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  • 5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

    5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर में प्रमुख पेंशनर संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के साथ आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। पेंशनरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के करीब 5 लाख पेंशनर भोपाल में विशाल रैली निकालेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर अर्धनग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है।

    जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।

    पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

    पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

    बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

  • पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा

    पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा


    जबलपुर । पितृपक्ष के दौरान गया जाकर पिंडदान और तर्पण करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और नियमित ट्रेनों में दबाव को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने गया के लिए 12 स्पेशल ट्रेन सेवाएं चलाने का फैसला लिया है। इनमें रानी कमलापति से गया और जबलपुर से गया के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए AC स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे।

    रानी कमलापति से गया के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया स्पेशल 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति स्पेशल 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से रवाना होगी और अगले दिन शाम 4 बजकर 15 मिनट पर रानी कमलापति पहुंचेगी।

    रानी कमलापति से गया जाने वाली ट्रेन को कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। इसमें नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड शामिल हैं। इससे रास्ते में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी गया जाने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसी तरह जबलपुर से गया के बीच भी स्पेशल ट्रेन सेवा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 01701 जबलपुर-गया स्पेशल 29 सितंबर 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर जबलपुर से रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01702 गया-जबलपुर स्पेशल 28 सितंबर 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से चलेगी और अगले दिन सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर जबलपुर पहुंचेगी।

    जबलपुर-गया स्पेशल ट्रेन का ठहराव सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड पर रहेगा।

    रेलवे के मुताबिक पितृपक्ष में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। पिंडदान और तर्पण के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के कारण इस दौरान ट्रेनों में काफी भीड़ रहती है। इसी को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी कम हो और नियमित ट्रेनों पर भी दबाव घटाया जा सके।

    पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे ने श्रद्धालुओं और यात्रियों से अपील की है कि वे इन अतिरिक्त ट्रेनों की सुविधा का लाभ उठाएं। ऐसे में गया जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्पेशल ट्रेनें काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

  • जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक: सांड ने युवक को पटककर किया घायल, अस्पताल में तोड़ा दम

    जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक: सांड ने युवक को पटककर किया घायल, अस्पताल में तोड़ा दम


    जबलपुर । जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। हनुमानताल क्षेत्र में सड़क पर लड़ रहे दो सांडों के बीच से
    गुजरना एक युवक को भारी पड़ गया। अचानक एक सांड ने युवक पर हमला कर दिया और उसे उठाकर सड़क पर पटक दिया। हमले के बाद सांड उसके ऊपर से गुजरते हुए वहां से भाग गए। गंभीर रूप से घायल युवक को आसपास मौजूद लोगों ने ऑटो की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।

    मृतक की पहचान गोराबाजार निवासी रवि यादव के रूप में हुई है। बताया गया है कि रवि दूध का कारोबार करता था और घटना वाले दिन दूध लेकर हनुमानताल क्षेत्र में आया था। घटना 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। उस समय सड़क पर दो सांड आपस में लड़ रहे थे। सांडों की लड़ाई के कारण सड़क पर यातायात भी रुक गया था। आसपास मौजूद लोग उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान सांडों पर पानी डाला जा रहा था।

    इसी बीच रवि वहां से निकल रहा था। अचानक एक सांड ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। सांड ने रवि को अपने सींगों से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद वह सांड उसके ऊपर से गुजर गया और दोनों सांड मौके से भाग निकले। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। रवि काफी देर तक सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा रहा। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे ऑटो से जिला अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

    हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल के मुताबिक मृतक दूध व्यवसाय से जुड़ा था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की समस्या एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

    नगर निगम के मुताबिक जबलपुर शहर में 20 हजार से अधिक आवारा मवेशी हैं। इन्हें पकड़ने के लिए करीब 80 कर्मचारी लगाए गए हैं और रोजाना 70 से 80 मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन मवेशियों को रखने की है। निगम अधिकारी कुशाग्र सिंह ठाकुर के मुताबिक तिलवारा में करीब 800 रामपुर में 130 और उमरिया में 170 मवेशियों को रखने की क्षमता है। इससे ज्यादा मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    अधिकारी का यह भी कहना है कि कई जगहों पर मवेशियों को पकड़ने के दौरान गौभक्तों की ओर से विरोध या विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे में निगम के सामने एक तरफ शहर की सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की समस्या भी बनी हुई है। रवि यादव की मौत ने इस पूरे इंतजाम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर सड़क पर घूम रहे हजारों आवारा मवेशियों से लोगों की जान कब तक खतरे में पड़ती रहेगी।

  • गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा

    गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सीधी में महिला प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या कर करीब एक साल से फरार चल रहे उसके पति वीरेंद्र साकेत को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऐसी रणनीति बनाई जिसकी भनक आरोपी को भी नहीं लगी। आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और फरारी के दौरान मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं कर रहा था। परिवार और बच्चों से भी उसने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया था। कई राज्यों में तलाश और लगातार दबिश के बावजूद जब उसका सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ऐसा जाल बिछाया जिसमें खुद कोतवाली थाना प्रभारी मजदूर बनकर पंक्चर की दुकान पर बैठ गए।

    29 अगस्त को सीधी के एक व्यक्ति से पुलिस को अहम जानकारी मिली कि वीरेंद्र कुछ साल पहले महाराष्ट्र के राजगढ़ इलाके में काम कर चुका है। पुलिस ने इस सुराग को गंभीरता से लिया और टीम को तत्काल महाराष्ट्र रवाना कर दिया। सीधी से पुलिस टीम ने करीब 1322 किलोमीटर का सफर तय किया। राजगढ़ पहुंचने के बाद पता चला कि वीरेंद्र खिरखिनदीवाड़ी इलाके की एक कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम कर रहा है और कंपनी के पास ही एक झोपड़ी किराए पर लेकर रह रहा है। पुलिस को डर था कि अगर आरोपी को पुलिस की भनक लग गई तो वह दोबारा फरार हो सकता है। इसलिए सीधे उसके ठिकाने पर दबिश देने के बजाय उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों को समझने की रणनीति बनाई गई।

    पुलिस को पता चला कि वीरेंद्र कंपनी की गाड़ी लेकर अक्सर पास की एक पंक्चर की दुकान पर आता है। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया। सिर पर गमछा बांधा गया। पैरों में चप्पल पहनी गई और पुराने कपड़े पहनकर वह मजदूर की तरह पंक्चर की दुकान पर पहुंच गए। दुकान संचालक को भी उनकी असली पहचान नहीं बताई गई। थाना प्रभारी ने वहां आम मजदूर की तरह काम करना शुरू कर दिया। कभी गाड़ियों में हवा भरी तो कभी पंक्चर बनाया। इस दौरान पुलिस की बाकी टीम आसपास सादी वर्दी में तैनात रही और आरोपी की हर गतिविधि पर नजर रखती रही।

    पुलिस को वीरेंद्र का इंतजार करीब 16 घंटे तक करना पड़ा। आखिरकार 2 सितंबर को वह कंपनी की गाड़ी लेकर उसी पंक्चर की दुकान पर पहुंचा। जैसे ही वीरेंद्र गाड़ी से उतरकर दुकान की ओर बढ़ा पहले से तैयार पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और मौके पर ही दबोच लिया। आरोपी को तत्काल वाहन में बैठाया गया और पुलिस टीम उसे लेकर सीधी रवाना हो गई। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम बात यह रही कि जिस थाना प्रभारी को आरोपी पहचानता था वही उसके सामने मजदूर बनकर कई घंटे तक पंक्चर की दुकान पर काम करता रहा और उसे इसकी भनक तक नहीं लगी।

    वीरेंद्र पर अपनी पत्नी और सीधी पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या का आरोप है। दोनों की शादी करीब 22 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। 15 सितंबर 2025 की रात शराब के नशे में दोनों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद मारपीट शुरू हो गई। बच्चों ने डरकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में रखे बेसबॉल के डंडे से सविता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी आधी रात को घर से फरार हो गया।

    पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी। उसके ऊपर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। इस दौरान कई राज्यों में दबिश दी गई लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। करीब एक साल में कोतवाली थाने के चार थाना प्रभारी बदल गए। 11 अगस्त 2026 को दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली और एसपी संतोष कोरी ने उन्हें सविता हत्याकांड की फाइल सौंपकर आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। आखिरकार पुलिस की बदली हुई रणनीति काम आई और मजदूर के भेष में पंक्चर की दुकान पर बैठकर बिछाए गए जाल में एक साल से फरार आरोपी फंस गया। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की बात कही है।

  • चेहरे की थकान और रूखेपन का आसान इलाज है खीरा, ग्लोइंग स्किन के लिए ऐसे बनाएं घरेलू नुस्खा

    चेहरे की थकान और रूखेपन का आसान इलाज है खीरा, ग्लोइंग स्किन के लिए ऐसे बनाएं घरेलू नुस्खा


    नई दिल्ली । खीरा गर्मियों में शरीर को ठंडक देने वाली सब्जियों में गिना जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल केवल खाने तक सीमित नहीं है। त्वचा की देखभाल के लिए भी खीरे का इस्तेमाल लंबे समय से घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता रहा है। खीरे में पानी की मात्रा अधिक होती है और इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे त्वचा को तरोताजा रखने वाली प्राकृतिक चीजों में शामिल किया जाता है। खासतौर पर धूप और गर्मी के कारण चेहरा थका हुआ और बेजान नजर आने लगे तो खीरे का इस्तेमाल त्वचा को ठंडक देने में मदद कर सकता है।

    खीरे का सबसे आसान इस्तेमाल इसका रस चेहरे पर लगाना है। इसके लिए खीरे को अच्छी तरह धोकर उसका रस निकाला जा सकता है। कॉटन की मदद से इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। कुछ देर बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा को ताजगी महसूस हो सकती है। हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी घरेलू चीज को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले थोड़ी मात्रा में पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए।

    खीरे के टुकड़ों को सीधे चेहरे पर लगाने का तरीका भी काफी आसान है। ठंडे खीरे के पतले टुकड़े आंखों के आसपास कुछ देर रखने से थकी हुई आंखों और आसपास की त्वचा को ठंडक मिल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने या पर्याप्त आराम न मिलने के कारण आंखों के आसपास थकान दिखाई दे तो यह तरीका कुछ लोगों को आरामदायक लग सकता है। हालांकि आंखों में खीरे का रस जाने से बचना चाहिए।

    खीरे का फेस पैक भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। खीरे को पीसकर उसमें एलोवेरा जेल मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। यह मिश्रण त्वचा को ठंडक और नमी देने में मदद कर सकता है। अगर त्वचा बहुत संवेदनशील है तो नींबू या दूसरे तेज पदार्थ मिलाने से बचना बेहतर है क्योंकि इससे जलन या संवेदनशीलता बढ़ सकती है।

    रूखी त्वचा वाले लोग खीरे के साथ ऐसा प्राकृतिक मॉइस्चराइजिंग मिश्रण इस्तेमाल कर सकते हैं जो त्वचा को अतिरिक्त नमी देने में मदद करे। वहीं तैलीय त्वचा में भी खीरे का इस्तेमाल चेहरे को ताजा महसूस कराने के लिए किया जा सकता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि खीरा किसी गंभीर त्वचा समस्या जैसे मुहांसे संक्रमण या एलर्जी का इलाज नहीं है।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी उपायों पर निर्भर रहना भी सही नहीं है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना अच्छी नींद लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। चेहरे को साफ रखना और बार बार हाथ लगाने से बचना भी त्वचा की देखभाल का अहम हिस्सा है।

    अगर खीरा लगाने के बाद चेहरे पर लालिमा जलन खुजली या सूजन दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए। लगातार बनी रहने वाली त्वचा संबंधी समस्या में त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है। कुल मिलाकर खीरा त्वचा की नियमित देखभाल में एक आसान और कम खर्च वाला घरेलू विकल्प हो सकता है जो त्वचा को ताजगी और ठंडक का एहसास देने में मदद कर सकता है।

  • जबलपुर में पुलिस की शिकायत शाखा का वीडियो वायरल: फरियादी बोला दूर से आए हैं सुन लीजिए, महिला पुलिसकर्मी बोली बाद में आना

    जबलपुर में पुलिस की शिकायत शाखा का वीडियो वायरल: फरियादी बोला दूर से आए हैं सुन लीजिए, महिला पुलिसकर्मी बोली बाद में आना


    जबलपुर । जबलपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय की शिकायत शाखा से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक फरियादी शिकायत दर्ज कराने के लिए महिला पुलिसकर्मी से आग्रह करता नजर आ रहा है। फरियादी का कहना है कि वह दोपहर करीब तीन बजे से शिकायत शाखा में इंतजार कर रहा है और काफी दूर से अपनी समस्या लेकर आया है। वह महिला पुलिसकर्मी से अपनी शिकायत सुनने की गुहार लगाते हुए कहता है कि काम ज्यादा नहीं है और दो सेकेंड में उसकी बात सुन ली जाए। इस दौरान शिकायत शाखा के बाहर कई लोग भी नजर आ रहे हैं।

    वायरल वीडियो में फरियादी महिला पुलिसकर्मी से बार बार अपनी शिकायत लेने का अनुरोध करता दिखाई देता है। वह बताता है कि वह अपनी समस्या को लेकर पिछले करीब तीन महीने से चक्कर लगा रहा है। फरियादी के मुताबिक वह पहले एक अधिकारी के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था लेकिन वहां से उसे शिकायत शाखा भेज दिया गया। इसके बाद भी उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। फरियादी यह भी कहता सुनाई देता है कि वह दूर से आया है और उसकी समस्या को थोड़ी देर सुन लिया जाए।

    वीडियो में महिला पुलिसकर्मी की ओर से तत्काल शिकायत नहीं लिए जाने की बात कही जा रही है। बातचीत के दौरान मीटिंग से आने और कुछ देर आराम करने का जिक्र भी सुनाई देता है। महिला पुलिसकर्मी फरियादी को बाद में आने के लिए कहती नजर आती है। इसी बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और पुलिस की शिकायत शाखा में फरियादियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे।

    वीडियो में दिखाई दे रही महिला पुलिसकर्मी का नाम एएसआई रश्मि पराशर बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उनका हाल ही में शिकायत शाखा में तबादला हुआ है। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित महिला पुलिसकर्मी से पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी ली।

    सीएसपी भगत सिंह गोठरिया ने बताया कि वायरल वीडियो पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आया है। वीडियो देखने के बाद संबंधित महिला पुलिसकर्मी को बुलाकर बातचीत की गई। पुलिस अधिकारी के मुताबिक फरियादी को करीब पांच मिनट इंतजार करने के लिए कहा गया था और इसके बाद उसकी शिकायत भी ले ली गई थी। महिला पुलिसकर्मी से पूरे मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार फरियादी की शिकायत लिए जाने की पुष्टि हुई है। अब महिला पुलिसकर्मी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस कार्यालयों में अपनी समस्या लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के साथ व्यवहार कैसा होना चाहिए और उनकी शिकायतों को समय पर सुनने के लिए व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।

  • दूसरे के दस्तावेज पर सिम एक्टिवेट कर थमा दी किसी और को: शिवपुरी में ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    दूसरे के दस्तावेज पर सिम एक्टिवेट कर थमा दी किसी और को: शिवपुरी में ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई


    शिवपुरी । मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो रही फर्जी सिम कार्ड के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत भौंती और मायापुर थाना पुलिस ने जांच के बाद तीन लोगों के खिलाफ अलग अलग मामले दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों और सिम कार्ड की जांच के दौरान की गई। जांच में कुछ ऐसे मोबाइल नंबर सामने आए जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया गया था। पुलिस ने सिम धारकों के साथ सिम जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही या गड़बड़ी करने वालों को भी जांच के दायरे में लिया है।

    भौंती थाना पुलिस के सामने साइबर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ठगी की शिकायत पहुंची थी। राजस्थान के डीडवाना कुचामन सिटी निवासी किशनलाल ने शिकायत में बताया कि उन्हें दो मोबाइल नंबरों से फोन आया था। कॉल करने वाले लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और एफआईआर दर्ज होने का डर दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। आरोपियों ने कार्रवाई का डर दिखाते हुए किशनलाल से 12520 रुपए फीनो पेमेंट्स बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि 7067915249 और 6267266154 नंबर ग्राम महोबा डामरौन निवासी राहुल जाटव और भानुप्रताप जाटव के नाम पर दर्ज थे। इसके बाद भौंती पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 318(4) और 319(2) बीएनएस के साथ 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नंबरों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इनके जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से कौन कौन लोग जुड़े हुए हैं।

    इसी अभियान के तहत मायापुर पुलिस ने सिम जारी करने वाले एजेंट के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस को मिली एक एक्सेल शीट की जांच के दौरान POS कोड 8085309715 से जारी एक सिम साइबर फ्रॉड से जुड़ी मिली। जांच में सिम नंबर 7898219481 रेखा पत्नी हल्के आदिवासी निवासी ग्राम पड़ोरा के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस ने जब रेखा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने यह सिम कभी खरीदी ही नहीं थी। परिवार के किसी सदस्य द्वारा भी इस सिम का इस्तेमाल किए जाने से उन्होंने इनकार किया।

    इसके बाद पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि मायापुर स्थित एयरटेल स्टोर के एजेंट पवन कुमार लोधी ने ग्राहक के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम से सिम एक्टिवेट की और उसे किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया। बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया। पुलिस की जांच में इस नंबर से कुल 13040 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।

    मायापुर पुलिस ने पवन कुमार लोधी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस के साथ 66(C) आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(E) और 42(6) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की विवेचना कर रही है। इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस केवल ठगी करने वालों पर ही नहीं बल्कि संदिग्ध सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम के नेटवर्क पर की जा रही यह कार्रवाई साइबर ठगी पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

  • शिवपुरी में कबड्डी का दमदार मुकाबला: नरवर की छात्राओं ने करेरा को दोनों मैचों में दी करारी शिकस्त

    शिवपुरी में कबड्डी का दमदार मुकाबला: नरवर की छात्राओं ने करेरा को दोनों मैचों में दी करारी शिकस्त


    शिवपुरी । शिवपुरी में आयोजित जिला स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिता में मंगलवार को स्कूली खिलाड़ियों का उत्साह देखने को मिला। तात्या टोपे शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय के मैदान पर आयोजित प्रतियोगिता में जिले के अलग अलग विकासखंडों से बालक और बालिका खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान कबड्डी के साथ नेटबॉल हॉकी और फुटबॉल सहित कई खेलों के मुकाबले कराए जा रहे हैं। कबड्डी प्रतियोगिता में नरवर की जूनियर छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का दम दिखाया और करेरा की टीम को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी।

    कबड्डी के मैदान पर नरवर की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने तेजी से रेड लगाकर अंक जुटाए और दूसरी ओर मजबूत टैकल के जरिए करेरा की खिलाड़ियों को रोकने में सफलता हासिल की। पहले मुकाबले में नरवर की छात्राओं ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए करेरा की टीम को 22-6 के बड़े अंतर से हराया। इस मुकाबले में नरवर की टीम ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और विपक्षी टीम को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया।

    पहले मुकाबले में जीत के बाद नरवर की खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे मुकाबले में भी टीम ने अपनी लय बरकरार रखी और शानदार रणनीति के साथ खेलते हुए करेरा को 18-7 से मात दी। लगातार दो जीत के बाद नरवर की छात्राओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। मैदान पर मौजूद दर्शकों और साथी खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन के लिए उनका उत्साह बढ़ाया।

    मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हर अंक के लिए जोरदार संघर्ष देखने को मिला। रेडर अंक हासिल करने के लिए तेजी से विपक्षी पाले में पहुंचती नजर आईं तो डिफेंडर उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत लगाती रहीं। खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल और आक्रामक रणनीति नरवर की जीत की बड़ी वजह बनी। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

    जिला स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। ऐसे आयोजनों के जरिए ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर मिलता है।

    प्रतियोगिता के सफल आयोजन में जिला खेल निरीक्षक चंद्रशेखर वेमेटे के साथ खेल शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यादवेंद्र चौधरी अब्दुल रजाक खान भगवत शर्मा बसंत बृजमोहन जाट नीरज सरैया मनोज खत्री नीरजा भार्गव रेखा शर्मा घनश्याम और शुभी रानी सहित अन्य स्टाफ ने प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं को संभाला। मैदान पर खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बीच प्रतियोगिता का माहौल उत्साह और खेल भावना से भरपूर रहा।

  • MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय

    MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय


    भोपाल। मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के लिए प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर बड़ा पेच फंस गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद परीक्षा को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन कर्मचारी चयन मंडल ESB ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से साफ इनकार कर दिया है। ESB का कहना है कि पिछले करीब छह साल से मंडल केवल ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और मौजूदा व्यवस्था में ऑफलाइन परीक्षा कराना उसके लिए संभव नहीं है। इस फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग के सामने नई परीक्षा एजेंसी तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग दूसरी एजेंसी से परीक्षा कराने के साथ ही जरूरत पड़ने पर खुद परीक्षा आयोजित कराने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल लौटने के बाद लिया जा सकता है।

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 में दिए गए आदेश के बाद मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी हो गया है। वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है। ऐसे शिक्षकों को हर साल होने वाली परीक्षा में शामिल होने के अवसर मिलेंगे। यदि कोई शिक्षक छह अवसर मिलने के बावजूद पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाता है तो उसकी सेवा समाप्त किए जाने का प्रावधान सामने आया है। इसी वजह से सरकार के लिए TET परीक्षा आयोजित कराना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

    इसी क्रम में कर्मचारी चयन मंडल ने पहले 21 अगस्त से 4 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में अभ्यर्थियों को राहत देते हुए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई। ESB की ओर से पहले 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन अब ऑफलाइन परीक्षा से इनकार के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सरकार किसी नई एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देती है तो परीक्षा की तारीख में भी बदलाव संभव है। नई एजेंसी को परीक्षा केंद्र तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन तक की पूरी व्यवस्था करनी होगी।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक यदि TET ऑफलाइन कराई जाती है तो परीक्षा आयोजित करने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में विभाग TET के साथ शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। सरकार के सामने लोक सेवा आयोग यानी PSC को परीक्षा की जिम्मेदारी देने का विकल्प भी मौजूद है लेकिन PSC ने अब तक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा या भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की है। इसलिए इस विकल्प पर भी अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही होगा।

    परीक्षा केंद्रों को लेकर भी शिक्षकों की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल भोपाल इंदौर जबलपुर खंडवा नीमच रतलाम रीवा सागर सतना उज्जैन और सीधी में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सागर के साथ चंबल और ग्वालियर अंचल के कई जिलों को केंद्रों में जगह नहीं मिली है। शिक्षकों की मांग है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएं ताकि उन्हें परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों की यात्रा न करनी पड़े। नई एजेंसी तय होने के बाद परीक्षा केंद्रों की संख्या और स्थानों में भी बदलाव की संभावना है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि TET परीक्षा आखिर किस एजेंसी के जरिए और किस तारीख को आयोजित होगी। आवेदन की प्रक्रिया अभी 18 सितंबर तक जारी है लेकिन एजेंसी बदलने की स्थिति में परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव हो सकता है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद होने वाली बैठक में इस पूरे मामले पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। तब तक हजारों शिक्षक परीक्षा की तारीख और व्यवस्था को लेकर असमंजस में बने रहेंगे।

  • ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप

    ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारों और बयानों ने सियासी माहौल को अलग ही रंग दे दिया है। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वापस आओ के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री बनाने की आवाज उठ रही है। दूसरी तरफ मंदसौर जिले में सड़क की समस्या को लेकर भाजपा विधायक का काफिला रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विधायक प्रतिनिधि पर एक ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों का पुराना मामा वाला प्यार एक बार फिर दिखाई दिया। कार्यक्रम में लोगों ने आई लव यू मामा और मामा वापस आ जाइए जैसे नारे लगाए। जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों की ओर फ्लाइंग किस भेजे और आई लव यू टू कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने मंच से कहा कि वह सभी से प्यार करते हैं और यह प्यार का सिलसिला जिंदगी भर चलता रहेगा।

    इस दौरान शिवराज सिंह चौहान का एक बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री आते जाते रहते हैं लेकिन मामा परमानेंट हैं। शिवराज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वाला संबोधन कोई नया नहीं है। लंबे समय से उनके समर्थक और आम लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कई कार्यक्रमों में उनके लिए मामा वापस आओ जैसे नारे सुनाई देते रहे हैं।

    उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। देवास जिले के खातेगांव में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो के नारे लगाए। इसके बाद भोपाल में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान जीतू पटवारी जब अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में पहुंचे तो वहां भी उनके पक्ष में मुख्यमंत्री बनाने के नारे गूंजे। समर्थकों ने हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो और अगला सीएम कैसा हो जीतू भैया जैसा हो जैसे नारे लगाए।

    हालांकि मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर अभी से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के भीतर भी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में आ सकते हैं। फिलहाल जीतू पटवारी के समर्थन में लग रहे नारे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्साह को जरूर दिखा रहे हैं।

    वहीं मंदसौर जिले के गरोठ में भाजपा विधायक चंदर सिंह सिसोदिया के काफिले को ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताने के लिए रोक लिया। आरोप है कि काफिला रोके जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें विधायक ग्रामीणों से बात करते दिखाई दे रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान विधायक प्रतिनिधि अनिल राठौर ने एक ग्रामीण को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल ले लिए गए। मामले को लेकर एक ग्रामीण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है और अब पूरा विवाद थाने तक पहुंच गया है। आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

    इधर इंदौर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का एक बयान भी चर्चा में रहा। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते समय उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल कभी प्रधानमंत्री नहीं रहे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा नेता के सामान्य ज्ञान और इतिहास की जानकारी पर सवाल उठाए।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयान नारे और विवाद लगातार सुर्खियां बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामा परमानेंट वाले बयान से लेकर जीतू पटवारी के लिए मुख्यमंत्री के नारों और गरोठ में विधायक प्रतिनिधि पर लगे थप्पड़ के आरोप तक हर मामला राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे रहा है।