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  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि

    'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड के युवा स्पिनर जयडेन लेनोक्स ने अपनी शानदार गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया। हालांकि सीरीज का अंतिम मुकाबला न्यूजीलैंड हार गया, लेकिन टीम ने 3-2 से सीरीज अपने नाम की। इस सफलता में लेनोक्स की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पूरी सीरीज में 14 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार अपने नाम किया।

    लेनोक्स की फिरकी के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पूरी श्रृंखला में संघर्ष करते नजर आए। पांच मुकाबलों में 14 विकेट लेने के साथ उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। वह अब एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले स्पिनरों की सूची में पूर्व दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले, शेन वॉर्न और शाहिद अफरीदी से आगे निकल गए हैं। इन तीनों महान स्पिनरों ने अपने-अपने करियर में किसी एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 13-13 विकेट लिए थे, जबकि लेनोक्स ने 14 विकेट लेकर यह आंकड़ा पार कर दिया।

    इस प्रदर्शन के साथ लेनोक्स ने श्रीलंका के स्पिनर अकिला धनंजय की भी बराबरी कर ली है। धनंजय ने वर्ष 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 14 विकेट हासिल किए थे। अब दोनों संयुक्त रूप से इस सूची में बराबरी पर हैं।

    एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भारत के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा के नाम दर्ज है, जिन्होंने एक श्रृंखला में 18 विकेट झटके थे। इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने एक वनडे सीरीज में 17 विकेट लेने का कारनामा किया था।

    सीरीज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में भी लेनोक्स ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 9 ओवर में केवल 35 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए और न्यूजीलैंड को मुकाबले में बनाए रखा। हालांकि वेस्टइंडीज ने शिमरॉन हेटमायर की नाबाद 69 रन और शेरफेन रदरफोर्ड की 61 रन की बेहतरीन पारियों की बदौलत 269 रन का लक्ष्य 47.3 ओवर में हासिल कर लिया।

    लेनोक्स के लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि न्यूजीलैंड को सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक भरोसेमंद स्पिनर मिल गया है। उनकी नियंत्रण भरी गेंदबाजी और विकेट निकालने की क्षमता भविष्य में टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत घरेलू सर्राफा बाजार के लिए तेज़ी भरी रही। सोने और चांदी की कीमतों में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,43,404 तक पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव बढ़कर ₹2,23,000 प्रति किलोग्राम हो गया। कीमतों में आई इस तेजी का असर देश के प्रमुख शहरों के खुदरा बाजारों में भी देखने को मिला, जहां सोना पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहा है।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने में ₹1,150 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की कीमत ₹3,159 प्रति किलोग्राम बढ़ने के बाद नए स्तर पर पहुंच गई। विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में भी समान रूप से तेजी देखने को मिली। 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज होने से आभूषण बाजार और निवेशकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,370 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत ₹1,44,220 रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना ₹1,44,270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में कीमतों का यह अंतर स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और व्यावसायिक लागत पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में सोने की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका पहला कारण परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने में आने वाला खर्च अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों में बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन क्षेत्रों में सोने की खरीद अधिक होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार दरों में अंतर देखने को मिल सकता है।

    स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी अपने-अपने क्षेत्रों की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दरें निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही ज्वेलर्स द्वारा पहले खरीदे गए स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराना स्टॉक अधिक कीमत पर खरीदा गया है तो उसका प्रभाव खुदरा बाजार की कीमतों पर भी दिखाई देता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्क प्रमाणित ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए ताकि शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न आधिकारिक बाजार दरों का मिलान करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में स्पष्ट अंतर होता है।

    बुलियन बाजार में आई इस नई तेजी ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। आगामी दिनों में वैश्विक बाजार के रुझान, घरेलू मांग और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों और ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा दरों की जानकारी लेकर ही निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।

  • शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 600 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंचकर कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी करीब 24 हजार के स्तर के आसपास फिसल गया। लगातार दूसरे दिन आई इस कमजोरी ने बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस स्थिति का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉरपोरेट लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब विदेशी निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है। रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताओं को बढ़ाया है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो शुरुआती कारोबार में एविएशन और फार्मा क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों में मुनाफावसूली के कारण भी बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। एशियाई बाजारों में कुछ प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, जबकि कुछ अन्य बाजारों में कमजोरी बनी रही। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, ऊर्जा बाजार और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका असर आने वाले दिनों में भी बाजार की चाल तय कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और आगामी आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और संतुलित निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।

  • कन्नौद के चपलासा गांव में दिल दहला देने वाली वारदात, संपत्ति विवाद में बेटे ने की पिता की हत्या

    कन्नौद के चपलासा गांव में दिल दहला देने वाली वारदात, संपत्ति विवाद में बेटे ने की पिता की हत्या


    देवास । मध्य प्रदेश के देवास जिले के कन्नौद थाना क्षेत्र स्थित चपलासा गांव में पारिवारिक संपत्ति विवाद ने एक दर्दनाक मोड़ ले लिया। मंगलवार को कथित रूप से एक बेटे ने अपने ही पिता की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार घटना की जानकारी डायल 112 के माध्यम से मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम गांव पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मृतक की पहचान माधवपुरी गोस्वामी के रूप में हुई है, जबकि हत्या के आरोप में उनके पुत्र जगदीशपुरी गोस्वामी को हिरासत में लिया गया है।

    फरियादी आशीष गोस्वामी ने पुलिस को बताया कि करीब आठ वर्ष पहले माधवपुरी गोस्वामी ने अपनी संपत्ति तीनों पुत्रों में बराबर बांट दी थी। आशीष के अनुसार उसके पिता और छोटे चाचा का पहले ही निधन हो चुका है, जबकि बीच वाले चाचा जगदीशपुरी अपने पिता के साथ रहते थे। परिवार का आरोप है कि जगदीशपुरी शराब का आदी था और किसी प्रकार का रोजगार नहीं करता था।

    घटना के समय जगदीशपुरी के पुत्र पवनपुरी ने आशीष को फोन कर बताया कि उसके पिता और दादाजी के बीच विवाद हो रहा है। सूचना मिलते ही आशीष अपनी पत्नी अर्चना के साथ मौके पर पहुंचा। वहां पहुंचने पर उसने कथित रूप से देखा कि जगदीशपुरी अपने पिता पर चाकू या उस्तरे जैसे धारदार हथियार से हमला कर रहा था। दोनों को आते देख आरोपी हथियार लेकर मौके से फरार हो गया।

    जब आशीष और उसकी पत्नी घर के अंदर पहुंचे तो माधवपुरी गोस्वामी खाट पर लहूलुहान अवस्था में पड़े मिले। उनके गले पर गहरा घाव था और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और हत्या में प्रयुक्त हथियार सहित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    संसद परिसर में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता काले वस्त्रों में पहुंचे, छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों के विरोध प्रदर्शन और विपक्षी नेताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद परिसर पहुंचे और केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है तथा सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इस विरोध को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया।

    विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि देशभर के छात्र अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी चिंताओं का समाधान निकालने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताते हुए सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की।

    प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि छात्र अपने भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत, शिक्षा और भविष्य किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्रों की बात को लगातार नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे शिक्षा व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार असहमति की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए, न कि कठोर कार्रवाई से। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे।

    कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के. सुरेश ने कहा कि काले वस्त्र पहनकर किया गया प्रदर्शन केवल छात्रों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध का भी प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इसी कारण कांग्रेस ने इस विरोध को प्रतीकात्मक रूप से ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

    कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए और शिक्षा से जुड़े गंभीर सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए राजनीतिक जवाबदेही की आवश्यकता पर बल दिया।

    इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना सरकार का दायित्व है और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

  • उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती, राजा स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन

    उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक भस्म आरती, राजा स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन


    नई दिल्ली । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और मनोहारी श्रृंगार किया गया। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में पहुंच गए थे।

    आरती की शुरुआत सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम और स्वस्ति वाचन से हुई। इसके बाद परंपरा के अनुसार आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला गया और गर्भगृह के पट खोले गए। पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत पंचामृत पूजन किया तथा कर्पूर आरती अर्पित की।

    पूजन के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात भगवान का भांग, चंदन, सिंदूर और आकर्षक आभूषणों से राजा स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार किया गया। दिव्य स्वरूप के दर्शन करते ही पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

    श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाएं धारण कराई गईं। साथ ही ड्रायफ्रूट, ताजे फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। नंदी हाल में भी नंदी महाराज का स्नान, पूजन और ध्यान संपन्न कराया गया।

    इसके बाद ज्योतिर्लिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई। परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए और सुख, समृद्धि तथा कल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में पूरी व्यवस्था सुचारु रही और श्रद्धालुओं ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आरती का आनंद लिया।

  • राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध

    राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में देवास में कांग्रेस का प्रदर्शन, पोस्टर जलाकर जताया विरोध


    देवास । नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में मध्य प्रदेश के देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। मंगलवार रात आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, रैली निकाली और पोस्टर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

    प्रदर्शन की शुरुआत रात करीब साढ़े नौ बजे शहर के मंडूक पुष्कर तालाब क्षेत्र से हुई। यहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन के बाद विरोध मार्च निकाला। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सयाजी द्वार पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के नेताओं के पोस्टर जलाकर अपना विरोध जताया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि नीट पेपर लीक जैसे संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

    कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

    प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं ने छात्रों के हितों की रक्षा और पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई। पूरे प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई।

    इस विरोध कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

    लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

    सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

    नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

  • इंदौर में सड़क हादसे ने ली किसान की जान, इलाज के दौरान तोड़ा दम; आरोपी वाहन चालक की तलाश

    इंदौर में सड़क हादसे ने ली किसान की जान, इलाज के दौरान तोड़ा दम; आरोपी वाहन चालक की तलाश


    इंदौर। इंदौर के रीगल ब्रिज पर मंगलवार शाम हुए एक सड़क हादसे में 48 वर्षीय किसान की मौत हो गई। वह कोर्ट में पेशी पूरी करने के बाद पैदल बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल किसान को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां देर रात उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है।

    छोटी ग्वालटोली थाना पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान खुडेल क्षेत्र के काजी पलासिया निवासी इलियास पुत्र अब्दुल रज्जाक के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा मंगलवार शाम रीगल ब्रिज पर हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इलियास सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। कुछ समय तक घायल सड़क पर ही पड़े रहे। बाद में राहगीरों ने उन्हें देखा और तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन देर रात उनकी मौत हो गई।

    अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद पता चला कि इलियास किसी न्यायिक मामले में पेशी के लिए इंदौर आए थे। अदालत का काम पूरा होने के बाद वह पैदल बस स्टैंड की ओर जा रहे थे ताकि अपने गांव लौट सकें। इसी दौरान यह हादसा हो गया।

    परिजनों ने बताया कि इलियास खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके परिवार में एक बेटा, छह बेटियां और पांच भाई हैं। उनकी असमय मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

    पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि वाहन और उसके चालक की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।