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  • सत्य निकेतन इमारत हादसे में बड़ा एक्शन, पीजी संचालक सुधांशु गिरफ्तार, साथी शुभम त्यागी की तलाश में जुटी पुलिस

    सत्य निकेतन इमारत हादसे में बड़ा एक्शन, पीजी संचालक सुधांशु गिरफ्तार, साथी शुभम त्यागी की तलाश में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। हादसे के मामले में अब उस इमारत में संचालित पीजी के संचालक सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस उससे हादसे को लेकर पूछताछ कर रही है। पूछताछ के बाद उसे जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा। इस मामले में सुधांशु के साथी शुभम त्यागी की तलाश की जा रही है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, महेश ने अगस्त 2025 में यह इमारत शुभम त्यागी और सुधांशु को लीज पर दी थी। दोनों मिलकर इसी इमारत में ‘Hostel Daze’ नाम से पीजी चला रहे थे। इमारत में संचालित पीजी को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। सुधांशु की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हादसे से जुड़े घटनाक्रम और इमारत में पीजी संचालन से संबंधित सवाल पूछ रही है। वहीं, शुभम त्यागी को पकड़ने के लिए तलाश जारी है।

    मामले में आरोपी महेश की दो दिन की पुलिस कस्टडी भी आज समाप्त हो रही है। पुलिस उसे साउथ कैंपस थाने से अदालत लेकर गई है। महेश के साथ इमारत का ठेकेदार और एक राजमिस्त्री भी कोर्ट ले जाए गए हैं। तीनों को मामले में आगे की कार्रवाई के तहत अदालत में पेश किया जा रहा है। पुलिस हादसे से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है और मामले में उनकी भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    इधर, सत्य निकेतन में कमजोर पड़ी इमारत को हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। कार्रवाई से पहले इमारत के भीतर रखा सामान बाहर निकाला गया। इसके बाद कमजोर हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। आसपास मौजूद पांच से छह इमारतों को भी खाली कराया गया है, ताकि कमजोर ढांचे को हटाने के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

    कमजोर हिस्से को हटाने के लिए बड़ी मशीन या बुलडोजर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इमारत के कमजोर हिस्से को हथौड़े और दूसरे छोटे औजारों की मदद से धीरे-धीरे तोड़ा जा रहा है। इस तरीके से कमजोर ढांचे को सावधानीपूर्वक हटाने का काम किया जा रहा है। मौके पर एमसीडी की टीम मौजूद है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी तैनात हैं।

    सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद पुलिस की कार्रवाई के साथ कमजोर ढांचे को हटाने का काम भी जारी है। पीजी संचालक सुधांशु की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि उसके साथ पीजी चलाने वाला शुभम त्यागी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। महेश, ठेकेदार और राजमिस्त्री को अदालत ले जाया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और अदालत में होने वाली प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

  • कोफोर्ज के बोर्ड मूल्यांकन में सामने आई खामियों के बाद चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दिया, शेयर करीब नौ प्रतिशत तक टूटा

    कोफोर्ज के बोर्ड मूल्यांकन में सामने आई खामियों के बाद चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दिया, शेयर करीब नौ प्रतिशत तक टूटा

    नई दिल्ली । मिडकैप आईटी कंपनी कोफोर्ज के इंटरनल ऑडिट में बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन ओपी भट्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भट्ट के इस्तीफे की जानकारी सामने आने के बाद बुधवार को कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली और कारोबार के दौरान स्टॉक करीब नौ प्रतिशत तक नीचे चला गया।

    कारोबार के दौरान कोफोर्ज के शेयर ने 1,780.70 रुपये का इंट्राडे निचला स्तर दर्ज किया। यह स्तर कंपनी के पिछले बंद भाव 1,950 रुपये की तुलना में करीब 8.71 प्रतिशत कम था। हालांकि बाद में शेयर में कुछ सुधार दिखाई दिया। सुबह 10:45 बजे तक कोफोर्ज का शेयर 4.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,862 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

    कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत इंटरनल ऑडिटर ने बोर्ड इवैल्यूएशन प्रक्रिया की समीक्षा की। इसके साथ ही उस प्रक्रिया से तैयार की गई बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट यानी बीईआर की भी जांच की गई। यह पूरी प्रक्रिया ओपी भट्ट की देखरेख में हुई थी।

    ऑडिट के दौरान बोर्ड के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी को प्रोसेस करने और उसके डिस्क्लोजर से जुड़ी कुछ कमियां सामने आईं। इन कमियों में चेयरमैन के प्रदर्शन के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी भी शामिल थी। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जब बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट को बोर्ड के सामने रखा गया, तब उसमें मौजूद या उससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां बोर्ड के सदस्यों के सामने पूरी तरह प्रस्तुत नहीं की गई थीं।

    इंटरनल ऑडिटर की रिपोर्ट सामने आने के बाद बोर्ड ने ओपी भट्ट से इस मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा। भट्ट ने अपने पक्ष का बचाव करते हुए कहा कि बोर्ड के मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने नेक नीयत से काम किया था। हालांकि, बोर्ड की ओर से उनके स्पष्टीकरण की समीक्षा पूरी होने और मामले पर कोई अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।

    ओपी भट्ट ने 8 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद कंपनी ने मौजूदा नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 31 जनवरी, 2027 तक प्रभावी रहेगी।

    कंपनी के अनुसार, ओपी भट्ट वॉकहार्ट लिमिटेड के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर भी हैं। वहां वह ऑडिट, स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप और कैपिटल जुटाने से संबंधित कमेटियों के सदस्य के तौर पर जुड़े हुए हैं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद कोफोर्ज के शेयर में आई तेज गिरावट ने बाजार में तत्काल प्रतिक्रिया को स्पष्ट किया।

  • सोने के भाव में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट, 2150 रुपये टूटा रेट, चांदी 600 रुपये महंगी

    सोने के भाव में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट, 2150 रुपये टूटा रेट, चांदी 600 रुपये महंगी

    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में 2,150 रुपये की बड़ी कमी दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक रुख के बीच 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना घटकर 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दूसरी ओर, दो कारोबारी सत्र तक स्थिर रहने के बाद चांदी के भाव में एक बार फिर तेजी देखने को मिली। चांदी 600 रुपये महंगी होकर 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।

    सोने की कीमत में आई इस गिरावट के बाद 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने का भाव 2,150 रुपये घट गया। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना अब 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। इस तरह लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के दाम में गिरावट दर्ज की गई है।

    वहीं, चांदी की कीमतों ने सोने के मुकाबले अलग रुख दिखाया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में चांदी का भाव स्थिर रहने के बाद मंगलवार को इसमें 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही चांदी की कीमत बढ़कर 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इस तरह एक तरफ सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन नीचे आई, तो दूसरी तरफ चांदी ने दो सत्र की स्थिरता के बाद फिर तेजी दर्ज की।

    सोने और चांदी की कीमतों में हुए इस बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख को प्रमुख वजह बताया गया है। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख का असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल का प्रभाव घरेलू बाजार में भी दिखाई देता है। इसी के चलते मंगलवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में तेज गिरावट देखने को मिली।

    हालांकि, चांदी ने इस दौरान अलग दिशा में कारोबार किया। दो कारोबारी सत्र तक कीमत स्थिर रहने के बाद मंगलवार को चांदी के भाव में 600 रुपये की तेजी आई। इससे इसकी कीमत 2,41,100 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी मंगलवार के कारोबार में सोने और चांदी के दाम में विपरीत रुख देखने को मिला।

    अगर आज सोना और चांदी खरीदने की योजना है, तो सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत वाली खबर है। हालांकि, सोने का भाव अभी भी 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में शादी या तीज-त्योहार के लिए सोना खरीदने वाले लोग अपने बजट और मौजूदा रेट को ध्यान में रखते हुए खरीदारी का फैसला कर सकते हैं। दूसरी ओर, चांदी के भाव में 600 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे दोनों कीमती धातुओं के आज के रेट में अलग-अलग बदलाव देखने को मिला है।

  • दिल्ली के ओखला फेज-1 में सिलेंडर फटने से जोरदार धमाका, एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल, राहत-बचाव जारी

    दिल्ली के ओखला फेज-1 में सिलेंडर फटने से जोरदार धमाका, एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल, राहत-बचाव जारी

    नई दिल्ली । दिल्ली के ओखला फेज-1 में बुधवार को कम्युनिटी हॉल के पास सिलेंडर फटने से जोरदार धमाका हो गया। अचानक हुए इस हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। धमाके की तेज आवाज सुनकर लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

    घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। इसके बाद राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। घटनास्थल पर मौजूद टीमों ने आसपास के इलाके को भी देखा और हादसे से प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। मौके पर बचाव कार्य जारी रहने की जानकारी है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई सिलेंडर एक गाड़ी में लाए गए थे और उन्हें नीचे उतारा जा रहा था। इसी दौरान अचानक एक लंबा सिलेंडर फट गया। सिलेंडर के फटते ही तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास मौजूद लोगों में डर फैल गया। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    धमाका इतना तेज बताया जा रहा है कि आसपास की इमारतों के शीशे तक टूट गए। तेज आवाज और धमाके के प्रभाव से लोग घबरा गए और तुरंत अपने घरों तथा दुकानों से बाहर निकल आए। हादसे के बाद आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं।

    स्थानीय निवासी संजय कश्यप के अनुसार, धमाके में दो लोगों के बुरी तरह घायल होने की बात सामने आई है। उन्होंने करीब तीन से चार लोगों के घायल होने की जानकारी दी। घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका इलाज कराया जा रहा है।

    हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, कई लोगों के घायल होने के कारण राहत और बचाव दल लगातार मौके पर काम कर रहे हैं। घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र को भी देखा जा रहा है, ताकि हादसे से प्रभावित लोगों और अन्य संभावित नुकसान की जानकारी मिल सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि कुछ समय के लिए स्थिति को समझना भी मुश्किल हो गया। आसपास मौजूद लोगों में घटना को लेकर भय का माहौल बन गया। धमाके के बाद पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जांच शुरू की। हादसा किस परिस्थितियों में हुआ और सिलेंडर फटने की वजह क्या रही, इसकी जांच की जा रही है।

  • कोच बनने का ऑफर आया तो पहले पत्नी से पूछेंगे नेहरा! टीम इंडिया की जिम्मेदारी पर बोले ऐसा काम आसान नहीं 3-4 साल टिकना भी मुश्किल

    कोच बनने का ऑफर आया तो पहले पत्नी से पूछेंगे नेहरा! टीम इंडिया की जिम्मेदारी पर बोले ऐसा काम आसान नहीं 3-4 साल टिकना भी मुश्किल


    नई दिल्ली। टीम इंडिया का हेड कोच बनना क्रिकेट की दुनिया में किसी भी खिलाड़ी या कोच के लिए बड़े सम्मान की बात मानी जाती है लेकिन पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के लिए यह जिम्मेदारी फिलहाल इतनी आसान नजर नहीं आती। टीम इंडिया के कोच पद को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपने खास मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद लोग हंस पड़े। नेहरा ने कहा कि अगर उन्हें भारतीय टीम की कोचिंग संभालनी पड़ी तो सबसे पहले घर की हाई कमीशन यानी अपनी पत्नी से बात करनी होगी वरना तलाक हो सकता है। हालांकि उनका यह बयान मजाकिया अंदाज में था और इसके पीछे उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट की बेहद व्यस्त जिंदगी को बड़ी वजह बताया।

    आशीष नेहरा को टीम इंडिया के अगले हेड कोच के संभावित दावेदारों में गिना जाता रहा है। इसकी बड़ी वजह आईपीएल में गुजरात टाइटन्स के साथ उनका शानदार कोचिंग रिकॉर्ड है। नेहरा ने 2022 में गुजरात टाइटन्स को उसके पहले ही सीजन में आईपीएल चैंपियन बनाया था। इसके बाद टीम ने 2023 और 2026 में भी फाइनल तक का सफर तय किया। इस प्रदर्शन ने नेहरा की कोच के तौर पर पहचान को और मजबूत किया है।

    कोलकाता में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के सालाना अवॉर्ड समारोह के दौरान नेहरा से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच की जिम्मेदारी संभालना चाहेंगे। नेहरा ने साफ किया कि वह इस पद को लेकर अभी कोई योजना नहीं बना रहे हैं। उनके मुताबिक टीम इंडिया को कोचिंग देना निश्चित तौर पर बड़े सम्मान और गर्व की बात होगी लेकिन फिलहाल वह गुजरात टाइटन्स के साथ अपनी भूमिका में खुश हैं और उन्होंने इस जिम्मेदारी को अपनी महत्वाकांक्षा नहीं बनाया है।

    इसके बाद नेहरा ने जिस अंदाज में अपनी पत्नी का जिक्र किया उसने पूरे बयान को मजेदार बना दिया। उन्होंने कहा कि अगर कभी टीम इंडिया के कोच पद का ऑफर आता है तो पहले पत्नी से बात करनी होगी। इसकी वजह भी उन्होंने खुद बताई। नेहरा के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट में कोच की नौकरी का मतलब साल के करीब आठ से नौ महीने तक लगातार यात्रा करना और परिवार से दूर रहना है। उनके मुताबिक यह काम सुनने में जितना आकर्षक लगता है असल में उतना ही चुनौतीपूर्ण है।

    नेहरा ने यह भी बताया कि इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग में लगातार यात्रा दबाव और काम की मांग इतनी ज्यादा होती है कि बहुत कम कोच तीन या चार साल से ज्यादा समय तक इस भूमिका में टिक पाते हैं। यही वजह है कि वह इस पद को लेकर तुरंत कोई फैसला या योजना बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

    नेहरा ने आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट की कोचिंग के बीच फर्क भी बताया। उनके मुताबिक आईपीएल में भी दबाव कम नहीं होता लेकिन नेशनल टीम को संभालने की जिम्मेदारी बिल्कुल अलग स्तर की होती है। राष्ट्रीय टीम का कोच सिर्फ एक फ्रेंचाइजी नहीं बल्कि पूरे देश की उम्मीदों के साथ जुड़ा होता है। लगातार दौरे मैचों का दबाव खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जिम्मेदारी और हर फैसले पर होने वाली आलोचना इस भूमिका को बेहद कठिन बना देती है।

    फिलहाल नेहरा गुजरात टाइटन्स के साथ खुश हैं और टीम इंडिया के कोच पद का दरवाजा उन्होंने पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। उनका कहना है कि भविष्य में अगर ऐसा मौका आता है तो उस समय परिस्थितियों को देखकर फैसला लिया जाएगा। यानी नेहरा ने कोच बनने से इनकार नहीं किया है लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता यही है कि वह अपनी मौजूदा भूमिका में पूरी तरह संतुष्ट हैं। उनका पत्नी वाला मजाक भले ही सुर्खियों में छा गया हो लेकिन इसके पीछे छिपी बात साफ है कि टीम इंडिया का कोच बनना सिर्फ क्रिकेट की रणनीति बनाने का काम नहीं बल्कि निजी जिंदगी से भी बड़ा समय और त्याग मांगने वाली जिम्मेदारी है।

  • दिल्ली नहीं, गुजरात केवड़िया में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह, उद्धव ठाकरे ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल

    दिल्ली नहीं, गुजरात केवड़िया में होगा 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह, उद्धव ठाकरे ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन दिल्ली से गुजरात के केवड़िया ले जाने के फैसले को लेकर सियासत गरमा गई है। शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक तरह की दीवार खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, पार्टी सांसद संजय राउत ने भी समारोह को लेकर सवाल उठाते हुए कलाकारों से इसके बहिष्कार की अपील की है।

    उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का स्थान बदले जाने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि इस तरह के राष्ट्रीय कार्यक्रम मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू और देश के दूसरे राज्यों की राजधानियों में क्यों नहीं आयोजित किए जा सकते। उन्होंने कहा कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच दीवार बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है, इसका जवाब भारतीय जनता पार्टी से मांगा जाना चाहिए।

    उद्धव ठाकरे के बाद सांसद संजय राउत ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल गुजरात के प्रधानमंत्री हैं। राउत ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश का राष्ट्रीय कार्यक्रम है और ऐसे में लोगों की स्वाभाविक उम्मीद होगी कि इसका आयोजन देश की राजधानी में किया जाए।

    संजय राउत ने समारोह को गुजरात ले जाने के फैसले पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या यह वाइब्रेंट गुजरात का कार्यक्रम है। उन्होंने इस विचार के पीछे के लोगों के लिए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ तक कहा।

    राउत ने दावा किया कि गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का स्थान बदला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से देश की राजधानी और राष्ट्रीय पुरस्कारों की अहमियत कम करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कलाकारों से गुजरात नहीं जाने की अपील करते हुए कहा कि देश पर गर्व करने वाले कलाकार पुरस्कार लेने से इनकार कर दें।

    अधिकारियों के अनुसार, 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह अब दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को समारोह में विजेताओं को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह का स्थान बदलने के फैसले ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है और विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

    केवड़िया, जिसे अब एकता नगर के नाम से जाना जाता है, गुजरात के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थित है, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के नाम से जाना जाता है। प्रतिमा की ऊंचाई 597 फीट है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में इसका उद्घाटन किया था।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। पहली बार पुरस्कार समारोह दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था। इसके बाद ज्यादातर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह विज्ञान भवन में ही होते रहे हैं। हालांकि, यह परंपरा पूरी तरह दिल्ली तक सीमित नहीं रही है। कुछ मौकों पर समारोह देश के दूसरे शहरों में भी आयोजित किए गए हैं। वर्ष 1971 में 17वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह चेन्नई में आयोजित किया गया था।

  • धुरंधर की कहानी पर तिग्मांशु धूलिया ने उठाए सवाल, रणवीर सिंह की फिल्म की तारीफ के बावजूद बोले- क्या यही कहानी है

    धुरंधर की कहानी पर तिग्मांशु धूलिया ने उठाए सवाल, रणवीर सिंह की फिल्म की तारीफ के बावजूद बोले- क्या यही कहानी है


    नई दिल्ली । रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और बॉक्स ऑफिस पर भी मजबूत प्रदर्शन किया। फिल्म की सफलता के बावजूद इसके कंटेंट और कहानी को लेकर अब फिल्म निर्माता-निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में बदलते कहानी कहने के तरीके पर चर्चा करते हुए ‘धुरंधर’ को मौजूदा फिल्मी फॉर्मूले का उदाहरण बताया।

    तिग्मांशु धूलिया के मुताबिक आज के दौर में कॉरपोरेट संस्कृति और एक जैसे फिल्मी टेम्पलेट के कारण मौलिक कहानियों की संख्या कम होती जा रही है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर बनने वाली कई फिल्मों में कहानी से ज्यादा प्रस्तुति, एक्शन और स्टार पावर पर जोर दिखाई देता है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘पुष्पा’, ‘केजीएफ’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों का उदाहरण दिया।

    हालांकि, तिग्मांशु ने ‘धुरंधर’ को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने फिल्म के पहले पार्ट की प्रस्तुति की तारीफ की और कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई। उनके अनुसार फिल्म को अच्छे तरीके से पेश किया गया था और इसका संगीत भी प्रभावशाली था। लेकिन जब बात कहानी की आती है तो उन्होंने इसकी मौलिकता पर सवाल खड़ा किया।

    तिग्मांशु ने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर किसी दर्शक से ‘धुरंधर’ की कहानी सुनाने के लिए कहा जाए तो वह वास्तव में कितनी विस्तृत कहानी बता पाएगा। उन्होंने फिल्म की कहानी को एक ऐसे व्यक्ति की कहानी के रूप में बताया जो अंडरकवर एजेंट बनकर पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचाता है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि क्या इसे पूरी तरह एक मौलिक और मजबूत कहानी माना जा सकता है।

    उनकी टिप्पणी केवल ‘धुरंधर’ तक सीमित नहीं रही। तिग्मांशु ने हिंदी सिनेमा में मौलिक कहानियों की कमी को लेकर व्यापक चिंता जताई। उनका कहना है कि पहले ऐसे लोग मौजूद थे जो अलग तरह की कहानियां सुनाते थे, लेकिन अब ऐसे कहानीकारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते। फिल्म उद्योग में यह धारणा भी बनी हुई है कि अलग और प्रयोगात्मक कहानियां दर्शकों को पसंद नहीं आएंगी।

    तिग्मांशु के अनुसार इसी सोच की वजह से फिल्मों में एक जैसे फॉर्मूले दोहराए जा रहे हैं। उनका मानना है कि इसका असर केवल फिल्मों की कहानियों पर नहीं बल्कि समाज और संस्कृति की विविधता पर भी दिखाई देता है। उन्होंने पूंजीवाद और एक जैसी उपभोक्ता संस्कृति का उदाहरण देते हुए कहा कि आज लोगों की पसंद, पहनावे और यहां तक कि शहरों की पहचान में भी समानता बढ़ती जा रही है।

    उन्होंने कहा कि जब हर चीज एक ही पैटर्न पर तैयार होने लगे तो अलग पहचान धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। उनके मुताबिक यही स्थिति फिल्म इंडस्ट्री में भी दिखाई दे रही है, जहां अलग तरह की कहानियों के बजाय सफल साबित हो चुके फॉर्मूलों को दोहराने पर ज्यादा भरोसा किया जाता है।

    तिग्मांशु धूलिया के अपने काम की बात करें तो उनकी आगामी फिल्म ‘घमासान’ 11 सितंबर 2026 को रिलीज होने वाली है। ऐसे में ‘धुरंधर’ की कहानी पर उनकी टिप्पणी उस समय सामने आई है जब हिंदी सिनेमा में बड़े बजट की फिल्मों, स्टार आधारित कहानियों और मौलिक कंटेंट को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। उनकी बातों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दर्शकों को आकर्षित करने वाली भव्य प्रस्तुति के साथ क्या मजबूत और नई कहानी को भी बराबर महत्व मिल रहा है।

  • ट्रंप ने पुतिन को मिलाया फोन, यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर हुई चर्चा

    ट्रंप ने पुतिन को मिलाया फोन, यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर हुई चर्चा

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीब एक घंटे फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं और आगे की कूटनीतिक पहल को लेकर चर्चा हुई। क्रेमलिन ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि युद्ध का अंत अमेरिका और रूस के संबंधों को सामान्य बनाने का रास्ता खोल सकता है।

    अमेरिकी दूतों की मॉस्को-कीव यात्रा के बाद हुई बातचीत

    ट्रंप और पुतिन के बीच यह फोन वार्ता अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की हालिया मॉस्को तथा कीव यात्रा के बाद हुई। दोनों अमेरिकी प्रतिनिधि यूक्रेन युद्ध को लेकर लंबे समय से रुकी बातचीत को फिर शुरू कराने की कोशिश में जुटे हैं।

    क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव के मुताबिक, पुतिन और ट्रंप ने अमेरिकी दूतों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को सकारात्मक माना। बातचीत के दौरान पुतिन ने ट्रंप को युद्धक्षेत्र की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी और यह भी बताया कि संघर्ष खत्म कराने में अमेरिका किस तरह भूमिका निभा सकता है।

    ट्रंप चाहते हैं अपने कार्यकाल में युद्ध का अंत

    उशाकोव ने बताया कि ट्रंप की इच्छा है कि उनके मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ही यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई बड़ी सफलता हासिल हो। ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त होने के बाद अमेरिका और रूस के बीच व्यापार तथा आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

    क्रेमलिन ने कहा कि युद्ध खत्म होने की स्थिति में दोनों देशों के रिश्तों को पूरी तरह सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    यूरोप को लेकर पुतिन ने क्या कहा?

    फोन बातचीत में पुतिन ने यूरोपीय देशों को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। क्रेमलिन के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति ने ट्रंप से कहा कि रूस की यूरोप के खिलाफ कोई आक्रामक मंशा नहीं है।

    पुतिन ने आरोप लगाया कि रूस से संभावित खतरे को लेकर यूरोपीय देशों में पैदा की जा रही चिंताएं उन्हें यूक्रेन के लिए सैन्य समर्थन बढ़ाने और अपने रक्षा खर्च में वृद्धि करने का आधार देती हैं।

    हालांकि, क्रेमलिन ने यह भी दोहराया कि रूस अपने घोषित सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बातचीत से क्या निकला?

    ट्रंप और पुतिन की बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी दूतों की मॉस्को और कीव यात्राओं के बाद दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। ऐसे में ट्रंप-पुतिन की फोन वार्ता को आगे की बातचीत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Bigg Boss 20 के पहले हफ्ते इन चार कंटेस्टेंट्स पर मंडराया खतरा, सबसे कम वोट मिलने पर किसका जीवनदान होगा खत्म

    Bigg Boss 20 के पहले हफ्ते इन चार कंटेस्टेंट्स पर मंडराया खतरा, सबसे कम वोट मिलने पर किसका जीवनदान होगा खत्म

    नई दिल्ली । बिग बॉस 20 शुरू होते ही घर के अंदर हलचल और विवाद देखने को मिलने लगे हैं। शो में इस बार 16 कंटेस्टेंट्स ने एंट्री ली है और शुरुआती दिनों में ही कई सदस्यों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। अब पहले वीकेंड का वार से पहले इस हफ्ते नॉमिनेट हुए कंटेस्टेंट्स की सूची सामने आ गई है। इन सदस्यों पर अब अपने पहले जीवनदान को बचाने की चुनौती है।

    पहले हफ्ते जिन कंटेस्टेंट्स को नॉमिनेट किया गया है, उनमें लव गिल, अर्शिफा खान, उदिति सिंह और कनिका मान का नाम शामिल है। अब दर्शकों के वोट यह तय करेंगे कि इन चारों में से किस कंटेस्टेंट को सबसे कम समर्थन मिलता है और कौन अपना पहला जीवनदान खो देगा।

    इस सीजन में नॉमिनेशन और एविक्शन का नियम पहले के मुकाबले कुछ अलग रखा गया है। हर कंटेस्टेंट को दो जीवनदान दिए गए हैं। ऐसे में किसी कंटेस्टेंट को पहली बार सबसे कम वोट मिलने पर सीधे घर से बाहर नहीं होना पड़ेगा। इसके बजाय उसका एक जीवनदान खत्म हो जाएगा। अगर किसी कंटेस्टेंट के दोनों जीवनदान खत्म हो जाते हैं, तभी उसके शो से बाहर होने की स्थिति बनेगी।

    पहले हफ्ते के नॉमिनेशन को लेकर दर्शकों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। सामने आई प्रतिक्रियाओं में कुछ दर्शक अर्शिफा खान और उदिति सिंह को सबसे ज्यादा खतरे में मान रहे हैं। हालांकि, वास्तविक स्थिति वोटिंग के नतीजे सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल चारों नॉमिनेटेड कंटेस्टेंट्स के लिए पहला जीवनदान बचाना बड़ी चुनौती बन गया है।

    शो में नॉमिनेशन के अलावा कैप्टेंसी को लेकर भी मुकाबला देखने को मिलेगा। घर के पहले कैप्टन बनने की रेस में कुशल तंवर उर्फ गुल्लू, आसिफ खान और युंग डीएसए उर्फ हर्ष के बीच मुकाबला होने वाला है। इस टास्क का परिणाम भी घर के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। कैप्टेंसी हासिल करने वाले कंटेस्टेंट को रूम नंबर 20 से जुड़ा सरप्राइज भी मिलने वाला है।

    बिग बॉस 20 में मैरी कॉम, माही विज, कनिका मान, आम्रपाली दुबे, ईशा रिखी, अर्शिफा खान, उदिति सिंह, रीति तिवारी, अमन गांधी, काजी तौकीर, लव गिल, कुशल तंवर, तनमय सिंह, हर्ष मछारे, रोहेद खान और रिया यादव सहित कुल 16 कंटेस्टेंट्स शामिल हैं।

    शो की शुरुआत से ही घर में विवादों का सिलसिला भी देखने को मिला है। काजी तौकीर और युंग के बीच मिमिक्री को लेकर बहस हुई। इसके बाद अर्शिफा खान की आम्रपाली दुबे और माही विज के साथ भी तीखी बहस सामने आई। अर्शिफा ने अपनी उम्र को लेकर किसी तरह की कमतर समझे जाने वाली सोच पर नाराजगी जाहिर की।

    पहले हफ्ते के नॉमिनेशन ने अब घर के चार सदस्यों के सामने सबसे बड़ी परीक्षा खड़ी कर दी है। लव गिल, अर्शिफा खान, उदिति सिंह और कनिका मान में से किसे दर्शकों का सबसे कम समर्थन मिलेगा, इसका फैसला वोटिंग से होगा। सबसे कम वोट पाने वाला कंटेस्टेंट सीधे बाहर नहीं होगा, लेकिन उसका एक जीवनदान जरूर खत्म हो जाएगा। ऐसे में पहले वीकेंड का वार पर सभी की नजरें टिकी हैं कि पहला जीवनदान किसके हिस्से में बचता है और किस कंटेस्टेंट को इसे गंवाना पड़ता है।

  • रात में फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी: रिसर्च में नींद से लेकर एकाग्रता तक पर असर के संकेत

    रात में फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी: रिसर्च में नींद से लेकर एकाग्रता तक पर असर के संकेत


    नई दिल्ली। मोबाइल आज हमारी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है जिससे दूरी बनाना आसान नहीं है। सुबह आंख खुलते ही फोन देखना हो या रात को सोने से ठीक पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो स्क्रीन हमारी रोजमर्रा की आदतों में शामिल हो चुकी है। कई लोग काम के दौरान बार बार नोटिफिकेशन देखते हैं तो कुछ लोग खाली समय मिलते ही रील्स वीडियो और सोशल मीडिया पर चले जाते हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मोबाइल हमारा कितना समय ले रहा है बल्कि अब यह भी चिंता बढ़ रही है कि इसका लगातार इस्तेमाल हमारी नींद ध्यान और दिमागी कार्यक्षमता को किस तरह प्रभावित कर रहा है।

    हालिया शोधों में मोबाइल और स्क्रीन टाइम को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। एक बड़े व्यवस्थित विश्लेषण में 21 अध्ययनों और करीब 5.48 लाख लोगों के आंकड़ों को शामिल किया गया। इसमें ज्यादा स्क्रीन टाइम का संबंध कम नींद अनिद्रा के लक्षण देर से सोने और सोने में परेशानी से पाया गया। विश्लेषण के मुताबिक स्क्रीन टाइम के हर अतिरिक्त घंटे के साथ सोने का समय औसतन करीब 13 मिनट तक आगे खिसक सकता है।

    रात में मोबाइल इस्तेमाल करने की समस्या केवल स्क्रीन की रोशनी तक सीमित नहीं है। फोन पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन सोशल मीडिया की पोस्ट वीडियो और मैसेज दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं। ऐसे में व्यक्ति बिस्तर पर जाने के बाद भी मानसिक रूप से आराम की स्थिति में नहीं पहुंच पाता। नतीजा यह होता है कि सोने में देर लग सकती है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में विश्वविद्यालय के छात्रों पर मोबाइल के सोने से पहले इस्तेमाल का असर देखा गया। शोध में पाया गया कि सोने से पहले लंबे समय तक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों में खराब नींद की संभावना अधिक थी। अध्ययन में मोबाइल के लंबे इस्तेमाल का संबंध एकाग्रता और कुछ प्रदर्शन संबंधी मापदंडों में कमी तथा प्रतिक्रिया समय बढ़ने से भी जोड़ा गया। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि इन निष्कर्षों को व्यापक आबादी पर लागू करने के लिए आगे बड़े अध्ययनों की जरूरत है।

    यहां सबसे जरूरी बात यह समझना है कि मोबाइल सीधे हमारे ब्रेन को खराब कर रहा है ऐसा कहना वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं होगा। असल समस्या अक्सर मोबाइल इस्तेमाल से बनने वाली आदतों की होती है। यदि कोई व्यक्ति रात में देर तक फोन चलाता है और इसके कारण पर्याप्त नींद नहीं ले पाता तो अगले दिन थकान चिड़चिड़ापन ध्यान लगाने में कठिनाई और काम करने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है। लंबे समय तक खराब नींद बनी रहे तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

    एक अन्य 2026 के अध्ययन में वयस्कों के बीच सोशल मीडिया और सोने से पहले स्मार्टफोन इस्तेमाल का संबंध देखा गया। इसमें ज्यादा स्मार्टफोन निर्भरता और बिस्तर पर फोन इस्तेमाल का संबंध खराब नींद से पाया गया जबकि खराब नींद और कुछ कार्यकारी क्षमताओं जैसे वर्किंग मेमोरी तथा ध्यान नियंत्रित करने में आने वाली कठिनाइयों के बीच भी संबंध सामने आया। हालांकि यह अध्ययन भी कारण और परिणाम को पूरी तरह साबित नहीं करता।

    ऐसे में मोबाइल छोड़ना समाधान नहीं है बल्कि इस्तेमाल का तरीका बदलना ज्यादा जरूरी है। खासकर सोने से पहले फोन से दूरी बनाना एक आसान कदम हो सकता है। रात में स्क्रीन टाइम कम करना नोटिफिकेशन बंद रखना और फोन को बिस्तर से दूर रखना मददगार आदतें हो सकती हैं। दिन में भी बिना जरूरत बार बार फोन देखने की आदत को कम किया जा सकता है।

    मोबाइल हमारी जिंदगी को आसान बनाने वाली तकनीक है लेकिन जब यही तकनीक हमारी नींद और रोजमर्रा की एकाग्रता पर हावी होने लगे तो सावधान होने की जरूरत है। फिलहाल वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं कहते कि मोबाइल हमारे ब्रेन को सीधे स्थायी रूप से बदल रहा है लेकिन लगातार और खासकर रात में अत्यधिक इस्तेमाल नींद तथा उससे जुड़ी मानसिक कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सवाल मोबाइल छोड़ने का नहीं बल्कि यह तय करने का है कि मोबाइल हमें चला रहा है या हम मोबाइल को चला रहे हैं।