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  • मिशन-2027: भाजपा ने यूपी में बूथवार माइक्रोमैनेजमेंट का खाका खींचा, तावड़े के मंत्र पर बनेगी रणनीति

    मिशन-2027: भाजपा ने यूपी में बूथवार माइक्रोमैनेजमेंट का खाका खींचा, तावड़े के मंत्र पर बनेगी रणनीति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी का फोकस अब बूथवार संगठन को मजबूत करने के साथ मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने पर है। दो दिवसीय यूपी दौरे पर आए भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर संगठन और जनसंपर्क मजबूत करने का जो मंत्र दिया, उसी के आधार पर माइक्रोमैनेजमेंट की रणनीति तैयार की जाएगी।

    पार्टी हर बूथ का अलग सामाजिक प्रोफाइल तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इसमें बूथ पर अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों की हिस्सेदारी, पार्टी के मजबूत आधार वाले वर्ग और उन समुदायों की पहचान की जाएगी, जहां संगठन को अपनी पहुंच बढ़ाने की जरूरत है। इस आकलन के बाद संबंधित जातियों और सामाजिक समूहों के बीच संपर्क के लिए अलग-अलग टीमें बनाई जाएंगी।

    जिस समाज की जिम्मेदारी, उसी के कार्यकर्ता करेंगे संपर्क

    भाजपा की रणनीति में सबसे अहम पहलू यह है कि किसी समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए उसी समाज के पार्टी कार्यकर्ताओं को आगे किया जाएगा। ये कार्यकर्ता अपने-अपने सामाजिक समूह के लोगों से घर-घर जाकर संवाद करेंगे। संपर्क के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ, स्थानीय विकास कार्य और सरकार की उपलब्धियां बताई जाएंगी। इसके साथ ही विपक्ष की ओर से किए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार का जवाब भी लोगों के बीच देने की तैयारी है।

    सिर्फ प्रचार नहीं, लोगों की राय भी संगठन तक पहुंचेगी

    भाजपा के बूथ अभियान में फीडबैक को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। कार्यकर्ता घर-घर संपर्क के दौरान केवल सरकार की उपलब्धियां बताने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्थानीय समस्याओं, जनता के मुद्दों और सरकार को लेकर लोगों की राय भी जानेंगे। यह जानकारी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

    इस फीडबैक के आधार पर बूथ स्तर पर पार्टी की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जहां संगठन कमजोर दिखाई देगा, वहां समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने और अतिरिक्त जनसंपर्क गतिविधियां चलाने की योजना है।

    विपक्ष के नैरेटिव का जवाब बूथ से देने की तैयारी

    पार्टी का जोर चुनावी नैरेटिव को केवल सोशल मीडिया या बड़े राजनीतिक मंचों तक सीमित रखने के बजाय सीधे मतदाताओं तक पहुंचाने पर है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों से जुड़े तथ्य उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जा सके।

    प्रदेश संगठन रखेगा हर बूथ की निगरानी
    पूरे अभियान की मॉनिटरिंग प्रदेश संगठन करेगा। बूथवार टीमों की सक्रियता, घर-घर संपर्क और जनता से मिले फीडबैक की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिन इलाकों में संगठन की गतिविधियां कमजोर मिलेंगी, वहां अतिरिक्त संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इस तरह भाजपा मिशन-2027 के लिए अपनी पुरानी ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ रणनीति को सामाजिक संपर्क और फीडबैक सिस्टम के साथ जोड़कर जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी में है।

  • राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठन को पुराने तौर-तरीकों से बाहर निकालकर युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब केवल राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय नेताओं के संगठनात्मक काम, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। इस प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया के तहत नेताओं को 10-10 के समूह में इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है।

    इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल कर रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नेताओं के कामकाज और उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का विस्तृत कामकाजी रिपोर्ट कार्ड पहले से ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है।

    कांग्रेस राष्ट्रीय सचिवों की मौजूदा टीम में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना मौजूदा 60 फीसदी से अधिक सचिवों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की है। कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राष्ट्रीय संगठन में बड़ी संख्या में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों के आने की संभावना है।

    चयन प्रक्रिया में ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर चुके नेताओं को विशेष प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहता है, जिन्होंने संगठन के साथ सीधे जमीन पर काम किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को करीब से समझा है।

    राहुल गांधी लंबे समय से कांग्रेस में युवा नेतृत्व और प्रतिभा आधारित चयन की पैरवी करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में इंटरव्यू आधारित चयन की प्रक्रिया इसी सोच का हिस्सा रही है। अब प्रदेश और जिला स्तर पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद राष्ट्रीय संगठन में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

    कांग्रेस का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से आने वाले ऐसे नेताओं की टीम तैयार करना है, जो सक्रिय हों, संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों और जमीनी स्तर पर काम का अनुभव रखते हों। राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    करीब दो दशक से राहुल गांधी कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम के चयन की मौजूदा प्रक्रिया को उनके इसी ‘जनरेशन चेंज’ अभियान को संगठनात्मक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने और कामकाज के तरीके में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।

  • सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन नस्लीय टिप्पणियों पर पीएम लॉरेंस वोंग ने कार्रवाई की चेतावनी दी

    नई दिल्ली ।सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन की जा रही नस्लीय और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने कहा है कि किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह को स्वीकार्य या सामान्य बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणियों को केवल सामान्य ऑनलाइन बातचीत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    प्रधानमंत्री वोंग ने रविवार, 6 सितंबर को यह टिप्पणी नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर भारतीयों के खिलाफ सामने आईं नफरत भरी टिप्पणियों के संदर्भ में की। इस बाढ़ के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली टिप्पणियों की लहर देखने को मिली थी। नेपाल में आई इस बाढ़ में नौ सिंगापुरी नागरिक लापता हुए थे।

    सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के विचार पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नस्लीय पूर्वाग्रह से जुड़ी टिप्पणियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि ऐसी बयानबाजी को बिना रोक-टोक जारी रहने देने से नस्लीय पूर्वाग्रह धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन सकता है।

    गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस को भारतीय समुदाय के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। षणमुगम के अनुसार, हाल के दिनों में सिंगापुर में भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों में बढ़ोतरी देखी गई है।

    भारतीय मूल के गृह मंत्री ने इन टिप्पणियों को शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस नस्लीय और विदेशी-विरोधी टिप्पणियों की जांच कर रही है। सरकार का रुख है कि ऐसी बयानबाजी को बिना कार्रवाई के आगे बढ़ने देना समाज में नस्लीय पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकता है।

    प्रधानमंत्री वोंग ने कहा कि सिंगापुर में अलग-अलग मुद्दों पर मजबूत बहस हो सकती है और लोगों को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है। लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह या विदेशियों के प्रति दुश्मनी फैलाने के लिए वैध तर्कों की आड़ नहीं ली जानी चाहिए।

    सिंगापुर एक बहुसांस्कृतिक देश है और ऐसे माहौल में सरकार ने नस्लीय सद्भाव को लेकर चिंता जताई है। भारतीय समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर सामने आई टिप्पणियों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सरकार की ओर से पुलिस जांच के निर्देश दिए जाने के बाद ऑनलाइन की जा रही आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियों पर निगरानी बढ़ने की बात सामने आई है।

    मामले को लेकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत या पूर्वाग्रह को सामान्य व्यवहार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री वोंग ने यह भी कहा कि सिंगापुर में होने वाली बहस और असहमति को किसी समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण या विदेशियों के प्रति शत्रुतापूर्ण बयानबाजी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन टिप्पणियों की जांच पुलिस कर रही है। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया है कि नस्लीय और विदेशी-विरोधी बयानबाजी को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामने आए इस विवाद ने सिंगापुर में नस्लीय पूर्वाग्रह और सामाजिक सद्भाव से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।

  • BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    नई दिल्ली । में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत अहम हो सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है और उनके साथ बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। ऐसे में भारत चीन से आने वाली हाईटेक वस्तुओं के आयात में आ रही अड़चनों और चीन में भारतीय कंपनियों के निवेश से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा उठा सकता है।

    भारत सरकार की ओर से चीनी तकनीक और महत्वपूर्ण सामान के आयात से जुड़ी परेशानियों पर उद्योग संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार ने चीन की ओर से प्रमुख तकनीकी उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी अध्ययन किया है। भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

    चीन की ओर से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें इंगट और वेफर तकनीक, बैटरी सेल और उससे जुड़ी तकनीक, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC उपकरण तथा कुछ विशेष ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स शामिल हैं। HVDC तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है और इससे ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। यह रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और बिजली व्यवस्था को स्थिर रखने में भी उपयोगी मानी जाती है।

    भारत की चिंता यह है कि महत्वपूर्ण तकनीक और कच्चे माल की आपूर्ति में लगातार अड़चनें आने से घरेलू विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। इससे बैकवर्ड इंटीग्रेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। भारत बातचीत के दौरान प्रक्रियागत बाधाओं और सोर्सिंग से जुड़े नियमों में राहत के साथ पारस्परिकता का मुद्दा उठा सकता है, यानी दोनों देशों की कंपनियों को समान स्तर की सुविधा मिले।

    हालांकि भारत-चीन व्यापार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में चीन को भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 28 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5.55 अरब डॉलर हो गया। अमेरिकी टैरिफ के कारण कुछ क्षेत्रों में निर्यात प्रभावित होने के बीच चीन को बढ़े निर्यात ने भारत को कुछ राहत दी।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के महीनों में कुछ नरमी भी दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली, नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू होना और लोगों के बीच संपर्क बढ़ना इसी बदलाव के संकेत हैं। इसके अलावा, लैंड बॉर्डर साझा करने वाले देशों से FDI से जुड़े नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।

    बिजली क्षेत्र में भी भारत ने चीन के साथ कुछ मामलों में नियमों में ढील दी है। मार्च में सरकारी बिजली उपकरण कंपनी BHEL को चीन से 21 महत्वपूर्ण वस्तुओं की खरीद पांच साल तक करने की अनुमति दी गई। जून में भारत में कारखाने रखने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडरों में भाग लेने की अनुमति मिली।

    2020 में LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी खरीद और निवेश से जुड़े नियम कड़े किए गए थे। अब कुछ क्षेत्रों में सीमित राहत से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यावहारिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन भारत-चीन के बीच इन आर्थिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत का अवसर बन सकता है। भारत की प्राथमिकता हाईटेक सामान और जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति आसान कराने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में निवेश का माहौल बेहतर करना हो सकती है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

  • भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद, दो से चार महीने बाद यात्रियों के लिए सेवा शुरू

    भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद, दो से चार महीने बाद यात्रियों के लिए सेवा शुरू


    नई दिल्ली ।
    भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई और जून के बीच शुरू होने की उम्मीद है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परीक्षण शुरू होने के बाद करीब दो से चार महीने तक ट्रेन की टेस्टिंग की जाएगी और इसके बाद इसे आम यात्रियों के लिए खोलने की तैयारी होगी।

    वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि हाई स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में तैयार हुआ है। इसे आगे की परीक्षण प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल मई या जून तक भारत की अपनी बुलेट ट्रेन परीक्षण के लिए पटरियों पर उतर जाएगी।

    रेल मंत्री के अनुसार, करीब दो से चार महीने की टेस्टिंग के बाद बुलेट ट्रेन के उद्घाटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत तैयार की जा रही है। इसके शुरू होने से मुंबई और वडोदरा के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

    वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन से वडोदरा से मुंबई का सफर करीब डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण कार्य की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस कॉरिडोर पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सूरत-वापी सेक्शन के इसी साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।

    रेल मंत्री ने रेलवे क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के ऑपरेटिंग सिस्टम, रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े पुराने नियमों को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य रेलवे की कार्यप्रणाली और सेवाओं को समय के साथ बेहतर बनाना है।

    उन्होंने कहा कि ऑपरेटिंग सिस्टम और रिजर्वेशन सिस्टम से लेकर पुराने कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल तक विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वैष्णव ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में रेलवे के कई लंबे समय से अटके हुए प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं।

    रेल मंत्री ने चेनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाले रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में 280 रेलवे स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया है और 36,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं।

    वैष्णव के अनुसार, रेलवे में वंदे भारत तकनीक वाली कार्गो ट्रेनें भी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आई चुनौतियों के बावजूद रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार तेज रही है।

    उन्होंने बताया कि 2020 में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन पूरा होने के बाद अगले सेक्शन के निर्माण कार्य में तेजी लाई गई। सरकार की ओर से रेलवे के आधुनिकीकरण और नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे का आधुनिक स्वरूप तैयार होने से आने वाली कई पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा। बुलेट ट्रेन परियोजना के परीक्षण और आगे यात्रियों के लिए सेवा शुरू होने से भारत के हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ने की उम्मीद है।

  • भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया

    भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया


    नई दिल्ली ।
    भारत और अफगानिस्तान के बीच आगामी क्रिकेट सीरीज से पहले जारी एक प्रमोशनल वीडियो को लेकर पाकिस्तान में नाराजगी सामने आई है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के इस वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया गया, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा दर्शाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह प्रमोशनल वीडियो साझा किया था। इसमें भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली आगामी सीरीज को लेकर उत्साह दिखाने की कोशिश की गई। हालांकि वीडियो में इस्तेमाल किए गए नक्शे को लेकर पाकिस्तान में विवाद खड़ा हो गया।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार झड़प और गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान पर यह आरोप भी लगाया जाता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमलों के लिए किया जाता है। अफगानिस्तान इन आरोपों को लेकर अलग रुख रखता है।

    ऐसे माहौल में अफगान क्रिकेट बोर्ड के वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया जाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई है। हालांकि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    भारत और अफगानिस्तान के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच क्रिकेट के साथ आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में भी संपर्क बना हुआ है। भारत और तालिबान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थिति अलग होने के बावजूद दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग के रास्ते खुले हुए हैं। भारत अफगानिस्तान में आर्थिक विकास से जुड़े प्रयासों में भी सहयोग करता रहा है।

    जानकारों के अनुसार, अफगानिस्तान के इस कदम को उसकी स्वतंत्र विदेश नीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश के बीच अफगानिस्तान पाकिस्तान की आपत्तियों से अलग अपनी प्राथमिकताएं दिखाना चाहता है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने वीडियो के साथ जारी संदेश में भारत और अफगानिस्तान की आगामी सीरीज को दोनों देशों के बीच संबंधों से जोड़ते हुए उत्साह व्यक्त किया। बोर्ड के अनुसार, यह सीरीज दोनों देशों को करीब लाने वाली है और दोनों देशों के साझा इतिहास तथा संस्कृति से भी जुड़ी है।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की यह सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जानी है। सीरीज को लेकर दोनों देशों के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्सुकता है।

    इसी बीच भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसमें सीमा शुल्क और डेटा साझा करने से जुड़े सहयोग को बढ़ाना, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि क्षेत्र में नियामक सहयोग, व्यापार संपर्क बेहतर करना तथा निवेश और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।

    इस पूरे घटनाक्रम में क्रिकेट सीरीज के प्रचार के लिए जारी एक वीडियो ने भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल विवाद का केंद्र वीडियो में दिखाया गया नक्शा और उस पर पाकिस्तान की आपत्ति है।

  • कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा

    कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को बेंगलुरु में स्विगी इंस्टामार्ट के एक डार्क स्टोर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक्सपायर हो चुके खाने-पीने के सामान और दवाओं के भंडारण तथा बिक्री के खिलाफ राज्य में तेज किए गए अभियान का हिस्सा थी। बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग तथा औषधि सुरक्षा विभाग की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, डार्क स्टोर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    इस कार्रवाई के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने लोगों से सामान खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजें और दवाइयां खरीदने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए। ग्राहकों को किसी उत्पाद में संदिग्ध स्थिति नजर आने पर उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देने की भी अपील की गई है।

    बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में पूरे कर्नाटक में करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त की गई हैं। जब्त किए गए सामान में एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट और दवाइयां भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ऐसे उत्पाद कथित तौर पर बिक्री के लिए स्टोर किए गए थे, जिन पर नए लेबल लगाए गए थे।

    खादर ने ग्राहकों से खाना, दवाइयां और अन्य उत्पाद खरीदते समय उनकी जानकारी अच्छी तरह जांचने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद में कोई छोटा सुराग या संदिग्ध बात दिखाई देती है तो उसकी रिपोर्ट करने की अपील की गई है।

    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्राहकों को उत्पादों की जांच करने में सहायता देने के लिए क्यूआर कोड और बारकोड की व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने सोशल एक्टिविस्ट से भी अपील की कि सार्वजनिक स्थानों पर इस व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि ग्राहक इसका इस्तेमाल कर सकें और उत्पादों के संबंध में अधिक जागरूक हो सकें।

    खादर के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक एक्सपायर हो चुके तथा गलत लेबल वाले खाद्य उत्पाद और दवाइयां पहुंचने से रोकने के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने इस प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्पादों की जांच के साथ संदिग्ध सामान की पहचान और उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने होसकोटे में हुई जांच का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को वहां डार्क स्टोर्स पर करीब 45 लाख रुपये मूल्य की दवाइयां मिलीं। उनके अनुसार, कुछ उत्पादों के लेबल बदले गए थे। इन उत्पादों को अधिकारियों ने अपनी कस्टडी में ले लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

    राज्य में चल रही कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राहकों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया गया है। अधिकारियों की जांच में सामने आए एक्सपायर और गलत लेबल वाले उत्पादों को लेकर लोगों से खरीदारी के समय जानकारी जांचने और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना देने की अपील की गई है। कर्नाटक सरकार की ओर से क्यूआर कोड और बारकोड के जरिए उत्पादों की जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • ट्रंप के ‘चांद हमारा है’ दावे के बीच जानिए अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश या व्यक्ति को चंद्रमा की जमीन क्यों नहीं देता

    ट्रंप के ‘चांद हमारा है’ दावे के बीच जानिए अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश या व्यक्ति को चंद्रमा की जमीन क्यों नहीं देता

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चांद को लेकर दिए गए बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चांद पर किसका अधिकार है। ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया पर चांद की तस्वीर साझा की, जिस पर ‘चंद्रमा हमारा है’ लिखा था और अमेरिकी झंडा भी दिखाई दे रहा था। इसके साथ ही चांद की जमीन खरीदने और उसके प्रमाणपत्र देने के दावे भी चर्चा में हैं।

    चांद पर जमीन खरीदने के दावे लंबे समय से सामने आते रहे हैं। कई लोग जन्मदिन, शादी या अन्य खास मौकों पर चांद की जमीन उपहार में देने की बात कहते हैं। कुछ संस्थाएं चांद की जमीन के नाम पर प्रमाणपत्र और दस्तावेज भी बेचती हैं। हालांकि इन दस्तावेजों से चांद की जमीन पर वास्तविक कानूनी मालिकाना हक हासिल नहीं होता।

    चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का प्रमुख आधार 1967 की अंतरिक्ष संधि है। इस संधि में भारत और अमेरिका समेत 114 देश शामिल हैं। संधि के अनुसार बाहरी अंतरिक्ष की खोज और उसका इस्तेमाल सभी देशों के लाभ और हित में होना चाहिए। चांद और दूसरे खगोलीय पिंड भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

    संधि का अनुच्छेद 2 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार बाहरी अंतरिक्ष, जिसमें चांद और अन्य खगोलीय पिंड शामिल हैं, किसी देश के राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र में नहीं आ सकते। कोई देश संप्रभुता, कब्जे या किसी अन्य तरीके से चांद के किसी हिस्से को अपना राष्ट्रीय क्षेत्र घोषित नहीं कर सकता। इसलिए किसी देश का चांद पर राष्ट्रीय स्वामित्व का दावा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप नहीं है।

    हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि देश चांद पर मिशन नहीं भेज सकते। अंतरिक्ष संधि सभी देशों को अंतरिक्ष और खगोलीय पिंडों की खोज तथा इस्तेमाल की स्वतंत्रता देती है। वैज्ञानिक अनुसंधान भी किया जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

    चांद पर पहुंचने वाले यान और उपकरणों को लेकर भी संधि में अलग व्यवस्था है। अनुच्छेद 8 के अनुसार किसी देश के पंजीकरण में दर्ज अंतरिक्ष वस्तु पर उस देश का अधिकार और नियंत्रण बना रहता है। चांद पर उतरने के बाद भी किसी यान या उपकरण का स्वामित्व केवल इसलिए खत्म नहीं होता कि वह खगोलीय पिंड पर मौजूद है। लेकिन इससे चांद की जमीन पर उस देश का मालिकाना हक नहीं बनता।

    निजी कंपनियों के लिए भी नियम स्पष्ट हैं। अनुच्छेद 6 के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी संबंधित देश की होती है। निजी संस्थाओं को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए संबंधित देश की अनुमति और लगातार निगरानी व्यवस्था के तहत काम करना होता है।

    चांद पर जमीन बेचने के दावे भी कई दशकों से होते रहे हैं। जर्मनी के नागरिक मार्टिन जुर्गेंस ने चांद को अपने परिवार की संपत्ति बताया था। बाद में अमेरिकी कारोबारी डेनिस होप ने लूनर एंबेसी नाम की संस्था के जरिए चांद की जमीन बेचने का दावा किया और लोगों को प्रमाणपत्र देने शुरू किए।

    ऐसे प्रमाणपत्र कुछ लोग मनोरंजन, कल्पना या उपहार के तौर पर खरीदते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून में निजी व्यक्तियों या कंपनियों के लिए चांद की जमीन के मालिकाना हक का कोई मान्य पंजीकरण तंत्र नहीं है। इसलिए इन प्रमाणपत्रों को कानूनी संपत्ति अधिकार नहीं माना जाता।

    चांद पर गतिविधियों से होने वाले नुकसान को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय नियम मौजूद हैं। अनुच्छेद 7 के अनुसार अंतरिक्ष वस्तुओं से दूसरे देशों या उनके लोगों को नुकसान होने की स्थिति में लॉन्च करने वाले देश की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बन सकती है। अनुच्छेद 9 देशों को ऐसी गतिविधियों से बचने और दूसरे देशों के हितों का ध्यान रखने की बात कहता है।

    चांद तक पहुंचने में सोवियत संघ, अमेरिका, जापान, यूरोप, भारत और चीन समेत कई देशों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत के चंद्रयान-1 और चंद्रयान-3 जैसे मिशनों ने चंद्रमा के अध्ययन में योगदान दिया है। अमेरिका के अपोलो मिशनों ने इंसानों को चांद की सतह तक पहुंचाया, जबकि हाल के वर्षों में सरकारी और निजी मिशनों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं।

    इसलिए चांद पर यान भेजना, वैज्ञानिक उपकरण स्थापित करना या शोध करना और चांद की जमीन का मालिक बनना अलग-अलग बातें हैं। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियम किसी देश को चांद पर संप्रभुता स्थापित करने की अनुमति नहीं देते और जमीन खरीदने के प्रमाणपत्र भी वास्तविक कानूनी मालिकाना हक प्रदान नहीं करते।

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी रही। कारोबार के अंत में निफ्टी 50 में 0.61 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    एनएसई निफ्टी 50 मंगलवार को 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत टूटकर 75,577 के स्तर पर पहुंच गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली।

    निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 0.12 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। यानी प्रमुख बेंचमार्क में दबाव रहने के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित तेजी बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे अधिक कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.93 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

    दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों ने बाजार में मजबूती बनाए रखने का काम किया। निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 1.31 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी फार्मा 0.77 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.63 प्रतिशत बढ़ा। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में भी बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अप्रैल में मिडकैप और मार्च में स्मॉलकैप शेयरों के 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इन दोनों सेगमेंट ने करीब 20 से 30 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है। इस तेजी के पीछे घरेलू निवेश में सुधार और कम कीमत पर बेहतर शेयरों की खरीदारी को प्रमुख कारण बताया गया।

    एक्सपर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आर्थिक मंदी, ऊंची महंगाई और व्यापार शुल्क जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों की कमाई को लेकर बनी चिंताओं में कमी आई थी। वहीं पहली तिमाही के नतीजों से कॉरपोरेट कमाई में सुधार के संकेत भी मिले हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से कमाई में सुधार की उम्मीदों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रह सकती है, लेकिन बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक निवेशकों के लिए कुछ मुनाफा बुक करना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

    पिछले पांच-छह महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। रणनीतिक नजरिए से लार्जकैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर अधिक ध्यान देना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बताया गया है। सेक्टर के स्तर पर हेल्थकेयर, टेलीकॉम और एफएमसीजी पर ध्यान देने की बात कही गई है।

  • अमेरिका में सत्यनारायण पूजा करवाना क्यों पड़ता है महंगा, पंडित की फीस से लेकर मंदिर और पूजा सामग्री तक जानें पूरा खर्च

    अमेरिका में सत्यनारायण पूजा करवाना क्यों पड़ता है महंगा, पंडित की फीस से लेकर मंदिर और पूजा सामग्री तक जानें पूरा खर्च

    नई दिल्ली । भारत में सत्यनारायण भगवान की कथा या पूजा करवाना आम बात है। खास मौकों, गृह प्रवेश, शादी के बाद, नामकरण या नए कारोबार की शुरुआत जैसे अवसरों पर लोग अपने घर में पंडित को बुलाकर पूजा करवाते हैं। पूजा की सामग्री जुटाने से लेकर पंडित की व्यवस्था तक ज्यादातर काम आसानी से हो जाता है। लेकिन अमेरिका में यही पूजा करवाना काफी महंगा और मेहनत वाला काम हो सकता है।

    भारत में सत्यनारायण पूजा सामान्य तौर पर कुछ हजार रुपये में हो जाती है। छोटे शहरों और गांवों में इसका खर्च करीब दो से पांच हजार रुपये तक हो सकता है, जबकि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में भी करीब 15 से 20 हजार रुपये में पूजा करवाई जा सकती है। इसके मुकाबले अमेरिका में इसी पूजा का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है।

    अमेरिका में सत्यनारायण पूजा के लिए पंडित की फीस 300 डॉलर या उससे अधिक हो सकती है। भारत की तरह वहां हर शहर, कस्बे या इलाके में आसानी से पंडित उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में कई दिन पहले बुकिंग करानी पड़ सकती है। पंडित अगर किसी दूसरे शहर या दूर की जगह से आ रहे हैं तो उनके आने-जाने का खर्च भी यजमान को उठाना पड़ सकता है।

    दूरी के हिसाब से पंडित के आने-जाने का खर्च करीब 50 डॉलर से लेकर 100 या 150 डॉलर तक हो सकता है। यानी पूजा के शुरुआती खर्च में ही पंडित की फीस के साथ यात्रा का खर्च जुड़ जाता है।

    अगर कोई व्यक्ति अपने घर या ऑफिस की जगह मंदिर में सत्यनारायण पूजा करवाना चाहता है, तो वहां भी पहले से बुकिंग करानी पड़ सकती है। मंदिर में पूजा करवाने के लिए अलग से शुल्क देना पड़ सकता है, जो करीब 100 से 150 डॉलर तक बताया गया है। इसके बाद पूजा सामग्री का खर्च सामने आता है।

    अमेरिका में भारत की तुलना में पूजा सामग्री हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती। फल, फूल, प्रसाद, कलश, पान, सुपारी और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी चीजों के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ सकती है। कुछ सामग्री की कीमत भी भारत के मुकाबले अधिक हो सकती है। केले का पत्ता तक वहां महंगा मिल सकता है।

    प्रसाद की व्यवस्था भी खर्च बढ़ा सकती है। यदि घर पर प्रसाद बनाया जाए तो अलग बात है, लेकिन बाहर से ऑर्डर करने पर अतिरिक्त पैसा खर्च होता है। इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद अमेरिका में सत्यनारायण पूजा का कुल खर्च 1000 डॉलर यानी करीब एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है।

    भारत में पूजा के खर्च में पंडित की फीस करीब 1100 से 5100 रुपये, पूजा सामग्री 500 से 2000 रुपये, ताजे फल 500 से 2000 रुपये, पंचामृत और प्रसाद 500 से 1000 रुपये तथा मुख्य प्रसाद के लिए करीब 300 से 1500 रुपये तक खर्च हो सकता है। हालांकि, जगह और आयोजन के स्तर के अनुसार यह रकम कम या ज्यादा हो सकती है।

    अमेरिका हो या भारत, यदि पूजा बड़े स्तर पर आयोजित की जाए तो सजावट, मेहमानों की संख्या और भोजन जैसी व्यवस्थाओं से खर्च कई गुना बढ़ सकता है। अमेरिका में भारतीय त्योहारों के दौरान पंडितों की मांग बढ़ने से फीस भी अधिक हो सकती है। नवरात्र, दिवाली, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर मांग बढ़ने के कारण पूजा से जुड़ा कुल खर्च और बढ़ सकता है।