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  • वंदे मातरम पर कांग्रेस-एनसी आमने-सामने, अब्दुल्ला परिवार के पूरे गीत के सम्मान में खड़े होने पर बढ़ा विवाद

    वंदे मातरम पर कांग्रेस-एनसी आमने-सामने, अब्दुल्ला परिवार के पूरे गीत के सम्मान में खड़े होने पर बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कांग्रेस और उसकी गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े रहे। इसके बाद कांग्रेस ने पूरे गीत के गायन पर आपत्ति जताते हुए एनसी से अपने रुख का समर्थन करने की अपील की। एनसी ने जवाब में कहा कि गठबंधन में होने का मतलब यह नहीं है कि कोई सहयोगी दल दूसरे पर अपनी शर्तें थोपे।

    कांग्रेस महासचिव एवं संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने वंदे मातरम के पूरे संस्करण को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में 1937 में तय किए गए स्वरूप के अनुरूप गीत के शुरुआती दो अंतरे ही गाएगी। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्णय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनी व्यापक सहमति और देश की बहुलतावादी एवं समन्वयवादी भावना को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    श्रीनगर के फिल्म महोत्सव से शुरू हुआ विवाद

    विवाद की शुरुआत श्रीनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के कार्यक्रम से हुई। कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। मंच पर मौजूद उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इस दौरान सम्मान में खड़े रहे। कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई।

    वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल शुरुआती दो अंतरे गाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सहयोगी दलों को भी कांग्रेस के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद और सरोजिनी नायडू सहित स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं के विचारों का भी उल्लेख किया।

    एनसी ने कहा- सहयोगी अपनी शर्तें नहीं थोप सकता

    कांग्रेस की अपील पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी नेता बशीर अहमद ने कहा कि गठबंधन में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि एक सहयोगी दल दूसरे दल को यह बताए कि कोई गीत कितने हिस्से में गाया जाए। उन्होंने कहा कि केसी वेणुगोपाल को सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन वह अपनी राय किसी दूसरे दल पर थोप नहीं सकते।

    एनसी नेता ने कहा कि उनकी पार्टी भी लोगों पर किसी तरह की शर्त थोपने के खिलाफ है। इस बयान के बाद कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं।

    कांग्रेस ने आरएसएस पर भी साधा निशाना

    एनसी की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें कांग्रेस के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें नागपुर यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबाव में नहीं आना चाहिए।

    भाजपा ने कांग्रेस को घेरा

    विवाद में भाजपा भी कूद पड़ी। भाजपा सांसद एवं प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरे वंदे मातरम के गायन को लेकर उसकी आपत्ति से उसकी राजनीतिक सोच स्पष्ट होती है। उन्होंने कांग्रेस को 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग तक करार दिया और आरोप लगाया कि पार्टी अलगाववादी तथा कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुक रही है।

    भाजपा नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि घाटी में अलगाववादी ताकतों ने भी राष्ट्रगीत को लेकर ऐसी आपत्ति नहीं जताई थी।

    1937 के फैसले का हवाला दे रही कांग्रेस

    कांग्रेस ने पिछले महीने अपनी कार्यसमिति की बैठक में 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप पार्टी के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाने का निर्णय लिया था। पार्टी का कहना है कि यह फैसला स्वतंत्रता आंदोलन के समय बनी व्यापक सहमति और देश की बहुलतावादी सोच को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    वहीं भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर वंदे मातरम का पूरा सम्मान नहीं करने का आरोप लगाती रही है।

    गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ सकता है असर

    वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच वैचारिक मतभेद का मुद्दा बन गया है। दोनों दल इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रगीत को लेकर उनके रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस अपने ऐतिहासिक और राजनीतिक निर्णय पर कायम है, जबकि एनसी का कहना है कि कोई भी सहयोगी दल दूसरे पर अपनी शर्तें नहीं थोप सकता।

    ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या इसका असर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ता है।

  • 6 एपिसोड की डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘मिथ्या’ में रिश्तों का ऐसा उलझा खेल, हर ट्विस्ट के साथ बढ़ेगा सस्पेंस और बेचैनी

    6 एपिसोड की डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘मिथ्या’ में रिश्तों का ऐसा उलझा खेल, हर ट्विस्ट के साथ बढ़ेगा सस्पेंस और बेचैनी

    नई दिल्ली । ओटीटी पर थ्रिलर और सस्पेंस पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘मिथ्या: द स्टोरी ऑफ ए लाइ’ एक ऐसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर सीरीज है, जिसमें रिश्तों के साथ झूठ, बदला और रहस्य लगातार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। सीरीज की कहानी इस तरह बुनी गई है कि जैसे-जैसे घटनाएं सामने आती हैं, दर्शकों के लिए किरदारों की असलियत समझना मुश्किल होता जाता है।

    इस सीरीज में हुमा कुरैशी और अवंतिका दसानी अहम भूमिकाओं में नजर आती हैं। अवंतिका दसानी अभिनेत्री भाग्यश्री की बेटी हैं और उन्होंने इसी सीरीज के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। सीरीज में उनके अभिनय को दर्शकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला, जबकि हुमा कुरैशी के प्रदर्शन ने भी कहानी को प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    कहानी जूही के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार हुमा कुरैशी ने निभाया है। जूही पेशे से हिंदी की प्रोफेसर है। कहानी में उस समय बड़ा मोड़ आता है, जब जूही अपनी छात्रा रिहा पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाती है। इस आरोप के बाद रिहा खुद को अपमानित महसूस करती है और जूही से बदला लेने का फैसला करती है।

    रिहा का बदला धीरे-धीरे जूही की पेशेवर जिंदगी से निकलकर उसकी निजी जिंदगी तक पहुंच जाता है। इसके बाद कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दोनों किरदारों के रिश्ते और उनके अतीत को नए तरीके से सामने लाते हैं। दर्शकों को लगातार यह सवाल परेशान करता है कि आखिर कौन सच बोल रहा है और कौन अपने फायदे के लिए कहानी को बदल रहा है।

    कहानी का एक बड़ा खुलासा तब होता है, जब जूही को पता चलता है कि रिहा केवल उसकी छात्रा नहीं बल्कि उसकी सौतेली बहन है। इस जानकारी के बाद दोनों के बीच चल रहा तनाव और भी गहरा हो जाता है। कहानी में पारिवारिक रिश्ते, पुराने गिले-शिकवे और बदले की भावना एक-दूसरे से जुड़ने लगते हैं।

    इसके बाद जूही की जिंदगी में मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उसे अपने पति और पिता को खोने का दुख झेलना पड़ता है। इन घटनाओं के बाद वह अपनी जिंदगी को संभालने की कोशिश करती है, लेकिन कहानी तब एक और खतरनाक मोड़ लेती है जब रिहा की नजर जूही के बेटे पर पड़ती है। इसके बाद जूही के सामने अपने परिवार और बच्चे को लेकर नई चुनौती खड़ी हो जाती है।

    सीरीज की खासियत इसके ट्विस्ट और टर्न हैं। कहानी में रिश्तों को केवल भावनात्मक नजरिए से नहीं दिखाया गया, बल्कि उनमें छिपे तनाव, अविश्वास और बदले की भावना को भी प्रमुखता दी गई है। यही वजह है कि एक घटना के बाद दूसरी घटना दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखती है।

    ‘मिथ्या’ के पहले सीजन में छह एपिसोड हैं और प्रत्येक एपिसोड लगभग 40 से 50 मिनट का है। दूसरे सीजन में भी छह एपिसोड हैं। यानी दोनों सीजन मिलाकर दर्शकों को कहानी के 12 एपिसोड देखने को मिलते हैं। सीरीज हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी उपलब्ध है।

    सीरीज को दर्शक ZEE5 पर देख सकते हैं। इसकी IMDb रेटिंग 6.8 बताई गई है। अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं, जिनमें पारिवारिक रिश्तों के साथ मनोवैज्ञानिक तनाव, रहस्य और बदले की भावना जुड़ी हो, तो ‘मिथ्या: द स्टोरी ऑफ ए लाइ’ आपकी ओटीटी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है।

  • 21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, आंधी और बिजली गिरने की भी चेतावनी

    21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, आंधी और बिजली गिरने की भी चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर सक्रिय हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, मेघालय समेत 21 से अधिक राज्यों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के आसपास सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। इसके अलावा अन्य मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    दिल्ली में बादल छाए रहने की संभावना

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार को आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद तापमान में कुछ कमी आई है। हालांकि, आज राजधानी के लिए किसी बड़े मौसम अलर्ट की घोषणा नहीं की गई है। दिनभर बादलों की आवाजाही रहने और धूप की तीव्रता कम रहने की संभावना है।

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश के आसार

    उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में फिलहाल दिन में धूप और रात में अपेक्षाकृत कम तापमान देखने को मिल रहा है। राज्य के ऊपर सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र कमजोर पड़ चुका है, लेकिन उससे जुड़ी मौसमी गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

    पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के आसपास चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय होने के कारण राज्य के पूर्वी हिस्सों में बारिश का दौर फिर शुरू हो सकता है।

    बिहार में सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा मौसम

    बिहार में बुधवार को मौसम की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। आईएमडी ने राज्य के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का भी खतरा जताया गया है।

    झारखंड में भी मानसूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। राज्य के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है।

    पहाड़ी राज्यों में 10 सितंबर को बढ़ेगा असर

    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में बुधवार को बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, इन राज्यों में मौसम की गतिविधियां गुरुवार, 10 सितंबर को और बढ़ सकती हैं।

    उत्तराखंड के कई इलाकों में 10 सितंबर को भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    दक्षिण भारत में भी बारिश और तेज हवाओं का असर

    दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। तटीय इलाकों में जोरदार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    वहीं, केरल और माहे में गर्म एवं उमस भरा मौसम बना रह सकता है। समुद्र से लगे क्षेत्रों में मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मानसूनी सिस्टम से कई राज्यों में बारिश का दौर

    मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा मौसमी प्रणालियों के कारण अगले कुछ समय तक देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करना जरूरी होगा।

  • शहजाद पूनावाला BJP छोड़ कांग्रेस में जाने की अटकलों के बीच पवन खेड़ा संग वायरल तस्वीर पर खुद दी सफाई, बताया क्या है पूरा मामला

    शहजाद पूनावाला BJP छोड़ कांग्रेस में जाने की अटकलों के बीच पवन खेड़ा संग वायरल तस्वीर पर खुद दी सफाई, बताया क्या है पूरा मामला

    नई दिल्ली । शहजाद पूनावाला फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ सामने आई उनकी तस्वीरों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। तस्वीर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यह अटकलें लगने लगीं कि क्या पूनावाला भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में वापसी करने वाले हैं। हालांकि, पूनावाला ने खुद इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कांग्रेस में शामिल होने की खबरों को खारिज कर दिया है।

    वायरल तस्वीर में शहजाद पूनावाला और पवन खेड़ा साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं और दोनों एक-दूसरे से हाथ मिला रहे हैं। तस्वीर सामने आने के बाद इसे लेकर तरह-तरह के दावे किए जाने लगे। इन चर्चाओं के बीच पूनावाला ने सोशल मीडिया पर तस्वीर के पीछे की पूरी कहानी बताई और कहा कि इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

    पूनावाला के मुताबिक, वह एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जो पायल मेहता के पिता की याद में आयोजित किया गया था। उनके अनुसार, कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेता भी मौजूद थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कई नेताओं से हुई और पवन खेड़ा भी वहां पहुंचे।

    उन्होंने बताया कि वह अपने करीबी मित्र और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के दौरान पत्रकार रिजिजू से उनकी स्विमिंग से जुड़ी तस्वीरों को लेकर सवाल कर रहे थे। इसी बीच पवन खेड़ा का जिक्र हुआ और संयोग से खेड़ा वहां से गुजरते हुए सामने आ गए। पूनावाला ने उन्हें बातचीत में शामिल किया और राज्यसभा के लिए चुने जाने पर बधाई दी। इसी दौरान दोनों की तस्वीर सामने आई।

    पूनावाला ने कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी से उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस कार्यक्रम में वह मौजूद थे, वह एक शोकसभा थी और ऐसी जगह पर राजनीतिक दल बदलने जैसी बातचीत करना उचित नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि पूनावाला पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2017 में कांग्रेस से दूरी बनाई थी और बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। बीजेपी में रहते हुए वह पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे और कांग्रेस तथा उसके नेतृत्व पर लगातार मुखर होकर हमला करते रहे।

    कांग्रेस में वापसी के सवाल पर पूनावाला पहले भी अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अगस्त में एक बातचीत के दौरान उनसे कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने शर्त रखते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि यदि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा को हटा दिया जाए तथा नेहरू के कार्यों के लिए माफी मांगी जाए, तभी वह कांग्रेस में शामिल होंगे।

    ऐसे में पवन खेड़ा के साथ उनकी तस्वीर सामने आने के बाद शुरू हुई राजनीतिक अटकलों को पूनावाला की सफाई ने फिलहाल विराम दे दिया है। तस्वीर को लेकर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं की मुलाकात एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी और इसे राजनीतिक दल बदलने से जोड़ना सही नहीं है। फिलहाल उनके बयान से यह साफ है कि वायरल तस्वीर के आधार पर कांग्रेस में उनकी वापसी की चर्चा को उन्होंने सिरे से खारिज किया है।

  • जाति जनगणना पर कांग्रेस के सामने नई चुनौती, सिद्धारमैया ने कर्नाटक में 75% आरक्षण लागू करने की मांग उठाई

    जाति जनगणना पर कांग्रेस के सामने नई चुनौती, सिद्धारमैया ने कर्नाटक में 75% आरक्षण लागू करने की मांग उठाई


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के जातिगत सर्वे के निष्कर्ष लागू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की बात कही है। उनकी इस मांग ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    कांग्रेस देशभर में जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। पार्टी का तर्क है कि प्रतिनिधित्व, आरक्षण और संसाधनों के बंटवारे से जुड़े फैसलों के लिए अलग-अलग समुदायों की वास्तविक संख्या का पता होना जरूरी है।

    लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के सामने एक अलग ही सवाल खड़ा हो गया है। राज्य में जातिगत सर्वे पहले ही हो चुका है और उसकी नई रिपोर्ट नवंबर 2025 से तैयार है। ऐसे में सिद्धारमैया अब अपनी ही पार्टी की सरकार पर इस रिपोर्ट को लागू करने का दबाव बना रहे हैं।

    बेंगलुरु में 6 सितंबर को कर्नाटक स्टेट बैकवर्ड कास्ट्स फेडरेशन के सिल्वर जुबली कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने जातिगत सर्वे लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सभी को सामाजिक न्याय देना है तो कम से कम 75 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए।

    सिद्धारमैया का कहना है कि आरक्षण अलग-अलग समुदायों की आबादी के अनुपात में होना चाहिए। उन्होंने केवल सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की बात नहीं की। उनका तर्क है कि सामाजिक और राजनीतिक समानता के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में भी प्रतिनिधित्व जाति और आबादी के अनुरूप होना चाहिए।

    कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय और समानुपातिक प्रतिनिधित्व से जोड़ रही है। पार्टी का कहना है कि विश्वसनीय जातिगत आंकड़ों के बिना सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व से जुड़े दावे अनुमानों पर आधारित रहेंगे। लेकिन कर्नाटक में स्थिति अलग है। यहां कांग्रेस सरकार के पास पहले से ही जातिगत सर्वे की रिपोर्ट मौजूद है।

    यही वजह है कि सिद्धारमैया की मांग कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है। अगर जातिगत आंकड़े सामने आने के बाद आरक्षण और प्रतिनिधित्व में बदलाव की मांग उठती है, तो राज्य में मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

    कर्नाटक में जातिगत सर्वे की शुरुआत सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री रहते उनके पिछले कार्यकाल में हुई थी। 2015 में एच. कंठराज के नेतृत्व में यह सर्वे कराया गया और 2017 तक पूरा हो गया था। हालांकि, इसकी रिपोर्ट कभी राजनीतिक रूप से लागू नहीं हो सकी। राज्य के प्रभावशाली लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं।

    इसके बाद जेडीएस-कांग्रेस और बीजेपी की सरकारों ने भी इसे बड़े नीतिगत फैसले के आधार के तौर पर आगे बढ़ाने से परहेज किया। 2023 में सिद्धारमैया के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया। 2025 में उनकी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया, लेकिन इसके साथ आंकड़ों की विश्वसनीयता और उनकी पुरानापन को लेकर सवाल भी उठे।

    इसके बाद सिद्धारमैया ने नए सिरे से जातिगत सर्वे का आदेश दिया। नई कवायद का उद्देश्य ज्यादा मौजूदा आंकड़े तैयार करना और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के तौर पर भी देखा गया।

    मई में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। इसके बावजूद जातिगत जनगणना और समानुपातिक आरक्षण का मुद्दा उठाकर उन्होंने कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के लिए सिद्धारमैया की मांग को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। ऐसा करने पर कांग्रेस पर यह सवाल उठ सकता है कि वह बीजेपी के खिलाफ जातिगत न्याय की बात तो करती है, लेकिन अपने शासन वाले राज्य में उसी सिद्धांत को लागू करने से पीछे क्यों हट रही है।

    दूसरी ओर, सर्वे के निष्कर्ष लागू करने की अपनी राजनीतिक कीमत भी हो सकती है। कर्नाटक में कई प्रभावशाली समुदाय आरक्षण, प्रतिनिधित्व और राज्य के संसाधनों को लेकर अलग-अलग दावे रखते हैं। ऐसे में जातिगत आंकड़ों के आधार पर बदलाव करने से कुछ समुदायों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है।

    कांग्रेस 2027 की जनगणना में जातियों की गणना को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी ने ओबीसी की संख्या दर्ज किए जाने को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा है और जनगणना के प्रश्नपत्र में ओबीसी श्रेणी को कथित तौर पर शामिल नहीं किए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    2027 की जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातियों की भी राष्ट्रीय स्तर पर गणना की जाएगी। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब इस तरह जातियों की गणना राष्ट्रीय स्तर पर की जाएगी। लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस के सामने 2027 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। राज्य में पहले ही जातिगत सर्वे हो चुका है और नई रिपोर्ट भी तैयार है। यही स्थिति कांग्रेस के लिए असली परीक्षा बन गई है।

  • दुआ की क्यूट तस्वीरों ने लूटी महफिल: नन्हीं परी को देखते ही फैंस बोले पापा रणवीर की हूबहू कॉपी

    दुआ की क्यूट तस्वीरों ने लूटी महफिल: नन्हीं परी को देखते ही फैंस बोले पापा रणवीर की हूबहू कॉपी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की बेटी दुआ एक बार फिर सोशल मीडिया पर छा गई हैं। दुआ के दूसरे जन्मदिन के मौके पर कपल ने अपनी बेटी के साथ कुछ बेहद खास और प्यारी तस्वीरें शेयर कीं तो देखते ही देखते इंटरनेट पर इन तस्वीरों की चर्चा शुरू हो गई। वैसे तो दीपिका और रणवीर अपनी बेटी की तस्वीरें बेहद कम शेयर करते हैं लेकिन इस बार सामने आई तस्वीरों ने फैंस को खुश कर दिया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि नन्हीं दुआ बिल्कुल अपने पापा रणवीर सिंह जैसी नजर आ रही हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दुआ और रणवीर के बचपन की तस्वीरों का कोलाज बनाकर दोनों की शक्ल की समानता भी दिखाई है।

    दरअसल 8 सितंबर को दुआ का दूसरा जन्मदिन था और इसी खास मौके पर रणवीर और दीपिका ने अपनी फैमिली की कुछ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरों में दुआ कभी अपने माता पिता के बीच मुस्कुराती नजर आईं तो कभी मस्ती करती दिखाई दीं। इन तस्वीरों में सबसे खास बात यह रही कि दीपिका का बेबी बंप भी साफ नजर आया। यानी एक तरफ कपल अपनी बेटी का दूसरा जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहा था तो दूसरी तरफ परिवार में आने वाले नए मेहमान की खुशी भी तस्वीरों में दिखाई दी।

    तस्वीरें सामने आते ही फैंस ने दुआ की मासूमियत पर जमकर प्यार लुटाया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा कि दुआ को देखकर उन्हें छोटे रणवीर की याद आ गई। कुछ लोगों ने रणवीर के बचपन की तस्वीरों के साथ दुआ की तस्वीरों की तुलना की और दोनों के चेहरे की समानता को लेकर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने दुआ को रणवीर की छोटी कॉपी बताया तो किसी ने उन्हें डैडी की छोटी ट्विन कह दिया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि दुआ के चेहरे में दोनों माता पिता की झलक दिखाई देती है लेकिन एक्सप्रेशन और कुछ फीचर्स उन्हें खास तौर पर रणवीर की याद दिलाते हैं।

    रणवीर ने तस्वीरें शेयर करते हुए अपनी बेटी के लिए बेहद प्यारा संदेश भी लिखा। पोस्ट के जरिए उन्होंने फैंस को दुआ के लिए मिले प्यार और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद दिया। इन तस्वीरों का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि दीपिका और रणवीर ने लंबे समय से अपनी बेटी को लाइमलाइट से काफी दूर रखा है। ऐसे में दुआ की एक साथ कई तस्वीरें सामने आना फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं रहा।

    दुआ के जन्मदिन की तस्वीरों में एक और चीज ने लोगों का ध्यान खींचा और वह था दीपिका का बेबी बंप। दीपिका और रणवीर इस साल अपने दूसरे बच्चे का स्वागत करने की तैयारी में हैं। दोनों ने अप्रैल 2026 में दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सार्वजनिक की थी। अब दुआ के दूसरे जन्मदिन पर सामने आई तस्वीरों ने इस खुशी को और खास बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दीपिका प्रेग्नेंसी के दौरान भी अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को लेकर एक्टिव हैं।

    फिलहाल सोशल मीडिया पर दुआ की क्यूटनेस और रणवीर से उनकी मिलती शक्ल की खूब चर्चा हो रही है। फैंस के लिए यह तस्वीरें सिर्फ एक स्टार फैमिली की झलक नहीं बल्कि एक बेहद खूबसूरत पारिवारिक पल हैं। दुआ के जन्मदिन पर मिली यह छोटी सी झलक अब सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा का कारण बन चुकी है और हर तरफ एक ही बात सुनाई दे रही है कि पापा रणवीर की नन्हीं कॉपी आखिर इतनी क्यूट कैसे हो सकती है।

  • भारत का बड़ा प्रोजेक्ट और चीन को पोर्ट का काम: मालदीव की डबल गेम से बढ़ी हलचल, मुइज्जू की रणनीति ने चौंकाया

    भारत का बड़ा प्रोजेक्ट और चीन को पोर्ट का काम: मालदीव की डबल गेम से बढ़ी हलचल, मुइज्जू की रणनीति ने चौंकाया


    नई दिल्ली। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हाल के दिनों में भारत के साथ रिश्तों को लेकर सकारात्मक संकेत देते नजर आए हैं लेकिन इसी बीच थिलाफुशी पोर्ट प्रोजेक्ट में चीन की बड़ी भूमिका ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच मालदीव की रणनीति को चर्चा में ला दिया है। कुछ समय पहले ही मुइज्जू ने भारत की मदद से तैयार हो रहे थिलामाले ब्रिज को भारत और मालदीव के मजबूत रिश्तों का प्रतीक बताया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के सहयोग के लिए आभार जताया था। लेकिन दूसरी तरफ मालदीव ने थिलाफुशी पोर्ट के पहले चरण का काम चीन की कंपनी चाइना हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी यानी CHEC को सौंप दिया है।

    थिलाफुशी कोई सामान्य इलाका नहीं है। राजधानी माले के पश्चिम में स्थित यह कृत्रिम द्वीप आने वाले समय में मालदीव के सबसे अहम कारोबारी और औद्योगिक केंद्रों में शामिल होने वाला है। सरकार माले के मौजूदा कमर्शियल पोर्ट पर बढ़ते दबाव और ट्रैफिक को कम करने के लिए बंदरगाह की गतिविधियों को थिलाफुशी ले जाने की योजना पर काम कर रही है। मालदीव सरकार के मुताबिक यहां आधुनिक वेयरहाउस कोल्ड स्टोरेज और माल ढुलाई से जुड़ी सुविधाओं के साथ एक बड़ा कमर्शियल पोर्ट विकसित किया जा रहा है।

    योजना के पहले चरण में पोर्ट क्षेत्र को करीब 5 हेक्टेयर से बढ़ाकर 20 हेक्टेयर तक करने की बात है। इसमें 650 मीटर लंबी क्वे वॉल 125 मीटर का रोडसाइड जेट्टी बॉन्डेड वेयरहाउस और एक्स रे सुविधा जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। आधुनिक ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए माल की क्लीयरेंस प्रक्रिया को मौजूदा कई दिनों से घटाकर करीब 48 घंटे तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी यह प्रोजेक्ट मालदीव की व्यापारिक व्यवस्था और सप्लाई चेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस थिलाफुशी इलाके में चीन की कंपनी पोर्ट से जुड़ा काम करेगी वही इलाका भारत के ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट यानी GMCP का भी अहम हिस्सा है। भारत की ओर से करीब 400 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन और 100 मिलियन डॉलर की ग्रांट से तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट के जरिए माले को विलिमाले गुल्हिफाल्हु और थिलाफुशी से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल आवाजाही आसान करना नहीं बल्कि मालदीव की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है।

    यानी एक ही रणनीतिक क्षेत्र में भारत और चीन दोनों की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं मौजूद हैं। यही वजह है कि थिलाफुशी पोर्ट को लेकर चर्चा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी बड़े बंदरगाह प्रोजेक्ट में विदेशी कंपनी की भूमिका स्वाभाविक रूप से रणनीतिक सवाल खड़े करती है। हालांकि चीनी कंपनी को ठेका मिलने का मतलब यह अपने आप नहीं है कि यह बंदरगाह सैन्य इस्तेमाल के लिए होगा। लेकिन रणनीतिक विश्लेषकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि चीन को मालदीव के अहम समुद्री बुनियादी ढांचे में कितनी बड़ी भूमिका मिलती है।

    मुइज्जू की राजनीति को देखें तो तस्वीर और दिलचस्प हो जाती है। वह 2023 में इंडिया आउट अभियान के जरिए सत्ता में आए थे और उनके कार्यकाल की शुरुआत में मालदीव को चीन के करीब जाता हुआ देखा गया था। लेकिन आर्थिक दबाव और वित्तीय जरूरतों के बीच भारत के साथ रिश्तों में फिर सुधार हुआ। अब मुइज्जू भारत की परियोजनाओं की तारीफ कर रहे हैं और साथ ही चीन के साथ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आगे बढ़ा रहे हैं।

    ऐसे में इसे केवल भारत की अनदेखी या चीन के सामने पूरी तरह झुकाव कहना शायद जल्दबाजी होगी। ज्यादा सटीक तस्वीर यह है कि मालदीव दोनों बड़े देशों से अपने हित साधने की कोशिश कर रहा है। भारत उसे वित्तीय सहयोग कनेक्टिविटी और विकास परियोजनाओं में मदद दे रहा है जबकि चीन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण प्रोजेक्ट में सक्रिय है। थिलाफुशी पोर्ट का फैसला यही बताता है कि माले फिलहाल भारत और चीन के बीच किसी एक पक्ष को चुनने के बजाय दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।

  • लक्ष्मी नारायण राजयोग से चमकेगा भाग्य: इन 5 राशियों को मिलेंगे धन कमाने के नए मौके, करियर में भी आएगी तेज रफ्तार

    लक्ष्मी नारायण राजयोग से चमकेगा भाग्य: इन 5 राशियों को मिलेंगे धन कमाने के नए मौके, करियर में भी आएगी तेज रफ्तार


    नई दिल्ली। 26 सितंबर 2026 को ग्रहों के राजकुमार बुध तुला राशि में प्रवेश करेंगे जहां धन वैभव और सुख सुविधाओं के कारक शुक्र पहले से मौजूद रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध और शुक्र की यह युति लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण करेगी। इस योग को धन समृद्धि बुद्धि व्यापार और भौतिक सुख सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान कुछ राशियों के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने नौकरी में तरक्की मिलने और कारोबार में नए अवसर बनने के योग बन सकते हैं।

    सबसे पहले बात मिथुन राशि की करें तो इस राशि के जातकों के लिए यह समय शिक्षा प्रतियोगिता और रचनात्मक क्षेत्रों में अच्छे परिणाम लेकर आ सकता है। विद्यार्थियों को मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की संभावना बढ़ सकती है। प्रेम संबंधों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। आर्थिक मामलों में अचानक लाभ के अवसर बन सकते हैं और लंबे समय से चली आ रही किसी योजना को गति मिल सकती है।

    तुला राशि के जातकों के लिए यह राजयोग विशेष महत्व रखता है क्योंकि बुध और शुक्र की युति इसी राशि में बनने जा रही है। इससे व्यक्तित्व में निखार आने के साथ आत्मविश्वास बढ़ सकता है। सामाजिक स्तर पर मान सम्मान बढ़ने के योग बन सकते हैं। व्यापार करने वालों को नए अवसर मिल सकते हैं और किसी महत्वपूर्ण सौदे से आर्थिक लाभ होने की संभावना है। साझेदारी के काम में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ने की उम्मीद है।

    धनु राशि वालों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग आय के नए रास्ते खोल सकता है। आमदनी बढ़ाने के नए साधन सामने आ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ लाभ मिलने के संकेत मिल सकते हैं। प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ेगा जो भविष्य में करियर और कारोबार के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानी कम होने और मनचाही चीजों की प्राप्ति के योग बन सकते हैं।

    मकर राशि के जातकों के लिए यह योग करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी में प्रमोशन वेतन वृद्धि या नई जिम्मेदारी मिलने के अवसर बन सकते हैं। किसी बड़ी कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव भी मिल सकता है। कारोबारियों की अटकी हुई योजनाओं में तेजी आ सकती है। नया काम शुरू करने या व्यापार का विस्तार करने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है।

    कुंभ राशि के लिए यह राजयोग भाग्य का साथ दिलाने वाला साबित हो सकता है। कामकाज में आ रही रुकावटें कम हो सकती हैं और लंबे समय से अटके सरकारी या कानूनी काम आगे बढ़ सकते हैं। धार्मिक या व्यावसायिक यात्रा के योग बन सकते हैं। इन यात्राओं से भविष्य में आर्थिक लाभ के रास्ते खुलने की संभावना है। मेहनत के साथ किस्मत का सहयोग मिलने से कई अधूरे काम पूरे हो सकते हैं।

    लक्ष्मी नारायण राजयोग के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए बुधवार और शुक्रवार को भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने की सलाह दी जाती है। मां लक्ष्मी को खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। साथ ही ऊं श्रीं लक्ष्मीनारायणाय नमः मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय भविष्यवाणियां आस्था और मान्यताओं पर आधारित होती हैं इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए।

  • Asian Games 2026 में टीम इंडिया को नहीं मिलेगा 5 स्टार होटल: फिर भी BCCI संतुष्ट नागोया में क्यों बदली ठहरने की रणनीति जानिए पूरी वजह

    Asian Games 2026 में टीम इंडिया को नहीं मिलेगा 5 स्टार होटल: फिर भी BCCI संतुष्ट नागोया में क्यों बदली ठहरने की रणनीति जानिए पूरी वजह


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट टीम की होटल व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद अब लगभग खत्म हो गया है। भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों को इस बार विदेश दौरों की तरह पांच सितारा होटल की सुविधा नहीं मिलेगी। इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने आयोजकों की ओर से की गई व्यवस्था पर संतोष जताया है। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने स्पष्ट किया है कि दोनों भारतीय टीमें एशियन गेम्स के आयोजकों की ओर से तय किए गए आवास में ही रहेंगी। बोर्ड की प्राथमिकता खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल सुनिश्चित करना है और मौजूदा व्यवस्था को इसी नजरिए से स्वीकार किया गया है।

    दरअसल भारतीय क्रिकेटरों को आमतौर पर विदेशी दौरों पर बेहतर सुविधाओं वाले पांच सितारा होटलों में ठहराया जाता है। ऐसे में जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के लिए जब पांच सितारा होटल उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई तो सवाल उठने लगे थे कि क्या बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों के लिए अलग व्यवस्था करेगा। नागोया में शीर्ष श्रेणी के होटलों की उपलब्धता सीमित होने को इस पूरे मामले की बड़ी वजह बताया गया। आयोजकों के सामने बड़ी संख्या में खिलाड़ियों और अधिकारियों के ठहरने की चुनौती भी है।

    शुरुआत में यह चर्चा भी थी कि अगर भारतीय टीम को निर्धारित होटल पसंद नहीं आया तो खिलाड़ियों के लिए टोक्यो या ओसाका जैसे शहरों में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन यह विकल्प व्यावहारिक नहीं माना गया क्योंकि मैच और अभ्यास स्थल से लंबी दूरी खिलाड़ियों के लिए परेशानी पैदा कर सकती थी। ऐसे में बीसीसीआई ने आयोजकों के साथ समन्वय करते हुए उसी व्यवस्था को स्वीकार करने का फैसला किया जो एशियन गेम्स के लिए तैयार की गई है।

    बीसीसीआई की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ होटल की स्टार रेटिंग नहीं बल्कि खिलाड़ियों की सुविधा और गोपनीयता को लेकर थी। रिपोर्टों के अनुसार खिलाड़ियों को अलग अलग कमरे उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। यानी पांच सितारा होटल नहीं होने के बावजूद टीम के खिलाड़ियों को अलग कमरे मिलेंगे ताकि आराम और तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो। बीसीसीआई ने होटल की तस्वीरों और वीडियो के जरिए भी व्यवस्थाओं की जानकारी ली थी।

    होटल के अलावा बीसीसीआई की चिंता खेल सुविधाओं को लेकर भी थी। खास तौर पर मैदान की गुणवत्ता पिच और ड्रेसिंग रूम जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे। बाद में निरीक्षण और बातचीत के बाद इन व्यवस्थाओं को लेकर भी संतोषजनक स्थिति सामने आई। यानी बोर्ड ने साफ संकेत दिया है कि टीम के लिए पांच सितारा होटल से ज्यादा जरूरी सुरक्षित ठहराव अच्छी खेल सुविधाएं और मैच स्थल तक आसान पहुंच है।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन जापान के आइची नागोया क्षेत्र में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होना है। क्रिकेट प्रतियोगिता भी इस बड़े खेल आयोजन का हिस्सा होगी और भारत ने पुरुष तथा महिला दोनों वर्गों में मजबूत टीमें उतारी हैं। पुरुष टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे जबकि भारतीय दल से पदक की बड़ी उम्मीदें हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि बीसीसीआई ने इस बार पांच सितारा होटल की सुविधा को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाने के बजाय खिलाड़ियों की तैयारी और प्रतियोगिता से जुड़ी व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता दी है। आयोजकों की तय व्यवस्था में रहकर टीम इंडिया अब अपना पूरा ध्यान मैदान पर प्रदर्शन और एशियन गेम्स में पदक जीतने पर लगाएगी।

  • कर्क में नीच होंगे मंगल: 18 सितंबर से 12 नवंबर तक 5 राशियों पर भारी पड़ सकता है गोचर, जानिए किन मामलों में बरतनी होगी खास सावधानी

    कर्क में नीच होंगे मंगल: 18 सितंबर से 12 नवंबर तक 5 राशियों पर भारी पड़ सकता है गोचर, जानिए किन मामलों में बरतनी होगी खास सावधानी


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को साहस ऊर्जा पराक्रम भूमि और शक्ति का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल की चाल में बदलाव का असर अलग अलग राशियों के जातकों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। 18 सितंबर 2026 को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कर्क मंगल की नीच राशि मानी जाती है। मंगल अग्नि तत्व से जुड़े ग्रह हैं जबकि कर्क जल तत्व की राशि है। ऐसे में इस अवधि में मंगल की ऊर्जा कमजोर मानी जाती है और इसका प्रभाव भावनात्मक तनाव गुस्सा पारिवारिक विवाद और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के रूप में सामने आ सकता है। मंगल 12 नवंबर तक कर्क राशि में रहेंगे। इस दौरान पांच राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि मंगल आपकी राशि के स्वामी हैं। कर्क राशि में मंगल का प्रवेश आपके चौथे भाव में होगा। यह भाव सुख सुविधा माता घर और संपत्ति से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान घर परिवार में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ सकता है। संपत्ति से जुड़े मामलों में विवाद की स्थिति बन सकती है। माता की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। मानसिक बेचैनी बढ़ने की संभावना रहेगी। वाहन चलाते समय भी अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होगा क्योंकि जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है।

    मिथुन राशि के लिए मंगल का गोचर दूसरे भाव में होने जा रहा है। यह भाव धन परिवार और वाणी से संबंधित होता है। इस अवधि में बोलचाल के कारण रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है। गुस्से में कही गई बात विवाद को बढ़ा सकती है। खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है और इसका असर आर्थिक बजट पर पड़ सकता है। निवेश से जुड़े फैसले सोच समझकर लेने होंगे। खानपान में लापरवाही से भी परेशानी हो सकती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है क्योंकि मंगल आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल लग्न भाव में नीच स्थिति में रहेंगे। इस दौरान स्वभाव में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ सकता है। छोटी बातों पर तनाव लेने से मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी जरूरी होगी। रक्तचाप और रक्त से जुड़ी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार में बहस से बचना और जल्दबाजी में बड़े फैसले नहीं लेना बेहतर रहेगा।

    सिंह राशि वालों के लिए मंगल बारहवें भाव में गोचर करेंगे। यह भाव खर्च नुकसान और अनावश्यक भागदौड़ से जुड़ा होता है। इस दौरान अचानक खर्च बढ़ सकते हैं और आर्थिक दबाव महसूस हो सकता है। जमीन जायदाद से जुड़े पुराने विवाद फिर सामने आ सकते हैं। कानूनी मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। बिना सोचे समझे किसी विवाद में पड़ना नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों के लिए मंगल आठवें भाव में गोचर करेंगे। यह स्थिति अचानक आने वाली परेशानियों और गुप्त मामलों से जुड़ी मानी जाती है। स्वास्थ्य में अचानक उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वाहन मशीनरी या जोखिम वाले काम करते समय विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कार्यक्षेत्र में विरोधी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। धन के लेनदेन में भी सावधानी रखना जरूरी होगा।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। हनुमान जी को लाल सिंदूर अर्पित करने की भी परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को तांबा गुड़ लाल वस्त्र या मसूर की दाल का दान किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि इस अवधि में क्रोध पर नियंत्रण रखें विवादों से दूरी बनाएं और किसी भी बड़े फैसले को जल्दबाजी में लेने से बचें।