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  • हिंदी दिवस पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, अब अहम फैसलों का आसान हिंदी सार ऑडियो-वीडियो बुलेटिन में मिलेगा

    हिंदी दिवस पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पहल, अब अहम फैसलों का आसान हिंदी सार ऑडियो-वीडियो बुलेटिन में मिलेगा

    नई दिल्ली ।हिंदी दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने लोगों तक न्यायिक फैसलों की जानकारी आसान भाषा में पहुंचाने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की है। कोर्ट जल्द ‘हिंदी जन सूचना सेवा’ शुरू करेगा। इस सेवा के तहत सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का सरल हिंदी में सार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही रोजाना हिंदी में ऑडियो और वीडियो बुलेटिन भी जारी किए जाएंगे।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रोजाना 15 से 30 मिनट का हिंदी ऑडियो और वीडियो बुलेटिन जारी किया जाएगा। इसमें महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों की जानकारी आसान भाषा में दी जाएगी। संबंधित फैसले का आधिकारिक लिंक भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लोग जरूरत पड़ने पर मूल आदेश या फैसले तक पहुंच सकें।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य कानूनी और न्यायिक जानकारी को आम लोगों के लिए अधिक सहज बनाना है। अदालतों के फैसले अक्सर लंबे और कानूनी शब्दावली से भरे होते हैं, जिसके कारण उन्हें हर व्यक्ति के लिए समझना आसान नहीं होता। ऐसे में सरल हिंदी में फैसलों का सार लोगों को महत्वपूर्ण न्यायिक जानकारी समझने में मदद करेगा।

    इस सेवा में ऑडियो और वीडियो माध्यम को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य उन लोगों के लिए सुविधा बढ़ाना है, जिन्हें लंबे कानूनी दस्तावेज पढ़ने या उनकी जटिल भाषा समझने में परेशानी होती है। यह पहल विशेष रूप से आम लोगों, वादकारियों और दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही है।

    नई हिंदी जन सूचना सेवा की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पहल पर की जा रही है। इसके साथ ही आगे चलकर इस व्यवस्था को अन्य भारतीय भाषाओं में भी शुरू करने की तैयारी है। इससे अलग-अलग भाषाओं में न्यायिक फैसलों की जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में व्यवस्था का विस्तार किया जा सकेगा।

    सुप्रीम कोर्ट पहले भी न्याय व्यवस्था में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल और फैसलों की पहुंच बढ़ाने के लिए कदम उठाता रहा है। कोर्ट ने ‘सुवास’ यानी Supreme Court Vidhik Anuvaad Software नाम का एआई आधारित अनुवाद सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इसकी मदद से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली और कन्नड़ समेत कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है।

    अब तक करीब 30 हजार फैसलों का हिंदी में अनुवाद किया जा चुका है। बड़ी संख्या में फैसले ई-एससीआर पर भी उपलब्ध हैं। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य भाषाओं में भी फैसलों के अनुवाद की व्यवस्था की गई है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर फैसलों के आधिकारिक क्षेत्रीय अनुवाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और कई जज समय-समय पर इस बात पर जोर देते रहे हैं कि न्याय की जानकारी आम लोगों तक प्रभावी तरीके से तभी पहुंच सकती है, जब वे अदालत के फैसलों को अपनी भाषा में समझ सकें। ‘हिंदी जन सूचना सेवा’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली पहल है।

    कोर्ट की ओर से बताया गया है कि जरूरी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद यह सेवा जल्द शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों की जानकारी सरल हिंदी में उपलब्ध होने के साथ ऑडियो और वीडियो प्रारूप में भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

  • थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव

    थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव


    नई दिल्ली ।
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 सितंबर को अगस्त 2026 के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 9.78 प्रतिशत थी। इस तरह थोक महंगाई लगातार चौथे महीने करीब 10 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। हालांकि WPI का 9.92 प्रतिशत होना यह नहीं बताता कि बाजार में हर सामान की कीमत इतनी ही बढ़ गई है।

    WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक उस कीमत में बदलाव को मापता है, जिस पर सामान थोक बाजार में कारोबार करता है। यह मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों पर आधारित होता है। इसके विपरीत खुदरा स्तर पर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों का आकलन CPI के जरिए किया जाता है। WPI में सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता। स्कूल फीस, डॉक्टर की फीस, किराया और मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाएं इसके दायरे में नहीं आतीं।

    अगस्त में WPI महंगाई 9.92 प्रतिशत रही। इसका अर्थ यह है कि अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में WPI में शामिल वस्तुओं की कीमतों में औसतन 9.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि हर वस्तु की कीमत 9.92 प्रतिशत बढ़ी है। अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि अलग-अलग रही है और कुछ श्रेणियों में कीमतें कम भी हुई हैं।

    अगस्त की थोक महंगाई बढ़ाने में पेट्रोलियम से जुड़ी कीमतों की बड़ी भूमिका रही। पावर पेट्रोल श्रेणी में महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 38.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 34.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    खाद्य वस्तुओं ने भी थोक महंगाई पर दबाव बढ़ाया। अगस्त में फूड इंडेक्स की महंगाई 7.05 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी। तैयार खाद्य उत्पादों की महंगाई भी अगस्त में 9.65 प्रतिशत रही। इससे खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ पैक्ड और प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव दिखाई दिया।

    हालांकि सभी श्रेणियों में कीमतें नहीं बढ़ीं। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई जुलाई के 8.52 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 7.76 प्रतिशत हो गई। नॉन-फूड आर्टिकल की महंगाई 17.66 प्रतिशत से घटकर 14.79 प्रतिशत और खनिजों की महंगाई 13.28 प्रतिशत से घटकर 8.24 प्रतिशत रही। बिजली की महंगाई -1.73 प्रतिशत और कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान की महंगाई -0.47 प्रतिशत रही।

    मार्च 2026 में WPI महंगाई 3.98 प्रतिशत थी। इसके बाद अप्रैल में 8.36 प्रतिशत, मई में 9.88 प्रतिशत, जून में 9.97 प्रतिशत और अगस्त में 9.92 प्रतिशत रही। इस बढ़ोतरी में बेस इफेक्ट की भी भूमिका बताई गई है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच WPI महंगाई औसतन -0.20 प्रतिशत थी, जबकि इस साल इसी अवधि में औसत महंगाई करीब 9.56 प्रतिशत रही।

    WPI का असर उपभोक्ता की जेब पर सीधे नहीं पड़ता, लेकिन थोक लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल, स्टील, केमिकल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने पर कंपनियां कुछ समय तक लागत खुद वहन कर सकती हैं। लगातार दबाव रहने पर कुछ उत्पादों की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    अगस्त का WPI आंकड़ा अभी अस्थायी है और 84.4 प्रतिशत महत्व-आधारित उत्तर के आधार पर तैयार हुआ है। आगे मिलने वाले आंकड़ों के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। सितंबर के WPI आंकड़े 14 अक्टूबर 2026 को जारी होंगे, जिससे पता चलेगा कि पेट्रोलियम और अन्य कच्चे माल से बना कीमतों का दबाव आगे भी बना रहता है या इसमें कमी आती है।

  • 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव सामने आ रहे हैं। इनमें महंगाई भत्ते यानी DA की समीक्षा साल में दो बार के बजाय चार बार करने और 25 प्रतिशत DA होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने की मांग प्रमुख है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई के असर के अनुसार वेतन में बदलाव अधिक नियमित तरीके से किया जा सकेगा।

    चेन्नई और पुडुचेरी के बाद 8वें वेतन आयोग की बैठक चंडीगढ़ में होने की जानकारी दी गई है। चंडीगढ़ में 16 से 18 अगस्त के बीच होने वाली बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न कर्मचारी संघ और पेंशनर्स संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रखेंगे। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, DA और HRA सहित वेतन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक प्रस्तावित है।

    वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। कर्मचारी संगठनों के एक वर्ग ने अब इसकी समीक्षा हर तीन महीने में यानी साल में चार बार करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे महंगाई में होने वाले बदलावों के अनुसार DA में अधिक नियमित संशोधन किया जा सकेगा।

    नेशनल काउंसिल यानी NC-JCM सहित कुछ संगठनों ने DA के 25 प्रतिशत होने पर उसे बेसिक पे में शामिल करने की मांग भी रखी है। इस मांग के लागू होने पर आगे कर्मचारियों के वेतन के साथ HRA और TA जैसे भत्तों की गणना बढ़े हुए बेसिक पे के आधार पर होने की बात कही गई है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।

    कर्मचारी संगठनों की ओर से वित्तीय अपग्रेडेशन से जुड़ी MACP व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की गई है। इसमें हर 10 साल के बजाय हर पांच साल में फाइनेंशियल अपग्रेडेशन देने का सुझाव शामिल है। इसके अलावा कुछ संगठनों ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग रखी है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर कर्मचारियों के बेसिक पे में बदलाव का प्रस्ताव है।

    7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट की संख्या तीन निर्धारित किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर पांच करने की मांग भी सामने आई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को नए वेतन आयोग में ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    हालांकि, कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी जा रही ये मांगें और सुझाव अभी अंतिम निर्णय नहीं हैं। 8वें वेतन आयोग को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मिल रहे हैं। इन सुझावों पर विचार के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। फिलहाल DA में साल में चार बार संशोधन, 25 प्रतिशत पर बेसिक पे में मर्जर, फिटमेंट फैक्टर, MACP और फैमिली यूनिट से संबंधित मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

  • दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें

    दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें


    नई दिल्ली।
    अच्छी सेहत हर व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। काम का तनाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। स्वस्थ रहने के लिए हमेशा कठिन नियम अपनाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों में बदलाव करके भी शरीर को बेहतर तरीके से स्वस्थ रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता किसी बीमारी के बाद नहीं बल्कि पहले से शुरू होनी चाहिए।

    स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन सबसे अहम माना जाता है। रोज के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अधिक तला हुआ भोजन ज्यादा नमक और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने से खानपान को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। भोजन की मात्रा के साथ खाने का समय भी नियमित रखना जरूरी है।

    पर्याप्त पानी पीना भी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान कमजोरी और सिरदर्द जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इसलिए दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए। हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत उसकी उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना हल्की एक्सरसाइज करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत से बचना भी महत्वपूर्ण है। काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना शरीर के लिए बेहतर हो सकता है।

    स्वास्थ्य के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। देर रात तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है इसलिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव को नियंत्रित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। ध्यान योग किताब पढ़ना या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। हाथों की नियमित सफाई साफ कपड़े और आसपास की स्वच्छता कई संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है। समय समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी हो सकता है ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

    ध्यान रखना चाहिए कि ये सामान्य स्वास्थ्य सुझाव हैं और किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। अगर शरीर में लगातार कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्वस्थ जीवन का आधार संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद मानसिक शांति और साफ सफाई जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें हैं। इन्हें रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा। इसमें दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और शिक्षाविद एक मंच पर जुटेंगे।

    इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम” रखी गई है। आयोजन में भारत की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में विकसित हो रही क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    आयोजन में सरकार की नीतिगत सहायता, बढ़ते निवेश और विविध एवं लचीली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की मांग से भारत के लिए पैदा हुए अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वैश्विक उद्योग संगठन एसईएमआई संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा लेंगे। इनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी। प्रदर्शनी के लिए 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। आयोजन के दौरान 150 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता तकनीकी तथा रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    कार्यक्रम में छह देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा स्टार्टअप, नवाचार, छात्रों, कौशल विकास और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष मंच तैयार किए जाएंगे।

    स्टार्टअप पवेलियन में करीब 40 स्टार्टअप अपनी तकनीक और नवाचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार और करियर से जुड़े अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण “सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स वैल्यू चेन एक्सपीरियंस” होगा। इसके जरिए आगंतुकों को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला को समझने का अवसर मिलेगा। इसमें कच्चे माल से लेकर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतिम सिस्टम निर्माण तक की प्रक्रिया प्रदर्शित की जाएगी।

    कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता, स्टूडेंट हैकाथॉन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित होंगे। इनमें युवा उद्यमी, शोधकर्ता और छात्र अपने विचारों और तकनीकों को प्रस्तुत करेंगे।

    सम्मेलन में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सप्लाई चेन रेजिलिएंस, एडवांस्ड पैकेजिंग, सामग्री एवं उपकरण, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप, नवाचार और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर मुख्य भाषण, पैनल चर्चा और विशेष सत्र होंगे।

    इसके अलावा छह अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ विशेष राउंडटेबल बैठकें आयोजित की जाएंगी। महिलाओं के नेतृत्व और सशक्तिकरण, कार्यबल विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इस आयोजन के जरिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने के साथ भारत की क्षमताओं और उद्योग से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों ने बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ाई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत में कुल 1.8 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। चांदी भी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।

    घरेलू बाजार में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा कारोबार का सुबह का सत्र बंद रहा। एमसीएक्स पर कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

    अमेरिका में शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों से अधिक रही। आंकड़ों से संकेत मिला कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

    महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। कारोबारी सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की करीब 88 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिनसे ब्याज आय नहीं होती।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

    यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे की बात भी सामने आई है। ये बंदरगाह उस महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र के पास हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।

    विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने फिलहाल सोने और चांदी में नई खरीदारी से दूरी बनाई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी फैसले पर है। यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा फेड के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने की संभावना है।

  • भाजपा से इस्तीफे के बाद कांग्रेस में शामिल हुए नरेंद्र बाबू, पुराने नेताओं की अनदेखी को लेकर नेतृत्व पर लगाए आरोप

    भाजपा से इस्तीफे के बाद कांग्रेस में शामिल हुए नरेंद्र बाबू, पुराने नेताओं की अनदेखी को लेकर नेतृत्व पर लगाए आरोप

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के पूर्व विधायक और प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष एनएल नरेंद्र बाबू ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। भारत जोड़ो कन्वेंशन के दौरान उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई। इस मौके पर कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया।

    नरेंद्र बाबू के कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में मंत्री रामलिंगारेड्डी, एचएम रेवन्ना, पूर्व मंत्री रानी सतीश, रमेश बाबू, हनुमंतरायप्पा और पूर्व मेयर रमेश समेत कई नेताओं की मौजूदगी रही।

    नरेंद्र बाबू ने कांग्रेस में शामिल होने से कुछ दिन पहले ही भाजपा से अलग होने का अपना फैसला सार्वजनिक किया था। शुक्रवार को उन्होंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के प्रदेश ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष पद से भी त्यागपत्र दे दिया था।

    भाजपा छोड़ने की घोषणा करते समय नरेंद्र बाबू ने पार्टी के भीतर पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने करीब 10 साल तक भाजपा के लिए काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी और सम्मान नहीं मिला।

    नरेंद्र बाबू कर्नाटक के तिगाला समुदाय के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। भाजपा से अलग होने के दौरान उन्होंने यह भी कहा था कि वह अवसर देखकर पार्टी बदलने वाली राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उनके मुताबिक, पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करने के बावजूद उन्हें जिस तरह की जिम्मेदारी और सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।

    उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर राजाजीनगर और महालक्ष्मी लेआउट में भी अनदेखी का आरोप लगाया था। नरेंद्र बाबू का कहना था कि उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। साथ ही इन क्षेत्रों में उन्हें और उनके साथ काम करने वाले लोगों को नजरअंदाज किया गया।

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद नरेंद्र बाबू के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई थी। अब भारत जोड़ो कन्वेंशन के दौरान उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में पार्टी में उनका स्वागत किया गया।

    नरेंद्र बाबू का भाजपा छोड़ना ऐसे समय हुआ है जब कर्नाटक की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। हालांकि, उनके पार्टी बदलने के पीछे उन्होंने मुख्य रूप से भाजपा में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिलने की बात कही है।

    कांग्रेस में शामिल होने के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। इस कार्यक्रम के साथ नरेंद्र बाबू का भाजपा से कांग्रेस तक का राजनीतिक सफर औपचारिक रूप से बदल गया है। उन्होंने भाजपा में करीब एक दशक तक काम करने के बाद अब कांग्रेस का रुख किया है।

  • देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा

    देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा


    सतना । सतना में सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। सुबह से ही घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान श्री गणेश की स्थापना की तैयारियां चलती रहीं। रविवार को गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर भीड़ रही। अलग अलग आकार और स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु अपने घरों प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों तक लेकर पहुंचे। देर रात तक प्रतिमाओं को पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा।

    सिंधी कैंप स्थित मीरानी कॉलोनी में गणेशोत्सव को लेकर इस बार भी विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां स्थापित होने वाली प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा मीरानी के राजा रविवार देर रात जबलपुर से सतना पहुंची। प्रतिमा के सतना पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। भक्तों ने ढोल नगाड़ों की धुन पर जयकारे लगाए और गणपति की अगवानी की। इसके बाद प्रतिमा को जुलूस के रूप में मीरानी कॉलोनी तक ले जाया गया। रास्ते में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सोमवार को शुभ मुहूर्त में विधि विधान के साथ मीरानी के राजा की स्थापना की गई।

    गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर शहर के अलग अलग हिस्सों में कई सार्वजनिक पंडाल तैयार किए गए हैं। रविवार देर रात तक इन पंडालों में सजावट का काम चलता रहा। कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां और विशेष सजावट की गई है। घरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष तैयारियां की हैं। गणपति स्थापना के साथ ही अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा और अलग अलग क्षेत्रों में गणपति बप्पा के जयकारों की गूंज सुनाई देगी।

    ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद मिश्रा के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस संयोग में भगवान गणेश की स्थापना और पूजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजन के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना गया है।

    गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही सतना में धार्मिक उल्लास का माहौल बन गया है। बाजारों से लेकर कॉलोनियों और सार्वजनिक पंडालों तक हर जगह गणपति उत्सव की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना में जुटे हैं। अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहने की उम्मीद है।

  • Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देश के शेयर बाजार में कारोबार बंद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर आज सामान्य ट्रेडिंग नहीं होगी। बाजार की छुट्टी के कारण निवेशक इक्विटी समेत कई प्रमुख सेगमेंट में खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।

    आज इक्विटी सेगमेंट, डेरिवेटिव्स सेगमेंट और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग यानी SLB सेगमेंट में कारोबार पूरी तरह बंद रहेगा। इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में भी सोमवार को कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। इस तरह इन सभी प्रमुख बाजार सेगमेंट में पूरे कारोबारी दिन गतिविधियां बंद रहेंगी।

    गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार बंद रहने के साथ देश के कई सरकारी और निजी कार्यालयों में भी अवकाश है। इसके अलावा कई सरकारी और निजी बैंक भी सोमवार को बंद रहने वाले हैं। हालांकि, सभी कार्यालयों में छुट्टी होना जरूरी नहीं है और कुछ जगहों पर सामान्य कामकाज जारी रहेगा।

    शेयर बाजार में छुट्टी के बावजूद कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR सेगमेंट में आंशिक कारोबार की व्यवस्था रहेगी। इन सेगमेंट में सुबह का कारोबारी सत्र बंद रहेगा। शाम के सत्र में कारोबार दोबारा शुरू किया जाएगा।

    कमोडिटी बाजार में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होगी। यानी इक्विटी और अन्य प्रमुख सेगमेंट के विपरीत कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट में दिन के दूसरे हिस्से में कारोबार किया जा सकेगा।

    बाजार बंद रहने की यह व्यवस्था गणेश चतुर्थी के अवसर पर लागू है। ऐसे में निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों के लिए सोमवार को शेयर बाजार की सामान्य गतिविधियां उपलब्ध नहीं रहेंगी। BSE की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आज संबंधित सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं होगी।

    अब बाजार अगले कारोबारी दिन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को फिर से खुलेगा। उस दिन BSE और NSE पर सामान्य कारोबार शुरू होने की उम्मीद रहेगी। वहीं, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट के लिए सोमवार शाम 5 बजे के बाद कारोबार का सत्र उपलब्ध रहेगा।

    गणेश चतुर्थी के कारण शेयर बाजार की छुट्टी निवेशकों के लिए कारोबारी कैलेंडर का हिस्सा है। इसलिए 14 सितंबर को इक्विटी, डेरिवेटिव्स, SLB, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में लेन-देन नहीं किया जा सकेगा। बाजार से जुड़े लोगों को अगले कारोबारी दिन यानी 15 सितंबर से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करनी होंगी।

    इस तरह सोमवार को शेयर बाजार की प्रमुख गतिविधियां बंद रहेंगी, जबकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR में शाम के सत्र में सीमित कारोबार जारी रहेगा। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि बाजार की छुट्टी केवल संबंधित ट्रेडिंग सेगमेंट के तय कार्यक्रम के अनुसार लागू है और मंगलवार से सामान्य कारोबार फिर शुरू होगा।

  • उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बनती है कि यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों को ही होती है। हालांकि कुछ प्रकार के कैंसर कम उम्र के लोगों में भी हो सकते हैं। 20 से 30 साल की उम्र में कैंसर का खतरा आमतौर पर उम्र बढ़ने के मुकाबले कम होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युवाओं को शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। कई बार सामान्य लगने वाले लक्षण किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की वजह से भी हो सकते हैं लेकिन अगर कोई बदलाव लगातार बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    शरीर में अचानक कोई गांठ महसूस होना ऐसा संकेत है जिस पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर अगर गांठ लंबे समय तक बनी रहे या उसके आकार में बदलाव दिखाई दे तो इसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती क्योंकि शरीर में कई तरह की गैर कैंसरकारी गांठ भी बन सकती हैं। इसलिए खुद से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    बिना किसी स्पष्ट वजह के लगातार वजन कम होना भी ऐसा बदलाव है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर खानपान या व्यायाम में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन तेजी से कम हो रहा है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव संक्रमण हार्मोन संबंधी समस्या या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं। लगातार वजन घटने पर डॉक्टर से जांच कराना सही कदम माना जाता है।

    लगातार थकान महसूस होना भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। पर्याप्त आराम और नींद के बावजूद कमजोरी बनी रहती है तो इसके कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। इसी तरह लंबे समय तक रहने वाला बुखार रात में अत्यधिक पसीना आना या शरीर में लगातार कमजोरी जैसी समस्या होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।
    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    यह समझना बेहद जरूरी है कि इन लक्षणों में से किसी एक का होना कैंसर होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे कई लक्षण सामान्य संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। कैंसर की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच और जरूरी टेस्ट के बाद ही हो सकती है। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी का अनुमान लगाने से बचना चाहिए।

    युवाओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अपने शरीर में होने वाले लगातार और असामान्य बदलावों को लेकर जागरूक रहें। संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू और धूम्रपान से दूरी तथा समय पर स्वास्थ्य जांच बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर कोई लक्षण लगातार बना रहता है या तेजी से बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना समझदारी है। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से बीमारी का कारण समझने और जरूरत पड़ने पर उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।