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  • BRICS Summit 2026: फ्लाइंग क्रेमलिन से रोलिंग बंकर तक, पुतिन की सुरक्षा के लिए दिल्ली में अभेद्य किले जैसा इंतजाम

    BRICS Summit 2026: फ्लाइंग क्रेमलिन से रोलिंग बंकर तक, पुतिन की सुरक्षा के लिए दिल्ली में अभेद्य किले जैसा इंतजाम


    नई दिल्ली।
    भारत की अध्यक्षता में इस सप्ताहांत होने वाली ब्रिक्स शिखर बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई देशों के शीर्ष नेता नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन से पहले राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों में मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 के जी-20 सम्मेलन के बाद दिल्ली में इतनी व्यापक सुरक्षा तैयारियां पहली बार देखने को मिल रही हैं।

    विदेशी नेताओं के साथ उनकी विशेष सुरक्षा व्यवस्था भी राजधानी पहुंचेगी। इनमें अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस विमान, बख्तरबंद वाहन, निजी खाद्य सुरक्षा इंतजाम और अन्य विशेष उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं। खासतौर पर रूसी राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा के लिए रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सुरक्षा घेरा तैयार कर रही हैं।

    छतों पर AI तकनीक से निगरानी, ड्रोन पर भी नजर

    सुरक्षा व्यवस्था के तहत ऊंची इमारतों की छतों पर स्नाइपर तैनात किए जाने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर AI-गाइडेड स्नाइपर सिस्टम और जेस्चर-रिकग्निशन कैमरों के जरिए निगरानी की जाएगी। ये कैमरे लोगों की गतिविधियों में असामान्य बदलाव पहचानने में मदद करेंगे।

    आपात स्थिति के लिए कमांडो को हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे उतारने की व्यवस्था भी तैयार रखी जाएगी। इसके अलावा सड़कों पर चौबीसों घंटे एंटी-ग्राफिटी टीमें तैनात रहेंगी।

    सुरक्षा एजेंसियों के लिए बिना पायलट वाले हवाई वाहन यानी UAV और ड्रोन भी प्रमुख खतरा माने जा रहे हैं। इसके लिए कई स्थानों पर ड्रोन के सिग्नल को जाम करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करने वाले सिस्टम लगाए जाने की बात सामने आई है।

    संभावित विरोध-प्रदर्शन पर भी खुफिया निगरानी

    रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कुछ विदेशी नेताओं को निशाना बनाकर आयोजन स्थलों के आसपास अचानक विरोध-प्रदर्शन किए जा सकते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर भड़काऊ संदेश स्प्रे-पेंट किए जाने की आशंका को देखते हुए एंटी-ग्राफिटी टीमें लगातार निगरानी करेंगी।

    हर महत्वपूर्ण अतिथि, उनके होटल और काफिले के लिए अलग-अलग कोड नेम या कॉल साइन तय किए गए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षा और आवाजाही के दौरान सूचनाओं के आदान-प्रदान को व्यवस्थित रखना है।

    पुतिन के लिए ‘रोलिंग बंकर’

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जमीनी आवाजाही के लिए रूस से उनकी विशेष ऑरस सेनेट बख्तरबंद कार लाई गई है। इसे सुरक्षा कारणों से ‘रोलिंग बंकर’ के नाम से भी जाना जाता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह वाहन स्नाइपर फायर, बारूदी सुरंग और रासायनिक हमले जैसे खतरों से सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें रन-फ्लैट टायर और आपातकालीन ऑक्सीजन सिस्टम जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं।

    ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ से सफर करते हैं रूसी राष्ट्रपति

    पुतिन के हवाई सफर के लिए विशेष रूप से तैयार Ilyushin IL-96-300PU विमान का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे अक्सर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है। विमान में सुरक्षित कमांड सिस्टम और मिसाइल डिफेंस से जुड़े सुरक्षा उपाय मौजूद होने की जानकारी दी जाती है।

    रिपोर्ट के अनुसार, विमान की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए जरूरत पड़ने पर डिकॉय विमानों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    पुतिन के खाने की भी होगी कड़ी जांच

    रूसी प्रतिनिधिमंडल अपनी सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। पुतिन के साथ निजी शेफ और खाद्य पदार्थों की जांच के लिए पोर्टेबल टेस्टिंग लैब जैसी व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई है।

    सुरक्षा व्यवस्था में जैविक कचरे को सुरक्षित तरीके से एकत्र करने और उसके निस्तारण तक के इंतजाम शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ होटलों में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए डमी डिग्निटरीज यानी नेताओं के हमशक्ल या प्रतिनिधियों की तैनाती की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।

    होटलों को अलग-अलग सुरक्षा जोन में बांटा गया

    विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के ठहरने के लिए दिल्ली के मध्य क्षेत्र, एयरोसिटी और गुरुग्राम के चुनिंदा होटलों को अलग-अलग सिक्योरिटी जोन में बांटा गया है।

    प्रत्येक होटल की सुरक्षा के लिए डीसीपी स्तर के अधिकारी को वेन्यू कमांडर बनाया गया है, जबकि बड़े क्षेत्रों की निगरानी स्पेशल कमिश्नर स्तर के अधिकारी करेंगे।

    हर होटल में दो कमरों को ऑपरेशनल कमांड पोस्ट में बदलने की तैयारी है। इनमें से एक दिल्ली पुलिस के केंद्रीय C4i कमांड सिस्टम से जुड़ा रहेगा, जबकि दूसरे का इस्तेमाल आपात स्थिति में बैकअप कंट्रोल रूम के तौर पर किया जाएगा।

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ भारतीय एजेंसियों की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था राजधानी में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार रहेगी।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव; 'हर वयस्क नागरिक को देंगे 5,000 डॉलर'

    डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव; 'हर वयस्क नागरिक को देंगे 5,000 डॉलर'


    वाशिंगटन)।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो बयानों ने अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में जीत हासिल करती है तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर यानी करीब 4.2 लाख रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। दूसरी ओर, उन्होंने ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण बढ़ी तेल कीमतों को लेकर कहा है कि इनके मध्यावधि चुनाव तक कम होने की संभावना कम है।

    ‘आर्थिक सफलता का नागरिकों को मिलेगा फायदा’

    ट्रंप ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों पर नियंत्रण हासिल करने की स्थिति में अमेरिकी नागरिकों को 5,000 डॉलर का डिविडेंड दिया जाएगा। उन्होंने इसे अमेरिका की कथित आर्थिक सफलता से जोड़ते हुए इसकी तुलना किसी सफल कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को नकद राशि बांटने से की।

    ट्रंप के इस बयान को आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक वादे के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस योजना को लागू करने के लिए इसकी वित्तीय व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया समेत कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    सेना के जवानों को 1,776 डॉलर देने का किया जिक्र

    ट्रंप ने पिछले साल अमेरिकी सैन्यकर्मियों को दी गई राशि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सैनिकों को 1,776 डॉलर दिए थे। हालांकि, मूल राशि 1,775 डॉलर थी और ट्रंप के मुताबिक उन्होंने इसमें खुद एक डॉलर जोड़कर इसे 1,776 डॉलर किया था।

    उन्होंने बताया कि 1776 का आंकड़ा अमेरिका की स्वतंत्रता के वर्ष से जुड़ा हुआ है। इसलिए उन्होंने राशि को 1,776 डॉलर करने का फैसला किया।

    ईरान युद्ध से तेल की कीमतों में उछाल

    इसी बीच ट्रंप ने ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बीच अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड की कीमत तीन प्रतिशत से अधिक बढ़कर जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच हमले तेज होने के बीच बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।

    ‘चुनाव के बाद गिरने लगेगी तेल की कीमत’

    डलास में रिपब्लिकन मिडटर्म कन्वेंशन के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतें नीचे जाना शुरू कर देंगी। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि कीमतों में गिरावट के लिए मिडटर्म चुनाव के बाद थोड़ा और समय लग सकता है।

    ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद ईरान पीछे हट जाएगा। उनका कहना था कि ईरान ज्यादा समय तक मौजूदा स्थिति में टिक नहीं पाएगा।

    सातवें महीने में पहुंचा युद्ध

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब सातवें महीने में पहुंच गया है। खास बात यह है कि युद्ध की शुरुआत में ट्रंप ने इसे कुछ ही सप्ताह में समाप्त होने की उम्मीद जताई थी। अब तेल कीमतों और संघर्ष की अवधि को लेकर उनके ताजा बयानों ने अमेरिकी राजनीति के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी ध्यान केंद्रित कर दिया है।

  • शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स

    शमशान घाट जाने की थी तैयारी, तभी आया फोन- अंतिम संस्कार रोक दीजिए; एंबुलेंस के झटके के बाद जिंदा मिला शख्स


    ऋषिकेश।
    उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे परिवार को अचानक हैरान कर दिया। जिस व्यक्ति को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय परिजनों ने एंबुलेंस में अचानक सांसें चलने की बात कही। इसके बाद अंतिम संस्कार की तैयारियां रोक दी गईं और व्यक्ति को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    यह मामला ऋषिकेश के गीता नगर गली नंबर-5 निवासी साईं राम से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद वे अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए थे। मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा के लिए वाहन भी बुक करा लिया गया था।

    श्मशान ले जाते समय एंबुलेंस का पहिया गड्ढे में गया

    बताया गया कि साईं राम के शव को एंबुलेंस से अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। जब वाहन श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंचा, तभी सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया चला गया।

    परिजनों के अनुसार, वाहन को जोरदार झटका लगा। इसी दौरान साईं राम के शरीर में हलचल हुई और उन्होंने आंखें खोल दीं। परिजनों ने सांसें चलने की बात कही, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया।

    अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग भी हो चुकी थी

    मुक्तिधाम सेवा समिति के पंकज गुप्ता के मुताबिक, दोपहर में साईं राम के अंतिम संस्कार के लिए वाहन की बुकिंग कराई गई थी। इसके बाद वाहन और चालक की व्यवस्था कर दी गई थी।

    उन्होंने बताया कि करीब 2:30 बजे परिवार की ओर से फोन आया और अंतिम यात्रा वाहन की बुकिंग रद्द करने को कहा गया। जब इसकी वजह पूछी गई तो परिजनों ने बताया कि एंबुलेंस के गड्ढे में जाने के बाद लगे झटके के दौरान साईं राम की सांसें चलने लगी हैं।

    दो बार हार्ट अटैक और किडनी फेल होने की बात

    परिजनों के अनुसार, साईं राम की तबीयत काफी खराब थी। डॉक्टरों ने उनके गुर्दे फेल होने और दो बार हार्ट अटैक आने की बात कही थी और उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

    हालांकि, बाद में सांसें चलने की सूचना के बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।

    घटना ने खड़े किए कई सवाल

    इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा हो रही है। हालांकि, एंबुलेंस के गड्ढे में जाने से लगे झटके और साईं राम के शरीर में दोबारा सांस चलने के बीच चिकित्सकीय संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि किसी मरीज को मृत घोषित किए जाने की प्रक्रिया में किन चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था। फिलहाल साईं राम की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति और उन्हें मृत घोषित किए जाने की परिस्थितियां ही इस पूरे मामले को स्पष्ट करने में अहम होंगी।

  • गुरुवार का व्रत खोलने से पहले जरूर करें ये काम: जानें पूजा की पूरी विधि मंत्र कथा प्रसाद और व्रत के जरूरी नियम

    गुरुवार का व्रत खोलने से पहले जरूर करें ये काम: जानें पूजा की पूरी विधि मंत्र कथा प्रसाद और व्रत के जरूरी नियम


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि ज्ञान और सकारात्मकता की कामना की जाती है। गुरुवार के व्रत को लेकर अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ नियम अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी कुल परंपरा के अनुसार विधि अपनाना उचित माना जाता है। सामान्य रूप से गुरुवार का व्रत सुबह स्नान और संकल्प के साथ शुरू किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति की पूजा की जाती है और दिनभर संयम रखते हुए व्रत किया जाता है।

    गुरुवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। धार्मिक परंपरा में पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाया जा सकता है। भगवान को पीले फूल हल्दी अक्षत तुलसी के पत्ते केला और पीले रंग की मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। कुछ परंपराओं में केले के पेड़ की पूजा करके उसकी जड़ में जल अर्पित करने का भी विधान बताया गया है।

    पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंत्र का जाप कर सकते हैं। बृहस्पति देव की आराधना करने वाले ॐ बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप भी अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं। इसके बाद गुरुवार व्रत की कथा पढ़ना या सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा पूरी होने पर भगवान की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें। धार्मिक मान्यताओं में व्रत के दौरान गुरु और बुजुर्गों का सम्मान करने तथा उनका आशीर्वाद लेने को भी विशेष महत्व दिया गया है।

    गुरुवार के व्रत में भोजन को लेकर भी अलग अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। कई परंपराओं में गुरुवार को नमक का सेवन न करने की मान्यता भी बताई गई है। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाला व्यक्ति अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपना सकता है। पीले फल केला चने की दाल गुड़ और अन्य सात्विक चीजों का सेवन या प्रसाद के रूप में इस्तेमाल कई जगहों पर किया जाता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का संयम ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि व्यवहार में भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झूठ बोलना किसी का अपमान करना क्रोध करना या कटु वचन बोलना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के साथ अच्छे व्यवहार और सकारात्मक सोच को भी महत्व दिया जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल पीले वस्त्र केला गुड़ या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।

    गुरुवार के व्रत की संख्या को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग 11 21 या 51 गुरुवार का संकल्प लेते हैं जबकि कुछ परंपराओं में 16 गुरुवार के व्रत का विधान मिलता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार संकल्प लेना बेहतर माना जाता है। संकल्प की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद उद्यापन की परंपरा भी बताई जाती है जिसमें भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की पूजा के साथ दान दक्षिणा और प्रसाद वितरण किया जाता है।
    गुरुवार के व्रत की संख्या को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग 11 21 या 51 गुरुवार का संकल्प लेते हैं जबकि कुछ परंपराओं में 16 गुरुवार के व्रत का विधान मिलता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार संकल्प लेना बेहतर माना जाता है। संकल्प की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद उद्यापन की परंपरा भी बताई जाती है जिसमें भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की पूजा के साथ दान दक्षिणा और प्रसाद वितरण किया जाता है।

    इस तरह गुरुवार का व्रत केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं माना जाता। इसमें सुबह का स्नान संकल्प पूजा मंत्र जाप कथा श्रवण आरती प्रसाद और दान जैसी परंपराएं शामिल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के प्रति आस्था प्रकट करने का माध्यम है। हालांकि व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखना चाहिए। आस्था के साथ संयम सेवा और अच्छे आचरण को जीवन में अपनाना ही इस धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

    जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया


    नई दिल्ली।
    जनगणना-2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार लोगों को अपना जनगणना ब्योरा खुद दर्ज करने (Self Enumeration) की सुविधा भी मिल रही है। 16 से 30 नवंबर तक स्व-गणना (Self Enumeration) की जा सकेगी। वहीं, 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर पहुंचकर जनगणना करेंगे।

    स्व-गणना पूरी करने वाले परिवार को एक स्व-गणना पहचान संख्या मिलेगी। इसे सुरक्षित रखना होगा और घर पहुंचने वाले प्रगणक को यह संख्या बतानी होगी।


    जाति और राष्ट्रीयता के लिए प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाएगा

    जनगणना के दौरान जाति और राष्ट्रीयता से जुड़ी जानकारी व्यक्ति की ओर से दी गई सूचना के आधार पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए किसी नागरिक से प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार से निर्धारित 40 सवाल पूछकर जानकारी दर्ज की जाएगी।


    5 से 9 जनवरी तक होगा पुनरीक्षण

    1 दिसंबर से शुरू होने वाली घर-घर जनगणना प्रक्रिया 4 जनवरी तक चलेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण किया जाएगा। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।


    50 फील्ड ट्रेनर होंगे तैयार

    औरैया में जनगणना की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी बृजेश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें तैयारियों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

    जिले में जनगणना के लिए 50 फील्ड ट्रेनर चिह्नित किए गए हैं। अक्टूबर में मास्टर ट्रेनर इन्हें प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद 20 नवंबर से पहले फील्ड ट्रेनर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को जनगणना की प्रक्रिया समझाएंगे।


    स्कूल-कॉलेज से गांवों तक चलेगा जागरूकता अभियान

    जनगणना में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें- पेंटिंग, रंगोली, भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी, प्रभात फेरी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।

    ग्रामीण और शहरी इलाकों में वॉल पेंटिंग, बैनर-पोस्टर, होर्डिंग, कूड़ा संग्रहण वाहनों और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। डीएम ने छोटे जागरूकता वीडियो और डिजिटल प्रचार सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।


    जनगणना के आंकड़े क्यों अहम

    बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना से जुटाए जाने वाले आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण का आधार बनते हैं। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने को कहा।

  • SIR में इन्फोसिस फाउंडर नीलेकणी सहित कई हस्तियों के नाम अटके, भेजे नोटिस….

    SIR में इन्फोसिस फाउंडर नीलेकणी सहित कई हस्तियों के नाम अटके, भेजे नोटिस….


    बेंगलुरु।
    भारत (India) के कई राज्यों में SIR यानी मतदाता सूची (Electoral Roll) का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) जारी है, जिनमें कर्नाटक भी शामिल है। खबर है कि कई बड़ी हस्तियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं, जिनमें इन्फोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani), एक्टर शिवराजकुमार और जेरोधा के फाउंडर कामत ब्रदर्स यानी नितिन और निखिल शामिल हैं। अधिकारियों ने इन नोटिस पर हैरानी जताई है और जांच की बात कही है। खास बात है कि इन नोटिसों की बात ऐसे समय पर आई है, जब भारत रत्न प्रोफेसर सीएनआर राव का नाम चिह्नित किए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है। जबकि, अधिकारियों का कहना है कि कोई नोटिस नहीं दिया गया है।

    हाल ही में पंजाब में हुए SIR में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम कटने पर भी जमकर सियासी बवाल हुआ था। चड्ढा ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी पर बदले की कार्रवाई के आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था।

    एक रिपोर्ट में अनिवाश नाम के एक एक्स यूजर के हवाले से बताया गया है कि नितिन और निखिल कामत और उनके माता-पिता के नाम मेल नहीं खा रहे हैं। इस वजह से उनका नाम चिह्नित किया गया है। जबकि, नीलेकणी को अनमैप्ड बताया गया है। खास बात है कि उन्होंने भारत में आधार की शुरुआत में बड़ी भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु जिला निर्वाचन अधिकारी और जीबीए मुख्य आयुक्त माहेश्वर राव से नोटिस को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘यह हैरानी की बात है और हम इसकी जांच करेंगे।’


    पीएम मोदी ने सौंपी है बड़ी जिम्मेदारी

    जुलाई में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित की थी, जिसकी कमान नीलेकणी को सौंपी गई थी। इस टास्क फोर्स का काम NTA की तरफ से कराई जाने वाली परीक्षाओं में सुधार का था। उनके साथ पूर्व इसरो चीफ एस सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका समेत कई बड़े नाम शामिल थे।


    कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल

    अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई और हस्तियों के नाम भी चुनावी रिकॉर्ड 2002 की पुरानी डेटाबेस सूची से सीधे मेल नहीं खा रहे हैं। अभिनेता शिवराजकुमार को अनमैप्ड श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि उनके पते की जानकारी नहीं मिल सकी है। उनका वर्तमान चुनावी डेटा 2002 की सूची से सीधे लिंक नहीं हो पा रहा था। शिवराजकुमार के मामले में उनके पिता का नाम दिवंगत मुथुराज दर्ज है, जो महान अभिनेता डॉक्टर राजकुमार का वास्तविक नाम है।

    अभिनेता प्रकाश राज के नाम काटे जाने के दावों को खारिज करते हुए अधिकारी कार्यालय ने साफ किया कि उनका नाम शांतिनगर निर्वाचन क्षेत्र की सूची में है।


    क्या कट जाएंगे नाम

    चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन मतदाताओं को अयोग्य नहीं पाया गया है और न ही उनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। यह समस्या केवल 2002 के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान पहचान के बीच नाम, माता-पिता के नाम की जानकारी या स्पेलिंग में अंतर के कारण आई है। 4 सितंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मतदाताओं को 43.81 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए गए हैं, जिनमें से 7.31 लाख से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं।


    भारत रत्न राव को नहीं दिया नोटिस

    बेंगलुरु चुनाव अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि राव को नोटिस नहीं दिया गया है। दरअसल, उनका नाम 2002 की मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र की सूची में केवल रामा के रूप में दर्ज था। जबकि वर्तमान में उनका नाम प्रो सीएन राव एम दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ ने खुद उनके घर जाकर विवरण जुटाया और उनका नाम अंतिम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • E20 पेट्रोल पर सरकार की बड़ी तैयारी…. और ज्यादा एथनॉल मिलाने का बनाया प्लान

    E20 पेट्रोल पर सरकार की बड़ी तैयारी…. और ज्यादा एथनॉल मिलाने का बनाया प्लान


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल (Petrol) में एथनॉल (Ethanol) मिलाने की मौजूदा E20 व्यवस्था (E20 system) के बाद सरकार अब इससे आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर (Tarun Kapoor) ने बुधवार को कहा कि सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर काम कर रही है। हालांकि, ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल फ्लेक्सी-फ्यूल व्हीकल्स (Flex-fuel vehicles-FFV) के जरिए किया जाएगा।


    क्या है सरकार का प्लान?

    एक कार्यक्रम में तरुण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अबतक बहुत सफल रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ”अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी सम्मिश्रण की मंजूरी देना है जो E20 से ज्यादा हो।” उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, ”यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।”

    उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।

    एथनॉल कितना, पेट्रोल कितना?
    बता दें कि E20 में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जाता है। सरकार अब E20 से आगे जाकर एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, तरुण कपूर ने यह भी कहा कि इसका इस्तेमाल सामान्य पेट्रोल वाहनों के बजाय फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ये ऐसी गाड़ियां होती हैं, जिन्हें पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में एथनॉल वाले ईंधन पर भी चलने के लिए डिजाइन किया जाता है।


    डीजल के लिए भी है प्लान

    डीजल सेग्मेंट के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है। इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है।

  • वास्तु के इन आसान नियमों से घर को दें सकारात्मक माहौल: प्रवेश द्वार की सफाई से सही दिशा में सामान रखने तक जानें किन बातों का रखें खास ध्यान

    वास्तु के इन आसान नियमों से घर को दें सकारात्मक माहौल: प्रवेश द्वार की सफाई से सही दिशा में सामान रखने तक जानें किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली । घर सिर्फ ईंट पत्थर और दीवारों से बना हुआ स्थान नहीं होता बल्कि यह परिवार के सुख शांति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा अहम हिस्सा होता है। यही वजह है कि भारतीय परंपरा में घर की बनावट और सामान की दिशा को लेकर वास्तु शास्त्र को विशेष महत्व दिया जाता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार घर में मौजूद चीजों की सही जगह और साफ सफाई का वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव माना जाता है। हालांकि इन बातों को वैज्ञानिक तथ्य के बजाय पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के तौर पर ही देखना चाहिए।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य दरवाजा सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है क्योंकि इसी रास्ते से घर में लोगों का आना जाना होता है। इसलिए प्रवेश द्वार को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के आसपास बेकार सामान जूते चप्पल कूड़ा या टूटी हुई चीजें जमा नहीं करनी चाहिए। वास्तु परंपरा में उत्तर पूर्व और पूर्व दिशा के प्रवेश द्वार को सकारात्मक माना जाता है। साथ ही मुख्य दरवाजे के आसपास पर्याप्त रोशनी रखने की बात कही जाती है ताकि जगह अंधेरी और अव्यवस्थित न लगे।

    घर के अंदर सामान का बिखरा रहना भी वास्तु में अच्छा नहीं माना जाता। खासकर टूटा हुआ शीशा बंद पड़ी घड़ी खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान सूखे या मुरझाए पौधे और लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली वस्तुओं को हटाने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी चीजें घर में ठहराव और अव्यवस्था का संकेत मानी जाती हैं। व्यावहारिक रूप से भी घर को व्यवस्थित रखने से जगह साफ दिखाई देती है और रोजमर्रा के काम आसान होते हैं।

    रसोई को लेकर भी वास्तु में कई नियम बताए गए हैं। पारंपरिक वास्तु के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इसे अग्नि कोण कहा जाता है। हालांकि हर घर की संरचना अलग होती है और बने बनाए मकान में दिशा बदलना संभव नहीं होता। ऐसे में केवल वास्तु के नाम पर बड़े निर्माण बदलाव करने के बजाय घर की सुरक्षा साफ सफाई और सुविधाजनक उपयोग को प्राथमिकता देना बेहतर माना जा सकता है।

    बेडरूम को लेकर वास्तु में दक्षिण पश्चिम दिशा को मास्टर बेडरूम के लिए अनुकूल बताया जाता है। सोने के कमरे में बहुत ज्यादा सामान जमा करने से बचने और वातावरण को शांत रखने की सलाह दी जाती है। बिस्तर के आसपास अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अव्यवस्था को कम रखना भी एक अच्छा घरेलू अभ्यास हो सकता है। वहीं कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी का होना भी आरामदायक वातावरण के लिए जरूरी है।

    वास्तु में घर के बीच के हिस्से को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बहुत ज्यादा भारी सामान रखने के बजाय जगह को खुला और साफ रखने की सलाह दी जाती है। इसी तरह पूजा स्थल को भी शांत और साफ स्थान पर रखने की परंपरा है। घर में धार्मिक तस्वीरें या मूर्तियां रखते समय उन्हें सम्मानजनक और साफ स्थान देना चाहिए। टूटी हुई मूर्तियों या खराब धार्मिक वस्तुओं को पूजा स्थल पर रखने से बचने की सलाह वास्तु परंपराओं में मिलती है।

    धन और समृद्धि से जुड़े वास्तु उपायों में उत्तर दिशा को विशेष महत्व देने की परंपरा भी है। कुछ वास्तु मान्यताओं में इसे कुबेर से जुड़ी दिशा माना जाता है और धन से संबंधित वस्तुओं को व्यवस्थित तरीके से रखने की सलाह दी जाती है। इसी तरह मनी प्लांट जैसे पौधों को भी वास्तु में सकारात्मकता और समृद्धि से जोड़ा जाता है हालांकि इसे आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता। पौधे को घर में रखने से पहले उसकी रोशनी पानी और देखभाल की जरूरत को समझना जरूरी है।

    वास्तु के इन नियमों का सबसे आसान और व्यावहारिक हिस्सा घर की नियमित सफाई और अव्यवस्था को दूर करना है। मुख्य दरवाजा साफ रखना खराब सामान को हटाना पर्याप्त रोशनी रखना रिसाव वाले नल ठीक कराना और टूटे हुए उपकरणों को घर में जमा न करना ऐसे कदम हैं जो किसी भी घर को बेहतर और व्यवस्थित बना सकते हैं। इसलिए अगर आप वास्तु के नियमों को मानते हैं तो शुरुआत बड़े बदलावों से नहीं बल्कि घर की साफ सफाई व्यवस्था और सकारात्मक माहौल से कर सकते हैं।

  • भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V… आज राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से मिलेंगे

    भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V… आज राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से मिलेंगे


    नई दिल्‍ली।
    इस्लामी समुदाय (Islamic community) के 50वें इमाम (50th Imam) प्रिंस रहीम आगा खान पंचम (Prince Rahim Aga Khan V) बुधवार देर रात अपनी पहली भारत यात्रा (India Tour) पर नई दिल्ली (New Delhi) पहुंचे। इस दौरान एयरपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा उनका रेड कार्पेट स्वागत किया गया। आगा खान पंचम 9 से 15 सितंबर तक भारत दौरे रहेंगे। इस दौरान वह दिल्ली में वे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री और विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगे।

    व‍िदेश मंत्रायल के अनुसार, आगा खान पंचम की यह भारत यात्रा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के निमंत्रण पर हो रही है। प्रिंस रहीम आगा खान करीब एक सप्‍ताह तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वो अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद भी जाएंगे।


    राष्ट्रपति मुर्मू-पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात

    दिल्ली प्रवास के दौरान आगा खान की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी प्रस्‍ताव‍ित है। इसके अलावा, वह गृह मंत्री और विदेश मंत्री से भी मिलेंगे। इन बैठकों के अलावा भारत यात्रा के दौरान आगा खान पंचम अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद का भी दौरा करेंगे। इन शहरों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) विभिन्न विकास कार्यों और सामुदायिक पहलों से जुड़ा हुआ है।

    आगा खान पंचम के रूप में इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम का पद संभालने के बाद यह हिज हाइनेस प्रिंस रहीम आगा खान पंचम की भारत की पहली यात्रा होगी।


    2025 में संभाला था 50वें इमाम का पद

    प्रिंस आगा खान पंचम ने फरवरी 2025 में अपने पिता प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ के निधन के बाद 50वें इमाम का पद संभाला। उस दौरान प्रिंस करीम अल-हुसैनी आगा खान चतुर्थ और शिया इस्माइली मुसलमानों के 49वें इमाम के इंतकाल की जानकारी इस्माइली धार्मिक समुदाय ने अपनी वेबसाइट्स पर दी थी।

    आगा खान चतुर्थ ने अपना पूरा जीवन लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने विश्व के सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर रहने वाले समुदायों की मदद की है।

    आगा खान ने वर्ष 1967 में ‘आगा खान फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। यह फाउंडेशन अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका के 18 देशों में काम करता है। आगा खान फाउंडेशन ने उनके परिवार और विश्व भर के इस्माइली समुदाय के प्रति अपनी संवेदना जताई है।

  • फिलीपींस में बड़ा हादसा….. समुद्री क्षेत्र में यात्री फेरी में लगी भीषण आग, 5 लोगों की मौत और 80 से ज्यादा लापता

    फिलीपींस में बड़ा हादसा….. समुद्री क्षेत्र में यात्री फेरी में लगी भीषण आग, 5 लोगों की मौत और 80 से ज्यादा लापता


    मनीला।
    फिलीपींस (Philippines) के पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया है। मनीला (Manila) से कोरोन (पालवान प्रांत) जा रही एक यात्री फेरी ‘एमवी जून एस्टर’ (MV June Aster) में अचानक भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। फिलीपींस कोस्ट गार्ड (Philippine Coast Guard) की टीम मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है।


    134 लोग थे सवार, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

    तटरक्षक बल की प्रवक्ता कमोडोर नोएमी कायाबयाब (Commodore Noemie Cayabyab) ने एक रेडियो साक्षात्कार में हादसे की पुष्टि करते हुए बताया, ‘दुर्घटनाग्रस्त फेरी में कुल 134 लोग सवार थे, जिनमें 117 यात्री और 17 क्रू मेंबर्स (नाविक दल) शामिल थे।’ बताया गया कि अब तक 42 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

    लापता लोगों का आंकड़ा: शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार लगभग 87 लोग लापता बताए जा रहे हैं, लेकिन बचाव अभियान जारी रहने के कारण इस संख्या में बदलाव हो सकता है।


    मनीला से पालवान जा रही थी फेरी

    तटरक्षक बल के अनुसार, यात्री फेरी ‘MV June Aster’ राजधानी मनीला से रवाना हुई थी और बुधवार को जब यह पालवान प्रांत के कोरोन (Coron) द्वीप के पास पहुंची, तभी जहाज में अचानक आग भड़क उठी। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

    घटनास्थल की तस्वीरों में कोस्ट गार्ड के कर्मचारी बचे हुए लोगों की ओर लाइफ जैकेट फेंकते हुए दिखे, जबकि पीछे फेरी जल रही थी। छोटी नावें भी बचे हुए लोगों को कम गहरे पानी में ले गईं।

    फिलीपींस के द्वीपों में फेरी परिवहन का एक आम जरिया है। तूफान, खराब रखरखाव वाली नावें, क्षमता से ज्यादा भीड़ और सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन न होने (खासकर दूर-दराज के इलाकों में) की वजह से समुद्री दुर्घटनाएं होती रहती हैं।