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  • आरबीआई की एफसीएनआर जमा योजना से आया बड़ा फंड, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड बढ़त के साथ चौथे स्थान पर

    आरबीआई की एफसीएनआर जमा योजना से आया बड़ा फंड, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड बढ़त के साथ चौथे स्थान पर


    नई दिल्ली ।
    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 44.9 अरब डॉलर बढ़कर 785.7 अरब डॉलर हो गया है। इस तेज बढ़ोतरी के साथ भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़ दिया है और अब चीन, जापान तथा स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बढ़ोतरी को मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर आकर्षित करने के लिए शुरू की गई एफसीएनआर (बी) जमा योजना के तहत आए बड़े फंड से जोड़ा गया है।

    785.7 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए महत्वपूर्ण बढ़त है। इस दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कुल 44.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी ने भारत को वैश्विक स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले प्रमुख देशों की सूची में रूस से आगे कर दिया है।

    विदेशी मुद्रा भंडार के अलग-अलग घटकों में हालांकि एक समान वृद्धि नहीं हुई। सप्ताह के दौरान सोने के भंडार में 2.59 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई और यह घटकर 113.81 अरब डॉलर रह गया। सोने की कीमतों में गिरावट को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्से में मजबूती के कारण कुल भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अधिक गुंजाइश मिलती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होने से केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

    मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के कारण आरबीआई को स्पॉट और फॉरवर्ड करेंसी मार्केट में भी हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता मिलती है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक अतिरिक्त डॉलर जारी करके रुपये की कीमत में तेज गिरावट को रोकने की कोशिश कर सकता है। इस तरह विदेशी मुद्रा भंडार बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में काम करता है।

    इस बीच, विदेशी मुद्रा के बड़े पैमाने पर देश में आने से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त लिक्विडिटी जमा हुई है। आरबीआई ने इसी अतिरिक्त तरलता को कम करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज की ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी ओएमओ बिक्री की घोषणा की है।

    केंद्रीय बैंक यह बिक्री तीन अलग-अलग किश्तों में करेगा। पहली नीलामी 17 सितंबर को होगी, जिसमें 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेची जाएंगी। इसके बाद 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये और 28 सितंबर को शेष 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री की जाएगी।

    आरबीआई के अनुसार, इन नीलामियों को मल्टी-सिक्योरिटी नीलामी के माध्यम से मल्टीपल-प्राइस मेथड के तहत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य विदेशी मुद्रा के भारी इनफ्लो से बैंकिंग सिस्टम में बनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करना है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में हुई 44.9 अरब डॉलर की साप्ताहिक बढ़ोतरी के बाद भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। रूस को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंचना देश के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बड़ी वृद्धि को दर्शाता है।

  • सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर परिवार से खास रिश्ता, रणबीर-करीना-करिश्मा से है नाता

    सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर परिवार से खास रिश्ता, रणबीर-करीना-करिश्मा से है नाता


    नई दिल्ली ।
    सलमान खान और अरबाज खान की फिल्म ‘गर्व: प्राइड एंड ऑनर’ साल 2004 में रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर की थी, जिसे झूठे मामलों में फंसाया जाता है। फिल्म में सलमान खान ने ACP अर्जुन राणावत का किरदार निभाया था। वहीं, एक्ट्रेस आकांक्षा मल्होत्रा ने उनकी मुंह बोली बहन राखी दीक्षित की भूमिका निभाई थी। कम ही लोग जानते हैं कि आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर के परिवार से पारिवारिक रिश्ता है।

    सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन

    ‘गर्व’ में आकांक्षा मल्होत्रा ने राखी का किरदार निभाया था। फिल्म में जब सलमान के किरदार को कोर्ट में सजा सुनाई जाती है, तब स्लो मोशन में आकांक्षा के किरदार राखी की एंट्री दिखाई जाती है। राखी कोर्ट में पहुंचकर बयान देती है, जिसके बाद ACP अर्जुन राणावत की ईमानदारी की सच्चाई सामने आती है। फिल्म की कहानी के अंत में आकांक्षा के किरदार की अहम भूमिका रहती है।

    इस फिल्म को आकांक्षा के परिवार से भी खास कनेक्शन था। फिल्म को उनके पिता और गुजरे जमाने के अभिनेता प्रेम किशन ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म का निर्देशन पुनीत इस्सर ने किया था, जो दुर्योधन के किरदार से भी पहचाने जाते हैं।

    प्रेम नाथ और राज कपूर का रिश्ता

    आकांक्षा मल्होत्रा के दादा प्रेम नाथ अपने दौर के मशहूर अभिनेता थे। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिकाएं निभाईं। फिल्म ‘बॉबी’ में उन्हें डिंपल कपाड़िया के पिता के किरदार में देखा गया था। प्रेम नाथ की बहन कृष्णा ने अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर से शादी की थी। इस रिश्ते के कारण राज कपूर, प्रेम नाथ के जीजा लगते थे।

    प्रेम नाथ के बेटे प्रेम किशन ने भी फिल्मों में बतौर अभिनेता काम किया। उन्होंने 70 और 80 के दशक में ‘दुल्हन वो ही जो पिया मन भाए’, ‘जय विजय’ और ‘हमारे तुम्हारे’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, बतौर अभिनेता वह अपने पिता जैसी पहचान नहीं बना सके। बाद में उन्होंने टीवी सीरियल और फिल्मों के निर्माण का काम शुरू किया।

    प्रेम किशन का परिवार

    प्रेम किशन के दो बच्चे हैं, बेटी आकांक्षा मल्होत्रा और बेटे पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा। आकांक्षा ने ‘गर्व’ में सलमान खान की बहन का किरदार निभाया था। वहीं, पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा फिल्म निर्देशन में सक्रिय हैं। उन्होंने करीना कपूर के साथ ‘वी आर फैमिली’ का निर्देशन किया था। इसके अलावा उन्होंने रानी मुखर्जी की ‘हिचकी’ और आमिर खान के बेटे जुनैद खान की फिल्म ‘महाराज’ का निर्देशन किया। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म ‘इक्का’ का निर्देशन भी सिद्धार्थ मल्होत्रा ने किया है। इसमें सनी देओल और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    राज कपूर परिवार से कनेक्शन

    प्रेम किशन की बुआ कृष्णा राज कपूर थीं। इसी पारिवारिक रिश्ते के चलते आकांक्षा मल्होत्रा और उनके भाई पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा का कपूर परिवार से संबंध बनता है। इस रिश्ते के अनुसार रणबीर कपूर, करीना कपूर और करिश्मा कपूर उनके पारिवारिक रिश्ते में भाई-बहन लगते हैं। हालांकि, यह रिश्ता अब दूर का है।

    आकांक्षा मल्होत्रा अब फिल्मों से दूर हैं और अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हैं। वह अपने परिवार और दो बेटियों के साथ समय बिताती हैं। इस तरह सलमान खान की फिल्म में उनकी ऑनस्क्रीन बहन का किरदार निभाने वाली आकांक्षा का फिल्म इंडस्ट्री के कपूर परिवार से भी पुराना पारिवारिक संबंध रहा है।

  • OTT पर इन 7 फिल्मों के ट्विस्ट कर देंगे दिमाग सुन्न, IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ हर कहानी में छिपा है बड़ा राज

    OTT पर इन 7 फिल्मों के ट्विस्ट कर देंगे दिमाग सुन्न, IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ हर कहानी में छिपा है बड़ा राज

    नई दिल्ली। वीकेंड पर अगर आप कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जिसकी कहानी आखिरी तक आपको बांधे रखे और जिसके ट्विस्ट दिमाग घुमा दें, तो OTT पर मौजूद ये 7 साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर फिल्में आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं। इन फिल्मों को IMDb पर भी अच्छी रेटिंग मिली है। इनमें अपराध, रहस्य, मानसिक उलझन और ऐसे मोड़ देखने को मिलते हैं, जो कहानी को लगातार दिलचस्प बनाए रखते हैं।

    फाइट क्लब

    IMDb रेटिंग: 8.8

    साल 1999 में रिलीज हुई ‘फाइट क्लब’ का निर्देशन डेविड फिंचर ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पूंजीवादी जीवनशैली से खुश नहीं है। उसे नींद नहीं आने की समस्या रहती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साबुन बेचने वाले एक शख्स से होती है और दोनों मिलकर अंडरग्राउंड फाइट क्लब की शुरुआत करते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दर्शकों को हैरान करते हैं।

    टैक्सी ड्राइवर

    IMDb रेटिंग: 8.2

    1976 में रिलीज हुई ‘टैक्सी ड्राइवर’ का निर्देशन मार्टिन स्कॉर्सेसे ने किया है। फिल्म की कहानी पूर्व नौसैनिक ट्रैविस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो न्यूयॉर्क में टैक्सी ड्राइवर के तौर पर काम करता है। एक समय के बाद वह कम उम्र की एक प्रॉस्टिट्यूट को बचाने की कोशिश करने का फैसला करता है। इसके बाद कहानी अलग दिशा में आगे बढ़ती है और ट्रैविस के फैसले कई घटनाओं को जन्म देते हैं।

    बदला

    IMDb रेटिंग: 7.8

    2019 में रिलीज हुई ‘बदला’ में अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी नैना के इर्द-गिर्द घूमती है। नैना एक शादीशुदा महिला है, जिसका अर्जुन नाम के युवक के साथ अफेयर होता है। उसकी जिंदगी उस समय बदल जाती है, जब उस पर अर्जुन की हत्या का आरोप लगता है। अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नैना, बादल गुप्ता की मदद लेती है। इसके बाद सामने आने वाले रहस्य कहानी को लगातार उलझाते जाते हैं।

    फॉरगॉटन

    IMDb रेटिंग: 7.4

    2017 में रिलीज हुई ‘फॉरगॉटन’ की कहानी जिन-सियोक और उसके भाई की किडनैपिंग के इर्द-गिर्द घूमती है। जिन-सियोक एक नए घर में रहने आता है। वहां उसका भाई किडनैप हो जाता है। 19 दिन बाद जब उसका भाई वापस लौटता है, तो उसे पिछली घटनाओं के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता। इसके बाद जिन सच का पता लगाने के मिशन पर निकलता है। फिल्म का निर्देशन जंग हैंग-जून ने किया है।

    मारीसन

    IMDb रेटिंग: 7.4

    ‘मारीसन’ 2025 में रिलीज हुई तमिल भाषा की क्राइम थ्रिलर फिल्म है। कहानी एक शातिर चोर से शुरू होती है, जो एक घर में चोरी करने पहुंचता है। वहां उसे एक बूढ़ा व्यक्ति बंधा हुआ मिलता है। वह व्यक्ति दावा करता है कि घर उसी का है और अगर चोर उसे वहां से छुड़ाकर ले जाए तो वह उसे एटीएम से पैसे निकालकर देगा। चोर उसकी बातों में आ जाता है और दोनों एक यात्रा पर निकलते हैं। इस यात्रा के दौरान होने वाली घटनाएं कहानी को कई अप्रत्याशित मोड़ देती हैं।

    कांथा

    IMDb रेटिंग: 7.2

    ‘कांथा’ का निर्देशन सेल्वमणि सेल्वराज ने किया है। यह तमिल भाषा की फिल्म है, जिसकी कहानी 1950 के मद्रास की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म की कहानी आर्या नाम के एक दिग्गज निर्देशक और उसकी फिल्म के अभिनेता टी. के. महादेवन के बीच दुश्मनी के इर्द-गिर्द घूमती है।

    द कॉल

    IMDb रेटिंग: 7.1

    2020 में रिलीज हुई ‘द कॉल’ का निर्देशन ली चुंग-ह्योन ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे घर में घटती है, जहां वर्तमान समय में एक लड़की को फोन आता है। फोन पर दूसरी लड़की बताती है कि उसे टॉर्चर किया जा रहा है। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पता चलता है कि फोन उसी घर से आ रहा है, लेकिन यह कॉल साल 1999 से की जा रही है। इसके बाद कहानी रहस्य और घटनाओं के ऐसे सिलसिले में बदल जाती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

  • लता मंगेशकर के ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन पर बना अमेरिकी गाना हुआ हिट, कॉपीराइट विवाद में करोड़ों का दावा

    लता मंगेशकर के ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन पर बना अमेरिकी गाना हुआ हिट, कॉपीराइट विवाद में करोड़ों का दावा

    नई दिल्ली । लता मंगेशकर ने अपने करियर में कई ऐसे आईकॉनिक गाने दिए हैं, जिन्हें आज भी लोग पसंद करते हैं। उनके गानों की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी उनके संगीत को पसंद किया गया। इसी कड़ी में साल 1981 की फिल्म ‘ज्योति’ का सुपरहिट गाना “थोड़ा रेशम लगता है” भी अंतरराष्ट्रीय संगीत विवाद से जुड़ा।

    यह गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। इसका संगीत दिग्गज संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था और इसे अरुणा ईरानी पर फिल्माया गया था। अपनी धुन और संगीत के कारण यह गाना उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ और आज भी इसे याद किया जाता है।

    मामला तब चर्चा में आया, जब अमेरिकी रैपर और प्रोड्यूसर DJ Quik ने इस गाने के संगीत और बीट्स का इस्तेमाल एक अमेरिकी गाने में किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी सिंगर Truth Hurts के लिए “Addictive” नाम का गाना तैयार किया था। इस गाने में “थोड़ा रेशम लगता है” की धुन और संगीत के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था।

    “Addictive” गाना अमेरिका में काफी लोकप्रिय हुआ और बिलबोर्ड चार्ट के टॉप 10 में जगह बनाने में सफल रहा। यह गाना चार्ट पर नौवें स्थान तक पहुंचा था। हालांकि, इस गाने के निर्माण में भारतीय गाने के इस्तेमाल को लेकर अनुमति नहीं लिए जाने का विवाद बाद में सामने आया।

    जब भारतीय म्यूजिक कंपनी को इस मामले की जानकारी मिली, तो अमेरिकी म्यूजिक लेबल से जुड़े पक्षों के खिलाफ कॉपीराइट को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई। मामले में 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने का दावा किए जाने की बात सामने आई। इसके साथ ही गाने की बिक्री और आगे होने वाली बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।

    इस विवाद ने भारतीय संगीत की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और कॉपीराइट अधिकारों को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया “थोड़ा रेशम लगता है” भारत में पहले ही लोकप्रिय था, लेकिन उसके संगीत के विदेशी इस्तेमाल के बाद यह गाना एक अलग वजह से भी सुर्खियों में आ गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस धुन से जुड़ा संगीत बाद में भारत में भी दोबारा इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी गाने के बाद संगीतकार हैरी आनंद ने इसी विदेशी धुन और स्टाइल से प्रेरित होकर “कलियों का चमन” तैयार किया। यह गाना भी भारत में काफी लोकप्रिय हुआ।

    इस तरह 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्योति’ का “थोड़ा रेशम लगता है” कई दशक बाद अंतरराष्ट्रीय संगीत विवाद का हिस्सा बना। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड इस गाने की धुन का इस्तेमाल अमेरिकी गाने में किया गया, जिसके बाद कॉपीराइट को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हुआ। गाने की लोकप्रियता और उससे जुड़े विवाद ने इसे भारतीय संगीत के उन चर्चित उदाहरणों में शामिल कर दिया, जिनकी गूंज देश से बाहर तक पहुंची।

  • गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    नई दिल्ली । गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर एक्टर परेश रावल ने रिएक्टर किया है। 72 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। इस साल 72वां ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली की जगह गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में आयोजित होगा। यह अवॉर्ड शो 22 सितंबर, 2026 को आयोजित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पहली बार ऐसा होगा जब यह अवॉर्ड शो दिल्ली से बाहर आयोजित किया जाएगा। ऐसे में गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

    गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर परेश रावल ने अपना रिएक्शन दिया। उनसे पूछा गया कि पहली बार ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर गुजरात में हो रहा है, इस पर आप क्या कहेंगे। इस सवाल पर परेश रावल ने कहा, ‘गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? ये भी हमारे ही देश का हिस्सा है। गुजरात में ये आयोजन क्यों नहीं होने चाहिए? गुजरात में भी आयोजन होने चाहिए…मैं तो ये कहता हूं कि ऐसे आयोजन हर राज्य में होने चाहिए। इसमें कोई बुरी बात नहीं है।’

    उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने की आलोचना

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ के गुजरात में आयोजन करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली और राष्ट्रीय पुरस्कारों के महत्व को कम कर रही है। संजय राउत ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने तक की अपील की है।

    पहली बार कब और कहां शुरू हुआ था ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’

    पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की शुरुआत 1954 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई थी। उस समय इन्हें ‘राज्य फिल्म पुरस्कार’ (State Awards) कहा जाता था। पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में वर्ष 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मानित किया गया था। पहली बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ (Shyamchi Aai) को मिला था।

    इस बार किसे मिलेगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ की लिस्ट सामने आ चुकी है। इस बार रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ को ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ का अवॉर्ड दिया जाएगा। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा की एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई है। इसके अलावा यामी गौतम स्टारर मूवी ‘आर्टिकल 370’ को साल 2024 की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलेगा। वहीं, राजकुमार राव की ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिलेगा।

    साथ ही साउथ एक्टर ममूटी की ‘ब्रह्मयुगम’ और कार्तिक आर्यन की मूवी ‘चंदू चैंपियन’ फिल्म के लिए ‘बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल’ का पुरस्कार साझा करेंगे। ममूटी को चौथी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

  • सूर्य गोचर 2026: 17 सितंबर के बाद वृश्चिक और धनु राशि वालों के करियर में बन सकते हैं सफलता के नए योग

    सूर्य गोचर 2026: 17 सितंबर के बाद वृश्चिक और धनु राशि वालों के करियर में बन सकते हैं सफलता के नए योग


    नई दिल्ली । 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। अब कन्या राशि में पहुंचने के बाद सूर्य केतु के प्रभाव से अलग हो जाएंगे। ऐसे में कुछ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से परिस्थितियां बेहतर होने के संकेत हैं। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं।

    ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, पद-प्रतिष्ठा और करियर का प्रमुख कारक माना जाता है। जब सूर्य की चाल बदलती है, तो इसका असर व्यक्ति के कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों पर भी देखने को मिल सकता है। सितंबर के मध्य में सूर्य एक बार फिर राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि सिंह राशि में सूर्य की केतु के साथ युति बन रही थी, जिससे कुछ राशियों को कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता था। अब कन्या राशि में पहुंचने के बाद सूर्य केतु के प्रभाव से अलग हो जाएंगे। ऐसे में कुछ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से परिस्थितियां बेहतर होने के संकेत हैं। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश लाभ के नए अवसर लेकर आ सकता है। सूर्य आपके एकादश भाव में गोचर करेंगे, जिसे आमदनी, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति से संबंधित माना जाता है। ऐसे में कारोबार से जुड़े लोगों को अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। व्यापार में नए संपर्क बनने और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ने की संभावना है।

    जो लोग लंबे समय से अपना काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। नौकरी करने वाले जातकों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। आय में बढ़ोतरी के साथ करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी अच्छी खबर मिल सकती है।

    धनु राशि

    सूर्य का राशि परिवर्तन धनु राशि के जातकों के करियर के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आपके लिए सूर्य का गोचर कर्म भाव यानी दसवें भाव में होने जा रहा है। यह स्थान नौकरी, पेशा, प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दौरान करियर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऑफिस में आपके काम और मेहनत की सराहना हो सकती है।

    लंबे समय से पदोन्नति की उम्मीद कर रहे जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी समय उत्साह बढ़ाने वाला रह सकता है। यदि आप नौकरी बदलने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो 17 सितंबर के बाद नए अवसर मिल सकते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे धनु राशि के जातकों को भी सफलता की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं।

  • कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, कहा- 15 साल में बसाया घर, फिर बेघर मत होने दो

    नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM पैकेज) के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। लगातार मिल रही धमकियों के बीच कर्मचारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर तत्काल सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 साल से घाटी में अपने जीवन को दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और अब उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने चिट्ठी के माध्यम से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही ऊपर से हालात सामान्य दिखाई देते हों, लेकिन जमीन पर डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अपनी सुरक्षा के साथ-साथ बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल के दिनों में सामने आई हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उस दौर में धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब दोबारा धमकी भरे पत्र सामने आने से कर्मचारियों के बीच पुराने भय की स्थिति बन रही है।

    पिछले कुछ हफ्तों के दौरान PM पैकेज के तहत घाटी में तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने की चेतावनी दी गई है और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इन मामलों में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है।

    कर्मचारियों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब उनका निजी डेटा ऑनलाइन लीक होने की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक साझा किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे घाटी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है।

    कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी किराए के कमरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, जहां ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और उसे मजबूत करने की मांग की है।

    अमित शाह को लिखी चिट्ठी में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही ऐसा प्रभावी सिस्टम बनाने की मांग की गई है, जिसके जरिए किसी कर्मचारी को धमकी मिलने पर वह तुरंत शिकायत दर्ज करा सके और समय पर सुरक्षा सहायता मिल सके।

    कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था। वर्ष 2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों ने एक बार फिर उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे कश्मीर में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं।

  • NHAI सदस्य विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश में उज्जैन-गरोठ और तेजाजी नगर-बलवाड़ा हाईवे परियोजनाओं का निरीक्षण किया

    NHAI सदस्य विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश में उज्जैन-गरोठ और तेजाजी नगर-बलवाड़ा हाईवे परियोजनाओं का निरीक्षण किया

    मध्य प्रदेश: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सदस्य परियोजना विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश के दौरे के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने करीब 140 किलोमीटर लंबे उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर के तीनों पैकेजों और इंदौर से खंडवा के बीच निर्माणाधीन 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवाड़ा प्रोजेक्ट का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और परियोजनाओं से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

    उज्जैन-गरोठ परियोजना के निर्माणाधीन पैकेज-1 के निरीक्षण के दौरान शर्मा ने अलग-अलग निर्माण गतिविधियों की स्थिति देखी। उन्होंने निर्माणाधीन RE Wall समेत विभिन्न संरचनात्मक कार्यों का जायजा लिया और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार काम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

    शर्मा ने अधिकारियों और संबंधित एजेंसी को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कार्यस्थल पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखने, जरूरी सुरक्षा प्रबंधों को बनाए रखने और निर्माण गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उनके निरीक्षण में परियोजना की प्रगति के साथ काम की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को प्रमुखता दी गई।

    उज्जैन-गरोठ परियोजना के दो पूर्ण हो चुके पैकेजों का भी उन्होंने निरीक्षण किया। इस दौरान हाईवे की मौजूदा स्थिति, यातायात व्यवस्था और सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की गई। शर्मा ने हाईवे पर मौजूद अतिक्रमण को लेकर आपत्ति जताई और संबंधित अधिकारियों को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाईवे को पूरी तरह अतिक्रमण-मुक्त बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे है, इसलिए यातायात प्रबंधन और सड़क उपयोगकर्ताओं की सुविधा से जुड़े निर्धारित मानकों का प्रभावी तरीके से पालन होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान हाईवे पर लगाए गए CCTV कैमरों से होने वाली निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। शर्मा ने कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विभिन्न स्थानों पर कैमरों के माध्यम से की जा रही निगरानी की जानकारी ली और अधिकारियों को लगातार प्रभावी निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

    शर्मा ने हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों और NHAI एम्बुलेंस की उपलब्धता तथा उनके संचालन की व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में सड़क उपयोगकर्ताओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी व्यवस्थाएं हमेशा तैयार और प्रभावी रहनी चाहिए। उन्होंने नियमित निगरानी के साथ त्वरित रिस्पॉन्स व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    इसके बाद उन्होंने इंदौर से खंडवा के बीच निर्माणाधीन 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवाड़ा प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों और निर्माणाधीन टनल का जायजा लिया गया। उन्होंने टनल निर्माण की प्रगति तथा साइट पर चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति की समीक्षा की।

    शर्मा ने निर्माण कार्यों में गति बनाए रखने के साथ बेहतर समन्वय और निरंतर मॉनिटरिंग पर जोर दिया। उन्होंने निर्धारित तकनीकी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए परियोजना के काम को व्यवस्थित एवं प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ उन्होंने प्रगति और कार्ययोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा भी की।

    निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय और परियोजना की नियमित समीक्षा के जरिए निर्माण गतिविधियों को गति देने पर भी जोर दिया गया।

  • भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि सरकार इन सभी समझौतों की जांच कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि समीक्षा के बाद कुछ फैसलों का असर जल्द सामने आ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन समझौतों में बदलाव किया जाएगा और किन्हें समाप्त करने पर विचार होगा।

    नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।

    BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।

    भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।

    हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।

    इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।

    ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।

    फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।

  • BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली ।18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज शाम करीब पौने छह बजे द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। BRICS शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

    काई ची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा व्यापार, कृषि क्षेत्र और बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित विषय भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं।

    बैठक के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर मजबूत सैन्य सुरक्षा व्यवस्था और आयात से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है।

    BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया था।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने किया था। इस तरह शिखर सम्मेलन के लिए कई प्रमुख देशों के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी हो चुकी है।

    शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ व्यापार, आर्थिक और तकनीकी विषयों पर चर्चा की संभावना है।

    सीमा से जुड़े विषय और LAC पर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रस्तावित बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, आपूर्ति श्रृंखला और आयात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    फिलहाल शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद BRICS शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक अहम कार्यक्रमों में शामिल है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम करीब पौने छह बजे प्रस्तावित है, जिसके दौरान दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।