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  • गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    गणेश उत्सव से पहले बिजली कंपनी की तैयारी, 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स से होगी रोशनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में आगामी गणेश उत्सव को देखते हुए गणेश पंडालों के लिए अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत पंडालों को घरेलू दर पर अस्थायी बिजली कनेक्शन देने की सुविधा मिलेगी। आवेदन जमा करने के 48 घंटे के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उत्सव के दौरान पंडालों में बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहरभर में बड़ी संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं, जहां रोशनी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बिजली की जरूरत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति से जुड़ी तैयारियां की गई हैं। पंडाल आयोजक अस्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ‘न्यू कनेक्शन’ सेक्शन के जरिए आवेदन कर सकते हैं।

    बिजली कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य गणेश पंडालों को भरोसेमंद अस्थायी बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है, ताकि उत्सव के दौरान बिजली व्यवस्था निर्बाध बनी रहे। कंपनी ने बताया कि पिछले वर्ष पूरे मुंबई में 1,000 से अधिक गणेश पंडालों को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई गई थी।

    इस वर्ष कनेक्शन की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने और पूरे उत्सव के दौरान भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या का तेजी से समाधान करने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाएगा।

    पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों से बिजली की वायरिंग के लिए केवल अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर का इस्तेमाल करने की अपील की गई है। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पंडाल स्थल पर बिजली की वायरिंग पूरी तरह तैयार हो और मीटर केबिन में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश मिले।

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत कनेक्शन में मानक वायर और स्विच का इस्तेमाल करने, आपात स्थिति के लिए एक सिंगल आइसोलेशन पॉइंट रखने और तारों को मानक इंसुलेशन टेप से सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। मीटर केबिन और स्विच तक पहुंचने का रास्ता भी साफ रखने को कहा गया है।

    इसके अलावा पंडाल आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कनेक्टेड लोड स्वीकृत लोड से अधिक न हो। मीटर केबिन के पास स्पष्ट संचालन निर्देशों वाला फायर एक्सटिंग्विशर और डेंजर बोर्ड रखने के साथ उचित अर्थिंग सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।

    पंडालों में अनधिकृत एक्सटेंशन या सीधे बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल नहीं करने तथा वायरिंग में अनावश्यक जोड़ से बचने की हिदायत दी गई है। मीटर केबिन के प्रवेश द्वार तक पहुंच भी बाधित नहीं होनी चाहिए।

    सुरक्षा निर्देशों के तहत आम लोगों को फ्लडलाइट्स, पेडेस्टल्स, पंखों या इंसुलेटेड वायरिंग जॉइंट्स तक पहुंचने की अनुमति नहीं देने को कहा गया है। इसके साथ ही स्वीकृत सीमा से अधिक बिजली का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है।

    गणेश मूर्ति विसर्जन के दौरान रोशनी की व्यवस्था के लिए 167 से अधिक विसर्जन स्थलों पर 2,958 फ्लडलाइट्स लगाए जाने की भी जानकारी दी गई है। इस तरह गणेश पंडालों के अस्थायी बिजली कनेक्शन के साथ विसर्जन स्थलों पर प्रकाश व्यवस्था की भी तैयारी की गई है।

  • MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात, निवेश और विकास परियोजनाओं पर हुई चर्चा

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इन बैठकों में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ राज्य में निवेश और विकास परियोजनाओं को गति देने पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के बीच हुई मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बातचीत के दौरान युवाओं के कौशल विकास और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा की। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसरों के सृजन को लेकर भी विचार साझा किए गए। मुलाकात में मध्यप्रदेश के विकास को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर सार्थक बातचीत हुई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से उनके नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान मध्यप्रदेश में वस्त्र एवं टेक्सटाइल उद्योग में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक में मध्यप्रदेश की वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य में इस क्षेत्र से जुड़ी निवेश संभावनाओं और रोजगार सृजन के अवसरों पर भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री और केंद्रीय वस्त्र मंत्री के बीच बातचीत में मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में और अधिक सशक्त बनाने से जुड़े विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान राज्य की मौजूदा वस्त्र एवं परिधान क्षमता को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने और निवेश की संभावनाओं को गति देने पर विचार हुआ।

    चर्चा का एक प्रमुख पक्ष वस्त्र क्षेत्र के माध्यम से रोजगार के अवसरों से भी जुड़ा रहा। मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल और परिधान उद्योग की संभावनाओं को देखते हुए निवेश और रोजगार सृजन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई इन मुलाकातों में राज्य के विकास से जुड़े अलग-अलग विषय सामने रहे। एक ओर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री के साथ युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, वहीं केंद्रीय वस्त्र मंत्री के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    वस्त्र क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा में मध्यप्रदेश की क्षमता को और मजबूत करने तथा राज्य को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित करने से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया। निवेश की संभावनाओं और रोजगार सृजन के पहलुओं को भी बातचीत में शामिल किया गया।

    मुख्यमंत्री की इन बैठकों का उद्देश्य मध्यप्रदेश के विकास से जुड़े विषयों को आगे बढ़ाने और राज्य में निवेश तथा विकास परियोजनाओं को गति देने से संबंधित पहलुओं पर चर्चा करना रहा। केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात में युवाओं, रोजगार, कौशल विकास और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई।

    इस दौरान देश के समावेशी विकास को गति देने और मध्यप्रदेश के वस्त्र क्षेत्र की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास में हुई इन बैठकों में राज्य में निवेश और रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने रहे।

  • भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, कुल मात्रा में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत दर्ज हुई

    भारत में एथेनॉल आपूर्ति 895 करोड़ लीटर पहुंची, कुल मात्रा में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत दर्ज हुई

    नई दिल्ली ।भारत में एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के दौरान एथेनॉल की आपूर्ति में अनाज आधारित कच्चे माल की भूमिका लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। अगस्त 2026 के अंत तक देश में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। यह मात्रा इस अवधि के लिए अनुबंधित 1,048 करोड़ लीटर एथेनॉल का करीब 85 प्रतिशत है।

    उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के अनुसार, कुल 895 करोड़ लीटर आपूर्ति में अनाज आधारित फीडस्टॉक से 624 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया। वहीं, चीनी आधारित स्रोतों से 271 करोड़ लीटर की आपूर्ति हुई। इस तरह कुल एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही।

    अनाज आधारित स्रोतों में मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। अगस्त के अंत तक मक्का से 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त अधिशेष चावल का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे 214 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया। इसके अलावा क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ।

    उद्योग संगठन के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में मक्का और अधिशेष चावल के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पादन व्यवस्था को अधिक स्थिरता मिल रही है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने के साथ किसानों के लिए कृषि उपज के नए उपयोग के अवसर भी बन रहे हैं।

    चीनी आधारित स्रोतों की भी एथेनॉल आपूर्ति में अहम भूमिका बनी हुई है। इस श्रेणी में गन्ने के रस से सबसे अधिक 149 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। बी-हेवी शीरे से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरे से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया।

    उद्योग के अनुसार, अलग-अलग फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से देश की आपूर्ति शृंखला अधिक लचीली हो रही है। इससे किसी एक फसल या कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। एथेनॉल उत्पादन के लिए कई स्रोतों के इस्तेमाल को देश के कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन की उपमहानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों का है। इसमें मक्का और भारतीय खाद्य निगम का अधिशेष चावल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, चीनी आधारित स्रोत भी आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि विभिन्न फीडस्टॉक के इस्तेमाल से भारत के एथेनॉल कार्यक्रम को मजबूती मिलती है। इससे कृषि उपज का बेहतर इस्तेमाल संभव होता है और उत्पादन से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

    हालांकि, उद्योग ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति बढ़ने के साथ स्थिर और अनुमानित मांग सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में मांग की स्थिरता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है।

    भारत की एथेनॉल खपत का दायरा भी केवल पेट्रोल में मिश्रण तक सीमित नहीं रखने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, कंप्रेस्ड बायोगैस, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अन्य औद्योगिक उपयोगों में एथेनॉल की खपत बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे में उत्पादन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ाना भी एथेनॉल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • कचरे और गंदगी से बेहाल मुंबई पर हाईकोर्ट नाराज, 26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगकर दी कड़ी चेतावनी

    कचरे और गंदगी से बेहाल मुंबई पर हाईकोर्ट नाराज, 26 वार्डों के अधिकारियों की सूची मांगकर दी कड़ी चेतावनी

    नई दिल्ली ।मुंबई में कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नगर निकाय को सख्त चेतावनी दी। न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहा जाता है, लेकिन सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे की स्थिति इस दावे पर सवाल खड़े करती है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर में जगह-जगह कचरा और गंदगी दिखाई दे रही है। अदालत ने BMC की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि क्या नगर निकाय की मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है। अदालत के मुताबिक, सफाई व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की स्थिति पैदा न हो और जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों का प्रभावी तरीके से पालन करें।

    हाईकोर्ट ने BMC को मुंबई के सभी 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा है। अदालत का यह निर्देश शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी अपना काम नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

    अदालत ने सुनवाई के दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी। कोर्ट ने कहा कि यदि वार्ड अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते हैं तो अवमानना की कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसके साथ ही BMC को सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए आखिरी मौका दिए जाने की बात कही गई।

    कचरे की समस्या पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति का भी जिक्र किया। कोर्ट ने इस संदर्भ में सिंगापुर के सख्त नियमों का उदाहरण दिया। अदालत ने कहा कि वहां लोग केवल निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालते हैं और नियमों के पालन पर जोर दिया जाता है। मुंबई में भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर अदालत ने जोर दिया।

    हाईकोर्ट ने सफाई व्यवस्था के लिए स्पष्ट और प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने की आवश्यकता बताई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गंदगी दिखाई दे रही है, तो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय शहर कहने का आधार क्या है। अदालत की सख्ती से स्पष्ट है कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    कंजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से जुड़े प्रदूषण के मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आई टिप्पणियों में अदालत ने नगर निकाय की जिम्मेदारी और अधिकारियों की जवाबदेही को प्रमुखता दी। BMC के सामने अब शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार करने और वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सुनिश्चित करने की चुनौती है।

  • बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर स्वामित्व विवाद, छह पोतियों और ट्रस्टी को नोटिस, मांगे दावेदारी के सबूत

    बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली पर स्वामित्व विवाद, छह पोतियों और ट्रस्टी को नोटिस, मांगे दावेदारी के सबूत

    फिरोजाबाद। टूंडला के अकबरपुर स्थित प्रख्यात संत बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली के पैतृक मकान पर स्वामित्व को लेकर उठे विवाद की जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने मामले में दोनों पक्षों से दावेदारी के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य मांगे हैं। समिति के अध्यक्ष एवं एडीएम (न्यायिक) अरविंद द्विवेदी ने बाबा की छह पोतियों और श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी संजय गुप्ता को नोटिस जारी किए हैं।

    प्रशासन ने संबंधित पक्षों को अपनी-अपनी दावेदारी, साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, विवाद में घरौनी में संशोधन की मांग को लेकर प्रशासन के सामने कानूनी पेच भी खड़ा हो गया है। प्रदेश स्तर पर राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।

    छह पोतियों ने डीएम से की थी शिकायत
    बाबा नीब करौरी यानी लक्ष्मी नारायण शर्मा के छोटे पुत्र स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह पुत्रियों सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और रिचा ने अगस्त में कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था।

    शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत नगला स्थित मकान संख्या 154-व, जिसमें बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय और शयन कक्ष शामिल हैं, पर श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के ट्रस्टी संजय गुप्ता ने एकाधिकार कर लिया है।

    मुंबई से आए शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से भावना रावत के पति मनोज रावत ने भी डीएम से मुलाकात की थी। उन्होंने पैतृक संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और विवाद के स्थायी समाधान के लिए डीएम की अध्यक्षता में शासकीय प्रशासनिक ट्रस्ट बनाने की मांग रखी थी।

    ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
    श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने ट्रस्ट पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट का गठन वर्ष 1996 में बाबा की धर्मपत्नी स्वर्गीय रामबेटी शर्मा ने कराया था।

    मनोज अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य हैं और बाबा की आगरा निवासी बेटी गिरजा भटेले स्वयं इसकी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा बाबा के बड़े बेटे स्वर्गीय अनेक सिंह शर्मा की बड़ी बेटी सुनीता शर्मा के पति त्रिलोकी चंद्र शर्मा, दूसरी बेटी अर्चना शर्मा और बेटे डॉ. धनंजय शर्मा भी ट्रस्ट के सदस्य हैं।

    उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य सेवा भावना से काम कर रहे हैं और संपत्ति का कोई निजी उपयोग नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति निष्पक्ष भाव से सेवा करना चाहता है, उसका स्वागत है।

    शिकायतकर्ता पक्ष बोला- ट्रस्ट पर किसी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए
    शिकायतकर्ता पोतियों में शामिल भावना रावत के पति मनोज रावत का कहना है कि उनका उद्देश्य ट्रस्ट पर किसी एक व्यक्ति के एकाधिकार को रोकना है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से प्रशासन के सामने डीएम की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि इससे बाबा की संपत्ति का दुरुपयोग रोकने और उसकी बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    घरौनी संशोधन पर रोक ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल
    प्रशासन ने विवाद की जांच शुरू कर दी है, लेकिन घरौनी में संशोधन की मांग के कारण मामले में कानूनी अड़चन सामने आ गई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने घरौनी में संशोधन की मांग की है, जबकि प्रदेश स्तर पर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू यानी राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।

    ऐसे में राजस्व नियमों की इस बंदिश के बीच जिला प्रशासन स्वामित्व विवाद का क्या कानूनी रास्ता निकालता है, इस पर निगाहें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और साक्ष्य मांगे हैं।

    जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी
    इधर, बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन विकास कार्यों को गति दे रहा है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने जन्मस्थली पहुंचकर विकास कार्यों और प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की।

    डीएम के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन नीति-2022 में संशोधन कर नीब करौरी बाबा सर्किट को शामिल किया है। इसके तहत लखनऊ, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद और मथुरा/वृंदावन को आपस में जोड़ा जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    पहले चरण में 865.98 लाख के काम
    कॉरिडोर विकास के फेज-1 में 865.98 लाख रुपए की लागत से डॉरमेट्री, रेस्तरां, सभा स्थल, डिजिटल लाइब्रेरी, सीसी रोड, सेप्टिक टैंक, समरसेबुल पंप और साइट डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं।

    वहीं फेज-2 में 222.47 लाख रुपए की लागत से टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सीसी रोड, नाली, पेवर, ट्यूबवेल, बाह्य विद्युत कार्य और म्यूरल वर्क स्वीकृत किए गए हैं।

    भूमि अधिग्रहण के बाद यहां भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सुविधा केंद्र, ध्यान एवं वेलनेस सेंटर, फूड कोर्ट, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, पार्किंग और प्रसाद मंडप जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

    अब जन्मस्थली के स्वामित्व विवाद में प्रशासन की जांच और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे। इन्हीं के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।

  • यूपी: रेलवे के ट्रैक मेंटेनेंस कोच में लगी भीषण आग, धमाके के साथ फटा सिलिंडर, एक घायल

    यूपी: रेलवे के ट्रैक मेंटेनेंस कोच में लगी भीषण आग, धमाके के साथ फटा सिलिंडर, एक घायल


    फिरोजाबाद।
    शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन के मालगोदाम के पास शनिवार दोपहर ट्रैक मेंटेनेंस के लिए खड़े कोच में अचानक आग लग गई। कोच में रखी मशीन से शुरू हुई आग कुछ ही देर में विकराल हो गई। आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठने लगीं। इसी दौरान करीब 1:25 बजे कोच के अंदर रखा सिलिंडर तेज धमाके के साथ फट गया। हादसे में एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना है।

    घटना दोपहर करीब 1 बजे शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन के पास मालगोदाम की शंटिंग लाइन पर हुई। यहां ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव के लिए कई कोच खड़े थे। इनमें से एक कोच में रखी मशीन में अचानक आग लगी। देखते ही देखते आग ने पूरे कोच को अपनी चपेट में ले लिया।

    सिलिंडर फटते ही मची भगदड़
    आग बुझाने और राहत कार्य में जुटे पुलिसकर्मी, रेलवे कर्मचारी और मौके पर मौजूद अन्य लोग सिलिंडर फटने के बाद घबरा गए। तेज धमाके की आवाज सुनते ही वहां भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाकर सुरक्षित स्थान की ओर भागे।

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। अब तक दमकल की तीन टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर मौजूद है।

    प्रयागराज डिवीजन के अधिकारी ले रहे जानकारी
    आग लगने की घटना के बाद रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्रयागराज डिवीजन के रेलवे अधिकारी लगातार घटनास्थल की जानकारी ले रहे हैं। आग लगने के कारणों और नुकसान का अभी विस्तृत आकलन किया जा रहा है।

    सिलिंडर फटने से एक व्यक्ति के घायल होने की पुष्टि हुई है। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही घटना में हुए नुकसान और आग लगने की वास्तविक वजह की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • 17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच तेज कर दी है। स्थानीय स्तर पर जांच कर चुकी सात सदस्यीय एसआईटी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, दर्ज बयानों और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों वाली केस डायरी NIA को सौंप दी है। एजेंसी अब इन तथ्यों को अपनी जांच से जोड़कर नकली नोटों के स्रोत, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क के फैलाव का पता लगाने में जुटी है। संदिग्ध लेनदेन के साथ विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    एसआईटी ने जुटाए थे बयान और साक्ष्य
    29 अगस्त को PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में तीन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला सामने आने के बाद शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की। DIG अभिषेक सिंह के निर्देश पर SSP अभिनंदन सिंह ने सात सदस्यीय SIT गठित की थी। SIT के साथ क्राइम ब्रांच ने भी आरोपियों तक पहुंचने और साक्ष्य जुटाने का काम किया।

    जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान, बरामदगी का विवरण, सामने आए तथ्य और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब एजेंसी इन तथ्यों को अपनी जांच में मिले साक्ष्यों से मिलाकर देखेगी। इससे जांच में सामने आए नए बिंदुओं और संभावित कड़ियों का पता चलने की उम्मीद है।

    नेटवर्क और लेनदेन पर NIA की नजर
    NIA की जांच का अहम बिंदु यह पता लगाना है कि नकली नोटों का नेटवर्क आखिर किस स्तर तक फैला हुआ है। एजेंसी यह भी देख रही है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं था। नकली नोटों के स्रोत के अलावा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल के मुताबिक, करेंसी चेस्ट मामले में एसआईटी ने जांच की थी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब पूरे मामले की जांच NIA कर रही है।

    NIA के एसपी ने पुलिस अधिकारियों से ली थी जानकारी
    9 सितंबर को NIA के एसपी वैभव सक्सेना ने पुलिस लाइन में SSP अभिनंदन सिंह और SP सिटी व्योम बिंदल से मुलाकात की थी। इस दौरान करेंसी चेस्ट मामले में अब तक हुई जांच के साथ पुराने नकली नोट के मामलों की जानकारी भी ली गई थी। NIA ने पहले पकड़े गए नकली नोटों से जुड़े मामलों को भी अपनी जांच में शामिल किया है। एजेंसी विदेशी कनेक्शन की संभावनाओं को भी खंगाल रही है।

    मुख्य सुरक्षा अधिकारी फिर करेंसी चेस्ट पहुंचे
    PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोट पहुंचने का स्रोत और वहां से असली करेंसी निकलने से जुड़ी कड़ियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। मामले की जांच NIA के अलावा SIT और बैंक स्तर पर भी की जा चुकी है। अभी तक एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    इसी बीच शुक्रवार को PNB की मुख्य सुरक्षा अधिकारी सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट पहुंचीं। उन्होंने मामले से जुड़े बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की और इसके बाद वापस लौट गईं।

    नकुड़ शाखा में किसान को मिला 500 का नकली नोट
    17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले की जांच के बीच नकुड़ कस्बे की तहसील रोड स्थित PNB शाखा से ग्राहक को 500 रुपये का संदिग्ध नोट दिए जाने का मामला सामने आया है। छापुर गांव निवासी किसान अंकित का आरोप है कि चेक के जरिये बैंक से निकाली गई रकम में यह नोट मिला था।

    अंकित के मुताबिक, वह अपने साथी संजीव निवासी अंबेहटी के साथ बैंक से रुपये निकालने पहुंचे थे। दोनों ने चेक के माध्यम से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये निकाले। कैशियर ने मशीन से रकम गिनने के बाद उन्हें पैसे दिए। इसके बाद दोनों एक रेस्टोरेंट पहुंचे, जहां संजीव ने रकम में से 15 हजार रुपये एक व्यक्ति को दिए। इसी दौरान दोबारा नोट गिनते समय 500 रुपये का एक नोट संदिग्ध लगा। जांच कराने पर उसे नकली बताया गया।

    इसके बाद दोनों बैंक शाखा पहुंचे और शाखा प्रबंधन से नोट बदलने की मांग की। आरोप है कि शाखा प्रबंधक और कैशियर ने शुरुआत में यह मानने से इनकार कर दिया कि नोट बैंक से दिया गया था। इससे शाखा में काफी देर तक हंगामा हुआ। अंकित के अनुसार, बाद में बैंक कर्मचारियों ने संदिग्ध नोट वापस लेकर उसकी जगह दूसरा 500 रुपये का नोट दे दिया।

    शाखा प्रबंधक संजीव अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह फिलहाल बाहर हैं। उन्होंने सोमवार को लौटने के बाद मामले में जानकारी देने की बात कही।

    क्या दोनों मामलों का आपस में संबंध है?
    नकुड़ शाखा में ग्राहक को मिले 500 रुपये के संदिग्ध नोट का मामला जिले की PNB करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों की जांच के बीच सामने आया है। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है। हालांकि, फिलहाल स्थानीय शाखा से मिले नोट और करेंसी चेस्ट में बरामद जाली नोटों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों मामलों के बीच कोई कनेक्शन है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए

    BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए


    नई दिल्ली ।
    भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 की शुरुआत हो गई है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भारत के साथ रूस, चीन, ब्राजील और BRICS के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के बीच साझा घोषणापत्र को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनने की खबर सामने आई है।

    साझा घोषणापत्र में किसी एक देश का सीधे तौर पर नाम लिए जाने की संभावना नहीं है। इसके बजाय किसी भी देश की ओर से किए जाने वाले एकतरफा युद्ध की निंदा किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। सदस्य देशों के बीच इस विषय पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। घोषणापत्र को शनिवार को अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है और इसके शाम करीब चार बजे जारी होने की बात कही गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। सदस्य देशों की ओर से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद कम करने तथा साझा सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है।

    BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, समूह के मंच पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसी बीच भारत दौरे पर पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल को लेकर कड़ा रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव और धमकी के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उनका कहना था कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेश्कियान के बीच भी मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत में सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा।

    BRICS Summit 2026 भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने वर्ष 2026 में चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता संभाली है। इसी वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे कर रहा है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान साझा घोषणापत्र पर सहमति बनने की प्रक्रिया को सदस्य देशों के बीच सामूहिक रुख तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्तावित घोषणापत्र में किसी देश को सीधे निशाना बनाने के बजाय एकतरफा युद्ध की निंदा करने की बात सामने आई है।

    ईरान और UAE के बीच तनाव के बीच सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश तथा प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत ने सम्मेलन के कूटनीतिक पक्ष को भी प्रमुखता दी है। अब साझा घोषणापत्र को अंतिम मंजूरी मिलने और उसके जारी होने का इंतजार है।

  • कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    नई दिल्ली ।सौरव दास ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की कुछ पोस्ट लगातार ब्लॉक किए जाने को लेकर Meta की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पोस्ट हटाए जाने या ब्लॉक होने से उनके अकाउंट की रीच भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की शिकायतों की जांच करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    सौरव दास के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की कई पोस्ट लगातार ब्लॉक की जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या Meta किसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उसकी उचित तरीके से जांच करता है या नहीं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर उनके अकाउंट की पहुंच पर पड़ रहा है।

    सौरव ने इस मामले से जुड़ा एक स्क्रीनशॉट भी एक्स पर साझा किया। स्क्रीनशॉट में बताया गया कि 10 सितंबर को इंस्टाग्राम पर प्रकाशित उनकी एक पोस्ट को कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किया गया। इसी कार्रवाई को लेकर उन्होंने Meta की व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। सौरव का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की शिकायतों और रिपोर्ट पर खुद उचित जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, कंपनियों को किसी सरकारी दबाव में काम नहीं करना चाहिए और प्लेटफॉर्म से जुड़ी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

    इस मामले में सौरव दास ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को लगातार टारगेट किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में सरकार की ओर से किसी खास दबाव का कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। इसलिए सरकार की ओर से कथित दबाव का आरोप फिलहाल उनके दावे के स्तर पर ही है।

    सौरव दास की ओर से उठाए गए सवालों का एक प्रमुख हिस्सा अकाउंट की रीच से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि पोस्ट के ब्लॉक होने और हटाए जाने की घटनाओं से उनके अकाउंट की पहुंच में कमी आई है। इसी वजह से उन्होंने Meta की कार्रवाई के तरीके और शिकायतों की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।

    सौरव दास के LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह दिल्ली में रहते हैं और खोजी पत्रकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। उन्होंने 2017 में RTI के जरिए जानकारी जुटाना शुरू किया था। उस समय उनकी उम्र 18 साल थी।

    बाद में सौरव दास ने पत्रकारिता में काम शुरू किया और वर्ष 2020 से पेशेवर तौर पर लिखना शुरू किया। उनके लेख कानून, सरकार, अदालत, अपराध और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न मीडिया संस्थानों में भी प्रकाशित हुए हैं। इनमें द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू शामिल हैं।

    फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र 10 सितंबर की वह इंस्टाग्राम पोस्ट है, जिसे कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किए जाने की जानकारी स्क्रीनशॉट में सामने आई। सौरव दास ने इस कार्रवाई के साथ अपने अकाउंट की घटती रीच और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • Zomato COD Charges: कैश ऑन डिलीवरी चुनने वाले ग्राहकों से 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूलेगी कंपनी

    Zomato COD Charges: कैश ऑन डिलीवरी चुनने वाले ग्राहकों से 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूलेगी कंपनी

    नई दिल्ली ।ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने कैश ऑन डिलीवरी यानी COD विकल्प चुनने वाले ग्राहकों के लिए अतिरिक्त शुल्क लागू करना शुरू किया है। अब डिलीवरी के समय नकद भुगतान करने वाले ग्राहकों को ऑर्डर के सामान्य बिल के अलावा 5 से 20 रुपये तक अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। कंपनी के ऐप पर बिल विवरण में यह राशि ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ के नाम से अलग से दिखाई जा रही है।

    यह शुल्क केवल उन ग्राहकों पर लागू हो रहा है, जो ऑनलाइन भुगतान करने के बजाय ऑर्डर की डिलीवरी के समय नकद भुगतान का विकल्प चुनते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ज्यादातर मामलों में यह शुल्क 5 रुपये है। हालांकि, कुछ ऑर्डरों में ग्राहकों से 7 रुपये और कुछ मामलों में 20 रुपये तक भी वसूले गए हैं। शुल्क की राशि अलग-अलग ऑर्डर में अलग हो सकती है।

    ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ को जोमैटो के पहले से लागू दूसरे शुल्कों से अलग रखा गया है। ग्राहकों को प्लेटफॉर्म शुल्क के अलावा रेस्तरां की ओर से लिया जाने वाला पैकेजिंग शुल्क और जीएसटी भी देना होता है। ऐसे में कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनने पर कुल बिल में यह अतिरिक्त राशि भी जुड़ रही है। वहीं, ऑनलाइन भुगतान करने वाले ग्राहकों से इस शुल्क की वसूली नहीं की जा रही है।

    जोमैटो के लिए यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनी फूड डिलीवरी कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी आय के नए स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी रोजाना करीब 23 लाख से 25 लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करती है। इतने बड़े ऑर्डर वॉल्यूम के बीच प्रति ऑर्डर छोटी अतिरिक्त फीस भी कंपनी के राजस्व पर असर डाल सकती है।

    फूड डिलीवरी बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। रैपिडो का फूड डिलीवरी ब्रांड ओनली तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट भी अपने ‘ईट इन’ फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म का परीक्षण कर रहा है। ऐसे माहौल में जोमैटो अपने कारोबार से आय बढ़ाने के लिए भुगतान के तरीके से जुड़े शुल्क का इस्तेमाल कर रही है।

    फूड डिलीवरी कंपनियों ने वर्ष 2023 में पहली बार प्लेटफॉर्म फीस लागू करना शुरू किया था। इसकी शुरुआत स्विगी ने 2 रुपये प्रति ऑर्डर के शुल्क से की थी। इसके बाद जोमैटो ने भी प्लेटफॉर्म फीस लागू की। समय के साथ कंपनी ने इस शुल्क में बढ़ोतरी की और इस वर्ष इसे 12.50 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया। इस शुल्क पर जीएसटी अलग से लिया जाता है।

    मौजूदा ऑर्डर वॉल्यूम को देखते हुए प्रति ऑर्डर शुल्क में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनी के लिए सालाना आधार पर अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। कैश ऑन डिलीवरी फीस इसी दिशा में एक और कदम है, जिसमें भुगतान के विकल्प के आधार पर ग्राहकों से अलग राशि ली जा रही है।

    जोमैटो हाल के महीनों में लागत नियंत्रण और परिचालन ढांचे में बदलाव पर भी काम कर रही है। अगस्त में सामने आई जानकारी के अनुसार, कंपनी ने संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के बाद करीब 250 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसी प्रक्रिया के तहत हैदराबाद स्थित कस्टमर डिलाइट ऑपरेशंस को बंद करने और बची हुई इन-हाउस ग्राहक सहायता गतिविधियों को गुरुग्राम में एकीकृत करने का फैसला लिया गया था।