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  • सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान

    सीहोर में सीवेज खुदाई से फूटी पेयजल पाइपलाइन, हजारों लीटर पानी बहा; दलदल बनी सड़कें, लोग परेशान


    सीहोर । सीहोर के मंडी क्षेत्र स्थित फ्रीगंज में सीवेज लाइन बिछाने का कार्य स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे रोजाना नलों की सप्लाई के समय हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। पानी की बर्बादी के साथ-साथ सड़कों पर कीचड़ और दलदल जैसी स्थिति बन गई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क खोदने के बाद एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मरम्मत का काम पूरा नहीं किया गया। ठेकेदार ने केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी, जिससे सड़कें ऊबड़-खाबड़ और कीचड़ से भर गई हैं। बारिश और पानी के रिसाव के कारण हालात और खराब हो गए हैं।

    क्षेत्र में दोपहिया और चारपहिया वाहन आए दिन कीचड़ में फंस रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को हो रही है। घरों के सामने गंदगी और पानी जमा रहने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

    वार्डवासियों ने नगर पालिका पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिम्मेदार इंजीनियर मौके का निरीक्षण नहीं करते, जिससे ठेकेदार मनमानी कर रहा है। पाइपलाइन टूटने के बाद भी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लगातार पानी की बर्बादी हो रही है।

    मामले पर सीहोर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सुधीर सिंह ने कहा कि संबंधित ठेकेदार और इंजीनियर को तत्काल पाइपलाइन की मरम्मत के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पानी की बर्बादी रोकी जाएगी और सड़क की स्थिति भी जल्द सुधारी जाएगी, ताकि नागरिकों को राहत मिल सके।

  • भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा

    भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह सकारात्मक संकेतों के साथ समाप्त हुआ। मजबूत निवेशक धारणा, चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी और बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रहीं, जबकि कुछ बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली।

    सप्ताह के दौरान सबसे अधिक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को मिला। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 72 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य 8.20 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों और आने वाली तिमाहियों में कारोबार की संभावनाओं को लेकर प्रबंधन के सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप आईटी क्षेत्र में खरीदारी तेज हुई और कंपनी के शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

    निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सप्ताहभर में बैंक के बाजार पूंजीकरण में 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार मूल्य में भी लगभग 24 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस और सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया।

    हालांकि सभी बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के बाजार मूल्यांकन में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण में भी कमी देखने को मिली। इसके बावजूद इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी रही और वे देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल रहीं।

    सप्ताह के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। यह क्रम भारतीय कॉरपोरेट जगत में इन कंपनियों की मजबूत उपस्थिति और निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

    समूचे शेयर बाजार का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 582 अंकों से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी भी 127 अंकों से अधिक मजबूत होकर बंद हुआ। विभिन्न सेक्टरों में सूचना प्रौद्योगिकी सबसे अधिक लाभ देने वाला सूचकांक रहा। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, ऑटो, सर्विसेज, सार्वजनिक उपक्रम और ऊर्जा क्षेत्रों में भी सकारात्मक बढ़त देखने को मिली।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजों, बेहतर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास के कारण भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। यदि आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो बाजार में यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल शीर्ष कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में आई यह बढ़ोतरी भारतीय इक्विटी बाजार की मजबूती और निवेशकों के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

  • सूचीबद्ध कंपनियों की निगरानी होगी और सख्त, सेबी ने फोरेंसिक ऑडिट पैनल का किया विस्तार, 18 नई विशेषज्ञ फर्मों को मिली जिम्मेदारी

    सूचीबद्ध कंपनियों की निगरानी होगी और सख्त, सेबी ने फोरेंसिक ऑडिट पैनल का किया विस्तार, 18 नई विशेषज्ञ फर्मों को मिली जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने पूंजी बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सूचीबद्ध कंपनियों के फोरेंसिक ऑडिट के लिए अपने अधिकृत पैनल का विस्तार किया है। नियामक ने 18 नई पेशेवर फर्मों को इस पैनल में शामिल किया है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की जांच की क्षमता और संस्थागत निगरानी दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय बाजार में विश्वास बनाए रखने और निवेशकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    यह विस्तार उस चयन प्रक्रिया के बाद किया गया है जिसे सार्वजनिक आमंत्रण के माध्यम से शुरू किया गया था। नियामक द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नई फर्मों को पहले से मौजूद अधिकृत सूची में शामिल किया गया है और उनका पंजीकरण तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इन फर्मों को सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय मामलों की गहन फोरेंसिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी जा सकेगी।

    नई सूची में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऑडिट एवं परामर्श फर्मों के साथ विभिन्न अनुभवी पेशेवर संस्थानों को भी स्थान दिया गया है। इन फर्मों के शामिल होने से जटिल वित्तीय मामलों, लेखा संबंधी विसंगतियों, संदिग्ध लेनदेन और संभावित कॉरपोरेट अनियमितताओं की जांच अधिक विशेषज्ञता और दक्षता के साथ किए जाने की संभावना बढ़ेगी। इससे नियामकीय जांच की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    फोरेंसिक ऑडिट सामान्य वित्तीय ऑडिट से अलग प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य केवल खातों की जांच करना नहीं, बल्कि संभावित धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ियों, धन के दुरुपयोग, लेखांकन में हेरफेर या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों का गहराई से परीक्षण करना होता है। जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के वित्तीय विवरणों या लेनदेन को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है, तब ऐसे मामलों में फोरेंसिक ऑडिट कराया जाता है ताकि वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।

    पूंजी बाजार में निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी उद्देश्य से नियामक समय-समय पर अपनी प्रक्रियाओं और विशेषज्ञ संसाधनों को मजबूत करता है। विस्तारित पैनल से उम्मीद है कि जांच संबंधी मामलों का निपटारा अधिक व्यवस्थित, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा। साथ ही कॉरपोरेट प्रशासन के मानकों को भी बेहतर बनाने में यह पहल सहायक सिद्ध हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत फोरेंसिक व्यवस्था से सूचीबद्ध कंपनियों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों के प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी और निवेशकों को अधिक विश्वसनीय कारोबारी वातावरण उपलब्ध होगा। नियामकीय संस्थाओं की ऐसी पहल से पूंजी बाजार की साख मजबूत होने के साथ-साथ दीर्घकालिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। आने वाले समय में यह कदम वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और निवेशक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार

    सलकनपुर मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ से 2 घंटे जाम, गुप्त नवरात्रि पर वाहनों की लगी लंबी कतार


    सीहोर । सीहोर जिले के बुधनी स्थित प्रसिद्ध सलकनपुर विजयासन देवी धाम में गुप्त नवरात्रि और रविवार के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दर्शन के लिए पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के कारण पहाड़ी पर मंदिर जाने वाले सड़क मार्ग पर लंबा जाम लग गया। करीब दो घंटे तक चार पहिया वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    स्थिति की जानकारी मिलते ही सलकनपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यातायात को व्यवस्थित करने के लिए लगातार प्रयास किए और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद मार्ग को सुचारु कराया। इसके बाद धीरे-धीरे वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, जाम लगने की बड़ी वजह सूर्य द्वार सीढ़ी मार्ग के आसपास सड़क किनारे लगी अस्थायी दुकानें हैं। आरोप है कि कुछ दुकानदार श्रद्धालुओं की कारों को बीच चढ़ाई में ही रुकवाकर सड़क किनारे खड़ा करवा देते हैं और उन्हें सीढ़ियों से मंदिर जाने की सलाह देते हैं। इससे सड़क संकरी हो जाती है और पीछे आने वाले वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।

    रविवार, अवकाश और विशेष धार्मिक अवसरों पर सलकनपुर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे अतिक्रमण यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों को व्यवस्थित किया जाए, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

  • संसद के मानसून सत्र में कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी, निवेश, न्याय व्यवस्था और एमएसएमई सुधार पर सरकार का विशेष फोकस

    संसद के मानसून सत्र में कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी, निवेश, न्याय व्यवस्था और एमएसएमई सुधार पर सरकार का विशेष फोकस

    नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार व्यापक विधायी एजेंडे के साथ सदन में प्रवेश करेगी। इस सत्र के दौरान सरकार पांच नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इन प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देना, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाना तथा राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों को और सख्त करना है। सरकार का मानना है कि इन विधेयकों से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक सुधारों को गति मिलेगी।

    सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में प्रस्तुत करेगी, जिसके माध्यम से पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेने वाला स्थायी कानून बनाया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना, सरकारी ऋण बाजार को अधिक मजबूत बनाना तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय बाजार में स्थिरता और तरलता बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने में सहायक होगी।

    मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा। इस विधेयक के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का तर्क है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निस्तारण की गति तेज होगी और न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते कार्यभार को कम करने में मदद मिलेगी।

    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार को और सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य भरोसे पर आधारित नियामकीय व्यवस्था विकसित करना, भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करना तथा राज्यों को अधिक प्रशासनिक अधिकार प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से छोटे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए विलंबित पंजीकरण से जुड़े नियमों को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध होने वाले कृत्यों पर अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किए जाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य कानूनों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।

    इन नए विधेयकों के अलावा सरकार संसद में पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। साथ ही अनुपूरक अनुदानों की मांग पर भी दोनों सदनों में विचार और मतदान कराया जाएगा। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक बहस होने की संभावना है। सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक और विपक्षी दलों की रणनीतिक बैठकों के बाद संसद की कार्यवाही राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।

  • इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का पारंपरिक शिल्प कौशल केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, आधुनिक सोच और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर रोजगार, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने इस विषय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विचारों को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आजीविका मजबूत हो रही है और भारत की पारंपरिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।

    वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्चस्तरीय फैशन परंपरा और भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई कला का सफल समन्वय हुआ है। इससे भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्य अवसर भी विकसित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भी इस पहल का उल्लेख किया गया था, जिससे भारतीय शिल्प कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत मिलता है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा किया और वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें यह जानकर विशेष संतोष हुआ कि कंपनी ने अपनी कार्यशाला को शहर से गांव में स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि पारंपरिक कौशल रखने वाले ग्रामीण परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः रोजगार की तलाश में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन इस पहल ने विपरीत दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभा को अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे पारंपरिक शिल्प की निरंतरता भी बनी रहती है और नई पीढ़ी का इस कला से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे समय में जब खेती प्रभावित होती थी, तब ग्रामीण परिवार सूती और रेशमी वस्त्रों पर बारीक कढ़ाई कर अपनी आजीविका चलाते थे। यही परंपरा आज आधुनिक बाजारों तक पहुंचकर नए अवसरों का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि धैर्य, अनुशासन और बारीकी जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण भारतीय कारीगरों की यह कला देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक विकास की भी मजबूत आधारशिला बन सकती है।

  • वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में शोपियां और पुलवामा से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप सिंगापुर के लिए रवाना की गई है। इस पहल को क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए नए अवसरों का द्वार माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत करना है।

    जम्मू-कश्मीर लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले शीतोष्ण फलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां की जलवायु, मिट्टी और प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसे फलों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। अरेको चेरी अपनी मिठास, आकर्षक रंग और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष मांग रखती है, जबकि सेंटरोज प्लम भी गुणवत्ता और स्वाद के आधार पर प्रीमियम श्रेणी का फल माना जाता है।

    इस निर्यात के लिए फलों की कटाई से लेकर ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन तक पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की गई। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली का उपयोग किया गया, ताकि सिंगापुर पहुंचने तक फलों की ताजगी और गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता से जुड़े सभी आवश्यक मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया गया।

    इससे पहले जम्मू-कश्मीर से ताजी चेरी और प्लम का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई जैसे बाजारों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। अब सिंगापुर जैसे नए और प्रीमियम बाजार में प्रवेश से क्षेत्र के बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और व्यापक होने की उम्मीद है। इससे भविष्य में अन्य देशों के साथ भी निर्यात के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

    इस पहल में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं और स्थानीय निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। आधुनिक पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात प्रबंधन की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि उत्पाद वैश्विक बाजार की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरें। इससे स्थानीय बागवानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन और प्रबंधन की नई जानकारी भी मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों को पारंपरिक बिक्री व्यवस्था की तुलना में काफी बेहतर प्रतिफल मिलने की संभावना है। बेहतर मूल्य मिलने से बागवान आधुनिक खेती तकनीकों, उन्नत पौधों, वैज्ञानिक प्रबंधन और फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी, फसल की बर्बादी कम होगी और निर्यात योग्य फलों की मात्रा में भी वृद्धि होगी।

    जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों के लिए यह उपलब्धि केवल एक निर्यात खेप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों से सीधा जुड़ाव किसानों को स्थायी आय, बेहतर बाजार विकल्प और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। साथ ही भारत के उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय पहचान और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में कृषि निर्यात को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

  • न्यूयॉर्क में नेतन्याहू की गिरफ्तारी की बात पर बढ़ा विवाद, इजरायल और अमेरिकी नेताओं ने ममदानी के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति

    न्यूयॉर्क में नेतन्याहू की गिरफ्तारी की बात पर बढ़ा विवाद, इजरायल और अमेरिकी नेताओं ने ममदानी के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति


    नई दिल्ली ।
    न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि यदि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए सितंबर में न्यूयॉर्क आते हैं, तो उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय द्वारा जारी आरोपों के संदर्भ में गिरफ्तारी होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी नए कानून के जरिए ऐसा करने का प्रयास नहीं करेंगे और शहर के मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर ही कार्य करेंगे।

    ममदानी ने कहा कि उनके अनुसार नेतन्याहू पर लगे आरोप गंभीर हैं और इस कारण उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि न्यूयॉर्क शहर का प्रशासन कानून के दायरे में रहकर ही किसी भी निर्णय पर अमल करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर शहर के कानूनी विभाग के साथ चर्चा हुई है, लेकिन किसी प्रकार के विशेष कानूनी बदलाव की योजना नहीं है।

    ममदानी के इस बयान के बाद इजरायल और अमेरिका के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अमेरिका में इजरायल के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई की संभावना व्यावहारिक रूप से नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका रोम संविधि का सदस्य नहीं है, जिसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय काम करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत किसी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को राजनयिक सुरक्षा प्राप्त होती है और संघीय अधिकार स्थानीय प्रशासन से ऊपर होते हैं।

    संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डेनी डेनन ने भी ममदानी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क के मेयर को अंतरराष्ट्रीय विवादों की बजाय शहर के प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के बयान केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने का प्रयास हैं और इससे किसी कानूनी स्थिति में बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेंगे और इजरायल का पक्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखेंगे।

    न्यूयॉर्क स्थित इजरायल के महावाणिज्य दूतावास की ओर से भी कहा गया कि किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ्तारी का आदेश देने का अधिकार शहर के मेयर के पास नहीं होता। उनके अनुसार यह विषय संघीय सरकार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और कानूनी प्रावधानों से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की भूमिका सीमित है।

    अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने भी ममदानी की टिप्पणी का विरोध किया। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासन को विदेश नीति से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय शहर की कानून-व्यवस्था, महंगाई, आवास संकट और सामाजिक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।

    इजरायल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डैनियल बी. शापिरो ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी किसी कार्रवाई का वास्तविक प्रभाव सीमित होगा और इससे इजरायल की आंतरिक राजनीति पर अलग तरह का असर पड़ सकता है। उनके अनुसार इस प्रकार की बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस को और तीखा बना सकती है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाएं कहीं अधिक जटिल हैं। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून, राजनयिक प्रतिरक्षा और स्थानीय प्रशासन की शक्तियों को लेकर एक बार फिर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

  • जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को जांजीबार, यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया के राष्ट्रपति और रिवोल्यूशनरी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. हुसैन अली म्विनी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जल आपूर्ति और अन्य विकासोन्मुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और तंजानिया अपने दीर्घकालिक संबंधों को नई तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत जांजीबार और तंजानिया के साथ अपनी विकास साझेदारी को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने उच्च शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की है। उनका कहना था कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो भविष्य की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आईआईटी जांजीबार भारत और तंजानिया के बीच मजबूत होते शैक्षणिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देती है, बल्कि अफ्रीका में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने इसे ज्ञान आधारित सहयोग का प्रभावी उदाहरण बताया।

    राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली म्विनी भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और इससे पहले उन्होंने चेन्नई में आयोजित आईआईटी मद्रास के 63वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। अपने चेन्नई प्रवास के दौरान उन्होंने भारत और जांजीबार के बीच शैक्षणिक सहयोग की सराहना करते हुए आईआईटी मद्रास के जांजीबार परिसर को दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह भारत का पहला विदेशी आईआईटी परिसर है, जिसे दोनों देशों के बीच ज्ञान और नवाचार आधारित सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    नई दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति म्विनी का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत और तंजानिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोगों के बीच संपर्क और साझा विकास प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के विकास संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

    भारत पिछले कुछ वर्षों से अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी को व्यापक रूप देने पर लगातार कार्य कर रहा है। इसी नीति के तहत शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जांजीबार के राष्ट्रपति की यह यात्रा भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक, शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विकास साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी।

  • 20 वर्षों बाद व्हाइट हाउस पहुंचे लेबनान के राष्ट्रपति, ट्रंप के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव पर होगी निर्णायक चर्चा

    20 वर्षों बाद व्हाइट हाउस पहुंचे लेबनान के राष्ट्रपति, ट्रंप के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य तनाव पर होगी निर्णायक चर्चा


    नई दिल्ली ।
    लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन आधिकारिक दौरे पर अमेरिका पहुंच गए हैं, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव और हिज्बुल्लाह की भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा सहयोग और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर वॉशिंगटन पहुंचे राष्ट्रपति आउन और उनकी पत्नी नायमा आउन का एंड्रयूज एयर फोर्स बेस पर औपचारिक स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, अमेरिका में लेबनान की राजदूत, संयुक्त राष्ट्र में लेबनान के प्रतिनिधि तथा लेबनानी दूतावास के राजनयिक और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद राष्ट्रपति आउन अपने आधिकारिक आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिका स्थित लेबनानी दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात कर वहां के कामकाज और प्रवासी लेबनानी समुदाय से जुड़े मुद्दों की जानकारी प्राप्त की।

    राष्ट्रपति आउन अपने दौरे की शुरुआत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक से करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, क्षेत्रीय हालात और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। दोनों नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में हिज्बुल्लाह के हथियारों से जुड़े मुद्दे, लेबनान के दक्षिणी क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी तथा संघर्ष विराम व्यवस्था को प्रभावी बनाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।

    इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति आउन अमेरिकी सीनेट के कई सदस्यों और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से भी अलग-अलग बैठक करेंगे। इन बैठकों में लेबनान की आर्थिक स्थिति, सुरक्षा सहयोग, मानवीय सहायता, निवेश और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    जोसेफ आउन पिछले वर्ष लेबनान के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वह लंबे समय तक लेबनानी सेना के कमांडर रहे और उन्हें अमेरिका समर्थित सैन्य नेतृत्व के रूप में भी देखा जाता रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला व्हाइट हाउस दौरा है और पहली बार उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात होगी। लगभग दो दशक बाद किसी लेबनानी राष्ट्रपति का व्हाइट हाउस पहुंचना इस यात्रा को विशेष महत्व प्रदान करता है।

    मध्य पूर्व में लगातार बदलते सुरक्षा परिदृश्य और सीमा पर बनी संवेदनशील स्थिति के बीच इस मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं। यदि दोनों पक्ष सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों पर किसी साझा समझ तक पहुंचते हैं तो इससे लेबनान, इजरायल और व्यापक पश्चिम एशियाई क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। साथ ही यह दौरा अमेरिका और लेबनान के बीच भविष्य के सहयोग को नई मजबूती देने का अवसर भी माना जा रहा है।