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  • बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला

    बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। लंबे समय से सरकार से किराया संशोधित करने की मांग कर रहे निजी बस संचालकों ने अब आंदोलन का रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। लगातार आश्वासनों के बावजूद किराया वृद्धि पर कोई ठोस फैसला नहीं होने से नाराज मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने 26 जुलाई को सागर में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश के सभी 55 जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

    एसोसिएशन के अनुसार सागर के भोपाल रोड स्थित आदर्श गार्डन में दोपहर एक बजे होने वाली बैठक में प्रत्येक जिले से कम से कम पांच प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा बस किराया बढ़ाने की मांग, 7 जुलाई को जारी राज्य सड़क परिवहन योजना के राजपत्र और बस संचालकों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना होगा। यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं आता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और हड़ताल की रूपरेखा भी इसी बैठक में तय की जा सकती है।

    बस संचालकों का कहना है कि परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के साथ कई दौर की बातचीत में किराया बढ़ाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इस बीच डीजल की कीमतों के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स, टायर, बीमा, फिटनेस, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे निजी बसों का संचालन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है और कई ऑपरेटरों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

    एसोसिएशन का तर्क है कि पड़ोसी राज्यों ने समय-समय पर बस किराए में संशोधन किया है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी बस किराए में वृद्धि की है। ऐसे में मध्य प्रदेश में वर्षों से किराया नहीं बढ़ने के कारण यहां के बस संचालक प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत के बीच आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    बैठक में राज्य सड़क परिवहन योजना के तहत सरकारी बसों के संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हाल ही में सरकार ने प्रदेश में सरकारी बसों के संचालन के लिए 40 प्रमुख रूट प्रस्तावित किए हैं और इस संबंध में आपत्तियां व सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। निजी बस संचालक इस योजना के संभावित प्रभाव पर भी विचार करेंगे।

    बस संचालकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। ऐसे में 26 जुलाई को सागर में होने वाली बैठक पर पूरे प्रदेश के परिवहन क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आगे की रणनीति तय होगी और जरूरत पड़ने पर हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है।

  • चाल में रहने को मजबूर हैदर अली खान, पूर्व पत्नी ईवा ग्रोवर ने बयां की पूरी कहानी..

    चाल में रहने को मजबूर हैदर अली खान, पूर्व पत्नी ईवा ग्रोवर ने बयां की पूरी कहानी..

    नई दिल्ली । हिंदी मनोरंजन जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मशहूर टीवी अभिनेत्री ईवा ग्रोवर ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने पूर्व पति और अभिनेता आमिर खान के सौतेले भाई हैदर अली खान की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए। ईवा के अनुसार, कभी मुख्यधारा के सिनेमा का हिस्सा रहे हैदर अली खान आज अपने जीवन के सबसे कठिन और अंधकारमय दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि हैदर के पास वर्तमान में न तो खुद का कोई स्थायी आशियाना बचा है और न ही दो वक्त के भोजन की बुनियादी व्यवस्था है। जीवनयापन के लिए वे दूसरों की मदद पर निर्भर हैं और मुंबई की एक छोटी सी चाल में रहने को विवश हो गए हैं।

    अभिनेत्री ने अपनी पिछली शादीशुदा जिंदगी के कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि प्रेम विवाह के बाद से ही उनके दांपत्य जीवन में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया था। ईवा के मुताबिक, शादी के शुरुआती दिनों में ही उन्हें हैदर के हिंसक व्यवहार और गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पता चला था। अत्यधिक शराब के सेवन और करियर में मिली असफलता ने स्थिति को और अधिक विकराल बना दिया, जिसके चलते उन्हें गहरे घरेलू तनाव का सामना करना पड़ा। ईवा ने यह भी दावा किया कि आमिर खान को विवाह से पूर्व ही इन परिस्थितियों का अंदेशा था और उन्होंने इस रिश्ते को लेकर चेतावनी भी दी थी, जिसे उस समय नजरअंदाज कर दिया गया था।

    घरेलू हिंसा और लगातार बिगड़ते हालातों के बीच पांच वर्षों के संघर्ष के बाद दोनों का तलाक हो गया था। हालांकि, अपनी आपबीती बयां करने के बावजूद ईवा ने अपने पूर्व पति की मौजूदा स्थिति पर गहरी मानवीय संवेदना और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि हैदर का स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति अब पूरी तरह चरमरा चुकी है। उनके आसपास मौजूद कुछ लोग उनकी इस कमजोरी का गलत फायदा उठाकर उन्हें निरंतर शराब के गर्त में धकेल रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति दिन-ब-दिन और अधिक दयनीय होती जा रही है।

    ईवा ग्रोवर द्वारा किए गए इन दावों के बाद से सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। जहां एक तरफ प्रशंसक ईवा के साहस और अतीत के संघर्षों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ परिवार की चुप्पी को लेकर भी तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर परिवार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने एक बार फिर बॉलीवुड के चकाचौंध के पीछे छिपे कड़वे सच को उजागर कर दिया है।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे के दौरान 35 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 4.2 इंच वर्षा नर्मदापुरम में रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल सहित कई शहरों में पूरी रात रुक-रुककर बारिश होती रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले 24 से 48 घंटे तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम के अलावा नरसिंहपुर में 2.5 इंच, राजगढ़ में 2.4 इंच, सीहोर और मलाजखंड में 2.2 इंच, भोपाल में 2.1 इंच, पचमढ़ी और मंडला में 1.8 इंच, श्योपुर में 1.5 इंच, सिवनी में 1.3 इंच तथा खरगोन में 1.1 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा उमरिया, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, टीकमगढ़, खंडवा, छतरपुर, सतना, बैतूल, दमोह, जबलपुर, इंदौर, रतलाम, दतिया, उज्जैन, धार, सीधी, ग्वालियर, सागर, शाजापुर, विदिशा, देवास, आगर-मालवा, बड़वानी और बुरहानपुर सहित कई जिलों में भी तेज बारिश और हवाओं का असर देखने को मिला।

    लगातार बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जलाशय का जलस्तर बढ़ने के बाद एक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं रायसेन और नर्मदापुरम सहित कई इलाकों में खेत पानी से लबालब भर गए हैं। कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर मजबूत हो गया है। प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र, लगातार बादलों की मौजूदगी और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी बारिश को लगातार बढ़ावा दे रही है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार अच्छी वर्षा हो रही है।

    बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 22 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। सुबह और रात के समय मौसम काफी सुहावना हो गया है तथा लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वातावरण में सापेक्षिक आर्द्रता 75 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का तेजी से निर्माण हो रहा है और वर्षा की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं।

    मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। यही हवाएं समुद्र से नमी लेकर मध्य प्रदेश तक पहुंच रही हैं और मानसून को लगातार मजबूत बनाए हुए हैं।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, बैतूल तथा आसपास के जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

  • श्रेयस अय्यर की कप्तानी में हरारे में युवा ब्रिगेड का शक्ति परीक्षण: प्रभसिमरन, हर्ष, अशोक और यश में से किसे मिलेगा डेब्यू का मौका?

    श्रेयस अय्यर की कप्तानी में हरारे में युवा ब्रिगेड का शक्ति परीक्षण: प्रभसिमरन, हर्ष, अशोक और यश में से किसे मिलेगा डेब्यू का मौका?

    नई दिल्ली । इंग्लैंड दौरे की समाप्ति के उपरांत भारतीय क्रिकेट टीम अब जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में अपनी चुनौती पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 23 जुलाई से हरारे स्पोर्ट्स क्लब में शुरू हो रही इस श्रृंखला के लिए भारतीय चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में युवा और ऊर्जावान खिलाड़ियों से सुसज्जित टीम की घोषणा की है। इस दौरे का सबसे मुख्य आकर्षण राष्ट्रीय टीम में शामिल किए गए चार नए चेहरे—विकेटकीपर बल्लेबाज प्रभसिमरन सिंह, स्पिन ऑलराउंडर हर्ष दुबे, तथा तेज गेंदबाज अशोक शर्मा और यश ठाकुर हैं। घरेलू प्रतियोगिताओं एवं इंडियन प्रीमियर लीग में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर राष्ट्रीय टीम का टिकट हासिल करने वाले इन खिलाड़ियों के बीच प्लेइंग इलेवन में स्थान बनाकर नीली जर्सी पहनने की होड़ लगी हुई है।

    टीम प्रबंधन के सामने पहले मुकाबले की अंतिम एकादश के चयन को लेकर सुखद धर्मसंकट की स्थिति निर्मित हो गई है। पंजाब किंग्स के लिए अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का लोहा मनवा चुके प्रभसिमरन सिंह शीर्ष क्रम में एक विस्फोटक बल्लेबाज और बैकअप विकेटकीपर के रूप में एक मजबूत विकल्प प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने टी20 प्रारूप में 150 से अधिक की स्ट्राइक रेट से निरंतर रन बनाए हैं। दूसरी ओर, बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर हर्ष दुबे निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी और किफायती गेंदबाजी से टीम संतुलन को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू कर चुके हर्ष टी20 प्रारूप में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रभाव छोड़ने के लिए पूरी तरह मुस्तैद दिख रहे हैं।

    गेंदबाजी आक्रमण को धार देने के लिए राजस्थान के 145-150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले अशोक शर्मा और डेथ ओवरों के विशेषज्ञ माने जाने वाले विदर्भ के यश ठाकुर कड़े दावेदार हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में सर्वाधिक विकेट लेने वाले अशोक शर्मा अपनी तीखी गति से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को परेशानी में डाल सकते हैं, जबकि घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए के लिए 110 विकेट चटका चुके यश ठाकुर अंतिम ओवरों में अपनी सटीक यॉर्कर गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। भारतीय टीम प्रबंधन परिस्थितियों और पिच के मिजाज को ध्यान में रखते हुए कम से कम दो नए खिलाड़ियों को पदार्पण का अवसर दे सकता है।

    तीन मैचों की इस टी20 श्रृंखला का दूसरा मुकाबला 25 जुलाई तथा अंतिम मैच 26 जुलाई को हरारे में ही आयोजित किया जाएगा। आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का ध्यान इस श्रृंखला के माध्यम से बेंच स्ट्रेंथ को परखने पर केंद्रित है। युवा खिलाड़ियों के पास अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपयोगिता साबित करने का यह स्वर्णिम अवसर होगा। मुख्य कोच और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीतिक योजना में इन नए चेहरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है, और क्रिकेट विशेषज्ञों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 23 जुलाई को हरारे के मैदान पर कौन सा युवा खिलाड़ी भारत के लिए अपनी पहली टी20 कैप हासिल करने में सफल रहता है।

  • निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल

    निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब का हवाला देते हुए फीस निर्धारण में पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच 5062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय की, जबकि वर्ष 2025-26 में एक ही बैठक के दौरान 355 निजी संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उन्होंने इसे नियमों और व्यावहारिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय करती है। उन्होंने जानकारी दी कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिकतम 15 दिनों के भीतर संस्थानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुल्क निर्धारण किया जाता है।

    सरकार के जवाब के बाद कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने दावा किया कि उनके मूल प्रश्न का महत्वपूर्ण हिस्सा अनुत्तरित छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने संस्थानों के आवेदन और वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया। उनके अनुसार वर्ष 2008 के राजपत्र में स्पष्ट प्रावधान हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की फीस तय करने से पहले उसके आय-व्यय, बैलेंस शीट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर संस्थान से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी लिया जाता है। ऐसे में एक ही दिन में बड़ी संख्या में संस्थानों की फीस तय होना कई सवाल खड़े करता है।

    उपाध्याय ने विशेष रूप से वर्ष 2025-26 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उनका कहना है कि प्रत्येक संस्थान के दस्तावेजों, निरीक्षण दल की रिपोर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट का अलग-अलग परीक्षण किए बिना इतनी बड़ी संख्या में शुल्क निर्धारण करना संभव नहीं लगता। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

    विधायक ने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस तय की जाती है, जबकि कई संस्थानों पर पहले से नियमों के उल्लंघन और अनियमित संचालन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे संस्थानों के मामलों में निरीक्षण दल और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किन मानकों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और शुल्क निर्धारण की अनुमति कैसे दी गई।

    कांग्रेस विधायक ने मांग की कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में समान पाठ्यक्रमों के लिए पारदर्शी और एक समान शुल्क व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

    यह मुद्दा विधानसभा में सामने आने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया, नियामक समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन आरोपों पर क्या आगे की कार्रवाई करती है।

  • भोपाल में शेफ की आत्महत्या सुसाइड नोट में लिखा कर्ज चुका दिया फिर भी रोज मांग रहे थे 10 हजार रुपये ब्याज

    भोपाल में शेफ की आत्महत्या सुसाइड नोट में लिखा कर्ज चुका दिया फिर भी रोज मांग रहे थे 10 हजार रुपये ब्याज


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में कर्ज और कथित सूदखोरी से जुड़ा एक दर्दनाक मामला सामने आया है। कलियासोत डेम के पास तेरा शटर क्षेत्र में एक 37 वर्षीय शेफ का शव पेड़ से फंदे पर लटका मिला। मृतक की पहचान नीलबड़ स्थित बृजधाम कॉलोनी निवासी रामश्रवण पटेल के रूप में हुई है। वह कोलार रोड स्थित एक निजी बंगले में शेफ के तौर पर कार्यरत थे। घटना स्थल से उनकी बाइक और जेब से एक सुसाइड नोट मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

    परिजनों के अनुसार रामश्रवण मंगलवार दोपहर काम पर जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। बाद में कलियासोत क्षेत्र में उनका शव पेड़ से लटका मिला। सुसाइड नोट में लिखे मोबाइल नंबर के आधार पर पुलिस ने परिवार को सूचना दी। बुधवार सुबह पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी।

    मौके से मिले सुसाइड नोट में मृतक ने आरोप लगाया कि मकान निर्माण के लिए उसने एक व्यक्ति से लगभग 3.70 लाख रुपये उधार लिए थे। नोट के अनुसार उसने पूरी मूल राशि चुका दी थी, लेकिन इसके बावजूद उससे प्रतिदिन 10 हजार रुपये ब्याज की मांग की जा रही थी। मृतक ने यह भी लिखा कि एक निजी फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट लगातार उस पर दबाव बना रहे थे, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में आ गया था।

    रामश्रवण के भाई अरुण पटेल ने बताया कि परिवार ने कर्ज चुकाने के लिए अपने गहने तक गिरवी रख दिए थे। इसके बावजूद वसूली करने वाले लगातार दबाव बना रहे थे। परिवार का कहना है कि पिछले कुछ समय से रामश्रवण बेहद तनाव में था और इसी कारण उसने यह कदम उठाया।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि तीन दिन पहले रामश्रवण को चुनाभट्टी थाने बुलाया गया था, जहां उस पर कर्ज चुकाने का दबाव बनाया गया। हालांकि पुलिस ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है।

    रातीबड़ थाना प्रभारी रास बिहारी शर्मा के अनुसार शुरुआती जांच में आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने यह भी जानकारी दी है कि चार दिन पहले रामश्रवण ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था, लेकिन उस समय उसकी जान बच गई थी।

    पुलिस अब सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग का परीक्षण कराएगी। साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और नोट में जिन लोगों का उल्लेख किया गया है, उनसे पूछताछ भी की जाएगी। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि कहीं कर्ज वसूली के नाम पर अवैध वसूली, धमकी या प्रताड़ना तो नहीं की गई।

    पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • घरेलू क्रिकेट में जानबूझकर नो-बॉल और खतरनाक बीमर फेंकने वाले गेंदबाज होंगे पूरे मैच से निलंबित

    घरेलू क्रिकेट में जानबूझकर नो-बॉल और खतरनाक बीमर फेंकने वाले गेंदबाज होंगे पूरे मैच से निलंबित

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आगामी 2026-27 घरेलू क्रिकेट सत्र के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व खेल परिस्थितियों और नियमों में कई युगांतकारी परिवर्तनों की घोषणा की है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब द्वारा वैश्विक क्रिकेट नियमों में किए गए संशोधनों के अनुपालन में बोर्ड ने घरेलू प्रतियोगिताओं को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से नए प्रावधान लागू किए हैं। इन संशोधनों के तहत अनुशासनहीनता और अनुचित खेल भावना पर लगाम कसने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं। नए दिशानिर्देशों का सर्वाधिक प्रभाव गेंदबाजों, खेल के संचालन, अंतिम ओवरों के निष्पादन तथा विकेटकीपरों की तकनीकी भूमिका पर पड़ेगा। बोर्ड ने इन अद्यतन नियमावलियों की विस्तृत जानकारी सभी राज्य क्रिकेट संघों, मैच रेफरी और अंपायरों को औपचारिक रूप से प्रेषित कर दी है।

    नए नियमों के अंतर्गत सबसे कठोर प्रावधान अनुचित गेंदबाजी प्रथाओं को रोकने के संदर्भ में किया गया है। यदि कोई भी गेंदबाज जानबूझकर फ्रंट फुट नो-बॉल फेंकता हुआ या बल्लेबाज के शरीर को निशाना बनाते हुए खतरनाक बीमर डालता हुआ पाया जाता है, तो अंपायर उसे केवल वर्तमान पारी से ही नहीं, बल्कि पूरे मैच से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर देंगे। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में गेंदबाज को केवल उस विशिष्ट पारी में गेंदबाजी करने से रोका जाता था और वह मैच में क्षेत्ररक्षण के साथ-साथ अगली पारी में गेंदबाजी के लिए पात्र रहता था। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से खेल में दुर्भावनापूर्ण व्यवहार पर पूर्ण विराम लगेगा और मैदान पर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

    प्रथम श्रेणी एवं बहु-दिवसीय मैचों के संचालन को लेकर भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत संशोधन किया गया है। अब दिन के अंतिम ओवर के दौरान यदि किसी भी गेंद पर विकेट का पतन होता है, तो खेल को उस समय स्थगित करने के बजाय ओवर की शेष गेंदों का खेल पूरा कराया जाएगा। इसके तहत नए बल्लेबाज को मैदान पर आकर अंतिम गेंदों का सामना करना अनिवार्य होगा, जिससे दिन के निर्धारित ओवरों की शत-प्रतिशत पूर्ति संभव हो सकेगी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य समय के अपव्यय को रोकना और खेल की निरंतरा को बनाए रखना है।

    सीमित ओवरों के प्रारूप में कप्तानों और विकेटकीपरों की सहूलियत तथा तकनीकी स्पष्टता के लिए भी विशेष रियायतें दी गई हैं। एकदिवसीय मैचों में अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान कप्तान मैदान के भीतर प्रवेश कर अपने खिलाड़ियों के साथ सामरिक रणनीतियों पर सीधा विचार-विमर्श कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, विकेटकीपरों द्वारा दस्तानों की स्थिति को लेकर उत्पन्न होने वाले तकनीकी विवादों को समाप्त करने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि गेंदबाज द्वारा गेंद छोड़ने के सटीक क्षण तक ही दस्ताने स्टंप्स के पीछे होना अनिवार्य है। बोर्ड का यह समग्र प्रयास भारतीय घरेलू क्रिकेट के ढांचे को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित

    मानसून सत्र में गरमाई सियासत कांग्रेस का वॉकआउट जैसा विरोध सदन 15 मिनट के लिए स्थगित


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहसों के नाम रहा। दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव के तहत इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और लगातार शोरगुल के चलते कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    कांग्रेस विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। विपक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के विरोध को केवल राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास बताया।

    शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुई घटना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्रों का अपमान किया गया और उनके खिलाफ बल प्रयोग हुआ। उन्होंने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की। जवाब में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मामला मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है और विधानसभा के नियमों के अनुसार इस पर चर्चा नहीं कराई जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सूचना निर्धारित समय के बाद दी गई थी।

    सदन में प्रश्नकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया। विधायकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था, आदिवासियों की जमीन, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक परियोजना पर लगाए गए जुर्माने, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर सरकार को घेरा।

    शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने 167 करोड़ रुपये की परियोजना में भ्रष्टाचार और किसानों तक पानी नहीं पहुंचने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्षों बाद भी किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसके जवाब में मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि परियोजना पूरी हो चुकी है और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी तकनीकी खामियां होंगी, वहां जांच कराकर सुधार कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी परियोजना का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

    पेसा एक्ट और सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसानों को नोटिस दिए जा रहे हैं। हालांकि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि से जुड़े मामलों में स्थानीय समुदाय के अधिकारों और सामूहिक हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

    सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। इसके बाद मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता समाप्त किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

    मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, जनहित के मुद्दों पर बहस और विधायी कार्यवाही एक साथ देखने को मिली। आने वाले दिनों में भी किसानों, शिक्षा, आदिवासी अधिकारों और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर सदन में तीखी बहस जारी रहने की संभावना है।

  • हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आया जगन्नाथ रथ, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच के आदेश

    नई दिल्ली । झारखंड के खूंटी जिले में लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के चलते एक भीषण दुर्घटना में दो निर्दोष स्कूली छात्रों की जान चली गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। यह हृदयविदारक घटना तोरपा थाना क्षेत्र स्थित श्री हरि प्लस टू विद्यालय परिसर के समीप घटी। लंच ब्रेक के दौरान जब छात्र विद्यालय परिसर के आसपास मौजूद थे, तभी पास में खड़े भगवान जगन्नाथ के रथ को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान लोहे के कलपुर्जों और लकड़ी से निर्मित यह भारी रथ ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन विद्युत लाइन के सीधे संपर्क में आ गया। क्षण भर में ही पूरे रथ में अत्यधिक उच्च क्षमता का करंट दौड़ गया, जिसकी चपेट में आकर वहां मौजूद बच्चे बुरी तरह प्रभावित हो गए।

    घटना के घटित होते ही घटनास्थल पर अफ़रा-तफ़री और चीख-पुकार मच गई। विद्युत आघात के कारण अचेत हुए और झुलसे हुए सभी बच्चों को तत्काल स्थानीय प्रशासन एवं विद्यालय प्रबंधन की सहायता से खूंटी के सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के चिकित्सा प्रभारियों के अनुसार, जांच के दौरान दो छात्रों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि छह घायलों का आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में गहन उपचार जारी है। घायलों में से एक छात्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल परिसर में पीड़ित परिवारों के रुदन से माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का आरोप है कि स्कूली बच्चों से भारी-भरकम रथ ढकेलवाने का कार्य लिया जाना अत्यंत लापरवाही भरा कदम था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें जांच में जुट गई हैं। खूंटी के उपायुक्त ने इस दुर्घटना को अत्यंत पीड़ादायक करार देते हुए संपूर्ण घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि हाई-टेंशन लाइन के नीचे रथ संचालन और बच्चों की भागीदारी के बिंदुओं पर विस्तृत पड़ताल की जा रही है, तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री ने भी इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।