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  • राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, शिकायतों के बाद हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी; संदीप गुप्ता को फिर मिली पुरानी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बदलाव के बीच अलग-अलग शिकायतों और आरोपों के चलते मंदिर की जिम्मेदारियों से हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी हो गई है। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आगमन के बाद संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक को उनके पुराने दायित्वों के साथ बहाल किया गया है। इस फैसले के बाद मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में पुराने कर्मचारियों की भूमिकाएं फिर से बहाल होने का सिलसिला सामने आया है।

    इन तीनों कर्मचारियों को अलग-अलग मामलों के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं से हटाया गया था। संदीप गुप्ता तीर्थ यात्री सेवा केंद्र में लॉकर व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। लॉकर में सामान रखने को लेकर एक विदेशी महिला से उनकी कहासुनी हुई थी, जिसके बाद महिला ने ट्रस्ट को शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने संदीप को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया था।

    संदीप गुप्ता शहीद कारसेवक वासुदेव गुप्ता के बेटे हैं। मंदिर में उन्हें काम दिए जाने के पीछे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया था। नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद संदीप की बहाली की सिफारिश की गई। इसके बाद उन्हें दोबारा उसी स्थान पर तैनात कर दिया गया और पुरानी जिम्मेदारी सौंप दी गई।

    दूसरी ओर, बजरंग पाठक प्रसाद व्यवस्था के प्रभारी थे। रामजन्मभूमि परिसर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी ने अपने मेहमानों के लिए प्रसाद दिलाने की सिफारिश की थी। बजरंग पाठक ने इसके लिए ट्रस्ट से आदेश लाने की बात कही और सिफारिश के आधार पर प्रसाद उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद क्षेत्राधिकारी ने ट्रस्ट से उनकी शिकायत की थी।

    शिकायत के बाद तत्कालीन अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने रामलला के आभूषणों और दानदाताओं से प्राप्त वस्तुओं की देखरेख करने वाले केडी तिवारी तथा प्रसाद व्यवस्था प्रभारी बजरंग पाठक को राम मंदिर से हटाकर बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया था। केडी तिवारी ने वहां अपनी नई तैनाती पर काम शुरू कर दिया था, जबकि बजरंग पाठक ने आदेश का पालन नहीं किया और कारसेवक पुरम में सेवा देते रहे। इसके बाद उन्हें भी व्यवस्था से बाहर कर दिया गया था।

    अब स्वामी गोविंद देव गिरि के फैसले के बाद केडी तिवारी और बजरंग पाठक की भी राम मंदिर की पुरानी जिम्मेदारियों पर वापसी हो गई है। इससे मंदिर की व्यवस्थाओं में कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को लेकर नए प्रशासनिक दौर की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

    इस बीच चढ़ावा प्रकरण के बाद महासचिव पद से त्यागपत्र देने वाले विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचे। दोनों ने कर्मचारियों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि किसी भी तरह की परेशानी या समस्या होने पर उन्हें इसकी जानकारी दी जाए। दोनों ने करीब एक घंटे तक सेवा केंद्र में कर्मचारियों के साथ समय बिताया।

  • रणवीर सिंह की प्रलय में दिखेगा बिल्कुल अलग अंदाज, वायरल वीडियो ने सर्वाइवल ड्रामा और जॉम्बी कहानी को लेकर बढ़ाया रोमांच

    रणवीर सिंह की प्रलय में दिखेगा बिल्कुल अलग अंदाज, वायरल वीडियो ने सर्वाइवल ड्रामा और जॉम्बी कहानी को लेकर बढ़ाया रोमांच

    नई दिल्ली । रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी फिल्म प्रलय की शूटिंग में व्यस्त हैं। फिल्म का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है और इसी दौरान शूटिंग सेट से सामने आए एक वीडियो ने अभिनेता के नए लुक को लेकर चर्चा तेज कर दी है। वीडियो में रणवीर सिंह काफी अलग अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ फिल्म की अभिनेत्री कल्याणी प्रियदर्शन और अन्य कलाकार भी नजर आ रहे हैं।

    शूटिंग के दौरान सामने आए वीडियो में रणवीर मटमैले कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं। उनके आसपास कैमरा और शूटिंग से जुड़े उपकरण नजर आते हैं। वीडियो में उनका किरदार अपनी पीठ पर एक बच्ची को लेकर चलता हुआ दिखाई देता है। यह दृश्य सामने आने के बाद फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि बच्ची का रणवीर के किरदार से क्या संबंध है और कहानी में उसकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होगी, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    रणवीर सिंह के इस नए लुक को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने अभिनेता के लुक की तारीफ की और इसे उनकी पिछली फिल्मों से अलग बताया। कुछ लोगों ने फिल्म को बड़े स्तर की परियोजना बताते हुए उम्मीद जताई कि रणवीर एक बार फिर दर्शकों को प्रभावित करेंगे। वहीं कुछ यूजर्स ने वीडियो में दिखाई दे रहे माहौल के आधार पर उनके किरदार को जॉम्बी से जोड़कर अनुमान लगाया है। हालांकि इन अटकलों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    प्रलय की कहानी दुनिया के खत्म होने जैसी स्थिति और इंसानों के सामने पैदा होने वाले अस्तित्व के संकट पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म को सर्वाइवल ड्रामा के रूप में पेश किया जाएगा। इसकी कहानी भविष्य के मुंबई में दिखाई जाएगी, जहां परिस्थितियां तेजी से बिगड़ती हैं। बताया जा रहा है कि शहर में जॉम्बी की संख्या बढ़ने के बाद लोगों के सामने खुद को बचाने और अपने करीबियों की सुरक्षा करने की चुनौती खड़ी होगी।

    फिल्म की खासियत इसका भविष्य का माहौल और सर्वाइवल पर केंद्रित कहानी बताई जा रही है। ऐसे समय में जब शहर की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने लगेगी, कहानी के पात्रों को मुश्किल परिस्थितियों के बीच फैसले लेने होंगे। रणवीर सिंह का किरदार भी इसी संघर्ष का हिस्सा होगा। शूटिंग से सामने आया उनका लुक संकेत देता है कि फिल्म में एक्शन के साथ भावनात्मक पहलुओं को भी महत्व दिया जा सकता है।

    प्रलय का निर्देशन जय मेहता कर रहे हैं। फिल्म का पहला शेड्यूल मुंबई में शुरू हो चुका है। कहानी और किरदारों से जुड़ी ज्यादातर जानकारी अभी सीमित रखी गई है, इसलिए सेट से सामने आने वाला हर नया दृश्य दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन रहा है। रणवीर का यह लुक भी इसी वजह से तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    रणवीर सिंह के काम से ब्रेक लेने की खबरें भी इसी बीच चर्चा में हैं। बताया जा रहा है कि फिल्म के अगले शेड्यूल से पहले वह परिवार के साथ समय बिताने के लिए लंबी छुट्टी ले सकते हैं। बच्चे के जन्म के बाद उनके कुछ समय तक काम से दूर रहने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल प्रलय से सामने आए रणवीर सिंह के लुक ने फिल्म के प्रति दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। पीठ पर बच्ची को लेकर चलते अभिनेता के दृश्य ने कहानी के भावनात्मक और सर्वाइवल पहलू को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब दर्शकों को फिल्म के आधिकारिक लुक और रणवीर के किरदार से जुड़ी अधिक जानकारी का इंतजार है।

  • पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज का बड़ा दावा, विश्व कप जीत के बाद खिलाड़ियों में बढ़ी कप्तानी की होड़ और जिम्मेदारी हुई कमजोर

    पाकिस्तान के पूर्व बल्लेबाज का बड़ा दावा, विश्व कप जीत के बाद खिलाड़ियों में बढ़ी कप्तानी की होड़ और जिम्मेदारी हुई कमजोर

    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मौजूदा प्रदर्शन और लगातार बदलते हालात को लेकर पूर्व बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने टीम की मौजूदा स्थिति के पीछे कई कारणों का जिक्र करते हुए 2021 टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मिली ऐतिहासिक जीत को एक अहम मोड़ बताया। यूसुफ के मुताबिक उस मुकाबले के बाद टीम के कुछ खिलाड़ियों में आत्मसंतुष्टि बढ़ी और आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी निरंतरता कमजोर पड़ गई।

    2021 के टी20 विश्व कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया था। यह विश्व कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की पहली जीत थी। मुकाबले में पाकिस्तान ने 152 रन का लक्ष्य बिना कोई विकेट गंवाए हासिल किया था। बाबर आजम ने नाबाद 68 रन और मोहम्मद रिजवान ने 79 रन की पारी खेलकर टीम को शानदार जीत दिलाई थी। उस समय इस सफलता को पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था।

    हालांकि, मोहम्मद यूसुफ का मानना है कि इसी जीत के बाद टीम के भीतर अपेक्षाओं और रवैये में बदलाव आने लगा। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को लगा कि उन्होंने बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जबकि किसी भी टीम के लिए एक बड़ी जीत के बाद भी लगातार सुधार और मेहनत जरूरी होती है। उनके मुताबिक सफलता के बाद जमीन से जुड़े रहना और अपनी कमियों पर काम करते रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

    यूसुफ ने खिलाड़ियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन के बाद खुद को बहुत बड़ा समझने लगे और विरोधी टीम का सम्मान करना कम कर दे, तो इससे समस्याएं पैदा होती हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसी कई परेशानियां सामने आई हैं, जिनका असर टीम के प्रदर्शन पर दिखाई दिया।

    पूर्व क्रिकेटर ने टीम के भीतर कप्तानी को लेकर पैदा हुई प्रतिस्पर्धा को भी नुकसानदायक बताया। उनका दावा है कि 2021 की जीत के बाद टीम में कई लोग कप्तान बनने की कोशिश में लगे रहे। इससे खिलाड़ियों का ध्यान अपने प्रदर्शन और टीम की जरूरतों से हटकर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की तरफ गया।

    पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में वनडे विश्व कप, टी20 विश्व कप, एशिया कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंटों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया। लगातार अस्थिरता, कप्तानी में बदलाव और टीम संयोजन से जुड़े फैसलों ने भी पाकिस्तान क्रिकेट की मुश्किलें बढ़ाई हैं।

    यूसुफ ने क्रिकेट बोर्ड की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार बोर्ड ने टीम को संभालने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए और अलग-अलग कोचों को जिम्मेदारी दी। इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आखिरकार बोर्ड को कुछ कड़े फैसले लेने पड़े और वह मौजूदा फैसलों का समर्थन करते हैं।

    उनकी टिप्पणियों से साफ है कि पाकिस्तान क्रिकेट की समस्या को वह केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं मानते। उनके मुताबिक टीम के भीतर अनुशासन, जिम्मेदारी, नेतृत्व और निरंतरता जैसे पहलुओं को मजबूत करना जरूरी है। पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आगे की राह आसान नहीं है और टीम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए प्रदर्शन के साथ-साथ सोच और कार्यशैली में भी सुधार करना होगा।

  • महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    महिला एशिया कप में भारत के बाद श्रीलंका अंतिम चार में पहुंचा, पाकिस्तान के पास आज सेमीफाइनल बचाने का आखिरी मौका

    नई दिल्ली । महिला एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है। श्रीलंका ने बांग्लादेश को चार विकेट से हराकर अंतिम चार में अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के बाद श्रीलंका टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है। अब बाकी दो स्थानों के लिए मुकाबला रोमांचक हो गया है और पाकिस्तान की नजर आज हांगकांग के खिलाफ होने वाले मैच पर टिकी है।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच मुकाबला बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा। बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका के सामने 115 रन का लक्ष्य रखा। लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। कप्तान चमारी अटापट्टू महज एक रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद लगातार विकेट गिरने से टीम मुश्किल स्थिति में पहुंच गई।

    पावरप्ले के दौरान श्रीलंका ने कई महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए। इसके बाद विशमी गुणरत्ने और कविशा दिलहारी के आउट होने से परेशानी और बढ़ गई। एक समय श्रीलंका का स्कोर पांच विकेट पर सिर्फ 44 रन था। ऐसा लग रहा था कि बांग्लादेश मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना चुका है और श्रीलंका के लिए लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल होगा।

    इसी संकट के समय हर्षिता समरविक्रमा ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने नीलक्षिका सिल्वा के साथ मिलकर छठे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों ने 38 रन जोड़कर श्रीलंका की उम्मीदों को जिंदा रखा। इसके बाद हर्षिता ने आखिरी ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    श्रीलंका को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 29 रन चाहिए थे। दबाव के बावजूद हर्षिता ने बड़े शॉट लगाने जारी रखे। 18वें ओवर में उन्होंने 16 रन जुटाए और अगले ओवर में 11 रन बनाकर टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। इसके बाद श्रीलंका ने 19वें ओवर की दूसरी गेंद पर लक्ष्य हासिल कर लिया और चार विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ श्रीलंका ने ग्रुप बी में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीन मुकाबले जीतकर अंतिम चार में जगह बनाई है। इससे पहले भारत भी ग्रुप चरण में लगातार जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में पहुंच चुका है।

    भारत ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है और उसका सेमीफाइनल मुकाबला 10 सितंबर को खेला जाएगा। ग्रुप बी की दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम भारत से भिड़ेगी। वहीं श्रीलंका 11 सितंबर को सेमीफाइनल में ग्रुप ए की दूसरे स्थान वाली टीम के खिलाफ उतरेगा। दोनों सेमीफाइनल मुकाबले दुबई में खेले जाएंगे।

    अब पाकिस्तान के लिए आज का मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। पाकिस्तान को हांगकांग के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी ताकि वह सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर सके। भारत के खिलाफ पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए टीम के लिए अब किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है।

    ग्रुप बी में बांग्लादेश के पास अभी भी एक मुकाबला बाकी है, जबकि ग्रुप ए में पाकिस्तान और हांगकांग के बीच मुकाबला स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। ऐसे में महिला एशिया कप के अंतिम दो सेमीफाइनल स्थानों के लिए आने वाले मुकाबले बेहद निर्णायक रहने वाले हैं।

  • यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी से मार्च के बीच मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और यहां विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। इसके बावजूद चुनाव इससे काफी पहले कराए जा सकते हैं। यदि फरवरी या मार्च में मतदान होता है, तो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से करीब दो महीने पहले ही अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का मौका मिल जाएगा।

    मौजूदा समय में पांचों राज्यों के विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों पर नजर डालें तो सबसे पहले मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को पूरा होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को गोवा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होगा। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च और उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। उत्तर प्रदेश में सबसे बाद में 22 मई 2027 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा।

    ऐसे में चुनाव कार्यक्रम इस तरह तैयार किए जाने की संभावना है कि पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया 13 मार्च से पहले पूरी हो जाए। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त समय की जरूरत होगी। इसी वजह से फरवरी से मतदान शुरू होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चुनाव की तैयारियों में जनगणना और मतदाता सूची से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किए जाने की योजना है। चुनाव और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। खासतौर पर शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तैनाती दोनों प्रक्रियाओं में होने के कारण इनके बीच समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है।

    जनगणना की तारीखों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर संभावित टकराव कम होने की उम्मीद है। इससे चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के लिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

    मतदाता सूची को लेकर भी पांचों राज्यों में प्रक्रिया चल रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 13.4 करोड़ बताई गई है। गोवा में यह संख्या करीब 10.6 लाख और मणिपुर में करीब 19.3 लाख रह गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीटों के समीकरण, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की संभावनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है। खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    हालांकि मतदान की सटीक तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों और विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 का दौर पांचों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में खतरनाक स्टेरॉयड ले रहे युवा, किडनी, लिवर और दिल पर बढ़ सकता है गंभीर जोखिम

    जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में खतरनाक स्टेरॉयड ले रहे युवा, किडनी, लिवर और दिल पर बढ़ सकता है गंभीर जोखिम

    नई दिल्ली । तेजी से मसल्स बढ़ाने और शरीर को भारी बनाने की चाहत में जिम जाने वाले कुछ युवा अब सामान्य एक्सरसाइज, संतुलित आहार और प्रोटीन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कम समय में ज्यादा मसल्स हासिल करने के लिए कुछ लोग ऐसे स्टेरॉयड इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनका उपयोग पशुओं में किया जाता है। बोल्डेनोन, ट्रेनबोलोन और नैंड्रोलोन जैसे स्टेरॉयड इसी वजह से चिंता का विषय बन रहे हैं।

    बाहर से इन दवाओं का असर मांसपेशियों के आकार और शरीर की बनावट में बदलाव के रूप में दिखाई दे सकता है, लेकिन शरीर के भीतर इनका प्रभाव कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। स्टेरॉयड के अनियंत्रित इस्तेमाल से हार्मोनल संतुलन प्रभावित होने के साथ किडनी, लिवर और हृदय से जुड़े जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बिना चिकित्सकीय सलाह ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं।

    चेन्नई स्थित स्टैनले मेडिकल कॉलेज में हुई रिसर्च में 18 से 50 वर्ष की उम्र के 161 पुरुष जिम करने वालों को शामिल किया गया। इनमें 57 लोगों में ऐसे शारीरिक बदलाव पाए गए, जो स्टेरॉयड के इस्तेमाल से जुड़े थे। खास बात यह रही कि प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवाओं की थी। इससे कम उम्र में शरीर को तेजी से बदलने की कोशिश को लेकर चिंता बढ़ती है।

    रिसर्च में स्टेरॉयड इस्तेमाल करने वाले लोगों के रक्त परीक्षण में क्रिएटिनिन और लिवर एंजाइम का स्तर अधिक पाया गया। क्रिएटिनिन किडनी की कार्यप्रणाली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जबकि लिवर एंजाइम में बदलाव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि केवल इन परीक्षणों के आधार पर किसी व्यक्ति में स्थायी अंग क्षति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन ऐसे बदलाव चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत जरूर बताते हैं।

    स्टेरॉयड के इस्तेमाल को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू इसका बंद किया जाना है। 79 पुरुषों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि स्टेरॉयड छोड़ने के तीन महीने बाद वजन में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इसका मतलब यह है कि स्टेरॉयड के जरिए हासिल किए गए शारीरिक बदलाव हमेशा स्थायी नहीं रहते। इस्तेमाल बंद होने के बाद शरीर में पहले दिखाई देने वाला वजन और मांसपेशियों का आकार कम हो सकता है।

    युवाओं में स्टेरॉयड लेने की प्रवृत्ति के पीछे जल्दी परिणाम पाने की इच्छा एक बड़ी वजह मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर तेजी से बदली हुई बॉडी और मसल्स को देखकर कई लोग प्राकृतिक तरीके से मांसपेशियां विकसित करने के बजाय शॉर्टकट तलाशते हैं। समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब बिना सही जानकारी के पशुओं के लिए बनाई गई दवाओं को इंसानों पर इस्तेमाल किया जाता है।

    स्वस्थ तरीके से मसल्स बढ़ाने में समय लगता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन का सेवन सुरक्षित तरीके से फिटनेस सुधारने में मदद कर सकता है। किसी भी स्टेरॉयड या हार्मोन संबंधी दवा का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं किया जाना चाहिए। तेजी से बदली हुई बॉडी आकर्षक दिखाई दे सकती है, लेकिन उसके पीछे छिपे स्वास्थ्य जोखिम लंबे समय तक परेशानी पैदा कर सकते हैं।

  • ‘अब 25 साल का नहीं हूं’, सैफ अली खान ने बताया क्यों बदलना चाहते हैं फिल्मों का चुनाव, हैवान हादसे का भी किया खुलासा

    ‘अब 25 साल का नहीं हूं’, सैफ अली खान ने बताया क्यों बदलना चाहते हैं फिल्मों का चुनाव, हैवान हादसे का भी किया खुलासा

    नई दिल्ली । अभिनेता सैफ अली खान अपने करियर के इस दौर में ऐसी फिल्मों और किरदारों की ओर बढ़ना चाहते हैं, जिनमें कहानी के साथ अभिनय की चुनौती भी हो। आगामी फिल्म हैवान में वह एक नेत्रहीन व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो परिस्थितियों से हारने के बजाय अपनी समझ और क्षमताओं के सहारे मुश्किलों का सामना करता है। सैफ ने बताया कि इस तरह का किरदार स्वीकार करने की सबसे बड़ी वजह फिल्म की कहानी और निर्देशक प्रियदर्शन का उन पर भरोसा था।

    सैफ के मुताबिक, अब वह अपने करियर में थोड़ा बदलाव करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उम्र और अनुभव के साथ फिल्में चुनने का नजरिया भी बदलता है। वह ऐसी कहानियां करना चाहते हैं, जिनमें सस्पेंस, थ्रिल और मजबूत किरदार हों। उन्होंने अजय देवगन की दृश्यम जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि अब वह उसी तरह के परिपक्व विषयों वाली फिल्मों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनके लिए हैवान का किरदार इसलिए खास है क्योंकि वह केवल सहानुभूति पाने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि उसमें अपनी परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता भी है।

    फिल्म में सैफ का किरदार नेत्रहीन है, लेकिन उसकी सुनने की क्षमता असाधारण है। वह हवा में उछली गेंद तक पकड़ सकता है। उसकी मां ने उसे संगीत और वायलिन की शिक्षा दी है, जबकि उसके पिता ने उसे मार्शल आर्ट सिखाया है। यही खूबियां उसके किरदार को सामान्य कमजोर या असहाय व्यक्ति से अलग बनाती हैं। सैफ ने माना कि ऐसे किरदार उन्हें कम ही मिले हैं और इस भूमिका को निभाने में उन्हें काफी आनंद आया।

    हैवान में सैफ के सामने अक्षय कुमार एक अलग और नकारात्मक अंदाज में नजर आएंगे। दोनों कलाकार इससे पहले साथ काम कर चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी भूमिकाओं का समीकरण बिल्कुल अलग है। सैफ ने बताया कि अक्षय का फिल्म में शामिल होना उनके लिए किसी तोहफे से कम नहीं था। दूसरे प्रमुख किरदार के लिए कलाकार की तलाश चल रही थी, तभी अक्षय ने स्वयं इस भूमिका को निभाने की इच्छा जताई। नकारात्मक किरदार होने के बावजूद उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया।

    फिल्म के एक्शन दृश्यों की शूटिंग के दौरान सैफ को एक हादसे का सामना भी करना पड़ा। एक दृश्य में पुलिसकर्मी को उन्हें कांच के सामने धक्का देना था। निर्देश के मुताबिक धक्का ज्यादा तेज नहीं होना था, लेकिन शूटिंग के दौरान जोर कुछ अधिक लग गया। इसके बाद पूरा कांच टूट गया और सैफ उसके सामने गिर पड़े। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें गंभीर चोट का एहसास नहीं हुआ, लेकिन बाद में शरीर पर पड़े असर का पता चला और उन्हें करीब दो दिन आराम करना पड़ा।

    सैफ ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ एक्शन करना पहले की तुलना में अधिक मेहनत वाला काम हो गया है। कलाकारों से अब भी युवा उम्र जैसी ऊर्जा और स्टंट की उम्मीद की जाती है, लेकिन शरीर पर उसका असर पड़ता है। इसके बावजूद सैफ को एक्शन करना पसंद है। उन्होंने फिल्म में पुलिस स्टेशन के अंदर फिल्माए गए एक्शन दृश्य को अपने पसंदीदा दृश्यों में बताया। अक्षय के साथ फाइट भी फिल्म का अहम हिस्सा है।

    ओटीटी के अनुभव को लेकर सैफ ने कहा कि लंबे फॉर्मेट में कलाकार को किरदार को गहराई से समझने और उसे लंबे समय तक जीने का अवसर मिलता है। सेक्रेड गेम्स जैसे प्रोजेक्ट में लंबे समय तक एक ही भूमिका निभाने से उन्हें अपने अभिनय में बदलाव और गहराई महसूस हुई। उनका मानना है कि ओटीटी और बड़े पर्दे दोनों के अपने फायदे हैं और कलाकार को दोनों माध्यमों में अच्छे अवसर मिलने चाहिए।

    आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर सैफ ने कियारा आडवाणी के साथ संभावित फिल्म पर भी बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी बातचीत चल रही है और फिल्म साइन होने के बाद ही वह इसके बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

  • एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड बचाने उतरेगा भारत, 2023 की चैंपियन टीम से पुरुष और महिला स्क्वॉड में कितना बदलाव हुआ

    एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड बचाने उतरेगा भारत, 2023 की चैंपियन टीम से पुरुष और महिला स्क्वॉड में कितना बदलाव हुआ

    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2023 में क्रिकेट के मैदान पर भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष और महिला दोनों वर्गों में गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे। अब 2026 में टीम इंडिया एक बार फिर उसी सफलता को दोहराने के इरादे से मैदान में उतरेगी। हालांकि चार साल के अंतराल में दोनों टीमों की तस्वीर काफी बदल गई है। पुरुष टीम में जहां बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है, वहीं महिला टीम अपेक्षाकृत ज्यादा स्थिर नजर आ रही है।

    पुरुष टीम की बात करें तो 2023 में भारत की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ ने संभाली थी, लेकिन 2026 में टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है। 2023 की 15 सदस्यीय टीम में से सिर्फ पांच खिलाड़ी ही 2026 के स्क्वॉड में जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं। तिलक वर्मा, शिवम दुबे, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई और अर्शदीप सिंह अब भी टीम का हिस्सा हैं।

    इसके अलावा पुरुष टीम में 10 नए चेहरे शामिल किए गए हैं। बल्लेबाजी में श्रेयस अय्यर और युवा वैभव सूर्यवंशी जैसे नाम हैं। ऑलराउंड विभाग में अभिषेक शर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी और अक्षर पटेल के विकल्प मौजूद हैं। विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संजू सैमसन और ईशान किशन संभाल सकते हैं। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और वरुण चक्रवर्ती जैसे नाम टीम को अतिरिक्त मजबूती देते हैं।

    2023 में भारत ने पुरुष क्रिकेट के क्वार्टर फाइनल में नेपाल को 23 रन से हराया था। इसके बाद सेमीफाइनल में बांग्लादेश को नौ विकेट से मात दी। फाइनल में भारत का सामना अफगानिस्तान से हुआ, लेकिन बारिश के कारण भारतीय पारी शुरू नहीं हो सकी और मुकाबला नो रिजल्ट रहा। बेहतर वरीयता के आधार पर भारत को गोल्ड मेडल दिया गया था।

    2026 में पुरुष टीम अपना पहला मुकाबला 28 सितंबर को निसिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में खेलेगी। बदली हुई टीम के सामने चुनौती पिछले प्रदर्शन को दोहराने के साथ नए खिलाड़ियों के तालमेल को मजबूत करने की होगी।

    महिला टीम में पुरुषों की तुलना में बदलाव थोड़ा कम है। 2023 की 15 सदस्यीय टीम में से छह खिलाड़ी 2026 के स्क्वॉड में बरकरार हैं। स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर, दीप्ति शर्मा और ऋचा घोष अब भी टीम का हिस्सा हैं। सबसे अहम बात यह है कि हरमनप्रीत कौर इस बार भी टीम की कप्तान हैं।

    महिला टीम में बल्लेबाजी की मुख्य धुरी काफी हद तक वही है। गेंदबाजी विभाग में रेणुका सिंह ठाकुर, राधा यादव, श्री चरणी और क्रांति गौड़ जैसे विकल्प मौजूद हैं। विकेटकीपिंग में ऋचा घोष के साथ गुनालन कमलिनी नया विकल्प हैं।

    2023 में महिला टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 19 रन से हराकर गोल्ड जीता था। इससे पहले सेमीफाइनल में भारत ने बांग्लादेश को आठ विकेट से मात दी थी। 2026 में महिला टीम अपने अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को जापान के खिलाफ पहले क्वार्टर फाइनल से करेगी।

    कुल मिलाकर 2023 से 2026 के बीच पुरुष टीम में बदलाव ज्यादा बड़ा है, जबकि महिला टीम की मुख्य बल्लेबाजी और नेतृत्व संरचना काफी हद तक बरकरार है। दोनों टीमों के सामने अब बदले हुए स्क्वॉड के साथ एशियन गेम्स में भारत का दबदबा कायम रखने और लगातार दूसरी बार क्रिकेट में गोल्ड जीतने की चुनौती होगी।

  • चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर मचा बवाल, ‘गर्लफ्रेंड देगी 0% इंटरेस्ट’ वाले दावे पर महिला सम्मान को लेकर उठे सवाल

    चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर मचा बवाल, ‘गर्लफ्रेंड देगी 0% इंटरेस्ट’ वाले दावे पर महिला सम्मान को लेकर उठे सवाल

    नई दिल्ली । चेन्नई मेट्रो में लगे एक विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए इस विज्ञापन में गर्लफ्रेंड की तुलना ब्याज से की गई है। विज्ञापन में दावा किया गया कि गर्लफ्रेंड शायद शून्य प्रतिशत इंटरेस्ट दे, जबकि एफडी पर 14 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। विज्ञापन का यह अंदाज अब सवालों के घेरे में आ गया है।

    चेन्नई मेट्रो के डिब्बों और परिसरों में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर भी नाराजगी देखने को मिली। विज्ञापन में वित्तीय निवेश को आकर्षक तरीके से पेश करने के लिए निजी रिश्ते का उदाहरण इस्तेमाल किया गया था। लेकिन यही तुलना विवाद की वजह बन गई।

    विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि किसी वित्तीय उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और निजी रिश्तों को इस तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इस तरह की भाषा महिलाओं को एक वस्तु की तरह पेश करती है और सार्वजनिक स्थान पर ऐसे संदेश से महिलाओं की गरिमा प्रभावित हो सकती है।

    मामला राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। डीएमके की सांसद तमिझाची थंगापांडियन ने विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने मांग की कि इस विज्ञापन को मेट्रो से तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए उचित नहीं है।

    एआईएडीएमके की ओर से भी विज्ञापन पर विरोध जताया गया है। पार्टी की प्रवक्ता कोवाई सत्यन ने इसे लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की और संबंधित क्रेडिट सोसायटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। उनका कहना है कि लोगों को ब्याज दर के बारे में जानकारी देने के लिए महिलाओं का अपमान करने वाली भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    विवाद बढ़ने के बाद अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में विज्ञापन प्रदर्शित करने से पहले उनकी भाषा और विषयवस्तु की किस तरह जांच की जानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग आते-जाते हैं, इसलिए विज्ञापनों की भाषा को लेकर संवेदनशीलता बरतना जरूरी माना जाता है।

    इस पूरे मामले में विज्ञापन की रचनात्मक शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एफडी की ब्याज दर को आकर्षक बनाने के लिए रिश्ते और भावनाओं से जुड़ी तुलना करने की कोशिश की गई, लेकिन इसका संदेश लोगों के एक वर्ग को आपत्तिजनक लगा। इसी वजह से विज्ञापन का उद्देश्य पीछे छूट गया और उसकी भाषा चर्चा का मुख्य विषय बन गई।

    चेन्नई मेट्रो में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विरोध करने वालों का कहना है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विज्ञापनों की समीक्षा होनी चाहिए। वहीं पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या वित्तीय प्रचार के लिए निजी रिश्तों और महिलाओं को इस तरह तुलना का आधार बनाना उचित है।

  • मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे

    मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मॉनसून (Monsoon) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को भारी बारिश (Heavy rain) के चलते केदारनाथ (Kedarnath) पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने ( Landslide) से महिला यात्री की मौत हो गई। खतरे को देखते हुए पुलिस ने केदारनाथ यात्रा को दिनभर रोके रखा। सैकड़ों यात्री अलग-अलग जगहों पर रोके जाने फंस गए। जल्द यात्रियों की आवाजाही शुरू कराई जाएगी।

    रविवार को पुलिस ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड से 11 बजे बाद यात्रियों की आवाजाही रोकी। हालांकि इससे पहले चार हजार से अधिक यात्री केदारनाथ के लिए रवाना हो गए थे। लगभग 2500 यात्री केदारनाथ से वापस लौट गए थे। पैदल मार्ग पर जो भी यात्री आवाजाही कर रहे थे उन्हें पुलिस, एसडीआरएफ, वाईएमएफ और डीडीआरएफ के जवानों की मौजूदगी में सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचा दिया गया। दिनभर बारिश के चलते यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें सोनप्रयाग से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। कोतवाली प्रभारी सोनप्रयाग सुरेश चन्द्र बलूनी ने बताया कि चीरबासा और अन्य स्थानों में पत्थर गिरते रहे।


    पत्थर की चपेट में आने से महिला यात्री की मौत

    गौरीकुंड से केदारनाथ जा रहे महाराष्ट्र के यात्री जैसे ही चीरबासा के पास पहुंचे तो पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरे और इसकी चपेट में आने से एक महिला यात्री की मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के अनुसार 60 वर्षीय मंगल अपाराव सिंधे पत्नी अपाराव सिंधे निवासी निम गांव जिला सोहलपुर महाराष्ट्र की मौत हो गई।


    आज पौड़ी समेत छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। सोमवार को छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, यूएसनगर और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं। बाकी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती हैं। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने आमजन से बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।


    बदरीनाथ-हेमकुंड में बर्फबारी

    गढ़वाल में हो रही बारिश के बीच रविवार को बदरीनाथ-हेमकुंड की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई। बदरीनाथ धाम के नर-नारायण और नीलकंठ पर्वत हिमपा हुआ। इसके अलावा हेमकुंड साहिब की पहाड़ियों, फूलों की घाटी, चिनाप वैली, सोना शिखर और वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क के कुंठखाल व टिपरा खरक की ऊंची पहाड़ियों पर इस साल की पहली बर्फबारी हुई।