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  • Zomato: ग्राहकों को कैश भुगतान पर चुकाना होगा 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क

    Zomato: ग्राहकों को कैश भुगतान पर चुकाना होगा 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क


    नई दिल्ली।
    फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Food delivery platform Zomato) ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (Cash on Delivery) यानी डिलीवरी के वक्त नकद भुगतान विकल्प चुनने पर ग्राहकों से पांच से 20 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लेगी। यह नया शुल्क एप के बिल विवरण में ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ (‘Pay on Delivery Fee’) के नाम से अलग से जोड़ा गया है। हालांकि, जो उपभोक्ता यूपीआई व अन्य तरीके से ऑनलाइन भुगतान करेंगे उन पर यह अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।

    जोमैटो ने बताया कि उसके बिल में अब पे ऑन डिलीवरी फीस नाम से एक अलग चार्ज दिखाई देगा। यह शुल्क उन ग्राहकों पर लागू होता है, जो ‘कैश ऑन डिलीवरी’ यानी फूड सप्लाई के समय भुगतान करने का विकल्प चुनते हैं। यह शुल्क सभी ऑर्डर के लिए समान नहीं है। अलग-अलग यूजर्स और ऑर्डर की राशि के आधार पर यह फीस भी अलग दिखाई देगी। कंपनी ने अभी तक फीस तय करने का कोई सटीक फॉर्मूला नहीं बताया है। फिलहाल यह फीस ऑर्डर की राशि, ग्राहक के स्थान या किसी अन्य मानदंड से जुड़ा है।

    एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फीस को तय करने का सटीक आधार क्या है और क्या यह ऑर्डर की वैल्यू, लोकेशन या दूसरे पैरामीटर्स जैसे फैक्टर्स से जुड़ा है, इसका तुरंत पता नहीं चल सका। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर और मॉनेटाइजेशन मॉडल्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

    कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर नई फीस के अलावा, जोमैटो प्लेटफॉर्म पहले से ही फूड ऑर्डर्स पर प्लेटफॉर्म फीस वसूलता है। इसके साथ ही ऑर्डर के आधार पर डिलीवरी, पैकेजिंग और अन्य चार्ज भी लागू होते हैं। जोमैटो की कॉम्पिटीटर स्विगी अभी कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर कोई अलग फीस नहीं ले रही है।

  • सऊदी अरब ने बढ़ाई ने टेंशन… ड्रोन हमले के बाद तेल पाइपलाइन को किया अस्थायी रूप से बंद

    सऊदी अरब ने बढ़ाई ने टेंशन… ड्रोन हमले के बाद तेल पाइपलाइन को किया अस्थायी रूप से बंद


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने शुक्रवार को ड्रोन हमले के बाद अपनी महत्वपूर्ण पूर्वी-पश्चिमी तेल पाइपलाइन (East-West Oil Pipeline) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इस दौरान, ईरान (Iran) समर्थित यमन के हूती लड़ाकों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक रणनीतिक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले से ही चल रहे क्षेत्रीय युद्ध में एक और मोर्चा खुल गया है। इस्लामी मिलिशिया ने बाब अल-मंदेब के नौवहन मार्ग के आसपास वर्षों में अपनी सबसे बड़ी क्षेत्रीय बढ़त हासिल कर ली है। हूतियों की यह बढ़त वैश्विक तेल और गैस की कीमतों को और बढ़ाने के ईरान के प्रयासों को मजबूत कर सकती है। इससे अमेरिका पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को बल मिल सकता है।


    1,200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन

    सऊदी अरब ने कहा कि उसने पिछले दिन हुए ड्रोन हमले के बाद अरब प्रायद्वीप के आर-पार फैली 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन को बंद कर दिया है। सऊदी अरब ने इस फैसले को एहतियाती कदम बताया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए इराक से उड़ाए गए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हमले में लोग घायल हुए हैं। सरकारी सऊदी प्रेस एजेंसी में जारी बयान में सऊदी अरब ने कहा कि वह तत्काल जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, ताकि इराकी सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अवसर दिया जा सके। सऊदी अरब ने हालांकि कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा, प्रतिष्ठानों और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।


    इराक सरकार ने की निंदा

    इराक सरकार ने हूतियों के हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि हमले में इस्तेमाल किये गये ड्रोन वास्तव में इराक के थे, एक सैन्य कमांडर को औपचारिक रूप से पद से हटा दिया गया है। बाद में इराक के सूत्रों ने बताया कि ईराक ने एहतियाती कदम के तौर पर ईरान के साथ शलमचेह सीमा चौकी को बंद करने का आदेश दिया है और हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की तलाश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। सऊदी अरब और अमेरिका ने जुलाई में इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त रूप से बमबारी की थी। दोनों देशों ने इन मिलिशिया पर सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था, जिनकी जिम्मेदारी हूतियों ने ली थी।


    बेहद महत्वपूर्ण है यह पाइपलाइन

    गौरतलब है कि 1980 के दशक में निर्मित पूर्वी-पश्चिमी पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। यह पाइपलाइन उस समय से सऊदी तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है, जब युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल परिवहन को बाधित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, जून की शुरुआत तक सऊदी अरब ने कथित तौर पर पाइपलाइन के पश्चिमी छोर पर स्थित लाल सागर के बंदरगाह के जरिए कच्चे तेल का निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ाकर प्रतिदिन 50 लाख बैरल से अधिक कर दिया था। बाब अल-मंदेब में स्थित छोटे और बंजर ज्वालामुखीय द्वीप मायून, जिसे पेरिम के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन हूतियों के कब्जे की पुष्टि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एक हूती अधिकारी ने की है।


    लाल सागर पर निर्भर है सऊदी अरब

    दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब, ईरान द्वारा होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाये जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए लाल सागर पर अधिक निर्भर हो गया है। करीब 28 किलोमीटर चौड़े बाब अल-मंदेब को बंद करने के हूतियों के प्रयासों ने इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना भी लगातार मुश्किल बना दिया है। हूती सशस्त्र बलों ने शुक्रवार को जारी एक बयान में तटीय क्षेत्र में अपनी और बढ़त का दावा किया, हालांकि इसमें मायून, बंदरगाह शहर मोखा या बाब अल-मंदेब का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया। समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ जैसी बढ़ोतरी, वैसी बढ़ोतरी की नीति अपनाने का संकल्प जताया और कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर सभी कंपनियों के लिए समुद्री नौवहन सुरक्षित है।


    तेल बाजार में चिंता

    इन घटनाक्रमों से तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमत फिर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गयी, जिससे भविष्य में वाशिंगटन के साथ किसी भी बातचीत में तेहरान को अधिक दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। जुलाई में नाकाबंदी की घोषणा करने के बाद से हूती लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमले कर रहे हैं और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों को भी निशाना बना रहे हैं। समूह का कहना है कि उसके हमले यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों की सऊदी अरब की लंबे समय से जारी नाकाबंदी के जवाब में हैं। एक हूती प्रसारक के अनुसार, गुरुवार को हूतियों द्वारा बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा किये जाने के बाद सऊदी अरब ने मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमला किया। तत्काल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की रिपोर्टें नहीं है।

  • मोदी के डिनर में क्यों नहीं पहुंचे शी जिनपिंग? पुतिन ने चखा भारतीय जायका, देखें पूरा मेन्यू

    मोदी के डिनर में क्यों नहीं पहुंचे शी जिनपिंग? पुतिन ने चखा भारतीय जायका, देखें पूरा मेन्यू


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम भारत मंडपम में ब्रिक्स देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया। इस डिनर में भारत की विविध पाक परंपराओं और शाकाहारी व्यंजनों को खास तौर पर मेन्यू में शामिल किया गया था। रात्रिभोज के दौरान ‘नवरस : द यूनिवर्स ऑफ शेयर्ड इमोशन्स’ नाम से विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।

    हालांकि, इस खास आयोजन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही। सूत्रों के मुताबिक, शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए। उनके डिनर में शामिल न होने की तत्काल कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई। एक सूत्र के अनुसार, शी आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे।

    दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स के अन्य नेताओं ने रात्रिभोज में हिस्सा लिया और भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखा। अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद भी डिनर में शामिल नहीं हुए।

    स्टार्टर में खंडवी और खुंब गलौटी

    रात्रिभोज की शुरुआत भारतीय स्वाद वाले खास स्टार्टर से हुई। मेहमानों को खंडवी मिलेफॉय परोसी गई। इसमें बेसन से तैयार स्टीम्ड खंडवी को सरसों, नारियल और करी पत्ते के तड़के के साथ परोसा गया। इसके साथ केसर आम, माइक्रोग्रीन्स और योगर्ट ड्रेसिंग का संयोजन रखा गया।

    इसके अलावा मेन्यू में खुंब गलौटी भी शामिल थी। इसमें तवे पर हल्के से ग्रिल किए गए मशरूम कबाब को मिंट पर्ल्स और शीरमल ब्रेड के साथ परोसा गया।

    डेजर्ट में पुरानी दिल्ली का स्वाद

    डेजर्ट को भी भारतीय परंपरागत स्वाद से जोड़ा गया। मेहमानों के लिए ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी परोसी गई। इसमें मौसमी फलों और हल्की व्हिप्ड क्रीम के साथ कुरकुरी जलेबी को शामिल किया गया था।

    इसके साथ शहतूत फिरनी भी डेजर्ट का हिस्सा रही, जिसने पारंपरिक भारतीय मिठास का स्वाद मेन्यू में जोड़ा।

    मेन कोर्स में पनीर लबाबदार और हिमालयी गुच्छी

    मुख्य भोजन में कई तरह के भारतीय शाकाहारी व्यंजन शामिल किए गए। इनमें पनीर लबाबदार के साथ हिमालयी गुच्छी मशरूम और शतावरी से तैयार गुच्छी मार्मिक प्रमुख रहे। इस व्यंजन में केसर, किशमिश और ममरा बादाम का इस्तेमाल किया गया।

    इसके अलावा मेन कोर्स में कैरट बीन पोरियाल, अरहर दाल और टमाटर से तैयार दक्षिण भारतीय शैली का हल्का सूप ढक्काली बेले सारू भी परोसा गया।

    मेहमानों के लिए मिवेट पुलाव, बीटरूट रायता और कई तरह की भारतीय रोटियां भी मेन्यू में शामिल थीं। इस पूरे शाकाहारी मेन्यू के जरिए भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय पाक परंपराओं और विविध स्वादों को एक ही टेबल पर पेश करने की कोशिश की गई।

  • टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन

    टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन


    नई दिल्ली।
    अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही टाटा ग्रुप (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons ) का आईपीओ (IPO) लॉन्च होगा। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने टाटा संस को प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी हो गया है। कानूनी विशेषज्ञ एचपी रानीना और कॉरपोरेट गवर्नेंस विश्लेषक श्रीराम सुब्रमणियन ने कहा कि रिजर्व बैंक के फैसले के बाद टाटा संस के सामने लागू लिस्टिंग नियमों का पालन करने का विकल्प बचता है।


    रिटेल निवेशकों को क्या फायदा?

    टाटा संस के आईपीओ आने से इसमें रिटेल निवेशक हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। अभी आम निवेशक टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा मोटर्स, TCS, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स जैसी अलग-अलग लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं लेकिन टाटा संस में सीधे निवेश नहीं कर सकते क्योंकि यह अनलिस्टेड है। अब अगर लिस्टिंग होती है तो शेयरों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी।


    टाटा संस की कैसे बढ़ीं मुश्किलें

    दरअसल, आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।


    जून 2026 में आरबीआई ने बदले नियम

    जून 2026 से आरबीआई ने कुछ नियमों में बदलाव किए। इसके तहत 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट्स वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में मतभेद
    हालांकि, टाटा संस के आईपीओ की राह में कई दिक्कतें भी हैं। सूत्रों की मानें तो सूचीबद्धता को लेकर टाटा संस के शेयरधारकों के बीच भी मतभेद हैं। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह सूचीबद्धता का विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में रहा है और इससे अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने की बात करता रहा है।


    चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति नहीं होने का भी कारण

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब टाटा संस में नेतृत्व और निदेशक मंडल को लेकर मतभेद की खबरें हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अगले साल फरवरी में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। ऐसी खबरें हैं कि टाटा संस की सूचीबद्धता का मुद्दा उन कारणों में भी शामिल था जिनकी वजह से नोएल टाटा ने चेयरमैन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया था। रतन टाटा के सौतेले भाई और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा टाटा संस के निदेशक मंडल के सदस्य भी हैं।

    चर्चा है कि वह चंद्रशेखरन से यह आश्वासन चाहते थे कि टाटा संस को सूचीबद्ध होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। वहीं, चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा था कि किसी नियामकीय या कानूनी मामले के नतीजे को पहले से तय नहीं माना जा सकता। नोएल टाटा ने समूह के कुछ अन्य कारोबार में हो रहे घाटे का मुद्दा भी उठाया था। इनमें टाटा डिजिटल और एयर इंडिया शामिल हैं, जिन्हें चंद्रशेखरन के करीब एक दशक के कार्यकाल में शुरू या अधिग्रहीत किया गया था।

  • ‘24 घंटे में सरकार गिराने का था प्लान, लेकिन…’, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप को सुनाया

    ‘24 घंटे में सरकार गिराने का था प्लान, लेकिन…’, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप को सुनाया

    तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका को उम्मीद थी कि वह महज 24 घंटे में ईरान की मौजूदा सरकार को गिराकर अपनी पसंद की नई सरकार स्थापित कर देगा, लेकिन उसका यह अनुमान पूरी तरह गलत साबित हुआ। पेजेश्कियन के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता के साथ-साथ वहां के लोगों के हौसले और एकजुटता को भी कम करके आंका।

    एक इंटरव्यू में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को लगता था कि ईरान के शीर्ष नेताओं, सैन्य कमांडरों और महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले करने के बाद जनता सरकार के खिलाफ खड़ी हो जाएगी। उनका दावा है कि इसके उलट हमलों के बाद बड़ी संख्या में लोग सरकार और देश की एकता के समर्थन में सड़कों पर उतर आए।

    वेनेजुएला और सीरिया जैसा मॉडल अपनाने का आरोप

    पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने ईरान के मामले में वेनेजुएला जैसा रास्ता अपनाने की कोशिश की। उन्हें लगा कि सैन्य कार्रवाई के जरिए 24 घंटे के भीतर ईरान पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है और इसके बाद अपनी पसंद की सरकार बनाई जा सकती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को ईरान में सीरिया जैसी स्थिति पैदा होने की उम्मीद थी। अमेरिकी आकलन था कि ईरान के सुप्रीम लीडर, सैन्य कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद सरकार कमजोर पड़ जाएगी और कुछ ही दिनों में सत्ता परिवर्तन हो जाएगा। हालांकि, पेजेश्कियन के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ।

    हमलों के बाद और मजबूत हुई एकजुटता

    ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के बाद देश के लोग पहले की तुलना में और अधिक एकजुट हो गए। यहां तक कि सरकार से नाराज रहने वाले कुछ लोगों ने भी देश की जमीन और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए सरकार का साथ दिया।

    पेजेश्कियन ने कहा कि इस संघर्ष ने ईरान के भीतर एकता को मजबूत किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेशों में रह रहे कुछ ईरानी नागरिक हमलों के बाद अपने देश वापस लौट आए।

    उनके मुताबिक, ईरान की सरकार, सेना और जनता ने मिलकर अमेरिका के दबाव का सामना किया और देश के खिलाफ बनाई गई रणनीति को सफल नहीं होने दिया।

    सैन्य ताकत के बावजूद ईरान के सामने नहीं झुका

    पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका ने शुरुआत में सैन्य शक्ति के दम पर ईरान की सरकार को गिराने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुआ। इसके बाद ईरान के महत्वपूर्ण ढांचे और ठिकानों को निशाना बनाया गया, फिर भी अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सका।

    उन्होंने कहा कि ईरान ने अत्याधुनिक सैन्य तकनीक से लैस ताकत के सामने भी मुकाबला जारी रखा। पेजेश्कियन ने जोर देकर कहा कि किसी देश की ताकत का आकलन केवल उसके हथियारों और सैन्य तकनीक के आधार पर नहीं किया जा सकता।

    अमेरिका पर खाद्य और दवाओं की सप्लाई रोकने का आरोप

    ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर ईरान में जरूरी सामान, भोजन और दवाओं की आवाजाही बाधित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री रास्तों को रोकने की कोशिश कर रहा है और जमीन के रास्तों को भी बंद करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पेजेश्कियन के मुताबिक, इन तमाम दबावों के बावजूद ईरान की सरकार, सेना और जनता ने मिलकर परिस्थितियों का सामना किया और देश की एकता को बनाए रखा।

  • भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…

    भारत मंडपम में चल रही ब्रिक्स समिट … प्रदर्शन करने पहुंच गए तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य…


    नई दिल्ली।
    भारत मंडपम (Bharat Mandapam) के पास विरोध-प्रदर्शन कर रहे तिब्बती यूथ कांग्रेस (Tibetan Youth Congress ) के 50 से अधिक सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह जानकारी पुलिस ने दी। गौरतलब है कि इन दिनों प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। देश में तमाम विदेशी मेहमान आए हुए हैं। पुलिस का पहरा भी सख्त है।

    शनिवार रात, तिब्बती यूथ कांग्रेस और तिब्बत के अन्य समर्थक BRICS समिट के लिए दिल्ली आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे का विरोध करने के लिए ITO के पास जमा हुए। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारत मंडपम की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो दिल्ली पुलिस ने कई दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारी भारत मंडपम के करीब भी पहुंच गए थे और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारी VVIP रूट के पास जमा होने की कोशिश कर रहे थे। बाद में उन्हें उस इलाके से दूर छोड़ दिया गया।

    लगातार कई दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद मजनू का टीला में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को, ‘स्टूडेंट्स फॉर ए फ्री तिब्बत’ के पाँच कार्यकर्ताओं ने प्रगति मैदान टनल के अंदर खंभों पर चढ़कर तिब्बत का राष्ट्रीय झंडा फहराया और शी जिनपिंग के खिलाफ नारे लगाए।

  • किम जोंग उन ने सैन्य अभ्यास खत्म होते ही दक्षिण कोरिया की ओर दाग दीं मिसाइलें

    किम जोंग उन ने सैन्य अभ्यास खत्म होते ही दक्षिण कोरिया की ओर दाग दीं मिसाइलें


    सियोल।
    दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के पांच दिवसीय त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास के खत्म होने के महज एक दिन बाद उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर की ओर कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। शनिवार को हुए इस प्रक्षेपण की जानकारी दक्षिण कोरियाई सेना ने दी। इसे लेकर क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।

    दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:20 बजे वोंसान क्षेत्र से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का पता चला। भारतीय समय के अनुसार यह समय रात करीब 1:50 बजे था। सेना के अनुसार मिसाइलें समुद्र में गिरने से पहले करीब 250 किलोमीटर तक हवा में रहीं।

    जेसीएस ने बताया कि मिसाइलों के प्रक्षेपण से जुड़े सटीक विवरण का अमेरिका के साथ मिलकर विश्लेषण किया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियां उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर शुरुआती चरण से ही नजर रख रही थीं और जापान के साथ भी संबंधित जानकारी साझा की गई।

    दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा कि वह मजबूत दक्षिण कोरिया-अमेरिका रक्षा व्यवस्था के तहत उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और किसी भी उकसावे का प्रभावी जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    ह्वासोंग-11 सीरीज की मिसाइलों का इस्तेमाल?

    दक्षिण कोरियाई सूत्रों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने ह्वासोंग-11 श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 600 मिलीमीटर के मल्टीपल रॉकेट लॉन्चरों से भी लगातार कई परीक्षण किए हैं।

    ताजा मिसाइल प्रक्षेपण दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के पांच दिवसीय ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास के शुक्रवार को समाप्त होने के ठीक बाद हुआ। यह अभ्यास जेजू द्वीप के समीप अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आयोजित किया गया था।

    ट्रंप ने घटाया था सैन्य अभ्यास का दायरा

    उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अपने वार्षिक संयुक्त ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ (UFS) अभ्यास का दायरा कम करने का निर्देश दिया था। उत्तर कोरिया के प्रति सुलह का संकेत देते हुए ट्रंप ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती का आदेश दिया था।

    ट्रंप का कहना था कि ये अभ्यास महंगे होने के साथ-साथ उत्तर कोरिया को ‘पूरी तरह से अनुचित और शत्रुतापूर्ण’ संकेत भी देते हैं। हालांकि, ‘फ्रीडम एज’ अभ्यास अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरा हुआ।

    उत्तर कोरिया ने पहले ही दी थी चेतावनी

    मिसाइल परीक्षण से पहले उत्तर कोरिया ने सैन्य अभ्यास को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी भी दी थी। उत्तर कोरिया के रक्षा मंत्री किम सोंग-गी ने सोमवार को त्रिपक्षीय अभ्यास की निंदा करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी डीपीआरके यानी उत्तर कोरिया के आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के खिलाफ नए सैन्य टकराव को भड़काने की कोशिश करते हैं तो उत्तर कोरिया ताकत के जरिए कड़े और प्रभावी जवाबी कदम उठाएगा।

    20 अगस्त को भी दागी थीं मिसाइलें

    उत्तर कोरिया ने इससे पहले 20 अगस्त को पूर्वी सागर की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की थी। उस समय दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगी अपना वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास कर रहे थे।

    उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग इन अभ्यासों को संभावित आक्रमण की तैयारी यानी युद्धाभ्यास करार देता है और इसके विरोध में अक्सर अपने मिसाइल और हथियार परीक्षण करता है।

    ट्रंप-शी बैठक से पहले बढ़ी हलचल

    शनिवार का मिसाइल प्रक्षेपण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस महीने के अंत में वाशिंगटन में प्रस्तावित उच्चस्तरीय शिखर बैठक से ठीक पहले हुआ है। माना जा रहा है कि ट्रंप और शी की आगामी बातचीत में उत्तर कोरिया से जुड़े मुद्दे भी अहम एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं।

  • सचिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब जो रूट के नाम 69 अर्धशतकों के साथ दिग्गज बल्लेबाजों की लिस्ट में मचाई हलचल

    सचिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड अब जो रूट के नाम 69 अर्धशतकों के साथ दिग्गज बल्लेबाजों की लिस्ट में मचाई हलचल


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में रूट ने ऐसी शानदार पारी खेली जिसने इंग्लैंड को जीत दिलाने के साथ उनके नाम एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज कर दिया। रूट ने 69 गेंदों में नाबाद 62 रन बनाए और इसी पारी के दौरान उन्होंने भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का 13 साल पुराना रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अब जो रूट टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।

    पाकिस्तान ने इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 130 रन का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने अपने शुरुआती विकेट गंवा दिए। इसके बाद जो रूट ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला। रूट ने बिना किसी दबाव के रन बनाए और अपनी पारी को अर्धशतक में बदल दिया। जैसे ही उन्होंने 50 रन का आंकड़ा पार किया वैसे ही उनका नाम क्रिकेट इतिहास के एक खास रिकॉर्ड के साथ जुड़ गया।

    जो रूट की यह टेस्ट क्रिकेट में 69वीं फिफ्टी थी। इससे पहले सबसे ज्यादा टेस्ट अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था। सचिन ने अपने शानदार टेस्ट करियर में 68 अर्धशतक लगाए थे। रूट ने अब 69वीं फिफ्टी पूरी करके सचिन को पीछे छोड़ दिया है। इस सूची में वेस्टइंडीज के दिग्गज शिवनारायण चंद्रपॉल 66 अर्धशतकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। भारत के राहुल द्रविड़ और ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर के नाम 63 63 टेस्ट अर्धशतक दर्ज हैं।

    रूट की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सचिन तेंदुलकर का यह रिकॉर्ड लंबे समय से कायम था। सचिन ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था और उसके बाद से कई बड़े बल्लेबाज इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचे लेकिन कोई भी इसे पार नहीं कर सका। अब इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जो रूट ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए यह मुकाम हासिल कर लिया है। उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है और यही वजह है कि वह टेस्ट क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड के आसपास लगातार नजर आ रहे हैं।

    पाकिस्तान के खिलाफ इसी मुकाबले में रूट ने एक और खास उपलब्धि अपने नाम की। उन्होंने एजबेस्टन के मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में अपने 1000 रन पूरे कर लिए। यह दुनिया का चौथा मैदान है जहां रूट ने टेस्ट क्रिकेट में एक हजार या उससे ज्यादा रन बनाए हैं। इससे पहले लॉर्ड्स मैनचेस्टर और द ओवल में भी वह यह कारनामा कर चुके हैं। उनके अलावा केवल जैक कैलिस और रिकी पोंटिंग ही चार अलग अलग मैदानों पर टेस्ट में 1000 से ज्यादा रन बनाने की उपलब्धि हासिल कर सके हैं।

    इस मुकाबले का नतीजा भी इंग्लैंड के लिए बेहद खास रहा। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को आठ विकेट से हराकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। पाकिस्तान पहली पारी में केवल 133 रन पर सिमट गया था। इसके बाद दूसरी पारी में टीम ने वापसी करते हुए 449 रन बनाए जिसमें शान मसूद ने 95 बाबर आजम ने 76 और रजाउल्लाह ने 81 रन की पारी खेली। इसके बावजूद इंग्लैंड की पहली पारी का 453 रन का स्कोर निर्णायक साबित हुआ और पाकिस्तान ने इंग्लैंड के सामने केवल 130 रन का लक्ष्य रखा।

    इंग्लैंड ने इस लक्ष्य को सिर्फ दो विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। जो रूट 62 रन बनाकर नाबाद रहे जबकि जॉर्डन कॉक्स ने भी 59 रन की नाबाद पारी खेली। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पाकिस्तान का सीरीज में पूरी तरह सफाया कर दिया और जो रूट ने अपने बल्ले से एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।

  • नींबू और शहद से चेहरे की देखभाल करते हैं तो पहले जान लें ये बातें वरना फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

    नींबू और शहद से चेहरे की देखभाल करते हैं तो पहले जान लें ये बातें वरना फायदे की जगह हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली। चेहरे की खूबसूरती और ग्लो के लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के साथ घरेलू नुस्खों का भी सहारा लेते हैं। नींबू और शहद ऐसा ही एक घरेलू कॉम्बिनेशन है जिसका इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। शहद को त्वचा के लिए मॉइस्चराइजिंग गुणों वाला घरेलू घटक माना जाता है जबकि नींबू में विटामिन सी और साइट्रिक एसिड पाया जाता है। यही वजह है कि कई लोग इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आने की उम्मीद करते हैं। हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि नींबू का रस सीधे चेहरे पर लगाना हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता।

    अगर आप नींबू और शहद को स्किन केयर में शामिल करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी त्वचा की संवेदनशीलता को समझना जरूरी है। संवेदनशील या पहले से irritated skin पर नींबू जलन लालिमा खुजली या चुभन बढ़ा सकता है। नींबू जैसे citrus fruits का रस त्वचा पर लगने के बाद धूप के संपर्क में आने पर कुछ लोगों में phototoxic reaction भी हो सकता है। इस स्थिति में त्वचा पर लाल चकत्ते जलन सूजन या बाद में गहरे निशान दिखाई दे सकते हैं।

    इसीलिए नींबू को सीधे चेहरे पर रगड़ने या लंबे समय तक लगाकर रखने से बचना बेहतर है। अगर किसी घरेलू मिश्रण का इस्तेमाल करना ही चाहते हैं तो पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना जरूरी है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी नए स्किन केयर प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने से पहले छोटे हिस्से पर टेस्ट करने की सलाह देती है ताकि संभावित irritation का पता लगाया जा सके।

    शहद को लेकर भी यह समझना जरूरी है कि प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति की त्वचा पर यह एक जैसा काम करेगा। किसी भी घरेलू मिश्रण को चेहरे पर लगाने से पहले उसकी थोड़ी मात्रा का परीक्षण किया जा सकता है। अगर जलन खुजली लालिमा या सूजन महसूस हो तो इसे तुरंत धो देना चाहिए और दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    अगर आपका मकसद चेहरे को साफ और healthy रखना है तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय एक सरल स्किन केयर रूटीन ज्यादा उपयोगी हो सकता है। चेहरे को mild cleanser से साफ करना मॉइस्चराइजर लगाना और दिन में sunscreen का इस्तेमाल करना त्वचा की सामान्य देखभाल का हिस्सा हो सकता है। खासकर अगर नींबू या कोई citrus ingredient त्वचा के संपर्क में आ गया है तो धूप से बचना और त्वचा को अच्छी तरह धोना जरूरी है।

    नींबू और शहद से तुरंत गोरा होने या दाग धब्बे पूरी तरह खत्म होने जैसे दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। त्वचा की रंगत और pigmentation कई कारणों से प्रभावित होती है और हर व्यक्ति की त्वचा अलग तरह से प्रतिक्रिया करती है। अगर चेहरे पर लगातार दाग धब्बे मुंहासे जलन या pigmentation की समस्या बनी हुई है तो घरेलू प्रयोगों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

    इसलिए नींबू और शहद को स्किन केयर का चमत्कारी नुस्खा मानने के बजाय सावधानी के साथ देखना चाहिए। खासतौर पर नींबू को सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है क्योंकि फायदा पाने की कोशिश में त्वचा को irritation या धूप से होने वाली प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। स्वस्थ त्वचा के लिए gentle products नियमित moisturization और पर्याप्त sun protection को प्राथमिकता देना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

  • मंगल गोचर से इन 3 राशियों की बढ़ेगी टेंशन करियर से वैवाहिक जीवन तक आ सकती हैं चुनौतियां

    मंगल गोचर से इन 3 राशियों की बढ़ेगी टेंशन करियर से वैवाहिक जीवन तक आ सकती हैं चुनौतियां


    नई दिल्ली। मंगल गोचर 2026 ज्योतिष की दुनिया में ग्रहों की चाल को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और जब मंगल अपनी राशि बदलते हैं तो इसका प्रभाव अलग अलग राशियों के जातकों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। 18 सितंबर 2026 को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं और 12 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कर्क राशि में मंगल नीच के माने जाते हैं। मंगल को ऊर्जा साहस क्रोध और आक्रामकता का कारक माना जाता है जबकि चंद्रमा भावनाओं और मन से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में इन दोनों की अलग प्रकृति के कारण कुछ राशियों के लिए यह अवधि चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    कर्क राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों या गुप्त शत्रुओं से परेशानी हो सकती है और किसी काम में बाधा आने की आशंका बनी रह सकती है। छोटी छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ सकता है इसलिए किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी से फैसला लेने से बचना बेहतर होगा। स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। रिश्तों में संदेह की स्थिति पैदा हो सकती है जिससे आपसी तालमेल प्रभावित हो सकता है। धन से जुड़े मामलों में भी सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है।

    तुला राशि के जातकों के लिए भी मंगल का यह गोचर कुछ परेशानियां बढ़ा सकता है। मंगल तुला राशि के दशम भाव में गोचर करेंगे जिससे करियर और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। नौकरी करने वाले लोगों को काम का तनाव महसूस हो सकता है जबकि कारोबार से जुड़े लोगों को नए फैसले लेते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी। इस अवधि में साझेदारी से जुड़े कामों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कोई नया काम शुरू करने से पहले उसके हर पहलू पर विचार करना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है। वैवाहिक जीवन में भी मतभेद की स्थिति बन सकती है इसलिए बातचीत के दौरान संयम बनाए रखना जरूरी होगा।

    मकर राशि के लिए भी मंगल का कर्क गोचर चुनौतीपूर्ण बताया गया है। मंगल इस राशि के सप्तम भाव में गोचर करेंगे जिसके कारण जीवनसाथी के साथ मतभेद या विवाद की स्थिति बन सकती है। इस दौरान आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है और छोटी बातों पर गुस्सा आने की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे में क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा। किसी भी तरह के विवाद और लड़ाई झगड़े से दूरी बनाए रखना आपके लिए बेहतर रहेगा। कला से जुड़े क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर मंगल का कर्क राशि में यह गोचर कुछ राशियों के लिए सावधानी बरतने का समय माना जा रहा है। नौकरी कारोबार स्वास्थ्य धन और रिश्तों से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना और सोच समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डाल सकती है हालांकि वास्तविक जीवन में किसी भी बड़े फैसले के लिए केवल ज्योतिषीय भविष्यवाणी पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।