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  • शिवपुरी में प्राचार्य के कमरे की तलाशी में मिली स्मैक की 14 पुड़िया विभाग ने किया निलंबित पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत शुरू की कार्रवाई

    शिवपुरी में प्राचार्य के कमरे की तलाशी में मिली स्मैक की 14 पुड़िया विभाग ने किया निलंबित पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत शुरू की कार्रवाई


    शिवपुरी । शिवपुरी में सरकारी कृषि प्रशिक्षण केंद्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शासकीय कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य लक्ष्मीनारायण चौरसिया की टेबल की दराज से स्मैक की 14 पुड़िया बरामद होने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राचार्य की टेबल से नशीला पदार्थ मिलने की खबर सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के अनुसार 9 सितंबर को कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र में स्मैक की पुड़िया रखी हुई हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और केंद्र परिसर में जांच शुरू की। इसके बाद प्राचार्य के कमरे की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान प्राचार्य की टेबल की दराज में सफेद पॉलिथीन के भीतर कागज में लिपटी हुई 14 पुड़िया मिलीं। पुलिस ने मौके पर ही बरामद पदार्थ की जांच और तौल की प्रक्रिया पूरी की।

    पुलिस के मुताबिक पुड़ियों के भीतर भूरे रंग का पाउडर मिला जिसका कुल वजन 1.66 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने इसे स्मैक बताते हुए जब्त कर लिया। बरामदगी की पूरी कार्रवाई को रिकॉर्ड करने के लिए वीडियोग्राफी भी कराई गई। मामले में पुलिस ने जब्ती की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही संबंधित दस्तावेज भी तैयार किए।

    कार्रवाई के दौरान प्राचार्य लक्ष्मीनारायण चौरसिया से पंचनामा जब्ती पत्र और नोटिस पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। पुलिस के अनुसार प्राचार्य ने इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके हस्ताक्षर नहीं करने की स्थिति को भी अलग पंचनामा के माध्यम से दर्ज किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि टेबल की दराज में मिली स्मैक वहां कैसे पहुंची और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं।

    कोतवाली पुलिस ने मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। नशीले पदार्थ की बरामदगी सरकारी संस्थान के परिसर से होने के कारण मामला और भी गंभीर माना जा रहा है। पुलिस बरामद पदार्थ की जांच और मामले से जुड़े तथ्यों को आगे बढ़ा रही है।

    इधर पुलिस कार्रवाई के बाद विभाग ने भी प्राचार्य के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। विभागीय कार्रवाई के बाद अब मामले की जांच पुलिस के साथ प्रशासनिक स्तर पर भी आगे बढ़ सकती है। फिलहाल पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि बरामद 14 पुड़िया किसके लिए रखी गई थीं और इनका इस्तेमाल या आपूर्ति किस उद्देश्य से की जानी थी। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • शेयर मार्केट में कमाई के लिए कहां लगाएं पैसा जोखिम और रिटर्न समझकर चुनें ये निवेश विकल्प नए निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी

    शेयर मार्केट में कमाई के लिए कहां लगाएं पैसा जोखिम और रिटर्न समझकर चुनें ये निवेश विकल्प नए निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी


    नई दिल्ली ।
    शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक अब बैंक एफडी और पारंपरिक बचत विकल्पों के साथ शेयर बाजार को भी अपने निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहे हैं। हालांकि शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर शेयर और हर निवेश विकल्प का जोखिम एक जैसा नहीं होता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर शेयर मार्केट में पैसा कहां लगाया जाए और किस तरह का निवेश बेहतर हो सकता है।

    शेयर बाजार में निवेश का सबसे सीधा तरीका कंपनियों के शेयर खरीदना है। जब किसी कंपनी के शेयर खरीदे जाते हैं तो निवेशक उस कंपनी में हिस्सेदारी लेता है। कंपनी के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति के आधार पर शेयर की कीमत ऊपर या नीचे जा सकती है। अच्छे कारोबार वाली मजबूत कंपनियों के शेयर लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं लेकिन शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए केवल किसी के कहने पर शेयर खरीदने के बजाय कंपनी के कारोबार वित्तीय प्रदर्शन कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है।

    नए निवेशकों के लिए Large Cap कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प मानी जाती हैं क्योंकि इनमें आमतौर पर बड़ी और स्थापित कंपनियां शामिल होती हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में तेजी से बढ़ने की संभावना हो सकती है लेकिन इनके साथ उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से ही इन श्रेणियों में पैसा लगाने का फैसला करना चाहिए।

    अगर किसी निवेशक को अलग अलग कंपनियों के शेयर चुनने में परेशानी होती है तो म्यूचुअल फंड एक विकल्प हो सकता है। म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा अलग अलग सिक्योरिटीज में लगाया जाता है और इसका प्रबंधन फंड मैनेजर करते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में शेयर बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है लेकिन अलग अलग कंपनियों में निवेश होने के कारण पोर्टफोलियो में विविधता मिल सकती है। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग Systematic Investment Plan यानी SIP के जरिए नियमित रकम निवेश करने पर भी विचार कर सकते हैं।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय पूरा पैसा एक ही शेयर या एक ही सेक्टर में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। अलग अलग कंपनियों और सेक्टर में निवेश करके पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही निवेश की अवधि भी महत्वपूर्ण है। अगर पैसा जल्द ही चाहिए तो बाजार के उतार चढ़ाव के कारण परेशानी हो सकती है। लंबी अवधि के निवेश में बाजार की छोटी अवधि की हलचल का असर कम करने का मौका मिल सकता है हालांकि इसमें भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।

    निवेश करने से पहले अपनी आय बचत और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग से पर्याप्त रकम रखने के बाद ही बाजार में निवेश करना बेहतर माना जाता है। किसी शेयर के पुराने रिटर्न को देखकर भविष्य में भी उसी तरह का रिटर्न मिलने की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले कंपनी और निवेश उत्पाद की जानकारी समझें और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार में तेजी से पैसा कमाने के बजाय अनुशासित तरीके से लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश की रणनीति बनानी चाहिए।

  • MP Weather Update: भोपाल में शनिवार को फिर बरसेंगे बादल बारिश के साथ तेज हवा और गरज चमक का अलर्ट जैसा रहेगा मौसम

    MP Weather Update: भोपाल में शनिवार को फिर बरसेंगे बादल बारिश के साथ तेज हवा और गरज चमक का अलर्ट जैसा रहेगा मौसम

    भोपाल । भोपाल में सितंबर के दूसरे सप्ताह में मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। राजधानी में शुक्रवार को भी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है और शनिवार 12 सितंबर को भी मौसम राहत देने के बजाय लोगों को फिर से भिगो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 सितंबर को भोपाल में आसमान में बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के शहरवार पूर्वानुमान में शनिवार के लिए न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री और अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री रहने का अनुमान जताया गया है।

    मौसम के इस बदलाव का असर सुबह से लेकर शाम तक देखने को मिल सकता है। राजधानी में कुछ समय के लिए बादल घने हो सकते हैं और इसके बाद अचानक बारिश का दौर शुरू हो सकता है। गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। ऐसे में खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। शनिवार को बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में सड़कें गीली होने और यातायात की रफ्तार प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    भोपाल में बीते दिनों से मौसम में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कभी तेज धूप निकल रही है तो कुछ ही समय बाद बादल घिरने लगते हैं। इसी वजह से दिन के तापमान में भी ज्यादा स्थिरता नहीं दिखाई दे रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 13 सितंबर को भी बारिश के कुछ दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है जबकि 14 और 15 सितंबर को भी हल्की बारिश हो सकती है। इसके बाद मौसम में कुछ राहत मिलने के संकेत हैं।

    शनिवार को बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को जरूरी काम के लिए निकलते समय मौसम का अपडेट देखते रहने की जरूरत है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को बारिश के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए। बिजली चमकने या तेज गरज के समय खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना बेहतर होगा। किसानों के लिए भी बदलता मौसम महत्वपूर्ण है क्योंकि बारिश का सीधा असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर 12 सितंबर को भोपाल का मौसम सुहावना रहने के साथ बीच बीच में बारिश का रंग दिखा सकता है। तापमान में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है लेकिन उमस और बादलों के बीच मौसम लगातार करवट ले सकता है। राजधानीवासियों के लिए शनिवार का दिन बारिश और बादलों के नाम रहने की संभावना है।

  • हरतालिका तीज पर बाजार की मूर्ति नहीं मिट्टी से बनाएं शिवलिंग इसके पीछे छिपी है माता पार्वती की कठोर तपस्या की कहानी

    हरतालिका तीज पर बाजार की मूर्ति नहीं मिट्टी से बनाएं शिवलिंग इसके पीछे छिपी है माता पार्वती की कठोर तपस्या की कहानी

    नई दिल्ली । हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति की इच्छा से हरतालिका तीज का व्रत करती हैं। इस साल हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस व्रत की पूजा में एक खास परंपरा देखने को मिलती है जिसमें महिलाएं मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करती हैं। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या कारण है और मिट्टी से बने शिवलिंग का क्या महत्व है आइए जानते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा का संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से माना जाता है। हरतालिका तीज की कथा में बताया जाता है कि माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसी दौरान उनके विवाह की चर्चा भगवान विष्णु से होने लगी। माता पार्वती भगवान शिव को ही पति के रूप में चाहती थीं इसलिए वह अपनी सखियों के साथ वन में चली गईं और वहां उन्होंने महादेव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या शुरू की।

    मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता पार्वती ने मिट्टी या रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी साधना जारी रखी। माता पार्वती की भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी कथा की स्मृति में हरतालिका तीज के दिन मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने और उसकी पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

    इस परंपरा का एक गहरा आध्यात्मिक संदेश भी माना जाता है। मिट्टी को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग को अपने हाथों से बनाकर पूजा करना इस बात का संकेत माना जाता है कि भगवान की आराधना के लिए किसी महंगी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची श्रद्धा संकल्प और भक्ति ही पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। व्रती महिलाएं जब अपने हाथों से शिवलिंग तैयार करती हैं तो वह माता पार्वती की साधना और उनके अटूट संकल्प को भी याद करती हैं।

    हरतालिका तीज की पूजा में मिट्टी से शिवलिंग के साथ शिव पार्वती और गणेश की आकृति बनाने की परंपरा भी कई स्थानों पर है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल चंदन अक्षत फूल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। अगर शिवलिंग बालू से बना हो तो बहुत अधिक जल चढ़ाने से उसे नुकसान हो सकता है इसलिए प्रतीकात्मक रूप से जल अर्पित करना उचित माना जाता है।

    माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर चूड़ी मेहंदी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है और भगवान शिव के मंत्र का जाप करते हुए आरती की जाती है।

    व्रत के समापन के बाद मिट्टी या बालू से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। आज के समय में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए घर पर ही साफ पात्र में विसर्जन कर मिट्टी को पौधे या गमले की मिट्टी में मिलाना बेहतर विकल्प माना जा सकता है। इस तरह हरतालिका तीज की यह परंपरा माता पार्वती की भक्ति तपस्या और अटूट संकल्प की याद दिलाने के साथ प्रकृति से जुड़ाव का संदेश भी देती है।

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    सिर्फ ₹20 सालाना में ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा, जानिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की पात्रता और जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना देश में उपलब्ध कम प्रीमियम वाली सरकारी दुर्घटना बीमा योजनाओं में शामिल है। इस योजना की सबसे खास बात इसका बेहद कम सालाना प्रीमियम है। इसके लिए पात्र व्यक्ति को केवल 20 रुपये प्रति वर्ष का भुगतान करना होता है। अगर इस रकम को रोजाना के खर्च के हिसाब से देखा जाए तो यह करीब 5.5 पैसे प्रतिदिन बैठती है। यानी इसका दैनिक खर्च 50 पैसे से भी काफी कम है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमित व्यक्ति को दुर्घटना से जुड़े मामलों में आर्थिक सुरक्षा मिलती है। योजना के अंतर्गत अधिकतम 2 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध है। यदि बीमित व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है या वह पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो 2 लाख रुपये की बीमा राशि का प्रावधान है।

    दुर्घटना के कारण आंशिक रूप से दिव्यांग होने की स्थिति में बीमा कवर की राशि 1 लाख रुपये है। इस तरह योजना दुर्घटना से होने वाली मृत्यु के साथ-साथ पूर्ण और आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान करती है।

    इस योजना का लाभ लेने के लिए आयु संबंधी पात्रता भी तय है। 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष की उम्र तक के व्यक्ति इसमें शामिल हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति का बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी है। योजना का लाभ लेने वाले व्यक्ति के खाते से निर्धारित प्रीमियम की राशि ऑटो-डेबिट माध्यम से तय समय पर काटी जाती है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की बीमा अवधि एक जून से अगले वर्ष 31 मई तक रहती है। यह वार्षिक आधार पर नवीनीकृत होने वाली योजना है। यानी योजना के तहत बीमा कवर एक साल की अवधि के लिए रहता है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसे आगे जारी रखा जा सकता है।

    इस बीमा योजना को सरकारी स्तर पर किफायती दुर्घटना बीमा सुविधा के तौर पर उपलब्ध कराया गया है। योजना के तहत बीमा सेवाएं सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों के माध्यम से उपलब्ध होती हैं। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम में दुर्घटना से संबंधित बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को समझने के लिए इसके प्रीमियम और कवर के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है। केवल 20 रुपये सालाना प्रीमियम के बदले पात्र व्यक्ति को दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। वहीं आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये का कवर निर्धारित है।

    इस योजना की पात्रता में उम्र और बचत बैंक खाते की शर्त प्रमुख है। 18 से 70 वर्ष के बचत बैंक खाताधारक इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। योजना की अवधि एक जून से 31 मई तक रहती है और प्रीमियम की राशि बैंक खाते से ऑटो-डेबिट के जरिए काटी जाती है।

  • चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव

    चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव


    सतना । सतना जिले के चित्रकूट में लगातार हो रही बाढ़ ने एक बार फिर नदी और इंसानी बस्तियों के बीच बिगड़ते संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच दिनों के भीतर तीन बार आई बाढ़ के बाद अब अतिक्रमण अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंदाकिनी नदी का प्राकृतिक रास्ता निर्माण और अतिक्रमण की वजह से इतना संकरा हो गया है कि बारिश का पानी अपना रास्ता छोड़कर घरों और दुकानों में पहुंचने लगा है। 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान सामने आया है। वहीं करीब 1000 करोड़ लीटर पानी के घरों और दुकानों में घुसने का दावा किया गया है।

    पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता के आकलन के अनुसार चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी करीब पांच किलोमीटर तक बहती है। नदी के दोनों किनारों पर लगभग 100 मीटर के दायरे में निर्माण और अतिक्रमण होने की बात सामने आई है। यदि दोनों तरफ के इस क्षेत्र को जोड़ा जाए तो करीब 10 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र बनता है। विशेषज्ञ के अनुसार यदि यहां पानी के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होती तो बड़ी मात्रा में पानी को समाने की क्षमता रहती। लेकिन निर्माण और अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक फैलाव को सीमित कर दिया है जिससे तेज बारिश के दौरान पानी के लिए रास्ता कम पड़ने लगा।

    मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण का मामला नया नहीं है। जबलपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा के अनुसार एनजीटी ने वर्ष 2014 के बाद 2016 और 2018 में भी जिला प्रशासन को सरयू और मंदाकिनी के किनारे 100 मीटर के दायरे में बने भवनों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। 1980 के बाद बने निर्माणों को ग्रीन बेल्ट के उल्लंघन के रूप में चिह्नित कर कार्रवाई करने की बात भी सामने आई थी। शुरुआती दौर में कुछ निर्माण हटाए गए लेकिन बाद में कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई।

    चित्रकूट की जल समस्या सिर्फ मंदाकिनी तक सीमित नहीं है। यहां कभी मंदाकिनी पयस्वनी और सरयू के संगम की धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पयस्वनी और सरयू अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं हैं। अतिक्रमण प्रदूषण और बढ़ते निर्माण ने इन जलधाराओं की स्थिति को प्रभावित किया है। राघवप्रयाग घाट के आसपास भी नालों के जरिए गंदा पानी मंदाकिनी में पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

    मंदाकिनी संरक्षण के लिए करीब 24.62 करोड़ रुपये का रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट भी सवालों के घेरे में है। आरोग्यधाम के पास 600 मीटर लंबी और सात मीटर ऊंची प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी। कुछ लोगों का आरोप है कि इस निर्माण से नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ा। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच जरूरी होगी।

    बाढ़ के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर चिंता जताई है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने नदी किनारे अतिक्रमण का रिकॉर्ड तैयार कराने की बात कही है जबकि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नदी को उसके स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त जगह देने की जरूरत बताई है।

    अब मंदाकिनी के किनारे हुए निर्माणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। मझगवां एसडीएम के नेतृत्व वाली टीम में नगर परिषद के अधिकारी नायब तहसीलदार पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालने वाले सरकारी और निजी निर्माणों को चिह्नित करेगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मंदाकिनी के हाई फ्लड लेवल को भी नए सिरे से चिन्हित किया जाएगा। 28 और 29 अगस्त की रात नदी का जलस्तर निर्धारित 139.60 मीटर के मुकाबले करीब 145.76 मीटर तक पहुंच गया था। अब सवाल सिर्फ बाढ़ का नहीं बल्कि यह है कि मंदाकिनी को उसका पुराना रास्ता और फैलाव वापस कैसे मिले।

  • गुना में गाय को पैर मारने पर बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति से नाक रगड़कर मंगवाई माफी, VIDEO वायरल

    गुना में गाय को पैर मारने पर बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति से नाक रगड़कर मंगवाई माफी, VIDEO वायरल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के गुना जिले के जामनेर कस्बे में गाय को पैर से हटाने की घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि कुछ हिंदूवादी संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने गाय को पैर मारने वाले बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति से उसके सामने जमीन पर झुककर माफी मंगवाई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बुजुर्ग गाय के सामने नतमस्तक होकर माफी मांगते दिखाई दे रहे हैं।

    मामला सामने आने के बाद बुजुर्ग ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन पर दबाव बनाया गया। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, इसलिए प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।

    सामान उतारते समय रास्ते में खड़ी थी गाय
    जानकारी के अनुसार, कैंट गुना निवासी जमीलउद्दीन शटर आदि लगाने का काम करते हैं। कुछ दिन पहले वह पिकअप वाहन से सामान लेकर जामनेर में एक परिवार के यहां काम करने पहुंचे थे। सामान उतारने के दौरान रास्ते में एक गाय खड़ी थी।

    बताया जा रहा है कि रास्ता खाली कराने के लिए जमीलउद्दीन ने गाय को पैर मारा। पास लगे CCTV कैमरे में यह घटना रिकॉर्ड हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते मामला फैल गया और हिंदूवादी संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए।

    माहौल बिगड़ने पर लोगों ने सुरक्षित रखा
    घटना को लेकर विवाद बढ़ने के बाद इलाके में माहौल तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि स्थिति को देखते हुए आसपास के कुछ लोगों ने जमीलउद्दीन को कुछ समय के लिए अपने यहां सुरक्षित रखा। इसके बाद उनसे गाय के सामने माफी मंगवाई गई। इसी दौरान का वीडियो अब सामने आया है। इसमें बुजुर्ग गाय के सामने जमीन पर झुककर माफी मांगते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।

    बुजुर्ग का आरोप- पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की
    जमीलउद्दीन ने जामनेर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के बाद वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन पर दबाव बनाया गया।

    जमीलउद्दीन का आरोप है कि पुलिस ने उनसे लिखवा लिया कि वह किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहते और वह माफी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से करेंगे। साथ ही उन्होंने अपने साथ किए गए व्यवहार की भी जांच की मांग की है।

    पुलिस बोली- दोनों पक्षों से नहीं मिली लिखित शिकायत
    जामनेर थाना प्रभारी मनोज मेहरा ने मामले में अलग पक्ष रखा है। उनके मुताबिक, जमीलउद्दीन काम के सिलसिले में जामनेर आए थे और रास्ते से गाय को हटाने के उद्देश्य से उन्होंने उसे पैर मारा था। मौके पर मौजूद बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया और उनसे पूछताछ की।

    थाना प्रभारी के अनुसार, इसके बाद जमीलउद्दीन ने गाय के सामने माफी मांग ली। पुलिस का कहना है कि मामले में दोनों पक्षों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, इसलिए फिलहाल कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। पुलिस के मुताबिक, यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत मिलती है तो मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में
    बुजुर्ग से माफी मंगवाने का वीडियो सामने आने के बाद पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर पुलिस लिखित शिकायत नहीं मिलने की बात कह रही है, वहीं बुजुर्ग पुलिस पर दबाव बनाकर माफीनामा लिखवाने का आरोप लगा रहे हैं। फिलहाल मामले में किसी पक्ष की लिखित शिकायत सामने नहीं आई है। शिकायत मिलने और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां

    भोपाल की कॉलेज कैंटीन में खाद्य सुरक्षा की खुली पोल सड़ी सब्जियों से लेकर एक्सपायर्ड ब्रेड तक मिलीं कई गंभीर खामियां


    भोपाल । भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए संचालित कैंटीन में खाद्य सुरक्षा और साफ सफाई को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान कैंटीन में सड़ी हुई प्याज मिली जबकि सैंडविच तैयार करने के लिए ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि करीब 10 दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने वाली कैंटीन में इस तरह की अनियमितताएं मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संचालकों को सुधार सूचना पत्र जारी कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने कॉलेज परिसर में संचालित नवीन कैंटीन का निरीक्षण किया था। इस दौरान खाद्य पदार्थों के निर्माण और उनके भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा गया। जांच के दौरान कैंटीन में साफ सफाई और हाइजीन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी। इसके अलावा भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और उसके भंडारण को लेकर भी कई कमियां सामने आईं।

    निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला सैंडविच ब्रेड से जुड़ा सामने आया। कैंटीन में ऐसी ब्रेड का इस्तेमाल किया जा रहा था जिसकी बेस्ट बिफोर अवधि लगभग 10 दिन पहले समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद उससे विद्यार्थियों के लिए सैंडविच तैयार किए जा रहे थे। कैंटीन में सड़ी हुई प्याज भी रखी मिली। खाद्य सामग्री की ऐसी स्थिति विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है क्योंकि कॉलेज कैंटीन में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र भोजन और नाश्ता करते हैं।

    अधिकारियों ने कैंटीन में इस्तेमाल होने वाले पेयजल की व्यवस्था की भी जांच की। इसके लिए आरओ और वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम तथा पानी की गुणवत्ता से संबंधित व्यवस्थाओं को देखा गया। निरीक्षण के दौरान कॉलेज परिसर में संचालित एक अन्य कैंटीन में भी स्वच्छता और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी कमियां सामने आईं। यहां भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों की वेशभूषा भी निर्धारित स्वच्छता मानकों के अनुरूप नहीं मिली।

    खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों कैंटीन संचालकों को कमियों को गंभीरता से लेते हुए सुधार सूचना पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित व्यवस्थाओं को नियमानुसार सुधारने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए दोनों कैंटीन से भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के नमूने भी लिए गए हैं।

    जांच के दौरान मटर का आटा और रिफाइंड सोयाबीन तेल के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत लिए गए हैं। इन नमूनों को खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद उसमें सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी कार्रवाई के बाद अब कैंटीन संचालकों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही विद्यार्थियों की सेहत से जुड़े खाद्य मानकों को लेकर कॉलेज परिसर में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी सामने आई है।

  • मंगल का नक्षत्र परिवर्तन 24 सितंबर को, 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और कमाई के रास्ते

    मंगल का नक्षत्र परिवर्तन 24 सितंबर को, 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और कमाई के रास्ते


    नई दिल्ली। ज्योतिष में ग्रहों की चाल के साथ उनके नक्षत्र परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी ग्रह के राशि परिवर्तन के अलावा नक्षत्र बदलने से भी उसके प्रभाव में बदलाव आने की मान्यता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में मंगल नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 24 सितंबर 2026 को मंगल पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 17 अक्टूबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान कुछ राशियों के जातकों को करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बताए जा रहे हैं।

    मंगल 24 सितंबर को सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि माने जाते हैं, जबकि इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं। इस अवधि में मंगल कर्क राशि में स्थित रहेंगे। कर्क मंगल की नीच राशि मानी जाती है, हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसी राशि में गुरु की मौजूदगी मंगल के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकती है और शुभ परिणामों की संभावना बढ़ा सकती है।

    मेष राशि: अटके काम होंगे पूरे, संपत्ति में लाभ के योग

    मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए राहत और प्रगति लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके कामों में गति आने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। कारोबार करने वालों के लिए समय अनुकूल रह सकता है और मुनाफे में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं।

    परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलेगा। इस दौरान कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार आएगा और मानसिक तनाव से भी राहत मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि: नौकरी और करियर में मिल सकते हैं नए अवसर

    सिंह राशि वालों के लिए मंगल का नक्षत्र परिवर्तन नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को कोई बेहतर मौका मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ आपकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होने के संकेत हैं।

    विद्यार्थियों के लिए भी यह समय अनुकूल रह सकता है। परिवार में आपसी तालमेल बेहतर होगा और किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है।

    कन्या राशि: मान-सम्मान बढ़ेगा, करियर में प्रगति के संकेत

    कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश मान-सम्मान और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। नौकरी या कारोबार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

    रोजगार के क्षेत्र में तरक्की के अवसर बन सकते हैं। नौकरी बदलने का विचार कर रहे लोगों को बेहतर विकल्प मिलने की संभावना है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और जीवनसाथी के साथ भी अच्छा समय बीत सकता है।

    धनु राशि: आमदनी में सुधार, कारोबार में बढ़ सकता है मुनाफा

    धनु राशि के जातकों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक रूप से लाभकारी रह सकता है। आमदनी में सुधार के साथ कारोबार में मुनाफे के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुके किसी काम में तेजी आने की संभावना है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों और माता-पिता का सहयोग मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं।