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  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • श्रीगणेश की कृपा चाहिए तो जान लें उनकी प्रिय चीजें सही विधि से पूजा करने पर खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के नए रास्ते

    श्रीगणेश की कृपा चाहिए तो जान लें उनकी प्रिय चीजें सही विधि से पूजा करने पर खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के नए रास्ते


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता बुद्धि के दाता और शुभ लाभ के देवता कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से भगवान गणेश की आराधना करता है उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख समृद्धि सफलता तथा सौभाग्य का आगमन होता है। लेकिन बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न रहता है कि भगवान गणेश को सबसे अधिक क्या पसंद है और उन्हें शीघ्र प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका क्या है।

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा घास अत्यंत प्रिय है। पूजा के समय तीन या इक्कीस गांठ वाली ताजी दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन से संकट दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही उन्हें मोदक और बेसन के लड्डू का भोग लगाना भी विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि मोदक भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग है और इसे अर्पित करने से घर में सुख समृद्धि और धन की वृद्धि होती है।

    भगवान गणेश को लाल रंग भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा में लाल फूल लाल चंदन और सिंदूर अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के समय शुद्ध घी का दीपक जलाकर धूप दिखानी चाहिए और श्रद्धा के साथ गणेश चालीसा अथवा गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए। यदि समय कम हो तो केवल ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस मंत्र के नियमित जाप से मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

    भगवान गणेश केवल पूजा सामग्री से ही नहीं बल्कि भक्त के सच्चे भाव से भी प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सत्य का पालन करता है विनम्र रहता है माता पिता और गुरु का सम्मान करता है तथा जरूरतमंदों की सहायता करता है उस पर भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहती है। इसलिए पूजा के साथ अच्छे कर्म करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है।

    बुधवार का दिन भगवान गणेश की विशेष आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान गणेश को दूर्वा लाल फूल सिंदूर तथा मोदक अर्पित करें। इसके बाद गरीबों को हरे मूंग फल या भोजन का दान करें। यह उपाय बुध ग्रह को भी मजबूत करता है और शिक्षा व्यापार नौकरी तथा करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को क्रोध अहंकार छल कपट और अपमान बिल्कुल पसंद नहीं है। इसलिए उनकी पूजा करते समय मन को शांत रखें किसी के प्रति द्वेष न रखें और सकारात्मक विचारों के साथ आराधना करें। यदि किसी कार्य में बार बार बाधाएं आ रही हों या आर्थिक संकट बना हुआ हो तो नियमित रूप से भगवान गणेश के मंदिर जाकर उनके दर्शन करें और श्रद्धा के साथ उनकी आरती करें। ऐसा करने से धीरे धीरे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

    भगवान श्रीगणेश की कृपा पाने का सबसे बड़ा मंत्र सच्ची श्रद्धा विश्वास और अच्छे कर्म हैं। जब भक्ति के साथ सेवा और सदाचार जुड़ जाते हैं तब भगवान गणेश अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

  • बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    बारिश के मौसम में चिपचिपी त्वचा से पाएं राहत, मुल्तानी मिट्टी, बेसन और खीरे से करें स्किन की नेचुरल केयर

    नई दिल्ली ।मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन हवा में बढ़ी नमी और उमस त्वचा, खासकर ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए कई परेशानियां लेकर आती है। इस दौरान चेहरे पर अतिरिक्त तेल जमा होने लगता है, जिससे त्वचा चिपचिपी महसूस होती है। साथ ही पिंपल्स, ब्लैकहेड्स और रोमछिद्र बंद होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में त्वचा की नियमित देखभाल और सही घरेलू उपाय अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    ऑयली स्किन की देखभाल के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का फेस पैक एक लोकप्रिय घरेलू विकल्प माना जाता है। मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त तेल और गंदगी को सोखने में मदद करती है, जबकि गुलाब जल त्वचा को ठंडक और ताजगी प्रदान करता है। इसे तैयार करने के लिए दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी में आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगभग 15 मिनट तक लगाकर रखें और सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में एक या दो बार इसका उपयोग किया जा सकता है।

    बेसन और दही का फेस पैक भी त्वचा की सफाई और देखभाल के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। बेसन त्वचा की सतह पर जमी गंदगी और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है, जबकि दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन में एक चम्मच ताजा दही मिलाकर पेस्ट तैयार करें। चाहें तो इसमें एक चुटकी हल्दी भी मिलाई जा सकती है। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगाने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए धो लें।

    खीरा और एलोवेरा जेल का फेस पैक भी मानसून में त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करने के लिए उपयोगी माना जाता है। आधे खीरे को पीसकर उसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाकर रखें। इसके बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। यह फेस पैक त्वचा को ताजगी देने के साथ अतिरिक्त तेल कम करने में भी मदद कर सकता है।

    घरेलू फेस पैक के साथ-साथ त्वचा की नियमित देखभाल भी बेहद जरूरी है। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करना, ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का उपयोग करना और मौसम चाहे कोई भी हो, सनस्क्रीन लगाना त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे का असर भी अलग-अलग हो सकता है। पहली बार किसी फेस पैक का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। यदि त्वचा पर लालपन, जलन, खुजली या एलर्जी जैसी समस्या दिखाई दे तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। लगातार मुंहासे, संक्रमण या अन्य गंभीर त्वचा संबंधी समस्याओं की स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

  • स्किन केयर का नया सुपरफूड बना रोज़मेरी वॉटर जानिए कैसे दूर कर सकता है डलनेस ऑयली स्किन और मुंहासों की परेशानी

    स्किन केयर का नया सुपरफूड बना रोज़मेरी वॉटर जानिए कैसे दूर कर सकता है डलनेस ऑयली स्किन और मुंहासों की परेशानी


    नई दिल्ली । इन दिनों प्राकृतिक स्किन केयर का चलन तेजी से बढ़ रहा है और लोग ऐसे उपायों की तलाश में हैं जो बिना ज्यादा केमिकल के त्वचा को स्वस्थ और दमकता हुआ बनाए रखें। इसी वजह से रोज़मेरी वॉटर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रोज़मेरी एक सुगंधित जड़ी बूटी है जिसका उपयोग लंबे समय से सौंदर्य और हर्बल देखभाल में किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुण त्वचा की देखभाल में मददगार माने जाते हैं। नियमित और सही तरीके से उपयोग करने पर यह चेहरे को ताजगी देने और त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

    रोज़मेरी वॉटर का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह त्वचा पर जमा धूल मिट्टी और अतिरिक्त तेल को हटाने में मदद कर सकता है। दिनभर प्रदूषण और धूप के संपर्क में रहने से त्वचा अपनी चमक खोने लगती है। ऐसे में चेहरे की सफाई के बाद रोज़मेरी वॉटर का उपयोग करने से त्वचा अधिक ताजा और साफ महसूस हो सकती है। कई लोग इसे प्राकृतिक फेस मिस्ट या टोनर के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

    रोज़मेरी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक माने जाते हैं। इससे त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यदि त्वचा बेजान और थकी हुई दिखाई देती है तो नियमित स्किन केयर रूटीन में रोज़मेरी वॉटर को शामिल करना लाभदायक हो सकता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की त्वचा के प्रकार और देखभाल की आदतों पर भी निर्भर करते हैं।

    ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए भी रोज़मेरी वॉटर उपयोगी माना जाता है। यह त्वचा पर अतिरिक्त तेल को संतुलित रखने में मदद कर सकता है जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। इसके साथ ही जिन लोगों को हल्की सूजन या लालिमा की समस्या रहती है उनके लिए भी यह आरामदायक महसूस हो सकता है। फिर भी यदि त्वचा बहुत संवेदनशील है या किसी प्रकार की एलर्जी की समस्या है तो उपयोग से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है।

    रोज़मेरी वॉटर का इस्तेमाल करना भी आसान है। सबसे पहले चेहरे को किसी सौम्य फेस वॉश से साफ करें। इसके बाद कॉटन की मदद से या स्प्रे बोतल के जरिए रोज़मेरी वॉटर चेहरे पर लगाएं। इसे प्राकृतिक रूप से सूखने दें और फिर अपनी पसंद का मॉइस्चराइजर लगाएं। दिन में एक या दो बार इसका उपयोग किया जा सकता है। यदि इसे घर पर तैयार करना हो तो रोज़मेरी की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और छानकर साफ बोतल में भरकर फ्रिज में कुछ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

    हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि केवल किसी एक प्राकृतिक उपाय से सभी त्वचा संबंधी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होता। संतुलित आहार पर्याप्त पानी नियमित नींद और धूप से बचाव भी स्वस्थ त्वचा के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि लगातार मुंहासे गंभीर एलर्जी या किसी त्वचा रोग की समस्या बनी हुई है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

    प्राकृतिक स्किन केयर अपनाने वाले लोगों के लिए रोज़मेरी वॉटर एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही तरीके से उपयोग और नियमित दिनचर्या के साथ यह त्वचा को ताजगी देने स्वस्थ बनाए रखने और प्राकृतिक निखार बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है।

  • हेयर फॉल कम करने के लिए अपनाएं घरेलू नुस्खा, नारियल तेल में बरगद की छाल मिलाकर करें इस्तेमाल; जानें सही तरीका

    हेयर फॉल कम करने के लिए अपनाएं घरेलू नुस्खा, नारियल तेल में बरगद की छाल मिलाकर करें इस्तेमाल; जानें सही तरीका

    नई दिल्ली । आज की व्यस्त जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण, असंतुलित खान-पान, तनाव और रासायनिक उत्पादों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण बालों का झड़ना और टूटना एक आम समस्या बन गया है। ऐसे में कई लोग प्राकृतिक और घरेलू उपायों की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं पारंपरिक उपायों में बरगद की छाल और नारियल तेल का मिश्रण भी शामिल है, जिसे लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। माना जाता है कि यह मिश्रण स्कैल्प को पोषण देने और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

    इस घरेलू मिश्रण को तैयार करने के लिए सबसे पहले बरगद की सूखी छाल या जटा को अच्छी तरह साफ कर धूप में पूरी तरह सुखाया जाता है। इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर या हल्का कूटकर लगभग 200 से 250 मिलीलीटर नारियल तेल में धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट तक पकाया जाता है। जब छाल का अर्क तेल में अच्छी तरह मिल जाए तो गैस बंद कर दी जाती है। ठंडा होने के बाद तेल को छानकर साफ और सूखी कांच की बोतल में सुरक्षित रखा जा सकता है।

    इस तेल का उपयोग सप्ताह में एक या दो बार किया जा सकता है। हल्का गुनगुना करने के बाद इसे स्कैल्प और बालों की जड़ों में धीरे-धीरे मालिश करते हुए लगाया जाता है। तेल लगाने के बाद इसे कम से कम 30 मिनट से एक घंटे तक बालों में रहने देना चाहिए। कई लोग इसे रातभर लगाकर अगली सुबह हल्के शैम्पू से बाल धोना भी पसंद करते हैं।

    नारियल तेल को लंबे समय से बालों की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। यह बालों को नमी प्रदान करने, रूखापन कम करने और टूटने से बचाने में सहायक माना जाता है। वहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार बरगद की छाल में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं जो स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखने और बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए व्यापक वैज्ञानिक शोध अभी सीमित हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किसी एक घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और नियमित बालों की देखभाल भी स्वस्थ बालों के लिए जरूरी है। यदि बाल अत्यधिक झड़ रहे हों, स्कैल्प में संक्रमण, खुजली या अन्य गंभीर समस्या हो, तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है।

    इस मिश्रण का पहली बार उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए, ताकि किसी संभावित एलर्जी या त्वचा की प्रतिक्रिया का पता चल सके। यदि तेल लगाने के बाद लालपन, जलन, खुजली या किसी प्रकार की असुविधा महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। स्कैल्प पर घाव, संक्रमण या किसी गंभीर त्वचा रोग की स्थिति में बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसे घरेलू उपाय अपनाने से बचना चाहिए।

    पारंपरिक घरेलू नुस्खे कई लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इनके परिणाम व्यक्ति की त्वचा, बालों की प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें संतुलित जीवनशैली और उचित हेयर केयर रूटीन के साथ अपनाना अधिक लाभकारी माना जाता है।

  • हूती संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस, सऊदी दौरे पर NSA डोवल ने तेज की रणनीतिक कवायद

    हूती संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस, सऊदी दौरे पर NSA डोवल ने तेज की रणनीतिक कवायद


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा को लेकर सक्रिय रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवल ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन रहमान से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूत बनाने पर चर्चा की।

    ईरान से जुड़े तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंकाओं के बीच भारत के लिए कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति अहम मुद्दा बन गई है। इसी कारण डोवल की सऊदी यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रही।

    सऊदी से बढ़ी भारत की तेल निर्भरता
    वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब से आता है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने के बाद सऊदी अरब ने बाब-अल-मंदेब मार्ग के जरिए भारत को तेल भेजना जारी रखा। हालांकि अब यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इस समुद्री मार्ग को भी बाधित करने की चेतावनी दिए जाने से नई चुनौती सामने आ गई है। इसी संभावित संकट से निपटने के लिए भारत कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रिय हो गया है।

    क्या है ‘डोवल डॉक्ट्रिन’?
    राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जटिल मामलों में अजित डोवल की कार्यशैली को अक्सर ‘डोवल डॉक्ट्रिन’ के रूप में देखा जाता है। डोवल कई बार कह चुके हैं कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में केवल निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उन फैसलों को सही साबित करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसी सोच के तहत भारत पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।

    ऑपरेशन राहत बना था मिसाल
    साल 2015 में यमन गृहयुद्ध के दौरान भारत ने ‘ऑपरेशन राहत’ चलाकर लगभग 4,741 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला था। इसके साथ ही करीब 2 हजार विदेशी नागरिकों को भी वहां से बाहर निकालने में मदद की गई थी। उस समय हूती गुट से भारत के औपचारिक संबंध नहीं थे, लेकिन अजित डोवल के नेतृत्व में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बैक-चैनल संवाद स्थापित किया। खुफिया तंत्र ने भारतीय नागरिकों के ठिकानों और सुरक्षित निकासी मार्गों की जानकारी जुटाई, जबकि नौसेना और वायुसेना ने अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    हूती गुट से संवाद की रणनीति
    ऑपरेशन राहत के बाद भी भारत ने हूती गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी, लेकिन यमन को भेजी जाने वाली मानवीय सहायता जारी रखी। खाद्य सामग्री और दवाओं के रूप में भेजी जाने वाली राहत का एक हिस्सा हूती प्रभाव वाले क्षेत्रों तक भी पहुंचता रहा है। माना जाता है कि यही मानवीय पहल भविष्य में संवाद की संभावनाओं को बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

    भारतीय नौसेना भी सतर्क
    भारत की नौसेना के 2 से 4 युद्धपोत लगातार यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्र में गश्त करते रहते हैं। ऐसे में यदि समुद्री मार्गों पर कोई खतरा पैदा होता है, तो भारत तेल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए नौसैनिक सहयोग भी बढ़ा सकता है।

    रक्षा सहयोग भी बढ़ सकता है
    ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ भारत और सऊदी अरब रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब उन छह देशों में शामिल है जिन्होंने भारत की ‘अस्त्र’ मिसाइल में रुचि दिखाई है। भारतीय वायुसेना के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अस्त्र मिसाइल का सफल इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इंडोनेशिया ने भी इस स्वदेशी मिसाइल की खरीद का समझौता किया है और अब सऊदी अरब भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहा है।

    चाणक्य नीति से जोड़कर देखा जा रहा सहयोग
    विशेषज्ञ इस रणनीतिक सहयोग की तुलना आचार्य चाणक्य की ‘समाश्रय नीति’ से भी करते हैं। इस नीति के अनुसार मित्र देशों के साथ केवल कूटनीतिक और आर्थिक ही नहीं, बल्कि सैन्य सहयोग भी विकसित किया जाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के हित सुरक्षित रह सकें।

    डोवल को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
    राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए अजित डोवल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 1 अगस्त को पुणे में आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगे।

    1983 में शुरू हुए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से देश और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाता है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और समाजवादी चिंतक एस. एम. जोशी जैसी हस्तियों को भी यह सम्मान मिल चुका है।

  • NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी

    NEET मुद्दे पर देशभर में तेज हुआ आंदोलन, शहर-शहर सड़कों पर उतरी कांग्रेस, जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी


    नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था और NEET परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर पर फैलता नजर आ रहा है। जंतर-मंतर से शुरू हुए आंदोलन में अब छात्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के साथ कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल भी शामिल हो गए हैं। संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राहुल गांधी की हिरासत के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।

    जंतर-मंतर से शुरू होकर कई राज्यों तक पहुंचा आंदोलन
    दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन अब कई राज्यों में फैल चुका है। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज की स्थिति बनी तथा कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सोशल मीडिया पर घायल छात्रों के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा तेज हो गई।

    राहुल गांधी की हिरासत के बाद बढ़ा सियासी तापमान
    मंगलवार शाम कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। वहीं, सरकार का कहना है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।

    संसद में भी गूंजा मामला
    संसद के मानसून सत्र में भी NEET और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना नियमों के विरुद्ध है।

    बारिश के बीच भी जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी
    बुधवार सुबह दिल्ली में बारिश के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या पहले से अधिक दिखाई दी। आयोजकों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    अहमदाबाद सहित कई शहरों में प्रदर्शन
    दिल्ली के अलावा अहमदाबाद में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। वहीं हैदराबाद, मुंबई, प्रयागराज सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।

    प्रीति जिंटा ने दी प्रतिक्रिया
    बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने कहा कि छात्रों का समर्थन करना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उचित है, लेकिन यह भी जरूरी है कि शांतिपूर्ण आंदोलन का दुरुपयोग देशविरोधी तत्व न कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया पर बढ़ती नफरत और विभाजनकारी माहौल पर भी चिंता जताई।

    राज्यसभा में चर्चा की मांग
    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सदन का कामकाज स्थगित कर NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की कथित विफलता, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चर्चा कराने की मांग की है।

    आंदोलन जारी रखने का ऐलान
    जंतर-मंतर पर धरना दे रहे आयोजकों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं कांग्रेस ने भी राहुल गांधी की हिरासत के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज करने के संकेत दिए हैं।

  • अगले 6 महीने इन 3 राशियों पर रहेगा शनि का प्रभाव, साढ़ेसाती के दौरान बरतनी होगी विशेष सावधानी

    अगले 6 महीने इन 3 राशियों पर रहेगा शनि का प्रभाव, साढ़ेसाती के दौरान बरतनी होगी विशेष सावधानी


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला और न्याय का देवता माना गया है। शनि की चाल सबसे धीमी होने के कारण उनका प्रभाव भी लंबे समय तक बना रहता है। जब शनि किसी राशि के बारहवें, प्रथम और दूसरे भाव से गोचर करते हैं, तो इस अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। इसे व्यक्ति के धैर्य, अनुशासन और कर्मों की परीक्षा का समय माना जाता है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आने वाले महीनों में मेष, कुंभ और मीन राशि के जातकों को धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। आइए जानते हैं इन तीनों राशियों पर साढ़ेसाती का क्या प्रभाव रहेगा और कब इससे राहत मिलेगी।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस दौरान आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की जरूरत होगी। अनावश्यक खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं और कुछ लोगों पर कर्ज का दबाव भी बढ़ सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मानसिक तनाव, सिरदर्द, आंखों की परेशानी और अनिद्रा जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इसलिए सेहत को लेकर लापरवाही न बरतें। पंचांग के अनुसार, मेष राशि के जातकों को 31 मई 2032 को साढ़ेसाती से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों पर इस समय साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। पंचांग के अनुसार, 3 जून 2027 को शनि के पूर्ण राशि परिवर्तन के साथ यह प्रभाव समाप्त हो जाएगा। इस अवधि में आर्थिक लेन-देन में सावधानी रखने की जरूरत है। रुका हुआ धन मिलने में देरी हो सकती है या उधार दिया गया पैसा समय पर वापस न मिले। पारिवारिक और कार्यस्थल पर गलतफहमियां भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना लाभकारी माना गया है।

    मीन राशि
    मीन राशि के जातकों पर इस समय साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे प्रभावशाली चरण चल रहा है। इस दौरान करियर और स्वास्थ्य दोनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। व्यापार में साझेदारों के साथ मतभेद हो सकते हैं, जबकि नौकरीपेशा लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सीने से जुड़ी समस्याएं या मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं। साथ ही सामाजिक और पेशेवर जीवन में अपनी छवि एवं व्यवहार को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, मीन राशि के जातकों को 8 अगस्त 2029 को साढ़ेसाती से पूरी तरह राहत मिलेगी।

    साढ़ेसाती के दौरान क्या करें?
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनि का प्रभाव हमेशा प्रतिकूल नहीं होता। यह समय व्यक्ति को अनुशासन, परिश्रम और जिम्मेदारी का महत्व सिखाता है। नियमित पूजा-पाठ, जरूरतमंदों की सहायता, संयमित जीवनशैली, खर्चों पर नियंत्रण और धैर्य बनाए रखने से साढ़ेसाती के संभावित दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • एमपी में आज 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी, अगले चार दिन तेज बारिश के आसार

    एमपी में आज 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी, अगले चार दिन तेज बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 36 घंटों से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र के अनुसार, आगामी चार दिनों तक प्रदेश में तेज बारिश का दौर बना रहेगा। बुधवार को उज्जैन, धार, गुना समेत 15 जिलों के लिए भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी भोपाल में भी रात से लगातार रिमझिम बारिश हो रही है।

    चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट
    मौसम विभाग ने शिवपुरी, गुना, सागर और डिंडौरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है। वहीं श्योपुर, अशोकनगर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, धार और बड़वानी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    इन जिलों में भी बारिश का दौर रहेगा जारी
    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश बढ़ने से सुधरे आंकड़े
    लगातार हुई बारिश का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई दिया है। एक ही दिन की बारिश से प्रदेश का कुल वर्षा घाटा 3 प्रतिशत कम हो गया है। सोमवार तक जहां मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं मंगलवार को यह घटकर 14 प्रतिशत रह गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, अब तक प्रदेश में 286.8 मिमी (11.3 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि तक 335.3 मिमी (13.2 इंच) बारिश होनी चाहिए थी। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।

    41 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश
    प्रदेश के 41 जिलों में अब भी औसत से कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में निवाड़ी को छोड़कर लगभग सभी जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है। वहीं 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम विशेषज्ञ ने क्या कहा
    मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून फिलहाल सक्रिय अवस्था में है। यदि बंगाल की खाड़ी से नमी की आपूर्ति और मौजूदा मौसमीय तंत्र बने रहते हैं, तो प्रदेश के मध्य हिस्सों में आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश जारी रह सकती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति जल संसाधनों और कृषि के लिए लाभदायक होगी, हालांकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव और यातायात संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।