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  • NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया

    NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया


    नई दिल्ली ।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जिन ओएमआर शीट्स को अभ्यर्थियों की वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताकर साझा किया जा रहा है, वे एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज पाया गया है और घोषित परीक्षा परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं मिली है।

    एनटीए के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि उनके परीक्षा परिणाम गलत घोषित किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की और रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं घोषित परिणामों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

    एजेंसी ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका उसके सुरक्षित रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इन उत्तर-पत्रिकाओं पर सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी और अभिभावकों का विवरण, अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा परीक्षा कक्ष के निरीक्षकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। यही प्रमाणित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं रिस्पॉन्स-की चैलेंज अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थीं और पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थीं।

    एनटीए ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में कई प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। कुछ मामलों में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ दिए गए, कहीं नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों में निरीक्षकों के प्रमाणित हस्ताक्षरों और अन्य विवरणों में भी फेरबदल किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता और इनका उद्देश्य अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों को भ्रमित करना है।

    एजेंसी ने अवनीश श्रीवास्तव से जुड़े वायरल दावों पर भी विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। एनटीए के अनुसार उसके रिकॉर्ड में सुरक्षित वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही नाम, अभिभावकों का विवरण, हस्ताक्षर और अन्य सभी आवश्यक विवरण दर्ज हैं। जबकि सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज में अलग नाम और अभिभावकों की जानकारी दिखाई गई है, जो नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाती। इसी प्रकार प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह से जुड़े मामलों की भी जांच की गई, जिनमें घोषित परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

    एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी फर्जी, जाली या डिजिटल रूप से परिवर्तित ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रसार या उपयोग सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    एजेंसी ने सभी अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री पर भरोसा न करें। यदि किसी अभ्यर्थी को अपने परिणाम या ओएमआर उत्तर-पत्रिका को लेकर वास्तविक शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करे। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड, उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप हैं तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

  • सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका

    सतना टाइगर शिकार केस में बड़ा मोड़, फरार मुख्य आरोपी की मौत; वन विभाग की जांच को बड़ा झटका


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले में सामने आए चर्चित बाघ शिकार मामले की जांच को बड़ा झटका लगा है। करंट लगाकर बाघ का शिकार करने और उसके नाखून तथा केनाइन निकालने के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी मुन्ना कोल की गिरफ्तारी से पहले ही मौत हो गई। वन विभाग को उम्मीद थी कि उसकी गिरफ्तारी के बाद बाघ के लापता 14 नाखूनों और अन्य वन्यजीव अंगों की बरामदगी हो सकेगी लेकिन उसकी मौत के साथ ही जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायब नाखूनों का पता लगाना और यह जानना है कि आखिर उन्हें कहां और किसके पास पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार मझगवां वन परिक्षेत्र में करीब ढाई महीने पहले शिकारियों ने जंगल में बिजली का करंट बिछाकर बाघ का शिकार किया था। बाघ की मौत के बाद आरोपियों ने उसके शव से नाखून और केनाइन निकाल लिए तथा सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को गड्ढा खोदकर जंगल में दफना दिया। इस सनसनीखेज घटना की भनक वन विभाग को लगभग दो महीने बाद लगी। इसके बाद तीन जुलाई को मुखबिर की सूचना पर विभाग ने जेसीबी की मदद से शव बाहर निकलवाया। जांच में पुष्टि हुई कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

    पूरे मामले की जांच के दौरान वन विभाग ने 11 आरोपियों की पहचान की थी। इनमें से 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया जबकि मुख्य आरोपी मुन्ना कोल लगातार फरार था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने बार-बार यही बताया कि बाघ के नाखूनों और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास थी। ऐसे में विभाग उसकी गिरफ्तारी को इस मामले की सबसे अहम कड़ी मान रहा था।

    जांच में यह भी सामने आया कि बाघ की मौत के बाद मुन्ना कोल ने उसके चारों पैर काटकर अलग-अलग स्थानों पर जमीन में दबा दिए थे। वहीं गिरोह के अन्य दो आरोपी सत्यम और शुभम ने बाघ के केनाइन निकाल लिए थे। बाद में जब अन्य साथियों ने नाखून मांगे तो मुन्ना ने दावा किया कि जमीन में दबे पैर किसी जंगली जानवर ने खोदकर निकाल लिए जिसके कारण केवल चार नाखून ही बरामद हो सके। इसी वजह से अब तक बाघ के 14 नाखूनों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार घटना उजागर होने के बाद से मुन्ना कोल गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अलग-अलग स्थानों पर इलाज कराता रहा। विभाग उसकी तलाश में जुटा था लेकिन 18 जुलाई को उसकी मौत हो गई। इससे अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सिरा समाप्त हो गया है और वन्यजीव तस्करी के संभावित नेटवर्क तक पहुंचना भी कठिन हो गया है।

    मझगवां रेंजर रंजन सिंह परिहार ने मुख्य आरोपी की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों ने भी पूछताछ में नाखूनों की जानकारी केवल मुन्ना कोल के पास होने की बात कही थी। वन विभाग अब उपलब्ध साक्ष्यों और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गायब नाखून कहीं वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क तक तो नहीं पहुंचा दिए गए।

  • एनआरआई और एफसीएनआर-बी जमा से बैंकों को मिलेगा सहारा, रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान

    एनआरआई और एफसीएनआर-बी जमा से बैंकों को मिलेगा सहारा, रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मजबूत डिपॉजिट ग्रोथ का अनुमान

    नई दिल्ली । देश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026-27 सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई गई है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) से आने वाले निवेश और एफसीएनआर-बी जमा में बढ़ोतरी के कारण बैंकों की डिपॉजिट वृद्धि दर लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमा राशि में सुधार के साथ-साथ ऋण वितरण की रफ्तार भी मजबूत बनी रहेगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली की स्थिति और अधिक संतुलित हो सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीएनआर-बी जमा योजनाओं के माध्यम से अब तक लगभग 13 से 14 अरब डॉलर की राशि बैंकिंग प्रणाली में आई है। इस पूंजी प्रवाह ने चालू वित्त वर्ष के दौरान बैंकों के जमा आधार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है तो आगामी वित्त वर्ष में भी बैंकिंग क्षेत्र को पर्याप्त वित्तीय मजबूती मिलेगी और जमा संग्रहण में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि वित्त वर्ष 2023 से जो रुझान देखने को मिल रहा है, उसके अनुसार क्रेडिट ग्रोथ अभी भी डिपॉजिट ग्रोथ से अधिक बनी हुई है। जून के अंत तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कुल जमा में 13.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे क्रेडिट और डिपॉजिट के बीच का अंतर बढ़कर 5.3 प्रतिशत अंक तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर अस्थायी नहीं बल्कि महामारी के बाद बैंकिंग व्यवहार और वित्तीय प्राथमिकताओं में आए संरचनात्मक बदलाव का परिणाम है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़े महानगरों में पारंपरिक जमा बाजार अब काफी हद तक संतृप्त हो चुके हैं। ऐसे में बैंक अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाकर जमा आधार मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में परिवारों की आय में वृद्धि, महिलाओं को केंद्र में रखकर संचालित कल्याणकारी योजनाएं और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार जमा वृद्धि के प्रमुख कारण बताए गए हैं। इससे भविष्य में ग्रामीण और छोटे शहरों की भूमिका बैंकिंग क्षेत्र में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

    दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान बैंक जमा से हटकर म्यूचुअल फंड, इक्विटी और अन्य बाजार आधारित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इसके कारण पारंपरिक बैंक जमा में घरेलू बचत का हिस्सा धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके बावजूद एनआरआई जमा और अन्य संस्थागत स्रोत बैंकिंग प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण सहारा बने हुए हैं।

    रिपोर्ट में ऋण वितरण के बदलते स्वरूप का भी उल्लेख किया गया है। बिना गारंटी वाले व्यक्तिगत ऋणों पर नियामकीय सख्ती के बाद बैंक अब उद्योग, बुनियादी ढांचा, कार्यशील पूंजी और स्वर्ण आभूषण के बदले दिए जाने वाले ऋण जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इससे ऋण पोर्टफोलियो में विविधता बढ़ी है और जोखिम प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियां बैंकिंग क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत पूंजी आधार, पर्याप्त कैपिटल एडिक्वेसी और कम गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। खपत में बढ़ोतरी और पूंजीगत निवेश के समर्थन से आने वाले समय में भी क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है, जबकि बैंक बैलेंस शीट अनुशासन बनाए रखते हुए वित्तीय स्थिरता को और मजबूत कर सकते हैं।

  • छत का कांच तोड़कर घर में घुसे बदमाश, सराफा कारोबारी के यहां लाखों की चोरी; पुलिस जांच में जुटी

    छत का कांच तोड़कर घर में घुसे बदमाश, सराफा कारोबारी के यहां लाखों की चोरी; पुलिस जांच में जुटी


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना शहर में चोरों ने एक सराफा कारोबारी के सूने मकान को निशाना बनाकर करीब 50 लाख रुपए की बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। परिवार के कुछ घंटों के लिए बाहर जाते ही बदमाश घर में घुस गए और सोने-चांदी के जेवरों के साथ नकदी भी समेटकर फरार हो गए। घटना का पता तब चला जब परिवार रात में वापस लौटा। घर के अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। कमरों का सामान बिखरा पड़ा था और अलमारियों के ताले टूटे हुए थे। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

    यह वारदात सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के राज होम्स गली स्थित आस्था कुटी में रहने वाले 31 वर्षीय विपुल जैन के घर हुई। विपुल जैन का परिवार शहर के पावर हाउस चौक पर एचबी ज्वेलर्स के नाम से सराफा कारोबार संचालित करता है। रविवार दोपहर करीब तीन बजे पूरा परिवार उचेहरा के इचौल घूमने के लिए घर से निकला था। रात करीब साढ़े नौ बजे जब वे वापस लौटे तो मुख्य कमरों का सामान अस्त-व्यस्त मिला और अलमारियां खुली हुई थीं।

    विपुल जैन ने बताया कि सबसे पहले उनकी मां के कमरे की अलमारी खुली मिली। उसमें रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी गायब थे। इसके बाद अपने और बड़े भाई के कमरों की जांच की गई तो वहां भी अलमारियों के ताले टूटे मिले और कीमती जेवर तथा नकदी चोरी हो चुकी थी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार चोर करीब 50 लाख रुपए मूल्य का सामान लेकर फरार हुए हैं।

    मौके की जांच में सामने आया कि बदमाश छत के रास्ते घर में दाखिल हुए थे। घर की छत पर बने दरवाजे का कांच तोड़कर उन्होंने अंदर प्रवेश किया और फिर एक-एक कमरे की अलमारियां खंगाल डालीं। इससे साफ है कि चोरों ने पूरी वारदात सुनियोजित तरीके से अंजाम दी और उन्हें यह जानकारी थी कि घर में उस समय कोई मौजूद नहीं है।

    घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    शहर में हुई इस बड़ी चोरी ने स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल

    एक घंटे की बारिश में डूबा बैकुंठपुर, दर्जनों दुकानों में घुसा पानी; नगर परिषद की तैयारियों की खुली पोल


    रीवा । रीवा जिले के बैकुंठपुर नगर में सोमवार सुबह हुई करीब एक घंटे की तेज बारिश ने नगर परिषद की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी। बारिश का दौर ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन इतनी ही देर में नगर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। सबसे अधिक प्रभावित वार्ड क्रमांक 10 रहा जहां केपी तिहारी के पास स्थित करीब एक दर्जन दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। दुकानों में पानी भरने से व्यापारियों को अपना सामान सुरक्षित रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी जबकि कई स्थानों पर बारिश रुकने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहा।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर ज्वेलर्स बर्तन जनरल स्टोर और रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर देखने को मिला। दुकानदारों ने जल्दबाजी में सामान ऊंची जगहों पर रखा ताकि नुकसान कम हो सके। अचानक हुए जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हुई और कारोबार पर असर पड़ा। स्थानीय लोगों को सड़क पर जमा पानी के बीच आवाजाही करने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बैकुंठपुर में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान यही हालात बनते हैं लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद नियमित रूप से नालियों की सफाई नहीं कराती जिसके कारण उनमें कचरा जमा रहता है और बारिश का पानी आसानी से नहीं निकल पाता। परिणामस्वरूप सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और पानी दुकानों तथा घरों तक पहुंच जाता है।

    वार्डवासियों का कहना है कि स्वच्छता और नालियों की सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि अभी मानसून की शुरुआत ही हुई है और यदि समय रहते जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। लगातार होने वाली बारिश से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ दैनिक जीवन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

    स्थानीय निवासी केपी तिहारी ने बताया कि महज एक घंटे की बारिश में ही उनकी सहित आसपास की कई दुकानों में पानी भर गया। उन्होंने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर परिषद से शिकायत की जा चुकी है लेकिन नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण हर वर्ष यही स्थिति बन जाती है। वहीं निवासी राजेश गुप्ता ने बताया कि वार्ड की कई नालियां लंबे समय से जाम हैं जिससे पानी की निकासी बाधित होती है और बारिश का पानी सीधे घरों तथा दुकानों में पहुंच जाता है।

    दूसरी ओर नगर परिषद का कहना है कि तेज बारिश के कारण कुछ स्थानों पर अस्थायी जलभराव हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक जहां भी नालियों में रुकावट की सूचना मिली है वहां सफाई दल भेजकर तत्काल सफाई कराई जा रही है। परिषद का दावा है कि पूरे बारिश के मौसम में जल निकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार सफाई अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि हर मानसून में उन्हें इसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव

    विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव


    मंदसौर । मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में सावन माह को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। भगवान पशुपतिनाथ की पारंपरिक राजसी शाही सवारी इस वर्ष 24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां काली आरती मंडल और मंदिर समिति ने शुरू कर दी हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। शहर के प्रमुख मार्ग भगवान पशुपतिनाथ के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान होंगे।

    भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 1996 से लगातार चली आ रही इस परंपरा का श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान का राजसी स्वरूप सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करता है। रास्ते भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते हैं और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक संस्थाएं जगह-जगह मंच बनाकर आरती और स्वागत कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

    आयोजन समिति के अनुसार सावन माह के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक भगवान पशुपतिनाथ का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और विशेष अभिषेक किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर परिसर में पूरे सावन माह तक भक्ति और आस्था का विशेष वातावरण बना रहेगा।

    शाही सवारी से एक दिन पहले 23 अगस्त को भव्य वाहन रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से श्रद्धालुओं को शाही सवारी में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा और पूरे शहर में धार्मिक उत्सव का माहौल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 24 अगस्त को भगवान पशुपतिनाथ की राजसी शाही सवारी निर्धारित मार्गों से होकर निकलेगी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए प्रशासन भी व्यापक तैयारियां करेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन माह के धार्मिक आयोजनों का समापन भी विशेष तरीके से किया जाएगा। 6 सितंबर को भगवान पशुपतिनाथ को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित कर भव्य छप्पन भोग महोत्सव आयोजित होगा। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रसादी वितरण भी किया जाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर छप्पन भोग का प्रसाद ग्रहण करेंगे।

    मंदिर समिति का कहना है कि सभी धार्मिक आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखते हुए आयोजनों में शामिल हों और धार्मिक गरिमा का पालन करें। सावन के इस पावन अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी एक बार फिर शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर होने जा रही है।

  • हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियों और लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सोमवार को ओमान के तट के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक व्यावसायिक जहाज में आग लगने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर आशंकाओं को और बढ़ा दिया।

    हर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में जहाज में आग लगने की घटना के बाद विभिन्न देशों ने हालात पर नजर तेज कर दी है। फिलहाल आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के भीतर अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी कार्रवाई लगातार कई दिनों से जारी है और इसमें केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व वाले ढांचों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों, सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक हितों के खिलाफ किया जा सकता है।

    संघर्ष के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक निर्माणाधीन परियोजना भी हमलों की चपेट में आ गई। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित दारखोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना की निर्माण साइट पर हवाई हमला किया गया। हालांकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में थी और वहां किसी प्रकार की परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद इस घटना ने परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    सैन्य टकराव का असर अमेरिकी सैनिकों पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं में एक अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हुई है। बताया गया कि यह घटना इराक में एक ड्रोन अभियान के दौरान नियंत्रित विस्फोट के समय हुई। इससे पहले भी संघर्ष के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे अभियान की गंभीरता और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।

    अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य प्रतिक्रिया तेज कर दी है। जॉर्डन, कुवैत और आसपास के क्षेत्रों की ओर मिसाइलों तथा ड्रोन से हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत में ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला होने से वहां आवश्यक सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र के देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहरा सकता है। लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई, समुद्री सुरक्षा पर मंडराता खतरा और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौती का रूप ले सकता है।

  • शुजालपुर में किसान की संदिग्ध आत्महत्या, मानसिक तनाव की आशंका; शव ले जाने को भी झेलनी पड़ी परेशानी

    शुजालपुर में किसान की संदिग्ध आत्महत्या, मानसिक तनाव की आशंका; शव ले जाने को भी झेलनी पड़ी परेशानी


    शुजालपुर । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है जहां एक किसान की खेत पर कीटनाशक पीने से मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद के बाद किसान घर से खेत गया था और वहीं उसने जहरीला पदार्थ पी लिया। कुछ घंटे बाद परिजन जब खेत पहुंचे तो वह अचेत अवस्था में मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है जबकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

    यह घटना शुजालपुर सिटी थाना क्षेत्र के ग्राम भ्राम ताजपुर गौरी की है। मृतक की पहचान 45 वर्षीय मांगीलाल पिता रेवाराम मालवीय के रूप में हुई है। वह खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। परिजनों के अनुसार रविवार सुबह करीब 11 बजे मांगीलाल रोज की तरह घर से खेत के लिए निकले थे। दोपहर बाद जब काफी देर तक वह वापस नहीं लौटे तो उनके भाई रमेश उन्हें देखने खेत पहुंचे। वहां मांगीलाल अचेत अवस्था में पड़े मिले।

    परिजन उन्हें तत्काल शुजालपुर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    परिवार के सदस्यों ने बताया कि घर में कुछ समय से छोटे-मोटे पारिवारिक विवाद चल रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि मानसिक तनाव के कारण मांगीलाल ने खेत पर पहुंचकर कीटनाशक पी लिया। हालांकि पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने और सभी पहलुओं की पड़ताल के बाद ही की जाएगी।

    घटना के बाद एक और समस्या सामने आई जिसने परिजनों की पीड़ा और बढ़ा दी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर पालिका का शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार शव वाहन में डीजल खत्म होने और तकनीकी खराबी के कारण उसका उपयोग नहीं किया जा सका। मजबूरन परिजनों को निजी वाहन की व्यवस्था कर किसान का शव गांव ले जाना पड़ा। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने भी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी आवश्यक सेवाएं हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए ताकि शोकग्रस्त परिवारों को अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

    शुजालपुर सिटी थाना के प्रधान आरक्षक निहाल सिंह ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शुजालपुर स्टेशन पर यात्री पर चाकू से हमला कर लूट, सात दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

    शुजालपुर स्टेशन पर यात्री पर चाकू से हमला कर लूट, सात दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली


    शुजालपुर । मध्य प्रदेश के शुजालपुर रेलवे स्टेशन पर हुई लूट और चाकूबाजी की घटना ने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वारदात को हुए सात दिन बीत चुके हैं लेकिन रेलवे पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। घायल यात्री का अस्पताल में उपचार जारी है जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश का दावा कर रही है।

    जानकारी के अनुसार घटना 13 जुलाई की रात करीब तीन बजे की है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के नगरिया निवासी केशव सविता गोरखपुर उज्जैन ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहे थे। ट्रेन जब शुजालपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर रुकी तो वे चने खरीदने के लिए नीचे उतरे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे दो अज्ञात बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया।

    बदमाशों ने केशव पर चाकू से वार किया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमला करने के बाद दोनों आरोपी उनका पर्स और बैग लेकर मौके से फरार हो गए। अचानक हुई इस वारदात से स्टेशन पर अफरा तफरी का माहौल बन गया। घायल यात्री को तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान बदमाशों द्वारा फेंका गया पर्स और आधार कार्ड बरामद कर लिया गया जिसे बाद में पीड़ित को लौटा दिया गया। हालांकि बैग और अन्य सामान के साथ फरार हुए आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

    घटना के सात दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से यात्रियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यात्रियों का कहना है कि देर रात स्टेशन पर पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी नहीं होने का फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं।

    इधर स्टेशन पर एक और समस्या भी सामने आई है। यात्रियों ने शिकायत की है कि कुछ किन्नर जबरन पैसे मांगते हैं और कई बार ऑनलाइन भुगतान करने का दबाव भी बनाते हैं। इस संबंध में काजी एस रहमान ने शिकायत पुस्तिका में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्टेशन परिसर में ऐसी गतिविधियों पर भी सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए ताकि यात्रियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

    रेलवे पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। वहीं यह घटना एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत की ओर इशारा कर रही है।

  • शुजालपुर के जटाशंकर महादेव मंदिर में शुरू हुआ प्रसादम काउंटर अब देश विदेश तक ऑनलाइन पहुंचेगा बाबा का प्रसाद

    शुजालपुर के जटाशंकर महादेव मंदिर में शुरू हुआ प्रसादम काउंटर अब देश विदेश तक ऑनलाइन पहुंचेगा बाबा का प्रसाद


    शुजालपुर । शुजालपुर के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल श्री जटाशंकर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधा की शुरुआत की गई है। मंदिर परिसर में सोमवार को प्रसादम काउंटर का शुभारंभ किया गया जहां अब भक्त भगवान को अर्पित शुद्ध देशी घी और ड्रायफ्रूट से बने प्रसाद को सशुल्क प्राप्त कर सकेंगे। खास बात यह है कि अब देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से बाबा का प्रसाद अपने घर तक मंगवा सकेंगे। इस पहल से मंदिर की धार्मिक परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

    प्रसादम काउंटर पर सांची के शुद्ध देशी घी और ड्रायफ्रूट से तैयार बेसन के लड्डू उपलब्ध कराए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इन्हें दो पैक में रखा गया है। 100 ग्राम का पैकेट 40 रुपए और 200 ग्राम का पैकेट 80 रुपए में उपलब्ध होगा। प्रतिदिन प्रातः और संध्याकालीन आरती के दौरान भगवान को भोग लगाने के बाद यही प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित और विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जाएगा जिससे भक्तों को मंदिर का पवित्र प्रसाद सहजता से मिल सके।

    इस व्यवस्था की सबसे विशेष बात यह है कि अब मंदिर आने की आवश्यकता नहीं होगी। देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यम से प्रसाद मंगवा सकेंगे। इससे दूर बैठे भक्त भी बाबा जटाशंकर महादेव की कृपा और आशीर्वाद से जुड़ सकेंगे। प्रसाद की बिक्री से प्राप्त राशि में प्रति किलोग्राम 100 रुपए का अंशदान मंदिर को समर्पित किया जाएगा जिससे मंदिर के विकास और धार्मिक गतिविधियों को भी सहयोग मिलेगा।

    प्रसादम व्यवस्था की शुरुआत शुजालपुर निवासी कृष्णपाल ने की है जो इससे पहले नलखेड़ा स्थित माता बगुलामुखी मंदिर और बोलाई हनुमान मंदिर में भी इस तरह की व्यवस्था का सफल संचालन कर रहे हैं। प्रारंभिक चरण में इस पूरी व्यवस्था का संचालन और खर्च निजी विक्रेता द्वारा वहन किया जाएगा। इससे मंदिर प्रबंधन पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शुभारंभ कार्यक्रम में भगवान जटाशंकर महादेव का विधिवत पूजन कर प्रसाद का भोग लगाया गया जिसके बाद प्रसादम काउंटर का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष बबीता परमार सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को धार्मिक आस्था और आधुनिक सुविधा का सुंदर संगम बताया।

    श्रद्धालुओं ने भी इस नई व्यवस्था का स्वागत किया। पहले ही दिन प्रसादम काउंटर पर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे और केवल दो घंटे के भीतर लगभग एक क्विंटल प्रसाद की बिक्री हो गई। इससे साफ है कि श्रद्धालुओं में इस सुविधा को लेकर उत्साह है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह व्यवस्था मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ साथ देश विदेश में बसे भक्तों के लिए भी आस्था का मजबूत माध्यम बनेगी।