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  • 11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा

    11 साल की उम्र में मोहम्मद रफी संग गाया पहला गीत फिर नाम बदलते ही बॉलीवुड पर छा गईं पूर्णिमा


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कई ऐसी आवाजें उभरीं जिन्होंने फिल्मों को नई पहचान दी लेकिन कुछ कलाकार ऐसे भी रहे जिनकी कहानी उतनी चर्चा में नहीं आई जितनी उनकी गायकी। ऐसी ही एक मशहूर गायिका हैं सुषमा श्रेष्ठा जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी मधुर आवाज से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया और बाद में पूर्णिमा नाम से बॉलीवुड की सफल पार्श्व गायिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर संघर्ष प्रतिभा और सफलता का शानदार उदाहरण माना जाता है।

    नेपाल में जन्मी सुषमा श्रेष्ठा को बचपन से ही संगीत में गहरी रुचि थी। उनके परिवार के परिचितों के माध्यम से उनकी मुलाकात फिल्म संगीत जगत से हुई और उनकी प्रतिभा ने संगीतकारों को प्रभावित कर दिया। महज 11 वर्ष की उम्र में उन्हें हिंदी फिल्म अंदाज के लिए मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर के साथ गाने का अवसर मिला। यह उपलब्धि किसी भी बाल कलाकार के लिए बेहद बड़ी मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने लगातार कई ऐसे गीत गाए जो आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं।

    बचपन में उन्होंने तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई क्या हुआ तेरा वादा तेरी है जमीन तेरा आसमान और एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल जैसे कई यादगार गीतों में अपनी आवाज दी। उनकी मासूम आवाज ने बच्चों पर आधारित गीतों को एक नई पहचान दी। उस दौर में जब अधिकतर बाल गीत बड़े गायक अपनी आवाज बदलकर गाते थे तब सुषमा श्रेष्ठा ने बाल गायिका के रूप में अलग स्थान बनाया।

    समय के साथ उन्होंने विवाह किया और कुछ वर्षों तक संगीत जगत से दूरी बना ली। इसके बाद 90 के दशक में जब उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी की तो संगीत कंपनियों की सलाह पर उन्होंने अपना नाम बदलकर पूर्णिमा रख लिया। नाम बदलने के साथ उनकी नई पारी भी शानदार साबित हुई। उनकी आवाज ने उस दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को नई पहचान दिलाई और वे बॉलीवुड की व्यस्त प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गईं।

    पूर्णिमा ने जूही चावला के लिए तू तू तू तारा और माधुरी दीक्षित पर फिल्माए गए लोकप्रिय गीत चने के खेत में जैसे सुपरहिट गानों को अपनी आवाज दी। इसके बाद करिश्मा कपूर की फिल्मों में उनकी आवाज सबसे ज्यादा पसंद की गई। उन्होंने ऊंची है बिल्डिंग सोना कितना सोना है उई अम्मा उई अम्मा मैं पैदल से जा रहा था और मैं हूं बीवी नंबर वन जैसे कई लोकप्रिय गीत गाए जो आज भी लोगों की जुबान पर बने हुए हैं।

    पूर्णिमा की सबसे बड़ी विशेषता उनकी आवाज की बहुमुखी शैली रही। वह रोमांटिक गीतों से लेकर डांस नंबर और बच्चों के गीतों तक हर शैली में सहज नजर आईं। यही वजह रही कि उन्होंने अलग अलग दौर की कई बड़ी अभिनेत्रियों को अपनी आवाज देकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी गायकी में मिठास ऊर्जा और भावनाओं का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

    आज भी जब 70 और 90 के दशक के लोकप्रिय गीतों की चर्चा होती है तब पूर्णिमा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने यह साबित किया कि सच्ची प्रतिभा समय और परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानती। एक बाल गायिका से लेकर सफल पार्श्व गायिका बनने तक का उनका सफर भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में प्रेरणादायक अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • 21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी

    21 जुलाई का मौसम देगा राहत या बढ़ाएगा मुश्किलें देश के कई राज्यों में भारी बारिश और गरज चमक का अलर्ट जारी


    मध्यप्रदेश । 21 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पूर्वी भारत और पश्चिमी तटीय राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। लगातार सक्रिय बने मानसूनी सिस्टम के कारण कई राज्यों में जलभराव बाढ़ और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली एनसीआर में पूरे दिन बादल छाए रहने और रुक रुक कर बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस से राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। सुबह और शाम के समय तेज हवा के साथ बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने से नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए यह बारिश फसलों के लिहाज से लाभदायक मानी जा रही है लेकिन अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव से नुकसान की आशंका भी बनी रहेगी।

    महाराष्ट्र गुजरात गोवा कर्नाटक और केरल में भी मानसून पूरी मजबूती के साथ सक्रिय रहेगा। पश्चिमी घाट के आसपास के क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क मार्ग प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

    हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। यात्रियों और श्रद्धालुओं को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र मानसून को लगातार मजबूती दे रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कई राज्यों में बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है इसलिए खुले मैदानों पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।

    विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। किसानों को भी मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर 21 जुलाई का दिन देश के कई हिस्सों में बारिश राहत और सतर्कता तीनों का संदेश लेकर आएगा। जहां एक ओर गर्मी और उमस से राहत मिलेगी वहीं दूसरी ओर भारी बारिश वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतना बेहद जरूरी रहेगा।

  • ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

    ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता


    लंदन।
    लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।


    चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध

    बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।


    हर तरफ से दबाव

    घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।


    ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत

    ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।

    यह भी एक रिकॉर्ड
    स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

  • US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

    US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर ट्रेड वॉर (Trade War) शुरू कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पड़ोसी देश कनाडा (Canada) से आयातित अधिकांश सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। अब ट्रंप के इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने से जुड़े तीन फैसलों को मंजूरी दी है। अमेरिका के ट्रेड एक्ट ऑफ 1930 की धारा 338 के तहत फैसला तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि चीन के अलावा कनाडा ही उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ का जवाब जवाबी शुल्क से दिया था। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के रवैये के लिए कनाडा की जवाबदेही तय की जानी जरूरी थी।

    बता दें कि ट्रेड एक्ट की धारा 338 को लागू कर ट्रंप पहले भी कई देशों पर इस तरह के शुल्क लगा चुके हैं। इसके बाद बीते साल डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस सेक्शन को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। सांसदों ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल एकतरफा टैरिफ लगाने के लिए कर सकते हैं। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है।


    किन चीजों पर पड़ेगा असर?

    ट्रंप के नए आदेश के तहत कनाडा के कुछ अहम सेक्टरों को बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी गई है। ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और दुर्लभ खनिजों को 50 फीसदी टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि यह 50 फीसदी टैरिफ उन कई उत्पादों पर भी लागू होगा जिन्हें पहले ‘यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट’ (USMCA) के तहत सीमा शुल्क से सुरक्षा मिली हुई थी। 2020 में लागू हुआ यह व्यापार समझौता हाल ही में खत्म हुआ था। फिलहाल इसे दोबारा लागू करने के लिए बातचीत जारी है।


    बढ़ सकती है महंगाई, रिश्तों में खटास

    अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी दरार आ सकती है। यही नहीं ट्रंप आने वाले दिनों में टैरिफ और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। मामले की जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को कनाडा पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।

  • MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?

    MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code UCC) के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल सोमवार को विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेश किया गया। सरकार इसे सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार देने वाला बिल बता रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश भी गोवा, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों में शामिल हो गया है।

    ऐसे में आइए जानते हैं कि समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है? संविधान इस पर क्या कहता है? यूसीसी का इतिहास क्या है? मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई? ड्राफ्ट बिल में क्या-क्या शामिल किया गया है? भारत के किन-किन राज्यों में यह लागू किया जा चुका है?


    समान नागरिक संहिता क्या है?

    समान नागरिक संहिता का अर्थ है हर नागरिक के लिए एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इसके लागू होने के बाद संबंधित राज्य में शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होते हैं।

    यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है। भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र का भी हिस्सा था। इसके साथ ही उसके शासन वाले राज्यों में इसे जोर-शोर से लागू भी कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश की कैबिनेट से इसकी मंजूरी इसी कड़ी का हिस्सा है।


    संविधान इस पर क्या कहता है?

    देश में संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि राज्य इसे लागू कर सकता है। इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर किसी भी वर्ग विशेष के साथ होने वाले भेदभाव या पक्षपात को खत्म करना और विविध सांस्कृतिक समूहों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आम्बेडकर ने कहा था कि UCC जरूरी है, लेकिन फिलहाल यह स्वैच्छिक रहना चाहिए।

    संविधान के मसौदे के अनुच्छेद 35 को भारत के संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 44 के रूप में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था। इसे संविधान में इस नजरिए के रूप में शामिल किया गया था जो तब पूरा होगा जब राष्ट्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होगा और UCC को सामाजिक स्वीकृति दी जा सकती है।


    इसका इतिहास क्या है?

    UCC की उत्पत्ति औपनिवेशिक भारत में हुई जब ब्रिटिश सरकार ने 1835 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानूनों की एकरूपता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। विशेष रूप से इसमें यह सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) को इस तरह के संहिताकरण के बाहर रखा जाए।

    ब्रिटिश सरकार को 1941 में हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने के लिए बी एन राव समिति बनाई। समिति ने शास्त्रों के अनुसार, एक संहिताबद्ध हिंदू कानून की सिफारिश की, जो महिलाओं को समान अधिकार देगा। इसके साथ ही समिति ने हिंदुओं के लिए विवाह और उत्तराधिकार के मुद्दों में भी नागरिक संहिता की सिफारिश की।


    मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई?

    मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में अभी विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, लिव-इन संबंध और अन्य पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का समग्र अध्ययन कर एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई।

    इसी उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।

    समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का भी परीक्षण किया। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, समानता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए गए। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनसे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर भी समिति ने विचार किया। साथ ही प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का अध्ययन किया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न हो। समिति को 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।


    जनता से सुझाव कैसे लिए गए?

    – जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया गया।
    – इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए।
    – वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए।
    – जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
    – इन बैठकों से 10,134 से अधिक सुझाव मिले।


    जन परामर्श में क्या सामने आया?

    – सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 93.54% लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।
    – 92.20% लोगों ने कहा कि सभी समुदायों में महिला और पुरुष के लिए समान कानून होना चाहिए।
    – 91.32% लोगों ने माना कि भेदभावपूर्ण तलाक कानून समाप्त होने चाहिए।
    – 92.66% लोगों ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार मिलने चाहिए।
    – 90.96% लोगों ने माना कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से कानूनी जटिलताएं बढ़ती हैं।
    – 86.78% लोगों ने कहा कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना समान नागरिक संहिता लागू की जा सकती है।


    ड्राफ्ट बिल के प्रमुख प्रावधान क्या है?

    ड्राफ्ट बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
    विवाह के बाद दूसरा विवाह तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हो जाए।
    केवल तलाक, तलाक, तलाक कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा। तलाक तभी प्रभावी होगा जब कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
    महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।
    जिन कानूनों में महिलाओं के अधिकार कम थे, वहां भाई और बहनों को समान अधिकार दिए जाएंगे।
    सरकार के अनुसार यह कानून सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी धर्म को नीचा नहीं दिखाता।
    महिलाओं की गरिमा, सम्मान और नारी सशक्तिकरण को इस कानून का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
    अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित रूढ़िगत समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है।
    धार्मिक समारोह, अनुष्ठान और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
    विवाह का पंजीकरण पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक अनिवार्य होगा।
    एक जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।
    न्यायालय के बाहर विवाह विच्छेद मान्य नहीं होगा।
    पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
    महिलाओं को संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं।

  • यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    कीव। समंदर (Ocean) में एक जहाज (Ship) पर हुए हमले (Attack) में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स (Four Indian crew members) की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो (MV Golden Leo) नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के ओडेशा बंदरगाह (Odesha Port) से निकल रहा था. तभी इस पर हमला हुआ।

    भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV GOLDEN LEO नाम के एक जहाज पर हमला हुआ. यूक्रेन का दावा है कि ये हमला रूस ने मिसाइलों से किया है. घटना के समय जहाज़ पर 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे. इनमें से 4 भारतीयों की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में हमारा मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्रालय हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करते हैं।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष आम नागरिकों (क्रू सदस्यों) की जान जोखिम में डालना या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

    ये जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहा था. तभी इसे निशाना बनाया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत समुद्र में चल रहा था।


    मरने वालों में एक शख्स केरल का

    भारतीयों में मरने वालों में एक शख्स केरल का था. 26 साल के इस शख्स का नाम अखिल जोयन है. जो कासरगोड ज़िले के वेल्लारिक्कुंडु के रहने वाले जोयन और सैली का इकलौता बेटा था।

    बलाल ग्राम पंचायत के वेल्लारिक्कुंडु वार्ड के सदस्य शोबी जोसेफ ने बताया कि परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी से अखिल की मौत के बारे में एक ईमेल मिला।


    जहाज पर मिसाइलों से हुआ हमला

    यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक रविवार को ओडेसा से निकलने के कुछ ही देर बाद मक्का ले जा रहे कार्गो जहाज़ ‘गोल्डन लियो’ पर रूस की तीन क्रूज़ मिसाइलें गिरीं। यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार तट के पास एक जहाज़ से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में ‘गोल्डन लियो’ के तौर पर हुई. इसके क्रू में भारत और सीरिया के सदस्य शामिल थे।

    यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण ने बताया कि रात भर खोज और बचाव अभियान चलता रहा. इस हमले में नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हो गई, जबकि 17 क्रू सदस्यों में से आठ को बचा लिया गया.

    LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, ‘गोल्डन लियो’ मुंबई स्थित ‘ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड’ का है. इस जहाज़ का प्रबंधन ‘फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी SA’ करती है।


    काला सागर फिर से लड़ाई का मुख्य केंद्र बना

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन काला सागर और आज़ोव सागर में सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहे हैं, जिससे कमर्शियल शिपिंग और अनाज के निर्यात पर लगातार खतरा बढ़ रहा है।

    2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद काला सागर इस संघर्ष के सबसे ज़्यादा विवादित इलाकों में से एक बन गया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से कुछ समय के लिए अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ग्लोबल फ़ूड मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिली थी, लेकिन फिर से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे व्यस्त एग्रीकल्चरल शिपिंग रूट में से एक को फिर से बाधित कर दिया है।

    यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाया है, जबकि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, फ़्यूल फ़ैसिलिटीज़ और कार्गो जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं।

  • साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

    साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    देश के शेयर बाजार (Stock Market) से जुड़ी सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (Central Depository Services- CDSL) पर SEBI ने बड़ा एक्शन लिया है। सेबी (SEBI) ने कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना (A fine of ₹1 crore) लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए एक बड़े मैलवेयर (Malware) साइबर अटैक से जुड़ी सुरक्षा खामियों के कारण की गई है। उस समय इस साइबर हमले की वजह से CDSL की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई थीं और शेयर बाजार के सेटलमेंट (Settlement) में भी देरी हुई थी। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    SEBI के आदेश के मुताबिक, CDSL अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने में कई स्तरों पर विफल रही। नियामक का कहना है कि अगर कंपनी ने समय रहते जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए होते, तो इस तरह का हमला टाला जा सकता था। इसी कारण सेबी ने 90 लाख रुपये का जुर्माना SEBI एक्ट के तहत और 10 लाख रुपये डिपॉजिटरीज़ एक्ट (Depositories Act) के तहत लगाया है। कंपनी को आदेश मिलने के 45 दिनों के अंदर यह राशि जमा करनी होगी।


    क्या और कब का है मामला?

    यह मामला 18 नवंबर 2022 का है। उस दिन सुबह करीब 3 बजे, जब दिनभर के सभी ऑपरेशन पूरे हो चुके थे, CDSL ने पाया कि उसके कुछ सर्वर और कर्मचारियों के कंप्यूटर अचानक काम करना बंद कर चुके हैं। जांच में पता चला कि कंपनी के सिस्टम पर एक मैलवेयर अटैक हुआ है। इसके बाद CDSL ने तुरंत अपने नेटवर्क को डिस्कनेक्ट किया, प्रभावित सर्वर अलग किए और वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कई कदम उठाए।


    सिस्टम करीब 54 घंटे तक प्रभावित

    हालांकि, कंपनी ने अगले दिन तक सिस्टम को काफी हद तक रिकवर कर लिया, लेकिन इस दौरान कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित रहीं। सेबी के अनुसार, सेटलमेंट सिस्टम लगभग 46 घंटे और इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर सिस्टम करीब 54 घंटे तक प्रभावित रहा। इसका असर केवल CDSL तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी पड़ा।

    जांच में सबसे बड़ी लापरवाही ADFS (Active Directory Federation Services) सर्वर को लेकर सामने आई। यह इंटरनेट से जुड़ा हुआ सर्वर था, लेकिन CDSL ने इसे “क्रिटिकल एसेट” नहीं माना। इसका मतलब यह हुआ कि इस सर्वर की नियमित सुरक्षा जांच, VAPT (Vulnerability Assessment and Penetration Testing) नहीं कराई गई। यही सर्वर साइबर अपराधियों के लिए कंपनी के नेटवर्क में घुसने का मुख्य रास्ता बन गया।

    SEBI ने कहा कि CDSL का यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि इस सर्वर पर निवेशकों का डेटा नहीं था, इसलिए इसे महत्वपूर्ण नहीं माना गया। नियामक ने साफ कहा कि इंटरनेट से जुड़े सभी सर्वर अपने आप में संवेदनशील होते हैं और उन्हें सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा मिलनी चाहिए।

    इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि एक डोमेन एडमिन अकाउंट का पासवर्ड बेहद कमजोर था, जिसे आसानी से “ब्रूट फोर्स” तकनीक से तोड़ा जा सकता था। इसके अलावा इस अकाउंट का पासवर्ड “Never Expire” पर सेट था, यानी वह कभी समाप्त नहीं होता था। इससे साइबर हमलावर लंबे समय तक सिस्टम में बिना पकड़े सक्रिय रह सके।

    SEBI ने यह भी पाया कि CDSL ने अपने SIEM (Security Information and Event Management) सिस्टम में ADFS सर्वर को जोड़ा ही नहीं था। इसका नतीजा यह हुआ कि संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कई अलर्ट कभी रिकॉर्ड ही नहीं हुए। कुछ मामलों में जहां अलर्ट मिले भी, उन्हें समय पर देखा या स्वीकार नहीं किया गया। इससे हमलावरों को सिस्टम के अंदर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने का मौका मिल गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में उस समय के CISO (Chief Information Security Officer) राजेश नाडकर्णी और CTO (Chief Technology Officer) अमित महाजन को भी नोटिस भेजा गया था। हालांकि, सेबी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी करने के बाद उन पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया और कार्यवाही समाप्त कर दी।

    यह मामला पूरे फाइनेंशियल सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है। आज जब शेयर बाजार पूरी तरह डिजिटल हो चुका है और करोड़ों निवेशकों का डेटा ऑनलाइन मौजूद है, तब साइबर सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़े फाइनेंशियल और ऑपरेशन नुकसान का कारण बन सकती है। SEBI का यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था केवल कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे की भी सबसे बड़ी गारंटी है।

  • J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न

    J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में सोमवार सुबह हुई भारी बारिश के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। श्रीनगर (Srinagar) के मुख्य और ऐतिहासिक लाल चौक (Historic Lal Chowk) समेत कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं। खराब मौसम और बाढ़ के खतरे को देखते हुए श्री अमरनाथ यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस बीच केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली में बताए जा रहे हैं।

    स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की खुली पोल
    अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटकों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे लाल चौक और घंटाघर की बाढ़ वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जलभराव के बाद श्रीनगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है।

    ड्रेनेज सिस्टम के फेल होने पर आम लोग और इंटरनेट यूजर्स प्रशासन को घेर रहे हैं। श्रीनगर नगर निगम (SMC) का कहना है कि करीब दो घंटे तक हुई भारी बारिश के कारण ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो हो गया। जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं। SMC का यह भी दावा है कि अप्रैल 2017 में शुरू हुए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मंजूर सभी काम पूरे हो चुके हैं।

    कंजर्वेशन आर्किटेक्ट हाकिम समीर हमदानी ने इस प्रोजेक्ट को ‘आत्माविहीन और फोटोशॉप’ बताते हुए कहा कि बारिश के पानी को प्रबंधित करने और ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने के लिए शहर में कोई एकीकृत और उचित सिस्टम मौजूद नहीं है।


    सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिए ऑडिट के आदेश

    जलभराव की स्थिति पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि थोड़ी सी बारिश से लाल चौक समेत शहर का बड़ा हिस्सा डूब गया, जो स्पष्ट रूप से ड्रेनेज सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर अब तक वास्तव में क्या हासिल किया गया है। कैबिनेट ने स्मार्ट सिटी पहल के तहत दिए गए ठेकों और प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन पर चिंता जताते हुए इसकी विफलता की जांच के लिए बाहरी ऑडिट के आदेश दे दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया था कि श्रीनगर में 3,634 करोड़ रुपये की लागत से 161 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पूरे किए जाने थे।


    अमरनाथ यात्रा निलंबित, 23 जुलाई तक स्कूल बंद

    19 जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा को बालटाल और पहलगाम, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हालात को देखते हुए सरकार ने राज्य भर में स्कूलों की छुट्टियां 23 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी हैं।


    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    IMD के निदेशक मुख्तार अहमद ने चेतावनी दी है कि कश्मीर में अगले तीन दिनों तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का भारी खतरा है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और पहाड़ी ढलानों, नदियों व नालों के पास बिल्कुल न जाएं।


    राहत-बचाव कार्य तेज, एलजी ने की समीक्षा

    उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने सबसे अधिक प्रभावित राजौरी और पुंछ समेत अन्य जिलों में हालात की समीक्षा की है। डोडा में दो लोगों की जान जाने पर एलजी ने गहरा दुख जताया है। NDRF, SDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की टीमें तैनात कर दी गई हैं और संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर में प्रमुख सड़कों को आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया है। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बहाल करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। फील्ड टीमों को घरों और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने का निर्देश दिया गया है।


    दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

    जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया और केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।

    संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च के कारण सुर्खियों में पीछे रह गया। उमर अब्दुल्ला सुबह जम्मू से दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन कॉजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण वह जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके।

    नेकां के लगभग 100 प्रदर्शनकारी हाथों में ”अपना वादा पूरा करो” और ”पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो” लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। बाद में मुख्यमंत्री कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, जहां जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक संगोष्ठी आयोजित की जानी थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

    ”रिस्टोर स्टेटहुड” लिखी जैकेट पहने उमर अशोक रोड पर सड़क किनारे बैठ गए। इस दौरान कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल कुछ युवा भी उनके साथ बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने ”मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?” जैसे नारे भी लगाए। पुलिस ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके समर्थक धरने पर बैठे हुए थे।

    बाद में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, ”यहां बाकी लोगों के साथ हमें भी आंसू गैस का निशाना बनाया गया। यह बेहद शर्मनाक है।” उमर ने कहा, ”हम अपने करीब 100 समर्थकों के साथ दिल्ली आए थे ताकि केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर सकें, लेकिन यहां भी हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से न्याय की मांग को लेकर आए युवाओं पर भी आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

  • Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..

    Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावा चोरी प्रकरण (Offering Theft Incident) के बाद अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब ट्रस्ट प्रत्येक माह की ऑडिट रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्त मंदिर की आय-व्यय और ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी सीधे देख सकें। इसके साथ ही वेबसाइट पर ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रमुख गतिविधियों का भी नियमित अपडेट किया जाएगा।

    अब तक ट्रस्ट की वित्तीय ऑडिट वर्ष में केवल एक बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद तैयार की जाती थी। यह रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती थी, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर महीने की आय, व्यय, दान, खर्च और वित्तीय स्थिति का विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है। ट्रस्ट चाहता है कि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो तथा मंदिर के संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने। इसी उद्देश्य से वेबसाइट को सूचना का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत वेबसाइट पर केवल ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट की प्रमुख बैठकों, प्रशासनिक फैसलों, निर्माण कार्यों की प्रगति, नई सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। इससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ सकेंगे।

  • नेपाल से भटककर गोरखपुर पहुंची 147 किलो की प्रेग्नेंट डॉल्फिन…52 KM का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नदी में छोड़ी

    नेपाल से भटककर गोरखपुर पहुंची 147 किलो की प्रेग्नेंट डॉल्फिन…52 KM का ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नदी में छोड़ी


    गोरखपुर/महराजगंज।
    नेपाल (Nepal) की त्रिवेणी नदी (Triveni River) से महराजगंज जिले (Maharajganj district) के एक कैनाल में बहकर आई 147 किलो की डॉल्फिन मछली (Dolphin) का रेस्क्यू चर्चा में है. प्रेग्नेंट मछली (Pregnant fish) को राप्ती नदी में छोड़ा गया. डॉल्फिन को सुरक्षित गोरखपुर लाने के लिए भटहट से 52 किलो के रास्ते में ग्रीन कॉरिडोर (Green Corridor) बनाया गया. तकरीबन 1 घंटे के सफर के बाद डॉल्फिन को गोरखपुर के राप्ती तट पर लाकर इलाज के बाद राप्ती नदी में छोड़ दिया गया.

    गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणी उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. योगेश कुमार सिंह ने बताया, नेपाल की त्रिवेणी नदी से एक डॉल्फिन भटककर एक कैनाल में आ गई और वह धीरे-धीरे परतावाल के पास धरमौली बाजार के कैनाल में आकर फंस गई थी. वह वहां 3 दिन से फंसी थी और उसकी जान को बचाना बहुत ही जरूरी था।

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी और मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बीसी ब्रम्हा के निर्देशन में डॉल्फिन को रविवार यानी 19 जुलाई को भी पकड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन बारिश के कारण कैनाल में पानी ज्यादा था और बहाव भी बहुत तेज होने के कारण बहुत ही कठिनाई हो रही थी.

    ऐसे में सिंचाई विभाग के आलाधिकारियों से बात करके कैनाल में पानी को कम कराया गया और सोमवार (20 जुलाई) को कुशीनगर वन प्रभाग के हाटा रेंज के तहत सिसवां शुक्ल ग्रामसभा के पास देवरिया कैनाल से सफल रेस्क्यू किया गया।

    रेस्क्यू के बाद डॉलफिन को डॉलफिन एंबुलेंस में रखा गया. जहां इलाज और जांच किया गया. 7 फीट 2 इंच लंबी डॉल्फिन 147 किलो की प्रेग्नेंट मादा है. एंबुलेंस के जरिए ही मछली को राजघाट के पास राप्ती नदी में छोड़ा जाना था, क्योंकि राप्ती नदी डॉल्फिन के लिए एक सुरक्षित घर है।

    गोरखपुर SSP डॉक्टर कौस्तुभ के आदेश पर डॉल्फिन को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके चलते राप्ती घाट तक कुल दूरी करीब 52 किमी को तय करने में मात्र एक घंटा 5 मिनट लगे और मछली को सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया।