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  • ट्रंप ने किया H-1B Visa की नई फीस को सपोर्ट…. बोले- 'अमेरिकी वर्कर को मिले जॉब

    ट्रंप ने किया H-1B Visa की नई फीस को सपोर्ट…. बोले- 'अमेरिकी वर्कर को मिले जॉब


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में H-1B वीजा (US H-1B Visa) सरकार के निशाने पर आ चुका है और इसके जरिए विदेशों से होने वाली हायरिंग को मुश्किल बनाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने H-1B वीजा याचिका पर लगाई जाने वाली फीस को लेकर पेश किए गए एक प्रस्ताव को सपोर्ट किया है। उनका कहना है कि इससे कंपनियां अब विदेश से स्किल वर्कर को लाने से पहले अमेरिकी वर्कर्स को नौकरी और ट्रेनिंग देंगी। फीस से उन्हें ऐसा करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

    अमेरिका में लेबर डे के मौके पर दिए गए एक संदेश में उन्होंने H-1B वीजा को लेकर ये सारी बातें कही हैं। ट्रंप ने कहा, ‘ये तय करने के लिए कि हम अमेरिकी वर्कर्स को काम पर रखें और उन्हें ट्रेनिंग दें, हम H-1B वीजा याचिकाओं पर एक नई फीस का प्रस्ताव रख रहे हैं। इससे कंपनियां विदेश से लेबर देखने से पहले योग्य अमेरिकियों में निवेश करने के लिए प्रेरित होंगी।’ उनके इस बयान के बाद अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों की परेशानियां बढ़ गई हैं।


    जिस प्रस्ताव को ट्रंप ने सपोर्ट किया, उसमें क्या है?

    दरअसल, ट्रंप के संदेश में जिस फीस का जिक्र किया गया है, वो लेबर डे पर शुरू किया गया कोई नया चार्ज नहीं है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने इससे पहले कैप-सब्जेक्ट H-1B आवेदनों के लिए 1,03,265 डॉलर (लगभग 97 लाख रुपये) की फीस का प्रस्ताव रखा था। इस फीस से एडवांस डिग्री यानी मास्टर्स-पीएचडी वाले लोगों को भी छूट नहीं दी जा रही है। ये प्रस्तावित फीस मौजूदा इमिग्रेशन खर्चों के अलावा, H-1B याचिका दाखिल करते समय चुकानी होगी। ये कदम फेडरल रेगुलेटरी प्रोसेस का हिस्सा है और फिलहाल कोई एक्टिव चार्ज नहीं है।


    अमेरिकी कंपनियां अब वापस लौट रहीं देश: ट्रंप

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्तावित H-1B फीस को डॉमेस्टिक एंप्लॉयमेंट और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के अपने बड़े अभियान से जोड़ा है। उनकी लेबर डे की स्पीच का फोकस अमेरिकी वर्कर्स, इंडस्ट्रियल कंपनियां और ट्रेड नीतियां रहीं। ट्रंप ने कहा, ‘दशकों से विनाशकारी ट्रेड पॉलिसी की वजह से हमारी इंडस्ट्रियल ताकत दूसरे देशों को सौंप दी गई, अब कंपनियां वापस लौट रही हैं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में खरबों डॉलर निवेश कर रही हैं और 9 लाख से ज्यादा जॉब्स जोड़ी गई हैं।’


    भारतीयों की चिंता क्यों बढ़ी?

    दरअसल, अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम के जरिए बड़ी टेक कंपनियां और अन्य सेक्टर्स की कंपनियां स्किल वर्कर्स की हायरिंग करती हैं। H-1B वीजा पाने में भारतीय सबसे आगे रहते हैं। 2024 में अकेले वीजा का 71% भारतीयों को मिला। इस वीजा पर जॉब करने वाले भारतीयों को ये डर सता रहा है कि अगर उनकी नौकरी चली जाती है और फिर ये नई फीस लागू हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में अमेरिकी कंपनियां उन्हें दोबारा से नौकरी नहीं देंगी।

    अमेरिकी कंपनियों के लिए उनकी हायरिंग महंगी हो जाएगी। इसी तरह से अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय भी चिंतित हैं, क्योंकि नई फीस के दायरे में वो भी होंगे। कोई भी कंपनी इतनी महंगी फीस देकर उन्हें भी नौकरी देने से बचेगी। भारत में भी जो लोग अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने का प्लान कर रहे हैं, उनके लिए भी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं, क्योंकि उन्हें भी वीजा पाने में दिक्कत आ सकती है।

  • दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील

    दिल्ली आ रहे चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग… भारत के साथ हो सकती है दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) भारत (India) आ रहे हैं। इस दौरे पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। जिनपिंग अपने साथ तोहफा भी ला रहे हैं।

    दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) की आपूर्ति को लेकर भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझौते के आसार हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के मद्देनजर इस समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर की शाम को द्विपक्षीय वार्ता होगी। वहीं रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ 11 को द्विपक्षीय वार्ता होगी।

    गौरतलब है कि पूर्व में चीन के साथ हुई बातचीत में वह भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दिला चुका है। अब सूत्रों का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।


    भारत तीसरे स्थान पर

    इससे पहले भारत में दुनिया के करीब छह फीसदी दुर्लभ खनिज होने का अनुमान है। इस मामले में भारत तीसरे स्थान पर है। हालांकि अभी तक इनका पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। कुछ समय पहले भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू किया है, जिसका मकसद ऐसे दुलर्भ खनिजों की खोजना है। सरकार ने बताया था कि भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात,महाराष्ट्र में 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है।


    क्या है दुर्लभ खनिज?

    दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व हैं, जिनमें से सात चीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इनमें स्कैडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेनियम शामिल हैं। दुनिया में इन दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता का करीब 80 फीसदी हिस्सा अकेले चीन में है। ऐसे में कई देश इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। यदि भारत के साथ यह समझौता होता है तो भारत को भी इन खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

    रूस सहयोग को तैयार

    इस बीच, रूस ने भी कहा है कि वह भारत को दुर्लभ खनिजों की खोज में मदद करने के लिए तैयार है। यह एक बेहद जटिल कार्य है और रूस की कंपनियों के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस संबंध में भारत को सहयोग देने के लिए तैयार है। पुतिन की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं, दुबले-पतले लोगों में भी बढ़ सकता है खतरा; जानें किन कारणों से लिवर में जमा होती है चर्बी

    फैटी लिवर सिर्फ मोटे लोगों की बीमारी नहीं, दुबले-पतले लोगों में भी बढ़ सकता है खतरा; जानें किन कारणों से लिवर में जमा होती है चर्बी

    नई दिल्ली । फैटी लिवर की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। शराब का सेवन न करने वाले लोगों में होने वाली नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का नाम बदलकर अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज किया गया है। यह लिवर की सबसे आम क्रोनिक बीमारियों में शामिल है और बड़ी संख्या में वयस्कों को प्रभावित करती है।

    भारत में भी फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर इसे अधिक वजन और मोटापे से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें लिवर में चर्बी जमा होने का खतरा अधिक रहता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दुबले-पतले या सामान्य वजन वाले लोग इससे पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर का वजन सामान्य होने के बावजूद लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। मेडिकल क्षेत्र में ऐसे मामलों को लंबे समय से लीन फैटी लिवर के रूप में जाना जाता रहा है। फैटी लिवर वाले कुछ लोगों का शरीर दुबला हो सकता है, इसलिए केवल शरीर का आकार देखकर लिवर को स्वस्थ मान लेना सही नहीं है।

    दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के अंदर जमा आंतरिक चर्बी, डायबिटीज, बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबोलिक समस्याएं इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा शराब का सेवन, कुछ दवाएं और लिवर से जुड़ी अन्य बीमारियां भी लिवर में चर्बी जमा होने का कारण बन सकती हैं। इसलिए यह मानना सही नहीं है कि दुबला शरीर होने की वजह से फैटी लिवर का खतरा नहीं हो सकता।

    सामान्य बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शरीर में चर्बी का वितरण भी स्वस्थ है। कुछ लोगों का शरीर बाहर से दुबला दिखाई दे सकता है, लेकिन पेट के आसपास या शरीर के अंदर अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। ऐसी स्थिति में मेटाबोलिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है और फैटी लिवर का खतरा बढ़ सकता है।

    डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसी समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दुबले-पतले लोगों में यदि इनमें से कोई जोखिम मौजूद है तो डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

    फैटी लिवर की शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है। कई लोगों को बीमारी के शुरुआती चरण में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। यदि जांच के दौरान लिवर एंजाइम बार-बार बढ़े हुए मिल रहे हैं या डायबिटीज जैसी मेटाबोलिक समस्या मौजूद है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर लिवर के स्वास्थ्य और फैटी लिवर के जोखिम का मूल्यांकन कराया जा सकता है।

    फैटी लिवर से बचाव के लिए सिर्फ वजन कम करना ही पर्याप्त नहीं है। दुबले-पतले लोगों के लिए भी नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और अत्यधिक चीनी तथा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। डायबिटीज, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी लिवर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

    अगर जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हो चुकी है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर की स्थिति और फाइब्रोसिस के जोखिम का मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। समय रहते खानपान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार लेने से बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल

    शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

    बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

    9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

    10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

    निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

    फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।

  • विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है

    विजय माल्या बोले- कॉकरोच बन जाना चाहिए, शायद उनकी जिंदगी बेहतर है


    नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी स्थिति की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा है कि शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर होती है। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक युवा आंदोलन चर्चा में है। माल्या ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को कथित अन्याय से जोड़ते हुए यह टिप्पणी की है।

    माल्या ने एक्स पर क्या लिखा?
    माल्या ने एक्स पर लिखा, “मैंने जितनी भी नाइंसाफियां झेली हैं और झेल रहा हूं, उन्हें देखते हुए सोचता हूं कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की जिंदगी बेहतर हो।”

    माल्या लंबे समय से अपने खिलाफ हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते रहे हैं। हालिया पोस्ट में भी उन्होंने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों के चलते वह वहां से बाहर नहीं जा सकते।

    ‘कॉकरोच’ शब्द से शुरू हुआ व्यंग्यात्मक आंदोलन

    2026 में ‘कॉकरोच’ शब्द सोशल मीडिया की राजनीति में एक अलग प्रतीक के तौर पर सामने आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की शुरुआत व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। आंदोलन के जरिए बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए गए।

    CJP के नाम को उस समय ज्यादा चर्चा मिली, जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की ओर से कुछ बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। आंदोलन से जुड़े लोगों ने ‘कॉकरोच’ शब्द को अपमान के बजाय व्यंग्यात्मक पहचान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

    इसके बाद आंदोलन सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी दिखाई दिया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए। जुलाई में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी आंदोलन से जुड़े दबाव के संदर्भ में बताया गया है।

    विजय माल्या पर क्या मामले हैं?

    विजय माल्या कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में गिने जाते थे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज समूह से जुड़े रहे और किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमोटर थे। एयरलाइन के वित्तीय संकट के बाद भारतीय बैंकों का हजारों करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।

    माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बकाये से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। भारत सरकार उनकी वापसी के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया भी चला रही है।

    संपत्तियों को लेकर माल्या का दावा

    माल्या का कहना है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई में उनके साथ अन्याय हुआ है। हालिया बयानों में उन्होंने दावा किया है कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और एजेंसियों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम वसूल की है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्या ने दावा किया कि करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं, जबकि वह अपनी देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये बताते हैं। ये आंकड़े माल्या के दावे के तौर पर ही देखे जाने चाहिए, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।

    अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या की संपत्तियों की जब्ती और बैंक रिकवरी से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को खत्म करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। माल्या के वकील ने अदालत में दावा किया था कि बैंकों ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है।

    CJP से जुड़े विवाद भी जारी

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ हाल के दिनों में भी सक्रिय रही है। सितंबर में इसके समर्थकों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने तक मार्च किया और एक प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग की।

    9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से CJP के प्रदर्शन में शामिल एक कानून छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने इस मामले में प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही।

    इसी बीच CJP से जुड़ा एक और कानूनी विवाद सामने आया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने CJP, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

  • लाल किला धमाका: जूते से एक्टिवेट किया था IED, NIA चार्जशीट में सामने आया पूरा प्लान

    लाल किला धमाका: जूते से एक्टिवेट किया था IED, NIA चार्जशीट में सामने आया पूरा प्लान


    नई दिल्ली। लाल किले के पास पिछले साल हुए बम धमाके को लेकर NIA की चार्जशीट में अहम खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक, डॉ. उमर उन नबी ने धमाका घबराहट में नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना के तहत किया था। उसने अपने जूते में लगी पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए कमांड मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर कार में रखे IED को एक्टिवेट किया था। यानी धमाके के लिए पैर या जूते से संचालित होने वाला ट्रिगर तैयार किया गया था।

    NIA के मुताबिक, इससे यह आशंका भी दूर होती है कि नबी से किसी गलती या घबराहट के कारण विस्फोट हुआ था। जांच में सामने आया कि लाल किले के इलाके को पहले से निशाना बनाया गया था। एजेंसी का कहना है कि हमलावरों के लिए लाल किला भारतीय सत्ता का प्रतीक था और इसी वजह से यहां हमला करने की योजना बनाई गई।

    इस साल मई में NIA ने मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। दिल्ली की एक अदालत ने 29 अगस्त को इसका संज्ञान लिया। धमाके में नबी समेत 12 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 लोग घायल हुए और 24 वाहन तबाह हुए। NIA के अनुसार, हमले में अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े डॉक्टरों के एक समूह की भूमिका थी, जिसका संबंध भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) से बताया गया है।

    फॉरेंसिक जांच में जूते से मिला अहम सुराग

    NIA की चार्जशीट के अनुसार, फॉरेंसिक जांच से यह पुष्टि हुई कि विस्फोट में वाहन के अंदर रखा IED इस्तेमाल किया गया था। घटनास्थल से ‘रेड-टेप’ ब्रांड का एक जूता मिला। उसके सिर्फ एक जूते की एड़ी में धातु का टुकड़ा लगा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह IED को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए कमांड मैकेनिज्म की ओर इशारा करता है।

    चार्जशीट में कहा गया है कि नाक से लिए गए स्वैब की जांच में TATP (ट्राई-एसीटोन ट्राई-पेरोक्साइड) और अमोनियम नाइट्रेट के अंश मिले। NIA का दावा है कि इससे संकेत मिलता है कि विस्फोट के वक्त नबी कार में मौजूद था और उसी ने कमांड मैकेनिज्म के जरिए IED को एक्टिवेट किया।

    पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट से तैयार किया गया था ट्रिगर

    जांच एजेंसी के मुताबिक, IED तैयार करने में सह-आरोपी और बम विशेषज्ञ जासिर बिलाल वानी की भूमिका थी। चार्जशीट में कहा गया है कि उसने ट्रांसड्यूसर तकनीक का इस्तेमाल किया था। इसमें पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट के जरिए दबाव या कंपन जैसी यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है और इसके विपरीत भी।

    NIA का दावा है कि वानी ने यह पीजोइलेक्ट्रिक प्लेट नबी को दी थी। घटनास्थल से मिले नबी के जूते में इसके पाए जाने और विस्फोटक विशेषज्ञों की जांच के आधार पर एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला कि नबी ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर विस्फोटक सामग्री से भरी हुंडई i20 में धमाका किया।

    लाल किले की कई बार रेकी का दावा

    चार्जशीट में नबी की लाल किले के इलाके में लगातार आवाजाही का भी जिक्र है। NIA के मुताबिक, दिसंबर 2023 से मई 2025 के बीच वह कम से कम 12 बार इस क्षेत्र में गया था। इनमें कुछ यात्राएं उसने अकेले कीं, जबकि कुछ मौकों पर वह डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शहीद सईद के साथ था।

    जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने लाल किले के आसपास IED तैयार करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान भी खरीदा था। NIA का कहना है कि आरोपियों की नजर में लाल किला भारतीय राज्य का प्रतीक था।

    एजेंसी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी के ठिकाने से मिले हाथ से लिखे नोट्स का भी हवाला दिया है। इनमें AGuH के सदस्यों को लोकतंत्र का विरोधी बताया गया और भारत में शरिया कानून लागू करने की इच्छा का उल्लेख था। NIA के अनुसार, इसी विचारधारा के तहत लाल किले के आसपास कई बार आवाजाही की गई।

    सुसाइड बॉम्बर तैयार करने की भी कोशिश

    NIA की चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि नबी और AGuH से जुड़े गिरफ्तार सदस्य मुजम्मिल शकील ऐसे युवाओं की तलाश में रहते थे, जिन्हें संगठन के लिए कट्टरपंथी बनाया जा सके। छात्रों और साथी डॉक्टरों में से संभावित लोगों को भी इसके लिए संपर्क किया जाता था।

    एजेंसी के मुताबिक, नबी ने जासिर बिलाल वानी और शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को आतंकी समूह में शामिल होने के लिए तैयार किया। डार को दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। चार्जशीट में दावा है कि नबी और गिरफ्तार विचारक इरफान अहमद वागे ने वानी और डार को सुसाइड बॉम्बर बनने के लिए प्रेरित किया था।

    डार को दिया गया था ‘45’ कोड नाम

    चार्जशीट के अनुसार, नवंबर 2024 में नबी ने डार को श्रीनगर के इकबाल पार्क बुलाया था। वहां उसकी वागे से मुलाकात कराई गई। NIA का कहना है कि दोनों ने डार को और कट्टरपंथी बनाया और नबी ने उसे ‘45’ कोड नाम दिया।

    इसके बाद मुजम्मिल शकील ने पुलवामा में डार से मुलाकात की और उसे भरोसा दिलाया कि समय आने पर उसे इस्लाम के लिए बुलाया जाएगा। मई-जून 2025 में नबी और वागे ने डार को फिदायीन ऑपरेशन के लिए शपथ दिलाई। NIA के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग वागे के मोबाइल फोन में मिली थी।

  • नीम से निखरेगी त्वचा और ऑयलीनेस पर भी लगेगी लगाम? चेहरे पर लगाने से पहले जान लें सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    नीम से निखरेगी त्वचा और ऑयलीनेस पर भी लगेगी लगाम? चेहरे पर लगाने से पहले जान लें सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । आज के समय में धूल मिट्टी प्रदूषण तेज धूप और लगातार बदलती लाइफस्टाइल का असर सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देता
    है। चेहरे पर ऑयलीनेस पिंपल छोटे दाने और त्वचा की थकान जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। ऐसे में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स के साथ घरेलू नुस्खों की ओर भी रुख करते हैं। नीम इन्हीं पारंपरिक घरेलू उपायों में शामिल है। नीम की पत्तियों का इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की साफ सफाई के लिए किया जाता रहा है। हालांकि इसे किसी त्वचा रोग का पक्का इलाज मानने के बजाय एक घरेलू स्किन केयर विकल्प के तौर पर ही इस्तेमाल करना बेहतर है।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली है तो नीम की साफ और ताजी पत्तियों को अच्छी तरह धोकर हल्का पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर पतला पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर बहुत मोटी परत में लगाने के बजाय हल्की परत लगाएं और थोड़ी देर बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा को रगड़ने के बजाय मुलायम तौलिए से हल्के हाथों से सुखाएं। त्वचा में रूखापन महसूस हो तो हल्का नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। त्वचा को जरूरत से ज्यादा सुखाना भी ठीक नहीं है क्योंकि अत्यधिक ड्राई और इरिटेटेड त्वचा परेशानी बढ़ा सकती है।

    नीम का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। किसी को घरेलू नुस्खा आराम दे सकता है तो किसी की त्वचा पर जलन लालिमा खुजली या सूखापन हो सकता है। इसलिए पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर है। अगर जलन या खुजली महसूस हो तो तुरंत इसे धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। नीम में नींबू बेकिंग सोडा टूथपेस्ट या किसी तेज रसायन को मिलाकर लगाने से बचना चाहिए। त्वचा को ज्यादा रगड़ना या बार बार नए नुस्खे आजमाना भी नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञ भी मुंहासों वाली त्वचा पर स्क्रबिंग और ऐसी चीजों से बचने की सलाह देते हैं जो त्वचा को इरिटेट कर सकती हैं।

    अगर चेहरे पर कभी कभार छोटे पिंपल निकलते हैं तो नीम आधारित हल्की देखभाल के साथ चेहरे को दिन में जरूरत के अनुसार सौम्य क्लींजर से साफ रखना ज्यादा जरूरी है। मेकअप और स्किन केयर प्रोडक्ट चुनते समय ऑयल फ्री और नॉन कॉमेडोजेनिक विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है। दिन में सनस्क्रीन लगाना भी स्किन केयर रूटीन का अहम हिस्सा है। खासकर अगर मुंहासों के बाद चेहरे पर काले दाग रह जाते हैं तो धूप से बचाव जरूरी हो जाता है।

    हालांकि अगर पिंपल लगातार निकल रहे हैं चेहरे पर दर्दनाक गांठें बन रही हैं या मुंहासों के बाद दाग और निशान बढ़ते जा रहे हैं तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार मुंहासों के इलाज में कई प्रमाणित टॉपिकल उपचार उपलब्ध हैं और सही उपचार का चुनाव त्वचा की स्थिति और मुंहासों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।

    इसलिए नीम को स्किन केयर रूटीन में शामिल करना हो तो इसे सरल और सीमित तरीके से इस्तेमाल करें। चेहरे पर कुछ भी लगाने से पहले अपनी त्वचा की संवेदनशीलता को समझना जरूरी है। खूबसूरत त्वचा के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे से ज्यादा जरूरी है नियमित सफाई पर्याप्त मॉइस्चराइजिंग धूप से सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह। नीम आपकी घरेलू देखभाल का हिस्सा हो सकता है लेकिन स्वस्थ त्वचा के लिए पूरी स्किन केयर रूटीन का विकल्प नहीं है।

  • वास्तु के अनुसार नमक का पोछा घर की नकारात्मकता दूर करने में माना जाता है कारगर, जानें सही तरीका

    वास्तु के अनुसार नमक का पोछा घर की नकारात्मकता दूर करने में माना जाता है कारगर, जानें सही तरीका

    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की साफ-सफाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार गंदे और अस्त-व्यस्त घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है, जबकि साफ-सुथरे वातावरण से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी वजह से घर की नियमित सफाई को वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। घर में जमा नकारात्मकता को दूर करने के लिए नमक के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया जाता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में नकारात्मक ऊर्जा के कारण बिना वजह कलह, चिड़चिड़ापन और बने-बनाए कामों में रुकावट जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इन्हें रुकी हुई नकारात्मक ऊर्जा के संकेत के तौर पर देखा जाता है। वास्तु में नमक को प्रभावशाली माना गया है और मान्यता है कि यह नकारात्मक तरंगों तथा नजर दोष को अपने भीतर समाहित कर सकता है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, सही तरीके से नमक का पोछा लगाने से घर की नकारात्मकता दूर करने और शांति तथा समृद्धि का वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।

    अक्सर लोग घर में पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य पानी में ऊपर से नमक मिला देते हैं। हालांकि, बताई गई वास्तु विधि के अनुसार केवल इस तरह नमक मिलाकर पोछा लगाना पर्याप्त नहीं माना जाता। इसके पूरे लाभ के लिए पानी और नमक को एक विशेष तरीके से तैयार करने की बात कही गई है। इसके बाद ही तैयार पानी से घर में पोछा लगाने की सलाह दी जाती है।

    नमक का पोछा तैयार करने के लिए सबसे पहले पानी में खड़ा समुद्री नमक या सेंधा नमक डालना होता है। इसके बाद पानी और नमक को एक साथ अच्छी तरह उबालने की बात कही गई है। दोनों को तब तक उबालना चाहिए, जब तक नमक पानी में अच्छी तरह घुल न जाए। इस प्रक्रिया के बाद पानी को पोछा लगाने के लिए तुरंत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    पानी और नमक के अच्छी तरह उबल जाने के बाद उसे पूरी तरह ठंडा होने के लिए छोड़ देना चाहिए। पानी को प्राकृतिक तरीके से ठंडा होने के बाद ही उससे घर में पोछा लगाने की सलाह दी गई है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी को उबालने से उसमें मौजूद नमक की क्लींजिंग प्रॉपर्टी सक्रिय होती है। मान्यता है कि पानी ठंडा होने के बाद यह नकारात्मक ऊर्जा को बेहतर तरीके से अवशोषित कर सकता है।

    पोछा लगाने के बाद बचे हुए पानी को लेकर भी विशेष सावधानी बताई गई है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार पोछा लगाने के बाद बचा हुआ गंदा पानी घर के अंदर बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। इसे बाथरूम में भी नहीं डालने की सलाह दी गई है। बताया गया है कि इस पानी को घर के बाहर किसी नाली में बहा देना बेहतर रहता है। इस तरह नमक के पोछे के लिए पानी तैयार करने से लेकर उसके इस्तेमाल और बचे हुए पानी को बाहर निकालने तक की पूरी प्रक्रिया को वास्तु के अनुसार महत्वपूर्ण माना गया है।

  • गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान

    गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों का अपना अलग धार्मिक महत्व बताया गया है। इनमें गुरुवार यानी बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा पाठ करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। गुरुवार को गुरु ग्रह से भी जोड़ा जाता है इसलिए इस दिन किए जाने वाले पूजा पाठ व्रत और दान का विशेष महत्व माना गया है। यही वजह है कि कई लोग गुरुवार को अपने जीवन में अच्छे बदलाव और मनोकामना पूर्ति की भावना से विशेष पूजा करते हैं।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में स्नान के पानी में हल्दी मिलाने और पीले रंग के वस्त्र धारण करने की मान्यता भी है। इसके बाद पूजा स्थान की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जा सकता है। पूजा में पीले फूल हल्दी चने की दाल गुड़ और केला अर्पित करने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति से जुड़े मंत्रों का जाप भी करते हैं। ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करने की परंपरा भी बताई जाती है।

    गुरुवार की पूजा में केले के पेड़ का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के वृक्ष को भगवान विष्णु और बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है। यदि घर के आसपास केले का पौधा उपलब्ध हो तो उसकी जड़ में जल अर्पित करके हल्दी और पीले फूल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के पास केले का पेड़ उपलब्ध हो। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने श्रद्धा से पूजा करना भी सरल विकल्प हो सकता है।

    गुरुवार को दान करने की परंपरा भी काफी पुरानी मानी जाती है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल हल्दी गुड़ केला या पीले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक लाभ प्राप्त करना नहीं बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना भी होना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया छोटा दान भी सेवा की भावना को मजबूत करता है। धार्मिक मान्यताओं में पीले रंग को गुरु तत्व से जोड़ा गया है इसलिए गुरुवार की पूजा में पीली वस्तुओं का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है।

    गुरुवार के व्रत को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही नियम अपनाने चाहिए। धार्मिक परंपराओं में गुरुवार को नमक से परहेज करने की मान्यता भी कुछ स्थानों पर मिलती है। इसी तरह बाल कटवाने नाखून काटने और कुछ घरेलू कामों से बचने की परंपराएं भी अलग अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इन नियमों को धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में देखना चाहिए।

    गुरुवार के दिन सबसे महत्वपूर्ण बात केवल पूजा की सामग्री नहीं बल्कि मन की श्रद्धा और व्यवहार को माना जाता है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना क्रोध करना या किसी जरूरतमंद की अनदेखी करना पूजा की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने के साथ अपने व्यवहार में संयम और सकारात्मकता लाने की कोशिश करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का दिन ज्ञान गुरु सम्मान सेवा और सात्विकता से जुड़ा है। ऐसे में पूजा पाठ के साथ अच्छे कर्म और जरूरतमंदों की सहायता को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    इस तरह गुरुवार के नियम केवल पूजा तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह दिन श्रद्धा संयम सेवा और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है। पीले वस्त्र पहनना भगवान विष्णु की पूजा करना केले के पौधे की आराधना करना मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। आस्था रखने वाले लोग अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार इनमें से नियम अपना सकते हैं।

  • वजन सामान्य और शरीर फिट दिखने के बावजूद 30 के बाद क्यों जरूरी है नियमित हेल्थ चेकअप, जानें किन बीमारियों का खतरा

    वजन सामान्य और शरीर फिट दिखने के बावजूद 30 के बाद क्यों जरूरी है नियमित हेल्थ चेकअप, जानें किन बीमारियों का खतरा

    नई दिल्ली । क्या आपकी उम्र 30 साल या उससे ज्यादा है? अगर हां, तो अब अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का समय है। कई ऐसी बीमारियां हैं जो पहले अधिक उम्र के लोगों में आम मानी जाती थीं, लेकिन अब कम उम्र में भी सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में इन बीमारियों के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ समझता रहता है, जबकि शरीर के भीतर बीमारी धीरे-धीरे बढ़ रही होती है।

    सिर्फ सामान्य वजन होना या रोजमर्रा के काम आसानी से कर पाना हमेशा अच्छी सेहत की गारंटी नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना किसी खास संकेत के रह सकते हैं। इसी तरह प्रीडायबिटीज और डायबिटीज भी शुरुआती चरण में कई लोगों में बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकती है। इसलिए केवल बाहरी फिटनेस के आधार पर अपनी सेहत का आकलन करना पर्याप्त नहीं माना जाता।

    भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की गाइडलाइन के अनुसार, बिना लक्षण वाले लोगों में भी 30 वर्ष की उम्र के बाद डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल की जांच पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति को कितनी बार और कौन-कौन से टेस्ट कराने चाहिए, यह उसकी उम्र, पारिवारिक इतिहास और स्वास्थ्य जोखिमों के आधार पर अलग हो सकता है।

    भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा महत्वपूर्ण है। ब्लड शुगर बढ़ने के बावजूद कई लोगों को लंबे समय तक प्यास अधिक लगना, बार-बार पेशाब आना या अत्यधिक थकान जैसे स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग से ब्लड शुगर में होने वाले बदलाव का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

    परिवार में अगर किसी सदस्य को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अधिक वजन की समस्या रही है तो 30 वर्ष के बाद स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहना जरूरी हो जाता है। पारिवारिक इतिहास के साथ कम शारीरिक गतिविधि, असंतुलित खानपान और अधिक वजन जैसे कारक भी मेटाबोलिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

    हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि बहुत से लोगों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। सिरदर्द या चक्कर नहीं आ रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लड प्रेशर सामान्य है। इसी तरह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी आमतौर पर कोई खास लक्षण नहीं देता और इसका पता रक्त जांच के जरिए लगाया जाता है।

    सामान्य वजन वाले लोगों को भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि उन्हें मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा नहीं है। शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान, धूम्रपान और पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास जैसे कारण सामान्य वजन के बावजूद जोखिम बढ़ा सकते हैं।

    30 वर्ष के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। डायबिटीज की स्क्रीनिंग और जोखिम के अनुसार लिपिड प्रोफाइल भी कराया जा सकता है। डॉक्टर आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, खानपान और ब्लड प्रेशर जैसे कारकों को देखकर तय कर सकते हैं कि आपके लिए कौन-कौन से परीक्षण जरूरी हैं।

    अगर लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान शुरुआती चरण में की जा सकती है।