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  • नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2070 तक भारत को ‘नेट जीरो’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में गुजरात ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य ने 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने का रिकॉर्ड बनाया है। यह किसी एक वर्ष में राज्य द्वारा दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्बन कटौती मानी जा रही है। इस उपलब्धि के पीछे सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के तेजी से विस्तार को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    राज्य सरकार के अनुसार इसी अवधि में गुजरात ने 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का उत्पादन भी दर्ज किया, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार किए गए निवेश, नई नीतियों और नवीकरणीय परियोजनाओं के विस्तार से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हुई है। इसका सीधा प्रभाव कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में सामने आया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफल रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन कटौती दर्ज होना राज्य की हरित विकास रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास लगातार मजबूत हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का व्यापक उपयोग कोयला तथा अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत को कम करता है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन घटता है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। स्वच्छ ऊर्जा का बढ़ता उपयोग जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव केवल जलवायु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, मौसम और प्राकृतिक संसाधनों से भी होता है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग, असामान्य तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। वहीं स्वच्छ ऊर्जा के अधिक उपयोग से वायु गुणवत्ता में सुधार आता है और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।

    राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल भी लागू की हैं। ‘इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026’, ‘ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी’ और ‘गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी’ जैसी योजनाओं ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति दी है। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग की निगरानी में विभिन्न सरकारी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से राज्य के बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

    गुजरात ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि यह रोडमैप न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ स्रोतों से पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राज्य की यह उपलब्धि देश में हरित विकास के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।

  • अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी

    अंधेरे से उजाले तक का सफर, शोभा सिंह पुरवा में रोड लाइट लगने पर लोगों ने जताई खुशी


    उत्तरप्रदेश । चित्रकूट धाम कर्वी नगर पालिका परिषद के वार्ड संख्या 21 स्थित शास्त्री नगर की अनुसूचित जाति बस्ती शोभा सिंह पुरवा में विकास कार्यों की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है। लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझने वाली इस बस्ती में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। हाल ही में सड़क किनारे रोड लाइटें लगाए जाने के बाद पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठा है। इससे न केवल वर्षों पुरानी अंधेरे की समस्या दूर हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा और सुविधा का एहसास भी बढ़ा है। बस्तीवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बदलाव बताया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता था। इससे आवागमन में परेशानी होती थी और महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब रोड लाइटें लगने के बाद रात के समय भी गलियां रोशन रहती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही आसान और सुरक्षित हो गई है। नागरिकों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी बस्ती को ऐसी सुविधा मिली है, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था।

    वार्ड के सभासद शंकर प्रसाद यादव ने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से कई जनहितकारी कार्य कराए जा रहे हैं। सबसे पहले जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए नाले का निर्माण कराया गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कराया गया और अब रोड लाइटें लगाकर लोगों को बेहतर रोशनी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि लगभग 15 दिन पहले क्षेत्र में नई पेयजल पाइपलाइन भी बिछाई गई, जिससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिलने लगी है।

    सभासद ने कहा कि उनका प्रयास केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि पात्र परिवारों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना भी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से पात्र लोगों को जोड़ने का कार्य लगातार किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

    मोहल्ले के बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार उनकी बस्ती में इतने व्यापक स्तर पर विकास कार्य देखने को मिल रहे हैं। पहले जलभराव, अंधेरा और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। सड़क पर लगी नई रोड लाइटों ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है और लोगों में विश्वास जगा है कि आने वाले समय में अन्य विकास कार्य भी पूरे होंगे।

    क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका परिषद और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि विकास का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि इसी तरह आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होता रहा तो शोभा सिंह पुरवा जल्द ही शहर के विकसित मोहल्लों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।

  • जंतर-मंतर घटना पर सियासत तेज, राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब और बहस की मांग

    जंतर-मंतर घटना पर सियासत तेज, राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन, छात्रों के मुद्दे पर सरकार से जवाब और बहस की मांग

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की घटना को लेकर मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालकर घटना का विरोध दर्ज कराया। विपक्षी नेताओं ने छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा और संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के अधिकारों, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

    राहुल गांधी ने मार्च की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर सरकार जवाब देने से बच रही है। उनका आरोप था कि सरकार इस मामले में न तो अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर रही है और न ही संसद में इस विषय पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए और इस मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने से पहले राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छात्रों पर हुई कार्रवाई और परीक्षा से जुड़े मामलों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग रखी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े प्रश्नों पर संसद में खुलकर विचार होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं के भविष्य पर भी संसद में चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उठाने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता दोनों के बीच लगातार उठाता रहेगा। साथ ही उन्होंने घायल छात्रों से अस्पताल जाकर मुलाकात करने की भी बात कही और उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने की इच्छा जताई।

    इस घटनाक्रम पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों की मांगों और उनके अधिकारों के समर्थन में खड़ी है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में जवाब देने और घटना की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति अपनाए हुए है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं, इसलिए इन पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए। दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है तथा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उस पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है। वहीं इस मामले पर आगे संसद की कार्यवाही और राजनीतिक दलों के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू

    बांदा में सामुदायिक भवन और मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प, करोड़ों की परियोजनाएं शुरू


    उत्तरप्रदेश । बांदा जिले में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। रविवार को सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने विभिन्न जनहितकारी योजनाओं का भूमि पूजन एवं शिलान्यास कर क्षेत्रवासियों को विकास की नई सौगात दी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नया आयाम मिलेगा।

    कार्यक्रम की शुरुआत विकासखंड महुआ की ग्राम पंचायत अनथुवा से हुई, जहां लगभग 41 लाख रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक सामुदायिक भवन (बारात घर) का विधिवत भूमि पूजन किया गया। यह भवन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनेगा। अब ग्रामीणों को शादी-विवाह, बैठक, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें निजी संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

    इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने नगर पालिका परिषद क्षेत्र के मोहल्ला खुटला स्थित कालका देवी मंदिर परिसर के समग्र विकास कार्य का शिलान्यास किया। लगभग 1.72 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। योजना में तालाब का सुंदरीकरण, आकर्षक कला मंच का निर्माण, आधुनिक शौचालय, श्रद्धालुओं के लिए गेस्ट हाउस तथा भव्य मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण शामिल है। इस परियोजना के पूरा होने से मंदिर परिसर न केवल अधिक सुंदर और व्यवस्थित बनेगा, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

    इस अवसर पर सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में समान रूप से विकास कार्यों को गति देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार तथा नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कराई जाएंगी ताकि आम जनता को जल्द से जल्द इनका लाभ मिल सके।

    नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती गुप्ता बासू ने कहा कि नगर के धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों का विकास नगर पालिका की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से शहर की सुंदरता बढ़ेगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने सभी नागरिकों से विकास कार्यों में सहयोग करने और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण का भी आह्वान किया।

    भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका के सभासदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की मौजूदगी रही। लोगों ने इन परियोजनाओं का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इनके पूरा होने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और बांदा में आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का भी विस्तार होगा।

  • भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन

    भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स स्वास्थ्य बैठक शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा और एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली पर करेंगे मंथन


    नई दिल्ली । 
    चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर केंद्रित चार दिवसीय ब्रिक्स बैठक का मंगलवार से शुभारंभ हो गया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और चिकित्सा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

    सम्मेलन के दौरान पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान, नियामकीय ढांचे, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जा रही है। भारत का प्रयास है कि सदस्य देशों के अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ साझा मंच पर उपलब्ध हो, जिससे पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में अधिक प्रभावी स्थान मिल सके।

    बैठक में भाग ले रहे विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। प्रतिनिधियों का मानना है कि वैज्ञानिक शोध, प्रमाण आधारित चिकित्सा और प्रभावी नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से पारंपरिक उपचार पद्धतियों को अधिक विश्वसनीय और व्यापक बनाया जा सकता है। साथ ही इन प्रणालियों को जनस्वास्थ्य सेवाओं का पूरक बनाकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

    सम्मेलन के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि विभिन्न देशों में पारंपरिक चिकित्सा की अपनी समृद्ध विरासत और विशिष्ट उपचार पद्धतियां मौजूद हैं। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक उपचार प्रणालियों के अनुभवों को साझा करने से सदस्य देशों को एक-दूसरे से सीखने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी आवश्यक बताया।

    भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के लिए एक स्थायी कार्य समूह के गठन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर सदस्य देशों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि यह कार्य समूह भविष्य में शोध, नीति निर्माण, प्रशिक्षण और सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    बैठक के पहले दिन पारंपरिक चिकित्सा में क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग, नई तकनीकों के उपयोग और स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

    चंडीगढ़ में आयोजित यह सम्मेलन भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों के बीच अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को संस्थागत रूप दिया जाता है, तो इससे वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा की स्वीकार्यता और उपयोग दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सम्मेलन के आगामी सत्रों में स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और सहयोगी पहलों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह

    '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति पर आयोजित अभिनंदन समारोह भावनाओं, सम्मान और प्रेरणा का अनूठा संगम बन गया। तिंदवारी रोड स्थित होटल रॉयल ऑर्बिट में “46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ” शीर्षक से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. शुक्ल की गौरवपूर्ण सेवाओं को नमन किया।

    डॉ. शुक्ल के सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस समारोह में उनके जीवन के विभिन्न आयामों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत होती है। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति डॉ. शुक्ल का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। प्रोफेसर उपाध्याय ने अपने संबोधन में डॉ. शुक्ल की साहित्यिक प्रतिभा, भाषा पर असाधारण पकड़, संपादन कौशल और शिक्षण शैली की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, अनुशासित व्यक्तित्व और संवेदनशील साहित्यकार बताया।

    समारोह की अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने ज्ञान, अनुभव और सामाजिक दृष्टि से शिक्षा जगत को समृद्ध किया है। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना की।

    कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित लगभग 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। उनके अभिन्न मित्र और सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी द्वारा तैयार इस वृत्तचित्र में भारतीय वायुसेना से लेकर उच्च शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के दौरान कई अतिथि भावुक भी नजर आए।

    समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोज कुमार ‘मृदुल’ ने प्रभावी ढंग से किया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाया। लगभग 17 वर्ष 7 माह तक सैन्य सेवा देने के बाद उन्होंने शिक्षा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।

    समारोह में भारतीय वायुसेना के उनके पूर्व साथी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और आकांक्षा दीक्षित ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रीतिभोज के साथ संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक विदाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी के सम्मान का उत्सव बन गया, जिसने अपने 46 वर्षों के सफर से समाज, शिक्षा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन

    पेपर लीक के विरोध में शिवपुरी के छात्र लामबंद, आंदोलन की अनुमति के लिए कलेक्टर को दिया ज्ञापन


    शिवपुरी । पेपर लीक की लगातार सामने आ रही घटनाओं के विरोध में अब शिवपुरी के छात्र-छात्राओं ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को लेकर छात्राओं ने जिला प्रशासन से शांतिपूर्ण धरना और रैली की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग रहा है और अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सरकार की जवाबदेही तय होना जरूरी है।

    मंगलवार को छात्रा सोम्या और श्रुति जैन ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से प्रेरित होकर शिवपुरी के छात्र भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं। उनका कहना है कि वे दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए अपने जिले में शांतिपूर्ण आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

    छात्राओं ने 21 से 24 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक शहर के पोलो ग्राउंड और माधव चौक पर धरना देने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही शहर में शांतिपूर्ण रैली निकालने का भी प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह संविधान के दायरे में रहेगा और किसी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।

    आवेदन में छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का प्रयोग है। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा, जिसमें परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    छात्राओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं का मनोबल पेपर लीक जैसी घटनाओं से टूट रहा है। इससे न केवल ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

    फिलहाल छात्र-छात्राएं जिला प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि अनुमति मिलती है तो शिवपुरी में आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में युवा सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह आंदोलन केवल पेपर लीक के विरोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष जांच और जवाबदेह व्यवस्था की मांग को भी प्रमुखता से उठाएगा। अब निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस शांतिपूर्ण आंदोलन को अनुमति देता है या नहीं।

  • श्रद्धालुओं की आस्था पर वार, शिवपुरी के मंदिर से दो दानपात्र चोरी; पुलिस जांच में जुटी

    श्रद्धालुओं की आस्था पर वार, शिवपुरी के मंदिर से दो दानपात्र चोरी; पुलिस जांच में जुटी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करैरा स्थित प्रसिद्ध बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में चोरों ने आस्था पर हाथ डालते हुए सीता रसोई को निशाना बनाया। मंगलवार तड़के अज्ञात बदमाश रसोई का ताला तोड़कर अंदर घुसे और वहां रखे दो दानपात्र चोरी कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर समिति में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना करैरा थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मंदिर परिसर में संचालित सीता रसोई का संचालन अन्नपूर्णा सेवा समिति द्वारा किया जाता है। समिति के सदस्य सुमित तिवारी ने बताया कि यहां प्रत्येक मंगलवार विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें करीब चार से पांच हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन 40 से 50 जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार दानपात्र में राशि डालकर इस सेवा कार्य में सहयोग करते हैं।

    मंगलवार सुबह जब समिति के सदस्य भंडारे की तैयारी के लिए सीता रसोई पहुंचे, तो मुख्य दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर प्रवेश करने पर देखा कि कमरे में रखे दो बड़े बक्सों के ताले भी तोड़े गए थे और उनमें रखे दोनों दानपात्र गायब थे। घटना देखकर समिति के सदस्यों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    समिति के अनुसार, चोरी हुए दानपात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा गुप्त रूप से दान की गई पांच हजार रुपए से अधिक की नकदी होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक राशि का पता जांच और रिकॉर्ड के आधार पर लगाया जाएगा। समिति के सदस्यों का कहना है कि यह केवल चोरी की घटना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और सेवा कार्य पर भी चोट है।

    सूचना मिलते ही करैरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ अन्य साक्ष्य भी जुटाने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

    मंदिर समिति ने प्रशासन से मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं की आस्था सुरक्षित बनी रहे।
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  • मध्य प्रदेश विधानसभा में 7,765.77 करोड़ का पहला अनुपूरक बजट पेश, कल होगी चर्चा

    मध्य प्रदेश विधानसभा में 7,765.77 करोड़ का पहला अनुपूरक बजट पेश, कल होगी चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 7,765.77 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इस पर बुधवार, 22 जुलाई को विधानसभा में विस्तृत चर्चा होगी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बजट पर चर्चा के लिए समय निर्धारित किया। प्रस्तुत बजट में 907.59 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 6,858.18 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। इसमें सिंचाई परियोजनाओं, सड़क निर्माण, कृषि, पुलिस आधुनिकीकरण, परिवहन, शिक्षा और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।

    नर्मदा घाटी विकास विभाग को सबसे बड़ा आवंटन
    अनुपूरक बजट में नर्मदा घाटी विकास विभाग को सबसे अधिक 3,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण कार्यों पर खर्च की जाएगी। वहीं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के तहत उपार्जन संस्थाओं को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 2,220.62 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    सड़क और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर
    लोक निर्माण विभाग को केंद्रीय सड़क निधि, ग्रामीण एवं जिला सड़कों के निर्माण और उन्नयन, भूमि अधिग्रहण मुआवजा, बड़े पुलों के निर्माण, सड़क सुदृढ़ीकरण तथा बीओटी परियोजनाओं के भुगतान के लिए 1,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि में अंतरित राशि के रूप में 397.54 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

    किसानों के लिए भी विशेष प्रावधान
    किसानों को राहत देने के उद्देश्य से किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के तहत भावांतर/फ्लैट रेट योजना के लिए 313.18 करोड़ रुपये तथा कपास उत्पादन मिशन के लिए 39.51 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    परिवहन और ई-बस सेवा को बढ़ावा
    मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपये तथा पीएम ई-बस सेवा योजना के लिए परिवहन विभाग को 28.26 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से इसी योजना के लिए 21.41 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान भी किया गया है।

    पुलिस, शिक्षा और पर्यटन को भी अतिरिक्त राशि
    गृह विभाग के तहत अंतर प्रचालित आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपये और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की लैपटॉप वितरण योजना के लिए 58.07 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

    इसके अलावा पर्यटन नीति के क्रियान्वयन के लिए 30 करोड़ रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 25 करोड़ रुपये, जल संसाधन विभाग में डिक्रीधन भुगतान हेतु 10 करोड़ रुपये तथा घुमंतू एवं अर्धघुमंतू जनजातियों की छात्रावास और छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 6.02 करोड़ रुपये का प्रावधान भी इस अनुपूरक बजट में शामिल किया गया है।

  • E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है। सरकार का फोकस अब केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन, एथेनॉल एटीएम, विमानन क्षेत्र के टिकाऊ ईंधन और निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों के लिए नए बाजार तैयार करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना तथा अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इस नीति के चलते देशभर में चीनी मिलों और अनाज आधारित डिस्टिलरी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ है।

    हालांकि इस सफलता के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके लगभग 24 अरब लीटर वार्षिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। वहीं पेय पदार्थ, दवा और रासायनिक उद्योगों की संयुक्त मांग भी कुल उत्पादन क्षमता से काफी कम है। ऐसे में बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए सरकार नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

    इसी दिशा में इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। प्रस्तावित एथेनॉल एटीएम मॉडल के तहत उपभोक्ता विशेष कंटेनर में इथेनॉल भरवा सकेंगे और उसे विशेष रूप से तैयार किए गए स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार की योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। भारत इथेनॉल के निर्यात की संभावनाओं पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित है। इससे भारतीय उत्पादकों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं और अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    विमानन क्षेत्र भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सतत विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस दिशा में इथेनॉल आधारित तकनीक से जेट ईंधन तैयार करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो देश में स्वच्छ विमानन ईंधन के उत्पादन को नई गति मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ने से केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को आर्थिक अवसर में बदलना और भारत को वैश्विक बायोफ्यूल क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।