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  • गरबा से पहले भोपाल में नई गाइडलाइन की मांग वराह पूजन और पंचगव्य के बाद प्रवेश को लेकर समिति का बड़ा ऐलान

    गरबा से पहले भोपाल में नई गाइडलाइन की मांग वराह पूजन और पंचगव्य के बाद प्रवेश को लेकर समिति का बड़ा ऐलान


    भोपाल । भोपाल में नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों को लेकर हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने आयोजकों से धार्मिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शहर में जहां भी गरबा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं वहां मां दुर्गा की प्रतिमा विधिवत स्थापित की जानी चाहिए और प्रतिदिन पूजा अर्चना के साथ सुबह और शाम आरती होनी चाहिए। उनका कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं बल्कि मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा धार्मिक पर्व है इसलिए आयोजकों को इसकी परंपराओं और मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    समिति की ओर से कहा गया है कि गरबा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा को प्रमुख स्थान दिया जाए। आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों के साथ गरबा कराया जाए ताकि आयोजन का धार्मिक स्वरूप बना रहे। समिति ने आयोजकों से कार्यक्रमों में अश्लीलता या ऐसे किसी भी प्रकार के प्रदर्शन से बचने की अपील की है जिससे धार्मिक आयोजन की मर्यादा प्रभावित हो।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने गरबा पंडालों के प्रवेश को लेकर भी एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि पंडाल के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित की जाए। उनके मुताबिक प्रवेश से पहले वराह भगवान का पूजन कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही पंचगव्य ग्रहण कराने की बात भी कही गई है। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गरबा आयोजन को धार्मिक परंपराओं से जोड़ना और उसकी पवित्रता बनाए रखना है।

    तिवारी ने बताया कि पंचगव्य में गाय का दूध दही घी गोबर और गोमूत्र शामिल होता है। उन्होंने दावा किया कि पंचगव्य ग्रहण करने से शुद्धिकरण होता है और इसके जरिए गरबा स्थल पर विधर्मियों के प्रवेश को रोका जा सकेगा। यह बयान सामने आने के बाद गरबा आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था और आयोजन के स्वरूप को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    समिति ने गरबा आयोजकों से अपील की है कि वे नवरात्रि के दौरान होने वाले कार्यक्रमों को धार्मिक और पारंपरिक तरीके से आयोजित करें। आयोजकों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने नियमित आरती कराने और धार्मिक गीतों के साथ गरबा आयोजित करने पर जोर दिया गया है। समिति की ओर से यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम के दौरान ऐसी गतिविधियों से बचा जाए जो धार्मिक भावनाओं या आयोजन की मर्यादा के विपरीत हों।

    चंद्रशेखर तिवारी ने यह भी कहा कि यदि आयोजक इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो समिति को कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। नवरात्रि नजदीक आने के साथ ही भोपाल में गरबा आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं और ऐसे में समिति की इस अपील के बाद आयोजकों की व्यवस्थाओं पर नजर रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि गरबा आयोजक इन सुझावों को किस तरह अपनाते हैं और आगामी नवरात्रि में शहर के गरबा पंडालों में धार्मिक परंपराओं और आयोजन व्यवस्था का स्वरूप कैसा रहता है।

  • अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी

    अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी


    भोपाल । भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में रियल एस्टेट कारोबारी के घर के बाहर फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जमीन और कथित अवैध प्लॉटिंग से जुड़े विवाद में पहले कारोबारी को फोन पर धमकियां मिलने का दावा किया गया और इसके बाद देर रात उनके घर के बाहर गोलियां चलाने की घटना सामने आई। अब फरियादी पक्ष की ओर से जारी किए गए छह कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। इन ऑडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर कारोबारी को गाली गलौज करते हुए भोपाल में काम नहीं करने की धमकी देता सुनाई दे रहा है। वह खुद को मुरैना निवासी सौरभ चौहान बताता है और ग्वालियर से जमीन का काम करने की बात कहता है। हालांकि इन ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मामला 60 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी संतोष सिंह तोमर से जुड़ा है। फरियादी के अनुसार गोरेगांव में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर शिकायत करने के बाद उनका कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच उन्हें कथित तौर पर फोन पर धमकियां दी गईं। इसके बाद 10 सितंबर की दरमियानी रात करीब ढाई बजे एक SUV में आधा दर्जन से ज्यादा लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि घर के गेट के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई और जान से मारने की धमकी देकर आरोपी मौके से फरार हो गए।

    फरियादी पक्ष का दावा है कि फायरिंग की घटना अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पहले से ही धमकियों का सिलसिला चल रहा था। जारी किए गए छह ऑडियो में कथित तौर पर जमीन विवाद को लेकर बातचीत और धमकी जैसी बातें सामने आती हैं। एक ऑडियो में खुद को सौरभ चौहान बताने वाला व्यक्ति कारोबारी को चुनौती देता सुनाई देता है। बातचीत में वह भोपाल में काम नहीं करने की बात कहता है। हालांकि पुलिस जांच में इन ऑडियो की वास्तविकता और कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि होना बाकी है।

    फायरिंग के बाद पुलिस को रात करीब 2 बजकर 55 मिनट पर डायल 112 के जरिए सूचना दी गई। इसके करीब आधे घंटे बाद फरियादी पक्ष रातीबड़ थाने पहुंच गया। इसके बावजूद FIR अगले दिन 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दर्ज होने की बात सामने आई है। FIR में फिलहाल किसी आरोपी को नामजद नहीं किया गया है। पुलिस ने मामले में उस SUV के नंबर MP 13 ZD 5656 का उल्लेख किया है जिससे आरोपी मौके पर पहुंचे थे।

    फरियादी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। कारोबारी ने गांव में रहने वाले लखन मारण पर भी संदेह जताया है। पुलिस अब जमीन विवाद से लेकर धमकी वाले कथित ऑडियो और फायरिंग तक की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि फायरिंग से पहले किन लोगों ने फरियादी से संपर्क किया था और वारदात के बाद किन नंबरों से उन्हें धमकी या दबाव देने की कोशिश की गई।

    इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। क्या फायरिंग जमीन विवाद के चलते हुई थी। कथित ऑडियो में आवाज किस व्यक्ति की है। SUV से मौके पर कौन लोग पहुंचे थे और फायरिंग में कितने हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल धमकी के कथित ऑडियो और घर के बाहर हुई फायरिंग ने भोपाल के इस जमीन विवाद को गंभीर बना दिया है और पुलिस की जांच अब घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने पर केंद्रित है।

  • स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा

    स्वाइन फ्लू को लेकर भोपाल में अलर्ट पहली मौत के बाद बढ़ी चिंता जानिए किन मरीजों को सबसे ज्यादा खतरा


    भोपाल । भोपाल में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल राजधानी में स्वाइन फ्लू से पहली मौत सामने आई है। एक निजी अस्पताल में भर्ती 80 वर्षीय राम सिंह की गंभीर सांस संबंधी बीमारी के चलते मौत हो गई। वे पहले से ही हृदय रोग हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। डॉक्टरों के मुताबिक उम्र के साथ पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण ऐसे मरीजों में फ्लू का संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

    भोपाल में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 65 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से 45 मरीज पिछले 12 दिनों के दौरान मिले हैं। यानी कुल मामलों का करीब 70 फीसदी हिस्सा बेहद कम समय में सामने आया है। मौसम में बदलाव नमी और ठंडक के बीच सर्दी खांसी बुखार और सांस से जुड़ी परेशानियों वाले मरीजों की संख्या भी अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ रही है। ऐसे में वायरल रेस्पिरेटरी संक्रमण को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।

    फिलहाल भोपाल में एच1एन1 की जांच सिर्फ एम्स में हो रही है। गांधी मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच की सुविधा अभी शुरू नहीं हुई है। स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच गंभीर लक्षण वाले मरीजों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक गंभीर लक्षण वाले 232 मरीजों की जांच की जा चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि हर सर्दी खांसी या बुखार वाले मरीज को एच1एन1 की जांच कराने की जरूरत नहीं होती। मरीज की उम्र उसकी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं।

    गांधी मेडिकल कॉलेज में आरआईआरडी के अधीक्षक और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. लोकेंद्र दवे के अनुसार मौसम में बदलाव और नमी के कारण वायरल रेस्पिरेटरी बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। एच1एन1 भी इसी तरह के संक्रमण का एक कारण है। हालांकि मौजूदा स्थिति को महामारी जैसी स्थिति नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञ के मुताबिक इंफ्लूएंजा के करीब 95 फीसदी मामले बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो जाते हैं।

    फिर भी बुजुर्गों और हृदय रोग डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है। सांस लेने में परेशानी ऑक्सीजन का स्तर कम होना या लक्षणों का तेजी से बढ़ना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी वाले गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर आईसीयू सपोर्ट की जरूरत भी पड़ सकती है।

    स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को खुद को अन्य लोगों से अलग रखना चाहिए। पर्याप्त आराम करने के साथ तरल पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। मास्क लगाने और हाथों को नियमित रूप से साफ रखने से संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है। सर्दी खांसी या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा लेना उचित नहीं है। एंटीवायरल दवा डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए और निर्धारित दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है।

    एच1एन1 से बचाव के लिए इंफ्लूएंजा वैक्सीन भी उपलब्ध है। विशेषज्ञों के अनुसार हाई रिस्क वाले लोग डॉक्टर की सलाह से वैक्सीन लगवा सकते हैं। इसका सुरक्षा प्रभाव करीब 60 से 70 फीसदी तक बताया जाता है। एग एलर्जी वाले लोगों को वैक्सीन लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। राजधानी में तेजी से सामने आ रहे मामलों को देखते हुए खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

  • हनुमान अंश को 100 करोड़ की OTT डील मिलने की खबर पर आया बड़ा अपडेट प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने बताया पूरा सच

    हनुमान अंश को 100 करोड़ की OTT डील मिलने की खबर पर आया बड़ा अपडेट प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने बताया पूरा सच


    नई दिल्ली। फिल्म हनुमान अंश इन दिनों सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को दर्शकों के साथ ही क्रिटिक्स की तरफ से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी बीच फिल्म की OTT डील को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। दावा किया जा रहा था कि हनुमान अंश को OTT प्लेटफॉर्म की तरफ से 100 करोड़ रुपये की डील का ऑफर मिला है। अब फिल्म की प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने इस खबर की सच्चाई सामने रख दी है।

    रागिनी सोना ने NDTV से बातचीत में 100 करोड़ रुपये की OTT डील की खबर को पूरी तरह अफवाह बताया है। उन्होंने साफ किया कि फिल्म की टीम को ऐसा कोई ऑफर नहीं मिला है। प्रोड्यूसर के मुताबिक फिलहाल टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ज्यादा से ज्यादा दर्शक फिल्म को सिनेमाघरों में जाकर देखें और इसे अपना प्यार दें। उन्होंने कहा कि इस समय किसी ऑफर या रकम से ज्यादा मायने दर्शकों का प्यार रखता है।

    प्रोड्यूसर ने यह भी कहा कि फिल्म को मिल रही सफलता में दर्शकों की बड़ी भूमिका है। उनका मानना है कि जिस तरह लोग खुद फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं और इसे दूसरे लोगों तक पहुंचा रहे हैं वह अपने आप में खास बात है। रागिनी सोना ने इसे नीम करोली बाबा का चमत्कार भी बताया। उनके मुताबिक दर्शक ही फिल्म का प्रचार कर रहे हैं और ऐसा अनुभव उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।

    रागिनी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म की टीम को किसी भी OTT प्लेटफॉर्म से 100 करोड़ रुपये का ऑफर नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि फिल्म से जुड़े फैसले टीम के साथ चर्चा के बाद ही लिए जाएंगे। अगर भविष्य में OTT को लेकर कोई बड़ा फैसला होता है तो इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाएगी। फिलहाल फिल्म की टीम को खुद यह जानकारी नहीं है कि हनुमान अंश OTT पर कब रिलीज होगी।

    दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की OTT यात्रा को लेकर पहले भी एक जानकारी सामने आ चुकी है। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया था कि एक OTT प्लेटफॉर्म ने उनकी फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया था। इसके बाद टीम ने फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला किया। थिएटर में रिलीज के बाद फिल्म को जिस तरह का रिस्पॉन्स मिला उसने पूरी तस्वीर बदल दी।

    निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म लिखने के अपने तरीके को लेकर भी दिलचस्प जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि कहानी लिखते समय उन्होंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे। उन्होंने पूरी फिल्म की कहानी पेन और पेपर पर लिखी थी। इसके बाद अपने असिस्टेंट की मदद से इसे डिजिटल रूप दिया गया। उन्होंने यह भी बताया था कि फिल्म का ओपनिंग सीन लिखने में उन्हें करीब 45 दिन लगे क्योंकि उनके लिए फिल्म की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण थी।

    अब 100 करोड़ रुपये की OTT डील की खबर पर प्रोड्यूसर के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऐसी किसी डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिल्म की टीम का पूरा ध्यान अभी सिनेमाघरों में मिल रहे दर्शकों के प्यार पर है। OTT रिलीज को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने आने तक 100 करोड़ रुपये की डील वाली खबर को महज अफवाह ही माना जा रहा है।

  • बारिश के बाद और भी हसीन हो जाती हैं ये 7 जगहें सितंबर ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

    बारिश के बाद और भी हसीन हो जाती हैं ये 7 जगहें सितंबर ट्रिप के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। सितंबर का महीना घूमने के शौकीन लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है। मानसून की बारिश के बाद देश के कई हिस्सों में पहाड़ हरियाली से ढक जाते हैं और झरने पूरी रफ्तार से बहने लगते हैं। कई जगहों पर मौसम भी सुहावना हो जाता है और गर्मी से राहत मिलती है। ऐसे में अगर आप सितंबर में किसी खूबसूरत जगह की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो भारत में कई ऐसे डेस्टिनेशन हैं जहां प्रकृति का अलग ही रूप देखने को मिलता है। कूर्ग से लेकर मुन्नार और उदयपुर से लेकर श्रीनगर तक ये जगहें बारिश के बाद और भी आकर्षक नजर आती हैं।

    कर्नाटक का कूर्ग और चिकमगलूर सितंबर की यात्रा के लिए शानदार विकल्प हैं। बारिश के बाद यहां की पहाड़ियां गहरी हरियाली से भर जाती हैं और कॉफी के बागानों का नजारा मन मोह लेता है। कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। यहां झरने पहाड़ी रास्ते और धुंध से ढकी वादियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। चिकमगलूर भी कॉफी एस्टेट और पश्चिमी घाट की खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। सितंबर में यहां प्रकृति के बीच समय बिताना और फोटोग्राफी करना खास अनुभव हो सकता है।

    केरल का मुन्नार भी सितंबर में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। यहां दूर तक फैले चाय के बागान बारिश के बाद और ज्यादा हरे नजर आते हैं। सुबह के समय पहाड़ियों पर छाई धुंध और बादलों का नजारा इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। अगर आपको शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारों के बीच छुट्टियां बिताना पसंद है तो मुन्नार अच्छा विकल्प हो सकता है।

    उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। पहाड़ों के बीच फैली हरियाली और रंग बिरंगे फूल इस जगह को बेहद खूबसूरत बनाते हैं। ट्रैकिंग पसंद करने वालों के लिए भी यह जगह खास है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना जरूरी है।

    राजस्थान का उदयपुर भी सितंबर में घूमने के लिए अच्छा विकल्प है। बारिश के बाद यहां की झीलों में पानी बढ़ जाता है और आसपास की हरियाली शहर की खूबसूरती को नया रंग देती है। झील के किनारे बैठकर सुकून के पल बिताना या शाम के समय शहर के खूबसूरत नजारों को देखना यात्रा को यादगार बना सकता है।

    कश्मीर का श्रीनगर भी सितंबर में आकर्षित करता है। डल झील में शिकारा की सवारी और चारों तरफ दिखाई देने वाली पहाड़ियों का नजारा यात्रा को खास बना सकता है। मौसम की स्थिति अनुकूल होने पर श्रीनगर में घूमने का अनुभव बेहद शानदार रहता है।

    उत्तराखंड का लैंसडाउन उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो कम समय में पहाड़ों का आनंद लेना चाहते हैं। देवदार के जंगल पहाड़ी रास्ते और शांत वातावरण यहां की खासियत हैं। बारिश के बाद इसकी हरियाली और निखर जाती है। शहर की भागदौड़ से दूर कुछ दिन शांति से बिताने के लिए लैंसडाउन का चुनाव किया जा सकता है।

    सितंबर में यात्रा करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर क्षेत्र में मौसम एक जैसा नहीं रहता। खासकर पहाड़ी इलाकों में बारिश भूस्खलन और सड़क की स्थिति यात्रा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए होटल और यात्रा की बुकिंग से पहले मौसम का ताजा अपडेट और स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर देख लें। सही तैयारी के साथ सितंबर की यह यात्रा आपके लिए प्रकृति के बेहद खूबसूरत रंगों को करीब से देखने का शानदार मौका बन सकती है।

  • तलाक के बाद 10 करोड़ लेने की चर्चा पर आकांक्षा ने दिया करारा जवाब शुगर डैडी के टैग पर भी खुलकर बोलीं

    तलाक के बाद 10 करोड़ लेने की चर्चा पर आकांक्षा ने दिया करारा जवाब शुगर डैडी के टैग पर भी खुलकर बोलीं


    नई दिल्ली। गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला कभी टीवी इंडस्ट्री की चर्चित जोड़ियों में शामिल रहे हैं लेकिन अब दोनों के रिश्ते में दरार की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। दोनों काफी समय से अलग रह रहे हैं और आकांक्षा ने रियलिटी शो द लॉक अप में अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात भी की थी। अब उनके तलाक की प्रक्रिया को लेकर चर्चा के बीच 10 करोड़ रुपये की एलिमनी मांगने की खबर सामने आई थी। इस खबर के बाद आकांक्षा चमोला ने खुद इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    दरअसल कुछ समय पहले ऐसी चर्चा शुरू हुई थी कि तलाक के बाद आकांक्षा गौरव खन्ना से करीब 10 करोड़ रुपये बतौर एलिमनी मांग सकती हैं। इस चर्चा को उस वक्त और हवा मिली जब ओरी ने भी आकांक्षा को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या आकांक्षा तलाक के बदले गौरव से बड़ी रकम लेने वाली हैं। अब आकांक्षा ने इन खबरों को लेकर ऐसा जवाब दिया है जिससे साफ है कि वह खुद को एलिमनी के लिए उत्सुक बताए जाने वाली बात से सहमत नहीं हैं।

    मैशेबल इंडिया के साथ बातचीत में आकांक्षा ने 10 करोड़ रुपये की एलिमनी वाली खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर उन्होंने इतनी रकम मांगी होती और उन्हें मिल भी गई होती तो वह यहां बैठकर बात नहीं कर रही होतीं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वास्तव में उनके पास इतना पैसा होता तो वह कब का देश छोड़कर चली गई होतीं। आकांक्षा की इस प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि वह 10 करोड़ रुपये की एलिमनी से जुड़ी खबर को अफवाह मानती हैं।

    आकांक्षा ने यह भी साफ किया कि वह उन लोगों में से नहीं हैं जो एलिमनी के पीछे भागते हैं। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने अपने और गौरव के बीच उम्र के अंतर को लेकर लगाए जाने वाले शुगर डैडी के टैग पर भी प्रतिक्रिया दी। आकांक्षा ने कहा कि केवल 10 साल बड़ा होने की वजह से किसी व्यक्ति को शुगर डैडी नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक इस तरह के टैग लगाना सही नहीं है।

    आकांक्षा और गौरव ने साल 2016 में शादी की थी। दोनों ने लंबे समय तक रिश्ते में रहने के बाद शादी की थी और उनकी जोड़ी को टीवी जगत में काफी पसंद किया जाता था। हालांकि अब दोनों अलग रह रहे हैं और तलाक की औपचारिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा चल रही है। गौरव ने इस रिश्ते और तलाक को लेकर अभी तक विस्तार से सार्वजनिक रूप से बात नहीं की है। वहीं जब आकांक्षा द लॉक अप में थीं तब गौरव ने उन्हें अपना समर्थन दिया था और शो में भी पहुंचे थे।

    आकांक्षा ने द लॉक अप के दौरान अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए थे। उन्होंने अपनी निजी पसंद और रिश्तों को लेकर भी बात की थी। इस दौरान उनके बयानों पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी और उन्हें ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा था। बच्चों को लेकर भी दोनों की सोच अलग होने की बात सामने आ चुकी है। गौरव ने बिग बॉस में बताया था कि वह बच्चे चाहते थे जबकि आकांक्षा बच्चे नहीं चाहती थीं। आकांक्षा ने तब कहा था कि यह उनका निजी फैसला है और इसके लिए उन्हें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है।

    फिलहाल आकांक्षा अपनी मां के साथ रह रही हैं और आगे अपने काम पर ध्यान देने की योजना बना रही हैं। वह कई टीवी शोज में नजर आ चुकी हैं और द लॉक अप में आने के बाद उनकी निजी जिंदगी एक बार फिर चर्चा में आई। वहीं गौरव खन्ना भी टीवी के जाने पहचाने चेहरों में शामिल हैं। दोनों के रिश्ते को लेकर आगे क्या कानूनी और व्यक्तिगत स्थिति बनती है यह आने वाले समय में साफ होगा लेकिन फिलहाल 10 करोड़ रुपये की एलिमनी को लेकर आकांक्षा का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर कुनिका सदानंद का हमला CINTAA चुनाव के बीच बोलीं कलाकारों के अधिकार सबसे जरूरी

    पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर कुनिका सदानंद का हमला CINTAA चुनाव के बीच बोलीं कलाकारों के अधिकार सबसे जरूरी


    नई दिल्ली। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने संगठन के कामकाज और उसके पदाधिकारियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। CINTAA के चुनावी माहौल के बीच कुनिका ने संगठन में लंबे समय से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए कहा कि किसी भी कलाकार संगठन का सबसे बड़ा उद्देश्य कलाकारों और उनके परिवारों की मदद करना होना चाहिए। उनके मुताबिक संगठन में पद हासिल करना या उस पर बने रहना किसी व्यक्तिगत ताकत का प्रदर्शन नहीं बल्कि कलाकारों की सेवा करने की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    कुनिका सदानंद ने एक बातचीत के दौरान पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के पदों पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाया। जब उनसे पूछा गया कि दोनों ने अब तक अपने पद क्यों नहीं छोड़े हैं तो उन्होंने साफ कहा कि इस सवाल का जवाब उन्हीं दोनों से पूछा जाना चाहिए। कुनिका ने बताया कि वह लंबे समय से CINTAA से जुड़ी रही हैं और पहले समिति का हिस्सा भी रह चुकी हैं। उन्होंने संगठन के पुराने दौर को याद करते हुए बताया कि उस समय कलाकार संगठन से जुड़ने का मतलब कलाकारों की मदद और उनकी सेवा करना माना जाता था।

    हालांकि कुनिका को लगता है कि समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि अब उन्हें यह मामला कुछ अलग नजर आता है और यहां तक कि उन्होंने इसे अहंकार से जोड़कर भी देखा। उनके इस बयान के बाद CINTAA के भीतर चल रही बहस को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि कुनिका ने अपने बयान में किसी तरह के व्यक्तिगत विवाद के बजाय संगठन के उद्देश्य और कलाकारों के हित को केंद्र में रखने की बात कही।

    CINTAA में चल रहे चुनाव को लेकर कुनिका सदानंद का रुख सकारात्मक नजर आया। उन्होंने कहा कि मतदान अच्छा रहा और चुनाव की व्यवस्था भी ठीक रही है। उनके अनुसार यह चुनाव संगठन के लिए एक नई शुरुआत का रास्ता खोल सकता है। उन्हें उम्मीद है कि नई समिति ऐसी होगी जो कलाकारों की वास्तविक परेशानियों को समझेगी और उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी तरीके से काम करेगी।

    कुनिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कलाकार संगठन का काम केवल चुनाव कराने या पदों को लेकर चर्चा तक सीमित नहीं होना चाहिए। कलाकारों की रोजमर्रा की समस्याएं उनकी प्राथमिकता में होनी चाहिए। उन्होंने कलाकारों की सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया। खासतौर पर महिला कलाकारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर उन्होंने गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई।

    इसके साथ ही कुनिका ने कलाकारों के बीच बराबरी और आर्थिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उनका मानना है कि कलाकारों को उनके काम का उचित भुगतान समय पर मिलना चाहिए। कई बार कलाकारों को काम करने के बाद भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में संगठन को इस दिशा में ठोस व्यवस्था बनाने की जरूरत है ताकि कलाकारों को अपने मेहनताने के लिए परेशान न होना पड़े।

    कुनिका ने बताया कि उन्होंने चुनाव में सात उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया है और उनकी प्राथमिकता ऐसे लोगों को आगे लाना है जो कलाकारों के हित में काम कर सकें। उनके बयान से साफ है कि वह CINTAA को केवल एक पद या चुनावी संस्था के रूप में नहीं बल्कि कलाकारों की आवाज और उनके अधिकारों की सुरक्षा करने वाले संगठन के रूप में देखना चाहती हैं। अब चुनाव के बाद बनने वाली नई समिति से कलाकारों को कितनी राहत मिलती है यह आने वाला समय बताएगा।

  • काम की तलाश में निकला था मजदूर जेब खाली थी और लगी थी तेज भूख अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचते ही सुरक्षा जांच में फंसा

    काम की तलाश में निकला था मजदूर जेब खाली थी और लगी थी तेज भूख अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचते ही सुरक्षा जांच में फंसा


    नई दिल्ली। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास शनिवार को उस समय सुरक्षा व्यवस्था में हलचल मच गई जब अन्नपूर्णा मंदिर के अन्न क्षेत्र के पास एक युवक को चाकू के साथ देखा गया। सुरक्षाकर्मियों को युवक की गतिविधियां संदिग्ध लगीं जिसके बाद उसे रोककर पूछताछ शुरू की गई। मामला संवेदनशील क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण पुलिस को सूचना दी गई और कुछ ही देर में कई सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गईं। हालांकि घंटों चली पूछताछ और पड़ताल के बाद जो तस्वीर सामने आई उसने पूरे मामले को एक अलग ही दिशा दे दी।

    पुलिस के मुताबिक युवक की पहचान शाहिद जमाल के रूप में हुई है जो चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। वह मजदूरी करता है और शादी समारोह तथा अन्य आयोजनों में सब्जी और नॉनवेज काटने का काम भी करता है। शनिवार सुबह वह अपने घर से काम की तलाश में पैदल निकला था। काफी देर तक इधर उधर घूमने के बावजूद उसे कोई काम नहीं मिला। जेब में पैसे नहीं थे और कई घंटे बीतने के बाद उसे तेज भूख लगने लगी।

    काम नहीं मिलने और भूख से परेशान युवक ने स्थानीय लोगों से रास्ता पूछा और अन्नपूर्णा मंदिर के अन्न क्षेत्र तक पहुंच गया। उसे उम्मीद थी कि वहां जरूरतमंदों के लिए मिलने वाले निशुल्क भोजन से उसकी भूख मिट जाएगी। लेकिन अन्न क्षेत्र के पास सुरक्षाकर्मियों की नजर उसके पास मौजूद चाकू पर पड़ गई। मंदिर क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद युवक को दशाश्वमेध थाने ले जाया गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने युवक से विस्तार से पूछताछ की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। उसके घर और स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई। उसके निवास क्षेत्र की पुलिस टीम ने परिजनों और गांव के प्रधान से भी पूछताछ की। इतना ही नहीं मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आईबी इंटेलिजेंस एलआईयू एटीएस और सीआरपीएफ की इंटेलिजेंस यूनिट ने भी युवक से पूछताछ की।

    जांच के दौरान युवक के मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली गई। पुलिस ने सीसीटीएनएस और डीसीआरबी के रिकॉर्ड में उसका आपराधिक इतिहास तलाशा। इन सभी स्तरों पर जांच के बाद फिलहाल ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिससे युवक की गतिविधियों को किसी आपराधिक साजिश से जोड़ा जा सके। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं मिला है।

    पूछताछ में चाकू रखने की वजह भी सामने आई। युवक ने बताया कि वह मजदूरी के साथ सब्जी और नॉनवेज काटने का काम करता है और इसी काम के सिलसिले में वह चाकू अपने साथ रखता था। शनिवार को भी वह इसी उम्मीद से घर से निकला था कि कहीं काम मिल जाएगा और कुछ कमाई हो सकेगी। लेकिन कई घंटे तक काम नहीं मिलने के बाद उसकी प्राथमिकता रोजगार से बदलकर भोजन की तलाश तक पहुंच गई।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ मंदिर क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता दिखाई दी तो दूसरी तरफ जांच के बाद युवक की मजबूरी की तस्वीर भी सामने आई। जिस युवक को चाकू के कारण संदिग्ध मानकर रोका गया था वह पूछताछ में एक ऐसा मजदूर निकला जो काम की तलाश में घर से निकला था और भूख लगने पर अन्न क्षेत्र तक पहुंचा था। फिलहाल पुलिस ने मामले में सतर्कता बरकरार रखी है और स्थानीय स्तर पर निगरानी जारी है।

  • लंबा मिर्गी का दौरा रोकने में काम आ सकती है क्लोबाजाम 95 मरीजों पर हुई स्टडी में सामने आए अहम नतीजे

    लंबा मिर्गी का दौरा रोकने में काम आ सकती है क्लोबाजाम 95 मरीजों पर हुई स्टडी में सामने आए अहम नतीजे


    नई दिल्ली। मिर्गी के मरीजों के लिए सामने आई एक नई रिसर्च में लंबे समय तक चलने वाले दौरे को रोकने के लिए मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम को संभावित विकल्प के तौर पर देखा गया है। AIIMS दिल्ली और जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से जुड़े शोधकर्ताओं की स्टडी में क्लोबाजाम की तुलना नाक के जरिए दी जाने वाली मिडाजोलम से की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों दवाओं के बीच लंबे दौरे को रोकने के समय में सांख्यिकीय रूप से कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।

    यह रिसर्च खास तौर पर उन स्थितियों को ध्यान में रखकर की गई जिसमें मिर्गी का दौरा सामान्य अवधि से ज्यादा समय तक जारी रहता है। ऐसे लंबे दौरे में जल्द उपचार जरूरी होता है क्योंकि स्थिति गंभीर हो सकती है। अध्ययन में दो मिनट से ज्यादा समय तक चलने वाले दौरे को रेस्क्यू मेडिसिन देने के लिए आधार बनाया गया। रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम और नाक से दी जाने वाली मिडाजोलम में से कौन सा विकल्प ऐसे दौरे को जल्दी रोकने में प्रभावी है।

    स्टडी में कुल 95 मरीजों को शामिल किया गया। सभी मरीज ड्रग रेसिस्टेंट मिर्गी से जूझ रहे थे और उन्हें AIIMS की Epilepsy Monitoring Unit में भर्ती किया गया था। मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। 47 मरीजों को नाक के जरिए मिडाजोलम दी गई जबकि 48 मरीजों को मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम दी गई। अध्ययन एक सिंगल सेंटर प्रोस्पेक्टिव रैंडमाइज्ड ट्रायल था और मरीजों में लंबे दौरे के दौरान क्लिनिकल और EEG दोनों स्तर पर असर को देखा गया।

    रिसर्च में क्लिनिकल दौरा रोकने का औसत समय मिडाजोलम समूह में करीब 20.5 सेकंड रहा जबकि क्लोबाजाम समूह में यह करीब 42 सेकंड था। EEG के जरिए दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में दौरा रुकने का औसत समय मिडाजोलम समूह में करीब 46 सेकंड और क्लोबाजाम समूह में करीब 54 सेकंड रहा। हालांकि इन अंतर को सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं पाया गया। इसका मतलब यह है कि इस अध्ययन के आधार पर क्लोबाजाम को मिडाजोलम से स्पष्ट रूप से बेहतर या खराब नहीं माना जा सकता।

    इस रिसर्च की एक अहम बात यह भी है कि क्लोबाजाम को मुंह में घुलने वाले रूप में दिया गया। दौरे के दौरान मरीज को सामान्य गोली निगलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में मुंह में घुलने वाला फॉर्म दवा देने का व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। वहीं नाक से दी जाने वाली मिडाजोलम भी रेस्क्यू मेडिसिन के तौर पर इस्तेमाल की जाती है लेकिन इसकी उपलब्धता और इस्तेमाल से जुड़ी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने क्लोबाजाम को सुविधाजनक और संभावित रूप से कम लागत वाले विकल्प के तौर पर आगे अध्ययन किए जाने की जरूरत बताई है।

    अध्ययन में दोनों समूहों में गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाए गए और उपचार विफल होने या दौरे के दोबारा आने की महत्वपूर्ण समस्या भी दर्ज नहीं हुई। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक सीमित मरीजों वाली सिंगल सेंटर स्टडी थी। इसलिए इसके आधार पर हर मरीज के लिए क्लोबाजाम को मिडाजोलम की जगह इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जा सकती।

    रिसर्च का महत्व इस बात में है कि लंबे दौरे के दौरान आसानी से दी जा सकने वाली रेस्क्यू मेडिसिन के विकल्पों पर काम आगे बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार मुंह में घुलने वाली क्लोबाजाम को लेकर बड़े और अलग-अलग परिस्थितियों में किए गए अध्ययनों की जरूरत है। मरीजों और परिवारों को किसी भी रेस्क्यू दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित योजना के अनुसार ही करना चाहिए। मिर्गी के लंबे या लगातार दौरे की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।