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  • किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव

    किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली ।
    किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के जरिए करीब 60 साल पुराने मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने और नकली बीजों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।

    प्रस्तावित कानून में बीज से जुड़े उल्लंघनों को तीन श्रेणियों में बांटने की योजना है। मामूली उल्लंघन करने वालों के लिए पहली बार चेतावनी और दोबारा उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। जानबूझकर किए गए उल्लंघनों में बीज के पैकेट पर QR कोड नहीं लगाना, जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और गलत ब्रांडिंग जैसे मामले शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।

    ऐसे मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है। उपलब्ध प्रस्ताव के अनुसार, कुछ उल्लंघनों के लिए पहली बार 1 लाख रुपये और दूसरी बार 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं गंभीर अपराधों को तीसरी श्रेणी में रखा गया है। इसमें नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण कारोबार करना और जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं। गंभीर उल्लंघनों के लिए 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रस्ताव है।

    प्रस्तावित कानून के तहत सभी बीज और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके जरिए किसान बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और आपूर्ति श्रृंखला में उसकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे।

    सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में लगभग 70 प्रतिशत बीज कानून के दायरे से बाहर हैं। अलग-अलग राज्यों में बीजों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी अलग हैं और मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं। इसी वजह से नकली और खराब गुणवत्ता वाले बीजों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई के लिए नए कानून की जरूरत बताई गई है।

    प्रस्तावित कानून में किसानों के पारंपरिक बीज अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है। किसान पारंपरिक और किसान किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे। ऐसे पारंपरिक बीजों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। व्यक्तिगत उपयोग, गांव में वितरण या किसी कंपनी के लिए बीज तैयार करने वाले किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण भी जरूरी नहीं होगा।

    नए कानून में ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य बीज फेल होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना है। सभी बीज किस्मों को एकीकृत राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। राज्य सरकारों को राज्य स्तरीय समितियों की सिफारिश के आधार पर नई बीज किस्में जारी करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।

    किसानों के नुकसान की स्थिति में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है। बीज फेल होने पर सत्यापन समिति जांच करेगी और किसान को 15 दिनों के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

    मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बनाया गया था, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। सरकार ने प्रस्तावित नए कानून पर पिछले साल सुझाव मांगे थे और करीब 18,000 सुझाव प्राप्त हुए। 10 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 20 किसान संगठनों के साथ परामर्श किया। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित सीड बिल संसद के शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है।

  • मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम बैठक हो रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत जारी है। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। बातचीत का दायरा रक्षा सौदों के अलावा व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों तक रहने की संभावना है।

    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा क्षेत्र में Su-57 फाइटर जेट, S-400 की बाकी खेप और एडवांस ब्रह्मोस-NG जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

    रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी समझौते की उम्मीद है। Su-57 को एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया गया है। इस विमान की क्षमताओं को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की संभावना है।

    भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है। इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी बैठक के संभावित एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, कुशल कामगारों और उर्वरक से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है। खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने तथा नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा संभव है।

    व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की संभावना है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच भारत मंडपम में बैठक हो रही है।

    बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत पर नजर है। Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG जैसे रक्षा विषयों के अलावा उद्योग, रेलवे, स्टील, टनलिंग, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों से जुड़े संभावित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

  • NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    नई दिल्ली ।भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) पवित्रन राजन के रणनीतिक अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। NATO से जुड़े हाइब्रिड वॉरफेयर पर तैयार एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में दोनों अधिकारियों के काम का कम से कम 10 बार उल्लेख किया गया है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसे भारतीय रणनीतिक सोच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

    डीएस हुड्डा नॉर्दर्न आर्मी के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। हुड्डा और पवित्रन राजन ने मिलकर ‘बियॉन्ड द काइनेटिक: डीकंस्ट्रक्टिंग वॉरफेयर इन द सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ नाम से एक पेपर तैयार किया था। यह पेपर जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च की ओर से प्रकाशित किया गया था।

    जनरल वीके सिंह ने दोनों अधिकारियों के काम को हाइब्रिड, कॉग्निटिव और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना महत्वपूर्ण है और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    हुड्डा और राजन के अध्ययन का मुख्य विषय आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति है। उनके अनुसार युद्ध अब केवल आमने-सामने के सैन्य संघर्ष या भौतिक लक्ष्यों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ऐसा भी बन गया है, जिसे उन्होंने ‘सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ यानी STCB के रूप में समझाया है।

    इस अवधारणा में सूचना, तकनीक और लोगों की सोच के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों अधिकारियों के अध्ययन के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली सूचनाएं उनकी राय और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। इसका रणनीतिक प्रभाव युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के प्रभाव जैसा हो सकता है।

    पेपर में कॉग्निटिव वॉरफेयर को आधुनिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें कहा गया कि विरोधी सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रवाह को प्रभावित कर पहले से मौजूद सामाजिक विभाजन और सूचना की कमी का फायदा उठा सकते हैं। उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के घटनाओं को देखने और फैसले लेने के तरीके को प्रभावित करना भी हो सकता है।

    अध्ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार AI की मदद से गलत सूचना फैलाने वाले अभियान ज्यादा सटीक और बड़े स्तर पर चलाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत या सामाजिक कमजोरियों को ध्यान में रखकर संदेश तैयार करना भी संभव हो सकता है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता, मजबूत संस्थानों, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल के जरिए मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    NATO से जुड़े प्रकाशन में हुड्डा और राजन के पेपर का उल्लेख विशेष रूप से ‘AI एंड कॉग्निटिव वॉरफेयर’ अध्याय में किया गया। इस अध्याय में कॉग्निटिव वॉरफेयर और OODA लूप पर चर्चा की गई है। OODA का अर्थ ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट है, जिसके जरिए सैन्य कमांडर किसी स्थिति को समझकर निर्णय लेते हैं और कार्रवाई करते हैं।

    प्रकाशन में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में तकनीक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है। यूक्रेन द्वारा स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट कम्युनिकेशन व्यवस्था के इस्तेमाल और Clearview AI के जरिए रूसी सैनिकों की पहचान से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

    पावर-ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की समीक्षा वाले हिस्से में भी कॉग्निटिव वॉरफेयर, गलत सूचना, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन और AI से पैदा होने वाली अव्यवस्था को जनता के भरोसे तथा निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। दोनों अधिकारियों का जनवरी 2026 का पेपर इस प्रकाशन की संदर्भ सूची में भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

  • बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    नई दिल्ली । बड़ा फंड तैयार करने के लिए लोग अक्सर शेयर बाजार, फिक्स्ड डिपॉजिट या SIP जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। हालांकि, जो लोग बाजार से जुड़े जोखिम से बचना चाहते हैं और बिना किसी निवेश साधन के नियमित बचत करना चाहते हैं, उनके लिए गुल्लक में रोज थोड़ी रकम जमा करने का तरीका अपनाया जा सकता है। तारीख के हिसाब से बचत करने वाला यह फॉर्मूला बेहद आसान है और पति-पत्नी मिलकर इसे अपनाएं तो एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा की जा सकती है।

    इस बचत चुनौती का नियम सीधा है। महीने की जिस तारीख को जितना अंक हो, उतने ही दस रुपये गुल्लक में जमा करने होते हैं। यानी हर दिन जमा होने वाली राशि तारीख के साथ बढ़ती जाती है। इससे शुरुआत में बचत की रकम छोटी रहती है और महीने के आखिर में धीरे-धीरे बढ़कर ज्यादा हो जाती है।

    उदाहरण के तौर पर महीने की 1 तारीख को 10 रुपये जमा करने होंगे। 5 तारीख को 50 रुपये, 10 तारीख को 100 रुपये, 15 तारीख को 150 रुपये, 20 तारीख को 200 रुपये और 25 तारीख को 250 रुपये गुल्लक में डालने होंगे। इसी क्रम को महीने की 30 तारीख तक जारी रखा जा सकता है, जब उस दिन 300 रुपये जमा होंगे।

    अगर महीने की 1 से 31 तारीख तक इसी नियम के अनुसार रोज बचत की जाए, तो एक व्यक्ति एक महीने में कुल 4,960 रुपये जमा कर सकता है। इस तरह लगातार 12 महीने तक यही तरीका अपनाने पर एक व्यक्ति के पास करीब 59,520 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

    इस चुनौती की खास बात यह है कि इसे पति-पत्नी मिलकर भी पूरा कर सकते हैं। दोनों लोग अपने-अपने स्तर पर तारीख के हिसाब से समान रकम गुल्लक में जमा करें तो एक साल में दोनों की संयुक्त बचत करीब 1,19,040 रुपये तक पहुंच सकती है। इस तरह एक लाख रुपये का लक्ष्य पार किया जा सकता है।

    इस तरीके में किसी निवेश योजना में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती। बचत की रकम सीधे गुल्लक में जमा की जाती है, इसलिए इसका उद्देश्य नियमित तौर पर पैसे अलग रखना और बचत की आदत विकसित करना है। रोजाना छोटी रकम जमा करने से एक साथ बड़ी राशि बचाने का दबाव भी कम किया जा सकता है।

    हालांकि, इस तरीके को बाजार निवेश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधनों में पैसे लगाने पर रिटर्न बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है और उसमें जोखिम भी रहता है। वहीं, गुल्लक में रखी रकम से निवेश रिटर्न नहीं मिलता। यह मूल रूप से बचत का तरीका है।

    इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जरूरी है कि तय तारीख पर निर्धारित रकम अलग रखी जाए। महीने की शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाली बचत महीने के अंत तक बढ़ती जाती है। पति-पत्नी दोनों नियमितता बनाए रखें तो 12 महीने में संयुक्त रूप से करीब 1.19 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।

  • Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान

    Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान


    झांसी। बड़ागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों खुद जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में करीब 20 दिन से पानी भरा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को मुख्य गेट से ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी जमा होने के कारण मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

    अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जलभराव की समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। दो बार उच्च अधिकारियों और स्थानीय विधायक को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, उसी अस्पताल परिसर को अपनी समस्या के ‘इलाज’ का इंतजार है।

    हर साल होती है जलभराव की समस्या

    सीएचसी के सीएमएस डॉ. वैभव पुरोहित ने बताया कि अस्पताल परिसर नीची जगह पर है। आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण हर साल यहां जलभराव की स्थिति बनती है। समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पिछले वर्ष भी स्थायी समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।

    प्रसव पीड़ा में पानी से होकर अस्पताल पहुंची गर्भवती

    स्थानीय निवासी अनूपा जोशी ने बताया कि 8 सितंबर को उनकी बहू वंदना को प्रसव पीड़ा हुई। मध्यरात्रि करीब दो बजे वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचीं। परिसर में पानी भरा देखकर परेशानी हुई, लेकिन प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण मजबूरी में बहू को पानी से होकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा।

    वहीं, वृद्ध मरीज अशोक निरंजन ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें उपचार के लिए सीएचसी जाना पड़ता है। कई दिनों से परिसर में पानी भरा होने के कारण ओपीडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। डॉक्टर ने फॉलोअप जांच के लिए बुलाया था, लेकिन जलभराव के कारण अस्पताल जाने में डर लग रहा है। पानी में गिरने या चोट लगने की आशंका बनी रहती है।

    मोटर से पानी निकालने की कोशिश, नहीं मिल रही सफलता

    सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि सीएचसी के आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण परिसर में जलभराव होता है। मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है, लेकिन इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि समस्या से बीडीओ को अवगत कराकर इसके स्थायी निदान के लिए कहा गया है।

  • यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    लखनऊ। बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात अभी जारी है, इसलिए खराब सड़कों की फिलहाल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाया जाए। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार इनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का लगातार सर्वे कराने और पर्वों से पहले जरूरी मरम्मत व नवीनीकरण पूरा करने के निर्देश दिए।

    681 प्रमुख मार्गों पर विशेष फोकस
    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और बेहतर स्थिति में रखने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद उसकी स्थिति के अनुसार स्थायी मरम्मत या नवीनीकरण कराया जाए।

    4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नौ विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर मार्ग हैं। मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 5,751 किलोमीटर मार्गों पर काम पूरा हो चुका है।

    क्षतिग्रस्त सड़कों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य अंतिम रूप से तय किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे की निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनका विभागवार सर्वे कराया जा रहा है।

    स्कूल-अस्पताल और बाजारों की सड़कें पहले सुधरें
    मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता पर सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए और सड़क को बिना देरी आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही काम में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

    30 हजार किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य
    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और करीब 5 हजार किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण के तहत करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई है।

    कई विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा
    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद और राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम मौजूद रहे।

  • कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    नई दिल्ली ।आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से दिए गए उनके अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज करते हुए सेवा में बहाली का रास्ता साफ किया गया था।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से 7 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारी की बहाली पर रोक रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने की बात कही गई है।

    यह विवाद वर्ष 2022 का है। रिंकू दुग्गा 1994 बैच की एजीएमयूटी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन पर आरोप लगा था कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को इस वजह से खाली करवाया गया, ताकि वह वहां अपने कुत्ते को टहला सकें और उस दौरान दूसरे लोगों को स्टेडियम में आने की अनुमति न हो।

    इस घटनाक्रम के दौरान उनके पति संजीव खैरवार भी उनके साथ मौजूद थे। संजीव खैरवार भी आईएएस अधिकारी हैं। स्टेडियम से जुड़ी तस्वीर और घटना की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया और इसे लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    बाद में केंद्र सरकार ने रिंकू दुग्गा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। इस फैसले को उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी सीएटी के समक्ष चुनौती दी। सीएटी ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया था।

    इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को सीएटी के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत रिंकू दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। इसके बाद उनकी सेवा में बहाली का रास्ता खुल गया था।

    केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अब हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में रिंकू दुग्गा को नोटिस भी जारी किया है।

    इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बहाली पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

    अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में केंद्र की चुनौती और रिंकू दुग्गा की सेवा से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया सामने आएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के आधार पर उनकी बहाली पर रोक लागू रहेगी, जिसने केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को खारिज किया था।

  • हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    नई दिल्ली ।यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती ताकत और रणनीतिक इलाकों की ओर उनके बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की। हालांकि, ट्रंप ने यमन में सीधे अमेरिकी हमले से इनकार कर दिया।

    हूतियों के मोचा शहर पर कब्जे और दक्षिण की ओर उनकी बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी समर्थित यमनी बलों के पीछे हटने की खबर सामने आई है। इसी स्थिति के बीच सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से मदद की अपील की। बातचीत के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात की जानकारी ट्रंप को दी और इसके बाद दोबारा संपर्क कर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी स्ट्राइक की मांग रखी।

    ट्रंप ने यमन में संघर्ष बढ़ने को लेकर चिंता जताई, लेकिन हूती समूह के खिलाफ सीधे हमले के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका ने हालांकि सऊदी अरब को हूतियों से संबंधित खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में गैर-गतिशील सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता का एक बड़ा कारण हूतियों का रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की ओर बढ़ना है। उनकी गतिविधियां बढ़ने से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अहम माना जाता है और सऊदी अरब के तेल निर्यात से भी इसका सीधा संबंध है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है।

    मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि ईरान पहले से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही पर दबाव बना रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूतियों का प्रभाव बढ़ने से अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बढ़ने की आशंका सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने क्षेत्र की स्थिति को लेकर तत्काल चर्चा के लिए अहम बैठकें कीं। हालांकि, वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास और व्हाइट हाउस की ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

    अमेरिका फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने से बचने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन की प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है। यमन के व्यापक संघर्ष से निपटने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर छोड़ने की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

    इसी वजह से सऊदी अरब की सैन्य हस्तक्षेप की मांग के बावजूद अमेरिका फिलहाल सीधे हमले के बजाय खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग तक अपनी भूमिका सीमित रखने की कोशिश कर रहा है।

    यमन में हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर बताया गया है। मोखा पर पहले सऊदी समर्थित यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स का नियंत्रण था। दोनों पक्षों के बीच नौ दिनों से लड़ाई चल रही थी। मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है।

  • ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा

    ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली ।
    फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है और इसकी कहानी बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अभिनेता चंदन आनंद ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए सेट के माहौल, अपनी भूमिका और वहां हुई कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में बताया, जिन्हें उन्होंने चमत्कार जैसा अनुभव माना।

    चंदन आनंद के मुताबिक, वह फिल्म की शूटिंग के लिए शुरुआत में केवल तीन दिनों के लिए गए थे, जबकि उनकी शूटिंग सिर्फ एक दिन की थी। उन्हें नासिर अली नाम के सूबेदार की भूमिका के लिए बुलाया गया था। हालांकि अगले दिन निर्देशक ने उनसे दो-तीन दिन और रुकने को कहा।

    निर्देशक ने उनसे नरेटर यानी कथावाचक की भूमिका निभाने को लेकर भी बात की। चंदन आनंद के लिए यह जिम्मेदारी खास थी, क्योंकि इस भूमिका में फिल्म की पूरी कहानी को शब्दों के जरिए बताना था और बाबा नीम करौली के बारे में दर्शकों को जानकारी देनी थी। उन्होंने इसे अपने लिए आशीर्वाद जैसी बात बताया।

    अभिनेता ने बताया कि उन्होंने चित्रकूट में रुकने का फैसला किया और वहां बिताए दिनों का अनुभव उनके लिए अलग रहा। उनके अनुसार, फिल्म के सेट पर सुबह से ही एक विशेष तरह का माहौल रहता था। पूरी कास्ट सुबह उठती थी और सेट पर पूजा-पाठ किया जाता था।

    चंदन आनंद ने बताया कि उन्हें शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि शूटिंग के दौरान सात्विक भोजन करना है। उन्हें एक अच्छे गेस्ट हाउस में ठहराया गया था। शाम के समय भी हनुमान जी के भजन-कीर्तन होते थे और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पहले इस तरह का माहौल नहीं देखा था, इसलिए उन्हें खुद को उसके अनुरूप ढालने में थोड़ा समय लगा। शूटिंग से जुड़े ड्राइवर पूरी कास्ट के लिए खाना बनाकर खिलाते थे। उनके मुताबिक, जब पूरी टीम साथ मिलकर काम करती है तो सभी लोग एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं।

    चंदन आनंद ने यह भी बताया कि वह वहां कुछ और दिन रुकना चाहते थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। शूटिंग के दौरान चमत्कार से जुड़े अनुभव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कास्ट के लोगों से सुना था कि वहां अचानक बंदरों का एक समूह पहुंच गया था।

    उनके मुताबिक, इससे पहले उस जगह पर बंदर दिखाई नहीं दिए थे। उन्होंने शूटिंग के लिए लोकेशन से जुड़ी दिक्कतों का भी जिक्र किया। शुरुआत में लोकेशन की अनुमति नहीं मिल रही थी या उपयुक्त लोकेशन उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। इसके बाद अचानक लोकेशन मिल जाना भी उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं लगा।

    चंदन आनंद ने अपने खानपान से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं थी कि धूम्रपान और शराब से बचना है। वह कभी-कभी खुशी के मौके पर थोड़ा ड्रिंक कर लेते हैं। होटल में उन्होंने थोड़ा ड्रिंक लिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उनके पेट में अचानक दर्द शुरू हो गया।

    अभिनेता ने कहा कि शूटिंग के दौरान उनके छह दिन चमत्कार जैसे रहे। इन दिनों उन्होंने मुख्य रूप से दाल और खिचड़ी खाई। उनके मुताबिक, फिल्म के सेट पर मिला आध्यात्मिक और सात्विक माहौल उनके लिए एक अलग अनुभव रहा।

  • राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम

    राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम


    मथुरा। बरसाना में 19 सितंबर को होने वाली राधाष्टमी को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। मेला क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टर में बांटकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए 38 होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इसके अलावा 50 पार्किंग स्थल, छह वॉच टावर और 88 बैरियर लगाए जाएंगे।

    12 गोताखोर और नाव रहेगी तैनात
    जल संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए 12 गोताखोर और एक नाव तैनात की जाएगी। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। सफाई और सजावट के साथ घोषणा प्रणाली से लगातार अनाउंसमेंट कराने पर भी जोर दिया गया है।

    जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त दिशा-सूचक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। बाइक एंबुलेंस के साथ नियमित दूरी पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 35 पानी के टैंकर, 30 मोबाइल शौचालय और 100 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे। सात स्थानों पर जूता घर भी बनाए जाएंगे।

    50 स्थानों पर 155 कैमरों से नजर
    भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बरसाना में 50 स्थानों पर कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कस्बे में पहले से लगे 60 कैमरों और राधारानी मंदिर में मौजूद 32 कैमरों के अतिरिक्त नए कैमरे शामिल होंगे। इसके अलावा 27 स्थानों पर 63 अस्थायी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

    पीली कोठी, श्रीजी गेट और कटारा पार्क सहित सात स्थानों पर स्टैटिक सेट के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का जोर भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने पर रहेगा।

    राधाष्टमी पर 160 बसें चलेंगी
    राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 18 और 19 सितंबर को 160 बसों के संचालन की तैयारी है। इसके अलावा 40 अतिरिक्त बसों को रिजर्व रखा जाएगा।

    बसों के संचालन के लिए चालक-परिचालकों की व्यवस्था के साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचाने और वापस लाने के लिए प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक अहिरवार के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर बसों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं।