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  • सड़क हादसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घायल, ड्राइवर मौके से फरार

    सड़क हादसे में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घायल, ड्राइवर मौके से फरार


    मंदसौर । मंदसौर जिले के पिपलियामंडी थाना क्षेत्र में बेलारा और पलेवना गांव के बीच शुक्रवार दोपहर एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में 45 वर्षीय किसान पर्वत लाल (निवासी कामलिया) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वंदना गोड़ गंभीर रूप से घायल हो गईं।

    जानकारी के मुताबिक, वंदना गोड़ ड्यूटी खत्म कर मंदसौर लौट रही थीं। रास्ते में उन्हें गांव के किसान पर्वत लाल मिले, जिन्होंने लिफ्ट देने की बात स्वीकार की और दोनों एक ही बाइक से रवाना हुए। इसी दौरान यह हादसा हो गया।

    बताया जा रहा है कि जैसे ही बाइक बेलारा और पलेवना के बीच पहुंची, पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि किसान सड़क पर गिर पड़े और ट्रक का पहिया उनके चेहरे के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वंदना गोड़ गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने किसान को मृत घोषित कर दिया। घायल महिला का इलाज जारी है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रक चालक लापरवाही से वाहन चला रहा था और नशे की हालत में होने की आशंका भी जताई जा रही है। हादसे के बाद चालक ट्रक मौके पर छोड़कर फरार हो गया।

    पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जांच पिपलियामंडी थाना पुलिस कर रही है।

  • चांद की क्लियर और डिटेल्ड फोटो लेने के आसान तरीके, कैमरा सेटिंग्स से लेकर टेलीस्कोप ट्रिक तक जानें जरूरी टिप्स

    चांद की क्लियर और डिटेल्ड फोटो लेने के आसान तरीके, कैमरा सेटिंग्स से लेकर टेलीस्कोप ट्रिक तक जानें जरूरी टिप्स


    नई दिल्ली ।
    31 मई को आसमान में नजर आने वाला इस वर्ष का दूसरा पूर्ण चंद्रमा यानी ब्लू मून खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए एक खास अवसर लेकर आ रहा है। इस दुर्लभ और खूबसूरत नजारे को सिर्फ देखना ही नहीं, बल्कि कैमरे में कैद करना भी कई लोगों के लिए रोमांचक अनुभव बन सकता है। इसी संदर्भ में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की मून फोटोग्राफी गाइड शुरुआती और पेशेवर दोनों तरह के फोटोग्राफरों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जो चांद की स्पष्ट और प्रभावशाली तस्वीरें लेने के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी प्रदान करती है।

    रात के आकाश में शांत और चमकते चांद की तस्वीर लेना जितना आकर्षक लगता है, उतना ही तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भी होता है। सही कैमरा सेटिंग्स, धैर्य और थोड़ी प्रैक्टिस के साथ इस चुनौती को आसान बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए जरूरी नहीं कि महंगे उपकरण ही हों, बल्कि साधारण डिजिटल कैमरा या आधुनिक स्मार्टफोन से भी अच्छी तस्वीरें ली जा सकती हैं, बशर्ते सही तकनीक का उपयोग किया जाए।

    फोटोग्राफी शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि तस्वीर का उद्देश्य क्या है। कुछ लोग चांद को पेड़ों या इमारतों के बीच सिल्हूट के रूप में कैद करना चाहते हैं, तो कुछ क्षितिज के पास दिखने वाले सुनहरे या नारंगी रंग के चांद की तस्वीर लेना पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ फोटोग्राफर चांद के बदलते चरणों को एक श्रृंखला के रूप में रिकॉर्ड करना चाहते हैं। डीएसएलआर या मिररलेस कैमरा इस तरह की फोटोग्राफी के लिए बेहतर माना जाता है, खासकर जब तस्वीरें RAW फॉर्मेट में ली जाएं, जिससे बाद में एडिटिंग आसान हो जाती है।

    चांद की फोटोग्राफी में कैमरे को मैन्युअल मोड पर सेट करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसमें अपर्चर, शटर स्पीड और आईएसओ जैसी तीन प्रमुख सेटिंग्स को सही तरीके से संतुलित करना जरूरी है। अपर्चर यह तय करता है कि कैमरे में कितनी रोशनी प्रवेश करेगी, शटर स्पीड यह नियंत्रित करती है कि सेंसर कितनी देर तक रोशनी को कैप्चर करेगा, जबकि आईएसओ कैमरे की संवेदनशीलता को निर्धारित करता है। नासा की गाइड में ‘लूनी 11’ नियम सुझाया गया है, जिसमें अपर्चर को f/11 पर सेट करने और आईएसओ तथा शटर स्पीड को समान रखने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि आईएसओ 100 है तो शटर स्पीड 1/100 सेकंड रखी जा सकती है। चूंकि चांद काफी चमकदार होता है, इसलिए कम आईएसओ से शुरुआत करना बेहतर परिणाम देता है।

    चांद की बेहतरीन तस्वीर पाने के लिए लगातार कई शॉट्स लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे फोटोग्राफी में ‘लकी इमेजिंग’ कहा जाता है। इस प्रक्रिया में सैकड़ों तस्वीरें ली जाती हैं, जिनमें से कुछ ही सही फोकस, स्थिरता और प्रकाश संतुलन के साथ सबसे बेहतर निकलती हैं। बाद में इन्हें एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से और बेहतर बनाया जा सकता है।

    यदि फोटोग्राफर के पास टेलीस्कोप उपलब्ध है, तो वह चांद की सतह के क्रेटर, पहाड़ और गड्ढों की अत्यंत विस्तृत तस्वीरें ले सकता है। इसके लिए कैमरा या स्मार्टफोन को टेलीस्कोप के आईपीस के साथ जोड़कर उपयोग किया जाता है, हालांकि इसमें थोड़ी प्रैक्टिस की जरूरत होती है। स्थिरता बनाए रखने के लिए ट्राइपॉड का उपयोग, साफ मौसम का चयन और वाइड या टेलीफोटो लेंस का सही उपयोग भी बेहतर परिणाम देने में मदद करता है। इस तरह सही तकनीक और धैर्य के साथ ब्लू मून की रात को यादगार फोटोग्राफिक अनुभव में बदला जा सकता है।

  • ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला

    ट्रैफिक बदलाव पर बवाल, विरोध के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला


    मंदसौर । मंदसौर के सबसे व्यस्त माने जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहा यानी बीपीएल चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार प्रशासन के यू-टर्न के साथ फिलहाल थम गया। लगातार विरोध और जनदबाव के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को चौराहे पर लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए, जिसके बाद यहां फिर से पुरानी यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई।

    बैरिकेड्स हटने की खबर मिलते ही स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा था।

    प्रशासन ने कुछ महीनों पहले बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे के सर्कल को छोटा कर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत चौराहे पर बैरिकेड्स लगाए गए थे। नई व्यवस्था के कारण अफीम गोदाम रोड, नई आबादी और संजीत नाका की ओर जाने वाले वाहन चालकों को सीधे मार्ग की बजाय सिटी क्राउन होटल या महाराणा प्रताप चौराहा होकर निकलना पड़ रहा था। इससे लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी और दूसरे मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनने लगी थी।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप था कि बिना पर्याप्त योजना और जनसुनवाई के लागू की गई इस व्यवस्था ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। इसी के विरोध में कुछ दिन पहले जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई थी।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर एक महीने के भीतर व्यवस्था की समीक्षा करने और बैरिकेड्स हटाने का आश्वासन दिया था। हालांकि लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने तय समय से पहले ही बैरिकेड्स हटाने का फैसला कर लिया।

    दीपक सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि सर्कल छोटा करने और बैरिकेड्स लगाने से चौराहे पर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था और लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बैरिकेड्स हटाने का श्रेय आम जनता के संघर्ष को दिया।

    बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों में भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से बैरिकेड्स हटाने की मांग की थी। अब पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद लोगों ने राहत महसूस की है और चौराहे पर यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम दिखाई दे रहा है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद, एंबुलेंस व्यवस्था के नोडल बदले

    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की कवायद, एंबुलेंस व्यवस्था के नोडल बदले


    नरसिंहपुर  नरसिंहपुर जिले में 108 एंबुलेंस सेवाओं को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों और अव्यवस्थाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गुरुवार देर शाम विभाग ने 108 एंबुलेंस सेवा के नोडल प्रभारी को बदलते हुए नई जिम्मेदारी सौंप दी। विभागीय आदेश के अनुसार अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी परिवार कल्याण रंजीत चौधरी को निर्देश दिए गए हैं कि वे तीन दिन के भीतर वाहन शाखा और 108 सेवा का पूरा प्रभार नए प्रभारी प्रशांत सोनी को सौंप दें।

    बताया जा रहा है कि जिले में लंबे समय से 108 एंबुलेंस सेवाओं के मनमाने संचालन और लापरवाही को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप था कि समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचती, कई बार फोन रिस्पॉन्स नहीं मिलता और सेवाओं का संचालन बेहद अव्यवस्थित हो चुका था। इससे लोगों का भरोसा भी लगातार कम हो रहा था।

    कुछ दिन पहले सेवा संचालक कंपनी ने भी जिला प्रबंधक को हटाया था। इसके बाद अब नोडल स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि निगरानी और समन्वय मजबूत होने से एंबुलेंस सेवाओं में सुधार आएगा।

    16 मई को सामने आई एक घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया था। हसन खान को एंबुलेंस कर्मियों के कथित असंवेदनशील रवैये के कारण अपनी बीमार मां को पीठ पर उठाकर ले जाना पड़ा था। इस घटना का वीडियो और शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचीं, जिसके बाद विभाग पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।

    हालांकि विभागीय आदेश में नोडल प्रभारी बदलने का कारण “प्रशासकीय कार्य सुविधा” बताया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी में गंभीर लापरवाही के कारण यह निर्णय लिया गया। लगातार बिगड़ती व्यवस्था और बढ़ती शिकायतों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।

    इस मामले में डॉ. मनीष मिश्रा ने कहा कि नोडल 108 के प्रभार में बदलाव उच्च स्तर से मिले निर्देशों के अनुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग अब एंबुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी करेगा।

  • गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप

    गिट्टी हटाने को लेकर परिवार में बवाल, महिला पर फावड़े से हमले का आरोप


    राजगढ़ । राजगढ़ जिले के कांगनीखेड़ा गांव में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गिट्टी हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला ने अपने देवर, देवरानी और सास पर मारपीट, अभद्रता और जेवर छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद पीड़िता अपने पति के साथ थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता सुनीता बाई बैरागी ने आरोप लगाया कि घटना दोपहर करीब एक बजे की है। वह अपने घर के सामने खड़ी थी, तभी उसका देवर राजू बैरागी वहां गिट्टी लेने पहुंचा और उसे हटने के लिए कहा। सुनीता के मुताबिक उसने कहा कि वह पहले से ही किनारे खड़ी है, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

    महिला का आरोप है कि थोड़ी ही देर में देवरानी सुमित्रा बाई और उसकी सास भी मौके पर आ गईं और तीनों ने मिलकर गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर विवाद और बढ़ गया। पीड़िता के अनुसार देवर राजू ने पीछे से फावड़े से हमला किया, जबकि सुमित्रा ने उसका गला पकड़ लिया। बीच-बचाव करने आए उसके बेटे के साथ भी मारपीट की गई।

    सुनीता बाई ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान आरोपियों ने उसके दो मंगलसूत्र और नाक की बाली छीन ली। महिला का कहना है कि मारपीट के दौरान उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए। उसने आरोप लगाया कि देवर राजू ने उसके ब्लाउज के बटन तोड़ दिए, जिससे उसकी बेइज्जती हुई।

    पीड़िता ने कहा कि जिस देवर को उसने हमेशा बेटे की तरह माना, उसी ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया। घटना के बाद परिवार में तनाव का माहौल बना हुआ है।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन दिन के आगे बढ़ने के साथ बाजार में कमजोरी बढ़ती गई और अंतिम घंटे में तेज बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 76,220.02 का ऊपरी स्तर और 74,589.11 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 के हाई से फिसलकर 23,484.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में यह गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो तेल एवं गैस, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। वहीं ऑटो, फार्मा, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी कमजोर रहे, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, विप्रो, नेस्ले इंडिया और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन दूसरी ओर पावरग्रिड, इंडिगो, ओएनजीसी, मैक्स हेल्थ, आयशर मोटर्स और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि एक ही सत्र में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देखने को मिली। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई पर कुछ सकारात्मक असर की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है।

    मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई है, जिससे कुछ हद तक घरेलू बाजार को सहारा मिला है। लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के 23,500 के नीचे फिसलने से निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है और इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कुल मिलाकर, सप्ताह का अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा और आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं

    भारतीय जिम कल्चर ने यूक्रेनी इंफ्लूएंसर को किया हैरान, बोलीं- यहां लोग सच में मदद करना चाहते हैं


    नई दिल्ली । भारत की सामाजिक संस्कृति और यहां के लोगों के व्यवहार को लेकर विदेशी नागरिकों के अनुभव अक्सर चर्चा का विषय बनते रहते हैं। इसी क्रम में अब एक यूक्रेनी कंटेंट क्रिएटर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने भारतीय और यूरोपीय जिम संस्कृति के बीच अंतर को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। भारत में रह रही सैंड्रा नाम की इस कंटेंट क्रिएटर ने भारतीय जिम के माहौल को यूरोप की तुलना में अधिक दोस्ताना, सहयोगी और जीवंत बताया है।

    वीडियो में सैंड्रा ने कहा कि भारत के जिम में प्रवेश करते ही उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे लोग वास्तव में नए सदस्यों का स्वागत करने के लिए उत्साहित रहते हैं। उनके अनुसार भारतीय जिम में लोगों का व्यवहार काफी खुला और मददगार होता है, जबकि यूरोप में अधिकांश लोग अपने वर्कआउट तक सीमित रहते हैं और दूसरों से बहुत कम संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में जिम केवल फिटनेस सेंटर नहीं बल्कि सामाजिक संपर्क और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान भी प्रतीत होता है।

    सैंड्रा सबसे अधिक भारतीय जिम में मौजूद स्टाफ व्यवस्था को देखकर प्रभावित हुईं। उन्होंने बताया कि यहां सफाई, मेंटेनेंस और सहायता के लिए अलग-अलग लोग मौजूद रहते हैं, जो लगातार इस बात का ध्यान रखते हैं कि जिम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उनके अनुसार यूरोप में इस तरह की सक्रिय सहायता व्यवस्था कम देखने को मिलती है।

    उन्होंने भारतीय ट्रेनर्स के व्यवहार को भी काफी अलग और बेहतर अनुभव बताया। सैंड्रा के मुताबिक भारत में ट्रेनर खुद आगे बढ़कर एक्सरसाइज की तकनीक सुधारने और सही तरीके समझाने की कोशिश करते हैं। अगर कोई सदस्य किसी मशीन या एक्सरसाइज को गलत तरीके से कर रहा हो तो ट्रेनर तुरंत मदद के लिए पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में इस तरह की व्यक्तिगत सहायता अक्सर अतिरिक्त शुल्क या पर्सनल ट्रेनिंग पैकेज के तहत मिलती है, जबकि भारत में कई जगह यह सामान्य व्यवहार का हिस्सा दिखाई देता है।

    हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यूरोपीय जिम कुछ मामलों में अधिक संतुलित नजर आते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी को लेकर उन्होंने कहा कि यूरोप में दोनों की संख्या लगभग बराबर होती है, जबकि भारत के कई जिम में पुरुषों की संख्या अधिक दिखाई देती है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में एक विदेशी महिला होने के कारण उन्हें थोड़ा असहज महसूस हुआ, लेकिन समय के साथ उन्होंने भारतीय माहौल को सहज और सकारात्मक पाया।

    सैंड्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ने उनके अनुभव से सहमति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में लोगों की मदद करना और मिलनसार व्यवहार करना सामान्य बात है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर देश और हर जिम का अनुभव अलग हो सकता है।

    फिटनेस संस्कृति के तेजी से विस्तार के बीच यह वीडियो इस बात को भी उजागर करता है कि भारतीय जिम अब केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सामूहिक ऊर्जा का भी हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप

    नई रेलवे लाइन पर ड्यूटी के दौरान ट्रक की टक्कर से मचा हड़कंप


    राजगढ़ । राजगढ़ में नई रेलवे लाइन पर गश्त कर रहे रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के दो जवान गुरुवार देर रात सड़क हादसे का शिकार हो गए। जालपा माता मंदिर की पहाड़ी के पास एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद राजस्थान के झालावाड़ रेफर किया गया है। वहां उनका इलाज जारी है।

    घायल जवानों की पहचान पवन उपाध्याय और ओमवीर सिंह जाट के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि पवन उपाध्याय झालावाड़ रेलवे स्टेशन पर जबकि ओमवीर सिंह जाट रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर पदस्थ हैं। राजगढ़ क्षेत्र में नई रेलवे लाइन शुरू होने के बाद दोनों जवानों की ड्यूटी रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग और सुरक्षा निगरानी के लिए लगाई गई थी।

    जानकारी के अनुसार दोनों जवान बाइक से रेलवे ट्रैक क्षेत्र की निगरानी करते हुए जालपा माता मंदिर मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार अज्ञात ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों जवान सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को संभाला और उन्हें राजगढ़ जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए झालावाड़ रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारी अस्पताल पहुंचे और घायल जवानों का हालचाल जाना। पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी वाहन और चालक की पहचान की जा सके।

    इस हादसे के बाद नई रेलवे लाइन क्षेत्र में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान जवानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई और मार्ग पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग की है।

  • वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन

    वेतन न मिलने से भड़के स्वास्थ्य कर्मचारी, कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन


    राजगढ़ । राजगढ़ में तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से नाराज स्वास्थ्य कर्मचारियों का गुस्सा शुक्रवार को सड़कों पर दिखाई दिया। जिलेभर के स्वास्थ्य कर्मियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक लंबित वेतन जारी नहीं किया गया तो मंगलवार से जिलेभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

    सुबह 10 बजे से ही जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों से कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे थे। प्रदर्शन में नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ आशा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और उषा कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अस्पतालों और गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    कर्मचारियों ने बताया कि तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। बैंक की किस्तें रुक गई हैं और घर का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था कि विभागीय प्रक्रियाओं और फाइलों में उलझे भुगतान का खामियाजा उन्हें और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

    सुरेश पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारी हर परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए सोमवार तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

    प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन साहू, सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, आरबीएसके डॉक्टर, सीएचओ, बीसीएम, बीपीएम, आउटसोर्स कर्मचारी, आशा और उषा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य कर्मचारियों की चेतावनी के बाद अब जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय पर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

  • राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश

    राजगढ़ में खरीदी केंद्रों पर बढ़ेगी निगरानी, ई-केवाईसी में तेजी लाने के आदेश


    विदिशा। राजगढ़ जिले में गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों को भुगतान में हो रही देरी और तकनीकी समस्याओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को आयोजित जिला उपार्जन समिति की बैठक में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों के भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

    बैठक के दौरान कलेक्टर ने उन मामलों की समीक्षा की, जिनमें तकनीकी कारणों से भुगतान अटक गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे किसानों की तुरंत ई-केवाईसी कराई जाए और आवश्यकता पड़ने पर बैंक खाते में सुधार या खाता परिवर्तन की प्रक्रिया भी प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाए, ताकि किसानों को जल्द से जल्द भुगतान मिल सके।

    कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि गेहूं उपार्जन केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत और आजीविका से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को परेशान करने वाली किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही सभी खरीदी केंद्रों की लगातार निगरानी करने और लंबित मामलों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में खरीदी केंद्रों पर रखे गेहूं के परिवहन और भंडारण व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कई केंद्रों पर अब तक गेहूं का उठाव पूरा नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिवहन एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर परिवहन कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि खरीदी केंद्रों पर भंडारण का दबाव कम हो सके और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

    बैठक के दौरान जिला उपार्जन समिति के सदस्यों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने उपार्जन कार्यों की प्रगति, किसानों को किए गए भुगतान और परिवहन व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान कर उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाएगा।