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  • बॉक्स ऑफिस पर 124 करोड़ के पार अब OTT पर दस्तक देगी धमाल 4 सामने आई रिलीज को लेकर बड़ी जानकारी

    बॉक्स ऑफिस पर 124 करोड़ के पार अब OTT पर दस्तक देगी धमाल 4 सामने आई रिलीज को लेकर बड़ी जानकारी


    नई दिल्ली। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म धमाल 4 सिनेमाघरों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है। रिलीज के बाद से फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छी कमाई कर रही है और अब इसकी OTT रिलीज को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिल्म देखने से चूक गए दर्शक यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह एडवेंचर कॉमेडी कब और किस प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। हालांकि अभी तक निर्माताओं की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी संभावित OTT रिलीज को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाल 4 के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार नेटफ्लिक्स के पास हैं और फिल्म इसी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो सकती है। मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए अधिकांश बड़ी हिंदी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज होने के चार से छह सप्ताह बाद OTT पर आती हैं। इसी आधार पर माना जा रहा है कि यदि फिल्म का थिएटर प्रदर्शन सामान्य रहता है तो इसे अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम किया जा सकता है। हालांकि दर्शकों को अंतिम तारीख के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

    धमाल फ्रेंचाइजी की चौथी कड़ी में एक बार फिर अजय देवगन के साथ रितेश देशमुख अरशद वारसी और जावेद जाफरी की लोकप्रिय तिकड़ी नजर आ रही है। इनके अलावा अंजलि आनंद संजीदा शेख और रवि किशन भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दे रहे हैं। फिल्म में कॉमेडी के साथ एडवेंचर और मनोरंजन का तड़का लगाया गया है जिसने परिवार के साथ फिल्म देखने वाले दर्शकों को आकर्षित किया है।

    बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने मजबूत प्रदर्शन किया है। शुरुआती दस दिनों में फिल्म ने 124 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है। पहले सप्ताह के बाद भी इसकी कमाई स्थिर बनी हुई है जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसका कलेक्शन और बढ़ सकता है। यही वजह है कि निर्माता फिलहाल थिएटर रन का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और इसके बाद ही OTT रिलीज की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि फिल्म को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिला है लेकिन समीक्षकों की राय कुछ अलग रही। कई फिल्म समीक्षकों ने माना कि धमाल फ्रेंचाइजी की पहचान उसकी हल्की फुल्की कॉमेडी रही है लेकिन इस बार कहानी और हास्य शैली में अपेक्षित नया प्रयोग देखने को नहीं मिला। कुछ समीक्षकों ने कॉमेडी को पुराना बताया जबकि कुछ ने इसे पारिवारिक मनोरंजन के लिहाज से सफल फिल्म माना। इसके बावजूद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन यह दिखाते हैं कि फिल्म ने अपनी अलग पहचान बनाने में सफलता हासिल की है।

    फिल्म का निर्देशन इंद्र कुमार ने किया है जो इससे पहले भी धमाल सीरीज की फिल्मों और कई सफल कॉमेडी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। उनकी शैली को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म एक बार फिर हल्के फुल्के मनोरंजन का पैकेज साबित हो रही है।

    जो दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म नहीं देख पाए हैं उनके लिए OTT रिलीज एक अच्छा विकल्प होगी। हालांकि अभी तक रिलीज डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है इसलिए दर्शकों को निर्माताओं या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की औपचारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

  • ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    ओमिक्रॉन का नया सब वैरिएंट RF.5 चर्चा में कितना खतरनाक है नया कोविड स्ट्रेन क्या कहते हैं विशेषज्ञ


    नई दिल्ली। देश में एक बार फिर कोविड-19 के नए मामलों के बीच ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट RF.5 की पहचान ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश में चार संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इस नए सब वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन सावधानी और सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से कोविड-19 के चार पॉजिटिव नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे स्थित वायरोलॉजी प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में इन सभी नमूनों में ओमिक्रॉन परिवार के RF.5 सब वैरिएंट की मौजूदगी पाई गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संक्रमित मरीजों की निगरानी की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक RF.5 कोई पूरी तरह नया वायरस नहीं बल्कि ओमिक्रॉन परिवार का ही एक विकसित सब वैरिएंट है। यह प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है और अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी उत्पत्ति पहले से मौजूद ओमिक्रॉन लाइनिएज के विकासक्रम से हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस वैरिएंट की निगरानी कर रहा है क्योंकि इसके मामले पहले सिंगापुर और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी सामने आ चुके हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक उपलब्ध आंकड़ों से ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि RF.5 व्यापक स्तर पर पहले के ओमिक्रॉन वैरिएंट की तुलना में बहुत अधिक गंभीर बीमारी फैला रहा है। हालांकि इसकी संक्रमण क्षमता और व्यवहार को लेकर लगातार अध्ययन जारी हैं। इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को सतर्क रहने और कोविड संबंधी सावधानियों का पालन करने की सलाह दे रही हैं।

    RF.5 के लक्षण भी काफी हद तक ओमिक्रॉन के अन्य सब वैरिएंट जैसे बताए जा रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति में गले में खराश खांसी बुखार सिरदर्द शरीर में दर्द थकान और कुछ मामलों में नाक बंद होने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अधिकांश मरीजों में लक्षण हल्के रहते हैं लेकिन बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड से बचाव के लिए पहले अपनाए गए उपाय आज भी प्रभावी हैं। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना या अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करना भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार बुखार सांस लेने में तकलीफ या गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता जरूरी है लेकिन बिना पुष्टि वाली खबरों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। समय पर जांच उपचार और आवश्यक सावधानियां अपनाकर कोविड संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज

    अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज


    नई दिल्ली। अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 1988 में एक अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण जन्म के तुरंत बाद दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों अपने जैविक माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों के साथ बड़े हुए। करीब 38 वर्ष तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला। आखिरकार एक सामान्य डीएनए टेस्ट ने ऐसा सच उजागर किया जिसने दो परिवारों की पूरी दुनिया बदल दी।

    रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन शहर स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर से जुड़ा है। परिवारों का कहना है कि 26 जनवरी 1988 को अस्पताल में केवल दो बच्चों का जन्म हुआ था। आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी के समय दोनों नवजातों को गलत परिवारों के साथ भेज दिया गया। इसके बाद दोनों बच्चे अपने नए परिवारों में पले बढ़े और उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि उनके जैविक माता-पिता कोई और हैं।

    समय के साथ दोनों ने सामान्य जीवन जिया। पढ़ाई की नौकरी की परिवार बसाया और अपने रिश्तों को उसी रूप में स्वीकार किया जैसा उन्हें बचपन से बताया गया था। हालांकि उनमें से एक व्यक्ति को बचपन से ही यह महसूस होता था कि उसका चेहरा और शारीरिक बनावट परिवार के अन्य सदस्यों से काफी अलग है। उस समय इसे सामान्य संयोग मान लिया गया लेकिन वर्षों बाद यही संदेह एक बड़े खुलासे की वजह बना।

    करीब दो वर्ष पहले दूसरे व्यक्ति ने अपने पारिवारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में सामने आए परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित थे। रिपोर्ट ने ऐसे जैविक रिश्तों की ओर संकेत किया जिनके बारे में उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद आगे की जांच और पारिवारिक रिकॉर्ड की पड़ताल में कथित अदला-बदली की पूरी कहानी सामने आने लगी। परिवारों का दावा है कि जन्म के समय अस्पताल की पहचान पट्टी में दर्ज विवरण भी उनकी आशंकाओं को मजबूत करता है।

    सच्चाई सामने आने के बाद दोनों परिवारों के लिए भावनात्मक स्थिति बेहद कठिन हो गई। जिन लोगों को वे जीवनभर अपना माता-पिता और भाई-बहन मानते रहे थे उनके साथ रिश्ते तो बने रहे लेकिन अचानक यह जानना कि जैविक परिवार कोई और है किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं था। दोनों पक्षों ने अपने वास्तविक परिवारों से मुलाकात की लेकिन लगभग चार दशक बाद नए रिश्तों को स्वीकार करना आसान नहीं रहा।

    परिवारों का आरोप है कि उन्होंने पहले अस्पताल के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अस्पताल के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया। उनका कहना है कि अस्पताल की कथित लापरवाही ने दो परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल दिया और उन्हें दशकों तक अपने वास्तविक रिश्तों से दूर रखा।

    वहीं अस्पताल ने इस मामले में परिवारों की भावनात्मक पीड़ा पर संवेदना जताई है लेकिन अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने अदालत से मामला खारिज करने की मांग की है। अब अंतिम निर्णय न्यायालय में पेश किए जाने वाले सबूतों और सुनवाई के आधार पर होगा।

    यह मामला केवल एक संभावित प्रशासनिक गलती का नहीं बल्कि पहचान रिश्तों और परिवार जैसी गहरी मानवीय भावनाओं का भी है। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला चिकित्सा इतिहास के सबसे गंभीर लापरवाही के मामलों में गिना जा सकता है और भविष्य में अस्पतालों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।

  • अमेरिका में हरी मिर्च के दाम सुनकर चौंके भारतीय एक छोटे पैकेट की कीमत ने सोशल मीडिया पर मचा दी बहस

    अमेरिका में हरी मिर्च के दाम सुनकर चौंके भारतीय एक छोटे पैकेट की कीमत ने सोशल मीडिया पर मचा दी बहस


    नई दिल्ली। भारतीय रसोई में हरी मिर्च का महत्व किसी से छिपा नहीं है। दाल सब्जी चटनी सलाद या पराठा लगभग हर व्यंजन में इसका इस्तेमाल आम बात है। देश के कई हिस्सों में तो सब्जी खरीदते समय दुकानदार कुछ हरी मिर्च बिना अतिरिक्त पैसे लिए ही थैले में रख देता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी हरी मिर्च को चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला वहां बिकने वाली हरी मिर्च की कीमत दिखाती है जिसे देखकर बड़ी संख्या में भारतीय हैरान रह गए।

    वीडियो में महिला एक छोटा पैकेट दिखाती है जिसमें लगभग 114 ग्राम हरी मिर्च है। उसके अनुसार इस पैकेट में करीब 12 से 13 मिर्च हैं और इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 400 रुपये के बराबर पड़ती है। महिला का दावा है कि यदि इसी अनुपात से एक किलोग्राम की कीमत निकाली जाए तो यह करीब 3500 रुपये तक पहुंच सकती है। वीडियो में वह हल्के फुल्के अंदाज में कहती है कि भारत में इतनी मिर्च तो कई बार सब्जी वाला मुफ्त में दे देता है। यही तुलना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।

    वीडियो सामने आने के बाद भारतीय यूजर्स ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने लिखा कि भारत के अधिकांश शहरों में 20 से 30 रुपये में अच्छी मात्रा में हरी मिर्च मिल जाती है। कुछ ने मजाक करते हुए कहा कि इतने पैसों में भारत में पूरे परिवार के लिए सब्जियां खरीदी जा सकती हैं। वहीं कुछ लोगों ने सलाह दी कि विदेश जाने वाले भारतीय अपने साथ हरी मिर्च ले जाया करें।

    हालांकि कई यूजर्स ने इस तुलना को अधूरा भी बताया। उनका कहना था कि केवल डॉलर को रुपये में बदलकर किसी वस्तु की कीमत की तुलना करना सही तस्वीर पेश नहीं करता। अमेरिका में औसत आय भारत की तुलना में कहीं अधिक है और वहां की क्रय शक्ति भी अलग है। इसलिए किसी भी वस्तु की वास्तविक लागत को समझने के लिए वहां की आय जीवनयापन का खर्च कर व्यवस्था और स्थानीय बाजार की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में भारतीय भोजन में इस्तेमाल होने वाली कुछ विशेष किस्म की हरी मिर्च हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती। कई बार इन्हें दूसरे क्षेत्रों या देशों से आयात किया जाता है। इसके अलावा पैकिंग परिवहन कोल्ड स्टोरेज और श्रम लागत जैसी कई वजहें भी कीमत बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि कुछ भारतीय खाद्य सामग्री वहां अपेक्षाकृत महंगी दिखाई देती है।

    यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका के अलग अलग शहरों और स्टोर्स में कीमतें अलग हो सकती हैं। भारतीय ग्रॉसरी स्टोर एशियन मार्केट और बड़े सुपरमार्केट में एक ही वस्तु अलग कीमत पर मिल सकती है। इसी तरह मौसम और उपलब्धता के अनुसार दाम बदलते रहते हैं। इसलिए किसी एक वीडियो में दिखाई गई कीमत को पूरे अमेरिका का मानक नहीं माना जा सकता।

    भारत में भी हरी मिर्च की कीमत पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। मौसम फसल और आपूर्ति के अनुसार इसके दाम बदलते रहते हैं। कई बार यह बेहद सस्ती होती है तो कई बार कीमत काफी बढ़ जाती है। यह वायरल वीडियो केवल हरी मिर्च की कीमत का नहीं बल्कि भारत और विदेश की जीवनशैली तथा खर्च के अंतर पर भी चर्चा छेड़ रहा है। यही वजह है कि यह वीडियो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया है।

  • सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही

    सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का नाम आते ही लोगों के मन में माउंट एवरेस्ट हिमालय और कंचनजंगा जैसी विशाल चोटियों की तस्वीर उभर आती है। इन पर्वतों पर चढ़ना साहस धैर्य और कठिन प्रशिक्षण की मांग करता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी चर्चा में है जिसे दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहा जा रहा है। यह जगह अपने आकार से ज्यादा अपने अनोखे दावे और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    सोशल मीडिया पर इसे माउंट पॉल्ट्री के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि इसकी ऊंचाई केवल कुछ सेंटीमीटर है और कई पोस्ट में इसे लगभग सात सेंटीमीटर ऊंचा बताया गया है। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग मजाकिया अंदाज में खुद को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी का विजेता बताते हुए फोटो और वीडियो साझा करते हैं। हालांकि इस दावे की किसी आधिकारिक भूगोल या वैज्ञानिक संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इसे अधिकतर इंटरनेट पर वायरल सामग्री के रूप में ही देखा जाता है।

    इस कथित पहाड़ी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी विशेष प्रशिक्षण या पर्वतारोहण उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। जहां बड़े पर्वतों पर चढ़ने में कई दिन लग जाते हैं वहीं इस छोटे प्राकृतिक उभार को बच्चे बुजुर्ग और यहां तक कि पालतू जानवर भी कुछ ही कदमों में पार कर लेते हैं। यही सरलता इसे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती है और परिवारों के लिए यह एक मनोरंजक अनुभव बन जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में क्वर्की टूरिज्म यानी अनोखी और अलग तरह की जगहों पर घूमने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अब केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जिनकी कहानी रोचक हो और जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया जा सके। माउंट पॉल्ट्री भी इसी वजह से चर्चा में आया है। यहां आने वाले पर्यटक कुछ सेकंड की चढ़ाई को भी खास उपलब्धि की तरह पेश करते हैं और मजेदार कैप्शन के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं।

    हालांकि भूगोल के विशेषज्ञ किसी स्थान को पहाड़ या पर्वत मानने के लिए उसकी ऊंचाई प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन करते हैं। ऐसे में इतनी कम ऊंचाई वाले प्राकृतिक उभार को अधिकतर विशेषज्ञ पहाड़ी की बजाय छोटा टीला या प्राकृतिक उभार मानते हैं। इसलिए माउंट पॉल्ट्री को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहना एक लोकप्रिय दावा जरूर है लेकिन इसे स्थापित भौगोलिक तथ्य नहीं माना जाता।

    फिर भी इस अनोखी जगह ने यह साबित कर दिया है कि किसी स्थान की लोकप्रियता केवल उसके आकार से तय नहीं होती। जहां एक ओर दुनिया की ऊंची चोटियां साहस और रोमांच का प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह की छोटी और अनोखी जगहें लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करती हैं। यही कारण है कि इंटरनेट पर माउंट पॉल्ट्री लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे देखने तथा अपनी यादगार तस्वीरें लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत

    ईरान का सख्त संदेश परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता विदेश मंत्री बोले होर्मुज हमारी सबसे बड़ी ताकत


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान को न तो धमकी देकर झुका सकते हैं और न ही किसी तरह का लालच देकर उसकी नीतियां बदलवा सकते हैं। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब समझ चुकी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है।

    अराघची ने युद्ध के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि हालात इतने गंभीर थे कि सरकार और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया था। संचार व्यवस्था बाधित हो गई थी और कई घंटों तक यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सुरक्षित है और कौन नहीं। उनके अनुसार उस समय पूरे नेतृत्व तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती हालात को समझना और प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना था।

    विदेश मंत्री ने दावा किया कि संघर्ष शुरू होने से पहले कई अंतरराष्ट्रीय माध्यमों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए मनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान विभिन्न प्रस्तावों और प्रलोभनों के जरिए ईरान को अपने रुख से पीछे हटाने का प्रयास हुआ लेकिन तेहरान ने इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। अराघची ने कहा कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन किसी सौदे का विषय नहीं है क्योंकि इसके लिए देश ने वर्षों तक आर्थिक प्रतिबंध झेले हैं और कई परमाणु वैज्ञानिकों ने अपनी जान गंवाई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि ईरान की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है इसलिए इसकी सुरक्षा और नियंत्रण का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। अराघची के अनुसार हालिया संघर्ष ने यह दिखा दिया कि इस क्षेत्र में ईरान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    ईरान के भीतर चल रही राजनीतिक बहस पर भी विदेश मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युद्ध और संघर्ष के बावजूद देश की मूल नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मित्र और विरोधी दोनों यह स्वीकार कर रहे हैं कि हालिया घटनाओं के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक मजबूत होकर उभरा है। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों ने देश की सैन्य और राजनीतिक क्षमता को और मजबूती दी है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चिंता बनी रहती है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकता है। इसी कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

    अराघची के ताजा बयान से साफ है कि ईरान अपनी रणनीतिक और परमाणु नीतियों पर फिलहाल किसी नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका ईरान संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक संवाद और तनाव कम करने के प्रयास पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

  • मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली

    मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली


    नई दिल्ली। लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देते हुए उनके लिए नई सीटें आवंटित कर दी हैं। इस फैसले का असर केवल इन सांसदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे सीटिंग प्लान में बदलाव करना पड़ा जिसके चलते कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गईं। नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से लागू होगी और सभी सांसद अपने नए डिवीजन नंबर तथा नई सीटों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

    लोकसभा सचिवालय के अनुसार टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एक साथ बैठाने के लिए सदन की पूरी बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था। इसी कारण कई अन्य सांसदों की सीटें भी बदलनी पड़ीं। संसद में सीटों का निर्धारण डिवीजन नंबर के आधार पर किया जाता है और यही नंबर किसी सांसद की पहचान तथा उसकी निर्धारित सीट तय करता है। संसदीय कार्यवाही के दौरान मतदान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में भी इसी डिवीजन नंबर का उपयोग किया जाता है।

    इस फेरबदल का असर कई प्रमुख नेताओं पर भी पड़ा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की सीट बदल दी गई है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के पी वी मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को भी नई सीटें आवंटित की गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय की सीट भी बदलकर 354 कर दी गई है जबकि पहले उनका सीट नंबर 280 था। इन बदलावों के साथ संसद की नई बैठक व्यवस्था मानसून सत्र में पहली बार देखने को मिलेगी।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शनिवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। पहला फैसला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार करने से जुड़ा था। दूसरा फैसला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का था। जानकारी के अनुसार ये सभी सांसद अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई से जुड़े हुए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अलग बैठने की मांग की थी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है। संसद में किसी समूह को अलग सीटें मिलना उसकी अलग पहचान को भी दर्शाता है। ऐसे में इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे समय में सीटिंग प्लान में यह बदलाव राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद सांसद अपने नए डिवीजन नंबर के अनुसार सदन में बैठेंगे और संसदीय कार्यवाही में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है क्योंकि विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुका है।

  • INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत

    INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत


    नई दिल्ली। देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसरो के मौसम उपग्रह INSAT 3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत का लगभग दो तिहाई हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढक चुका है। जम्मू कश्मीर से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों बिहार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का घना फैलाव दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश आंधी और कहीं कहीं अत्यधिक वर्षा का कारण बन सकती है।

    19 जुलाई को जारी सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण के अनुसार देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत भूभाग पर बादलों का प्रभाव देखा गया। सबसे घने बादल पंजाब उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर मौजूद हैं जबकि पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य बादलों की मोटी परत से ढके हुए हैं। दक्षिण भारत में भी अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण लंबी बादल पट्टियां सक्रिय दिखाई दे रही हैं। हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत साफ मौसम बना हुआ है।

    INSAT 3DR भारत का अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊपर भू स्थिर कक्षा में रहकर लगातार मौसम पर नजर रखता है। यह हर आधे घंटे में नई तस्वीरें भेजता है जिनका उपयोग भारतीय मौसम विभाग मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने के लिए करता है। उपग्रह के विजिबल और थर्मल इंफ्रारेड सेंसर बादलों की मोटाई ऊंचाई और तापमान का विश्लेषण करते हैं जिससे यह पता लगाया जाता है कि किस क्षेत्र में सामान्य बादल हैं और कहां खतरनाक तूफानी बादल विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर यानी बादलों की ऊपरी सतह का तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है। जितना अधिक ठंडा बादल का ऊपरी हिस्सा होगा उतना ही ऊंचा और शक्तिशाली वह बादल माना जाता है। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज चमक वाले तूफान का संकेत देते हैं जबकि माइनस 70 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले बादल बेहद खतरनाक मौसम प्रणाली का हिस्सा माने जाते हैं। ताजा तस्वीरों में जम्मू कश्मीर के ऊपर माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडे बादल दर्ज किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पूर्वोत्तर में भी अत्यधिक सक्रिय बादल मौजूद हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह बादल होने का मतलब भारी बारिश नहीं होता। हल्के मानसूनी बादल केवल सामान्य वर्षा या बूंदाबांदी करा सकते हैं जबकि अत्यधिक बारिश केवल उन क्षेत्रों में होती है जहां गहरे और ऊंचे तूफानी बादल विकसित होते हैं। फिलहाल उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। ऐसे समय में INSAT 3DR जैसे आधुनिक मौसम उपग्रह मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखें और भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार

    हार के बाद कप्तान शुभमन गिल का बड़ा खुलासा डेथ ओवरों की खराब गेंदबाजी ने छीनी जीत रोहित की पारी को बताया यादगार


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए निर्णायक तीसरे वनडे में 27 रन की हार के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 1-2 से गंवा दी। मुकाबला खत्म होने के बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने हार के कारणों पर खुलकर बात की और माना कि टीम 45वें ओवर तक मुकाबले में पूरी तरह बनी हुई थी लेकिन आखिरी तीन ओवरों में की गई महंगी गेंदबाजी ने जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गिल ने यह भी कहा कि शुरुआती ओवरों में अनुशासित गेंदबाजी नहीं होने से इंग्लैंड को बड़ी साझेदारी बनाने का मौका मिल गया जिसका असर पूरे मैच पर पड़ा।

    मैच के बाद गिल ने कहा कि भारतीय टीम की स्थिति 45वें ओवर तक मजबूत थी और खिलाड़ी मुकाबले में वापसी की उम्मीद बनाए हुए थे। हालांकि अंतिम तीन ओवरों में करीब 60 रन खर्च करने से इंग्लैंड विशाल स्कोर तक पहुंच गया। उनके अनुसार यही वह मोड़ था जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। कप्तान ने माना कि यदि डेथ ओवरों में गेंदबाज बेहतर नियंत्रण रखते तो लक्ष्य काफी हद तक सीमित किया जा सकता था।

    शुभमन गिल ने रन चेज की रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि टीम ने पहले से योजना बनाई थी कि शुरुआती 40 ओवर तक विकेट बचाकर रखे जाएंगे और पावरप्ले के बाद रन गति लगभग छह से साढ़े छह रन प्रति ओवर रखी जाएगी। इसके बाद अंतिम दस ओवरों में तेज बल्लेबाजी करते हुए 100 से 110 रन बनाने का लक्ष्य रखा गया था। गिल का मानना था कि यदि यह योजना पूरी तरह लागू हो जाती तो भारत के पास मुकाबला जीतने का शानदार मौका होता।

    भारतीय कप्तान ने गेंदबाजी विभाग की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पावरप्ले के दौरान गेंदबाजों ने जरूरत से ज्यादा ऑफ स्टंप के बाहर गेंदें फेंकीं जिसका इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों ने पूरा फायदा उठाया। इससे मेजबान टीम ने शुरुआत से ही दबदबा बना लिया और भारत को लगातार दबाव में रखा। गिल के अनुसार पावरप्ले और डेथ ओवरों की गेंदबाजी दोनों ही विभागों में टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सीरीज हारने के बावजूद शुभमन गिल ने टीम के प्रदर्शन में कई सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों ने पूरी सीरीज में लगातार रन बनाए और गेंदबाजों ने भी अलग अलग मुकाबलों में विकेट लेकर योगदान दिया। उनके अनुसार यह प्रदर्शन आने वाले महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए टीम का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है और खिलाड़ी अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    गिल ने इस दौरान रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रोहित ने वर्षों से दुनिया के अलग अलग देशों में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है और लॉर्ड्स में खेली गई 138 रन की पारी भी उसी स्तर की थी। कप्तान ने कहा कि मैच के अंतिम चरण में पिच धीमी हो चुकी थी और ऐसे हालात में इतनी शानदार बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। उनके अनुसार रोहित की पारी देखना हर क्रिकेट प्रेमी के लिए किसी खास अनुभव से कम नहीं था।

    गौरतलब है कि इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 387 रन का विशाल स्कोर बनाया। बेन डकेट ने 141 रन जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन की शानदार पारी खेली। जो रूट ने नाबाद 74 और जोस बटलर ने तेज 41 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जवाब में रोहित शर्मा के 138 रन शुभमन गिल के 77 और विराट कोहली के 74 रन भी भारत को जीत नहीं दिला सके और टीम 360 रन तक ही पहुंच सकी। इस हार के साथ इंग्लैंड ने वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली।

  • हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई

    हिटमैन का ऐतिहासिक शतक बेकार इंग्लैंड में तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड लेकिन भारत 27 रन से हारा और सीरीज गंवाई


    नई दिल्ली। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले में अपने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया जिसने एक बार फिर उनकी क्लास और अनुभव की झलक दुनिया को दिखा दी। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर रोहित ने 138 रन की शानदार शतकीय पारी खेलते हुए न सिर्फ अपनी फॉर्म में दमदार वापसी की बल्कि आठ साल पुराना अपना ही रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। हालांकि उनकी यह यादगार पारी भारत को जीत नहीं दिला सकी और टीम को 27 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-2 से गंवा दी जबकि इससे पहले टी20 सीरीज भी इंग्लैंड के नाम रही थी।

    रोहित शर्मा ने अपनी पारी के दौरान शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 17 चौके और 5 छक्के लगाए। शुरुआत से ही उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए। इस पारी के साथ रोहित इंग्लैंड की धरती पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने वर्ष 2017 में ट्रेंट ब्रिज में खेली गई अपनी 137 रन की नाबाद पारी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया।

    भारतीय पारी की शुरुआत भी शानदार रही। रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 147 रन की मजबूत साझेदारी कर टीम को बेहतरीन शुरुआत दिलाई। गिल ने 77 रन की शानदार पारी खेली और रोहित का अच्छा साथ निभाया। गिल के आउट होने के बाद विराट कोहली ने भी जिम्मेदारी संभाली और रोहित के साथ दूसरे विकेट के लिए 113 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। कोहली ने 60 गेंदों में 74 रन बनाते हुए लक्ष्य का पीछा करने की उम्मीदों को जिंदा रखा।

    पहले दो वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा था जिसके बाद उनकी फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। आलोचकों ने उनकी बल्लेबाजी पर सवाल खड़े किए थे लेकिन तीसरे मुकाबले में उन्होंने अपने अनुभव और क्षमता का शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी आलोचनाओं का जवाब बल्ले से दिया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास साफ नजर आया और हर शॉट में पुरानी लय दिखाई दी।

    हालांकि रोहित की शानदार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। 388 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट पर 360 रन ही बना सका। रोहित गिल और कोहली के अलावा अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सके। ईशान किशन 14 रन बनाकर आउट हो गए जबकि श्रेयस अय्यर बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। केएल राहुल केवल 12 रन ही बना सके और अक्षर पटेल भी 2 रन बनाकर सस्ते में आउट हो गए। मध्यक्रम की यही नाकामी भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी।

    इससे पहले इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 387 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। बेन डकेट ने 141 रन की शानदार पारी खेली जबकि जैकब बेथेल ने 91 रन बनाए। अनुभवी बल्लेबाज जो रूट ने नाबाद 74 रन जोड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और अंत में जोस बटलर ने सिर्फ 13 गेंदों में 41 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत के सामने बेहद कठिन लक्ष्य खड़ा कर दिया।

    भले ही भारत सीरीज हार गया हो लेकिन रोहित शर्मा की रिकॉर्डतोड़ पारी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाएगी। बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता एक बार फिर साबित हुई है और आने वाले महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों से पहले उनका फॉर्म में लौटना टीम इंडिया के लिए राहत की खबर है।