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  • ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला

    ब्रिक्स समिट में भाग नहीं लेगा बांग्लादेश… PM तारिक रहमान को न्योता नहीं मिलने का दिया हवाला


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के आउटरीच सेशन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Prime Minister Tariq Rahman) के शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत तौर पर इस बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, बल्कि यह न्योता BIMSTEC के मौजूदा चेयर को दिया गया था।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री को आमंत्रित ही नहीं किया गया, तो सरकार की ओर से किसी प्रतिनिधि को भेजने की भी कोई वजह नहीं है।


    ‘हमारे PM को किसने बुलाया? BIMSTEC चेयर को न्योता मिला था’

    हुमायूं कबीर ने कहा, “हम कैसे जाएंगे? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया था।” जब उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री को न्योता दिए जाने की बात क्यों कही जा रही है, तो उन्होंने जवाब दिया, “आपको किसने बताया कि हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया था? BIMSTEC चेयर को आमंत्रित किया गया था। फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?”

    BRICS समिट का आउटरीच सेशन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होना है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं के साथ आउटरीच के लिए आमंत्रित किए गए नेता भी शामिल होंगे।


    भारत ने क्या कहा था?

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को BIMSTEC के मौजूदा चेयर के तौर पर 18वें BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री के लिए एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण फरवरी से ही मौजूद है।

    बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि तारिक रहमान की भारत की पहली यात्रा बहुपक्षीय यात्रा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार भारत के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय यात्रा की व्यवस्था करने पर काम कर रही है और इसके लिए उचित समय का इंतजार किया जा रहा है।


    भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव के बीच आया फैसला

    बांग्लादेश का यह फैसला ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली और ढाका के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। इसकी वजहों में भारत में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदगी, उनके प्रत्यर्पण की मांग और पानी के बंटवारे से जुड़े समझौतों समेत कुछ अन्य लंबित मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के संदर्भ में बताया गया है।

    फरवरी में भारत ने भेजे थे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
    भारत ने 17 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बांग्लादेश भेजा था। वह 12 फरवरी के आम चुनाव के बाद तारिक रहमान की BNP सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। ओम बिरला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तारिक रहमान के लिए एक पत्र भी लेकर गए थे। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बांग्लादेशी समकक्ष को बधाई दी थी और उन्हें पत्नी तथा बेटी के साथ भारत आने का निमंत्रण दिया था।

  • तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम

    तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन दिन के ब्रेक के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। जबलपुर रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 12 सितंबर से इंदौर नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को सतना रीवा मऊगंज सीधी मैहर शहडोल डिंडौरी अनूपपुर मंडला बालाघाट सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में कहीं धूप तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच मंदसौर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा समेत कई जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    पिछले तीन दिनों से प्रदेश में भारी बारिश का दौर थमा हुआ था। इसके चलते कई शहरों में तेज धूप निकलने लगी थी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। भोपाल समेत इंदौर उज्जैन ग्वालियर और जबलपुर में भी दिन के समय गर्मी का असर दिखाई दिया। हालांकि अब मौसम का मिजाज फिर बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र मानसून ट्रफ और पश्चिमी हिस्से में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन अब तक सामान्य से करीब 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक करीब 795.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक लगभग 862.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 2.6 इंच कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी करीब 2 प्रतिशत जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी करीब 13 प्रतिशत बताई गई है।

    प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है। वहीं कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। अनूपपुर छतरपुर मैहर मऊगंज निवाड़ी पन्ना सतना शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ उमरिया समेत कई जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। भोपाल बुरहानपुर दतिया गुना ग्वालियर खरगोन राजगढ़ श्योपुर और शिवपुरी जैसे जिलों में भी बारिश सामान्य से अधिक रही है।

    इस सीजन की शुरुआत में जून में बारिश की कमी ने प्रदेश के आंकड़ों को प्रभावित किया था। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया। हालांकि मानसून में कई बार ब्रेक आने के कारण जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब सितंबर में सक्रिय हो रहे नए सिस्टम से बारिश के आंकड़ों में और सुधार की उम्मीद है।

    भोपाल में भी सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। राजधानी में सितंबर महीने की औसत बारिश करीब 7 इंच मानी जाती है। पिछले कई वर्षों में सितंबर के दौरान सामान्य से ज्यादा बारिश भी दर्ज होती रही है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला फिर तेज हो सकता है।

  • देश के तटीय क्षेत्रों में आने वाले हैं 3 शक्तिशाली चक्रवाती तूफान…. ISRO ने जारी की चेतावनी

    देश के तटीय क्षेत्रों में आने वाले हैं 3 शक्तिशाली चक्रवाती तूफान…. ISRO ने जारी की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देश के तटीय इलाकों के लिए आने वाले तीन महीने बेहद संवेदनशील होंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) (Indian Space Research Organisation – ISRO) ने अपने उपग्रहों और मौसम निगरानी प्रणालियों से मिले डाटा के आधार पर चेतावनी जारी की है कि अक्तूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) और अरब सागर (Arabian Sea) में तीन शक्तिशाली चक्रवाती तूफान (Powerful Cyclonic Storm) बन सकते हैं। इसरो ने आगाह किया है कि चक्रवात के साथ तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरें आ सकती हैं।

    इसरो के अनुसार, चक्रवातों की ताकत का सूचकांक 44 साल के औसत से 83 फीसदी ज्यादा रह सकता है। मतलब ये पहले के मुकाबले ज्यादा तबाही मचा सकते हैं। रिपोर्ट में अक्तूबर-दिसंबर के लिए 1.30 करोड़ का पीडीआई (पावर डिसिपेशन इंडेक्स) बताया गया है। 1982-2025 के दौरान औसत पीडीआई 71 लाख रहा है। पीडीआई एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना है जो किसी चक्रवात की विनाशकारी क्षमता, उसकी अवधि और संख्या को मिलाकर उसकी कुल ऊर्जा का आकलन करता है। पीडीआई की इकाई नॉट्स क्यूब होती है।


    44 साल के बाद सबसे ज्यादा तीव्रता

    रिपोर्ट में 1982 से 2025 तक उत्तर हिंद महासागर में मानसून सीजन के बाद आए चक्रवातों की संख्या और उनके पीडीआई का अध्ययन किया गया है। इस अवधि में पीडीआई का औसत 7.15×10 नॉट्स क्यूब रहा। 2026 के अक्तूबर-दिसंबर में इसके 13.06×10 नॉट्स क्यूब तक पहुंचने का अनुमान है।

    आसान भाषा में कहें तो इस बार सिर्फ यह नहीं देखा जा रहा कि कितने चक्रवात बन सकते हैं। बल्कि यह अनुमान लगाया गया है कि वे कितनी तेज हवा के साथ बनेंगे और कितने समय तक टिक सकते हैं।


    केंद्र सरकार ने निगरानी शुरू की

    इसरो की चेतावनी के बाद केंद्र सरकार, मौसम विभाग और तटीय राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों ने स्थिति पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी जारी की जाएगी। मछुआरों और समुद्र में काम करने वाले लोगों के लिए भी ऐसे मौसमी अनुमान महत्वपूर्ण हैं।

  • Women Asia Cup 2026 : बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फाइनल में पहुंची टीम इंडिया

    Women Asia Cup 2026 : बांग्लादेश को 40 रनों से हराकर फाइनल में पहुंची टीम इंडिया


    दुबई।
    महिला एशिया कप 2026 (Women Asia Cup 2026) के सेमीफाइनल (Semifinal) में बांग्लादेश (Bangladesh) को रौंदकर भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) ने फाइनल का टिकट कटवा लिया है. दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में शेफाली वर्मा की 64 रनों की तूफानी पारी के दम पर भारत ने 149 रनों का स्कोर खड़ा किया. इसके जवाब में बांग्लादेश की महिला टीम (Bangladesh women’s team) 20 ओवरों में 6 विकेट खोकर 109 रन ही बना सकी. हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली टीम ने 40 रनों से मुकाबला जीत लिया।

    शुक्रवार (11 सितंबर) को पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा. ये मैच जीतने वाली टीम 13 सितंबर को भारत के खिलाफ फाइनल खेलेगी. बता दें कि अब तक हुए महिला एशिया कप के हर संस्करण में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया है. 10 में से 7 बार भारतीय महिला टीम एशिया कप की चैंपियन बनी है।

    बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में मिली शानदार जीत में आक्रामक बल्लेबाज शेफाली वर्मा का अहम योगदान रहा. उन्हें तीन जीवनदान मिले और उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाते हुए 40 गेंदों पर 64 रन बना दिए. इस दौरान शेफाली ने 7 चौके और 3 छक्के जड़े. उनकी इस पारी के दम पर भारत ने 149 रनों का स्कोर खड़ा किया।


    गेंदबाजी में चमकी दीप्ति शर्मा

    बल्ले से शेफाली वर्मा ने कोहराम मचाया तो गेंदबाजी में दीप्ति शर्मा का जलवा देखने को मिला. स्टार ऑलराउंडर ने 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट चटकाए. वहीं, नंदिनी शर्मा ने 10 रन देकर 2 विकेट चटकाए. बांग्लादेश की तरफ से शोर्ना अख्तर ने सबसे ज्यादा 22 रन बनाए और वो अंत तक नाबाद रहीं. 40 गेंदों पर 64 रनों की धमाकेदार पारी खेलने वाली स्टार बल्लेबाज शेफाली वर्मा को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया. एशिया कप 2026 में भारतीय महिला टीम की ये लगातार चौथी जीत है. इससे पहले ग्रुप स्टेज में भारत ने थाईलैंड, हांगकांग और पाकिस्तान को बुरी तरह रौंदा था।

    8वीं बार चैंपियन बनना चाहेगी टीम इंडिया
    एशिया कप में भारतीय महिला टीम का दबदबा रहा है. 2004 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट में 10 संस्करण हुए हैं और हर बार भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया है. इसमें से 7 बार टीम इंडिया चैंपियन भी बनी है. अब हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी की नजर 8वें खिताब पर होगी।

  • डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!

    डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!


    नई दिल्ली।
    भारत (India) इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में शनिवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में 11 देशों के शीर्ष नेता जुटेंगे। इस बीच अब ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) की डॉलर (Dollar) पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी वाली योजना पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। दरअसल भारत, चीन और रूस की अगुवाई वाला ब्रिक्स कई सालों से डॉलर का विकल्प तलाशने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह समूह अमेरिका से हमेशा खटकता रहा है। अब आगामी शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने क्रॉस बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इससे अमेरिका की बौखलाहट और बढ़ सकती है।

    दरअसल BRICS बीते कुछ समय से एक ऐसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जा सके। अब ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

    हालांकि भारत किसी ऐसे यूनिफाइड पेमेंट नेटवर्क का समर्थन नहीं कर रहा है जिसे अमेरिकी डॉलर या SWIFT के विकल्प के रूप में देखा जाए। इसकी वजह यह है कि भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स समूह को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े ब्लॉक के रूप में देखा जाए। यही कारण है कि भारत एक साझा ‘ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम’ बनाने के बजाय द्विपक्षीय डिजिटल करेंसी कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है।

    डिजिटल और स्थानीय करेंसी पर जोर
    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का प्रस्ताव है कि ब्रिक्स देश अपनी-अपनी सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ें। इससे मध्यस्थ बैंकों पर निर्भरता कम होगी और लेनदेन की लागत में भारी गिरावट आएगी। आसान भाषा ने कहें तो भारत किसी तीसरे देश की करेंसी यानी डॉलर का उपयोग करने के बजाय सदस्य देशों की अपनी करेंसी में व्यापार करने की बात पर जोर दे रहा है।


    क्या है भारत का प्लान?

    जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा।

    भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है। UPI ने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बनाया है और इसी मॉडल को अन्य देशों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।


    काम कैसे करेगा ब्रिक्स का पेमेंट सिस्टम?

    ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सेटलमेंट साइकिल पर काम करेगा। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के लिए, अगर भारत एक महीने में चीन से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और चीन भारत से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो भारत को सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट भी कम होंगी।

  • मां लक्ष्मी को शुक्रवार के दिन बेहद प्रिय हैं ये चीजें व्रत रखने वाले जान लें पूजा के नियम और किन बातों से बचना माना जाता है जरूरी

    मां लक्ष्मी को शुक्रवार के दिन बेहद प्रिय हैं ये चीजें व्रत रखने वाले जान लें पूजा के नियम और किन बातों से बचना माना जाता है जरूरी


    नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन धन वैभव और सुख समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने और व्रत रखने से घर में सुख शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कई लोग शुक्रवार को नियमित व्रत रखते हैं और पूजा के दौरान विशेष नियमों का पालन करते हैं। मान्यता है कि पूजा के साथ घर की स्वच्छता मन की शुद्धता और अच्छे आचरण का भी विशेष महत्व होता है। ऐसे में शुक्रवार व्रत रखने वालों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर और विशेष रूप से पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए। पूजा के स्थान पर मां लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके दीपक जलाएं। इसके बाद माता को फूल फल और नैवेद्य अर्पित करें। मां लक्ष्मी को कमल का फूल विशेष प्रिय माना जाता है। यदि कमल का फूल उपलब्ध न हो तो श्रद्धा के अनुसार अन्य स्वच्छ और सुगंधित पुष्प भी अर्पित किए जा सकते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार मां लक्ष्मी को लाल और गुलाबी रंग भी प्रिय माने जाते हैं। इसलिए पूजा में इन रंगों के फूल या वस्त्र का प्रयोग किया जा सकता है। माता को खीर मखाने मिश्री या दूध से बनी सात्विक मिठाई का भोग लगाने की परंपरा भी कई स्थानों पर है। भोग हमेशा स्वच्छता और श्रद्धा के साथ तैयार करना चाहिए। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट सकते हैं।

    शुक्रवार व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो तो व्रत के नियमों को लेकर विशेषज्ञ या अपने परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार निर्णय लेना बेहतर है। केवल भूखा रहना ही व्रत का उद्देश्य नहीं माना जाता बल्कि संयम और सकारात्मक आचरण को भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

    शुक्रवार के दिन घर में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता में मां लक्ष्मी का संबंध स्वच्छता और व्यवस्थित वातावरण से जोड़ा जाता है। इसलिए घर में गंदगी नहीं रखनी चाहिए और पूजा स्थल को विशेष रूप से साफ रखना चाहिए। इसके साथ ही किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और अपनी क्षमता के अनुसार अन्न या वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है।

    व्रत के दौरान कुछ बातों से बचना भी जरूरी माना जाता है। किसी के साथ अनावश्यक विवाद करना क्रोध करना या अपशब्द बोलना उचित नहीं माना जाता। घर में नकारात्मक वातावरण बनाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा करते समय मन में श्रद्धा और अच्छे विचार रखना विशेष महत्व रखता है।

    शाम के समय भी मां लक्ष्मी के सामने दीपक जलाकर आरती की जा सकती है। पूजा के बाद माता से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि व्रत और पूजा आस्था से जुड़े विषय हैं और अलग अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में इनके नियमों में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार विधि का पालन करना उचित माना जाता है।

  • पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता

    पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के अलीपुरद्वार (Alipurduar) में आज सुबह हल्के भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology-NCS) के मुताबिक यह भूकंप सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर आया. भूकंप की तीव्रता (Earthquake intensity) रिक्टर पैमाने पर 3.0 मापी गई, जिसे मामूली श्रेणी में रखा जाता है. फिलहाल किसी तरह के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस भूकंप की जानकारी साझा की. एजेंसी के अनुसार भूकंप का केंद्र अक्षांश 26.445 उत्तर और देशांतर 89.560 पूर्व पर स्थित था. भूकंप की गहराई जमीन से करीब 9 किलोमीटर नीचे बताई गई है. भूकंप का केंद्र अलीपुरद्वार जिले में ही रहा, जो पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भूटान तथा असम की सीमा के करीब पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक 3.0 तीव्रता का भूकंप हल्का माना जाता है और इससे आमतौर पर किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती. ऐसे झटके अक्सर सिर्फ हल्की कंपन के रूप में महसूस होते हैं और कई बार लोगों को इनका एहसास भी नहीं होता. कम गहराई वाले भूकंप जमीन के करीब होने की वजह से थोड़ा ज्यादा महसूस हो सकते हैं, भले ही उनकी तीव्रता कम हो. अलीपुरद्वार और आसपास का इलाका हिमालय की तलहटी में आता है, जहां भूगर्भीय हलचल की वजह से समय समय पर हल्के भूकंप आते रहते हैं।

    फिलहाल प्रशासन की तरफ से किसी नुकसान या एहतियाती कदम को लेकर कोई अलग बयान नहीं आया है. मौसम और भूकंप एजेंसियां इलाके की निगरानी करती रहती हैं ताकि किसी भी आगे की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

  • आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक

    आज देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल…. 3 दिन नहीं खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    अगर आपको बैंक (Bank) का कोई जरूरी काम है और वह सिर्फ बैंक ब्रांच जाकर ही हो सकता है, तो उसे टालना भारी पड़ सकता है. आने वाले कुछ दिनों में कई जगह बैंक ब्रांच (Bank branch) बंद रहने वाली हैं. ऐसे में कैश निकालने, जमा करने या दूसरे ब्रांच से जुड़े काम के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकिंग सेवाएं (Banking Services) पूरी तरह बंद रहेंगी. डिजिटल बैंकिंग, ATM और दूसरे ऑनलाइन ऑप्शन आपके काम आ सकते हैं।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल (Nationwide bank strike) का ऐलान किया है. बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगों को लेकर यह हड़ताल बुलाई है. इसका असर खास तौर पर बैंक ब्रांच में होने वाले सामान्य कामकाज पर पड़ सकता है. हड़ताल के बाद 12 सितंबर को शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में सोमवार और मंगलवार को गणेश चतुर्थी के चलते भी बैंक बंद रहेंगे. यानी कुछ जगहों पर बैंक ब्रांच से जुड़े काम के लिए ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है।

    किन मांगों को लेकर हड़ताल?
    बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगों में ‘5 डे बैंकिंग वीक’ लागू करना शामिल है. इसके अलावा परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (PLI Scheme) की समीक्षा की भी मांग की जा रही है. यूनियनों का कहना है कि सरकार की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में पांच दिन कामकाज और शनिवार, रविवार फुल डे वीक ऑफ लागू करने का वादा किया गया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए. इन्हीं मांगों के समर्थन में UFBU ने हड़ताल का फैसला लिया है. यूएफबीयू में एआइबीईए, एआइबीओसी, एनसीबीई, एआइबीओए, बीईएफआइ, आइएनबीओसी और आइएनबीईएफ समेत सात बैंक यूनियनें शामिल हैं. ये बैंकिंग वर्कफोर्स के 90 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करती हैं।


    बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी?

    ऐसा नहीं है कि हड़ताल के दौरान बैंकिंग की हर सुविधा बंद हो जाएगी. बैंकों ने जरूरी सेवाएं जारी रखने के लिए इंतजाम किए हैं. लेकिन बैंक ब्रांच में होने वाले कई काम प्रभावित हो सकते हैं. अगर आपका काम ऐसा है जिसके लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, तो उसमें देरी हो सकती है. खास तौर पर कैश जमा करने, कैश निकालने या किसी दूसरे ऑफलाइन काम के लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।


    SBI ने ग्राहकों को क्या कहा?

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने कहा है कि हड़ताल के दौरान ब्रांच और ऑफिस के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं. इसके बावजूद 11 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के कारण बैंकिंग काम प्रभावित हो सकता है. SBI ने ग्राहकों को सलाह दी है कि अगर कोई जरूरी बैंकिंग ट्रांजैक्शन करना है तो उसे डिजिटल या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पूरा करें।


    कैश की जरूरत तो क्या करें?

    अगर आपको कैश की जरूरत है तो बैंक ब्रांच बंद होने की स्थिति में ATM और ADWM (Automated Deposit and Withdrawal Machine) का इस्तेमाल किया जा सकता है. SBI ने ग्राहकों को उपलब्ध बैंकिंग सेवाओं के लिए CSP (Customer Service Point) का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी है. इसके अलावा इंटरनेट बैंकिंग, YONO, मोबाइल बैंकिंग, UPI और दूसरे डिजिटल चैनलों के जरिए कई जरूरी काम किए जा सकते हैं. यानी अगर आपका काम ऑनलाइन हो सकता है तो बैंक ब्रांच खुलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. UPI से पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहने की स्थिति में उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।


    PNB ने जारी की एडवाइजरी

    पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी 11 सितंबर की बैंक हड़ताल को लेकर ग्राहकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. बैंक ने जरूरी ट्रांजैक्शन के लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. PNB के मुताबिक ग्राहक UPI Payments, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ATM और ADWM जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।


    HDFC और ICICI का अपडेट

    HDFC Bank, ICICI Bank और कुछ दूसरे बैंकों की ओर से इस हड़ताल को लेकर फिलहाल कोई अलग बयान सामने नहीं आया है. ऐसे में ग्राहकों को अपने बैंक की तरफ से जारी होने वाले अपडेट पर नजर रखनी चाहिए. अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में है और कोई जरूरी काम ब्रांच जाकर करना है, तो ब्रांच जाने से पहले बैंक की वेबसाइट, ऐप या दूसरे आधिकारिक चैनल पर स्थिति जरूर चेक कर लें।


    अगले कुछ दिन रहेंगे मुश्किल

    11 सितंबर की हड़ताल के बाद 12 सितंबर शनिवार और 13 सितंबर रविवार है. इसके बाद कुछ राज्यों में 14 और 15 सितंबर को गणेश चतुर्थी के चलते बैंक हॉलिडे रह सकता है. हालांकि, छुट्टी की स्थिति राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है. इसलिए अगर आपको कैश जमा करना है, कैश निकालना है या ऐसा कोई काम करना है जो सिर्फ बैंक ब्रांच में हो सकता है, तो इसके लिए अगले कुछ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है।

  • 17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम

    17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसके तहत प्रदेशभर में अलग अलग स्तर पर सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की रूपरेखा साझा की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सेवा गतिविधियों के जरिए समाज के अलग अलग वर्गों तक पहुंचना है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यकाल में देश तथा मध्य प्रदेश में हुए बदलावों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

    अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को शाम 7 बजे से होगी। इस दिन प्रदेश के करीब 18 हजार बूथों पर लाभार्थियों के घरों में आशीर्वाद का दीप जलाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले प्रमुख स्थानों पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास है कि इस कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को मजबूत किया जाए और सरकार की योजनाओं से जुड़े लोगों तक संगठन की पहुंच बढ़ाई जाए।

    अभियान के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों में मेरे सपनों का भारत कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए चित्रकला ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। विकसित भारत की संकल्पना को लेकर स्कूल स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें विद्यार्थियों को भविष्य के भारत को लेकर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा नमो सेवा अनकही कहानी नाम से भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यों पर आधारित 10 से 15 मिनट की नाट्य प्रस्तुतियां तैयार की जाएंगी। इनका मंचन चौक चौराहों और विभिन्न संस्थानों में किया जाएगा। अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।

    महिलाओं और बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए आंगन मिलन कार्यक्रम भी अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। प्रदेश की 97 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ियों में तीन दिन तक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का सम्मान किया जाएगा। बच्चों और माताओं के साथ पोषण स्वास्थ्य तथा महिलाओं से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की जाएगी। इसके जरिए सरकार की योजनाओं और समाज के अंतिम वर्ग के बीच संवाद को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

    भाजपा प्रदेश के करीब 11 हजार 400 शक्ति केंद्रों पर सेवा की कहानी कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में छोटी झांकियों और प्रस्तुतियों के जरिए देश में हुए बदलावों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के साथ केंद्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल में हुए बदलावों को भी इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के सामने रखा जाएगा।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान शासन और समाज के मिलकर काम करने की भावना पर आधारित है। पार्टी का फोकस सेवा गतिविधियों के साथ सरकार की योजनाओं और उनके प्रभाव को जनता तक पहुंचाने पर रहेगा। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में बूथ से लेकर आंगनवाड़ी और शक्ति केंद्र तक अलग अलग स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर के दौरान मध्य प्रदेश में भाजपा का यह अभियान संगठनात्मक गतिविधियों के साथ व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में भी नजर आएगा।

  • एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी

    एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले की जांच अब भोपाल तक पहुंच गई है। STF की जांच में गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ का पता भी सामने आया है। दावा है कि इसी एक पते का इस्तेमाल 40 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने के लिए किया गया। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर एक ही पते पर रहने वाले अलग अलग लोगों के नाम से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट के आवेदन कैसे आगे बढ़े और सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।

     टीम ने मामले की पड़ताल के लिए अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंचकर वहां मौजूद भंते कश्यप आनंद से बातचीत की। भंते के मुताबिक उन्हें मठ के पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनके आने के बाद अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी दूसरी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।

    भंते कश्यप आनंद ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मठ के पते से कितने लोगों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पुलिस को पते का सत्यापन करना चाहिए था। हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वह भोजन के लिए मठ से बाहर चले जाते हैं इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।

    यही बात अब STF की जांच को और गंभीर बना रही है। अगर जांच एजेंसी के मुताबिक एक ही मठ के पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट बने हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन आवेदनों में दिए गए दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों की पहचान और उनके वास्तविक निवास की पुष्टि कैसे की गई। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मठ का पता पासपोर्ट आवेदनों में किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।

    इस पूरे मामले की शुरुआत डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से सामने आए संदिग्ध पासपोर्ट से हुई थी। जांच आगे बढ़ी तो मध्य प्रदेश के अलग अलग स्थानों के पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के मुताबिक इनमें 22 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। जांच में फर्जी आधार कार्ड वोटर आईडी निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    STF ने मामले में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कनेक्शन असम समेत दूसरे राज्यों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। STF अब इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मठ के एक पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में यह असामान्य स्थिति पकड़ में क्यों नहीं आई। अब STF पासपोर्ट आवेदन से लेकर दस्तावेज तैयार होने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि मठ का पता किसने इस्तेमाल किया दस्तावेज कहां तैयार हुए और इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है।