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  • उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    नई दिल्ली । भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों के साथ असम की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना के बाद 9 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव की अधिसूचना 9 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव के तहत तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट और पश्चिम बंगाल की रेजीनगर तथा नंदीग्राम विधानसभा सीट भी इस चुनाव में शामिल हैं। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव की पूरी प्रक्रिया 11 अक्टूबर 2026 से पहले पूरी कर ली जाएगी।

    उपचुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित जिलों में चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने मतदाता सूची को लेकर भी जानकारी दी है। उसके मुताबिक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित आवेदन नामांकन की समयसीमा से कम से कम 10 दिन पहले प्राप्त हो जाएं।

    मतदान के दौरान एपिक कार्ड मुख्य पहचान दस्तावेज बना रहेगा। इसके साथ मतदाता आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड और पासपोर्ट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपेट के जरिए मतदान कराया जाएगा।

    असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के कारण हो रहा है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जबकि नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    तमिलनाडु की मदुरांतकम विधानसभा सीट मरागथम कुमारवेल के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। वहीं धारापुरम विधानसभा सीट पी. सत्यबामा के इस्तीफे के चलते रिक्त हुई। इन दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 23 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की गई थी। अब निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी रिक्त सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 9 अक्टूबर को परिणाम सामने आएंगे।

    नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी और 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने का कार्यक्रम तय किया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है और मतदान के लिए ईवीएम तथा वीवीपेट का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नोरा फतेही के ‘खिलौना विमान’ कमेंट पर विवाद गहराया, विमानन कंपनी ने 3 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा किया

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री और डांसर नोरा फतेही एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। इस बार मामला पिछले साल दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान चार्टर्ड विमान को लेकर की गई उनकी सोशल मीडिया टिप्पणी से जुड़ा है। विमानन कंपनी ड्यून्स एविएशन ने नोरा फतेही के खिलाफ गांधीनगर की अदालत में तीन करोड़ रुपये की मानहानि का सिविल मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि अभिनेत्री की टिप्पणियों से उसकी छवि और कारोबार को नुकसान पहुंचा।

    मुकदमे के मुताबिक, दिसंबर में मुंबई से जयपुर की यात्रा के दौरान नोरा फतेही ने सेसना सिटेशन CJ2 विमान के अंदर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने विमान को छोटा और खिलौने जैसा बताया था। उन्होंने विमान की तुलना लेगो से भी की थी। बाद में यह वीडियो उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया गया, जिसके बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई।

    ड्यून्स एविएशन का दावा है कि नोरा फतेही के बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होने के कारण उनकी टिप्पणी का कंपनी की छवि पर सीधा प्रभाव पड़ा। कंपनी के मुताबिक, अभिनेत्री की टिप्पणियों के बाद लोगों के बीच विमान को लेकर गलत धारणा बनी और इसका असर उसके कारोबार पर भी पड़ा।

    कंपनी ने अदालत में दावा किया है कि उसकी बुकिंग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आई। इसके साथ ही रद्द होने वाली बुकिंग की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। ड्यून्स एविएशन ने नोरा की टिप्पणियों को लापरवाह और गैरजिम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया कि ये बातें किसी तकनीकी जानकारी, जांच या तथ्यों के आधार पर नहीं कही गई थीं।

    विमान की सुरक्षा को लेकर भी कंपनी ने अपना पक्ष अदालत के सामने रखा है। ड्यून्स एविएशन के मुताबिक जिस विमान पर नोरा ने टिप्पणी की थी, वह असुरक्षित या गैरकानूनी नहीं था। कंपनी का कहना है कि विमान निर्धारित मानकों के अनुरूप है और उड़ान के लिए पूरी तरह उपयुक्त था।

    कंपनी ने यह भी दावा किया है कि विमान नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए से प्रमाणित था और वैध एनएसओपी के तहत कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था। ड्यून्स एविएशन का कहना है कि नोरा की टिप्पणियों के कारण उसकी प्रतिष्ठा, गुडविल और कारोबार को गंभीर नुकसान पहुंचा।

    इस मामले में कंपनी ने नोरा फतेही से तीन करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इसके अलावा अदालत से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो हटाने का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है। कंपनी ने अभिनेत्री से सार्वजनिक रूप से सफाई देने की मांग भी की है।

    मामले की सुनवाई गांधीनगर की सीनियर सिविल जज आर. अग्रवाल की अदालत में 25 सितंबर को होगी। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और कंपनी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इसलिए नोरा फतेही की टिप्पणी और उससे कंपनी को हुए कथित नुकसान को लेकर कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    नई दिल्ली । केरल के त्रिशूर में शनिवार को पलियक्कारा टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लाइन करीब दो किलोमीटर से अधिक तक पहुंच गई थी। इसी दौरान त्रिशूर के सांसद और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी इस जाम में फंस गए। वह त्रिशूर से एर्नाकुलम की ओर जा रहे थे। शाम करीब 5:45 बजे उनका काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था।

    जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मंत्री के काफिले को वहां से आगे निकाल दिया। इसके बाद सुरेश गोपी ने पलियक्कारा टोल प्लाजा के सभी 12 गेट खोलने का आदेश दिया। उनका कहना था कि सड़क पर इतनी लंबी कतार देखकर लोगों को हो रही परेशानी पर ध्यान देना जरूरी था। इसी वजह से उन्होंने तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।

    सुरेश गोपी ने बताया कि जब उन्होंने सड़क पर वाहनों की लंबी लाइन देखी तो उन्हें लगा कि इस स्थिति में कुछ कदम उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं तो इससे ईंधन की खपत होती है और धुआं भी निकलता है। ऐसे हालात में टोल गेट खोलकर वाहनों को आगे जाने देना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सभी 12 गेट खोलने का निर्देश दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को जाम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि वहां तैनात कर्मचारी अपना काम कर रहे थे और टोल लेना उनकी जिम्मेदारी है। हालांकि, जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचते हैं तो टोल लेने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इस वजह से सड़क पर वाहनों की कतार बढ़ने लगती है और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सुरेश गोपी ने आगे कहा कि ऐसे दिनों में जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से लोगों को जाम की परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यातायात की स्थिति को संभालने के लिए इस तरह के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

    इस बीच जाम के दौरान पुलिस द्वारा मंत्री के काफिले को आगे निकालने पर कुछ वाहन चालक नाराज भी हुए। सुरेश गोपी ने माना कि कई लोगों को उनका काफिला आगे जाता देखकर गुस्सा आया था। उन्होंने कहा कि कुछ वाहन चालक उन्हें आगे निकलते देखकर नाराज नजर आए। हालांकि, बाद में जब टोल प्लाजा के गेट खोले गए और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो स्थिति में सुधार होने लगा और लोगों को राहत मिली।

    पुलिस के मुताबिक, करीब 30 मिनट के भीतर टोल प्लाजा के दोनों तरफ यातायात की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी। वाहनों की लंबी कतार कम होने लगी और गाड़ियां आगे बढ़ने लगीं। इसके बाद सुरेश गोपी भी वहां से आगे रवाना हो गए।

    पूरी घटना के दौरान सुरेश गोपी ने लंबे समय से जाम में फंसे वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए टोल प्लाजा के सभी गेट खोलने का निर्देश दिया। उन्होंने टोल कर्मचारियों को दोषी नहीं माना और कहा कि बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचने पर टोल प्रक्रिया में समय लगना जाम की वजह बन सकता है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के बीच समन्वय की जरूरत बताई।

  • राहुल रॉय का बदला दौर: कभी फिल्मों की लगी रहती थी लाइन, अब शादी में डांस कर 2 से 4 लाख रुपये कमाकर चला रहे खर्च

    राहुल रॉय का बदला दौर: कभी फिल्मों की लगी रहती थी लाइन, अब शादी में डांस कर 2 से 4 लाख रुपये कमाकर चला रहे खर्च

    नई दिल्ली । फिल्म इंडस्ट्री में समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी जिस अभिनेता के पास फिल्मों की लाइन लगी रहती है और लाखों प्रशंसक उसके दीवाने होते हैं, उसे आगे चलकर काम के लिए संघर्ष भी करना पड़ सकता है। अभिनेता राहुल रॉय की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। ‘आशिकी’ से रातोंरात लोकप्रिय हुए राहुल रॉय आज अपने करियर को दोबारा खड़ा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।

    राहुल रॉय ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उनके सामने कई मुश्किलें आईं। खासतौर पर ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनके लिए काम करना और दोबारा इंडस्ट्री में सक्रिय होना आसान नहीं रहा। पिछले साल उनका एक शादी समारोह में परफॉर्म करते हुए वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, लेकिन राहुल का कहना है कि लोग उनकी परिस्थितियों और मेहनत को नहीं समझते।

    राहुल रॉय ने अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए बताया कि वह 60 साल की उम्र में फिर से अपना साम्राज्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने भाई के साथ चल रहे एक कानूनी मामले का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक यह करीब 30 लाख रुपये का मामला है, जिसे वह और उनके भाई सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तलाक के समय उन्होंने अपनी संपत्ति पत्नी के नाम कर दी थी और अब वह जिंदगी को नए सिरे से व्यवस्थित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    अभिनेता ने कहा कि पिछले पांच साल उनके लिए एक तरह का ब्रेक रहे। इस दौरान वह अपनी सेहत को सुधारने पर ध्यान दे रहे थे और उनके पास ज्यादा काम नहीं था। उनका कहना है कि अगर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं आती तो वह इस दौरान और अधिक काम कर रहे होते। अब उन्हें कुछ काम मिलना शुरू हुआ है और वह आगे ज्यादा से ज्यादा काम करना चाहते हैं।

    राहुल ने बताया कि लंबे समय बाद सेट पर वापस लौटकर कैमरे का सामना करना उनके लिए बेहद खास अनुभव था। उन्होंने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उन पर भरोसा किया। अभिनेता के मुताबिक फिल्मों में उनकी 37 साल की यात्रा रही है और उन्होंने इस दौरान अच्छा काम किया है। अब वह अपने करियर में आगे और काम करना चाहते हैं।

    शादी समारोहों में परफॉर्म करने को लेकर राहुल ने साफ कहा कि उन्हें अपने खर्चे चलाने के लिए पैसे की जरूरत है। ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनके लिए काम मिलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में वह जो भी काम मिल रहा है, उसे करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कभी शादी में डांस करके उन्हें दो लाख रुपये मिलते हैं तो कभी चार लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

    राहुल का कहना है कि उन्हें ट्रोल करने वाले लोग यह नहीं जानते कि शादी में परफॉर्म करना भी उनके लिए मेहनत का काम है। उन्हें अपने खर्चे खुद उठाने हैं और इसके लिए वह किसी भी ईमानदार काम को छोटा नहीं मानते।

    राहुल ने यह भी बताया कि मुश्किल दौर में इंडस्ट्री के कई लोगों ने उनका साथ दिया। उन्होंने सलमान खान, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, फराह खान, अर्चना पूरन सिंह और पूजा भट्ट का नाम लिया। उनके मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक के बाद सलमान खान ने उनकी दवाइयों का खर्च उठाने में मदद की थी। राहुल ने ‘आशिकी’ से जुड़े कलाकारों अनु अग्रवाल, दीपक तिजोरी और अवतार गिल के साथ-साथ महेश भट्ट का भी आभार जताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उन्हें और काम मिलेगा और वह फिर से अपने अभिनय करियर को आगे बढ़ा सकेंगे।

  • इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन का बड़ा असर: गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद मरीजों की बढ़ी परेशानी

    इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन का बड़ा असर: गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद मरीजों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने अस्पताल की कई सेवाओं से दूरी बना ली है। हालात यहां तक पहुंच गए कि इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हुईं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा। अचानक सेवाओं के प्रभावित होने से अस्पताल परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और काम के मुकाबले काफी कम है। डॉक्टरों का तर्क है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पताल में नियमित रूप से मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है। ओपीडी से लेकर वार्ड और इमरजेंसी तक अलग अलग जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इसी मांग को लेकर डॉक्टरों ने काम बंद आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

    प्रदर्शन के बीच गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन में भी हलचल बढ़ गई। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए किसी भी तरह की देरी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में डॉक्टरों के काम से अलग होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई। कई लोग इलाज और चिकित्सकीय सलाह के लिए अस्पताल पहुंचे लेकिन सेवाओं के प्रभावित होने से उन्हें इंतजार करना पड़ा।

    मामले की जानकारी डीन डॉ. झारोकर मालवीय ने दी। उन्होंने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन और सेवाओं के प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। डॉक्टरों की मांगों को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर बातचीत का दौर भी चल रहा है। हालांकि आंदोलनकारी डॉक्टर अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं और इसी वजह से विरोध लगातार जारी है।

    इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों तक बात पहुंचा चुके हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से अब आंदोलन खत्म नहीं होगा। डॉक्टर स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी के साथ अपनी दूसरी मांगों पर भी ठोस कार्रवाई चाहते हैं। जब तक उन्हें संतोषजनक फैसला नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।

    गांधी मेडिकल कॉलेज में सेवाओं के प्रभावित होने का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल लंबी खिंचने पर मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है। अस्पताल प्रबंधन के सामने चुनौती यह है कि आंदोलन के बीच जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को किस तरह सुचारू रखा जाए।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन भी स्थिति को संभालने और मरीजों को जरूरी उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं। अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो गांधी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट और गहरा सकता है।

  • वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज

    वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में जेन-जी युवाओं के साथ करीब 25 मिनट तक संवाद किया। कार्यक्रम में करीब छह हजार युवाओं को शामिल किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं से झूठे दावों और भ्रामक बातों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग झूठ की गूंज के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनके इस बयान को राहुल गांधी और कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज के तौर पर देखा गया।

    युवाओं के बीच पहुंचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर खास तौर पर Y आकार का रैंप तैयार किया गया था। भाषण से पहले प्रधानमंत्री इसी रैंप पर चलते हुए युवाओं के बीच पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही क्वीन का लोकप्रिय गीत ‘वी विल रॉक यू’ बजाया गया। इसके बाद फिल्म ‘धुरंधर’ का गीत ‘आरी आरी’ भी सुनाई दिया। कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने प्रधानमंत्री को तस्वीर भेंट की, जबकि युवाओं ने मोबाइल फोन से उनका वीडियो भी बनाया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा बताया। उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब अलग ट्रैक की व्यवस्था से माल परिवहन को गति मिली है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं।

    उन्होंने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से डबल कंटेनर मालगाड़ी के संचालन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे एक बार में 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल मुंबई से वडोदरा पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रकों से सामान पहुंचाने में करीब 30 घंटे लग सकते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए यह दूरी करीब 10 घंटे में पूरी हो सकती है।

    फ्रेट कॉरिडोर के इतिहास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर 2004 में विचार शुरू हुआ था और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई थी। उनके अनुसार, 2014 तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक जाती रहीं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने परियोजना को गति दी और करीब 2,000 किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया।

    प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत को सुपरपावर बनाने के लिए पूरे इकोसिस्टम की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ युवाओं की स्किल ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

    जेन-जी से संवाद को लेकर प्रधानमंत्री पिछले कुछ समय से युवाओं के बीच सक्रिय नजर आए हैं। जुलाई में उन्होंने सेल्फी वीडियो के जरिए युवाओं से संवाद किया था। इसके बाद उन्होंने युवाओं के सुझावों पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया के अनौपचारिक अंदाज में भी उनसे जुड़ने की कोशिश की। अगस्त में मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ समय बिताने और सरकारी स्कूलों का दौरा करने का निर्देश दिया गया था।

    देश की राजनीति में जेन-जी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 18 से 29 वर्ष आयु के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी। ऐसे में भाजपा, कांग्रेस और आरएसएस तीनों ही युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के वडोदरा कार्यक्रम में इसी व्यापक प्रयास की झलक दिखाई दी।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।

  • राजेश शर्मा की तबीयत बिगड़ने पर बड़ा खुलासा, एक्टर ने जहरीले कीड़े के काटने की खबर को बताया झूठ, डायबिटीज को बताया असली वजह

    राजेश शर्मा की तबीयत बिगड़ने पर बड़ा खुलासा, एक्टर ने जहरीले कीड़े के काटने की खबर को बताया झूठ, डायबिटीज को बताया असली वजह


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता राजेश शर्मा ने अपनी सेहत को लेकर चल रही खबरों पर सफाई दी है। कुछ समय पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि शूटिंग के दौरान उन्हें किसी जहरीले कीड़े ने काट लिया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अब अभिनेता ने खुद इन खबरों को गलत बताया है और अपनी तबीयत खराब होने की असली वजह बताई है।

    राजेश शर्मा ने बताया कि उनके सीधे पैर में लंबे समय से त्वचा से जुड़ी समस्या चल रही थी। बाद में वहां संक्रमण हो गया, जिसके कारण उन्हें इलाज कराना पड़ा। अभिनेता के मुताबिक उनका इलाज अब पूरा हो चुका है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह एक-दो सप्ताह में दोबारा काम पर लौट सकेंगे।

    कीड़े के काटने की खबर पर सफाई देते हुए राजेश शर्मा ने कहा कि यह गलत खबर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभास की फिल्म के सेट पर उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के लिए न तो प्रभास जिम्मेदार थे और न ही फिल्म की यूनिट। अभिनेता के मुताबिक हैदराबाद में शूटिंग के दौरान उनके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।

    राजेश शर्मा ने बताया कि हैदराबाद से कोलकाता लौटने के बाद उनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। उन्होंने इसके पीछे अपनी डायबिटीज का स्तर काफी बढ़ जाना भी एक बड़ी वजह बताया। अभिनेता ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया था। इसके बाद समस्या बढ़ती गई और उन्हें उपचार की जरूरत पड़ी।

    इससे पहले अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा की तबीयत को लेकर जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि अभिनेता को कीड़े ने काट लिया है और उनकी हालत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब राजेश शर्मा ने इस दावे को गलत बताया है।

    अभिनेता ने कहा कि सुदीपा उनकी दोस्त हैं और वह उनकी सेहत को लेकर चिंतित थीं। हालांकि, उस समय उन्हें भी पूरी और सही जानकारी नहीं थी। इसी वजह से कीड़े के काटने की बात सामने आई।

    जुलाई में सुदीपा चटर्जी ने सोशल मीडिया पर राजेश शर्मा की तबीयत को लेकर एक पोस्ट साझा किया था। उस पोस्ट के मुताबिक रामोजी फिल्म सिटी में फिल्म की शूटिंग के दौरान अभिनेता वहां के एक तकनीशियन से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक जहरीले कीड़े के काटने की बात कही गई थी। पोस्ट में बताया गया था कि इसके बाद उनकी हालत खराब हुई और वह हैदराबाद से कोलकाता के लिए फ्लाइट से रवाना हुए।

    यात्रा के दौरान उन्हें बुखार और बेचैनी जैसी परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अब अभिनेता की ओर से सामने आई जानकारी ने उस समय बताई गई वजह को गलत साबित किया है। राजेश शर्मा ने अपनी बीमारी के पीछे पैर के संक्रमण और बढ़ी हुई डायबिटीज को प्रमुख कारण बताया है।

    अभिनेता फिलहाल उपचार के बाद रिकवरी कर रहे हैं और जल्द ही काम पर लौटने की उम्मीद जता रहे हैं। उनकी सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह जहरीले कीड़े का काटना नहीं थी, जैसा कि पहले बताया गया था।

  • बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद

    बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद


    उज्जैन । उज्जैन शहर के मध्य स्थित सिंधिया ट्रस्ट के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में बछ बारस के अवसर पर मंगलवार को पारंपरिक मटकी फोड़ आयोजन किया गया। जन्माष्टमी के चार दिन बाद होने वाले इस आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर के मुख्य द्वार पर करीब 10 फीट की ऊंचाई पर माखन से भरी मटकी बांधी गई थी। दोपहर करीब 12 बजे कृष्ण के रूप में सजे एक छोटे बालक को मंदिर से बाहर लाया गया। बाल कृष्ण ने लाठी की मदद से ऊंचाई पर बंधी मटकी फोड़ी। मटकी टूटते ही पूरा मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के जयकारों से गूंज उठा।

    मटकी फूटने के बाद उसमें रखा माखन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटा गया। भक्तों को माखन के साथ मिश्री और धानी का प्रसाद भी वितरित किया गया। आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आया। मटकी फोड़ने की परंपरा के बाद भगवान द्वारकाधीश की चांदी की पादुकाओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे मंदिर में दिन के समय शयन आरती संपन्न हुई।

    मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संजय मालिया के अनुसार यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। जन्माष्टमी के बाद चार दिनों तक भगवान की रात में शयन आरती नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान के सोने और जागने का कोई निश्चित समय नहीं माना जाता। बछ बारस के दिन मटकी फोड़ने के बाद भगवान के शयन की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण साल में एक बार दिन के समय शयन आरती की जाती है।

    इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि बच्चों को राधा और कृष्ण के रूप में सजाया गया। मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी परिवार के सदस्य मुख्य द्वार पर पहुंचे और परंपरागत तरीके से मटकी फोड़ कार्यक्रम संपन्न कराया। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चे को देखकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। मटकी फूटने के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए।

    गोपाल मंदिर में बछ बारस का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उज्जैन की समृद्ध कृष्ण भक्ति परंपरा को भी दर्शाता है। जन्माष्टमी के उत्सव के बाद होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बाल कृष्ण के हाथों माखन की मटकी फूटने के साथ मंदिर परिसर में उमड़ा उल्लास पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा।

  • जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम

    जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें मोबाइल अचानक बंद होने के बाद युवक को लगा कि फोन में तकनीकी खराबी आ गई है लेकिन कुछ देर बाद जब वह नया मोबाइल खरीदने पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। बैंक खाते में करीब 88 हजार रुपए होने के बावजूद मोबाइल से भुगतान नहीं हो सका। खाते में सिर्फ 36 पैसे बचे थे। जब मिनी स्टेटमेंट निकलवाया गया तो पता चला कि खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 88 हजार 542 रुपए निकाले जा चुके हैं।

    मामला राजीव गांधी नगर निवासी 46 वर्षीय वीरेन्द्र बावरिया का है। वीरेन्द्र जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत कैंट थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 9 अगस्त की बताई जा रही है। वीरेन्द्र काम पर जाने से पहले भैंसासुर रोड स्थित एक दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने QR कोड स्कैन कर 150 रुपए का UPI भुगतान किया। इसके बाद वह तीन पत्ती चौक स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे उनका ओप्पो एंड्रॉयड मोबाइल अचानक ऑटो अपडेट होने लगा। अपडेट की प्रक्रिया के दौरान फोन बंद हो गया और इसके बाद दोबारा चालू नहीं हुआ।

    वीरेन्द्र को लगा कि फोन की बैटरी या सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ गई है। वह फोन लेकर ITI माढ़ोताल स्थित कटंगी रोड की एक मोबाइल दुकान पर पहुंचे। दुकानदार ने फोन चेक करने के बाद बताया कि बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज है और पुरानी बैटरी ठीक से काम नहीं कर रही है। फोन की समस्या के चलते वीरेन्द्र ने नया मोबाइल खरीदने का फैसला किया।

    उन्होंने उसी दुकान से करीब 14 हजार रुपए का नया मोबाइल लेने की बात तय की। भुगतान के लिए उन्होंने PhonePe का इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन स्क्रीन पर बैलेंस कम होने का मैसेज दिखाई दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए क्योंकि उन्हें खाते में पर्याप्त रकम होने की उम्मीद थी। बैंक खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि उसमें सिर्फ 36 पैसे बचे हैं।

    इसके बाद वीरेन्द्र पास के SBI ATM पहुंचे और मिनी स्टेटमेंट निकाला। स्टेटमेंट देखते ही उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। उनके Union Bank of India की सदर शाखा के खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन किए गए थे। पहले 29 हजार रुपए फिर 50 हजार रुपए और इसके बाद 9 हजार 542 रुपए खाते से ट्रांसफर किए गए। कुल 88 हजार 542 रुपए की रकम उनके खाते से निकल चुकी थी।

    वीरेन्द्र का कहना है कि उन्होंने ये ट्रांजैक्शन नहीं किए थे। मोबाइल बंद होने और खाते से रकम निकलने के बीच संबंध को लेकर अब पुलिस साइबर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल बंद होने के दौरान खाते तक ठगों की पहुंच कैसे बनी और UPI ट्रांजैक्शन किस माध्यम से किए गए।

    इस घटना ने मोबाइल यूजर्स के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। अचानक मोबाइल बंद होने या अपडेट होने जैसी स्थिति में लोग अक्सर इसे सामान्य तकनीकी समस्या मान लेते हैं। लेकिन इस मामले में मोबाइल की खराबी सामने आने के बाद बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चला। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजैक्शन की जानकारी के आधार पर साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।