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  • नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका

    नेपाल में बाढ़ का संकट थमा नहीं, कई इलाकों में फिर भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, बढ़ी नई आफत की आशंका


    नई दिल्ली । नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से पैदा हुआ संकट अभी खत्म नहीं हुआ है और इसी बीच मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बुधवार को देश के कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बिजली चमकने का खतरा बताया गया है। बाढ़ से पहले ही प्रभावित लोगों के सामने मौसम की नई चुनौती खड़ी हो गई है।

    मौसम विभाग ने मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेश के कई इलाकों में तेज बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। कोशी, बागमती और गंडकी के ऊंचे हिस्सों में बारिश के साथ बिजली चमक सकती है और बर्फबारी भी हो सकती है। लुंबिनी और कर्णाली के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।

    26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,377 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं 5,326 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में 6,827 लोग घायल हुए हैं। बाढ़ के कारण 7,570 घर टूट गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी मुश्किलें पैदा हुई हैं।

    प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के कारोबार और खासकर चीन के साथ होने वाले व्यापार पर भी पड़ा है। रसुवागढ़ी और तातोपानी सीमा मार्गों को नुकसान पहुंचने के कारण सामान से भरे करीब 500 से 600 कंटेनर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं। इसके अलावा 200 से अधिक नेपाली कंटेनर बाढ़ के पानी में बह चुके हैं। इससे सीमा के रास्ते होने वाली सामान की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    फंसे हुए सामान को वैकल्पिक रास्ते से आगे भेजने की कोशिश की जा रही है। करीब 176 ट्रकों को कोराला मार्ग से भेजने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन इस रास्ते से सामान को पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन लग रहे हैं। इससे व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।

    बाढ़ से नेपाल को आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन में देश को चार लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक के नुकसान की बात सामने आई है। इसमें घरों, सड़कों तथा सरकारी और निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है। नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत तक और बढ़ सकता है।

    नेपाल सरकार के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों में राहत और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। सरकार के अनुमान के अनुसार देश के पुनर्निर्माण और टूटे हुए ढांचे की मरम्मत के लिए चार से पांच अरब डॉलर तक की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से नेपाल दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सहायता मांग रहा है। ऐसे समय में भारी बारिश, आंधी और बर्फबारी की नई चेतावनी ने पहले से प्रभावित इलाकों में चिंता और बढ़ा दी है।

  • इंदौर में 27 नवंबर से तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल का होगा भव्‍य आयोजन

    इंदौर में 27 नवंबर से तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल का होगा भव्‍य आयोजन

    इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में एक बार फिर साहित्य, कला और संस्कृति का अनूठा संगम होने जा रहा है। आगामी 27, 28 और 29 नवंबर 2026 को प्रतिष्ठित इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल (ILF) के अगले संस्करण का भव्य आयोजन किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह वैचारिक उत्सव इंदौर के ऐतिहासिक डेली कॉलेज परिसर में आयोजित होगा, जहां देश-विदेश के प्रख्यात साहित्यकार, लेखक, कवि, पत्रकार और कलाकार एक मंच पर जुटेंगे।

    आयोजन समिति के अनुसार, इस वर्ष का फेस्टिवल कला और विचार-विमर्श के नए आयाम स्थापित करेगा। महोत्सव में समकालीन साहित्य, क्षेत्रीय भाषाएं, डिजिटल मीडिया के दौर में लेखन की चुनौतियां, और सिनेमाई पटकथा जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस तीन दिवसीय आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगी।

    इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल हमेशा से ही युवाओं और विचारकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। इस वर्ष भी उत्सव में छात्र-छात्राओं और उभरते हुए लेखकों को दिग्गज विचारकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा। डेली कॉलेज के हरे-भरे परिसर में विभिन्न सत्रों के लिए विशेष मंच तैयार किए जा रहे हैं, जहां समानांतर रूप से अलग-अलग विषयों पर परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। सांस्कृतिक नगरी इंदौर का यह उत्सव न केवल साहित्य प्रेमियों को आकर्षित करता है, बल्कि यह बौद्धिक विमर्श का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आयोजन को लेकर शहर के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

  • दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के तीसरे दिन 8 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन बैठकों में मध्य प्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, तकनीक, ग्रीन एनर्जी और नगरीय विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को रखते हुए कहा कि राज्य देश के मध्य में स्थित होने के कारण सड़क, रेल और हवाई संपर्क के लिहाज से सुविधाजनक स्थिति में है। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा और कुशल मानव संसाधन को निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश से देश के विभिन्न हिस्सों तक उत्पादों की पहुंच सुगम और त्वरित है।

    क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बद्र जाफर के साथ बैठक में वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने की बात कही। जाफर ने शहरी अधोसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और तकनीक हस्तांतरण में दीर्घकालिक निवेश में रुचि दिखाई। ऊर्जा और तकनीक में नवाचार पर भी चर्चा हुई।

    डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ बैठक में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना बताई। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन सुविधाओं के माध्यम से किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों को बेहतर व्यापार तथा निर्यात सहायता देने पर चर्चा हुई।

    राणा होल्डिंग्स के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा के साथ बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और कृषि मशीनरी में निवेश संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की के साथ बैठक में शिक्षा क्षेत्र में निवेश पर विचार हुआ। कंपनी ने मध्य प्रदेश के प्रमुख और विकासशील शहरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रुचि दिखाई। इन संस्थानों में विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ स्थानीय जरूरतों और भविष्य की शिक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम लागू करने की योजना पर चर्चा हुई।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, तकनीक और ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की इच्छा जताई।

    शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर के साथ शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर चर्चा हुई। इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में रेल-साइडिंग वाले लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार हुआ। इसमें 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश और करीब 300 से 600 रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई।

    वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर के साथ वीजा सेवाओं, पर्यटन, रोजगार और युवाओं के कौशल विकास पर चर्चा हुई। भोपाल और इंदौर में वीजा आवेदन सेवाओं का विस्तार करने तथा युवाओं के लिए यात्रा, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी के साथ आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना और रिटेल क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। समूह मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केंद्र स्थापित करने का इच्छुक है। साथ ही स्थानीय किसानों और उत्पादकों से कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

  • सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ी दुखद घटना के बाद मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनके परिवार से एक व्यक्ति को कथित तौर पर जोड़कर किए जा रहे दावों पर सफाई दी है। मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में जिस व्यक्ति को उनके परिवार या रिश्तेदार से संबंधित बताया जा रहा है, उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बंडा क्षेत्र की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हृदयविदारक घटना है और वह इससे बेहद दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय का सामना करने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

    मंत्री ने कहा कि घटना के बीच कुछ लोगों द्वारा एक गांव के व्यक्ति को उनके परिवार से जोड़ने का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति उनका कोई रिश्तेदार नहीं है और उनके नाम को मामले से जोड़कर जानकारी प्रसारित करना गलत है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने स्वयं सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान या उसका किसी से संबंध कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि आरोपी किसी का रिश्तेदार या नातेदार हो अथवा किसी राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से जुड़ा हो, कानून के सामने किसी को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि सागर जिला उनके परिवार को अच्छी तरह जानता है। मंत्री के अनुसार उनका पूरा परिवार शराब, सट्टा और जुआ जैसी गतिविधियों से हमेशा दूर रहा है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को इस प्रकार की गतिविधियों में सहयोग या संरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं।

    मंत्री ने गंभीर घटना के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सच्चाई सामने लाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील स्थिति में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति या परिवार को बदनाम करने वाली जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं की जानी चाहिए।

    गोविंद सिंह राजपूत ने दोहराया कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है, तो ऐसी गतिविधियों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    बंडा क्षेत्र की घटना को लेकर मंत्री की सफाई का मुख्य केंद्र उनके परिवार से संबंधित बताए जा रहे व्यक्ति के आरोपों को खारिज करना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने जांच में किसी भी तरह के प्रभाव या संबंध को आड़े नहीं आने देने की बात कही है।

    मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि घटना में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और अफवाहों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान में घटना की गंभीरता के बीच तथ्य सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।

  • मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से मुलाकात की। यह बैठक एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के दौरान हुई, जिसमें मध्य प्रदेश और शारजाह के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस को वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए मध्य प्रदेश आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने शारजाह के व्यापारिक समुदाय और कंपनियों से प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह भी किया।

    मुख्यमंत्री ने शारजाह चैंबर के साथ दीर्घकालिक और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्य प्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। इसके साथ ही दोनों क्षेत्रों के कारोबारियों और उद्यमियों के बीच सेक्टर आधारित बिजनेस टू बिजनेस बैठकों के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

    चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश के छोटे और मध्यम उद्यमों तथा निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों और वितरकों से जोड़ने में शारजाह चैंबर के सहयोग की जरूरत पर भी बात हुई। मुख्यमंत्री ने शारजाह की कंपनियों को मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    इन क्षेत्रों में फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। बैठक में इन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं और दोनों पक्षों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता को रेखांकित करते हुए राज्य की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, औद्योगिक लैंड बैंक और इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के बड़े बाजारों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण मध्य प्रदेश निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    उन्होंने राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल व्यवस्था का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल विंडो व्यवस्था और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बैठक में शारजाह के व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी को मध्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया। दोनों पक्षों के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाने और उद्यमियों के लिए संभावित सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।

    भारत और शारजाह के आर्थिक संबंधों को व्यापक भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी तथा सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। शारजाह चैंबर की ओर से भारत में मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर ट्रेड मिशन और बिजनेस फोरम आयोजित किए गए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्री, टूरिज्म और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।

    अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, खाद्य उत्पादन, शिक्षा, कृषि और द्विपक्षीय व्यापारिक संस्थाओं में नेतृत्व का अनुभव है।

  • दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण

    दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण


    भोपाल । दुबई में मध्यप्रदेश ने निवेश की संभावनाओं को लेकर बड़ा असर छोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के तीसरे दिन प्रदेश को 53 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है। ग्रीन एनर्जी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शिक्षा मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों और कारोबारी समूहों ने मध्यप्रदेश में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से वन टू वन मुलाकात कर प्रदेश की खूबियां गिनाईं और साफ संदेश दिया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को अगले साल जनवरी में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि वेलकम टू मध्यप्रदेश।

    दुबई दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात कई बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों से हुई। इनमें राणा होल्डिंग्स जेम्स एजुकेशन क्रेसेंट ग्रुप प्योर हेल्थ शराफ ग्रुप चोइथराम्स डीपी वर्ल्ड ब्यूमर्क कॉरपोरेशन वेस्ट जोन केजीके ग्रुप विस्टास मीडिया कैपिटल वीएफएस ग्लोबल और एनआईडीआई सर्विसेज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठकों का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को अलग अलग सेक्टर में सामने रखना और संभावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाना रहा।

    इनमें राणा होल्डिंग्स की ओर से सबसे बड़े प्रस्तावों में रुचि दिखाई गई। कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2000 मेगावॉट के सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावॉट के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट 50 मेगावॉट क्षमता के एआई और कंप्यूट डेटा सेंटर क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब जैसी परियोजनाओं में रुचि दिखाई। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से करीब 35 हजार 200 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना बताई गई है।

    इसके अलावा औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस और सॉवरेन एआई फैक्ट्री को लेकर भी चर्चा हुई। 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.5 से 2 अरब डॉलर यानी लगभग 18 हजार करोड़ रुपए के निवेश का कॉन्सेप्ट सामने रखा गया। भविष्य में इसकी क्षमता को 100 मेगावॉट से अधिक तक बढ़ाने की संभावना भी बताई गई है। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों के साथ साथ एआई डेटा सेंटर और हाई टेक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए क्षेत्रों पर भी अपना फोकस बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री की बातचीत केवल ऊर्जा और तकनीक तक सीमित नहीं रही। हेल्थ सेक्टर में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल डिजिटल हेल्थ टेलीमेडिसिन मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा हुई। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क वेयरहाउसिंग कोल्ड चेन और ग्लोबल सप्लाई चेन से मध्यप्रदेश को जोड़ने पर जोर दिया गया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण रिटेल कृषि उत्पादों की खरीद वितरण नेटवर्क और कोल्ड चेन को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशीं गईं।

    शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ हुई बैठक में भी मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग टेक्सटाइल फार्मास्यूटिकल्स पर्यटन नवीकरणीय ऊर्जा और एसएमई सहयोग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने शारजाह के निवेशकों को भी मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

    दुबई दौरे में मुख्यमंत्री ने वेस्ट टू एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़ी परियोजनाओं को भी करीब से समझा। बीईईएएच के साथ इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्कुलर इकोनॉमी स्मार्ट सिटी और हरित ऊर्जा को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं एमार समूह की लीडरशिप से मुलाकात में इंदौर पीथमपुर उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर के साथ टाउनशिप हॉस्पिटैलिटी और आधुनिक शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।

    इस पूरे दौरे में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता को वैश्विक मंच पर पेश करने के साथ राज्य की निवेश नीति इंफ्रास्ट्रक्चर भूमि उपलब्धता लॉजिस्टिक्स और सिंगल विंडो व्यवस्था को भी प्रमुखता से बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार निवेशकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।

    इसी दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया सम्मान भी मिला। यह पुरस्कार निवेश संवर्धन विदेशी निवेश आकर्षित करने रोजगार सृजन नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए दिया गया। ऐसे में दुबई दौरे से मिले 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के लिए बड़ी संभावनाओं का संकेत जरूर हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की होगी।

  • तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज

    तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज


    भोपाल । मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत के बाद स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21 हजार 500 रुपए प्रतिमाह करने पर सहमति बनी है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक में इस मुद्दे पर सकारात्मक समाधान निकला। हालांकि बढ़ी हुई राशि कब से लागू होगी और इसके लिए औपचारिक आदेश कब जारी होगा इसकी स्थिति सरकारी आदेश के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में आंदोलन ने उस समय बड़ा रूप ले लिया था जब डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड को 14 हजार 337 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की थी। डॉक्टरों का कहना था कि मौजूदा राशि उनके काम के बोझ और बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी कम है।

    आंदोलन के दौरान सोमवार को हमीदिया अस्पताल के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। डॉक्टरों के मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद कुछ इंटर्न डॉक्टरों के घायल होने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर मेडिकल संगठनों और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई थी। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश दिए गए।

    इसके बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन को और तेज कर दिया। भोपाल में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया गया और कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने और पुलिस कार्रवाई के मामले में लिखित तौर पर ठोस कदम नहीं उठाती तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े इंटर्न्स ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया।

    इसी बीच बुधवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत में स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के इलाज का मुद्दा भी उठाया गया। बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    बैठक में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का भरोसा दिया। शुरुआती जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी दी गई है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के लिए जांच टीम भी बनाई गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को भी यह भरोसा मिला कि पुलिस कार्रवाई के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

    बैठक के दौरान प्रदर्शन में घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों के उपचार को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से घायल छात्रों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। JUDA और MTA प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा अब 21 हजार 500 रुपए के स्टाइपेंड पर बनी सहमति है। इंटर्न डॉक्टर भले ही 30 हजार रुपए की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए पर सहमति बनने से आंदोलन खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल गया है। अब निगाहें औपचारिक आदेश पर हैं क्योंकि आदेश जारी होने के बाद ही नई राशि के लागू होने की तारीख और दूसरी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच टकराव के बाद बातचीत से निकला यह समाधान चिकित्सा छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

  • फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील

    फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील


    इंदौर । इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र अपोलो टावर पर नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी इमारत को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का सीधा असर टावर में संचालित 600 से अधिक दुकान और ऑफिस पर पड़ रहा है। नगर निगम की टीम के अचानक पहुंचते ही पूरे परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही दुकानदार और ऑफिस संचालक अपने सामान को सुरक्षित करने में जुट गए और कई लोगों ने निगम की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अपोलो टावर प्रबंधन को करीब तीन महीने पहले फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। भवन में सुरक्षा मानकों को लेकर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन तय समय सीमा के बाद भी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया। इसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और फायर सेफ्टी जैसी गंभीर व्यवस्था में लापरवाही भारी पड़ सकती है।

    अपोलो टावर इंदौर की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों में शामिल है और इसे शहर के शुरुआती बड़े व्यावसायिक परिसरों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें और कार्यालय संचालित होते हैं। ऐसे में एक साथ पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई होने से सैकड़ों कारोबारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। निगम की टीम के पहुंचने की खबर फैलते ही टावर में काम कर रहे लोगों और व्यापारियों के बीच हलचल तेज हो गई। कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने लगे जबकि कुछ लोग जरूरी सामान को सुरक्षित करने में जुटे दिखाई दिए।

    नगर निगम की इस कार्रवाई को शहर में फायर सेफ्टी नियमों को लेकर कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बड़े व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है और नोटिस मिलने के बावजूद यदि कमियों को दूर नहीं किया जाता है तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में अन्य व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की जा सकती है।

    अपोलो टावर पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर शहर की व्यावसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। आग लगने जैसी किसी आपात स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने से बड़े हादसे की आशंका रहती है। ऐसे में नगर निगम अब केवल नोटिस देकर कार्रवाई सीमित रखने के बजाय सीधे सख्त कदम उठाता दिखाई दे रहा है। फिलहाल अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकान और ऑफिस प्रभावित होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है जबकि निगम की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

  • कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में

    कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में


    रीवा। मध्यप्रदेश की राजनीति में रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़ा कल्पना मिश्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भोपाल स्थित मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर लगे पोस्टर और बैनर भी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस विधायक की हिरासत के बाद इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। अभय मिश्रा सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं और वे लंबे समय से रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सी सेक्शन के बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई और दो डॉक्टरों तथा दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक को भी पद से हटाया गया और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए। हालांकि कल्पना मिश्रा के परिजन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं।

    इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। अभय मिश्रा मंत्रालय के सामने धरना देकर सरकार से मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने धरना स्थल से उन्हें हिरासत में ले लिया जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामला केवल कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत तक सीमित नहीं रहा है बल्कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे अलग अलग आरोपों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

    अभय मिश्रा ने इससे पहले अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए थे और अस्पताल में निगरानी तथा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। एक मामले में मरीज को मृत घोषित किए जाने और बाद में उसके जीवित होने की बात सामने आने के बाद जांच की मांग उठी। इसके अलावा एक युवक को गलत इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप तथा एक महिला मरीज के इलाज और देखरेख में लापरवाही के आरोपों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनमें से कुछ आरोपों को निराधार बताया है और कई मामलों में जांच की बात कही गई है।

    मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सक्रिय हैं। उन्होंने रीवा में धरने के दौरान कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी निशाने पर लिया और जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

    फिलहाल अभय मिश्रा को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पीड़ित परिवार FIR और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है जबकि दूसरी ओर सरकार और अस्पताल प्रशासन जांच तथा पहले से की गई कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है क्योंकि इसी से तय होगा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है।

  • सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन

    सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले कई दिनों से चल रहा MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे इंटर्न डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध मंगलवार को बातचीत के बाद खत्म हो गया। मंत्रालय में हुई अहम बैठक के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद निकले इस समाधान को इंटर्न डॉक्टरों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ मंत्रालय में अहम बैठक हुई। इस बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन यानी JUDA और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी MTA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बन गई और आखिरकार 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड तय किया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

    बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों को 18,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में लंबे समय तक काम करने की जिम्मेदारी को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत हुई। अंततः सरकार ने अपने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दी और इसी पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।

    इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई जिसके बाद समाधान का रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। JUDA और MTA के प्रतिनिधियों ने भी बैठक के बाद सकारात्मक बातचीत पर संतोष जताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलना महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का भी आभार व्यक्त किया।

    बैठक में केवल स्टाइपेंड का मुद्दा ही नहीं बल्कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम भी गठित की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज का भरोसा भी दिया है।

    दरअसल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन के कारण कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। हालात उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया जिसके बाद डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी।

    अब 21,500 रुपये स्टाइपेंड पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। यह फैसला न केवल इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती का समाधान साबित हुआ है। आने वाले दिनों में इंटर्न डॉक्टरों के ड्यूटी पर लौटने के साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।