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  • गर्मियों में त्वचा को बनाएं ग्लोइंग: अपनाएं ये समर स्किन केयर टिप्स

    गर्मियों में त्वचा को बनाएं ग्लोइंग: अपनाएं ये समर स्किन केयर टिप्स


    नई दिल्ली ।
    गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। तेज यूवी किरणें पसीना और धूल मिलकर चेहरे के रोमछिद्र बंद कर देते हैं जिससे मुंहासे डलनेस और टैनिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई लोग सर्दियों वाला स्किन केयर ही फॉलो करते हैं जो गर्मियों में त्वचा के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। इस मौसम में हल्के सांस लेने वाले और हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।

    क्लींजिंग और हाइड्रेशन का सही बैलेंस
    बार-बार चेहरा धोना त्वचा को ताज़गी तो देता है लेकिन ज्यादा फेस वॉश प्राकृतिक ऑयल्स को खत्म कर सकता है। दिन में दो बार फोम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर चुनें। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है बिना चिपचिपा किए।

    सनस्क्रीन
    घर के अंदर या बाहर सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। कम से कम 30-50 SPF वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज़ाना लगाएं। हर 3 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है क्योंकि पसीने से इसकी परत हट सकती है। यह टैनिंग सनबर्न और झुर्रियों से बचाने का सबसे कारगर तरीका है।

    प्राकृतिक कूलिंग एजेंट

    धूप से लौटते ही सीधे बर्फ या ठंडा पानी न डालें। इसके बजाय एलोवेरा जेल या गुलाब जल का स्प्रे करें। एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो रेडनेस और सनबर्न को तुरंत शांत करते हैं। हफ्ते में एक बार मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक लगाएं जो त्वचा की गर्मी को सोख लेता है।

    एक्सफोलिएशन
    पसीना और तेल के कारण डेड स्किन जम जाती है। हफ्ते में 1-2 बार हल्के स्क्रब से चेहरे को एक्सफोलिएट करें। इससे रोमछिद्र खुलते हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। ध्यान रखें धूप में निकलने से ठीक पहले स्क्रब न करें।

    खान-पान और ब्यूटी स्लीप
    आंतरिक पोषण भी त्वचा के लिए जरूरी है। तरबूज खीरा और नारियल पानी जैसे फलों का सेवन करें जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन बाहर निकल सकें।

  • हर सुबह अलार्म से उठना कर सकता है नुकसान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

    हर सुबह अलार्म से उठना कर सकता है नुकसान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी


    नई दिल्ली : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह समय पर उठने के लिए अलार्म लगाना एक आम आदत बन चुकी है। ज्यादातर लोग मोबाइल या घड़ी में अलार्म सेट करके सोते हैं, ताकि उनकी दिनचर्या समय पर शुरू हो सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी सेहत, खासकर दिल और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हमारा शरीर एक प्राकृतिक सिस्टम यानी Circadian Rhythm पर काम करता है, जिसे आम भाषा में बॉडी क्लॉक कहा जाता है। यह सिस्टम सूरज के उगने और ढलने के अनुसार हमारे सोने और जागने के समय को नियंत्रित करता है। जब हम इस प्राकृतिक प्रक्रिया को नजरअंदाज कर अलार्म के जरिए अचानक जागते हैं, तो शरीर को झटका लगता है।

    अलार्म की तेज आवाज नींद के गहरे चरण को अचानक तोड़ देती है, जिससे Sleep Inertia नाम की स्थिति पैदा होती है। इस अवस्था में व्यक्ति जाग तो जाता है, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता। यही कारण है कि कई लोग सुबह उठने के बाद भी थकान, सुस्ती और भ्रम महसूस करते हैं।

    सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब अलार्म की आवाज शरीर में Fight or Flight Response को सक्रिय कर देती है। यह वही प्रतिक्रिया है, जो किसी खतरे की स्थिति में शरीर में होती है। अचानक तेज आवाज से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेजी से बढ़ते हैं। अगर यह प्रक्रिया रोज होती है, तो लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी होती है। जब अलार्म बार-बार नींद को बाधित करता है, तो यह आपके मूड और इमोशनल हेल्थ को भी प्रभावित करता है। सुबह की शुरुआत अगर घबराहट और तनाव के साथ होती है, तो इसका असर पूरे दिन पर पड़ता है। व्यक्ति चिड़चिड़ा, चिंतित और थका हुआ महसूस कर सकता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अलार्म पूरी तरह से खतरनाक है, लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल जरूर नुकसानदायक हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों को धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाइल को इस तरह ढालना चाहिए कि वे बिना अलार्म के स्वाभाविक रूप से जाग सकें।

    इसके लिए सबसे जरूरी है एक निश्चित स्लीप रूटीन अपनाना। रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, ताकि आपकी बॉडी क्लॉक खुद सेट हो सके। सोने से पहले मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और रिलैक्सिंग गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, हल्का योग या ध्यान करें।

    सुबह की प्राकृतिक रोशनी भी शरीर को जगाने में अहम भूमिका निभाती है। अगर आप अपने कमरे में हल्की रोशनी आने देते हैं, तो शरीर खुद ही जागने के संकेत देने लगता है। इसके अलावा, रोज 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी है।

    अंत में यही कहा जा सकता है कि अलार्म की आदत को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे बदलाव करके आप अपने शरीर को प्राकृतिक तरीके से जगने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह न केवल आपकी नींद को बेहतर बनाएगा, बल्कि आपके दिल और मानसिक स्वास्थ्य को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा।

  • बुध की सीधी चाल से इन राशियों में आ सकती हैं बाधाएं, जानें उपाय और सावधानियां

    बुध की सीधी चाल से इन राशियों में आ सकती हैं बाधाएं, जानें उपाय और सावधानियां


    नई दिल्ली : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी कड़ी में ग्रहों के राजकुमार कहे जाने वाले बुध ग्रह 21 मार्च 2026 से अपनी चाल में बदलाव करने जा रहे हैं। बुध का मार्गी होना आम तौर पर शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

    उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था चल रही थी, जो 21 मार्च को समाप्त हो जाएगी। बुध का मार्गी होना कार्यों में गति लाने वाला माना जाता है। वक्री अवस्था में अक्सर कार्यों में रुकावट, भ्रम और देरी की स्थिति बनी रहती है। वहीं मार्गी होने पर हालात सामान्य होने लगते हैं और अटके काम आगे बढ़ते हैं।

    हालांकि, यदि बुध कमजोर या नकारात्मक प्रभाव में हो, तो मार्गी अवस्था में भी कुछ जातकों को तनाव, गलतफहमियों और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष के अनुसार, बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार और तकनीकी क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इसकी चाल में बदलाव सीधे व्यक्ति के सोचने-समझने, निर्णय लेने और कामकाज पर असर डालता है।

    तुला राशि:
    तुला राशि के जातकों के लिए 21 मार्च से बुध का मार्गी होना नुकसानदायक साबित हो सकता है। इस दौरान आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है और हर कार्य में चुनौती आ सकती है। सबसे जरूरी है कि इस समय अपनी वाणी पर विशेष ध्यान दें। किसी को कटु या अपमानजनक शब्द नहीं बोलने चाहिए, अन्यथा बड़े विवाद की संभावना बढ़ सकती है। बुध को शांत करने के लिए गरीबों को दान देना और भगवान गणेश की सेवा करना शुभ रहेगा।

    कुंभ राशि:
    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी बुध का मार्गी होना सुखद नहीं होगा। शारीरिक परेशानियां, मानसिक तनाव और कारोबार में नुकसान की संभावना है। इस समय नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए और सभी काम सोच-समझकर करें। किसी को कठोर वचन देने से बचें, अन्यथा विवाद के कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। उपाय के तौर पर भगवान गणेश की सेवा करें, उन्हें हरे रंग का भोग लगाएं, हरे वस्त्र दान करें और गरीबों की मदद करें।

    मीन राशि:
    मीन राशि के जातकों के लिए बुध का मार्गी होना चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है। इस दौरान व्यापार में नुकसान और आर्थिक तंगी की संभावना है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें क्योंकि दुर्घटना की आशंका भी हो सकती है। उपाय के तौर पर गणेश भगवान के मंत्रों का जाप करें, उन्हें हरे रंग की मिठाई का भोग लगाएं और पशुओं को हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज का कहना है कि इन उपायों से बुध के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और इन राशियों के जातक कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रख सकते हैं। बुध की मार्गी चाल से धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होंगी, लेकिन सावधानी और उपायों को अपनाना आवश्यक है।

    इस प्रकार, 21 मार्च 2026 से तुला, कुंभ और मीन राशियों के जातकों को अपने व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उचित उपाय और सतर्कता अपनाकर बुध के प्रभाव को सकारात्मक बनाया जा सकता है और आने वाले समय में राहत मिल सकती है।

  • हिंदू नववर्ष 2026: ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ कार्य, पूरे साल मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

    हिंदू नववर्ष 2026: ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ कार्य, पूरे साल मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नववर्ष का विशेष महत्व माना गया है जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। वर्ष 2026 में यह पावन अवसर 19 मार्च को पड़ रहा है इसी दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष का पहला दिन पूरे साल की दिशा तय करता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ समय में किया गया हर सकारात्मक प्रयास पूरे वर्ष जीवन में खुशियां सफलता और समृद्धि लेकर आता है।

    ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार नववर्ष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध और ऊर्जा से भरपूर होता है जो मन और शरीर को सकारात्मकता से भर देता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें। विशेष रूप से भगवान विष्णु मां दुर्गा और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और पूरे वर्ष ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

    नववर्ष के पहले दिन घर की साफ सफाई का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि स्वच्छ और सुसज्जित घर में देवी देवताओं का वास होता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार को सजाना चाहिए रंगोली बनानी चाहिए और आम के पत्तों या फूलों से तोरण लगाना चाहिए। यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है और नकारात्मकता को दूर करता है।

    इसके साथ ही दान पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। दान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि यह हमारे भीतर करुणा और सेवा की भावना को भी जागृत करता है। ऐसा करने से जीवन में समृद्धि और संतोष का भाव बना रहता है।

    हिंदू नववर्ष को नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन व्यक्ति को अपने जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लेना चाहिए। जैसे नियमित पूजा करना अच्छे कर्म करना दूसरों की सहायता करना और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने का प्रण लेना। कई लोग इस शुभ अवसर पर नया व्यवसाय नई योजना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत भी करते हैं क्योंकि इसे अत्यंत शुभ समय माना गया है।

    अंतत ब्रह्म मुहूर्त में किया गया हर शुभ कार्य व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि इस पावन दिन को श्रद्धा भक्ति और सकारात्मकता के साथ मनाया जाए तो पूरे वर्ष जीवन में खुशहाली सफलता और मानसिक शांति बनी रहती है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़े महत्व

    चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़े महत्व


    नई दिल्ली । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रहा है। पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी और प्रतिपदा आरंभ होने के साथ ही नवरात्रि प्रारंभ होगी। नवरात्रि 9 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व परंपरागत रूप से घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ आरंभ होता है।

    घटस्थापना का उद्देश्य
    घटस्थापना देवी का आह्वान करने के लिए की जाती है। इसका महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि इससे घर में सुख-शांति सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द की भावना बनी रहती है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं जिससे आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।

    कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

    अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक लाभ चौघड़िया: 12:29 से 1:59 तक सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:54 से 7:57 तक शुभ चौघड़िया इन समयों में घटस्थापना और कलश स्थापना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं और पूजा का प्रभाव अधिकतम माना जाता है।

    पंचक और खरमास

    15 मार्च से खरमास शुरू हो चुके हैं। इस दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों के साथ सूर्य देव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दौरान पंचक भी रहेगा जिसकी शुरुआत 16 मार्च शाम 6:14 से होगी और समाप्ति 20 मार्च रात 2:28 तक होगी।इस चैत्र नवरात्रि पर निर्धारित शुभ मुहूर्त में घटस्थापना और कलश स्थापना कर आप घर में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

  • सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव

    सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खानपान के चलते कब्ज एसिडिटी और बढ़ता वजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं जबकि एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय हमारी दिनचर्या में ही छिपा है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी-सी आदत शरीर को भीतर से साफ करने और कई समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित होती है।

    सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर में मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। जब आप गुनगुना पानी पीते हैं तो शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है जिससे थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू होती है। इसका सीधा असर कैलोरी बर्निंग पर पड़ता है और वजन कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से 15 दिनों तक यह आदत अपनाने पर पेट की अतिरिक्त चर्बी में कमी महसूस होने लगती है और शरीर हल्का लगने लगता है।

    गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रातभर शरीर में जमा हुए विषैले तत्व सुबह पानी के माध्यम से बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया किडनी और पसीने के जरिए शरीर की गहराई से सफाई करती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है।

    यदि आप लंबे समय से कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो गुनगुना पानी आपके लिए एक सरल और प्रभावी उपाय हो सकता है। यह आंतों की गति को सुचारू बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित सेवन से गैस एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। करीब दो हफ्तों में पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

    इस आदत का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है तो त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। गुनगुना पानी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे त्वचा की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मुंहासे कम होते हैं और चेहरे पर एक अलग ही चमक नजर आती है।

    इसके अलावा गुनगुना पानी बालों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाता है। वहीं जो लोग सुबह उठते ही साइनस या बंद नाक की समस्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह आदत राहत देने वाली हो सकती है। गुनगुना पानी म्यूकस को पतला कर देता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है।

    कुल मिलाकर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी आदत है जो शरीर को स्वस्थ ऊर्जावान और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए तो केवल 15 दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें

    भारत से पश्चिम एशिया के लिए आज संचालित होंगी 50 उड़ानें


    नई दिल्ली।
    भारत से पश्चिम एशिया के लिए कल, 18 मार्च को कुल 50 उड़ानें संचालित की जाएंगी। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की ये उड़ानें वेस्ट एशिया के विभिन्न गंतव्यों को जोड़ेंगी।

    सूत्रों के अनुसार, इन उड़ानों में 14 शेड्यूल्ड फ्लाइट्स जेद्दा और 12 फ्लाइट्स मस्कट के लिए उड़ान भरेंगी। शेड्यूल्ड उड़ानों का संचालन दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, मैंगलोर, कोझिकोड, कन्नूर, कोच्चि, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहरों से किया जाएगा।

    इसके अलावा, 24 नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स यूएई और सऊदी अरब के लिए संचालित की जाएंगी। इन उड़ानों का उद्देश्य विशेष रूप से उन यात्रियों और भारतीय नागरिकों को सेवा देना है, जो मौजूदा तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचना चाहते हैं।

    एयरलाइनों ने यात्रियों से समय पर एयरपोर्ट पहुंचने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त उड़ानों से मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की आवाजाही सुगम बनेगी।

    विशेष रूप से हाल के अंतरराष्ट्रीय तनाव और मध्य पूर्व में सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए, यह कदम भारतीय नागरिकों और व्यापारिक यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

  • पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से की बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता

    पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से की बातचीत, क्षेत्रीय तनाव पर जताई चिंता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार रात संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जाएद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की और उन्हें ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मौजूदा सुरक्षा हालात पर भी चर्चा की।

    प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं और इनकी सख्त निंदा की जानी चाहिए।

    बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

    दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने मध्य पूर्व में तनाव कम करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हाल के वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बीच यह बातचीत क्षेत्रीय परिस्थितियों और आपसी सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • 2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण

    2033 तक देश के हर नागरिक को मिलेगा स्वास्थ्य बीमा का लाभ : निर्मला सीतारमण


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2033 तक देश के सभी नागरिकों को बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। यह एक मजबूत और समावेशी इकोसिस्टम के रूप में उभर रहा है, जहां सरकार की नीतियों के कारण समाज के सबसे निचले तबके को भी सुरक्षा कवच मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा क्षेत्र का आकार 1,17,505 करोड़ रुपये हो गया, जिसके तहत देश के 58 करोड़ लोगों को कवर किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने 42,420 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया है। निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 37,752 करोड़ रुपये है। स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों का योगदान 37,331 करोड़ रुपये है।

    उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 2.51 करोड़ व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां जारी हुईं, जिनसे 6.01 करोड़ लोगों को कवर मिला। इसके अतिरिक्त, 13.05 लाख ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के जरिए 27.51 करोड़ सदस्य कवर किए गए हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर औसत प्रति व्यक्ति प्रीमियम 943 डॉलर है, जबकि भारत में यह केवल 97 डॉलर है। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार कई लक्षित सुधार कर रही है। व्यक्तिगत प्रीमियम पर जीएसटी छूट और ग्रामीण व सामाजिक क्षेत्रों में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए नियामक संस्था इरडा द्वारा 2024 में अधिसूचित नए नियम इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। इसके अलावा, बाजार में गहराई लाने और पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार दिसंबर 2025 में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए एक विधेयक लेकर आई।

    वित्त मंत्री ने कहा कि देश के सबसे गरीब नागरिकों को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत मात्र 436 रुपये वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का लाइफ कवर देती है। इसमें अब तक 26.79 करोड़ नामांकन हो चुके हैं। आयुष्मान भारत (एबी-पीएमजेएवाई) देश की 40 प्रतिशत निचली आबादी (लगभग 12 करोड़ परिवार) को हर साल 5 लाख रुपये का अस्पताल खर्च कवर देती है। 28 फरवरी 2026 तक देश भर में 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।