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  • हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ 14 पारियों में पूरे किए 1000 टेस्ट रन, लेकिन सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड रहा बरकरार

    नई दिल्ली । हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट में अर्धशतक लगाकर खास उपलब्धि हासिल की। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 14 पारियों में 1000 रन पूरे कर लिए। हालांकि, इस मामले में वह पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए।

    इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेला जा रहा है। पाकिस्तान की पहली पारी 133 रनों पर सिमटने के बाद इंग्लैंड की शुरुआत भी मुश्किल रही। मेजबान टीम ने 39 रन के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिए थे।

    ऐसे समय में हैरी ब्रूक ने पारी को संभाला और टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एमिलियो गे के साथ शतकीय साझेदारी की, जिससे इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ पहली पारी में बढ़त हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद ब्रूक ने अपना अर्धशतक पूरा किया और इसी के साथ पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में 1000 रन भी पूरे कर लिए।

    हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ यह आंकड़ा नौ टेस्ट की 14 पारियों में हासिल किया है। पाकिस्तान के खिलाफ उनका बल्लेबाजी औसत 79.46 का है। इस उपलब्धि के बावजूद वह सबसे कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम नहीं कर सके।

    वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन सिर्फ 11 पारियों में पूरे किए थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने भी पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन बनाने के लिए 11 पारियां ही ली थीं। इस तरह सहवाग और वॉर्नर इस सूची में संयुक्त रूप से शीर्ष पर बने हुए हैं।

    ब्रूक ने हालांकि कुछ दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग से कम पारियों में पाकिस्तान के खिलाफ 1000 टेस्ट रन पूरे किए। दोनों बल्लेबाजों ने यह उपलब्धि 15-15 पारियों में हासिल की थी।

    इस सूची में उस्मान ख्वाजा भी 14 पारियों के साथ ब्रूक के बराबर हैं। वहीं सहवाग और वॉर्नर 11 पारियों के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद ख्वाजा और ब्रूक का नंबर आता है, जबकि संगकारा और पोंटिंग ने 15 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था।

    तीसरे टेस्ट के पहले दिन पाकिस्तान की टीम 133 रन पर ऑलआउट हो गई। इसके जवाब में इंग्लैंड ने दिन का खेल समाप्त होने तक चार विकेट खोकर 156 रन बना लिए थे। इस तरह मेजबान टीम को पहली पारी में 23 रन की बढ़त हासिल हो गई।

    हैरी ब्रूक अभी भी क्रीज पर मौजूद हैं, जिससे इंग्लैंड को अपनी बढ़त को और मजबूत करने की उम्मीद है। टीम की कोशिश दूसरे दिन अपने स्कोर को 300 रन के पार पहुंचाने की होगी। इससे पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ सकता है।

    तीन मैचों की सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले इंग्लैंड ने जीते हैं। ऐसे में टीम पहले ही सीरीज में अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है। अब उसकी नजर तीसरा टेस्ट जीतकर सीरीज में पाकिस्तान का क्लीन स्वीप करने पर है। ब्रूक की पारी इस मुकाबले में इंग्लैंड के लिए अहम साबित हो रही है।

  • MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस

    MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस


    भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने के इंतजार के बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित लोकभवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

    जस्टिस कोगजे की नियुक्ति के साथ ही अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थायी नेतृत्व मिल गया है। पिछले करीब तीन महीने से जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में लंच का आयोजन किया गया। शुक्रवार से जस्टिस कोगजे हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से अपना पदभार संभालेंगे।

    जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का लंबा न्यायिक और कानूनी अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने 1990 में केमिस्ट्री से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी साल उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की। करीब 33 वर्षों के कानूनी सफर में उन्होंने वकील से लेकर गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश और अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक का सफर तय किया है।

    जस्टिस कोगजे को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में पैरवी की। वर्ष 2001 में वे असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर रहे। इसके बाद 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम किया। वर्ष 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल बने। वर्ष 2011 में उन्हें स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने गोधरा दंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा।

    6 अप्रैल 2016 को जस्टिस कोगजे को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। करीब दो साल बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस और लेबर विवाद तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। कई मामलों में उनके फैसलों ने खासा ध्यान खींचा।

    वर्ष 2024 में पत्नी की हत्या के आरोपी पति को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अदालत ने आरोपी के जांच को गुमराह करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया था। वर्ष 2022 के कस्टोडियल डेथ मामले में भी जमानत से इनकार किया गया। इसके अलावा जल निकायों की सुरक्षा और अंधाधुंध लैंड फिलिंग को लेकर भी उनकी पीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। औद्योगिक विवादों और वर्कमैन के अधिकारों से जुड़े मामलों में भी उनके कई अहम फैसले सामने आए।

    जस्टिस कोगजे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्हें करीब चार वर्ष दस महीने का कार्यकाल मिलेगा। अब उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक प्रशासन से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। शपथ ग्रहण समारोह में हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश और बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद रहे।

  • MP के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी हर महीने मिलेंगे 7500 रुपए NEET JEE और CLAT की तैयारी का खर्च भी उठाएगी सरकार

    MP के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी हर महीने मिलेंगे 7500 रुपए NEET JEE और CLAT की तैयारी का खर्च भी उठाएगी सरकार


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए एक बड़ी पहल शुरू करने जा रही है। सरकार की नई योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 7500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देना है जो पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी तैयारी करने में परेशानी का सामना करते हैं। भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना के नाम से प्रस्तावित इस योजना का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजने की तैयारी है। सरकार का प्रस्ताव है कि योजना इसी साल से लागू की जाए।

    इस योजना के तहत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई के साथ NEET JEE और CLAT जैसी महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी। 7500 रुपए की मासिक सहायता का इस्तेमाल कोचिंग फीस आने जाने के खर्च किताबें हॉस्टल ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक मदद मिलने से श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के मुताबिक शुरुआत में योजना को प्रयोग के तौर पर लागू किया जाएगा। पहले चरण में 600 विद्यार्थियों को इसका लाभ देने की तैयारी है। इनमें 500 विद्यार्थी भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल से जबकि 100 विद्यार्थी श्रमिक कल्याण मंडल के माध्यम से लिए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि इसके लिए 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर योजना का शुरुआती प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में विद्यार्थियों की संख्या और चयन के लिए निर्धारित कटऑफ बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

    योजना का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें भी तय की गई हैं। बच्चे के माता या पिता का निर्माण श्रमिक के तौर पर संबंधित मंडल में पंजीकरण होना जरूरी होगा। पंजीयन निर्धारित अवधि से होना चाहिए और श्रमिक के कम से कम 90 दिन काम करने का रिकॉर्ड भी आवश्यक होगा। विद्यार्थी को 10वीं कक्षा में कम से कम 80 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। चयन केवल आवेदन करने से नहीं होगा बल्कि पात्र विद्यार्थियों की मेरिट तैयार की जाएगी और इसी आधार पर अधिकतम 500 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। योजना में छात्राओं के लिए 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान भी बताया गया है।

    चयन के बाद योजना का लाभ जारी रखने के लिए भी विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। 12वीं कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा। इसके अलावा आगे की पढ़ाई के दौरान हर साल निर्धारित समय पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यानी सरकार की आर्थिक सहायता लगातार पाने के लिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में प्रदर्शन बनाए रखना होगा।

    इस योजना को लेकर सरकार का जोर केवल स्कॉलरशिप देने तक सीमित नहीं है बल्कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने पर है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करता है और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करता है तो वह योजना के लिए आवेदन कर सकेगा। हालांकि अंतिम चयन मेरिट के आधार पर ही होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर वकील और अन्य प्रतिष्ठित करियर की दिशा में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

  • न सूरज की रोशनी, न बारिश का असर, चीन में बंद कोयला खदानों के अंदर खेती की नई तकनीक पर हो रहा प्रयोग

    न सूरज की रोशनी, न बारिश का असर, चीन में बंद कोयला खदानों के अंदर खेती की नई तकनीक पर हो रहा प्रयोग

    नई दिल्ली । खेती के लिए आमतौर पर खुली जमीन, धूप, पानी और सही मौसम की जरूरत होती है. लेकिन क्लाइमेट चेंज के दौर में यही चीजें किसानों के लिए चुनौती बनती जा रही हैं. कहीं सूखा फसल खराब कर देता है तो कहीं ज्यादा बारिश पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है.

    चीन के वैज्ञानिक अब इसी समस्या का एक अलग रास्ता खोज रहे हैं. उनका आइडिया है कि खेती को जमीन के ऊपर करने के बजाय जमीन के नीचे ले जाया जाए. इसके लिए बंद हो चुकी कोयला खदानों का इस्तेमाल किया जा सकता है. खदानों में मौजूद बड़ी खाली जगह को एक तरह के हाईटेक फार्म में बदला जाएगा, जहां फसल के लिए जरूरी रोशनी, पानी, तापमान और हवा को इंसान अपने हिसाब से कंट्रोल कर सकेगा. हालांकि, इसका मकसद सिर्फ अनाज उगाना नहीं, बल्कि भविष्य की स्पेस कॉलोनियों के लिए खेती की टेक्नोलॉजी तैयार करना भी है.

    अंधेरी खदान में आएगी नकली धूप

    जमीन के कई मीटर नीचे सूरज की रोशनी पहुंचना संभव नहीं है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पौधे बढ़ेंगे कैसे? वैज्ञानिकों के प्लान में इसका जवाब आर्टिफिशियल लाइटिंग है. इसका मतलब खदान के अंदर ऐसी लाइट लगाई जाएगी, जो पौधों को ग्रो करने के लिए जरूरी रोशनी देगी. इस काम में खदानों का पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर भी मदद कर सकता है. कई खदानों में पहले से पावर सप्लाई और वेंटिलेशन सिस्टम मौजूद हैं. इन्हें खेती की जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की संभावना देखी जा रही है. इसका मतलब बाहर चाहे रात हो या दिन, बारिश हो या तेज धूप, जमीन के नीचे मौजूद पौधों के लिए एक अलग ही मौसम तैयार किया जा सकेगा.

    गर्मी के लिए धरती की एनर्जी

    जमीन के अंदर एक और फायदा है. यहां का तापमान खुले मैदान की तरह लगातार तेजी से ऊपर-नीचे नहीं होता. वैज्ञानिक इस स्थिर वातावरण का फायदा उठाने की योजना बना रहे हैं. इसके लिए जियोथर्मल एनर्जी यानी धरती के अंदर मौजूद गर्मी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे अंडरग्राउंड फार्म में पौधों के लिए जरूरी तापमान बनाए रखने में मदद मिलेगी. साथ ही पारंपरिक फ्यूल पर निर्भरता कम करने और ग्रीनहाउस गैसों के एमिशन को घटाने की कोशिश भी की जा सकती है. इसका मतलब जिस खदान को कभी कोयला निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, वही जगह आगे चलकर क्लीन एनर्जी और खेती के एक्सपेरिमेंट का सेंटर बन सकती है.

    जहरीले पानी को भी बनाया जाएगा यूजफुल

    कोयला खदानों में सिर्फ खाली जगह ही नहीं होती. वहां जमा पानी भी एक बड़ी समस्या बन सकता है. कई बार इस पानी में ऐसे केमिकल और हैवी मेटल्स पाए जा सकते हैं, जिन्हें सीधे खेती में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वैज्ञानिक इस समस्या के लिए पानी को साफ करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं. मेम्ब्रेन सेपरेशन जैसी टेक्नोलॉजी के जरिए पानी से नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को अलग करने की कोशिश होगी. इसके बाद साफ किए गए पानी का इस्तेमाल कुछ फसलों की सिंचाई में किया जा सकता है. चाय और रेपसीड जैसी फसलों का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, कौन सी फसल जमीन के नीचे इस सिस्टम में सबसे अच्छी तरह उग सकती है, यह भी रिसर्च का हिस्सा होगा.

    असली मकसद खेती से कहीं बड़ा

    पहली नजर में लग सकता है कि चीन का यह पूरा प्लान सिर्फ जमीन की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है. लेकिन वैज्ञानिकों की दिलचस्पी इससे कहीं आगे की है. दरअसल, अंडरग्राउंड फार्म को एक तरह की एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग लैब के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है. यहां वैज्ञानिक देखेंगे कि बिना प्राकृतिक वातावरण के पौधों को किस तरह जिंदा रखा जा सकता है. रोशनी कितनी होनी चाहिए, पानी किस तरह इस्तेमाल किया जाए, हवा और तापमान कैसे कंट्रोल हों और कार्बन का पौधों पर क्या असर पड़े, इन सभी चीजों पर एक्सपेरिमेंट किया जा सकता है.

    धरती के नीचे की खेती जाएगी अंतरिक्ष तक

    इस रिसर्च का सबसे दिलचस्प हिस्सा स्पेस मिशन से जुड़ा है. भविष्य में अगर इंसान चांद या मंगल जैसे दूसरे ग्रहों पर लंबे समय तक रहना चाहता है तो वहां खुले खेत बनाना बेहद मुश्किल होगा. वहां न धरती जैसा वातावरण है, न आसानी से उपलब्ध पानी और न ही खेती के लिए सामान्य मौसम. ऐसे में जमीन के नीचे या पूरी तरह कंट्रोल किए गए एनवायरनमेंट में खाना उगाने की टेक्नोलॉजी बेहद काम आ सकती है. चीन के वैज्ञानिकों का यह एक्सपेरिमेंट इसी दिशा में एक टेस्टिंग ग्राउंड की तरह काम कर सकता है. आज जिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बंद पड़ी कोयला खदान में किया जाएगा, कल उसी के किसी बेहतर वर्जन से दूसरे ग्रहों पर पौधे उगाने की कोशिश की जा सकती है.

    हजारों बंद खदानें बन सकती हैं नया फार्म

    चीन में पिछले कई सालों में बड़ी संख्या में कोयला खदानें बंद हुई हैं. एक दशक में करीब बारह हजार खदानें बंद की जा चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है. ऐसे में देश के पास जमीन के नीचे ऐसे कई बड़े इलाके मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल नए तरीके से किया जा सकता है. वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में बंद खदानों में मौजूद विशाल खाली जगह अंडरग्राउंड एग्रीकल्चर के लिए इस्तेमाल हो सकती है. हालांकि, इसे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले कई सवालों के जवाब तलाशने होंगे.

    आसान नहीं होगी जमीन के नीचे खेती

    अंडरग्राउंड फार्म का आइडिया सुनने में जितना शानदार लगता है, इसे असल में लागू करना उतना ही आसान नहीं होगा. आर्टिफिशियल लाइटिंग के लिए बड़ी मात्रा में बिजली चाहिए. तापमान और हवा को कंट्रोल करने के लिए भी लगातार एनर्जी की जरूरत होगी. इसके अलावा खदानों की सेफ्टी, पानी की क्वालिटी और अंदर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी अहम मुद्दे होंगे. इसलिए फिलहाल इसे बड़े पैमाने की खेती का तैयार मॉडल मानना जल्दबाजी होगी. वैज्ञानिक पहले यह समझना चाहते हैं कि बंद खदानों को किस तरह सुरक्षित और उपयोगी एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर में बदला जा सकता है.

    आज खदान, कल अंतरिक्ष का खेत

    चीन का यह प्रयोग खेती की पारंपरिक सोच को जरूर बदलने वाला है. जिस जगह कभी धरती के अंदर से कोयला निकाला जाता था, वहीं अब पौधों को उगाने की कोशिश की जा रही है. फिलहाल इसका सबसे बड़ा मकसद करोड़ों टन अनाज जमीन के नीचे पैदा करना नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम समझना है जिसमें इंसान प्राकृतिक मौसम पर निर्भर हुए बिना खाना उगा सके. अगर यह प्रयोग सफल होता है तो इसका फायदा सिर्फ चीन की बंद खदानों तक सीमित नहीं रहेगा. क्लाइमेट चेंज से जूझती दुनिया से लेकर भविष्य में चांद और मंगल पर बनने वाली इंसानी बस्तियों तक, जमीन के नीचे खेती की यह टेक्नोलॉजी एक दिन बेहद काम की साबित हो सकती है.

  • रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी के सवालों पर BJP मंत्री ने घेरा कहा सरकार की खामी ढूंढने पर ज्यादा जोर

    रायबरेली की दिशा बैठक में राहुल गांधी के सवालों पर BJP मंत्री ने घेरा कहा सरकार की खामी ढूंढने पर ज्यादा जोर


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक उस समय चर्चा में आ गई जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और बीजेपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच एक योजना को लेकर तीखी बहस होती दिखाई दी। बैठक का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसे खुद राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया है। राहुल गांधी अपने दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर पहुंचे थे और इसी दौरान उन्होंने जिले में आयोजित दिशा की बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में विकास योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों से सवाल किए गए।

    वायरल वीडियो में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को लेकर राहुल गांधी और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच सवाल जवाब होता नजर आ रहा है। बताया गया कि योजना की समीक्षा के दौरान राहुल गांधी ने अधिकारी से पूछा कि इस योजना के तहत क्या काम किया जाता है। इसी दौरान दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी से कहा कि इस योजना की जानकारी उन्हें होनी चाहिए। इसके बाद चर्चा योजना के प्रचार प्रसार के लिए निर्धारित बजट पर पहुंच गई। राहुल गांधी ने प्रचार प्रसार के मद में कितना बजट रखा गया है इसकी जानकारी मांगी। मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का ज्यादा ध्यान सरकार की योजनाओं में कमियां तलाशने पर है जबकि उनका जोर इस बात पर होना चाहिए कि योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

    दिनेश प्रताप सिंह ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिशा की बैठक का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की निगरानी करना तथा उनके क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं को दूर करना है। मंत्री के मुताबिक राहुल गांधी को योजनाओं की जानकारी लेकर उनके प्रभाव और लाभार्थियों तक पहुंच की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि बैठक में राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों का फोकस योजनाओं के बजट और जमीनी स्थिति पर रहा।

    बैठक में राहुल गांधी ने रायबरेली की खराब सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़कों में गड्ढों की तस्वीरें लेकर पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को तस्वीरें दिखाते हुए सवाल किया कि जिन सड़कों का निर्माण कराया गया है उनमें गड्ढे क्यों हैं और उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि कौन सी सड़क किस कार्यदायी संस्था ने बनाई है और उसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने अधिकारियों से सड़कों की स्थिति को लेकर जवाब मांगा।

    बैठक में मौजूद अधिकारियों ने राहुल गांधी के सवालों का जवाब दिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिशासी अभियंता ने कहा कि सड़कों में मौजूद गड्ढों को जल्द ठीक कराया जाएगा। राहुल गांधी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर भी अधिकारियों से जवाब तलब किया। इस दौरान बैठक का माहौल काफी गंभीर नजर आया।

    रायबरेली में हुई इस बैठक के बाद राहुल गांधी बाहर निकले लेकिन उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की और बिना कुछ कहे वहां से चले गए। दूसरी ओर बैठक का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की रायबरेली सक्रियता और स्थानीय विकास के मुद्दों को लेकर उनके सवालों ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। वहीं बीजेपी मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है।

  • 60 साल से धरती को हरा-भरा करने में जुटे हैं झारखंड के ट्री मैन 65 लाख पौधों का रोपण कर कायम की मिसाल

    60 साल से धरती को हरा-भरा करने में जुटे हैं झारखंड के ट्री मैन 65 लाख पौधों का रोपण कर कायम की मिसाल


    झारखंड । झारखंड के पलामू के रहने वाले डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। करीब छह दशक से पेड़ पौधों की रक्षा और नए पौधे लगाने के लिए लगातार काम कर रहे डॉ. कौशल को आज लोग ट्री मैन के नाम से जानते हैं। उनका पर्यावरण प्रेम इस कदर गहरा है कि वह पेड़ों को परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए वनराखी मूवमेंट भी चला रहे हैं। अब तक भारत समेत कई देशों में 65 लाख से अधिक पौधों का निशुल्क वितरण और रोपण कर चुके डॉ. कौशल की कहानी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।

    डॉ. कौशल किशोर जायसवाल के अनुसार पर्यावरण के प्रति उनका जुड़ाव वर्ष 1966 में शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1967 में अपनी 7.72 एकड़ निजी जमीन पर पौधारोपण करते हुए जंगल बचाव और जंगल लगाव अभियान को आगे बढ़ाया। धीरे धीरे यह अभियान उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मिशन बन गया। उन्होंने लोगों को केवल पौधे लगाने के लिए प्रेरित नहीं किया बल्कि लगाए गए पेड़ों की देखभाल और सुरक्षा को भी उतना ही जरूरी बताया। इसी सोच के साथ उन्होंने वनराखी मूवमेंट की शुरुआत की जिसमें पेड़ों को परिवार के सदस्य की तरह मानकर उनकी रक्षा करने का संदेश दिया जाता है।

    उनका अभियान अब झारखंड तक सीमित नहीं है। भारत के 26 राज्यों के 181 जिलों के अलावा नेपाल भूटान म्यांमार सिंगापुर मलेशिया अजरबैजान थाईलैंड इंडोनेशिया जापान और वियतनाम जैसे देशों तक उनका पर्यावरण संदेश पहुंच चुका है। अलग अलग स्थानों पर उन्होंने निशुल्क पौधों का वितरण और रोपण किया है। उनके अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित धरती तैयार करना है।

    डॉ. कौशल के अभियान की एक खास बात पेड़ों के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता है। वह पेड़ों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं बल्कि जीवनदाता मानते हैं। इसी सोच के कारण उन्होंने लाखों पौधों को लगाने के साथ उनकी रक्षा का संदेश भी दिया। उनके अभियान के तहत करीब 30 लाख पेड़ों को राखी बांधने की बात भी सामने आई है। इसके जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि जिस तरह परिवार में भाई की रक्षा का संकल्प लिया जाता है उसी तरह पेड़ों की भी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।

    करीब 58 वर्षों से निशुल्क पौधा वितरण और रोपण का अभियान चलाने वाले डॉ. कौशल को उनके पर्यावरणीय योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें अब तक 65 प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई है। हाल ही में झारखंड के राज्यपाल की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध पर्यावरणविदों के साथ काम किया है और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को लगातार आगे बढ़ाया है।

    डॉ. कौशल का मानना है कि जंगलों की कटाई प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। ऐसे समय में केवल सरकार या संस्थाओं के भरोसे पर्यावरण को सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उनका जीवन इसी विचार का उदाहरण है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार प्रयास करता रहे तो उसका छोटा सा कदम भी बड़े पर्यावरणीय आंदोलन में बदल सकता है। 65 लाख से अधिक पौधों के रोपण और वितरण की उनकी यात्रा आज हजारों लोगों को पेड़ लगाने और उन्हें बचाने की प्रेरणा दे रही है।

  • यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर

    यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर


    नई दिल्ली ।बहुजन समाज पार्टी में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करने के साथ ही संगठन से भी अलग कर दिया है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था। अब इस कार्रवाई के बाद बसपा के भीतर परिवार और संगठन को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

    मायावती ने आकाश आनंद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पार्टी की विचारधारा और हितों से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे थे। मायावती के मुताबिक आकाश आनंद पहले उनके एक्स पोस्ट को लगातार रिपोस्ट किया करते थे लेकिन जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा मामला सामने आया तो उन्होंने मायावती की संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया। बसपा प्रमुख ने इसे पार्टी के प्रति उनके रुख में बदलाव का संकेत माना।

    मायावती ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति डबल माइंड होकर काम करेगा वह बहुजन समाज पार्टी का भला कैसे कर सकता है। उनका कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति को संगठन और बहुजन आंदोलन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने का फैसला लिया है।

    इस पूरे विवाद में आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। मायावती ने कहा कि सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का फैसला सही समय पर नहीं लिया। उनका कहना है कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली होती तो बसपा और बहुजन आंदोलन के साथ आकाश आनंद को भी लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।

    मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें वास्तव में आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन आंदोलन की चिंता होती तो वह काफी पहले राजनीति से किनारा कर लेते। हालांकि अब अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।

    आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद मायावती ने अब अपना ध्यान सीधे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से विरोधियों के राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने की अपील की है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर आगे बढ़ते हुए पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारी में जुटने को कहा है।

    बसपा प्रमुख ने 2027 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य भी कार्यकर्ताओं के सामने रखा है। आकाश आनंद पर हुई कार्रवाई से पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि इस बड़े फैसले का बसपा के संगठन और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई

    मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी दौरान करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क की जद में आया जिसके बाद मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के कुछ हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे हनुमान जी का दैवीय चमत्कार बताया जाने लगा।

    मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

    इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

    अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

  • सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

    सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली । चीन एक बार फिर अपने गोल्ड रिजर्व को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और इसके बावजूद चीन ने सोने की खरीदारी रोकने के बजाय इसे और तेज कर दिया है। अगस्त 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व में 20 टन से ज्यादा सोना जोड़ा है। खास बात यह है कि चीन की यह खरीदारी लगातार 22वें महीने भी जारी रही है। यानी करीब दो साल से ड्रैगन लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ाने में जुटा है।

    चीन के इस कदम को सामान्य निवेश की तरह नहीं देखा जा रहा है क्योंकि सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद उसकी खरीदारी जारी है। ताजा खरीदारी के बाद चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर करीब 2387 टन हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में चीन के गोल्ड रिजर्व में जुलाई के मुकाबले करीब 650000 औंस की बढ़ोतरी हुई है। यह अक्टूबर 2023 के बाद किसी एक महीने में चीन की सबसे बड़ी सोने की खरीदारी बताई गई है। अक्टूबर 2023 में चीन के रिजर्व में करीब 740000 औंस का इजाफा हुआ था।

    चीन की लगातार जारी गोल्ड खरीदारी के पीछे उसकी लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार को ज्यादा मजबूत और संतुलित बनाना चाहता है। इसके लिए वह केवल अमेरिकी डॉलर पर निर्भर रहने के बजाय सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बदलते हालात के बीच सोने को एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है और चीन इसी वजह से अपने रिजर्व में इसकी मात्रा बढ़ाता दिखाई दे रहा है।

    चीन का यह कदम उसकी आर्थिक रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा सकता है। लगातार 22 महीने तक गोल्ड खरीदना बताता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है बल्कि इसके पीछे लंबी अवधि की योजना काम कर रही है। चीन अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है। सोने के बढ़ते भंडार से उसे विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने का मौका मिलता है और किसी एक मुद्रा या संपत्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    चीन की यह खरीदारी साल 2015 के बाद सबसे लंबे गोल्ड खरीदारी अभियान के रूप में भी सामने आई है। 22 महीने से लगातार जारी यह सिलसिला इस बात का संकेत है कि बीजिंग सोने को अपने आर्थिक सुरक्षा कवच के तौर पर देख रहा है। दुनिया में आर्थिक और भू राजनीतिक अनिश्चितता के बीच चीन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में अगर चीन इसी रफ्तार से सोना खरीदता रहा तो उसके गोल्ड रिजर्व में और बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

  • शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला

    शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। वाजेद के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपों की जांच चल रही थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

    साइमा वाजेद ने वर्ष 2024 की शुरुआत में WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक का पद संभाला था। उनका कार्यकाल पांच साल का निर्धारित था। हालांकि, आरोपों और जांच के बीच WHO ने उन्हें पिछले साल बिना वेतन प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया था।

    बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी लगाए थे आरोप

    साइमा वाजेद के खिलाफ बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने मार्च 2025 में उन पर फ्रॉड और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए थे। इसके बाद जुलाई 2025 में WHO ने उन्हें प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया।

    WHO की ओर से लगाए गए आरोपों में चीन की यात्रा से जुड़े खर्च में कथित वित्तीय अनियमितता भी शामिल थी। इसके अलावा संगठन ने उनकी शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, वाजेद ने इन आरोपों को खारिज किया है।

    वकीलों ने WHO को भेजा जवाब

    साइमा वाजेद के वकीलों ने जुलाई 2026 में WHO को पत्र भेजकर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। पत्र में कहा गया था कि उनकी मुवक्किल ने किसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी नहीं की है। वकीलों ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया था।

    जमीन हासिल करने के आरोप पर भी दी सफाई

    साइमा वाजेद पर बांग्लादेश में एक जमीन का प्लॉट कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने का आरोप भी लगाया गया था। इस्तीफे में उन्होंने इस आरोप का भी जवाब दिया।

    वाजेद के मुताबिक, उन्होंने संबंधित जमीन WHO में शामिल होने से पहले हासिल की थी। उनका कहना है कि यह जमीन बांग्लादेश के उस कानून के तहत मिली थी, जो देश के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता शेख मुजीबुर रहमान के परिवारों से जुड़ा था। शेख मुजीबुर रहमान, शेख हसीना के पिता हैं।

    शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ा परिवार पर दबाव

    साइमा वाजेद का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके परिवार से जुड़े लोगों पर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

    हसीना के कई करीबी नेताओं और सहयोगियों पर बांग्लादेश में अलग-अलग मामलों में आरोप लगाए गए हैं। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी शामिल हैं। शेख हसीना देश छोड़ने के बाद भारत में रह रही हैं।

    हालांकि, साइमा वाजेद के खिलाफ लगे आरोपों को उनके द्वारा लगातार खारिज किया गया है। उनके इस्तीफे को शेख हसीना के परिवार पर बढ़ते राजनीतिक और कानूनी दबाव के व्यापक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

    WHO शुरू करेगा नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया

    साइमा वाजेद के इस्तीफे के बाद WHO अब दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा। एक सूत्र के मुताबिक, यह प्रक्रिया अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है।

    WHO का दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय सदस्य देशों में स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों और नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नए क्षेत्रीय निदेशक का चुनाव संगठन के लिए अहम माना जा रहा है।