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  • कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के हालिया एलान ने भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह और गौरव की एक नई लहर पैदा कर दी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही कई कलाकारों के करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। इस वर्ष के पुरस्कारों में सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन रहे, जिन्हें उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और बेहतरीन अभिनय के लिए देश का सर्वोच्च अभिनय सम्मान दिया गया है। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया है। उनके साथ ही दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को भी उनके शानदार अभिनय के लिए इस शीर्ष सम्मान से नवाजा गया है, जो उनके सफर का चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा होते ही विजेता अभिनेता के घर और प्रशंसकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। कार्तिक आर्यन ने अपनी इस बड़ी कामयाबी की झलक सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण पोस्ट के जरिए साझा की है। उन्होंने एक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया है जिसमें वह अपने परिवार के साथ बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन पर लाइव पुरस्कारों की घोषणा देख रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर विजेता के रूप में उनका नाम आता है, पूरा परिवार खुशी से झूम उठता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार्तिक गर्व से स्क्रीन की तरफ उंगली दिखाकर अपने माता-पिता और परिजनों को अपना नाम दिखा रहे हैं, जिसके बाद पूरा परिवार गले मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण को साझा करता है।

    इस अविस्मरणीय पल को अपने प्रशंसकों के साथ साझा करते हुए अभिनेता ने लिखा कि वह अभी भी इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जो शब्दों की सीमा से बहुत परे होते हैं और यह पुरस्कार उनके लिए बिल्कुल वैसा ही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि वर्षों से देखा गया उनका एक बड़ा सपना आज आखिरकार सच हो गया है, जिसके लिए वह सिनेमा जगत, जूरी और अपने प्रशंसकों के प्रति हमेशा विनम्र और आभारी रहेंगे। यह पुरस्कार उनके लिए मात्र एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके सालों के कड़े परिश्रम और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है।

    कार्तिक आर्यन ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी, जिसके बाद लंबे समय तक उन्हें मुख्य रूप से रोमांटिक-कॉमेडी और ड्रामा फिल्मों के लिए पहचाना जाता रहा। उन्होंने ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में काम करके बॉक्स ऑफिस पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई थी। हालांकि, निर्देशक कबीर खान के मार्गदर्शन में बनी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ ने उनके करियर की पूरी दिशा ही बदल दी। यह फिल्म भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जिसके मुख्य किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए कार्तिक आर्यन ने अभूतपूर्व शारीरिक और मानसिक बदलाव किए थे। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने रिलीज के समय ही उनके इस काम को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना था और अब राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस मान्यता ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

    इस वर्ष के राष्ट्रीय पुरस्कारों में ‘चंदू चैंपियन’ के अलावा अन्य फिल्मों का भी दबदबा रहा। फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपनी सशक्त और गंभीर भूमिका के लिए अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया है, जिन्होंने पुरस्कार जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सपने सच होते हैं। वहीं दूसरी ओर, फिल्म ‘भक्षक’ में अपने बेहतरीन और यथार्थवादी अभिनय के लिए जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला है। अभिनेता रणदीप हुड्डा को भी उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया है, जिसे उन्होंने अपने करियर की सबसे कठिन फिल्म बताया था। कला जगत और खेल पृष्ठभूमि पर आधारित सिनेमा को इस बार राष्ट्रीय मंच पर जो सराहना मिली है, उसने भारतीय फिल्म उद्योग में गुणवत्तापूर्ण और कंटेंट-आधारित कहानियों के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

  • रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच

    रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच


    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण की रिलीज से पहले दिल्ली में आयोजित भव्य रेड कारपेट इवेंट ने दर्शकों के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर पहली बार बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया गया जहां पूरी स्टारकास्ट ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल अरुण गोविल रवि दुबे और कई अन्य कलाकारों ने मंच पर फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए और बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए कितना खास है।

    कार्यक्रम की शुरुआत ट्रेलर प्रदर्शन के साथ हुई जिसके बाद सबसे पहले रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच संभाला। पारंपरिक भारतीय परिधान में पहुंचे दोनों कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। निर्देशक नितेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने इन दोनों कलाकारों को केवल अभिनय क्षमता के आधार पर नहीं चुना बल्कि उनकी आंखों में उन्हें राम और सीता का व्यक्तित्व दिखाई देता था। उनका कहना था कि इन किरदारों के लिए वह किसी और की कल्पना नहीं कर सकते थे।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने फिल्म की परिकल्पना और निर्माण यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी विश्व स्तर पर विजुअल इफेक्ट्स के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है लेकिन अब समय आ गया था कि भारतीय संस्कृति की सबसे महान कथा को उसी भव्यता के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के साथ रामायण पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया गया ताकि भारतीय विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।

    निर्देशक नितेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि फिल्म की मूल कथा और भावनाओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से दर्शकों को रामायण का ऐसा अनुभव मिलेगा जो पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा गया। उन्होंने संकेत दिया कि लंका दहन किशकिंधा और अन्य महत्वपूर्ण दृश्यों को अत्यंत भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    कार्यक्रम में अभिनेता अरुण गोविल ने भी भावुक कर देने वाला अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब रामानंद सागर की रामायण बन रही थी तब शुरुआत में उन्हें भगवान राम की भूमिका नहीं मिली थी लेकिन बाद में वही किरदार उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म में वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने कहा कि इस सेट पर काम करते समय उन्हें हमेशा आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ।

    रणबीर कपूर ने मंच से अरुण गोविल के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने उन्हें भगवान राम के रूप में देखा है और यदि वह उनके अभिनय का थोड़ा सा भी अंश अपने किरदार में ला सके तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं साई पल्लवी ने कहा कि उन्होंने इस भूमिका को स्वीकार करने से पहले माता सीता से प्रार्थना की कि उन्हें इस दिव्य चरित्र को निभाने की शक्ति मिले।

    रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका मिलने को अपना सौभाग्य बताया जबकि साउथ सुपरस्टार यश ने रावण का किरदार निभाने का अवसर मिलने पर मेकर्स का आभार व्यक्त किया। उनकी एंट्री पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। वहीं सनी देओल के मंच पर आते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म हर भारतीय तक पहुंचेगी और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल करेगी।

    कार्यक्रम में कवि कुमार विश्वास ने भगवान राम की कथा का महत्व बताया जबकि सितार वादक ऋषभ शर्मा की भक्तिमय प्रस्तुति ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में ट्रेलर को एक बार फिर प्रदर्शित किया गया जिसे दर्शकों ने उत्साह के साथ देखा। इस भव्य आयोजन ने साफ कर दिया कि रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को आधुनिक तकनीक के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का एक विशाल प्रयास है।

  • मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी

    मेरी पत्नी को बुलाओ कहकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक पुलिस और प्रशासन की समझाइश से बची बड़ी अनहोनी


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर में शनिवार को एक पारिवारिक विवाद उस समय सार्वजनिक तमाशे में बदल गया जब एक युवक अपनी पत्नी के मायके चले जाने से नाराज होकर करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया। किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए।

    घटना विजयपुर नगर के बस स्टैंड क्षेत्र की बताई जा रही है। टंकी पर चढ़े युवक की पहचान धीरज खटीक के रूप में हुई है। ऊंचाई पर बैठे युवक को देखकर स्थानीय लोग घबरा गए और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली और लगातार युवक से बातचीत कर उसे शांत करने की कोशिश करती रही।

    करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान युवक बार बार अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने की मांग करता रहा। वह मीडिया से बात कराने की भी जिद करता रहा ताकि अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख सके। पुलिस अधिकारियों प्रशासनिक अमले और स्थानीय लोगों ने धैर्य के साथ उससे बातचीत जारी रखी। काफी समझाइश और भरोसा दिलाने के बाद आखिरकार युवक सुरक्षित नीचे उतर आया जिससे सभी ने राहत की सांस ली।

    नीचे आने के बाद युवक ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी लगभग पंद्रह दिन पहले उसे छोड़कर मायके चली गई थी। उसका कहना था कि उसने इस संबंध में पुलिस से शिकायत भी की थी लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी और मानसिक तनाव के चलते उसने विरोध दर्ज कराने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ने जैसा कदम उठाया। युवक का कहना था कि वह चाहता था उसकी बात सुनी जाए और उसकी पत्नी को वापस बुलाया जाए।

    हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग है। विजयपुर थाना प्रभारी के अनुसार युवक की पत्नी पहले ही उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा चुकी थी। पुलिस ने बताया कि पत्नी की शिकायत के आधार पर पहले शांति भंग की कार्रवाई भी की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि युवक ने पत्नी पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने संयम और सतर्कता के साथ स्थिति को संभाला जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। अधिकारियों ने युवक को उसकी शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन भी दिया। फिलहाल पुलिस पति पत्नी के बीच विवाद की वास्तविक वजह जानने में जुटी है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर संकेत करती है कि पारिवारिक विवाद यदि समय रहते बातचीत और कानूनी प्रक्रिया से नहीं सुलझाए जाएं तो वे सार्वजनिक घटनाओं का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक आवेश में खतरनाक कदम उठाने के बजाय संवाद और कानून का सहारा लेना ही सबसे सुरक्षित और उचित रास्ता है।

  • उच्च ग्रह बनाएंगे राजा या नीच ग्रह करेंगे परेशान जानिए कुंडली का असली गणित और ज्योतिष का बड़ा सच

    उच्च ग्रह बनाएंगे राजा या नीच ग्रह करेंगे परेशान जानिए कुंडली का असली गणित और ज्योतिष का बड़ा सच


    नई दिल्ली । जन्मकुंडली में किसी ग्रह का उच्च या नीच होना हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का विषय रहा है। अक्सर यह धारणा बना ली जाती है कि यदि कुंडली में कई उच्च ग्रह मौजूद हैं तो व्यक्ति निश्चित रूप से अत्यंत सफल और भाग्यशाली होगा जबकि नीच ग्रह जीवन में केवल कठिनाइयां और असफलताएं ही लेकर आते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ग्रह का प्रभाव केवल उसकी राशि से नहीं बल्कि उसकी संपूर्ण स्थिति और कुंडली में उसके योगदान से तय होता है।

    ज्योतिषविदों का कहना है कि किसी ग्रह का शुभ या अशुभ परिणाम उसके उच्च या नीच होने से कहीं अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह कुंडली में किस भाव का स्वामी है और किस भाव में स्थित है। यदि कोई उच्च ग्रह ऐसे भाव का स्वामी है जो रोग ऋण शत्रु बाधा या संघर्ष से जुड़ा हुआ है तो वह अपनी शक्ति के साथ उन भावों के प्रभाव को भी बढ़ा सकता है। ऐसे में ग्रह शक्तिशाली होने के बावजूद व्यक्ति को अपेक्षित शुभ परिणाम नहीं मिलते।

    दूसरी ओर यदि कोई ग्रह नीच राशि में स्थित है तो इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि वह हमेशा नकारात्मक परिणाम ही देगा। यदि वह ग्रह शुभ भाव का स्वामी हो शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहा हो मजबूत नवांश में स्थित हो या नीचभंग राजयोग जैसी स्थिति बना रहा हो तो वही ग्रह व्यक्ति को सम्मान धन सफलता और प्रतिष्ठा भी दिला सकता है। यही कारण है कि केवल ग्रह की राशि देखकर भविष्य का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।

    ज्योतिष शास्त्र में ग्रह जिस भाव में स्थित होता है उसका महत्व भी अत्यंत अधिक होता है। यदि उच्च ग्रह अशुभ भाव में बैठा हो या राहु केतु अथवा शनि जैसे ग्रहों से पीड़ित हो तो उसकी सकारात्मक शक्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं नीच ग्रह यदि केंद्र या त्रिकोण में शुभ योग बना रहा हो और उस पर बृहस्पति चंद्रमा या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो वह आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी परिणाम दे सकता है।

    फलादेश में ग्रहों की युति और दृष्टि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार एक ग्रह दूसरे ग्रह के प्रभाव से अपना स्वभाव बदल देता है। यही कारण है कि केवल एक ग्रह को देखकर भविष्यवाणी करना ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता। किसी भी व्यक्ति के जीवन का सही आकलन करने के लिए पूरी कुंडली का संतुलित और गहन अध्ययन आवश्यक होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कई बार सामान्य दिखाई देने वाला ग्रह अपनी महादशा या अंतरदशा में असाधारण सफलता देता है जबकि अत्यंत मजबूत दिखाई देने वाला ग्रह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। इसलिए किसी की कुंडली में उच्च ग्रह होने पर अत्यधिक उत्साहित होने या नीच ग्रह देखकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सही फलादेश के लिए ग्रह की राशि भाव भावेश युति दृष्टि योग दशा और संपूर्ण कुंडली का समग्र विश्लेषण जरूरी होता है। ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं बल्कि व्यक्ति को सही दिशा और संतुलित मार्गदर्शन देना है।

  • अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर

    अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे अभिजीत दीपके लेकिन माइग्रेन की परेशानी ने बढ़ाई मुश्किलें आंदोलन पर टिकी सबकी नजर


    नई दिल्ली । सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ नया घटनाक्रम अब अभिजीत दीपके के अनिश्चितकालीन अनशन तक पहुंच गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और आंदोलन के समर्थन का प्रतीक बताया है लेकिन इस फैसले के साथ ही उनके स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ी वजह यह है कि खुद दीपके पहले कई बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें माइग्रेन की समस्या है और लंबे समय तक खाली पेट रहने पर उनकी तबीयत बिगड़ सकती है।

    दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर यह सवाल लगातार उठ रहा था कि जब सोनम वांगचुक लंबे समय से अनशन पर बैठे हैं तब आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके खुद अनशन क्यों नहीं कर रहे। इस सवाल का जवाब देते हुए दीपके ने पहले कहा था कि आंदोलन की पूरी रणनीति और प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है इसलिए उनका सक्रिय रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि सोनम वांगचुक ने स्वयं उन्हें अनशन पर बैठने से मना किया था ताकि आंदोलन का संचालन प्रभावित न हो।

    इसके अलावा अभिजीत दीपके ने अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या का भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि उन्हें माइग्रेन की शिकायत है और यदि समय पर भोजन नहीं मिलता तो तेज सिरदर्द शुरू हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार के लोग हमेशा उन्हें समय पर खाना खाने की सलाह देते हैं क्योंकि अधिक देर तक भूखे रहने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। चिकित्सकीय दृष्टि से भी माइग्रेन के मरीजों के लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि इससे सिरदर्द का तीव्र दौरा पड़ सकता है और शारीरिक कमजोरी भी बढ़ सकती है।

    ऐसे में अब जब अभिजीत दीपके ने खुद अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है तो उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा तो दूसरी ओर आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। किसी भी बड़े आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका केवल मंच तक सीमित नहीं होती बल्कि रणनीति बनाना कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना प्रशासन के साथ संवाद करना और हर स्थिति पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी होता है। यह सब कार्य लगातार ऊर्जा और मानसिक एकाग्रता की मांग करते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनशन लंबा खिंचता है तो अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में आंदोलन की गति और नेतृत्व दोनों प्रभावित होने की आशंका रहेगी। दूसरी ओर उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया साहसिक कदम बता रहे हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अभिजीत दीपके अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद इस अनिश्चितकालीन अनशन को कितने समय तक जारी रख पाते हैं। आने वाले दिनों में उनका स्वास्थ्य और आंदोलन दोनों ही चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।

    English Tags:
    Abhijeet Deepke, Sonam Wangchuk, Hunger Strike, Migraine, Protest Movement

  • MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित

    MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती का फैसला किया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए मितव्ययिता संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अगले दो वर्षों तक गैर-जरूरी सरकारी खर्चों (Non-Essential Government Expenditures) पर रोक रहेगी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा.

    नए आदेश के मुताबिक, अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों तक सीमित रहेंगी. देश के भीतर हवाई यात्रा भी आवश्यकता के आधार पर ही की जाएगी और सभी अधिकारी सरकारी खर्च पर केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर कर सकेंगे.


    होटल में बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं

    वित्त विभाग ने होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम अब सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे. जहां संभव होगा, वहां प्रशिक्षण और बैठकों को वर्चुअल माध्यम या वेबिनार के जरिए आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.


    किराए के वाहनों की संख्या घटेगी

    सरकार ने सभी विभागों को किराए के वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए व्हीकल पूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. दो या अधिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन उपलब्ध कराने के बजाय साझा वाहन व्यवस्था अपनाई जाएगी. यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार दिया जाता है तो उसे दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.


    दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी रोक

    आदेश में अधिकारियों के कार्यालयों और केबिन की सजावट तथा इंटीरियर पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगा दी गई है. विभागाध्यक्षों को इन खर्चों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.


    नई कंसल्टेंसी सेवाओं पर रोक

    राज्य सरकार ने फिलहाल नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है. साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके.

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: फ्रांस को 6-4 से हराकर इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज… बुकायो साका ने लगाई हैट्रिक

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: फ्रांस को 6-4 से हराकर इंग्लैंड ने जीता ब्रॉन्ज… बुकायो साका ने लगाई हैट्रिक


    नई दिल्ली
    , फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) में फैंस को इतिहास का सबसे रोमांचक और हाई-स्कोरिंग मुकाबला (High-scoring match) देखने को मिला. सेमीफाइनल की निराशा को पीछे छोड़ते हुए इंग्लैंड की टीम (England team) ने फ्रांस (France) को एक रोमांच से भरपूर मैच में 6-4 से हराकर वर्ल्ड कप ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. 1966 में विश्व विजेता बनने के बाद वर्ल्ड कप के इतिहास में इंग्लैंड का यह अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

    मैच में एक समय इंग्लैंड 4-0 से आगे था, लेकिन दूसरी हाफ में फ्रांस के स्टार फॉरवर्ड किलियन एम्बाप्पे के तूफान ने इंग्लैंड के खेमे में खलबली मचा दी. हालांकि, बुकायो साका की शानदार हैट्रिक और जूड बेलिंगहैम के आखिरी मिनट के जादुई गोल की बदौलत इंग्लैंडने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया।

    मैच की शुरुआत से पहले किसी को भी इतने बड़े स्कोर की उम्मीद नहीं थी. इंग्लैंड ने अपनी शुरुआती प्लेइंग इलेवन में कप्तान हैरी केन और स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंगहैम को आराम दिया था, जबकि गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड की जगह डीन हेंडरसन को मौका मिला. कप्तान की आर्मबैंड पहने डेक्लान राइस (Declan Rice) ने मैच के शुरू होने के महज ढाई मिनट (2.5 मिनट) के भीतर पहला गोल दागकर फ्रांस को स्तब्ध कर दिया।

    इसके बाद 18वें मिनट में एजरी कोन्सा ने एक शानदार हेडर के जरिए बढ़त को 2-0 कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ बुकायो साका का शो, जिन्होंने पहले हाफ के खत्म होने से ठीक पहले दो बैक-टू-बैक गोल दागकर फ्रांस के डिफेंस को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया और इंग्लैंड को 4-0 की विशाल बढ़त दिला दी।


    दूसरा हाफ: एम्बाप्पे का तूफान

    हाफ-टाइम के बाद मैदान पर पासा पूरी तरह पलट गया. फ्रांसीसी टीम एक नई ऊर्जा के साथ उतरी. दूसरे हाफ के शुरुआती मिनटों में ही किलियन एम्बाप्पे ने इंग्लैंड के डिफेंस को भेदकर फ्रांस का पहला गोल दागा. इसके ठीक बाद 54वें मिनट में ब्रैडली बारकोला ने गेंद को नेट में पहुंचाकर स्कोर 4-2 कर दिया।

    मैच के 66वें मिनट में एम्बाप्पे ने एक और ऐतिहासिक गोल दागा. इस गोल के साथ ही एम्बाप्पे फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सर्वकालिक सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने दिग्गज लियोनेल मेसी को पीछे छोड़ दिया है. इस टूर्नामेंट में यह एम्बाप्पे का 10वां गोल था, जिसके साथ ही वे गोल्डन बूट की रेस में सबसे आगे निकल गए हैं. स्कोर अब 4-3 हो चुका था और फ्रांस बराबरी के बेहद करीब था।


    साका की हैट्रिक और बेलिंगहैम का ‘विनिंग टच’

    जब फ्रांस मैच को पेनल्टी शूटआउट की तरफ ले जाने के लिए लगातार हमले कर रहा था, तभी 87वें मिनट में इंग्लैंड को एक पेनल्टी मिली. दबाव के इस बेहद नाजुक क्षण में बुकायो साका ने गेंद को गोल पोस्ट के दाहिने कोने में डालते हुए अपनी शानदार हैट्रिक पूरी की और इंग्लैंड को 5-3 से आगे कर दिया।

    इंजरी टाइम में फ्रांस के ओस्मान डेम्बेले ने एक बेहतरीन फिनिश के जरिए गोल दागकर स्कोर 5-4 कर दिया और मैच में रोमांच चरम पर पहुंच गया. लेकिन आखिरी मिनटों में मैदान पर उतरे जूड बेलिंगहैम ने एक बेहद खूबसूरत मैदानी गोल दागकर इंग्लैंड की 6-4 से जीत पक्की कर दी।

  • खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट

    खराब मौसम ने अमरनाथ यात्रा पर लगाया ब्रेक…. भारी बारिश-भूस्खलन का अलर्ट


    जम्मू।
    अगर आप 19 जुलाई को अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) पर निकलने वाले थे, तो यह खबर आपके लिए है. खराब मौसम (Bad Weather) के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) को फिलहाल रोक दिया है. पहलगाम (Pahalgam) और बालटाल (Baltal), दोनों रास्तों से किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप में श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है. खराब मौसम ने इस बार अमरनाथ यात्रा की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

    प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया है. यह रोक यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर लागू रहेगी. प्रशासन के मुताबिक, मौसम विभाग ने अगले कुछ समय के लिए खराब मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है. पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, फिसलन और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए जोखिम उठाने की बजाय यात्रा को फिलहाल रोकना जरूरी समझा गया।

    इस फैसले के बाद जम्मू स्थित भगवती नगर यात्री निवास बेस कैंप में मौजूद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई. उन्हें बेस कैंप में ही रुकने और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है।

    हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं. लेकिन ऊंचाई वाले इस इलाके में मौसम कुछ ही घंटों में बदल जाता है. ऐसे में प्रशासन समय-समय पर मौसम और रास्तों की स्थिति की समीक्षा करता है. अगर हालात अनुकूल नहीं होते, तो यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया जाता है।

    अधिकारियों ने कहा है कि जैसे ही मौसम साफ होगा, उसी हिसाब से फैसला लिया जाएगा. तब तक श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें. यानी फिलहाल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकले श्रद्धालुओं को थोड़ा इंतजार करना होगा. मौसम की मार थमेगी, रास्ते सुरक्षित होंगे, तभी यात्रा दोबारा आगे बढ़ेगी।


    राजौरी में बारिश ने बिगाड़े हालात

    जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. तेज बारिश के चलते जिले के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. जिला प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरत यात्रा न करने, नदियों और नालों से दूर रहने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात पर नजर रखी जा रही है।


    उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से यात्रा पर असर

    लगातार हो रही बारिश का असर उत्तराखंड की तीर्थ यात्राओं पर भी पड़ा है. रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर शुक्रवार को पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने के कारण रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया था. हालांकि राहत एवं बचाव दलों ने मलबा हटाकर पैदल मार्ग फिर से खोल दिया, लेकिन सुरक्षा कारणों से घोड़ा-खच्चर और डोली सेवा फिलहाल स्थगित रखी गई है. प्रशासन लगातार मार्ग की निगरानी कर रहा है।

    वहीं, पिथौरागढ़ जिले में कैलाश-मानसरोवर यात्रा भी प्रभावित हुई है. गरबाधार क्षेत्र में भूस्खलन के कारण गुंजी मार्ग बंद हो गया. इसके चलते 50 श्रद्धालुओं वाले चौथे जत्थे को धारचूला बेस कैंप पर ही रोक दिया गया. प्रशासन का कहना है कि रास्ता सेफ होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाएगा।

    राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (DEOC) को 24 घंटे एक्टिव रखने, राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और भूस्खलन संभावित मार्गों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही चारधाम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करें. भारी बारिश के दौरान नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।

  • MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित

    MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand region) में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project) और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और परियोजना से प्रभावित परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला।

    इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं और पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर की केवल एक बार औपचारिक मेडिकल जांच की गई. प्रदर्शनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी शुरू किया है।

    बता दें कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

    हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है. मौजूदा आंदोलन में रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि अधिकारियों द्वारा किए गए पुनर्वास के वादों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

    छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में पड़ोसी पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित 176 लोग शामिल हैं और इनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजे की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

    एक बयान में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटने और पुनर्वास का लाभ उठाने के लिए वहां के जिला अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह किया. इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुनर्वास और पुनर्स्थापना के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और प्रति प्रभावित परिवार पुनर्वास सहायता को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया है।

    प्रशासन ने कहा कि अतिरिक्त आवंटन पात्र लाभार्थियों के समय पर पुनर्वास में मदद करेगा. इसमें कहा गया कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर विरोध स्थल पर पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया था. पास के एक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल स्टाफ और दवाइयां भी तैनात की गई थीं, जबकि स्थानीय अधिकारी इंतजामों पर नजर रखे हुए थे।

    प्रशासन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मना रहे थे. उसने दावा किया कि कुछ लोग प्रोजेक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे और जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

    प्रशासन का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।

    अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल संसाधन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ लोगों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूल तोड़ दिए गए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे और हर गांव में प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से दिखाए।

    बिजावर के SDM विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए आंदोलन के बारे में पता चला, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने न तो पहले से कोई जानकारी दी थी और न ही कोई औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी लंबित मांगों का जायजा लिया।

    द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के लोगों की शिकायतों का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर के निवासियों से जुड़े मुद्दों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की, खासकर मॉनसून को देखते हुए, और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि फ़ायदे चुनिंदा लोगों को दिए गए थे; उन्होंने कहा कि अगर कोई खास मामला प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है

    MP: दतिया में आशुतोष तिवारी का प्रचार कर रहे नरोत्तम… स्वागत के दौरान कार्यकर्ताओं से बोले- माला वाला पीछे है


    दतिया।
    दतिया विधानसभा (Datia Assembly Constituency) के चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. नरोत्तम मिश्रा रात को बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी (BJP candidate Ashutosh Tiwari) के साथ जनसंपर्क कर रहे थे. चुनाव प्रचार के दौरान एक जगह पार्टी कार्यकर्ता स्वागत करने आए तो नरोत्तम मिश्रा ने इनकार करते हुए कहा कि प्रत्याशी आशुतोष तिवारी पीछे हैं. उनको माला पहनाओ।

    वायरल वीडियो के अनुसार, दतिया में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा था. जनसंपर्क के दौरान एक मोड़ पर उत्साहित भाजपा कार्यकर्ता अपने चहेते नेता नरोत्तम मिश्रा का स्वागत करने के लिए फूल-मालाएं लेकर आगे बढ़े. जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मिश्रा के गले में माला डालनी चाही, नरोत्तम मिश्रा ने तुरंत उनका हाथ रोक दिया और माला पहनने से पूरी तरह मना कर दिया।


    ‘माला वाला पीछे आ रहा है…’ बोलकर प्रत्याशी को बढ़ाया आगे

    नरोत्तम मिश्रा ने न सिर्फ माला पहनने से मना किया, बल्कि वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि असली प्रत्याशी वह खुद नहीं, बल्कि उनके पीछे चल रहे आशुतोष तिवारी हैं। नरोत्तम मिश्रा ने मुस्कुराते हुए और अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में पीछे आ रहे आशुतोष तिवारी की तरफ उंगली से इशारा किया और जोर से कहा, ”माला वाला पीछे आ रहा है, उसे ही माला पहनाओ.”

    मिश्रा के इतना कहते ही वहां मौजूद सभी कार्यकर्ता और खुद प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी हंस पड़े. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़कर प्रत्याशी का फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया।


    सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?

    राजनीतिक गलियारों में नरोत्तम मिश्रा के इस कदम को बेहद सूझबूझ भरा माना जा रहा है. चुनाव के समय अक्सर बड़े नेताओं के इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो जाती है और मुख्य प्रत्याशी उपेक्षित महसूस करने लगता है. ऐसे में नरोत्तम मिश्रा ने खुद को पीछे रखकर और आशुतोष तिवारी को ‘माला वाला प्रत्याशी’ बताकर यह संदेश दिया है कि पूरी पार्टी एकजुट होकर नए उम्मीदवार को जिताने के लिए मैदान में पसीना बहा रही है. दतिया के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स से लेकर ट्विटर तक इस वीडियो को भाजपा के मजबूत टीमवर्क के रूप में शेयर किया जा रहा है।