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  • बच्चों की मौत के बाद बालाघाट में बढ़ी चिंता: सरकारी दावों पर सवाल, इलाज के बाद फिर बीमार पड़ रहे मासूम

    बच्चों की मौत के बाद बालाघाट में बढ़ी चिंता: सरकारी दावों पर सवाल, इलाज के बाद फिर बीमार पड़ रहे मासूम


    भोपाल । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में पिछले ढाई महीने से बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने पूरे प्रदेश को चिंता में डाल दिया है। जून के आखिरी सप्ताह से बैहर और बिरसा ब्लॉक के कई बैगा और गोंड बहुल गांवों में बच्चों के बीमार पड़ने का सिलसिला शुरू हुआ था जो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सबसे बड़ा सवाल मौतों की संख्या को लेकर है। शुरुआत में प्रशासन की ओर से केवल 8 बच्चों की मौत की बात सामने आई लेकिन गांवों में पहुंची जमीनी पड़ताल और स्थानीय लोगों के दावों के बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया। अलग अलग रिपोर्टों में अब 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की बात सामने आ रही है जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक मौतों का कोई स्पष्ट और आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    सोनगुड्डा बोंदारी कुंडेकसा कोरका गठिया मछूलदा और मातला जैसे गांवों से बच्चों के बीमार होने और मौत की खबरें सामने आईं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई मौतें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तक नहीं हुईं। अडोरी पंचायत के सरपंच ने तो अपनी पंचायत में ही 9 बच्चों की मौत का दावा किया है। दूसरी ओर सरकार की मेडिकल स्क्रीनिंग में बीमारी की गंभीर स्थिति सामने आई है। केंद्रीय टीम ने इलाके में 32433 लोगों की जांच की जिसमें 7711 बच्चे गंभीर कुपोषित पाए गए। इनमें 518 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करना पड़ा। वहीं 13406 बच्चे डायरिया से पीड़ित मिले जबकि 274 बच्चों में गंभीर निमोनिया के लक्षण पाए गए। जुलाई से अब तक 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनमें से 379 बच्चों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 52 बच्चे अब भी इलाजरत हैं।

    इन मौतों के पीछे किसी एक बीमारी को जिम्मेदार नहीं माना जा रहा है। कई बच्चों में मलेरिया डायरिया खसरा और चर्म रोग जैसी समस्याएं सामने आईं लेकिन लगभग सभी मामलों में कुपोषण एक बड़ी साझा समस्या बनकर उभरा। यही कुपोषण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है और सामान्य दिखने वाली बीमारियों को भी गंभीर बना रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का शरीर संक्रमण से मुकाबला नहीं कर पाता। जिंक विटामिन ए और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी के कारण डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियां भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

    बालाघाट पहले से ही मलेरिया के लिहाज से संवेदनशील जिला रहा है। पिछले वर्ष प्रदेश में दर्ज 2126 मलेरिया मामलों में 685 मामले अकेले बालाघाट से सामने आए थे। इस वर्ष जुलाई तक प्रदेश में मिले 583 मामलों में भी 174 मामले बालाघाट के थे। इसके साथ ही बैगा समुदाय की बस्तियां जंगल और दुर्गम क्षेत्रों में होने के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। साफ पानी की कमी और लंबे समय तक पोषण आहार नहीं मिलने की समस्या ने हालात को और गंभीर किया है।

    सबसे चिंता की बात यह है कि इलाज के बाद घर लौटने वाले कुछ बच्चे दोबारा बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्पताल में इलाज कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों के पोषण और गांव के स्वास्थ्य वातावरण पर भी लगातार निगरानी जरूरी है। डायरिया होने पर तत्काल ओआरएस देना जिंक की खुराक पूरी करना और बच्चे की हालत बिगड़ने पर बिना देरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना जरूरी बताया गया है।

    मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। गलत आंकड़े बताए जाने के आरोपों के बाद तत्कालीन सीएमएचओ को हटाया गया। एक बच्चे की मौत के बाद बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार कराए जाने के ग्रामीण आरोपों ने भी विवाद बढ़ाया। अस्पतालों में फोटो और मीडिया कवरेज पर रोक लगाने का आदेश जारी होने और कुछ ही घंटों में वापस लिए जाने से भी पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हुए।

    सरकार ने स्थिति संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रभावित बैगा गांव पहुंचे और मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर आर्थिक सहायता की घोषणा की। जिला अस्पताल के बच्चों के वार्ड की क्षमता बढ़ाई गई है। छह मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं और निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है। गांवों में सफाई अभियान और कीटनाशक छिड़काव भी कराया गया है।

    इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल अभी भी वहीं खड़ा है कि आखिर इन बच्चों की मौतों की वास्तविक संख्या कितनी है और बीमारी की जड़ क्या है। कुपोषण मलेरिया संक्रमण दूषित पानी और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था सभी एक साथ जिम्मेदार हैं या इसके पीछे कोई और कारण भी है यह स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में जरूरी है कि मौतों के आंकड़ों को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाए और हर प्रभावित गांव की स्वतंत्र जांच कराई जाए। क्योंकि बालाघाट की इन आदिवासी बस्तियों में सवाल सिर्फ बीमार बच्चों का नहीं बल्कि उन परिवारों के भरोसे का भी है जो अपने बच्चों को बचाने के लिए अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

  • 17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान

    17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान


    भोपाल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर भारत में बड़े जनसंपर्क अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। 17 सितंबर से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर के बीच कुल 20 यात्राएं निकाली जाएंगी। दोनों दिशाओं में 10-10 यात्राओं के लिए अलग अलग रूट तैयार किए जा रहे हैं ताकि इनके मार्ग आपस में न टकराएं। इस पूरे अभियान में मध्यप्रदेश को भी अहम केंद्र बनाया गया है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 55 जिलों को इन यात्राओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

    बीजेपी की योजना के मुताबिक यह अभियान केवल यात्राओं और राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जनभागीदारी सेवा गतिविधियों सरकारी योजनाओं के प्रचार और विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी इससे जोड़ा जाएगा। गुजरात राजस्थान मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरने वाली इन यात्राओं में स्थानीय नागरिकों युवाओं महिलाओं विद्यार्थियों किसानों व्यापारियों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को अलग अलग गतिविधियों में शामिल करने की तैयारी है। अब तक 13 रूट तय किए जा चुके हैं जबकि अन्य मार्गों को अंतिम रूप देने पर मंथन जारी है।

    मध्यप्रदेश में यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अलग अलग नेताओं को सौंपी जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि यात्रा के हर प्रमुख पड़ाव को स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी का केंद्र बनाया जाए। यहां लोगों से उनके क्षेत्र के विकास को लेकर सुझाव लिए जाएंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाया जाएगा। 25 आइकॉन अभियान के तहत प्रत्येक पड़ाव से किसान शिक्षक महिला उद्यमी खिलाड़ी या किसी अन्य क्षेत्र में प्रेरणादायक काम करने वाले व्यक्ति का चयन किया जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

    अभियान में चिट्ठी 2047 के नाम के जरिए नागरिकों से यह पूछा जाएगा कि वे वर्ष 2047 तक अपने क्षेत्र और देश को किस रूप में देखना चाहते हैं। इसी तरह मेरे लिए भारत की प्रगति नाम से लोगों की राय रिकॉर्ड की जाएगी। अलग अलग स्थानों से जुटाई गई इन आवाजों को वाराणसी में जोड़कर एक विशेष फिल्म तैयार करने का प्रस्ताव है। यात्रा से स्थानीय प्रभावशाली लोगों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा।

    यात्रा के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से जुड़े गांवों और स्मारकों से मिट्टी एकत्र करने की भी योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। कई प्रमुख पड़ावों पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे जहां सामान्य जांच ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के साथ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण सहायता डेस्क भी लगाए जाएंगे।

    बीजेपी इस अभियान के जरिए वर्ष 2001 से 2026 तक हुए बदलावों को भी लोगों के सामने रखने की तैयारी कर रही है। पहले और अब प्रदर्शनी के जरिए सड़क स्कूल घर बिजली और दूसरी सुविधाओं में आए बदलावों को तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से दिखाया जाएगा। विकास की यात्रा नाम से नुक्कड़ नाटक भी आयोजित होंगे जिनमें एक परिवार की कहानी के जरिए विकास और सरकारी योजनाओं के असर को स्थानीय भाषा में समझाने की कोशिश की जाएगी।

    मोदी के जन्मदिन से डिजिटल अभियान पर भी खास जोर रहेगा। भाजपा इन्फ्लुएंसर्स और रील्स के जरिए खासकर युवा पीढ़ी तक पहुंचने की रणनीति बना रही है। प्रत्येक शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इन वीडियो में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। वीडियो में लाभार्थी का नाम स्थान जिला और संबंधित योजना के साथ उसके जीवन में आए बदलाव को सामने लाने की योजना है।

    कहानी बदलाव की अभियान के तहत करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को शॉर्टलिस्ट कर करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इनका व्यापक प्रचार किया जाएगा।

    17 सितंबर की शाम आशीर्वाद का दीया अभियान के तहत बूथ स्तर पर लोगों के घरों में दीप जलाने की अपील की जाएगी। वहीं सेवा मेरा योगदान अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक को कम से कम 25 मिनट समाज सेवा के लिए देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा कार्य का फोटो या वीडियो बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    गांवों में नमो सेवा गाथा के जरिए नुक्कड़ नाटक होंगे। आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगन का उत्सव आयोजित कर माताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। सेवा ज्योति यात्रा भी अलग अलग जिलों और गांवों से निकलेगी। इसके अलावा वड़नगर से काशी तक जल जन और सेवा संकल्प यात्रा में पवित्र नदियों का जल लेकर यात्रियों के पहुंचने की योजना है।

    अभियान में सेवा सेतु के जरिए विधानसभा स्तर पर कैंप लगाने की भी तैयारी है जहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर दिलाने की कोशिश होगी। नदी घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण से लेकर ह्यूमन रंगोली और भारत मंडला जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। युवाओं के लिए राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज आयोजित किया जाएगा जिसमें विद्यार्थी स्टार्टअप और इनोवेटर्स अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत करेंगे।

    इस पूरे अभियान का बड़ा समापन 17 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित जनसेवक महाकुंभ पंचायत से पार्लियामेंट के रूप में होगा। इसमें करीब 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने का अनुमान है। इस तरह बीजेपी का यह अभियान एक साथ जनसंपर्क सेवा सरकारी योजनाओं की पहुंच सांस्कृतिक जुड़ाव और डिजिटल प्रचार को जोड़ने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। पार्टी की रणनीति साफ है कि मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाला यह अभियान केवल जमीन पर होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित न रहे बल्कि मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया के जरिए भी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे।

  • सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?

    सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में जहरीली दवा, शराब और दूषित पानी से लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन 20 साल से अधिक समय से सत्ता में रहने वाली भाजपा सरकार इनसे सबक लेने और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है।
    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में शासन व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने सागर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद एक जैसी कार्रवाई दोहराई जाती है—कुछ गिरफ्तारियां, कुछ अधिकारियों का निलंबन और जांच के आदेश। उनके मुताबिक, यह पहली बार नहीं हुआ है।

    इंदौर के दूषित पानी और जहरीली कफ सिरप का भी किया जिक्र

    राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में हाल की अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले साल जहरीली कफ सिरप से कई छोटे बच्चों की जान जाने का भी उन्होंने जिक्र किया।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जहरीली दवा, शराब और पानी से जुड़ी घटनाओं के बाद नए कानून और नियम बनाए जाते हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं होता। राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, ताकि अगली घटना होने का इंतजार न करना पड़े।

    ‘छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे कार्रवाई’

    राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार को 20 साल से ज्यादा समय हो चुका है। उन्होंने सवाल किया कि हादसों की रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं बन पाई और हर घटना के बाद होने वाली कार्रवाई में जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।

    उन्होंने सागर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मौतों की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच में जिस किसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    अब तक 15 मौतें, 14 आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक सागर जिले में जहरीली शराब त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इलाज के दौरान दो और पीड़ितों की मौत होने के बाद यह आंकड़ा बढ़ा। पुलिस ने बताया कि मामले में कुल 30 आरोपियों में से अब तक 14 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सागर जिले के बांदा क्षेत्र में जहरीली शराब से कई परिवार तबाह हो गए हैं और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रभावित परिवारों में से कुछ से मुलाकात की थी।

  • मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं

    मास्टर प्लान के लिए भोपाल में दौड़े शहरवासी: मसूद ने सरकार को घेरा अरेरा कॉलोनी की जर्जर सड़कें भी जल्द बनाएं


    भोपाल । भोपाल में लंबे समय से अटके मास्टर प्लान को लागू कराने की मांग अब सड़क तक पहुंच गई है। राजधानी में बुधवार को कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की अगुआई में रन फॉर मास्टर प्लान दौड़ आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में युवा महिलाएं छात्र व्यापारी और शहर के अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। 11 नंबर बस स्टॉप से शुरू हुई इस मैराथन के जरिए लोगों ने सरकार से भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग उठाई। दौड़ के दौरान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को लेकर आवाज बुलंद की गई। प्रतिभागियों का कहना था कि राजधानी जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए स्पष्ट मास्टर प्लान बेहद जरूरी है क्योंकि इसके अभाव में विकास कार्यों से लेकर जमीन के उपयोग और यातायात व्यवस्था तक कई स्तरों पर परेशानियां सामने आ रही हैं।

    विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब दो दशक से अटका हुआ है और इसका खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उज्जैन का मास्टर प्लान सामने आ सकता है तो भोपाल का मास्टर प्लान आखिर क्यों अटका हुआ है। उनका कहना था कि एक ही प्रदेश में शहरों के लिए अलग अलग रवैया नहीं होना चाहिए। भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी है और यहां भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास की स्पष्ट दिशा तय होना जरूरी है।

    मसूद ने कहा कि इस आंदोलन के पीछे किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं बल्कि शहर के लोगों की बुनियादी जरूरतें हैं। बच्चे युवा महिलाएं व्यापारी और आम नागरिक एक ही मांग कर रहे हैं कि भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं लेकिन शहर के विकास के मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक मास्टर प्लान के अभाव में कई क्षेत्रों में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    इस दौरान मास्टर प्लान के साथ अरेरा कॉलोनी और आई टू से आई एट क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया गया। इन इलाकों में सीवेज लाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की हालत खराब होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। मसूद ने मांग की कि सड़क निर्माण का काम तत्काल शुरू कराया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क का भूमिपूजन कौन करता है या निर्माण का श्रेय किसे मिलता है इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। जरूरत यह है कि लोगों को जल्द राहत मिले और पूरी अरेरा कॉलोनी की सड़कों को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए।

    मैराथन में स्पाइडर मैन का मास्क पहनकर पहुंचे एक युवक ने भी लोगों का ध्यान खींचा। खुद को स्पीडी बताने वाले युवक ने कहा कि वह भोपाल के भविष्य के लिए मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर दौड़ में शामिल हुआ है। उसका कहना था कि मास्टर प्लान के अभाव में शहर में ट्रैफिक और आम लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं।

    भोपाल में मास्टर प्लान के लंबे समय से लंबित रहने का असर जमीन के उपयोग नए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग कार्रवाई को लेकर भी व्यापारियों और संपत्ति मालिकों में चिंता बनी हुई है। शहर में विकास के नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से कई लोगों के सामने असमंजस की स्थिति है। ऐसे में रन फॉर मास्टर प्लान के जरिए उठी आवाज ने सरकार के सामने राजधानी के भविष्य की योजना को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

  • गणेश जी की पूजा में इन चीजों का है विशेष महत्व: सही भोग और सामग्री से करें विघ्नहर्ता की आराधना

    गणेश जी की पूजा में इन चीजों का है विशेष महत्व: सही भोग और सामग्री से करें विघ्नहर्ता की आराधना


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि विवेक तथा सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गणेश जी की आराधना में कुछ विशेष चीजों का महत्व बताया गया है। इनमें दूर्वा मोदक लड्डू और विभिन्न प्रकार के फल प्रमुख माने जाते हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार इन चीजों को भगवान गणेश को अर्पित करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा विशेष रूप से प्रिय है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। दूर्वा को शुद्धता और श्रद्धा का प्रतीक भी माना जाता है। पूजा करते समय साफ और ताजी दूर्वा अर्पित की जाती है। कई श्रद्धालु दूर्वा चढ़ाने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। हालांकि पूजा की विधि और सामग्री से जुड़े नियम अलग अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं में अलग हो सकते हैं।

    मोदक भी भगवान गणेश के सबसे प्रिय भोगों में शामिल माना जाता है। गणेश उत्सव और गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष रूप से मोदक का भोग लगाया जाता है। धार्मिक कथाओं और परंपराओं में मोदक को ज्ञान और आनंद का प्रतीक माना गया है। कई घरों में गणेश जी को घर पर बने मोदक अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू और अन्य मिठाइयों का भोग भी श्रद्धा के अनुसार लगाया जाता है। पूजा के बाद इस प्रसाद को परिवार और अन्य लोगों में बांटने की परंपरा है।

    भगवान गणेश को फल अर्पित करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। केले नारियल और मौसमी फलों को पूजा में शामिल किया जा सकता है। नारियल को धार्मिक पूजा में शुभ माना जाता है और कई लोग इसे गणेश जी को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही फूल भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। श्रद्धालु अपनी परंपरा और उपलब्धता के अनुसार फूल अर्पित करते हैं। पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सामग्री की अधिकता नहीं बल्कि श्रद्धा और सच्चे मन से की गई आराधना मानी जाती है।

    गणेश जी की पूजा करते समय स्वच्छता और शांत मन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल की सफाई की जा सकती है। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान कर दीपक जलाया जाता है और श्रद्धा के अनुसार फूल दूर्वा फल और भोग अर्पित किया जाता है। कई लोग गणेश मंत्रों का जाप भी करते हैं। पूजा के दौरान मन में सकारात्मक विचार रखना और परिवार की सुख शांति की कामना करना भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का देवता भी माना गया है। इसलिए विद्यार्थी परीक्षा या किसी नए काम की शुरुआत से पहले गणपति बप्पा का स्मरण करते हैं। व्यापार और नौकरी से जुड़े लोग भी सफलता और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हुए गणेश जी की पूजा करते हैं। हालांकि केवल पूजा और भोग अर्पित करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अच्छे कर्म करने सत्य का साथ देने और दूसरों के प्रति सकारात्मक व्यवहार रखने को भी धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

    कुल मिलाकर गणेश जी की पूजा में दूर्वा मोदक लड्डू फल और नारियल का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन सबसे बड़ी बात सच्ची श्रद्धा और मन की शुद्धता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा से की गई गणेश जी की आराधना व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा देती है और जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ाती है। पूजा की सामग्री और विधि को लेकर व्यक्ति को अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक विश्वास का सम्मान करते हुए ही आराधना करनी चाहिए।

  • बुधवार को पूजा से पहले जान लें ये खास बातें: गणेश जी की आराधना के दौरान इन नियमों का पालन माना जाता है शुभ

    बुधवार को पूजा से पहले जान लें ये खास बातें: गणेश जी की आराधना के दौरान इन नियमों का पालन माना जाता है शुभ


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी देवता और ग्रह से जुड़ा माना जाता है। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से पूजा करने से बुद्धि विवेक और कार्यों में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। कई लोग बुधवार के दिन अपने जीवन में सुख शांति और समृद्धि की कामना के साथ भगवान गणेश की आराधना करते हैं। हालांकि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक भावना मानी जाती है।

    बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थान की साफ सफाई करके भगवान गणेश का स्मरण किया जा सकता है। पूजा के दौरान सबसे पहले मन को शांत करके भगवान गणेश का ध्यान करें और अपने दिन की शुरुआत सकारात्मक संकल्प के साथ करें। धार्मिक परंपराओं में गणेश जी को दूर्वा और मोदक प्रिय बताए गए हैं इसलिए श्रद्धा के अनुसार उन्हें दूर्वा अर्पित की जा सकती है। फूल फल और प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। पूजा के बाद परिवार के लोगों में प्रसाद बांटने की परंपरा भी है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है इसलिए किसी नए और महत्वपूर्ण काम की शुरुआत से पहले उनका स्मरण किया जाता है। बुधवार को गणेश जी की पूजा करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए और शांत मन से आराधना करनी चाहिए। पूजा के दौरान साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। यदि घर में नियमित पूजा होती है तो उसी परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहता है। किसी विशेष व्रत या धार्मिक अनुष्ठान के नियम अलग हो सकते हैं इसलिए व्यक्ति को अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ही उनका पालन करना चाहिए।

    बुधवार का संबंध बुध ग्रह से भी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध को बुद्धि वाणी तर्क क्षमता और व्यापार से जुड़ा ग्रह बताया गया है। यही कारण है कि कई लोग बुधवार के दिन पूजा पाठ के साथ अपने व्यवहार और वाणी में संयम रखने का प्रयास करते हैं। इस दिन दूसरों से मधुर व्यवहार करना और अनावश्यक विवाद से बचना भी सकारात्मक माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और दान पुण्य करना भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। हालांकि दान की वस्तुओं और विशेष उपायों को लेकर अलग अलग परंपराएं हो सकती हैं।

    पूजा के समय केवल बाहरी विधि पर ध्यान देने के बजाय मन की शुद्धता को भी महत्व देना चाहिए। क्रोध ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास पूजा की भावना को अधिक सार्थक बना सकता है। घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक रखने के लिए परिवार के साथ प्रार्थना करना भी अच्छा माना जाता है। बुधवार के दिन विद्यार्थी और कामकाजी लोग भगवान गणेश से बुद्धि और सफलता की प्रार्थना कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर बुधवार की पूजा को श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ करने की परंपरा है। भगवान गणेश की आराधना करते समय स्वच्छता शांत मन और सच्ची भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक आस्था व्यक्ति की व्यक्तिगत मान्यताओं और परंपराओं से जुड़ी होती है इसलिए पूजा और व्रत के नियमों का पालन अपनी पारिवारिक परंपरा और विश्वास के अनुसार करना उचित है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना और अच्छे कर्मों का संकल्प ही किसी भी पूजा को सार्थक बनाने का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

  • पेगुला ने नवारो का सपना तोड़ा, अब सबालेंका की चुनौती: US Open खिताब से सिर्फ 2 जीत दूर अमेरिकी स्टार

    पेगुला ने नवारो का सपना तोड़ा, अब सबालेंका की चुनौती: US Open खिताब से सिर्फ 2 जीत दूर अमेरिकी स्टार

    नई दिल्ली। यूएस ओपन 2026 में अमेरिकी स्टार जेसिका पेगुला ने शानदार वापसी करते हुए महिला एकल के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। आर्थर ऐश स्टेडियम में खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में पेगुला ने अपनी हमवतन एमा नवारो को तीन सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में 3-6 6-4 6-3 से हराया। करीब 2 घंटे 21 मिनट तक चले इस मुकाबले में पेगुला को शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने दबाव से बाहर निकलते हुए लगातार शानदार खेल दिखाया और मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ पेगुला ने लगातार तीसरे सेमीफाइनल में जगह बनाई है और अब वह अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब की ओर एक और कदम बढ़ा चुकी हैं।

    मुकाबले की शुरुआत पेगुला के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। एमा नवारो ने पहले सेट में आक्रामक खेल दिखाया और पेगुला को लगातार दबाव में रखा। नवारो ने पहला सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया जिसके बाद पेगुला के सामने मैच में वापसी की बड़ी चुनौती थी। हालांकि अमेरिकी खिलाड़ी ने धैर्य नहीं खोया और दूसरे सेट में अपने खेल को बेहतर करते हुए वापसी शुरू कर दी। पेगुला ने महत्वपूर्ण मौकों पर अंक हासिल किए और दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

    निर्णायक तीसरे सेट में पेगुला का आत्मविश्वास और बढ़ता गया। उन्होंने नवारो की गलतियों का फायदा उठाया और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लगातार दबाव बनाए रखा। तीसरा सेट 6-3 से जीतते ही पेगुला ने क्वार्टर फाइनल मुकाबला अपने नाम कर लिया। जीत के बाद पेगुला के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। उन्होंने माना कि परिस्थितियां आसान नहीं थीं और उन्हें मैच के दौरान कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ा। पेगुला ने बताया कि न्यूयॉर्क में उमस के कारण वह अपनी सर्विस का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पा रही थीं लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद मुकाबले में खुद को बनाए रखा।

    पेगुला ने मैच के बाद स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। बड़ी संख्या में अमेरिकी प्रशंसकों की मौजूदगी ने उन्हें मुकाबले के दौरान हौसला दिया और वापसी करने में मदद की। पेगुला के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद अब तक ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने में सफल नहीं हुई हैं।

    अब सेमीफाइनल में पेगुला के सामने सबसे बड़ी चुनौती के रूप में एरिना सबालेंका होंगी। सबालेंका ने लिंडा नोस्कोवा को हराकर अंतिम चार में अपनी जगह बनाई है। सबालेंका लगातार तीसरी बार यूएस ओपन खिताब जीतने की कोशिश में हैं और इस लक्ष्य से वह अब केवल दो जीत दूर हैं। दूसरी तरफ पेगुला भी अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगी। ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के बीच होने वाला सेमीफाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

    पेगुला और सबालेंका के बीच इससे पहले कई मुकाबले हो चुके हैं और आमने सामने के रिकॉर्ड में सबालेंका का पलड़ा भारी है। सबालेंका ने पेगुला के खिलाफ 9 मुकाबले जीते हैं जबकि पेगुला को 4 जीत मिली हैं। दोनों खिलाड़ियों की पिछली बड़ी भिड़ंत 2024 यूएस ओपन फाइनल में हुई थी जहां सबालेंका ने जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया था। ऐसे में इस बार पेगुला के पास उस हार का हिसाब बराबर करने और फाइनल में पहुंचने का सुनहरा मौका होगा।

    पेगुला की इस जीत से उनके लिए एक और बड़ा अवसर भी खुल गया है। यदि वह यूएस ओपन का खिताब जीतने में सफल रहती हैं और एलेना रयबाकिना सेमीफाइनल में हार जाती हैं तो पेगुला डब्ल्यूटीए रैंकिंग में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बन सकती हैं। फिलहाल उनका लक्ष्य सेमीफाइनल की चुनौती पार करना है जहां उन्हें दो बार की चैंपियन सबालेंका के खिलाफ अपनी सर्वश्रेष्ठ टेनिस दिखानी होगी।

  • स्किन केयर में एलोवेरा का कमाल: ग्लो बढ़ाने और त्वचा को हाइड्रेट रखने के आसान घरेलू तरीके जानिए

    स्किन केयर में एलोवेरा का कमाल: ग्लो बढ़ाने और त्वचा को हाइड्रेट रखने के आसान घरेलू तरीके जानिए


    नई दिल्ली। आज के समय में धूल मिट्टी प्रदूषण तेज धूप और बदलती दिनचर्या का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर नजर आता है। लंबे समय तक धूप में रहने या पर्याप्त देखभाल नहीं करने से चेहरा रूखा बेजान और थका हुआ दिखाई दे सकता है। ऐसे में एलोवेरा त्वचा की सामान्य देखभाल के लिए एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। एलोवेरा जेल में पानी की मात्रा अधिक होती है और इसे त्वचा पर लगाने से नमी और ठंडक का एहसास मिल सकता है। यही वजह है कि कई लोग इसे अपने स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बनाते हैं। हालांकि एलोवेरा को किसी जादुई इलाज की तरह इस्तेमाल करने के बजाय त्वचा की सामान्य देखभाल के एक विकल्प के रूप में देखना बेहतर है।

    चेहरे पर एलोवेरा लगाने के लिए सबसे पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। इसके बाद एलोवेरा जेल की थोड़ी मात्रा लेकर चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और कुछ देर के लिए छोड़ दें। अगर त्वचा इसे आसानी से स्वीकार करती है तो बाद में चेहरे को सामान्य पानी से धोया जा सकता है। इसके बाद हल्का मॉइस्चराइजर लगाने से त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। एलोवेरा लगाने पर त्वचा को मुलायम और फ्रेश महसूस किया जा सकता है। खासकर रूखी त्वचा वाले लोगों को इसका हाइड्रेटिंग एहसास पसंद आ सकता है।

    एलोवेरा का इस्तेमाल करते समय यह समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। किसी एक व्यक्ति को एलोवेरा लगाने से अच्छा अनुभव हो सकता है जबकि दूसरे व्यक्ति की त्वचा पर जलन या लालिमा हो सकती है। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना समझदारी है। हाथ या बांह के छोटे हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर कुछ समय देखें। अगर खुजली जलन लालिमा या सूजन जैसी परेशानी दिखाई दे तो चेहरे पर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आंखों के आसपास भी इसे लगाने से बचना बेहतर है।

    सोशल मीडिया पर एलोवेरा के साथ नींबू बेकिंग सोडा या कई दूसरी चीजें मिलाकर लगाने के घरेलू नुस्खे खूब बताए जाते हैं। लेकिन त्वचा पर बिना सोचे समझे ऐसे प्रयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर संवेदनशील त्वचा पर तेज या परेशान करने वाली सामग्री जलन बढ़ा सकती है। इसलिए एलोवेरा का इस्तेमाल सरल तरीके से करना बेहतर है। अगर बाजार से एलोवेरा जेल खरीद रहे हैं तो पैकेट पर दी गई सामग्री जरूर पढ़ें और ऐसे उत्पाद का चुनाव करें जिसमें आपकी त्वचा के लिए अनावश्यक परेशान करने वाले तत्व कम हों।

    एलोवेरा के साथ रोजाना की स्किन केयर में कुछ और आदतों को शामिल करना भी जरूरी है। चेहरा साफ रखना पर्याप्त पानी पीना संतुलित खानपान लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा की देखभाल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। केवल एलोवेरा लगाने से त्वचा की हर समस्या खत्म नहीं हो सकती। अगर चेहरे पर लगातार लालिमा खुजली सूजन या किसी तरह की गंभीर समस्या बनी रहती है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

    कुल मिलाकर एलोवेरा त्वचा की सामान्य देखभाल में एक सरल और सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। इसका सही और सावधानीपूर्वक इस्तेमाल त्वचा को नमी और ताजगी का एहसास देने में मदद कर सकता है। लेकिन बेहतर त्वचा के लिए नियमित स्किन केयर स्वस्थ खानपान पर्याप्त नींद और धूप से बचाव को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

  • कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में

    कहीं नेता के लिए रुकी जनसुनवाई, कहीं फरियादी खुद विधायक को घर ले गई: अधूरे ब्रिज पर नारे और पंडितजी का बंगला भी चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीति और नौकरशाही की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें कहीं आम और खास के बीच का फर्क दिखाई देता है तो कहीं जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सीधे संवाद की एक उम्मीद नजर आती है। शिवपुरी में जनसुनवाई के दौरान भाजपा नेता के पहुंचते ही कलेक्टर का कुर्सी से उठकर उनसे मिलना और फिर उन्हें अपने केबिन में लेकर जाना चर्चा का विषय बन गया। दूसरी ओर गुना में एक बुजुर्ग महिला कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का हाथ पकड़कर उन्हें अपने आधे अधूरे घर तक ले गई। इन दोनों घटनाओं ने लोकतंत्र और प्रशासन की प्राथमिकताओं पर अपने अपने तरीके से सवाल खड़े किए हैं।

    शिवपुरी में कलेक्टर जनसुनवाई कर रहे थे और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे हुए थे। इसी दौरान भाजपा जिला अध्यक्ष वहां पहुंचे। बताया गया कि कलेक्टर ने उनसे मुलाकात की और फिर जनसुनवाई के बीच ही उन्हें अपने केबिन में लेकर चले गए। कुछ देर बाद कलेक्टर वापस लौटे और लोगों की समस्याएं सुनने का सिलसिला फिर शुरू हुआ लेकिन तब तक यह दृश्य चर्चा में आ चुका था। सवाल यह उठने लगा कि यदि कोई आम व्यक्ति अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचता है तो उसे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है लेकिन किसी राजनीतिक पदाधिकारी के आने पर प्राथमिकता बदल क्यों जाती है। यह घटना भले कुछ मिनटों की रही हो लेकिन आम और खास के बीच व्यवहार के अंतर को लेकर बहस जरूर छेड़ गई।

    इसके विपरीत गुना जिले में राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सामने एक बुजुर्ग महिला ने अपनी परेशानी सीधे रखी। महिला विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें अपने घर तक ले गई और अपना अधूरा मकान दिखाया। उसने बताया कि घर में प्लास्टर और पुताई का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। विधायक ने महिला को मदद और घर का काम पूरा कराने का भरोसा दिया। यह दृश्य राजनीति की तस्वीर के रूप में चर्चा में रहा लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश भी छिपा है कि जनता को अपने प्रतिनिधियों तक बिना डर और संकोच पहुंचने का अधिकार होना चाहिए। लोकतंत्र की असली खूबसूरती तभी है जब कोई आम नागरिक बेझिझक अपने जनप्रतिनिधि का हाथ पकड़कर अपनी परेशानी बता सके।

    उधर इंदौर जिले के महू में अधूरे रेलवे ओवरब्रिज को लेकर राजनीतिक विरोध का अलग तरीका देखने को मिला। ब्रिज निर्माण में हो रही देरी से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसकी बाउंड्री पर सरकार नेता और ठेकेदार को निशाने पर लेते हुए नारे लिखवा दिए। काम की धीमी रफ्तार और विकास के नाम पर सवाल उठाते इन स्लोगन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं। इसके बाद प्रशासन ने बाउंड्री पर लिखे नारों को सफेद रंग से पुतवा दिया। कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन और कीर्तन भी किया। विपक्ष का तर्क है कि यदि निर्माण कार्य पूरा करने में भी उतनी ही तेजी दिखाई जाती जितनी नारों को मिटाने में दिखाई गई तो शायद विरोध की जरूरत ही नहीं पड़ती।

    राजनीति के इन खुले दृश्यों के बीच भोपाल की अंदरूनी सियासत से जुड़ी चर्चा भी सुर्खियों में रही। खबर में एक ऐसे भाजपा नेता का जिक्र है जिन्हें पंडितजी के नाम से संबोधित किया गया है और जो विधायक या मंत्री न होने के बावजूद अपना सरकारी बंगला 2028 तक बचाने में सफल रहे हैं। चर्चा है कि बंगले को लेकर बदलाव की तैयारी थी लेकिन दिल्ली स्तर पर हस्तक्षेप के बाद मामला बदल गया। बंगला समाज सेवा के नाम पर आवंटित बताया जा रहा है जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की सियासत के केंद्र के रूप में भी देखा जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने सत्ता राजनीति और प्रशासन की कई परतें खोल दी हैं। कहीं आम आदमी इंतजार करता दिखाई देता है और खास व्यक्ति को प्राथमिकता मिलती नजर आती है तो कहीं एक बुजुर्ग महिला सीधे अपने विधायक तक पहुंचकर अपनी समस्या बताती है। अधूरे विकास कार्यों पर विपक्ष नारे लिखकर सरकार को घेरता है और दूसरी तरफ सत्ता के गलियारों में बंगले बचाने की सियासत चलती है। यही राजनीति और व्यवस्था की वह तस्वीर है जिसमें सवाल भी हैं और उम्मीदें भी।

  • कल्पना की मौत पर नहीं थम रहा कांग्रेस का आक्रोश: अभय मिश्रा आज मंत्रालय के सामने देंगे मौन धरना, राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग

    कल्पना की मौत पर नहीं थम रहा कांग्रेस का आक्रोश: अभय मिश्रा आज मंत्रालय के सामने देंगे मौन धरना, राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग


    भोपाल । रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा बुधवार को राजधानी भोपाल में मंत्रालय यानी वल्लभ भवन के सामने मौन धरने पर बैठेंगे। विधायक सुबह 11 बजे से धरना देकर रीवा के संजय गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी स्मारक अस्पताल में हुई इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाएंगे। कांग्रेस विधायक ने इस मामले में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग भी की है जिससे यह मामला अब सीधे सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही से जुड़ गया है।

    कल्पना मिश्रा की मौत 26 अगस्त की रात रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी। वह प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं लेकिन इलाज के दौरान उनकी और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि मौत की वास्तविक वजह और किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय होगी लेकिन घटना के बाद सामने आए वीडियो और परिजनों के आरोपों ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया।

    मामला उस समय और गंभीर हो गया जब कल्पना मिश्रा का मौत से कुछ घंटे पहले का वीडियो सामने आया। वीडियो में वह महिला वार्ड से बाहर निकलकर रोते हुए मदद मांगती नजर आई और इलाज को लेकर अपनी आशंका जाहिर करते हुए परिजनों से गुहार लगाती दिखाई दी। इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल और तेज हो गए। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कल्पना की बिगड़ती हालत पर ध्यान देने और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतका के पिता ने जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। परिवार ने इलाज के दौरान कथित तौर पर 30 हजार रुपए की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया है जिसकी जांच होना जरूरी है।

    मामले में सरकार और चिकित्सा प्रशासन की ओर से शुरुआती कार्रवाई भी की गई है। दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को भी पद से हटाया गया जबकि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल को रीवा से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। उनकी जगह सतना मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग को रीवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह अधीक्षक सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है।

    सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को इलाज से जुड़े दस्तावेजों चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और संबंधित स्टाफ के बयान की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद मृतका के पिता रामशरण मिश्रा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।

    इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी रीवा में धरने में शामिल होकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जच्चा बच्चा की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने में देरी हो रही है।

    अब कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा का भोपाल में मंत्रालय के सामने मौन धरना इस आंदोलन को नई राजनीतिक धार देने वाला माना जा रहा है। इससे पहले मंगलवार को युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जिसके बाद कांग्रेस ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर है क्योंकि पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर अपना दबाव लगातार बढ़ा रही है।