापान के नाकानिशी जुन्या को बेहद रोमांचक मुकाबले में शूट ऑफ के जरिए हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस शानदार जीत के साथ भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी में 16 साल से चला आ रहा इंतजार भी खत्म हो गया।

    25 वर्षीय धीरज ने पूरे टूर्नामेंट में जबरदस्त प्रदर्शन किया। विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद सेना के इस जवान ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में अपनी सटीक निशानेबाजी का दम दिखाया। फाइनल में उनका सामना दुनिया के 20वें नंबर के जापानी तीरंदाज नाकानिशी जुन्या से हुआ। मुकाबला पांच सेट तक चला और दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पांच सेट के बाद स्कोर 5-5 से बराबर था। इसके बाद फैसला शूट ऑफ से हुआ जहां धीरज ने 10-9 के अंतर से जीत दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    धीरज की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि विश्व कप फाइनल में भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के लिए इससे पहले स्वर्ण पदक का सपना अधूरा रहा था। भारत की ओर से जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद लंबे समय तक भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण हासिल नहीं कर सके। अब धीरज ने उस सूखे को खत्म कर इतिहास अपने नाम कर लिया है।

    धीरज की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं बल्कि परिवार का संघर्ष और त्याग भी छिपा है। करियर के शुरुआती दौर में परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। साल 2017 में बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें महंगे विदेशी उपकरणों की जरूरत थी लेकिन पैसों की कमी बड़ी चुनौती बन गई। हालात यहां तक पहुंच गए कि धीरज की मां रेवती ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपना मंगलसूत्र तक गिरवी रख दिया। इसी रकम से उनके लिए नया धनुष खरीदा गया।

    एक समय धीरज तीरंदाजी छोड़ने का मन भी बना चुके थे लेकिन परिवार के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उनके पिता श्रवण कुमार भी तीरंदाजी से जुड़े रहे और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ तीरंदाजी जजों में शामिल हैं। परिवार के इसी समर्थन और धीरज की मेहनत ने उन्हें आज दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में खड़ा कर दिया है।

    इस साल जून में तुर्किये के अंताल्या में विश्व कप स्टेज तीन में धीरज ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का संकेत दिया था। अब विश्व कप फाइनल में गोल्ड जीतकर उन्होंने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है। विश्व कप फाइनल में इससे पहले भारत के लिए डोला बनर्जी ने 2007 में महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। धीरज की जीत ने पुरुष वर्ग में भी भारत का झंडा सबसे ऊंचा कर दिया है।

  • गणेश चतुर्थी से जुड़े बॉलीवुड के वो सीन जो आज भी याद हैं गणपति उत्सव के बीच आया कहानी में बड़ा मोड़

    गणेश चतुर्थी से जुड़े बॉलीवुड के वो सीन जो आज भी याद हैं गणपति उत्सव के बीच आया कहानी में बड़ा मोड़


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का त्योहार देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। खासकर मुंबई में गणपति उत्सव का नजारा देखते ही बनता है। गलियों में गूंजते गणपति बप्पा मोरया के जयकारे और ढोल नगाड़ों की आवाज इस त्योहार को खास बना देती है। बॉलीवुड भी लंबे समय से गणेश उत्सव की इसी भव्यता को अपनी फिल्मों में दिखाता आया है। कई फिल्मों में गणपति पूजा और विसर्जन केवल धार्मिक आयोजन या गीतों तक सीमित नहीं रहे बल्कि इनका इस्तेमाल कहानी को नया मोड़ देने के लिए किया गया।

    बॉलीवुड की चर्चित फिल्म डॉन इसका बेहतरीन उदाहरण है। साल 2006 में रिलीज हुई इस फिल्म में शाह रुख खान ने डॉन का किरदार निभाया था। फिल्म के गणपति विसर्जन वाले दृश्य में जबरदस्त भीड़ और उत्सव के बीच पुलिस डॉन का पीछा करती है। इसी अफरा तफरी में डॉन घायल होकर कोमा में चला जाता है। इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल जाती है। डॉन की जगह उसके हमशक्ल विजय को गैंग में भेजा जाता है। गणपति विसर्जन के बीच घटने वाली यह घटना फिल्म के सस्पेंस और पहचान से जुड़े सबसे बड़े मोड़ों में से एक बन जाती है।

    संजय दत्त की फिल्म वास्तव द रियलिटी में भी गणपति विसर्जन कहानी के बेहद भावुक और निर्णायक हिस्से के रूप में सामने आता है। रघु परिस्थितियों के कारण अपराध की दुनिया में पहुंच जाता है और धीरे धीरे एक खतरनाक गैंगस्टर बन जाता है। फिल्म के अंत में गणपति विसर्जन का जुलूस चल रहा होता है। चारों तरफ भीड़ और बप्पा के जयकारों के बीच रघु अपनी मां तक पहुंचता है। मां समझ जाती है कि उसका बेटा अपराध की दुनिया से वापस नहीं लौट सकता। इसके बाद वह ऐसा फैसला लेती है जो हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दनाक क्लाइमेक्स में गिना जाता है। गणपति विसर्जन के बीच मां अपने ही बेटे को गोली मार देती है।

    ऋतिक रोशन की अग्निपथ में भी गणपति उत्सव कहानी के महत्वपूर्ण हिस्से से जुड़ा है। देवा श्री गणेशा गीत के दौरान विजय गणपति पूजा करता है और इसके बाद अपने दुश्मन सूर्या को खत्म करने के लिए आगे बढ़ता है। सूर्या की हत्या के बाद कांचा चीना विजय और उसके परिवार को खत्म करने की कसम खाता है। इस तरह गणपति उत्सव के दौरान लिया गया फैसला आगे की कहानी में बड़े संघर्ष की नींव रखता है।

    राम गोपाल वर्मा की सरकार 3 में भी गणपति आरती के दौरान कहानी में बड़ा मोड़ आता है। अमिताभ बच्चन का किरदार सुभाष नागरे गणपति आरती कर रहा होता है तभी उस पर गोलीबारी होती है। यह हमला फिल्म में चल रही राजनीतिक साजिशों और सत्ता संघर्ष को नया मोड़ देता है।

    इन फिल्मों को देखकर साफ समझ आता है कि बॉलीवुड ने गणेश चतुर्थी को सिर्फ आस्था और उत्सव के दृश्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया। कई बार बप्पा की मौजूदगी कहानी के सबसे अहम मोड़ का कारण बनी। कहीं पहचान बदली तो कहीं रिश्तों की परीक्षा हुई और कहीं दुश्मनी ने नया रूप लिया। यही वजह है कि गणपति उत्सव से जुड़े ये फिल्मी दृश्य आज भी दर्शकों की यादों में खास जगह बनाए हुए हैं।

  • अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम

    अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से पहले एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला। क्रिकेट के मैदान पर पहली बार राष्ट्रीय गान जन गण मन से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का वादन किया गया। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों के साथ दर्शकों ने भी सम्मान के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय गीत को सुना। यह मौका भारतीय क्रिकेट और देश के खेल इतिहास में खास माना जा रहा है।

    मुकाबला शुरू होने से पहले आमतौर पर राष्ट्रीय गान बजाने की परंपरा रही है। हालांकि इस बार कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से हुई और उसके बाद राष्ट्रीय गान जन गण मन बजाया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन ने स्टेडियम के माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच भी इस दौरान खास उत्साह नजर आया।

    बताया गया कि यह आयोजन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इससे संबंधित दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इन्हीं दिशा निर्देशों के तहत अरुण जेटली स्टेडियम में वंदे मातरम के सभी छह छंद प्रस्तुत किए गए। राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण को प्रस्तुत करने में करीब 3 मिनट 10 सेकेंड का समय निर्धारित किया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय गान के लिए करीब 52 सेकेंड का समय रखा गया। इस तरह पूरे कार्यक्रम की अवधि लगभग 4 मिनट 2 सेकेंड रही।

    नए दिशा निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय गीत के वादन के दौरान वहां मौजूद लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़े रहने के लिए कहा गया है। राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण संस्करण के इस्तेमाल को कुछ औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों और विशेष अवसरों के लिए मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले से पहले भी इसका आयोजन किया गया।

    वंदे मातरम का भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था। वर्ष 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसके शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद वर्ष 1950 में संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी।

    क्रिकेट मुकाबले की बात करें तो भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम में संजू सैमसन को विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई जबकि अभिषेक शर्मा और ईशान किशन टीम का हिस्सा रहे। तिलक वर्मा नीतीश कुमार रेड्डी शिवम दुबे अक्षर पटेल अर्शदीप सिंह जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती भी प्लेइंग इलेवन में शामिल रहे। हालांकि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला।

    इस ऐतिहासिक शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों में वंदे मातरम को लेकर क्या परंपरा आगे बढ़ती है। भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले हुआ यह आयोजन निश्चित तौर पर क्रिकेट के मैदान पर यादगार पलों में शामिल हो गया है।