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  • पांच राज्यों के चुनावों के दौरान BJP के खजाने में आए 1473 करोड़ रुपये, असम में हुए सबसे ज्यादा खर्च

    पांच राज्यों के चुनावों के दौरान BJP के खजाने में आए 1473 करोड़ रुपये, असम में हुए सबसे ज्यादा खर्च


    नई दिल्ली
    । भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party-BJP) के केंद्रीय पार्टी मुख्यालय को पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों (Assembly elections) के दौरान कुल 1472.8 करोड़ रुपये मिले थे। यह जानकारी पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को सौंपे गए चुनाव खर्च के ब्योरे से सामने आई है। फिलहाल चुनाव आयोग (Election Commission) ने असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी के खर्च से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। चुनाव पूरा होने के बाद 6 मई 2026 को बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,627.2 करोड़ रुपये था। 15 मार्च 2026 को यह राशि 6,722.6 करोड़ रुपये थी।


    तीन राज्यों में बीजेपी ने 160 करोड़ रुपये खर्च किए

    बीजेपी ने केंद्रीय मुख्यालय के साथ संबंधित राज्य और जिला इकाइयों को मिलाकर असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में कुल 160 करोड़ रुपये खर्च किए। इनमें सबसे ज्यादा खर्च असम में हुआ। आंकड़ों के मुताबिक:-
    – असम: 96.3 करोड़ रुपये
    – तमिलनाडु: 51.6 करोड़ रुपये
    – पुडुचेरी: 11.9 करोड़ रुपये

    एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने करीब 130.4 करोड़ रुपये सामान्य चुनाव प्रचार पर खर्च किए। वहीं, 29.6 करोड़ रुपये उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान और उनके आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी के प्रचार पर खर्च किए गए।


    असम में प्रचार पर 76.7 करोड़ रुपये खर्च

    असम में बीजेपी ने सामान्य पार्टी प्रचार पर कुल 76.7 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें केंद्रीय इकाई की ओर से खर्च किए गए 23.1 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। उम्मीदवारों पर पार्टी ने 19.5 करोड़ रुपये खर्च किए।

    स्टार प्रचारकों की यात्रा खर्च पर 27.3 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि विज्ञापनों पर 37 करोड़ रुपये खर्च किए गए। प्रचार सामग्री पर 8.9 करोड़ रुपये और अन्य मदों में 2.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उम्मीदवारों को कुल 19.4 करोड़ रुपये एकमुश्त राशि के तौर पर दिए गए। वहीं, उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी प्रकाशित करने पर 16.7 लाख रुपये खर्च हुए।


    तमिलनाडु में प्रचार के लिए 44.5 करोड़ रुपये

    तमिलनाडु में बीजेपी ने सामान्य पार्टी प्रचार के लिए 44.5 करोड़ रुपये खर्च करने को मंजूरी दी थी। इसके अलावा उम्मीदवारों पर 7 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

    कांग्रेस ने 248.6 करोड़ रुपये खर्च किए
    इसी चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से पहले जारी किए गए चुनाव खर्च के ब्योरे में कुल 248.6 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई थी। पश्चिम बंगाल और केरल के चुनाव खर्च से जुड़े बीजेपी के स्टेटमेंट अभी चुनाव आयोग की ओर से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

  • तमिलनाडु में CM विजय के खिलाफ एकजुट हो रहे सारे विपक्षी दल…. सरकार गिराने की हो रही तैयारी!

    तमिलनाडु में CM विजय के खिलाफ एकजुट हो रहे सारे विपक्षी दल…. सरकार गिराने की हो रही तैयारी!


    चेन्नई। त
    मिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) के विरोधी एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। AIADMK यानी अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने एमके स्टालिन (M.K. Stalin) की डीएमके (DMK) को साथ आने का चैलेंज दे दिया है। साथ ही कहा है कि विजय की तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) के खिलाफ नई पार्टियां भी साथ आ सकती हैं। हालांकि, इसपर डीएमके ने अब तक कोई रिप्लाई नहीं किया है।

    मंगलवार को पूर्व सीएम एडापड्डी के पलनीस्वामी से जब पूछा गया कि क्या टीवीके के खिलाफ गठबंधन तैयार हो रहा है या नहीं। इसपर उन्होंने कहा, ‘हां। हम भी टीवीके खिलाफ हैं। अगर कोई दूसरी पार्टी शामिल होना चाहती है, तो हम उनका स्वागत करेंगे। हमारा गठबंधन जैसा है, वैसा रहेगा। अगर दूसरी पार्टियां आना चाहती हैं, तो वो शामिल हो सकती हैं।’


    DMK को दिया चैलेंज

    इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के प्रमुख विपक्षी दल डीएमके को भी चैलेंज दे दिया है। उन्होंने कहा, ‘अगर नई पार्टियां हमारे साथ आना चाहती हैं, तो आ सकती हैं। क्या डीएमके… क्या डीएमके आएगी। क्या आप यह सवाल पूछ सकते हैं।’


    6 विधायक टूटे

    खास बात है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अन्ना द्रमुक के 6 विधायक टूट गए थे। सभी विजय के साथ चले गए थे और बचे हुए भी दो गुटों में बंट गए थे। इधर, डीमके नेता आरएस भारती जून में दोनों दलों के साथ आने से इनकार कर चुके हैं, लेकिन कहा था कि अगर DMK और AIADMK भविष्य में साथ आते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।


    DMK चेता चुकी

    अगस्त में स्टालिन ने कहा था कि नकी पार्टी राजनीतिक वापसी करने में सक्षम है और वह पूरे राज्य में मतदाताओं का समर्थन फिर से हासिल करने पर ध्यान लगाएगी। स्टालिन ने यहां द्रमुक मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘वह (विजय) विधानसभा को फिल्म का सेट समझते हैं और डायलॉग बोलते हैं।’

    स्टालिन ने कहा कि द्रमुक की नींव तत्काल राजनीतिक जीत या हार से कहीं आगे की है। उन्होंने कहा, ‘हम राजनीति में इसलिए नहीं आए क्योंकि हम ऊब गए थे। हम लड़ने के लिए आए थे। हमारे आंदोलन का जीवन केवल सफलता या विफलता तक सीमित नहीं है। चुनाव हारने के बाद अगले चुनाव तक सोए रहना अन्य दलों की आदत है। विपक्ष में रहते हुए भी हमारी पार्टी लोगों के लिए बिना सुस्ती के असाधारण रूप से काम करने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वियों के बीच जानी जाती है।’

    उन्होंने कहा, ‘हम वापसी करने में माहिर हैं और हम इसे अच्छी तरह करेंगे।’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जनसंपर्क मजबूत करने की अपील की।


    TVK की बैठक पर लेफ्ट दूर

    टीवीके बुधवार को चेन्नई में सहयोगी दलों के साथ दूसरी समन्वय बैठक करेगी, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। टीवीके मुख्यालय में होने वाली बैठक का उद्देश्य गठबंधन को औपचारिक रूप देना, साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना, संचालन समिति गठित करना और गठबंधन का आधिकारिक नाम तय करना है। कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके के बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वाम दलों ने बैठक से दूरी बनाई हैं।


    मतभेदों के बीच मीटिंग

    इस बीच, 2029 के लोकसभा चुनाव में विजय को प्रधानमंत्री पद का संभावित चेहरा बनाए जाने की टीवीके नेताओं की मांग को लेकर कांग्रेस के साथ भी मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस ने राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरा बताया है। हालांकि, टीवीके ने ‘विजय फॉर पीएम’ की मांग को व्यक्तिगत राय करार दिया है।

  • MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल

    MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले (Sehore district) में पानी साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्लोरीन गैस (Chlorine Gas) जब अचानक हवा में फैल जाए तो क्या होगा? आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फिर लोगों का अस्पताल की तरफ दौड़ना।

    मामला लसुड़िया खास गांव (Lasudiya Khas village) का है. यहां एक पानी फिल्टर प्लांट (Water filtration plant) है, जहां तालाब के पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था. सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी दौरान क्लोरीन गैस के टैंक में लीकेज हो गया।

    गैस टैंक से बाहर निकली तो आसपास मौजूद लोगों को इसका असर महसूस होने लगा. कुछ लोगों की आंखों में तेज जलन होने लगी, तो कुछ को सांस लेने में परेशानी हुई. देखते ही देखते इलाके में हड़कंप मच गया।

    गैस के संपर्क में आए लोगों को इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया. यहां डॉक्टरों ने प्रभावित लोगों का इलाज करना शुरू किया. अस्पताल पहुंचे लोगों की हालत को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन डॉक्टरों ने राहत की खबर दी. जिला अस्पताल के डॉक्टर हरिओम गुप्ता के मुताबिक, गैस से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को गंभीर परेशानी नहीं हुई है और सभी लोग खतरे से बाहर हैं।


    पानी साफ करने वाली गैस ने बढ़ाई चिंता

    क्लोरीन का इस्तेमाल आमतौर पर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है. लसुड़िया खास के इस फिल्टर प्लांट में भी तालाब के पानी को साफ करने के लिए इसका उपयोग हो रहा था. लेकिन टैंक में लीकेज के बाद यही गैस लोगों के लिए परेशानी की वजह बन गई।

    घटना की सूचना के बाद प्लांट में स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू की गईं. हालांकि, गैस लीक होने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

    राहत की बात यही है कि आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जरूर हुई, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है. सभी प्रभावित लोग खतरे से बाहर हैं. लोगों का सवाल है कि पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल हो रहा क्लोरीन गैस का टैंक आखिर लीक कैसे हुआ? और क्या प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे?

  • बुधवार का दिन और वास्तु के खास उपाय: घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए जानिए जरूरी नियम

    बुधवार का दिन और वास्तु के खास उपाय: घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए जानिए जरूरी नियम


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर के वातावरण और उसमें मौजूद ऊर्जा को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह के अलग अलग दिनों में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद मिल सकती है। बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन घर की साफ सफाई करने पूजा स्थल को व्यवस्थित रखने और आसपास के वातावरण को सकारात्मक बनाने पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है। मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मकता का अनुभव अधिक होता है और मन भी शांत रहता है।

    बुधवार की सुबह घर के मुख्य द्वार और आसपास के क्षेत्र की सफाई करना अच्छा माना जाता है। मुख्य प्रवेश द्वार को घर में आने वाली ऊर्जा का प्रमुख स्थान माना जाता है इसलिए वहां अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। टूटे हुए सामान पुराने बेकार कागज और अनुपयोगी वस्तुओं को लंबे समय तक घर में रखने के बजाय समय समय पर अलग करना बेहतर माना जाता है। साफ और व्यवस्थित घर न केवल देखने में अच्छा लगता है बल्कि मानसिक रूप से भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

    पूजा स्थल को बुधवार के दिन विशेष रूप से साफ और व्यवस्थित रखा जा सकता है। भगवान गणेश की पूजा करने वाले श्रद्धालु इस दिन पूजा स्थान पर दीपक जलाकर प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को दूर्वा और मिठाई का भोग लगाया जाता है। पूजा करते समय मन को शांत रखना और परिवार के सुख शांति की कामना करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वास्तु और धार्मिक परंपराओं में यह माना जाता है कि घर का पूजा स्थल साफ और शांत होना चाहिए ताकि वहां नियमित रूप से सकारात्मक वातावरण बना रहे।

    घर के उत्तर और पूर्व दिशा को लेकर भी वास्तु में विशेष मान्यताएं हैं। बुधवार के दिन इन स्थानों पर साफ सफाई रखने और अनावश्यक सामान जमा न होने देने की सलाह पारंपरिक रूप से दी जाती है। घर के कमरों में पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रवेश होना भी जरूरी है। बंद और अंधेरे स्थानों को नियमित रूप से साफ करने और हवादार रखने से घर का वातावरण बेहतर महसूस हो सकता है। सुबह के समय कुछ देर प्राकृतिक रोशनी आने देना भी घर को ताजगी भरा बना सकता है।

    बुधवार के दिन पौधों की देखभाल करना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। घर में लगे पौधों को जरूरत के अनुसार पानी देना और सूखे या खराब हिस्सों को हटाना घर की सुंदरता बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि पौधों की देखभाल करते समय उनकी जरूरत और मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। घर में साफ सफाई और हरियाली से वातावरण अधिक सुखद महसूस हो सकता है।

    वास्तु के अनुसार रसोई और भोजन करने की जगह को भी साफ रखना जरूरी माना जाता है। बुधवार को रसोई में अनावश्यक सामान इकट्ठा होने से बचना चाहिए और खराब खाद्य सामग्री को समय पर हटा देना चाहिए। भोजन बनाने और खाने की जगह साफ रहने से घर में व्यवस्था और स्वच्छता बनी रहती है। इसके साथ ही घर के सदस्यों को आपस में मधुर व्यवहार रखने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि किसी भी घर की वास्तविक सकारात्मकता केवल वस्तुओं की दिशा से नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों के व्यवहार और सोच से भी जुड़ी होती है।

    कुल मिलाकर बुधवार को अपनाए जाने वाले वास्तु टिप्स का उद्देश्य घर को साफ व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखना है। भगवान गणेश की आराधना करना पूजा स्थल की सफाई रखना मुख्य द्वार को व्यवस्थित रखना और घर में प्राकृतिक रोशनी तथा ताजी हवा का ध्यान रखना अच्छे वातावरण के लिए उपयोगी आदतें हो सकती हैं। वास्तु से जुड़ी मान्यताएं व्यक्तिगत विश्वास और परंपराओं पर आधारित हैं लेकिन स्वच्छता व्यवस्था और सकारात्मक सोच हर घर के लिए महत्वपूर्ण हैं। बुधवार के दिन इन छोटी आदतों को अपनाकर घर के माहौल को अधिक सुखद और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

  • MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार

    MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कारण उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी (Standing Hanuman Ji) के मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की टीमों ने मंदिर का ढांचा तोड़ दिया है लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की तमाम कोशिशें विफल रही हैं। इसको श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं। विरोध में हिंदूवादी संगठनों और भक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर मूर्तिं को हटाने का विरोध किया। अब तकनीकी जांच की बात कही जा रही है।


    सिहस्थ के मद्देनजर चौड़ी की जा रही सड़क

    अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में सिहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की हद में खड़े हनुमान जी के मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा है जिसे प्रसासन हटाने में लगा हुआ है। यह क्षेत्र कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर तक के मार्ग में है। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रशासन खड़े हनुमान जी की मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना चाहता है।


    तमाम कोशिशें बेकार, टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

    बताया जाता है कि बीते एक हफ्ते के भीतर प्रशासन की टीमों ने तीन बार हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें की लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अब श्रद्धालु, संत और हिंदूवादी संगठन इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोग प्रशासन से मूर्ति को नहीं हटाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा वक्त में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है जबकि प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो जगह दी है वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।


    जैसे पता चल कि प्रशासन आने वाला है, लग गया जमावड़ा

    श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे मंदिर के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर असर पड़ सकता है। बताया जाता है कि मंगलवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद खबरें फैलीं कि प्रशासन की टीम एक बार फिर मूर्ति को हटाने के लिए पहुंच सकती है। इसके बाद लोगों का जमावड़ा लगने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मंदिर पहुंच गए।


    हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे…

    भारी भीड़ के बीच भक्तों ने मंदिर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। नारेबाजी करते हुए लोगों ने हनुमान जी की प्रतिमा को किसी भी सूरत में नहीं हटाने देने की चेतावनी दी। हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने सरकार विकास के नाम पर 60 मंदिर हटा चुकी है। मैं सरकार से दो-टूक कहना चाहता हूं कि अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था श्री राम जी मत उलझो मिट जाओगे। आज हम कहते हैं हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे।


    बढ़ रहा आक्रोश, विरोध प्रदर्शन होगा तेज

    रूपेश ठाकुर ने आगे कहा कि महापौर और पार्षद को इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि उनका विरोध और तेज होगा। मौजूदा वक्त में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टेंट में विराजमान है। वहीं प्रशासन दिन प्रति दिन बढ़ते लोगों के आक्रोश के कारण कोई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता है। प्रशासन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिशें कर रहा है। इसके लिए बेहद सावधानी बरती जा रही है।


    पुरातत्व विभाग की टीम भी लौटी

    प्रशासन की ओर से तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन मूर्ति हिलने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं एक बार पुरातत्व विभाग की टीम भी लौट चुकी है। आलम यह कि खड़े हनुमान जी के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। नगर निगम की ओर से प्रतिमा को शिफ्ट करने के प्रयास सफल नहीं होने की खबरें ट्रेंड कर रही हैं। अब खड़े हनुमान जी मंदिर का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। अब मूर्ति की तकनीकी जांच की बात सामने आ रही है।

  • MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया

    MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा (Chhindwara) में मंगलवार दोपहर मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे भगवा झंडे को हटाने को लेकर विवाद हो गया. नगर निगम के कर्मचारियों ने पोल से भगवा झंडा (Saffron flag) उतार दिया था. जब हिंदू संगठनों के सदस्यों को पता चला कि झंडा नीचे पर पड़ा है, तो वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिसके बाद वहां जल्द ही भीड़ जमा हो गई. रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत (Arvind Rajput) ने आरोप लगाया कि कलेक्टर हरेंद्र नारायण (Collector Harendra Narayan) के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के कहने पर भगवा झंडा हटाया गया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नगर आयुक्त खुद मौके पर आकर झंडा दोबारा नहीं लगा देते।

    विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर निगम कमिश्नर सीपी राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और खंभे पर दोबारा केसरिया झंडा लगा दिया. इसके बाद विरोध-प्रदर्शन खत्म हो गया और हालात सामान्य हो गए. जानकारी के मुताबिक, खंभे पर लगे भगवा झंडे की जगह तिरंगा लगाने की योजना थी, लेकिन जिस तरह से झंडा हटाया गया, उससे विरोध शुरू हो गया. इसके बाद फिलहाल भगवा झंडे को उसकी मूल जगह पर वापस लगा दिया गया. इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने भीड़ जमा हो गई. प्रशासन ने झंडा हटाने के आरोपों को लेकर कोई अलग बयान जारी नहीं किया है।


    निगम कमिश्नर ने खुद लगाया झंडा

    कमिश्नर सीपी राय ने बताया कि मंगलवार दोपहर नगर निगम के कर्मचारियों ने मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे एक खंभे से भगवा झंडा हटा दिया था. हिंदू संगठनों के सदस्यों को झंडा नीचे पड़ा देखकर इस घटना का पता चला. इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे. नगर निगम की एक टीम भी वहां पहुंची. जब झंडे को लेकर विवाद बढ़ने लगा, तो वे खुद मौके पर गए लोगों की बात सुनी, खुद झंडा लगाया और मामले को सुलझाया।

  • वोंग बने दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले प्रधानमंत्री, 64% वृद्धि के बाद ट्रंप से भी ज्यादा हुआ वेतन

    वोंग बने दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले प्रधानमंत्री, 64% वृद्धि के बाद ट्रंप से भी ज्यादा हुआ वेतन


    सिंगापुर।
    सिंगापुर (Singapore) के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Prime Minister Lawrence Wong) ने मंगलवार को संसद को बताया कि राजनीतिक नेताओं (Political Leaders) की सैलरी बढ़ाई जाएगी। इससे मंत्रियों की सैलरी में 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी।

    सिंगापुर ने राजनीतिक नेताओं के भारी-भरकम वेतन को सही ठहराया है। तर्क दिया है कि इससे काबिल लोग आकर्षित होते हैं और अच्छा शासन सुनिश्चित होता है। फिर भी यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि कैबिनेट सदस्यों की आय ज्यादातर आम नागरिकों की आय से कहीं ज्यादा है।


    कितनी हो जाएगी सिंगापुर के पीएम की सैलरी?

    वोंग ने कहा कि इस बदलाव के बाद उनकी सालाना बेंचमार्क सैलरी 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर (1.7 मिलियन डॉलर) से बढ़कर 3.6 मिलियन सिंगापुर डॉलर हो जाएगी। उप-प्रधानमंत्री की 1.87 मिलियन सिंगापुर डॉलर से बढ़कर 3.06 मिलियन सिंगापुर डॉलर हो जाएगी, जबकि कैबिनेट मंत्रियों को उनकी सीनियरिटी और पोर्टफोलियो के महत्व के आधार पर 1.80 मिलियन सिंगापुर डॉलर से 2.88 मिलियन सिंगापुर डॉलर के बीच सैलरी मिलेगी।


    दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले पीएम

    वोंग ने कहा कि वे अपने कार्यकाल के दौरान वेतन में हुई पूरी बढ़ोतरी को सही और अच्छे कामों के लिए दान करने की योजना बना रहे हैं। वेतन में बढ़ोतरी से पहले भी सिंगापुर के प्रधानमंत्री की सैलरी अमेरिका और जी7 देशों समेत कई अन्य नेताओं की सैलरी से कहीं ज्यादा थी।

    वोंग ने कहा, “राजनीतिक वेतन एक मुश्किल और भावनात्मक मुद्दा है।” वोंग की पीपल्स एक्शन पार्टी लंबे समय से सत्ता में है और सिंगापुर की संसद तथा 21 सदस्यों वाली कैबिनेट पर उसका दबदबा है। उन्होंने कहा, “इसमें शामिल रकम ज्यादातर नागरिकों की कमाई से कहीं ज्यादा है, इसलिए मैं समझता हूं कि सिंगापुर के लोग इसकी बारीकी से जांच-पड़ताल क्यों करते हैं और क्यों कई लोग इस मामले को लेकर इतनी मजबूत राय रखते हैं।”

    हालांकि, वोंग ने कहा कि असल मुद्दा यह है कि क्या आने वाले दशकों में सिंगापुर में वैसी राजनीतिक लीडरशिप बनी रहेगी, जिसकी हमारे देश को आगे ले जाने के लिए जरूरत है। सिंगापुर को दुनिया के सबसे कम भ्रष्टाचार वाले देशों में लगातार गिना जाता है। वोंग ने कहा कि वेतन बढ़ाने की सिफारिश एक स्वतंत्र समिति ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा पदधारियों को तुरंत नए वेतनमानों पर नहीं लाया जाएगा।

  • दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा

    दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में पिछले माह कार्यालय आधारित नौकरियों (Office-Based Jobs) में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी (Office Jobs Rise 14 Percent) दर्ज की गई। इसमें ऑटो, स्वास्थ्य सेवा और रिटेल जैसे सेक्टरों का अहम योगदान रहा। नौकरी.डॉम (Naukri.com) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स पिछले साल अगस्त के 2,664 के मुकाबले बढ़कर 3,028 पर पहुंच गया। यह एक मासिक सूचकांक है, जो देश में व्हाइट-कॉलर (कार्यालय आधारित) नौकरियों के बाजार और भर्ती गतिविधियों की स्थिति को ट्रैक करता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वाहन क्षेत्र में भर्ती 19 फीसदी बढ़ी जबकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 16 प्रतिशत और खुदरा क्षेत्र में 15 फीसदी की वृद्धि हुई। इनके अलावा, बीमा क्षेत्र में 12 प्रतिशत, आईटी में 11 प्रतिशत, बैंकिंग व दैनिक उपभोग की वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र में 10-10 प्रतिशत तथा बीपीओ/आईटीईएस, तेल एवं गैस और रियल एस्टेट क्षेत्र में 8-8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, दवा/जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भर्ती स्थिर रही, जबकि आतिथ्य एवं यात्रा क्षेत्र में भर्ती 4%घटी और शिक्षा क्षेत्र में 8 फीसदी की गिरावट आई।

    रिपोर्ट में 14 फीसदी वृद्धि को त्योहारी सीजन के कैलेंडर के संदर्भ में देखने की बात कही गई है, क्योंकि पिछले साल त्योहारी अवधि का बड़ा हिस्सा अगस्त में था, जबकि इस साल यह सितंबर में आ गया है। इन्फो एज (इंडिया) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हितेश ओबेरॉय ने कहा, त्योहारों वाली तिमाही के दौरान आगे बढ़ने के साथ हमें भर्ती के अंतर्निहित रुझान की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। नौकरी.कॉम इन्फो एज का प्रमुख ब्रांड है।


    नए स्नातकों की भर्ती 15% बढ़ी

    रिपोर्ट के अनुसार, सभी अनुभव स्तरों पर भर्ती में वृद्धि रही। नए स्नातकों की भर्ती सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ी, जबकि चार से सात वर्ष के अनुभव वाले लोगों के लिए इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्यम से वरिष्ठ अनुभव वाले वर्गों में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। आठ से 12 वर्ष के अनुभव वालों के लिए भर्ती 16 प्रतिशत, 13 से 16 वर्ष के लिए 18 प्रतिशत और 16 वर्ष से अधिक अनुभव वालों के लिए 13 प्रतिशत बढ़ी।

  • BRICS Summit: आपसी मतभेद भुलाकर क्या मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे ब्रिक्स देश?

    BRICS Summit: आपसी मतभेद भुलाकर क्या मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे ब्रिक्स देश?


    नई दिल्ली।
    आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) से ठीक पहले कूटनीतिक हलकों में यह सवाल सबसे अहम है कि क्या ब्रिक्स देश (BRICS Country) अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मजबूत साझा सुर तलाश पाएंगे। इस चिंता की मुख्य वजह यह है कि भारत की अध्यक्षता में मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों (BRICS Foreign Ministers) की बैठक में तमाम कोशिशों के बावजूद किसी संयुक्त घोषणापत्र पर आम सहमति नहीं बन पाई थी। ब्रिक्स पारंपरिक रूप से सर्वसम्मति से काम करता है, लेकिन असहमति इस बात का संकेत है कि जैसे-जैसे इसका कुनबा बढ़ा है, वैसे-वैसे इसके भीतर अंतर्विरोध भी गहरे हुए हैं।


    क्यों फंसा था पेंच? :

    विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, फलस्तीन मुद्दे और लाल सागर में नौवहन सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर सदस्य देशों के बीच तीखा मतभेद देखने को मिला था। इस गतिरोध के केंद्र में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात थे। ईरान ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर कड़ी भाषा की मांग की, जबकि यूएई समेत कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। ईरान ने फिलिस्तीन और लाल सागर से जुड़े कुछ प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। नतीजतन संयुक्त बयान के स्थान पर भारत को अध्यक्षीय बयान से ही संतोष करना पड़ा।


    विस्तारित कुनबे की जटिलताएं

    ब्रिक्स में अब केवल पांच पारंपरिक देश- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका- के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया भी जुड़ चुके हैं। दुनिया की बहुत बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की नुमाइंदगी करने वाले इस विस्तारित मंच का आकार जितना बढ़ा है, कूटनीति के पेचीदा मामलों पर आमराय कायम करना उतना ही कठिन होता गया है। संगठन के भीतर अलग-अलग सामरिक गठबंधनों से जुड़े देशों के हित टकराते हैं, तो सहमति तलाशना कठिन साबित होता है।


    संतुलन साधने की परीक्षा

    ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहे भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की दोहरी चुनौती है। भारत की अध्यक्षता का मुख्य फोकस लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के एजेंडे के तहत वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत करना है। साथ ही आर्थिक-तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया संघर्ष और बढ़ते ध्रुवीकरण के बीच भारत को यह सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि ब्रिक्स किसी एकपक्षीय गुट के रूप में उभर कर न आए। इसकी बजाय विकासशील देशों के आर्थिक हितों का मंच बना रहे।

  • ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल

    ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नई पाबंदियों का ऐलान किया है। इस कार्रवाई में ईरान की 27 एयरलाइंस को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही तुर्की यूएई मलेशिया और कजाकिस्तान में काम करने वाली कुछ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ये कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को विमान जरूरी सामान और दूसरी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रही थीं।

    अमेरिका की इस कार्रवाई का सीधा असर ईरान के एविएशन कारोबार पर पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नए प्रतिबंधों का मकसद उन रास्तों को बंद करना है जिनके जरिए ईरानी एयरलाइंस को विदेशों से पैसा विमान उपकरण और दूसरी जरूरी सुविधाएं हासिल होती हैं। प्रतिबंधों के बाद ईरानी विमानन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना और विदेशी कंपनियों से सेवाएं लेना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

    ईरान का एविएशन सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रहा है। पुराने प्रतिबंधों के कारण ईरानी एयरलाइंस को नए विमान हासिल करने के साथ साथ विमान के जरूरी पुर्जे और तकनीकी सेवाएं जुटाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अब नई कार्रवाई के बाद यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। खास तौर पर ऐसी कंपनियां ज्यादा मुश्किल में आ सकती हैं जो ईरानी एयरलाइंस के साथ सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करती हैं।

    अमेरिकी अधिकारियों ने वित्तीय संस्थानों और बैंकों को भी ईरानी एविएशन नेटवर्क से जुड़े लेनदेन पर नजर रखने को कहा है। इसका मतलब यह है कि ईरानी एयरलाइंस के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना और विदेशों से जरूरी सामान खरीदना पहले की तुलना में और कठिन हो सकता है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ईरान की विमानन कंपनियों को सहायता देने वाले विदेशी कारोबारी नेटवर्क भी उसकी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

    इस कार्रवाई में Mahan Air पर भी दबाव बढ़ाया गया है। अमेरिका पहले से ही इस एयरलाइन पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी आरोप है कि Mahan Air ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को सहायता पहुंचाने में भूमिका निभाई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुछ विदेशी कंपनियों ने Mahan Air को विमान हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में मदद की। इसी तरह की गतिविधियों के आरोप में तुर्की और मलेशिया की कुछ कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है।

    अमेरिका के अनुसार कुछ कंपनियों ने Mahan Air को कम से कम तीन Boeing 777 विमान हासिल करने में मदद की। इन विमानों को पहले दूसरे देशों में इस्तेमाल से हटाया गया था और बाद में ईरानी एयरलाइंस के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया। अमेरिका का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की विमानन क्षमता को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

    नई पाबंदियों का असर केवल एयरलाइंस तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। टिकट बिक्री विमान आपूर्ति तकनीकी सेवाओं और दूसरे एविएशन कारोबार से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। इससे ईरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क पर दबाव बढ़ सकता है। दुबई दोहा और इस्तांबुल जैसे प्रमुख एयर कनेक्शन वाले क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    यह कार्रवाई ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अमेरिका पहले से ही ईरान के तेल और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है। अब एविएशन सेक्टर को भी निशाना बनाकर अमेरिका ईरान तक पहुंचने वाले विदेशी पैसे सामान और तकनीकी सहायता के रास्तों को और सीमित करना चाहता है। आने वाले समय में यदि ऐसी कार्रवाई और बढ़ती है तो ईरान की एयरलाइंस के लिए विमान संचालन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।