Blog

  • महिला आयोग की सुनवाई में भावुक कर देने वाला मामला बच्चों ने पिता पर लगाए अफेयर और घरेलू हिंसा के आरोप

    महिला आयोग की सुनवाई में भावुक कर देने वाला मामला बच्चों ने पिता पर लगाए अफेयर और घरेलू हिंसा के आरोप


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। दो नाबालिग बच्चे अपनी मां के लिए न्याय की गुहार लेकर आयोग पहुंचे और अपने ही पिता पर गंभीर आरोप लगाए। बच्चों का कहना था कि उनके पिता का पड़ोस में रहने वाली एक शादीशुदा महिला से पिछले चार वर्षों से संबंध है। इस रिश्ते का विरोध करने पर वह उनकी मां के साथ मारपीट करते हैं और कई बार उन्हें भी प्रताड़ित किया जाता है। लगातार घरेलू तनाव के कारण उनकी मां गहरे अवसाद में चली गई हैं और आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी हैं।

    बच्चों ने आयोग के सामने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले भी पुलिस से की गई थी। उस समय उनके पिता ने शपथ पत्र देकर दोबारा ऐसा नहीं करने का भरोसा दिया था लेकिन इसके बावजूद उनका व्यवहार नहीं बदला। बच्चों का आरोप है कि संबंधित महिला के भी तीन बच्चे हैं और वह आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उक्त महिला ने उनके पिता से आर्थिक मदद ली लेकिन अब तक राशि वापस नहीं की है।

    बच्चों ने आयोग से अपनी मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

    इसी जनसुनवाई के दौरान एक अन्य पारिवारिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान भी हुआ। पति और पत्नी दोनों पक्ष आयोग के सामने उपस्थित हुए। समझाइश और बातचीत के बाद दोनों साथ रहने पर सहमत हो गए। महिला ने आगे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की इच्छा जताई जबकि पति ने भी परिवार में आपसी विश्वास और सम्मान के साथ जीवन बिताने का आश्वासन दिया।

    जनसुनवाई में एक औद्योगिक हादसे से जुड़ा मामला भी सामने आया। मंडीदीप स्थित एक फैक्ट्री के वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों के नीचे दबने से एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद अब तक उसे उचित मुआवजा नहीं मिला। सुनवाई के दौरान कंपनी का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ जिस पर महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अगली सुनवाई में कंपनी के प्रतिनिधि की अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने स्पष्ट कहा कि यदि अगली सुनवाई में भी कंपनी की ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ तो उसके खिलाफ वारंट जारी करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आयोग पूरी गंभीरता से काम करेगा।

    मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में घरेलू हिंसा कार्यस्थल पर प्रताड़ना पारिवारिक विवाद और मुआवजे से जुड़े कुल 18 मामलों पर सुनवाई की गई। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव सदस्य साधना स्थापक और सचिव सुरेश तोमर की मौजूदगी में दोनों पक्षों को सुनकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। आयोग ने दोहराया कि महिलाओं और पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    ब्रिटेन के शेल्टर होम में गधों को पहनाए जा रहे हैं विशेष पायजामे और लेगिंग्स..

    नई दिल्ली । भीषण गर्मी के दौर में जहां मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं बेजुबान जानवरों के सामने भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ब्रिटेन में तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के कारण काटने वाले जहरीले कीड़ों की तादाद में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इन मक्खियों और कीड़ों के लगातार हमलों के कारण जानवरों की त्वचा पर दर्दनाक घाव, जलन और खुजली की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इस विकट स्थिति से रेस्क्यू किए गए गधों को बचाने के लिए ब्रिटेन के डेवोन स्थित द डॉन्की सैंक्चुअरी ने एक बेहद व्यावहारिक और अनोखा तरीका अपनाया है। संस्था ने कीड़ों के सीधे संपर्क को रोकने के लिए लगभग चालीस गधों को विशेष रूप से तैयार किए गए ढीले पायजामे, लेगिंग्स और कॉटन के वस्त्र पहनाना शुरू किया है। पहली नज़र में यह पहल भले ही कौतूहल पैदा करती हो, लेकिन इसके पीछे की वैज्ञानिक सोच और संवेदनशीलता की व्यापक स्तर पर सराहना हो रही है।

    इस अनूठे सुरक्षा उपाय के विकास की प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध रही है। शुरुआत में संस्था के विशेषज्ञों ने जानवरों के पैरों की सुरक्षा के लिए पारंपरिक मोजे पहनाने का प्रयास किया था, लेकिन खेतों में निरंतर विचरण के कारण मोजे बार-बार फिसल कर निकल जाते थे। इसके बाद कर्मचारियों ने बड़े आकार के पायजामे, मैटरनिटी ट्राउज़र और लेगिंग्स का उपयोग कर नए सिरे से परीक्षण किया। कपड़े का आवरण इतना आरामदायक और ढीला रखा गया है कि जानवरों को चलने-फिरने, घास चरने और दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। ये वस्त्र कीड़ों के डंक और गधों की संवेद्य त्वचा के बीच एक अभेद्य भौतिक अवरोधक का कार्य करते हैं। रासायनिक कीटनाशक स्प्रे के बार-बार छिड़काव की तुलना में यह उपाय अधिक दीर्घकालिक और सुरक्षित सिद्ध हो रहा है।

    संस्था द्वारा गधों के शारीरिक नाप और आवश्यकताओं के अनुसार विशेष रूप से तैयार किए गए इन परिधानों को ‘डॉन-गेरी’ नाम दिया गया है, जो ‘डॉन्की’ और ‘डंगरी’ शब्दों का एक रचनात्मक संयोजन है। यह प्रयोग केवल जानवरों के स्वास्थ्य संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। कपड़ों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संस्था ने पुराने और अप्रयुक्त सूती कपड़ों के दान की अपील की है। इस अभियान में स्कॉटलैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज की री-यूज शॉप ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई है। छात्रों और स्थानीय नागरिकों द्वारा दान किए गए वस्त्रों को पुनर्चक्रित कर बेजुबान जानवरों के लिए सुरक्षात्मक पोशाक में परिवर्तित किया जा रहा है।

    वर्ष 1969 में स्थापित द डॉन्की सैंक्चुअरी वैश्विक स्तर पर उपेक्षित और प्रताड़ित जानवरों के कल्याण के लिए समर्पित एक प्रमुख वैश्विक संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। संस्था का मानना है कि जानवरों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हमेशा अत्यधिक जटिल या खर्चीली तकनीकों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि थोड़ी सी संवेदनशीलता और नवोन्मेषी सोच से बड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जा सकता है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बेजुबान गधों को कीड़ों के जानलेवा संक्रमण और असहनीय दर्द से मुक्त रखने वाली यह मानवीय पहल वर्तमान में वैश्विक स्तर पर पशु कल्याण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।

  • राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार

    राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता रेड क्रॉस चौराहे पर राहुल गांधी के प्रदर्शन के विरोध में एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। इसी दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक महिला कार्यकर्ता के हाथ में ऐसी तख्ती दिखाई दी जिस पर संविधान से जुड़ा विवादित संदेश लिखा था। पोस्टर सामने आते ही वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई।

    मौके पर मौजूद भाजपा नेताओं को जैसे ही तख्ती पर लिखे संदेश की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत उसे हटाने का प्रयास किया। बताया गया कि पार्टी के प्रवक्ता ने स्थिति को संभालते हुए विवादित तख्ती को सार्वजनिक रूप से दिखाई देने से रोक दिया। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    भारतीय जनता पार्टी का यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के जवाब में आयोजित किया गया था। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने और राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित आदिवासी छात्रावास में छात्रों की गूंज अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस दौरान वे छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ दिल्ली में हुए घटनाक्रम पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष सामने रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी।

    समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाने की तैयारी की है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं थी और इस विषय पर जनता के सामने अपना पक्ष रखा जाएगा।

    दिल्ली में हुए घटनाक्रम का असर अब प्रदेश की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक ओर भाजपा विरोध प्रदर्शन कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाने में जुटी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

    नोट: भाजपा प्रदर्शन के दौरान दिखाई देने वाली विवादित तख्ती को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं। इस मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और घटनाक्रम राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।

  • अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज

    अफगानिस्तान क्रिकेट में बड़ा बदलाव वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी नए कप्तान की तलाश हुई तेज


    नई दिल्ली । अफगानिस्तान क्रिकेट टीम को वनडे प्रारूप में बड़ा झटका लगा है। टीम के अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने वनडे कप्तानी छोड़ने का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2022 से टीम की कमान संभाल रहे शाहिदी ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह फैसला उन्होंने पूरी इच्छा और सम्मान के साथ लिया है। उनके इस निर्णय के बाद अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सामने नए कप्तान के चयन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है खासकर ऐसे समय में जब टीम 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों में जुटी हुई है।

    हशमतुल्लाह शाहिदी का कप्तानी कार्यकाल अफगानिस्तान क्रिकेट के सबसे सफल दौरों में गिना जाता है। उनकी अगुवाई में टीम ने न केवल लगातार बेहतर प्रदर्शन किया बल्कि दुनिया की कई बड़ी टीमों को हराकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। उन्होंने एशिया कप वनडे विश्व कप 2023 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जैसे बड़े टूर्नामेंटों में टीम का नेतृत्व किया और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    विश्व कप 2023 में शाहिदी की कप्तानी में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीमों को हराकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया था। टीम ने अंक तालिका में छठा स्थान हासिल किया और शानदार प्रदर्शन के दम पर चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी क्वालीफाई किया। यह उपलब्धि अफगानिस्तान क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है।

    शाहिदी ने अपने भावुक संदेश में टीम के खिलाड़ियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने लिखा कि कप्तान बनना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा और टीम की हर उपलब्धि पूरी टीम की मेहनत एकता और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने खिलाड़ियों कोचिंग स्टाफ अधिकारियों और क्रिकेट बोर्ड का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग और विश्वास के बिना यह सफर संभव नहीं था।

    द्विपक्षीय सीरीज में भी शाहिदी का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उनकी कप्तानी में अफगानिस्तान ने बांग्लादेश के खिलाफ तीन सीरीज जीती जबकि जिम्बाब्वे और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। कप्तान के रूप में उन्होंने 27 वनडे मुकाबलों में टीम को जीत दिलाई और अपनी शांत नेतृत्व शैली से खिलाड़ियों का भरोसा जीता।

    बतौर बल्लेबाज भी शाहिदी का योगदान बेहद अहम रहा। उन्होंने कप्तानी के दौरान लगातार जिम्मेदारी निभाई और मध्यमक्रम को मजबूती दी। वनडे क्रिकेट में उनका एकमात्र शतक भारत के खिलाफ आया जब उन्होंने 131 गेंदों में शानदार 102 रन बनाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। उनकी संयमित बल्लेबाजी और नेतृत्व कौशल ने अफगानिस्तान को कई यादगार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    अब अफगानिस्तान को आयरलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलनी है और इसके बाद टीम का पूरा ध्यान 2027 विश्व कप की तैयारियों पर रहेगा। ऐसे में नया कप्तान चुनना बोर्ड के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शाहिदी का इस्तीफा टीम के लिए चुनौती जरूर है लेकिन उनके द्वारा तैयार की गई मजबूत टीम भविष्य में भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखती है।

  • केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार

    केंसिंग्टन ओवल में कैरेबियाई तूफान हेटमायर और रदरफोर्ड ने पलटा मैच न्यूजीलैंड को अंतिम वनडे में मिली हार


    नई दिल्ली । बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल मैदान पर खेले गए पांचवें और अंतिम वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को दो विकेट से हराकर सीरीज का समापन जीत के साथ किया। हालांकि इस हार के बावजूद न्यूजीलैंड ने पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम करने में सफलता हासिल की। मुकाबले में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 269 रन के लक्ष्य को 47.3 ओवर में आठ विकेट खोकर हासिल कर लिया।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज को अकीम ऑगस्टे और जस्टिन ग्रीव्स ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 57 रन जोड़कर मजबूत आधार तैयार किया। ग्रीव्स ने 22 रन बनाए जबकि ऑगस्टे ने आक्रामक अंदाज में 34 रन की पारी खेली। इसके बाद कीसी कार्टि और कप्तान शाई होप ने अच्छी शुरुआत तो की लेकिन बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। एक समय वेस्टइंडीज का स्कोर 123 रन पर चार विकेट था और टीम मुश्किल में दिखाई दे रही थी।

    ऐसे समय में शेरफेन रदरफोर्ड और शिमरॉन हेटमायर ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 95 रन की अहम साझेदारी कर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। रदरफोर्ड ने 64 गेंदों पर 61 रन बनाए जिसमें दो चौके और पांच शानदार छक्के शामिल रहे। दूसरी ओर हेटमायर ने बेहद परिपक्व और आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 64 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और चार लंबे छक्के शामिल रहे। अंत तक क्रीज पर डटे रहकर उन्होंने टीम को यादगार जीत दिलाई।

    न्यूजीलैंड की ओर से जैकब डफी और जेडन लेनोक्स ने तीन तीन विकेट लेकर मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा लेकिन अंतिम क्षणों में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने कोई गलती नहीं की।

    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती विकेट जल्दी गिर गया। इसके बाद विल यंग और निक केली ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 86 रन जोड़े। विल यंग ने 56 रन जबकि निक केली ने 64 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। मध्यक्रम में टॉम लाथम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 69 रन बनाए और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड ने निर्धारित 50 ओवर में नौ विकेट पर 268 रन बनाए।

    वेस्टइंडीज की ओर से 19 वर्षीय युवा गेंदबाज विटेल लॉव्स ने प्रभावित किया और दो विकेट अपने नाम किए। अनुभवी तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने भी दो सफलताएं हासिल कर न्यूजीलैंड की रन गति पर अंकुश लगाया।

    भले ही अंतिम मुकाबले में जीत वेस्टइंडीज के हिस्से आई लेकिन पूरी सीरीज में लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर न्यूजीलैंड ने 3-2 से ट्रॉफी अपने नाम की। अंतिम मैच ने दोनों टीमों के संघर्ष और रोमांचक क्रिकेट का शानदार उदाहरण पेश किया।

  • IND vs ZIM टी20 सीरीज से पहले जिम्बाब्वे का बड़ा दांव नए विकेटकीपर त्सिगा की एंट्री अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी

    IND vs ZIM टी20 सीरीज से पहले जिम्बाब्वे का बड़ा दांव नए विकेटकीपर त्सिगा की एंट्री अनुभवी खिलाड़ियों की वापसी


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 23 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम ने अपने 15 सदस्यीय स्क्वॉड का ऐलान कर दिया है। टीम चयन में कई अहम बदलाव किए गए हैं जिनका उद्देश्य भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ संतुलित और प्रतिस्पर्धी संयोजन तैयार करना है। सबसे बड़ी चर्चा विकेटकीपर बल्लेबाज तफादजवा त्सिगा को पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने की है। टेस्ट क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके त्सिगा अब सफेद गेंद के प्रारूप में भी देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं।

    जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने इस बार युवा खिलाड़ियों और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। ऑलराउंडर वेस्ली मधेवेरे और तेज गेंदबाज न्यूमैन न्यामहुरी की भी टीम में वापसी हुई है। मधेवेरे लगभग एक वर्ष बाद टी20 टीम में लौटे हैं और उनके पास 79 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों का अनुभव है। वहीं न्यामहुरी चोट से उबरने के बाद फिर से टीम का हिस्सा बने हैं जिससे गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    इन खिलाड़ियों की वापसी के साथ क्लाइव मडेंडे टिनोटेंडा मापोसा और ताशिंगा मुसेकिवा को इस बार टीम से बाहर रखा गया है। चयनकर्ताओं का मानना है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अनुभव और संतुलन दोनों की जरूरत होगी।

    टीम की कप्तानी एक बार फिर अनुभवी ऑलराउंडर सिकंदर रजा के हाथों में रहेगी। हाल के महीनों में उनकी कप्तानी में जिम्बाब्वे ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। बांग्लादेश के खिलाफ टीम ने टेस्ट और वनडे सीरीज अपने नाम की थी हालांकि टी20 सीरीज में उसे 1-2 से हार झेलनी पड़ी थी। इसके बावजूद टीम का आत्मविश्वास मजबूत माना जा रहा है।

    भारत की बात करें तो टीम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। ऐसे में यह दौरा भारतीय टीम के लिए लय हासिल करने का अच्छा अवसर माना जा रहा है। दूसरी ओर जिम्बाब्वे भी घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाकर उलटफेर करने की कोशिश करेगा।

    दोनों टीमों के बीच पिछली टी20 भिड़ंत 2026 टी20 विश्व कप के सुपर 8 चरण में हुई थी जिसमें भारत ने 72 रन से शानदार जीत दर्ज की थी। हालांकि इस बार जिम्बाब्वे अपनी घरेलू परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने के इरादे से मैदान पर उतरेगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि हरारे की पिच पर शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को मदद मिल सकती है जिससे मुकाबले और भी रोमांचक होने की संभावना है।

    तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले जाएंगे। पहला मैच 23 जुलाई दूसरा 25 जुलाई और अंतिम मुकाबला 26 जुलाई को होगा। दोनों टीमों के पास युवा खिलाड़ियों को परखने और आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी का यह अहम अवसर होगा।

    भारत के खिलाफ जिम्बाब्वे टी20 टीम
    सिकंदर रजा कप्तान ब्रायन बेनेट रयान बर्ल तनाका चिवांगा बेन करन ब्रैड इवांस वेस्ली मधेवेरे तदीवानाशे मारुमानी वेलिंगटन मसाकाद्जा ब्लेसिंग मुजारबानी डियोन मायर्स रिचर्ड नगारवा न्यूमैन न्यामहुरी मिल्टन शुम्बा और तफादजवा त्सिगा।

  • बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा

    बॉलीवुड स्टार जॉन अब्राहम ने मुंबई में बढ़ाया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो 84 करोड़ का शानदार बंगला खरीदा


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम ने एक बार फिर अपने बड़े रियल एस्टेट निवेश से सुर्खियां बटोर ली हैं। फिल्मों के साथ कारोबार और निवेश में भी सक्रिय रहने वाले जॉन ने मुंबई के प्रतिष्ठित बांद्रा वेस्ट इलाके में लगभग 84 करोड़ रुपये की कीमत का एक शानदार बंगला खरीदा है। इस खरीद के साथ उनका रियल एस्टेट पोर्टफोलियो और भी मजबूत हो गया है। मुंबई के सबसे प्रीमियम रिहायशी क्षेत्रों में गिने जाने वाले इस इलाके में संपत्ति खरीदना लंबे समय के निवेश के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    रियल एस्टेट से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार यह बंगला बांद्रा के सेंट मार्टिन रोड पर स्थित है। पूरी संपत्ति करीब 1017.60 वर्ग मीटर के बड़े प्लॉट पर बनी हुई है। इसमें लगभग 193.12 वर्ग मीटर का निर्मित बंगला मौजूद है जबकि परिसर में करीब 31.50 वर्ग मीटर का एक अलग आउटहाउस भी बनाया गया है। विशाल खुला परिसर और प्रीमियम लोकेशन इस प्रॉपर्टी को बेहद खास बनाते हैं।

    बताया गया है कि इस सौदे की रजिस्ट्री 14 जुलाई 2026 को पूरी की गई। इस खरीद के लिए जॉन अब्राहम ने करीब 5.04 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी भी अदा की है। यह सौदा मुंबई के इस वर्ष के चर्चित हाई वैल्यू रियल एस्टेट लेनदेन में शामिल माना जा रहा है।

    यह पहली बार नहीं है जब जॉन अब्राहम ने मुंबई में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी हो। इससे पहले वर्ष 2023 में उन्होंने खार इलाके में करीब 70.83 करोड़ रुपये का एक शानदार बंगला खरीदा था। उस संपत्ति में बड़ा प्लॉट और विशाल निर्मित क्षेत्र शामिल था। लगातार हो रहे इन निवेशों से साफ है कि जॉन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं हैं बल्कि रियल एस्टेट को भी भविष्य के मजबूत निवेश के रूप में देख रहे हैं।

    फिल्मों के अलावा जॉन अब्राहम खेल जगत में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। हाल ही में वह यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी रॉटरडैम डॉकर्स के सह मालिक बने हैं। इस टीम के प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई बड़े नाम भी शामिल हैं। इससे साफ है कि अभिनेता मनोरंजन उद्योग के साथ खेल और व्यवसाय में भी अपनी पहचान लगातार मजबूत कर रहे हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो जॉन अब्राहम जल्द ही निर्देशक रोहित शेट्टी की नई बायोपिक फिल्म में मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया की भूमिका निभाते नजर आएंगे। इसके अलावा उनकी लोकप्रिय एक्शन फ्रेंचाइजी फोर्स का अगला भाग भी दर्शकों के बीच आने की तैयारी में है जिसमें वह एक बार फिर एसीपी यशवर्धन सिंह के दमदार किरदार में दिखाई देंगे।

    लगातार बड़े निवेश और नए प्रोजेक्ट यह साबित करते हैं कि जॉन अब्राहम अभिनय के साथ कारोबार और संपत्ति निर्माण के क्षेत्र में भी लंबी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुंबई के सबसे महंगे इलाकों में की गई यह नई खरीद उनके बढ़ते निवेश साम्राज्य का एक और मजबूत अध्याय मानी जा रही है।

  • जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय

    जिम्बाब्वे कप्तान सिकंदर रजा का भारत को खुला चैलेंज बोले एकतरफा नहीं होगी सीरीज रोमांच तय


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच 24 जुलाई से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज से पहले मेजबान टीम के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान देकर मुकाबले का रोमांच और बढ़ा दिया है। रजा ने भारत को सीरीज का प्रबल दावेदार मानने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह मुकाबला पूरी तरह संतुलित रहेगा और दोनों टीमों के पास जीत हासिल करने का समान अवसर होगा। उनका मानना है कि क्रिकेट में नाम से नहीं बल्कि मैदान पर प्रदर्शन से नतीजे तय होते हैं।

    हरारे स्पोर्ट्स क्लब में होने वाली इस टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 24 जुलाई को खेला जाएगा जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को इसी मैदान पर आयोजित होंगे। भारतीय टीम हालिया सीमित ओवरों की सीरीज में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी है और अब वह नई शुरुआत की तलाश में जिम्बाब्वे पहुंची है। दूसरी ओर मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान का पूरा फायदा उठाने की तैयारी में है।

    सिकंदर रजा ने कहा कि भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है लेकिन जिम्बाब्वे भी युवा खिलाड़ियों के साथ नई टीम तैयार कर रहा है। ऐसे में किसी एक टीम को पहले से विजेता घोषित करना सही नहीं होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को रोमांचक क्रिकेट देखने को मिलेगा।

    रजा ने कहा कि उनकी टीम का आत्मविश्वास हाल के प्रदर्शन से काफी बढ़ा है। जिम्बाब्वे ने इस वर्ष कई मजबूत टीमों के खिलाफ प्रभावशाली खेल दिखाया है और महत्वपूर्ण मुकाबलों में जीत दर्ज कर अपनी क्षमता साबित की है। यही कारण है कि टीम भारतीय चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    हालांकि भारत का टी20 क्रिकेट में रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है लेकिन हाल के विदेशी दौरों में मिली हार ने टीम पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में भारतीय खिलाड़ी वापसी की कोशिश करेंगे। वहीं जिम्बाब्वे की नजर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर एक और बड़ी जीत दर्ज करने पर होगी।

    गौरतलब है कि पिछले दौरे पर भारतीय टीम ने शुरुआती हार के बाद शानदार वापसी करते हुए सीरीज अपने नाम की थी लेकिन इस बार मेजबान टीम पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। सिकंदर रजा का मानना है कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा होगा और परिणाम आखिरी क्षणों तक तय नहीं होगा।

    दोनों टीमों के हालिया प्रदर्शन और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी को देखते हुए क्रिकेट प्रेमियों को एक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी टी20 सीरीज की उम्मीद रहेगी जहां हर मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

  • नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा

    नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर तीखा हमला बोले छात्रों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं सब याद रखा जाएगा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के प्रदर्शन और उनके साथ हुई कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी से उन्हें हमेशा उम्मीद रही है और आज भी वही उम्मीद उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ सिखाया है। उन्होंने कहा कि अभिनय की दुनिया में जो अनुभव उन्होंने हासिल किया उसका बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के साथ काम करते हुए मिला। इसी कारण वह छात्रों के संघर्ष और उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझते हैं।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार देखने को मिला उससे उनका मन बेहद व्यथित है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी घटना से भावुक भी हैं और भीतर से आक्रोश भी महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे हिम्मत न हारें और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखें। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो छात्रों की भावनाओं को समझते हैं और उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि युवा पीढ़ी देश के भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता रखती है और यही उम्मीद उन्हें सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती है।

    अपने संबोधन में अभिनेता ने सरकार की भी आलोचना की और कहा कि समय हर घटना का साक्षी बनता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ आज हो रहा है उसे लोग भूलेंगे नहीं और इतिहास हर बात को याद रखता है। उनका मानना है कि सत्ता में बैठे लोगों को भी यह समझना चाहिए कि जनता की भावनाओं और युवाओं की उम्मीदों का सम्मान करना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

    इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें दावा किया गया कि नसीरुद्दीन शाह अपने बेटों के साथ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो किसी विरोध प्रदर्शन का नहीं बल्कि मुंबई में आयोजित एक फिल्म स्क्रीनिंग का था और इसे गलत संदर्भ में साझा किया गया।

    नसीरुद्दीन शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिनेता का संदेश युवाओं के समर्थन और लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

  • अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन

    अनुपम खेर ने सुनाया करियर का सबसे बड़ा अफसोस बोले अमरीश पुरी से टैलेंट की वजह से होती थी जलन


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में सैकड़ों यादगार भूमिकाएं निभाई हैं लेकिन एक ऐसा किरदार भी था जो उनके हाथ में आने के बाद उनसे छिन गया। यह किरदार था फिल्म मिस्टर इंडिया के मशहूर खलनायक मोगैंबो का जिसे बाद में अमरीश पुरी ने निभाकर भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।

    अनुपम खेर ने एक पॉडकास्ट में इस घटना को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में मोगैंबो की भूमिका के लिए उनका चयन किया गया था। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर इस किरदार पर काम कर रहे थे और शुरुआती तैयारी भी हो चुकी थी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माता बोनी कपूर और अभिनेता अनिल कपूर को लगा कि जिस तरह के दमदार और प्रभावशाली खलनायक की कल्पना की गई थी उसमें अनुपम खेर पूरी तरह फिट नहीं बैठ रहे हैं।

    इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने अमरीश पुरी को इस भूमिका के लिए चुना। जब अनुपम खेर को यह पता चला तो उन्हें बेहद दुख हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना के बाद उनके मन में अमरीश पुरी के प्रति जलन पैदा हो गई थी। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह जलन किसी व्यक्तिगत दुश्मनी की नहीं बल्कि अभिनय प्रतिभा की वजह से थी।

    अनुपम खेर के अनुसार उन्हें यह महसूस होता था कि अमरीश पुरी उसी किरदार को उनसे कहीं बेहतर तरीके से निभा रहे थे। यही बात उन्हें सबसे अधिक परेशान करती थी। उन्होंने कहा कि कलाकारों के बीच ऐसी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक होती है और कई बार यही भावना व्यक्ति को बेहतर काम करने की प्रेरणा भी देती है।

    बाद में अनुपम खेर ने निर्देशक शेखर कपूर के फैसले को पूरी तरह सही माना। उनका कहना था कि वह मोगैंबो के किरदार को एक चतुर धूर्त और राजनीतिक दांवपेंच समझने वाले खलनायक के रूप में निभाना चाहते थे जबकि निर्देशक की कल्पना इससे बिल्कुल अलग थी। शेखर कपूर एक ऐसे भव्य कॉमिक बुक शैली के विलेन की तलाश में थे जिसकी स्क्रीन मौजूदगी बेहद प्रभावशाली हो और जिसे बच्चे भी याद रखें।

    अमरीश पुरी ने मोगैंबो के रूप में जिस अंदाज से अभिनय किया वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। उनका संवाद मोगैंबो खुश हुआ आज भी लोगों की जुबान पर है और यह किरदार हिंदी फिल्मों के सबसे प्रतिष्ठित खलनायकों में गिना जाता है।

    अनुपम खेर का यह अनुभव इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बड़े अवसर आखिरी समय पर हाथ से निकल जाते हैं लेकिन एक सच्चा कलाकार अपनी भावनाओं को स्वीकार करते हुए उनसे सीख भी लेता है। यही कारण है कि अनुपम खेर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।