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  • TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी गुट और बागी गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा की। आयोग ने दोनों गुटों के पांच-पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली बुलाया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े दावों पर निर्णय ले सकता है।

    दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में हुई। बागी गुट के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी ने की। इस गुट के साथ बैठक का समय शनिवार सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया था। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर 12 बजे चर्चा का समय तय किया गया।

    चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहल ने 9 सितंबर को दोनों गुटों को बैठक के लिए संदेश भेजा था। बैठक के लिए भेजे गए संदेश में मुलाकात के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, बैठक का मुख्य विषय दोनों पक्षों के पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किए जा रहे दावों से संबंधित बताया गया।

    आयोग दोनों गुटों की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों को सुनने के बाद इस संबंध में आगे का निर्णय ले सकता है। पार्टी के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच चुनाव आयोग की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

    पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नंदीग्राम पूर्वी मिदनापुर जिले में स्थित है। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित है।

    ऐसे में चुनाव आयोग को उपचुनाव की अंतिम नामांकन तारीख से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले पर फैसला लेना होगा। दोनों गुटों के दावों को लेकर आयोग की ओर से होने वाला निर्णय आगामी चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी आगे बढ़ रही हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजिनगर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

    टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के बीच आयोग की ओर से प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग समय पर बुलाकर उनकी बात सुनी गई। अब दोनों पक्षों के दावों और उनके पक्ष में दिए गए तर्कों पर विचार करने के बाद चुनाव आयोग को अपना निर्णय लेना है।

    इस पूरे मामले में 16 सितंबर की नामांकन अंतिम तारीख महत्वपूर्ण है। इसके बाद 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसलिए चुनाव आयोग के फैसले का सीधा संबंध आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।

  • BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    BRICS सम्मेलन के बीच अमेरिका का चीन पर गंभीर आरोप, जॉर्डन में सैन्य अड्डे पर हमले से सैटेलाइट तस्वीरों का जोड़ा संबंध

    नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बीच जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए मिसाइल हमले को लेकर एक नया आरोप सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान को चीन से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की हाई-क्वालिटी सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन तस्वीरों से ईरान को सैन्य अड्डे और वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती थी।

    अमेरिकी अधिकारियों ने जॉर्डन में मौजूद मुवफ्फक सलती एयर बेस पर हुए हमले और चीन से मिली तस्वीरों के बीच संबंध होने की बात कही है। उनके अनुसार, ईरान ने इस सैन्य अड्डे की साफ और विस्तृत सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की थीं। माना जा रहा है कि ऐसी तस्वीरों से बेस की स्थिति और वहां की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना आसान हो सकता था।

    यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य सैनिक घायल हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों के रहने वाली जगह पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था। हमले के समय कई अमेरिकी सैनिक सो रहे थे।

    यह हमला 24 घंटे के भीतर सैन्य अड्डे पर हुए तीन मिसाइल हमलों में से एक था। अप्रैल में हुए सीजफायर के बाद यह पहली ऐसी घटना थी, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान गई। इसी वजह से हमले से जुड़ी जानकारी के स्रोत और उससे संबंधित संभावित सहायता को लेकर अमेरिकी स्तर पर जांच और सवालों का सिलसिला जारी है।

    हालांकि, अमेरिका ने यह दावा नहीं किया है कि चीन की सरकार ने सीधे तौर पर ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने में मदद की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन के सामने सैटेलाइट तस्वीरों से संबंधित सवाल उठाए थे। इसके जवाब में चीन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

    चीन ने अमेरिका से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत भी मांगे हैं। अमेरिका की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीन की कौन-सी कंपनी या संस्था ने कथित तौर पर ये सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध कराई थीं। इसलिए तस्वीरों की आपूर्ति से जुड़े संस्थानों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    अमेरिका इससे पहले भी ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराने के आरोप में चीन की तीन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में जॉर्डन के सैन्य अड्डे से जुड़ा नया आरोप दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच सामने आया है।

    पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ईरान तक किस माध्यम से पहुंचीं और उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने तस्वीरों और हमले के बीच संबंध की संभावना जताई है, जबकि चीन ने सीधे तौर पर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

    जॉर्डन में हुए हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत और चार सैनिकों के घायल होने के बाद यह मामला अमेरिका के लिए सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। वहीं, चीन पर लगे आरोपों से अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति भी बनी हुई है।

  • हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग

    हनुमान अंश की टीम का भोपाल में खास अंदाज में स्वागत कलाकारों से मिलेंगे दर्शक रविवार को भी शहर में रहेगा फिल्मी रंग


    भोपाल । भोपाल में फिल्म हनुमान अंश को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। फिल्म की टीम शनिवार को भोपाल पहुंच रही है जहां कलाकार सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद करेंगे। टीम में फिल्म में पार्वती माई गोपाल बहेलिया और चांद चोर जैसे किरदार निभाने वाले कलाकार शामिल हैं। इस दौरान दर्शकों को फिल्म के कलाकारों से सीधे मिलने और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। फिल्म की टीम शनिवार शाम अवधपुरी स्थित रीगल सिनेमा पहुंचेगी जहां ऑडियंस के साथ खास बातचीत का कार्यक्रम रखा गया है।

    फिल्म में गोपाल बहेलिया का किरदार अभिनेता भगवानदास पटेल ने निभाया है जबकि पार्वती माई की भूमिका नेहा परांजपे ने निभाई है। चांद चोर के किरदार में अभिषेम मिश्रा नजर आए हैं। टीम के भोपाल दौरे को लेकर दर्शकों में खास उत्सुकता है क्योंकि फिल्म धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं से जुड़ी कहानी को पर्दे पर प्रस्तुत करती है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोपाल में हनुमान अंश फिल्म देखी थी। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी विषयवस्तु और कलाकारों के काम की सराहना की थी।

    हनुमान अंश की टीम केवल शनिवार को ही नहीं बल्कि रविवार को भी भोपाल में दर्शकों के बीच मौजूद रहेगी। रविवार सुबह 11.30 बजे टीम बंसल प्लाजा मल्टीप्लेक्स पहुंचेगी। इसके बाद दोपहर 2.30 बजे डीबी मॉल में दर्शकों से मुलाकात की जाएगी। इस दौरान फिल्म के कलाकार ऑडियंस के साथ बातचीत करेंगे और फिल्म से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। श्री हनुमान भक्त मंडल भी इस पूरे कार्यक्रम में टीम के साथ मौजूद रहेगा। मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि फिल्म के कलाकारों के साथ दर्शकों के संवाद को लेकर विशेष तैयारी की गई है।

    फिल्म की खास बात यह भी है कि इसमें मध्य प्रदेश की प्रतिभाओं को महत्वपूर्ण जगह मिली है। सागर जिले के दिव्यांग गायक सुनील लोधी ने फिल्म के लिए बुंदेली भजन गाया है। उनकी प्रतिभा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच चुकी थी। मुख्यमंत्री ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास बुलाकर सम्मानित किया था और एक लाख रुपये की सम्मान निधि भी दी थी। इसके साथ ही उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के उपचार में मदद का भरोसा दिया गया था। अब उनकी आवाज फिल्म का हिस्सा बनकर प्रदेश की लोक संस्कृति और बुंदेली संगीत को बड़े पर्दे तक पहुंचा रही है।

    फिल्म से जुड़े कलाकारों का भी मध्य प्रदेश से गहरा रिश्ता है। गोपाल का किरदार निभाने वाले भगवानदास पटेल जबलपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने थिएटर में करीब छह साल काम करने के बाद टीवी और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों और वेब सीरीज में काम करने का अवसर मिला। मुझसे फ्रेंडशिप करोगे प्रेम रतन धन पायो थार रंगबाज और फोटोग्राफ जैसे प्रोजेक्ट में वे नजर आ चुके हैं। वहीं फिल्म से जुड़े गायक साधु तिवारी का संबंध ग्वालियर से है।

    इस तरह हनुमान अंश की टीम का भोपाल दौरा केवल फिल्म के प्रचार तक सीमित नहीं है बल्कि यह मध्य प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं और धार्मिक आस्था से जुड़े कलाकारों को दर्शकों के करीब लाने का भी अवसर बन रहा है। टीम के लगातार दो दिन भोपाल में रहने से फिल्म के प्रशंसकों के बीच उत्साह और बढ़ने की उम्मीद है।

  • शराब के खिलाफ शिवपुरी में भड़का गुस्सा दुकान में घुसकर तोड़फोड़ और बोतलें फोड़ीं 15 लोगों पर केस उमा भारती बोलीं समर्थन करें

    शराब के खिलाफ शिवपुरी में भड़का गुस्सा दुकान में घुसकर तोड़फोड़ और बोतलें फोड़ीं 15 लोगों पर केस उमा भारती बोलीं समर्थन करें


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शराब दुकानों के विरोध का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिले के अलग अलग गांवों में महिलाएं और ग्रामीण शराब बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच इंदार थाना क्षेत्र के कुटवारा गांव में शराब दुकान में तोड़फोड़ और शराब की बोतलें फोड़ने का मामला सामने आया है। सेल्समैन की शिकायत पर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों में महिलाएं भी शामिल बताई गई हैं।

    बताया गया कि 11 सितंबर की शाम करीब साढ़े पांच बजे कुटवारा गांव स्थित शराब दुकान पर सेल्समैन बल्लू शिवहरे अपने साथी मनोज शिवहरे के साथ मौजूद था। इसी दौरान करीब 15 से 20 महिला और पुरुष लाठी डंडे लेकर वहां पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने शराब दुकान बंद कराने की मांग की और कथित तौर पर गाली गलौज भी की। इसके बाद कुछ लोग दुकान के अंदर घुस गए और वहां रखी शराब की पेटियों को बाहर निकालने लगे।

    सेल्समैन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने शराब की कांच की बोतलों को जमीन पर पटककर तोड़ दिया। दुकान में देशी शराब के साथ अंग्रेजी शराब और बीयर की पेटियां भी रखी थीं। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कई पेटियां तोड़कर शराब नष्ट कर दी। सेल्समैन और उसके साथी ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन भीड़ ने विरोध जारी रखा।

    इस घटना से शराब ठेकेदार को करीब चार लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और घटना में शामिल लोगों की पहचान तथा उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि तोड़फोड़ में कितने लोग शामिल थे और वास्तविक नुकसान कितना हुआ है।

    शिवपुरी में शराब दुकानों के खिलाफ विरोध केवल कुटवारा तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ दिनों से जिले के कई गांवों में महिलाएं शराब बिक्री और कथित अवैध शराब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। कई स्थानों पर महिलाओं ने शराब की पेटियां दुकानों से बाहर निकालकर नष्ट की हैं। कुछ जगहों पर सड़क जाम करने और थानों तक प्रदर्शन करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का बयान भी सामने आया है। उन्होंने शिवपुरी में शराब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और लोगों से इन महिलाओं का समर्थन करने की अपील की। उमा भारती लंबे समय से शराबबंदी और शराब की बिक्री को लेकर मुखर रही हैं। उनके समर्थन से शिवपुरी में चल रहे इस विरोध को राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा मिल गई है।

    हालांकि शराब दुकानों के खिलाफ विरोध कर रहे लोगों की मांगों को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से अलग अलग स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है। दूसरी ओर शराब कारोबारियों ने भी दुकानों और कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। कुछ ठेकेदारों ने सुरक्षा नहीं मिलने की स्थिति में लाइसेंस सरेंडर करने तक की चेतावनी दी है।

    शिवपुरी में लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने शराब बिक्री को लेकर स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष को सामने ला दिया है। अब पुलिस की जांच के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की शिकायतों और शराब दुकानों से जुड़े नियमों पर क्या कदम उठाता है।

  • बालों का झड़ना रोकने के लिए महंगे प्रोडक्ट नहीं इन आसान आदतों पर दें ध्यान खानपान से लेकर तेल लगाने तक रखें इन बातों का ख्याल

    बालों का झड़ना रोकने के लिए महंगे प्रोडक्ट नहीं इन आसान आदतों पर दें ध्यान खानपान से लेकर तेल लगाने तक रखें इन बातों का ख्याल

    नई दिल्ली । बालों का झड़ना आजकल काफी आम समस्या बन गई है। मौसम में बदलाव तनाव नींद की कमी खराब खानपान बालों पर ज्यादा केमिकल प्रोडक्ट का इस्तेमाल और स्कैल्प की ठीक से देखभाल नहीं करना इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों में रोजाना कुछ बालों का टूटना सामान्य होता है लेकिन जब बाल सामान्य से काफी ज्यादा गिरने लगें या सिर की त्वचा पर बालों का घनत्व तेजी से कम होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बालों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है।

    बालों की देखभाल में तेल लगाना एक आसान तरीका माना जाता है। नारियल तेल जैसे हल्के तेल से स्कैल्प की हल्की मालिश की जा सकती है। इससे बालों में नमी बनाए रखने और रूखेपन को कम करने में मदद मिल सकती है। तेल लगाने के दौरान स्कैल्प को जोर से रगड़ने या नाखून से खुजलाने से बचना चाहिए। हल्के हाथों से कुछ मिनट मालिश करना बेहतर रहता है। अगर किसी तेल से खुजली लालिमा या जलन होती है तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बालों की सेहत का सीधा संबंध खानपान से भी है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना जरूरी है क्योंकि बाल मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं। दालें अंडे दूध दही पनीर सोया और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा हरी सब्जियां फल मेवे और बीज भी पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। बिना जांच के किसी सप्लीमेंट या विटामिन की गोली लेना सही नहीं है।

    बाल धोते समय भी कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। बहुत गर्म पानी से सिर धोने से बाल और स्कैल्प रूखे हो सकते हैं इसलिए सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना बेहतर है। शैंपू को स्कैल्प की जरूरत के अनुसार चुनें और बालों को बहुत जोर से रगड़ने से बचें। गीले बाल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें जोर से कंघी करने के बजाय पहले हल्का सूखने दें और फिर धीरे से सुलझाएं।

    हेयर स्टाइलिंग के दौरान अत्यधिक गर्मी का इस्तेमाल भी कम करना चाहिए। लगातार हेयर स्ट्रेटनर कर्लर और तेज गर्म हवा वाले ड्रायर का इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। बहुत ज्यादा टाइट पोनीटेल या ऐसी हेयर स्टाइल जिसमें बालों की जड़ों पर लगातार खिंचाव पड़ता है उससे भी बचना चाहिए।

    अगर बाल लगातार बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं सिर में खाली पैच दिखाई दे रहे हैं खुजली या पपड़ी की समस्या है या अचानक तेजी से हेयर फॉल शुरू हुआ है तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय समस्या की असली वजह पता करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। सही खानपान नियमित नींद तनाव को नियंत्रित करना और बालों की उचित देखभाल लंबे समय में बालों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है।

  • खाना खाने के बाद भी पेट में होती है तेज गुड़गुड़ तो समझिए शरीर दे रहा है संकेत जानिए गैस से लेकर पाचन तक पूरी वजह

    खाना खाने के बाद भी पेट में होती है तेज गुड़गुड़ तो समझिए शरीर दे रहा है संकेत जानिए गैस से लेकर पाचन तक पूरी वजह


    नई दिल्ली ।
    पेट में गुड़गुड़ की आवाज आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। खासकर जब पेट काफी देर से खाली हो तो यह आवाज ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है। कई बार यह आवाज इतनी तेज होती है कि आसपास बैठे लोग भी इसे सुन लेते हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर इसे सिर्फ भूख से जोड़कर देखते हैं लेकिन पेट की गुड़गुड़ाहट के पीछे केवल भूख ही जिम्मेदार नहीं होती। पाचन तंत्र की लगातार चलने वाली गतिविधियां भी इस आवाज की बड़ी वजह हो सकती हैं।

    हमारा पाचन तंत्र भोजन करने के बाद ही सक्रिय नहीं होता बल्कि पेट और आंतों में लगातार हलचल चलती रहती है। जब हम खाना खाते हैं तो पेट और आंतों की मांसपेशियां भोजन और तरल पदार्थ को आगे बढ़ाने का काम करती हैं। इस प्रक्रिया को पेरिस्टालसिस कहा जाता है। पेट खाली होने के दौरान भी इन मांसपेशियों में समय समय पर संकुचन होता रहता है। इसी दौरान गैस और तरल पदार्थ आंतों में आगे बढ़ते हैं और इनके कारण गुड़गुड़ जैसी आवाज सुनाई देती है।

    खाली पेट यह आवाज ज्यादा सुनाई देने का एक बड़ा कारण यह है कि उस समय पेट में भोजन कम या नहीं होता। भोजन मौजूद रहने पर आंतों की गतिविधियों से पैदा होने वाली आवाज कुछ हद तक दब जाती है लेकिन खाली पेट में वही आवाज अधिक स्पष्ट हो जाती है। भूख के दौरान शरीर में होने वाले कुछ हार्मोनल बदलाव भी पाचन तंत्र की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक कुछ न खाने पर पेट में हलचल और आवाज ज्यादा महसूस हो सकती है।

    पेट की गुड़गुड़ाहट में गैस की भी अहम भूमिका हो सकती है। खाना खाते समय ज्यादा हवा निगलने या बहुत तेजी से खाने पर पाचन तंत्र में हवा बढ़ सकती है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थ भी गैस बनने की समस्या को बढ़ा सकते हैं। जब गैस आंतों के अंदर आगे बढ़ती है तो उससे भी आवाज पैदा होती है। कब्ज अपच और खानपान में अचानक बदलाव के कारण भी आंतों की सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है और पेट में आवाज ज्यादा आने लगती है।

    हालांकि हर बार पेट में गुड़गुड़ होना किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। अगर केवल आवाज आती है और इसके साथ किसी तरह की परेशानी नहीं है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर पेट में लगातार तेज आवाज के साथ दर्द उल्टी दस्त पेट फूलना या मल त्याग में परेशानी जैसी समस्या भी हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है क्योंकि कुछ मामलों में ये लक्षण पाचन तंत्र से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

    पेट को स्वस्थ रखने के लिए खानपान की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन को धीरे धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं। बहुत लंबे समय तक भूखे रहने से बचें और दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें। संतुलित आहार लें और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। अगर किसी व्यक्ति को पेट से जुड़ी समस्या बार बार हो रही है तो खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

  • 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका सहवाग को पीछे छोड़ने के लिए चाहिए तीन छक्के

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका सहवाग को पीछे छोड़ने के लिए चाहिए तीन छक्के


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का आगाज 13 सितंबर से होने जा रहा है। सीरीज का पहला मुकाबला नई दिल्ली में खेला जाएगा और इस मैच में सबसे ज्यादा नजर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर रहने वाली है। 15 साल के वैभव के पास अपने घरेलू मैदान पर पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उतरने का मौका है। अगर उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है तो वह बल्ले से धमाल मचाने के साथ ही पूर्व भारतीय विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का एक खास रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ सकते हैं।

    वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में टी20 क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई है। भारत के लिए अब तक खेले छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 193 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 32 से ज्यादा है जबकि स्ट्राइक रेट 189 के करीब रहा है। इस दौरान उनके बल्ले से दो अर्धशतक निकले हैं। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने केवल छह अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में 14 छक्के जड़ दिए हैं।

    अब उनके सामने वीरेंद्र सहवाग का रिकॉर्ड है। सहवाग ने भारत के लिए 19 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे और इस दौरान उनके बल्ले से 394 रन निकले थे। उनका स्ट्राइक रेट 145 से ज्यादा रहा था। सहवाग ने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 16 छक्के लगाए थे। ऐसे में वैभव अगर अफगानिस्तान के खिलाफ पहले मुकाबले में तीन छक्के लगाने में सफल रहते हैं तो वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए छक्कों के मामले में सहवाग से आगे निकल जाएंगे।

    हालांकि दोनों खिलाड़ियों के रिकॉर्ड की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि सहवाग का अंतरराष्ट्रीय टी20 करियर काफी छोटा रहा था। वहीं वैभव अभी अपने करियर की शुरुआत में हैं। इसके बावजूद केवल छह मैचों में 14 छक्के लगाना उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाजा देता है। वैभव जिस अंदाज में बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं उसे देखते हुए तीन छक्कों का यह आंकड़ा उनके लिए मुश्किल लक्ष्य नहीं माना जा सकता।

    वैभव का टी20 क्रिकेट में ओवरऑल रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली है। वह अब तक 40 टी20 मुकाबले खेल चुके हैं और उनके नाम 148 छक्के दर्ज हैं। आईपीएल 2026 में भी उन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया था। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 16 मैचों में 776 रन बनाए थे। उनका स्ट्राइक रेट 237 से ज्यादा रहा था। इस दौरान उन्होंने एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। पूरे सीजन में उनके बल्ले से 72 छक्के निकले और वह आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बने।

    भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में फिलहाल रोहित शर्मा सबसे आगे हैं। उनके नाम 205 छक्के हैं। सूर्यकुमार यादव 179 छक्कों के साथ दूसरे नंबर पर हैं जबकि हार्दिक पांड्या 126 छक्कों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। विराट कोहली 124 छक्कों के साथ चौथे और अभिषेक शर्मा 104 छक्कों के साथ पांचवें नंबर पर हैं।

    अब सबकी नजर वैभव पर होगी कि क्या वह अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 में मैदान पर उतरते हैं और क्या तीन छक्के लगाकर सहवाग को पीछे छोड़ने में सफल रहते हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच सीरीज के मुकाबले 13 15 और 17 सितंबर को नई दिल्ली में खेले जाएंगे। ऐसे में युवा वैभव के पास अपने घरेलू मैदान पर एक और यादगार प्रदर्शन करने का शानदार मौका होगा।

  • भारत में छिपा है अपना Mini Italy झील किनारे बसा लवासा अपनी खूबसूरती और यूरोपीय अंदाज से जीत लेगा दिल

    भारत में छिपा है अपना Mini Italy झील किनारे बसा लवासा अपनी खूबसूरती और यूरोपीय अंदाज से जीत लेगा दिल


    नई दिल्ली। अगर आपका मन इटली घूमने का है लेकिन विदेश यात्रा का बजट फिलहाल इजाजत नहीं देता तो महाराष्ट्र का लवासा आपको एक अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस दे सकता है। पहाड़ियों के बीच बसा यह खूबसूरत हिल टाउन अपनी रंगीन इमारतों शांत झील और यूरोपीय अंदाज वाली प्लानिंग के कारण बाकी पर्यटन स्थलों से काफी अलग नजर आता है। यही वजह है कि लवासा को अक्सर Mini Italy of India या Italy of India जैसे नामों से पुकारा जाता है। महाराष्ट्र पर्यटन भी लवासा को यूरोपीय वास्तुकला से प्रेरित और खूबसूरत झील के आसपास बसा हिल टाउन बताता है।

    लवासा की सबसे खास बात यहां का माहौल है। यहां पहुंचते ही आपको ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आप किसी विदेशी हॉलिडे टाउन में आ गए हों। आसपास की पहाड़ियां झील का शांत पानी और उसके किनारे बनी खूबसूरत इमारतें मिलकर इस जगह को बेहद आकर्षक बनाती हैं। खासतौर पर दासवे झील के आसपास का इलाका पर्यटकों को सबसे ज्यादा पसंद आता है। झील किनारे बनी सड़कें और आसपास नजर आने वाली रंग बिरंगी इमारतें यहां के पूरे नजारे को खास बना देती हैं।

    लवासा की वास्तुकला को इटली के मशहूर शहर पोर्टोफिनो की शैली से प्रेरित बताया जाता है। पोर्टोफिनो अपने समुद्री किनारे रंगीन इमारतों छोटी गलियों कैफे और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। इसी तरह का वातावरण महाराष्ट्र की पहाड़ियों के बीच तैयार करने की कोशिश लवासा में दिखाई देती है। यहां इमारतों के रंग और डिजाइन से लेकर झील किनारे के वॉकिंग एरिया तक में यूरोपीय शहरों की झलक नजर आती है।

    यहां की रंगीन इमारतें भी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण हैं। टेराकोटा पीच मस्टर्ड ऑलिव ग्रीन और ब्रिक रेड जैसे रंगों वाली इमारतें झील के आसपास बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं। कई जगहों पर आर्च छोटी बालकनी टाइल वाली छत और हल्के रंग की दीवारें देखने को मिलती हैं। पहाड़ों और पानी के बीच इन इमारतों का नजारा तस्वीरों के लिए भी शानदार बैकग्राउंड तैयार करता है।

    लवासा में घूमने का एक अलग आनंद पैदल चलते हुए आसपास की खूबसूरती को महसूस करने में है। झील किनारे बने रास्ते कैफे और बैठने की जगहें पर्यटकों को आराम से समय बिताने का मौका देती हैं। यहां सुबह का शांत माहौल हो या शाम के समय झील के आसपास का नजारा दोनों ही समय यह जगह बेहद आकर्षक नजर आती है।

    लवासा की खासियत केवल इसकी खूबसूरत इमारतें नहीं हैं। पहाड़ियों और झील से घिरा शांत वातावरण इसे वीकेंड ट्रिप के लिए भी आकर्षक बनाता है। महाराष्ट्र में पहले से ही लोनावला जैसे कई लोकप्रिय हिल स्टेशन हैं लेकिन लवासा अपनी यूरोपीय शैली वाली पहचान के कारण अलग अनुभव देता है। महाराष्ट्र पर्यटन भी राज्य के हिल स्टेशनों को प्राकृतिक सुंदरता और मनोरंजन के लिहाज से प्रमुख पर्यटन विकल्पों में शामिल करता है।

    अगर आप भारत में रहते हुए कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आम पहाड़ी पर्यटन स्थलों से अलग हो तो लवासा आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकता है। यहां झील है पहाड़ हैं रंग बिरंगी इमारतें हैं कैफे हैं और सबसे खास बात है विदेशी शहर जैसा माहौल। इसी अनोखे मेल के कारण लवासा को Mini Italy of India कहा जाता है और यहां पहुंचकर आपको कुछ देर के लिए सचमुच ऐसा लग सकता है कि आप भारत में नहीं बल्कि किसी यूरोपीय शहर में छुट्टियां मना रहे हैं।

  • वैभव सूर्यवंशी फिर मचाएंगे धमाल संजू की होगी वापसी नीतीश या शिवम में एक बाहर जानिए कैसी हो सकती है भारत की Playing 11

    वैभव सूर्यवंशी फिर मचाएंगे धमाल संजू की होगी वापसी नीतीश या शिवम में एक बाहर जानिए कैसी हो सकती है भारत की Playing 11


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का आगाज 13 सितंबर से दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में होने जा रहा है। सीरीज के तीनों मुकाबले इसी मैदान पर खेले जाएंगे और पहले मैच से पहले टीम इंडिया की प्लेइंग 11 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने कई अहम फैसले होंगे। खास तौर पर विकेटकीपिंग ओपनिंग और ऑलराउंडर के स्लॉट को लेकर टीम मैनेजमेंट को संतुलन बनाना होगा। संजू सैमसन की टीम में वापसी हुई है जबकि 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने हालिया प्रदर्शन से अपनी जगह काफी मजबूत कर ली है।

    संजू सैमसन के लिए यह सीरीज वापसी का बड़ा मौका है। वह जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में टीम का हिस्सा नहीं थे लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ उन्हें स्क्वॉड में शामिल किया गया है। 2026 में उनका टी20 इंटरनेशनल प्रदर्शन भी प्रभावशाली रहा है। ऐसे में उनके पहले मुकाबले में प्लेइंग 11 में शामिल होने की पूरी संभावना है। हालांकि असली सवाल यह है कि टीम में उनके साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी किसे मिलेगी। ईशान किशन भी टीम के मजबूत विकल्प हैं और हाल में घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन उन्हें टीम मैनेजमेंट की नजरों में मजबूत बनाता है।

    दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी को बाहर बैठाना आसान नहीं होगा। महज 15 साल की उम्र में वैभव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में दो अर्धशतक लगाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद दलीप ट्रॉफी में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया। ऐसे प्रदर्शन के बाद अफगानिस्तान के खिलाफ उन्हें प्लेइंग 11 में मौका मिलने की संभावना काफी मजबूत है।

    ओपनिंग में वैभव के साथ अभिषेक शर्मा को उतारा जा सकता है। हालांकि जिम्बाब्वे सीरीज में अभिषेक का बल्ला उम्मीद के मुताबिक नहीं चला था। ऐसे में उनके प्रदर्शन पर नजर रहेगी। टीम के पास संजू को ऊपर भेजने का विकल्प भी मौजूद है। अगर मैनेजमेंट संजू को ओपनिंग में उतारता है तो बल्लेबाजी क्रम में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल वैभव और अभिषेक की जोड़ी को मौका मिलने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।

    मिडिल ऑर्डर में कप्तान श्रेयस अय्यर और उपकप्तान तिलक वर्मा की जगह मजबूत नजर आती है। दोनों टीम के बल्लेबाजी क्रम को स्थिरता देने के साथ तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखते हैं। ईशान किशन को भी मध्यक्रम में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भारत एक साथ संजू और ईशान दोनों को प्लेइंग 11 में शामिल कर सकता है।

    सबसे बड़ा चयन पेंच नीतीश कुमार रेड्डी और शिवम दुबे को लेकर हो सकता है। दोनों को एक साथ खिलाने के बजाय टीम कॉम्बिनेशन के हिसाब से किसी एक को मौका मिल सकता है। अगर भारत को बल्लेबाजी में ज्यादा गहराई और पावर हिटिंग चाहिए तो शिवम दुबे उपयोगी साबित हो सकते हैं। वहीं नीतीश कुमार रेड्डी बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी का विकल्प भी देते हैं। इसलिए अंतिम फैसला पिच और टीम की रणनीति को देखकर लिया जा सकता है।

    गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की वापसी सबसे बड़ा आकर्षण होगी। उनके साथ अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती को मौका मिल सकता है जबकि अक्षर पटेल टीम के ऑलराउंड संतुलन में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत और अफगानिस्तान के बीच पहला टी20 13 सितंबर को शाम 7:30 बजे शुरू होगा।

  • ‘भारत से दुनिया में जाए शांति का संदेश’, ईरानी राष्ट्रपति से भारतीय धर्मगुरुओं ने की मुलाकात

    ‘भारत से दुनिया में जाए शांति का संदेश’, ईरानी राष्ट्रपति से भारतीय धर्मगुरुओं ने की मुलाकात


    नई दिल्ली।
    भारत के विभिन्न धर्मगुरुओं ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक शांति, न्याय, मानवता और संवाद के जरिए विवादों के समाधान पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत की धरती से पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का संदेश जाना चाहिए।

    हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के विभिन्न धर्मगुरु मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की धरती से ‘सबके लिए प्यार और किसी से नफरत नहीं’ का संदेश दिया जाता रहा है। आज जब दुनिया के कई बड़े नेता भारत में एकत्र हुए हैं, तब इस संदेश का महत्व और बढ़ जाता है।

    उन्होंने कहा कि संदेश स्पष्ट है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर अन्याय होता है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए। भारत हमेशा न्याय, करुणा, दया और एकता जैसे मूल्यों पर विश्वास करता रहा है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हुए सभी को मिलकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।

    आचार्य लोकेश मुनि ने ईरान में शांति सम्मेलन का दिया प्रस्ताव

    जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य लोकेश मुनि ने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को ईरान में शांति सम्मेलन आयोजित करने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया की नजर इस समय भारत पर है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच शांति के लिए पहल करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

    आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि धर्मगुरुओं का स्पष्ट मानना है कि युद्ध, हिंसा और आतंक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। विवादों को बातचीत, संवाद और शांति के प्रयासों के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति ने शांति सम्मेलन के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।

    उन्होंने बताया कि जल्द ही एक मंच पर धर्मगुरुओं और दुनिया में शांति की इच्छा रखने वाली ताकतों को एकत्र किया जाएगा। इस मंच के जरिए बातचीत और संवाद के माध्यम से वैश्विक शांति की दिशा में प्रयास करने की योजना है।

    मीरवाइज उमर फारूक ने युद्ध खत्म करने की अपील की

    मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि बैठक में धर्मगुरुओं, कारोबारी प्रतिनिधियों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सबसे बड़ा संदेश शांति का होना चाहिए। नई दिल्ली में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दुनिया के बड़े नेताओं की मौजूदगी इस संदेश को और प्रभावी बनाती है।

    फारूक ने कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब न्याय सुनिश्चित हो। उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान पर थोपा गया युद्ध गलत है। उन्होंने फलस्तीन और लेबनान के हालात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के कारण दुनिया में अराजकता की स्थिति पैदा हो रही है और इसका समाधान जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी मानवता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उनके मुताबिक, अगर शांति की दिशा में आगे बढ़ना है तो इंसानियत को सबसे अधिक महत्व देना होगा। आज का समय बातचीत और कूटनीति का है, युद्ध का नहीं।

    ‘अब युद्ध खत्म करने का समय’

    मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि मानव मूल्यों में विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति की पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब युद्ध खत्म करने और बातचीत को मौका देने का समय है। उनके मुताबिक, गंभीर वैश्विक संकट का समाधान निकालने का रास्ता बातचीत और समझौते की प्रक्रिया से ही निकल सकता है।

    भारत और ईरान के संबंधों का उल्लेख करते हुए फारूक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जहां भी ज्यादती और जुल्म हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने ईरान और फलस्तीन का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों को मिलकर मजबूत संदेश देना चाहिए कि युद्ध समाप्त होना चाहिए और बातचीत एवं कूटनीति को अवसर दिया जाना चाहिए।