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  • मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल

    मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं और हल्के फुल्के राजनीतिक प्रसंगों के कारण चर्चा में रहा। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर तक पहुंचने के लिए मंत्री दौड़ लगाते नजर आए तो कहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी को मुस्कुराते हुए हाईकमान बताया। वहीं एक महिला मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए मंच पर अनोखा प्रयोग कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    टीकमगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हेलिकॉप्टर से खजुराहो रवाना होना था। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे और उड़ान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार तेज कदमों से दौड़ते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और समय रहते उसमें सवार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे अपने अपने अंदाज में साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उनकी नजर चूड़ियों के स्टॉल पर पड़ी। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां खरीदीं और मुस्कुराते हुए कहा कि यह मेरी हाईकमान के लिए हैं। उनकी इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि वह सत्तर वर्ष के हो चुके हैं और अब सठिया गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जो भी कहते हैं सामने कहते हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने में विश्वास रखते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसके अलग अलग अर्थ निकाले जाने लगे।

    उधर मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद पर सफाई देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मंच पर तीन अलग अलग पेय पदार्थ रखे और उन्हें अलग प्रकार के ग्लासों में डालकर यह समझाने का प्रयास किया कि पात्र बदल जाने से किसी वस्तु की वास्तविक पहचान नहीं बदलती। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगा देने भर से उसकी वास्तविक पहचान या कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। उनका यह प्रयोग भी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति केवल गंभीर फैसलों और बहसों तक सीमित नहीं रहती बल्कि नेताओं के व्यवहार उनके अंदाज और छोटे छोटे प्रसंग भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दृश्य तेजी से वायरल होते हैं और आम लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे देते हैं।

  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर रद्द की शिंदे समर्थक की जमानत, आपराधिक रिकॉर्ड को किया रेखांकित

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर रद्द की शिंदे समर्थक की जमानत, आपराधिक रिकॉर्ड को किया रेखांकित


    नई दिल्ली ।
    चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर न्यायपालिका ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुंबई के डोंबिवली स्थित एक सरकारी अस्पताल में महिला डॉक्टर से कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरोपी शिवसेना नेता रमेश म्हात्रे को निचली अदालत से मिली जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने आरोपी को 20 जुलाई 2026 तक संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के मामलों में न्यायपालिका के कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    मामला उस समय सामने आया जब डोंबिवली के सरकारी अस्पताल में भर्ती के लिए पहुंचे एक मरीज को तत्काल बेड उपलब्ध कराने की मांग को लेकर विवाद हो गया। ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर ने अस्पताल के नियमों और बेड की उपलब्धता का हवाला देते हुए तत्काल व्यवस्था करने में असमर्थता जताई। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर रमेश म्हात्रे ने डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके साथ मारपीट की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया और पुलिस ने डॉक्टर की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। बाद में स्थानीय अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी थी।

    निचली अदालत के इस फैसले के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय किसी भी आरोपी के आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कुछ मामलों में आरोपी को राहत मिली हो, लेकिन उसके विरुद्ध दर्ज मामलों की प्रकृति और संख्या पर विचार करना आवश्यक है। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में न्यायिक विवेक का उपयोग पूरी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।

    अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर और अन्य चिकित्सा कर्मी समाज को आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं तथा ड्यूटी के दौरान उनके साथ हिंसा या अभद्रता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। न्यायालय ने टिप्पणी की कि अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय है और इस प्रकार की घटनाओं पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने आरोपी को निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति की सामाजिक या राजनीतिक पहचान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकती।

    इस घटनाक्रम के बाद डॉक्टर संगठनों में भी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। पहले जमानत दिए जाने के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन और हड़ताल की घोषणा की गई थी। हालांकि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अदालत ने डॉक्टर समुदाय से अपील की कि वे अपने प्रस्तावित आंदोलन पर पुनर्विचार करें और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से बचाएं। चिकित्सा समुदाय का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था और सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि वे बिना किसी भय के मरीजों की सेवा कर सकें।

  • एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक

    एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक 2026 के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप से नया चरण पार कर लिया है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा।

    यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और सरकार इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कैबिनेट बैठक भोपाल के समीप जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक चमन महल में आयोजित की गई जहां जनजातीय संस्कृति और विरासत को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति दी जबकि सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र लगाए गए थे। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राजा भोज परमार राजवंश और गोंड शासकों की समृद्ध विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने रानी कमलापति के साहस और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक विकास में विभिन्न शासकों और संस्कृतियों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    देश में समान नागरिक संहिता को लेकर पहले भी कई राज्यों ने पहल की है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना जहां विधेयक पारित होने के बाद जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने भी यूसीसी विधेयक पारित किया। वहीं असम विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है हालांकि वहां कुछ अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।

    अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है जबकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना भी है।

  • भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

    भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी


    भोपाल  भोपाल रविवार को जैन समाज की आस्था श्रद्धा और गुरु भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। चतुर्मास के पावन अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज का 20 मुनियों के संघ के साथ राजधानी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने पहुंचे। पूरे मार्ग पर गुरु भक्ति के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया।

    मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में नारायण नगर जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं युवा बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालु पूरे मार्ग पर आचार्य विद्यासागर महाराज और आचार्य समय सागर महाराज के जयकारे लगाते हुए भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे। धार्मिक उल्लास और अनुशासित वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

    यात्रा के दौरान नाके चौराहे पर एक भावुक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब मुनि निर्णय सागर महाराज उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज और निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज सहित पूरे मुनि संघ ने आचार्य समय सागर महाराज की परिक्रमा कर चरण वंदना की। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा और गुरु भक्ति के इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।

    शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जीव दया गोसेवा और हथकरघा को प्रोत्साहित करने वाले संदेशों के साथ निकाली गई झांकियों ने समाज को सेवा और करुणा का संदेश दिया। निर्माणाधीन रानी कमलापति जिनालय की प्रतिकृति ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विभिन्न मंदिर समितियों महिला मंडलों युवा मंडलों सामाजिक संगठनों पाठशाला परिवारों और दिव्य घोष दल ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

    इस आयोजन में केवल भोपाल ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र दिल्ली राजस्थान और आसपास के कई राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। शहर के अनेक सामाजिक व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर आचार्य संघ का अभिनंदन किया और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।

    शोभायात्रा के समापन पर रानी कमलापति जिनालय में धर्मसभा आयोजित की गई। यहां भगवान आदिनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री के गुणों का स्मरण और वंदन किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

    अपने संबोधन में आचार्य समय सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र निर्माण संस्कृति संरक्षण और आत्मकल्याण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्श केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सही दिशा देता रहेगा।

    चतुर्मास के शुभारंभ के साथ भोपाल में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का नया अध्याय शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में प्रवचन स्वाध्याय तप और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर प्राप्त होगा।

  • सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सफदरजंग अस्पताल में हाई-ड्रामा, पत्नी गीतांजलि का आरोप- 'अस्पताल को जेल बना दिया गया'

    सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर सफदरजंग अस्पताल में हाई-ड्रामा, पत्नी गीतांजलि का आरोप- 'अस्पताल को जेल बना दिया गया'


    नई दिल्ली ।
    लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम ने राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। धरना स्थल से अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वांगचुक के परिवार का कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ लेने से इनकार किया है, जिसके चलते उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं अस्पताल में उनकी देखभाल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले पर परिवार, समर्थकों और प्रशासन के अलग-अलग दावे सामने आने से विवाद और गहरा गया है।

    वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अस्पताल प्रशासन को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि उनकी लिखित अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को मुंह से या नसों के माध्यम से किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ या दवा न दी जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल परिसर में अत्यधिक सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य मुलाकात और संवाद प्रभावित हो रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां और मेडिकल रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उपचार की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़े कुछ आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाते हुए स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।

    दूसरी ओर, वांगचुक के कानूनी प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि उन्हें अपने मुवक्किल से मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर अदालत का रुख किया जाएगा। परिवार का यह भी कहना है कि धरना स्थल से अस्पताल ले जाने की कार्रवाई और उसके बाद की परिस्थितियों की न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    इस बीच, वांगचुक की अनुपस्थिति में आंदोलन को जारी रखने की तैयारी भी तेज हो गई है। परिवार और समर्थकों ने पहले से प्रस्तावित कार्यक्रमों को जारी रखने का संकेत दिया है। जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित संसद मार्च में अब गीतांजलि आंगमो नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। वहीं आंदोलन स्थल पर मौजूद अन्य समर्थकों ने भी प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है। एक प्रदर्शनकारी द्वारा भूख हड़ताल शुरू किए जाने के बाद वहां तनाव की स्थिति भी देखने को मिली, जबकि प्रदर्शन के दौरान हुई एक अलग घटना में पुलिस ने एक महिला को हिरासत में लिया। समर्थकों ने सभी प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की है।

    स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों, विशेषकर अस्पताल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी आधिकारिक जानकारी, प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अदालत, प्रशासन और आंदोलन से जुड़े पक्षों के अगले कदम इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

  • सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से बदला आतंकियों का गेमप्लान, कश्मीर में दबाव बढ़ने के बाद गुजरात और राजस्थान के आर्थिक प्रतिष्ठान निशाने पर

    नई दिल्ली । भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने आतंकवाद का स्वरूप लगातार बदलता नजर आ रहा है। लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर तक सीमित रहने वाली आतंकी गतिविधियों के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों पर भी विशेष नजर बनाए हुए हैं। हाल के दिनों में एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद सुरक्षा तंत्र ने सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकवादी संगठन केवल पारंपरिक संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय देश के आर्थिक और औद्योगिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की मंशा से नई रणनीतियों पर काम कर सकते हैं। इसी कारण महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, गुजरात और राजस्थान की भौगोलिक स्थिति उन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। दोनों राज्यों की सीमाएं पाकिस्तान से जुड़ी होने के कारण यहां लगातार निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा इन राज्यों में देश के कई बड़े औद्योगिक केंद्र, ऊर्जा परियोजनाएं, परिवहन नेटवर्क और बंदरगाह स्थित हैं। यदि ऐसे किसी महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने का प्रयास होता है, तो उसका असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के माहौल पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां इन क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दायरे में रखकर लगातार निगरानी कर रही हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि आतंकवादी संगठनों की रणनीति समय के साथ बदली है। पहले जहां उनका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा करना और सुरक्षा बलों को चुनौती देना होता था, वहीं अब देश के महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक ढांचों को संभावित लक्ष्य के रूप में देखा जा सकता है। पश्चिमी भारत के बड़े बंदरगाह, पेट्रोलियम रिफाइनरी, ऊर्जा परियोजनाएं और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। इसी दिशा में तटीय निगरानी, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

    इतिहास भी इस बात का संकेत देता है कि देश के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों को पहले भी आतंकवादी निशाना बनाने का प्रयास कर चुके हैं। अतीत में बड़े आतंकी हमलों के बाद तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को काफी मजबूत किया गया था। वर्तमान समय में सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई चुनौती डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग भी है। जांच एजेंसियां इस संभावना पर भी नजर रख रही हैं कि संदिग्ध नेटवर्क सामान्य उपयोग की वस्तुओं का अलग-अलग स्थानों से संग्रह कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर से बचने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए साइबर निगरानी, वित्तीय लेनदेन की जांच और तकनीकी खुफिया तंत्र को भी लगातार सशक्त बनाया जा रहा है।

    उभरते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं। सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है, जबकि महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, ऊर्जा केंद्रों, बंदरगाहों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और खुफिया संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के जरिए संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने और उन्हें विफल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी खुफिया तंत्र और नागरिकों की सतर्कता के संयुक्त प्रयास से ही बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

  • सिनेमाघरों में दिखेगा मनोरंजन का महासंग्राम, 20 से 26 जुलाई के बीच थलपति विजय की 'जन नायगन' समेत 6 बड़ी फिल्में होंगी रिलीज

    सिनेमाघरों में दिखेगा मनोरंजन का महासंग्राम, 20 से 26 जुलाई के बीच थलपति विजय की 'जन नायगन' समेत 6 बड़ी फिल्में होंगी रिलीज

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म उद्योग के लिए जुलाई का आगामी सप्ताह बेहद व्यस्त और रोमांचक रहने वाला है। 23 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच देशभर के सिनेमाघरों में अलग-अलग शैलियों की छह बड़ी फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। इस सप्ताह दर्शकों को राजनीतिक एक्शन, कोर्टरूम ड्रामा, पारिवारिक कॉमेडी, रोमांटिक ड्रामा और रहस्य से भरपूर फिल्मों का शानदार मिश्रण देखने को मिलेगा। इन फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की उम्मीद की जा रही है। साथ ही मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन थिएटरों में दर्शकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। फिल्म कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यह रिलीज़ लाइनअप सिनेमाघरों में नए दर्शकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    इस सप्ताह की सबसे चर्चित रिलीज ‘जन नायगन’ है, जो 23 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह एक बड़े बजट की राजनीतिक एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसमें थलपति विजय और बॉबी देओल पहली बार आमने-सामने दिखाई देंगे। फिल्म में पूजा हेगड़े और प्रकाश राज भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसकी कहानी एक ऐसे आम नागरिक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए लोगों की उम्मीद का प्रतीक बन जाता है। दमदार स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर बने एक्शन दृश्यों की वजह से इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह है।

    24 जुलाई 2026 को कई अलग-अलग विषयों पर आधारित फिल्में एक साथ रिलीज होंगी। इनमें ‘उत्तर दा पुत्तर’ एक पारिवारिक कॉमेडी ड्रामा है, जिसमें अन्नू कपूर, पवन मल्होत्रा और बृजेंद्र काला मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी भारतीय परिवारों में वास्तु, अंधविश्वास और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी मजेदार परिस्थितियों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी दिन श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल अभिनीत ‘द इंडिया स्टोरी’ भी रिलीज होगी। यह कोर्टरूम ड्रामा कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले को कानूनी लड़ाई के माध्यम से बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करता है।

    पारिवारिक मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘दुल्हनिया ले आएगी’ भी 24 जुलाई को सिनेमाघरों में आएगी। खुशहाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा अभिनीत यह फिल्म एक उद्योगपति परिवार की शादी के दौरान होने वाली हास्यपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं को दिखाती है। वहीं रहस्य और रोमांच पसंद करने वालों के लिए ‘इंद्रजाल’ एक दिलचस्प विकल्प होगी, जिसकी कहानी ब्रिटिश काल के एक रहस्यमयी खजाने और पूर्ण सूर्य ग्रहण से जुड़े रहस्यों पर आधारित है। इसके अलावा अमन इंद्र कुमार, आकांक्षा शर्मा और परेश रावल अभिनीत रोमांटिक ड्रामा ‘तेरा यार हूं मैं’ भी इसी दिन रिलीज होगी। यह फिल्म छोटे शहर से महानगर पहुंचे एक युवक के संघर्ष, सपनों, प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की भावनात्मक यात्रा को पर्दे पर उतारती है। विविध विषयों और अलग-अलग दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार की गई ये सभी फिल्में जुलाई के अंतिम सप्ताह में सिनेमाघरों की रौनक बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

  • सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    नई दिल्ली । डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई दमदार विकल्प उपलब्ध हैं। यदि आप वीकेंड पर रोमांच और रहस्य से भरपूर सीरीज देखना चाहते हैं, तो जी5 पर मौजूद सात हिंदी क्राइम थ्रिलर और डॉक्यूसीरीज बेहतरीन चुनाव साबित हो सकती हैं। इन शोज की खास बात यह है कि इनमें से कई कहानियां वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं बल्कि समाज के कई गंभीर पहलुओं पर भी सोचने के लिए मजबूर करती हैं। दमदार अभिनय, मजबूत कहानी और शानदार प्रस्तुति के चलते इन सीरीज को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    इस सूची में शामिल ‘सतरंगी बदले का खेल’ एक ऐसे युवक की कहानी है, जो अपने पिता की हत्या के बाद न्याय और प्रतिशोध की राह पर निकल पड़ता है। इस सीरीज को लगभग 6.9 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें बबलू महतो का किरदार दिन में पारंपरिक लोक कलाकार के रूप में जीवन बिताता है, जबकि रात के अंधेरे में अपने पिता के हत्यारों तक पहुंचने की गुप्त योजना बनाता है। वहीं, वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘हाथरस: 16 डेज’ इस सूची की सबसे संवेदनशील डॉक्यूमेंट्री सीरीज मानी जाती है, जिसे करीब 8.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह सीरीज वर्ष 2020 के चर्चित हाथरस मामले के बाद न्यायिक प्रक्रिया, सामाजिक माहौल और पीड़ित परिवार के संघर्ष को विस्तार से सामने लाती है।

    सच्ची घटनाओं पर आधारित अपराध कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए ‘हनीमून से हत्या’ भी एक शानदार विकल्प है। लगभग 7.2 आईएमडीबी रेटिंग वाली यह छह एपिसोड की डॉक्यूसीरीज उन मामलों को सामने लाती है, जहां वैवाहिक रिश्तों में पैदा हुए तनाव ने भयावह अपराध का रूप ले लिया। दूसरी ओर, रहस्य और हल्के हास्य का मिश्रण पेश करने वाली ‘सनफ्लावर 2’ को करीब 7.6 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। सुनील ग्रोवर अभिनीत यह सीरीज एक हाउसिंग सोसाइटी में हुई हत्या की गुत्थी को बेहद दिलचस्प अंदाज में पेश करती है, जहां हर किरदार शक के दायरे में नजर आता है।

    सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक खेल पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘बिच्छू का खेल’ भी एक लोकप्रिय सीरीज है, जिसे लगभग 7.4 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसकी कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खुद हत्या की बात स्वीकार करता है, लेकिन कानून को उसे दोषी साबित करने की खुली चुनौती देता है। वहीं, मुंबई के अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर बनी ‘मुर्शिद’ को करीब 7.5 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें एक पूर्व गैंगस्टर की कहानी दिखाई गई है, जिसे परिस्थितियां फिर से अपराध की दुनिया में लौटने के लिए मजबूर कर देती हैं। सूची की आखिरी सीरीज ‘नक्सलबाड़ी’ है, जिसे लगभग 7.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह एक एसटीएफ अधिकारी के मिशन पर आधारित है, जो नक्सल प्रभावित इलाके में आतंक और हिंसा के नेटवर्क को खत्म करने की चुनौती का सामना करता है। दमदार कहानी, रहस्य, रोमांच और प्रभावशाली अभिनय के कारण ये सभी सीरीज ओटीटी पर क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती हैं।

  • कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के हालिया एलान ने भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह और गौरव की एक नई लहर पैदा कर दी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही कई कलाकारों के करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। इस वर्ष के पुरस्कारों में सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन रहे, जिन्हें उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और बेहतरीन अभिनय के लिए देश का सर्वोच्च अभिनय सम्मान दिया गया है। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया है। उनके साथ ही दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को भी उनके शानदार अभिनय के लिए इस शीर्ष सम्मान से नवाजा गया है, जो उनके सफर का चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा होते ही विजेता अभिनेता के घर और प्रशंसकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। कार्तिक आर्यन ने अपनी इस बड़ी कामयाबी की झलक सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण पोस्ट के जरिए साझा की है। उन्होंने एक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया है जिसमें वह अपने परिवार के साथ बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन पर लाइव पुरस्कारों की घोषणा देख रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर विजेता के रूप में उनका नाम आता है, पूरा परिवार खुशी से झूम उठता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार्तिक गर्व से स्क्रीन की तरफ उंगली दिखाकर अपने माता-पिता और परिजनों को अपना नाम दिखा रहे हैं, जिसके बाद पूरा परिवार गले मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण को साझा करता है।

    इस अविस्मरणीय पल को अपने प्रशंसकों के साथ साझा करते हुए अभिनेता ने लिखा कि वह अभी भी इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जो शब्दों की सीमा से बहुत परे होते हैं और यह पुरस्कार उनके लिए बिल्कुल वैसा ही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि वर्षों से देखा गया उनका एक बड़ा सपना आज आखिरकार सच हो गया है, जिसके लिए वह सिनेमा जगत, जूरी और अपने प्रशंसकों के प्रति हमेशा विनम्र और आभारी रहेंगे। यह पुरस्कार उनके लिए मात्र एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके सालों के कड़े परिश्रम और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है।

    कार्तिक आर्यन ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी, जिसके बाद लंबे समय तक उन्हें मुख्य रूप से रोमांटिक-कॉमेडी और ड्रामा फिल्मों के लिए पहचाना जाता रहा। उन्होंने ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में काम करके बॉक्स ऑफिस पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई थी। हालांकि, निर्देशक कबीर खान के मार्गदर्शन में बनी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ ने उनके करियर की पूरी दिशा ही बदल दी। यह फिल्म भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जिसके मुख्य किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए कार्तिक आर्यन ने अभूतपूर्व शारीरिक और मानसिक बदलाव किए थे। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने रिलीज के समय ही उनके इस काम को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना था और अब राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस मान्यता ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

    इस वर्ष के राष्ट्रीय पुरस्कारों में ‘चंदू चैंपियन’ के अलावा अन्य फिल्मों का भी दबदबा रहा। फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपनी सशक्त और गंभीर भूमिका के लिए अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया है, जिन्होंने पुरस्कार जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सपने सच होते हैं। वहीं दूसरी ओर, फिल्म ‘भक्षक’ में अपने बेहतरीन और यथार्थवादी अभिनय के लिए जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला है। अभिनेता रणदीप हुड्डा को भी उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया है, जिसे उन्होंने अपने करियर की सबसे कठिन फिल्म बताया था। कला जगत और खेल पृष्ठभूमि पर आधारित सिनेमा को इस बार राष्ट्रीय मंच पर जो सराहना मिली है, उसने भारतीय फिल्म उद्योग में गुणवत्तापूर्ण और कंटेंट-आधारित कहानियों के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

  • रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच

    रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच


    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण की रिलीज से पहले दिल्ली में आयोजित भव्य रेड कारपेट इवेंट ने दर्शकों के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर पहली बार बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया गया जहां पूरी स्टारकास्ट ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल अरुण गोविल रवि दुबे और कई अन्य कलाकारों ने मंच पर फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए और बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए कितना खास है।

    कार्यक्रम की शुरुआत ट्रेलर प्रदर्शन के साथ हुई जिसके बाद सबसे पहले रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच संभाला। पारंपरिक भारतीय परिधान में पहुंचे दोनों कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। निर्देशक नितेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने इन दोनों कलाकारों को केवल अभिनय क्षमता के आधार पर नहीं चुना बल्कि उनकी आंखों में उन्हें राम और सीता का व्यक्तित्व दिखाई देता था। उनका कहना था कि इन किरदारों के लिए वह किसी और की कल्पना नहीं कर सकते थे।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने फिल्म की परिकल्पना और निर्माण यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी विश्व स्तर पर विजुअल इफेक्ट्स के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है लेकिन अब समय आ गया था कि भारतीय संस्कृति की सबसे महान कथा को उसी भव्यता के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के साथ रामायण पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया गया ताकि भारतीय विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।

    निर्देशक नितेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि फिल्म की मूल कथा और भावनाओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से दर्शकों को रामायण का ऐसा अनुभव मिलेगा जो पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा गया। उन्होंने संकेत दिया कि लंका दहन किशकिंधा और अन्य महत्वपूर्ण दृश्यों को अत्यंत भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    कार्यक्रम में अभिनेता अरुण गोविल ने भी भावुक कर देने वाला अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब रामानंद सागर की रामायण बन रही थी तब शुरुआत में उन्हें भगवान राम की भूमिका नहीं मिली थी लेकिन बाद में वही किरदार उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म में वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने कहा कि इस सेट पर काम करते समय उन्हें हमेशा आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ।

    रणबीर कपूर ने मंच से अरुण गोविल के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने उन्हें भगवान राम के रूप में देखा है और यदि वह उनके अभिनय का थोड़ा सा भी अंश अपने किरदार में ला सके तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं साई पल्लवी ने कहा कि उन्होंने इस भूमिका को स्वीकार करने से पहले माता सीता से प्रार्थना की कि उन्हें इस दिव्य चरित्र को निभाने की शक्ति मिले।

    रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका मिलने को अपना सौभाग्य बताया जबकि साउथ सुपरस्टार यश ने रावण का किरदार निभाने का अवसर मिलने पर मेकर्स का आभार व्यक्त किया। उनकी एंट्री पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। वहीं सनी देओल के मंच पर आते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म हर भारतीय तक पहुंचेगी और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल करेगी।

    कार्यक्रम में कवि कुमार विश्वास ने भगवान राम की कथा का महत्व बताया जबकि सितार वादक ऋषभ शर्मा की भक्तिमय प्रस्तुति ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में ट्रेलर को एक बार फिर प्रदर्शित किया गया जिसे दर्शकों ने उत्साह के साथ देखा। इस भव्य आयोजन ने साफ कर दिया कि रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को आधुनिक तकनीक के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का एक विशाल प्रयास है।