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  • ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

    ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं।

    यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए “अंतिम नियम” के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था” की जगह लेगा।


    15 सितंबर से लागू होगा नया नियम

    नए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की शर्तों का पालन करते रहते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में कहा, “इस अंतिम नियम को लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। हम सभी छात्रों को सलाह देते हैं कि वे 8 सितंबर, 2026 से शुरू होने वाली कक्षाओं से पहले न्यूयॉर्क लौट आएं।”


    क्या-क्या बदलेगा?

    – डीएचएस ने एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय कर दी है।
    – नए नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने की छूट 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।
    – अगर किसी छात्र को अपनी अवधि बढ़ानी होगी तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से फॉर्म आई-539 के माध्यम से मंजूरी लेनी होगी।


    किन छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम?

    डीएचएस के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर को पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” के तहत मौजूद होंगे, वे अपने फॉर्म आई-20 में दर्ज कार्यक्रम पूरा होने तक या स्वीकृत ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी/एसटीईएम ओपीटी) की अवधि तक अमेरिका में रह सकेंगे। हालांकि, यह छूट भी नए नियम के लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य होगी और किसी भी स्थिति में 14 नवंबर, 2030 के बाद लागू नहीं रहेगी। इसमें देश छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि भी शामिल होगी।


    भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता

    नए नियम के बाद भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि इसका असर उनकी पढ़ाई और करियर की योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है, “चार वर्ष की सीमा आधुनिक डिग्री पाठ्यक्रमों के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में लगभग 5.7 वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और उनके निपटारे में करीब एक वर्ष लग रहा है।”

    विशेषज्ञों का कहना है, “छात्रों को पढ़ाई या शोध के बीच में ही अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे प्रयोगशालाओं को प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं का नुकसान होगा और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।” एफआईआईडीएस के अनुसार, शोध आधारित कई पाठ्यक्रम, विशेषकर पीएचडी और चिकित्सा शिक्षा, सामान्य तौर पर चार वर्ष से अधिक समय लेते हैं। वहीं, जे-1 श्रेणी के शोधकर्ता और चिकित्सकों को अपना कार्यक्रम पूरा करने में अक्सर पांच से सात वर्ष तक लग जाते हैं।

  • NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव

    NEET विवाद पर कांग्रेस ने बदली रणनीति, छात्र आंदोलन में बढ़ाई सक्रियता; सरकार पर संसद से सड़क तक बनाया दबाव


    नई दिल्ली। NEET पेपर लीक विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरुआत में आंदोलन से सीमित दूरी बनाए रखने वाली पार्टी अब खुलकर छात्रों के समर्थन में उतर आई है। संसद के भीतर से लेकर सड़क तक कांग्रेस ने सरकार को घेरने की तैयारी तेज कर दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक मुकाबला और तीखा हो गया है।

    शुरुआत में दूरी, बाद में बदला रुख

    पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने देशभर में छात्रों से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत तो की, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से खुद को अलग रखा। पार्टी के भीतर यह धारणा थी कि सीजेपी का आंदोलन राजनीतिक रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला हो सकता है। हालांकि, सीजेपी की अपील पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा जंतर-मंतर पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की।

    पार्टी ने औपचारिक रूप से आंदोलन का समर्थन नहीं किया।

    छात्र जुटे तो कांग्रेस ने बदली रणनीति

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संसद मार्च के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी और पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष है। इसके बाद पार्टी ने आंदोलन को अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    रणनीति बदलने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने सदन में इस मामले पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की।

    कानूनी सहायता का भी ऐलान

    कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी मदद उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

    पार्टी का कहना है कि आंदोलन के दौरान किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने पर उसकी हरसंभव सहायता की जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब इस आंदोलन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के पक्ष में है।

    धरना, हिरासत और फिर रिहाई

    मंगलवार को राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के निकट निषेधाज्ञा वाले क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ घंटों तक हिरासत में रखने के बाद रात में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।

    राजनीतिक मुकाबला हुआ तेज

    NEET पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विपक्ष और सरकार के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बनता जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता के बाद संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना मानी जा रही है।

  • डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    नई दिल्ली । अगर रोज़ाना एक जैसा भोजन खाकर ऊब महसूस होने लगी है, तो डिनर में जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा का पारंपरिक संयोजन स्वाद में नया बदलाव ला सकता है। हल्के मसालों की खुशबू से भरपूर जीरा राइस और खट्टे-तीखे स्वाद वाली क्रीमी कढ़ी के साथ नरम पकोड़े भारतीय भोजन की सबसे पसंदीदा डिशों में शामिल हैं। यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार भी किया जा सकता है।

    कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक कप खट्टे दही में तीन बड़े चम्मच बेसन, हल्दी, नमक और लगभग तीन कप पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रखें कि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, करी पत्ता तथा साबुत लाल मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें। अब दही और बेसन का मिश्रण इसमें डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 20 से 25 मिनट तक पकाएं, ताकि कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी और स्वादिष्ट बन सके।

    इस बीच पकोड़े तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में बेसन, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो हल्के और मुलायम पकोड़ों के लिए इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल में छोटे-छोटे पकोड़े सुनहरे होने तक तल लें। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इन पकोड़ों को उसमें डालकर लगभग आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि उनमें कढ़ी का स्वाद पूरी तरह समा जाए।

    जीरा राइस इस डिश का स्वाद और बढ़ा देते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में घी या तेल गर्म कर जीरा भूनें और फिर उसमें चावल डालकर हल्का सा मिला लें। चाहें तो इसमें थोड़ा हरा धनिया भी डाल सकते हैं। जीरे की खुशबू चावल को अलग स्वाद देती है और कढ़ी के साथ इसका मेल बेहद संतुलित लगता है।

    बेहतरीन कढ़ी बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा हल्का खट्टा दही इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक बनता है। कढ़ी को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाएं, ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और स्वाद में कच्चापन न रहे। वहीं पकोड़ों को बहुत ज्यादा सख्त न तलें, ताकि वे कढ़ी में डालने के बाद मुलायम बने रहें।

    करी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद को और बेहतर बना देता है। यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ा लाल मिर्च पाउडर घी में भूनकर डाल सकते हैं, जिससे डिश का रंग और स्वाद दोनों आकर्षक हो जाते हैं। गर्मागर्म कढ़ी पकोड़ा को जीरा राइस, पापड़, अचार और सलाद के साथ परोसकर परिवार के साथ पारंपरिक भारतीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।

  • डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    डिनर में बनाएं जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा, पारंपरिक स्वाद के साथ मिलेगा घर जैसा लाजवाब जायका

    नई दिल्ली । अगर रोज़ाना एक जैसा भोजन खाकर ऊब महसूस होने लगी है, तो डिनर में जीरा राइस और कढ़ी पकोड़ा का पारंपरिक संयोजन स्वाद में नया बदलाव ला सकता है। हल्के मसालों की खुशबू से भरपूर जीरा राइस और खट्टे-तीखे स्वाद वाली क्रीमी कढ़ी के साथ नरम पकोड़े भारतीय भोजन की सबसे पसंदीदा डिशों में शामिल हैं। यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार भी किया जा सकता है।

    कढ़ी बनाने के लिए सबसे पहले एक कप खट्टे दही में तीन बड़े चम्मच बेसन, हल्दी, नमक और लगभग तीन कप पानी मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें। ध्यान रखें कि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न रहे। इसके बाद एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें और उसमें जीरा, राई, मेथी दाना, हींग, करी पत्ता तथा साबुत लाल मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें। अब दही और बेसन का मिश्रण इसमें डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 20 से 25 मिनट तक पकाएं, ताकि कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी और स्वादिष्ट बन सके।

    इस बीच पकोड़े तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में बेसन, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और स्वादानुसार नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें। चाहें तो हल्के और मुलायम पकोड़ों के लिए इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल में छोटे-छोटे पकोड़े सुनहरे होने तक तल लें। जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तब इन पकोड़ों को उसमें डालकर लगभग आठ से दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि उनमें कढ़ी का स्वाद पूरी तरह समा जाए।

    जीरा राइस इस डिश का स्वाद और बढ़ा देते हैं। इसके लिए पके हुए चावल में घी या तेल गर्म कर जीरा भूनें और फिर उसमें चावल डालकर हल्का सा मिला लें। चाहें तो इसमें थोड़ा हरा धनिया भी डाल सकते हैं। जीरे की खुशबू चावल को अलग स्वाद देती है और कढ़ी के साथ इसका मेल बेहद संतुलित लगता है।

    बेहतरीन कढ़ी बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा हल्का खट्टा दही इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद अधिक संतुलित और पारंपरिक बनता है। कढ़ी को तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाएं, ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और स्वाद में कच्चापन न रहे। वहीं पकोड़ों को बहुत ज्यादा सख्त न तलें, ताकि वे कढ़ी में डालने के बाद मुलायम बने रहें।

    करी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का कढ़ी की खुशबू और स्वाद को और बेहतर बना देता है। यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ा लाल मिर्च पाउडर घी में भूनकर डाल सकते हैं, जिससे डिश का रंग और स्वाद दोनों आकर्षक हो जाते हैं। गर्मागर्म कढ़ी पकोड़ा को जीरा राइस, पापड़, अचार और सलाद के साथ परोसकर परिवार के साथ पारंपरिक भारतीय भोजन का आनंद लिया जा सकता है।

  • आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले

    आंध्र और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में कोरोना की दस्‍तक, भागलपुर में बाप-बेटी पॉजिटिव निकले


    नई दिल्‍ली । आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सामने आने के बाद बिहार में भी मामले सामने आ रहे हैं. बिहार के भागलपुर जिले में एक 65 साल के बुजुर्ग और उनकी 35 साल की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दोनों को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल यानी जेएलएनएमसीएच में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक एचपी दुबे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी. शुरुआत में दुबे ने दूसरे मरीज को बुजुर्ग की पत्नी बताया था, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि वह उनकी बेटी हैं.

    अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बुजुर्ग की तबीयत 15 जुलाई को बिगड़ी थी. शुरुआत में उनका इलाज एक निजी क्लिनिक में हुआ, लेकिन कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर उन्हें जेएलएनएमसीएच रेफर किया गया.

    रविवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आरटी-पीसीआर जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद जब उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की गई तो उनकी बेटी भी पॉजिटिव पाई गईं.

    अस्पताल अधीक्षक दुबे ने बताया कि दोनों मरीजों को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया है और डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी हालत पर नजर रख रही है और इलाज कर रही है. उन्होंने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया है और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को निर्देश दिया गया है कि दोनों मरीजों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जांच कराई जाए.

    भागलपुर जिला प्रशासन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर दोनों पॉजिटिव मामलों की पुष्टि की है. जेएलएनएमसीएच के मेडिसिन विभाग के प्रमुख राजकमल चौधरी ने कहा कि दोनों मरीजों की हालत स्थिर है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें लेकिन घबराएं नहीं. प्रशासन ने कहा कि सही सावधानी और समय पर इलाज से कोरोना के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

  • सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह

    सरकार ने की सोनम वांगचुक से संवाद की पहल शुरू, मेदांता अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से बातचीत की दिशा में केंद्र सरकार ने पहल शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की। इस मुलाकात को सरकार और वांगचुक के बीच संभावित संवाद की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

    हाईकोर्ट के आदेश पर मेदांता में कराया गया भर्ती
    दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर आगे के उपचार के लिए गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज की आवश्यकता बताई थी।

    28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर
    सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना, NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है।

    पत्नी की याचिका पर मिला राहत का आदेश
    इससे पहले वांगचुक का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अदालत से अनुरोध किया था कि बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल उन्हें मेदांता भेजने का निर्देश दिया।

    डॉक्टरों ने जताई थी स्वास्थ्य को लेकर चिंता
    सुनवाई के दौरान एम्स और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की। डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर कम है और टीएलसी (TLC) रिपोर्ट को लेकर भी चिकित्सकीय चिंता बनी हुई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने विशेषज्ञ निगरानी में इलाज को आवश्यक माना।

    सरकार ने नहीं जताई कोई आपत्ति
    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने पर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उनके स्थानांतरण की अनुमति देते हुए बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

  • नई रिपोर्ट का दावा: चेतावनियों के बावजूद जेफ्री एपस्टीन से 30 से अधिक बार मिले थे बिल गेट्स

    नई रिपोर्ट का दावा: चेतावनियों के बावजूद जेफ्री एपस्टीन से 30 से अधिक बार मिले थे बिल गेट्स


    नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और दिवंगत फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन के संबंधों को लेकर एक नई समीक्षा रिपोर्ट में कई अहम दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स और उनकी परोपकारी संस्था गेट्स फाउंडेशन के अधिकारियों ने वर्ष 2011 से 2014 के बीच एपस्टीन से 30 से अधिक मुलाकातें की थीं। यह भी कहा गया है कि संस्था के कुछ कर्मचारियों ने इन बैठकों से प्रतिष्ठा को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन इसके बावजूद संपर्क बना रहा।

    30 से ज्यादा बैठकों का उल्लेख
    लॉ फर्म विल्मरहेल (WilmerHale) द्वारा तैयार समीक्षा रिपोर्ट के तीन पन्नों का सारांश मंगलवार को जारी किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 से 2014 के बीच हुई करीब 30 बैठकों में से कई एपस्टीन के मैनहट्टन स्थित टाउनहाउस में आयोजित हुईं, जबकि एक बैठक गेट्स फाउंडेशन के कैंपस में भी हुई थी।

    अवैध गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं मिला
    रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच के दौरान ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि गेट्स फाउंडेशन ने एपस्टीन को कोई भुगतान किया था या किसी अवैध गतिविधि में शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच मुख्य रूप से एक संभावित ग्लोबल हेल्थ फंड बनाने पर चर्चा हुई थी, जो बाद में कभी अस्तित्व में नहीं आ सका। इसके अलावा, एपस्टीन के एक सहयोगी द्वारा संचालित इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट को दिए गए वित्तीय सहयोग पर भी बातचीत होने का उल्लेख किया गया है।

    बिल गेट्स ने माना था फैसला गलत था
    रिपोर्ट में बिल गेट्स पर एपस्टीन के यौन अपराधों में किसी तरह की संलिप्तता का आरोप नहीं लगाया गया है। गेट्स पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि उन्हें नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण की जानकारी नहीं थी। हाल ही में एक संसदीय समिति के समक्ष गेट्स ने स्वीकार किया था कि एपस्टीन से मुलाकात करना उनके जीवन के फैसलों में “एक बड़ी गलती” थी।

    स्टाफ की आपत्तियों के बावजूद जारी रहा संपर्क
    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फाउंडेशन के कुछ कर्मचारियों ने कानूनी जोखिम और संस्था की साख पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी। इसके बावजूद 2012 में एपस्टीन ने बिल गेट्स की मुलाकात इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के प्रमुख तेर्जे रोड-लार्सन से कराई। इसके बाद फाउंडेशन ने पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के लिए इस संस्था को वित्तीय सहायता दी। बाद में विवाद बढ़ने पर 2020 में तेर्जे रोड-लार्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

    फाउंडेशन ने मजबूत किए निगरानी तंत्र
    यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में वॉरेन बफेट ने अपने वार्षिक दान में गेट्स फाउंडेशन को शामिल नहीं किया। इस बीच फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क सुजमैन ने कहा कि बोर्ड ने जोखिम प्रबंधन और जांच प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए नए कदमों को मंजूरी दी है। उनके अनुसार संस्था का कार्य सहयोगियों के भरोसे और पारदर्शिता पर आधारित है।

    एपस्टीन फाइल्स में भी आया था नाम
    अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए एपस्टीन फाइल्स में टेक्नोलॉजी, वित्त और राजनीति जगत की कई चर्चित हस्तियों के साथ बिल गेट्स का नाम भी दर्ज है। गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन को जुलाई 2019 में नाबालिगों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले ही जेल में उसकी मौत हो गई थी, जिसे अधिकारियों ने आत्महत्या बताया था।

  • हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं

    हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर बृज भूषण ने लिया यू-टर्न, दी सफाई, बोले- भावनाएं आहत हुई हों तो क्षमा चाहता हूं


    गोंडा। हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर दिए गए बयान पर मचे राजनीतिक विवाद के बीच पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा मांगने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का खंडन करना या उसका विरोध करना नहीं था।

    मुख्यमंत्री के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
    हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि सपा शासनकाल में हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान बृज भूषण शरण सिंह ने कहा था कि वहां नमाज नहीं पढ़ी गई थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई।

    सीढ़ियों और परिसर को लेकर दिया स्पष्टीकरण
    विवाद बढ़ने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि मीडिया ने उनसे विशेष रूप से यह सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी? इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं हुई, लेकिन 52 बीघा परिसर, किसी संत के स्थान या परिसर के अन्य हिस्से में नमाज पढ़े जाने की बात अलग विषय है। यदि वह यह बात उसी समय जोड़ देते, तो शायद इतना विवाद पैदा नहीं होता।

    ‘मुख्यमंत्री की बात काटने का सवाल ही नहीं’
    पूर्व सांसद ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था। उन्होंने कहा, “अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो जैसी स्थिति बन गई है। एक तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का बयान भी सही है और मेरा बयान भी सही है। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी।”

    भावनाएं आहत हुई हों तो मांगी माफी
    बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि किसी को उनके बयान से ठेस पहुंची है या ऐसा लगा कि वह मुख्यमंत्री के बयान का विरोध कर रहे हैं, तो यह उनकी मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा मांगने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड

    गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड


    नई दिल्ली । छुट्टियां आते ही सबसे पहले मन में घूमने फिरने का ख्याल आता है और जब भारत की सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की बात होती है तो गोवा और मनाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक ओर गोवा अपने सुनहरे समुद्री तट रंगीन नाइट लाइफ और पुर्तगाली संस्कृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर मनाली बर्फ से ढके पहाड़ों हरियाली ठंडी वादियों और रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों के कारण यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है। यदि आप भी इन दोनों जगहों में से किसी एक का चुनाव करने की सोच रहे हैं तो पहले अपनी पसंद बजट और यात्रा के उद्देश्य को समझना जरूरी है।

    अगर आपको समुद्र की लहरें बीच पर सुकून भरे पल और वाटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो गोवा आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यहां बागा बीच कलंगुट बीच पालोलेम बीच और अंजुना बीच जैसे खूबसूरत समुद्री तट पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गोवा में पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय बीच किनारे सूर्यास्त का नजारा और स्थानीय सी फूड का स्वाद यात्रा को और भी खास बना देता है।

    यदि आप प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं और बर्फीले पहाड़ों के बीच रोमांच का अनुभव लेना चाहते हैं तो मनाली एक बेहतरीन विकल्प है। यहां सोलंग वैली रोहतांग दर्रा हिडिंबा देवी मंदिर मनु मंदिर और वशिष्ठ के गर्म पानी के कुंड प्रमुख आकर्षण हैं। सर्दियों के मौसम में मनाली बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है जहां स्कीइंग स्नो बाइकिंग स्नोबोर्डिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को रोमांच से भर देती हैं। गर्मियों में भी यहां का सुहावना मौसम यात्रियों को राहत और सुकून देता है।

    यात्रा की योजना बनाते समय बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि पहले से होटल और फ्लाइट या ट्रेन की बुकिंग कर ली जाए तो खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर होटल और पर्यटन गतिविधियों में बेहतर छूट मिल जाती है। स्थानीय परिवहन का उपयोग करने और पहले से यात्रा कार्यक्रम तैयार करने से समय और पैसे दोनों की बचत होती है।

    सफर के दौरान मौसम के अनुसार कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। गोवा जाने वाले यात्रियों को हल्के सूती कपड़े सनस्क्रीन टोपी और धूप का चश्मा साथ रखना चाहिए। वहीं मनाली जाने वालों को गर्म जैकेट ऊनी कपड़े दस्ताने और आरामदायक जूते जरूर रखने चाहिए ताकि मौसम का पूरा आनंद लिया जा सके।

    यात्रा के दौरान स्थानीय संस्कृति और नियमों का सम्मान करना भी हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखें प्लास्टिक का कम उपयोग करें और प्राकृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने से बचें। इससे पर्यटन स्थलों की सुंदरता लंबे समय तक बनी रहती है।

    चाहे आप गोवा की समुद्री लहरों के बीच छुट्टियां बिताना चाहते हों या मनाली की ठंडी वादियों में सुकून तलाश रहे हों दोनों ही जगहें अपने अलग अनुभव और यादगार पलों के लिए मशहूर हैं। सही योजना और थोड़ी तैयारी के साथ आपका सफर न केवल आरामदायक होगा बल्कि जीवन भर याद रहने वाला अनुभव भी बन जाएगा।

  • गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड

    गोवा की सुनहरी बीच या मनाली के बर्फीले पहाड़ किस जगह का सफर देगा सबसे यादगार अनुभव पढ़िए पूरी ट्रैवल गाइड


    नई दिल्ली । छुट्टियां आते ही सबसे पहले मन में घूमने फिरने का ख्याल आता है और जब भारत की सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की बात होती है तो गोवा और मनाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एक ओर गोवा अपने सुनहरे समुद्री तट रंगीन नाइट लाइफ और पुर्तगाली संस्कृति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर मनाली बर्फ से ढके पहाड़ों हरियाली ठंडी वादियों और रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों के कारण यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है। यदि आप भी इन दोनों जगहों में से किसी एक का चुनाव करने की सोच रहे हैं तो पहले अपनी पसंद बजट और यात्रा के उद्देश्य को समझना जरूरी है।

    अगर आपको समुद्र की लहरें बीच पर सुकून भरे पल और वाटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो गोवा आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। यहां बागा बीच कलंगुट बीच पालोलेम बीच और अंजुना बीच जैसे खूबसूरत समुद्री तट पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। गोवा में पैरासेलिंग जेट स्की बनाना राइड और स्कूबा डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। शाम के समय बीच किनारे सूर्यास्त का नजारा और स्थानीय सी फूड का स्वाद यात्रा को और भी खास बना देता है।

    यदि आप प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं और बर्फीले पहाड़ों के बीच रोमांच का अनुभव लेना चाहते हैं तो मनाली एक बेहतरीन विकल्प है। यहां सोलंग वैली रोहतांग दर्रा हिडिंबा देवी मंदिर मनु मंदिर और वशिष्ठ के गर्म पानी के कुंड प्रमुख आकर्षण हैं। सर्दियों के मौसम में मनाली बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है जहां स्कीइंग स्नो बाइकिंग स्नोबोर्डिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को रोमांच से भर देती हैं। गर्मियों में भी यहां का सुहावना मौसम यात्रियों को राहत और सुकून देता है।

    यात्रा की योजना बनाते समय बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि पहले से होटल और फ्लाइट या ट्रेन की बुकिंग कर ली जाए तो खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर होटल और पर्यटन गतिविधियों में बेहतर छूट मिल जाती है। स्थानीय परिवहन का उपयोग करने और पहले से यात्रा कार्यक्रम तैयार करने से समय और पैसे दोनों की बचत होती है।

    सफर के दौरान मौसम के अनुसार कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। गोवा जाने वाले यात्रियों को हल्के सूती कपड़े सनस्क्रीन टोपी और धूप का चश्मा साथ रखना चाहिए। वहीं मनाली जाने वालों को गर्म जैकेट ऊनी कपड़े दस्ताने और आरामदायक जूते जरूर रखने चाहिए ताकि मौसम का पूरा आनंद लिया जा सके।

    यात्रा के दौरान स्थानीय संस्कृति और नियमों का सम्मान करना भी हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखें प्लास्टिक का कम उपयोग करें और प्राकृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने से बचें। इससे पर्यटन स्थलों की सुंदरता लंबे समय तक बनी रहती है।

    चाहे आप गोवा की समुद्री लहरों के बीच छुट्टियां बिताना चाहते हों या मनाली की ठंडी वादियों में सुकून तलाश रहे हों दोनों ही जगहें अपने अलग अनुभव और यादगार पलों के लिए मशहूर हैं। सही योजना और थोड़ी तैयारी के साथ आपका सफर न केवल आरामदायक होगा बल्कि जीवन भर याद रहने वाला अनुभव भी बन जाएगा।