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  • बीएसएनएल में जेटीओ भर्ती का बड़ा अवसर, 100 पदों पर आवेदन 4 जून से शुरू, इंजीनियर युवाओं के लिए सुनहरा मौका

    बीएसएनएल में जेटीओ भर्ती का बड़ा अवसर, 100 पदों पर आवेदन 4 जून से शुरू, इंजीनियर युवाओं के लिए सुनहरा मौका

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के इंजीनियरिंग युवाओं के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण रोजगार अवसर सामने आया है, जिसमें जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के 100 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को एक मजबूत अवसर प्राप्त हुआ है।

    जारी जानकारी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 4 जून की सुबह 10 बजे से शुरू होगी और उम्मीदवार 3 जुलाई की सुबह 10 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस अवधि के भीतर इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि सुधारने के लिए 4 जुलाई से 11 जुलाई तक सुधार विंडो भी उपलब्ध रहेगी, जिससे उम्मीदवार अपनी जानकारी को सही कर सकेंगे।

    इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उन उम्मीदवारों को पात्र माना गया है जिन्होंने दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत या इंस्ट्रूमेंटेशन जैसे विषयों में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की हो। इसके अलावा कंप्यूटर साइंस या इलेक्ट्रॉनिक्स में एमएससी तथा संबंधित क्षेत्रों में एमटेक करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। यह अवसर विशेष रूप से तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित बहुविकल्पीय परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम अभ्यर्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को 16,400 रुपये से 40,500 रुपये तक मासिक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो इस पद को और अधिक आकर्षक बनाता है।

    परीक्षा के आयोजन को लेकर संभावना जताई जा रही है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा अगस्त महीने में आयोजित की जा सकती है। परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 2000 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह शुल्क 1000 रुपये रखा गया है।

    इस भर्ती प्रक्रिया को सरकारी क्षेत्र में तकनीकी करियर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। देशभर के इंजीनियरिंग स्नातक इस भर्ती का लाभ उठाकर एक स्थिर और सम्मानजनक करियर की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

  • ब्लैक बॉक्स का वित्त वर्ष 2026 रहा शानदार, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और वैश्विक विस्तार से कंपनी को मिला नया उछाल

    ब्लैक बॉक्स का वित्त वर्ष 2026 रहा शानदार, रिकॉर्ड ऑर्डर बुक और वैश्विक विस्तार से कंपनी को मिला नया उछाल

    नई दिल्ली । एस्सार ग्रुप की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन दर्ज किया है, जिससे कंपनी की बाजार स्थिति और वैश्विक उपस्थिति दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कंपनी ने इस अवधि में न केवल राजस्व और लाभप्रदता में स्थिर वृद्धि दर्ज की, बल्कि अपने ऑर्डर बैकलॉग को भी एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचाकर भविष्य की मजबूत विकास संभावनाओं का संकेत दिया है।

    वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपने प्रमुख वित्तीय मानकों में निरंतर सुधार किया। बेहतर व्यावसायिक मिश्रण, मजबूत ग्राहक संबंधों और रणनीतिक अनुबंधों के चलते कंपनी की ग्रोथ स्थिर बनी रही। डेटा सेंटर, नेटवर्किंग और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुख्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने कंपनी की स्थिति को और मजबूत किया। चौथी तिमाही में भी कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन जारी रखा, जिससे पूरे वर्ष का परिणाम सकारात्मक रहा।

    कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग लगभग 792 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि ने न केवल राजस्व की स्थिरता को मजबूत किया, बल्कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भी मजबूत शुरुआत की नींव रखी है। इसी अवधि में कंपनी को वैश्विक स्तर पर कई बड़े अनुबंध प्राप्त हुए, जिनमें डेटा सेंटर सेवाएं, हवाई अड्डा परियोजनाएं और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के महत्वपूर्ण डिजिटल समाधान शामिल रहे।

    घरेलू बाजार में भी कंपनी ने दूरसंचार, बैंकिंग और एंटरप्राइज नेटवर्किंग सेक्टर में महत्वपूर्ण अनुबंध हासिल किए, जिससे इसकी घरेलू उपस्थिति और मजबूत हुई। विभिन्न क्षेत्रों में मिले नए ऑर्डरों ने कंपनी की विकास गति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, कंपनी ने ब्राजील स्थित एक टेक्नोलॉजी फर्म का अधिग्रहण कर लैटिन अमेरिका में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी पकड़ और मजबूत हुई है।

    वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को भी मजबूत किया और पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस कदम ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिरता प्रदान की और निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ। कंपनी के नेतृत्व ने इस प्रदर्शन को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग से जोड़ते हुए इसे दीर्घकालिक विकास का आधार बताया है।

    कंपनी प्रबंधन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क और एंटरप्राइज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग आने वाले वर्षों में और तेज होगी। इस बहु-वर्षीय निवेश चक्र से कंपनी को बड़े अवसर मिलने की संभावना है, जिससे उसका व्यवसाय और विस्तार करेगा।

    कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 ब्लैक बॉक्स लिमिटेड के लिए मजबूत विकास, बेहतर निष्पादन और वैश्विक विस्तार का वर्ष साबित हुआ है। ऑर्डर बुक में रिकॉर्ड वृद्धि और रणनीतिक अधिग्रहणों ने कंपनी को आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है।

  • 12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

    12 घंटे ड्यूटी फिर भी वेतन नहीं, ग्वालियर में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा


    ग्वालियर । ग्वालियर में लोगों की जान बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा खुद गंभीर बदहाली का शिकार होती नजर आ रही है। मेंटीनेंस की कमी, खराब वाहनों, डीजल संकट और कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने जैसे आरोपों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मंगलवार को 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े चालक और EMT कर्मचारी अपनी समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा रखी। कर्मचारियों ने सेवा संचालन करने वाली JASS कंपनी पर लापरवाही और व्यवस्थाओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए।

    कर्मचारियों के मुताबिक जिले में संचालित सात से आठ एम्बुलेंस लंबे समय से मेंटीनेंस के अभाव में बंद पड़ी हैं। कई वाहनों के एयर कंडीशनर खराब हैं, जिससे भीषण गर्मी में मरीजों और कर्मचारियों दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    उन्होंने बताया कि कई एम्बुलेंस की लाइटें खराब हैं और कुछ वाहन डीजल की कमी के कारण रास्ते में ही बंद हो जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनकी जान पर भी खतरा बन सकता है।

    एम्बुलेंस कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है, लेकिन इसके बावजूद समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा। वेतन में देरी और खराब कार्य परिस्थितियों से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ तो वे काम बंद करने को मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कंपनी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    इस पूरे मामले ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित कंपनी 108 एम्बुलेंस सेवा को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर मरीजों की जिंदगी पर पड़ सकता है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा

    सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमजोरी, लेकिन मिडकैप-स्मॉलकैप की रफ्तार ने निवेशकों को दिया सहारा


    नई दिल्ली । बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला और बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे बाजार की व्यापक धारणा संतुलित बनी रही।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 141 अंक से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी बेहद सीमित दायरे में रहते हुए हल्की कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। बाजार में लार्जकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने निवेशकों को कुछ राहत दी। मिडकैप इंडेक्स में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई, वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की मजबूती के साथ बंद हुआ।

    सेक्टर आधारित प्रदर्शन की बात करें तो कई क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखा गया। मीडिया, एनर्जी, मेटल, ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में तेजी रही, जिससे बाजार को सहारा मिला। इन सेक्टरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और ऑटो सेक्टर में मजबूत खरीदारी का रुझान बना रहा।

    इसके विपरीत बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। निजी बैंक और कुछ प्रमुख वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण लार्जकैप इंडेक्स पर असर पड़ा। आईटी और कंज्यूमर सेक्टर में भी मिला-जुला रुख रहा, जिससे पूरे बाजार में संतुलित लेकिन कमजोर समापन देखने को मिला।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई, जिनमें ऊर्जा, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर बैंकिंग और आईटी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। इससे सूचकांक सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा और दिन के अंत में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी ने दिन की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ की थी और शुरुआती कारोबार में यह सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहा। दिन के मध्य सत्र में यह स्तरों पर पहुंचा लेकिन ऊपरी स्तरों पर दबाव बनने के कारण मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बाद इंडेक्स में गिरावट आई और यह अंततः हल्की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए निकट भविष्य में एक अहम प्रतिरोध स्तर बना हुआ है, जबकि नीचे की ओर भी एक मजबूत सपोर्ट जोन मौजूद है। यदि बाजार में खरीदारी का रुझान बढ़ता है तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि बिकवाली बढ़ने पर इंडेक्स सीमित दायरे में रह सकता है।

    कुल मिलाकर, बुधवार का सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए मिला-जुला रहा, जहां बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप ने बाजार को संभाले रखा। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी हुई है, जहां वैश्विक संकेत और घरेलू आर्थिक डेटा बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी

    भोपाल का पानी RO से भी ज्यादा शुद्ध? मेयर मालती राय ने प्लांट में खुद पिया पानी

    भोपाल । भोपाल में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत और गंदे पानी की शिकायतों को लेकर चल रहे विवाद के बीच नगर निगम ने लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की है। इसी कड़ी में मंगलवार को भोपाल की मेयर मालती राय ने अरेरा हिल्स स्थित वॉटर फिल्ट्रेशन प्लांट का औचक निरीक्षण किया और वहां पहुंचकर खुद ट्रीटेड पानी का गिलास पीकर उसकी शुद्धता का दावा किया।

    मेयर मालती राय ने कहा कि अपर लेक से सप्लाई होने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है और यह RO से भी बेहतर गुणवत्ता का है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और निगम के जल सप्लाई सिस्टम पर भरोसा रखने की अपील की। निरीक्षण के दौरान भाजपा पार्षद रवींद्र यति और नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे।

    अधिकारियों ने मेयर को जानकारी दी कि एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में पानी के सैंपल की जांच की गई है, जिसमें पीएच लेवल, टीडीएस, टर्बिडिटी और बैक्टीरियल सेफ्टी सभी मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। नगर निगम का दावा है कि अब तक 20 हजार से अधिक पानी के सैंपल की जांच की जा चुकी है और सभी रिपोर्ट संतोषजनक रही हैं।

    हालांकि दूसरी ओर शहर में लो-प्रेशर और गंदे पानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। अधिकारियों ने माना कि बार-बार बिजली कटौती होने से पंपिंग सिस्टम प्रभावित होता है, जिसके कारण कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है। सिस्टम को दोबारा शुरू करने में समय लगने से सप्लाई प्रभावित हो रही है।

    नगर निगम के आंकड़े भी शहर की जल व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। निगम के अनुसार 1 जनवरी से अब तक 5,610 पाइपलाइन लीकेज सुधारे गए हैं। इसका मतलब है कि पिछले करीब पांच महीनों में रोज औसतन 38 पाइपलाइन लीकेज सामने आए हैं।

    इसके अलावा नगर निगम ने 15 हजार से अधिक सीवेज चैंबरों की सफाई भी कराई है ताकि जलभराव और ओवरफ्लो जैसी समस्याओं को रोका जा सके। बावजूद इसके विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट का पानी भले शुद्ध हो, लेकिन पुरानी और बार-बार टूटने वाली पाइपलाइनें घरों तक पहुंचते-पहुंचते पानी को दूषित कर सकती हैं। मेयर के इस निरीक्षण और दावे के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम पानी की गुणवत्ता के साथ वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए कितनी तेजी से काम करता है।

  • मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल

    मुरैना में हैरान करने वाला कांड, स्कूटर पर पिस्टल लोड करते समय चली गोली, दोनों घायल


    मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो युवकों ने खुद पर चली गोलियों को गैंगवार और हमले का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच और CCTV फुटेज ने पूरी सच्चाई उजागर कर दी।

    घटना मंगलवार को गर्ल्स स्कूल रोड इलाके में हुई, जब अचानक गोलियों की आवाज सुनकर इलाके में हड़कंप मच गया। स्कूटर पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और दोनों को तीन-तीन गोलियां लगीं। शुरुआत में मामला किसी आपसी रंजिश या गैंगवार जैसा दिखाई दिया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कहानी पूरी तरह बदल गई।

    पुलिस के अनुसार घायल युवकों की पहचान गोपालपुरा निवासी राहुल सिकरवार और पुराना चुंगी नाका निवासी निखिल तिवारी के रूप में हुई है। दोनों एक स्कूटर पर सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे बैठे युवक ने अपनी अवैध पिस्टल निकाली और चलते वाहन पर ही उसे लोड करने लगा।

    जांच में सामने आया कि जैसे ही स्कूटर एक स्पीड ब्रेकर से गुजरा, जोरदार झटका लगने से युवक का संतुलन बिगड़ गया और पिस्टल से लगातार कई राउंड फायर हो गए। अचानक हुई फायरिंग में दोनों युवक खुद ही गोलियों की चपेट में आ गए।

    पुलिस ने जब सड़क किनारे लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी तो पूरी घटना साफ हो गई। फुटेज में स्कूटर के झटके के बाद गोली चलने और दोनों युवकों के घायल होने की घटना कैद हो गई। इसके बाद पुलिस को समझ आ गया कि यह किसी गैंगवार का मामला नहीं बल्कि लापरवाही और अवैध हथियार के इस्तेमाल का मामला है।

    इस घटना ने एक बार फिर चंबल क्षेत्र में अवैध हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल और युवाओं में हथियारों के क्रेज को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस्तेमाल की गई पिस्टल प्रतिबंधित श्रेणी की और बेहद खतरनाक मानी जा रही है। फिलहाल दोनों घायलों का इलाज जारी है। उनकी हालत स्थिर होने के बाद पुलिस आधिकारिक बयान दर्ज करेगी। इसके बाद आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, असम में शादी, तलाक और लिव-इन नियमों में सख्त प्रावधान मंजूर

    समान नागरिक संहिता की ओर बड़ा कदम, असम में शादी, तलाक और लिव-इन नियमों में सख्त प्रावधान मंजूर


    नई दिल्ली ।
    असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी बिल के पास होने के साथ ही राज्य में पारिवारिक और विवाह संबंधी कानूनों में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना बताया गया है, हालांकि अनुसूचित जनजाति समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस कदम को राज्य में सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में एक बड़े परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर अलग-अलग वर्गों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

    नए प्रावधानों के अनुसार बहुविवाह और द्विविवाह को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है, तो उसे सात साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही विवाह को कानूनी रूप से एकविवाही व्यवस्था के तहत अनिवार्य किया गया है, जिससे एक से अधिक विवाह पर रोक सुनिश्चित की जा सके। शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की सीमा निर्धारित की गई है।

    कानून के अनुसार सभी विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यदि कोई दंपति 60 दिनों के भीतर अपने विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं कराता है, तो उस पर जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके अलावा गलत या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सख्त दंड और कारावास की सजा का भी उल्लेख किया गया है।

    लिव-इन रिलेशनशिप को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण न कराने या जानकारी छिपाने की स्थिति में जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान रखा गया है। वहीं तलाक के लिए भी समान आधार तय किए गए हैं, जिसमें क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे कारण शामिल हैं। छोटे बच्चों की कस्टडी को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की अभिरक्षा सामान्यतः माता को दी जाएगी।

    उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे को लेकर भी समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसमें पति, पत्नी, बच्चे और माता-पिता को बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। वसीयत बनाने के लिए किसी भी वयस्क व्यक्ति को गवाहों की उपस्थिति में लिखित रूप से संपत्ति का बंटवारा करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए विवाह विभिन्न रीति-रिवाजों जैसे वैदिक, निकाह और अन्य पारंपरिक तरीकों से किए जा सकते हैं।

    सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा, जबकि कुछ वर्ग इसे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में इसके प्रभाव को लेकर और चर्चाएं होने की संभावना है।

  • श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर में हड़कंप, दुकान विवाद में न्याय न मिलने पर बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट में की आत्मघाती कदम

    श्योपुर । श्योपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां शिकायतों से परेशान एक बुजुर्ग ने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    मृतक की पहचान देवेंद्र गोयल के रूप में हुई है, जो सब्जी मंडी क्षेत्र में दुकान के मालिक थे। बताया जा रहा है कि उनकी दुकान पर उनके ही परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। इस मामले को लेकर वह लंबे समय से न्याय की गुहार लगा रहे थे।

    परिजनों और जानकारी के अनुसार, देवेंद्र गोयल ने 28 फरवरी को दुकान पर कब्जे की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्होंने 2 मार्च से लेकर 26 मई तक कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे वे लगातार परेशान चल रहे थे।

    मंगलवार को वह अपनी समस्या लेकर श्योपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां जनसुनवाई चल रही थी। उस समय कलेक्टर शीला दाहिमा मौजूद नहीं थीं। डेप्युटी कलेक्टर देवेंद्र मीणा ने उनका आवेदन लिया। इसके बाद बाहर निकलते ही बुजुर्ग ने सल्फास खा लिया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

    घटना के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वह तीन बार जनसुनवाई में आ चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई।

    बताया जा रहा है कि पहले उन्होंने पुलिस में भी शिकायत दी थी, लेकिन मामला राजस्व विभाग से जुड़ा होने के कारण उन्हें वहां भेज दिया गया था। इसके बाद से वह लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, SIR को कानूनी दायरे में माना, आगे की लड़ाई लगभग समाप्त

    मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय, SIR को कानूनी दायरे में माना, आगे की लड़ाई लगभग समाप्त

    नई दिल्ली ।सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और अधिकार क्षेत्र को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसे किसी भी तरह से उसकी शक्तियों से बाहर का कदम नहीं माना जा सकता। इस निर्णय के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चल रही बहस को एक स्पष्ट दिशा मिलती दिखाई दे रही है। अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण को मनमाना या असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता, बशर्ते वह निर्धारित कानूनी ढांचे के भीतर किया गया हो।

    अदालत ने अपने विस्तृत रुख में यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी नागरिक को मतदाता सूची से अनुचित रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि सूची में केवल पात्र और वैध मतदाताओं को शामिल करना है। यह भी कहा गया कि दस्तावेजों की जांच और उनकी विश्वसनीयता के आधार पर नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय लेना आयोग की प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। अदालत ने यह भी माना कि इस प्रक्रिया को नागरिकता तय करने के प्रयास के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह अधिकार संविधान और कानून के तहत किसी अन्य प्राधिकरण के पास होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया किसी भी मौजूदा कानून का उल्लंघन नहीं करती है। अदालत ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व से जुड़े कानून और संविधान के प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची को अद्यतन और सही करने का पूरा अधिकार प्राप्त है। इस निर्णय के माध्यम से अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि विशेष परिस्थितियों में व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण की आवश्यकता पड़ सकती है और इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि यह प्रक्रिया कानूनी सीमाओं के भीतर हो।

    इस फैसले के बाद याचिकाकर्ताओं के सामने कानूनी रूप से सीमित विकल्प बचे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है, जिसमें अदालत से अपने ही निर्णय पर पुनः विचार करने की मांग की जाती है। इसके अलावा एक अंतिम विकल्प के रूप में क्यूरेटिव याचिका भी दायर की जा सकती है, जो बेहद सीमित परिस्थितियों में स्वीकार की जाती है। हालांकि इन दोनों विकल्पों में सफलता की संभावना को लेकर कानूनी जानकार बहुत अधिक उम्मीद नहीं जताते।

    कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने चुनाव आयोग की भूमिका को और स्पष्ट कर दिया है तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को संवैधानिक वैधता प्रदान कर दी है। अब यह मामला लगभग अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां आगे की कानूनी लड़ाई केवल सीमित दायरों में ही संभव रह गई है।

  • मध्यप्रदेश में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: E-5 हाथी को मिला सहारा, तनाव में था हिंसक व्यवहार

    मध्यप्रदेश में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: E-5 हाथी को मिला सहारा, तनाव में था हिंसक व्यवहार


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल और अनूपपुर वन क्षेत्र में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बना जंगली हाथी E-5 आखिरकार वन विभाग की टीम द्वारा सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इस हाथी पर तीन ग्रामीणों की मौत और कई मवेशियों व घरों को नुकसान पहुंचाने के आरोप थे, जिसके चलते इसे अत्यंत खतरनाक माना जा रहा था।

    लेकिन इस पूरे ऑपरेशन में जो बात सामने आई, उसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, E-5 वास्तव में स्वभाव से हिंसक नहीं था, बल्कि अपने झुंड से अलग हो जाने के कारण लंबे समय से अकेलेपन और तनाव में था। माना जा रहा है कि इसी मानसिक स्थिति ने उसके व्यवहार को आक्रामक बना दिया था।

    रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित पालतू हाथी रामा को मैदान में उतारा गया। आमतौर पर जंगली हाथी अन्य हाथियों या इंसानों के संपर्क में आने पर आक्रामक हो जाते हैं, लेकिन E-5 ने रामा को देखते ही अलग व्यवहार दिखाया। वह शांत हुआ और धीरे-धीरे उसके करीब आने लगा। विशेषज्ञों ने इसे सामाजिक जुड़ाव की तलाश के रूप में देखा।

    वन विभाग की टीम ने इससे पहले 22 मई को हाथी को काबू में करने की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास असफल रहा था। उस दौरान E-5 ने पिंजरा और GPS कॉलर तक तोड़ दिया था। इसके बाद रणनीति बदली गई और रातों-रात एक नया प्लान तैयार किया गया।

    मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. समिता राजौरा के नेतृत्व में अगले चरण में पालतू हाथियों और माहूतों की मदद से उसे सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर पहनाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ रेंज में शिफ्ट किया गया।

    अब E-5 को अन्य हाथियों के झुंड के करीब रखा गया है, ताकि वह दोबारा सामाजिक वातावरण में लौट सके और सामान्य जीवन जी सके। यह पूरा मामला वन्यजीव व्यवहार और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक नई समझ भी सामने लाता है।