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  • भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर

    भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। भारत में 12-13 सितंबर के बीच ब्रिक्स बैठक होनी है। लगभग सभी देश इसमें शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश के शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण और तीस्ता नदी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। साथ ही बांग्लादेश में चीन के बढ़ते दखल के भी संकेत मिल रहे हैं। भारत अब तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली आने का दो बार न्योता दे चुका है।

    बुधवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उनसे पीएम रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल सुनते ही उन्होंने चुप्पी साध ली और विषय बदलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह वहां अपने देश के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं हैं और उनसे महासभा के अध्यक्ष के रूप में ही सवाल किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई द्विपक्षीय मुद्दा है तो वह विदेश मंत्री के तौर पर उस पर अलग से बात कर सकते हैं।

    भारत का न्योता

    भारत ने रहमान को BIMSTEC शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भी बुलाया है। इसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान शामिल हैं। हालांकि, भारत की तरफ से यह भी कहा जा चुका है कि रहमान के आने की अभी कोई पुष्टि नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी थी।

    इससे पहले जब रहमान प्रधानमंत्री बने, तब भारत ने उन्हें नई दिल्ली आने का न्योता दिया था। हालांकि, उस समय भी उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं हुई थी और ऐसी खबरें सामने आई थीं कि रहमान चीन जाने की तैयारी कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यात्रा उस समय के लिए टाल दी थी। बाद में वह म्यांमार और बीजिंग पहुंचे थे।

    एक ओर बांग्लादेश भारत के सामने अपनी शर्तें रख रहा है, वहीं बैठकों में डीजल सप्लाई बढ़ाने समेत कई तरह की मदद भी मांग रहा है।

    किस मूड में है बांग्लादेश

    अगस्त में बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री को भारत यात्रा की कोई जल्दी नहीं है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय हितों के आधार पर किसी समझौते पर पहुंचा जाता है तो अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह यात्रा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश ने कहा था कि रहमान की यात्रा के लिए भारत को अनुकूल माहौल बनाना होगा।

    क्या शेख हसीना हैं वजह

    साल 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। बाद में जब 2026 में रहमान सरकार ढाका में आई, तो उनके प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई। हाल ही में एक और मंत्री जाहिद उर रहमान ने कहा है कि हसीना को भारत से लेकर आएंगे और उन्हें फांसी दे दी जाएगी। हालांकि, इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को सभी कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रत्यर्पण के मुद्दे पर पहले से तनावपूर्ण रिश्ते तब और खराब हुए, जब हसीना ने भारत में रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बांग्लादेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही इस पर आपत्ति जताई थी और बाद में अपना रुख और सख्त कर लिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।

    क्या चीन है कारण

    जून में तारिक रहमान चीन की यात्रा पर पहुंचे थे और इस दौरान बांग्लादेश की ओर से बीजिंग से निवेश मांगने की खबरें सामने आई थीं। यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय समझौते भी हुए थे। बांग्लादेश ने बीजिंग से तीस्ता नदी के मुद्दे पर मदद मांगी थी। इसके अलावा मोंगला पोर्ट पर SEZ यानी स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए जाने से जुड़ी डील भी चर्चा में रही थी। ढाका के इन कदमों को भारत बारीकी से देख रहा था।

  • राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से

    राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से


    भोपाल।  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सियासी बयानबाजी के साथ नेताओं और सरकारी अमले से जुड़े कई दिलचस्प मामले भी चर्चा में हैं। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक रहा। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पहुंचने के बाद कांग्रेस ने जमकर जश्न मनाया। शहर में राहुल गांधी का बड़ा कटआउट लगाया गया और आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़े बजाए गए। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

    कांग्रेस इस कार्यक्रम को युवाओं से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह तक युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी हो। हालांकि कार्यक्रम को लेकर अभी अनुमति का पेंच बना हुआ है। यही वजह है कि कार्यक्रम आखिर किस स्थान पर होगा इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

    इस बीच भाजपा की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर तंज भी सामने आया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को भाजपा का स्टार प्रचारक बताया। उनका कहना है कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को राजनीतिक फायदा मिलता है। इस बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    उधर आलीराजपुर में मंत्री नागर सिंह चौहान का अलग अंदाज देखने को मिला। स्कूली बच्चों की रैली देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। मंत्री ने बच्चों से यह भी पूछा कि वे उन्हें पहचानते हैं या नहीं। हालांकि बताया गया कि बच्चों में कुछ ही मंत्री को पहचान सके। इस पूरे घटनाक्रम को मंत्री की लोकप्रियता के अनौपचारिक टेस्ट के तौर पर देखा गया।

    सीधी से सामने आया एक वीडियो सरकारी कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में पटवारी नीलेश नामदेव एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा नाला पार करते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि पटवारी गांव में सर्वे के काम से पहुंचे थे। वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है लेकिन अब सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है। घटना ने सरकारी अमले के आम लोगों के प्रति व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।

    इसी बीच सत्ता के गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का हवाला देकर बार बार स्टेट हैंगर पहुंच रहे थे। चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने अपने ओएसडी से इस पर सवाल किया और कहा कि जरूरत होने पर अधिकारी को खुद बुलाया जाएगा। यह संदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि इस तरह की अंदरूनी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का उत्साह भाजपा का तंज मंत्रियों के बदले अंदाज और सरकारी अमले से जुड़े विवादों ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है।

  • टॉक्सिक के खराब रिस्पॉन्स से आहत हुए यश, दोस्त जयदेव मोहन ने बताया फोन पर एक्टर की आवाज में झलका दर्द

    टॉक्सिक के खराब रिस्पॉन्स से आहत हुए यश, दोस्त जयदेव मोहन ने बताया फोन पर एक्टर की आवाज में झलका दर्द


    नई दिल्ली
    । कन्नड़ एक्टर जयदेव मोहन, जो यश के करीबी दोस्त हैं और जिन्होंने ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ की कन्नड़ डबिंग में काम किया था, ने बताया कि फिल्म को खराब रिस्पॉन्स मिलने पर यश ने कैसा रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म रिलीज होने के बाद फोन पर हुई बातचीत के दौरान यश की आवाज में दर्द साफ झलक रहा था।

    ‘प्रजावाणी’ से बात करते हुए एक्टर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उनका योगदान भले ही छोटा था, फिर भी उन्हें इस नेगेटिव रिएक्शन को समझना मुश्किल लग रहा था। उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को फिल्म रिलीज होने के बाद से वे यश से आमने-सामने नहीं मिले हैं, लेकिन फोन पर दो बार बात हुई है।

    यश की आवाज में दिखा दर्द

    जयदेव ने यश की बातें हूबहू दोहराते हुए कहा, ‘यश ने कहा, ‘इसे दिल पर मत लो। जो हो गया, सो हो गया, फिल्म रिलीज हो गई। अब इसे लोगों पर छोड़ देते हैं। यह उनकी पसंद है। हमने पूरी लगन से यह फिल्म बनाई और दर्शकों के सामने पेश की। बस इतना ही। इस बारे में ज्यादा मत सोचो। आगे के काम के लिए तैयार हो जाओ। समझे? जल्द मिलते हैं।’

    यश का जवाब नपा-तुला और प्रोफेशनल था। लेकिन जयदेव ने कहा कि उनके जहन में शब्द नहीं, बल्कि यश की आवाज का लहजा बसा रहा। उन्होंने कहा, ‘लेकिन आप उनकी आवाज में दर्द महसूस कर सकते थे।’

    जयदेव के लिए यह दर्द समझ में आने वाली बात है, क्योंकि वे जानते हैं कि किसी और के देखने से पहले यश कितने लंबे समय तक इस फिल्म से जुड़े रहे। जयदेव ने कहा, ‘मैंने इस कहानी को तब से बनते-बिगड़ते सुना है जब यह सिर्फ एक बीज की तरह थी। मैंने इसे साढ़े चार सालों में कई पड़ावों से गुजरते हुए देखा है, जब तक कि इसकी आखिरी कहानी तैयार नहीं हो गई। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे यश ही थे। उन्हें कितना दुख हुआ होगा।’

    हालात के भावनात्मक बोझ के बावजूद, जयदेव का मानना था कि न तो वे और न ही यश दर्शकों को इस बात के लिए दोषी मानते हैं कि उन्होंने फिल्म को वैसा रिस्पॉन्स नहीं दिया जैसा मेकर्स चाहते थे। उन्होंने कहा, ‘कोई बात नहीं। हमें इसे शालीनता से स्वीकार करना चाहिए। आखिर में, दर्शक ही सबसे अहम होते हैं। अगर उन्हें फिल्म पसंद आती है, तो अच्छी बात है। अगर नहीं, तो नहीं।’

    उन्होंने खास तौर पर उस तर्क को खारिज कर दिया कि दर्शक फिल्म को समझ नहीं पाए। जयदेव ने कहा, ‘हमने एक अच्छी फिल्म बनाई है और दर्शकों को वह समझ नहीं आई – यह हमारी सोच नहीं है। हमने फिल्म उनके लिए बनाई है, अगर उन्हें पसंद आएगी तो वे जरूर देखेंगे। कोई बात नहीं।’

    बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप फिल्म

    इंडस्ट्री ट्रैकर के अनुसार, ‘टॉक्सिक’ ने रिलीज़ के पहले 14 दिनों में दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर लगभग 338 करोड़ रुपये की कमाई की। ओपनिंग वीकेंड के बाद से रोजाना होने वाली कमाई में तेजी से गिरावट आई है और इसमें सुधार के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

  • अरुण ग्रह की वक्री चाल शुरू, मेष, सिंह और कन्या राशि वालों के करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में बनेंगे नए अवसर

    अरुण ग्रह की वक्री चाल शुरू, मेष, सिंह और कन्या राशि वालों के करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में बनेंगे नए अवसर

    नई दिल्ली । अरुण ग्रह यानी यूरेनस 10 सितंबर 2026 को वक्री अवस्था में आ जाएंगे। ज्योतिष में अरुण ग्रह को अचानक बदलाव, नई सोच, तकनीक, रिसर्च और अप्रत्याशित अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इसकी वक्री चाल कुछ राशियों के लिए पुराने कामों को नए तरीके से शुरू करने और करियर में नई दिशा पाने का मौका दे सकती है। यह स्थिति 8 फरवरी 2027 तक रहने की बात कही जा रही है।

    ग्रहों की चाल में होने वाला बदलाव ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अरुण ग्रह की वक्री चाल का असर सभी राशियों पर एक जैसा नहीं माना जाता। कुछ राशियों को नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं, जबकि कुछ लोगों के रुके हुए काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं।

    मेष राशि

    अरुण की वक्री चाल मेष राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से नए रास्ते खोल सकती है। लंबे समय से जिस काम या प्रोजेक्ट में रुकावट आ रही थी, उसमें दोबारा प्रगति देखने को मिल सकती है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या ऐसा काम मिल सकता है, जिसमें उनकी क्षमता खुलकर सामने आए।

    जो लोग नौकरी बदलने का मन बना रहे हैं, उन्हें इस अवधि में अचानक कोई अच्छा विकल्प मिल सकता है। हालांकि केवल आकर्षक प्रस्ताव देखकर तुरंत फैसला करने के बजाय उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच करना बेहतर रहेगा।

    बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय उपयोगी हो सकता है। पुराने क्लाइंट, पुराने संपर्क या पहले अधूरी रह गई कारोबारी योजना दोबारा चर्चा में आ सकती है। किसी नए आइडिया पर लंबे समय से काम करने का विचार है, तो उसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

    सिंह राशि

    सिंह राशि के लोगों के लिए अरुण की वक्री चाल कामकाज और आय के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। नौकरी में कार्यशैली या जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। शुरुआत में यह बदलाव थोड़ा अचानक लग सकता है, लेकिन आगे चलकर इससे फायदा मिलने की संभावना बन सकती है।

    कारोबार करने वाले लोगों को नई तकनीक या नए तरीके से काम करने का लाभ मिल सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन काम, मार्केटिंग या नए बिजनेस आइडिया से जुड़े लोगों के लिए यह समय खास हो सकता है।

    धन के मामले में नए स्रोतों पर विचार करने का मौका मिल सकता है। अगर आमदनी का कोई अतिरिक्त जरिया शुरू करने की योजना लंबे समय से मन में है, तो उस पर गंभीरता से काम किया जा सकता है। हालांकि खर्च और निवेश के मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा।

    कन्या राशि

    कन्या राशि के जातकों के लिए अरुण की वक्री चाल आर्थिक और भाग्य से जुड़े मामलों में बदलाव का संकेत दे सकती है। इस दौरान विदेश से जुड़े काम, उच्च शिक्षा, यात्रा या नए लोगों से संपर्क के जरिए अवसर मिलने की संभावना जताई जाती है।

    नौकरी करने वालों के लिए यह समय नई जिम्मेदारी या किसी नए प्रोजेक्ट से जुड़ने का हो सकता है। लंबे समय से किसी बेहतर अवसर की तलाश कर रहे लोगों के सामने अचानक कोई ऐसा प्रस्ताव आ सकता है, जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी।

    आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। निवेश या पुराने आर्थिक फैसलों की समीक्षा करना फायदेमंद रहेगा। हालांकि किसी भी निवेश में केवल ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर फैसला लेने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

    अरुण की वक्री चाल के दौरान अचानक बदलाव की स्थिति बन सकती है। इसलिए नौकरी बदलने, बड़ा निवेश करने, बिजनेस पार्टनर बदलने या किसी पुराने समझौते को खत्म करने जैसे फैसलों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सामने आए अवसरों का अच्छी तरह आकलन करने के बाद ही कदम उठाना बेहतर रहेगा।

  • पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक

    पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी चयन मंडल ने पुलिस आरक्षक के 7500 पदों पर भर्ती के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 22 सितंबर से शुरू होगी और अभ्यर्थी 6 अक्टूबर की रात 12 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस भर्ती में सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना नहीं दी जाएगी। आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को प्रदेश के 55 जिलों में अपनी पसंद की यूनिट चुननी होगी और नियुक्ति मिलने के बाद उसी यूनिट में कम से कम पांच साल की सेवा पूरी करनी होगी।

    कर्मचारी चयन मंडल के मुताबिक अभ्यर्थी को आवेदन करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वह सामान्य ड्यूटी के आरक्षक पद के लिए आवेदन कर रहा है या विशेष सशस्त्र बल यानी एसएएफ के आरक्षक पद के लिए। भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को शासकीय रेल पुलिस की भोपाल इंदौर और जबलपुर इकाइयों में भी नियुक्ति दी जा सकती है। इस तरह भर्ती में प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में पुलिस बल को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों का आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है तो अभ्यर्थियों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपना कलर फोटो हस्ताक्षर और हाथ से लिखा हुआ एक पैराग्राफ स्कैन करके अपलोड करना होगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि पोलेराइड फोटो स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    जन्मतिथि के प्रमाण के लिए अभ्यर्थी को आठवीं दसवीं या बारहवीं की अंकसूची प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र देना होगा। एनसीसी या अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर मिलने वाले बोनस अंकों का लाभ लेने के लिए संबंधित दस्तावेज भी आवेदन के दौरान प्रस्तुत करने होंगे।

    आरक्षक भर्ती में विशेष सशस्त्र बल के लिए कुल 700 पद रखे गए हैं। वहीं एसएएफ को छोड़कर सामान्य ड्यूटी के लिए 6800 पद निर्धारित किए गए हैं। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 7500 पदों पर नियुक्तियां होंगी। भर्ती में आरक्षण के नियम भी निर्धारित किए गए हैं जिसके अनुसार विभिन्न वर्गों के लिए तय प्रावधानों के आधार पर पदों का वितरण किया जाएगा।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सामान्य अभ्यर्थियों के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्था से दसवीं हायर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा रखी गई है। चयन के बाद उम्मीदवारों को तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि से गुजरना होगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को 19500 रुपये से लेकर 62000 रुपये तक का वेतनमान मिलेगा। भर्ती नियमों में दो से अधिक बच्चों को लेकर भी विशेष शर्त रखी गई है। यदि किसी उम्मीदवार के दो से अधिक बच्चे हैं और उनमें से किसी एक बच्चे का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है तो वह नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि एक बच्चे के बाद एक ही प्रसव में दो या उससे अधिक बच्चे जन्म लेने की स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा।

    इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन से पहले कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी नियम और पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती परीक्षा की आगे की प्रक्रिया मंडल के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी।

  • बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

    बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना अनियमित खानपान नींद की कमी तनाव और शारीरिक गतिविधि का कम होना धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकता है। अच्छी सेहत के लिए किसी एक दिन की मेहनत काफी नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे और लगातार बदलाव जरूरी होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू से दूरी और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल खुद की सेहत संभालने के अहम हिस्से हैं।

    स्वास्थ्य देखभाल की शुरुआत सबसे पहले भोजन से होती है। रोज के खाने में अलग अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है। साबुत अनाज दालें फल सब्जियां और जरूरत के अनुसार प्रोटीन के अच्छे स्रोत भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा नमक चीनी अस्वास्थ्यकर वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। WHO के अनुसार स्वस्थ आहार पर्याप्तता संतुलन संयम और विविधता जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

    इसके साथ शारीरिक गतिविधि को रोज की दिनचर्या में जगह देना बेहद जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम जाए। तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैरना योग करना खेलना या रोजमर्रा के कामों में सक्रिय रहना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। WHO के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर अधिक तीव्र गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। जो लोग लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं उन्हें अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम करने के बजाय धीरे धीरे शुरुआत करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य देखभाल में नींद को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए। देर रात तक मोबाइल चलाना लगातार काम करना और सोने का समय बदलते रहना शरीर की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना भी बेहतर नींद की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है। अगर लंबे समय तक नींद से जुड़ी समस्या बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की सेहत से अलग नहीं है। लगातार तनाव चिंता चिड़चिड़ापन या थकान महसूस होने पर व्यक्ति को अपने काम के बीच आराम और सामाजिक जुड़ाव के लिए समय निकालना चाहिए। परिवार और दोस्तों से बातचीत करना पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खुद की देखभाल का मतलब यह नहीं है कि बीमारी होने पर डॉक्टर की जरूरत नहीं है। WHO भी स्पष्ट करता है कि self care स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों की जगह नहीं लेती बल्कि उनकी देखभाल को बेहतर तरीके से पूरा करती है।

    तंबाकू से दूरी बनाना भी स्वास्थ्य सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इसी तरह शराब के सेवन से बचना या उसे सीमित करना कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारी है उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। WHO की सलाह के मुताबिक जीवनशैली में बदलाव कई बीमारियों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं लेकिन कई स्थितियों में दवा और चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी रहती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि स्वस्थ रहने के लिए किसी बड़े बदलाव का इंतजार न करें। रोज थोड़ी शारीरिक गतिविधि पौष्टिक भोजन पर्याप्त आराम तनाव को संभालने की कोशिश और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा अंतर ला सकती हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझना और लगातार बनी रहने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य की सही देखभाल बीमारी के बाद शुरू नहीं होती बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली की आदतों से पहले ही शुरू हो जाती है।

  • मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई में 20 बिल्लियों की हत्या से सनसनी, क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाली

    मुंबई: के चेंबूर इलाके में करीब 20 बिल्लियों की हत्या और उनके क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुंबई पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि इस घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

    मामला चेंबूर के पंजरापोल इलाके का है। स्थानीय स्तर पर बिल्लियों की देखभाल करने वाली रूबीना पठान ने इन बिल्लियों के क्षत-विक्षत शव देखे। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पशुओं के साथ क्रूरता के इस मामले में PETA India ने भी दखल दिया और स्थानीय कैट केयरगिवर तथा RCF पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर FIR दर्ज कराने में मदद की।

    CCTV फुटेज से खुलेगा राज

    पुलिस के मुताबिक, फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई है। जांच टीम इलाके में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिल्लियों को किसने और किस वजह से निशाना बनाया। इसके अलावा घटनास्थल और आसपास के इलाकों से भी जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

    इस घटना ने पशु प्रेमियों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बिल्लियों की हत्या और उनके शवों का क्षत-विक्षत हालत में मिलना सामान्य घटना नहीं माना जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या सभी घटनाएं एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़ी हैं।

    PETA ने रखा 50 हजार रुपये का इनाम

    मामले में सुराग देने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए PETA India ने भी इनाम की घोषणा की है। संगठन ने ऐसी जानकारी देने वाले व्यक्ति को 50,000 रुपये तक का इनाम देने का ऐलान किया है, जिससे बिल्लियों की हत्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि में मदद मिल सके।

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 325 और पशु क्रूरता रोकथाम कानून की धारा 11 के तहत केस दर्ज किया है। BNS की धारा 325 के तहत किसी जानवर को मारना, जहर देना या उसे गंभीर रूप से घायल करना अपराध है। दोषी साबित होने पर 5 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

  • भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त

    भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त


    भोपाल। भोपाल में अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ लिया है। कजलीखेड़ा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्कॉर्पियो के जरिए बड़ी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखना शुरू किया और उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो का पीछा शुरू कर दिया।

    पुलिस के पीछा करने के दौरान चालक ने वाहन को बचाकर निकालने का प्रयास किया लेकिन कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। जब पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में शराब रखी मिली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन से करीब 40 पेटी शराब बरामद की गई है।

    पुलिस ने शराब के साथ स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है। कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब किस जगह से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके साथ ही शराब के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वाहन चालक से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि स्कॉर्पियो में शराब किसके कहने पर भरी गई थी और इसके पीछे किसी बड़े शराब तस्करी नेटवर्क का हाथ तो नहीं है। पुलिस शराब की कुल मात्रा और उसकी अनुमानित कीमत का भी पता लगा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब वाहन से जुड़े दस्तावेजों और शराब के संबंध में उपलब्ध जानकारी की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बरामद शराब वैध तरीके से खरीदी गई थी या इसे अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल कजलीखेड़ा पुलिस ने स्कॉर्पियो और उसमें मिली शराब को जब्त कर लिया है। चालक से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बड़ी मात्रा में शराब एक वाहन के जरिए ले जाई जा रही थी। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

  • बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    बाबा नीम करौली के पैतृक घर पर विवाद, पोतियों ने लगाए अवैध कब्जे के आरोप; जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली महाराज के फिरोजाबाद स्थित अकबरपुर गांव के पैतृक घर को लेकर विवाद बढ़ गया है। उनकी पोतियों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत देकर एक ट्रस्ट पर संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अरविंद कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में टूंडला उपजिलाधिकारी दिव्या सिंह और जिला पर्यटन अधिकारी विशाल श्रीवास्तव को भी शामिल किया गया है।

    विवाद अकबरपुर गांव में स्थित मकान नंबर 154 और आसपास की संरचनाओं से जुड़ा है। यही स्थान संत के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। वर्तमान में इस स्थल को पर्यटक आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां संत का ध्यान कक्ष, भोजन क्षेत्र, अतिथि क्वार्टर और शयनकक्ष जैसी संरचनाएं मौजूद हैं।

    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, विवाद 24 अगस्त को हुए एक पारिवारिक कार्यक्रम के बाद सामने आया। आरोप है कि संत के दिवंगत बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियों को घर के कमरों में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई। यह मकान एक डुप्लेक्स है और करीब 4000 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले भूखंड पर बना हुआ है।

    मामले को लेकर छह पोतियों सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, रितु तिवारी और ऋचा रावत ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पैतृक निवास को ट्रस्ट के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की है। भावना रावत के पति मनोज रावत ने बताया कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जांच समिति को सौंपे जा चुके हैं।

    श्री नीम करौली महाराज ट्रस्ट की अध्यक्ष वर्तमान में संत की बेटी गिरिजा देवी भटेले हैं। उनकी दिवंगत पत्नी रामबेटी पहले ट्रस्ट की अध्यक्ष रह चुकी हैं। शिकायत के बाद अब संपत्ति से जुड़े दावों और दस्तावेजों की जांच प्रशासनिक समिति करेगी।

    हालांकि, परिवार के एक अन्य सदस्य धनंजय शर्मा ने इन आरोपों से दूरी बनाई है। वह संत के दूसरे दिवंगत बेटे अनेक सिंह शर्मा के बेटे हैं। उनका कहना है कि संपत्ति बाबा नीम करौली की इच्छा के अनुसार ट्रस्ट को सौंपी गई थी। उन्होंने परिवार के बीच पैदा हुए विवाद पर चिंता जताते हुए मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की अपील की है।

    वहीं ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता ने किसी भी अवैध कब्जे या ट्रस्ट के भीतर विवाद से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्हें धर्म नारायण शर्मा ने नियुक्त किया था और वह संस्था की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

    पैतृक घर से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बाबा नीम करौली महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ रिलीज होने के बाद चर्चा में है। सात अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने एक महीने के भीतर दुनिया भर में 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है।

    अब पैतृक संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच तीन सदस्यीय समिति करेगी। जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, ट्रस्ट के नियंत्रण और परिवार की ओर से किए गए दावों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद इस विवाद के आगे की दिशा समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

  • MP में पंप संचालकों की बढ़ी मुश्किलें हुईं आसान टैक्स असेसमेंट के लिए नई व्यवस्था लागू 2024-25 के लंबित मामलों को निपटाने का रास्ता साफ

    MP में पंप संचालकों की बढ़ी मुश्किलें हुईं आसान टैक्स असेसमेंट के लिए नई व्यवस्था लागू 2024-25 के लंबित मामलों को निपटाने का रास्ता साफ


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पेट्रोल डीजल और CNG पंप संचालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़े लंबित टैक्स असेसमेंट मामलों को आसान तरीके से निपटाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत पात्र पंप संचालक स्व-घोषणा के आधार पर अपना कर निर्धारण पूरा करा सकेंगे। वाणिज्यिक कर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब संबंधित कारोबारियों को लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002 केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956 मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। इसके लिए पंप संचालकों को निर्धारित फॉर्म में आवेदन करना होगा। आवेदन में दी गई जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विभाग टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी करेगा। सबसे खास बात यह है कि आवेदन जमा होने के बाद यदि 30 दिन के भीतर विभाग की ओर से कोई आपत्ति या सूचना नहीं दी जाती है तो आवेदन स्वत स्वीकार माना जाएगा और असेसमेंट पूरा हो जाएगा।

    इस सुविधा का लाभ हर पंप संचालक को नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। वही पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालक पात्र होंगे जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से पेट्रोल डीजल या CNG की खरीद की हो और उस पर निर्धारित टैक्स तथा उपकर का भुगतान किया गया हो। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में संबंधित कारोबारी के खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कारोबारियों के खिलाफ अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित नोटिस लंबित हैं और उन्होंने उसका निर्धारित तरीके से अनुपालन नहीं किया है उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा करने वाले पंप संचालक भी इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

    आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज देना भी अनिवार्य होगा। पंप संचालकों को कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। जिन कारोबारियों का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से अधिक है उन्हें CA की ऑडिट रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यदि किसी कारोबारी ने केंद्रीय बिक्री कर के तहत छूट या रियायती दर का लाभ लिया है तो उसे फॉर्म C फॉर्म F और फॉर्म E जैसे मूल दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे।

    टैक्स विभाग की ओर से आवेदन की जांच के दौरान अगर किसी तरह की कमी या गलती सामने आती है तो कारोबारी को तुरंत आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा। अधिकारी लिखित नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति को सुनवाई और कमी दूर करने का मौका देंगे। निर्धारित समय में कमी को ठीक कर दिया जाता है तो आवेदन स्वीकार किया जा सकेगा। वहीं सुधार नहीं करने या सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने पर आवेदन खारिज भी किया जा सकता है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़े पात्र लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है। स्व-घोषणा और 30 दिन की तय समयसीमा से कारोबारियों को प्रक्रिया में राहत मिलेगी। हालांकि टैक्स चोरी से जुड़े मामलों और नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले कारोबारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था से पेट्रोल डीजल और CNG कारोबारियों के लंबित असेसमेंट मामलों को जल्द सुलझाने में मदद मिलने की उम्मीद है।