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  • भोपाल में IPS अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या , घर में फांसी लगाकर दी जान

    भोपाल में IPS अधिकारी की बेटी ने की आत्महत्या , घर में फांसी लगाकर दी जान


    भोपाल । भोपाल में एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक IPS अधिकारी की नाबालिग बेटी ने आत्महत्या कर ली। यह घटना हबीबगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत पॉश इलाके चार इमली की बताई जा रही है, जहां छात्रा ने अपने घर पर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी।

    जानकारी के अनुसार मृतिका 12वीं कक्षा की छात्रा थी और अपने परिवार के साथ रहती थी। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और तत्काल हबीबगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मृतिका की पहचान IPS अधिकारी संजीव कंचन की बेटी के रूप में हुई है, जो वर्तमान में पुलिस मुख्यालय PHQ में AIG के पद पर पदस्थ हैं। इस घटना के बाद परिवार और आसपास के लोगों में गहरा शोक फैल गया है।

    पुलिस को शुरुआती जांच में मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हर एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    जांच के तहत पुलिस मृतिका के मोबाइल फोन को खंगाल रही है, साथ ही उसके संपर्कों और हाल की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही इस पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल इस घटना ने पूरे शहर में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती 2026 के तहत प्रधान आरक्षक कंप्यूटर और सहायक उप निरीक्षक कंप्यूटर के कुल 89 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की घोषणा कर दी गई है। चयनित उम्मीदवारों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 7 से 9 जून तक आयोजित की जाएगी।

    यह फिजिकल टेस्ट भोपाल के लाल परेड ग्राउंड और जबलपुर के परेड ग्राउंड तथा 6वीं वाहिनी विसबल रांझी में संपन्न होगा। इस चरण में अभ्यर्थियों की 800 मीटर दौड़ सहित शारीरिक दक्षता से जुड़े अन्य परीक्षण किए जाएंगे। इसके साथ ही दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

    सहायक पुलिस महानिरीक्षक चयन एवं भर्ती गोपाल सिंह धाकड़ ने जानकारी दी कि ऑनलाइन परीक्षा के बाद अगले चरण के लिए सूचना पत्र जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपना सूचना पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अभ्यर्थियों को तय तारीख और स्थान पर ही उपस्थित होना अनिवार्य होगा और इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

    भर्ती प्रक्रिया के दौरान आधार e-KYC का सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड साथ लाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आधार नंबर लॉक न हो। इसके बिना सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा दस्तावेज परीक्षण के लिए अभ्यर्थियों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्र और उनकी स्वयं प्रमाणित छायाप्रति साथ लाना जरूरी होगा।

    गौरतलब है कि इस भर्ती के लिए परीक्षा 24 और 25 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 8 मई 2026 को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जारी किया जा चुका है। अब चयनित उम्मीदवार शारीरिक दक्षता परीक्षा के अगले चरण में शामिल होंगे, जो अंतिम चयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • योग कार्यक्रम में चूक से विवाद , खजुराहो में VIP एंट्री पर NO ENTRY लिखने से मचा बवाल

    योग कार्यक्रम में चूक से विवाद , खजुराहो में VIP एंट्री पर NO ENTRY लिखने से मचा बवाल


    खजुराहो । खजुराहो में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के काउंटडाउन के तहत आयोजित योग महोत्सव के दौरान उस समय बड़ी लापरवाही सामने आ गई जब कार्यक्रम स्थल पर VIP एंट्री गेट पर ही नो एंट्री का बैनर लगा दिया गया। यह घटना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI विभाग की ओर से की गई व्यवस्था में गंभीर चूक मानी जा रही है, जिसे लेकर मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई।

    यह पूरा मामला खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध पश्चिमी समूह मंदिर परिसर का है, जहां योग महोत्सव के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। इसी परिसर में VIP प्रवेश के लिए बनाए गए गेट पर अचानक NO ENTRY का बैनर नजर आया, जो कैमरों में कैद हो गया। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ गई और तुरंत आनन फानन में बैनर को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। स्थिति को संभालने के लिए उस बैनर को लाल कपड़े से ढक दिया गया और उसे वहां से हटा दिया गया।

    दिलचस्प बात यह रही कि इसी VIP गेट से बाद में केंद्रीय आयुष मंत्री प्रताप जाधव योग महोत्सव में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम Yoga for Healthy Aging थीम पर आधारित था और इसका उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना था। लेकिन आयोजन से पहले हुई इस गलती ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

    कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष मंत्री के अलावा प्रदेश के आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, सांसद वी.डी. शर्मा और राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से इस आयोजन से जुड़े।

    इसी कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने आयुष क्षेत्र के विस्तार और विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी साझा कीं। बताया गया कि राज्य में पिछले ढाई वर्षों में 9 नए आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी महाविद्यालय शुरू किए गए हैं, जो स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    इसके साथ ही खजुराहो में 15 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का हाईटेक आयुष वेलनेस सेंटर स्थापित करने की योजना भी सामने आई है। यह सेंटर न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए उपयोगी होगा बल्कि स्थानीय लोगों को भी आधुनिक आयुष सुविधाएं प्रदान करेगा।

    पर्यटन मंत्री ने कहा कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर ऐसे वेलनेस सेंटर एमपीटी के सहयोग से विकसित किए जा रहे हैं। पूरे मामले में जहां एक ओर आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे, वहीं दूसरी ओर आयुष और योग के विस्तार को लेकर सरकार ने अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

  • व्रत-त्योहारों का विशेष संगम बनेगा जून 2026, निर्जला एकादशी और कामाख्या अंबुबाची मेला रहेंगे मुख्य आकर्षण

    व्रत-त्योहारों का विशेष संगम बनेगा जून 2026, निर्जला एकादशी और कामाख्या अंबुबाची मेला रहेंगे मुख्य आकर्षण

    नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत, पर्व और धार्मिक आयोजन एक साथ देखने को मिलेंगे। पूरे महीने श्रद्धालुओं के लिए उपवास, पूजा-पाठ और तीर्थ से जुड़े अवसरों की श्रृंखला रहेगी, जिससे यह अवधि भक्ति और परंपरा का विशेष संगम बन जाएगी। इस महीने का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कई ऐसे व्रत और पर्व शामिल हैं जिनका पालन देशभर में बड़ी आस्था के साथ किया जाता है।

    जून की शुरुआत से ही विभिन्न मासिक व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो जाएगा। श्रद्धालु इस दौरान उपवास रखकर भगवान की आराधना करेंगे और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। महीने के मध्य में एकादशी, प्रदोष व्रत और अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्वों का संयोग देखने को मिलेगा, जिन्हें हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इन अवसरों पर भक्तगण आध्यात्मिक शुद्धि और मन की शांति के लिए विशेष साधना करते हैं।

    मध्य जून में ज्येष्ठ मास से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहेगा, जिसमें दान-पुण्य और व्रत का पालन प्रमुख रूप से किया जाता है। इस अवधि में विभिन्न देवताओं की आराधना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मचिंतन और साधना का माना जाता है, जिसमें लोग अपने जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का प्रयास करते हैं।

    जून 2026 का सबसे महत्वपूर्ण व्रत निर्जला एकादशी रहेगा, जिसे वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में से एक माना जाता है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

    इसी महीने असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में प्रसिद्ध अंबुबाची मेला भी आयोजित होगा, जो शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मेला 22 जून से 26 जून तक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान देवी कामाख्या का वार्षिक रजस्वला काल माना जाता है, जिसके चलते मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और बाद में विशेष पूजा के साथ पुनः दर्शन शुरू होते हैं। यह आयोजन तांत्रिक साधना और शक्ति आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है।

    महीने के अंत में वट पूर्णिमा व्रत और शनि प्रदोष जैसे कई अन्य धार्मिक पर्व भी मनाए जाएंगे, जिनका विशेष महत्व परिवारिक सुख-समृद्धि और आस्था से जुड़ा होता है। वट पूर्णिमा विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला व्रत है, जिसमें वे वट वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती हैं। इस दौरान मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना का माहौल रहता है।

    इस प्रकार जून 2026 का पूरा महीना धार्मिक गतिविधियों, व्रत-त्योहारों और आध्यात्मिक आयोजनों से परिपूर्ण रहेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था, परंपरा और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

  • उज्जैन में ई-साइकिल वितरण CM मोहन यादव ने ,PM मोदी के 12 साल पूरे होने पर की तारीफ

    उज्जैन में ई-साइकिल वितरण CM मोहन यादव ने ,PM मोदी के 12 साल पूरे होने पर की तारीफ


    उज्जैन । उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इलेक्ट्रिक साइकिल की सौगात दी। यह ई-साइकिलें कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व निधि के तहत एक कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई गई हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

    मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी क्योंकि इससे उनके रोजमर्रा के कामकाज में सुविधा बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च भी कम होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में ई-साइकिल एक बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर सामने आई है, जो कामकाज को सरल और सुलभ बनाएगी।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से आई बहनों को यह ई-साइकिल उनके फील्ड वर्क में काफी मदद करेगी। उन्होंने इस पहल को महिला सशक्तिकरण और आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में देश ने सुशासन और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं और भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति कर रहा है और आने वाले समय में यह गति और तेज होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि वे बाबा महाकाल से प्रार्थना करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी तरह देश की सेवा करते रहें और देश को आगे बढ़ाते रहें। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

  • राजस्थान के मांगणियार मुस्लिम कलाकारों की कृष्ण भक्ति परंपरा ने संगीत जगत में रचा सांस्कृतिक एकता का अनोखा अध्याय

    राजस्थान के मांगणियार मुस्लिम कलाकारों की कृष्ण भक्ति परंपरा ने संगीत जगत में रचा सांस्कृतिक एकता का अनोखा अध्याय

    नई दिल्ली । राजस्थान की लोकसंगीत परंपरा में मांगणियार समुदाय का नाम विशेष सम्मान और सांस्कृतिक गौरव के साथ लिया जाता है। यह समुदाय सदियों से अपनी अनोखी संगीत साधना और पारंपरिक गायन शैली के लिए जाना जाता है, जिसने उन्हें न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई है। इन कलाकारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनकी संगीत यात्रा की शुरुआत धार्मिक सीमाओं से परे जाकर कृष्ण भजनों और मीराबाई के पदों से होती है, जो भारतीय संस्कृति की गहरी एकता और समरसता को दर्शाती है।

    मांगणियार समुदाय राजस्थान के उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा है जहां लोकसंस्कृति और दरबारी परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। ऐतिहासिक रूप से ये कलाकार राजपूत शासकों और जमींदार परिवारों के संरक्षण में रहते हुए दरबारी संगीतकार के रूप में अपनी सेवाएं देते थे। उस दौर में अधिकांश संरक्षक परिवार कृष्ण भक्ति से जुड़े थे, जिसके कारण सुबह के समय भजन गायन की परंपरा विकसित हुई। यह परंपरा समय के साथ केवल एक धार्मिक अभ्यास न रहकर एक सांस्कृतिक पहचान बन गई और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही।

    आज भी यह परंपरा जीवित है जहां मांगणियार कलाकार अपने दैनिक अभ्यास की शुरुआत पारंपरिक रीति से करते हैं। वे अपने वाद्य यंत्रों के साथ जब रियाज शुरू करते हैं, तो सबसे पहले कृष्ण भक्ति और मीरा के पदों की गूंज सुनाई देती है। यह अभ्यास केवल संगीत की तैयारी नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन भी माना जाता है, जो उनकी गायकी को गहराई और आत्मीयता प्रदान करता है। इसी परंपरा ने राजस्थान के लोकसंगीत को एक ऐसा स्वरूप दिया है जो धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानी भावनाओं को जोड़ता है।

    मांगणियार कलाकारों की यह संगीत परंपरा समय के साथ व्यापक मंचों तक पहुंची है। लोकधुनों और पारंपरिक गायकी की यह शैली अब फिल्मी संगीत और आधुनिक प्रस्तुतियों में भी अपनी जगह बना चुकी है। इस समुदाय के कई कलाकारों ने अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान बनाई है। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी की सादगी, लोकधुनों की गहराई और सांस्कृतिक विरासत की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    इस परंपरा की सबसे बड़ी ताकत इसकी पीढ़ीगत शिक्षा प्रणाली है, जिसमें बच्चे बचपन से ही संगीत की बारीकियां सीखना शुरू कर देते हैं। घरों में ही उन्हें राग, ताल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की शिक्षा दी जाती है, जिससे उनकी कला में स्वाभाविक निखार आता है। यह निरंतर अभ्यास और पारिवारिक परंपरा ही उनकी गायकी को विशिष्ट बनाती है और उसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    आज मांगणियार संगीत केवल एक क्षेत्रीय परंपरा नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। कृष्ण भजनों से शुरू होकर आधुनिक मंचों तक पहुंचने वाली यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि संगीत न केवल कला है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और एकता का संदेश देने का भी माध्यम है।

  • रणवीर सिंह के डॉन-3 से बाहर होने पर बढ़ा विवाद, FWICE ने स्पष्ट किया- यह बैन नहीं बल्कि असहयोग नोटिस

    रणवीर सिंह के डॉन-3 से बाहर होने पर बढ़ा विवाद, FWICE ने स्पष्ट किया- यह बैन नहीं बल्कि असहयोग नोटिस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के फिल्म डॉन-3 से जुड़े विवाद ने फिल्म इंडस्ट्री में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अभिनेता के अचानक प्रोजेक्ट से बाहर होने की खबर सामने आने के बाद जहां सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, वहीं अब फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। संस्था की ओर से कहा गया है कि रणवीर सिंह पर किसी प्रकार का बैन नहीं लगाया गया है और उनके खिलाफ चल रही खबरें गलत और भ्रामक हैं।

    संस्था के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने बयान जारी करते हुए कहा कि FWICE कोई न्यायिक संस्था नहीं है और न ही यह किसी कलाकार पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार रखती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से केवल असहयोग नोटिस जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि मौजूदा परिस्थितियों में सदस्यों को संबंधित अभिनेता के साथ काम करने से फिलहाल परहेज करने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई स्थायी फैसला नहीं है और परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव संभव है।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब रणवीर सिंह के डॉन-3 से अचानक अलग होने की खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि फिल्म से जुड़े कई प्री-प्रोडक्शन कार्य पूरे हो चुके थे और बड़े स्तर पर शूटिंग की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। ऐसे में अभिनेता के प्रोजेक्ट छोड़ने के फैसले ने निर्माताओं और पूरी टीम को असमंजस की स्थिति में डाल दिया। इस बदलाव के कारण आर्थिक और प्रोडक्शन स्तर पर असर पड़ने की बात भी सामने आई है, जिससे इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है।

    FWICE ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस तरह की परिस्थितियां फिल्म निर्माण प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती हैं। बड़े बजट की फिल्मों में जब प्रमुख कलाकार अचानक किसी प्रोजेक्ट से हटते हैं तो इसका असर केवल फिल्म तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे कई विभागों की योजनाएं प्रभावित होती हैं। संस्था ने इसे उद्योग के लिए संवेदनशील मुद्दा बताया है और संतुलित समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    संस्था ने यह भी दावा किया कि इस मामले को लेकर रणवीर सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर अभिनेता की टीम ने इस मुद्दे को FWICE के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। इसके बावजूद संगठन का कहना है कि बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं और आपसी समझौते की संभावना बनी हुई है।

    बॉलीवुड में अनुबंध और पेशेवर प्रतिबद्धता को हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि बड़े प्रोजेक्ट्स में कई स्तरों पर निवेश और तैयारी शामिल होती है। ऐसे में किसी भी बड़े बदलाव का असर पूरी टीम पर पड़ता है। यही कारण है कि यह मामला केवल एक फिल्म से जुड़ा विवाद न रहकर इंडस्ट्री स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में यह विवाद सुलझता है या और आगे बढ़ता है।

  • गंगा दशहरा पर नीलगंगा पहुंचे CM मोहन यादव संतों संग किया पूजन, सिंहस्थ को लेकर बड़ा बयान

    गंगा दशहरा पर नीलगंगा पहुंचे CM मोहन यादव संतों संग किया पूजन, सिंहस्थ को लेकर बड़ा बयान


    उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था का विशेष संगम देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नीलगंगा आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने विधि विधान से मां गंगा की प्रतिमा का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने नीलगंगा सरोवर में गुप्त गंगा के दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

    नीलगंगा घाट पर इस अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। संतों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्ति रस में डुबो दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 का आयोजन ऐतिहासिक होगा, जिसमें पूरी दुनिया सनातन संस्कृति की भव्यता और उज्जैन की दिव्यता का साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि शिप्रा के घाटों पर परंपरा और संतों की भावना के अनुरूप भव्य आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं।

    इस धार्मिक आयोजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज, अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज और नारायण गिरि महाराज सहित कई प्रमुख संत उपस्थित रहे। संतों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या मौजूद रही, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

    नीलगंगा आश्रम स्थित गंगा सरोवर के विकास और सौंदर्यीकरण कार्य भी इस समय तेजी से जारी हैं। करीब 4 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से यहां घाटों का पुनर्निर्माण, परिक्रमा पथ और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। संतों ने इन विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और इसे धार्मिक स्थलों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    इस मौके पर हरि गिरि महाराज ने कहा कि उज्जैन में विकास कार्य उम्मीदों से कहीं आगे बढ़कर हो रहे हैं। उन्होंने शिप्रा नदी पर बन रहे 29 किलोमीटर लंबे घाटों का उल्लेख करते हुए इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी।

    कार्यक्रम के अंत में जूना अखाड़ा के वरिष्ठ संतों ने मुख्यमंत्री का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने भी सभी संतों से आशीर्वाद लिया और प्रदेश के विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए संकल्प दोहराया।

  • बॉलीवुड के ‘मैं तेरा’ गानों का जादू बरकरार, रोमांस से लेकर मस्ती तक हर दौर में बना दर्शकों की पहली पसंद

    बॉलीवुड के ‘मैं तेरा’ गानों का जादू बरकरार, रोमांस से लेकर मस्ती तक हर दौर में बना दर्शकों की पहली पसंद


    नई दिल्ली । सहित पूरे देश में बॉलीवुड संगीत की लोकप्रियता समय के साथ लगातार बदलती रही है, लेकिन कुछ शब्द ऐसे हैं जिन्होंने हर दौर में अपनी खास पहचान बनाए रखी है। इन्हीं में से एक है ‘मैं तेरा’, जो सिर्फ एक वाक्यांश नहीं बल्कि हिंदी फिल्म संगीत में भावनाओं, रिश्तों और मनोरंजन की एक पूरी श्रृंखला का प्रतीक बन चुका है। 90 के दशक से लेकर आज तक इस थीम पर आधारित कई गाने अलग-अलग अंदाज में सामने आए और दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने में सफल रहे। इन गीतों की खासियत यह रही कि हर बार इनका अंदाज नया रहा, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव हमेशा बरकरार रहा।

    बॉलीवुड के शुरुआती दौर में ‘मैं तेरा’ जैसी पंक्तियों पर आधारित गीतों ने हल्के-फुल्के रोमांस और मस्ती भरे संगीत को दर्शकों तक पहुंचाया। उस समय के गानों में सरल शब्दों और आकर्षक धुनों का प्रयोग किया जाता था, जिससे वे आसानी से लोगों की जुबान पर चढ़ जाते थे। धीरे-धीरे जैसे फिल्मी संगीत ने आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाया, वैसे ही इन शब्दों का उपयोग भी अधिक विविध और रचनात्मक रूप में होने लगा। यह बदलाव न केवल संगीत की शैली में दिखा, बल्कि गीतों के विषय और प्रस्तुति में भी स्पष्ट रूप से नजर आया।

    समय के साथ जब युवा दर्शकों की पसंद बदली तो ‘मैं तेरा’ थीम पर आधारित गानों में भी तेज म्यूजिक, पार्टी वाइब और आधुनिक लिरिक्स का समावेश हुआ। इन गानों ने न केवल रोमांस को नए अंदाज में पेश किया बल्कि दोस्ती, जुनून और मनोरंजन के रंगों को भी साथ जोड़ा। कुछ गीतों ने प्रेम और समर्पण को केंद्र में रखा, तो कुछ ने हल्के-फुल्के मजाकिया अंदाज में रिश्तों की गहराई को दिखाया। इसी विविधता के कारण ये गाने हर पीढ़ी के दर्शकों के बीच लोकप्रिय होते चले गए।

    फिल्मी दुनिया में जब डिजिटल युग की शुरुआत हुई, तब इन गानों की लोकप्रियता और भी बढ़ गई। सोशल प्लेटफॉर्म और म्यूजिक प्लेलिस्ट के दौर में ‘मैं तेरा’ जैसे गानों को नई पहचान मिली और ये युवाओं के बीच ट्रेंड करने लगे। इन गीतों की खास बात यह रही कि इनमें इस्तेमाल होने वाले शब्द सरल होने के बावजूद भावनात्मक रूप से बहुत प्रभावशाली थे, जिससे लोग आसानी से उनसे जुड़ पाते थे।

    आज भी जब पुराने और नए बॉलीवुड संगीत की बात होती है तो ‘मैं तेरा’ थीम पर आधारित गीतों को विशेष रूप से याद किया जाता है। ये गाने केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहे, बल्कि प्रेम, अपनापन और रिश्तों की गहराई को व्यक्त करने का एक मजबूत माध्यम भी बने हैं। समय बदलने के बावजूद इन गीतों की लोकप्रियता यह साबित करती है कि सरल और भावनात्मक शब्द हमेशा दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखते हैं और लंबे समय तक संगीत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ते हैं।

  • छोटे कद पर तानों ने तोड़ी रिश्ते की डोर, दो साल बाद मंगेतर ने छोड़ा साथ, पहली बार छलका अब्दू रोजिक का दर्द

    छोटे कद पर तानों ने तोड़ी रिश्ते की डोर, दो साल बाद मंगेतर ने छोड़ा साथ, पहली बार छलका अब्दू रोजिक का दर्द

    नई दिल्ली । लोकप्रिय सिंगर और टीवी स्टार अब्दू रोजिक ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी के उस दर्दनाक अध्याय का खुलासा किया है, जिसने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। अपनी पहचान, लोकप्रियता और सफलता के बावजूद अब्दू को निजी रिश्तों में ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें लंबे समय तक मानसिक तनाव और अकेलेपन में धकेल दिया। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी टूटी सगाई और उससे जुड़े भावनात्मक संघर्षों को लेकर खुलकर बातचीत की।

    अब्दू रोजिक ने बताया कि उनकी सगाई लगभग दो वर्षों तक चली, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां इतनी कठिन होती गईं कि रिश्ता टूटने की नौबत आ गई। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके छोटे कद और बीमारी को लेकर लगातार होने वाली टिप्पणियों और सामाजिक तानों का असर केवल उन पर ही नहीं, बल्कि उनकी मंगेतर पर भी पड़ा। समय के साथ यह दबाव इतना बढ़ गया कि दोनों के रिश्ते में दूरियां आने लगीं।

    उन्होंने कहा कि लोगों की सोच और समाज का रवैया कई बार किसी इंसान की निजी जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर देता है। अब्दू के मुताबिक, उनकी मंगेतर लगातार इस बात से परेशान रहने लगी थीं कि लोग उनके रिश्ते को लेकर मजाक बनाते थे। सार्वजनिक जीवन में रहने के कारण यह स्थिति और ज्यादा कठिन हो गई थी। हर जगह होने वाली चर्चा, ट्रोलिंग और व्यक्तिगत टिप्पणियों ने रिश्ते की मजबूती को कमजोर कर दिया। आखिरकार दोनों ने अलग होने का फैसला लिया।

    अब्दू ने यह भी स्वीकार किया कि सगाई टूटने के बाद वह मानसिक रूप से काफी टूट गए थे। उन्होंने लंबे समय तक खुद को अकेला महसूस किया और डिप्रेशन जैसी स्थिति से गुजरना पड़ा। हालांकि उन्होंने अपने परिवार और करीबी लोगों के सहयोग से धीरे-धीरे खुद को संभाला। उन्होंने कहा कि जिंदगी में सफलता मिलने के बावजूद इंसान भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ सकता है और रिश्तों का टूटना किसी भी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोग अक्सर किसी व्यक्ति के बाहरी रूप या शारीरिक स्थिति को देखकर राय बना लेते हैं, जबकि असली संघर्ष और दर्द को समझने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं। अब्दू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज को संवेदनशील होने की जरूरत है, क्योंकि मजाक और ताने कई बार किसी व्यक्ति के आत्मविश्वास और निजी जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

    अब्दू रोजिक की यह कहानी केवल एक सेलिब्रिटी के टूटे रिश्ते की नहीं, बल्कि उन लोगों की भावनाओं को भी सामने लाती है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि प्यार और रिश्तों में सबसे ज्यादा जरूरी समझ, सम्मान और भावनात्मक सहयोग होता है। यदि समाज बाहरी चीजों के बजाय इंसानियत को महत्व दे, तो कई रिश्ते टूटने से बच सकते हैं।

    अपने संघर्षों के बावजूद अब्दू ने सकारात्मक सोच बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कठिन समय इंसान को मजबूत बनाता है और अब वह अपने करियर तथा भविष्य पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। उनकी इस भावुक कहानी ने उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया है और कई लोग सोशल मीडिया पर उनके साहस और ईमानदारी की सराहना कर रहे हैं।