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  • टीकमगढ़ में जंगल में मिला बुजुर्ग का शव: बेटे ने जताई हत्या की आशंका, गोली के निशान मिलने का दावा

    टीकमगढ़ में जंगल में मिला बुजुर्ग का शव: बेटे ने जताई हत्या की आशंका, गोली के निशान मिलने का दावा


    टीकमगढ़  टीकमगढ़ जिले के देहात थाना क्षेत्र में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब कई दिनों से लापता एक बुजुर्ग का शव जंगल में बरामद हुआ। मृतक की पहचान 65 वर्षीय हरचरण रैकवार के रूप में हुई है। शव मिलने की सूचना के बाद इलाके में दहशत और चर्चा का माहौल बन गया। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए शरीर पर गोली जैसे निशान होने का दावा किया है। वहीं पुलिस मामले की हर पहलू से जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार हरचरण रैकवार मंगलवार से लापता थे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। गुरुवार को श्रीनगर गांव के पास स्थित मुड़ापार जंगल में ग्रामीणों ने एक शव पड़ा देखा, जिसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान हरचरण रैकवार के रूप में की।

    मृतक के बेटे रमेश रैकवार ने आरोप लगाया कि उनके पिता की कनपटी और कमर के पास गोली लगने जैसे निशान दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि हत्या का मामला हो सकता है। बेटे के आरोपों के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।

    घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य जुटाए और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी एकत्र करना शुरू किया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गोली मारकर हत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस अज्ञात आरोपियों की तलाश में जुटी है और हर पहलू से जांच की जा रही है।

    जंगल में शव मिलने और गोली जैसे निशानों की चर्चा के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। ग्रामीणों के बीच घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

    फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, क्योंकि उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। वहीं परिजन लगातार हत्या की आशंका जता रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

  • कटनी हाईवे पर दर्दनाक हादसा: केबिन में फंसे घायलों को ग्रामीणों ने निकाला, क्लीनर ने तोड़ा दम

    कटनी हाईवे पर दर्दनाक हादसा: केबिन में फंसे घायलों को ग्रामीणों ने निकाला, क्लीनर ने तोड़ा दम


    कटनीकटनी जिले में गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर एक भीषण सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी। नैगवा ग्राम के पास दो भारी ट्रकों की आमने-सामने की टक्कर में एक ट्रक क्लीनर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना जबरदस्त था कि दोनों ट्रकों के केबिन बुरी तरह चकनाचूर हो गए और उनमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार को उमरिया से कटनी की ओर आ रहा एक लोडर ट्रक और कटनी से दूसरी दिशा में जा रहा हाइवा ट्रक नैगवा गांव के पास आमने-सामने भिड़ गए। टक्कर इतनी तेज थी कि दूर तक धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। हादसे के तुरंत बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    घटना की सूचना मिलते ही बड़वारा थाना प्रभारी के.के. पटेल अपनी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों की मदद से तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। ट्रकों के क्षतिग्रस्त केबिन में फंसे घायलों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो रहा था। काफी मशक्कत के बाद पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला।

    हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल पुलिस वाहन और एम्बुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़वारा पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल कटनी रेफर कर दिया। अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है।

    पुलिस प्रशासन ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान राजेंद्र कोल के रूप में हुई है, जो विजयराघवगढ़ क्षेत्र का निवासी था और ट्रक में क्लीनर के रूप में काम करता था। हादसे के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    हादसे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित रहा। बाद में पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात बहाल कराया। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी।

    प्राथमिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और वाहन नियंत्रण बिगड़ना माना जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

    इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर तेज रफ्तार भारी वाहनों के खतरे को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने और भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण लगाने की मांग की है।

  • अंडरब्रिज से टपक रहा गंदा पानी, रेलवे पर लापरवाही के आरोप: राहगीरों की बढ़ी परेशानी

    अंडरब्रिज से टपक रहा गंदा पानी, रेलवे पर लापरवाही के आरोप: राहगीरों की बढ़ी परेशानी


    बीना  बीना के सागर गेट अंडरब्रिज में फैली गंदगी और ऊपर से लगातार टपक रहे गंदे पानी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले करीब एक सप्ताह से अंडरब्रिज से गिर रहे बदबूदार पानी के कारण वाहन चालकों, राहगीरों और स्थानीय रहवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन लगातार शिकायतों के बावजूद इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहा है।

    अंडरब्रिज के ऊपर जमा गंदगी और जलभराव के कारण गंदा पानी नीचे सड़क पर टपक रहा है। इससे न केवल वहां से गुजरने वाले लोग परेशान हो रहे हैं, बल्कि रेलवे ट्रैक पर भी गंदा पानी जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और मरम्मत का काम नहीं कराया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

    कांग्रेस सेवादल शहर अध्यक्ष प्रमोद राय ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो आम नागरिकों के साथ आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल गंदगी का मामला नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

    चेतन धाम कॉलोनी निवासी सुदर्शन जैन ने बताया कि रोज सुबह अंडरब्रिज से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि स्नान कर घर से निकलने के बाद जब इस गंदे पानी और बदबू से गुजरना पड़ता है, तो पूरा दिन खराब हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि इस रास्ते से बचना हो तो ओवरब्रिज से करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है।

    गांधी वार्ड निवासी शिवकुमार अहिरवार ने कहा कि यह समस्या नई नहीं है। लंबे समय से गंदा पानी टपक रहा है, लेकिन रेलवे प्रशासन ने कभी स्थायी समाधान निकालने की कोशिश नहीं की। वहीं सिंधी कॉलोनी निवासी जन्नू लाल राय ने बताया कि अंडरब्रिज बनने के समय से ही यह दिक्कत बनी हुई है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण ऊपर गंदगी जमा हो जाती है और फिर वही पानी नीचे रिसने लगता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अंडरब्रिज से गुजरना अब जोखिम भरा हो गया है। सड़क पर फैली गंदगी के कारण फिसलने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लोगों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन तत्काल सफाई कराकर जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करे, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

  • सागर में बेकाबू टैंकर का कहर: दुकानों और घरों में घुसा, तेंदूपत्ता तोड़ने जा रहा युवक चपेट में आया; ड्राइवर फरार

    सागर में बेकाबू टैंकर का कहर: दुकानों और घरों में घुसा, तेंदूपत्ता तोड़ने जा रहा युवक चपेट में आया; ड्राइवर फरार


    सागर सागर जिले के खुरई रोड स्थित ग्राम जरुआखेड़ा में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार बेकाबू टैंकर सड़क किनारे बनी दुकानों और घरों में जा घुसा। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर की आवाज सुनते ही आसपास के लोग दहशत में बाहर निकल आए। दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं हादसे के बाद टैंकर चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।

    जानकारी के अनुसार घटना सागर-खुरई रोड पर झंडापुरा मुहाल इलाके में हुई। गुरुवार सुबह सड़क पर तेज गति से दौड़ रहा एक कैप्सूल टैंकर अचानक अनियंत्रित हो गया। देखते ही देखते टैंकर सड़क किनारे बनी दो दुकानों और घरों को तोड़ते हुए अंदर जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दुकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं और घरों में रखा सामान भी बिखर गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए।

    इसी दौरान अशोक अहिरवार नाम का युवक तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल की ओर जा रहा था। वह सड़क किनारे से गुजर ही रहा था कि अचानक बेकाबू टैंकर की चपेट में आ गया। टक्कर लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए उसे बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टैंकर काफी तेज रफ्तार में था और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया। हादसे के बाद ड्राइवर मौके से भाग निकला। लोगों ने चालक को पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन वह भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गया।

    घटना की सूचना मिलते ही जरुआखेड़ा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त इलाके का निरीक्षण करने के बाद टैंकर को जब्त कर लिया है। मामले में प्रकरण दर्ज कर फरार चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना है कि सागर-खुरई रोड पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार लगातार हादसों का कारण बन रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही। लोगों ने क्षेत्र में स्पीड कंट्रोल और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • सागर में ईद-उल-अजहा पर उमड़ा जनसैलाब: ईदगाह में जगह कम पड़ी, सड़कों पर अदा हुई नमाज

    सागर में ईद-उल-अजहा पर उमड़ा जनसैलाब: ईदगाह में जगह कम पड़ी, सड़कों पर अदा हुई नमाज


    सागर  सागर में गुरुवार को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरी श्रद्धा, सादगी और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही शहर की ईदगाहों और मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। मुस्लिम समाज के लोगों ने विशेष नमाज अदा कर देश की खुशहाली, अमन-चैन और तरक्की की दुआ मांगी। ईद की नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी, जिससे पूरे शहर में भाईचारे और सौहार्द का माहौल देखने को मिला।

    मोतीनगर चौराहे के पास लेहदरा नाका स्थित ईदगाह मैदान में सुबह से हजारों की संख्या में लोग पहुंचने लगे थे। भीड़ इतनी ज्यादा रही कि ईदगाह परिसर में जगह कम पड़ गई। इसके बाद बड़ी संख्या में नमाजियों ने भोपाल रोड पर बैठकर नमाज अदा की। सड़क पर एक साथ हजारों लोगों के सजदे में झुकने का दृश्य बेहद भावुक और आकर्षक नजर आया। नमाज के दौरान पूरा इलाका अल्लाहु अकबर की सदाओं से गूंज उठा।

    कटरा बाजार स्थित जामा मस्जिद सहित शहर की अन्य मस्जिदों में भी बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की। मस्जिदों के अंदर जगह भरने के बाद लोग बाहर सड़कों और गलियों में कतारबद्ध होकर नमाज पढ़ते नजर आए। नमाज के बाद बच्चों और युवाओं में खास उत्साह दिखाई दिया। लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाकर और गले लगकर ईद की शुभकामनाएं देते रहे।

    त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर के संवेदनशील इलाकों, ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने।

    ईद-उल-अजहा को इस्लाम धर्म में कुर्बानी और त्याग के पर्व के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल को अल्लाह के हुक्म पर कुर्बान करने जा रहे थे, लेकिन अल्लाह ने उनकी आस्था और समर्पण से प्रसन्न होकर हजरत इस्माइल को जीवनदान दे दिया। इसी घटना की याद में हर साल बकरीद मनाई जाती है।

    सागर में इस बार भी ईद का त्योहार भाईचारे, आपसी सौहार्द और शांति का संदेश देकर गया। नमाज के दौरान लोगों ने देश की तरक्की, समाज में प्रेम और आपसी एकता बनाए रखने की दुआ की।

  • ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    ‘वनवासी’ शब्द को लेकर झाबुआ में सियासी बवाल, कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


    झाबुआ झाबुआ में गुरुवार को आदिवासी अस्मिता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नई दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय गर्जना’ रैली के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल पर आदिवासी कांग्रेस सड़क पर उतर आई। जिला मुख्यालय के राजवाड़ा चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया और गृहमंत्री का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने किया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। डॉ. विक्रांत भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर ‘आदिवासी’ शब्द से परहेज कर रही है और ‘वनवासी’ जैसे शब्दों के जरिए समाज को सीमित दायरे में दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाला समुदाय नहीं, बल्कि इस देश के मूल निवासी हैं, जिनकी अपनी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास है।

    डॉ. भूरिया ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को दूर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है। अब भाषा और शब्दों के माध्यम से भी उनकी पहचान बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को बड़े औद्योगिक घरानों के हवाले करना चाहती है और आदिवासी समाज को केवल मजदूर बनाकर रखना चाहती है।

    उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे समाप्त कर आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। डॉ. भूरिया ने कहा कि आज आदिवासी समाज शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। समाज के लोग डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर और आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में उन्हें ‘जंगली’ या ‘वनवासी’ जैसे शब्दों से संबोधित करना अपमानजनक है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने शुरुआती दो बार पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। तीसरी कोशिश में कार्यकर्ताओं ने अमित शाह का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान राजवाड़ा चौक पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।

    कार्यक्रम में जसवंत सिंह भाबर, नटवर डोडियार, नरवेश अमलियार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने गृहमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि आदिवासी समाज की पहचान और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल जारी रहा, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच

    जिपं CEO के आदेश पर जनपद CEO की ‘कैंची’! 10 महीने से अधिकारों के लिए भटक रहीं उप सरपंच


    भोपाल । भोपाल की अर्रावती ग्राम पंचायत में सरपंच पद के प्रभार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उप सरपंच सविता चौहान ने जनपद CEO पर जिला पंचायत CEO के आदेश को पलटने और 10 महीने तक अधिकार नहीं देने के आरोप लगाए हैं। मामला अब पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तक पहुंच गया है।

    भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक गलियारों से निकलकर राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले तक पहुंची इस शिकायत ने पंचायत व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप सरपंच सविता चौहान ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत CEO के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक सरपंच के पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए।

    पूरा मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब अर्रावती के तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रकरण दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। पंचायत राज अधिनियम के अनुसार सरपंच का प्रभार उप सरपंच को सौंपा जाना था। इसी नियम के तहत जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने 14 अगस्त 2025 को जनपद CEO देवेशकुमार सराठे को आदेश जारी कर सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार देने के निर्देश दिए थे।

    आरोप है कि आदेश जारी होने के बाद भी जनपद CEO ने शुरुआत में प्रभार देने में देरी की। बाद में औपचारिक रूप से चार्ज तो सौंप दिया गया, लेकिन सरपंच के अधिकार और वित्तीय शक्तियां नहीं दी गईं। सविता चौहान का कहना है कि पिछले 10 महीनों से वे अधिकारों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब पंचायत के खातों और बिल भुगतान को लेकर सवाल उठने लगे। सविता चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना लाखों रुपए के बिल पास किए गए। इतना ही नहीं, बाद में पंचों के सम्मेलन आयोजित किए गए और इसी प्रक्रिया के बीच लेखरात अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया। चौहान का कहना है कि यह फैसला जिला पंचायत CEO के आदेश के खिलाफ है और जनपद CEO को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

    उप सरपंच सविता चौहान अपने पति धनवीर सिंह और समर्थकों के साथ पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें नियमानुसार अधिकार दिलाने की मांग की। जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में जनपद CEO की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जिला पंचायत सदस्य विनय मेहर ने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी नियमों के तहत सविता चौहान को प्रभार दे चुके हैं, तब किसी दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करना नियम विरुद्ध है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत CEO इला तिवारी ने जांच के आदेश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और आखिर पंचायत व्यवस्था में आदेशों के टकराव का जिम्मेदार कौन माना जाएगा।

  • ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी

    ईदगाहों में उमड़ी भीड़, लोगों ने अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति

    रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति


    नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं।

    जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए।

    घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे।

    हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

  • HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार

    HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार


    नई दिल्ली। HDFC Bank ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैंक में मजबूत निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं तथा सभी मामलों को तय प्रक्रियाओं के तहत ही संभाला जाता है।

    बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अटकलों को पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि आंतरिक समीक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है।

    दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (एसीबी) ने वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान Maharashtra State Road Development Corporation को किए गए करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला एमएसआरडीसी द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज भुगतान से जुड़ा बताया गया। आरोप लगाया गया कि राशि सीधे ब्याज भुगतान के तौर पर जारी करने के बजाय मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के नाम पर भेजी गई।

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें बैंक के एमडी और सीईओ Sashidhar Jagdishan की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियामकीय मानकों और आंतरिक नियमों के अनुसार संचालित होती हैं।

    इन खबरों के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला। NSE: HDFCBANK के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 2.69 प्रतिशत टूटकर 757.90 रुपए तक पहुंच गया।