Blog

  • सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन

    सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया। इस पावन अनुष्ठान के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु शिव भक्ति में भाव विभोर नजर आए।

    पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रथम घंटा बजाकर वैदिक मंत्रों के बीच हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते दिखाई दिए। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

    श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों से सुसज्जित बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा विशेष आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। सनातन परंपरा में यह मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती को विश्वभर के श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं।

    सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में इस दिन आयोजित भस्म आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप मानी जाती है। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भव्य श्रृंगार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था और विश्वास से जुड़ी यह परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • जमीन अधिग्रहण पर बवाल: देवास में किसानों का भोपाल कूच नाकाम, मुआवजे को लेकर सड़क पर आंदोलन

    जमीन अधिग्रहण पर बवाल: देवास में किसानों का भोपाल कूच नाकाम, मुआवजे को लेकर सड़क पर आंदोलन


    देवास । देवास में वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन सोमवार को और तेज हो गया। अपनी कृषि भूमि के बदले बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ भोपाल कूच के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें शिप्रा चौराहे पर ही रोक दिया। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के बाद किसान बरलाई जागीर गांव में सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।

    किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें कानून के अनुसार उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों के अनुसार बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा चाहते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    सोमवार सुबह किसान ट्रैक्टरों के साथ भोपाल की ओर रवाना होने की तैयारी में थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल पहले से ही शिप्रा चौराहे पर तैनात था। जैसे ही किसानों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों और प्रशासन के बीच बहस हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हालांकि, इसके बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और बरलाई जागीर में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन ले रही है, लेकिन उसके बदले उचित मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं कर रही। किसानों का कहना है कि उनकी बहु-फसली सिंचित भूमि ही उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत है और इसके अधिग्रहण से उनका भविष्य प्रभावित होगा।

    प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है और किसानों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास भी जारी है।

    वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना इंदौर और देवास क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस आउटर हाईवे का उद्देश्य भारी वाहनों को शहरों के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे ट्रैफिक का दबाव कम हो सके। साथ ही वर्ष 2028 में उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस परियोजना से इंदौर, देवास, सांवेर और देपालपुर क्षेत्र के करीब 39 गांव प्रभावित होंगे।

    फिलहाल किसानों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है। एक ओर सरकार इस परियोजना को क्षेत्रीय विकास और बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए जरूरी बता रही है, वहीं किसान उचित मुआवजे और अपनी जमीन के अधिकारों को लेकर आंदोलन पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेगी।

  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग

    संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग


    नई दिल्ली ।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।

    संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

    नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड


    इंदौर । नशे के खिलाफ जनजागरण की दिशा में इंदौर ने एक बार फिर देश के सामने मिसाल पेश की है। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के तहत सोमवार को शहर में 8,534 लोगों ने एक साथ मानव श्रृंखला बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ इंदौर पुलिस ने अपना ही पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले नशे के खिलाफ 7,100 लोगों की मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड भी इंदौर पुलिस के नाम दर्ज था। इस बार बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी ने न केवल रिकॉर्ड बनाया, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने का सशक्त संदेश भी दिया।

    इस ऐतिहासिक आयोजन में स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी, खिलाड़ी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और शहर के हजारों नागरिक शामिल हुए। सभी ने हाथों में हाथ डालकर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और नशे के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि युवाओं और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने मौजूद सभी लोगों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके खिलाफ जागरूक करने की शपथ दिलाई। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त इंदौर और नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

    इंदौर पुलिस के अनुसार इस आयोजन में केवल मानव श्रृंखला का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया गया, बल्कि एक साथ इतने बड़े समूह को पुलिस कमिश्नर द्वारा नशामुक्ति की शपथ दिलाने के आधार पर भी दूसरे विश्व रिकॉर्ड का दावा किया गया है। यानी एक ही कार्यक्रम के माध्यम से दो अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसी को सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण भेजे जा रहे हैं।

    ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान पिछले कुछ समय से शहरभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, बस्तियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों तक पहुंचकर युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है। अभियान के दौरान संवाद कार्यक्रम, शपथ समारोह, रैलियां और जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ताकि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।

    इंदौर पहले भी स्वच्छता, जनभागीदारी और सामाजिक अभियानों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब नशामुक्त समाज के संकल्प के साथ शहर ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर किसी उद्देश्य के लिए काम करें तो सकारात्मक बदलाव संभव है।

    पुलिस का कहना है कि अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा और शहर के अधिक से अधिक युवाओं को इससे जोड़ा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ ऐसी सामाजिक चेतना विकसित करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आगे बढ़ सकें। इंदौर का यह प्रयास देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

  • पोस्टल असिस्टेंट हत्याकांड: पति के शव पर सस्पेंस बरकरार, DNA रिपोर्ट करेगी सबसे बड़े राज का खुलासा

    पोस्टल असिस्टेंट हत्याकांड: पति के शव पर सस्पेंस बरकरार, DNA रिपोर्ट करेगी सबसे बड़े राज का खुलासा


    इंदौर । इंदौर की पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी हत्याकांड में एक नया और बेहद रहस्यमयी मोड़ सामने आया है। आरोपी पति अखिलेश सैनी के कथित सिरकटे शव की पहचान को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है। एक ओर पिता और भाई ने शव को अखिलेश का बताते हुए उसकी पहचान कर ली है, वहीं दूसरी ओर उसकी 15 वर्षीय बेटी प्रेक्षा ने बिना सिर के शव को अपने पिता का मानने से साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में पुलिस अब किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय वैज्ञानिक जांच का इंतजार कर रही है। पूरे मामले की सच्चाई अब DNA रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिसके आने में करीब 10 दिन लग सकते हैं।

    मामला 11 जुलाई को हुई पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी की हत्या से जुड़ा है। पत्नी की हत्या के बाद से ही अखिलेश सैनी फरार था। शनिवार रात गंजबासौदा-पवई रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर एक सिरकटा शव मिला। शव की पैंट की जेब से अखिलेश के आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज और तीन कथित सुसाइड नोट बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने परिजनों को बुलाकर पहचान कराई।

    सोमवार सुबह अखिलेश के पिता सीताराम सैनी और भाई चित्रेश सैनी ने शव की पहचान अखिलेश के रूप में की। पिता ने बताया कि बेटे की नाभि में बीमारी के कारण सूजन थी और शरीर पर सफेद दाग थे, जिनके आधार पर उन्होंने उसकी पहचान की। पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया और अंतिम संस्कार भोपाल के टीला जमालपुरा में किए जाने की तैयारी की गई।

    हालांकि कहानी में नया मोड़ तब आया जब अखिलेश की बेटी प्रेक्षा ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया। उसका कहना था कि सिर नहीं होने की स्थिति में वह यह नहीं मान सकती कि यह उसके पिता का शव है। पुलिस ने उसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी भी दी, लेकिन उसने केवल धड़ देखकर पहचान स्वीकार नहीं की। गौरतलब है कि मां की हत्या के बाद से प्रेक्षा लगातार अपने पिता की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग करती रही थी।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि DNA जांच से शव की पहचान तो स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका सही निष्कर्ष तभी निकलेगा जब शव के सभी महत्वपूर्ण अंगों की जांच संभव हो। सिर नहीं मिलने से यह पता लगाना कठिन होगा कि मौत आत्महत्या, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से हुई।

    जांच के दौरान शव के पास से मिले तीन कथित सुसाइड नोट भी पुलिस के लिए अहम सबूत बने हुए हैं। एक नोट पिता के नाम लिखा गया है, जिसमें बच्चों का ध्यान रखने और बेटे प्रायु से मुखाग्नि दिलाने की इच्छा जताई गई है। दूसरा नोट बेटे के नाम और तीसरा पुलिस के नाम बताया जा रहा है, जिसमें वैवाहिक विवाद और कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस इन नोटों की सत्यता और उनमें किए गए दावों की भी जांच कर रही है।

    पुलिस के सामने कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। आखिर पत्नी की हत्या के बाद अखिलेश आठ दिन तक कहां रहा? रेलवे ट्रैक पर मिला शव वास्तव में उसी का है या नहीं? उसकी मौत आत्महत्या है, हादसा है या किसी साजिश का हिस्सा? यही नहीं, पत्नी की हत्या के बाद उसका सामान्य व्यवहार, मोबाइल, एटीएम और स्कूटी छोड़कर गायब होना भी जांच के दायरे में है।

    फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की सबसे अहम कड़ी DNA रिपोर्ट बन गई है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रेलवे ट्रैक पर मिला सिरकटा शव वास्तव में अखिलेश सैनी का है या इस पूरे मामले में अभी कोई और बड़ा रहस्य सामने आना बाकी है।

  • भोपाल में दर्दनाक हादसा, स्कॉर्पियो की चपेट में आने से 3 साल की मासूम की मौत; CCTV में कैद घटना

    भोपाल में दर्दनाक हादसा, स्कॉर्पियो की चपेट में आने से 3 साल की मासूम की मौत; CCTV में कैद घटना


    भोपाल । राजधानी भोपाल के बैरसिया क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। यहां तीन वर्षीय मासूम बच्ची स्कॉर्पियो वाहन की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसकी मौत हो गई। हादसे की पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस ने वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार यह हादसा रविवार दोपहर बैरसिया थाना क्षेत्र के ललरिया गांव में हुआ। मृत बच्ची की पहचान जूना खान (3) के रूप में हुई है। उसके पिता सोहेल खान सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि मां भी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। रविवार की छुट्टी होने के कारण पूरा परिवार बच्ची के ननिहाल आया हुआ था।

    जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब ढाई बजे बच्ची के नाना उसे और परिवार की दो अन्य बच्चियों को पास की दुकान से चॉकलेट और बिस्किट दिलाने लेकर गए थे। दुकान पर खरीदारी के दौरान जूना अचानक बाहर सड़क की ओर निकल गई। इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ी।

    इसी समय कुछ दूरी पर खड़ी स्कॉर्पियो का चालक वाहन स्टार्ट कर आगे बढ़ा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चालक को सड़क पर गिरी बच्ची दिखाई नहीं दी। स्कॉर्पियो का अगला पहिया बच्ची के ऊपर से गुजर गया और वह वाहन के नीचे फंस गई। प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार बच्ची करीब 20 फीट तक वाहन के साथ घिसटती रही। इसके बाद वाहन का पिछला पहिया भी उसके ऊपर से गुजर गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तत्काल बच्ची की मदद के लिए दौड़े।

    हादसे की सूचना मिलते ही बैरसिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पूरे गांव में इस हादसे के बाद शोक का माहौल है।

    डॉक्टरों के अनुसार हादसे में बच्ची के लिवर में गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हुआ था। सिर पर गंभीर चोट लगी थी, जबकि हाथ और पैर में फ्रैक्चर के साथ शरीर के कई अंदरूनी अंग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। चोटें इतनी गंभीर थीं कि उसे बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस ने स्कॉर्पियो चालक की पहचान ललरिया गांव निवासी जाकिर के रूप में की है। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करता है। वहीं छोटे बच्चों पर हर समय निगरानी रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ ही सेकंड की चूक किसी परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है।

  • मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में

    मोबाइल स्क्रॉल करते-करते बढ़ रही कब्ज की गंभीर बीमारी, अब युवा और बच्चे भी चपेट में


    भोपाल । स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी एक छोटी-सी आदत स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। खासकर टॉयलेट में बैठकर लंबे समय तक मोबाइल स्क्रॉल करना अब सिर्फ समय बिताने की आदत नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों की वजह बनता जा रहा है। भोपाल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी के अनुसार लगातार लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और बार-बार जोर लगाने से ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम (ODS) जैसी गंभीर समस्या विकसित हो सकती है। यही वजह है कि अब कब्ज के साथ-साथ पाइल्स, फिशर और रेक्टल प्रोलैप्स जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं।

    डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि हाल ही में उनके पास 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पहुंचे, जो करीब 35 वर्षों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। लगभग 20 साल तक उनका इलाज आईबीएस-सी (IBS-C) मानकर किया जाता रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। जब विशेष जांच और एनोरेक्टल मैनोमेट्री की गई तो पता चला कि असली समस्या ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम थी। बायोफीडबैक थेरेपी के आठ सत्रों के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां उन्हें शौचालय में लगभग एक घंटा लग जाता था, वहीं अब यह समय घटकर करीब पांच मिनट रह गया और कब्ज की दवाओं की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो गई।

    ऐसा ही एक अन्य मामला 40 वर्षीय महिला का सामने आया, जो दस वर्षों से कब्ज से जूझ रही थीं। लगातार जोर लगाने की आदत के कारण उनके मलाशय का हिस्सा बाहर आने लगा। जांच में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी और ODS की पुष्टि हुई। समय पर बायोफीडबैक थेरेपी मिलने से बिना सर्जरी ही उनकी स्थिति में 90 से 95 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मोबाइल फोन नहीं, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने की आदत है। पहले लोग शौचालय में अखबार पढ़ते थे, अब उसकी जगह मोबाइल ने ले ली है। जब व्यक्ति स्क्रीन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर लेता है तो मस्तिष्क और आंत के बीच का प्राकृतिक समन्वय प्रभावित होने लगता है। इससे मलत्याग का सामान्य रिफ्लेक्स कमजोर पड़ता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है।

    डॉ. रघुवंशी के अनुसार पहले कब्ज को मुख्य रूप से 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में कब्ज की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं। उनके क्लीनिकल अनुभव के मुताबिक पिछले दस वर्षों में कब्ज के मरीजों की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कब्ज के हर दस मरीजों में से तीन से चार ऐसे मिलते हैं, जो टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत स्वीकार करते हैं। हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह उनके चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है और इस विषय पर व्यापक भारतीय वैज्ञानिक अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    विशेषज्ञ स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सलाद शामिल करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें और रोज सुबह एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत विकसित करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टॉयलेट में अनावश्यक समय बिताने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

  • कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू

    कल की चिंता नहीं करता' लेकर भोपाल आ रहे स्टैंड-अप स्टार रवि गुप्ता, टिकट बुकिंग शुरू


    भोपाल । भोपाल के लोगों के लिए जुलाई का आखिरी सप्ताह हंसी और मनोरंजन से भरपूर होने वाला है। देश के लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन रवि गुप्ता अपने चर्चित इंडिया टूर ‘कल की चिंता नहीं करता’ के तहत 26 जुलाई को राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं। उनका लाइव कॉमेडी शो शहर के प्रतिष्ठित रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां वे अपने खास ऑब्जर्वेशनल ह्यूमर और दमदार कॉमिक अंदाज से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर करेंगे। शो को लेकर कॉमेडी प्रेमियों में उत्साह देखने को मिल रहा है और टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।

    पिछले कुछ वर्षों में रवि गुप्ता ने भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, पारिवारिक रिश्तों, छोटे शहरों की संस्कृति, कॉर्पोरेट लाइफ, सामाजिक व्यवहार और आम आदमी की परेशानियों को बेहद सहज और मजेदार अंदाज में मंच पर पेश करते हैं। उनकी कॉमेडी में न तो बनावटीपन होता है और न ही अनावश्यक शोर, बल्कि साधारण बातों को असाधारण तरीके से प्रस्तुत करने की उनकी कला ही उन्हें दर्शकों का पसंदीदा बनाती है।

    सोशल मीडिया पर भी रवि गुप्ता की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। उनके स्टैंड-अप वीडियो करोड़ों बार देखे जा चुके हैं और यूट्यूब सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित उनके लाइव शो अक्सर हाउसफुल रहते हैं। अब भोपाल के दर्शकों को भी उन्हें मंच पर लाइव देखने का मौका मिलेगा।

    ‘कल की चिंता नहीं करता’ शो में रवि गुप्ता अपनी नई और चर्चित कॉमेडी प्रस्तुत करेंगे। उनकी शानदार टाइमिंग, सहज संवाद शैली और दर्शकों से जुड़ने का अंदाज हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। युवा वर्ग के साथ-साथ परिवार भी उनकी कॉमेडी का भरपूर आनंद लेते हैं। यही कारण है कि उनके शो में हर आयु वर्ग के दर्शकों की अच्छी-खासी मौजूदगी देखने को मिलती है।

    आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम 26 जुलाई को रविंद्र भवन में आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन के मुख्य प्रायोजक मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी हैं, जबकि सेज ग्रुप और ओरिएंटल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पावर्ड बाय पार्टनर के रूप में जुड़े हुए हैं। शो का आर्टिस्ट मैनेजमेंट ओरियल एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है।

    शो के लिए टिकटों की बुकिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुक माय शो पर शुरू हो चुकी है। आयोजकों का कहना है कि सीटों की संख्या सीमित है और रवि गुप्ता के बढ़ते क्रेज को देखते हुए टिकटें तेजी से बुक हो रही हैं। ऐसे में जो लोग इस लाइव कॉमेडी अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें समय रहते अपनी सीट सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।

    अगर आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ और तनाव से कुछ देर की राहत चाहते हैं, तो 26 जुलाई की शाम रविंद्र भवन में आयोजित यह स्टैंड-अप कॉमेडी शो आपके लिए यादगार अनुभव साबित हो सकता है। हंसी, मनोरंजन और बेहतरीन कॉमिक अंदाज से भरपूर यह शाम भोपाल के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने के लिए तैयार है।