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  • हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    नई दिल्ली ।यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती ताकत और रणनीतिक इलाकों की ओर उनके बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की। हालांकि, ट्रंप ने यमन में सीधे अमेरिकी हमले से इनकार कर दिया।

    हूतियों के मोचा शहर पर कब्जे और दक्षिण की ओर उनकी बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी समर्थित यमनी बलों के पीछे हटने की खबर सामने आई है। इसी स्थिति के बीच सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से मदद की अपील की। बातचीत के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात की जानकारी ट्रंप को दी और इसके बाद दोबारा संपर्क कर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी स्ट्राइक की मांग रखी।

    ट्रंप ने यमन में संघर्ष बढ़ने को लेकर चिंता जताई, लेकिन हूती समूह के खिलाफ सीधे हमले के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका ने हालांकि सऊदी अरब को हूतियों से संबंधित खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में गैर-गतिशील सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता का एक बड़ा कारण हूतियों का रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की ओर बढ़ना है। उनकी गतिविधियां बढ़ने से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अहम माना जाता है और सऊदी अरब के तेल निर्यात से भी इसका सीधा संबंध है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है।

    मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि ईरान पहले से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही पर दबाव बना रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूतियों का प्रभाव बढ़ने से अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बढ़ने की आशंका सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने क्षेत्र की स्थिति को लेकर तत्काल चर्चा के लिए अहम बैठकें कीं। हालांकि, वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास और व्हाइट हाउस की ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

    अमेरिका फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने से बचने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन की प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है। यमन के व्यापक संघर्ष से निपटने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर छोड़ने की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

    इसी वजह से सऊदी अरब की सैन्य हस्तक्षेप की मांग के बावजूद अमेरिका फिलहाल सीधे हमले के बजाय खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग तक अपनी भूमिका सीमित रखने की कोशिश कर रहा है।

    यमन में हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर बताया गया है। मोखा पर पहले सऊदी समर्थित यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स का नियंत्रण था। दोनों पक्षों के बीच नौ दिनों से लड़ाई चल रही थी। मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है।

  • ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा

    ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली ।
    फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है और इसकी कहानी बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अभिनेता चंदन आनंद ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए सेट के माहौल, अपनी भूमिका और वहां हुई कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में बताया, जिन्हें उन्होंने चमत्कार जैसा अनुभव माना।

    चंदन आनंद के मुताबिक, वह फिल्म की शूटिंग के लिए शुरुआत में केवल तीन दिनों के लिए गए थे, जबकि उनकी शूटिंग सिर्फ एक दिन की थी। उन्हें नासिर अली नाम के सूबेदार की भूमिका के लिए बुलाया गया था। हालांकि अगले दिन निर्देशक ने उनसे दो-तीन दिन और रुकने को कहा।

    निर्देशक ने उनसे नरेटर यानी कथावाचक की भूमिका निभाने को लेकर भी बात की। चंदन आनंद के लिए यह जिम्मेदारी खास थी, क्योंकि इस भूमिका में फिल्म की पूरी कहानी को शब्दों के जरिए बताना था और बाबा नीम करौली के बारे में दर्शकों को जानकारी देनी थी। उन्होंने इसे अपने लिए आशीर्वाद जैसी बात बताया।

    अभिनेता ने बताया कि उन्होंने चित्रकूट में रुकने का फैसला किया और वहां बिताए दिनों का अनुभव उनके लिए अलग रहा। उनके अनुसार, फिल्म के सेट पर सुबह से ही एक विशेष तरह का माहौल रहता था। पूरी कास्ट सुबह उठती थी और सेट पर पूजा-पाठ किया जाता था।

    चंदन आनंद ने बताया कि उन्हें शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि शूटिंग के दौरान सात्विक भोजन करना है। उन्हें एक अच्छे गेस्ट हाउस में ठहराया गया था। शाम के समय भी हनुमान जी के भजन-कीर्तन होते थे और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पहले इस तरह का माहौल नहीं देखा था, इसलिए उन्हें खुद को उसके अनुरूप ढालने में थोड़ा समय लगा। शूटिंग से जुड़े ड्राइवर पूरी कास्ट के लिए खाना बनाकर खिलाते थे। उनके मुताबिक, जब पूरी टीम साथ मिलकर काम करती है तो सभी लोग एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं।

    चंदन आनंद ने यह भी बताया कि वह वहां कुछ और दिन रुकना चाहते थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। शूटिंग के दौरान चमत्कार से जुड़े अनुभव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कास्ट के लोगों से सुना था कि वहां अचानक बंदरों का एक समूह पहुंच गया था।

    उनके मुताबिक, इससे पहले उस जगह पर बंदर दिखाई नहीं दिए थे। उन्होंने शूटिंग के लिए लोकेशन से जुड़ी दिक्कतों का भी जिक्र किया। शुरुआत में लोकेशन की अनुमति नहीं मिल रही थी या उपयुक्त लोकेशन उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। इसके बाद अचानक लोकेशन मिल जाना भी उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं लगा।

    चंदन आनंद ने अपने खानपान से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं थी कि धूम्रपान और शराब से बचना है। वह कभी-कभी खुशी के मौके पर थोड़ा ड्रिंक कर लेते हैं। होटल में उन्होंने थोड़ा ड्रिंक लिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उनके पेट में अचानक दर्द शुरू हो गया।

    अभिनेता ने कहा कि शूटिंग के दौरान उनके छह दिन चमत्कार जैसे रहे। इन दिनों उन्होंने मुख्य रूप से दाल और खिचड़ी खाई। उनके मुताबिक, फिल्म के सेट पर मिला आध्यात्मिक और सात्विक माहौल उनके लिए एक अलग अनुभव रहा।

  • राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम

    राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम


    मथुरा। बरसाना में 19 सितंबर को होने वाली राधाष्टमी को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। मेला क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टर में बांटकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए 38 होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इसके अलावा 50 पार्किंग स्थल, छह वॉच टावर और 88 बैरियर लगाए जाएंगे।

    12 गोताखोर और नाव रहेगी तैनात
    जल संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए 12 गोताखोर और एक नाव तैनात की जाएगी। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। सफाई और सजावट के साथ घोषणा प्रणाली से लगातार अनाउंसमेंट कराने पर भी जोर दिया गया है।

    जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त दिशा-सूचक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। बाइक एंबुलेंस के साथ नियमित दूरी पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 35 पानी के टैंकर, 30 मोबाइल शौचालय और 100 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे। सात स्थानों पर जूता घर भी बनाए जाएंगे।

    50 स्थानों पर 155 कैमरों से नजर
    भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बरसाना में 50 स्थानों पर कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कस्बे में पहले से लगे 60 कैमरों और राधारानी मंदिर में मौजूद 32 कैमरों के अतिरिक्त नए कैमरे शामिल होंगे। इसके अलावा 27 स्थानों पर 63 अस्थायी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

    पीली कोठी, श्रीजी गेट और कटारा पार्क सहित सात स्थानों पर स्टैटिक सेट के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का जोर भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने पर रहेगा।

    राधाष्टमी पर 160 बसें चलेंगी
    राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 18 और 19 सितंबर को 160 बसों के संचालन की तैयारी है। इसके अलावा 40 अतिरिक्त बसों को रिजर्व रखा जाएगा।

    बसों के संचालन के लिए चालक-परिचालकों की व्यवस्था के साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचाने और वापस लाने के लिए प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक अहिरवार के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर बसों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं।

  • वंतारा ने माधुरी की सेहत को बताया पहली प्राथमिकता, कोल्हापुर वापसी के बाद भी जारी रहेगी पशु चिकित्सा निगरानी व्यवस्था

    वंतारा ने माधुरी की सेहत को बताया पहली प्राथमिकता, कोल्हापुर वापसी के बाद भी जारी रहेगी पशु चिकित्सा निगरानी व्यवस्था

    नई दिल्ली । कोल्हापुर की ‘महादेवी’ के नाम से पहचानी जाने वाली हथिनी माधुरी अब हाई-पावर्ड कमेटी यानी HPC के आदेश के तहत वापस कोल्हापुर लौटेगी। 9 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कमेटी ने माधुरी को लौटाने की अनुमति दी, लेकिन उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। वंतारा ने कहा है कि वह HPC के आदेश का पूरी तरह पालन करेगा और माधुरी की भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

    निर्धारित शर्तों के अनुसार, कोल्हापुर लौटने के बाद माधुरी का इस्तेमाल किसी जुलूस या अन्य काम के लिए नहीं किया जा सकेगा। उसकी 24 घंटे देखभाल सुनिश्चित करनी होगी और हर दो सप्ताह में उसका मेडिकल चेकअप किया जाएगा। पशु चिकित्सा से जुड़ी जांच की रिपोर्ट संबंधित सक्षम अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    माधुरी की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर वंतारा ने कहा कि उसकी सेहत फिलहाल स्थिर है, लेकिन पुरानी बीमारियां पूरी तरह ठीक नहीं हुई हैं। ऐसे में उसे लगातार पशु चिकित्सा देखभाल और नियमित निगरानी की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उसके कोल्हापुर लौटने के बाद भी चिकित्सा व्यवस्था और निगरानी जारी रखने की तैयारी की गई है।

    माधुरी को 30 जुलाई 2025 को HPC के निर्देश पर जामनगर स्थित वंतारा लाया गया था। इन निर्देशों को बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था। वंतारा के अनुसार, उसने माधुरी की कस्टडी की मांग नहीं की थी। उसे सक्षम अधिकारियों के निर्देश के तहत देखभाल के लिए वहां लाया गया था।

    माधुरी से कोल्हापुर के लोगों की भावनाएं जुड़ी होने की बात भी वंतारा ने स्वीकार की है। महाराष्ट्र सरकार, अधिकारियों, संबंधित पक्षों और समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के बाद 6 अगस्त 2025 को वंतारा ने स्पष्ट किया था कि वह इन भावनाओं का सम्मान करता है और सक्षम अधिकारियों के निर्देशों का पालन करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को HPC के समक्ष अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था।

    HPC ने सभी पक्षों की बात सुनने के साथ संबंधित रिपोर्ट भी मंगाई। कमेटी ने नंदनी स्थित उस सुविधा केंद्र का निरीक्षण किया, जहां माधुरी को वापस रखा जाना है। इसके बाद 9 सितंबर 2026 को विस्तृत और तर्कपूर्ण आदेश जारी करते हुए उसे कोल्हापुर लौटाने की अनुमति दी गई।

    माधुरी की वापसी के लिए वंतारा ने रहने की स्थिति, पशु चिकित्सा सुविधाओं, मेडिकल उपकरण, दवाइयों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार करने में मदद की है। वंतारा के पशु चिकित्सक हर दो सप्ताह में कोल्हापुर जाकर माधुरी की मेडिकल जांच करेंगे। HPC के निर्देश के अनुसार इन जांचों की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी।

    वंंतारा ने स्पष्ट किया है कि माधुरी के कोल्हापुर लौटने के साथ उसकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। संस्था का कहना है कि माधुरी की भलाई उसके स्थान पर निर्भर नहीं करती। उसकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, ताकि उसे लंबी, सुरक्षित और बेहतर जिंदगी मिल सके।

  • भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    नई दिल्ली । भारत के बिजली क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान तेजी से विस्तार हुआ है। बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और घरेलू स्तर पर बिजली की बढ़ती खपत के बीच देश की अधिकतम बिजली मांग करीब दोगुनी हो गई है। सरकार के अनुसार, इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है।

    वर्ष 2013-14 में भारत की अधिकतम बिजली मांग 135.9 गीगावाट थी। यह मांग 21 मई 2026 को बढ़कर 270.8 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सरकार के मुताबिक, बिजली मांग में यह वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, शहरीकरण, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली के लगातार बढ़ते उपयोग से जुड़ी है।

    बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च 2014 में भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 249 गीगावाट थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 552 गीगावाट हो गई। इस दौरान जोड़ी गई क्षमता ने मौजूदा बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की मांग के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली के पारेषण ढांचे का भी विस्तार किया गया। अप्रैल 2014 में देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई 2,91,336 सर्किट किलोमीटर थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 5,10,594 सर्किट किलोमीटर हो गई। नेटवर्क के विस्तार से राष्ट्रीय ग्रिड को अधिक एकीकृत बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बिजली के प्रवाह को सुगम करने में मदद मिली है। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी योगदान मिला है।

    भारत ने पारंपरिक बिजली ढांचे के विस्तार के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

    31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 283.46 गीगावाट थी। इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल थी। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता जोड़ी। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा बताया गया है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

    ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने जलवायु लक्ष्यों के संदर्भ में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इस तरह भारत ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 के लिए निर्धारित इस लक्ष्य को तय समय सीमा से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।

  • मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण को लेकर 6 दिसंबर को मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा पर अखाड़ा परिषद ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। हरिद्वार में परिषद से जुड़े संतों ने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से मथुरा में किसी भी तरह की कार सेवा नहीं की जाएगी। परिषद ने कार सेवा से खुद को अलग करते हुए कहा कि मामले का समाधान न्यायालय के जरिए ही होना चाहिए।

    हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ लाई गई रजत शिला के विधि-विधान से पूजन के दौरान संतों ने यह बात कही। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने अपने स्थान पर संकल्पित रजत शिला का पूजन किया।

    न्यायालय के आदेश के बिना समर्थन नहीं
    डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले का समाधान न्यायालय के माध्यम से ही संभव है। संतों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश के बिना वे किसी प्रकार की कार सेवा का समर्थन नहीं करेंगे।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां न्यायालय के माध्यम से फैसला आया, उसी तरह मथुरा प्रकरण में भी न्यायालय से निर्णय आने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से किसी भी प्रकार की कार सेवा का कार्यक्रम नहीं होगा। उनका दावा है कि प्रकरण से संबंधित प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और इन्हीं के आधार पर न्यायालय निर्णय करेगा।

    सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील
    महामंडलेश्वर राधानंद गिरी महाराज ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबरें प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने सनातन समाज से ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में संत समाज न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखता है।

    हरिद्वार में हुए संकल्पित रजत शिला पूजन कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभारी-संयोजक पं. राजेश पाठक, महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी महाराज, महंत दिव्यात्मानंद पुरी महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के राष्ट्रीय महामंत्री जय राम शर्मा, महंत बाबा हरिदास महाराज, राष्ट्रीय मंत्री उद्देश सैनी, राष्ट्रीय प्रचारक गुलाब चंद सैनी, राष्ट्रीय महामंत्री गिर्राज वाल्मीकि, कान्हा कौशिक, अनिल कृष्ण शास्त्री, ब्रह्मानंद गिरी, महेशानंद सरस्वती, पूजा भार्गव, रामनारायण बृजवासी, गोविंद बल्लभ शास्त्री और मयंक शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

  • यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी

    यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश, अगस्त ने पलटा मानसून का रुख, चित्रकूट में सबसे ज्‍यादा बरसा पानी


    लखनऊ। मानसून की शुरुआत में बारिश की कमी से चिंतित उत्तर प्रदेश में अब तस्वीर बदल गई है। अलनीनो के प्रभाव के चलते कमजोर मानसून की आशंका जताई गई थी, लेकिन अगस्त में सक्रिय रहे कई मौसमी सिस्टम ने बारिश की कमी पूरी कर दी। प्रदेश में अब मानसूनी बारिश सामान्य औसत से ऊपर पहुंच गई है।

    एक जून से 8 सितंबर तक 100.3% बारिश
    उत्तर प्रदेश में एक जून से 8 सितंबर तक 649.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 647.3 मिलीमीटर है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य की 100.3 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। खास बात यह है कि सितंबर का आधे से ज्यादा महीना अभी बाकी है।

    कमजोर मानसून का अनुमान, अगस्त में बदली तस्वीर
    मौसम विभाग ने अलनीनो की सक्रियता को देखते हुए मानसून के कमजोर रहने का अनुमान जताया था। जून से सितंबर के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत की करीब 90 प्रतिशत बारिश होने का पूर्वानुमान था। मानसून की शुरुआत में जून-जुलाई में बारिश अपेक्षाकृत कम भी रही, लेकिन अगस्त में लगातार सक्रिय हुए कम दबाव के क्षेत्रों और अन्य मानसूनी सिस्टम ने पूरी स्थिति बदल दी। प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के दौर आए और बारिश की कमी तेजी से पूरी हुई।

    अगस्त में सामान्य से 24% ज्यादा बारिश
    जून-जुलाई की कम बारिश के बाद अगस्त में प्रदेश में 291.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 235.5 मिलीमीटर होती है। यानी अगस्त में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। यह अगस्त 2018 के बाद सबसे अधिक बारिश वाले अगस्त में दूसरे स्थान पर रहा। अगस्त 2018 में प्रदेश में 293.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी।

    प्रदेश का औसत सामान्य, लेकिन जिलों में तस्वीर अलग
    प्रदेश का औसत बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से ऊपर पहुंच गया हो, लेकिन जिलों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कहीं बारिश ने सामान्य आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया तो कुछ जिले अब भी कमी से जूझ रहे हैं।

    चित्रकूट सबसे आगे, कुशीनगर में सबसे ज्यादा कमी
    चित्रकूट में अब तक 1201.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। इसके विपरीत कुशीनगर में सिर्फ 204.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। यहां सामान्य के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। मऊ में भी सामान्य से करीब 53 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इस तरह प्रदेश में मानसून का औसत आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंचने के बावजूद जिलों में बारिश की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। यही वजह है कि एक ही प्रदेश में कहीं मानसून ने जमकर पानी बरसाया तो कहीं अब भी बारिश का इंतजार बना हुआ है।

  • मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने और मंचों व कपड़ों में इसका इस्तेमाल करने से विपक्षी दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। बहुजन समाज के हित की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए। मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

    मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीएसपी के नीले रंग को अपनाकर उसे कपड़ों और मंचों पर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी वर्षों पुरानी सोच नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी रही है।

    उन्होंने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से कोई दिल से अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले इन दलों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। मायावती ने आरोप लगाया कि ये दल इन वर्गों के मुद्दों पर “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं” और कहते कुछ हैं, जबकि करते उसके विपरीत हैं।

    पीडीए को लेकर सपा पर निशाना
    मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दे पर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा अलग-अलग रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज के हितों की वास्तविक लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती रही है।

    उन्होंने बीएसपी से निष्कासित नेताओं को लेकर भी विरोधी दलों पर हमला बोला। मायावती ने कहा कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग बाद में दूसरी पार्टियों में चले गए और कुछ ने छोटे संगठन या राजनीतिक दल भी बना लिए। उनके मुताबिक, ऐसे लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और अवसरवाद की राजनीति करते हैं और बहुजन समाज के सामूहिक हित के लिए काम नहीं कर सकते।

    कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
    मायावती ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, वह खुद “डूबते जहाज” जैसी स्थिति में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।

    मायावती ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

    अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे पर भी बोला हमला
    मायावती ने बीएसपी से जुड़े रहे और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल घोषणा नहीं की। मायावती के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात इसे रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए और अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।

    मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस मामले में और भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और पार्टी व आंदोलन के हित में सतर्क रहने की अपील की।

  • उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की हालत बारिश के कारण खराब हुई है, उन्हें पहले आवागमन के योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार उनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अभी बारिश जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने बारिश के कारण नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए। आगामी पर्व और त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन को देखते हुए उन्होंने प्रमुख मार्गों पर यातायात में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण के कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां पहले उसे मोटरेबल बनाया जाए और बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद आवश्यकता के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग और रेलवे सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर खराब मार्गों को चिन्हित किया जाएगा और गड्ढामुक्ति के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभागीय प्रस्तुतिकरण के अनुसार गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के अधीन आने वाले मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के तहत करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। मौजूदा लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाना है। अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा होने की जानकारी दी गई।

    बैठक में नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा हुई। नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर में नवीनीकरण और करीब 700 किलोमीटर में विशेष मरम्मत की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से कहा कि जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी काम शुरू कराया जाए और सड़क को जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने काम की गति के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

  • ब्रिक्स में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ी मांग, यूएई और चीन की हिस्सेदारी 88.50 प्रतिशत, नए व्यापार अवसरों पर नजर

    ब्रिक्स में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ी मांग, यूएई और चीन की हिस्सेदारी 88.50 प्रतिशत, नए व्यापार अवसरों पर नजर

    नई दिल्ली ।भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षेत्र ने ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 49.27 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में दर्ज 26.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी से काफी अधिक रही। उद्योग जगत को उम्मीद है कि 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद डिजिटल सहयोग और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने से निर्यात की रफ्तार और तेज हो सकती है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अनुसार, ब्रिक्स देशों के साथ बढ़ता व्यापार यह संकेत देता है कि डिजिटल और तकनीकी सहयोग को कारोबारी अवसरों में बदलने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार सुगमता से जुड़े प्रस्ताव प्रभावी तरीके से लागू किए जाते हैं, तो भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यातकों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।

    ब्रिक्स देशों में संयुक्त अरब अमीरात और चीन भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के सबसे बड़े आयातक बने हुए हैं। दोनों देशों की संयुक्त हिस्सेदारी ब्रिक्स देशों को भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 88.50 प्रतिशत रही। इससे इन दोनों बाजारों की भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका का पता चलता है।

    उत्पादों की श्रेणी में दूरसंचार उपकरण भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का सबसे बड़ा सेगमेंट रहा। ब्रिक्स देशों को होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में दूरसंचार उपकरणों की हिस्सेदारी 74.60 प्रतिशत रही। इससे इस क्षेत्र में भारत और ब्रिक्स बाजारों के बीच व्यापार की प्रमुख दिशा भी सामने आती है।

    ब्रिक्स देशों का भारत के कुल वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 19.61 प्रतिशत योगदान है। उद्योग के अनुसार, सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग नेटवर्क उपकरणों, डिवाइस सर्टिफिकेशन और साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने वाले सॉफ्टवेयर की मांग बढ़ा सकता है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान डिजिटल सहयोग और व्यापार से जुड़े कई प्रस्तावों को एजेंडे में शामिल किया गया है। उद्योग का मानना है कि इन प्रस्तावों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश उन्हें कितनी तेजी और गंभीरता से लागू करते हैं।

    ब्रिक्स डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर रिपॉजिटरी पर चर्चा और पिछले महीने पुणे में भारत तथा ब्राजील के बीच हुआ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी समझौता इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताए गए हैं। इस समझौते में 5जी, 6जी, ओपन रैन और उपग्रह कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है। ये क्षेत्र भविष्य में ब्रिक्स के डिजिटल सहयोग का आधार बन सकते हैं।

    प्रस्तावित ब्रिक्स ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान 2026-2030 और एमएसएमई सहयोग पोर्टल को भी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन पहलों से खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए प्रस्तावित ब्रिक्स इनवॉइस डिस्काउंटिंग तंत्र भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य एमएसएमई के सामने आने वाली व्यापार वित्तपोषण संबंधी चुनौतियों को कम करना है। उद्योग जगत के मुताबिक, सऊदी अरब, रूस, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में विस्तार की योजना बना रहे भारतीय निर्यातकों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।