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  • गणपति उत्सव सिर्फ मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं कहीं गौरी पूजन तो कहीं खास सजावट जानिए राज्यों के अनुसार गणेश चतुर्थी की अनोखी परंपराएं

    गणपति उत्सव सिर्फ मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं कहीं गौरी पूजन तो कहीं खास सजावट जानिए राज्यों के अनुसार गणेश चतुर्थी की अनोखी परंपराएं


    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी का पर्व भारत में भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 से शुरू होगा। गणपति स्थापना के साथ देशभर में कई दिनों तक पूजा अर्चना भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। हालांकि इस पर्व की खासियत सिर्फ इसकी भव्यता नहीं बल्कि अलग अलग राज्यों में इससे जुड़ी स्थानीय परंपराएं भी हैं। महाराष्ट्र से लेकर गोवा कर्नाटक तमिलनाडु और अन्य राज्यों तक गणेश उत्सव मनाने का तरीका काफी अलग दिखाई देता है।

    महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव सबसे ज्यादा लोकप्रिय और भव्य रूप में दिखाई देता है। यहां घरों के साथ सार्वजनिक पंडालों में भी गणपति की स्थापना की जाती है। कई स्थानों पर विशाल प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूरे उत्सव के दौरान विशेष पूजा आरती सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा भजन का आयोजन होता है। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में गणेश उत्सव की रौनक देखते ही बनती है। परिवारों में गणपति को घर का सदस्य मानकर श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया जाता है।

    गोवा में गणेश चतुर्थी को चवथ के नाम से जाना जाता है। यहां इस पर्व का स्वरूप काफी पारिवारिक और पारंपरिक होता है। गणपति स्थापना के साथ माटोली सजाने की खास परंपरा निभाई जाती है। माटोली में फल सब्जियां पत्तियां फूल और जंगल से मिलने वाली कई प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना भी माना जाता है। गणपति पूजा के दौरान मोदक के अलावा कई स्थानीय पकवान भी तैयार किए जाते हैं।

    कर्नाटक में गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश के साथ गौरी पूजन की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई परिवारों में गौरी देवी का विशेष स्वागत किया जाता है और महिलाओं द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। गणेश और गौरी की पूजा को परिवार की सुख समृद्धि और मंगल से जोड़कर देखा जाता है। घरों में सजावट के साथ पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

    तमिलनाडु में गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यहां भगवान गणेश की पूजा में पारंपरिक दक्षिण भारतीय रीति रिवाजों की झलक दिखाई देती है। घरों और मंदिरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा की जाती है। भगवान गणेश को अलग अलग प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं और भक्त श्रद्धा के साथ मंत्र जाप तथा आरती करते हैं।

    देश के अन्य हिस्सों में भी गणेश चतुर्थी स्थानीय संस्कृति के रंग में रंगी दिखाई देती है। कहीं बड़े सार्वजनिक आयोजन होते हैं तो कहीं परिवार के लोग घर में छोटी प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं। कई जगहों पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

    गणेश चतुर्थी की यही विविधता भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है। पूजा की विधि और परंपराएं भले ही अलग हों लेकिन हर जगह भगवान गणेश से सुख शांति समृद्धि और विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। यही वजह है कि गणपति उत्सव धार्मिक आस्था के साथ साथ भारत की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का भी खूबसूरत उदाहरण बन जाता है।

  • आज का राशिफल 12 सितंबर 2026: शनिवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा बेहद खास नौकरी कारोबार और आर्थिक मामलों में बनेंगे नए अवसर

    आज का राशिफल 12 सितंबर 2026: शनिवार का दिन इन राशियों के लिए रहेगा बेहद खास नौकरी कारोबार और आर्थिक मामलों में बनेंगे नए अवसर

    नई दिल्ली । 12 सितंबर 2026 शनिवार का दिन ग्रहों की चाल के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आज का दिन कुछ लोगों के लिए आर्थिक मजबूती लेकर आ सकता है तो कुछ जातकों को अपने काम और रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। नौकरी करने वालों को किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का मौका मिल सकता है। कारोबार में भी नए संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं। परिवार में किसी सदस्य की सफलता से मन प्रसन्न रहेगा। वृषभ राशि वालों को आज आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाने की सलाह है। अचानक खर्च सामने आ सकते हैं लेकिन आय के नए रास्ते भी बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।

    मिथुन राशि के लिए दिन नई योजनाओं को आगे बढ़ाने वाला रहेगा। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा हो सकता है। नौकरी में बदलाव के बारे में सोच रहे हैं तो आज किसी अच्छी खबर की उम्मीद रख सकते हैं। कर्क राशि वालों को भावनात्मक फैसलों से बचना चाहिए। परिवार के साथ समय बिताने से मन हल्का होगा। धन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी नुकसान दे सकती है। सिंह राशि के जातकों के लिए दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। आपकी मेहनत लोगों की नजर में आएगी और कार्यक्षेत्र में सम्मान मिल सकता है। कारोबारियों को किसी पुराने संपर्क से फायदा मिलने के संकेत हैं।

    कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन योजनाओं को व्यवस्थित करने का है। काम का दबाव रह सकता है लेकिन सही रणनीति से आप कई जिम्मेदारियां आसानी से पूरी कर सकते हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रह सकती है। तुला राशि के जातकों को रिश्तों के मामले में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। जीवनसाथी के साथ किसी पुराने मतभेद को दूर करने का मौका मिलेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वृश्चिक राशि वालों को आज अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। छोटी सी बात विवाद का कारण बन सकती है। निवेश से जुड़े फैसले लेते समय पूरी जानकारी जरूर लें।

    धनु राशि के लिए शनिवार का दिन उत्साह और अवसर लेकर आ सकता है। यात्रा से जुड़े काम बन सकते हैं और किसी पुराने मित्र से मुलाकात संभव है। करियर में आगे बढ़ने का नया रास्ता दिखाई दे सकता है। मकर राशि वालों को मेहनत का परिणाम मिलने की संभावना है। लंबे समय से चल रही किसी समस्या का समाधान निकल सकता है। आर्थिक मामलों में भी दिन राहत देने वाला रहेगा। कुंभ राशि के जातकों के लिए नए संपर्क भविष्य में लाभकारी साबित हो सकते हैं। काम के सिलसिले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। मीन राशि वालों के लिए दिन मिश्रित परिणाम वाला रह सकता है। मन में चल रही उलझनों को शांत होकर सुलझाने की कोशिश करें। खर्च पर नियंत्रण रखें और किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी न करें। कुल मिलाकर 12 सितंबर का दिन मेहनत धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने वालों के लिए बेहतर परिणाम देने वाला रह सकता है।

  • अब जमीन का भी बनेगा Aadhaar: हर संपत्ति को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक नंबर, सबकुछ होगा डिजिटल

    अब जमीन का भी बनेगा Aadhaar: हर संपत्ति को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक नंबर, सबकुछ होगा डिजिटल


    नई दिल्ली। अब जमीन की पहचान भी डिजिटल तरीके से होगी। केंद्र सरकार ने देशभर में भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक और एकीकृत करने की दिशा में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 की शुरुआत की है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों की जमीनों से जुड़े रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्रेशन और अन्य जानकारियों को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सरकार ने गुरुवार को DILRMP के तीसरे चरण की विस्तृत गाइडलाइन जारी की।

    योजना के लिए 2026 से 2031 के दौरान 565.5 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्रेशन और उससे जुड़े आंकड़ों को GIS आधारित डिजिटल फ्रेमवर्क में लाना है। सरकार का मानना है कि एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की पहचान और जांच आसान होगी तथा धोखाधड़ी और विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के लॉन्च के दौरान कहा कि DILRMP 3.0 केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश को एक यूनिफाइड लैंड मैनेजमेंट सिस्टम की ओर ले जाएगा। उनके मुताबिक, इससे किसानों को संस्थागत ऋण हासिल करने में आसानी होगी और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी।

    GIS आधारित ‘लैंड स्टैक’ बनेगा

    DILRMP 3.0 की सबसे अहम पहल GIS-इनेबल्ड लैंड स्टैक है। यह एक यूनिफाइड डिजिटल फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप, अधिकारों के रिकॉर्ड, संपत्ति रजिस्ट्रेशन और भूमि से जुड़े अदालती मामलों जैसी जानकारियों को एक ही डिजिटल इंटरफेस पर जोड़ा जाएगा।

    हर राज्य API के माध्यम से अलग-अलग भूमि डेटासेट और सिस्टम को आपस में जोड़कर अपना स्टेट लैंड स्टैक तैयार कर सकेगा। यही राज्य स्तरीय स्टैक आगे चलकर नेशनल लैंड स्टैक की नींव बनेंगे। इससे संबंधित अधिकारियों को भूमि से जुड़े डेटा और सिस्टम पर बेहतर नियंत्रण मिल सकेगा।

    हर जमीन को मिलेगा 14 अंकों का यूनिक नंबर

    योजना के तहत देश की हर जमीन को 14 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति की स्पष्ट डिजिटल पहचान सुनिश्चित करना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे जमीन की पहचान को लेकर होने वाली गड़बड़ियों और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

    75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय बनेंगे सर्विस सेंटर

    जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाओं को भी आधुनिक बनाया जाएगा। पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर ज्यादा भीड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को डिजिटल सुविधाओं से लैस कर आधुनिक सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।

    इससे लोगों को रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाएं एक बेहतर और व्यवस्थित व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

    पुश्तैनी जमीन के पुराने रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल

    भूमि और संपत्ति के पुराने रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड को भी व्यवस्थित तरीके से स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखना, विरासत से जुड़े अधिकारों की रक्षा करना और पुश्तैनी जमीन को लेकर होने वाले विवादों को कम करना है।

    डिजिटल होगी रजिस्ट्रेशन रिपोजिटरी

    योजना में रजिस्ट्रेशन रिपोजिटरी भी विकसित की जाएगी। इसमें रजिस्टर्ड दस्तावेजों के साथ संपत्ति से जुड़ी देनदारियों और ऋण की जानकारी सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इससे जमीन के स्वामित्व की जांच, पुराने खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और संपत्ति से संबंधित जरूरी जांच-पड़ताल आसान हो सकेगी।

    पेपरलेस होंगे राजस्व न्यायालय

    राजस्व अदालतों को भी डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इसके लिए राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) को आधुनिक बनाया जाएगा। इसे सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने का उद्देश्य लंबित मामलों को कम करना और म्यूटेशन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाना है।

    शहरों में तैयार होंगे डिजिटल लैंड रिकॉर्ड

    शहरी क्षेत्रों के लिए NAKSHA (नक्शा) पायलट प्रोजेक्ट को भी गति दी जाएगी। इसके तहत सटीक और GIS-इनेबल्ड शहरी भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। शहरी संपत्तियों के लिए Urban Property Card यानी UrPro Card जारी किए जाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

    इस तरह DILRMP 3.0 के जरिए जमीन के नक्शे से लेकर मालिकाना हक, रजिस्ट्रेशन और न्यायालय से जुड़े रिकॉर्ड तक को एक डिजिटल व्यवस्था में लाने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि जमीन से जुड़े कामकाज में पारदर्शिता बढ़े, रिकॉर्ड तक पहुंच आसान हो और संपत्ति विवाद व धोखाधड़ी के मामलों में कमी आए।

  • अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा


    नई दिल्ली। सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कमोडिटी मार्केट से लेकर सर्राफा बाजार तक दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। MCX पर दो दिनों में चांदी 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है, जबकि सोना भी 2 हजार रुपए से अधिक सस्ता हो गया है। शुक्रवार को भी दोनों के भाव गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

    आज सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ?
    MCX पर शुक्रवार को सोने की कीमत करीब 1,200 रुपए गिरकर 1,50,695 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई। वहीं चांदी करीब 2,600 रुपए टूटकर 2,30,270 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी सोने-चांदी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत 2 हजार रुपए से ज्यादा और चांदी की कीमत 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी दबाव
    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दिया। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड 1.32% गिरकर 4,401.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत 5.45% की गिरावट के साथ 64.908 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों से बढ़ा दबाव
    सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका से आए महंगाई के मजबूत आंकड़ों को माना जा रहा है। इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दरों में बढ़ोतरी की संभावना 80% तक पहुंच गई है।

    ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद से सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा ऊंचे स्तरों से मुनाफावसूली ने भी कीमतों में गिरावट को तेज किया है।

    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी असर
    दूसरी ओर, जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसके चलते डॉलर भी मजबूत हो रहा है। Brent Crude Oil 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। मजबूत डॉलर और तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी सोने-चांदी के भाव पर देखने को मिल रहा है।

    नोट: सोने और चांदी में निवेश करने से पहले बाजार की मौजूदा स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।

  • शनिवार को इन नियमों का रखें खास ध्यान तेल दीपक और दान से जुड़े हैं बड़े धार्मिक रहस्य जानिए क्या करें और क्या नहीं

    शनिवार को इन नियमों का रखें खास ध्यान तेल दीपक और दान से जुड़े हैं बड़े धार्मिक रहस्य जानिए क्या करें और क्या नहीं

    नई दिल्ली । शनिवार का दिन हिंदू धर्म में न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन लोग शनिदेव की पूजा करते हैं और जीवन में चल रही परेशानियों से राहत पाने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ शनिदेव की आराधना करने से उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है। वहीं कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें शनिवार के दिन करने से बचना चाहिए।

    शनिवार की सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर शनिदेव का स्मरण करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो शनिदेव के मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाया जा सकता है। कई जगहों पर पीपल के पेड़ के नीचे भी दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को पीपल की पूजा और दीपदान करने से शनि संबंधी परेशानियों से राहत की कामना की जाती है। हालांकि पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

    शनिवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। काला तिल काला कपड़ा उड़द की दाल लोहे की वस्तु और अपनी क्षमता के अनुसार अन्य उपयोगी चीजों का दान किया जाता है। मान्यता है कि जरूरतमंद की सहायता करना शनिदेव की आराधना का एक महत्वपूर्ण तरीका है क्योंकि शनिदेव को न्याय और कर्म से जोड़ा जाता है। इसलिए किसी गरीब या असहाय व्यक्ति की मदद करना केवल धार्मिक उपाय के रूप में नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

    शनिवार को हनुमान जी की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी की आराधना करने से शनिदेव से जुड़े कष्टों में राहत मिल सकती है। भक्त इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और भगवान हनुमान का स्मरण करते हैं। कुछ लोग शनिदेव के मंत्रों का जाप भी करते हैं। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और किसी के प्रति बुरा विचार न रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    वहीं शनिवार के दिन कुछ कार्यों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन किसी के साथ छल कपट करना झूठ बोलना या जानबूझकर किसी को परेशान करना अनुचित माना गया है। खासकर गरीब कमजोर या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। शनिदेव को कर्मों का फल देने वाला माना जाता है इसलिए इस दिन ही नहीं बल्कि हर दिन अच्छे कर्म करने पर जोर दिया जाता है।

    शनिवार के दिन घर में साफ सफाई रखना भी अच्छा माना जाता है। बेवजह क्रोध करने विवाद करने और दूसरों के प्रति कटु व्यवहार से बचना चाहिए। पूजा में दिखावे की जगह श्रद्धा और सेवा की भावना को महत्व देना चाहिए। शनिदेव की कृपा पाने के लिए केवल एक दिन उपाय करने के बजाय अपने व्यवहार और कर्मों में सकारात्मक बदलाव लाना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शनिवार को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं लेकिन इन्हें आस्था और परंपरा के संदर्भ में ही समझना चाहिए। किसी भी उपाय को लेकर अंधविश्वास या भय पैदा करने के बजाय उसके पीछे छिपे संदेश को समझना जरूरी है। शनिदेव की पूजा का मूल भाव व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदार बनाना और गलत कार्यों से दूर रहने की प्रेरणा देना है।

    इसलिए शनिवार को शनिदेव का स्मरण करने के साथ जरूरतमंद की मदद करें संयमित व्यवहार रखें और अपने कर्मों को बेहतर बनाने का प्रयास करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार यही शनिदेव की आराधना का सबसे सकारात्मक मार्ग माना जाता है।

  • MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर

    MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर


    भोपाल। ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम ने मध्यप्रदेश में बारिश का दौर शुरू कर दिया है। शुक्रवार को भोपाल, दमोह, टीकमगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में बारिश हुई। भोपाल में तेज आंधी के साथ हुई बारिश के दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, दमोह के निचले इलाकों में पानी भर गया।

    शनिवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें उज्जैन, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट और छतरपुर शामिल हैं। मौसम का असर अगले तीन दिन तक बने रहने की संभावना है।

    41 जिलों में हल्की से तेज बारिश के आसार

    मौसम केंद्र के मुताबिक भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, आलीराजपुर, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।

    3-4 दिन के ब्रेक से बढ़ी गर्मी-उमस

    प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन से चार दिन से बारिश नहीं हुई थी। इसके चलते गर्मी और उमस का असर बढ़ गया था। अब बारिश का दौर शुरू होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।

    सीजन में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होती है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.7 इंच कम यानी 8% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 1%, जबकि पश्चिमी हिस्से में 14% कम बारिश दर्ज की गई है।

    33 जिलों में 1 से 56% तक बारिश कम

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 3% से 26% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के कारण स्थिति में काफी सुधार आया है। इस दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा सुधरा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंचा है।

    वहीं पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 56% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन 22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • घर में बरकत और शांति चाहते हैं तो आज ही बदलें ये वास्तु नियम इन आसान उपायों से सकारात्मक माहौल बनाने में मिलेगी मदद

    घर में बरकत और शांति चाहते हैं तो आज ही बदलें ये वास्तु नियम इन आसान उपायों से सकारात्मक माहौल बनाने में मिलेगी मदद

    नई दिल्ली । घर सिर्फ रहने की जगह नहीं होता बल्कि परिवार की खुशियों और भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान भी होता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं को लेकर कई तरह के नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि घर में चीजों को सही दिशा और उचित स्थान पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनाया जा सकता है। वहीं गलत जगह पर रखी कुछ वस्तुएं घर के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि लोग घर बनाते समय ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी वास्तु नियमों का ध्यान रखते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हमेशा साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास बेकार सामान या कूड़ा जमा नहीं होने देना चाहिए। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है इसलिए यहां साफ सफाई रखना शुभ माना जाता है। दरवाजे पर पर्याप्त रोशनी रखना भी सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा माना जाता है।

    घर के पूजा स्थान को लेकर भी वास्तु में विशेष महत्व बताया गया है। पूजा घर को साफ रखना चाहिए और वहां अनावश्यक वस्तुओं का ढेर नहीं लगाना चाहिए। पूजा स्थल के आसपास गंदगी या टूटे हुए सामान रखने से बचना चाहिए। घर में बंद पड़ी घड़ियां और लंबे समय से खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी तुरंत ठीक कराने या हटाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि खराब और बेकार वस्तुएं घर में नकारात्मकता का माहौल बना सकती हैं।

    रसोई को भी घर की महत्वपूर्ण जगह माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार गैस चूल्हे और पानी से जुड़े स्थानों को व्यवस्थित रखना चाहिए। रसोई में गंदे बर्तन लंबे समय तक नहीं छोड़ने चाहिए। भोजन बनाने वाली जगह की नियमित सफाई करना जरूरी है। इसी तरह घर में पानी का रिसाव हो रहा हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वास्तु में पानी को धन और ऊर्जा के प्रवाह से जोड़कर देखा जाता है इसलिए टपकते नल को जल्द ठीक कराने की सलाह दी जाती है।

    शयनकक्ष में भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बिस्तर के आसपास अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए और कमरे में पर्याप्त हवा तथा रोशनी का इंतजाम रखना चाहिए। सोने की जगह को शांत और व्यवस्थित रखने से मानसिक सुकून मिलने में मदद मिल सकती है। घर में टूटे हुए शीशे खराब फर्नीचर और ऐसी वस्तुएं जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है उन्हें हटाना भी बेहतर माना जाता है।

    वास्तु से जुड़े इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। इनका वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी नहीं है लेकिन साफ सफाई व्यवस्थित घर पर्याप्त रोशनी और अच्छी हवा जैसी आदतें निश्चित रूप से घर के वातावरण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। इसलिए घर को सुंदर बनाने के साथ उसे साफ व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखना सबसे जरूरी है।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही।

    एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स अपनी सदस्यता, एजेंडे और सहयोग के तरीकों के लिहाज से लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी हुई है, सदस्य देशों के लिए आर्थिक सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है और जटिल परिस्थितियां वैश्विक व्यवस्था की पहचान बन गई हैं।

    विदेश मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का अर्थ अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कारोबारी व्यवहार को बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखना और व्यापारिक साझेदारियों में भरोसे को बढ़ाना जरूरी है।

    उन्होंने विविध व्यापारिक संबंधों, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था तथा ऐसे कारोबारी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका अनुमान लगाया जा सके। उनके मुताबिक, कारोबारियों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद परिस्थितियां तैयार होने से उन्हें नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग देशों की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी।

    जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के बीच आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने की जरूरत भी बताई। मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए आपसी व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। भारत की ओर से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने और आर्थिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव भी दिया गया।

    भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी संगठन का सदस्य बना।

    ब्रिक्स के विस्तार के साथ संगठन के भीतर व्यापार और निवेश सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए अधिक बाजारों तक पहुंच, बेहतर सप्लाई नेटवर्क, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और भरोसेमंद कारोबारी माहौल को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा गया है।

  • वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद निचले स्तर से संभले, लेकिन कारोबार का अंत लाल निशान में हुआ। आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों से बाजार को कुछ सहारा मिला, इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।

    सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।

    निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।

    इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।

    कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।

    पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।

    बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।

    प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • शुक्रवार का व्रत करने वाले जरूर जान लें पूजा की पूरी विधि किस तरह करें मां लक्ष्मी का पूजन और किन गलतियों से बचना चाहिए

    शुक्रवार का व्रत करने वाले जरूर जान लें पूजा की पूरी विधि किस तरह करें मां लक्ष्मी का पूजन और किन गलतियों से बचना चाहिए


    नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन धन वैभव और सुख समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार को श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने तथा मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में सुख शांति का वातावरण बनने की कामना की जाती है। कई लोग आर्थिक परेशानियों को दूर करने और जीवन में सुख समृद्धि बनाए रखने के उद्देश्य से शुक्रवार का व्रत रखते हैं। अगर आप भी शुक्रवार का व्रत करने की सोच रहे हैं तो पूजा के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।

    शुक्रवार व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। घर में मां लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर उनके सामने दीपक जलाएं। पूजा के स्थान पर स्वच्छ आसन बिछाकर श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का ध्यान करें। इसके बाद जल और पुष्प अर्पित करें। मां लक्ष्मी को लाल या गुलाबी रंग के फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान धूप और दीप जलाकर माता की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

    शुक्रवार के व्रत में सात्विक भोजन करने की परंपरा मानी जाती है। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। पूजा के बाद फल या अन्य सात्विक सामग्री का प्रसाद बनाया जा सकता है। व्रत के दौरान मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में पूजा के साथ मन की शुद्धता और अच्छे आचरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान घर में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर स्वच्छता रहती है वहां सकारात्मक वातावरण बना रहता है। इसलिए शुक्रवार के दिन घर के पूजा स्थल के साथ मुख्य स्थानों की भी सफाई करें। शाम के समय भी दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का स्मरण किया जा सकता है।

    शुक्रवार व्रत के दौरान जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना भी शुभ माना जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न वस्त्र या अन्य जरूरी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना जाता है। व्रत के दौरान किसी के प्रति गलत भावना रखने और विवाद करने से बचना चाहिए।

    पूजा पूरी होने के बाद मां लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से शुक्रवार का व्रत रखता है तो उसे अपनी परंपरा और परिवार में चली आ रही पूजा विधि के अनुसार व्रत का संकल्प और उद्यापन करना चाहिए। अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं में शुक्रवार व्रत की विधि में कुछ अंतर हो सकता है इसलिए स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।

    ध्यान रखें कि व्रत धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत श्रद्धा से जुड़ा विषय है। इसका पालन अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण और जरूरतमंदों की सेवा को शुक्रवार के दिन विशेष महत्व दिया जाता है।