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  • नाना बनने के बाद भी इतनी फिट बॉडी कैसे रखते हैं सुनील शेट्टी जानिए उनका डाइट और वर्कआउट रूटीन

    नाना बनने के बाद भी इतनी फिट बॉडी कैसे रखते हैं सुनील शेट्टी जानिए उनका डाइट और वर्कआउट रूटीन


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी 65 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस को लेकर लगातार चर्चा में रहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ जहां ज्यादातर लोग अपनी शारीरिक सक्रियता कम कर देते हैं वहीं सुनील शेट्टी आज भी अपने वर्कआउट और डाइट को लेकर बेहद अनुशासित नजर आते हैं। नाना बनने के बाद भी उनकी फिट बॉडी और एनर्जी देखकर उनकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। अभिनेता लंबे समय से फिटनेस को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाए हुए हैं और उनका मानना है कि स्वस्थ शरीर के लिए केवल एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं है बल्कि खानपान पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है।

    सुनील शेट्टी ने बताया है कि उन्होंने कम उम्र से ही फिटनेस को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। करीब 15 साल की उम्र में उनकी मुलाकात महान क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स से हुई थी। इसी मुलाकात के दौरान फिटनेस को लेकर उनके मन में एक अलग सोच विकसित हुई। इसके बाद से ही उन्होंने अपने शरीर को मजबूत और एक्टिव रखने पर ध्यान देना शुरू किया और समय के साथ यह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया।

    सुनील शेट्टी के फिटनेस रूटीन में वर्कआउट और संतुलित डाइट दोनों की अहम भूमिका है। अभिनेता सुबह जल्दी उठने की कोशिश करते हैं और आमतौर पर सुबह करीब 5 बजे एक्सरसाइज शुरू कर देते हैं। अगर किसी वजह से वह सुबह जल्दी वर्कआउट नहीं कर पाते हैं तो भी कोशिश रहती है कि सुबह 8 बजे तक उनकी कसरत पूरी हो जाए। उनके वर्कआउट में वेट लिफ्टिंग रनिंग वॉकिंग स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और स्क्वॉट्स जैसी एक्सरसाइज शामिल रहती हैं। इसके अलावा वह मानसिक शांति और शरीर के संतुलन के लिए योग भी करते हैं।

    फिटनेस के साथ उनकी डाइट भी काफी अनुशासित है। सुनील शेट्टी ब्लैक कॉफी के साथ खजूर लेना पसंद करते हैं। उनके लंच और डिनर में प्रोटीन से भरपूर भोजन शामिल रहता है। दक्षिण भारतीय होने के कारण वह चावल खाना पसंद करते हैं लेकिन इसकी मात्रा सीमित रखते हैं। वह खाने में तेल की मात्रा बेहद कम रखने की कोशिश करते हैं। डेयरी प्रोडक्ट्स से एलर्जी होने के कारण वह दूध और दही जैसी चीजों से भी दूरी रखते हैं।

    उनकी डाइट का सबसे अहम हिस्सा वह दो चीजें हैं जिन्हें उन्होंने लगभग पूरी तरह छोड़ दिया है। सुनील शेट्टी चीनी से दूरी बनाए रखते हैं और जंक फूड को अपनी डाइट का हिस्सा नहीं बनाते। इसके अलावा वह तेल का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। अभिनेता ग्लूटेन का सेवन भी सीमित रखते हैं क्योंकि उनके मुताबिक इससे उन्हें सिरदर्द और पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

    सुनील शेट्टी का फिटनेस मंत्र साफ है कि शरीर को फिट रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज के साथ सही खानपान और अनुशासन बेहद जरूरी है। वह अपनी भूख और जरूरत के हिसाब से भोजन की मात्रा तय करने पर भी ध्यान देते हैं। यही वजह है कि 65 साल की उम्र में भी वह फिटनेस के मामले में कई युवा कलाकारों को कड़ी टक्कर देते नजर आते हैं।

  • निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब

    निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं और उनकी इस विदेश यात्रा को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विजय की लंदन यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य निवेशकों से मुलाकात और तमिलनाडु में निवेश लाने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा करना बताया गया है। लेकिन इसी दौरान अभिनेता अजित के साथ उनकी मुलाकात और अभिनेत्री तृषा के साथ नजर आने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल डीएमके ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

    शनिवार को सोशल मीडिया पर थलपति विजय और अभिनेता अजित का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में दोनों काफी सहज और दोस्ताना अंदाज में नजर आए। बताया जा रहा है कि अजित इन दिनों लंदन में मोटर रेसिंग से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद हैं। विजय की उनसे मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विजय ने लंदन जाकर निवेश लाने की बात कही थी लेकिन अब तस्वीर सामने है कि वह अपने दोस्त की कार रेस देखने भी पहुंचे हैं।

    डीएमके विधायक मार्कंडेयन ने भी विजय की लंदन यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में किसानों और मछुआरों समेत कई वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को पहले राज्य की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था। उनके मुताबिक निवेशकों से मुलाकात कुछ समय के लिए टाली भी जा सकती थी लेकिन राज्य के लोगों से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता वाले हैं।

    हालांकि विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं और विदेश दौरे के दौरान किसी परिचित या दोस्त से मुलाकात करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अजित केवल तमिल फिल्मों के बड़े अभिनेता ही नहीं बल्कि मोटर रेसिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान रखते हैं। ऐसे में उनसे मुलाकात को तमिलनाडु की ब्रांड वैल्यू से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    दरअसल थलपति विजय की लंदन यात्रा को तमिलनाडु में मोटर स्पोर्ट्स से जुड़ी बड़ी योजना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चेन्नई में एक आधुनिक मोटर स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन में मौजूद विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी यात्रा का हिस्सा बताया जा रहा है।

    विजय के साथ अभिनेत्री तृषा के नजर आने और अजित के साथ उनकी मुलाकात के वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। एक तरफ डीएमके इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का मुद्दा बना रही है तो दूसरी तरफ टीवीके इसे मुख्यमंत्री के कामकाज और तमिलनाडु की वैश्विक पहचान से जोड़कर देख रही है। ऐसे में विजय की लंदन यात्रा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकती है।

  • एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण

    एक ही दिन तीज और गणेश चतुर्थी महिलाओं के लिए खास रहेगा आज का दिन दोपहर में गणेश स्थापना और रातभर होगा जागरण


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला एशिया कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर आठवीं बार एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। टीम की इस शानदार उपलब्धि के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को इस ऐतिहासिक जीत के लिए शुभकामनाएं दीं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की।

    यूएई में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट की तरह निर्णायक मुकाबले में भी अपना दबदबा कायम रखा। टीम के खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए श्रीलंका को 72 रन से मात दी। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने आठवीं बार महिला एशिया कप का खिताब जीतकर अपनी मजबूती का परिचय दिया। फाइनल में मिली इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीम की जीत पर खुशी जताते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय टीम के खेल में आत्मविश्वास निरंतर शानदार प्रदर्शन और जबरदस्त जज्बा नजर आया। प्रधानमंत्री ने महिला खिलाड़ियों की मेहनत और उनके प्रदर्शन की तारीफ करते हुए इस उपलब्धि को भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत देशभर के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम की इस सफलता से युवा क्रिकेट के साथ साथ दूसरे खेलों में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे। खिलाड़ियों की मेहनत आत्मविश्वास और लगातार बेहतर प्रदर्शन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि भारतीय महिला क्रिकेट किस तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एशिया कप जीतने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर टीम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने एशियाई क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अमित शाह ने टीम के पूरे टूर्नामेंट में दबदबा बनाए रखने की तारीफ की और कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया।

    महिला टीम की इस जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और फाइनल जैसे अहम मुकाबले में भी दबाव के बीच शानदार खेल दिखाया। श्रीलंका के खिलाफ 72 रन की जीत ने भारतीय टीम की तैयारियों और मजबूत इरादों को सामने रखा।

    आठवीं बार एशिया कप जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह एशियाई क्रिकेट में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। खिलाड़ियों की इस सफलता ने देश के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्साह भर दिया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत देश की कई हस्तियों की ओर से मिल रही बधाइयां इस ऐतिहासिक जीत की अहमियत को और बढ़ा रही हैं।

  • सोमवार के दिन इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा धन और सुख शांति के लिए जानें खास उपाय

    सोमवार के दिन इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा धन और सुख शांति के लिए जानें खास उपाय


    नई दिल्ली। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के साथ घर के वास्तु पर ध्यान देने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और आसपास रखी वस्तुओं को महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहे तो परिवार के सदस्यों के बीच सुख शांति बनी रहती है और कामकाज में भी मन लगता है। ऐसे में सोमवार के दिन कुछ आसान वास्तु उपाय किए जा सकते हैं।

    सोमवार की सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करना शुभ माना जाता है। घर में लंबे समय से बेकार पड़ी वस्तुओं को हटाना चाहिए। खासकर मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। वास्तु मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है इसलिए इसे साफ सुथरा रखना जरूरी माना जाता है। सोमवार सुबह घर के मुख्य द्वार पर साफ पानी का छिड़काव करना भी सकारात्मक माना जाता है।

    भगवान शिव की पूजा के लिए घर में साफ और शांत स्थान का चयन करना चाहिए। यदि घर में शिवलिंग रखा है तो उसकी नियमित रूप से विधि अनुसार पूजा की जा सकती है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय ओम नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना जाता है। हालांकि घर में शिवलिंग रखने और उसकी पूजा से जुड़े नियम अलग अलग परंपराओं में अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करना बेहतर माना जाता है।

    वास्तु के अनुसार घर के उत्तर पूर्व हिस्से को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए यदि संभव हो तो पूजा का स्थान उत्तर पूर्व दिशा में रखा जा सकता है। पूजा स्थल को हमेशा साफ रखना चाहिए और वहां अनावश्यक सामान जमा नहीं करना चाहिए। सोमवार को पूजा स्थल की सफाई करके दीपक जलाना घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने का एक सरल उपाय माना जाता है।

    घर में तुलसी का पौधा भी सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। तुलसी के पौधे के आसपास सफाई रखना चाहिए। सोमवार को तुलसी की देखभाल करते समय अपनी परंपरा का ध्यान रखें क्योंकि अलग धार्मिक परंपराओं में सोमवार को तुलसी से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं। घर में सूखे या खराब पौधे हों तो उन्हें हटाना भी बेहतर माना जाता है।

    सोमवार के दिन घर में शांत और सकारात्मक माहौल बनाए रखना भी वास्तु से जुड़े उपायों में महत्वपूर्ण माना जाता है। बेवजह विवाद और नकारात्मक बातचीत से बचना चाहिए। घर में मधुर वातावरण बनाए रखने से परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंध बेहतर हो सकते हैं। शाम के समय पूजा स्थल पर दीपक जलाकर भगवान शिव का स्मरण किया जा सकता है।

    धन और समृद्धि के लिए घर को व्यवस्थित रखना जरूरी माना जाता है। अलमारी और तिजोरी के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। टूटे हुए बर्तन बंद घड़ी खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं आने वाली चीजों को घर में जमा करके रखने से बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती है।

    सोमवार को किए जाने वाले ये वास्तु उपाय धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य घर में सकारात्मकता और अनुशासन का वातावरण बनाना है। महादेव की पूजा के साथ यदि व्यक्ति अपने घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखता है तो इससे मानसिक शांति और बेहतर वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी उपाय को श्रद्धा के साथ करें और अंधविश्वास के बजाय अपनी समझ और परिस्थितियों को भी महत्व दें।

  • हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना

    हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी आज एक साथ बना खास संयोग सुबह निर्जला व्रत तो दोपहर में होगी बप्पा की स्थापना


    भोपाल। भोपाल में आज धार्मिक आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने से शहर में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक आयोजनों की रौनक बनी रहेगी। दिन की शुरुआत महिलाओं के निर्जला व्रत से होगी। इसके बाद दोपहर में शुभ मुहूर्त में घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। शाम को प्रदोष काल में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विधान से पूजन करेंगी। इसके बाद रातभर जागरण और आराधना का सिलसिला चलेगा।

    तिथि भेद के कारण इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का यह विशेष संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक तृतीया तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसी अवधि में घरों और गणेश पंडालों में विधि-विधान से भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी।

    हरतालिका तीज के अवसर पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी। शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाएगी। मान्यता के अनुसार महिलाएं इस दौरान सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। पूजन के बाद रातभर जागरण कर तीज की पूजा और आराधना की जाएगी। इस वजह से आज शहर के कई इलाकों में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    गणेश उत्सव को लेकर भी भोपाल में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शहर में 300 से अधिक बड़े गणेश पंडाल सजकर तैयार हैं जबकि 700 से ज्यादा छोटी झांकियां और अन्य धार्मिक आयोजन भी बनाए गए हैं। रविवार सुबह से ही कई स्थानों पर गणपति बप्पा की अगवानी शुरू हो गई थी। सोमवार को शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के साथ उत्सव का विधिवत आगाज होगा।

    टीटी नगर जहांगीराबाद जवाहर चौक कोलार मंगलवारा और बरखेड़ा पठानी सहित कई इलाकों में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सजी हुई हैं। रविवार को बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और पंडालों के लिए भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदते नजर आए। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं के साथ पूजा सामग्री और सजावट की वस्तुओं की भी मांग रही।

    वहीं हरतालिका तीज को लेकर भी शहर के प्रमुख बाजारों में महिलाओं की भीड़ दिखाई दी। न्यू मार्केट और दस नंबर समेत कई बाजारों में महिलाओं ने चूड़ी मेहंदी साड़ी और साज-श्रृंगार की सामग्री खरीदी। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही रही।

    तीज और गणेश चतुर्थी के बाद धार्मिक पर्वों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 15 सितंबर को ऋषि पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन सप्त ऋषियों और अरुंधती का पूजन किया जाएगा। इसके बाद 19 सितंबर को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भी भोपाल में धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े कार्यक्रमों की रौनक बनी रहेगी

  • ट्रंप का आयरिश व्हिस्की पर बड़ा ऐलान: 10% टैरिफ हटाने की घोषणा, बोले- सब मेरे पीछे पड़े थे

    ट्रंप का आयरिश व्हिस्की पर बड़ा ऐलान: 10% टैरिफ हटाने की घोषणा, बोले- सब मेरे पीछे पड़े थे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयरिश व्हिस्की के कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। आयरलैंड में आयरिश ओपन गोल्फ टूर्नामेंट के समापन समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आयरिश व्हिस्की पर लगाया गया 10% टैरिफ हटाने जा रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इस शुल्क को हटाने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर गोल्फ खिलाड़ियों तक कई लोग उनके पीछे पड़े हुए थे।

    ट्रंप ने रविवार को यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के अलावा गोल्फ से जुड़े लोगों ने भी उनके सामने यह मुद्दा उठाया था। आयरिश ओपन के विजेता शेन लोरी भी टैरिफ हटाने की मांग करने वालों में शामिल थे। ट्रंप ने इसी संदर्भ में कहा, “सब इसके लिए मेरे पीछे पड़े थे।”

    अभी 10% शुल्क दे रहे हैं आयरिश व्हिस्की कारोबारी

    फिलहाल अमेरिका में आयरिश व्हिस्की पर 10% टैरिफ लागू है। यह शुल्क यूरोपीय संघ से आने वाले ज्यादातर सामान पर लगाया गया है। जुलाई में अमेरिकी प्रशासन ने इसे 15% से घटाकर 10% किया था। अब ट्रंप के नए ऐलान से आयरिश व्हिस्की को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर किए जाने की उम्मीद है।

    हालांकि, ट्रंप की घोषणा के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टैरिफ हटाने का फैसला किस तारीख से प्रभावी होगा। नई व्यवस्था लागू होने की आधिकारिक समयसीमा का इंतजार है।

    ब्रिटिश व्हिस्की को पहले ही मिल चुकी है राहत

    आयरिश व्हिस्की पर टैरिफ हटाने के फैसले का एक संबंध ब्रिटेन की व्हिस्की को मिली हालिया राहत से भी जोड़ा जा रहा है। ट्रंप ने अप्रैल में ब्रिटेन की कुछ व्हिस्की पर लगे टैरिफ हटाने की घोषणा की थी। इसमें स्कॉच के साथ उत्तरी आयरलैंड में बनने वाली शराब भी शामिल थी।

    इसके बाद आयरलैंड की व्हिस्की पर 10% शुल्क जारी रहने से दोनों देशों के उत्पादों के बीच अलग स्थिति बन गई थी। अब ट्रंप के ताजा ऐलान के बाद आयरिश व्हिस्की को भी ब्रिटिश उत्पादों के समान राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    घोषणा पर दर्शकों ने बजाईं तालियां

    ट्रंप की घोषणा के तुरंत बाद समारोह में मौजूद दर्शकों ने तालियों और सीटियों के साथ प्रतिक्रिया दी। हालांकि, राहत की वास्तविक शुरुआत कब होगी, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिका के डिस्टिल्ड स्पिरिट्स काउंसिल के प्रमुख क्रिस स्वॉन्गर ने इस फैसले का स्वागत किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इसे शराब कारोबार में व्यापारिक बाधाएं कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी दुकानदारों, रेस्टोरेंट, ग्राहकों और अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है, खासकर छुट्टियों के सीजन में।

    कई महीनों से टैरिफ हटाने की मांग

    आयरिश व्हिस्की एसोसिएशन भी लंबे समय से अमेरिकी बाजार में लागू इस शुल्क को हटाने की मांग कर रहा था। संगठन ने मई में कहा था कि टैरिफ हटने से आयरिश उत्पाद बेचने वाली कई अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा। इसके साथ ही उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता भी कम हो सकती है।

    ब्रिटेन की व्हिस्की को शुल्क से राहत देने के फैसले का जिक्र करते हुए ट्रंप ने अप्रैल में कहा था कि किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला की व्हाइट हाउस यात्रा के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया था। वहीं, 24 जुलाई को स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन ने बताया था कि ब्रिटेन की व्हिस्की पर शून्य टैरिफ की नीति लागू हो गई है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रंप द्वारा आयरिश व्हिस्की पर 10% टैरिफ हटाने की घोषणा को अमेरिकी प्रशासन कब से औपचारिक रूप से लागू करता है।

  • भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत

    भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत


    भोपाल । भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के बीच अब लोगों की नजर नए मास्टर प्लान पर टिक गई है। सरकार नए मास्टर प्लान को लागू करने की तैयारी में है लेकिन इसके लागू होने के बाद भी आवासीय इलाकों में चल रहे कमर्शियल कारोबार को तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक यदि सरकार अभी मास्टर प्लान की घोषणा करती है तो इसे लागू होने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। वहीं मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों के डायवर्सन के लिए भी संबंधित लोगों को निर्धारित राशि चुकानी पड़ सकती है।

    भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर ही शहर का विकास हो रहा है। यानी करीब 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से शहर की व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं जबकि इस दौरान आबादी और शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया मास्टर प्लान समय पर लागू नहीं होने के कारण कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं। अगर शहर के विस्तार के साथ नया मास्टर प्लान लागू होता तो कमर्शियल क्षेत्रों के लिए पहले से जगह तय होती और उसी हिसाब से सड़कें पार्किंग सीवेज बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाता।

    अब मिक्स्ड लैंड यूज को संभावित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। यदि सरकार अरेरा कॉलोनी बावड़ियाकलां रोहित नगर समेत कुछ बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल करती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वहां चल रहे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने आप वैध हो जाएंगे। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। संबंधित इलाकों में पार्किंग सीवेज बिजली पानी और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी करनी होगी।

    इसके अलावा जिन भवनों को कमर्शियल उपयोग के दायरे में लाया जाएगा उनके डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ सकता है। यह राशि कितनी होगी इसका फैसला सरकार करेगी। विशेषज्ञ के अनुसार डायवर्सन की प्रक्रिया में भी करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है। यानी मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा।

    पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई भी बेहद अहम मानी जा रही है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। साथ ही हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत वाले आदेश भी निरस्त कर दिए गए थे। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी है।

    इसी के चलते भोपाल में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई। एक सप्ताह में आठ हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए जबकि करीब 190 प्रतिष्ठान स्वेच्छा से या सीलिंग के जरिए बंद किए गए। निगम को कुल 62 हजार नोटिस जारी करने थे लेकिन शुरुआती कार्रवाई में ही व्यापारियों और रहवासियों का विरोध सामने आ गया।

    निगम की कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। रोशनपुरा और न्यू मार्केट में प्रदर्शन हुआ तो कोलार रोड समेत कई इलाकों में बाजार बंद रखे गए। अवधपुरी और रायसेन रोड पर भी विरोध देखने को मिला। अब सभी की निगाहें सरकार के नए मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर हैं। फिलहाल इतना साफ है कि मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी राहत की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों को नियमों के साथ डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

  • गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप

    गणपति के कितने रूप कहीं पत्नी नहीं तो कहीं रिद्धि-सिद्धि का साथ जानिए देशभर में क्यों अलग है बप्पा का स्वरूप


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन इस त्योहार की खासियत केवल इसकी भव्यता नहीं बल्कि भगवान गणेश को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित मान्यताएं भी हैं। देश के एक हिस्से में गणपति को ब्रह्मचारी माना जाता है तो दूसरे हिस्से में उन्हें रिद्धि-सिद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कहीं वे बाल गणपति हैं तो कहीं सिद्धि-विनायक और महागणपति के रूप में उनकी आराधना होती है। यही विविधता गणेश उपासना को बेहद व्यापक और रोचक बनाती है।

    भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। महाराष्ट्र में इस पर्व का विशेष महत्व है जहां बड़े-बड़े पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पिछले कुछ दशकों में गणेशोत्सव महाराष्ट्र और दक्षिण तथा पश्चिम भारत से निकलकर उत्तर भारत के कई हिस्सों तक पहुंचा है। अब यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित त्योहार नहीं रह गया है। अलग-अलग स्थानों पर गणपति के स्वरूप और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी अपने स्थानीय इतिहास और परंपराओं के अनुसार विकसित हुई हैं।

    दक्षिण भारत की कई धार्मिक परंपराओं में भगवान गणेश को अविवाहित और ब्रह्मचारी माना जाता है। यहां उनका ब्रह्मचर्य संयम ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति से जोड़ा जाता है। इससे जुड़ी लोककथाओं में कहा जाता है कि गणेश अपनी माता पार्वती को आदर्श स्त्री मानते थे और उनके समान गुणों वाली स्त्री मिलने पर ही विवाह करना चाहते थे। एक अन्य कथा में यह विचार मिलता है कि संसार की सभी स्त्रियां आदिशक्ति और माता पार्वती का ही अंश हैं इसलिए गणेश ने विवाह न करने का निर्णय लिया। तमिलनाडु के सुचिंद्रम में गणेश के स्त्री रूप विनायकी की प्राचीन प्रतिमा भी इस परंपरा की विशिष्टता को दर्शाती है।

    वहीं उत्तर भारत में गणपति की छवि काफी अलग दिखाई देती है। यहां उन्हें रिद्धि-सिद्धि दाता और सिद्धि-बुद्धि के पति के रूप में पूजा जाता है। कई चित्रों और प्रतिमाओं में गणेशजी के साथ दो स्त्री आकृतियां दिखाई देती हैं। शिव पुराण से जुड़ी कथा में प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि का विवाह गणेशजी से बताया गया है। इसी परंपरा से क्षेम और लाभ जैसे पुत्रों का उल्लेख मिलता है जो बाद में लोकप्रिय मान्यताओं में शुभ-लाभ के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए।

    इन मान्यताओं का प्रतीकात्मक अर्थ भी काफी महत्वपूर्ण है। बुद्धि विवेक और ज्ञान का प्रतीक है जबकि सिद्धि सफलता या आध्यात्मिक उपलब्धि का संकेत देती है। रिद्धि समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। यानी गणपति के साथ इन शक्तियों का जुड़ाव यह संदेश देता है कि जहां विवेक और बुद्धि है वहां सफलता और समृद्धि का मार्ग भी खुलता है।

    महाराष्ट्र में गणपति लोकजीवन का अहम हिस्सा हैं। अष्टविनायक की परंपरा से लेकर सार्वजनिक गणेशोत्सव तक यहां गणपति के अनेक स्वरूप देखने को मिलते हैं। वहीं बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान गणेशजी के पास साड़ी में लिपटा केले का पौधा दिखाई देता है जिसे कोला बऊ कहा जाता है। लोकमान्यता में इसे गणेश की पत्नी माना जाता है लेकिन धार्मिक परंपरा में कोला बऊ वास्तव में नवपत्रिका पूजा का हिस्सा है।

    तांत्रिक और शाक्त परंपराओं में भी गणपति के अलग स्वरूप मिलते हैं। उच्छिष्ट गणपति महागणपति ऊर्ध्व गणपति पिंगल गणपति और लक्ष्मी गणपति जैसे रूपों में वे शक्ति के साथ दिखाई देते हैं। इन स्वरूपों को सामान्य वैवाहिक अर्थ में नहीं बल्कि शक्ति और सृजनात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    इस तरह भगवान गणेश के अलग-अलग रूप और उनसे जुड़ी मान्यताएं एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि भारतीय धार्मिक परंपराओं की विविधता को दर्शाती हैं। क्षेत्र बदलने के साथ पूजा की शैली और मान्यता बदल सकती है लेकिन गणपति का मूल भाव वही रहता है। वे बुद्धि विवेक और विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति के देवता हैं। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी का स्मरण करने की परंपरा आज भी पूरे देश में कायम है।

  • Shani Gochar 2027: मेष में शनि की एंट्री से 4 राशियों पर पड़ेगा प्रभाव, रहना होगा सतर्क

    Shani Gochar 2027: मेष में शनि की एंट्री से 4 राशियों पर पड़ेगा प्रभाव, रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। साल 2027 में शनि का राशि परिवर्तन ज्योतिष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार शनि जून 2027 में मीन राशि छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष में मेष को शनि की नीच राशि माना जाता है। ऐसे में शनि के इस गोचर को कई राशियों के लिए जिम्मेदारियां बढ़ाने, धैर्य की परीक्षा लेने और पुराने मामलों को निपटाने वाला समय माना जा रहा है। खासतौर पर मेष, वृषभ, कन्या और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में संभलकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है।

    3 जून के आसपास मेष में प्रवेश

    उपलब्ध ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक शनि करीब 3 जून 2027 को मेष राशि में पहुंच सकते हैं। इसके बाद उनकी गति और वक्री अवस्था भी राशियों पर प्रभाव डाल सकती है। कुछ गणनाओं में अगस्त 2027 में शनि के वक्री होने और अक्टूबर में दोबारा मीन राशि की ओर लौटने का उल्लेख मिलता है। इसका मतलब यह है कि पूरे साल शनि का प्रभाव एक जैसा नहीं रहेगा और उनकी चाल के अलग-अलग चरणों में परिस्थितियां बदल सकती हैं।

    मेष में शनि को क्यों माना जाता है नीच?

    मेष राशि के स्वामी मंगल हैं, जबकि शनि को ज्योतिष में धैर्य, अनुशासन, धीमी गति और लंबे संघर्ष के बाद परिणाम देने वाला ग्रह माना जाता है। इसके विपरीत मेष ऊर्जा, तेजी, साहस और तुरंत निर्णय लेने की प्रवृत्ति से जुड़ी है। यही कारण है कि ज्योतिषीय मान्यता में मेष राशि शनि के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती और इसे शनि की नीच राशि कहा जाता है।

    हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि शनि का गोचर हर व्यक्ति के लिए नकारात्मक ही होगा। जन्मकुंडली में शनि किस भाव में स्थित हैं, किन ग्रहों से उनका संबंध है और दशा-अंतर्दशा क्या चल रही है, इन सभी कारकों के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

    मेष राशि: बढ़ सकती हैं जिम्मेदारियां

    मेष राशि के जातकों के लिए शनि का यह परिवर्तन विशेष माना जा रहा है। कामकाज और निजी जीवन दोनों में जिम्मेदारियां बढ़ने की संभावना जताई जाती है। इस दौरान जल्दबाजी में लिए गए फैसले परेशानी खड़ी कर सकते हैं, इसलिए बड़े निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

    करियर के मोर्चे पर भी मेहनत ज्यादा करनी पड़ सकती है। कुछ लोगों को अपेक्षित परिणाम मिलने में देरी महसूस हो सकती है। हालांकि ज्योतिष में शनि को ऐसे ग्रह के रूप में देखा जाता है जो मेहनत और धैर्य के बाद स्थायी परिणाम देता है। इसलिए इस दौर में जल्दबाजी के बजाय निरंतर प्रयास पर जोर देना बेहतर माना जाता है।

    वृषभ: साढ़ेसाती का पहला चरण

    शनि के मेष राशि में पहुंचने के साथ वृषभ राशि से साढ़ेसाती का चरण शुरू होने की बात कही गई है। ऐसे में खर्च, आर्थिक प्रबंधन और बढ़ती जिम्मेदारियों पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।

    ज्योतिषीय सलाह के अनुसार वृषभ राशि वालों को अनावश्यक खर्च और कर्ज से बचना चाहिए। बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश करने या किसी को बड़ी रकम उधार देने से भी सावधानी बरतना बेहतर माना जाता है। यह समय आर्थिक अनुशासन विकसित करने का अवसर भी बन सकता है।

    कन्या: साझेदारी और फैसलों में सावधानी

    कन्या राशि के लिए शनि का मेष गोचर अचानक बदलाव और काम के दबाव से जुड़ा माना जा रहा है। नौकरी या कारोबार में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा।

    साझेदारी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पड़ सकती है। कानूनी मामलों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। ज्योतिषीय विश्लेषण में कन्या राशि के लिए करियर और पार्टनरशिप से जुड़े दबाव की संभावना बताई गई है।

    कुंभ: साढ़ेसाती के प्रभाव में बदलाव

    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि हैं। ऐसे में 2027 का यह गोचर इस राशि के लिए भी अहम माना जा रहा है। जून 2027 के आसपास कुंभ राशि के लिए साढ़ेसाती का अंतिम चरण समाप्त होने की बात कही गई है।

    हालांकि शनि की वक्री चाल के कारण अक्टूबर के बाद परिस्थितियों में फिर बदलाव संभव माना जा रहा है। इसलिए कुंभ राशि वालों के लिए पूरे साल को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। शनि की चाल के अलग-अलग चरणों के अनुसार परिस्थितियां बदल सकती हैं।

    नीच राशि का मतलब हमेशा अशुभ नहीं

    शनि के मेष में जाने की खबर सुनकर इसे सीधे नुकसान से जोड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति, भाव, दूसरे ग्रहों के साथ संबंध और दशा-अंतर्दशा परिणामों को प्रभावित करते हैं।

    ज्योतिष में नीचभंग की अवधारणा भी है। कुछ विशेष ग्रह स्थितियों में नीच ग्रह की कमजोरी कम या समाप्त मानी जाती है। इसलिए केवल राशि देखकर किसी व्यक्ति के भविष्य को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

    शनि के गोचर में किन बातों का ध्यान रखें?

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार 2027 में शनि के मेष गोचर के दौरान धैर्य और अनुशासन को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। बिना पूरी जानकारी के आर्थिक जोखिम लेने से बचना चाहिए। नौकरी और कारोबार में शॉर्टकट के बजाय लगातार मेहनत पर भरोसा करना उचित माना जाता है।

    विवाद की स्थिति में उसे बढ़ाने के बजाय बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए। शनि को ज्योतिष में कर्म और जिम्मेदारी का ग्रह माना जाता है, इसलिए इस अवधि में जिम्मेदारियों से बचने के बजाय उन्हें ईमानदारी और धैर्य के साथ पूरा करना शुभ माना जाता है।

  • "समुद्र न होता तो अरब तक चुनाव लड़ने पहुंच जाते" CM मोहन यादव का गांधी परिवार पर तीखा तंज

    "समुद्र न होता तो अरब तक चुनाव लड़ने पहुंच जाते" CM मोहन यादव का गांधी परिवार पर तीखा तंज


    आगर मालवा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी और उनके परिवार के चुनावी क्षेत्रों को लेकर तीखा तंज कसा। आगर मालवा में सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि यह परिवार दिल्ली से चुनाव लड़ने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों से चुनाव लड़ता रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर बीच में समुद्र नहीं होता तो चुनाव लड़ने के लिए अरब देशों तक पहुंच जाते।

    मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और उनके परिवार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो दिल्ली से चुनाव लड़कर दिखाएं। उन्होंने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और परिवार के अन्य नेताओं ने दिल्ली से चुनाव नहीं लड़ा, क्योंकि वहां के लोग उन्हें अच्छी तरह जानते थे।

    रायबरेली-अमेठी से वायनाड तक तंज

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि गांधी परिवार अब उत्तर प्रदेश की रायबरेली और अमेठी से आगे निकल चुका है।

    उन्होंने कहा कि लोग यह भी कहते हैं कि बीच में समुद्र आ गया, वरना ये नेता चुनाव लड़ने के लिए अरब देशों या किसी और जगह तक पहुंच जाते।

    राहुल पर ‘पप्पू’ वाले बयान से हमला

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर न्यायपालिका और सशस्त्र बलों पर सवाल उठाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भारत नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ लोकतंत्र में आगे बढ़ रहा है, लेकिन राहुल गांधी इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

    इसी दौरान यादव ने राहुल गांधी को लेकर ‘पप्पू’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि नाम ही ‘पप्पू’ है तो काम भी उसी तरह करेंगे, इसमें क्या किया जा सकता है।

    इंदौर के कांग्रेस कार्यक्रम को लेकर भी निशाना

    मोहन यादव ने इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भी राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों और युवाओं की बात करने के नाम पर राहुल गांधी मध्य प्रदेश में ‘झूठ का पुलिंदा’ लेकर आ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि राज्य सरकार ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में गलत जानकारी फैला रही है।

    यादव ने राहुल गांधी से मध्य प्रदेश की जनता से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकारें राज्य में डकैतों और नक्सलवाद की समस्या को रोकने में नाकाम रही थीं। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार ने राज्य से डकैतों और नक्सलियों दोनों का सफाया कर दिया है।

    लाड़ली बहना के खातों में 1,835 करोड़

    सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना के तहत 1.25 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों के खातों में 1,835 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की। कार्यक्रम में सरकार की योजनाओं और महिला लाभार्थियों को दी जा रही आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया गया।