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  • ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समूह किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी का सम्मान करने और साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच के साथ काम करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित रही है। इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने इन प्राथमिकताओं के जरिए ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है।

    उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन देने के लिए सभी सदस्य देशों का आभार भी जताया।

    ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने को प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अपने विकास के ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और सामर्थ्य को नई दिशा देने की जरूरत होती है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स की सोच किसी के खिलाफ खड़े होने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। इसके लिए संगठन को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्षता बदलने से संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्रिक्स में निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

    उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ट्रोइका के माध्यम से ब्रिक्स की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों का फॉलोअप किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग अध्यक्षताओं के बीच निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पहले से तय पहलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

    18वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप, भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और संगठन के अगले 20 वर्षों की दिशा पर अपना दृष्टिकोण रखा। उनके संबोधन में सहयोग, निरंतरता, कार्यान्वयन और वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर रहा।

  • लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्य, महापुरुषों की आत्मकथाएं, धार्मिक ग्रंथ और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। किताबें व्यक्ति को नई दिशा देने के साथ जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन भी कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की और इसे हर बच्चे के लिए पढ़ने योग्य बताया।

    योगी ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए तो कभी जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में। मुश्किल समय में जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी किताबें संबल दे सकती हैं।

    ‘युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आज का युवा किताबों से दूर हो गया है या सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके मुताबिक जरूरत युवाओं तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करने की है।

    उन्होंने बताया कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव आने पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा कर इसे प्रोत्साहित करने को कहा था। लखनऊ में आयोजन का अच्छा परिणाम मिलने के बाद उन्होंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव कराने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोगों की भागीदारी हुई और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता।

    ज्ञान को संकुचित दायरे में न बांधें

    योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र भी तब कमजोर होते हैं, जब वे अपनी क्षमता खोने लगते हैं और अपनी विरासत से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले सीमित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़े।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ को करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान के रास्ते खुले रखने चाहिए। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है।

    9 दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच देता है। यहां ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलता है। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 अगले 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि आत्मकथाओं के जरिए महापुरुषों के संघर्ष को जाना जा सकता है और वैज्ञानिकों के शोध व उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। किताबें रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।

    57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। ग्राम सचिवालयों में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उनके मुताबिक सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूलों की तस्वीर बदली, स्मार्ट क्लास की सुविधा

    योगी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर थीं। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की स्थिति में बदलाव किया गया। भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

    चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साल के अंतराल में स्कूल की स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि तीसरी कक्षा की एक छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री भी प्रदर्शित की। उनके मुताबिक पहले सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता था।

    किताब खरीदें और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जब भी किताब खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ऐसी किताबों को भी प्राथमिकता दें, जो रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करें। अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक शोध पर आधारित पुस्तक जीवनभर प्रेरणा दे सकती है।

    उन्होंने युवाओं से खाली समय में किताब पढ़ने की आदत विकसित करने और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं को अपनी राह खुद तैयार करनी है और पुस्तक मेले इसमें महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं।

    ‘नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों का सबसे बड़ा खरीदार यूपी’

    योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इसे केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक मेले को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। यह समय की जरूरत है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । वाराणसी के भेलूपुर स्थित शिवाला इलाके में सीवर का पानी सड़कों और आसपास के घरों तक पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। सड़कों और गलियों में गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काशी घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटक भी जलभराव वाले रास्तों से गुजरते नजर आए।

    शिवाला क्षेत्र में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के साथ आसपास की गलियों में भी फैल गया। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए और आवागमन में भी परेशानी हुई। अस्सी क्षेत्र के कुछ रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति सामने आई।

    वाराणसी में सामने आई इस स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शहर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वीडियो में शिवाला इलाके की स्थिति और गंदे पानी से होकर गुजरते लोगों को दिखाया गया था।

    मामला सामने आने के बाद जलकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर अधिकारियों ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने पुरानी ट्रंक सीवर लाइन और कोनिया सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान कुछ पंप बंद मिले। इसके बाद संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर खराब पड़े पंपों को ठीक कराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बंद पंपों को दोबारा चालू कराया गया।

    नगर निगम के अनुसार, करीब डेढ़ घंटे में पंप फिर से चलने लगे। इसके बाद सड़कों और गलियों में जमा सीवर के पानी को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे प्रभावित इलाकों में जमा पानी को हटाया गया और आवागमन की परेशानी को दूर करने का प्रयास किया गया।

    वाराणसी के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जलभराव और सीवर से जुड़ी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। शिवाला और अस्सी क्षेत्र की स्थिति के बाद नगर निगम की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। खास तौर पर उन इलाकों में समस्या सामने आई जहां स्थानीय लोगों के साथ काशी घूमने आने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।

    शिवाला में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के दौरान विदेशी पर्यटकों को भी उसी रास्ते से गुजरना पड़ा। इससे इलाके में मौजूद लोगों के साथ बाहर से आए पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    नगर निगम ने तत्काल समस्या से निपटने के बाद भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार करने की बात कही है। विभाग की ओर से पंपों की स्थिति की जांच और सीवर व्यवस्था को लेकर की गई कार्रवाई के बाद तत्काल जमा पानी निकालने का काम पूरा किया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जलभराव और सीवर के पानी को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी सामने आई, वहीं दूसरी ओर मामले को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर राजनीतिक तंज कसा। उनके वीडियो साझा करने के बाद संबंधित विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए बंद पंपों को चालू कराया और जमा पानी निकालने का काम शुरू किया।

  • दूसरों की सिगरेट का धुआं भी ले सकता है जान पैसिव स्मोकिंग को हल्के में न लें बच्चों और दिल के मरीजों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक

    दूसरों की सिगरेट का धुआं भी ले सकता है जान पैसिव स्मोकिंग को हल्के में न लें बच्चों और दिल के मरीजों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक

    नई दिल्ली । धूम्रपान को हमेशा से सेहत के लिए गंभीर खतरा माना जाता है लेकिन इसका नुकसान सिर्फ सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद लोग भी सिगरेट के धुएं की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता लेकिन आसपास मौजूद व्यक्ति की सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों से निकलने वाले धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है तो इसे पैसिव स्मोकिंग या सेकंडहैंड स्मोकिंग कहा जाता है। यही वजह है कि घर ऑफिस या किसी बंद जगह पर होने वाला धूम्रपान आसपास मौजूद लोगों के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है।

    हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक सेकंडहैंड स्मोकिंग से दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है। भारत में भी यह समस्या गंभीर रूप ले रही है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में भारत में तीन लाख से अधिक मौतों का संबंध सेकंडहैंड स्मोकिंग से बताया गया। वर्ष 1990 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत बढ़ा है। इस मामले में चीन के बाद भारत का स्थान बताया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि धूम्रपान का धुआं सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए ही नहीं बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी कितना खतरनाक हो सकता है।

    पैसिव स्मोकिंग के दौरान व्यक्ति कई तरह के हानिकारक रसायनों के संपर्क में आता है। सिगरेट पीते समय निकलने वाला धुआं आसपास की हवा में फैल जाता है और वहां मौजूद व्यक्ति उसे सांस के साथ शरीर के अंदर ले सकता है। बंद कमरे में इसका खतरा और बढ़ सकता है क्योंकि धुआं लंबे समय तक हवा में मौजूद रह सकता है। लगातार ऐसे वातावरण में रहने से शरीर पर इसका प्रभाव भी बढ़ सकता है।

    बच्चों के लिए पैसिव स्मोकिंग विशेष रूप से चिंता का विषय है। धुएं के संपर्क में आने से बच्चों में सांस से जुड़ी समस्याएं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं गर्भवती महिलाओं और हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए भी सेकंडहैंड स्मोकिंग को गंभीर जोखिम माना जाता है। लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    पैसिव स्मोकिंग के तुरंत प्रभाव के तौर पर आंखों में जलन खांसी गले में परेशानी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों के बीच रहता है तो सांस की गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। सेकंडहैंड स्मोकिंग को हृदय रोग स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी जोड़ा जाता है।

    इस खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि घर को पूरी तरह स्मोक फ्री जोन बनाया जाए। परिवार में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसे घर के अंदर सिगरेट पीने से रोकना चाहिए। बच्चों को विशेष रूप से धुएं से दूर रखना जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों पर भी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से दूरी बनाए रखना बेहतर है। साथ ही लोगों को यह समझना होगा कि धूम्रपान का असर केवल धूम्रपान करने वाले तक सीमित नहीं होता। दूसरों के धुएं से बचाव भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल

    MIC में जीतू यादव की वापसी से भड़के कमलेश कालरा देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे परिवार संग बैठे धरने पर उठाए कई सवाल


    इंदौर । इंदौर में भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पार्षद कमलेश कालरा ने जीतू यादव की मेयर इन काउंसिल यानी MIC में दोबारा नियुक्ति के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को कालरा अपनी पत्नी अरुणा मां देवकी और बेटे के साथ राजबाड़ा पहुंचे और देवी अहिल्या की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए। हाथों में तख्तियां लेकर परिवार ने न्याय की मांग की। कालरा का कहना है कि जिस व्यक्ति पर उनके परिवार से जुड़े गंभीर मामले में आरोप लगे थे उसे दोबारा पार्टी में जगह देने के बाद MIC जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है।

    दरअसल महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर जीतू यादव को एक बार फिर MIC का सदस्य नियुक्त किया है। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। जीतू यादव की वापसी के साथ ही करीब डेढ़ साल पुराना कालरा और जीतू विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस विवाद के बाद भाजपा ने जीतू यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया था और उनकी MIC सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी। बाद में पुलिस की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद उनकी भाजपा में वापसी हुई और अब उन्हें MIC में भी दोबारा जिम्मेदारी मिल गई है।

    कमलेश कालरा का कहना है कि जनवरी 2025 में उनके घर पर हमला हुआ था और इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आए थे। कालरा ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान उनके परिवार को डराया गया और उनके बच्चे के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने लगातार न्याय की मांग की है लेकिन अब जीतू यादव को पार्टी में वापस लाने के साथ ही MIC में महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई है।

    कालरा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी मामले में पुलिस ने चालान पेश किया है तो अंतिम निर्णय अदालत को करना होता है। उनका कहना है कि उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। अब वे इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उनका सवाल है कि आखिर जीतू यादव को पार्टी में वापसी और MIC की जिम्मेदारी देने का फैसला किन आधारों पर किया गया।

    कालरा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत दुश्मनी के तौर पर नहीं है बल्कि वे इसे न्याय की लड़ाई मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं और पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं। उनके मुताबिक यदि एक पक्ष की बात सुनी जा रही है तो पीड़ित पक्ष की शिकायतों और सवालों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

    राजबाड़ा पर परिवार के साथ धरने पर बैठने के बाद कालरा ने संकेत दिया कि उनका विरोध अभी खत्म नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी बात पार्टी और सरकार के जिम्मेदार लोगों तक नहीं पहुंचती तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वे प्रदेश से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की बात भी कह चुके हैं।

    जीतू यादव की MIC में वापसी के बाद शुरू हुआ यह नया विवाद इंदौर भाजपा की राजनीति में आने वाले दिनों में और हलचल पैदा कर सकता है। एक तरफ संगठन ने जीतू यादव को फिर से जिम्मेदारी दी है वहीं दूसरी तरफ भाजपा के ही निर्वाचित पार्षद कमलेश कालरा खुले तौर पर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व कालरा के विरोध और उनकी न्याय की मांग पर क्या रुख अपनाता है।

  • ‘शूरवीर’ गाने पर बढ़ा विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल; ‘मिर्जापुर: द मूवी’ से हटाने की मांग

    ‘शूरवीर’ गाने पर बढ़ा विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल; ‘मिर्जापुर: द मूवी’ से हटाने की मांग

    नई दिल्ली । मिर्जापुर: द मूवी के ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म के क्लाइमेक्स में इस्तेमाल किए गए इस गाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में अदालत से फिल्म के क्लाइमेक्स से इस गाने को हटाने या इसकी जगह कोई दूसरा ट्रैक इस्तेमाल करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह गाना महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित है, ऐसे में इसे फिल्म में गैंगस्टर और अपराधी किरदारों के साथ दिखाना गलत है। प्रशांत कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गई PIL में कहा गया है कि ‘शूरवीर’ गीत मूल रूप से राजस्थान के महान योद्धा महाराणा प्रताप की वीरता और उनके गौरव को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था।

    इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में इसी गीत का इस्तेमाल काल्पनिक गैंगस्टरों और अपराधियों को दिखाने वाले सीन में किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे गीत के मूल भाव और सांस्कृतिक महत्व का गलत अर्थ निकल सकता है। उनका तर्क है कि एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय नायक को समर्पित गीत को अपराध और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना सही नहीं है।

    ‘सांस्कृतिक को पहुंच सकता है नुकसान’

    याचिका में ये भी कहा गया है कि फिल्म में अपराधियों के सीन के साथ इस गाने का इस्तेमाल राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अगर ऐसे गीतों को उनके मूल संदर्भ से हटकर इस्तेमाल किया जाता है, तो लोगों के बीच ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर गलत मैसेज जाएगा।

    PIL में अदालत से सिर्फ फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि भविष्य के लिए भी कुछ दिशानिर्देश बनाने की अपील की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अहम लोगों से जुड़े गानों और प्रतीकों का इस्तेमाल इस तरह न हो, जिससे उनका संबंध अपराध या गलत तरह की गतिविधियों से जुड़ता हुआ दिखाई दे।

    राजेंद्र राठौड़ ने भी जताई थी आपत्ति

    दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल होने से एक दिन पहले राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने ‘शूरवीर’ गीत को फिल्म से हटाने की मांग करते हुए सेंट्रल फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष को पत्र लिखा था। राठौड़ ने अपने पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को समर्पित इस गीत को फिल्म में गैंगस्टर और आपराधिक किरदारों के साथ जोड़कर दिखाना ठीक नहीं है।

    ‘शूरवीर और गैंगस्टर के मूल्यों में अंतर’

    राठौड़ ने अपने लेटर में कहा कि शूरवीर और गैंगस्टर के कैरेक्टर और उनके मूल्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। उनके मुताबिक वीरता, त्याग, स्वाभिमान और अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों को अपराध, हिंसा और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना गलत है। उन्होंने CBFC से मांग की कि फिल्म से ‘शूरवीर’ गाने को हटाया जाए और आगे किसी भी ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े गानों, प्रतीकों और चीजों के ऐसे इस्तेमाल की अनुमति न दी जाए, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे।

    अब अदालत के फैसले पर नजर

    फिलहाल, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। एक तरफ याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं इस पूरे मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी। फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटेगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही साफ होगा।

  • तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान

    तेज रफ्तार थार ने तोड़ी ब्रिज की रेलिंग फिर 50 फीट नीचे गिरी कार में फंसे चार लोगों की ऐसे बची जान


    इंदौर। इंदौर में देर रात एक भीषण सड़क हादसे ने लोगों को हैरान कर दिया। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में प्रतीक सेतु ब्रिज पर तेज रफ्तार थार अचानक अनियंत्रित हो गई और ब्रिज की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि थार नीचे गिरने के बाद पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे जो वाहन के अंदर ही फंस गए। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे लोगों और पुलिस की मदद से चारों घायलों को बाहर निकाला गया जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब साढ़े तीन बजे हुआ। ब्लैक कलर की थार अन्नपूर्णा की तरफ से बिजलपुर की ओर जा रही थी। प्रतीक सेतु ब्रिज पर पहुंचते ही कार की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। देखते ही देखते थार ब्रिज की रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि रेलिंग टूट गई और कार करीब 50 फीट नीचे जा गिरी। नीचे पहुंचने के बाद थार पलट गई। हादसे के दौरान कार के एयरबैग भी खुल गए जिससे सवार लोगों को कुछ राहत मिली।

    हादसे में कार सवार आरती उम्र 25 वर्ष अभिजीत उम्र 20 वर्ष आदित्य और लावण्या घायल हुए हैं। हादसे के बाद चारों लोग कार के अंदर फंस गए थे। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और इसके बाद रेस्क्यू कर सभी को वाहन से बाहर निकाला गया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल उनकी हालत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे की तस्वीरें सामने आने के बाद दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। थार पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आई। जिस जगह से कार नीचे गिरी उसके पास ही रेलवे ट्रैक भी मौजूद है। ऐसे में हादसा और भी गंभीर हो सकता था। गनीमत रही कि जिस समय थार ब्रिज से नीचे गिरी उस वक्त सड़क पर कोई दूसरा वाहन नहीं था। यदि उसी समय वहां से कोई वाहन गुजर रहा होता तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती थी।

    एसीपी निधि सक्सेना के अनुसार प्रतीक सेतु ब्रिज पर हुए इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं और सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है लेकिन चालक हादसे के समय नशे में था या नहीं इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना की परिस्थितियों का पता लगा रही है।

    यह हादसा एक बार फिर रात के समय तेज रफ्तार वाहन चलाने के खतरे को सामने लाता है। ब्रिज जैसे स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। इस घटना में चार लोग घायल हुए हैं लेकिन राहत की बात यह है कि सभी को समय रहते वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचा दिया गया।

  • Crude Oil Price Rise: कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5 प्रतिशत पार होने का अनुमान, एसबीआई रिसर्च ने रेपो रेट बढ़ाने को कहा

    Crude Oil Price Rise: कच्चे तेल की तेजी से महंगाई 6.5 प्रतिशत पार होने का अनुमान, एसबीआई रिसर्च ने रेपो रेट बढ़ाने को कहा

    नई दिल्ली ।वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेजी के बीच भारत में महंगाई को लेकर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकती है। ऐसे में रिपोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक से मौद्रिक नीति के स्तर पर दरों में बढ़ोतरी करने की सलाह दी है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक को अक्टूबर में रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी करनी चाहिए। इसके बाद दिसंबर में भी 25 आधार अंक की अतिरिक्त वृद्धि का सुझाव दिया गया है। इस तरह कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी की जरूरत बताई गई है। इसके पीछे मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर पड़ने वाला संभावित असर है।

    एसबीआई रिसर्च के अनुमान के मुताबिक अगस्त में महंगाई दर करीब 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच रह सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहने पर आने वाले महीनों में स्थिति बदल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक रहने की संभावना बन सकती है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल का बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। अगले 15 दिनों में इसके 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की उम्मीद भी जताई गई है। कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह की तेजी का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में लागत के रूप में दिखाई देने लगा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक खुदरा महंगाई बढ़ने के शुरुआती संकेत पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बेवरेज, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में लागत का बढ़ता बोझ अब ग्राहकों तक पहुंचने की स्थिति बन रही है। रिपोर्ट ने इन सभी परिस्थितियों को ब्याज दरों में कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी के लिए अनुकूल आधार माना है।

    लिक्विडिटी के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में जुटाए गए फंड काफी हद तक बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग जरूरतों को पूरा करते हैं। इसके साथ ही क्रेडिट की मजबूत मांग और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए मौजूदा तेजी में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद जताई गई है।

    रिपोर्ट का अनुमान है कि यदि क्रेडिट की मांग अपेक्षा के अनुरूप पूरी होती है तो वित्त वर्ष 2027 के अंत तक सिस्टम में लिक्विडिटी सामान्य स्तर पर लौट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के बाकी समय में लिक्विडिटी धीरे-धीरे कम होने की संभावना है और मार्च 2027 तक इसका स्तर आदर्श रूप से 6 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए।

    बॉन्ड बाजार को लेकर भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण अनुमान दिया गया है। कई संकेतों के आधार पर 10 साल की भारतीय बेंचमार्क यील्ड के 7.15 प्रतिशत या उससे ऊपर जाने की संभावना जताई गई है।

    वैश्विक स्तर पर भी यील्ड में तेजी का रुझान बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रमुख यील्ड पिछले दस वर्षों के उच्चतम स्तर से ऊपर जा रहे हैं। अमेरिकी यील्ड में भी तेजी देखने को मिल रही है और 10 साल की यील्ड करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 30 साल की यील्ड घटकर 5.40 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    नई दिल्ली ।भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच अफ्रीकी कारोबारियों ने देश की आर्थिक प्रगति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। नाइजीरिया के डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन इदेहाई फ्रेडरिक ने कहा कि भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए देश ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर सकता है।

    इदेहाई फ्रेडरिक के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक शानदार नेता हैं और उनके पास देश के विकास को लेकर बड़ा विजन है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में हो रही तेज प्रगति प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए जा रहे कदमों, नीतियों और साझेदारी में दिखाई देती है। उनके मुताबिक ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी भारत के नेतृत्व और दृष्टिकोण का प्रभाव स्पष्ट नजर आ रहा है।

    फ्रेडरिक ने भारत और नाइजीरिया के संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दशकों से मित्र रहे हैं और दोनों के बीच कारोबार का भी बड़ा आधार है। उन्होंने भारत को नाइजीरिया के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार में आगे और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई।

    उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी आर्थिक प्रगति के आधार पर उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भारत लक्ष्य से पहले प्राप्त कर सकता है।

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा सामने आई। अबिसीनिया बिजनेस नेटवर्क के प्रबंध निदेशक डैनियल तिरुनेह ने भारत और इथियोपिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

    डैनियल तिरुनेह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इथियोपिया यात्रा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार कुछ महीने पहले हुई इस यात्रा से भारत और इथियोपिया के संबंधों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव ब्रिक्स के मंच पर भी दिखाई दे रहा है और इथियोपिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण मंच है।

    भारत इस वर्ष 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ब्रिक्स में वर्तमान में 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच भारत की भूमिका और उसकी साझेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित है।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए राजधानी नई दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 15,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पैरामिलिट्री फोर्स की 200 कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई हैं।

    अफ्रीकी कारोबारियों की टिप्पणियों में भारत की आर्थिक प्रगति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ब्रिक्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को प्रमुखता दी गई। नाइजीरिया और इथियोपिया से जुड़े प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

    इस बीच नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहा है। सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।