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  • पढ़ाई के लिए तरसते 190 दिव्यांग बच्चे, सिर्फ 3 शिक्षकों के भरोसे 12वीं तक की कक्षाएं: भोपाल में छात्रों ने खोली व्यवस्था की पोल

    पढ़ाई के लिए तरसते 190 दिव्यांग बच्चे, सिर्फ 3 शिक्षकों के भरोसे 12वीं तक की कक्षाएं: भोपाल में छात्रों ने खोली व्यवस्था की पोल


    भोपाल । भोपाल में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ी एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्कूल की जिम्मेदारी दृष्टि बाधित और श्रवण बाधित बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देकर उनका भविष्य संवारने की है वहीं बच्चे आज अपनी पढ़ाई और बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाने को मजबूर हैं। शासकीय दृष्टि बाधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षकों की भारी कमी से लेकर नियमित कक्षाएं नहीं लगने और साइन लैंग्वेज जानने वाले शिक्षकों के अभाव तक कई गंभीर शिकायतें सामने रखी हैं। बच्चों का सबसे बड़ा सवाल है कि जब उनकी भाषा समझने वाला शिक्षक ही नहीं है तो उन्हें पढ़ाएगा कौन और उनकी समस्याओं को सुनेगा कौन।

    पहली से 12वीं तक कक्षाएं संचालित करने वाले इस स्कूल में दृष्टि बाधित और श्रवण बाधित विद्यार्थियों को मिलाकर करीब 190 बच्चे पढ़ते हैं जबकि फिलहाल यहां केवल तीन शिक्षक उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई सिर्फ तीन शिक्षकों के भरोसे कैसे हो सकती है। खासतौर पर श्रवण बाधित विद्यार्थियों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है क्योंकि बच्चों के अनुसार शिक्षकों को साइन लैंग्वेज तक नहीं आती और स्कूल में उनकी बात समझने के लिए कोई इंटरप्रेटर भी नहीं है। ऐसे में जो बच्चा सुन और बोल नहीं सकता उसकी पढ़ाई और संवाद की व्यवस्था आखिर कैसे होगी यह सवाल अब शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ा हो गया है।

    विद्यार्थियों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और स्कूल प्रबंधन पर पढ़ाई की उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाए। एक विद्यार्थी अंश राजपूत ने बताया कि वह वर्ष 2018 से स्कूल में पढ़ रहा है लेकिन 2026 तक पहुंचने के बाद भी उसे गणित और अंग्रेजी की बुनियादी जानकारी नहीं हो सकी है। बच्चों का कहना है कि वे नियमित कक्षाएं लगाने की मांग करते हैं लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जाता। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन चलाते रहते हैं और कक्षाओं में पढ़ाई की जगह वीडियो दिखाए जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है लेकिन बच्चों की शिकायतों ने स्कूल में शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।

    समस्या केवल शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। स्कूल प्रबंधन ने भी भवन में कमरों की कमी स्वीकार की है जिसके कारण कई बार एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाएं संचालित करनी पड़ती हैं। विद्यार्थियों ने कंप्यूटर लैब के पर्याप्त उपयोग नहीं होने परिवहन सुविधा की कमी छात्राओं के लिए अलग हॉस्टल नहीं होने हॉस्टल में साफ सफाई की समस्या और खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिलने जैसी शिकायतें भी रखी हैं। बच्चों का आरोप है कि दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों को इन व्यवस्थाओं की कमी का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सामने 15 प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच भारतीय सांकेतिक भाषा में विद्यार्थियों से सीधे संवाद साइन लैंग्वेज प्रशिक्षित और मूक बधिर शिक्षकों की नियुक्ति इंटरप्रेटर की व्यवस्था हॉस्टल और परिवहन सुविधा कंप्यूटर लैब तक बेहतर पहुंच खेल गतिविधियां भोजन और साफ सफाई में सुधार शामिल हैं।

    स्कूल के प्रभारी अधीक्षक एवं प्राचार्य मोहम्मद इरफान का कहना है कि उन्होंने मार्च 2026 में कार्यभार संभाला है और उनके अनुसार बच्चों या अभिभावकों ने उनके पास पहले कोई लिखित या मौखिक शिकायत नहीं की। उन्होंने शिक्षकों की कमी स्वीकार करते हुए कहा कि रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों को रखने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द चार और शिक्षक मिलने की उम्मीद है। लेकिन बच्चों का सवाल भी उतना ही अहम है कि यदि समस्याएं लंबे समय से बनी हुई थीं और समाधान नहीं हुआ तो फिर अपनी बात सुनाने के लिए आंदोलन के अलावा उनके पास क्या रास्ता बचता।

    अब यह मामला सिर्फ तीन शिक्षकों और 190 विद्यार्थियों के अनुपात का नहीं बल्कि दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के अधिकार समान अवसर और समावेशी व्यवस्था का है। जब श्रवण बाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए उनकी भाषा समझने वाला शिक्षक नहीं हो और एक कमरे में कई कक्षाएं चलानी पड़ें तो फिर यह तय करना जरूरी हो जाता है कि इन बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

  • वेस्ट बैंक विवाद पर इजरायल का ब्रिटेन को जवाब, पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान

    वेस्ट बैंक विवाद पर इजरायल का ब्रिटेन को जवाब, पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान


    नई दिल्ली। वेस्ट बैंक को लेकर इजरायल और ब्रिटेन के बीच बढ़ता तनाव अब राजनयिक स्तर पर भी पहुंच गया है। इजरायल ने पूर्वी यरूशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने बताया कि यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर लिए गए कई फैसलों का हिस्सा है। यह कार्रवाई ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की उस पहल के बाद हुई है, जिसमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर रोक लगाने की बात कही गई है।

    ब्रिटेन को गाजा मिशन से भी हटाएगा इजरायल

    पूर्वी यरूशलम का ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास ब्रिटेन और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के बीच संबंधों से जुड़े मामलों को देखता था। इजरायल ने इसके अलावा अमेरिका की अगुआई वाले गाजा समन्वय मिशन से ब्रिटेन को बाहर करने की बात कही है। साथ ही फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों को ब्रिटेन की ओर से दी जा रही ट्रेनिंग भी रोकने का फैसला किया गया है।

    जेरेमी कॉर्बिन समेत 12 ब्रिटिश अधिकारियों पर रोक

    इजरायल ने ब्रिटेन के पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन समेत 12 चुने हुए ब्रिटिश अधिकारियों और कुछ अन्य नागरिकों के देश में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इजरायल का आरोप है कि इन लोगों की गतिविधियां यहूदी विरोधी और इजरायल विरोधी रही हैं।

    विदेश मंत्री गिडियन सार ने ब्रिटेन की पहल को गलत बताया। उन्होंने इसे किसी संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करार दिया। सार ने ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि वेस्ट बैंक के कुछ इलाकों से फिलिस्तीनियों को जबरन हटाया जा रहा है।

    अमेरिका ने व्यापारिक पाबंदियों का किया विरोध

    दूसरी तरफ अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की प्रस्तावित व्यापारिक पाबंदियों का समर्थन नहीं किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम वेस्ट बैंक में तनाव और अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं।

    वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम दो-राष्ट्र समाधान की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ है। तीनों नेता सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं। डेनमार्क, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन और स्वीडन ने भी दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराया है।

    पाबंदी का आर्थिक असर सीमित, राजनीतिक संदेश बड़ा

    वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों से मुख्य रूप से खजूर, खट्टे फल, जड़ी-बूटियां और वाइन जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात होता है। इजरायल के कुल निर्यात में इनका हिस्सा काफी छोटा है। ऐसे में प्रस्तावित व्यापारिक पाबंदियों का सीधा आर्थिक प्रभाव सीमित माना जा रहा है, लेकिन इसका कूटनीतिक और राजनीतिक संदेश काफी महत्वपूर्ण है।

    इसी बीच इजरायल वेस्ट बैंक में करीब 1,000 नए घरों के निर्माण की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इनमें ई1 बस्ती परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है। इसे लेकर इजरायल और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच मतभेद और गहराने की आशंका है।

  • स्टाइपेंड की लड़ाई ने बढ़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता: इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, सरकार के सामने जल्द समाधान की चुनौती

    स्टाइपेंड की लड़ाई ने बढ़ाई स्वास्थ्य व्यवस्था की चिंता: इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, सरकार के सामने जल्द समाधान की चुनौती


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन ने अब स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है और भोपाल से लेकर इंदौर समेत प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में इसका सीधा असर मरीजों पर दिखाई दे रहा है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं जबकि जूनियर डॉक्टर और सीनियर रेजिडेंट्स के समर्थन में आने से आंदोलन और व्यापक होता जा रहा है। बुधवार को भी नियमित ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया गया है जिससे सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से अलग रखा गया है ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।

    भोपाल में इस आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र कमला पार्क क्षेत्र बना हुआ है जहां इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता तब तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। सड़क पर बैठे डॉक्टरों के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई और पुलिस तथा प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर चक्काजाम समाप्त कराने की कोशिश करते रहे। इसके बावजूद डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े रहे और उन्होंने सड़क पर ही भोजन कर विरोध जारी रखा। इस बीच मानवता की तस्वीर भी देखने को मिली जब एक दंपती ने अपनी बेटी के एक्सीडेंट की जानकारी दी तो प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने तुरंत उनकी गाड़ी को रास्ता दे दिया।

    आंदोलन के पीछे केवल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग नहीं बल्कि सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी डॉक्टरों में गहरी नाराजगी है। इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी कार्रवाई के विरोध में अब आंदोलन और तेज हो गया है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं बल्कि संवेदनशील बातचीत और ठोस निर्णय के जरिए किया जाना चाहिए।

    इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के बाद सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा भी ओपीडी और अन्य गैर जरूरी सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिए जाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। जूनियर डॉक्टरों ने भी साफ कर दिया है कि नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी का बहिष्कार जारी रहेगा जबकि आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जाएंगी।

    प्रदेशभर के डॉक्टरों में पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी का दावा किया जा रहा है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार को जल्द ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे आंदोलन समाप्त हो सके। दूसरी ओर अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों की मांगों पर जल्द सहमति बनाकर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करना है। प्रशासन और सरकार की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं क्योंकि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन का असर प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं पर और अधिक गंभीर हो सकता है।

  • X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप

    X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को लेकर अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि X दुनिया में खबरों का नंबर-1 सोर्स बन चुका है। मस्क के मुताबिक, हर महीने X को पढ़ने वाले लोगों की संख्या दुनिया के सभी अखबारों की कुल सर्कुलेशन से भी अधिक है। उन्होंने यह बात X पर एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कही।

    मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि X धरती पर खबरों का नंबर-1 सोर्स है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्लेटफॉर्म की मासिक रीडरशिप दुनिया भर के सभी अखबारों की संयुक्त सर्कुलेशन से ज्यादा है। मस्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर X की न्यूज भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    यूरोप में भी X की बढ़ती लोकप्रियता का दावा

    मस्क ने जिस पोस्ट को रीपोस्ट किया, उसमें यूरोप में X के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया गया था। पोस्ट के मुताबिक, यूरोप के लगभग सभी देशों में X न्यूज ऐप्स के बीच नंबर-1 स्थान पर है। इसमें दावा किया गया कि यूरोपीय देशों के लोग खबरों और सूचनाओं के लिए अब X का इस्तेमाल पहले से ज्यादा कर रहे हैं।

    रीपोस्ट की गई पोस्ट में यह भी कहा गया कि यूरोप ने कई वर्षों तक X की आलोचना की, लेकिन इसके बावजूद प्लेटफॉर्म अब वहां खबरों के प्रमुख माध्यमों में शामिल हो रहा है। पोस्ट में लोगों के X की तरफ बढ़ते रुझान का भी दावा किया गया।

    फिलहाल मस्क का दावा, आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

    इन दावों को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंधित आंकड़े X पर साझा की गई पोस्ट में दिए गए हैं। मस्क ने इन्हीं दावों को रीपोस्ट करते हुए अपनी टिप्पणी की है। इसलिए फिलहाल इन्हें मस्क और संबंधित पोस्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    एलन मस्क लंबे समय से X को महज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बजाय खबरों, सूचनाओं और विचारों के बड़े मंच के रूप में पेश करते रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर दुनिया भर के यूजर सीधे पोस्ट कर सकते हैं और न्यूज रिपोर्ट, वीडियो तथा किसी घटना से जुड़ी जानकारी तेजी से सामने आती है।

    मस्क के ताजा बयान ने एक बार फिर पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के बीच बदलते न्यूज कंजम्पशन पैटर्न पर बहस छेड़ दी है। X पर सूचनाएं तेजी से पहुंचती हैं, लेकिन वहां सामने आने वाली हर जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

  • ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू

    ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू


    नई दिल्ली। राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की अवधारणा के तहत नगरीय निकाय चुनाव का पहला चरण आज शुरू हो गया है। पहले चरण में 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में वोट डाले जा रहे हैं। इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इस चरण में 20,623 प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला 57,52,278 मतदाता करेंगे।

    राज्य में कुल 309 नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है।

    चार नगर निगमों में भी आज वोटिंग

    पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के वार्डों में भी पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में कराया जाएगा।

    हालांकि जयपुर जिले की चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू समेत 18 अन्य नगरीय निकायों में पहले चरण में ही मतदान हो रहा है।

    27 नगर परिषदों में मुकाबला

    पहले चरण में नागौर, ब्यावर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन सिटी, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर और बाड़मेर समेत 27 नगर परिषदों के वार्डों में चुनाव हो रहे हैं।

    इसके अलावा 131 नगर पालिकाओं के वार्डों में भी पार्षद पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली और खंडार समेत कई निकाय शामिल हैं।

    जयपुर जिले के बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका नगर पालिकाओं में भी पहले चरण में मतदान हो रहा है।

    BJP के सामने शहरी किला बचाने की चुनौती

    इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दांव बड़ा है। दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच यह सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत कराए जा रहे इन चुनावों के नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज और नीतियों के प्रति जनता की राय से जोड़कर भी देखा जाएगा।

    राजस्थान के नगरीय निकायों में भाजपा को पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है। बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे शहरों में पार्टी के सामने अपने शहरी आधार को बनाए रखने की चुनौती है।

    भाजपा ने इस बार बड़ी संख्या में पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी के भीतर टिकट से नाराज नेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में मैदान में उतरे बागियों को साधना संगठन के लिए चुनौती है। इसके साथ ही भितरघात रोकना भी अहम होगा।

    कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस पाने का मौका

    विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव शहरी इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करने का अवसर हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का आधार बनाया है।

    सफाई व्यवस्था, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में नतीजे यह भी बताएंगे कि शहरी मतदाताओं के बीच कांग्रेस अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती है।

    58 लाख युवा वोटरों पर नजर

    इस चुनाव में युवा मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 18 से 25 वर्ष की आयु के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष के बीच करीब 36.60 लाख वोटर हैं। यानी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 58 लाख मतदाता हैं।

    वहीं 18 से 29 वर्ष के Gen-Z वोटरों की संख्या करीब 35 लाख बताई गई है। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए युवा वोटरों को अपने पक्ष में करना खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पहले चरण के मतदान के बाद नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके साथ ही यह भी साफ होगा कि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए इस पहले प्रयोग में शहरी राजस्थान ने किस पार्टी के पक्ष में अपना भरोसा जताया।

  • MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम

    MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक 9 से 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। इन तीन दिनों में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। स्थानीय सिस्टम सक्रिय होने और पर्याप्त नमी मिलने पर कुछ जिलों में तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर को पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसका असर 12 सितंबर से मध्य प्रदेश में दिखाई देने लगेगा। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश का दौर थमा हुआ है।

    सैटेलाइट तस्वीरों में ज्यादातर हिस्से साफ
    मंगलवार को मौसम विभाग की नई सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से बादल छंटे नजर आए। भोपाल समेत कई जिलों में तेज धूप रही। हालांकि श्योपुर, उज्जैन, इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे।

    12 सितंबर को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद 12 सितंबर को छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    पूर्वी MP में बारिश का आंकड़ा सुधरा
    बारिश के आंकड़ों में पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में सुधार आया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब बारिश करीब 1 प्रतिशत तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 24% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले सप्ताह कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ जैसे हालात बनने से पूर्वी हिस्से का बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा। सोमवार तक यह हिस्सा पहली बार सीजन में सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया था।

    पश्चिमी हिस्से में अब भी बारिश की कमी
    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    प्रदेश में अब तक कुल 31.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र बारिश के आंकड़ों में और सुधार ला सकता है।

  • आज का राशिफल 9 सितंबर: किसी को मिलेगा बड़ा अवसर तो किसी को खर्च पर लगाम की जरूरत, जानिए मेष से मीन तक दिन का हाल

    आज का राशिफल 9 सितंबर: किसी को मिलेगा बड़ा अवसर तो किसी को खर्च पर लगाम की जरूरत, जानिए मेष से मीन तक दिन का हाल


    नई दिल्ली। 9 सितंबर 2026 का दिन ग्रहों की स्थिति के लिहाज से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। आज कुछ राशि वालों को करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं जबकि कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। नौकरी करने वाले लोगों के लिए दिन नई जिम्मेदारियों और काम के बढ़ते दबाव वाला हो सकता है लेकिन मेहनत और समझदारी से काम करने पर अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। कारोबारियों को किसी पुराने संपर्क से फायदा मिलने की संभावना है और रुके हुए काम को दोबारा गति मिल सकती है। आर्थिक स्थिति की बात करें तो कुछ लोगों के लिए धन प्राप्ति के योग बन रहे हैं लेकिन साथ ही अनावश्यक खर्च भी बढ़ सकता है इसलिए बजट का ध्यान रखना जरूरी होगा। निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी करने के बजाय पूरी जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने की संभावना है। वृषभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में लाभ मिल सकता है लेकिन किसी को उधार देने से पहले सोच विचार जरूर करें। मिथुन राशि के लोगों के लिए आज संपर्क और बातचीत के जरिए नए अवसर बन सकते हैं। किसी पुराने मित्र या सहयोगी से महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। कर्क राशि वालों के लिए परिवार से जुड़ा कोई फैसला अहम रहेगा और घर के लोगों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। सिंह राशि के जातकों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है और मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है। कन्या राशि वालों को आज अपने काम में एकाग्रता बनाए रखने की जरूरत होगी। छोटी सी लापरवाही भी परेशानी पैदा कर सकती है इसलिए जरूरी काम पहले पूरा करें।

    तुला राशि के लिए आज का दिन आर्थिक रूप से अच्छा रह सकता है। आय के नए स्रोत तलाशने का मौका मिलेगा और पुराना अटका हुआ पैसा मिलने की संभावना भी बन सकती है। वृश्चिक राशि वालों को कारोबार या नौकरी में कोई अच्छी खबर मिल सकती है। हालांकि किसी भी फैसले में भावनाओं के बजाय व्यावहारिक सोच रखना बेहतर रहेगा। धनु राशि के लोगों के लिए यात्रा के योग बन रहे हैं। काम के सिलसिले में होने वाली यात्रा भविष्य में फायदा दे सकती है। मकर राशि वालों को आज मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है लेकिन उसका परिणाम भी अच्छा मिलने की संभावना है। अधिकारियों और सहकर्मियों से तालमेल बनाकर चलना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। कुंभ राशि के जातकों के लिए नई योजना पर काम शुरू करने का दिन है। रचनात्मक सोच और नए आइडिया कार्यक्षेत्र में आपकी अलग पहचान बना सकते हैं। मीन राशि वालों को आज परिवार और काम के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। भावनात्मक दबाव में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें।

    प्रेम और रिश्तों की बात करें तो आज कई राशियों के लिए दिन सकारात्मक रह सकता है। साथी के साथ बातचीत करने से गलतफहमियां दूर हो सकती हैं और रिश्ते में नजदीकी बढ़ सकती है। विद्यार्थियों के लिए मेहनत और एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अपनी पढ़ाई की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। स्वास्थ्य के मामले में आज पर्याप्त आराम और संतुलित खानपान जरूरी रहेगा। कुल मिलाकर 9 सितंबर का दिन मेहनत करने वालों के लिए आगे बढ़ने के अवसर लेकर आ सकता है। ग्रहों के संकेत यह बताते हैं कि सही योजना बनाकर और सोच समझकर कदम उठाने वाले लोग आज बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेतों पर आधारित है इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय अपनी परिस्थितियों और विवेक के अनुसार ही लें।

  • सोना महंगा तो चांदी सस्ती क्यों दिख रही, गोल्ड-सिल्वर रेशियो और फेयर वैल्यू से समझिए दोनों धातुओं की कीमत का अंतर

    सोना महंगा तो चांदी सस्ती क्यों दिख रही, गोल्ड-सिल्वर रेशियो और फेयर वैल्यू से समझिए दोनों धातुओं की कीमत का अंतर

    नई दिल्ली ।मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मंगलवार, 8 सितंबर को सोने और चांदी के वायदा भाव में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिका की मौद्रिक नीति को लेकर बनी उम्मीदों से कीमती धातुओं को समर्थन मिला। अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा और इसमें 0.14 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई। दूसरी ओर दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स 2.38 लाख रुपये प्रति किलो पर रहा, जिसमें 0.08 प्रतिशत की गिरावट आई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,434 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 66.95 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। दोनों धातुओं पर मौजूदा आर्थिक संकेतों का प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन उनकी कीमत और वैल्यूएशन की स्थिति एक जैसी नहीं है।

    सोने की मॉडल्ड फेयर वैल्यू 3,248 से 4,595 डॉलर प्रति औंस के बीच बताई गई है। इसका मिडपॉइंट 3,922 डॉलर प्रति औंस है। अगस्त की शुरुआत में सोना करीब 4,242 डॉलर प्रति औंस पर था, जो अनुमानित मिडपॉइंट से करीब 8 प्रतिशत अधिक था। जनवरी में सोना 5,589 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचा था, जो मॉडल्ड रेंज से काफी ऊपर था।

    इसके बाद जून में सोने की कीमत लगभग 3,985 डॉलर प्रति औंस तक आई, जो अनुमानित फेयर वैल्यू के करीब थी। बाद में सोने में फिर तेजी देखने को मिली। इसका मतलब यह है कि पहले की तेज सट्टेबाजी कुछ कम हुई है, लेकिन सोना अभी भी मॉडल्ड मिडपॉइंट से ऊपर कारोबार कर रहा है।

    चांदी के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। इसकी वैल्यूएशन को गोल्ड-सिल्वर रेशियो के आधार पर देखा जा रहा है। 60:1 के सामान्य रेशियो के अनुसार चांदी की अनुमानित कीमत 54 से 77 डॉलर प्रति औंस के बीच बनती है, जिसका मिडपॉइंट 65 डॉलर है। विश्लेषण के अनुसार चांदी करीब 61.7 डॉलर प्रति औंस पर थी, यानी मिडपॉइंट से लगभग 6 प्रतिशत नीचे।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी चांदी की तुलनात्मक स्थिति को समझने में मदद करता है। जनवरी में यह अनुपात करीब 46 तक पहुंच गया था, जिसका मतलब था कि सोने की तुलना में चांदी महंगी हो गई थी। अब यह लगभग 69 पर पहुंच चुका है, जो 21वीं सदी के करीब 69:1 के औसत के आसपास है।

    चांदी को केवल निवेश मांग से ही समर्थन नहीं मिलता। इसका इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी प्रभाव पड़ता है। रुपये की कमजोरी भी घरेलू MCX सिल्वर के लिए समर्थन देने वाला कारक मानी जा रही है।

    MCX सिल्वर के लिए 2.36 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर सपोर्ट और 2.42 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर रेजिस्टेंस बताया गया है। यदि चांदी रेजिस्टेंस के ऊपर टिकती है तो खरीदारी बढ़ने की संभावना बताई गई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर है। PPI और CPI जैसे आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। सोने के लिए 4,300 से 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी के लिए 65 से 67 डॉलर प्रति औंस के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये की चाल भी अहम है। अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने के साथ रुपया कमजोर होने पर घरेलू सोने-चांदी की कीमतों में तेजी अधिक दिख सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट की स्थिति में कमजोर रुपया घरेलू कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकता है।

  • अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्ली ।भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार मजबूत हो रही है। अगस्त 2026 में देश में ईवी की खुदरा बिक्री 52.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 2,98,448 यूनिट पर पहुंच गई। इसके साथ कुल वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त 2025 में यह 9.5 प्रतिशत थी।

    अगस्त में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहन, चारों प्रमुख श्रेणियों में अब तक की सबसे अधिक मासिक खुदरा बिक्री दर्ज की गई। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री अगस्त में 67.05 प्रतिशत बढ़कर 1,83,204 यूनिट रही। हालांकि जुलाई 2026 में दर्ज 2,04,362 यूनिट की तुलना में अगस्त में बिक्री कुछ कम रही। इस श्रेणी में टीवीएस मोटर 48,938 यूनिट के साथ पहले स्थान पर रही। बजाज ऑटो ने 41,114 और एथर एनर्जी ने 28,757 यूनिट बेचीं। ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 13,852 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 29 प्रतिशत कम है। इलेक्ट्रिक दोपहिया की बाजार हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 10.7 प्रतिशत हो गई।

    इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बिक्री 25.28 प्रतिशत बढ़कर 79,846 यूनिट पहुंच गई। इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ 56.6 प्रतिशत से बढ़कर 65.3 प्रतिशत हो गई। बजाज ऑटो ने 13,833 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री की। महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी ने 12,806 और टीवीएस मोटर ने 4,415 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट के रूप में सामने आए। अगस्त में इनकी बिक्री करीब तीन गुना बढ़कर 4,702 यूनिट रही, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,631 यूनिट था। बाजार हिस्सेदारी भी 2.06 प्रतिशत से बढ़कर 5.18 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स ने 1,416 यूनिट के साथ इस श्रेणी में बढ़त बनाए रखी। यूलर मोटर्स ने 849 और सैनी हेवी इंडस्ट्री इंडिया ने 605 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री 51.89 प्रतिशत बढ़कर 30,696 यूनिट रही। इस श्रेणी में ईवी की बाजार हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने 13,158 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री दर्ज की। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 6,464 और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने 4,622 यूनिट बेचीं। नई कंपनियों में विनफास्ट ऑटो इंडिया की बिक्री 2,199 यूनिट और टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी की बिक्री 116 यूनिट रही।

    फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने अगस्त 2026 को भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उद्योग के इतिहास का सबसे बड़ा अगस्त महीना बताया। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट के प्रदर्शन को खास तौर पर उल्लेखनीय बताया और कहा कि फ्लीट विद्युतीकरण अब परीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक खरीद निर्णयों तक पहुंच गया है।

    उन्होंने कहा कि गैर-त्योहारी मौसम के बावजूद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन संरचनात्मक रूप से इलेक्ट्रिक श्रेणी में बदल चुके हैं। उनके अनुसार, ईवी की वृद्धि अब केवल सरकारी प्रोत्साहनों तक सीमित नहीं है। कम परिचालन लागत, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क, उपभोक्ताओं का बढ़ता विश्वास, पीएम ई-ड्राइव योजना और राज्यों की अनुकूल नीतियां मिलकर इस बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं।

  • 2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी

    2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी



    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और मामले की आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल राहत देते हुए अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।

    पूरा मामला सितंबर 2018 का है। उस समय राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-चीफ’ और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने भाषण का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था।

    राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चोरी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी से पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

    शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से मानहानि मामले की कार्यवाही के साथ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द करने का अनुरोध किया था।

    राहुल गांधी के वकीलों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष को लेकर थी। इसी आधार पर वकीलों ने दावा किया कि किसी पार्टी कार्यकर्ता को इस तरह की टिप्पणी के आधार पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

    इस दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शशि थरूर से संबंधित पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत और पहचान योग्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है तथा प्रधानमंत्री उसके प्रमुख प्रतिनिधि हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं की मानहानि होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

    हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ऐसा कोई गैर-कानूनी या अनुचित आधार नहीं है, जिसके चलते उसे रद्द किया जाए। इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।

    हालांकि, फैसले के बावजूद राहुल गांधी को छह सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अगले छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित रहेगी और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से भी छूट मिलेगी। इस अवधि में वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।