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  • नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर ममदानी का यू-टर्न, कानूनी अधिकार न होने की बात स्वीकार, फिर भी ICC वारंट लागू करने की उठाई मांग

    नेतन्याहू की गिरफ्तारी पर ममदानी का यू-टर्न, कानूनी अधिकार न होने की बात स्वीकार, फिर भी ICC वारंट लागू करने की उठाई मांग

    नई दिल्ली । न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर अपने पहले के चुनावी रुख में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कहा है कि उनके प्रशासन के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई बार दावा किया था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब कानूनी समीक्षा के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्थानीय प्रशासन के अधिकार सीमित हैं और इस प्रकार की कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

    ममदानी ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उनके प्रशासन ने लागू कानूनों का विस्तृत अध्ययन किया और यह जांचने का प्रयास किया कि क्या न्यूयॉर्क शहर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) द्वारा जारी किसी गिरफ्तारी वारंट को स्वयं लागू कर सकता है। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि नगर प्रशासन के पास ऐसा करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में अंतिम अधिकार संघीय सरकार के पास है।

    हालांकि कानूनी सीमाओं को स्वीकार करने के बावजूद ममदानी ने अपने राजनीतिक रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने दोहराया कि उनकी राय में बेंजामिन नेतन्याहू पर लगे आरोप गंभीर हैं और यदि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका की संघीय सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाए और संबंधित वारंट के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए।

    ममदानी ने यह भी कहा कि जब सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने की संभावना हो, तब संघीय प्रशासन को आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के साथ सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। हालांकि अमेरिका वर्तमान में आईसीसी का सदस्य नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक जटिलताएं बनी हुई हैं।

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा के दौरान किसी प्रकार की गिरफ्तारी नहीं होगी। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिकी भूमि पर रहते हुए इजरायली प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनके इस बयान के बाद ममदानी की नई टिप्पणी को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ममदानी ने यह भी दोहराया कि वह नेतन्याहू की नीतियों के आलोचक बने हुए हैं और उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आईसीसी ने आरोप तय किए हैं तो न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क ऐसे किसी व्यक्ति का स्वागत नहीं करता जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा हो।

    दूसरी ओर, नेतन्याहू के कार्यालय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इजरायल की ओर से कहा गया कि आईसीसी का इजरायली नागरिकों या अमेरिकी नागरिकों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और उसके निर्णयों को स्वीकार नहीं किया जाता। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय न्याय, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्थानीय प्रशासन के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में बढ़ा राजनीतिक टकराव, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का दिया हवाला

    नई दिल्ली । लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा को लेकर सदन में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चर्चा के दौरान केवल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को बोलने का अवसर दिया गया, जबकि अन्य विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी बहस देखने को मिली।

    अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार यह पूरे देश के युवाओं का विषय है और सभी राजनीतिक दलों को इस पर अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस और भाजपा को बोलने का मौका दिया गया तो अन्य विपक्षी दलों को क्यों नहीं सुना गया। उन्होंने इसे संसदीय प्रक्रिया में समान अवसर के सिद्धांत से जुड़ा मुद्दा बताया।

    सपा प्रमुख ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उनकी आवाज दबाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना गया तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से उनके समर्थन में सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

    अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को सदन के भीतर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार यदि संसद में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता और सरकार खुलकर जवाब देती तो विपक्ष को अलग से विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल छात्रों की समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी ढंग से रखना है।

    इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों ने चर्चा की इच्छा जताई है और सरकार भी इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संसदीय नियमों के तहत व्यवस्थित तरीके से ही चर्चा कराई जा सकती है और सदन की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के आपसी मतभेदों का समाधान अध्यक्ष के स्तर पर नहीं किया जा सकता।

    सदन में जारी बहस के बीच कुछ समय के लिए हंगामे जैसी स्थिति भी बनी। इसके बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। संसदीय कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार की ओर से यह दोहराया गया कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष ने मांग की कि चर्चा सभी दलों की भागीदारी के साथ कराई जाए।

    संसद के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान भी अखिलेश यादव ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद के भीतर छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करती तो विपक्ष को अलग से प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने युवाओं और छात्रों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाधान खोजा जाना चाहिए।

    लोकसभा में हुई इस बहस के बाद छात्रों के मुद्दे, संसदीय प्रक्रिया और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में मानसून सत्र के दौरान इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होने की संभावना बनी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

    Tags (English)

    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    नई दिल्ली । भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के मीडिया में लगातार कवरेज देखने को मिल रही है। इस बीच पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने अपने देश के मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रही गतिविधियों और वहां के हालात को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के मीडिया कवरेज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि समाचार माध्यमों का दायित्व केवल पड़ोसी देशों की घटनाओं को दिखाना नहीं, बल्कि अपने देश और उससे जुड़े क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी समान प्राथमिकता देना है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई महीनों से सामने आ रहे घटनाक्रमों और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान क्यों नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संतुलित पत्रकारिता के लिए सभी महत्वपूर्ण विषयों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान के कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को विस्तार से प्रकाशित और प्रसारित किया है। विभिन्न रिपोर्टों में प्रदर्शन, विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल का उल्लेख किया गया है। कई विश्लेषणों में यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन ने देश की राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है और विभिन्न दलों की सक्रियता बढ़ी है।

    कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी भारत में जारी विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन रिपोर्टों में प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक कदमों का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर देशभर में बहस तेज हुई है। हालांकि अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने घटनाक्रम को अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

    इधर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न दावे और रिपोर्ट सामने आती रही हैं। स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जनभावनाओं को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी राय रखते रहे हैं। इसी संदर्भ में कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि यदि मीडिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को विस्तार से दिखा सकता है तो उसे अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी समान गंभीरता के साथ सामने लाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका निष्पक्ष और संतुलित सूचना उपलब्ध कराने की होती है। जब किसी एक विषय को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और दूसरे महत्वपूर्ण विषय अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं, तो मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।

    भारत में जारी छात्र प्रदर्शनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगरानी की जा रही है और विभिन्न विदेशी मीडिया संस्थान अपने-अपने दृष्टिकोण से घटनाक्रम का विश्लेषण कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान के भीतर मीडिया कवरेज को लेकर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि समाचार प्रस्तुति और संपादकीय प्राथमिकताओं पर बहस केवल एक देश तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इन विषयों को किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं तथा दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों को किस संतुलन के साथ स्थान दिया जाता है।

  • आज शाम 530 बजे होगा हाई टी कार्यक्रम मुख्य सचिव ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को किया आमंत्रित

    आज शाम 530 बजे होगा हाई टी कार्यक्रम मुख्य सचिव ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को किया आमंत्रित


    मध्य प्रदेश । प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में आज शाम एक महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहा है। मंत्रालय के कक्ष क्रमांक 505 सी में शाम 530 बजे हाई टी कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम को लेकर शासन स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन स्वयं मौजूद रहेंगे और उन्होंने शासन के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।

    हाई टी कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव प्रमुख सचिव सचिव तथा विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष शामिल होंगे। यह आयोजन केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसे प्रशासनिक समन्वय और आपसी संवाद को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ बैठकर प्रदेश के विकास कार्यों प्रशासनिक चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर अनौपचारिक चर्चा करते हैं जिससे विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है।

    सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान शासन की प्राथमिकताओं विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विभागीय समन्वय जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद और सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इस प्रकार के संवाद कार्यक्रमों को काफी उपयोगी माना जाता है क्योंकि इससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने के साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।

    मुख्य सचिव अनुराग जैन के नेतृत्व में प्रदेश में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को एक साझा मंच मिलता है जहां वे अपने अनुभव साझा करने के साथ विभिन्न विषयों पर खुलकर विचार विमर्श कर सकते हैं। इससे शासन की योजनाओं के प्रभावी संचालन और समयबद्ध क्रियान्वयन में भी सहायता मिलती है।

    मंत्रालय में आयोजित होने वाला यह हाई टी कार्यक्रम प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें शासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान आपसी समन्वय मजबूत करने के साथ आने वाले समय की प्रशासनिक रणनीतियों पर भी विचार किया जा सकता है। शासन स्तर पर इस आयोजन को प्रशासनिक संवाद को नई गति देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

    प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी वाला यह कार्यक्रम प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को और अधिक सशक्त बनाने के साथ बेहतर समन्वय और प्रभावी निर्णय प्रक्रिया को भी मजबूती प्रदान करेगा। ऐसे आयोजनों से शासन के विभिन्न विभागों के बीच सहयोग की भावना बढ़ती है और जनहित से जुड़े कार्यों के तेज और प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

  • दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    दिल्ली छात्र प्रदर्शन के बीच सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- दलितों, किसानों के बाद अब छात्रों को बनाया जा रहा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए लगातार अलग-अलग वर्गों को भड़काने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले दलितों, वंचितों और किसानों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया और अब छात्रों को आंदोलन के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झूठे नैरेटिव के जरिए जनता को गुमराह करने की रणनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 के आम चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान विपक्ष ने कई ऐसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिनका उद्देश्य जनता के बीच भ्रम पैदा करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान और आरक्षण को लेकर भी भ्रामक प्रचार किया गया। उनके अनुसार लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने संविधान और आरक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का काम किया है तथा समाज के जरूरतमंद वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए थे। उनका दावा था कि उस दौरान भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि देश के बाहर धार्मिक और सामाजिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों के मुद्दों पर विपक्ष उतनी मुखरता नहीं दिखा पाया, जितनी घरेलू राजनीतिक विरोध के दौरान दिखाई गई।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच गलत जानकारी फैलाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, क्योंकि वही देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर रचनात्मक संवाद होना चाहिए, न कि भ्रम और टकराव का वातावरण बनाया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, किसानों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की गई हैं। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है और इसी दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज बनी हुई है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मांगों को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार चर्चा और संवाद के माध्यम से समाधान की बात कह रही है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर छात्रों को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया।

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने की संभावना है। एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे विपक्ष की राजनीति पर सीधा जवाब बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए छात्र और युवा हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।

  • जहां जन्मा था एडोल्फ हिटलर, उसी ऐतिहासिक इमारत में खुला पुलिस स्टेशन, चरमपंथी गतिविधियों पर लगेगी रोक

    जहां जन्मा था एडोल्फ हिटलर, उसी ऐतिहासिक इमारत में खुला पुलिस स्टेशन, चरमपंथी गतिविधियों पर लगेगी रोक

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रिया ने इतिहास के सबसे विवादित और कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर के जन्मस्थान को नई पहचान देते हुए वहां आधिकारिक तौर पर पुलिस स्टेशन शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य उस इमारत को नव-नाजी समर्थकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने से रोकना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। वर्षों तक विवादों में रही इस इमारत का व्यापक पुनर्निर्माण करने के बाद इसे पुलिस प्रशासन के उपयोग के लिए तैयार किया गया है।

    यह ऐतिहासिक भवन ऑस्ट्रिया के ब्राउनाउ-एम-इन शहर में स्थित है, जहां 20 अप्रैल 1889 को एडोल्फ हिटलर का जन्म हुआ था। 17वीं सदी में बने इस भवन को लंबे समय तक लेकर यह बहस चलती रही कि इसका भविष्य क्या होना चाहिए। कई विशेषज्ञों का मानना था कि यदि इसे ऐतिहासिक स्मारक का रूप दिया जाता है तो यह चरमपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए प्रतीकात्मक स्थल बन सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने इसे सार्वजनिक प्रशासन के उपयोग में लाने का निर्णय लिया।

    इमारत के पुनर्निर्माण पर लगभग 20 मिलियन यूरो, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 220 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह परियोजना तय समय से लगभग तीन वर्ष की देरी से पूरी हुई। बाहरी स्वरूप में भी बदलाव किए गए हैं ताकि भवन की पुरानी पहचान कम दिखाई दे और उसे सामान्य सरकारी भवन जैसा रूप दिया जा सके। अब मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस स्टेशन का आधिकारिक चिन्ह लगाया गया है।

    हालांकि भवन के बाहर स्थित स्मारक पत्थर को यथावत रखा गया है। इस स्मारक पर शांति, स्वतंत्रता और लोकतंत्र का संदेश अंकित है तथा फासीवाद की पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई है। सरकार का मानना है कि यह स्मारक इतिहास की त्रासदी को याद रखने और भविष्य के लिए सीख लेने का महत्वपूर्ण माध्यम बना रहेगा।

    इतिहास के अनुसार, हिटलर के शासनकाल में लाखों लोगों ने उत्पीड़न और नरसंहार का सामना किया। ऑस्ट्रिया भी उस दौर की घटनाओं को लेकर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना करता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि आधुनिक ऑस्ट्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और मानवाधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    इस भवन का स्वामित्व कई दशकों तक एक निजी परिवार के पास रहा। बाद में सरकार इसे लीज पर लेकर सामाजिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करती रही, लेकिन भविष्य को लेकर विवाद लगातार बना रहा। निजी मालिक और सरकार के बीच कानूनी प्रक्रिया भी चली, जिसके बाद सरकार ने कानून के तहत भवन का अधिग्रहण किया और मुआवजा देकर इसे अपने नियंत्रण में लिया।

    भवन के उपयोग को लेकर कई विकल्पों पर विचार किया गया था। कुछ लोगों ने इसे संग्रहालय बनाने का सुझाव दिया, जबकि कुछ ने भवन को पूरी तरह ध्वस्त करने की वकालत की। हालांकि इतिहासकारों और विशेषज्ञों की राय थी कि भवन को मिटाने के बजाय उसका ऐसा उपयोग किया जाए जिससे चरमपंथी विचारधारा को किसी प्रकार का प्रतीकात्मक लाभ न मिले। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर अंततः इसे पुलिस स्टेशन में बदलने का निर्णय लिया गया।

    सरकार का मानना है कि भवन में स्थायी पुलिस उपस्थिति यह स्पष्ट संदेश देगी कि नाजी विचारधारा या उसके किसी भी प्रकार के महिमामंडन के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है। साथ ही यह कदम इतिहास की संवेदनशील विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास भी माना जा रहा है।

  • ICC ODI Ranking में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, डेरिल मिशेल से महज 1 अंक पीछे

    ICC ODI Ranking में शुभमन गिल नंबर-1 से सिर्फ एक कदम दूर, डेरिल मिशेल से महज 1 अंक पीछे


    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा जारी ताजा वनडे रैंकिंग में भारतीय कप्तान शुभमन गिल विश्व के नंबर-1 बल्लेबाज बनने की दहलीज पर पहुंच गए हैं। न्यूजीलैंड के स्टार बल्लेबाज डेरिल मिशेल 802 रेटिंग अंकों के साथ पहले स्थान पर कायम हैं, जबकि शुभमन गिल उनसे महज एक रेटिंग अंक पीछे दूसरे स्थान पर मौजूद हैं। ऐसे में आगामी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन गिल को वनडे का नया नंबर-1 बल्लेबाज बना सकता है।

    भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहा है। विराट कोहली तीसरे और रोहित शर्मा चौथे स्थान पर बने हुए हैं। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में शानदार 138 रन की पारी खेलने का फायदा रोहित को भी मिला है। अफगानिस्तान के युवा बल्लेबाज इब्राहिम जादरान पांचवें स्थान पर हैं।

    पाकिस्तान के बाबर आजम और आयरलैंड के हैरी टैक्टर ने भी एक-एक स्थान का सुधार किया है और वे क्रमशः छठे तथा सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने वाले इंग्लैंड के अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को चार स्थानों का फायदा मिला है। वह आठवें स्थान पर पहुंचकर एक बार फिर शीर्ष-10 बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए हैं।

    वेस्टइंडीज के शे होप को तीन स्थान का नुकसान हुआ है और वह नौवें स्थान पर खिसक गए हैं, जबकि श्रीलंका के चरिथ असलांका दसवें स्थान पर बने हुए हैं।

    वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में भी बदलाव

    गेंदबाजों की रैंकिंग में अफगानिस्तान के राशिद खान पहले स्थान पर कायम हैं, जबकि पाकिस्तान के अबरार अहमद दूसरे नंबर पर हैं। इंग्लैंड के जोफ्रा आर्चर एक स्थान की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सैंटनर को तीन स्थान का फायदा मिला है और वह चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं। दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज और श्रीलंका के महेश थीक्षाना क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं।

    पाकिस्तान के शाहीन शाह अफरीदी दो स्थान के सुधार के साथ सातवें और बांग्लादेश के मेहदी हसन मिराज आठवें स्थान पर पहुंच गए हैं। इंग्लैंड के आदिल रशीद नौवें स्थान पर खिसक गए हैं, जबकि वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती ने सात स्थान की बड़ी छलांग लगाते हुए टॉप-10 में दसवां स्थान हासिल कर लिया है।

    अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर आगामी वनडे मुकाबलों पर होगी, जहां शुभमन गिल के पास दुनिया के नंबर-1 वनडे बल्लेबाज बनने का सुनहरा अवसर होगा।

  • चुनावी वादे से पीछे हटे न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी, बोले- नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार नहीं, फिर भी ट्रंप प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

    चुनावी वादे से पीछे हटे न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी, बोले- नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार नहीं, फिर भी ट्रंप प्रशासन से की कार्रवाई की मांग

    नई दिल्ली । न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर अपने पहले के चुनावी रुख में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कहा है कि उनके प्रशासन के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कई बार दावा किया था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब कानूनी समीक्षा के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्थानीय प्रशासन के अधिकार सीमित हैं और इस प्रकार की कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

    ममदानी ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उनके प्रशासन ने लागू कानूनों का विस्तृत अध्ययन किया और यह जांचने का प्रयास किया कि क्या न्यूयॉर्क शहर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) द्वारा जारी किसी गिरफ्तारी वारंट को स्वयं लागू कर सकता है। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि नगर प्रशासन के पास ऐसा करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय में अंतिम अधिकार संघीय सरकार के पास है।

    हालांकि कानूनी सीमाओं को स्वीकार करने के बावजूद ममदानी ने अपने राजनीतिक रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने दोहराया कि उनकी राय में बेंजामिन नेतन्याहू पर लगे आरोप गंभीर हैं और यदि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका की संघीय सरकार से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाए और संबंधित वारंट के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए।

    ममदानी ने यह भी कहा कि जब सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने की संभावना हो, तब संघीय प्रशासन को आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के साथ सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। हालांकि अमेरिका वर्तमान में आईसीसी का सदस्य नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर कानूनी और कूटनीतिक जटिलताएं बनी हुई हैं।

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा के दौरान किसी प्रकार की गिरफ्तारी नहीं होगी। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिकी भूमि पर रहते हुए इजरायली प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उनके इस बयान के बाद ममदानी की नई टिप्पणी को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ममदानी ने यह भी दोहराया कि वह नेतन्याहू की नीतियों के आलोचक बने हुए हैं और उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आईसीसी ने आरोप तय किए हैं तो न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क ऐसे किसी व्यक्ति का स्वागत नहीं करता जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा हो।

    दूसरी ओर, नेतन्याहू के कार्यालय ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इजरायल की ओर से कहा गया कि आईसीसी का इजरायली नागरिकों या अमेरिकी नागरिकों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और उसके निर्णयों को स्वीकार नहीं किया जाता। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय न्याय, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्थानीय प्रशासन के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • हरारे में वापसी को तैयार वैभव सूर्यवंशी, कहा- प्रक्रिया पर भरोसा है, बड़ी पारी खेलने की कोशिश करूंगा

    हरारे में वापसी को तैयार वैभव सूर्यवंशी, कहा- प्रक्रिया पर भरोसा है, बड़ी पारी खेलने की कोशिश करूंगा


    नई दिल्ली ।  भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से हरारे में शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन और तैयारी को लेकर भरोसा जताया है। इंग्लैंड के खिलाफ हालिया टी20 सीरीज में लगातार तीन मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के बावजूद वैभव ने कहा कि क्रिकेट में फॉर्म का ऊपर-नीचे होना सामान्य बात है और उनका पूरा ध्यान प्रक्रिया पर कायम रहने तथा टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है।

    बीसीसीआई टीवी से बातचीत में वैभव ने कहा कि पिछले चार महीनों में उनके क्रिकेट करियर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन यही खेल की प्रकृति है। उन्होंने कहा कि वह अपनी तैयारियों पर पूरा भरोसा रखते हैं और कोचिंग स्टाफ से उन्हें लगातार सही मार्गदर्शन और अभ्यास का पूरा सहयोग मिल रहा है। इससे उनका आत्मविश्वास मजबूत हुआ है।

    वैभव ने हरारे स्पोर्ट्स क्लब को अपने करियर का बेहद खास मैदान बताया। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले इसी मैदान पर भारत ने अंडर-19 विश्व कप का फाइनल जीता था, जो उनके जीवन का अविस्मरणीय पल है। उसी मैदान पर फिर से भारत की सीनियर टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलना उनके लिए गर्व की बात है।

    युवा बल्लेबाज ने कहा कि हरारे की पिच और परिस्थितियों की उन्हें अच्छी समझ है, क्योंकि अंडर-19 विश्व कप के दौरान यहां कई मुकाबले खेल चुके हैं। उनका मानना है कि उस टूर्नामेंट से मिले अनुभव का फायदा अब इस टी20 सीरीज में मिलेगा और वह उसी आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेंगे।

    उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान जिस तरह की तैयारी की है, उसी पर भरोसा रखते हुए अपने स्वाभाविक खेल को जारी रखेंगे। उनका लक्ष्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान देना है। वैभव ने उम्मीद जताई कि हरारे में उनका पिछला शानदार प्रदर्शन इस बार भी उन्हें बड़ी पारी खेलने का आत्मविश्वास देगा।

    गौरतलब है कि अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें एक बार फिर हरारे में उनकी बल्लेबाजी पर टिकी होंगी।